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Bharat| A patriotic Poem by Shubham Shyam

6m 22s1,011 words127 segmentsHindi

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1885 में जब स्वामी

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विवेकानंद शिकागो के धर्म संसद में भारत

0:06

की पैरवी कर रहे थे तब उन्होंने बताया था

0:09

जब आप उनका स्पीच पढ़ेंगे तो आपको उनकी

0:11

स्पीच से सारांश यह समझ में आएगा कि व यह

0:13

कहना चाह रहे हैं कि हजारों साल के विदेशी

0:16

हुकूमत के बावजूद कई सालों तक मुगलों के

0:19

अधीन रहने के बाद और कई सालों तक

0:21

अंग्रेजों के अधीन रहने के बावजूद

0:23

हिंदुस्तान ने भारत ने अपनी भारतीयता बचा

0:26

के रखी है भारत के कुछ सिद्धांत थे जैसे

0:29

हम संत में हमेशा बचपन में नैतिक शिक्षा

0:31

वगैरे में पढ़ते थे सर्वे भवंति सुखना

0:34

सर्वे संतु निरामया अतिथि देवो भय तमसो मा

0:38

ज्योतिर्गमय सर्वे भवन सर्वधर्म संभा

0:42

वासुदेव कुटुंब कम ये सारे मतलब आठ 10 वो

0:46

विचार उसमें प्रेजेंट करते हैं और फिर वो

0:48

कहते हैं कि दुनिया की कोई ताकत नहीं है

0:51

जो हिंदुस्तान से उसके यह स्वभाव छीन ले

0:54

और जब तक यह स्वभाव जिंदा है तब तक आगे

0:57

चलकर उस पर बहुत बहुत प्यारा शेर लिखा

0:59

बड़े शायर ने यूनानो मिसर रोमा सब मिट गए

1:02

जहां से कुछ तो है कि हस्ती मिटती नहीं

1:04

हमारी आज जब हम आजाद हैं आजादी के 75 साल

1:08

बाद खड़े हैं और अपने देश में हर रोज हो

1:10

रहे विभाजन को देखते हैं तो सवाल उठता है

1:13

कि हमारी व वैल्यूज हमारे वो मूल्य कहां

1:16

है कविता वहीं से शुरू होती है संभालिए कि

1:19

किन मूल्यों के केंद्र में थे हम किन

1:22

मूल्यों पर आकर ठहरे किन मलयो के केंद्र

1:25

में थे हम किन मूलियो पर आकर ठहरे किन

1:27

मूलियो की छिनी आजादी किस पर डाले कितने

1:30

पहरे यह सारी बातें हमको करनी होगी

1:33

सिंहासन से यह सारी बातें हमको करनी होगी

1:36

सिंहासन से कहना होगा देश नहीं चलता है

1:39

केवल भाषण से महाराज के करनी में कथनी में

1:43

अंतर नहीं चलेगा महाराज के करनी में एंड

1:46

दिस इज नॉट प्रोजेक्टेड टू वन पर्सन एनी

1:48

वन हु हैव अ डिक्टेटोरियल बिहेवियर महाराज

1:51

के करनी में कथनी में अंतर नहीं चलेगा

1:53

मंदिर मस्जिद गिरजा घर के धर्म का मंत्र

1:55

नहीं चलेगा न्याय की देवी आंख खोलकर खड़ी

1:59

रहेगी सं

2:00

न्याय की देवी आंख खोलकर खड़ी रहेगी संसद

2:03

में धृतराष्ट्र की चुप्पी पर वो चीख

2:06

पड़ेगी संसद में कि अंधे हो जाने से

2:09

दुर्योधन के शासन बढ़ते हैं अंधे हो जाने

2:12

से दुर्योधन के शासन बढ़ते हैं उसके शह पर

2:15

पंचाली के तरफ दुशासन बढ़ते हैं राजा

2:18

अंग्रेजों की तरह आग लगाए नहीं चलेगा राजा

2:22

अंग्रेजों की तरह आग लगाए नहीं चलेगा जले

2:25

देश और नीरो जैसा राग लगाए नहीं चलेगा

2:29

राजा अंग्रेज की तरह आग लगाए नहीं चलेगा

2:31

जले देश और नीरो जैसा राग लगाए नहीं चलेगा

2:35

वो कैसा राजा जो देश की थाली में ही छेद

2:38

करे वो कैसा राजा जो देश की जनता में ही

2:40

भेद करे वो कैसा राजा जो देश की थाली में

2:43

ही छेद करे वो कैसा राजा जो देश की जनता

2:46

में ही भेद करे वो कैसा राजा जो चुप्पी

2:49

साधे देश के दंगों पर कैसा राजा वो जो

2:52

फर्क करे कब्रों के रंगों

2:53

[संगीत]

2:58

पर राजा जैसे छत्रपति राजा जैसे छत्रपति

3:02

सब धर्मों का सम्मान करें राजा जैसे

3:05

अंगराज जो भिक्षु को सब दान करें राजा हो

3:08

तो हरिश्चंद्र सा सत्य बसाओ मन में राजा

3:11

हो तो हरिश्चंद्र सा सत्य बसाओ मन में

3:14

राजा हो तो हरिश्चंद्र सा सत्य बसाओ मन

3:16

में राजा हो तो धर्मराज सा अटल रहो जीवन

3:19

में वोट के खातिर जनता को वादों से ना

3:22

भरमा है वो राजा हो तो रामचंद्र साह अपना

3:25

वचन निभाए

3:27

[प्रशंसा]

3:30

मुल्क तरक्की करके सोने की लंका हो जाए पर

3:35

मुल्क तरक्की करके सोने की लंका हो जाए पर

3:38

पाप करे रावण तो उसका अंत मेरे श्रीराम

3:41

करेंगे मुल्क तरक्की करके सोने की लंका हो

3:44

जाए पर पाप करे रावण तो उसका अंत मेरे

3:47

श्रीराम करेंगे ताकत पर इतरा करर सबको कैद

3:50

करेगा कंस मगर उसी जेल से आकर उसका अंत

3:53

मेरे घनश्याम करेंगे भारत की भूमि ने देखा

3:57

न्याय सतत इतिहास में भारत की भूमि ने

4:00

देखा न्याय सतत इतिहास में भारत की भूमि

4:03

ने पाया प्रेम गुजरती सांसों में भारत आने

4:07

वाला भारत का होकर रह जाता है सबको गले

4:10

लगा ले ऐसी प्यारी भारत माता

4:16

है जिस भूमि के जख्मों पर मरहम रखा हो

4:20

पीरों ने जिस भूमि के जख्मों पर मरहम रखा

4:23

हो पीरों ने जिस भूमि पर जुल्म से डटकर

4:26

युद्ध लड़ हो वीरों ने जिस भूमि को समरसता

4:29

का पाठ पढ़ाया मीरा ने जिस भूमि को प्रेम

4:32

दिया रसखान रहीम कबीरा ने हमने दर से

4:36

लौटाया है युद्धों के आप सिकंदर याद

4:38

कीजिएगा हमने दर से लौटाया है युद्धों के

4:41

उन मादी को हमने कलिंग में बुद्ध चुना जब

4:44

देख लिया बर्बादी को वा हमने दर से लौटाया

4:47

है युद्धों के उन मादी को हमने कलिंग में

4:50

बुद्ध चुना जब देख लिया बर्बादी को

4:52

सिंहासन मगरूर हो तो चाणक्य गूंजता है

4:55

घर-घर और परमाणु के दौर में भी गांधी को

4:58

पूजता है घर-घर वाह आंगन तुक को देव कहा

5:01

उन लोगों का स्वभाव क्या हो आंगन तुक को

5:04

देव कहा उन लोगों का स्वभाव क्या हो हमने

5:07

दुनिया को सिखलाया सर्व धर्म संभाव क्या

5:09

हो भारत भूमि के कंकर कंकर में शंकर नाम

5:13

रहे भारत भूमि के कंकर कंकर में शंकर नाम

5:17

रहे नानक रहे महावीर रहे ईशा पैगंबर राम

5:20

रहे भारत को भारत करते हैं भारत के ये

5:24

मूल्य सभी भारत को भारत करते हैं भारत के

5:27

ये मूल्य सभी सदी लगाकर अर्जित की है इतने

5:30

हैं बहुमूल्य सभी चंद वर्षों की राजनीति

5:33

पर क्यों इसको कुर्बान करें चंद वर्षों की

5:36

राजनीति पर क्यों इसको कुर्बान करें जिसके

5:39

खातिर जान दिया हो सबने उसका मान रखें इन

5:43

मूल्यों के केंद्र में थे हम इन तक वापस

5:46

आना है इन मूल्यों के केंद्र में थे हम इन

5:49

तक वापस आना है जिन मूल्यों की छिनी आजादी

5:52

उनको वापस पाना है इन मूल्यों के खातिर एक

5:55

प्रतिरोध तो बनता है अपना इन मूल्यों के

5:58

खातिर एक प्रतिरोध तो बनता है अपना इन

6:01

मूल्यों के खातिर सकल विरोध तो बनता है

6:04

अपना ये सब मूल्य मिलाकर ही तो भारत की

6:07

परिभाषा है यह सब मूल्य मिलाकर ही तो भारत

6:10

की परिभाषा है यह कविता उस भारत खातिर एक

6:14

उम्मीद की आशा है थैंक यू

6:18

[संगीत]

6:18

[प्रशंसा]

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