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Jab Khana Kaaba Par Hamla Hua! | Ababeel Aur Hathi Ka Wo Manzar | Quran Stories

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0:00

एक ऐसा बादशाह जिसके पास दुनिया की सबसे

0:02

ताकतवर फौज थी। हाथियों की कतारें,

0:06

तलवारों की चमक और सिपाहियों का हुजूम।

0:10

वो चलता तो जमीन कांप जाती। वो बोलता तो

0:13

लोग खामोश हो जाते। उसने फैसला किया कि

0:16

अल्लाह के घर को जमीन के साथ बराबर कर

0:18

देगा।

0:20

लश्कर तैयार हुआ। हाथी आगे बढ़े।

0:24

आगे बढ़ो।

0:26

और मक्का की तरफ कूद शुरू हो गया।

0:29

मगर जब मक्का की सरहद पर पहुंचे तो अल्लाह

0:32

ने फैसला कर लिया था ना फौज की जरूरत थी

0:36

ना तलवारों की ना इंसानों की।

0:40

बस आसमान से कुछ छोटे परिंदे आए

0:44

और सुबह तक दुनिया की सबसे बड़ी फौज भूसे

0:47

की तरह बिखर चुकी थी।

1:01

यह वो वाकया है जिस पर अल्लाह ने पूरी

1:04

सूरत नाजिल फरमाई। यह है असहाबे फील गुरूर

1:08

से तबाही तक का सफर और यकीन कीजिए जो आगे

1:11

आने वाला है वो आपके ईमान को मजबूत कर

1:14

देगा। यह वाकया है छठी सदी ईवी का। मक्का

1:19

अभी तक मोहम्मद की बीसत से पहले का शहर

1:21

था। काबा खड़ा था। लोग उसकी ताजीम करते

1:25

थे। मगर तौहीद की रोशनी अभी नहीं आई थी।

1:28

इसी दौर में जूबी अरब में यमन में एक शख्स

1:31

हुकूमत करता था। उसका नाम था अब्राह। वो

1:34

हबशा का नायब था। एक ईसाई हुक्मरान और

1:38

अपनी फौज और ताकत पर बहुत मखरूर। तफसीर

1:41

इबने कसीर के मुताबिक अब्राह ने सना में

1:44

एक शानदार गिरजा बनवाया।

1:47

इतना बड़ा और खूबसूरत कि लोग देखकर हैरान

1:50

रह जाते। दीवारों पर सोने की नक्काशी,

1:53

फर्श संगमरमर का छत इतनी ऊंची कि गर्दन

1:57

ऊपर करनी पड़ती।

2:00

अब्राह का ख्वाब था कि पूरा अरब इस गिरजा

2:03

की तरफ रुख करे।

2:06

मगर हकीकत कुछ और थी। अरब के लोग अब भी

2:09

मक्का जाते थे।

2:12

काबा का तवाफ करते थे। और अबराहा के गिरजा

2:16

को एक नजर भी ना देखते थे।

2:20

यह बात अब्राह को चुप गई। गुरूर ने दिल

2:23

में जगह बनाई और फिर वो फैसला किया गया जो

2:25

तारीख बदल देने वाला था। अब ने कहा,

2:28

मैं इस घर को

2:31

मुनहदम कर दूंगा।

2:35

जिसकी तरफ अरब जाते हैं।

2:39

मैं काबा को मुस्मार करूंगा।

2:44

ये सिर्फ हसद नहीं था। यह तकब्ुर था। यह

2:47

अल्लाह के घर से जंग का ऐलान था। अब्राह

2:50

ने हुकुम दिया,

2:51

फौज तैयार करो, हाथी लाओ, हथियार जमा करो।

2:59

रिवायत के मुताबिक इसके पास नौ हाथी थे और

3:02

सबसे आगे एक बहुत बड़ा हाथी था।

3:07

जिसका नाम था महमूद।

3:13

यह हाथी इतना ताकतवर था कि जंग में अकेला

3:16

ही दुश्मनों की सफें तोड़ देता। अब्राह ने

3:19

उसे सबसे आगे रखा ताकि लोगों के दिल में

3:21

दहशत बैठ जाए। फौज निकली हजारों सिपाही नौ

3:26

हाथी, असलहा का अंबार और अब रहा अपने

3:29

घोड़े पर सवार। वो सोच रहा था कौन रोक

3:33

सकता है मुझे? कौन टक्कर ले सकता है?

3:36

लश्कर आगे बढ़ता रहा। रास्ते में जो कबीले

3:39

आए उन्होंने लड़ने की कोशिश की मगर

3:42

हाथियों के आगे कोई ठहर ना सका।

3:45

आखिरकार अब्राह की फौज मक्का के करीब

3:47

पहुंच गई।

3:50

तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक जब अब्राहम

3:52

मक्का के करीब आया तो उसने लोगों के ऊंट,

3:56

बकरियां, माल छीन लिए। उनमें से अब्दुल

3:59

मुत्तलिब के 200 ऊंट भी थे।

4:03

अब्दुल मुत्तलिब वो मक्का के सरदार थे।

4:06

कुरैश के रहनुमा और रसूल्लाह सल्लल्लाहो

4:09

अलैह वसल्लम के दादा जब उन्हें खबर मिली

4:12

तो वह खुद अब्राहा के कैंप में गए। अब्राह

4:15

ने जब उन्हें देखा तो उनकी शख्सियत से

4:17

मुतासिर हुआ। उसने इज्जत दी पास बिठाया और

4:20

पूछा

4:22

तुम्हें क्या चाहिए?

4:24

अब्दुल मुत्तलिब ने कहा

4:25

मेरे 200 ऊंट वापस कर दें।

4:28

अब्राहा हैरान हुआ। वो बोला

4:31

मैं तुम्हारे सबसे मुकद्दस घर को गिराने

4:35

आया हूं। और तुम मुझसे ऊंट मांग रहे हो?

4:37

अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया और यह जवाब

4:40

तारीख का सबसे बड़ा जवाब है।

4:42

मैं ऊंटों का मालिक हूं

4:44

इसलिए मैंने अपना हक मांगा और इस घर का एक

4:48

मालिक है। वो खुद उसकी हिफाजत करेगा।

4:54

यह सुनकर अब्राह को लगा कि यह लोग बुजदिल

4:56

हैं। लड़ेंगे नहीं। उसने ऊंट वापस कर दिए

4:59

और मुस्कुरा कर कहा,

5:00

"कल सुबह मैं काबा को खत्म कर दूंगा।

5:05

अब्दुल मुत्तलिब मक्का वापस आए। उन्होंने

5:08

काबा का दरवाजा पकड़ा और अल्लाह से दुआ

5:10

की।

5:10

ऐ अल्लाह

5:12

बंदा अपने घर की हिफाजत करता है। तू अपने

5:16

घर की हिफाजत फरमा।

5:19

फिर उन्होंने लोगों से कहा पहाड़ों में

5:21

चले जाओ। अब यह मामला अल्लाह का है।

5:26

रात गुजरी, मक्का खाली था। काबा अकेला था।

5:32

मगर अल्लाह की निगाह अपने घर पर थी। सुबह

5:36

हुई इब्राहम ने हुक्म दिया आगे बढ़ो।

5:42

सिपाहियों ने हाथियों को धकेला मगर सबसे

5:45

आगे वाला हाथी महमूद एक कदम भी आगे नहीं

5:48

बढ़ा।

5:50

इब्राह हैरान हुआ। इसे आगे बढ़ाओ।

5:53

उन्होंने छुड़ियां मारी। लोहे की सलाखें

5:56

घसीयूने। मगर महमूद जमीन पर बैठ गया। फिर

6:00

क्या हुआ? तफसीर इबने कसीर के मुताबिक जब

6:03

उस हाथी को किसी और सिम मोड़ते तो वह तेजी

6:05

से दौड़ पड़ता। मगर जब काबा की तरफ मोड़ते

6:08

तो बैठ जाता। यह अल्लाह की तरफ से पहली

6:11

निशानी थी। मगर इब्राहम ने ना समझा वो

6:15

चीखा।

6:15

को आगे करो।

6:20

और फिर आसमान ने जवाब दिया। अचानक आसमान

6:23

पर स्याही छा गई। लोग ऊपर देखने लगे।

6:26

परिंदों के झंड के झंड समुंदर की तरफ से आ

6:29

रहे थे। यह कोई आम परिंदे ना थे। यह थे

6:32

अबाबील। हर परिंदे के पास तीन पत्थर थे।

6:36

एक चोंच में, दो पंजों में। और यह पत्थर

6:39

आम पत्थर ना थे। रिवायत कहती हैं यह आग से

6:42

पक्की हुई मिट्टी के थे। और जब किसी पर

6:45

गिरते तो जिस्म को पिघला देते। पहला पत्थर

6:48

गिरा एक सिपाही पर। वो चीखा और गिर गया।

6:54

फिर दूसरा, फिर तीसरा और फिर बारिश।

6:58

हजारों पत्थर, हजारों सिपाहियों पर हाथी

7:00

भागने लगे। सिपाही चीखने लगे। इब्राह की

7:03

फौज तितर-बित्तर हो गई। कोई मक्का की तरफ

7:06

भागा, कोई यमन की तरफ मगर परिंदे पीछा

7:09

नहीं छोड़ रहे थे। जहां भी जाते पत्थर साथ

7:12

चलते इब्राह खुद भी भागा मगर उसका जिस्म

7:15

पिघलना शुरू हो चुका था। तफसीर इबने कसीर

7:18

के मुताबिक उसका जिस्म टुकड़े-टुकड़े होने

7:21

लगा और वो सना पहुंचने से पहले रास्ते में

7:23

ही मर गया और उसकी फौज चबाए हुए भूसे की

7:27

तरह जमीन पर बिखर गई। यह वाकया सिर्फ एक

7:30

कहानी नहीं यह अल्लाह की कुदरत का ऐलान

7:33

है। अल्लाह ने दिखा दिया कि उसके घर की

7:36

हिफाजत किसी फौज की मोहताज नहीं। ना

7:38

तलवारों की जरूरत थी ना सिपाहियों की। बस

7:42

एक इशारा और छोटे परिंदों ने ताकतवर फौज

7:46

को खत्म कर दिया। यह वाकया आमुल फील

7:48

कहलाता है। वो साल जब हाथी आए और इसी साल

7:52

कुछ महीने बाद मक्का में एक बच्चा पैदा

7:54

हुआ। वो बच्चा जो बाद में नबी बना। वो

7:57

बच्चा जो पूरी दुनिया के लिए रहमत बना। वो

8:00

थे मोहम्मद।

8:02

अल्लाह ने अपने घर को बचाया ताकि अपने नबी

8:05

को उसी शहर में भेज सके। यह वाक्य आज भी

8:08

हमें क्या सिखाता है? पहला सबक ताकत

8:11

अल्लाह की मर्जी के बगैर कुछ नहीं। अब्राह

8:14

के पास हाथी थे, फौज थी, हथियार थे। मगर

8:18

अल्लाह के सामने सब बेबस हो गए। दूसरा सबक

8:21

गुरूर इंसान को अंधा कर देता है। अब्राह

8:24

ने सोचा कि वो अल्लाह के घर को भी गिरा

8:26

सकता है। मगर गुरूर उसे अपनी तबाही की तरफ

8:29

ले गया। तीसरा सबक अल्लाह अपने दीन की

8:32

हिफाजत खुद करता है। आज भी जब दीन पर हमला

8:35

होता है तो समझ लो अल्लाह की निगाह वहां

8:38

है। चौथा सबक छोटी चीज भी अल्लाह के हुक्म

8:41

से ताकतवर बन जाती है। छोटे परिंदे छोटे

8:44

पत्थर मगर अल्लाह ने उनसे बड़ी फौज खत्म

8:47

करा दी। आज सोचें जब अल्लाह का घर खतरे

8:51

में था तो अल्लाह ने खुद उसकी हिफाजत की।

8:54

अगर हम अल्लाह के दीन पर चलें अगर हम उसके

8:56

अहकाम को पकड़े तो क्या अल्लाह हमारी

8:58

हिफाजत नहीं करेगा? अब्दुल मुत्तलिब ने

9:01

कहा था इस घर का एक मालिक है। आज हम कहते

9:04

हैं हमारी जिंदगी का भी एक मालिक है। और

9:07

जब वो साथ हो तो कोई ताकत हमारा कुछ नहीं

9:10

बिगाड़ सकती। अब्राह ने ताकत पर भरोसा

9:13

किया अब्दुल मुतलिब ने अल्लाह पर एक तबाह

9:16

हो गया। एक तारीख बन गया। अगर आपको आज की

9:19

कुरानी कहानी पसंद आई है तो वीडियो को

9:22

लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब जरूर

9:24

करें। इससे हमें हौसला मिलता है और हमें

9:27

कमेंट्स में जरूर बताएं कि अगली बार आप

9:29

किस नबी की कहानी या किस कौम का वाकया

9:31

सुनना पसंद करेंगे।

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