Employee Relations and Labour Laws Unit 4, Employee Relations and Labour Laws mba 3rd sem, aktu mba
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द कॉन्ट्रैक्ट लेबर रेगुलेशन एंड
एवोल्यूशन एक्ट 1970 आपने देखा होगा बहुत
सारे ऑर्गेनाइजेशन में क्या होता है कि
वहां पर कोई उनको काम कंप्लीट करवाना होता
है तो उसके लिए वो जो है कॉन्ट्रैक्टर को
ढूंढते हैं और उन कॉन्ट्रैक्टर के जरिए वो
अपना काम कराते हैं। जैसे आप सपोज कि
गवर्नमेंट को रोड जो है बनवाना होता है।
डिफरेंट-डिफरेंट नेशनल हाईवेज या फिर
स्टेट हाईवेज जो है स्टेट गवर्नमेंट को
बनवाना होता है। तो उसके लिए वो क्या करते
हैं? कॉन्ट्रैक्टर को जो है रोड बनाने की
जिम्मेदारी दे देते हैं और वह
कॉन्ट्रैक्टर बहुत सारे एंप्लाइजज़ को
रिक्रूट करके उस रोड को बनाकर कंप्लीट
करके जो है वो दे देता है। तो अब
कॉन्ट्रैक्टर जो है उस काम को कंप्लीट
करने के लिए जिन भी एंप्लाइजज़ को रिक्रूट
करता है सपोज कि एक साल का काम है 6 महीने
का काम है और फिर जो है उसके लिए जो भी
एंप्लाइजज़ रिक्रूट करेगा उस टास्क को
कंप्लीट करने के लिए उसको हम कॉन्ट्रैक्ट
लेबर कहते हैं। क्लियर उनको हम क्या कहते
हैं? कॉन्ट्रैक्ट लेबर। वो एंप्लई नहीं
होते हैं कि हर महीने जाएंगे और हर महीने
सैलरी मिलेगी। वो क्या है? वो किसी
कॉन्ट्रैक्ट पे लिए गए काम को कंप्लीट
करने के लिए उनको रिक्रूट किया जाता है।
तो ऐसे लेबर को हम कॉन्ट्रैक्ट लेबर कहते
हैं। तो उनको रेगुलेट करने के लिए उनको जो
है डिफरेंट बेनिफिट्स प्रोवाइड करने के
लिए ये एक्ट जो है बनाया गया है। क्लियर?
किन के लिए? ऐसे एंप्लाइजज़ जो कॉन्ट्रैक्ट
पे काम कर रहे हो। क्लियर? तो एन एक्ट टू
रेगुलेट दी एंप्लॉयमेंट ऑफ़ कॉन्ट्रैक्ट
लेबर इन सर्टेन एस्टैब्लिशमेंट। इट
एक्सटेंड टू होल ऑफ़ इंडिया। तो यह पूरे
इंडिया पर एप्लीकेबल है। ए वर्कमैन शैल बी
डीम्ड टू बी एंप्लॉयड एज कॉन्ट्रैक्ट लेबर
व्हेन ही इज़ हायर्ड इन और इन कनेक्शन विद
सच वर्क बाय और थ्रू अ कॉन्ट्रैक्टर विद
और विदाउट दी नॉलेज ऑफ़ द प्रिंसिपल
एंप्लयर। यानी कि ऐसे एंप्लाइजज़ ऐसे लेबर
जिनका एंप्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्टर द्वारा
किया गया है किसी काम को कंप्लीट करने के
लिए उनको हम कॉन्ट्रैक्ट लेबर कहेंगे।
चाहे जो प्रिंसिपल एंप्लयर है यानी कि
जिसने कॉन्ट्रैक्टर को हायर किया है काम
कंप्लीट करने के लिए उसके नॉलेज में है या
फिर नहीं है। अगर आपको किसी कॉन्ट्रैक्टर
ने रिक्रूट किया है किसी काम को कंप्लीट
करने के लिए तो फिर आप कॉन्ट्रैक्ट लेबर
कहलाएंगे। सपोज कि गवर्नमेंट है या फिर
स्टेट गवर्नमेंट है उत्तर प्रदेश
गवर्नमेंट है तो उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट
ने एक्स व जेड कॉन्ट्रैक्टर को जो है
सेलेक्ट किया कि रोड बनानी है 10 कि.मी.
के। तो अब जो उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट है
वो ये उसको चाहे ये पता हो चाहे ना पता हो
कि एंप्लई कौन काम कर रहे हैं। लेकिन अगर
कॉन्ट्रैक्टर ने किसी एंप्लई को हायर किया
है तो वो कॉन्ट्रैक्ट लेबर कहलाएगा।
क्लियर? अब ये अप्लाई कहां होता है? तो इट
अप्लाई। तो सेक्शन वन में चीज ये कही गई
है कि इट अप्लाई टू एव्री एस्टैब्लिशमेंट
इन व्हिच 20 और मोर वर्कमैन आर एंप्लॉयड
और वेयर एंप्लॉयड ऑन एनी डे ऑफ़ द
प्रिसीडिंग 12 मंथ एज कॉन्ट्रैक्ट लेबर।
तो, यह हर एस्टैब्लिशमेंट पे एप्लीकेबल
होगा यह एक्ट। जहां पर 20 या उससे ज्यादा
वर्कमैन एंप्लॉयड हैं या फिर पिछले 12
महीने में 20 या उससे ज्यादा एंप्लॉय हो
चुके हैं। तो वहां पर जो है ये एक्ट
एप्लीकेबल होगा। और वहीं पे टू एव्री
कॉन्ट्रैक्टर हु एंप्लाइजज़ और हु एंप्लॉयड
ऑन एनी डे ऑफ़ द प्रिसीडिंग 12 मंथ 20 और
मोर वर्कमैन। यानी कि अगर किसी
कॉन्ट्रैक्टर ने 20 या 20 से ज्यादा पिछले
12 महीनों में जो है एंप्लॉय किया है तो
वो भी उन पर भी जो है ये कॉन्ट्रैक्ट लेबर
रेगुलेशन एंड एवोल्यूशन एक्ट 1970
एप्लीकेबल होगा। क्लियर? तो यहां पर क्या
है कि जो एक डिफरेंट-डिफरेंट स्टेट
गवर्नमेंट है वो अलग-अलग सेक्शन में वो
कुछ मॉडिफिकेशन कर लेती है या फिर कोई नया
सेक्शन ऐड कर देती है। तो उत्तर प्रदेश
में इस सेक्शन में जो है चेंज किया गया
है। क्या चेंज किया गया है कि टू एव्री
एस्टैब्लिशमेंट इन व्हिच 50 और मोर
वर्कमैन आर एंप्लॉयड और वेयर एंप्लॉयड ऑन
एनी डे ऑफ़ द प्रिसीडिंग 12 मंथ एज
कॉन्ट्रैक्ट लेबर। यानी कि उत्तर प्रदेश
में ऐसे एस्टैब्लिशमेंट जहां पर 50 या
उससे ज्यादा एंप्लई को रिक्रूट किया गया
है या फिर पिछले 12 महीने में रिक्रूट
किया गया था तो उन पे ये एक्ट लागू होगा।
या फिर ऐसे कॉन्ट्रैक्टर जिन्होंने 50 या
50 से ज्यादा वर्कमैन जो है पिछले 12
महीने में रिक्रूट किया है तो उन पर जो है
ये एक्ट लागू होगा उत्तर प्रदेश में। तो
जो एक्ट आया उसमें 20 है लेकिन जो उत्तर
प्रदेश में अमेंडमेंट किया गया उसके
अकॉर्डिंग 50 का यहां पर क्राइटेरिया फिल
कर दिया गया है। क्लियर? तो अब जो इस एक्ट
में द कॉन्ट्रैक्ट लेबर रेगुलेशन एंड
रेवोल्यूशन एक्ट है तो यहां पर जो है पहले
एक सेंट्रल एडवाइज़री यानी कि जिसको हम
सेंट्रल एडवाइज़री कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड
कहते हैं वो बनाया गया है। फिर स्टेट
एडवाइज़री कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड बना है।
उसके बाद फिर रजिस्ट्रेशन होता है यहां पर
जो एस्टैब्लिशमेंट है उनका द्वारा जो है
रजिस्ट्रेशन किया जाता है। उसके बाद फिर
जो कॉन्ट्रैक्टर होते हैं उनको लाइसेंस
मिलता है। उसके बाद फिर जो है वो
कॉन्ट्रैक्ट पर लेबर को रिक्रूट कर सकते
हैं। और फिर जो लाइस कॉन्ट्रैक्टर हैं
उनको डिफरेंट-डिफरेंट बेनिफिट्स होते हैं
जो कि को कॉन्ट्रैक्ट लेबर को प्रोवाइड
करनी पड़ती हैं। और फिर लास्ट में अगर वो
जो इस एक्ट को फॉलो नहीं करते हैं या फिर
किसी भी प्रोविजन को ब्रेक करते हैं तो
उनके ऊपर अगेंस्ट एक्शन लिया जा सकता है।
तो हम बात कर लें कि सेंट्रल एडवाइज़री
कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड जो कि सेक्शन थ्री
में इस एक्ट के सेक्शन थ्री में बताया गया
है। तो जो सेंट्रल एडवाइज़री कॉन्ट्रैक्ट
लेबर बोर्ड है ये सेंट्रल गवर्नमेंट को
एडवाइस करता है। क्लियर? ये जो बोर्ड है
ये सेंट्रल गवर्नमेंट को एडवाइस करेगा
कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट को लेकर जो भी
सजेशंस होते हैं। तो द सेंट्रल बोर्ड शैल
कंसिस्ट ऑफ ए चेयरमैन टू बी अपॉइंटंटेड
बाय द सेंट्रल गवर्नमेंट। यानी कि सेंट्रल
गवर्नमेंट ही रिक्रूटमेंट करेगा। तो
चेयरमैन होंगे जो कि सेंट्रल गवर्नमेंट
द्वारा अपॉइंट किया जाएगा। वहीं पे द चीफ
लेबर कमिश्नर होगा जो कि सेंट्रल
गवर्नमेंट द्वारा ही अपॉइंट किया जाएगा।
और वहीं पे सच नंबर ऑफ़ मेंबर्स नॉट
एक्सीडिंग 17 बट नॉट लेस देन 11। यानी कि
11 से 17 मेंबर तक जो है कुछ मेंबर 11 से
17 लोग जो है एज अ मेंबर इस सेंट्रल बोर्ड
में रहेंगे। तो एक चेयरमैन, एक चीफ लेबर
कमिश्नर और 11 से 17 मेंबर होंगे इसमें।
ठीक है? वो मेंबर कौन होंगे? टू
रिप्रेजेंट दी गवर्नमेंट, द रेलवे, द कोल
इंडस्ट्री, द माइनिंग इंडस्ट्री, द
कॉन्ट्रैक्टर, द वर्कमैन एंड एनी अदर
इंटरेस्ट व्हिच इन द ओपिनियन ऑफ़ द सेंट्रल
गवर्नमेंट। तो जो 11 से 17 मेंबर होंगे वो
जो है गवर्नमेंट को रिप्रेजेंट करेंगे।
कुछ रेलवे को, कुछ कोल इंडस्ट्री को, कुछ
माइनिंग इंडस्ट्री को, कुछ कॉनंट्रेक्टर
को और कुछ वर्कमैन को रिप्रेजेंट करेंगे।
क्लियर? तो यहां पर हम मान लें कि बोर्ड
सेंट्रल गवर्नमेंट जो है 17 मेंबर रिक्रूट
करती है, मेंबर को अपॉइंट करती है। एक चीफ
लेबर और एक चेमन। तो टोटल 19 लोग यहां पर
सेंट्रल बोर्ड में हो सकते हैं। द नंबर ऑफ
मेंबर्स नॉमिनेटेड टू रिप्रेजेंट दी
वर्कमैन शैल नॉट बी लेस देन दी नंबर ऑफ
मेंबर नॉमिनेटेड टू रिप्रेजेंट दी
प्रिंसिपल एंप्लयर एंड द कॉन्ट्रैक्टर। तो
यहां पर ये भी ध्यान रखना है कि जब ये
सेंट्रल गवर्नमेंट अपॉइंट करती है सेंट्रल
बोर्ड को यानी कि सेंट्रल एडवाइज़री
कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड को तो वहां पर जो
रिप्रेजेंट करते हैं वर्कमैन को उनकी
संख्या जो है वो प्रिंसिपल एंप्लॉयर और
कॉन्ट्रैक्टर को जो लोग रिप्रेजेंट कर रहे
होंगे उनकी संख्या से कम नहीं होनी चाहिए।
क्लियर? यानी कि जो वर्कमैन के
रिप्रेजेंटेटिव होंगे वो या तो इक्वल हो
या फिर ज्यादा हो एंप्लॉयर या फिर
कॉन्ट्रैक्टर के नंबर से। क्लियर? इसी
तरीके से स्टेट एडवाइज़री कॉन्ट्रैक्ट लेबर
बोर्ड जो है वो बनाया जाता है। सेक्शन फोर
में इसके बारे में बताया गया है कि जो
स्टेट गवर्नमेंट होगी वो जो है स्टेट
एडवाइज़री कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड अपने
यहां पर बनाएगी और इस स्टेट बोर्ड में जो
है एक चेयरमैन होंगे जो कि स्टेट
गवर्नमेंट अपॉइंट करेगी। वहीं पे लेबर
कमिश्नर होगा या फिर उसके एब्सेंस में कोई
भी ऑफिसर जो कि स्टेट गवर्नमेंट नॉमिनेट
करती है वो वहां पर काम करेगा। और वहीं पे
सच नंबर ऑफ़ मेंबर्स नॉट एक्सीडिंग 11 बट
नॉट लेस दैन नाइन। तो यहां पर 9 से 11 है।
इससे पहले जो सेंट्रल बोर्ड था वहां पर जो
है 11 से 17 था और यहां पर 9 से 11 है। तो
सच नंबर ऑफ मेंबर नॉट एक्सीडिंग 11 बट नॉट
लेस देन नाइन एज द स्टेट गवर्नमेंट मे
नॉमिनेट। तो यहां पर कितने हो गए? अगर हम
मैक्सिमम मेंबर की बात करें तो 11 मेंबर
एक लेबर कमिश्नर, एक चेयरमैन। यहां पे 13
लोगों की टीम यहां पर स्टेट बोर्ड में
होती है। तो यहां पे जो मेंबर होंगे
सिमिलरली टू रिप्रेजेंट द गवर्नमेंट, द
इंडस्ट्री, द कॉन्ट्रैक्ट, द वर्कमैन एंड
एनी अदर इंटरेस्ट इन व्हिच इन द ओपिनियन
ऑफ़ द स्टेट गवर्नमेंट और टू बी
रिप्रेजेंटेड ऑन द स्टेट बोर्ड। तो जो
मेंबर होंगे वो स्टेट गवर्नमेंट से हो
सकते हैं। वो इंडस्ट्री को रिप्रेजेंट
करने वाले होंगे। वो कॉन्ट्रैक्टर को
रिप्रेजेंट करने वाले होंगे। वो वर्कमैन
को रिप्रेजेंट करने वाले होंगे। वहीं पे
यहां पे भी सिंपल कंडीशन है कि जो नंबर ऑफ
नॉमिनेटेड मेंबर होंगे जो वर्कमैन को
रिप्रेजेंट कर रहे होंगे उनकी संख्या अह
ऐसे मेंबर जो कि प्रिंसिपल एंप्लॉय या फिर
कॉन्ट्रैक्टर को रिप्रेजेंट कर रहे होंगे
उनसे कम नहीं होनी चाहिए। क्लियर? अब तो
ये बात हो गई एडवाइज़री बोर्ड की। तो
सेंट्रल गवर्नमेंट ने अपने लिए एडवाइज़री
बोर्ड बना लिया। स्टेट गवर्नमेंट ने अपने
लिए एडवाइज़री बोर्ड बना लिया। अब बात आती
है रजिस्ट्रेशन की। तो यहां पर होगी
रजिस्ट्रेशन ऑफ़ एस्टैब्लिशमेंट एंप्लॉइंग
कॉन्ट्रैक्ट लेबर। तो ऐसे एस्टैब्लिशमेंट
जो कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर को एंप्लॉय करते
हैं उनका रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है। तो
उसके लिए क्या होता है कि एक रजिस्ट्रिंग
ऑफिसर को अपॉइंट किया जाता है। उसके लिए
रजिस्ट्रेशन के लिए एक रजिस्टरिंग ऑफिसर
को अपॉइंट किया जाता है। जिसके बारे में
सेक्शन सिक्स में बताया गया है। तो द
एप्रोप्रियट गवर्नमेंट यानी कि सेंट्रल
गवर्नमेंट या फिर स्टेट गवर्नमेंट कोई भी
गवर्नमेंट। तो द एप्रोप्रियट गवर्नमेंट
अपॉइंट सच पर्सन बीइंग गैजेटेड ऑफिसर ऑफ
गवर्नमेंट टू बी रजिस्टर्ड रजिस्टरिंग
ऑफिसर। यानी कि जो स्टेट गवर्नमेंट है या
फिर जो सेंट्रल गवर्नमेंट है वो किसी
गैजेटेड ऑफिसर को जो है रजिस्टिंग ऑफिसर
के रूप में अपॉइंट करेगा और जो भी उसकी
लिमिट्स होंगी या फिर जो भी उसके पावर
होंगी वो जो है स्टेट गवर्नमेंट जैसा
डिफाइन करेगी वैसा होगा। यहां पे बात होगी
कि रजिस्टिंग ऑफिसर को अपॉइंट किया जाता
है। उसके बाद फिर क्या होता है?
रजिस्ट्रेशन होता है। तो सेक्शन सेवन में
रजिस्ट्रेशन ऑफ़ सर्टेन एस्टैब्लिशमेंट के
बारे में बताया गया है। तो बाय एव्री
प्रिंसिपल एंप्लयर विद इन स्पेसिफाइड टाइम
बाय द एप्रोप्रियट गवर्नमेंट। इफ द
एप्लीकेशन फॉर रजिस्ट्रेशन इज़ कंप्लीट इन
ऑल रेस्पेक्ट द रजिस्टरिंग ऑफिसर शैल
रजिस्टर दी इस एस्टैब्लिशमेंट एंड इशू टू
दी प्रिंसिपल एंप्लयर ऑफ द एस्टैब्लिशमेंट
इज़ सर्टिफिकेट ऑफ़ रजिस्ट्रेशन। यानी कि जो
भी प्रिंसिपल एंप्लयर हैं जो भी इस एक्ट
के अंदर आते हैं उनको जो है अह अपने
एप्रोप्रियट गवर्नमेंट के द्वारा जो भी
रजिस्टिंग ऑफिसर है उसके पास जो है
एप्लीकेशन देना होगा। का जो भी फॉर्मेट है
और उसके बाद जब सभी चीजें कंप्लीट होगी
इन्वेस्टिगेशन होगा उसके बाद उनको जो है
सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन मिल जाता है।
यूपी में यहां पर कुछ चेंज किया गया है कि
ऑन सबमिशन ऑफ़ एप्लीकेशन इन ऑल रेस्पेक्ट द
रजिस्टरिंग ऑफिसर शैल ग्रांट और रिफ्यूज
टू ग्रांट और ऑब्जेक्ट टू ग्रांट
रजिस्ट्रेशन विद इन वन डे फ्रॉम द डेट ऑफ
सबमिशन ऑफ एप्लीकेशन। तो यहां पे उत्तर
प्रदेश में क्या है कि जब भी कोई
इस्टैब्लिशमेंट है वो रजिस्ट्रेशन के लिए
यहां पे एप्लीकेशन देगा। तो एक दिन के
अंदर ही जो है वहां पर रजिस्टरिंग ऑफिसर
को बताना होगा कि उसका एप्लीकेशन अप्रूव
हुआ है या फिर नहीं हुआ है। विद इन वन डे
जो है वहां पे बताना होगा। ऑन द
एक्सपायरेशन ऑफ द सेट पीरियड द
रजिस्ट्रेशन शैल बी डीम टू बी ग्रांटेड।
यानी कि अगर सारे डॉक्यूमेंट्स कंप्लीटेड
हैं और फिर भी रजिस्टिंग ऑफिसर ने जो है
कंफर्म नहीं किया तो ये माना जाएगा कि
उसको जो है रजिस्ट्रेशन हो चुका है। उसको
ग्रांट मिल चुका है। उसको सर्टिफिकेट मिल
जाएगा। वहीं पे अब जो है रजिस्ट्रेशन हो
गया प्रिंसिपल एंप्लॉयर की। अब बात आती है
कॉन्ट्रैक्टर की। तो ये जो कॉन्ट्रैक्टर
होते हैं जो कॉन्ट्रैक्ट लेबर को एंप्लॉय
करते हैं उनको लाइसेंस लेना पड़ता है।
लाइसेंसिंग ऑफ कॉन्ट्रैक्टर। तो
कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 के तहत उनको
जो है लाइसेंस लेना पड़ता है। तभी आप जो
है कॉन्ट्रैक्ट पे काम कराने के लिए
एंप्लॉय को लेबर को रिक्रूट कर सकते हैं।
तो सबसे पहले अब लाइसेंस देने के लिए भी
क्या है? गवर्नमेंट ने लाइसेंसिंग ऑफिसर
बनाया। अपॉइंट किया। तो अपॉइंटमेंट ऑफ
लाइसेंसिंग ऑफिसर। क्लियर? रजिस्ट्रेशन के
लिए रजिस्टिंग ऑफिसर। लाइसेंस
कॉन्ट्रैक्टर को लाइसेंस देने के लिए
लाइसेंसिंग ऑफिसर। सेक्शन 11 में इसकी बात
कही गई है। तो द एप्रोप्रियट गवर्नमेंट
यानी कि सेंट्रल गवर्नमेंट या फिर स्टेट
गवर्नमेंट। द एप्रोप्रियट गवर्नमेंट
अपॉइंट्स सच पर्सन बीइंग गैजेटेड ऑफिसर ऑफ
गवर्नमेंट टू बी लाइसेंसिंग ऑफिसर। तो
यहां पर भी जो लाइसेंसिंग ऑफिसर होगा वो
क्या होगा? गैजेटेड ऑफिसर होगा। और जो
एप्रोप्रियट गवर्नमेंट होगी वो जो है उसकी
लिमिट्स उसकी पावर जो है वो अकॉर्डिंगली
उसको वहां पर जा बताएगी। वहीं पे जो
लाइसेंसिंग ऑफिसर होगा वो लाइसेंस देगा
पहली बार या फिर रिन्यू करेगा अगर जरूरत
पड़ेगी आफ्टर दी इन्वेस्टिगेशन एज पर दी
प्रिस्राइब फॉर्मेट या फिर फी यानी कि जो
भी लाइसेंस के लिए फॉर्मेट होगा जो भी
उसमें डिटेल्स देनी है जो भी उसके लिए फीस
देना होगा वो जब कॉन्ट्रैक्टर दे देगा
उसके बाद उसको इन्वेस्टिगेट करेगा और
इन्वेस्टिगेशन करने के बाद जो लाइसेंसिंग
ऑफिसर होगा वो लाइसेंस जो है वो
कॉन्ट्रैक्टर को दे देगा क्लियर तो
लाइसेंसिंग से रिलेटेड कहां है सेक्शन 11
में बात कही गई है क्लियर तो अब अगला आता
है कि आप जो प्रिंसिपल एंप्लॉय है वो
रजिस्ट्रेशन हो गया। उसका कॉन्ट्रैक्टर को
लाइसेंस मिल गया। अब जो कॉन्ट्रैक्ट क्या
करता है? वो कॉन्ट्रैक्टर जो है लेबर को
रिक्रूट कर लेता है एज अ कॉन्ट्रैक्ट
लेबर। तो अब जब आप बीइंग अ कॉन्ट्रैक्टर
किसी लेबर को एज अ कॉन्ट्रैक्ट लेबर अपने
यहां पर रिक्रूट करते हो तो आपको उसको कुछ
वेलफेयर और उसको कुछ हेल्थ से रिलेटेड
वहां पे बेनिफिट्स देने होते हैं। तो सबसे
पहली चीज आती है कैंटीन। तो सेक्शन 16 में
कहा गया है कि वेयर इन कॉन्ट्रैक्ट लेबर
नंबरिंग 100 और मोर इज ऑर्डिनरी एंप्लॉयड
बाय अ कॉन्ट्रक्टर वन और मोर कैंटेन शैल
बी प्रोवाइडेड एंड मेंटेन बाय द
कॉन्ट्रैक्टर फॉर द यूज़ ऑफ़ सच कॉन्ट्रैक्ट
लेबर। यानी कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970
के अकॉर्डिंग अगर कॉन्ट्रैक्टर ने रिक्रूट
किया है कॉन्ट्रैक्ट लेबर पे और वहां पर
जो लेबरों की संख्या है वो 100 से ज्यादा
है। कॉन्ट्रैक्ट लेबर नंबरिंग 100 और मोर
तो उस केस में जो कॉन्ट्रैक्टर है उसको जो
है कैंटीन की फैसिलिटी वहां पर प्रोवाइड
करनी होगी और कैंटीन की फैसिलिटी एक या एक
से ज्यादा कैंटीन वहां पर उसको एज़ पर
रिक्वायरमेंट वहां पे देनी होगी। क्लियर?
इसके बाद सेक्शन 17 में कहा गया है रेस्ट
रूम इन एव्री प्लेस वेयर इन कॉन्ट्रैक्ट
लेबर इज़ रिक्वायर्ड टू हल्ट एट नाइट इन
कनेक्शन विद द वर्क ऑफ एन एस्टैब्लिशमेंट।
यानी कि अगर किसी कॉन्ट्रैक्ट में ऐसा कोई
काम है जहां पर रात में रुकना पड़ेगा। तो
उस केस में देयर शैल बी प्रोवाइडेड एंड
मेंटेनेंड बाय द कॉन्ट्रैक्टर फॉर द यूज़
ऑफ द कॉन्ट्रैक्ट लेबर। तो रेस्ट रूम जो
है वहां पर प्रोवाइड किया जाना चाहिए। वो
भी किसके द्वारा? कॉन्ट्रैक्टर द्वारा। और
उसी के द्वारा उसको मेंटेन किया जाइए। शैल
बी सफिशिएंटली लाइटेड एंड वेंटिलेटेड एंड
शैल बी मेंटेंड इन अ क्लीन एंड कंफर्टेबल
कंडीशन। तो जो भी रेस्टोरूम्स हैं वो जो
है वहां पर लाइटिंग की फैसिलिटी होनी
चाहिए। वेंटिलेशन की फैसिलिटी होनी चाहिए
और साफ-सुथरा होना चाहिए और कंफर्टेबल
कंडीशन वहां पर होनी चाहिए। क्लियर? तो
अगर रात में रुकना पड़ रहा है तो
रेस्टोरूम भी कॉन्ट्रैक्टर को वहां पर
देना होगा। इसके अलावा अदर फैसिलिटीज़ में
सेक्शन 18 में बताया गया है अदर
फैसिलिटीज़। इट शैल बी द ड्यूटी ऑफ़ एव्री
कॉन्ट्रक्टर एंप्लॉयंग कॉन्ट्रैक्ट लेबर
इन कनेक्शन विद दी वर्क ऑफ एन
एस्टैब्लिशमेंट टू प्रोवाइड एंड मेंटेन।
तो यहां पे भी किसकी जिम्मेदारी है?
कॉन्ट्रैक्टर की जिम्मेदारी है कि एक
सफिशिएंट सप्लाई ऑफ़ होलसम ड्रिंकिंग वाटर
जो है वहां पर प्रोवाइड करें। ए सफिशिएंट
सप्लाई ऑफ़ होलसम ड्रिंकिंग वाटर फॉर द
कॉन्ट्रैक्ट लेबर एट कन्वीनिएंट प्लेसेस।
तो बीइंग अ कॉन्ट्रैक्टर आपको जो
कॉन्ट्रैक्ट लेबर है उनके लिए आपको
ड्रिंकिंग वाटर की फैसिलिटी आपको वहां पर
मेंटेन रखनी पड़ेगी। इफिशिएंट नंबर ऑफ़
लैट्रिन एंड यूरिनल्स ऑफ द प्रिस्राइब
टाइप। सो सिचुएटेड एज टू बी कन्वीनिएंट
एंड असेसबल टू दी कॉन्ट्रैक्ट लेबर इन द
एस्टैब्लिशमेंट। यानी कि वहां पर वाशरूम
की फैसिलिटी भी जो है कॉन्ट्रैक्टर को
वहां पर जो है मेंटेन रखनी होगी। वहां पर
अवेल करनी होगी जिससे कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर
उसको एक्सेस कर सके। और वहीं पे वाशिंग
फैसिलिटीज़ यानी कि हाथ पैर मुंह धोने के
लिए इन सब की फैसिलिटीज़ भी जो है कपड़े
धोने के लिए भी वहां पर जो है
कॉन्ट्रैक्टर को वहां पर अरेंज करना
पड़ेगा। क्लियर? यह सेक्शन 18 में कहा गया
है। इसके अलावा भाई कॉन्ट्रैक्ट लेबर हैं,
काम कर रहे हैं तो चोट लग सकती है। तो
फर्स्ट एट फैसिलिटीज़ की भी जो है यहां पे
बात कही गई है। सेक्शन 19 में देयर शैल बी
प्रोवाइडेड एंड मेंटेन बाय दी
कॉन्ट्रैक्टर। तो कॉन्ट्रैक्टर ही जो है
प्रोवाइड करेगा और कॉन्ट्रैक्टर ही फर्स्ट
एड फैसिलिटीज़ जो है मेंटेन करेगा। एंड
एक्सेसिबल ड्यूरिंग ऑल वर्किंग आवर्स ए
फर्स्ट एड बॉक्स इक्विड विद दी
प्रिस्राइब्ड कंटेंट एट एव्री प्लेस
व्हेयर कॉन्ट्रैक्ट लेबर इज़ एंप्लॉयड बाय
हिम। तो कॉन्ट्रैक्टर ने जहां-जहां पे भी
कांटेक्ट लेबर को एंप्लॉय किया है वहां पर
फर्स्ट एड बॉक्स जो है वो वहां पर उसको
रखना होगा जिसको जो कॉन्ट्रैक्ट लेबर है
वो किसी भी टाइम पे वर्किंग आवर्स में
उसको एक्सेस कर सके। वहीं पे सेक्शन 20
कहता है ऑल एक्सपेंसेस इंकर्ड बाय द
प्रिंसिपल एंप्लयर इन प्रोवाइडिंग दी
अमिनिटी मे बी रिकवर्ड बाय द कॉन्ट्रैक्टर
आइदर बाय डिडक्शन फ्रॉम एनी अमाउंट पेएबल
टू द कॉन्ट्रैक्टर अंडर एनी कॉन्ट्रैक्ट
और एज़ अ डेप्ट पेएबल बाय दी कॉन्ट्रैक्टर।
यानी कि अगर इन द केस जो प्रिंसिपल
एंप्लयर है वो पे करता है कॉन्ट्रैक्टर की
जगह तो उस केस में जो प्रिंसिपल एंप्लॉयर
है वो कॉन्ट्रैक्टर से पैसे वसूलेगा
कॉन्ट्रैक्ट लेबर से नहीं कॉन्ट्रैक्टर से
पैसे वसूलेगा उनके जो भी पैसा देना होगा
कॉन्ट्रैक्टर को वो वहां से डिटेक्ट कर
लेगा क्लियर तो ये जो है बात कही गई है कि
अगर प्रिंसिपल एंप्लॉयर जो है एक्सपेंस
इंकर्ड करता है तो उस केस में अब आती है
रिस्पांसिबिलिटी फॉर पेमेंट ऑफ वेजेज यानी
कि जो कॉन्ट्रैक्ट लेबर हैं उनको आप वेजेज
भी दोगे तो इसकी रिस्पोंसिबिलिटी किसकी है
इसकी रिस्पोंसिबिलिटी होल सोल देखी जाए तो
कॉन्ट्रैक्ट कॉन्ट्रैक्टर की होती है तो
सेक्शन 21 में बात कही गई है कि ए
कॉन्ट्रैक्टर शैल बी रिस्पांसिबल फॉर
पेमेंट ऑफ वेजेस टू ईच वर्कर एंप्लॉयड बाय
हिम एज़ कॉन्ट्रैक्ट लेबर एंड सच वेजेस शैल
बी पेड बिफोर दी एक्सपायरी ऑफ़ सच पीरियड
एज मे बी प्रिस्क्राइब्ड यानी कि अगर आपने
उसको दिहाड़ी पे रखा है तो हर दिन आपको जो
है उसको पेमेंट करना पड़ेगा वेज देना पड़ेगा
अगर आपने उसको मंथली रखा है तो मंथली के
बेसिस पे आपको जो है उसको पेमेंट करना
पड़ेगा और ये कॉन्ट्रैक्ट कॉन्ट्रैक्टर की
रिस्पांसिबिलिटी होती है लेकिन एव्री
प्रिंसिपल एंप्लयर शैल नॉमिनेट अ
रिप्रेजेंटेटिव ड्यूली अथोराइज़्ड बाय हिम
टू बी प्रेजेंट एट द टाइम ऑफ़ डिस्पर्समेंट
ऑफ़ वेजेस बाय द कॉन्ट्रैक्टर एंड इट शैल
बी द ड्यूटी ऑफ़ सच रिप्रेजेंटेटिव टू
सर्टिफाई द अमाउंट पेड एज वेजेस। यानी कि
जब कॉन्ट्रैक्टर अपने जो कॉन्ट्रैक्टर
लेबर हैं उनको वेजेस डिस्ट्रीब्यूट करेगा
बांटेगा तो उस वक्त जो प्रिंसिपल एंप्लयर
है उसका एथराइज किया हुआ एक
रिप्रेजेंटेटिव भी वहां पर मौजूद होगा और
वो जो है उसको वेरीफाई करेगा सर्टिफाई
करेगा कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर को सही अमाउंट
मिल रहा है। इट शैल बी द ड्यूटी ऑफ़
कॉन्ट्रैक्टर टू इंश्योर द डिसबर्समेंट ऑफ़
वेजेस इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ अथोराइज़
रिप्रेजेंटेटिव ऑफ़ द प्रिंसिपल एंप्लयर।
तो यह जो है कॉन्ट्रैक्टर की ड्यूटी बनती
है कि वह जब भी वेजेस डिस्ट्रीब्यूट करे
तो उस वक्त जो प्रिंसिपल एंप्लॉय का
रिप्रेजेंटेटिव है वो वहां पे मौजूद हो।
इन केस द कॉन्ट्रैक्टर फेस टू मेक पेमेंट
ऑफ वेजेस विद इन द प्रिस्राइब पीरियड और
मेक शॉर्ट पेमेंट। यानी कि कोई ऐसा केस
हुआ जहां पर कॉन्ट्रैक्ट जो है पेमेंट
नहीं कर पाता है या फिर कम अमाउंट पे करता
है। देन द प्रिंसिपल एंप्लॉयर शैल बी
लायबल टू मेक पेमेंट ऑफ वेजेस इन फुल और
दी अनपेड बैलेंस ड्यू। यानी कि तब वहां पर
प्रिंस प्रिंसिपल एंप्लयर की ये ड्यूटी
बनेगी कि वो पूरा पेमेंट करें या फिर
थोड़ा पेमेंट हुआ है तो जो बचा है वो
पेमेंट करें कॉन्ट्रैक्ट लेबर को एंड
रिकवर दी अमाउंट सो पेड फ्रॉम द
कॉन्ट्रैक्टर आइदर बाय डिडक्शन फ्रॉम एनी
अमाउंट पेबल टू दी कॉन्ट्रैक्टर अंडर एनी
कॉन्ट्रैक्ट और एज़ अ डेप्ट पेएबल बाय दी
कॉन्ट्रैक्टर यानी कि ओवरऑल यहां पे क्या
हो गया कि अगर कॉन्ट्रैक्टर जो है पैसा
नहीं पे कर पाता है या फिर थोड़ा पैसा पे
करता है तो उस केस में प्रिंसिपल एंप्लॉयर
की ये रिस्पांसिबिलिटी बनती है कि वो जो
है कॉन्ट्रैक्ट लेवल को पूरा पैसा पे या
फिर जो भी पैसा बचा है वह पे करें और उसके
बाद फिर कॉन्ट्रैक्टर के अमाउंट से वह जो
है डिडक्ट कर ले। यानी कि प्रिंसिपल
एंप्लयर जो है वह किससे काटेगा पैसा?
कॉन्ट्रैक्टर को जो पैसा देना है उससे
पैसा वह काट लेगा। अब आता है कि अगर आप
किसी भी रूल को, किसी भी सेक्शन को,
प्रोविज़न को अगर आप तोड़ते हैं, तो आपके
ऊपर क्या पेनल्टीज़ या फिर क्या एक्शन लिया
जा सकता है? तो, ऑब्स्ट्रक्शन सेक्शन 22
में कहा गया है कि हु एवर ऑब्स्ट्रक्ट एन
इंस्पेक्टर इन द डिस्चार्ज ऑफ हिज़ ड्यूटीज़
अंडर दिस एक्ट। और हु एवर विलफुली
रिफ्यूसेस टू प्रोड्यूस ऑन द डिमांड ऑफ़ एन
इंस्पेक्टर एनी रजिस्टर और अदर डॉक्यूमेंट
केप्ट इन परसेंस ऑफ़ दिस एक्ट। शैल बी
पनिशेबल विथ इंप्रिज़मेंट ऑफ़ अ टर्म व्हिच
मे एक्सटेंड टू 3 मंथ। और विद फाइन व्हिच
मे एक्सटेंड टू ₹500 और विद बोथ। यानी कि
अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर या फिर प्रिंसिपल
एंप्लयर किसी भी इंस्पेक्टर को उसकी
ड्यूटीज परफॉर्म करने से रोकता है या फिर
अड़चनें डालता है या फिर जो कॉन्ट्रैक्टर
या फिर प्रिंसिपल एंप्लयर हैं वो कोई
डॉक्यूमेंट जो है नहीं दे रहे हैं या फिर
उसको छुपा रहे हैं तो उस केस में उनको 3
साल का जेल हो सकता है या फिर ₹500 का
उनको फाइन लगेगा या फिर दोनों ही लग सकता
है उनके ऊपर। तो यहां तो बात हो गई कि अगर
आप इंस्पेक्टर को डिस्टर्ब करते हो,
ऑब्सेप्ट करते हो तो उस केस में आपको जो
है 3 महीने की जेल या फिर ₹500 या फिर
दोनों ही आपके ऊपर फाइन लग सकता है। वहीं
पे अगर आप जो है एंप्लॉयमेंट ऑफ
कॉन्ट्रैक्ट लेबर से रिगार्डिंग जो
प्रोविज़ंस हैं उसको कॉन्ट्रावेंट करते हैं
उसको तोड़ते हैं तो उस केस में आपको जो है
शैल बी पनिशेबल विद इंप्रज़मेंट फॉर अ टर्म
व्हिच मे एक्सटेंड टू 3 मंथ्स और विथ फाइन
व्हिच मे एक्सटेंड टू ₹1000 और विद बोथ।
यानी कि आपको 3 महीने की जेल या फिर आपको
₹1000 का फाइन या फिर दोनों ही आपको लग
सकता है। एंड इन द केस ऑफ़ अ कंटिन्यूइंग
कंट्रावेंशन विथ एन एडिशनल फाइन व्हिच मे
एक्सटेंड टू ₹100 फॉर एवरीडे। और अगर आप
जो है फर्दर आप जो है उस प्रोविज़न को तोड़
रहे होते हो तो उसके ऊपर पर डे के हिसाब
से आपको ₹100 एक्स्ट्रा देना पड़ेगा। यानी
कि यहां पर जो जेल है 3 महीने की और ₹1000
है। उसके अलावा आपको जो है ₹100 पर डे के
हिसाब से आपके ऊपर फाइन लग जाएगा। क्लियर?
तो ये बात हो गई कि अगर आप कंट्रावेंट
करते हैं किसी भी एक्ट को प्रोविजन को तो
आपके ऊपर ये फाइन लग जाएगा। वहीं पे कुछ
अदर सेक्शन है जैसे कि इंस्पेक्टिंग
स्टाफ। तो ये सेक्शन 28 में इसके बारे में
कहा गया है कि एप्रोप्रियट गवर्नमेंट मे
बाय नोटिफिकेशन इन द ऑफिशियल गैजेट अपॉइंट
सच पर्सन एज इट थिंक्स फिट टू बी
इंस्पेक्टर्स फॉर द पर्पस ऑफ़ दिस एक्ट।
यानी कि इंस्पेक्टिंग स्टाफ वो स्टाफ होता
है जो कि डिफरेंट-डिफरेंट को जहां पे भी
कॉन्ट्रैक्ट लेबर होते हैं वहां पे जाते
हैं और इंस्पेक्शन करते हैं। बुक्स को चेक
करेंगे, रजिस्टर को चेक करते हैं। तो ये
कौन अपॉइंट करेगा? जो ऑफिशियल गैजेट में
नोटिफिकेशन देके जो एप्रोप्रियट गवर्नमेंट
है सेंट्रल गवर्नमेंट या स्टेट गवर्नमेंट
वो जो है अपने यहां पर इंस्पेक्टिंग स्टाफ
रिक्रूट कर सकती है। वहीं पे सेक्शन 29
कहता है कि रजिस्टर और अदर रिकॉर्ड्स जो
है वो मेंटेन करना जरूरी होगा। जो
प्रिंसिपल एंप्लयर है और जो कॉन्ट्रैक्टर
हैं उनको रजिस्टर और जो अदर रिकॉर्ड्स हैं
उसको मेंटेन करना जरूरी है। एव्री
प्रिंसिपल एंप्लॉयर एंड एव्री
कॉन्ट्रैक्टर शैल मेंटेन सच रजिस्टर एंड
रिकॉर्ड गिविंग सच पार्टिकुलर ऑफ
कॉन्ट्रैक्ट लेबर एंप्लॉयड द नेचर ऑफ़ वर्क
परफॉर्म्ड बाय द कॉन्ट्रैक्ट लेबर। द रेट
ऑफ़ वेजेस पे टू द कॉन्ट्रैक्ट लेबर एंड सच
अदर पार्टिकुलर्स इन सच फॉर्म एज़ मे बी
प्रिस्राइब्ड। तो ऐसा रजिस्टर या फिर
रिकॉर्ड जो है प्रिंसिपल एंप्लॉयर और
एव्री कांट्रेक्टर को मेंटेन करना जरूरी
है। जहां पर कौन से लोग एंप्लॉय हुए हैं
एज अ का कॉन्ट्रैक्ट लेबर किस तरीके का
काम परफॉर्म कर रहे हैं। किस रेट से उनको
वेजेस दिए जा रहे हैं। और जो अदर डिटेल्स
हैं एप्लीकेबल डिटेल्स हैं वो जो है वहां
पर उसके रिगार्डिंग रजिस्टर और रिकॉर्ड
मेंटेन करना जरूरी है। तो ये ओवरऑल
ओवरव्यू था कॉन्ट्रैक्ट लेबर रेगुलेशन एंड
एवोल्यूशन एक्ट 1970 का जहां पर प्रिंसिपल
एंप्लयर होता है उसको कोई अपना काम
कंप्लीट करवाना होता है तो वह
कॉन्ट्रैक्टर को सर्च करता है।
कॉन्ट्रैक्टर को काम कंप्लीट करने के लिए
दे देता है। कॉन्ट्रैक्टर उस काम को
कंप्लीट करने के लिए कुछ लेबर्स को हायर
करता है जिनको हम कॉन्ट्रैक्ट लेबर कहते
हैं। तो कॉन्ट्रैक्ट लेबर को हायर करने के
रिगार्डिंग उसको रेगुलेट करने के लिए जो
है ये एक्ट आया गया है। और यहां पर जो है
पहले प्रिंसिपल एंप्लॉयर को अपना
रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। उसके बाद जो
है जो कॉन्ट्रैक्टर होते हैं उनको अब
लाइसेंस लेना होता है। उसके बाद कुछ
बेनिफिट्स होते हैं जो कि कॉन्ट्रैक्ट
लेबर को देना होता है। जैसे कैंटीन की
फैसिलिटी, रेस्टोरूम की फैसिलिटी, वाटर की
फैसिलिटी, वाशरूम की फैसिलिटी, वाशिंग
फैसिलिटीज़ और फर्स्ट एड फैसिलिटीज़। इसके
अलावा जो है उनको वेजेस जो है टाइम पर
देना होता है और सभी रजिस्टर्स और
रिकॉर्ड्स जो है मेंटेन करने होते हैं। तो
यही है जो कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 में
इंपॉर्टेंट सेक्शंस होते हैं। एंप्लाइजज़
स्टेट इंश्योरेंस एक्ट 1948। आपने देखा
होगा कि आपके आसपास की फैक्ट्रीज में
शॉप्स हो गए, होटल हो गए, रेस्टोरेंट हो
गए, सिनेमा, थिएटर्स हो गए या फिर जो
न्यूज़पेपर इस्टैब्लिशमेंट्स है,
प्रिंटिंग प्रेस है, प्राइवेट मेडिकल या
एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन है तो वहां पर बहुत
सारे एंप्लाइजज़ काम करते हैं। और बहुत
सारे ऐसे एंप्लाइजज़ काम करते हैं जिनका जो
वेज होता है वो बहुत कम होता है। क्लियर?
तो ऐसे में उनको जब कभी इंजरी हो जाए या
फिर कोई मेडिकल इश्यूज आ जाते हैं
ऑक्यूपेशनल डिजीज हो गया, बीमारी हो गई या
फिर मेंटेंटरी लीव पे जाना पड़ता है। कोई
फिजिकल डिसेबलेंट डिसएबेलमेंट हो गया जॉब
पे काम करते-करते या फिर ऑक्यूपेशनल डिजीज
हो गया या फिर डेथ हो जाती है। तो उस केस
में उनको फाइनेंशियल सपोर्ट प्रोवाइड करने
के लिए उनको मेडिकल बेनिफिट प्रोवाइड करने
के लिए उनके डिपेंडेंट्स को कुछ मेडिकल
केयर या फिर जो है फाइनेंसियल सपोर्ट
प्रोवाइड करने के लिए ये जो है स्टेट
इंश्योरेंस जो है वो स्कीम लेकर आया गया।
तो इसको जो है सबसे पहले इसको इनोगेट किया
था कानपुर में 24th फरवरी 1952 में जिसको
हम ईएसआईसी डे के रूप में भी मनाते हैं
बाय द प्राइम मिनिस्टर पंडित जवाहरलाल
नेहरू। तो उस वक्त के प्राइम मिनिस्टर
पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। तो उन्होंने जो
है इस स्कीम को जो है इनोगेट किया था
कानपुर में 24 फरवरी 1952 में जिसको हम
ईएसआईसी डे के नाम से जानते हैं। तो ये जो
है फर्स्ट मेजर लेजिसलेशन था ऑन सोशल
सिक्योरिटी फॉर वर्कर्स इन इंडिपेंडेंट
इंडिया। तो सोशल सिक्योरिटी स्कीम के नाम
से जो है वर्कर्स के लिए ये स्कीम जो है
लाई गई थी पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा
24th फरवरी 1952 जिसको हम ईएसआईसी डे के
नाम से जानते हैं। तो बात कर लें
ऑब्जेक्टिव की तो ये यानी कि इस स्टेट
इंश्योरेंस एक्ट एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस
एक्ट 1948 का ऑब्जेक्टिव क्या था? तो
बेसिक कि टू प्रोवाइड एन इंटीग्रेटेड नीड
बेस्ड सोशल इंश्योरेंस स्कीम दैट वुड
प्रोटेक्ट दी इंटरेस्ट ऑफ वर्कर इन
कॉन्टिजेंसीज सच एज सिकनेस यानी कि बीमारी
हो गई मैटरनिटी लेव में जाना पड़ गया या
मिसकैरज हो जाता है टेंपरेरी या परमानेंट
फिजिकल डिसेबलमेंट हो गया या फिर कोई
ऑक्यूपेशनल डिजीज हो गई या फिर डेथ हो
जाती है ड्यू टू एंप्लॉयमेंट इंजरी
रिजल्टिंग इन लॉस ऑफ़ वेजेस और अर्निंग
कैपेसिटी यानी कि ऐसी कोई डिजीज हो गई
जिसकी वजह से अब जो है आप जो है वेज़ नहीं
अर्न कर सकते हो या फिर अर्न नहीं कर सकते
हो। तो उस पे आपको जो है इंश्योरेंस जो है
उसके तहत आपको जो है यहां पे इंश्योरेंस
मिलता था। दिस एक्ट आल्सो गारंटीज़
रिज़नेबली गुड मेडिकल केयर टू वर्कर्स एंड
देयर इमीडिएट डिपेंडेंट्स। तो इस एक्ट के
जरिए जो है एक अच्छी मेडिकल केयर आपको मिल
सकती थी। एंप्लाइजज़ को मिल सकती थी और
फर्दर जो उनके डिपेंडेंट्स होते थे उनको
भी जो है मेडिकल केयर या फिर फाइनेंसियल
सपोर्ट इस एक्ट के तहत उनको दिया जाता।
क्लियर? अब बात कर लें कि नेक्स्ट कि यह
जो एक्ट है इसकी स्कोप क्या है या फिर
एप्लीकेबिलिटी किस पे है? तो पहली चीज कि
ये एक्ट जो है होल ऑफ इंडिया यानी कि पूरे
इंडिया पर एप्लीकेबल है। द एक्ट एक्सटेंड
टू दी होल ऑफ इंडिया। और वहीं पे ये जो
एक्ट है यह सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा
इनफोर्स किया जाता है। द सेंट्रल
गवर्नमेंट इज़ एमावर्ड टू इनफोर्स दी
प्रोविज़ ऑफ द एक्ट बाय नोटिफिकेशन इन द
ऑफिशियल गैजेट एज़ पर सेक्शन वन सब सेक्शन
थ्री। तो सेंट्रल गवर्नमेंट ही है जो इसको
जो है रेगुलेट करती है, एमावर करती है और
इसके जो भी डिफरेंट प्रोविज़ंस होते हैं वो
उस एक्ट के वो नोटिफिकेशन के जरिए ऑफिशियल
गैजेट में सभी जगह पर एप्लीकेबल करवाती
है। किस लोगों पे किन लोगों पे ये चीज
एप्लीकेबल है? यानी कि जो एंप्लई स्टेट
इंश्योरेंस है ये किन लोगों पर एप्लीकेबल
है? किस टाइप के बिज़नेस पे एप्लीकेबल है?
तो सबसे पहली चीज़ ऑल फैक्ट्रीज़। ऑल
फैक्ट्रीज़ एक्सक्लूडिंग सीजनल फैक्ट्रीज़
एंप्लॉइंग एट लीस्ट 10%। यानी कि वो सभी
फैक्ट्रीज जो कि कम से कम 10 पर्सन अपने
यहां पर एंप्लॉयमेंट दे रहे हैं वेज के
रूप में उनको एंप्लई को रख रहे हैं अपने
यहां पर तो वहां पर जो है ये एंप्लई स्टेट
इंश्योरेंस एक्ट लागू होगा। शॉप्स हो गए,
होटल एंड रेस्टोरेंट्स हो गए, सिनेमाज़ एंड
थिएटर्स हो गए, रोड, मोटर ट्रांसपोर्ट
एस्टैब्लिशमेंट हो गए, न्यूज़पेपर
एस्टैब्लिशमेंट्स हो गए या फिर कोई
प्राइवेट मेडिकल या एजुकेशनल इंस्टीटशंस
हो गए जहां पर 20 से अधिक लोग काम कर रहे
हैं। तो वहां पर यह एक्ट जो है वो
एप्लीकेबल होगा। अब बात कर लें कि इसमें
जो एंप्लाइजज़ को बेनिफिट्स दिए जाते हैं
उसके लिए फंड्स कहां से आते हैं? तो उसके
लिए क्या होता है कि कंट्रीब्यूशन किया
जाता है। कॉन्ट्रिब्यूशन क्या होता है कि
सम ऑफ़ मनी पेएबल टू दी कॉर्पोरेशन।
कॉर्पोरेशन यानी कि एक फंड बना दिया जाता
है एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस फंड के नाम
से। और उस फंड्स में जो है एंप्लयर द्वारा
एंप्लयर का हिस्सा और एंप्लई का हिस्सा जो
है वह पे किया जाता है। तो कॉनंट्रीब्यूशन
कहते हैं उसको। ठीक है? ठीक है? तो मींस द
सम ऑफ़ मनी पेएबल टू दी कॉर्पोरेशन बाय दी
प्रिंसिपल एंप्लयर इन रिस्पेक्ट ऑफ एन
एंप्लाइज एंड इंक्लूड एनी अमाउंट पेएबल
बाय और ऑन बिहाफ ऑफ द एंप्लई इन अकॉर्डेंस
विद दी प्रोविज़न ऑफ़ दिस एक्ट। तो यहां पर
क्या होता है कि एंप्लई एक मतलब कि कुछ
परसेंट जो है गवर्नमेंट द्वारा फिक्स कर
दिया जाता है। उतना परसेंट जो है एंप्लयर
को अपना और एंप्लई का हिस्सा जो है
एंप्लयर द्वारा पे किया जाता है कॉरपोरेशन
को। क्लियर? द कंट्रीब्यूशन पेएबल शैल
ऑर्डरली फॉल ड्यू ऑन द लास्ट डे ऑफ़ द वेज
पीरियड। तो जो वेज पीरियड का लास्ट डे
होता है उस दिन तक जो है ये कंट्रीब्यूशन
को कंट्रीब्यूट कर लेना होता है फंड में
कॉरपोरेशन को। अब बात कर लें कि क्या रेट
है? तो द कंट्रीब्यूशन शैल बी पेड एट
रेट्स प्रिस्राइब्ड बाय दी सेंट्रल
गवर्नमेंट। तो सेंट्रल गवर्नमेंट जो भी
रेट बताएगा उसके अकॉर्डिंग जो है
कंट्रीब्यूशन एंप्लयर को करना पड़ेगा। तो
करेंटली जो कंट्रीब्यूशन रेट है वो 4% है।
4% में कुछ एंप्लयर का है, कुछ एंप्लई का
है। तो एंप्लयर का ज्यादा होता है, एंप्लई
का कम होता है। 3.25% जो है वो एंप्लयर
कंट्रीब्यूशन होता है और वहीं पे 75 जो है
वो एंप्लई कंट्रीब्यूशन होता है। याद रहे
एंप्लई खुद नहीं पे करेगा। एंप्लयर ही
एंप्लई का हिस्सा भी पे करेगा। तो एंप्लई
का जितना भी वेज होगा सपोज़ कि 10,000 है
तो 10,000 का 75% जो है एंप्लयर जो है
कंट्रीब्यूट कर देगा फंड में। और वहीं पे
10,000 का 3.25% एंप्लयर अपने साइड से पे
कर देगा कंट्रीब्यूशन फंड में। क्लियर? तो
ये जो है कंट्रीब्यूशन रेट हो गया। तो
अकॉर्डिंग टू सेक्शन 40 ऑफ द एक्ट द
प्रिंसिपल एंप्लॉयर इज़ लायबल टू पे बोथ द
एंप्लॉयर्स कॉनंट्रीब्यूशन एंड एंप्लाइजज़
कॉन्ट्रिब्यूशन। यानी कि सेक्शन 40 जो है
वो एक्ट का ये कहता है कि जो प्रिंसिपल
एंप्लॉयर होता है उसकी लायबिलिटी बनती है।
उसकी जिम्मेदारी बनती है कि जो एंप्लयर का
कंट्रीब्यूशन है और जो एंप्लई को
कंट्रीब्यूशन है दोनों ही वो पे करें
कंट्रीब्यूशन फंड में। ठीक है? इन
रिस्पेक्ट ऑफ एव्री एंप्लई वेदर
डायरेक्टली एंप्लॉयड बाय हिम और बाय थ्रू
एन इमीडिएट एंप्लॉय। तो चाहे उस एंप्लई को
प्रिंसिपल एंप्लॉय ने डायरेक्टली रिक्रूट
किया है, एंप्लॉयड किया है या फिर किसी
इमीडिएट एंप्लॉय ने एंप्लॉय किया है। वो
प्रिंसिपल एंप्लई की ही जिम्मेदारी बनती
है कि उसका हिस्सा भी जो है वो
कंट्रीब्यूशन फंड में पे करेगा। तो जितने
भी एंप्लई की वेज होगी उसका 3.25% जो है
एंप्लयर पे करेगा और जितना वेज होगा उसका
75% वो एंप्लई की वेज से डिडक्ट करके
कंट्रीब्यूशन में फंड में जो है सबमिट
किया जाता है। अगर कोई प्रिंसिपल एंप्लयर
कंट्रीब्यूशन करने से रह जाता है। इफ एनी
कंट्रीब्यूशन इज़ नॉट पेड बाय द प्रिंसिपल
एंप्लयर ऑन ड्यू डेट। तो जो भी ड्यू डेट
है उस तक प्रिंसिपल एंप्लयर द्वारा
कंट्रीब्यूशन नहीं किया जाता है। तो उससे
यानी कि एंप्लयर से जो है 12% पर एनम के
रेट से जो है चार्ज किया जाएगा। ही शैल बी
लायबल टू पे सिंपल इंटरेस्ट एट 12% पर एनम
और एट हायर रेट स्पेसिफाइड इन दी
रेगुलेशन। तो अभी जो है 12% पर एनम है।
अगर आगे चलके चेंज करके उसको बढ़ाया भी जा
सकता है। तो अगर कोई प्रिंसिपल एंप्लयर
ड्यू डेट तक जो है पे नहीं करता है,
कंट्रीब्यूशन नहीं करता है तो उससे सिंपल
इंटरेस्ट 12% पर एनम के हिसाब से लिया
जाएगा एज़ पर सेक्शन 39 सब सेक्शन फाइव के
अकॉर्डिंग। क्लियर? अब बात कर लें कि
बेनिफिट्स की कि एंप्लयर एंप्लई स्टेट
इंश्योरेंस एक्ट 1948 के तहत क्या
बेनिफिट्स मिलते हैं। तो अंडर दी सेक्शन
46 ऑफ द एक्ट द इंश्यर्ड पर्सन देयर
डिपेंडेंट्स आर एंटाइटल्ड टू दी फॉलोइंग
बेनिफिट्स ऑन प्रिस्राइब्ड स्केल। तो जो
भी गवर्नमेंट द्वारा प्रिस्राइब किया
जाएगा उस स्केल के तहत जो बेनिफिट्स हैं
वो दिए जाएंगे। किसको? इंश्यर्ड पर्सन को
और उनके डिपेंडेंट्स को भी। पहला
पीरियडिकल पेमेंट इन केस ऑफ़ सिकनेस
सर्टिफ़ाइड ब द मेडिकल प्रैक्टिशनर। तो
यानी कि अगर कोई मेडिकल प्रैक्टिशनर है
उसने सर्टिफ़ाई कर दिया तो कि इंश्योर को
या फिर उसके डिपेंडेंट को कोई पर्टिकुलर
सिकनेस है तो उसके लिए जो है पीरियडिकल
पेमेंट जो है उसको दिया जाएगा। पीरियडिकल
पेमेंट टू एन इंश्य्यर्ड वर्कमैन इन केस
ऑफ़ कनफाइनमेंट और मिसकैरज और सिकनेस
अराइज़िंग आउट ऑफ प्रेगनेंसी कनफाइनमेंट।
क्लियर? तो यहां पर जो है पीरियडिकल
पेमेंट किया जाएगा। अगर किसी फीमेल
कैंडिडेट को उसको मिसकैरज हो जाता है या
फिर प्रेगनेंसी की वजह से कोई सिकनेस होती
है तो उसको जो है यहां पर पीरियडिकल
पेमेंट किया जाएगा। पीरियडिकल पेमेंट टू
एन इंश्यर्ड पर्सन सफरिंग फ्रॉम
डिसेबलमेंट एज अ रिजल्ट ऑफ़ एंप्लॉयमेंट
इंजरी। यानी कि एंप्लॉयमेंट पे जॉब पे कर
रहा था उसकी वजह से इंजरी हुई। उसके वजह
से वो डिसेबल्ड हो गया तो उसको पीरियडिकल
पेमेंट दिया जाएगा। पीरियडिकल पेमेंट टू
डिपेंडेंट ऑफ इंश्यर्ड पर्सन। यहां पे जो
है इंश्यर्ड पर्सन है उसके डिपेंडेंट हो
गए। उनको भी पीरियडिकल पेमेंट मिलेगा।
मेडिकल ट्रीटमेंट एंड अटेंडेंस ऑफ
इंश्यर्ड पर्सन। तो इंश्यर्ड पर्सन का
मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए जो है यहां पे
बेनिफिट दिया जाएगा। पेमेंट ऑफ फ्यूनरल
एक्सपेंसेस ऑन द डेथ ऑफ इंश्यर्ड पर्सन एट
द प्रिस्राइब्ड रेट ऑफ यानी कि अगर जो
इंश्यर्ड पर्सन है उसकी डेथ हो जाती है तो
उसके उसके फ्यूनरल के खर्चे भी जो है वो
इंश्योरेंस इस स्कीम के तहत जो है उसको
दिए जाते थे। यानी कि इतने तरीके के
बेनिफिट जो है वो मिलते हैं इस एंप्लई
स्टेट इंश्योरेंस एक्ट के तहत। क्लियर? अब
यहां पर जो है इसके लिए कुछ जनरल प्रोविजन
है रिलेटिंग टू बेनिफिट। क्या है कि राइट
टू रिसीव बेनिफिट इज़ नॉट ट्रांसफरल और
असाइनेबल। यानी कि ये नहीं कि आप इंश्यर्ड
हो लेकिन आप कह रहे हो कि नहीं मेरी जगह
किसी और को दे दो। तो ऐसा नहीं होगा। यानी
कि ट्रांसफरेबल नहीं है ना ही असाइनेबल
है। वहीं पे दूसरा क्या है कि एन
इंश्य्यर्ड पर्सन इज़ नॉट एंटाइटल्ड टू
रिसीव फॉर द सेम पीरियड मोर देन वन
बेनिफिट। यानी कि यहां पर आप जो है दो
बेनिफिट एक साथ नहीं ले सकते हो। यानी कि
बेनिफिट ऑफ सिकनेस कैन नॉट बी कंबाइंड विद
द बेनिफिट ऑफ मैटरनिटी और डिसेबलमेंट।
क्लियर? तो आप जो है दो बेनिफिट एक साथ
सेम पीरियड में नहीं ले सकते हैं। क्लियर?
तो इस स्कीम की एडमिनिस्ट्रेशन के लिए जो
है यहां पर तीन लेवल पे क्रिएट किया गया
है। एंप्लाइजज़ स्टेट इंश्योरेंस
कॉरपोरेशन, स्टैंडिंग कमिटी और मेडिकल
बेनिफिट काउंसिल हैव बीन कॉन्स्टिट्यूटेड।
तो ये तीन चीजें जो है बनाई गई है जो कि
इस स्कीम को जो है मॉनिटर करती हैं,
एडमिनिस्टर करती हैं। सेक्शन 26 ऑफ द एक्ट
प्रोवाइड दैट ऑल कंट्रीब्यूशन पेड अंडर
दिस एक्ट एंड ऑल द अदर मनीज़ रिसीव्ड ऑन
बिहाफ ऑफ़ द कॉरपोरेशन शैल बी पेड इंटू अ
फंड। उसको क्या कहते हैं? एंप्लई स्टेट
इंश्योरेंस फंड व्हिच शैल बी हेल्ड एंड
एडमिनिस्टर्ड बाय द कॉरपोरेशन फॉर द पर्पज
ऑफ़ दिस एक्ट। तो ये जो है एडमिनिस्ट्रेशन
से रिलेटेड कुछ यहां पे इंफॉर्मेशन हो गई
कि जो एडमिनिस्ट्रेशन है इस इंश्योरेंस
स्कीम का वो एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस
कॉरपोरेशन करती है। स्टैंडिंग कमिटी सजेशन
करती है। मेडिकल बेनिफिट काउंसलिंग होती
है जो कि फर्दर जो है सजेस्ट करती है। और
सेक्शन 26 क्या कहता है कि जो भी
कंट्रीब्यूशन आता है एंप्लयर के साइड से
और जो भी अदर मनी रिसीव्ड होते हैं
कॉरपोरेशन के साइड से वो एंप्लाइजज़ स्टेट
इंश्योरेंस फंड में जो है जाएंगे और जो है
उसको एडमिनिस्ट्रेशन कौन करेगा? उसको
एडमिनिस्टर कौन करेगा इस फंड को?
कॉरपोरेशन ही करेगी इस एक्ट के पर्पस के
लिए। एंप्लाइजज़ स्टेट इंश्योरेंस एक्ट
1948 के चैप्टर सिक्स में एजुडिकेशन ऑफ़
डिस्प्यूट एंड क्लेम्स के बारे में
डिफरेंट सेक्शन में बताया गया है। तो
देखिए होता क्या है कि बहुत सारे
डिस्प्यूट्स आ जाते हैं कि एंप्लयर ने
अपना कंट्रीब्यूशन नहीं दिया या फिर
प्रिंसिपल एंप्लॉय ने एंप्लई को
कंट्रीब्यूशन डिडक्ट नहीं किया। उसको पे
नहीं किया या फिर जो भी बेनिफिट्स मिलने
थे, क्लेम्स मिलने थे, उसको लेकर जो है
डिस्प्यूट्स होते हैं। तो उन डिस्प्यूट्स
को रिॉल्व करने के लिए ये जो है एंप्लई
स्टेट इंश्योरेंस एक्ट 1948 के चैप्टर
सिक्स में एजुडिकेशन ऑफ डिस्प्यूट एंड
क्लेम्स के अंदर डिफरेंट सेक्शन में बताया
गया है कि कैसे जो है डिस्प्यूट को
रिज़ॉल्व करना है या फिर क्लेम्स को
क्लेम्स को लेकर जो भी डाउट्स हैं, जो भी
डिस्प्यूट्स हैं, उसको रॉल्व करना है। तो
एजुडिकेशन का मतलब क्या होता है? द एक्ट
ऑफ जजिंग अ केस कंपटीशन और आर्गुमेंट और
ऑफ मेकिंग अ फॉर्मल डिसीजन अबाउट समथिंग।
तो जो डिस्प्यूट्स हैं, जो क्लेम्स हैं,
उससे रिलेटेड जो भी कंपटीशन या फिर
आर्गुमेंट या फिर जो भी डिस्प्यूट्स होता
है, उसको जज करने के लिए उसको रॉल्व करने
के लिए इस सेक्शन में बताया गया है। तो
सबसे पहले कि अगर एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस
एक्ट 1948 के तहत जो भी बेनिफिट्स हैं, जो
भी कंट्रीब्यूशन है उसको लेकर कोई इशू आता
है तो उसके लिए जो है एक एंप्लाइजज़
इंश्योरेंस कोड जो है वो कॉन्स्टिट्यूट
किया जाएगा। सेक्शन 74 में इसके बारे में
बताया गया है कि जो स्टेट गवर्नमेंट होगी
वो गैजेट ऑफिशियल गैजेट नोटिफिकेशन जारी
करके एंप्लाइजज़ इंश्योरेंस कोर्ट जो है वो
कॉन्स्टिट्यूट करेगी यानी कि बनाएगी।
क्लियर? और इसमें जो है कौन होगा ऑफिशियल?
तो एनी पर्सन हु इज़ और हैज़ बीन अ जुडिशियल
ऑफिसर और इज़ अ लीगल प्रैक्टिशनर ऑफ़ फाइव
इयर्स स्टैंडिंग शैल बी क्वालिफाइड टू बी
अ जज ऑफ द एंप्लाइजज़ इंश्योरेंस कोड। तो
जो एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट बनाएगी
गवर्नमेंट स्टेट गवर्नमेंट उसमें जो जज
होगा वह या तो जुडिशियल ऑफिसर हो या फिर
लीगल प्रैक्टिशनर हो जो कि फाइव ईयर का
उसके पास जो है एक्सपीरियंस होना चाहिए।
क्लियर? तो यहां पे पहली चीज तो क्लियर हो
गई कि अगर कोई डिस्प्यूट या फिर क्लेम
होता है एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस एक्ट
1948 के तहत तो उसके एजुडिकेशन के लिए एक
एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट जो है वो बनता है
एज़ पर सेक्शन 74। उसके बाद अब सेक्शन 75
में बताया गया है कि कौन-कौन से मैटर्स
हैं जो कि एंप्लाइजज़ इंश्योरेंस कोर्ट में
डील किए जाते हैं। क्लियर? तो वेदर एनी
पर्सन इज़ एन एंप्लई विद इन द मीनिंग ऑफ़
दिस एक्ट और वेदर ही इज़ लायबल टू पे द
एंप्लाइजज़ कंट्रीब्यूशन। तो जो है वो
एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट में जा सकता है।
अगर उसके पास डिस्प्यूट है। द रेट ऑफ़
वेजेस और एवरेज डेली वेजेस ऑफ़ एन एंप्लई
फॉर द पर्पस ऑफ़ दिस एक्ट। तो इस एक्ट को
लेके जो भी रेट ऑफ वेजेस है या फिर एवरेज
डेली वेजेस है उससे लेकर कोई डिस्प्यूट है
तो इस इंश्योरेंस एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट
में जा सकता है। द रेट ऑफ कंट्रीब्यूशन
पेएबल बाय प्रिंसिपल एंप्लयर इन रेस्पेक्ट
ऑफ एनी एंप्लई एंप्लई के लिए जो प्रिंसिपल
एंप्लयर को जो भी कंट्रीब्यूशन देना था
उसके रेट को लेकर अगर कोई डिस्प्यूट है तो
वहां पर एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट में जा
सकता है। द पर्सन हु इज़ और वाज़ द
प्रिंसिपल एंप्लयर इन रेस्पेक्ट ऑफ़ एनी
एंप्लई वो जो है उसको डील कर सकता है
एंप्लॉय इंश्योरेंस कोर्ट। वहीं पे द राइट
ऑफ एनी पर्सन टू एनी बेनिफिट एंड एज टू द
अमाउंट एंड ड्यूरेशन देयर ऑफ अगर इसको
लेकर कि मतलब कि आपको क्या बेनिफिट मिलने
थे या फिर कितना अमाउंट मिलना था या फिर
ड्यूरेशन को लेकर कोई डिस्प्यूट है तो वो
एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट में जा सकता है।
यानी कि एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस एक्ट में
जो भी बेनिफिट्स मिलने हैं उसको लेकर कोई
डिस्प्यूट है या फिर जो कंट्रीब्यूशन को
लेकर कोई डिस्प्यूट हो रहा है तो वो कोर्ट
में एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट में जा सकता
है उसको लेकर। क्लियर? उसके अलावा एनी अदर
मैटर व्हिच इज इन डिस्प्यूट बिटवीन अ
प्रिंसिपल एंप्लयर एंड द कॉरपोरेशन और
बिटवीन अ प्रिंसिपल एंप्लयर एंड एन
इमीडिएट एंप्लयर और बिटवीन अ पर्सन एंड द
कॉरपोरेशन और बिटवीन एन एंप्लई एंड ए
प्रिंसिपल और इमीडिएट एंप्लॉयर। तो अगर
किसी भी वजह से कोई भी ऐसा मैटर जो कि इस
एक्ट में इंक्लूडेड है उसको लेकर
प्रिंसिपल एंप्लयर और कॉरपोरेशन या
प्रिंसिपल एंप्लयर और इमीडिएट एंप्लॉयर और
या फिर इमीडिएट एंप्लॉयर या फिर प्रिंसिपल
एंप्लॉयर और एंप्लई के बीच में डिस्प्यूट
है तो वो जो है एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट
में जाएगा। क्लियर? तो ये सारे मैटर्स हैं
जो कि डील करता है। क्लियर? नेक्स्ट है कि
किस टाइप के क्लेम को लेकर जो है एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट डिसीजन दे सकती है? तो द
फॉलोइंग क्लेम शैल बी डिसाइडेड बाय दी
एंप्लाइजज़ इंश्योरेंस कोर्ट नेमली। पहला
क्या है? क्लेम फॉर द रिकवरी ऑफ़
कंट्रीब्यूशन फ्रॉम द प्रिंसिपल एंप्लयर।
अगर एंप्लयर ने प्रिंसिपल एंप्लॉयर ने
कंट्रीब्यूशन नहीं पे किया है तो उसके लिए
क्लेम ले सकता है। इंप्लुएंस इंश्योरेंस
कोड जो है वो ऑर्डर दे सकता है। क्लेम बाय
अ प्रिंसिपल एंप्लॉयर टू रिकवर
कंट्रीब्यूशन फ्रॉम एनी इमीडिएट एंप्लयर।
तो जो प्रिंसिपल एंप्लॉयर है वो किसी भी
इमीडिएट एंप्लयर से जो है क्लेम कर सकता
है कि उससे वो रिकवर करे जो भी उसको
कंट्रीब्यूशन देना था। क्लेम अंडर सेक्शन
70 फॉर द रिकवरी ऑफ़ द वैल्यू और अमाउंट ऑफ
द बेनिफिट्स रिसीव्ड बाय अ पर्सन व्हेन ही
इज़ नॉट लॉफुल एंटाइटल्ड देयर टू। यानी कि
सपोज़ कि कोई एंप्लई है। उसने जो है वो
बेनिफिट अवेल कर लिया जिसके लिए वह
एलिजिबल नहीं था। तो उसके लिए भी जो है
रिकवरी ले सकता है प्रिंसिपल एंप्लयर और
उसके लिए जो है एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट
ऑर्डर दे सकती है। इफ एनी क्लेम फॉर द
रिकवरी ऑफ़ एनी बेनिफिट एडमिसिबल अंडर दिस
एक्ट तो उसके लिए भी जो है एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट जो है आर्डर दे सकती है।
तो यहां पर कहने का मतलब यह है कि अगर
एंप्लॉयर ने या फिर एंप्लई ने जो
प्रिंसिपल एंप्लयर है उसने जो है
कंट्रीब्यूशन पे नहीं किया तो उसके लिए
क्लेम जो है क्लेम का आर्डर दे सकती है।
अगर किसी ने गलत तरीके से बेनिफिट ले लिया
वो एलिजिबल नहीं था तो उसके लिए जो है उसे
रिकवर करने के लिए जो है आर्डर दे सकती
है। तो ये जो है मेजर दो इंपॉर्टेंट यहां
पर डिसीजन है या फिर क्लेम को लेकर
इंश्योरेंस कोर्ट जो है वो ऑर्डर दे सकती
है। अब बात कर लें कमेंसमेंट ऑफ
प्रोसीडिंग तो 77 सेक्शन में कहा गया है
कि जो प्रोसीडिंग है वो एंप्लॉय
इंश्योरेंस कोर्ट वो जो है जैसे ही उसको
एप्लीकेशन मिलेगा तुरंत प्रोसीडिंग
स्टार्ट हो जाएगी। और एव्री सच एप्लीकेशन
शैल बी मेड विद इन अ पीरियड ऑफ़ थ्री इयर्स
फ्रॉम द डेट ऑन व्हिच द कॉज़ ऑफ़ एक्शन
अरोज़। तो यानी कि जब भी यह कॉज़ हुआ है, जब
भी वह डिस्प्यूट हुआ है, तो उसके 3 साल के
अंदर जो है एप्लीकेशन देना होगा। और जब आप
एप्लीकेशन दोगे तो उसके बाद ही जो है आपकी
प्रोसीडिंग यानी कि केस की सुनवाई होगी।
क्लियर? तो ये सेक्शन 77 में कहा गया। अब
बात कर लें कि पावर ऑफ़ एंप्लाइजज़
इंश्योरेंस कोर्ट। तो कुछ एंप्लाइजज़
इंश्योरेंस कोर्ट को पावर दी गई है जो कि
सेक्शन 78 में कहा गया है कि शैल हैव ऑल
दी पावर ऑफ अ सिविल कोर्ट फॉर द पर्पस ऑफ़
समनिंग एंड इनफोर्सिंग दी अटेंडेंस ऑफ
विटनेस कंपेलिंग द डिस्कवरी एंड प्रोडक्शन
ऑफ़ डॉक्यूमेंट्स एंड मटेरियल ऑब्जेक्ट्स।
एडमिनिस्टरिंग ओथ एंड रिकॉर्डिंग एविडेंस
एंड सच कोर्ट शैल बी डीम्ड टू बी अ सिविल
कोर्ट। तो यानी कि जो एंप्लाइजज़
इंश्योरेंस कोर्ट है वो सिविल कोर्ट के
इक्विवेलेंट माना गया है और उसके पास ये
पावर है कि वो किसी को भी समन भेज सके।
किसी को भी विटनेस के लिए बुला सके। कोई
भी डॉक्यूमेंट है उसको मांगा जा सके कि
डॉक्यूमेंट आप प्रोवाइड करिए। कोई भी जो
है वहां पे ओथ मांगा जा सकता है, लिया जा
सकता है, एविडेंस को रिकॉर्ड किया जा सकता
है। यानी कि सिविल कोर्ट के जैसा उनके पास
पावर रहता है। हालांकि रजिस्ट्रेशनंस के
साथ ये सारे पावर रहते हैं। द एंप्लाइजज़
इंश्योरेंस कोर्ट शैल फॉलो सच प्रोसीजर एज
मे बी प्रिस््राइब्ड बाय रूल्स मेड बाय दी
स्टेट गवर्नमेंट। तो जो भी स्टेट
गवर्नमेंट रूल बनाती है वो एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट को फॉलो करना पड़ेगा।
वहीं पे जो ऑर्डर एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट
देगी उसको जो है इनफोर्सिएबल माना जाएगा।
उसको जो है फॉलो करना पड़ेगा और सिविल
कोर्ट के इक्विवेलेंट माना जाएगा। एंड
ऑर्डर ऑफ द एंप्लाइजज़ कोर्ट शैल बी
इनफोर्सबल एज इफ इट वेयर अ डिग्री पास्ड
इन अ सूट बाय सिविल कोर्ट। यानी कि जिस
तरीके से सिविल कोर्ट जो ऑर्डर देता है वो
इनफोर्सबल होता है उसको फॉलो करना पड़ता
है। उसी तरीके से जब एंप्लई इंश्योरेंस
कोर्ट कोई ऑर्डर देगा तो उसको जो है फॉलो
करना होगा। डिग्री का मतलब होता है एन
ऑफिशियल ऑर्डर गिवेन बाय गवर्नमेंट और
ऑफिशियल यानी किसी पर्सन द्वारा। ठीक है?
अब बात कर लें कि अपील यानी कि अगर जो है
एंप्लॉय इंश्योरेंस कोर्ट ने कोई केस का
ऑर्डर दे दिया। उसने क्लेम का ऑर्डर दे
दिया किसी प्रिंसिपल एंप्लयर को या फिर जो
है एंप्लई के लिए तो उसके अगेंस्ट आप जो
है अपील कर सकते हैं। तो सेक्शन 82 में
कहा गया है कि एन अपील कैन बी मेड टू हाई
कोर्ट फ्रॉम एन ऑर्डर ऑफ एन एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट। तो अगर आप जो है एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट के ऑर्डर से खुश नहीं है
तो आप जो है हाई कोर्ट में अपील कर सकते
हैं। एन अपील अंडर दिस सेक्शन शैल बी 60
डेज। यानी कि आपको 60 दिनों के अंदर जो है
अपील बनाना होगा। एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट
ने जिस दिन आपको आर्डर दिया उस दिन से
आपको 60 दिन के अंदर हाई कोर्ट में अपील
करना होगा। अगर आप जो है एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट के ऑर्डर से खुश नहीं
है। वहीं पे स्टे ऑफ़ पेमेंट पेंडिंग अपील।
तो सेक्शन 83 में कहा गया है कि व्हेयर द
कॉरपोरेशन हैज़ प्रेजेंटेड एन अपील अगेंस्ट
एन ऑर्डर ऑफ़ द एंप्लाइज़ इंश्योरेंस कोर्ट।
यानी कि जब कोई कॉरपोरेशन जो है एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट के आर्डर के अगेंस्ट
अपील किया हो हाई कोर्ट में तो कोर्ट मे
एंड इफ सो डायरेक्टेड बाय हाई कोर्ट शैल
विथोल्ड दी पेमेंट ऑफ एनी सम डायरेक्टेड
टू बी पेड बाय दी ऑर्डर्ड अपील अगेंस्ट।
तो यहां पर कहने का मतलब ये है कि अगर जो
कॉरपोरेशन है उन्होंने एंप्लई इंश्योरेंस
कोर्ट के अगेंस्ट जो है ऑर्डर के अगेंस्ट
हाई कोर्ट में अपील की है तो उस केस में
जो कोर्ट है वो अपने आप से चाहे हाई कोर्ट
के आर्डर से हाई कोर्ट के डायरेक्शन से उस
आर्डर को जो है स्टे कर सकती है यानी कि
रोक सकती है। अब सपोज कि जो एंप्लई
इंश्योरेंस कोर्ट है उन्होंने कह दिया कि
कॉरपोरेशन को ₹1 लाख जो है अगले महीने तक
सबमिट करना है। अब फिर एंप्लई इंश्योरेंस
कोर्ट की इस ऑर्डर के अगेंस्ट जो है
कॉर्पोरेशन हाई कोर्ट में अपील कर देता
है। तो जो 1 महीने के अंदर ₹1 लाख जमा
करना था कॉर्पोरेशन को उस पे स्टे लगाया
जा सकता है। यानी कि अब उसने अपील कर दिया
हाई कोर्ट में तो जो कोर्ट है या फिर हाई
कोर्ट के डायरेक्शन पे ₹1 लाख जो 1 महीने
के अंदर जमा करना था वो रुक जाएगा। यानी
कि अभी आपको ₹1 लाख जमा करने की जरूरत
नहीं है। जब हाई कोर्ट में सुनवाई हो
जाएगी उसके बाद जो फाइनल डिसीजन आएगा उसके
बाद फिर आपको जो है उसके अकॉर्डिंग वहां
पर एक्टिविटी परफॉर्म करनी पड़ेगी।
क्लियर? तो ये जो है एंप्लई स्टेट
इंश्योरेंस एक्ट के से जो है कुछ
इंपॉर्टेंट सेक्शंस थे। एजुडिकेशन ऑफ
डिस्प्यूट एंड क्लेम से। तो यहां पर क्या
होता है कि जब भी इस एक्ट के तहत जो भी
चीजें डील होती हैं उससे रिलेटेड जब
डिस्प्यूट्स होते हैं एंप्लयर ने
कंट्रीब्यूशन नहीं दिया या फिर कोई अदर जो
है बेनिफिट को लेकर या फिर अमाउंट को लेकर
डिस्प्यूट होता है तो उसके लिए जो स्टेट
गवर्नमेंट है वो एंप्लई इंश्योरेंस कोड जो
है सेक्शन 74 के तहत जो है बनाती है।
उसमें जो है एक जज होता है। वो जुडिशियल
ऑफिसर या फिर लीगल प्रैक्टिशनर हो सकता है
जिसके पास 5 साल का एक्सपीरियंस हो। वहीं
पे कुछ सेक्शन 75 में कौन-कौन से मैटर डील
किए जाएंगे एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट में
उसके बारे में बताया गया। क्लियर? उसके
बाद फिर क्या-क्या क्लेम से रिलेटेड
डिसीजन ले सकती है एंप्लई इंश्योर कोर्ट
उसके बारे में बताया गया। सेक्शन 75 में
ही सेक्शन 77 में बताया गया कि कमेंसमेंट
ऑफ प्रोसीडिंग। तो जब एप्लीकेशन मिलेगा
तभी प्रोसीडिंग स्टार्ट होगी और
डिस्प्यूट्स होने से 3 साल के अंदर ही जो
है वहां पर एप्लीकेशन देना होता है। उसके
बाद फिर इंप्लांसेस कोर्ट की पावर्स के
बारे में बताया गया सेक्शन 78 में। तो
वहां पर एक सिविल कोर्ट की जो पावर होती
है वही पावर एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट को
भी रहेगी वहां पर क्लियर। वहीं पे उसके
बाद अगर आप एंप्लई इंश्योरेंस कोर्ट के
ऑर्डर से नाखुश हैं तो सेक्शन 82 के तहत
आप जो है हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं
60 डेज के अंदर। और सेक्शन 83 में बताया
गया है कि अगर आप हाई कोर्ट में अपील करते
हैं तो उस केस में जो कोर्ट ने ऑर्डर दिया
है या फिर हाई कोर्ट के डायरेक्शन के
बेसिस पे जो भी ऑर्डर रहा होगा क्लेम को
रिकवर करने के लिए उस पे जो है स्टे लगाया
जा सकता है। एंप्लाइजज़ स्टेट इंश्योरेंस
एक्ट 1948 के चैप्टर से में पेनल्टीज के
बारे में बताया गया है। तो पेनल्टीज़ क्या
है? कि जब भी कोई एंप्लयर या फिर एंप्लई
कोई ऑफेंस करता है इस एक्ट के तहत तो उसके
ऊपर पेनल्टीज लगाया जाता है। यानी कि उसको
जेल भेज दिया जाएगा या फिर उसके ऊपर फाइन
लगा दिया जाएगा या फिर दोनों ही उसके ऊपर
पेनल्टीज लगाई जा सकती है। यानी कि उसको
जेल के साथ-साथ फाइन भी देना पड़ेगा। तो
एंप्लयर क्या होता है? एंप्लयर को जो है
कई बार कंट्रीब्यूशन जो है पे करना पड़ता
है इस एक्ट के तहत एंप्लयर को। तो एंप्लई
के वेजेस से जो है एंप्लयर अपना
कंट्रीब्यूशन का हिस्सा भी डिटेक्ट कर ले
रहा है या फिर एंप्लई का कोई बेनिफिट है
वो एंप्लयर उसको नहीं प्रोवाइड कर रहा है
या फिर एंप्लयर जो है कोई फॉल्स स्टेटमेंट
दे रहा है या फिर जो इंस्पेक्टर्स होते
हैं उनको जो है ऑफसेट कर रहा है। उनको
एक्टिविटीज़ परफॉर्म नहीं करने दे रहा है
उनको। तो इस केस में क्या होता है कि उनके
ऊपर पेनल्टीज़ लगा दी जाती हैं। तो सबसे
पहले बात करेंगे पनिशमेंट फॉर फॉल्स
स्टेटमेंट अकॉर्डिंग टू सेक्शन 84 ऑफ़ दिस
एक्ट। तो हु एवर नोइंगली मेक्स और कॉजेस
टू बी मेड एनी फॉल्स स्टेटमेंट और फॉल्स
रिप्रेजेंटेशन। यानी कि कोई भी जानबूझकर
अगर कोई फॉल्स स्टेटमेंट या फिर फॉल्स
रिप्रेजेंटेशन करता है। फॉर द पर्पस ऑफ़
कॉजिंग एनी इंक्रीज़ इन पेमेंट और बेनिफिट
अंडर दिस एक्ट। यानी कि ज्यादा बेनिफिट
पाने के लिए जो है फॉल्स स्टेटमेंट दिखा
रहा है। और फॉर द पर्पस ऑफ़ कॉजिंग एनी
पेमेंट और बेनिफिट टू बी मेड व्हेयर नो
पेमेंट और बेनिफिट इज़ अथराइज़्ड। यानी कि
जहां पे कोई पेमेंट नहीं होना था या फिर
कोई बेनिफिट नहीं मिलना था। वहां पे भी
आपको जो है पेमेंट या फिर बेनिफिट ले लिया
आपने फॉल्स स्टेटमेंट की वजह से या फिर
फॉर द पर्पस ऑफ़ अवॉयडिंग एनी पेमेंट टू बी
मेड बाय हिमसेल्फ अंडर दिस एक्ट और
इनेबलिंग एनी अदर पर्सन टू अवॉयड एनी सच
पेमेंट यानी कि आपको कोई पेमेंट करना था
लेकिन आपने फॉल्स स्टेटमेंट या फिर फॉल्स
रिप्रेजेंटेशन करके आपने पेमेंट नहीं किया
या फिर किसी और को पेमेंट करने से रोक
दिया तो इस केस में क्या है ये पनिशमेंट
ये जो है ऑफेंस बनेगा और ऑफेंस बनेगा तो
इसमें आपको क्या मिलेगा पनिशमेंट मिलेगी
क्या पनिशमेंट मिलेगी कि अगर आप जो है शैल
बी पनिशिबल विद इंप्रज़मेंट फॉर अ टर्म
व्हिच मे एक्सटेंड टू सिक्स मंथ और विद
फाइन नॉट एक्सीडिंग ₹2000 और विद बोथ।
यानी कि अगर आपने फॉल्स रिप्रेजेंटेशन या
फिर फॉल्स जो है वहां पर इंफॉर्मेशन देते
हो और उसके बेसिस पे या तो आपको पेमेंट
करना था पेमेंट नहीं किया। आपको जो है
एक्स्ट्रा बेनिफिट ले लेते हो फॉल्स
स्टेटमेंट के बेसिस पे। तो उस केस में
आपको 6 महीने की जेल, 6 महीने तक की जेल
या फिर आपको जो है ₹2000 तक का फाइन या
फिर दोनों ही आपके ऊपर लगाया जा सकता है।
क्लियर? व्हेयर एन इंश्यर्ड पर्सन इज
कन्विक्टेड। अगर कोई इंश्यर्ड पर्सन है वो
उसको जो है सजा मिलती है या फिर उसने जो
है ऑफेंस किया है तो उस केस में ही शैल
नॉट बी एंटाइटल्ड फॉर एनी कैश बेनिफिट
अंडर दिस एक्ट। तो उसको क्या मिलेगा कि
अगर वो इंश्यर्ड पर्सन है तो उसको कोई भी
बेनिफिट कैश बेनिफिट नहीं मिलेगा इस एक्ट
के तहत। फॉर सच अ पीरियड एज मे बी प्री
प्रिस्क्राइब बाय द सेंट्रल गवर्नमेंट। तो
जो भी पीरियड बताया जाएगा सेंट्रल
गवर्नमेंट की तरफ से उस पीरियड तक जो है
उसको कैश बेनिफिट नहीं मिलेगा अगर वो
कन्विक्टेड होता है तो यानी कि उसने ऑफेंस
किया है तो फॉल्स स्टेटमेंट देकर जो है
कोई चीज उसने सर्विस अवेल की है। क्लियर?
तो अगर फॉल्स स्टेटमेंट देकर आप जो है
पेमेंट बढ़ा देते हो, बेनिफिट बढ़ा देते
हो या फिर आपको पेमेंट करना था, आप पेमेंट
नहीं करते हो, पेमेंट करने से बच जाते हो
तो उस केस में 6 महीने तक की जेल प्लस
₹2000 तक का फाइन या फिर दोनों दोनों में
से कोई एक या फिर दोनों ही आपके ऊपर लगाया
जा सकता है। और अगर पर्सन इंश्यर्ड है तो
उस केस में उसको कैश बेनिफिट नहीं मिलेगा।
क्लियर? अब बात आती है पनिशमेंट फॉर फेलोर
टू पे कंट्रीब्यूशन। अगर जो है एंप्लयर जो
है वो कंट्रीब्यूशन को पे नहीं करता है तो
सेक्शन 85 में बताया गया है कि अगर
कंट्रीब्यूशन पे नहीं करता है या फिर कुछ
और चीजें हैं अगर वो वो सारी एक्टिविटीज
परफॉर्म करता है तो उसके वो ऑफेंस माना
जाएगा और उसके ऊपर पेनल्टीज लगाई जाएंगी।
इफ एनी पर्सन फेस टू पे एनी कंट्रीब्यूशन
व्हिच अंडर दिस एक्ट ही इज़ लायबल टू पे।
तो अगर कोई भी पर्सन जो है वो
कंट्रीब्यूशन पे नहीं करता है इस एक्ट के
तहत जो उसको पे करना चाहिए था तो वो जो है
ऑफेंस में आएगा। डिडक्ट्स और अटेम्प्ट्स
टू डिडक्ट फ्रॉम द वेजेस ऑफ़ एन एंप्लई द
होल और एनी पार्ट ऑफ़ द एंप्लयर
कंट्रीब्यूशन। यानी कि उस पर्सन ने क्या
किया कि जो एंप्लॉयर का कंट्रीब्यूशन था
उसको भी एंप्लई के वेजेस से डिडक्ट कर
लिया। चाहे पूरा चाहे थोड़ा। तो, यह भी
क्या है? ऑफेंस है। अब एंप्लयर का
कंट्रीब्यूशन एंप्लयर खुद देगा। एंप्लॉय
के वजह से नहीं काटना चाहिए। इन
कंट्रावेंशन ऑफ़ सेक्शन 72 रिड्यूस दी
वेजेस और एनी बेनिफिट एडमिसिबल टू एन
एंप्लई। यानी कि एंप्लई को कोई वेजेज़ या
फिर बेनिफिट मिलना था सेक्शन 72 के
अकॉर्डिंग लेकिन उस उसके बेनिफिट को उसने
रिड्यूस कर दिया। तो वो भी ऑफेंस है। य पे
डी में बताया गया है कि इन कंट्रावेंशन ऑफ़
सेक्शन 73 और एनी रेगुलेशन डिसमिसेस,
डिस्चार्ज, रिड्यूसेस और अदरवाइज़ पनिशेस
एन एंप्लॉय। किसी एंप्लई को पनिश कर रहा
है, डिसमिस कर रहा है, डिस्चार्ज कर दे
रहा है। सेक्शन 73 में जो ऐसा नहीं करना
चाहिए था तो वो भी ऑफेंस होगा। फेल्स और
रिफ्यूज टू सबमिट एनी रिटर्न रिक्वायर्ड
बाय द रेगुलेशंस और मेक ए फॉल्स रिटर्न।
यानी कि जो पर्सन है वो फॉल्स रिटर्न पे
कर रहा है या फिर रिटर्न नहीं पे करता है।
रिटर्न को करने से रिफ्यूज करता है सबमिट
करने से। तो उस केस में भी क्या है? ये
ऑफेंस बनेगा। ऑब्स्ट्रक्ट एनी इंस्पेक्टर
और अदर ऑफिशियल ऑफ द कॉरपोरेशन इन द
डिस्चार्ज ऑफिस ड्यूटीज़। यानी कि जो भी
इंस्पेक्टर हैं या फिर जो ऑफिशियल
कॉरपोरेशन है ऑफिशियल पर्सन है उस
कॉरपोरेशन के उनको उनकी एक्टिविटीज करने
से रोकता है। उनकी ड्यूटीज परफॉर्म करने
से रोकता है। या इज़ गिल्टी ऑफ़ एनी
कंट्रावेंशन ऑफ और नॉन कॉम्प्लंस विद एनी
ऑफ़ द रिक्वायरमेंट ऑफ दिस एक्ट और द रूल
ऑफ द रेगुलेशन इन रिस्पेक्ट ऑफ व्हिच नो
स्पेशल पेनल्टी इज़ प्रोवाइडेड। यानी कि
कोई ऐसा इस एक्ट के तहत कोई ऐसी पॉइंट
जिसका जो है एंप्लयर ने या फिर किसी पर्सन
ने कॉन्ट्रावेंट किया है या फिर उसको
कॉम्प्लेंस नहीं किया है नॉन कॉम्प्लेंस
किया है और जिसके बारे में यहां पर
पेनल्टी के बारे में नहीं बताया गया है तो
वो भी इसमें सेक्शन 85 में इंक्लूड हो
जाएगा। तो सेक्शन 85 में कंट्रीब्यूशन पे
नहीं किया वो तो आएगा ही। साथ ही साथ जो
बी, सी, डी, ई, एफ और जी हैं यह भी अगर
एक्टिविटीज़ परफॉर्म कर रहा है तो ऑफेंस
माना जाएगा और जो है उसके ऊपर पेनल्टी
लगेगा। तो यहां पर ए के लिए जो फ्रेज़ टू
पे एनी कंट्रीब्यूशन व्हिच इज़ अंडर दिस
एक्ट ही इज़ लायबल टू पे। यानी कि इस एक्ट
के अंदर उसको पे करना था लेकिन वो जो है
पे नहीं करता है अपने कंट्रीब्यूशन को। तो
उसके लिए अलग ऑफेंस है। बाकी बी, सी, डी,
ई, एफ, जी के लिए अलग ऑफेंसेस हैं। तो
यहां पर क्या है? शैल बी पनिशेबल ऑफेंस
अंडर क्लॉज़ ए यानी कि ए वाला अगर वो नहीं
परफॉर्म करता है, ए वाला ऑफेंस करता है,
तो उस केस में क्या पेनल्टीज़ होगी उसको?
तो विद इंप्रज़मेंट फॉर अ टर्म व्हिच मे
एक्सटेंड टू 3 इयर्स। यानी कि 3 साल तक की
सजा उसको जेल हो सकती है। बट व्हिच शैल
नॉट बी लेस देन वन ईयर इन केस ऑफ़ फेलोर टू
पे दी एंप्लाइजज़ कंट्रीब्यूशन व्हिच हैज़
बीन डिडक्टेड बाय हिम फ्रॉम द एंप्लाइजज़
वेज़ एंड शैल आल्सो बी लायबल टू फाइंड ऑफ़
₹10,000। यानी कि 23 साल तक की मैक्सिमम
सजा तो होगी। लेकिन एंप्लई को
कंट्रीब्यूशन नहीं पे किया और एंप्लई के
वेस्ट से उसको डिडक्ट भी कर लिया। एंप्लई
के वेस्ट से जो एंप्लई का कंट्रीब्यूशन था
उसके वेज से डिडक्ट कर लिया। लेकिन
एंप्लयर ने एंप्लॉयज़ की कंट्रीब्यूशन को
पे नहीं किया। तो उस केस में कम से कम एक
साल तक की सजा तो होगी उसको जेल होगी और
प्लस ₹10,000 का फाइन भी लगेगा। तो
क्लियर? तो यहां पे ये है कि मैक्सिमम 3
साल तक की सजा होगी अगर वो ए वाला ऑफेंस
करता है। ठीक है? मैक्सिमम 3 साल तक की।
लेकिन एंप्लई का कंट्रीब्यूशन उसने पे
नहीं किया और एंप्लई की वजह से डिडक्ट कर
लिया तो उस केस में कम से कम एक साल तक की
सजा तो होनी ही होनी है उसको और प्लस
₹10,000 का फाइन लगेगा। वहीं पे दूसरा है
व्हिच शैल नॉट बी लेस देन सिक्स मंथ इन
एनी अदर केस एंड शैल आल्सो बी लायबल टू
फाइन ऑफ़ ₹5000।
इसके अलावा अगर जो है किसी वजह से वो
कंट्रीब्यूशन को पे नहीं करता है तो उसको
कम से कम 6 महीने की जेल होगी और प्लस जो
है वहां पर ₹5,000 का उसके ऊपर फाइन
लगेगा। क्लियर? तो ये क्लॉज़ ए के लिए यानी
कि ए वाला ऑफेंस करता है। तो बाकी जो बी
से लेके जी तक थे अगर वह वाला ऑफेंस करता
है कोई भी पर्सन तो वहां पर उसको क्या
होगा? वन ईयर और बोथ फाइन व्हिच मे
एक्सटेंड टू ₹4000 और विद बोथ। यानी कि उस
केस में उसको एक साल तक की जेल होगी। प्लस
क्या होगा? उसको जो है ₹4000 का फाइन भी
देना पड़ेगा या फिर दोनों ही लगेगा उसको।
क्लियर? तो या तो एक साल की ज्यादा या तो
₹4000 या तो दोनों ही उसके ऊपर पेनल्टीज
लगाए जा सकते हैं। अगर वो क्लॉज़ बी से जी
तक के ऑफेंस को करता है। ए वाला ऑफेंस
करेगा तो 3 साल तक की मैक्सिमम सजा है।
₹100 ₹10,000 तक का फाइन है। अगर एंप्लई
के वजह से काट लिया और एंप्लॉयर की
कंट्रीब्यूशन को पे नहीं किया और वहीं पे
अगर कोई अदरवाइज से जो है उसने पे नहीं
किया तो उस केस में ₹5,000 का फाइन प्लस 6
महीने की जेल उसको होगी। क्लियर? वहीं पे
बी से जी तक के ऑफेंस को करता है तो 1 साल
तक की सजा या फिर ₹4000 तक का फाइन या फिर
दोनों ही उसके ऊपर लगाए जा सकते हैं। अब
सपोज कि आप जो है जो पर्सन है वो अपनी
गलती बार-बार दोहरा रहा है। बार-बार कर
रहा है। पहली बार गलती की थी उसको सजा मिल
गई। उसके बाद फिर से उसने वही गलती कर दी।
तो एनहांस्ड पनिशमेंट इन सर्टेन केसेस
आफ्टर प्रीवियस कन्वेक्शन। यानी कि आपने
पहले गलती की थी उसके बाद फिर से जो है आप
गलती कर रहे हो। तो 85 ए में उसके बारे
में कहा गया। क्या कहा गया? हु एवर कमिट्स
द सेम ऑफेंस शैल फॉर एव्री सच सबसीक्वेंट
ऑफेंस बी पनिशेबल विद इंप्रज़मेंट फॉर अ
टर्म व्हिच मे एक्सटेंड टू 2 इयर्स एंड
विद फाइन ऑफ़ ₹5000 यानी कि पहले आपने गलती
की आपको सजा मिल गई उसके बाद फिर आप गलती
करते हो। तो उस केस में आपको जो है 2 साल
तक की सजा और प्लस यहां पर ₹5,000 का फाइन
भी आपको देना पड़ेगा। क्लियर? यहां पे एक
चीज़ कंडीशन है प्रोवाइडेड दैट व्हेयर सच
सब्सिक्वेंट ऑफेंसेस इज़ फॉर फेलर बाय द
एंप्लॉयड टू पे एनी कंट्रीब्यूशन व्हिच
अंडर दिस एक्ट ही इज़ लायबल टू पे ही शैल
फॉर एव्री सच सच सबसीक्वेंट ऑफेंस बी
पनिशेबल विद इंप्रिजमेंट फॉर अटम व्हिच मे
एक्सटेंड टू फाइव इयर्स बट व्हिच शैल नॉट
बी लेस देन टू इयर्स एंड शैल आल्सो बी
लायबल टू फाइन ऑफ ₹25000
तो यहां पर क्या है कि जो अभी आपने पीछे
देखा कि क्लॉज़ ए वाला तो यहां पर क्लॉज़ ए
में जो ऑफेंस था कि अगर जो है वो एंप्लयर
जो है कंट्रीब्यूशन को पे नहीं करता है तो
उसको जो है पनिशमेंट मिलेगी। तो अगर पहली
बार करता है तो उसके हिसाब से उसको जो है
3 साल से मिनिमम 1 साल से 3 साल तक का
वहां पे उसको जेल हो जाएगा। प्लस जो फाइन
था वो देना पड़ेगा। लेकिन अगर दोबारा से
वही गलती करता है कि एंप्लॉयर जो है वो
अपना कंट्रीब्यूशन या फिर एंप्लई का
कंट्रीब्यूशन पे नहीं करता है। अगर दूसरी
बार, तीसरी बार, चौथी बार भी यही गलती
करता है तो उस केस में उसको कम से कम 2
साल से 5 साल तक की सजा मिलेगी और वहीं पे
उसके ऊपर ₹25,000 का फाइन भी लगाया जाएगा।
क्लियर? बाकी बी से जी के जो ऑफेंसेस हैं
उस केस में क्या है कि 2 साल तक की सजा और
प्लस आपको ₹5,000 का फाइन देना पड़ेगा।
लेकिन अगर क्लॉज़ ए वाला आप जो है ऑफेंस
करते हैं कंट्रीब्यूशन पे नहीं करते हैं
तो उस केस में आपको अगर मतलब ये गलती पहली
बार गलती कर दी थी उसको सजा मिल गई दूसरी
तीसरी चौथी बार गलती करते हैं तो उस केस
में 2 से 5 साल तक की सजा प्लस ₹25000 का
फाइन लगेगा तो ये जो है इंपॉर्टेंट सेक्शन
थे क्लॉज़ थे एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस एक्ट
1948 के पेनल्टीज़ के तहत देखिए नाम में ही
क्लियर है कि चाइल्ड लेबर प्रोहिबिशन
रेगुलेशन यानी कि क्या होता है कि कई सारे
ऐसे इंडस्ट्रीज होती हैं ऐसे ऑर्गेनाइजेशन
होते हैं जहां पे चिल्ड्रन का यूज़ नहीं
किया जा सकते हैं। वहां से उनसे उनसे वर्क
नहीं करवाया जा सकता है। वहीं पे कुछ ऐसी
इंडस्ट्रीज़ होते हैं, कुछ ऐसे
ऑर्गेनाइज़ेशन होते हैं जहां पे चिल्ड्रन
को चिल्ड्रन से जॉब करवाया जा सकता है।
लेकिन उनको रेगुलेट करने की जरूरत है।
उनको यह डिसाइड करने की जरूरत है कि वो
कैसे वर्किंग कंडीशन क्या होगी। तो
कहां-कहां पे उनसे जॉब नहीं करवाया जा
सकता और कहां-कहां पे जॉब करवाया जा सकता?
तो किस तरीके से जॉब करवाया जा सकता है।
इसी को मॉनिटर करने के लिए इसी को जो है
रेगुलाइज करने के लिए जो है ये एक्ट आया
है चाइल्ड लेबर प्रोहिबिशन एंड रेगुलेशन
एक्ट 1986। तो एन एक्ट टू प्रोबिट द
एंगेजमेंट ऑफ चिल्ड्रन इन सर्टेन
एंप्लॉयमेंट एंड टू रेगुलेट कंडीशन ऑफ
वर्क ऑफ चिल्ड्रन इन सर्टेन अदर
एंप्लॉयमेंट। यानी कि कुछ एंप्लॉयमेंट में
चिल्ड्रन को जो है एंगेज करने से रोकना और
कुछ एंप्लॉयमेंट में चिल्ड्रन अगर एंगेज
हैं तो उसमें जो है वर्किंग कंडीशन कैसी
होनी चाहिए उसको रेगुलेट करना ही इस एक्ट
का जो है काम है। चाइल्ड मींस ए पर्सन हु
हैज़ नॉट कंप्लीटेड हिज 14th ईयर ऑफ़ एज। तो
चाइल्ड आप किसे कहेंगे इस लॉ के
अकॉर्डिंग? इस साइड के अकॉर्डिंग चाइल्ड
वो हो गया जिसने 14 ईयर की ऐज जो है
कंप्लीट नहीं की है। तो वो चाइल्ड
कहलाएगा। तो बट ऑब्वियस सी बात है कि 14
इयर्स का जो है ऐज कंप्लीट नहीं की है तो
वो चाइल्ड आएगा। और कई सारे ऐसे
एंगेजमेंट्स होते हैं। कई सारे ऐसे
एंप्लॉयमेंट्स होते हैं जहां पे उनसे जो
है वर्क नहीं करवाया जा सकता। उनको जॉब पे
नहीं रखा जा सकता। तो इस एक्ट का
ऑब्जेक्टिव क्या है? बैन द एंप्लॉयमेंट ऑफ़
चिल्ड्रन। सबसे इंपॉर्टेंट चीज़ कि
एंप्लॉयमेंट ऑफ़ चिल्ड्रन को बैन करना है।
यानी कि दोज़ हु हैव नॉट कंप्लीटेड देयर
14थ ईयर इन स्पेसिफाइड ऑक्युपेशन एंड
प्रोसेस। यानी कि इस एक्ट में कुछ
ऑक्यूपेशन है, कुछ प्रोसेससेस हैं, कुछ
जॉब हैं जो कि स्पेसिफाई किया गया है,
बताया गया है कि वहां पे चिल्ड्रन को जॉब
नहीं दिया जा सकता। वहां पे उनको
एंप्लॉयमेंट नहीं दी जा सकती है। जो 14
इयर्स से नीचे हैं उनको तो उसको जो है बैन
करना। नेक्स्ट है ले डाउन ए प्रोसीजर टू
डिसाइड मॉडिफिकेशन टू द शेड्यूल ऑफ बैंड
ऑक्यूपेशन और प्रोसीजर प्रोसेस। तो यहां
पे क्या है कि दूसरा ऑब्जेक्टिव ये है कि
जो बैंड ऑक्यूपेशन और प्रोसेस है जहां पे
चिल्ड्रन को हम एंप्लॉयमेंट नहीं दे सकते
हैं। उसके ऊपर रिगार्डिंग जो है
मॉडिफिकेशन अगर उसमें कुछ करना है तो उसको
जो है ले डाउन करना। रेगुलेट दी कंडीशन ऑफ
वर्क ऑफ़ चिल्ड्रन इन एंप्लॉयमेंट व्हेयर
दे आर नॉट प्रोबिटेड फ्रॉम वर्किंग। कुछ
ऐसे भी एरिया होते हैं ऐसे जॉब्स होते हैं
जहां पे चिल्ड्रन को वर्क करने से नहीं
रोका गया है। तो, वहां पे क्या कंडीशन
होनी चाहिए, वर्क कंडीशन क्या होनी चाहिए?
उसको जो है रेगुलेट करना भी ऑब्जेक्टिव
है। ले डाउन एनहांस पेनल्टीज फॉर
एंप्लॉयमेंट ऑफ चिल्ड्रन इन वायलेशन ऑफ द
प्रोविजन ऑफ दिस एक्ट एंड अदर एक्ट व्हिच
फॉरबिट द एंप्लॉयमेंट ऑफ चिल्ड्रन। तो
यहां पे क्या है कि ये जो है जो पेनल्टीज
होती है एंप्लॉयमेंट के ऊपर कि आप अगर
चिल्ड्रन को एंप्लॉयमेंट दे रहे हो अपने
यहां पे और वायलेशन करके यानी कि चाइल्ड
लेबर का जो एक्ट है या फिर कोई दूसरा एक्ट
है उसको वायलेट करके आप चिल्ड्रन से
एंप्लॉयमेंट दे रहे हो जिसमें अलाउड नहीं
है। तो उसके अगेंस्ट आपके ऊपर पेनल्टीज़
लगाई जाएगी। तो उसको भी ले डाउन करता है
यह एक्ट चाइल्ड लेबर प्रोविजन एंड
रेगुलेशन एक्ट 1986 एंड लास्ट टू ऑब्टेन
यूनिफॉर्मिटी इन द डेफिनेशन ऑफ़ चाइल्ड इन
द रिलेटेड लॉ। और सबसे इंपॉर्टेंट चीज़ कि
एक यूनिफॉर्मिटी होते है। कहीं पे 14 ईयर
से नीचे जो होते हैं उनको चिल्ड्रन माना
जाता है। कहीं पे 15 इयर्स से नीचे होते
हैं उनको चिल्ड्रन माना जाता है। तो यहां
पे एक यूनिफॉर्म ले यूनिफिटी लाने के लिए
ये एक्ट लाया गया है। जहां पे अब ये है कि
जो चिल्ड्रन है वो 14 इयर्स से नीचे हैं
तो उनको चिल्ड्रन माना जाएगा। और वो कौन
से जॉब में एंप्लॉयमेंट कर सकते हैं, कौन
से जॉब में वो कौन से एंप्लॉयमेंट में जो
है वो जॉब पा सकते हैं और कौन से
एंप्लॉयमेंट में कौन जॉब नहीं कर सकते
उसके बारे में यहां पे भी बताया गया है।
नेक्स्ट है चाइल्ड लेवल प्रोविज़ रेगुलेशन
एक्ट में सेक्शन थ्री है प्रोविजन ऑफ
एंप्लॉयमेंट ऑफ चिल्ड्रन इन सर्टेन
ऑक्यूपेशन एंड प्रोसेस। तो ये प्रोविज़न है
कि यानी कि कुछ एंप्लॉयमेंट कुछ ऑक्यूपेशन
कुछ प्रोसेस ऐसे हैं जहां पे चिल्ड्रन का
यूज़ नहीं किया जा सकता। उनसे वर्क नहीं
लिया जा सकता। नो चाइल्ड शैल बी एंप्लॉयड
और परमिटेड टू वर्क इन एनी ऑफ द ऑक्युपेशन
मेंशंड इन दी पार्ट ए ऑफ द शेड्यूल और इन
एनी वर्कशॉप वेयर इन एनी ऑफ द प्रोसेस दैट
फोर्थ इन पार्ट बी ऑफ़ द शेड्यूल इज़ कैरिड
ऑन। तो सेक्शन थ्री में ये चीज़ बताया गया
है कि इस एक्ट में जो शेड्यूल है उस
शेड्यूल में पार्ट ए और पार्ट बी में दो
पार्ट में डिवाइड किया है। पार्ट ए में जो
है कुछ ऑक्यूपेशन है। और पार्ट बी में कुछ
प्रोसेस है। जहां पे चिल्ड्रंस को आप जो
है ऑक्यूपाई ऑक्यूपाइड या एंप्लॉयमेंट
नहीं दे सकते हैं। एज़ पर सेक्शन थ्री। द
प्रोविज़न ऑफ़ एंप्लॉयमेंट ऑफ़ चिल्ड्रन इज़
नॉट एप्लीकेबल टु एनी वर्कशॉप व्हेयर इन
एनी प्रोसेस इज़ कैरिड ऑन बाय द ऑक्युपायर
विद द एड ऑफ़ हज़ फैमिली और टु एनी स्कूल
एस्टैब्लिश्ड बाय और रिसीविंग असिस्टेंस
और रिकॉग्निशन फ्रॉम गवर्नमेंट। तो यहां
पे एक चीज़ और इंपॉर्टेंट है कि यहां पे ये
भी बताया गया है कि वहां ये प्रोविज़न वहां
पे नहीं लगेगा जहां पे बच्चों के साथ उनके
पेरेंट्स भी हैं या फिर रिकॉग्नाइज्ड है
गवर्नमेंट द्वारा। तो वहां पे जो है ये
एक्ट जो है वो एप्लीकेबल नहीं होगा। ये
सेक्शन थ्री है। नेक्स्ट है पावर टू अमेंड
द शेड्यूल। यहां पे सेक्शन फोर में पावर
दी गई है इस शेड्यूल को अमेंड करने की।
यानी कि यह जो शेड्यूल है जहां पे
ऑक्युपेशन का जो कौन-कौन से ऑक्युपेशन है
और कौन से प्रोसेस है जहां पे चिल्ड्रन को
एंप्लॉयमेंट नहीं दिया जा सकता उसको अमेंड
कौन कर सकता है? तो उसको अमेंड सिर्फ और
सिर्फ ऑफिशियल गैजेट द्वारा सेंट्रल
गवर्नमेंट जो है वह कर सकती है। तो द
सेंट्रल गवर्नमेंट आफ्टर गिविंग बाई
नोटिफिकेशन इन दी ऑफिशियल गैजेट नॉट लेस
देन थ्री मंथ नोटिस ऑफ इट्स इंटेंस सो टू
डू। यानी कि अगर सेंट्रल गवर्नमेंट करना
चाह रही है उसमें अमेंडमेंट, तो 3 महीने
पहले उसको नोटिस भी देना होगा। उसके बाद
जो है उसको अमेंडमेंट कर सकती है ऑफिशियल
गैजेट के थ्रू। तो सिर्फ सेंट्रल
गवर्नमेंट जो है इसको अमेंड कर सकती है और
कोई नहीं कर सकता ऑक्यूपेशन और प्रोसेस को
जहां पे चिल्ड्रन को एंप्लॉयमेंट नहीं
दिया जा सकता है। नेक्स्ट जो टॉपिक है
सेक्शन फाइव चाइल्ड लेबर टेक्निकल
एडवाइज़री कमिटी। तो यहां पे क्या है? इस
एक्ट में यह भी बताया गया है कि सेंट्रल
गवर्नमेंट द्वारा चाइल्ड लेबर टेक्निकल
एडवाइज़री कमिटी भी जो है सेटअप करना
चाहिए जो कि वह रेगुलर गवर्नमेंट को
सजेशंस देगी। तो सेक्शन फाइव के सब सेक्शन
वन में क्या है? कि द सेंट्रल गवर्नमेंट
मे बाय नोटिफिकेशन इन द ऑफिशियल गैजेट
कंस्टीट्यूट एन एडवाइज़री कमिटी टू बी
कॉल्ड द चाइल्ड लेबर टेक्निकल एडवाइज़री
कमिटी टू एडवाइस दी सेंट्रल गवर्नमेंट फॉर
द पर्पस ऑफ़ एडिशन टू ऑक्यूपेशन एंड
प्रोसेस टू द शेड्यूल। तो जो शेड्यूल है
इस एक्ट में उसमें और ऑक्यूपेशन या
प्रोसेस को ऐड ऑन करना या फिर उसमें से
रिमूव करना। उसके लिए सजेशन देने के लिए
जो सेंट्रल गवर्नमेंट है वो ऑफिशियल गैजेट
रिलीज़ करके चाइल्ड लेबर टेक्निकल एडवाइज़री
कमिटी सेटअप कर सकती है। जो कि वो क्या
करेगी? एडवाइस करेगी सेंट्रल गवर्नमेंट
को। नेक्स्ट है द कमिटी शैल कंसिस्ट ए
चेयरमैन एंड सच अदर मेंबर नॉट एक्सीडिंग
10 एज मे बी अपॉइंटेड बाय द सेंट्रल
गवर्नमेंट। तो सेंट्रल गवर्नमेंट जो है इस
कमिटी में एक चेयरमैन और 10 मेंबर जो हैं
इंक्लूड कर सकते हैं रिक्रूट कर सकते हैं
इसमें। नेक्स्ट है चाइल्ड लेबर प्रोविजन
रेगुलेशन एक्ट 1986 में आवर्स एंड पीरियड
ऑफ़ वर्क। सेक्शन सेवन। तो यहां पे क्या
कहा गया है? नो चाइल्ड शैल बी रिक्वायर्ड
टू परमिटेड टू वर्क इन एनी एस्टैब्लिशमेंट
इन एक्सेस ऑफ़ सच नंबर ऑफ़ आवर्स एज़ मे बी
प्रिस्क्राइब्ड फॉर सच एस्टैब्लिशमेंट और
क्लास ऑफ़ एस्टैब्लिशमेंट। यानी कि जो भी
सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा जो भी
प्रिस्क्राइब्ड होगा वर्किंग आवर उससे
ज्यादा वर्क जो है आप किसी भी
एस्टैब्लिशमेंट में नहीं ले सकते हो उस
चिल्ड्रन से। द पीरियड ऑफ़ वर्क ऑन इच डे
शैल बी सो फिक्स्ड दैट नो पीरियड शैल
एक्सीड थ्री आवर्स एंड दैट नो चाइल्ड शैल
वर्क फॉर मोर देन थ्री आवर्स बिफोर ही हैज़
ऐड हैड एन इंटरवेल फॉर रेस्ट ऑफ़ एट लीस्ट
वन ऑवर। तो यहां पे ये चीज कही गई है कि
ऐसी जगह पे जहां पे चिल्ड्रन को
एंप्लॉयमेंट देने से प्रोहिबिशन नहीं है।
तो वहां पे अगर आप चिल्ड्रन को आप रख रहे
हो वर्क करने के लिए तो वहां पे जो है
उनसे तीन घंटे से लगातार ज्यादा काम नहीं
लिया जा सकता है। और साथ ही साथ 3 घंटे के
अंदर आप जो है उनको एक घंटे का रेस्ट आवर
भी देंगे। नेक्स्ट है द पीरियड ऑफ़ वर्क ऑफ़
अ चाइल्ड शैल बी शो अरेंज्ड दैट इंक्लूसिव
ऑफ हिज़ इंटरवल फॉर रेस्ट अंडर सब सेक्शन
टू। इट शैल नॉट बी स्प्रेड ओवर मोर देन
सिक्स आवर। फॉर इंक्लूडिंग द टाइम स्पेंट
इन वेटिंग फॉर वर्क ऑन एनी डे। तो यहां पे
ये चीज कही जा रही है कि जो अगर आप जो है
किसी जो है चिल्ड्रन को अपने वर्क अपने
यहां पे जो है एंप्लॉयमेंट दे रहे हो और
उससे 3 घंटे से ज्यादा आप काम नहीं करवा
सकते हो और एक घंटे का इंट्रॉल भी आपको
देना है। तो ये दोनों मिलाके 6 घंटे से
ज़्यादा नहीं होना चाहिए। यानी कि ये 3
घंटे प्लस 1 घंटे मिलाके चार या पांच घंटे
हो सकते हैं। उससे ज़्यादा का जो है
वर्किंग आवर नहीं होना चाहिए दोनों
मिलाके। और याद रखिए कि इंक्लुडिंग द टाइम
स्पेट इन वेटिंग फॉर वर्क ऑन एनी डे। यानी
कि आपने बोला कि आप बाहर वेट करो। आपका
टाइम 1:00 से होगा। तो जो वेट कर रहे हैं
उस टाइम को भी उसमें काउंट करके 6 घंटे से
ज्यादा नहीं होना चाहिए। ये चीज कही गई
है। नो चाइल्ड शैल बी परमिटेड और
रिक्वायर्ड टू वर्क बिटवीन 7:00 pm एंड
8:00 am। तो इस एक्ट के अकॉर्डिंग क्या है
कि कोई भी चाइल्ड जो 14 साल से कम है और
अगर उससे वर्क ले रहे हो तो सात रात को
7:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक जो है वह
काम नहीं करेगा। नो चाइल्ड शैल बी
रिक्वायर्ड और परमिटेड टू वर्क ओवर टाइम।
किसी भी चिल्ड्रन से चाइल्ड लेबर से आप जो
है ओवरटाइम काम नहीं करवा सकते। नो चाइल्ड
शैल बी रिक्वायर्ड और परमिटेड टू वर्क इन
एनी एस्टैब्लिशमेंट ऑन एनी डे ऑन व्हिच ही
हैज़ ऑलरेडी बीन वर्किंग इन अनदर
एस्टैब्लिशमेंट। यानी कि अगर कोई चिल्ड्रन
है वो किसी दूसरे एस्टेब्लिशमेंट में किसी
डे पे काम कर रहा है तो उस दिन उससे किसी
और एस्टैब्लिशमेंट पे काम नहीं करवाया जा
सकता। यानी कि सपोज़ करिए कि बच्चा है कहीं
और जो है 3 घंटे काम करके आया उसके बाद
आपके पास आ गया और आपसे बोल रहा है कि हम
काम पे रख लिए, तो आप नहीं दे सकते। वहां
पे वह 3 घंटे काम करके आ गए। अब आप जो है
3 घंटे उसको उस दिन नहीं करवा सकते हो।
अगले दिन 3 घंटे करवा सकते हो। तो ये भी
इस एक्ट में कहा गया है। तो ये कुछ
इंपॉर्टेंट पोज़ है। अब है वीकली हॉलिडेज़।
तो यहां पे जो चिल्ड्रंस हैं उनको जो
चाइल्ड लेबर है उनको भी जो है आपको वीक
हॉलिडेज़ देना चाहिए। एव्री चाइल्ड
एंप्लॉयड इन एन एस्टैब्लिशमेंट शैल बी ऑल
ईच वीक ए हॉलिडे ऑफ़ वन होली डे। यानी कि
हर वीक में एक फुल डे छुट्टी किसी भी
बच्चे को मिलना चाहिए जो कि एज़ एंप्लई काम
कर रहा है। शैल नॉट बी एल्टेड बाय द
ऑक्यूपायर मोर देन वंस इन 3 मंथ। और उस
छुट्टी के जो वीक डे वीक ऑफ होता है उसको
जो है तीन महीने में एक ही बार जो है चेंज
कर सकता है एंप्लॉयर उससे ज्यादा नहीं जा
सकता। यानी कि सपोज़ करिए कि कहीं-कहीं जगह
होता है कि वीक ऑफ जो है मंडे को वो दिया
जा रहा है। कहीं पे ट्यूसडे को दिया जाता
है किसी एंप्लॉय को कहीं पे किसी को
थर्सडे को दिया जा रहा है। तो ये जो वीक
ऑफ है वो 3 महीने तक होना चाहिए। 3 महीने
में एक बार जो है एंप्लॉयर चेंज कर सकता
है। तो वीक ऑफ भी जो है मिलना चाहिए
चाइल्ड लेबर के केस में। पेनल्टीज की बात
करते हैं। तो अगर कोई भी एंप्लॉयर है, कोई
भी एस्टेब्लिशमेंट है, कंट्रीब्यूशन करता
है इस प्रोविजन को जो भी इस प्रोविजन है
यहां पे अगर वो करता है, तो उस केस में
उसको 3 महीने की कम से कम और जिसको बढ़ा के
एक साल तक का इंप्रिजमेंट यानी जेल किया
जा सकता है। और साथ ही साथ उसको ₹10,000
का ₹10,000 से कम नहीं होगा का फ़ाइन लगाया
जा सकता है और उसको एक्सटेंड करके ₹20,000
का फ़ाइन भी लगाया जा सकता है। या फिर
दोनों ही यानी जेल और फ़ाइन दोनों ही लगाया
जा सकता है। तो, अगर कोई भी
एस्टैब्लिशमेंट ऐसा काम करता है या
कंट्रावेंशन करता है इस प्रोविज़न में इस
जो इस एक्ट में प्रोविज़ंस हैं, उनको तोड़ता
है, तो उस केस में कम से कम 6 महीने से 1
साल तक की जेल और ₹10,000 से ₹20,000 तक
का फाइन या फिर दोनों उस पे लगाया जा सकता
है। हु एवर कमिट्स ए लाइक ऑफेंस आफ्टर
वर्ड ही शैल बी पनिशेबल विथ इंप्रज़मेंट
फॉर ए टर्म व्हिच शैल नॉट बी लेस देन
सिक्स मंथ बट व्हिच मे बी एक्सटेंड टू
डियर। यानी कि अगर कोई ऐसा है एक बार उसने
तोड़ दिया उसको फाइनल लग चुका है। उसके बाद
भी वह गलती कर रहा है। उसके बाद भी
प्रोविज़ंस को तोड़ रहा है। तो उस केस में
उसको छह महीने से 2 साल तक की सजा दी जा
सकती है। नेक्स्ट है हु एवर फेज टू गिव
नोटिस एज रिक्वायर्ड बाय सेक्शन नाइन।
सेक्शन नाइन में जो भी बताया गया है उसके
अकॉर्डिंग अगर नोटिस नहीं दे पाता है। फेज
टू मेंटेन अ रजिस्टर एज़ रिक्वायर्ड बाय
सेक्शन 11। यानी कि जो रजिस्टर मेंटेन
रखना होता है कि आपके यहां पे कितने
चाइल्ड काम कर रहे हैं, कब आए, कब गए।
उसको मेंटेन नहीं कर पाता है। या फिर
उसमें फॉल्स एंट्री करता है। फेज टू
डिस्प्ले नोटिस कंटेनिंग एन एब्स्ट्रैक्ट
ऑफ़ सेक्शन थ्री एंड दिस सेक्शन इज़
रिक्वायर्ड बाय सेक्शन 12। तो सेक्शन थ्री
का जो एब्स्ट्रैक्ट है उसको जो है वहां पे
नोटिस दे बोर्ड पे लगाना चाहिए। अगर उसको
नहीं लगा पाता है फेस टू कंप्लीट विद और
कंट्रावेंस एनी अदर प्रोविज़न ऑफ़ दिस एक्ट
और द रूल मेड देयर अंडर। यानी कि कोई अदर
प्रोविज़ंस को अगर ये जो है कंप्लीट नहीं
कर पाता है फिर कंट्रीव करता है तोड़ता है
तो उस केस में जो है वो पनिशेबल होगा और
वहां पे जो है सिंपल इंप्रज़मेंट जो है
दिया जाएगा जो कि एक महीने से एक महीने तक
का हो सकता है और विद फाइन व्हिच मे
एक्सटेंड टू ₹10,000 और विद बोथ। यानी कि
यहां पे एक महीने तक की जेल और ₹5,000 तक
का जुर्माना लग सकता है और साथ ही साथ
दोनों भी लगा जा सकता है। यानी कि या तो
अलग-अलग एक ही चीज लगा दिया या फिर दोनों
एक साथ लगा दिया। तो अगर ए बी सी डी जो
सेक्शन थ्री में ए बी सी डी पॉइंट है अगर
इसको फॉलो नहीं करता है तो। तो सेक्शन 14
पेनल्टी से रिलेटेड है। जहां पे बताया गया
है कि सेक्शन थ्री को अगर वो फॉलो नहीं
करता है, कंट्रीवमेंट करता है तो उस केस
में उसको 6 महीने से एक साल तक की सजा या
फिर ₹10,000 से ₹20,000 तक का फाइन या फिर
दोनों ही लगाए जा सकते हैं। अब आप यहां पे
देख सकते हैं कि कुछ हेल्थ और सेफ्टी के
लेकर भी जो है गाइडलाइंस दी गई है सेक्शन
13 में। तो आप यहां देख सकते हैं ये
सेक्शन 13 में जो भी गाइडलाइन हैं साफ-साफ
वही चीजें हैं कि क्लीननेस होना चाहिए,
डिस्पोजल ऑफ़ वेस्ट और एफिलिएट के लिए होना
चाहिए, वेंटिलेशन होना चाहिए, टेंपरेचर
मेंटेन होना चाहिए। डस्ट ऑफ फ्यूम नहीं
होना चाहिए। आर्टिफिशियल ह्यूमडीिकेशन है
तो वहां पे आपको है जो गवर्नमेंट का
नॉर्म्स है उसके अकॉर्डिंग ह्यूमडीिकेशन
करना होगा। लाइटिंग अच्छी होनी चाहिए,
ड्रिंकिंग वाटर होना चाहिए। वॉशरूम की
फैसिलिटी होनी चाहिए। स्पिट्यूस यानी कि
स्पिट करने के लिए जो है बकेट्स होनी
चाहिए। फेंसिंग होनी चाहिए। मशीनरी के
आस-पास अगर वह डेंजरस मशीन्स हैं। वर्क एट
ऑल नियर मशीनरी इन मोशन। यानी कि कोई मोशन
वाली मशीनरी है तो वहां पे जो आसपास काम
कर रहे हैं तो उसको भी जो है सेफ्टी रखनी
है वहां पे। तो ये हेल्थ एंड सेफ्टी से
रिलेटेड गाइडलाइंस है। इसी तरीके से यह जो
आप देख रहे हैं यहां पे शेड्यूल है जहां
पे ये बताया गया है कि कौन सी जगह पे काम
कर सकते हैं कौन सी जगह पे काम नहीं कर
सकते। यहां पे कुछ एग्जांपल्स आपको दिए
हैं। बहुत सारी लिस्ट है। लंबी लिस्ट है।
तो नीचे आपको डिस्क्रिप्शन में इस एक्ट का
जो है लिंक मिल जाएगा। आप वहां से उसको
डाउनलोड भी कर सकते हैं। तो यहां पे देख
सकते हैं जैसे ट्रांसपोर्ट ऑफ पैसेंजर
गुड्स और मेल्स बाय रेलवे सिलेंडर पैकिंग
हो गया या फिर एयरपोर्ट पोर्ट अथॉरिटी विद
इन द लिमिट्स ऑफ एनी पोर्ट एबोटियर्स या
स्लॉटर हाउस हो गया ऑटोमोबाइल वर्कशॉप और
गार्गेज हो गया फाउंड्रीज हो गया। तो यहां
पे वो ऑक्यूपेशन ऐसे हैं जहां पे वो काम
नहीं कर सकते। जैसे कि सिर्फ प्रोसेस में
है वो पार्ट बी में है। तो वहां पे बीड़ी
मेकिंग हो गया, कारपेट वेविंग हो गया,
सीमेंट मैन्युफैक्चर हो गया या मेकअप
कटिंग और स्प्लिटिंग हो गया, सेलेग
मैन्युफैक्चर हो गया, सोप मैन्युफैक्चर
यहां पे बच्चे काम नहीं कर सकते हैं। तो,
यह वह प्रोविज़न है। यानी कि, यह वह
प्रोसेस है और यह ऑक्युपेशन है जहां पे
प्रोहिबिटेड है। यहां पे चिल्ड्रन काम
नहीं कर सकते हैं। तो, यह आप जो है इसको
देख लीजिएगा। नॉर्मली इसको आपको याद तो
नहीं होगा, लेकिन फिर भी आपको एग्ज़ांपल के
तौर पे लिखने के लिए हेल्प आएगा। विश यू
ऑल द बेस्ट। कीप वाचिंग। सब्सक्राइब द
चैनल फ़ॉर मोर वीडियोज़। थैंक यू
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