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Koton Mein Koi, Koi Mein Bhi Koi, Mujhe Jaanenge, Pehchanenge ...kaise...??( Part 1)- BK Rini USA

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0:00

ओम

0:01

शांति। आज हम बहुत

0:05

इंपॉर्टेंट टॉपिक लेंगे। और बाबा कई बार

0:09

मुरली में कहते हैं कोटों में कोई मुझे

0:13

जानते हैं। और कोई में से भी कोई मैं जैसा

0:18

हूं वैसे मुझे पहचानते हैं। राइट? तो हम

0:23

देखेंगे कि बाबा को जानने के लिए सबसे

0:28

पहले

0:30

एक चीज बाबा कहते हैं जितना तुम अपने आप

0:33

को

0:34

जानोगे उतना तुम मुझे

0:37

पहचानोगे और या फिर जितना तुम मुझे

0:40

पहचानोगे उतना अपने आप को

0:43

जानोगे। तो पहले स्टेप में हम यह देखते

0:47

हैं कि बाबा अगर बोल रहे हैं कि जितना

0:52

तुम अपने आप को जानोगे उतना मुझे

0:56

पहचानोगे।

0:58

क्यों? क्योंकि अगर आज मैं अपने आप को एक

1:03

बॉडी माइंड मानकर जानती

1:06

हूं तो उसी आईडिया के थ्रू मैं परमात्मा

1:10

को पहचानने की कोशिश

1:13

करूंगी। राइट? और

1:17

इसीलिए अपने आप को जानना बहुत जरूरी है।

1:22

तो अपने आप को जानने के लिए बाबा हमें

1:25

कहते हैं अपने अनादि स्वरूप को जानो सबसे

1:31

पहले। और यह भी पहचानो कि अभी तुम अपने आप

1:34

को कैसे जानते हो। तो दोनों चीजें बोलते

1:38

हैं। राइट? तो अभी हमारा जो करंट अनुभव है

1:43

अपने लिए अपने प्रति वो क्या है? अगर हम

1:48

अपना करंट अनुभव देखें अपने

1:57

प्रति तो जब अगर हम देखते हैं ज्ञान में

2:03

आते हैं तो हम बहुत डिवोशनल भक्ति के

2:06

संस्कारों को लेकर आते हैं। भक्ति बहुत

2:09

ब्यूटीफुल चीज है। भक्ति का जो प्यार होता

2:12

है वो बहुत ब्यूटीफुल चीज है। है ना? पर

2:16

उसमें एज अ पर्सन एज अ एज अ बॉडी एंड अ

2:21

माइंड मैं परमात्मा को अपने आप से एक दूर

2:25

ऑब्जेक्ट के रूप में पूजती हूं। राइट? और

2:30

परमात्मा मुझसे बहुत दूर है। मुझसे बहुत

2:32

ऊंचा है और मैं नीची हूं। इस भाव से हम

2:36

परमात्मा

2:37

को पूजते हैं भक्ति में। राइट? और वो

2:42

डिवोशनल संस्कार जो होते हैं भक्ति के

2:45

संस्कार एक चीज भक्त के लिए भक्ति के

2:48

संस्कार के

2:50

लिए बहुत मुश्किल होती है और वो क्या

2:55

है पता है

2:57

आपको वो है अपने भक्ति के ऑब्जेक्ट को

3:04

छोड़ना राइट तो आज जो भक्ति का

3:09

ऑब्जेक्ट पहले कोई मूर्ति हुआ करती थी।

3:12

ज्ञान में आने के बाद एक इमेज हो जाती है

3:15

भक्ति का ऑब्जेक्ट। है ना? तो अभी भी जैसे

3:20

हम ज्ञान लेना शुरू करते हैं

3:23

तो कुछ माइंड्स हैं जो एक झाटू

3:29

में

3:31

अपने जैसे कि वो माइंड जो पुराना

3:34

संस्कारों का पैकेज

3:37

है वो एक झाटू में खत्म हो जाता है।

3:40

मर्जीवा जैसे ब्रह्मा बाबा वह माइंड जिसको

3:44

हम ब्रह्मा बाबा बोलते हैं वह माइंड एक

3:47

झाटू में सरेंडर टू गॉड राइट जिसमें अब

3:52

परमात्मा ही करण करावनहार रहा उस माइंड का

3:56

कोई ओनर ही नहीं रहा राइट अब परमात्मा ही

3:59

ओनर उस माइंड का चलाने वाला ऐसे मेजॉरिटी

4:04

में नहीं होता है

4:06

क्योंकि मेजॉरिटी माइंड्स को अभी भी आज

4:09

चलाने आने वाला एक सेपरेट माइंड बॉडी का

4:16

थॉट है। राइट? एक जैसे मैं एक थिंकर और

4:21

डअर हूं। तो वो चलाने वाला एक जो

4:24

आइडेंटिटी है थिंकर और डअर की वो माइंड को

4:27

चलाती है। राइट? और वो भी एक बहुत

4:30

स्ट्रांग भक्ति का संस्कार है। पर

4:33

परमात्मा कहते हैं अच्छा ठीक है। तुम

4:36

डिसाइड करो दोनों में से तुम अपने आप को

4:39

कहां देखते हो? एक झाटू में सरेंडर

4:42

परमात्मा रिस्पांसिबल है अब माइंड के लिए।

4:46

अच्छे और बुरे संस्कारों का जो पैकेज

4:49

है जो भी है परमात्मा का बोझ है। अब मैं

4:54

कुछ भी नहीं परमात्मा ही चला रहा है तो

4:57

फिर परमात्मा के संस्कार उस माइंड को

5:00

चलाएंगे। राइट? दैट इज वन थिंग। और एक और

5:04

यह भी है कि अगर मान लीजिए अभी भी यह लगता

5:08

है कि नहीं मुझे मैं तो हूं कुछ मैं अलग

5:12

हूं तो और परमात्मा मुझसे थोड़ा दूरी पर

5:16

है डिस्टेंस पर है। अगर यह फीलिंग भी है

5:18

दैट्स ओके मैं तुमको वहां मिलूंगा जहां पर

5:21

तुम अपने आप को समझते हो। हे मन है ना? तो

5:25

बाबा जैसे कि मन से बोलते हैं कि तुम अपने

5:27

आप को समझते हो तुम मुझसे दूरी पर है। तो

5:30

मैं भी तुमको बोलता हूं मैं बहुत दूर से

5:32

आता हूं।

5:34

राइट? क्यों बोलते हैं बाबा इस मन को कि

5:37

मैं बहुत दूर से आता हूं। क्योंकि बाबा उस

5:41

माइंड को

5:43

वहां मीट करना चाहते हैं। वहां मिलना

5:46

चाहते हैं जहां पर वह आज है। क्योंकि नहीं

5:50

तो उसके लिए परमात्मा सदैव दूरी पर ही

5:53

रहेगा। तो वह जो डिस्टेंस है, दूरी है

5:58

परमात्मा और मन के बीच में उस दूरी को

6:01

खत्म करने के लिए बाबा जहां पर भी मन अपने

6:05

आप को समझता है, उस आधार पर उस मन से

6:08

मिलते हैं।

6:10

राइट? तो कोई मन समझ कर चल रहा है। मैं

6:13

अभी सेपरेट पर्सन हूं। बहुत दूर हूं

6:16

परमात्मा

6:17

से। इस दुनिया में रहता हूं। तो बाबा

6:20

बोलते हैं अच्छा ठीक है। मैं भी बहुत दूर

6:22

देश से आया हूं। हम अब यह पोएटिक वे है

6:26

बोलने का। इसको लिटरली नहीं लेना है। कई

6:29

बार क्या होता है हम जो पोएटिक वे होता है

6:31

लेने का उसको लिटरली ले लेते हैं और जो

6:33

लिटरल लेना चाहिए उसको पोएटिकली ले लेते

6:36

हैं। वो भी हम देखेंगे। है ना? तो जैसे कि

6:40

तो बाबा हमें बोलते हैं कि

6:43

[संगीत]

6:45

तुम अब मैं तुम्हारे पास आ गया हूं। हे मन

6:49

है ना। तो अब तुम जितना

6:53

मेरी नजर से अपने आप को

6:55

देखोगे तो तुम्हारा अपना सेंस ऑफ सेपरेशन

6:59

डिॉल्व होता जाएगा। राइट? तो यह एक बहुत

7:04

ब्यूटीफुल मुरली का पैसेज है जो मैं पढ़ना

7:07

चाहूंगी क्योंकि इसमें बाबा हमें यह बताते

7:10

हैं माइंड को

7:12

कि तुम कैसे अपने उस निराकार सत्य को जान

7:16

सकते हो। यह है फर्स्ट जनवरी 23 की मुरली।

7:20

इसमें बाबा ने कहा है अहंकार आने का

7:22

दरवाजा एक शब्द है। वह कौन सा? मैं। तो यह

7:27

अभ्यास करो। जब भी मैं शब्द आता है तो

7:32

ओरिजिनल स्वरूप सामने लाओ। मैं कौन? मैं

7:37

आत्मा या फलाना फलानी। औरों को ज्ञान देते

7:41

हो ना? मैं शब्द उड़ाने वाला है। मैं शब्द

7:45

नीचे लाने वाला

7:47

है। तो मैं कहने से ओरिजिनल निराकार

7:50

स्वरूप याद आ जाए। यह नेचुरल हो जाए।

7:55

राइट? तो अनेक बार मैं शब्द यूज़ करते हो।

7:58

सारे दिन में 25 बार तो जरूर करते हो।

8:02

बोलते नहीं तो सोचते तो होंगे। मैं यह

8:05

करूंगी, मुझे यह करना है। है ना? तो जितनी

8:10

बार मैं शब्द यूज करते हो सोचते हो तो

8:14

उतनी बार यह ध्यान रखो कि आत्मा स्वरूप की

8:18

स्मृति

8:20

निराकारी निराकारी

8:23

ओरिजिनल निराकार स्वरूप याद आ जाए। है ना?

8:28

तो इसलिए अपने आप को जानना बहुत जरूरी है।

8:31

तो जब हम बोलते हैं मैं मैं कौन?

8:36

तो मुझे यह याद है

8:40

कि जब बाबा के

8:42

साथ पहली बार बाबा का जब यह बहुत गहरा

8:46

इंट्रोडक्शन और साथ महसूस हुआ तो सबसे

8:50

पहले बाबा ने जैसे यही एक इंट्रोडक्शन

8:52

दिया जो मैं तुम हो वो मैं निराकारी मैं

8:58

है और निराकारी मतलब

9:01

क्या जिसका कोई आकार आकार

9:05

नहीं है ना तो जब कोई आकार नहीं तो

9:11

बिगिनिंग और एंड भी नहीं मतलब आदि और अंत

9:16

भी

9:18

नहीं अगर आदि और अंत नहीं तो फिर कोई हद

9:24

भी

9:25

नहीं क्योंकि हद है मतलब कोई तो शुरुआत और

9:29

अंत होगी तब हद होगी राइट जब शुरुआत और

9:33

अंत ही नहीं तुम्हारा तुम अपने अनादि

9:36

स्वरूप निराकार सत्य को जानो तो आदि और

9:40

अंत नहीं हम इसको प्रैक्टिकली भी देखेंगे

9:43

अभी और लिमिट नहीं हद

9:47

नहीं तो

9:49

फिर तुम किस में आओगे और

9:53

जाओगे हद होगी तो यहां से वहां तक भी आओगे

9:57

और जाओगे कमिंग एंड गोइंग होगा राइट पर जब

10:01

कोई हद ही नहीं

10:04

सीमा ही नहीं बेहद की हद और बेहद से भी

10:07

पार इनफ तो तुम्हारा अपना वह सत्य जब

10:10

तुमने जाना तो तुम किस स्पेस भी नहीं है

10:13

तो स्पेस में तो जैसे ये ऑब्जेक्ट है है

10:18

ना इसकी एक हद है। ये यहां शुरू होती है।

10:22

यहां खत्म होती है या यहां शुरू होती है।

10:25

यहां खत्म होती है। राइट? इसकी डेप्थ है,

10:30

इसकी विड्थ है। इसकी लेंथ है। तो इसकी हद

10:33

है। इसकी एक बाउंड्री है। तो ये यहां से

10:37

यहां जा सकती है। राइट? पर जिस चीज की कोई

10:42

आकार ही नहीं है। इसका तो आकार भी है।

10:45

राइट? चीज है। आकार है। हम रिलेटिवली

10:49

समझने की कोशिश कर रहे हैं। पर जिस चीज का

10:52

कोई आकार ही नहीं।

10:56

तो अब जिसका कोई आकार ही नहीं है। अब हम

10:58

उसका मिसाल देते हैं स्पेस का। है ना? अब

11:01

स्पेस का कोई आकार नहीं है। तो हम कहां

11:04

बोलेंगे स्पेस कहां खत्म होती है, कहां

11:07

शुरू होती है? हम बोल ही नहीं सकते। है

11:10

ना? क्योंकि वो बे हद और बेहद से पार। ये

11:14

मिसाल है। हम ये नहीं बोल रहे हैं कि हम

11:16

स्पेस हैं। हम मिसाल दे रहे हैं। है ना?

11:20

तो मिसाल के तौर पर कोई शुरुआत और अंत

11:23

नहीं क्योंकि कोई आकार नहीं। तो बाबा हमें

11:26

बोल रहे हैं तुम निराकार हो। तो जब कोई

11:29

आकार नहीं तो जितनी बार मैं शब्द बोलते हो

11:32

वो मैं शब्द पॉइंट कर रहा है निराकार की

11:36

तरफ। पॉइंटर है मैं शब्द। तो जितनी बार

11:39

तुम सोचते हो और बोलते हो मैं शब्द। तो

11:43

याद है जैसे अभी भी कभी भी कोई बुलाता है

11:46

ना री आप प्लीज इधर आएंगे आपका यह कुछ काम

11:50

है तो जैसे ही वो नाम बोलते हैं

11:55

ऋणी मन क्या करता है सीधा बाबा की तरफ

11:58

देखता है क्योंकि मन तो नाम और रूप का

12:01

आकार है अगर उस भाव में मैंने सुना मैं

12:04

ऋणी और फिर हां मैंने उस सुनकर उसको जवाब

12:06

भी दे

12:08

दिया तो फिर सीधा मैं आकारी बन बन गई और

12:13

टाइम स्पेस में आ गई। राइट? और सामने वाले

12:17

को भी आकार देखा और टाइम स्पेस बॉडी माइंड

12:20

का आकार देखा और टाइम स्पेस में एक

12:24

ऑब्जेक्ट की तरह जैसे ये बॉटल एक आकार

12:28

टाइम स्पेस में ऑब्जेक्ट की तरह देखा। पर

12:31

जैसे ही उन्होंने बुलाया री आप प्लीज इधर

12:34

आएंगे। किसी ने भी

12:35

बुलाया तो अंदर निराकारी हूं। यह मैं कौन

12:40

जिसको

12:43

कोई बुला भी रहा है। मान लीजिए भाषा में

12:45

हम बोलते हैं जो बुला रहा है वह भी

12:48

निराकारी। जो जो जिसको बुलाया जा रहा है

12:52

वो भी

12:53

निराकारी। है ना? ऑफिस में भी हो सकता है।

12:56

बॉस बुला रहा है। फोन पर कुछ कह रहा है।

12:59

फोन उठाने से पहले भी किसी से बात करने से

13:03

पहले भी। मैं कौन? एकदम निराकारी। तो जैसे

13:09

ही निराकारी शब्द आता है

13:12

इस माइंड के लिए देखा है इसने एकदम

13:15

डिजॉल्व हो जाता है परमात्मा

13:17

में है ना सारी कहानियां डिॉल्व हो जाती

13:21

है टाइम स्पेस डिॉल्व हो जाता है और यह

13:26

बॉडी माइंड की जो हदें हैं यह भी डिॉल्व

13:28

हो जाती है क्योंकि एकदम स्पेस लाइक मिसाल

13:32

है यह मैं स्पेस नहीं हूं पर स्पेस लाइक

13:35

बीइंग की भावना जागृत होती है तो मान

13:41

लीजिए बुलाया उन्होंने

13:43

और मन में फीलिंग्स आई, थॉट्स आई है ना?

13:47

क्योंकि आकारी थॉट्स हदें आएंगी। थॉट्स

13:50

हैं जिनकी हद होती है। थॉट्स की बिगिनिंग

13:53

और एंड होती है। फीलिंग्स की बिगिनिंग और

13:56

एंड होती है। इसीलिए वो आकार

14:00

हैं। कर्मेंद्रियों का अनुभव साइट, साउंड,

14:04

टेस्ट, टच, स्मेल इनका आकार होता है।

14:07

आंखें बंद

14:08

की तो साइट का अनुभव खत्म। आंखें खोली तो

14:14

साइट का अनुभव शुरू। राइट? तो इनका आकार

14:17

है। बिगिनिंग और एंड है। आदि और अंत है।

14:21

तो यह सब आकार है। राइट? तो हम जब देखते

14:25

हैं कि बाबा ने कहा निराकार सत्य को जानो।

14:28

तो निराकार सत्य तो फिर एवर प्रेजेंट है

14:31

क्योंकि वो जाएगा आएगा कहां? वो कोई स्पेस

14:34

में तो चीज नहीं है जो कहीं स्पेस में

14:37

यहां से वहां जाएगी। है ना? तो पता चला

14:42

कि एवर प्रेजेंट हूं मैं। वह मैं कहीं आती

14:46

जाती नहीं। और यह जो मैं है

14:49

यह अनादि मैं

14:52

है। अनादि मतलब इस अनादि में कोई सेंस ऑफ

14:56

सेपरेशन नहीं है। इसीलिए अपने आप को जितना

14:58

मैं जानूंगी अनादि स्वरूप में उतना मैं

15:01

परमात्मा को भी अनादि स्वरूप में जानूंगी।

15:05

तो पता चलेगा कितने अनादि हो सकते हैं। दो

15:08

या एक ही अनादि हो सकता है। एक परमात्मा

15:12

ही अनादि है। और जो मैं अनादि हूं वो मैं

15:16

अनादि मतलब उसकी एक्टिविटी हूं। परमात्मा

15:20

की एक्टिविटी हूं। शिव की शक्ति हूं। शिव

15:25

का मूवमेंट हूं। शिव स्टिलनेस है, शिव

15:29

साइलेंस है। इसीलिए वह पावर हाउस है। और

15:33

यह जो माइंड और आत्मा एक ही तरीके से हम

15:36

यूज़ कर रहे हैं दोनों शब्दों को क्योंकि

15:38

आत्मा जब हम बोलते हैं उसका मीनिंग क्लियर

15:41

होना जरूरी है। आत्मा मतलब निराकारी,

15:46

आकारी और साकारी मन तीनों मनों को

15:50

मिलाकर आत्मा शब्द यूज़ किया जाता है।

15:54

इसलिए आत्मा रूपी

15:56

बैटरी आत्मा एक बैटरी की तरह है। है ना?

16:00

आत्मा परमात्मा की मूवमेंट है। आत्मा

16:04

परमात्मा की शक्ति शिव की शक्ति है। बैटरी

16:08

की तरह। राइट? उसका अपना कोई अलग अस्तित्व

16:13

नहीं है। राइट? तो परमात्मा ही इस आत्मा

16:18

रूपी बैटरी को चलाता

16:22

है। यह बहुत इंपॉर्टेंट है इस चीज को

16:28

समझना। और यह समझना क्यों जरूरी है?

16:32

क्योंकि जब बाबा से पहचान मिलती है ना तो

16:36

जैसे हमने कहा निराकारी आकारी और साकारी

16:40

माइंड। राइट? मिलाकर आत्मा बनता है। राइट?

16:44

गुड और बैड संस्कार सुख और दुख के संस्कार

16:48

मिलकर उसको शब्द आत्मा दिया है। आत्मा

16:52

शब्द में नहीं फंसना है। जैसे गॉड शब्द

16:55

में भी नहीं फंसना है। आईडिया में नहीं

16:58

जाना है। ना आत्मा के आईडिया में जाना है

17:00

ना गॉड के आईडिया में जाना है। राइट? तो

17:03

जैसे ही बाबा की

17:05

पहचान जैसे ही इस माइंड को मिली तो ऐसी

17:09

फीलिंग आई कि मैं इंप्योर हो ही नहीं

17:14

सकती। क्यों? क्योंकि जो प्योरिटी ऑफ़

17:18

माइंड है वो पहले बाबा ने जैसे माइंड को

17:21

निराकारी माइंड को साकारी माइंड से डिटच

17:26

किया। तब पता चला कि निराकारी माइंड

17:33

साकारी माइंड संस्कार साकारी संस्कार

17:36

स्थूल संस्कारों

17:38

से

17:40

बिल्कुल एकदम अलग अगर खड़ा होकर देखे बाबा

17:45

के साथ निराकारी

17:47

माइंड निराकारी माइंड जैसे बाबा में

17:50

डिजोल्व हो गया तो अब बाबा ही जैसे उन

17:54

साकारी संस्कारों को देखकर बिल्कुल अपने

17:58

अंदर समा लेता है। अब उस उन साकारी

18:01

संस्कारों का उन मनुष्यता के संस्कारों का

18:05

कोई ओनर नहीं है। पर यह मनुष्यता के

18:08

संस्कार सामने आएंगे। और सबसे पहले

18:11

मनुष्यता के संस्कार क्या होते हैं? मुझे

18:15

लोग चाहिए आसपास मेरी खुशी के लिए।

18:19

लोग मुझे पसंद नहीं करेंगे तो मैं अपने आप

18:22

को कैसे पसंद करूंगी? है ना? लोक लाज का

18:28

भय। तो बाबा यह कहते हैं कि हे मन हे

18:35

आत्मा मतलब हे मन हम सिनोनिमसली यूज़ कर

18:39

रहे हैं दोनों शब्द कि हे

18:42

मन सब कुछ तुम मुझे दे दो।

18:47

तो यह मन साकारी मन जो थॉट्स है ना यह

18:50

थॉट्स आते हैं। साकारी थॉट्स आते हैं। यह

18:52

साकारी थॉट्स ही साकारी मन है। साकारी

18:56

संस्कार के आधार पर साकारी थॉट्स और

19:00

साकारी फीलिंग्स आती हैं। और यही साकारी

19:02

दुनिया मन में क्रिएट भी करते हैं। राइट?

19:06

तो बाबा कहते हैं ये तीसरे तरह का परवाना

19:10

है। तीन तरह के परवाने भी होते हैं। राइट?

19:13

तो बाबा बोलते हैं तीसरी तरह के परवाना जो

19:15

सुनता भी है। पहला परवाना तो बिल्कुल

19:19

क्षमा ही बन जाता है। क्षमा में जल जाता

19:21

है और क्षमा ही बन जाता है। दूसरा परवाना

19:24

क्षमा के आसपास घूमता है। और तीसरा परवाना

19:28

बाबा बोलते हैं इस मुरली में बाबा ने कहा

19:32

है क्षमा को देख आकर्षित भी होते हैं,

19:35

सोचते भी हैं लेकिन दुविधा के चक्कर में

19:38

रहते हैं। दोप नाम में पांव रखते हैं।

19:44

राइट। अब दो नाम में पांव रखते हैं। मतलब

19:48

क्या कि

19:50

उनको यह साकारी संकल्पों की दुनिया भी

19:54

नहीं छोड़नी। क्योंकि वो बना हुआ ही

19:56

साकारी संकल्पों से है तो वो मरना नहीं

19:59

चाहता। पर उसको पता है सुख उससे मिलना

20:02

नहीं है। सुख मिल भी नहीं सकता इन साकारी

20:06

संकल्पों की दुनिया से और ना ही

20:09

साकारी मन की दुनिया से। सुख मिल नहीं

20:12

सकता। इसलिए परमात्मा भी चाहिए पर साकारी

20:17

मन की दुनिया को भी नहीं छोड़ना। वो दोनों

20:20

पांव में नाव रखना चाहता है ना। है ना? तो

20:24

बाबा उसको धीरे-धीरे अपनी तरफ जैसे

20:26

अट्रैक्ट करते हैं। है ना? क्योंकि उसको

20:30

लगता है अरे कहीं मेरा एंबिशन खत्म नहीं

20:32

हो

20:33

जाए। कहीं मेरे फ्रेंड्स मुझे डिसअ्रूव

20:37

मेरा मुझे फ्रेंड्स छोड़ नहीं दें।

20:39

सन्यासी बोलेंगे मुझे। मुझे सोचेंगे कि

20:42

मैं तो बिल्कुल अलग हो गई हूं। मुझे मेरी

20:45

फैमिली का अप्रूवल नहीं मिलेगा। तो मैं

20:48

गुड गर्ल या बैड बॉय बैड गर्ल बैड बॉय की

20:54

इमेज ना मिल जाए गुड बॉय या गुड गर्ल की

20:57

जगह पर। है ना? तो बाबा कहते हैं कि जितने

21:01

भी थॉट्स आ रहे हैं, जितने भी फीलिंग्स आ

21:04

रही हैं, जितनी भी इमोशंस आ रहे हैं, आने

21:07

दो, आने दो। कोई प्रॉब्लम नहीं। ये बाबा

21:10

जज नहीं कर रहा है तुमको आने दो ये थॉट्स

21:14

हे मन आने दो ये

21:17

थॉट्स तो हम जैसे ये मन का अभी तक ओनर जो

21:22

होता है सेपरेट आइडेंटिटी वो इंटरेक्शंस

21:25

में आता है वो ये सोचता मैं क्या बोलूं

21:28

सामने वाला कुछ बोल रहा है कंफ्यूजन में

21:30

होता है बहुत कुछ होता है यह सारा कुछ

21:34

आएगा हां तो उसमें अगर दोनों नाम में पांव

21:38

नहीं रखकर

21:41

सिर्फ इस एक निराकारी मैं को याद रखा उस

21:45

वक्त और यह याद नहीं है। मेमोरी वाली याद

21:48

नहीं है। ये वो ये वो समझ है कि आकारी

21:52

संकल्प आ रहे हैं। अरे अब मैं क्या बोलूं?

21:55

वो क्या

21:57

सोचेंगे?

21:59

और इस तरह के भी बहुत तरह के ये भी थॉट्स

22:04

आते हैं। बाबा मेरा बच्चा है। पर यह अभी

22:08

तक मेरी बेटी है। बाबा मेरा पति है। पर

22:11

हां, यह भी अभी मेरा पति है। यह सब

22:14

फीलिंग्स, थॉट्स, इमोशंस आएंगे। बाबा कहते

22:17

हैं मन को आने दे। सब मेरे पास आने दे। सब

22:22

मुझे मुझे दे दे सारा बोझ। हे मन तू मुझ

22:25

में डूब जा। तू समा जा मुझ में। मैं तेरे

22:28

लिए सोचूंगा। तू अपना सोच बंद कर। तू थिंक

22:32

कर मर

22:34

जा। बाबा इस तरीके से बोलता है मन को। मैं

22:38

के आगे जो भी फीलिंग्स, थॉट्स, इमोशंस आ

22:40

रही है उन आकारों को हे निराकारी मैं हे

22:44

निराकारी मन, निराकारी मैं इन आकारों से,

22:48

संकल्पों के आकारों से, फीलिंग्स के

22:51

आकारों से मत जुड़। देख जैसे यह क्रिस्टल

22:55

है। क्रिस्टल में कैसे वह सारे आसपास के

23:00

रंगों को अपने अंदर दिखाता भी है। ऐसे

23:04

लगता है कि यह रंग जैसे मेरे ही रंग हैं।

23:08

पर क्रिस्टल पे कोई रंग चढ़ता नहीं

23:11

है। तो तू अपने आप को हे निराकारी

23:15

मैं ये संकल्पों की कहानियों से मिक्स मत

23:19

कर। फीलिंग्स की और कर्मेंद्रियों की

23:22

कहानियों से मिक्स मत कर। अपने उस सत्य को

23:24

देख जो इन संकल्पों की फीलिंग्स की

23:28

कहानियों से पहले का सत्य है। परे का नहीं

23:32

पहले का सत्य है। राइट? तो संकल्प आता है

23:36

मैं दुखी हूं। या मैं बोल रहा हूं या मैं

23:41

क्या बोलूं? मैं कैसे सोचूं? मैं

23:44

कंफ्यूज्ड हूं। मैं डाउट में हूं।

23:48

ठीक है। यह जो निराकारी में है, इन आकारों

23:52

के रंगों को अपने अंदर अपना रंग मत समझ।

23:56

लग रहा है कि हां मैं ये रंग मेरे ही लग

23:59

रहे हैं। क्रिस्टल के अंदर वो रंग कितने

24:02

ऐसे लगते हैं कि क्रिस्टल का ही रंग है

24:04

जैसे कोई। पर ये क्रिस्टल को कुछ रंग लगा

24:07

नहीं है। फिर बाबा जैसे उस वक्त अंदर ही

24:10

अंदर बाबा के साथ रिश्ता जोड़ हे मन। और

24:13

बाबा से बातें शुरू कर। यह चिंता मत कर

24:16

मैं क्या बोलूंगा तू यह देख बाबा बोलेगा

24:20

और तू बस बाबा के साथ अगर विजुअल भी हेल्प

24:23

करता है शुरू शुरू में तो बाबा के साथ

24:26

बिल्कुल दो सितारे के रूप में देख ये

24:30

फर्स्ट बिगिनिंग स्टेज में नो प्रॉब्लम टू

24:33

स्टार्स बिगिनिंग में देख कहां पे ऊपर

24:36

नीचे नहीं जस्ट राइट बिफोर थॉट्स राइट

24:41

बिफोर फीलिंग्स राइट बिफोर

24:43

कर्मेंद्र्रियों के अनुभव जैसे कि

24:47

टाइम स्पेस से परे राइट

24:51

हियर यह टाइम स्पेस की दुनिया है। माइंड

24:54

की बनी हुई दुनिया है। ये संकल्पों की बनी

24:57

हुई दुनिया है ये। तो संकल्प से पहले अपने

24:59

आप को पॉइंट के रूप में देख और यह देख कि

25:05

क्या तू जो एक पॉइंट है क्या तेरी और मेरे

25:09

साथ है तू मन मेरे अंदर डूबा हुआ है। मैं

25:12

ही बस एक पॉइंट हूं। तो दूसरा पॉइंट भी

25:15

जैसे कि धीरे-धीरे खत्म। मैं ही एक पॉइंट

25:18

हूं। अब मुझे बता कोई भी संकल्प की हद अगर

25:22

दुखी मैं दुखी हुई। दुखी हूं का रंग तूने

25:25

अपने अंदर नहीं

25:27

भरा। संकल्पों के अलग-अलग वेदर

25:30

आएंगे। पर वेदर को कंट्रोल करने की कोशिश

25:33

नहीं कर। अपने आप को

25:36

आसमान समझ नीला आसमान। अपने आप को वो

25:39

क्लियर क्लीन क्रिस्टल के रूप में जान।

25:43

तो उसके लिए बाबा ने कहा

25:47

कि मन को कहते हैं बाबा कि सबसे पहले एक

25:51

चीज जान

25:53

ले। तीन फार्मूला देते हैं जैसे बाबा।

25:56

पहला

25:58

फार्मूला हे मन ब्लेम गेम खेलना बंद करो।

26:03

ड्रामा निर्दोष है। किसी भी संकल्प का कोई

26:07

दोष नहीं। किसी भी फीलिंग का कोई दोष

26:09

नहीं। किसी भी कर्मेंद्रियों का, इमेज का,

26:12

मेमोरी का कोई दोष नहीं। कोई संस्कारों का

26:16

कोई दोष नहीं। तुम अपने संस्कारों से पहले

26:20

हे मन तुम ये संस्कारों से बने हुए हो।

26:24

साक्षी बिल्कुल परमात्मा के साथ समा जाओ।

26:27

तो जैसे परमात्मा ही देख रहा है संस्कारों

26:31

को और कोई देखने वाला नहीं है। तो

26:35

इंटरेक्शंस आपके लिए एक दुआ बन बनते जाते

26:39

हैं क्योंकि ब्लेम गेम नहीं है। सिर्फ

26:42

अपनी चेकिंग के

26:43

लिए माइंड किस हद तक मरा है। पुराने

26:47

संस्कारों से उस चेकिंग के लिए हर एक

26:51

इंटरेक्शन में आते हैं कि बाबा किस हद तक

26:55

माइंड को यूज कर पा रहा है। बाबा ही चला

26:58

रहा है। बाबा ही सोच रहा है। उस उस भाव से

27:02

हर इंटरेक्शन में हर

27:05

एक सिचुएशन में एंटर करते हैं। जैसे एंटर

27:08

और एग्जिट माइंड की भाषा में। पर जैसे कि

27:13

एवर प्रेजेंट बाबा जो है वो माइंड को चला

27:17

रहे हैं। है ना? तो परमात्मा का लव

27:20

ऑटोमेटिकली माइंड को हील करने लगता है।

27:24

राइट? परमात्मा का प्यार ऑटोमेटिकली माइंड

27:28

को भी निराकारी साकारी माइंड से निराकारी

27:31

माइंड की तरफ ले जाता

27:33

है। राइट? तो यह बहुत ब्यूटीफुल है।

27:37

इसीलिए एक ही चीज है लोकलाज का जो डर है

27:44

सरेंडर। है ना? ये जो दूसरों की अप्रूवल

27:48

मांगने वाला संस्कार है ये भी है ना? जैसे

27:54

कि परमात्मा से मिल रही है ना अप्रूवल

27:57

माइंड को हाईएस्ट अप्रूवल परमात्मा ही

28:03

बेस्ट फ्रेंड

28:04

है माइंड का है ना क्योंकि आज माइंड को

28:10

चलाने वाला इमेजिनरी थिंकर और इमेजिनरी

28:15

डअर

28:16

है। और वह इमेजिनरी थिंकर और इमेजिनरी डअर

28:20

जैसे-जैसे परमात्मा मन को चलाता है, वह

28:24

डिॉल्व होता जाता है। है ना? तो शिव की

28:29

शक्ति रियलाइज होने लगता है कि मैं अपना

28:33

अलग अस्तित्व नहीं है। मैं सिर्फ शिव जो

28:35

कि पावर हाउस है। कास्टेंट स्टिलनेस और

28:39

कॉन्सेंट साइलेंस शिव खुद है। और वो चला

28:44

रहा है। है ना? और उसकी यह जो बैटरी है

28:48

आत्मा रूपी बैटरी या मन रूपी बैटरी जो भी

28:51

आपको शब्द यूज करना है हम एक ही तरीके से

28:54

यूज कर रहे हैं वो मूवमेंट है वो

28:57

एक्टिविटी है शिव

28:59

की राइट और वो बाबा के पावर से चलती है

29:04

परमात्मा का पावर चलाता है उसको परमात्मा

29:07

का प्यार चलाता है कैसे

29:10

थिंकर और डअर को खत्म करके अभी हम नेक्स्ट

29:14

सेशन में देखेंगे

29:16

कैसे होता है यह? है ना? तो आज हमने हमने

29:19

यह देखा कि आपके पास दो तरीके हैं। एक

29:23

होता है अपने निराकार मैं को जानकर माइंड

29:26

और बॉडी को अपने सत्य से रिअलाइन करना।

29:30

निराकार सत्य मतलब

29:34

संकल्पों

29:35

सेंसेशंस और कर्मेंद्रियों से पहले का

29:39

सत्य। जिससे मुझे यह पता चलता है कि मैं

29:43

किसी संकल्प से नहीं बांधी जा सकती। ना

29:46

मेरा संकल्प कोई मुझे मेरी पहचान बना सकता

29:49

है। तो कैसा भी संकल्प आ जाए वो मेरी

29:54

पहचान नहीं बना सकता मेरी। वो मुझे रंग

29:57

नहीं भर सकता है मुझ में। है ना? क्योंकि

30:00

मैं मैं ही

30:02

नहीं। है ना? परमात्मा ही सब कुछ है मेरे

30:06

लिए। राइट? तो एवर प्रेजेंट बाबा प्योर

30:13

बीइंग जो बाबा है बस वही ओनर है इस माइंड

30:17

का है ना तो हमें पता चलता है कि वाकई

30:23

में जब एक ही चलाने वाला

30:28

है तो फिर

30:30

धीरे-धीरे यह जो हम एक और छोटा सा एक

30:33

एग्जांपल देखेंगे बहुत ब्यूटीफुल एग्जांपल

30:36

है यह जैसे अगर आप देखेंगे यह सागर है।

30:40

सागर में यह जो अलग बूंद दिख रही है आपको

30:43

वह जैसे अपना अलग अस्तित्व बनाकर खड़ी हो

30:46

गई है। राइट? और जैसे कि यह बूंद अपना एक

30:50

नाम रूप लेकर खड़ी हो गई है। और और ऐसे कई

30:54

बूंदे आपस में मिलकर जैसे अपनी ही एक

30:58

दुनिया बना ली है उन्होंने। अलग-अलग भंवर

31:01

बना लिए हैं और सोचते हैं कि नहीं नहीं हम

31:03

तो अपने समंदर से अलग हैं। हमारी अलग

31:05

पहचान है और इस तरीके से वह सफर करती हैं।

31:09

राइट? हर भवर की अपनी एक कहानी होती

31:12

है। पैटर्न होती है। फिक्स्ड पैटर्न होती

31:15

है। तो यह फिक्स्ड बैटरी की पैटर्न है। यह

31:18

फिक्स्ड बैटरी है।

31:20

यह लिटरली हर भवर जैसे एक आत्म रूपी बैटरी

31:25

है सागर

31:26

में। राइट? और

31:30

जैसे-जैसे

31:31

भवर समुद्र में वापस खुलने लगता है और

31:35

समुद्र में मिलने लगता है, प्यार में उसके

31:40

डिॉल्व होने लगता है तो ड्रॉप जैसे-जैसे

31:44

वापस सागर

31:49

के लहर सागर के

31:53

उसमें स्टिलनेस में और साइलेंस में

31:57

क्योंकि इतनी सफर कर रही है अपने को अलग

31:59

समझकर वो ड्रॉप तो वापस वो खींचती है जैसे

32:03

कि सागर के साइलेंस से और सागर में जैसे

32:07

डूब जाती है वापस है ना अब सागर

32:11

चलाएगा उस बूंद को भी सागर चलाएगा नहीं तो

32:15

जब बूंद अपने आप को अलग समझ रही थी तो सफर

32:18

कर रही थी है ना पर जैसे ही बूंद सागर में

32:23

समा जाती है तब सागर बूंद को चलाता है

32:26

बूंद का अपना अलग अस्तित्व खत्म हो जाता

32:29

है। तब बाबा बोलते हैं तुम निराकार सत्य

32:32

को जानो। अब जो भी संकल्प आए तो यह देखो

32:36

उससे पहले मैं

32:37

कौन? असंतुष्टता का संकल्प आया। ओके। उससे

32:42

पहले मैं कौन हूं। अ उदासीपन की फीलिंग

32:48

आई। बहुत घबराहट की सेंसेशंस आई। बोर्डम

32:54

की सेंसेशंस आई। अलगपन की सेंसेशंस आई।

32:57

क्योंकि बूंद अलग समझती है ना अपने आप को

33:00

उससे पहले यहीं पर मैं

33:04

कौन? तो जैसे-जैसे आप

33:08

देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि

33:13

धीरे-धीरे एक ही चलाने वाला बाबा सागर है।

33:17

बूंद धीरे-धीरे समाती जाएगी सागर में। है

33:21

ना? और उसे पता चलेगा कि जितना मैंने अपने

33:25

आप को जाना एज निराकार अगर मैं निराकार

33:29

हूं तो ना मैं प्रकट हो सकती हूं और ना ही

33:33

मैं गायब हो सकती हूं। क्योंकि गायब और

33:36

प्रकट होने के लिए आकार

33:38

चाहिए। तो अगर मैं प्रकट नहीं हो सकती,

33:41

मैं गायब नहीं हो सकती।

33:43

मेरी कोई डायमेंशंस नहीं है। मतलब मेरी

33:46

कोई लेंथ, विड्थ, हाइट नहीं है। मेरा कोई

33:49

वेट नहीं है। मेरी कोई एज नहीं है। मेरा

33:52

कोई नाम नहीं है। मेरा कोई रूप नहीं

33:57

है। तो फिर मेरा जो अलगपन का भाव है वो

34:02

डिॉल्व हो जाता है परमात्मा में।

34:05

और फिर

34:09

परमात्मा इस मन और बॉडी को चलाता है। है

34:15

ना? और हम देखते हैं

34:18

धीरे-धीरे छोटा सा एक एग्जांपल देकर हम

34:20

फिनिश करते हैं कि कैसे यह ट्रांजिशन होता

34:26

है। तो जैसे एक मदर को पूछा गया अ कि आप

34:34

बाबा को अपना सब कुछ पार्टनर मानकर चलते

34:37

हैं। राइट? तो उन्होंने अपना अनुभव शेयर

34:39

किया कि हां पहले जब मैं बाबा को अपना

34:42

पार्टनर मानकर चलती थी तो एक बूंद मानकर

34:45

चलती थी। राइट? एज अ बूंद अपने आप को

34:49

सोचती थी कि मैं सागर का सागर मेरा

34:52

पार्टनर है। वो भी बहुत अच्छा था। क्योंकि

34:55

पहले मैं सोचती थी कि हां अगर मुझे बेटी

34:57

को स्कूल लेने जाना है। तो बाबा के बच्चे

35:01

को स्कूल लेने जा रही हूं मैं। है ना? और

35:04

वो भी बाबा का बच्चा। पर अंदर यह भी लगता

35:06

था मैं यह मैटर की बनी हुई बॉडी माइंड

35:09

हूं। वो भी मैटर की बनी हुई बॉडी माइंड

35:11

है। पूरी फुल डुअलिटी थी। द्वैधता थी। पर

35:15

फिर भी धीरे-धीरे बाबा का बच्चा है तो उस

35:17

पे गुस्सा कम आता था। उससे धीरे-धीरे

35:19

एक्सपेक्टेशंस कम होने लगी। और धीरे-धीरे

35:22

जैसे-जैसे एक्सपेक्टेशंस कम होने लगी

35:24

क्योंकि वो बाबा का बच्चा है। तो मैं उसके

35:27

ऊपर कैसे चिल्लाऊंगी? तो मैं कैसे उम्मीद

35:30

रख सकती हूं? वो मेरा बच्चा थोड़े ना है।

35:32

वो बाबा का बच्चा है। तो धीरे-धीरे जैसे

35:35

उनसे उससे मेरी एक्सपेक्टेशंस जैसे-जैसे

35:37

कम होने लगी तो डुअलिटी के बजाय पहले तो

35:40

मुझे लगता था कि मैं लेने जा रही हूं उसको

35:43

स्कूल। धीरे-धीरे ऐसे फील होने लगा बाबा

35:46

लेने जा रहा है उसको स्कूल। तो धीरे-धीरे

35:50

उसने देखा कि

35:51

डअर खत्म होने

35:54

लगा। और वो थॉट्स जो डअर क्रिएट कर रहे

35:57

थे, जो आकार क्रिएट कर रहे थे डअर का बॉडी

36:01

माइंड टाइम स्पेस उसके साथ वह डिॉल्व होने

36:05

लगे तो बूंद जैसे सागर में वापस समाने लगी

36:09

फिर उन्होंने कहा कि ऐसा फील होने लगा कि

36:12

वाकई में अब तो लगता है मैं हूं ही

36:17

नहीं बाबा ही सोचता है मेरे लिए और बाबा

36:21

ही चलाता है सब कुछ मैं डअर और थिंकरी

36:24

जैसे खत्म हो

36:26

गई ऐसा नहीं कि टाइम स्पेस के कांसेप्ट को

36:29

यूज नहीं करती

36:30

और पर यह जो मैंपन है कि मैं टाइम स्पेस

36:34

के यह निराकारी हो गया। आकारी से निराकारी

36:38

हो

36:39

गया। है ना? तो कर्म तो अभी भी ऐसे ही चल

36:45

रहा है। पर ऐसा लगता है जैसे कि

36:46

रिकॉर्डिंग चल रही है। एक और चलाने वाला

36:48

चला रहा है उस रिकॉर्डिंग

36:50

को। है ना? और करण करावनहार करा रहा है।

36:54

तो यह फीलिंग आई है उनको। तो यह बहुत

36:57

ब्यूटीफुल है कि कैसे शुरुआत में भले ही

37:02

हम डलिटी में स्टार्ट करते हैं और डलिटी

37:05

सिर्फ मैं बॉडी तुम बॉडी

37:07

नहीं यह दुनिया मैटर की बनी हुई और मैं

37:11

इसमें माइंड की बनी हुई एक पर्सन थॉट्स और

37:14

फीलिंग्स की बनी हुई ये पुतली मैटर की

37:17

दुनिया मेरे बाहर माइंड और मैटर की भी

37:20

डुअलिटी राइट धीरे-धीरे उन्होंने कहा कि

37:23

जैसे-जैसे संकल्पों से साक्षी जी संकल्प

37:26

से पहले मैं कौन? फीलिंग से पहले मैं

37:29

कौन? मैं जा रही हूं लेने इस थॉट से भी

37:33

पहले मैं

37:34

कौन? यह बाबा का बच्चा है उस थॉट से पहले

37:37

भी मैं कौन? एक्सपेक्टेशन की फीलिंग आ रही

37:41

है उसके प्रति। उससे भी पहले मैं

37:43

कौन? तो जैसे-जैसे यह देखने लगी तो जैसे

37:48

कि ये फीलिंग ऑफ़ टाइम और स्पेस भी खत्म

37:52

होने लगा।

37:53

प्रैक्टिकल पर्पस के लिए तो अभी भी यूज

37:56

करते हैं। इनफैक्ट पहले से जल्दी मैं टाइम

37:58

पर पहुंचती हूं। पहले तो फिर भी एज अ

38:00

पर्सन मैं लेजी होकर धीरे से केयरलेसनेस

38:04

में भी आ जाती थी और और लेट भी पहुंचती

38:08

थी। अब तो लिटरली क्योंकि वेस्ट थिंकिंग

38:11

वेस्ट ज्यादा चलता ही नहीं है। अब तो

38:13

ऑटोमेटिकली सब टाइम पे ही होता

38:15

है। है ना? क्योंकि वो वेस्ट वेस्ट जब

38:20

चलाते थे वो वेस्ट से ही पर्सन बना हुआ था

38:22

ना। अब क्योंकि जैसे-जैसे पर्सन मरता गया

38:25

तो वेस्ट थिंकिंग भी अपने आप कम कम कम कम

38:28

होती

38:30

गई। तो ऑटोमेटिकली बाबा चला रहा है। ऐसा

38:33

नहीं कि वेस्ट थॉट्स अभी भी नहीं आते हैं।

38:35

आते हैं। पर उससे पहले मैं कौन? तो मैं

38:39

निराकारी में निराकारी में आते ही बाबा

38:42

टेकओवर कर लेता है। राइट? क्योंकि उसमें

38:45

निराकारी में दो नहीं हो सकते। एक ही हो

38:47

सकता है। तो फिर जैसे बाबा टेकओवर कर लेता

38:50

है और बाबा बाबा जैसे रिकॉर्डिंग को चलते

38:53

रहने देता है। फिर कोई भी बीच में डअर

38:57

नहीं है। अभी भी कर्म सब हो रहे हैं पर

39:01

बीच में डअर नहीं है। पहले से बेटर हो रहे

39:04

हैं। सफरिंग नहीं है क्योंकि डअर और थिंकर

39:08

नहीं है। है ना? तो यह है निराकारी मैं का

39:12

राज समझ लेना। तो जैसे जैसे निराकारी मैं

39:17

का पता चलता है ना तो मृत्यु का भय मृत्यु

39:19

का भी भय एक मान्यता थी। वह मान्यता यह

39:24

भंवर जो आप देख रहे हैं ना लास्ट वाला

39:26

भंवर जैसे आपको एक लाइट दिख रही है यहां

39:28

पे जैसे वो बाबा की लाइट उस भंवर को अनडू

39:31

कर रही है। खोल रही है और उसको जैसे एक

39:34

स्टिल

39:35

साइलेंट सागर की तरह उसमें समा लिया है

39:39

प्यार में जैसे अपने यहां लास्ट में

39:41

देखेंगे कोई भवर ही नहीं है जैसे। जब अलग

39:45

था तो जैसे कि डेथ वर्ल्ड पूल ऑफ डेथ

39:48

बोलते हैं इसको। एक्चुअली कैलिफोर्निया

39:50

में यह एक वर्ल्ड पूल है। इसको वर्ल्ड पूल

39:52

ऑफ़ डेथ बोलते हैं। वो ब्लैक होल की तरह

39:55

जैसे बोलते हैं उसको वो जैसे सब शक कर

39:57

लेता है अपने अंदर। है ना? तो वो अपने आप

40:02

को अलगपन की भावना समझकर चलना होता है।

40:04

उसमें ऐसे ये संकल्प फीलिंग से बना हुआ

40:07

कर्मेंद्रियों से बना हुआ। पर जब बाबा

40:10

उसको टच करता है माइंड को तो वह माइंड

40:12

खुलने लगता है लाइट से बाबा की और खुलकर

40:15

जैसे सागर के प्यार में समा जाता है और

40:18

परमात्मा ही फिर उसको चलाता है। है ना? तो

40:22

यह है गॉड इज द पावर हाउस स्टिल साइलेंट

40:28

शिव एवर प्रेजेंट शिव जो कि निराकारी

40:34

मैं साकारी से साकारी संकल्पों से जब बाहर

40:39

निकलते हैं तो साकारी दुनिया मतलब साकारी

40:41

संकल्प साकारी फीलिंग्स साकारी इमोशंस

40:45

साकारी थॉट्स और साकारी देखने का तरीका

40:50

राइट राइट और बाबा जैसेजैसे मन को वर्ल्ड

40:54

पूल को इस भवर को खोलता है अपनी लाइट से

40:59

अपनी अपनी शाइन से हम धीरे-धीरे खोलते

41:03

हैं। बाबा खोलता है उसको धीरे-धीरे मन

41:06

खुलता है। बिल्कुल जैसे बाबा ही चला रहा

41:09

है। वैसे चलता है। सब कुछ अभी भी अपीयरेंस

41:14

ही है चाय पर हो रहा है।

41:18

पर अब एकदम सागर की

41:22

शांति सब कुछ चल रहा है पर एकदम शांति से

41:27

ऐसा नहीं कि तूफान नहीं भी आते तूफान आते

41:30

भी हैं पर सागर टेक ओवर कर लिया ना तो

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सागर हिलता नहीं है तूफानों से तो सागर

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संभालता है तूफानों को भी सागर संभालता है

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सागर परमात्मा ही संभालता है सारे मूवमेंट

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को सारी एक्टिविटी को राइट एंड दैट इज

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ट्रू निराकारी मैं। और जब मैं निराकारी

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मैं अपने आप को जान गई तो फिर परमात्मा को

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भी उस नजर से देखेंगे हम। फिर परमात्मा का

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निराकारी सत्य पता चलता है। इसीलिए वो

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माइंड जिसको हम ब्रह्मा बोलते हैं। तीन

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लास्ट शब्द थे निराकारी, निर्विकारी,

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निरहंकारी।

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जब तक निराकारी सत्य नहीं जाना तो

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निरहंकारी और निर्विकारी पॉसिबल नहीं।

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क्योंकि जब तक फॉर्म है डलिटी है। जब तक

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डलिटी है मैं और तुम मैटर और

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माइंड तब

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तक सफरिंग

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है। इसीलिए जब मैं निराकारी साकारी मैं से

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निराकारी मैं की

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तरफ आत्मा आती है माइंड आता है और फिर

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परमात्मा टेक ओवर कर लेता है। उस माइंड को

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अब दो नहीं है। अब एक परमात्मा ही है जो

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चला रहा है उस माइंड को। एंड दैट इज ट्रू

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जीवन मुक्ति निराकारी में। फिर परमात्मा

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को जान लिया हमने। ठीक है? अभी हम थोड़ा

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और डिटेल में लेंगे नेक्स्ट सेशन में। इसी

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का पार्ट टू जिसमें हम देखेंगे पहले तरह

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का

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अ परवाना कैसा होता है। है ना? फर्स्ट

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काइंड ऑफ परवाना और उसको हम लाइफ में और

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कैसे जीते हैं। ठीक है जी। तो अभी हम समरी

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में देखते हैं कि बूंद नहीं रहना है। सागर

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में समा जाना

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है। बूंद बनी हुई तो सागर से ही है। बूंद

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को अगर देखेंगे तो उसमें सिर्फ सागर की ही

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प्रॉपर्टीज दिखेंगी। पर क्योंकि इसने अपने

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आप को अलग ऊपर समझ लिया है सागर से अलग

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समझ लिया है। है ना? मैं पर्सन मैं ये

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बॉडी माइंड मैं ये थॉट्स फीलिंग्स

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इमोशंस तो वो सफरिंग क्रिएट करता है। पर

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जैसे ही वो बूंद वापस सागर में समा जाती

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है तो सफरिंग डिॉल्व हो जाती है। फिर सागर

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चलाता है। है ना? तो निराकार साकार से

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निराकार सत्य को जानना। तो साकारी संकल्प

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साकारी फीलिंग्स सब आएंगे खत्म नहीं होंगे

44:10

एकदम से पर अपने अपने

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उस मैं कौन नहीं हूं यह जानना बहुत जरूरी

44:17

है ताकि मैं कौन हूं उस सत्य को और अच्छी

44:22

तरह से जान पाऊं और उसको हम नेक्स्ट सेशन

44:24

में देखेंगे और भी गहराई में ओके जी थैंक

44:28

यू ओम शांति

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