Three PVC winners
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यह मेडल यह पदक देखने में छूटा लेकिन
मैदान जंग में बहादुरी का सबसे बड़ा इनाम
माना गया है। यही परमवीर चक्र है। इसे वही
हासिल करता है जो देश की रक्षा में जान की
बाजी लगाकर अपनी बहादुरी का जौहर दिखाए।
नामुमकिन को मुमकिन साबित कर दे।
वन डे आई विल किल डेथ। इफ डेथ कम्स बिफोर
मी तो उनको मौत वगैरह से डर नहीं लगता था।
वही अग्रेसिव स्पिरिट वही नेवर से डाई
एटीट्यूड जो हम एक परफेक्ट आर्मी मैन में
देखना चाहते हैं।
अगर खुद को साबित करने से पहले मुझे मौत आ
गई
कसम से मैं मौत को मार डालूंगा। जय मां
काली
जब उनका एनडीए में इंटरव्यू हुआ तो उनसे
ये पूछा गया था कि व्हाई डू यू वांट टू
जॉइन द आर्म फोर्स तो उन्होंने स्ट्रेट
फॉरवर्डली ये बात कही थी कि आई वांट टू
गेट द परमवीर चक्र
वो हम खुद खत्म कर देंगे और सीओ साहब को
हम अपना विक्ट्री साइन बता देंगे कि हमने
खत्म कर दिया और टास्क कंप्लीट हो गई है।
लेकिन उस यंग लड़के का देखो कितना तगड़ा
सेंस ऑफ रिस्पांसिबिलिटी था। उसने सबको
बताया कि नहीं कमांडिंग ऑफिसर साहब ने
मुझे जो है ड्यूटी सौंपा है कि इसको खत्म
करना है और उस जवान ऑफिसर ने विदाउट
हेजिटेशन
क्रॉल क्रॉल करके नजदीक बंकर की तरफ बढ़ने
लगा।
हमने कहा कि तुम अफसर हो जब लड़ाई कहीं
कुछ होगा तो तुम पीछे रहना अपने जवानों को
आगे भेजना। तो कहने लगे मम्मी जहां पर
जैसे हम और आप होंगे तो जहां कोई मुसीबत
होगी तो आप आगे जाओगी कि हमको आगे कर दोगी
तो हमने कहा नहीं हम जाएंगे तो कहे वो
जवान जो मेरे बच्चे की तरह हैं और जब
लड़ाई होगी तो हम आगे रहेंगे अपने बच्चों
को आगे क्यों भेजेंगे तब मेरी समझ में आया
इनको देशभक्ति के लिए और अपने जूनियर के
लिए कितना प्रेम है
जिस बेटे के कंधे पर पिता की अस्थियां
जानी चाहिए उस पिता के कंधे पर बेटे की
अस्थियां गई है।
दुख का कोई सीमा नहीं है दोनों के हमारे
लेकिन साथ-साथ में गर्व भी है कि हमारे
बेटे ने बहुत चंद समय में इतिहास में अपना
नाम अंकित करके और समाज की सेवा करी और
देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का
उद्धरण कर लिया।
भारतीय सशस्त्र बलों का इतिहास वीरता के
अनगिनत कारनामों से भरा पड़ा है। आज हम
प्रस्तुत हैं इस गौरवशाली इतिहास से
भारतीय वायु सेना का एक ऐसा अध्याय लेकर
जो त्याग, शौर्य और सर्वस्व समर्पण की
महान भावना से ओतप्रूत है। यह कहानी है
मां भारती के उस वीर सपूत की जिसने 1971
के हवाई युद्ध में अकेले ही दुश्मन के छह
सेबर जेट्स का डटकर सामना कर अदम्य साहस
का परिचय दिया। यह गाथा है भारतीय
वायुसेना के इकलौते परमवीर चक्र सम्मानित
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह से की।
लुधियाना के छोटे से गांव इससेवाल में
जन्मे निर्मलजीत बचपन से ही विमान और वायु
सेना के जीवन से प्रभावित थे और वायु सेना
में जाने की चाहत रखते थे।
अपने अडिग और अथक प्रयास के साथ उन्होंने
इस जुनून और चाहत को सच्चाई में बदल दिया।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़
अपने सपनों को पंख देकर आसमान में उड़ान
भरने की तैयारी शुरू कर दी।
तकरीबन डेढ़ साल उन्होंने इंजीनियरिंग दे
वि लगाया सी उस पिछो उन्होंनेु सी कि नहीं
मैं डिफेंस जॉइ करनी है उस टाइम ते नहीं
सी पता कि एयरफोर्स करनी है या आर्मी करनी
है पर वो एयरफोर्स लिए उन्होंने अप्लाई उे
उन्होंने सिलेक्शन हो गई 64 दे वि
उन्होंने इंजीनियरिंग छडी छन तो पिछो
उन्होंने एयरफोर्स जॉइ कीती तीन साल दी
ट्रेनिंग तो पिछो 4 जून 1967 दे उन्होंने
कमीशन होया कि कमीशन हो तो पीछे फर्स्ट
पोस्टिंग वाज़ इन अंबाला इन 18 स्क्वाडन।
वो कहते हैं ना कि पूत के पांव पालने में
ही नजर आ जाते हैं। कुछ इसी तरह फ्लाइंग
ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के हृदय में
बचपन से ही देश सेवा की भावना प्रबल थी।
एक चाहत थी कि देश के लिए कुछ कर गुजर
जाऊं। फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखो
श्रीनगर स्थित एक नेट टुकड़ी के पायलट थे।
तो एंड ऑफ नवंबर घर आए थे। घर आए तो ही
वास वेरी एक्साइटेड कि मैंने इस बार कुछ
करना है। मैंने कुछ करना है। तो हमने भी
बहुत समझाया कि नहीं अपना देखना। कहते
नहीं इस बार तो मतलब हद हो गई। कुछ ना कुछ
करके दिखाना है।
पाकिस्तानी वायु सेना के हमलों से कश्मीर
घाटी की रक्षा का दायित्व सेखों और उनके
साथी बीएस घुमन के कंधों पर था। खतरा बहुत
था। पर सेखों का जज्बा और साहस कौन सा कम
था। लगता यूं था कि शायद जैसे उन्हें डर
और खौफ जैसी भावनाओं का ज्ञात ही नहीं था।
14 दिसंबर सुबह 8:02 पर पाकिस्तान वायु
सेना बेस पेशावर से 26 स्क्वाडन के छह
पाकिस्तानी F86 जेट विमानों ने श्रीनगर
एयरफील्ड पर हमला बोल दिया। फ्लाइंग ऑफिसर
सेखो उस समय रेडिनेस ड्यूटी पर थे। जिस
बीच दुश्मन ने एयर फील्ड पर बमबारी शुरू
कर दी। हर तरफ बम गिर रहे थे। खतरा काफी
था। पहला विमान हमला अपनी आंखों के सामने
होते देख निर्मल और उनके साथी घुमन
अपने-अपने नेट एयरक्राफ्ट की ओर बढ़े।
हमले के दौरान उड़ान भरने में जान का
जोखिम तो था ही पर इसके बावजूद दोनों
उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार थे।
दो नेट जहाजों की फॉर्मेशन में नंबर टू के
रूप में फ्लाइंग ऑफिसर सेखो तुरंत उड़ान
नहीं भर सके क्योंकि पहले जहाज की धूल अभी
भी काफी थी। घातक परिस्थितियों को देख
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखो ने
फैसला किया और समय ना गवाते हुए रनवे बिना
क्लियर हुए ही उड़ान भर ली पर शायद देर हो
चुकी थी। दुश्मन के छह विमान हमले के लिए
आगे बढ़ चुके थे। 18 स्क्वाडन यानि
फ्लाइंग बुलेट्स के इस शेर ने निडरता के
साथ अपने विमान को रफ्तार दी और हवाई हमले
के नापाक मंसूबों को नाकाम करने की तैयारी
में लग गए। उड़ान भरते ही जांबाज से ने
दुश्मन के सेबर हमले का मुंहतोड़ जवाब
देते हुए एक एयरक्राफ्ट को निशाना बना
लिया और दूसरे को आग के हवाले कर दिया। अब
एक का मुकाबला चार से था। घिरे होने के
बावजूद फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह
सेखों ने चारों को उलझाए रखा। दुश्मन
बार-बार सेखों के विमान को निशाना बनाने
में चूक रहे थे। पर सेखों दुश्मन को
खदेड़ने में पीछे नहीं हटे। लगता था जैसे
सेखों ने ठान ही लिया है कि दुश्मन के
खेमे को धराशाई किए बिना वो वापस तो नहीं
जाने वाले थे।
अपनी आखिरी सांस तक लड़ने वाले वीज योद्धा
ने साथी घुमन को आखिरी संदेश में कहा था
शायद मेरे विमान में भी निशाना लग गया है।
श्रीनगर एयर फील्ड के इस घातक हवाई युद्ध
में फ्लाइंग ऑफिसर सेखों का विमान
दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे वीरगति को
प्राप्त हुए। भारतीय वायुसेना की परंपरा
को कायम रखते हुए फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत
सिंह सेखो ने अनुकरणीय साहस और दृढ़
संकल्प का प्रदर्शन किया। अकेले दुश्मन के
छह सेबर जेट के खिलाफ उनकी बहादुरी और
कौशल के कारण उन्हें भारत के सर्वोच्च
बहादुरी पदक परमवीर चक्र से नवाजा गया।
आसमान पर स्वर्ण अक्षरों से नाम सजाए। आज
50 साल बाद भी फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत
सिंह सेखों भारतीय वायुसेना के इकलौते
परमवीर चक्र से सम्मानित योद्धा हैं। सच
ही कहा गया है। वीर कभी मरा नहीं करते। वे
तो सदा जिंदा रहते हैं।
नो सर यू नो माय गद इज स्टिल फायरिंग एंड
आई कैन नॉट बेल आउट
द पार्टिंग वर्ड्स वरेड कि बेटा यू नो
शेरों जैसे लड़के आना
1971
एक नए देश का जन्म हुआ
उस देश की गुहार हार सुन भारत आगे आया उस
देश को आजादी दिलाने।
कुछ पराक्रमी महावीरों ने भारत को दिलाई
उसकी सबसे बड़ी जीत।
एक बार फिर पलटे इतिहास के वो पन्ने और
याद करें उस पराक्रमी शूरवीर को जिसने
इतिहास रच हमारे आज के युवाओं के लिए
प्रेरणा और प्रोत्साहन प्रदान किया।
श्री अरुण क्षेत्रपाल
अरुण वाज़ अ जेंटलमैन ही इज़ वै सॉफ्ट
स्पोकन
बट ही वाज़ यू नो ही हैड नर्व्स ऑफ स्टील
इफ ही डिटरमिन टू डू समथिंग देन नथिंग कुड
स्टॉप
अरुण फौज जॉइ करना चाहते थे मतलब रात को
अगर मेरे पिताजी की वर्दी तैयार होती तो
वो ड्यूटी पे जब उनकी वर्दी पड़ी होती थी
और कहीं इत्तेफाक से अगर मेरे फादर को
कहीं शाम को कहीं बाहर थाने पे जाना
पड़ता। सो बोथ अरुण एंड आई वुड वेयर दैट
वर्दी।
जब ये आईआईटी का रिजल्ट आया अरुण को मतलब
वहां पे आईआईटी जाने का मौका मिला। पर
अरुण का दिल नहीं था आईआईटी जाने का। पर
साथ-साथ में हिम्मत भी नहीं थी कि पिताजी
से बोल दे कि भाई हम आईआईटी नहीं जाना
चाहते क्योंकि हमने कहा यार आईआईटी आ गए
बहुत बढ़िया आईआईटी दो यू नो वेरी गुड
इंस्टट्यूट
तो फिर अरुण ने मेरी मदर को मतलब जो है
कहा कि मम्मा आप पापा को बोलो कि मेरे को
मतलब जो है इंजीनियर नहीं बनना।
तो एक दिन डाइनिंग टेबल पे मेरी मदर ने
हिम्मत करके मेरे फादर से बोला कि
मदन माय फादर्स फर्स्ट नेम वाज़ मदन कि ये
अरुण कह रहा है कि इसको आईआईटी नहीं जाना।
तो फिर मेरे फादर ने अरुण की तरफ देखा कि
क्यों आप क्या बोल रहे हो? आईआईटी नहीं
जाओगे।
तो फिर अरुण ने अपनी धीमी सी आवाज में कहा
कि नहीं पापा मैं आपके जैसे फौज में जाना
चाहती हूं। रोज मतलब रो नहीं पापा मुझे
आर्मी जॉइ करना है। तो फाइनली वन डे माय
फादर रिलेंटेड एंड टोल्ड अरुण कि अच्छा
बेटा जो आप करना चाहे यू नो इट इज योर
डिसजन। आई विल नॉट एंड अरुण वास वै
हैप्पी। सो ही सेड कि मुझे आईआईटी नहीं
मतलब जाना है और मैं अब एनडीए जा रहा हूं।
ही वेंट टू एनडीए ही डीड वेल ही वेंट टू
आईएमए ही डीड वेल अगेन एंड देन ही वेंट
एंड जॉइ अ रेजिममेंट व्हिच इज़ यू नो स्टीप
विथ हिस्ट्री ऑफ़ वेलर
तो ये वयोस कोस को बीच में ही स्थगित करके
इनको ऑल द यंग हाउस को ये कहा कि आप लोग
सब अपने यूनिट पे मतलब वन रिपोर्ट बैक टू
योर एचटी
एंड माय फादर सेड दैट आई हैव बीन टू वॉर
सेल टाइम्स सो हियर इज योर ओपोरर्चुनिटी
यू आर गोइंग टू बैटल यू नो एंड आई एम
क्वाइट श्योर दैट यू विल यू नो डिस्चार्ज
योरसेल्फ ऑनरेबली
माय मदर वास आल्सो यू नो ऑन द वे टू द
स्टेशन यू नो दी पार्टिंग वर्ड्स वरेड कि
बेटा यू नो शेरों जैसे लड़के आना।
विथ हिज़ थ्री टैंक्स वाज़ लेफ्ट फेसिंग आई
हैव टोल्ड यू नो सम एट टैंक्स ऑफ यू नो 13
लंसेस।
एंड अ फियर्स बैटल टूक प्लेस। यू नो दिस
टैंक्स ऑफ़ अरुण हिट दी पाकिस्तानी यामा।
टिल इवेंचुअली
अरुण टू टैंक्स वर आल्सो हिट एंड अरुणस
टैंक वाज़ आल्सो ऑन फायर। नाउ आई एम टोल्ड
दैट यू नो इफ अ टैंक इज ऑन फायर इट्स कैन
बी वैरी डेंजरस बिकॉज़ इट्स गॉट हाई ओके
फ्यूल इट गोट आर्म यू नो शेल्स इनसाइड एंड
द हीट कैन कैन एक्चुअली बर्स्ट द शेल्स ऑर
यू नो बर्न द वन अ द कॅप्टन यू नो कैप्टन
मल्होत्रा हुस् डन वाज़ नॉट फायरिंग यूज़ ऑफ़
द बैग ही टोल्ड अरुण अरुण योर टैंक इज़ ऑन
फायर यू नो व्हाई डोंट यू यू नो बेल आउट
एंड टोल्ड अरुण सेड दैट नो सर
यू नो माय गद इज स्टिल फायरिंग एंड आई कैन
नॉट बेल आउट। ह ड्राइवर टोल्ड अरुण कि
साहब थोड़ा सा टैंक को पीछे ले लो। आग बुझा
लेते हैं फिर आ जाएंगे। एंड अरुण सेड नो
वी विल नॉट मूव 1 इंच बैक। बिकॉज़ सीओ साहब
का आर्डर है कि हम 1 इंच भी पीछे नहीं
मिलेंगे। नाउ यू नो इन दैट प्रोसेस ही
आल्सो स्विच्ड ऑफ द इंटरकॉन। देयर वास नो
कम्युनिकेशन एंड दिस बैटल हैपेंड यू नो सो
दे हिट यू नो हिज़ अदर टैंक्स हेड गॉट हिट
देन देयर वर थ्री फोर टैंक्स देन हिज टैंक
हिट टू थ्री मोर बट इवेंचुअली देयर वाज़ यू
नो दी एनिमी कमांडर्स टैंक एंड हिज के
टैंक केम विद इन 100 टू ईच अदर
100 यर्स इज़ नथिंग यू नो फॉर अ टैंक बैटल
दे वर फेस टू फेस एंड दे फायर्ड इट इच अदर
किस की रात को यू नो अह हमें फिर यू नो एक
ये टेलीग्राम
एंड दिस इज द टेलीग्राम इज स्टिल विद यू
ओके इट्स हियर
डीपली रिग्रेट टू इनफॉर्म यू योर सन आईसी
25067
सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण केवाल रिपोर्टेड
किल्ड इन एक्शन 16 दिसंबर प्लीज एक्सेप्ट
सिंसियर कंडुलेंसेस
सो ऑन द मॉर्निंग
व्हेन माय मदर एट 8 ओ क्लॉक इन द मॉर्निंग
समबडी प्रेस द बेल
एंड माय मदर वेंट टू द बेल एंड डाकिया था
यू नो एंड ही हैंडेड दिस टेलीग्राम टू हर
ऑफ कोर्स माय
माय मदर यू नो क्राइड इन पेन एंड शी
कोलप्स्स
नो शी
व्हेन वी हर्ड हर क्राई माय फादर एंड आई
रश्ड आउट एंड
वी सॉ दिस
एंड दैट इज हाउ वी केम टू नो दैट अरुण
ही डिड एट द एज ऑफ़ 21.
ही वाज़ द यंगेस्ट यू नो पीबीसी विनर ऑफ़ यू
नो दैट्स एवर हैपन।
व्हेनएवर आई मीट एनीबडी फ्रॉम द आर्म्ड
फोर्सेस टुडे एंड आई एम सेइंग यू नो आई
टेल देम आई मुकेश केतपाल एंड अरुण यंगर
ब्रदर।
पीपल वांट टू शेक माय हैंड अगेन।
लिसन दिस हैपन 50 इयर्स इट्स नॉट यस्टरडे।
एंड येट पीपल रिमेंबर हिम टुडे
आई थिंक दैट्स ग्रेट बिकॉज़ व्हाट नॉट
बिकॉज़ अरुण वास अरुण बट आई थिंक देयर आर
सो मेनी अरुण्स हियर
एंड दे कैन ऑल दे शुड ऑल टेक इन यू कैन बी
एन अरुण नॉट नेसेसरी बाय गोइंग टू बैटल बट
यू कैन कंट्रीब्यूट टू द सोसाइटी दैट यू
लिव इन व्हाटएवर प्रोफेशन यू आर डूइंग बी
एन अरुण पुट योर नेम सो दैट इट्स कार्ड
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