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Indian National Movement | Modern History | L1 | Shubham Gupta

50m 41s8,200 words1,093 segmentsHindi

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नमस्कार दोस्तों दोस्तों, कैसे हैं आप

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लोग? आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है हमारे

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ब्रांड न्यू चैनल अनअकडमी अभियान में जहां

1:02

पर हम शुरू करने जा रहे हैं वापस से अपनी

1:04

आधुनिक भारत की सीरीज मॉडर्न हिस्ट्री की

1:06

सीरीज को हम यहां वापस से कंटिन्यू

1:08

करेंगे। सबसे पहले आप मुझे बताइए आप लोग

1:10

कैसे हैं? और क्या आप मेरी आवाज सुन पा

1:12

रहे हैं? दोस्तों, क्या मेरी वॉइस क्लियर

1:14

है? ऑडियो वीडियो क्लियर है? इसके बाद फिर

1:16

मैं कमेंट को आगे रखता हूं और फिर हम शुरू

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करते हैं हमारा आज का सेशन। जल्दी बताइए।

1:20

इज एवरीथिंग गुड? ऑडियो एंड वीडियो सही

1:23

है? बहुत दिनों के बाद हम स्मार्ट बोर्ड

1:25

से पढ़ाई कर रहे हैं और अब आदत डाल दीजिए

1:26

क्योंकि लगातार यह क्लास चलने वाली है

1:28

दोस्तों। बढ़िया है सब बढ़िया।

1:32

ओके ऑल गुड। चलिए ठीक है तो शुरू करते

1:34

हैं।

1:38

सबसे पहले आप सभी लोगों को महात्मा गांधी

1:40

जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। शास्त्री

1:42

जी की जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आज

1:45

इस दिन को दोस्तों हम लोगों ने इसीलिए

1:47

चुना है क्योंकि दो महान लोगों का आज

1:50

जन्मदिन है। उनकी जयंती है और इसी उपलक्ष

1:53

में हमने भी अपने चैनल को आज स्टार्ट किया

1:55

है। जैसा आप जान रहे हैं कि हमारे चैनल पर

1:57

चार लोगों की टीम है और ये अक्रॉस द स्टेट

2:00

सबसे अच्छे टीचर्स की टीम है दोस्तों और

2:03

यहां पर सनमती सर हैं जो आपको डेली करंट

2:05

अफेयर्स का सेशन ले रहे हैं सुबह 8:00

2:07

बजे। मेरा सेशन होगा रोज 2:45 पर मॉडर्न

2:11

हिस्ट्री का सेशन होगा। मुकेश सैनी सर

2:14

आएंगे और मुकेश सैनी सर आपको इंडियन पिटी

2:17

पढ़ाएंगे। 4:15 पर इंडियन पिटी का उनका

2:20

सेशन होगा और इंडियन ज्योग्राफी लेकर के आ

2:23

रहे हैं नूर आलम सर। तो दोस्तों सारी

2:26

तैयारी आपको इस प्लेटफार्म पर कराई जाएगी।

2:28

आप किसी भी स्टेट पीएससी की तैयारी कर रहे

2:31

हो या वन डे एग्जामिनेशन की तैयारी कर रहे

2:33

हो यह सबसे अच्छा प्लेटफार्म रहेगा जहां

2:36

पर आप बहुत अच्छे तरीके से प्रिपरेशन कर

2:38

सकते हैं। ना सिर्फ यहां पर आपके लेक्चर

2:41

होंगे बल्कि इनका रिवीजन भी होगा। एक मिनट

2:44

मैं आपको प्लानिंग समझा दे रहा हूं।

2:46

सोमवार से शुक्रवार तक हमारी लगातार

2:49

कक्षाएं होंगी। शनिवार का जो दिन रहेगा उस

2:52

दिन रिवीजन होगा। संडे को स्पेशल संडे

2:54

रहेगा और संडे को हम करंट अफेयर्स की

2:57

बातें कर रहे होंगे। मैं एमपी से हूं तो

2:59

मैं मध्य प्रदेश के करंट अफेयर्स लेकर के

3:01

आऊंगा। नूर आलम सर यूपी के करंट अफेयर्स

3:04

लेकर के आएंगे और मुकेश सैनी सर आपके लिए

3:07

राजस्थान के करंट अफेयर्स लेकर के आएंगे।

3:09

जल्द ही दोस्तों बिहार और झारखंड से भी दो

3:12

टीचर हमारे साथ जुड़ने वाले हैं। तो वो

3:14

आपको बिहार और झारखंड का करंट अफेयर्स

3:16

लेकर भी आएंगे। ये एक जीएस स्पेशल का बैच

3:19

है जो लगभग दो से तीन महीने में पूरा

3:21

होगा। मैं हिस्ट्री जैसे ही मॉडर्न

3:23

हिस्ट्री खत्म होगी इसके बाद हम एंशिएंट

3:25

हिस्ट्री स्टार्ट करेंगे और फिर मिडिवल

3:28

हिस्ट्री स्टार्ट करेंगे। तो पूरी इतिहास

3:29

को मैं यहां पर कवर कराऊंगा। उसी प्रकार

3:32

से पिटी मुकेश सैनी सर कवर कराएंगे और नूर

3:35

आलम सर आपको इंडियन और वर्ल्ड ज्योग्राफी

3:38

इसी प्लेटफार्म पर विदाउट एनी कॉस्ट आपको

3:42

कवर कराएंगे। दोस्तों बस आपसे एक छोटी सी

3:44

रिक्वेस्ट है। हमारा नया चैनल है। इसे

3:46

सब्सक्राइब कीजिए, शेयर कीजिए अपने

3:48

दोस्तों के साथ। वीडियोस को लाइक कीजिए और

3:51

हमारा हौसला बढ़ाइए। अच्छा कंटेंट लाने की

3:53

जिम्मेदारी हमारी है। बहुत सारा कंटेंट

3:55

मैंने YouTube पर और स्पेशल क्लासेस पर

3:58

दिया हुआ है। इसी को हम और आगे बढ़ाएंगे

4:00

आप सब लोगों के सपोर्ट के साथ। चलिए

4:03

दोस्तों शुरू करते हैं अभियान को। चलिए

4:05

शुरू करते हैं हमारे इस पहले वीडियो को।

4:07

वीडियो शुरू करने से पहले मैं आपको बता

4:09

दूं कि यह हमारा ऑफिशियल टेलीग्राम चैनल

4:12

है। अभियान tme

4:16

अभियान academy अभियान आप लिखेंगे। ये

4:18

हमारा ऑफिशियल टेलीग्राम चैनल है जहां पर

4:21

एक दिन पहले आपको बता दिया जाएगा कि कल

4:24

कौन सा टीचर कौन सा टॉपिक पढ़ा रहा है और

4:27

अगर कल क्लास नहीं है तो उसकी जानकारी भी

4:30

आपको इस चैनल पर मिल जाएगी। साथ ही साथ

4:32

पीडीएफ जो सबसे बड़ी दिक्कत आपको पीडीएफ

4:35

की होती है तो आप हमारे चैनल को खोलिएगा।

4:37

चैनल पर यहां पर एक आइकन बना हुआ है। वहां

4:40

पर Google ड्राइव की लिंक दी गई है।

4:42

दोस्तों एक क्लिक में वन क्लिक में आपको

4:45

सभी टीचर्स की सारी पीडीएफ मिल जाएंगी। आज

4:48

से एक साल के बाद या 5 साल के बाद भी आप

4:51

ये लेक्चर देखोगे तो यहां आपको एक पीडीएफ

4:54

लिंक मिलेगी। तो पीडीएफ की सारी समस्याएं

4:56

हमने खत्म कर दी हैं। कई बार ये होता है

4:58

कि आप लोग लेक्चर बाद में देखते हैं।

5:00

पीडीएफ आपको नहीं मिलता है। हमारे

5:02

टेलीग्राम चैनल से जुड़िए। वहां पर तो

5:04

आपको पीडीएफ प्रोवाइड कराई ही जाएगी।

5:07

लेकिन आप हमारे चैनल आइकन पर भी जा सकते

5:09

हैं। वहां पर टेलीग्राम और पीडीएफ दोनों

5:12

की लिंक दी गई है। उसको जरूर आप ज्वाइन कर

5:14

लीजिए और प्लीज हमारे चैनल को सब्सक्राइब

5:16

कीजिए। एक और बात बता दूं ये मेरा पूरा एक

5:19

शेड्यूल है। दोस्तों एक तो मैं मॉडर्न

5:22

हिस्ट्री की क्लास लेकर के आ रहा हूं जो

5:24

हमारी YouTube पर होगी रोज 2:45 पर। दूसरा

5:27

जो एक क्लास मैं स्टार्ट किया हूं वो

5:29

11:00 बजे सुबह एक टेस्ट सीरीज है। ये

5:32

क्लास नहीं है। ये एक टेस्ट सीरीज है और

5:35

इसमें डेली टॉपिक वाइज टेस्ट हम कर रहे

5:37

हैं और आज पहला टेस्ट था। इसकी जानकारी भी

5:40

मैंने अपने टेलीग्राम चैनल पर डाल दी थी।

5:42

दोनों टेलीग्राम चैनल पर मैंने आपको बता

5:44

दिया था। अब जो कल का टॉपिक है वो मैं

5:46

आपको बता दूं दोस्तों कि कल जो हमारा

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टेस्ट होगा वो कैबिनेट मिशन से संविधान

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सभा तक का टेस्ट होगा। कैबिनेट मिशन से

5:54

कॉन्स्टिटुएंट असेंबली तक का टेस्ट होगा।

5:57

स्पेशल क्लास सुबह 11:00 बजे हो रही है।

6:00

स्पेशल क्लास के लिए आप अनअकडमी पर मुझे

6:02

फॉलो कर सकते हैं। लिंक आपके डिस्क्रिप्शन

6:04

बॉक्स में दी गई है। तो यहां पर आप दोपहर

6:07

आइए सुबह 11:00 बजे और मेरे साथ एक

6:09

टारगेटेड तैयारी आप कीजिए। हर दिन मैं

6:12

आपको टास्क दूंगा। वो टास्क आपको खुद पढ़

6:15

करके आना है। आप लुसेंट और घटनाचक्र से

6:18

उसको पढ़िए। अभी सैनी सर भी स्टार्ट कर

6:20

रहे हैं। उनके साथ भी आप पढ़ सकते हैं और

6:23

रोज 11:00 बजे वहां पर टेस्ट होगा। अगेन

6:25

ये सोमवार से शनिवार तक होगा। संडे को

6:28

इसमें कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा दोस्तों।

6:31

ठीक है? और एक और बात बता दूं दोस्तों कि

6:33

दोस्तों ये हम यहां से स्टार्ट कर रहे हैं

6:35

और ये टॉपिक है भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन।

6:39

इंडियन नेशनल मूवमेंट और ये हमारी इकाई आठ

6:42

होगी। ये हमारी यूनिट एट होगी। आप में से

6:45

बहुत से लोग जो नए जुड़े हैं, कह रहे

6:46

होंगे सर यह यूनिट एट क्यों लिखा हुआ है?

6:49

इकाई आठ क्यों लिखा हुआ है? यहां पर इकाई

6:51

वन क्यों नहीं लिखा हुआ है? इसका कारण

6:54

समझिए। इससे पहले की जो कक्षाएं हैं, इससे

6:57

पहले की जो लेक्चर हैं, वो मैंने स्पेशल

7:00

क्लास में कवर कराएं। देखिए दोस्तों, क्या

7:02

है? जो हमारा आधुनिक भारत का इतिहास है जो

7:05

मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री है तो उसके दो

7:07

पार्ट हैं। आधुनिक भारतीय इतिहास को हम दो

7:10

हिस्सों में बांट करके देखते हैं। एक वो

7:13

इतिहास जो कि 1885 के पहले का है बिफोर

7:18

1885 के पहले की हिस्ट्री है। ओके? 1885

7:22

के पहले की हिस्ट्री है। और एक वो इतिहास

7:25

जो कि 1885 के बाद का है। ओके? और जो

7:29

इतिहास 1885 के बाद स्टार्ट हुआ है जो

7:33

हिस्ट्री 1885 के बाद हमको पढ़नी है

7:35

दोस्तों तो उसी इतिहास को हम कहते हैं

7:38

इंडियन नेशनल मूवमेंट उसी इतिहास को हम

7:42

कहते हैं भारतीय

7:45

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ठीक है उसी को हम

7:48

क्या बोलते हैं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

7:51

का नाम हम इसको देते हैं और ये जो इतिहास

7:54

है ये 1885 के पहले का इतिहास है इसमें हम

7:58

पढ़ पढ़ते हैं कि किस प्रकार से यूरोपीय

8:00

कंपनियां भारत में आई। किस प्रकार से

8:02

उत्तरवर्ती मुगल शासकों का अंत हुआ।

8:04

अराइवल ऑफ यूरोपियन कंपनी। ठीक है? इसमें

8:07

हम मुगल रूलर्स के बारे में पढ़ते हैं।

8:09

फिर हम ये भी पढ़ते हैं कि भारत में किस

8:12

प्रकार से सांस्कृतिक, धार्मिक सुधार

8:14

आंदोलन शुरू किए गए। कल्चरल और रिलीजियस

8:17

रिफॉर्म मूवमेंट स्टार्ट किए गए। तो ये

8:19

सारी चीजें मैं अपनी स्पेशल क्लास में कवर

8:21

करा चुका हूं। प्लीज वहां जाकर के आप

8:23

देखिए और बहुत से लोग होंगे जो वहां पर

8:25

जुड़े हुए थे। बहुत डिटेल में मैंने हर हर

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एक चीज को पढ़ाया है। टेस्ट भी कंडक्ट

8:29

कराए हैं। तो वहां जा करके आप इनको देख

8:31

सकते हैं। यहां पर जो हम मॉडर्न हिस्ट्री

8:34

पढ़ने वाले हैं वो हम स्टार्ट करेंगे

8:37

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से इंडियन नेशनल

8:40

मूवमेंट से यहां पर हम हिस्ट्री स्टार्ट

8:42

करेंगे। सर इसमें हम क्या-क्या पढ़ेंगे?

8:44

तो इसमें सबसे पहले हम पढ़ेंगे भारतीय

8:47

राष्ट्रवाद का उदय राइज ऑफ इंडियन

8:50

नेशनलिज्म कि आखिरकार राष्ट्रवाद क्या

8:52

होता है? इसका उदय क्यों हुआ? कैसे

8:55

कांग्रेस के पहले की संस्थाओं ने प्री

8:58

कांग्रेस इंस्टीट्यूशन ने इंडिया में

9:00

चीजों को आगे बढ़ाया। सुरेंद्रनाथ बनर्जी

9:03

की इंडिया एसोसिएशन

9:05

ओके दादा भाई नौरोजी की लंदन एसोसिएशन

9:08

इन्होंने किस प्रकार से काम किया उसके

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बारे में हम पढ़ रहे होंगे। दूसरा जो

9:13

हमारा चैप्टर इसमें निकल कर के आएगा वो

9:15

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में

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निकल कर के आएगा। इंडियन नेशनल कांग्रेस

9:20

के बारे में निकल कर के आएगा। हम पढ़ेंगे

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कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का निर्माण

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किस प्रकार से हुआ और उसकी गतिविधियां किस

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प्रकार से आगे बढ़ती चली गई। फिर हम बात

9:30

करेंगे भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलनों के

9:33

चरणों की। हम डिस्कस करेंगे स्टेजेस ऑफ

9:35

इंडियन नेशनल मूवमेंट। अब आपने पढ़ा होगा

9:38

कई बार किताबों में कि एक उदारवादी चरण है

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जिसको हम लिबरल फेज बोलते हैं। एक

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क्रांतिकारी चरण है जिसको हम रेवोल्यूशनरी

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फेज बोलते हैं और फिर एक गांधीवादी चरण है

9:49

जिसको हम गांधीयन स्टेज या गांधियन इरा

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बोलते फेज बोलते हैं। तो इन तीनों चरणों

9:55

को हम डिस्कस करेंगे। सभी क्रांतिकारियों

9:57

की बात करेंगे। सभी उदारवादियों की बात

10:00

करेंगे और गांधी जी और उनके साथ जो

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गतिविधियां हुई, उन सबको हम इस फेज में

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डिस्कस करेंगे। और आखिरी पार्ट हमारा होगा

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वो होगा स्वतंत्रता और विभाजन इंडिपेंडेंस

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एंड डिवीजन भारत को स्वतंत्रता किस प्रकार

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से मिली और भारत का विभाजन किस प्रकार से

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हुआ इस बारे में हम बात करेंगे। पूरी

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कोशिश रहेगी कि आने वाली 20 से 25 कक्षाओं

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में 25 घंटे के अंदर आपके ये सारे टॉपिक

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खत्म करवा दिए जाएं विद एमसीक्यू।

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एमसीक्यू इस बार डेली बेसिस पर होंगे। आज

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जो क्लास होगी कल की क्लास स्टार्ट होने

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से पहले पांच एमसीक्यू आपको दिए जाएंगे।

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तो विद एमसीक्यू हम इन चीजों को कंडक्ट

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करेंगे। चलिए शुरू करते हैं। आई विश आप

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सभी लोग तैयार होंगे और एक छोटा सा आपके

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दिमाग में आईडिया बन गया होगा कि हम क्या

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पढ़ने वाले हैं और किस प्रकार हम चीजों को

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पढ़ने वाले हैं। शुरू करते हैं दोस्तों और

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सबसे पहले हम बात करते हैं भारतीय

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राष्ट्रवाद का उदय राइज ऑफ इंडियन

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नेशनलिज्म। ठीक है? अब यहां पर एक शब्द

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निकल कर के आ गया और शब्द है राष्ट्रवाद।

11:01

शब्द है राष्ट्रवाद। शब्द है नेशनलिज्म।

11:04

ओके? ये शब्द यहां पर निकल कर के आया। सर

11:07

आखिरकार इसका मतलब क्या होता है?

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राष्ट्रवाद का मतलब क्या होता है? तो

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दोस्तों राष्ट्रवाद का मतलब ये होता है कि

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जैसे मान लीजिए ये एक क्षेत्र है। ये एक

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पूरा का पूरा इलाका है और इस इलाके में

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बहुत सारे लोग रह रहे हैं। हमने ये मान

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लिया कि ये चार पांच लोग यहां पर रह रहे

11:24

हैं। ठीक है? इस एरिया के अंदर ये लोग रह

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रहे हैं। जब ये लोग आपस में एक दूसरे से

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जब ये लोग आपस में एक दूसरे से सांस्कृतिक

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रूप में जुड़ जाते हैं। जब ये एक दूसरे से

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आपस में कल्चरली जुड़ जाते हैं और इस पूरे

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क्षेत्र को एक इकाई मानने लगते हैं। एक

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यूनिट मानने लगते हैं दोस्तों। तो इसी को

11:49

कहा जाता है राष्ट्रवाद। इसी को कहा जाता

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है नेशनलिज्म। जैसे कि हम बहुत से लोग

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मध्य प्रदेश में रहते हैं। बहुत से लोग

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दिल्ली में रहते हैं। बहुत से लोग

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तमिलनाडु में रहते हैं। कुछ लोग मिजोरम

12:01

अरुणाचल में रहते हैं। जम्मू कश्मीर में

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रहते हैं। लेकिन हमारी भाषा भी अलग-अलग

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है। हमारे रहने का तरीका भी अलग-अलग है।

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लेकिन एक चीज जो हमको जोड़े रखती है वो ये

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है कि हम सब भारतीय हैं। हम सब इंडियन

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हैं। हमारे कल्चर अलग हो सकते हैं। हमारी

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भाषा अलग हो सकती है। लेकिन अगर हमारे देश

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के लिए जब बारी कुछ भी करने की बारी आएगी

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तो सबसे पहले हम इंडियन हैं। सबसे पहले हम

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भारतीय हैं। देखो तो राष्ट्रवाद की

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परिभाषा कुछ इस प्रकार आप दे सकते हैं। जब

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एक व्यक्ति, जब एक व्यक्ति अपनी संस्कृति,

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अपनी भाषा, अपने क्षेत्र से ज्यादा महत्व

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राष्ट्र को देता है तो उसे राष्ट्रवाद कहा

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जाता है। व्हेन अ पर्सन गिव्स मोरेंट टू अ

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नेशन इंस्टेड ऑफ़ इट्स लैंग्वेज,

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रीजन एंड द कल्चर देन दिस इज़ नोन एज द

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नेशनलिज्म। इसे ही राष्ट्रवाद कहा जाता

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है। ठीक है? तो अब ये भारतीय राष्ट्रवाद

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क्या है? इंडियन नेशनलिज्म क्या है? देखिए

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भारतीय राष्ट्रवाद से हमारा मतलब ये है

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दोस्तों कि देखिए हमारे यहां पर शुरू से

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ही शुरू से ही भारत एक यूनाइटेड कंट्री

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था। लेकिन भारत में अलग-अलग छोटे-छोटे

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राज्य हुआ करते थे। ये पूरी कहानी हम लोग

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जानते हैं। एक समय आया जब प्राचीन इतिहास

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हम पढ़ते हैं तो हम मौर्य के बारे में

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पढ़ते हैं। जब मौर्य थे तो पूरा भारत

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इंटीग्रेटेड हो गया। जब मौर्य गए तो फिर

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भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बट गया। फिर

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वापस से गुप्त साम्राज्य आया फिर भारत

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यूनाइट हो गया। फिर भारत टूट गया। फिर

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दिल्ली सल्तनत आई। फिर भारत यूनाइट हुआ

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फिर टूट गया। मुगलों के समय भी ऐसा ही

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हुआ। तो भारत में क्या था? भारत शुरू से

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एक राष्ट्र तो था। लेकिन भारत के लोगों के

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अंदर ये भावना पैदा करना कि मैं बंगाल से

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नहीं हूं। मैं मध्य प्रांत से नहीं हूं।

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मैं भारतीय हूं। इसी को कहा जा रहा है

13:53

राष्ट्रवाद। इसी को कहा जा रहा है

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नेशनलिज्म। तो क्या हुआ? जब अंग्रेज भारत

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में आए। जब ब्रिटिशर्स इंडिया में आए तो

14:01

ब्रिटिशर्स ने क्या किया? इंडिया का

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पॉलिटिकल इंटीग्रेशन किया। भारत का क्या

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किया? भारत का राजनीतिक एकीकरण कर दिया।

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भारत के कई रियासतों को खत्म करके उन्हें

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राज्यों में बदला, उन्हें प्रोविंस में

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बदला और इंडिया का पॉलिटिकल इंटीग्रेशन कर

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दिया। ठीक है? और इस पॉलिटिकल इंटीग्रेशन

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के अलावा क्या हुआ? जब ब्रिटेन के लोग

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भारत में आए तो उन्होंने भारत में एक और

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काम किया वो था हमारा ट्रांसपोर्टेशन

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सिस्टम। वो था हमारा परिवहन। इन्होंने

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परिवहन को सुचारू रूप से आगे बढ़ा दिया।

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ठीक है? तो इसकी वजह से क्या हुआ दोस्तों?

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तो इसकी वजह से भारत के अलग-अलग क्षेत्रों

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के लोग एक साथ आपस में जुड़ने लगे और उनके

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बीच में विचारों का आदान-प्रदान होने लगा।

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उनके बीच में थॉट का एक्सचेंज होने लगा।

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ये तो एक कारण था जो कि ब्रिटिश का

14:54

पॉजिटिव रीजन आया। दूसरी दिक्कत ये थी कि

14:57

जो हमारे यहां पर ब्रिटिश रूल हुआ जो

15:00

हमारे यहां पर ब्रिटेन का शासन हुआ तो उन

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उन्होंने कॉलोनियल पॉलिसीज को अपनाया।

15:07

उन्होंने औपनिवेशिक नीतियों को अपनाया।

15:09

कहोगे सर सर ये उपनिवेश का मतलब क्या होता

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है? कॉलोनी का मतलब क्या होता है? तो मेरे

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दोस्त जब एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर

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सिर्फ इसलिए कब्जा कर सिर्फ उसके आर्थिक

15:23

संसाधनों का दोहन करने के लिए कब्जा करता

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है, तो इसे उपनिवेशवाद कहा जाता है। इसे

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कॉलोनियलिज्म कहा जाता है। फिर से रिपीट

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करता हूं। जब एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर

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सिर्फ आर्थिक संसाधनों का दोहन करने के

15:40

लिए शासन करता है तो उसे कॉलोनियलिज्म कहा

15:44

जाता है। उसे ही उपनिवेशवाद कहा जाता है।

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तो ये चीज आपको याद रखनी है। तो ब्रिटेन

15:50

के लोग भारत क्यों आए थे? तो ब्रिटेन के

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लोगों का भारत आने का सिर्फ एक पर्पस था

15:56

कि भैया हमें कैसे भी करके यहां पर

15:58

मैक्सिमम प्रॉफिट अर्न करना है। जितना लूट

16:01

सकते हो भारत को लूटो और यहां से अधिकतम

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धनराशि को लेकर के यहां से बाहर निकल जाओ।

16:06

तो इसके लिए उन्होंने कॉलोनियल पॉलिसीज को

16:09

अपनाया। इसके लिए उन्होंने औपनिवेशिक

16:11

नीतियों को अपनाया। इसमें क्या-क्या शामिल

16:13

था? तो इसमें उनकी लैंड रेवेन्यू पॉलिसी

16:16

शामिल थी। इसमें उनकी भू-राजस्व नीति

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शामिल थी। और भू-राजस्व नीतियों में हम

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डिस्कस किए हैं पुरानी क्लासों में कि

16:24

भू-राजस्व नीतियों में स्थाई बंदोबस्त,

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परमानेंट सेटलमेंट, रयतवारी और महलवाड़ी।

16:30

इन तीनों की तीनों नीतियों में किसानों का

16:32

बहुत ज्यादा शोषण हुआ। फार्मर्स का इन

16:35

तीनों में बहुत ज्यादा एक्सप्लॉयटेशन किया

16:37

गया। एक तरफ किसानों का शोषण हुआ, दूसरी

16:41

ओर जमींदार वर्ग तैयार हुआ। दूसरी ओर एक

16:43

जमींदार सेक्शन तैयार हुआ। और ये वही

16:46

जमींदार वर्ग है जो हमेशा अंग्रेजों से

16:49

वफादार रहेगा। जो हमेशा अंग्रेजों का क्या

16:52

रहेगा? लॉयल रहेगा। और जब-जब भारत में

16:55

क्रांति की बात होगी तो ये जमींदारी वर्ग

16:58

हमेशा ब्रिटेन का साथ देगा।

17:00

क्रांतिकारियों के साथ भी धोखा करेगा।

17:02

राष्ट्रवादी

17:03

और जितने भी आंदोलन होंगे सबके साथ ये

17:06

धोखा करेगा। ये पॉइंट आपको याद रखना है।

17:09

दूसरी चीज यहां पर आपको याद रखना है इनकी

17:11

एडमिनिस्ट्रेशन पॉलिसी। जो इनकी प्रशासनिक

17:15

नीतियां थी उन्होंने भी भारत को बहुत

17:17

ज्यादा प्रभावित किया। जो इनका

17:19

एडमिनिस्ट्रेशन पॉलिसीज थी उससे भी इंडिया

17:22

को बहुत दिक्कत हुई। अगर इसके बाद हम कुछ

17:25

और कारणों की बात करें तो एक इनकी सोशियो

17:28

रिलीजियस पॉलिसी थी। सामाजिक और धार्मिक

17:32

नीतियां थी। कई प्रकार से जबरन धर्मांतरण

17:35

की बात कही गई। ईसाई मिशनरियों को बढ़ावा

17:37

दिया गया। ये सारे काम किए गए। जिसकी वजह

17:40

से भी भारत में बहुत ज्यादा असंतोष था। और

17:43

याद रखना कि रिलीजन को लेकर के हमेशा से

17:46

ही भारत में सेंटीमेंट आगे रहते हैं। तो

17:48

ये चीज बहुत ज्यादा अफेक्ट कर गई। तो जब

17:51

ब्रिटेन के लोग जब ब्रिटेन के लोगों ने

17:54

इतने सारे काम किए उन्होंने अपनी

17:56

औपनिवेशिक नीतियां चलाई। उन्होंने

17:58

पाश्चात्य शिक्षा और चिंतन इसको हम डिस्कस

18:01

करेंगे। सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन

18:03

भारत में हो गए। प्रेस और समाचार पत्र

18:06

भारत में चलने लगे। राजनीतिक संस्थाएं

18:08

भारत में बनने लगी। इतने सारे काम जब

18:11

इंडिया में हुए तो भारत के लोग जो कि

18:14

सांस्कृतिक रूप से अलग-अलग हैं। कल्चरली

18:17

लोग अलग-अलग हैं। लेकिन उनके बीच में एक

18:20

जुड़ाव होने लगा। उनके बीच में ये भावना

18:23

आने लगी कि हम भारतीय हैं और ये चीजें

18:26

यहीं से निकल कर के आई और इसी को कहा जा

18:29

रहा है भारतीय राष्ट्रवाद का उदय। इसी को

18:32

कहा जा रहा है राइज ऑफ इंडियन नेशनलिज्म।

18:36

ओके? इसमें एक पॉइंट आपको याद रखना है

18:38

दोस्तों। कि इसमें सबसे बड़ा योगदान

18:41

निभाएगी पाश्चात्य शिक्षा और चिंतन। इसमें

18:45

सबसे बड़ा रोल प्ले करेगी वेस्टर्न

18:47

एजुकेशन एंड थिंकिंग। क्योंकि भारत के लोग

18:50

जब ब्रिटेन यहां पर आया ब्रिटेन ने

18:53

अंग्रेजी शिक्षा स्टार्ट कर दी। आपको पता

18:55

ही होगा मैकले एक मैले मिनट करके आया था।

18:58

तो मैकोले मिनट के बाद भारत में अंग्रेजी

19:00

शिक्षा शुरू हो गई। इंग्लिश एजुकेशन

19:02

स्टार्ट हो गई। अब जैसे ही इंडिया में

19:05

इंग्लिश एजुकेशन को स्टार्ट किया गया तो

19:07

भारत के लोग बाहर भी जाने लगे पढ़ाई करने

19:09

के लिए। ये अमेरिका जाने लगे, यूरोप जाने

19:12

लगे। वहां पर ये पढ़ाई करने के लिए जाने

19:14

लगे। और जब ये वहां पढ़ाई करने के लिए गए

19:17

तो वहां पर इन्होंने स्वतंत्रता को देखा।

19:20

लिबर्टी को देखा, समानता को देखा,

19:22

इक्वलिटी को देखा। इन सभी चीजों को

19:24

इन्होंने वहां पर देखा और जब ये चीजें

19:27

उन्होंने वहां पर देखी और भारत के साथ

19:29

इसका कंपेयर किया। इंडिया के साथ जब इसका

19:32

कंपैरिजन किया तो इन्होंने पाया कि भारत

19:34

में ये चीजें नहीं हो रही हैं। तो

19:36

पाश्चात्य शिक्षा का इसमें बहुत बड़ा

19:38

योगदान होगा क्योंकि वही लोग भारत आएंगे

19:41

और यही लोग भारत में सुधार आंदोलनों को

19:44

शुरू करेंगे। रिफॉर्मिस्ट मूवमेंट की बात

19:46

करेंगे। आप जितने भी सुधार आंदोलन उठा

19:49

लीजिए। चाहे राजा राममोहन राय की आप बात

19:51

कर लें। जिन्होंने आत्मीय सभा और ब्रह्म

19:53

समाज की स्थापना की। एजुकेटेड थे। हाइली

19:56

एजुकेटेड थे। आप ईश्वर चंद्र विद्यासागर

19:58

की बात कर लीजिए। जिन्होंने विधवा

20:00

पुनर्विवाह को शुरू करवाया था। विडो

20:02

रीमैरिज के लिए एक्ट पास कराया था। इसके

20:05

अलावा चाहे आप सर सैयद अहमद खान की बात कर

20:09

लीजिए। आप सुरेंद्रनाथ बनर्जी की बात कर

20:11

लीजिए जिन्होंने इंडिया एसोसिएशन की

20:13

स्थापना की। और ये वही इंडिया एसोसिएशन है

20:16

दोस्तों जिस इंडिया एसोसिएशन ने सिविल

20:19

सेवा के रिफॉर्म की बात की थी। सिविल सेवा

20:22

के सुधारों की बात की थी। जितने भी लोग

20:24

आपको मिलेंगे हाइली एजुकेटेड थे और जो

20:27

वेस्टर्न थिंकिंग से बहुत ज्यादा प्रभावित

20:29

थे और इंडिया में उन चीजों को इन्फ्लुएंस

20:32

करना चाहते थे और आखिरी में सबसे बड़ा जो

20:35

योगदान यहां पर दिया है वो योगदान दिया है

20:38

राजनीतिक संस्थाओं ने पॉलिटिकल

20:41

इंस्टीट्यूशन ने क्या हुआ भारत में

20:44

अलग-अलग लोगों ने राजनीतिक संगठनों की

20:47

स्थापना करना शुरू कर दिया पॉलिटिकल

20:49

इंस्टीट्यूशन बनाना स्टार्ट कर दिया और ये

20:52

राजनीतिक संगठन दो प्रकार के थे दोस्तों।

20:55

एक तो था इंडियन नेशनल कांग्रेस भारतीय

20:57

राष्ट्रीय कांग्रेस और आपको पता ही है कि

21:00

1885 में 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस

21:04

को बनाया गया था। इसका एस्टैब्लिशमेंट

21:07

किया गया था। और इंडियन नेशनल कांग्रेस वो

21:10

आधार बनती है जिस आधार पर भारतीय

21:14

राष्ट्रीय आंदोलन को खड़ा किया जाता है।

21:17

जिस बेस पर या जिस फाउंडेशन पर इंडियन

21:20

नेशनल मूवमेंट को स्टार्ट किया जा रहा है।

21:22

कांग्रेस के इर्द-गिर्द बहुत सारी

21:24

कहानियां होंगी जो हम आगे की कक्षाओं में

21:27

पढ़ रहे होंगे। लेकिन क्या सिर्फ कांग्रेस

21:29

ही थी? क्या सिर्फ कांग्रेस ही अवेलेबल

21:32

थी? नहीं। कांग्रेस के पहले भी कुछ

21:35

राजनीतिक संस्थाएं थी। उन्होंने भी इसमें

21:38

बहुत बड़ा योगदान दिया है। जिनको कहा जाता

21:41

है कांग्रेस पूर्व राजनीतिक संस्थाएं

21:44

जिनको कहा जाता है प्री कांग्रेस

21:47

इंस्टीट्यूशन और आज की क्लास में हमें

21:50

इन्हीं कांग्रेस पूर्व राजनीतिक संस्थाओं

21:52

को पढ़ना है। हमें इन्हीं प्री कांग्रेस

21:55

इंस्टीट्यूशन की बात करनी है। तो ये बताइए

21:58

क्या यहां तक आपको टॉपिक क्लियर हुआ?

22:00

भारतीय राष्ट्रवाद क्या है? भारतीय

22:02

राष्ट्रवाद के उदय के कारण और तीसरा अब हम

22:05

पढ़ने के लिए जा रहे हैं कांग्रेस पूर्व

22:07

संस्थाओं की बात करने जा रहे हैं। प्री

22:09

कांग्रेस इंस्टीट्यूशन की बात करने के लिए

22:11

जा रहे हैं। बताइए दोस्तों क्लियर है यहां

22:13

तक? जल्दी बताइए। फिर अपन आगे बढ़ते हैं।

22:21

ऑल गुड।

22:27

ठीक है। चलो बहुत अच्छी बात है। बढ़िया।

22:29

तो आगे बढ़ा जाए। अगले पार्ट पर चलें।

22:34

स्पेक्ट्रम बुक यूज़ कीजिए। स्पेक्ट्रम और

22:36

घटनाचक्र ऑब्जेक्टिव के लिए। चलिए

22:38

दोस्तों, तो आगे बढ़ते हैं। अगले पार्ट पर

22:40

आ जाते हैं। ओके? इसके बाद अब हम आगे बढ़े

22:43

तो हमें यह देखना होगा कि ये जो कांग्रेस

22:45

पूर्व की संस्थाएं हैं, इनका उद्देश्य

22:48

क्या था? तो देखिए दोस्तों, कांग्रेस

22:50

पूर्व बहुत सारी संस्थाओं का गठन किया

22:52

गया। कांग्रेस से पहले भी भारत में

22:53

अलग-अलग पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन हुआ करते

22:56

थे। जैसे आपने नाम सुना होगा इंडिया

22:58

एसोसिएशन का। आपने लैंड होडेड सोसाइटी के

23:01

बारे में सुना होगा। आपने बंग भाषा

23:03

प्रकाशक समिति के बारे में भी सुना होगा।

23:06

एक दो इंस्टिट्यूशन और थे जिसको बॉम्बे

23:08

कमेटी और मद्रास कमेटी कहा जाता था। बहुत

23:11

सारे इंस्टिट्यूशन बनाए गए। 20, 50 से

23:14

ज्यादा आपको राजनीतिक संस्थाएं देखने के

23:16

लिए मिलती है। लेकिन यहां पर पांच या छह

23:19

राजनीतिक संगठन ऐसे हैं जिनसे अक्सर

23:22

एग्जाम में सवाल आते हैं। तो उनको हमें ना

23:25

सिर्फ पढ़ना है बल्कि आज की इसी क्लास में

23:28

उनको याद भी कर लेना है। पर ये समझना

23:31

जरूरी है कि कांग्रेस और कांग्रेस से पहले

23:34

जो संस्थान आए, उन दोनों के बीच में अंतर

23:37

क्या है? उन दोनों के बीच में बेसिक

23:39

डिफरेंस क्या है? देखिए सबसे बड़ा बेसिक

23:41

डिफरेंस यही है कि कांग्रेस से पहले जो

23:44

संगठन थे वो एक क्षेत्र विशेष में हुआ

23:47

करते थे। बंगाल उनका इलाका हो गया या फिर

23:50

बिहार उनका इलाका हो गया। तो एक पर्टिकुलर

23:53

रीजन में ही वो क्या होते थे? उनका

23:55

लिमिटेशन थी कि वो एक क्षेत्रीय संगठन है।

23:58

वो एक रीजनल इंस्टीट्यूशन है। लेकिन जब

24:01

कांग्रेस का गठन किया गया और जब कांग्रेस

24:03

पिक्चर में आई दोस्तों तो कांग्रेस एक ऐसा

24:06

संगठन थी जो किसी एक क्षेत्र का संगठन

24:09

नहीं थी बल्कि उसका विस्तार पूरे के पूरे

24:12

भारत में था बल्कि उसका विस्तार पूरे के

24:15

पूरे इंडिया में था। इसीलिए कहा जाता है

24:17

कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी थी

24:20

क्योंकि पूरे इंडिया में वो फैल गई

24:21

धीरे-धीरे। लेकिन कांग्रेस से पहले जितनी

24:24

भी संस्थाएं बनेंगी वो सारी संस्थाएं एक

24:27

क्षेत्र में सीमित रहेंगी। दूसरी बात ये

24:29

है मेरे दोस्त कि इनका तरीका क्या था? तो

24:33

इन्होंने कभी भी बड़ा आंदोलन नहीं किया या

24:35

कोई बड़े स्तर पर सरकार का विरोध नहीं

24:38

किया। ये सरकार से रिक्वेस्ट किया करते

24:40

थे। ये क्या करते थे? ये इनको पत्र लिखा

24:43

करते थे। ये जाकर के दरख्वास्त किया करते

24:45

थे। ये मुलाकातें किया करते थे कि देखिए

24:48

साहब ये चीज अच्छी नहीं हो रही है। ये हम

24:50

आपसे रिक्वेस्ट कर रहे हैं। इसको ठीक कर

24:52

दीजिए। तो ये बेसिक फेज है। कहते हैं ना

24:55

ये स्टार्टिंग का फेज है। ये इन्फेंट फेज

24:58

कहलाता है। ये सबसे पहला चरण है जो आपको

25:00

यहां देखने के लिए मिल रहा है। तो अगर आप

25:02

इनके क्रियाकलापों की बात करें तो इनके

25:05

कुछ उद्देश्य थे। पहला उद्देश्य इनका ये

25:07

था कि भारतीयों प्रशासन में भारतीयों की

25:10

भागीदारी को बढ़ाना। इंक्रीस पार्टिसिपेशन

25:13

ऑफ इंडियंस इन द एडमिनिस्ट्रेशन। इसका

25:16

मतलब ये था मेरे दोस्त कि जो सिविल सर्विज

25:20

के एग्जामिनेशन थे या फिर जो इंडियन

25:22

एडमिनिस्ट्रेशन की पोस्ट थी उसमें

25:25

भारतीयों की संख्या बहुत कम थी। अब दो

25:28

प्रकार से प्रशासन होता है। एक तो होता है

25:30

विधायिका जो कि लेजिसलेशन पावर हुआ करती

25:33

थी। ठीक है? और दूसरा यहां पर होता है

25:36

एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी जिसमें आपके पूरे

25:38

अधिकारी आते हैं जिसमें आपके पूरे ऑफिसर

25:41

आते हैं। तो पहली डिमांड इन्होंने यही रखी

25:44

कि ना सिर्फ भारतीयों को विधायिका में जगह

25:46

दी जाए ना सिर्फ इंडियंस को लेजिसलेशन में

25:49

जगह दी जाए बल्कि भारतीयों को इन पोस्ट पर

25:54

भी जगह दी जाए। इन नौकरियों पर भी

25:56

भारतीयों को जगह दी जाए। ये पहली डिमांड

25:58

इन्होंने यहां पर रखी। दूसरी इनकी डिमांड

26:01

ये रही दोस्तों कि प्रशासनिक व्यय में कमी

26:04

की जाए। यहां पर जो एडमिनिस्ट्रेटिव

26:06

एक्सपेंडिचर है उसको रिड्यूस किया जाए

26:08

क्योंकि आप लगातार ब्रिटेन से अधिकारियों

26:11

की नियुक्ति कर रहे हैं भारत में। उनकी

26:13

सैलरी भी ज्यादा होती थी। उनके अलाउसेस भी

26:16

ज्यादा होते थे। तो इसको रिड्यूस किया

26:18

जाए। क्योंकि ये सारा पैसा अल्टीमेटली जा

26:20

कहां से रहा था? ये सारा पैसा अल्टीमेटली

26:23

भारत के खजाने से निकल कर के जा रहा था।

26:26

जिसे दादा भाई नौरोजी ने क्या कहा था? धन

26:30

निष्कासन सिद्धांत कहा था। ड्रेन ऑफ वेल्थ

26:33

थ्योरी कही थी। याद रखिएगा 1867 के आसपास

26:36

दादा भाई नौरोजी इस बात का प्रतिपादन कर

26:39

चुके हैं कि देखिए भारत से पैसा किस तरह

26:42

से इंग्लैंड भेजा जा रहा है। जिसे धन

26:45

निष्कासन सिद्धांत कहा गया था। ड्रेन ऑफ

26:47

वेल्थ थ्योरी कहा गया था। बाद में

26:49

उन्होंने एक किताब लिखी पॉवर्टी एंड द

26:52

अनब्रिटिश रूल ऑफ इंडिया जिसमें इन सभी

26:55

बातों को विस्तार से बता दिया गया। तीसरा

26:58

रीजन था कि भारत में आधुनिक शिक्षा का

27:01

प्रसार किया जाए। मॉडर्न एजुकेशन को

27:03

इंडिया में स्प्रेड किया जाए। अंग्रेजों

27:06

ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा शुरू कर दी।

27:09

1833 के अधिनियम के द्वारा आपको पता पड़

27:11

रहा होगा। सॉरी 1813 के अधिनियम के द्वारा

27:14

एजुकेशन पर एक्सपेंडिचर स्टार्ट किया गया।

27:16

33 के बाद और चीजों को आगे बढ़ाया गया।

27:19

लेकिन एक बड़ी प्रॉब्लम यहां पर यही नजर आ

27:22

रही थी कि बड़े स्तर पर इसका विकास नहीं

27:24

हो पा रहा था। बहुत सीमित स्तर पर शिक्षा

27:27

का विकास था और इसको बड़े लेवल पर

27:30

एक्सपैंड नहीं किया गया था। तो ये अगली

27:31

डिमांड थी कि भारत में शिक्षा का प्रचार

27:34

प्रसार किया जाए। इन संस्थाओं का आधार

27:37

क्षेत्रीय अथवा स्थानीय था। तो ये आपकी

27:39

कांग्रेस पूर्व संस्थाओं के उद्देश्य

27:42

होंगे। ठीक है? तो हमने क्या-क्या पढ़

27:44

लिया साहब? हमने सबसे पहले डिस्कस कर लिया

27:47

राष्ट्रवाद क्या होता है? जब एक व्यक्ति

27:50

अपने क्षेत्र, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा

27:52

से ज्यादा अपने राष्ट्र को महत्व देता है

27:55

तो उसे राष्ट्रवाद कहा जाता है। जब एक

27:57

इंडिविजुअल, अपनी लैंग्वेज, अपने कल्चर,

28:01

अपने रीजन की जगह पर प्रायोरिटी किसको

28:04

देता है? नेशन को देता है तो उसे

28:06

नेशनलिज्म कहा जाता है। हमने ये भी देख

28:08

लिया कि भारत में राष्ट्रवाद के उदय के

28:11

कारण क्या थे? आखिरकार भारत में

28:13

राष्ट्रवाद के राइज़ के कारण क्या थे?

28:15

व्हाट वाज़ द रीज़न बिहाइंड दी राइज़ ऑफ

28:18

इंडियन नेशनलिज्म। फिर तीसरे नंबर पर हमने

28:21

ये देखा कि प्री कांग्रेस इंस्टीट्यूशन के

28:26

ऑब्जेक्टिव क्या थे? जो कांग्रेस से पहले

28:28

राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना की गई। उनकी

28:31

प्रकृति, उनका नेचर और उनका ऑब्जेक्टिव,

28:34

उनका उद्देश्य क्या था? प्रकृति क्या थी?

28:37

तो नेचर में दोस्तों आप बता देंगे कि इनका

28:39

नेचर स्थानीय था। इनकी प्रकृति कैसी थी?

28:42

लोकल थी या रीजनल थी? बेहतर वर्ड होगा।

28:45

रीजनल वर्ड का इस्तेमाल करें। दूसरा आपने

28:48

यहां पर क्या बता दिया कि इसके ऑब्जेक्टिव

28:50

क्या थे? तो ऑब्जेक्टिव यही थे कि जो

28:52

हमारा ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन है तो उसमें

28:56

इंडियंस को जगह दी जाए। जो हमारा

28:58

एडमिनिस्ट्रेशन एक्सपेंस है उसको कम किया

29:01

जाए। एक और ऑब्जेक्टिव क्या था कि यार जो

29:04

इंडियंस हैं इंडियंस हैं तो उनको मॉडर्न

29:07

एजुकेशन प्रोवाइड कराई जाए। उनको आधुनिक

29:10

शिक्षा दी जाए। तो इतने टॉपिक हमने कवर कर

29:12

लिए। तो ये तो हो गया साहब हमारा आज का

29:15

कंसेप्ट वाला पार्ट। ये हो गया हमारा

29:18

कंसेप्चुअल एलिमेंट। सारी चीजें डिस्कस हो

29:21

गई। अब हमें ये डिस्कस करना है कि प्रमुख

29:24

राजनीतिक संस्थाएं कौन-कौन सी थी? मेजर

29:28

पॉलिटिकल पार्टीज कौन सी थी? जो कांग्रेस

29:31

के पहले एस्टैब्लिश थी। अब थोड़ा फ़क्चुअल

29:33

इंफॉर्मेशन है। धैर्य बनाए रखेंगे और

29:36

चीजों को पढ़ते रहेंगे। कहानी के रूप में

29:38

पढ़ेंगे। कोशिश करना है यहीं पर याद हो

29:40

जाए। तो साथ में दोहराते रहिएगा मेरे

29:42

दोस्त। ओके? तो सबसे पहली संस्था जो आपको

29:45

देखने मिलेगी और ये टेबल बना के दे दिया

29:47

है मैंने आपको। पीडीएफ में आपको मिल जाएगा

29:49

टेबल मिल जाएगी। हमेशा की तरह ऐसा कर

29:50

दिया। ठीक है? सबसे पहली संस्था थी जिसका

29:53

नाम था कोलकाता यूनिटेरियन कमेटी। क्या

29:57

नाम था? कोलकाता यूनिटेरियन कमेटी थी।

30:00

इसको

30:02

1823 में इसकी स्थापना की गई थी। 1823 में

30:06

इसे एस्टैब्लिश किया गया था। और इसकी

30:08

स्थापना कोलकाता वाले इलाके में की गई थी।

30:11

और इसके संस्थापक सदस्यों में इसके

30:13

फाउंडिंग मेंबर्स में राजा राममोहन राय

30:16

थे, द्वारकानाथ टैगोर थे और विलियम एडमम

30:20

थे। तो ये आप ये कह सकते हैं बहुत ही

30:22

प्रोटोो इसको तो पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन बस

30:25

कहा जाता है। ऐसे कुछ बड़े काम इसने किए

30:28

नहीं। पर चूंकि हमें पढ़ना है। एग्जाम में

30:30

पूछा गया है। तो याद रखिएगा कोलकाता

30:33

यूनिटेरियन कमेटी इसकी स्थापना 1823 में

30:37

की गई थी। ईयर उतना इंपॉर्टेंट नहीं है।

30:39

1823 में इसकी स्थापना की गई थी राजा

30:42

राममोहन राय द्वारकानाथ टैगोर और विलियम

30:45

एडमम के द्वारा। अब यहां पर दो बातें

30:47

समझिए कि ये पार्टी ने उतना ज्यादा काम

30:49

क्यों नहीं किया? इसके दो स्पेसिफिक रीज़न

30:52

थे। पहला रीजन इसका ये था कि जो राजा

30:54

राममोहन राय हैं उनका ज्यादा ध्यान

30:57

राजनीतिक सुधारों पर नहीं था। ज्यादा फोकस

30:59

उनका पॉलिटिकल रिफॉर्म पर नहीं था। उनका

31:02

ज्यादा फोकस था सामाजिक सुधार पर। ज्यादा

31:05

उनका फोकस था सोशल और रिलीजियस रिफॉर्म

31:08

मूवमेंट पर। वो सभी के लिए आंदोलन कर रहे

31:10

थे। और जो दूसरी कुप्रथाएं चल रही थी,

31:13

उसके लिए वो लगातार आंदोलन कर रहे थे। ये

31:16

इसका एक रीज़न हो गया। दूसरा रीजन ये हो

31:18

जाएगा कि इस समय

31:21

भारत में कहते हैं ना कि एक राष्ट्रीय

31:23

चेतना नहीं थी। इंडिया में एक नेशनलिज्म

31:25

की फीलिंग नहीं थी कि वो राष्ट्रीय

31:27

मुद्दों को समझ सके। वो नेशनल इश्यूज को

31:30

समझ सके। तो यहां पर याद रखेंगे कोलकाता

31:33

यूनिटेरियन कमेटी कोलकाता में ही इसकी

31:36

स्थापना राजा राममोहन राय, द्वारकानाथ

31:38

टैगोर और विलियम एडमम के द्वारा की गई थी।

31:42

आगे बढ़ते हैं, अगले पार्ट पर आते हैं। जो

31:44

अगली कमिटी है, उसका नाम है बंग भाषा

31:47

प्रकाशक सभा। वेरी मच इंपॉर्टेंट। इसको

31:50

याद रखेंगे। अगली कमेटी है बंग भाषा

31:53

प्रकाशक सभा और इसे 1836 में 1836 में

31:59

कोलकाता में ही इसे इस्टैब्लिश किया गया

32:01

था। अच्छा एक बात आप और समझिएगा। देखिए

32:04

भारत में अगर आप पूरे-पूरे भारत की बात

32:06

करें तो इंडिया में ज्यादातर इस कोलकाता

32:09

वाले इलाके में ही आंदोलनों की शुरुआत

32:12

होगी। इवन जब कांग्रेस की भी स्टार्टिंग

32:14

होगी तो ज्यादातर यहीं के लोग पार्टिसिपेट

32:16

करेंगे। इसका एक बहुत बेसिक रीजन है। एक

32:19

तो ब्रिटिश भारत का 1911 से पहले 1911 से

32:24

पहले ये ब्रिटिश भारत का एडमिनिस्ट्रेटिव

32:27

हेड क्वार्टर था। प्रशासनिक केंद्र था। ये

32:29

इसका पहला कारण है और दूसरा कारण यहीं पर

32:32

ये अबकि ये एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन था तो

32:34

जितने भी एजुकेशन रिफॉर्म हुए या जितने भी

32:38

आप कहें ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटी आई वो इसी

32:41

इलाके में सबसे ज्यादा आएंगे तो इसी इलाके

32:44

में कुछ जमींदार वर्ग निकले और यहीं से

32:47

कुछ स्कॉलर भी निकल कर के आएंगे और यही

32:50

स्कॉलर जब बाहर गए इन्होंने चीजों को पढ़ा

32:53

फिर ये भारत वापस आए और भारत में वापस आने

32:56

के बाद इन्होंने अलग अलग-अलग संस्थाओं का

33:00

निर्माण किया। अलग-अलग इंस्टीट्यूशन को

33:02

इन्होंने इस्टैब्लिश किया। फिर दूसरा रीजन

33:05

आपको ये देखने मिलेगा। बम बॉम्बे वाला

33:07

इलाका देखने मिलेगा और तीसरा आपको मद्रास।

33:10

क्योंकि ये तीन वो इनिशियल जगह हैं। ठीक

33:12

है? बॉम्बे में उस समय गुजरात का रीजन भी

33:15

आएगा। तो बंगाल, बॉम्बे और मद्रास। ये तीन

33:18

वो इनिशियल इलाके थे जहां पर ब्रिटेन ने

33:21

ज्यादातर अपना एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल

33:25

रीजन रखा और ज्यादातर एक्टिविटी ब्रिटेन

33:27

की यहीं पर की गई। तो आपने देखा कोलकाता

33:31

यूनिटेरियन कमेटी भी कोलकाता में बनाई गई

33:33

थी और दूसरा जो है बंग भाषा प्रकाशक सभा

33:36

इसको भी कोलकाता वाले रीजन में इस्टैब्लिश

33:39

किया गया। इसको राजा राममोहन राय के

33:42

अनुयायियों ने सम्मिलित रूप से बनाया था

33:44

और इसके बारे में एक ही बात इंपॉर्टेंट है

33:46

कि ये बंगाल में स्थापित प्रथम राजनीतिक

33:50

संगठन है। इट इज दी फर्स्ट पॉलिटिकल

33:52

ऑर्गेनाइजेशन एस्टैब्लिश्ड इन द बंगाल। ये

33:55

प्लीज याद रखिएगा। यह प्रश्न एक बार आ

33:58

चुका है कि बंगाल में स्थापित पहली

34:01

राजनीतिक संस्था कौन सी थी? व्हिच वाज़ दी

34:04

फर्स्ट पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन

34:06

एस्टैब्लिश्ड इन द बंगाल। डू रिमेंबर इट

34:09

वाज़ दी बंग भाषा प्रकाशक सभा एस्टैब्लिश्ड

34:12

बाय दी फॉलोअर्स ऑफ राजा राममोहन राय एंड

34:15

इट वाज़ क्रिएटेड इन द 1836 इन द कोलकाता

34:19

इटसेल्फ। ठीक है? कार्य वही रहेगा कि क्या

34:21

करना है कि सुधार के लिए क्या करना है? तो

34:24

सुधार के लिए रिक्वेस्ट करना है। वही

34:25

कार्य है कि अलग से मूवमेंट नहीं करेंगे

34:28

पर ब्रिटिश गवर्नमेंट के पास जाना है और

34:30

रिफॉर्म के लिए हमें रिक्वेस्ट करना है।

34:32

ठीक है? और साथ ही साथ क्या करना है? देश

34:35

में पॉलिटिकल अवेयरनेस फैलाना है। देश में

34:38

राजनीतिक जागरूकता को हमें फैलाना है।

34:40

चलिए अगली सभा की हम बात करते हैं। याद

34:43

रखते जाइएगा। कोलकाता यूनिटेरियन सभा पहली

34:47

राजा राममोहन राय द्वारकानाथ टैगोर। दूसरा

34:50

बंग भाषा प्रकाशक सभा 1836 और इसको बनाया

34:55

गया बनाया था राजा राममोहन राय और उनके

34:57

अनुयाई ने। यहीं पर याद हो जाएगा। बस फोकस

35:00

रखे रहना मेरे दोस्त सारी चीजें आपको यहीं

35:02

पर याद हो जाएंगी। आगे बढ़ते हैं अगले

35:04

क्वेश्चन पे चलते हैं। ये बड़ी इंपॉर्टेंट

35:07

सोसाइटी है और इसका नाम है लैंड होल्डर

35:10

सोसाइटी। बहुत इंपॉर्टेंट है। अगेन इट इज़

35:12

वेरी मच इंपॉर्टेंट। लैंड होल्डर सोसाइटी

35:15

या कई बार इसको जमींदारी एसोसिएशन भी कहा

35:18

जाता है। लैंड होल्डर सोसाइटी या जमींदारी

35:22

एसोसिएशन इसको कहा जाता है। इसकी स्थापना

35:25

भी कोलकाता वाले इलाके में की गई थी।

35:27

द्वारकानाथ टैगोर और दूसरे लोगों ने मिलकर

35:30

के इसकी स्थापना की थी। अब यहां पर आप

35:33

देखें तो यहां पर लिखा गया है जमींदारी

35:35

एसोसिएशन। अब जो चीज जमींदारों के लिए

35:38

बनाई जा रही है मेरे दोस्त तो उसका काम भी

35:41

क्या होगा? वो किसके हितों की रक्षा

35:43

करेगी? तो निश्चित सी बात है वो जमींदारों

35:46

के हितों के लिए ही काम करेगी। वो

35:48

जमींदारों के लिए ही वर्क कर रही होगी। तो

35:51

आप कहोगे सर जमींदारों को क्या दिक्कत आ

35:53

रही थी? तो जमींदारों को क्या हुआ था? जो

35:56

लैंड रेवेन्यू सिस्टम बनाए गए थे तो उसमें

35:59

आपको याद होगा एक सूर्यस्त कानून पढ़ा था

36:02

हम लोगों ने। ठीक है? सनसेट लॉ हमने उसमें

36:04

पढ़ा था। तो कई बार जमींदारों से जमीनों

36:06

को छीना जा रहा था। उनके भी अधिकारों को

36:09

दबाया जा रहा था। तो जमींदारों ने यूनाइट

36:12

होकर के जितने भी जमींदार थे उन्होंने

36:15

एकत्रित हो के एक संगठन बनाया था और इस

36:18

संगठन का नाम था जमींदारी एसोसिएशन या

36:21

लैंड होल्डर सोसाइटी। याद रखिएगा जमींदारी

36:25

संगठन का हेड क्वार्टर या इसको बनाया

36:28

कोलकाता वाले इलाके में गया था। द्वारकाना

36:30

टैगोर ने यहां पर प्रमुख भूमिका निभाई थी

36:33

और ये जमींदारों के हितों की रक्षा करता

36:35

था। उससे भी बड़ी बात यह है कि ये भारत

36:38

में पहली बार संगठित रूप से राजनीतिक

36:42

क्रियाकलाप इसने आरंभ किया था। अब यहां पर

36:45

एक शब्द आया संगठित रूप से। यहां पर एक

36:47

शब्द आया ऑर्गेनाइज्ड। अब इससे पहले क्या

36:50

था? तो इससे पहले जो हमने बंग भंग बंग

36:54

भाषा प्रकाशक सभा की बात की और उससे भी

36:56

पहले हमने कोलकाता यूनिटेरियन सोसाइटी की

36:59

बात की। तो इन्होंने क्या नहीं किया?

37:01

इन्होंने संगठन नहीं बनाया। इन्होंने

37:03

ऑर्गेनाइजेशन नहीं बनाया। सर संगठन का

37:06

मतलब क्या होता है? संगठन का मतलब ये होता

37:08

है लोगों को जोड़ना उस संगठन से। आप एक

37:11

बहुत बड़ा ऑर्गेनाइजेशन बना लिए। जैसे आज

37:13

भारत में पॉलिटिकल पार्टियां हैं तो इनके

37:15

बड़े-बड़े संगठन है। इनका बड़ा-बड़ा

37:17

ऑर्गेनाइजेशन है। पर ऐसा काम उन दोनों ने

37:20

नहीं किया। ऐसा काम करेगी लैंड होल्डर

37:24

सोसाइटी जमींदारी एसोसिएशन। और जमींदारी

37:27

एसोसिएशन भारत में पहली बार संगठित रूप से

37:30

राजनीतिक क्रियाकलापों को आरंभ करेगी।

37:32

ऑर्गेनाइज्ड होकर इंडिया में पॉलिटिकल

37:35

एक्टिविटी को स्टार्ट करेगी जिसको

37:37

द्वारकानाथ टैगोर और दूसरे लोगों के

37:40

द्वारा स्थापित किया गया था। अगली जो सभा

37:42

है वो ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन है।

37:45

कंफ्यूज नहीं होना है मेरे दोस्त। देखो ये

37:48

ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन है। इंडियन

37:51

एसोसिएशन अलग है। इट इज ब्रिटिश इंडियन

37:54

एसोसिएशन। ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन इसे

37:57

1851 में कोलकाता में इसे भी स्थापित किया

38:01

गया था। चार संस्थाएं चारों कोलकाता में

38:04

देखो एक चीज यहीं पर याद हो जाएगी कोलकाता

38:06

यूनिटेरियन राजा राममोहन राय वाली कोलकाता

38:09

में है बंग भाषा प्रकाशक सभा कोलकाता में

38:11

राजा राममोहन राय लैंड होल्डर सोसाइटी

38:14

कोलकाता में है द्वारकानाथ टैगोर और इसके

38:16

बाद ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन ये भी

38:20

कोलकाता में है और बेसिकली होगा ये कि

38:23

लैंड होल्डर सोसाइटी को ही आगे जाकर के

38:26

ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन के नाम से जाना

38:28

जाएगा। कैसे बनेगी? तो दोस्तों दो अलग-अलग

38:31

सोसाइटी थी। एक का नाम था लैंड होल्डर

38:34

सोसाइटी। हमने यहां पर देख लिया और दूसरा

38:36

था बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी। इन

38:40

दोनों का मर्जर हो गया। लैंड होल्डर

38:43

सोसाइटी और बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी

38:46

का मर्जर हो गया। और इन दोनों के मर्जर से

38:49

जो नई सोसाइटी बनी या जो नया पॉलिटिकल

38:52

ऑर्गेनाइजेशन बना उसका नाम रखा गया

38:55

ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन 1851 में। और

38:59

इसमें दो लोगों की भूमिका सबसे ज्यादा थी।

39:02

एक द्वारिकाना टैगोर और दूसरे थे राधाकांत

39:06

देव। द्वारकानाथ टैगोर और राधाकांत देव।

39:09

राधाकांत देव के बारे में आपको याद आ रहा

39:12

होगा। राधाकांत देव ने धर्म सभा की

39:14

स्थापना की थी और ये वही व्यक्ति हैं

39:17

जिन्होंने सती प्रथा का समर्थन किया था।

39:20

और उन्होंने जो सती के अबवॉलिशन के लिए जो

39:22

कानून आया था, सती प्रथा को समाप्त करने

39:24

के लिए जो कानून आया था, उसका इन्होंने

39:27

विरोध किया था। तो याद रखेंगे दोस्तों

39:29

लैंड होल्डर सोसाइटी लैंड होल्डर सोसाइटी

39:32

और बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी मिलकर के

39:35

ही क्या बनाएंगी ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन

39:38

बनाएंगी याद रखिएगा इंडियन एसोसिएशन अलग

39:41

है ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन अलग है कितने

39:44

संस्थान हो गए टोटल चार हो गए भैया एक दो

39:48

तीन और चार संस्थान हो गए आओ आगे बढ़ते

39:50

हैं खत्म करते हैं क्लास को दो-तीन पॉइंट

39:53

और इसके बाद अगला है लंदन इंडियन एसोसिएशन

39:56

सोसाइटी और एक है ईस्ट इंडिया एसोसिएशन।

40:00

तो ये दोनों याद रखिएगा प्रीलिम्स में

40:02

पूछे गए हैं। लंदन इंडियन सोसाइटी और ईस्ट

40:06

इंडिया एसोसिएशन इन दोनों को ही लंदन में

40:09

एस्टैब्लिश किया गया था भारत के बाहर और

40:12

दोनों को ही दादा भाई नौरोजी के द्वारा

40:14

स्थापित किया गया था। तो दादा भाई नौरोजी

40:17

ने भारत में संस्थानों की स्थापना की थी।

40:20

कांग्रेस के फाउंडिंग मेंबर में से एक रहे

40:23

हैं। लेकिन भारत से बाहर जाकर के भी

40:26

इन्होंने कई संस्थानों की स्थापना की थी।

40:28

और यह भी आपको याद रखना है। दादा भाई

40:30

नौरोजी ब्रिटिश पार्लियामेंट में चुनाव

40:33

जीते थे। और ये फिसबेरी से चुनाव जीत के

40:35

ब्रिटिश पार्लियामेंट गए थे। ये भी हम

40:37

लोगों ने पहले पढ़ा हुआ है। जब हम दादा

40:39

भाई नौरोजी के बारे में बात कर रहे थे। तो

40:43

दादा भाई नौरोजी ने लंदन में दो संस्थान

40:45

बनाए थे। दोनों का नाम आपको याद रखना है।

40:48

लंदन में दो इंस्टीट्यूशन इन्होंने बनाए

40:51

थे। एक है लंदन इंडियन एसोसिएशन, लंदन

40:55

इंडियन एसोसिएशन और दूसरा आपका है ईस्ट

40:59

इंडिया एसोसिएशन। तो देखिए कंफ्यूज नहीं

41:01

होंगे। ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन कोलकाता

41:05

है जो जमींदारों के हितों के लिए काम कर

41:07

रही है। लंदन इंडियन एसोसिएशन और ईस्ट

41:11

इंडिया एसोसिएशन ये दोनों लंदन में

41:14

स्थापित की गई हैं और ये दोनों दादा भाई

41:17

नौरोजी के द्वारा स्थापित की गई है।

41:19

छोटा-छोटा कंफ्यूजन नाम को लेकर के हो

41:21

जाता है। इस कंफ्यूजन से हमें यहां पर

41:23

बचना है। चलिए आगे बढ़ते हैं अगले पार्ट

41:26

पर। अगला यहां पर दिया गया है इंडियन

41:28

एसोसिएशन। इसको तो यह हम बोलते हैं ना

41:31

अपनी भाषा में। ये महा इंपॉर्टेंट है मेरे

41:33

दोस्त। यह बहुत बहुत ज्यादा जरूरी है।

41:36

इसको मत भूलिएगा। इसका नाम है इंडियन

41:39

एसोसिएशन। इंडियन एसोसिएशन को भी कोलकाता

41:43

में स्थापित किया गया था। सुरेंद्रनाथ

41:46

बनर्जी और आनंद मोहन बोस के द्वारा। दो

41:49

मिनट कहानी सुनिए। सारी चीजें आपको समझ

41:51

में आएंगी। देखिए एक शिशिर कुमार घोष थे

41:55

और उन्होंने 1875 में एक इंडियन लीग की

41:59

स्थापना की थी। दो मिनट मैं आपको अच्छे से

42:00

समझा देता हूं। इस तरीके से आप समझिए।

42:02

देखिए 1875 में 1875 में शिशिर कुमार घोष

42:09

इन्होंने किसकी स्थापना की? इन्होंने

42:12

इंडिया लीग की स्थापना की। इंडिया लीग की

42:15

स्थापना की। आगे जाकर के 1876 में एक दो

42:20

व्यक्ति यहां पर आते हैं और एक का नाम था

42:23

सुरेंद्रनाथ बनर्जी और दूसरे व्यक्ति का

42:26

नाम था आनंद मोहन बोस। अब आपको दोस्तों एक

42:29

बात बता दूं कि जो सुरेंद्रनाथ बनर्जी हैं

42:32

वो एक आईसीएस ऑफिसर थे। वो एक इंडियन

42:36

सिविल सर्वेंट के ऑफिसर थे। जिन पर झूठे

42:40

आरोप लगाकर इनको बर्खास्त कर दिया गया था।

42:43

इनको डिसमिस कर दिया गया था। ओके। तो ये

42:46

सुरेंद्रनाथ बनर्जी जो है वो एक एक्स आईएस

42:49

आईआईसीएस ऑफिसर थे। इंडियन सिविल सर्वेंट

42:52

के ऑफिसर थे। जिन पर झूठे आरोप लगा के

42:56

उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। तो

42:58

सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस

43:01

इन्होंने मिलाकर के एक सभा बनाई जिस सभा

43:04

का नाम था इंडिया एसोसिएशन। क्या नाम था?

43:08

इंडिया एसोसिएशन इसका नाम था। और इन्होंने

43:12

तीन बातों के लिए कार्य किया। इंडिया

43:14

एसोसिएशन तीन चीजों पर केंद्रित थी। सबसे

43:17

पहला जो इनका आंदोलन था वो था सिविल सेवा

43:21

में आयु को लेकर के। सिविल सेवा में आयु

43:25

को लेकर के एज को लेकर के। आपको याद होगा

43:28

दोस्तों कि एक समय ऐसा आया था। जब सिविल

43:32

सेवा का परीक्षा देने का न्यूनतम आयु

43:35

मिनिमम ऐज 19 ईयर कर दिया गया था। तो

43:38

सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने इंडिया एसोसिएशन के

43:41

द्वारा इसी डिमांड को बार-बार रखा, इसी

43:44

मांग को बार-बार रखा कि सिविल सेवा की

43:47

न्यूनतम आयु को बढ़ाया जाए। इसको मैक्सिमम

43:51

आगे बढ़ाया जाए। इसको आगे कर दिया जाए।

43:53

ठीक है? क्योंकि सॉरी अधिकतम आयु माफ़

43:55

कीजिए मैक्सिमम एज मैक्सिमम। मैक्सिमम एज

43:58

19 मतलब 19 के बाद आप पेपर नहीं दे सकते।

44:00

तो इस आयु को बढ़ाया जाए। इसके अलावा आपको

44:03

याद होगा एक एक्ट आया था

44:07

18 अह 1878 के आसपास एक एक्ट आया था जिसका

44:10

नाम था वर्नाकुलर प्रेस एक्ट। ठीक है? और

44:13

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के द्वारा जो भारतीय

44:16

अखबार थे जो इंडियन न्यूज़पेपर थे उनको

44:19

बैन कर दिया गया था। उन पर कई प्रकार के

44:21

प्रतिबंध लगा दिए गए थे। तो इसका विरोध भी

44:23

वो कर रहे थे। तो जो इंडिया एसोसिएशन है

44:26

ये बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट ऑर्गेनाइजेशन

44:29

है जो कि सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन

44:32

बोस के द्वारा बनाई गई थी। इसने सिविल

44:35

सेवा की आयु को बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा

44:37

आंदोलन चलाया था और बाद में दोस्तों यही

44:41

इंडिया एसोसिएशन 1886 में 1886 में ये

44:46

मर्ज हो जाती है। किसके साथ? याद रखिएगा

44:50

ये मर्ज हो जाती है इंडियन नेशनल कांग्रेस

44:53

के साथ। ये मर्ज हो जाती है भारतीय

44:56

राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ। तो शिशिर

44:58

कुमार घोष ने इंडिया लीग बनाई थी। इंडिया

45:01

लीग आगे जाकर के इंडिया एसोसिएशन में

45:03

तब्दील होती है और इंडिया एसोसिएशन 1886

45:06

में 1886 में कांग्रेस के साथ मर्ज हो

45:10

जाती है और आगे कांग्रेस पर आप जानते हैं

45:12

कि एक बड़ा संगठन बनता है और बहुत सारे

45:15

आंदोलनों को ये आगे बढ़ाता है। यहां पर

45:17

कुछ जानकारी लिखी हुई है। वो ध्यान से आप

45:19

पढ़ें। इंडिया लीग के बारे में यहां लिखा

45:22

हुआ है। तो इंडियन एसोसिएशन ले लिया अनेक

45:25

ने तो सिविल सेवा परीक्षा की आयु बढ़ा आयु

45:27

सीमा ठीक है वर्नाकुलर प्रेस एक्ट

45:30

कांग्रेस में इसका विलय हो जाता है 1886

45:33

में तो दोस्तों इस प्रकार हमारी प्रमुख

45:36

संस्थान थे एक बार रिवीजन करेंगे फिर

45:38

चीजों को खत्म करेंगे सबसे पहले हमने क्या

45:41

पढ़ा तो सबसे पहले हमने कोलकाता

45:44

यूनिटेरियन सोसाइटी के बारे में पढ़ा इसको

45:47

कोलकाता में ही बनाया गया था ठीक है इसको

45:50

कोलकाता में ही बनाया गया था ठीक है?

45:53

कोलकाता वाले रीजन में ही इसको बनाया गया

45:54

था। राजा राममोहन राय साथ में रिवीजन

45:58

कीजिएगा। राजा राममोहन राय, द्वारकानाथ

46:00

टैगोर और दूसरे लोगों के द्वारा इसे बनाया

46:03

गया था। दूसरा हमने डिस्कस किया बंग भाषा

46:07

प्रकाशक सभा। ठीक है? इसे भी कोलकाता वाले

46:11

रीजन में बनाया गया था। और इसे राजा

46:14

राममोहन राय के फॉलोअर्स के द्वारा बनाया

46:17

गया था। इनके नेतृत्वकर्ताओं के रूप में

46:19

इनको बनाया था। और इसमें आपको याद रखना है

46:22

कि ये बंगाल का फर्स्ट पॉलिटिकल

46:25

ऑर्गेनाइजेशन था। बंगाल की पहली राजनीतिक

46:29

संस्था का नाम इसको दिया जाता है। फिर

46:31

इसके बाद हम लोगों ने क्या डिस्कस किया?

46:33

तो आप लोगों को याद आ रहा होगा हमने लैंड

46:36

होल्डर्स सोसाइटी के बारे में बात की

46:38

जिसको जमींदारी एसोसिएशन भी कहा जाता है।

46:41

जमींदारी एसोसिएशन भी कोलकाता वाले इलाके

46:44

में बनाया गया था। ठीक है? द्वारकानाथ

46:47

टैगोर की इसमें बहुत बड़ी भूमिका थी।

46:49

द्वारकानाथ टैगोर की और इसने क्या किया

46:52

था? इसे कहा जाता है कि यह इंडिया का ये

46:56

इंडिया का फर्स्ट ऑर्गेनाइज्ड पॉलिटिकल

46:59

पार्टी इसको कहा गया था कि इसमें संगठन

47:02

किया गया था लोगों का। तो पहला संगठित

47:04

प्रयास किया गया था। बाद में आपको याद

47:06

रखना है कि एक ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन

47:10

बनाया गया। अगेन ये भी कोलकाता में ही

47:13

बनाया गया था। ठीक है? और इसमें दो लोगों

47:15

का योगदान था। एक तो राधाकांत जी का

47:18

योगदान था और दूसरा इसमें द्वारकानाथ

47:20

टैगोर का योगदान था और इन दोनों का एक ही

47:23

काम था वो काम था जमींदारों के इंटरेस्ट

47:26

को प्रोटेक्ट करना जमींदारों के हितों की

47:30

रक्षा करना ये इन दोनों का काम था और यहां

47:32

पर याद रखेंगे कि जो ब्रिटिश इंडिया

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एसोसिएशन है वो बंगाल एसोसिएशन और लैंड

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होल्डर सोसाइटी इन दोनों का मर्जर हो के

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ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की गई

47:44

थी। फिर हमने दादा भाई नौरोजी के बारे में

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बात की और दादा भाई नौरोजी ने दो संस्थान

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बनाए और दोनों ही संस्थान उन्होंने लंदन

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में बनाए। एक संस्थान का नाम था लंदन

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इंडिया सोसाइटी और दूसरे संस्थान का नाम

48:00

क्या था दोस्तों? तो दूसरे इंस्टिट्यूशन

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का नाम था ईस्ट इंडिया एसोसिएशन। ये दोनों

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ही संस्थान उन्होंने लंदन में बनाए थे

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अवेयरनेस को बढ़ाने के लिए। फिर हमने एक

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और संस्थान की बात की। इंडिया एसोसिएशन की

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हमने बात की जो कि 1876 में सुरेंद्रनाथ

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बनर्जी और आनंद मोहन बोस के द्वारा बनाया

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गया और ये सबसे इंपॉर्टेंट ऑर्गेनाइजेशन

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रहेगा। इसे भी कोलकाता में बनाया गया था

48:28

और आगे जाकर के 1886 में कांग्रेस में

48:32

इसका विलय हो जाएगा। तो दोस्तों ये हमारे

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कांग्रेस के पहले स्थापित सभी महत्वपूर्ण

48:38

संस्थान थे। एक पीपीटी आप देख सकते हैं।

48:41

इस प्रकार से मैंने पूरी एक पीपीटी तैयार

48:43

कर दी है। अब इसकी पीपीटी आपको कहां पर

48:46

मिलेगी? तो इसके लिए हमारे टेलीग्राम चैनल

48:48

को आप ज्वाइन कर लीजिए अभियान को।

48:50

Unacademy अभियान आप सर्च करेंगे या एक

48:52

मेरा Telegram चैनल भी है शुभम गुप्ता

48:54

पीडीएफ। वहां भी आपको मिल जाएगी। तो दोनों

48:56

जगह आपको ये पीपीटी मिल जाएगी। एक बात और

48:59

बता दूं दोस्तों अनअकडमी पर एमपीपीएससी के

49:01

लिए मेरे कोर्सेज स्टार्ट हो चुके हैं।

49:04

बढ़िया कोर्स अभी पिटी का खत्म होने वाला

49:06

है और ज्योग्राफी का कोर्स मैं 21 तारीख

49:08

से स्टार्ट कर रहा हूं। प्लीज अनअकडमी को

49:10

ज्वाइन करें। कोई भी सब्सक्रिप्शन लेने के

49:12

लिए आप मेरा कोड यूज़ करें एसजी लाइव।

49:15

अनअकडमी के जो एमपीपीएससी के प्राइस हैं

49:18

वो भी बढ़ने वाले हैं। तो जल्दी

49:19

सब्सक्रिप्शन लीजिए। मेरा कोड यूज़ करें

49:21

एसजी लाइव ताकि आपको 10% का डिस्काउंट मिल

49:24

सके। और हमारे नए चैनल को प्लीज लाइक

49:26

करें, शेयर करें और सब्सक्राइब करें। आई

49:28

विश आपको ये टॉपिक समझ में आया होगा।

49:30

बताइए आपके कोई डाउट है क्या?

49:37

बताइए। कोई डाउट है दोस्तों आप लोगों के?

49:40

एनी प्रॉब्लम? ऑल गुड। सारी चीजें क्लियर

49:43

हो गई?

49:45

सारी चीजें क्लियर हो गई?

49:48

10थ क्लास की एनसीईआरटी भी आने वाली है।

49:50

वो भी रेगुलर हो जाएगी। डोंट वरी यार।

49:54

इसका प्लेलिस्ट पल्लवी जी इसका प्लेलिस्ट

49:56

मैं यहां पर ऐड कर दूंगा। ओके ठीक है

50:02

वो हम डिस्कस कर लेंगे। ओके थैंक यू सो मच

50:04

गाइस। कल आप लोगों से फिर मिलते हैं। कल

50:06

फिर आप लोगों से मिलते हैं। प्लीज हमारे

50:08

इस नए चैनल को सपोर्ट कीजिएगा। लाइक

50:10

कीजिएगा, शेयर कीजिएगा, सब्सक्राइब

50:12

कीजिएगा और अभी अगली जो क्लास होगी वो

50:15

4:15 पर क्लास होगी। बहुत अच्छे तरीके से

50:18

इंडियन पिटी आप पढ़ेंगे मुकेश सैनी सर के

50:20

साथ दोस्तों और शाम को 6:00 बजे इंडियन

50:23

ज्योग्राफी लेकर के आ रहे हैं नूर आलम सर।

50:25

तो जुड़िए हमारे साथ इस प्लेटफार्म पर

50:28

सारी प्रिपरेशन हम आपको कराएंगे। अच्छा

50:30

कंटेंट प्रोवाइड कराएंगे। प्लीज हमारा साथ

50:32

दीजिए। लाइक कीजिए हमारे चैनल को, शेयर

50:35

कीजिए, सब्सक्राइब कीजिए। थैंक यू सो मच।

50:36

थैंक यू सो मच गाइस। टेक केयर।

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