Jab Khana Kaaba Par Hamla Hua! | Ababeel Aur Hathi Ka Wo Manzar | Quran Stories
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एक ऐसा बादशाह जिसके पास दुनिया की सबसे
ताकतवर फौज थी। हाथियों की कतारें,
तलवारों की चमक और सिपाहियों का हुजूम।
वो चलता तो जमीन कांप जाती। वो बोलता तो
लोग खामोश हो जाते। उसने फैसला किया कि
अल्लाह के घर को जमीन के साथ बराबर कर
देगा।
लश्कर तैयार हुआ। हाथी आगे बढ़े।
आगे बढ़ो।
और मक्का की तरफ कूद शुरू हो गया।
मगर जब मक्का की सरहद पर पहुंचे तो अल्लाह
ने फैसला कर लिया था ना फौज की जरूरत थी
ना तलवारों की ना इंसानों की।
बस आसमान से कुछ छोटे परिंदे आए
और सुबह तक दुनिया की सबसे बड़ी फौज भूसे
की तरह बिखर चुकी थी।
यह वो वाकया है जिस पर अल्लाह ने पूरी
सूरत नाजिल फरमाई। यह है असहाबे फील गुरूर
से तबाही तक का सफर और यकीन कीजिए जो आगे
आने वाला है वो आपके ईमान को मजबूत कर
देगा। यह वाकया है छठी सदी ईवी का। मक्का
अभी तक मोहम्मद की बीसत से पहले का शहर
था। काबा खड़ा था। लोग उसकी ताजीम करते
थे। मगर तौहीद की रोशनी अभी नहीं आई थी।
इसी दौर में जूबी अरब में यमन में एक शख्स
हुकूमत करता था। उसका नाम था अब्राह। वो
हबशा का नायब था। एक ईसाई हुक्मरान और
अपनी फौज और ताकत पर बहुत मखरूर। तफसीर
इबने कसीर के मुताबिक अब्राह ने सना में
एक शानदार गिरजा बनवाया।
इतना बड़ा और खूबसूरत कि लोग देखकर हैरान
रह जाते। दीवारों पर सोने की नक्काशी,
फर्श संगमरमर का छत इतनी ऊंची कि गर्दन
ऊपर करनी पड़ती।
अब्राह का ख्वाब था कि पूरा अरब इस गिरजा
की तरफ रुख करे।
मगर हकीकत कुछ और थी। अरब के लोग अब भी
मक्का जाते थे।
काबा का तवाफ करते थे। और अबराहा के गिरजा
को एक नजर भी ना देखते थे।
यह बात अब्राह को चुप गई। गुरूर ने दिल
में जगह बनाई और फिर वो फैसला किया गया जो
तारीख बदल देने वाला था। अब ने कहा,
मैं इस घर को
मुनहदम कर दूंगा।
जिसकी तरफ अरब जाते हैं।
मैं काबा को मुस्मार करूंगा।
ये सिर्फ हसद नहीं था। यह तकब्ुर था। यह
अल्लाह के घर से जंग का ऐलान था। अब्राह
ने हुकुम दिया,
फौज तैयार करो, हाथी लाओ, हथियार जमा करो।
रिवायत के मुताबिक इसके पास नौ हाथी थे और
सबसे आगे एक बहुत बड़ा हाथी था।
जिसका नाम था महमूद।
यह हाथी इतना ताकतवर था कि जंग में अकेला
ही दुश्मनों की सफें तोड़ देता। अब्राह ने
उसे सबसे आगे रखा ताकि लोगों के दिल में
दहशत बैठ जाए। फौज निकली हजारों सिपाही नौ
हाथी, असलहा का अंबार और अब रहा अपने
घोड़े पर सवार। वो सोच रहा था कौन रोक
सकता है मुझे? कौन टक्कर ले सकता है?
लश्कर आगे बढ़ता रहा। रास्ते में जो कबीले
आए उन्होंने लड़ने की कोशिश की मगर
हाथियों के आगे कोई ठहर ना सका।
आखिरकार अब्राह की फौज मक्का के करीब
पहुंच गई।
तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक जब अब्राहम
मक्का के करीब आया तो उसने लोगों के ऊंट,
बकरियां, माल छीन लिए। उनमें से अब्दुल
मुत्तलिब के 200 ऊंट भी थे।
अब्दुल मुत्तलिब वो मक्का के सरदार थे।
कुरैश के रहनुमा और रसूल्लाह सल्लल्लाहो
अलैह वसल्लम के दादा जब उन्हें खबर मिली
तो वह खुद अब्राहा के कैंप में गए। अब्राह
ने जब उन्हें देखा तो उनकी शख्सियत से
मुतासिर हुआ। उसने इज्जत दी पास बिठाया और
पूछा
तुम्हें क्या चाहिए?
अब्दुल मुत्तलिब ने कहा
मेरे 200 ऊंट वापस कर दें।
अब्राहा हैरान हुआ। वो बोला
मैं तुम्हारे सबसे मुकद्दस घर को गिराने
आया हूं। और तुम मुझसे ऊंट मांग रहे हो?
अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया और यह जवाब
तारीख का सबसे बड़ा जवाब है।
मैं ऊंटों का मालिक हूं
इसलिए मैंने अपना हक मांगा और इस घर का एक
मालिक है। वो खुद उसकी हिफाजत करेगा।
यह सुनकर अब्राह को लगा कि यह लोग बुजदिल
हैं। लड़ेंगे नहीं। उसने ऊंट वापस कर दिए
और मुस्कुरा कर कहा,
"कल सुबह मैं काबा को खत्म कर दूंगा।
अब्दुल मुत्तलिब मक्का वापस आए। उन्होंने
काबा का दरवाजा पकड़ा और अल्लाह से दुआ
की।
ऐ अल्लाह
बंदा अपने घर की हिफाजत करता है। तू अपने
घर की हिफाजत फरमा।
फिर उन्होंने लोगों से कहा पहाड़ों में
चले जाओ। अब यह मामला अल्लाह का है।
रात गुजरी, मक्का खाली था। काबा अकेला था।
मगर अल्लाह की निगाह अपने घर पर थी। सुबह
हुई इब्राहम ने हुक्म दिया आगे बढ़ो।
सिपाहियों ने हाथियों को धकेला मगर सबसे
आगे वाला हाथी महमूद एक कदम भी आगे नहीं
बढ़ा।
इब्राह हैरान हुआ। इसे आगे बढ़ाओ।
उन्होंने छुड़ियां मारी। लोहे की सलाखें
घसीयूने। मगर महमूद जमीन पर बैठ गया। फिर
क्या हुआ? तफसीर इबने कसीर के मुताबिक जब
उस हाथी को किसी और सिम मोड़ते तो वह तेजी
से दौड़ पड़ता। मगर जब काबा की तरफ मोड़ते
तो बैठ जाता। यह अल्लाह की तरफ से पहली
निशानी थी। मगर इब्राहम ने ना समझा वो
चीखा।
को आगे करो।
और फिर आसमान ने जवाब दिया। अचानक आसमान
पर स्याही छा गई। लोग ऊपर देखने लगे।
परिंदों के झंड के झंड समुंदर की तरफ से आ
रहे थे। यह कोई आम परिंदे ना थे। यह थे
अबाबील। हर परिंदे के पास तीन पत्थर थे।
एक चोंच में, दो पंजों में। और यह पत्थर
आम पत्थर ना थे। रिवायत कहती हैं यह आग से
पक्की हुई मिट्टी के थे। और जब किसी पर
गिरते तो जिस्म को पिघला देते। पहला पत्थर
गिरा एक सिपाही पर। वो चीखा और गिर गया।
फिर दूसरा, फिर तीसरा और फिर बारिश।
हजारों पत्थर, हजारों सिपाहियों पर हाथी
भागने लगे। सिपाही चीखने लगे। इब्राह की
फौज तितर-बित्तर हो गई। कोई मक्का की तरफ
भागा, कोई यमन की तरफ मगर परिंदे पीछा
नहीं छोड़ रहे थे। जहां भी जाते पत्थर साथ
चलते इब्राह खुद भी भागा मगर उसका जिस्म
पिघलना शुरू हो चुका था। तफसीर इबने कसीर
के मुताबिक उसका जिस्म टुकड़े-टुकड़े होने
लगा और वो सना पहुंचने से पहले रास्ते में
ही मर गया और उसकी फौज चबाए हुए भूसे की
तरह जमीन पर बिखर गई। यह वाकया सिर्फ एक
कहानी नहीं यह अल्लाह की कुदरत का ऐलान
है। अल्लाह ने दिखा दिया कि उसके घर की
हिफाजत किसी फौज की मोहताज नहीं। ना
तलवारों की जरूरत थी ना सिपाहियों की। बस
एक इशारा और छोटे परिंदों ने ताकतवर फौज
को खत्म कर दिया। यह वाकया आमुल फील
कहलाता है। वो साल जब हाथी आए और इसी साल
कुछ महीने बाद मक्का में एक बच्चा पैदा
हुआ। वो बच्चा जो बाद में नबी बना। वो
बच्चा जो पूरी दुनिया के लिए रहमत बना। वो
थे मोहम्मद।
अल्लाह ने अपने घर को बचाया ताकि अपने नबी
को उसी शहर में भेज सके। यह वाक्य आज भी
हमें क्या सिखाता है? पहला सबक ताकत
अल्लाह की मर्जी के बगैर कुछ नहीं। अब्राह
के पास हाथी थे, फौज थी, हथियार थे। मगर
अल्लाह के सामने सब बेबस हो गए। दूसरा सबक
गुरूर इंसान को अंधा कर देता है। अब्राह
ने सोचा कि वो अल्लाह के घर को भी गिरा
सकता है। मगर गुरूर उसे अपनी तबाही की तरफ
ले गया। तीसरा सबक अल्लाह अपने दीन की
हिफाजत खुद करता है। आज भी जब दीन पर हमला
होता है तो समझ लो अल्लाह की निगाह वहां
है। चौथा सबक छोटी चीज भी अल्लाह के हुक्म
से ताकतवर बन जाती है। छोटे परिंदे छोटे
पत्थर मगर अल्लाह ने उनसे बड़ी फौज खत्म
करा दी। आज सोचें जब अल्लाह का घर खतरे
में था तो अल्लाह ने खुद उसकी हिफाजत की।
अगर हम अल्लाह के दीन पर चलें अगर हम उसके
अहकाम को पकड़े तो क्या अल्लाह हमारी
हिफाजत नहीं करेगा? अब्दुल मुत्तलिब ने
कहा था इस घर का एक मालिक है। आज हम कहते
हैं हमारी जिंदगी का भी एक मालिक है। और
जब वो साथ हो तो कोई ताकत हमारा कुछ नहीं
बिगाड़ सकती। अब्राह ने ताकत पर भरोसा
किया अब्दुल मुतलिब ने अल्लाह पर एक तबाह
हो गया। एक तारीख बन गया। अगर आपको आज की
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