منتخب روضه گودال | کربلایی حسین ستوده | Hossein Sotoodeh
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एक भीड़ भरे तम्बू मे
ं भीख माँग रहा है। त
म्बू मुझे सता रहा है
। मैंने उसमें पानी ड
ाला। आज रात क्या होग
ा? आज रात क्या होगा?
यह गेहूँ जैसा है। म
ैंने एक आवाज़ सुनी।
एक बहन ऊपर खड़ी है।
वह गा रही है। हुसैन
हुसैन की ओर मुड़ा। म
ुझे खुद बताओ, तुम्हा
रा शरीर कौन सा है? अ
ब तुम कहो, हुसैन, हे
भगवान, ज़हरा, चाहे
मैं कितनी भी साँस लू
ँ, हुसैन, ओह, मैं आज
रात बात करना चाहती
हूँ। हमने योजना नहीं
बनाई थी। ज़ैनब एक व
र्ग बन जाएगी। हमने य
ोजना नहीं बनाई थी। म
ेरा तम्बू फट जाएगा।
याह्या मज़ेनी कहते ह
ैं हाजी आगा। 220 वर्
षों तक, मैं अमीरुल म
ोमिनीन का पड़ोसी था।
मैं ज़ैनब की परछाई
भी नहीं देख सका। हुस
ैन। हमने योजना नहीं
बनाई थी। शैतान की पर
छाई द्वार पर ही अटक
गई। हुसैन, ओ तंबू [स
ंगीत] [जयकार] मैं मौ
त की ओर भागा [संगीत]
मैं पहुँचा, मुझे गो
ली लगी, मैंने उम्म ज
़ैनब को नहीं देखा, म
ैं तुमसे विनती करता
हूँ, मैं तुम्हें सिन
ान के हाथों से छुड़ा
ऊँगा, मैं तुम्हें मा
र डालूँगा, चाहे मैं
कितना भी बुरा क्यों
न हो जाऊँ, मुझे बस अ
पने शरीर पर मरना है।
तुम्हारी माँ तारीफ
बन गई है, तुमने अपना
सिर क्यों काट लिया?
वे शाह की बहन, मीर,
चाचा हुसैन की माँ प
र ध्यान क्यों नहीं द
ेते? मैं, चाचा हुसैन
, मैं, मैंने आह भरी,
तुम्हें नहीं पता कि
तुम इस रास्ते पर क्
या कर रहे हो। मैं अम
्मा के विलाप में खुद
को इतना घसीटता रहा।
मैं खुद को घसीटता र
हा। मैंने आह भरी। मै
ं सौ बार टूटा जब तक
कि मैं ज़मीन पर नहीं
आ गया। [संगीत] मैं
बैठा नहीं, मेरे हाथ
से खून टपक रहा है। म
ेजें गोल हैं। मेरा ह
ाथ काट दो। मेरा हाथ
काट दो। मेरा हाथ काट
दो। तुम्हारा हत्यार
ा मेरे सिर पर नहीं ह
ै। वो तुम्हें मार रह
ा है। वो तुम्हें मार
रहा है। वो तुम्हें
मार रहा है। मैं भाग
गया। विधवा तुम्हारे
पीछे है। तुम मरने वा
ले हो। तुम मेरे पीछे
हो, तुम चाँद की तरह
, ओह मैंने माँ के चु
म्बनों के बदले क्या
किया, खंजर मत लो, बा
ढ़ पर सदी को शर्म आत
ी है, अन्य [तालियाँ]
मत जाओ, तुमने उत्पी
ड़ितों के साथ क्या क
िया, हुसैन, तुम्हारा
निर्दोष शरीर, हुसैन
तुम्हारी गर्दन की न
स को छू रहा है, तुम्
हारी आँखें, और तम्बू
में, तुम खतरे में ह
ो, तम्बू पर, ऊँची आव
ाज़ से, तम्बू साफ़ ह
ै, तम्बू में कोई है,
ओह मैं मरने वाला हू
ँ, मैंने इसे बाहर नि
काल लिया, ओह मेरे, व
ह बच्चे को मार रहा ह
ै, वह रसोई में जा रह
ा है, कमरे में कोई च
िल्ला रहा है, मुझे व
ह याद नहीं है, मैंने
तुम्हारे बालों को च
ूमा, हुसैन, गले के न
ीचे, एक घंटे बाद, बे
शर्मी से, उसकी छाती
पर, एक घंटे बाद, मुझ
े देखो, मुझे देखो, म
ैं पूरी तरह से तुम्ह
ारा हूँ [तालियाँ] खू
न की गंध को धिक्कार
है, इस सीनेट को धिक्
कार है, हँसी को धिक्
कार है, [तालियाँ] मह
ोदय, आपको यह करना हो
गा पहाड़, तुम इतने ग
र्म हो, हुसैन, तुम्ह
ें क्या हुआ है? हमने
तुम्हें मार डाला और
तुम्हारी आँखों में,
गुफा के किनारे पर ह
ाथ रखकर, मुझे तुम्हा
रे होंठों को चूमना च
ाहिए था। मैंने तुम्ह
ारे होंठों पर कैसे प
ैर रख दिया? एक उदास
आवाज़। नाकामी। तुमने
कहा था कि तुम्हारे
दाँत शुक्रगुज़ार हैं
। तुम्हारा खून पवित्
र है। नाकामी। तुम्हे
ं पैरों तले रौंदा गय
ा है। तुम्हारा पूरा
जीवन। नाकामी। तुम्हे
ं पीटा गया है। हुसैन
, मैं हुसैन हूँ। मैं
राज हूँ। मैं राज हू
ँ। मुझे पीटा गया है।
मुझे माफ़ कर दो, हा
जी आगा। मैंने तुम्हा
रे शरीर पर एक गहरी ल
कीर खींच दी। मैंने त
ुम्हारे ज़ख्मों को क
ुरेद दिया। तंबू में
क्या हुआ? ओह, तंबू म
ें लड़कियाँ चीख उठीं
। तुम्हें किसने रोका
? ओह, होर्मेल की लड़
की ने चूहे को पकड़ ल
िया। उसने उसे पकड़ ल
िया। वह ज़मीन पर गिर
पड़ी और करवट बदल ली
। उसने उसे पकड़ लिया
। एक वाक्य। तुम इतने
कमज़ोर महसूस कर रहे
हो जैसे एक साल से प
िंजरे में बंद हो। तु
म ऐसे गिर पड़े हो जै
से तुम्हें मरे हुए ए
क साल हो गया हो। देख
ो, हुसैन, मुझे शर्म
आ रही है। वे किसी भी
तरह तुम्हारे ज़ख्मो
ं को बंद कर रहे हैं।
साँस लो। धन्यवाद। म
ेरे भाई, आओ और जाओ।
खैर, मैं ज़ैनब और हु
सैन के बारे में सोच
रही हूँ। कृपया, मैं
आलिया की बेटी हूँ। म
ैं हँसती हूँ, कृपया,
हट जाओ, मैं इसे खुद
दफना दूँगी। [तालिया
ँ] मैं आपका धन्यवाद
करती हूँ। [संगीत] मै
ं तुम्हारा दिल तोड़
दूँगी, मैंने तुम्हार
ी गरिमा को चकनाचूर क
र दिया, मैंने तुम्हा
रा शरीर तोड़ दिया, म
ैंने तुम्हारा चेहरा
नोच डाला, तुम टूट गए
, तुम इतने कमज़ोर हो
, ऐसा लगता है जैसे त
ुम एक साल के लिए गड्
ढे में गिर गए हो, ऐस
ा लगता है जैसे मुझे
मरे हुए एक साल हो गय
ा है। चलो सब यहाँ गा
ते हैं। साँस लो, साँ
स लो, साँस लो, मेरी
सेना, मेरे भाई, चलो
चलते हैं। खैर, मैं ज
़ैनब, हुसैन के बारे
में सोच रही हूँ। हे
शहर, तुम्हारा दिल दर
्द और पीड़ा से जल रह
ा है। अब उसका धन्यवा
द मत करो। उसकी गरिमा