CLASS 11TH COMPLETE PHYSICS MOST EXPECTED MCQS|| BY SAJAD SIR
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बच्चों जैसा कि मैंने आपको बताया था कि
मैं आपके लिए जेके बोस के इंपॉर्टेंट
एमसीक्यू ले आऊंगा जो बार-बार एग्जाम में
पूछे जाते हैं। तो यहां पर मैं आपके लिए
वो एमसीक्यू लेके आ गया हूं। 50 ऐसे
एमसीक्यू जो बोर्ड में बार-बार पूछे जाते
हैं। अगर आप ये 50 एमसीक्यू कर लेते हो तो
मैं गारंटी से कहता हूं कि इन 50 एमसीक्यू
में से कोई बार एमसीक्यू नहीं आएगा। और जब
आप ये 50 एमसीक्यू करोगे तो आपके 50
एमसीक्यू
और हो जाएंगे। तो आपने क्या करना है कि
इनको अच्छे से पढ़ना है। ठीक है? तो बगैर
टाइम वेस्ट किए जो है वो हम अपने एमसीक्यू
पे आते हैं। तो हमारा पहला एमसीक्यू है द
नंबर ऑफ सिग्निफिकेंट फिगर इन 23.023।
अब देखो ये वाला क्वेश्चन जो है ना वो कम
से कम तीन बार आया हुआ है। बट फिर भी आपको
सिग्निफिकेंट फिगर के रूल्स आने चाहिए।
निकालना आना चाहिए। तो आपको ये चीज पता है
कि किसी भी मेजरमेंट के अंदर जितने भी नॉन
जीरोज़ होते हैं वो सारे सिग्निफिकेंट फिगर
होते हैं। तो यहां पे देखो कितने नॉन
जीरोज़ हैं? एक नॉन जीरोज़ है, दो नॉन जीरो,
तीन और चार। तो चार नॉन जीरोज़ हैं यहां
पे। यहां पे टोटल कितने नॉन जीरोज़ हैं?
चार। तो ध्यान से देखो। दूसरा रूल क्या
होता है? के जितने भी जीरोज़ दो नॉन जीरोज़
के बीच में आते हैं वो भी सिग्निफिकेंट
फिगर होते हैं। तो यहां पे देखो क्या जीरो
दो नॉन जीरो के बीच में आ रहा है? बिल्कुल
आ रहा है। तो ये भी सिग्निफिकेंट फिगर
होगा। तो 4 + 1 हम करेंगे तो हमारा कितना
आएगा? पांच। तो इसका आंसर क्या हो जाएगा
हमारा? पांच। तो आपको रूल पता होने चाहिए।
जितने भी नॉन जीरो है जितने भी हमारे नॉन
जीरो डिजिट है वो सारे के सारे
सिग्निफिकेंट फिगर होते हैं। नॉन जीरो
मतलब 1 2 3 और जितने भी जितने भी जीरो
जितने भी जीरो हमारे नॉन जीरो नॉन जीरो के
बिटवीन आते हैं। नॉन जीरो के बिटवीन आते
हैं। वो भी सिग्निफिकेंट फिगर होते हैं।
जैसे नॉन ज़ीरो के बीच में आ गया जीरो। और
उसके बाद आपको एक रूल और पता होना चाहिए
कि अगर आपके नॉन जीरो के अगर आपके नॉन
जीरो के पहले जीरो आ रहा है नॉन जीरो के
पहले जीरो आ रहा है तो वो सिग्निफिकेंट
फिगर काउंट नहीं होगा और अगर आपका नॉन
जीरो के बाद में जीरो आ रहा है तो
सिग्निफिकेंट फिगर काउंट होगा। ठीक है? तो
नेक्स्ट हमारा जो है वो क्वेश्चन है
प्लैंक कांस्टेंट प्लैंक कांस्टेंट h हैज़
सेम डायमेंशन हैज़ दैट ऑफ़। तो डायमेंशन के
ऊपर हर साल जो है वो क्वेश्चन आता ही आता
है। आपको ये चीज
पता होनी चाहिए कि डायमेंशन फार्मूले जो
है वो बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते
हैं यहां पे फिजिक्स में। तो यहां पे देखो
प्लैंक कांस्टेंट आपको पता है कि प्लैंक
ने कहा था कि फोटन की जो एनर्जी होती है
वो होती है E = E = H टाइम उसकी
फ्रीक्वेंसी। H टाइम फ्रीक्वेंसी। तो हमें
h की वैल्यू निकालनी है। h की वैल्यू हो
जाएगी e डिवाइडेड बाय फ्रीक्वेंसी इज
इक्वल टू आ गया h बच्चों एनर्जी का
डायमेंशन फार्मूला आपको पता होना चाहिए जो
होता है हमारे पास क्या ml²
t की पावर -2 और नीचे आ गया फ्रीक्वेंसी
फ्रीक्वेंसी का मतलब क्या होता है?
फ्रीक्वेंसी का मतलब होता है 1 / t 1 / t
तो जब इस फ्रीक्वेंसी की जगह पे 1 / t
आएगा तो यहां पे आ गया 1 / t फिर इस t को
ऊपर लेके जाएंगे तो ये हो जाएगा कितना ये
हो जाएगा m l²
t की पावर - 1 तो प्लैंक कांस्टेंट का जो
डायमेंशन फार्मूला निकल के आ गया वो निकल
के आ गया m l² t की पावर -1 अब हमें देखना
है कि इनमें से किसका डायमेंशन फार्म
फार्मूला ml² t की पावर -1 है। तो ध्यान
से देखो। एनर्जी का डायमेंशन फार्मूला
हमें हमने अभी लिखा m l² t की पावर -2
जनरली क्या होता है कि फोर्स और एनर्जी का
आपको रटा रटाया होना चाहिए। और मोमेंटम
अगर आप ध्यान से देखो तो मोमेंटम जो होता
है वो होता है मास * वेलोसिटी। मास *
वेलोसिटी। मास का डायमेंशन फार्मूला मास
को m में लिखेंगे। वेलोसिटी का होता है lt
की पावर -1। क्या इसका डायमेंशन फार्मूला
इससे मिलता है? n नहीं मिलता। उसके बाद आ
गया फ्रीक्वेंसी। आपको पता है फ्रीक्वेंसी
का डायमेंशन फार्मूला क्या होता है? t की
पावर -1 क्योंकि फ्रीक्वेंसी टाइम के
इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होती है। अब आता है
एंगुलर मोमेंटम। एंगुलर मोमेंटम जो होता
है वो होता है l = l = लीनियर mv mv और
साथ में r। तो ध्यान से देखो। तो मास का
तो मास ही आएगा। वेलोसिटी का होता है lt
की पावर -1 और r जो है वो एक तरह का
डिस्टेंस है तो डिस्टेंस की जगह पे आ
जाएगा l तो यहां से देखो ये हो जाएगा m l
* l कितना हुआ l² और साथ में t की पावर -1
तो क्या एंगुलर मोमेंटम का डायमेंशन
फार्मूला मैच हो गया किसके साथ
प्लैंक कांस्टेंट के साथ बिल्कुल हो गया
तो हम कहेंगे कि इसका आंसर क्या आएगा
एंगुलर मोमेंटम तो सीधा स्टेट जो है वो
आपको क्या करना है याद याद रखना है कि
हमारा जो प्लैंक कांस्टेंट होता है उसका
डायमेंशन फार्मूला किसके साथ मिलता है?
एंगुलर मोमेंटम के साथ। अब देखो नेक्स्ट
क्वेश्चन आता है बच्चों। ऐसे क्वेश्चन जो
है वो बार-बार मैंने देखे हैं जेके बोस
में पूछे गए हैं कि आपको एक इक्वेशन दे
देगा और आपको बोलेगा उस इक्वेशन में
डायमेंशन फार्मूला निकालो। यहां पे
इक्वेशन क्या गिवन है? यहां पे इक्वेशन
गिवन है f = f = at
+ bt²।
तो बच्चों जब भी आपके पास ऐसी इक्वेशन आ
जाए तो आपने सबसे पहले क्या करना है?
प्रिंसिपल ऑफ होमोजेनिटी लगा देना है।
आपको पता है कि डायमेंशन फार्मूले में
हमने एक टॉपिक पढ़ा था प्रिंसिपल ऑफ
होमोजेनिटी उसके अकॉर्डिंग उसके अकॉर्डिंग
कोई भी अगर आपका एक मैथमेटिकल रिलेशन गिवन
है इक्वेशन गिवन है तो उसमें जो लेफ्ट
साइड के डायमेंशन होते हैं वो किसके बराबर
होते हैं? राइट साइड में। मतलब लेफ्ट साइड
में जितनी भी टर्म्स हैं उनके डायमेंशन
किसके बराबर होंगे? जो राइट साइड पे लिखी
हुई है। तो मुझे बताओ क्या मैं ये कह सकता
हूं कि AT का डायमेंशन फार्मूला जो है वो
f के बराबर होगा? बिल्कुल होगा। क्योंकि
अकॉर्डिंग टू प्रिंसिपल ऑफ़ होमोजेनिटी
दोनों बराबर होते हैं। तो यहां से मुझे a
की वैल्यू निकालनी है। तो a की वैल्यू
क्या हो जाएगी? f / f/ t तो मुझे बताओ f
का डायमेंशन फार्मूला क्या होता है? ml² t
की पावर -2 फोर्स का डायमेंशन फार्मूला और
एनर्जी का फार्मूला रट लो। मैं कहता हूं
बार-बार आता है फोर्स का डायमेंशन
फार्मूला होता है ml²
t की पावर m एक मिनट इसका होता है हमारा
डायमेंशन फार्मूला क्या ml
t की पावर - 2 तो ये होता है फोर्स का
डायमेंशन फार्मूला और नीचे क्या है t तो t
आ गया अब ये पावर ऊपर जाएगा तो नेगेटिव हो
जाएगी तो ये हो गया t की पावर -1 उसमें ये
ऐड होगा तो ये आ जाएगा m l साथ में कितना
हुआ t की पावर -3 तो ध्यान से देखो देखो
यहां पे कहां पे आ रहा है? mlt की पावर -3
चलो एक तो मिल गया हमें। अब साथ में हमें
एक डायमेंशन फार्मूला और निकालना है। वो
कौन सा है? हमें निकालना है bt²। तो हम ये
कहेंगे क्या? अकॉर्डिंग टू प्रिंसिपल ऑफ़
होमोजेनिटी। bt² इक्वल टू bt² = f। तो
हमें b की वैल्यू निकालनी है। तो b इक्वल
टू किसके बराबर हो जाएगा? fेड बाय t का
स्क्वायर। तो अगर आप ध्यान से देखोगे तो
यहां पे हमारा जो है वो b किसके बराबर आ
जाएगा? f की जगह पे आ जाएगा m l ml t की
पावर -2 और नीचे आ जाएगा कितना t² अब देखो
ये t² है तो ऊपर जाएगा t की पावर -2 हो
जाएगा तो b की वैल्यू निकल के आ जाएगी
कितनी m l की पावर 1 t की पावर -4 तो ये
कौन है ml t की पावर 4 आंसर हमारा कौन सा
होगा बी सही होगा ठीक है तो जैसे एक है ना
इक्वेशन v = u + at तो आपको क्या करना
करना है। U का डायमेंशन किसके बराबर होगा?
जो V का होगा और AT का डायमेंशन किसका
होगा? जो V का होगा। अकॉर्डिंग टू
प्रिंसिपल ऑफ़ होमोजेनिटी। ज्यादा सोचना ही
नहीं है। उसके बाद है हमारा
उसके बाद है हमारा क्वेश्चन
ए प्रोजेक्टाइल विल कवर द सेम हॉरिजॉन्टल
डिस्टेंस व्हेन द इनिशियल एंगल ऑफ़
प्रोजेक्शन आर। इनिशियल एंगल ऑफ़
प्रोजेक्शन आर। तो याद रखना कि आपको ये
बोल देगा कि आपके पास दो बॉडीज है। उन दो
बॉडीज को आप इनिशियली किस एंगल से फेंको
कि सच दैट कि उनकी उनका जो हॉरिजॉन्टल
डिस्टेंस है वो सेम रहे। तो याद रखना अगर
ये दोनों एंगल अगर ये दोनों एंगल आपस में
कॉम्प्लीमेंट्री पेयर बना रहे हैं।
कॉम्प्लीमेंट्री पेयर मतलब θ1 + θ2 की
वैल्यू कितनी होनी चाहिए? 90° होनी चाहिए।
तो अगर दो एंगल का सम जो है वो
कॉम्प्लीमेंट्री के बराबर आ रहा है तो हम
कहेंगे कि वहां पे उनकी हॉरिजॉन्टल रेंज
क्या रहेगी? सेम रहेगी। जैसे यहां से आप
किसी बॉडी को फेंक रहे हो। एक बॉडी को ऐसे
फेंका कितने डिग्री के एंगल पे? 30° पे।
एक ऐसे को फेंका कितने डिग्री पे एंगल के?
60° पे। क्या ये दोनों आपस में
कॉम्प्लीमेंट्री है? बिल्कुल है। तो इसका
मतलब इनकी हॉरिजॉन्टल रेंज क्या होगी? सेम
होगी। तो यहां पे देखो ये जो दो है वो आपस
में क्या बना रहे हैं? कॉम्प्लीमेंट्री
पेयर बना रहे हैं। यहां पे 1 मिनट।
यहां पर यह मिस्टेक हो गई है क्योंकि यह
भी कॉम्प्लीमेंट्री पेयर बना रहे हैं।
यहां पर आप इसको कर दो कितना मतलब
कॉम्प्लीमेंट्री नहीं होना चाहिए। यहां पर
यह इसको हम बोल सकते हैं कि मान लो कि ये
60° है। ठीक है? तो आपको ये बोलेगा कि
हॉरिजॉन्टल रेंज सेम होने के लिए क्या
होना चाहिए? हमारे पास दोनों एंगल का सम
कॉम्प्लीमेंट्री होना चाहिए। बस आपको इतना
ध्यान में रखना है। नेक्स्ट आता है हमारे
पास एक लाइट बॉडी एट हैवी बॉडी। तो याद
रखना कि मोमेंटम और काइनेटिक एनर्जी के
ऊपर हमेशा क्वेश्चन पूछता ही पूछता है।
चाहे जो मर्जी हो जाए कि मोमेंट हमारा जो
मोमेंटम है वो काइनेटिक एनर्जी के साथ
कैसे रिलेट करेगा? काइनेटिक एनर्जी
मोमेंटम के साथ कैसे रिलेट होगी? तो उसके
लिए आपको एक फार्मूला याद रखना है। कौन
सा? E इक्वल टू मतलब हमारी एनर्जी जो होती
है वो किसके बराबर होती है? मोमेंटम का
स्क्वायर / 2m। तो जब आप क्लास 11th में
पढ़ते हो ना कौन सा टॉपिक? वर्क पावर
एनर्जी तो वहां पे आपका एक फार्मूला निकल
के आता है। कांसेप्ट निकल के आता है
काइनेटिक एनर्जी और मोमेंटम। तो ये
डायरेक्ट रिलेशन होता है किसके बीच में?
काइनेटिक एनर्जी और मोमेंटम। तो यहां पे
मोमेंटम की वैल्यू निकालो। तो p² जो है वो
किसके बराबर हो जाएगा? p² बराबर हो जाएगा
e और साथ में हो जाएगा कितना? टू और साथ
में हो जाएगा m। ये मोमेंटम इधर स्क्वायर
है तो उधर जाके रूट हो जाएगा। तो p इक्वल
टू किसके बराबर हो जाएगा? अंडर रूट e और
साथ में हो जाएगा 2 और साथ में हो जाएगा m
तो यहां पर क्वेश्चन में देखो क्या कह रहा
है लाइट बॉडी एंड हैवी बॉडी हैव इक्वल
काइनेटिक एनर्जी मतलब इस काइनेटिक एनर्जी
की वैल्यू सेम है टू की वैल्यू भी सेम है
तो इसका मतलब यहां पे मैं ये कह सकता हूं
कि मोमेंटम जो है वो डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल है किसके मास के जिसका मास
ज्यादा होगा उसकी हमारे पास जो है वो
मोमेंटम क्या होगा ज्यादा होगा तो हैवी
बॉडी तो जब भी आपके पास ऐसा क्वेश्चन आए
तो ये रिलेशन यूज़ करके आप बता सकते हो।
नेक्स्ट आता है एंगुलर मोमेंटम। अब आपको
पता है कि एंगुलर मोमेंटम को L से
रिप्रेजेंट करते हैं L वेक्टर। और इसका
फार्मूला आता है क्या? P मोमेंटम क्रॉस R।
ठीक है? अब हमें पूछ रहा है कि ये एंगुलर
मोमेंटम क्या है? तो आपके दिमाग में जब भी
एंगुलर मोमेंटम का कांसेप्ट आए ना तो आपको
सबसे पहले पता ये होना चाहिए कि जब भी कोई
बॉडी रोटेट करती है तो उस वक्त जो उसके
पास मोमेंटम होता है उसको बोलते हैं
एंगुलर मोमेंटम। और एंगुलर मोमेंटम किसका
पार्ट है? रोटेशनल मोशन का और रोटेशनल
मोशन में हमेशा कोई बॉडी किसी एक्सिस के
अबाउट रोटेट करती है। तो ये रेडियस जो है
वो किसको रिप्रेजेंट कर रहा है? एक्सिस
को। तो ये हमारा कौन सा वेक्टर होगा?
एक्सियल वेक्टर होगा। स्केलर तो हो नहीं
सकता। क्यों? क्योंकि एंगुलर मोमेंटम जो
है वो एक वेक्टर क्वांटिटी है और पोलर भी
नहीं हो सकता। तो होगा कौन? एक्सियल।
क्यों एक्सियल? क्योंकि रोटेशनल मोशन जो
होता है वो किसी एक्सिस के अबाउट होता है।
यहां पे इस चीज को दिमाग में रखने के लिए
आप ऐसे सोच सकते हो। ठीक है? नेक्स्ट आता
है हमारे पास देयर इज नो एमॉस्फेयर ऑन द
मून बिक बिकॉज़ अब देखो यह चीज आप ध्यान
में रखना मून के ऊपर आपको पता है कि किसी
भी बॉडी को अगर आपने स्पेस में भेजना है
तो उसको आपको एक मिनिमम वेलोसिटी चाहिए
होती है उसको प्रोजेक्टाइल करने के लिए
प्रोजेक्टेड करने के लिए उसको बोलते हैं
एस्केप वेलोसिटी तो आप ये याद रखोगे कि
मून के ऊपर मून के ऊपर जो हमारी एस्केप
वेलोसिटी की वैल्यू होती है वो कम होती है
क्या होती है कम होती है तो जिसकी वजह से
क्या होता है कि मॉलिक्यूल वहां पे रुक ही
नहीं पाता। अगर आप चाहते हो आपका
मॉलिक्यूल अर्थ के जैसे हमारी गैसेस जो है
वो अर्थ को सराउंड करके रखी हुई है
क्योंकि वहां पे एस्केप वेलोसिटी उनके पास
है। अगर हमारे सेटेलाइट स्पेस में जाते
हैं क्योंकि हमारे सेटेलाइट के पास क्या
है कि एस्केप वेलोसिटी है। तो यहां पे मून
के ऊपर एस्केप वेलोसिटी कम होती है।
एस्केप वेलोसिटी कम होने की वजह से
मॉलिक्यूल वहां पे रुकता ही नहीं स्पेस
में चला जाता है। तो यहां पे क्या इसका
होगा? ये वाला द एस्केप वेलोसिटी ऑफ़ गैस
मॉलिक्यूल इज लेस देन कि आप ऐसा कर सकते
हो कि मून के ऊपर जो गैस के मॉलिक्यूल है
वो एस्केप वेलोसिटी से ज्यादा वेलोसिटी से
मूव करते हैं। तो अगर ज्यादा वेलोसिटी से
मूव करेंगे तो वो स्पेस में चले जाएंगे।
तो ये क्वेश्चन जो है ना स्टूडेंट मैं
आपको बार-बार ये कहता हूं कि ये क्वेश्चन
आप करके जाओ। ये क्वेश्चन जो है वो लास्ट
15 साल में भी आए हुए हैं। और इसके अलावा
भी हमने कुछ ऐसे क्वेश्चन डाले जिनमें एक
क्वेश्चन से तीन चार क्वेश्चन जो है वो
बराबर निकल के आ जाए।
फिर डायमेंशन फार्मूले के ऊपर क्वेश्चन आ
गया। कहता है डायमेंशन फार्मूला ऑफ मोडलेस
ऑफ इलास्टिसिटी। अब आपको पता है कि जब आप
स्ट्रेस को जब आप स्ट्रेस को डिवाइड करते
हो किसके साथ? स्ट्रेन के साथ। जब आप
स्ट्रेस को स्ट्रेन के साथ डिवाइड करते हो
तो आपको एक कांस्टेंट मिलता है जिसको
बोलते हैं यंग मोड्युलस ऑफ इलास्टिसिटी।
जो हमें ये बताता है कि कोई सॉलिड कितना
इलास्टिक है। तो हमें हमें ये बताना है कि
यंग मोड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी का डायमेंशन
फार्मूला किससे मिलता है। अब आप खुद सोचो
कि स्ट्रेस की जगह पे तो मान लो मैंने
स्ट्रेस लिख दिया।
अब देखो स्ट्रेन का फार्मूला क्या होता
है? स्ट्रेन का फार्मूला होता है चेंज इन
लेंथ डिवाइडेड बाय ओरिजिनल लेंथ। अब देखो
लेंथ की यूनिट क्या होती है? मीटर। नीचे
लेंथ की यूनिट क्या आएगी? मीटर। मीटर से
मीटर कट गया। तो यहां पे आंसर क्या आ गया?
वन। तो यहां से हमें एक और क्वेश्चन पता
चल गया क्या? कि स्ट्रेन जो होता है वो
स्ट्रेन जो होता है वो क्या होता है?
यूनिटलेस होता है। स्ट्रेन जो हमारा कैसा
होता है? यूनिट लेस। यूनिट लेस है तो जो
यूनिट लेस है तो वो डायमेंशन लेस भी होगा।
तो यहां पे देखो इसकी जगह पे आप जब वन
लिखोगे तो ये वन आएगा। तो यहां पे यंग
मोडलेस ऑफ़ इलास्टिसिटी की वैल्यू किसके
बराबर निकल के आएगी? स्ट्रेस के। इसका
मतलब अगर यंग मोड्युलस की वैल्यू स्ट्रेस
के बराबर है तो जो डायमेंशन फार्मूला
स्ट्रेस का होगा वही किसका होगा? यंग
मोडलेस ऑफ़ इलास्टिसिटी का। तो यहां पे हम
क्या बोल सकते हैं के जो हमारा मोडलेस ऑफ़
इलास्टिसिटी है उसका डायमेंशन फार्मूला
किससे मिलताजुलता है? स्ट्रेस से। ठीक है?
और अभी आपको पता है स्ट्रेन जो होता है वो
तो यूनिटलेस होता है। वेलोसिटी का
डायमेंशन फार्मूला होता है lt की पावर -1
और सरफेस टेंशन के ऊपर अलग से मैंने
क्वेश्चन पूछा हुआ है। व्हाट इज द
डायमेंशन फार्मूला ऑफ़ सरफेस टेंशन? वो हम
आगे देखेंगे।
नेक्स्ट आता है ड्यूरिंग द फ्री एक्सपेंशन
ऑफ़ गैस एंट्रॉपी में क्या होगा? तो याद
रखना कि एंट्रोपी एंट्रॉपी का मतलब होता
है डिसऑर्डर। एंट्रॉपी का मतलब होता है
क्या? डिसऑर्डर। जैसे कमरे में अगर चीजें
बड़ी संभाल के रखी हुई है तो हम कहेंगे कि
डिसऑर्डर बहुत कम है। तो अगर कमरे में
चीजें जो है वो बहुत ज्यादा बिखरी हुई है
तो हम कहेंगे कि डिसऑर्डर बहुत ज्यादा है।
ठीक है? तो जहां पे डिसऑर्डर ज्यादा होगा
तो वहां पे हमारी एंट्रॉपी भी क्या होगी?
ज्यादा होगी। तो यहां पे आप खुद सोचो कि
अगर एक गैस जो है वो एक्सपेंड कर रही है
तो अगर एक गैस एक्सपेंड कर रही है तो गैस
इधर भी मूव करेगी उधर भी मूव करेगी आगे
जाएगी पीछे आएगी हर तरफ जाएगी तो जब गैस
हर तरफ जाएगी तो डिसऑर्डर बढ़ जाएगा तो
डिसऑर्डर बढ़ेगा तो हमारी एंट्रॉपी भी जो
है वो क्या होगी इनक्रीस होगी ठीक है चलो
द एरिया देखो मैंने आपको ये चीज पहले बताई
थी कि कैनामेटिक में ग्राफ के ऊपर
क्वेश्चन पूछता है यहां पे देखो क्या कह
रहा है एक्सीलरेशन टाइम ग्राफ एक्सीलरेशन
टाइम ग्राफ में आपको पता है कि x एक्सिस
पे आप किसको लेते हो? टाइम को। y एक्सिस
पे किसको लेते हो? एक्सीलरेशन को। तो ऐसे
ग्राफ को हम क्या बोलते हैं? एक्सीलरेशन
टाइम ग्राफ। कहता है कि एक्सीलरेशन टाइम
ग्राफ का एरिया क्या आएगा? मान लो कि
हमारा ग्राफ ऐसा आया तो हमें ये वाला
एरिया निकालना है। तो मैं आपको एक ट्रिक
बताता हूं जिसकी मदद से आप एरिया आसानी से
निकाल देते हो। जब भी आपको एरिया का
बोलेगा तो आपने सिंपली क्या करना है कि x
एक्सिस को मल्टीप्लाई कर देना है। किसके
साथ? y एक्सिस के साथ। x एक्सिस पे क्या
है? t y एक्सिस पे क्या है? a और आपको पता
है कि वेलोसिटी जो होती है वो किसके बराबर
होती है? एक्सीलरेशन डिवाइडेड बाय टाइम।
तो वहां वहां से एक्सीलरेशन की वैल्यू
निकालो तो वो हो जाएगी v * t = a तो जब
वेलोसिटी और टाइम को मल्टीप्लाई करूंगा तो
क्या पता चलेगा?
वेलोसिटी और टाइम को जब आपस में
मल्टीप्लाई करता हूं तो एक्सीलरेशन पता
चलती है। तो यहां पर देखो t * a 1 मिनट
हमारा है v = ये है ना v = a/ t तो यहां
से अगर आप v * t करोगे तो आपका क्या आ
जाएगा? वेलोसिटी जो होती है वो किसके नहीं
सॉरी एक मिनट यहां पे गलती हो गई। हमारा
जो एक्सीलरेशन होती है वो होती है ये
वेलोसिटी होती है डिस्प्लेसमेंट। जो हमारी
एक्सीलरेशन होती है वो होती है हमारे पास
क्या? वेलोसिटी डिवाइडेड बाय टाइम
एक्सीलरेशन को दिमाग में रखो। एक्सीलरेशन
किसके बराबर है? वेलोसिटी डिवाइडेड बाय
टाइम। तो वहां से वेलोसिटी किसके बराबर हो
जाएगी? एक्सीलरेशन * टाइम इज इक्वल टू
वेलोसिटी। तो जब एक्सीलरेशन को जब
एक्सीलरेशन को टाइम से मल्टीप्लाई करते
हैं तो क्या पता चलता है? वेलोसिटी पता
चलती है। तो एक्सीलरेशन टाइम ग्राफ जो है
वो हमें किसके बारे में बताएगा? चेंज इन
वेलोसिटी के बारे में बताएगा। तो ये आपको
चीज पता होना चाहिए। और आपको ये भी पूछ
सकता है कि अगर आपका एक्सीलरेशन टाइम
ग्राफ ना हो बल्कि वेलोसिटी टाइम ग्राफ हो
जिसमें आपने y एक्सिस पे वेलोसिटी लिया
हुआ है और x एक्सिस पे टाइम को लिया हुआ
है। इसका एरिया क्या बताएगा? तो याद रखना
इसका एरिया जो है वो आपको एक्सीलरेशन
देगा।
द
एक्सीलरेशन टाइम ग्राफ। एक्सीलरेशन टाइम
ग्राफ का एरिया हमें किसके बारे में
इंफॉर्मेशन देता है? वेलोसिटी के बारे
में। वेलोसिटी टाइम ग्राफ हमें किसके बारे
में इंफॉर्मेशन देता है? एक्सीलरेशन के
बारे में। ठीक है? और पोजीशन टाइम ग्राफ
के एरिया से हमें कुछ भी पता नहीं चलता।
ठीक है? तो ये आपको पता होना चाहिए।
नेक्स्ट है हमारे पास एंगुलर मोमेंटम ऑफ ए
बॉडी रिमेन कांस्टेंट। अब आपको पता है कि
जब एक बॉडी लीनियर मोशन में होती है तो
उसके पास कौन सा मोमेंटम होता है? लीनियर
मोमेंटम। और जब बॉडी रोटेशनल मोशन में
होती है तो उसके पास कौन सा मोमेंटम होता
है? एंगुलर मोमेंटम। और आपने ये चीज पढ़ी
है कि किसी बॉडी के ऊपर लगने वाली अगर
टोटल फोर्स जो है वो कितनी है? ज़ीरो है तो
उस केस में हम कहेंगे कि उसका मोमेंटम जो
होता है जिसको P से रिप्रेजेंट करते हैं
वो क्या रहता है? कांस्टेंट रहता है या तो
सेम रहता है। बट आपको पता है कि रोटेशनल
मोशन में हम फोर्स को फोर्स नहीं बोलते।
रोटेशनल मोशन में हम फोर्स को बोलते हैं
टॉर्क। क्या बोलते हैं? टॉर्क बोलते हैं।
और टॉर्क को रिप्रेजेंट करते हैं टाऊ से।
ठीक है? तो आपको पता है कि जब किसी बॉडी
के ऊपर लगने वाली फोर्स जीरो होती है तो
उसका लीनियर मोमेंटम कांस्टेंट रहता है।
बट यहां पे टॉर्क की बात हो रही है। तो जब
किसी बॉडी के ऊपर लगने वाला टॉर्क जीरो
होता है। जब किसी बॉडी के ऊपर लगने वाला
टॉर्क जीरो होता है तो उस केस में हम कहते
हैं कि उसका जो एंगुलर मोमेंटम रहेगा वो
क्या रहेगा? कंजर्व रहेगा और एंगुलर
मोमेंटम सेम रहेगा। ठीक है? और टॉर्क का
मतलब क्या होता है? एक ऐसी फोर्स जो बॉडी
को रोटेट करवाने का काम करती है। नेक्स्ट
आता है हमारे पास मोडलेस ऑफ रिजिडिटी ऑफ़ ए
लिक्विड। अब एक चीज आप याद रखो दिमाग में
कि जैसे हमने अभी पढ़ा था यंग मोडलेस ऑफ
इलास्टिसिटी। हमारा ये जो यंग मोडलेस ऑफ़
इलास्टिसिटी होता है ना ये सॉलिड के लिए
डिफाइन होता है। किसके लिए डिफाइन होता
है? सॉलिड के लिए। ये हमें ये बताता है कि
कोई भी सॉलिड जो है वो कितना इलास्टिक है।
इलास्टिक का मतलब जब हमने उसके ऊपर फोर्स
लगाई तो फोर्स लगा के छोड़ी तो क्या वो
अपनी ओरिजिनल पोजीशन में कितना जल्दी आ
रहा है उसका मतलब होता है इलास्टिसिटी।
चाहे मोडलेस ऑफ रिजिडिटी हो चाहे यंग
मोडलेस ऑफ़ इलास्टिसिटी हो। ये सारी की
सारी टर्म सॉलिड के लिए डिफाइन होती है।
लिक्विड के लिए या गैसेस के लिए डिफाइन
नहीं होती। आप खुद सोचो कि क्या क्या
लिक्विड जो होते हैं वो मतलब इलास्टिक
होते हैं? क्या लिक्विड के ऊपर मैं ऐसे
फोर्स लगाऊंगा, ऐसे पुश करूंगा अगर मैं
उसको या पुल करूंगा तो क्या लिक्विड अपनी
ओरिजिनल स्टेट में दोबारा आ जाएगा?
डेफिनेट सी बात है कि नहीं आएगा। तो याद
रखना कि ये जो माउलेस ऑफ़ रिजिडिटी होती
है, ये लिक्विड के केस में भी हमारे पास
कितनी होती है? जीरो होती है। और ये गैसेस
के केस में भी कितनी होती है? जीरो होती
है। क्योंकि ना तो वो वो क्या नहीं होते?
वो स्ट्रेच नहीं होते। ना तो आप उसके ऐसा
नहीं है कि आप उनके ऊपर फोर्स लगाओगे तो
वो अपनी ओरिजिनल स्टेट में दोबारा से आ
जाएंगे। तो ये चीज आपको पता होनी चाहिए।
नेक्स्ट आता है हमारे पास इंटरनल एनर्जी
ऑफ़ एन आइडियल गैस डिपेंड अपॉन। अब आपको
पता है कि काइनेटिक थ्योरी ऑफ़ गैस में
हमने ये चीजें बहुत ही अच्छे से डिस्कस की
है
के जो हमारे गैस के मॉलिक्यूल्स होते हैं
उनके बीच में जो इंटरमॉलिक्यूलर फोर्सेस
ऑफ़ अट्रैक्शन होती हैं। जो गैस के
मॉलिक्यूल के बीच में फोर्सर्सेस ऑफ़
अट्रैक्शन होती है वो जीरो होती है। ये
कौन कहता है? ये कहता है काइनेटिक थ्योरी
ऑफ़ गैस। गैसेस के गैसेस का वॉल्यूम जो
होता है वो नेग्लिजिबल होता है। जीरो के
बराबर होता है। ये कौन कहता है? काइनेटिक
थ्योरी ऑफ़ गैस। और काइनेटिक थ्योरी ऑफ़ गैस
में आपने एक और पॉइंट पढ़ा है कि काइनेटिक
एनर्जी जो होती है गैस की वो डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल होती है टेंपरेचर की। अगर आप
टेंपरेचर बढ़ाओगे तो काइनेटिक एनर्जी
बढ़ेगी। तो आपको ये भी पता होना चाहिए कि
किसी भी सिस्टम की जो टोटल एनर्जी होती है
वो किसके बराबर होती है? सम ऑफ़ काइनेटिक
एनर्जी प्लस पोटेंशियल एनर्जी। अब आप खुद
सोचो कि टोटल एनर्जी को ही हम क्या बोलते
हैं? इंटरनल एनर्जी। अब आप खुद सोचो कि
काइनेटिक एनर्जी अगर चेंज होगी तो टोटल
एनर्जी चेंज होगी। सिर्फ दिमाग में इतनी
बात याद रखो कि अगर अगर आप अगर आप गैस का
क्या अगर आप क्या करोगे? अगर आप टेंपरेचर
को बढ़ाओगे। अगर आप टेंपरेचर को बढ़ाओगे
तो इंटरनल एनर्जी बढ़ेगी। और इंटरनल
एनर्जी के केस में याद रखना आइडियल गैस के
केस में फोर्स भी जीरो होती है और वॉल्यूम
भी जीरो होता है।
नेक्स्ट एट वि एंगल। अब आपको पता है कि जब
आप बॉडी के प्रोजेक्टाइल मोशन के बारे में
पढ़ते हो तो प्रोजेक्टाइल मोशन में जो
रेंज का फार्मूला निकल के आता है वो निकल
के आता है u² sin u² sin 2 थीटा बाय g अब
आप खुद सोचो क्या सोचो कि यहां पे थीटा की
वैल्यू जितनी ज्यादा होगी उतनी रेंज
ज्यादा होगी रेंज मतलब हाइट ज्यादा होगी
अब आप खुद सोचो कि sin कितने पे मैक्सिमम
होता है sin 90 पे मैक्सिमम होता है sin
90 के ऊपर साइन की वैल्यू जो हमें मिलती
है वो क्या मिलती है? मैक्सिमम। अब आप खुद
सोचो कि यहां पे एंगल कितना होगा? 90°। अब
आप खुद सोचो कि इस स्टाइलस को अगर मैं ऐसे
फेंक रहा हूं तो ये यहां तक जाएगा। अगर
मैं इसको ऐसे फेंक रहा हूं ऊपर तो ये यहां
तक गया। तो किसी भी ऑब्जेक्ट को जब आप
वर्टिकली फेंकते हो तो वो ज्यादा हाइट
क्या करता है? अटैन करता है। खत्म। ज्यादा
सोचने की जरूरत ही नहीं। नेक्स्ट आ गया
हमारे पास न्यूटन सेकंड लॉ ऑफ़ मोशन। नाइंथ
क्लास से हम जो है वो ये चीज पढ़ते आए हैं
कि न्यूटन सेकंड लॉ मोशन हमें क्या बताता
है कि फोर्स जो होती है वो किसके बराबर
होती है? मास इन एक्सीलरेशन।
फोर्स जो है वो किसके बराबर होती है? मास
इन एक्सीलरेशन। अब आपको न्यूटन के सेकंड
लॉ से किसके बारे में पता चला? ये जो f
लिखा हुआ है ये क्या है? फोर्स है। तो
ध्यान से पढ़ो। न्यूटन सेकंड लॉ ऑफ़ मोशन
गिव दी मेजर ऑफ़ मेजर ऑफ़ फोर्स। क्योंकि
न्यूटन के सेकंड लॉ हमें फोर्स के बारे
में बताता है।
नेक्स्ट इफ नो एक्सटर्नल फोर्स इज
एक्सर्टेड ऑन ए सिस्टम द वेलोसिटी ऑफ द
सेंटर ऑफ मास। अब देखो जैसे मैं इसको अगर
यहां पे बैलेंस कर रहा हूं। यहां पे ये
नहीं हो रहा। देखो ये यहां पे मैंने इसको
बैलेंस किया तो इसका सेंटर ऑफ़ मास क्या
होगा? यहां पे होगा। कोई भी बॉडी जिस
पॉइंट के अबाउट क्या होती है कि बैलेंस
होती है वो उसका सेंटर ऑफ़ मास होता है। अब
देखो इस बॉडी का मान लो सेंटर ऑफ़ मास यहां
पे है। तो जब मैं इसको मूव करवाऊंगा तो
इसका सेंटर ऑफ़ मास ही मूव करेगा। तो जब
सेंटर ऑफ़ मास मूव करेगा तो सेंटर ऑफ़ मास
की वेलोसिटी भी चेंज होगी। अब आप खुद सोचो
कि फिजिक्स में फिजिक्स में कोई बॉडी
रेस्ट पे कब होती है? या तो या तो वो रुकी
हुई है या तो वो कांस्टेंट वेलोसिटी के
साथ चल रही है। किसके साथ? कांस्टेंट
वेलोसिटी के साथ। जब बॉडी कांस्टेंट
वेलोसिटी के साथ चलती है तो उसकी
एक्सीलरेशन जीरो होती है। एक्सीलरेशन ज़ीरो
का मतलब उसके ऊपर फोर्स जो लग रही है वो
क्या है? ज़ीरो। तो क्वेश्चन क्या कह रहा
है? कि अगर आपके सेंटर ऑफ मास के ऊपर कोई
भी एक्सटर्नल फोर्स नहीं लग रही तो अगर
एक्सटर्नल फोर्स नहीं लग रही तो उसकी
वेलोसिटी क्या रहेगी? उसकी वेलोसिटी जो है
वो कांस्टेंट रहेगी। इसमें क्या सोचना है?
क्योंकि आपको पता है कि जो एक्सीलरेशन
क्यों आती है? फोर्स की वजह से आती है।
बॉडी के ऊपर फोर्स लगेगी तभी एक्सीलरेशन
आएगी। अगर फोर्स नहीं लग रही तो
एक्सीलरेशन नहीं आएगी। नेक्स्ट आता है
हमारे पास नंबर ऑफ़ डिग्री ऑफ़ फ्रीडम। आ
गया हमाराेंट क्वेश्चन। नंबर ऑफ़ डिग्री ऑफ़
फ्रीडम। बच्चों अगर आपको डिग्री ऑफ फ्रीडम
आना निकालना आ जाए ना अगर आपको यह पता चल
जाए कि मोनो एटॉमिक डाई एटॉमिक ट्राई
एटॉमिक गैस की डिग्री ऑफ फ्रीडम क्या होती
है तो आप आसानी से क्या कर सकते हो आपको
ये तीन नंबर में भी देखने को मिल सकता है
और एक नंबर में तो हर साल आता ही आता है
तो याद रखना कि डिग्री ऑफ़ फ्रीडम डिग्री
ऑफ़ फ्रीडम का फार्मूला याद रखो कि डिग्री
ऑफ़ फ्रीडम DOF का जो फार्मूला आता है वो
होता है कितना 3P
3p - R यहां पे R का मतलब होता होता है
हमारे पास नंबर ऑफ़ पार्टिकल। R का मतलब
होता है हमारे पास क्या? नंबर ऑफ़
पार्टिकल। और R का मतलब होता है उन
मॉलिक्यूल्स के बीच का रिलेशन। उन
मॉलिक्यूल के बीच का रिलेशन। ठीक है? अब
देखो, आपको पता है कि या तो एक सिंगल एटम
एक्सिस्ट करेगा या तो दो एटम आपस में
मिलेंगे या तो दो से ज्यादा एटम आपस में
मिलेंगे। जब एक सिंगल एटम की मैं बात करता
हूं तो उसको मैं बोलूंगा मोनो एटॉमिक।
क्या बोलूंगा? मोनो एटॉमिक। जैसे हमारी जो
नोबल गैस होती है वो क्या होती है? मोनो
एटॉमिक होती है। जैसे हमारा हीलियम जो है
वो एक क्या है? नोबल गैस है। तो इसकी
डिग्री ऑफ़ फ्रीडम कितनी होगी? देखो हीलियम
नंबर ऑफ़ पार्टिकल कितने हैं? तीन की जगह
पे तीन आएगा। नंबर ऑफ़ पार्टिकल कितना है?
एक है। और R कितना है? जीरो। क्योंकि एक
हीलियम अगर दूसरे के साथ बॉन्ड बनाता, तो
हम कहते एक रिलेशन है। तो ये ज़ीरो है। तो
डिग्री ऑफ़ फ्रीडम कितनी आ जाएगी? तीन आ
जाएगी। आपको सिर्फ इतना याद रखना है कि
मोनो एटॉमिक गैस की मोनो एटॉमिक गैस की
डिग्री ऑफ फ्रीडम कितनी होती है? तीन। तो
अगर हमारे पास डाई एटॉमिक मॉलिक्यूल आ जाए
डाई एटॉमिक जैसे ऑक्सीजन आ गया हमारा N2 आ
गया हमारा। ये डाई एटॉमिक है तो इनकी
डिग्री ऑफ़ फ्रीडम कितनी होती है? पांच
होती है। आप खुद फार्मूले से भी निकाल के
ये देख सकते हो। तीसरा आता है हमारे पास।
तीसरा आता है हमारे पास ट्राई एटॉमिक
मॉलिक्यूल। ट्राई एटॉमिक मॉलिक्यूल में
बता दो। जैसे हमारा आ गया ओजोन O3 जैसे
हमारे पास आ गया CO2 आ गया जैसे हमारा
वाटर आ गया। ठीक है? अब देखो इसमें भी दो
कैटेगरी होती है। आपने केमिस्ट्री में पढ़ा
है कि कुछ मॉलिक्यूल के स्ट्रक्चर लीनियर
होते हैं। तो जिन मॉलिक्यूल के स्ट्रक्चर
जो होते हैं वो लीनियर होते हैं उनकी
डिग्री ऑफ़ फ्रीडम होती है कितनी? सेवन। और
जिन मॉलिक्यूल की स्ट्रक्चर जो होता है वो
ट्रायंगुलर होता है। जिन मॉलिक्यूल का
स्ट्रक्चर जो होता है वो कैसा होता है?
ट्रायंगुलर। उनकी डिग्री ऑफ फ्रीडम कितनी
होती है? उनकी डिग्री ऑफ फ्रीडम छह होती
है। तो याद क्या रखना है कि मोनो एटॉमिक
की कितनी होती है? तीन होती है। डाई
एटॉमिक की कितनी होती है? पांच होती है।
और ट्राई एटॉमिक की सात भी होती है और छह
भी होती है। क्वेश्चन में डाई एटॉमिक पूछ
रहा है तो डाई एटॉमिक की कितनी होती है?
पांच होती है। ठीक है? उसके बाद देखो
उसके बाद होता है व्हिच टाइप्स ऑफ वेव आर
प्रोड्यूस इन सितार वायर? अब देखो ये भी
आपको पूछ सकता है साथ में ये भी पूछ सकता
है कि ऑर्गन पाइप के अंदर कौन सी आपको पता
है कि ऑर्गन पाइप वाला एक मोस्ट
इंपोर्टेंट क्वेश्चन होता है हमारा वेव
वाला कि ऑर्गन पाइप के अंदर हमारी कौन सी
वेव बनती है? ये पूछ सकता है। पूछ सकता है
कि स्ट्रिंग के अंदर हमारी कौन सी वेव
बनती है? स्ट्रेच स्ट्रिंग के अंदर कौन सी
वेव बनती है? ठीक है? तो पहले तो आपको ये
पता होना चाहिए कि सितार वायर के अंदर जो
हमारी वेव बनती है वो बनती है कौन सी?
स्टेशनरी ट्रांसवर्स वेव। अब आप खुद
सोचोगे एक रस्सी को अगर आप ऐसे पकड़ के
हिला रहे हो तो पार्टिकल ऊपर जा रहा है और
वेव आगे जा रही है। पार्टिकल ऊपर जा रहा
है। वेव आगे जा रही है। तो कौन सा हमारे
पास यहां पे मोशन होगा? ट्रांसवर्स मोशन
होगा। तो ऑर्गन पाइप के अंदर तो आपको पता
है कि स्टैंडिंग वेव बनती है। आप ये भी
पता होना चाहिए आपको कि ऑर्गन पाइप के
अंदर कौन सी वेव बनती है? स्टैंडिंग वेव
बनती है। और स्ट्रिंग के अंदर भी हमारे
पास कौन सी बनती है? ट्रांसवर्स वेव बनती
है। ठीक है? तो ये आपको पता होना चाहिए और
साथ में ये भी पता होना चाहिए कि साउंड जो
है वो कौन सी वेव है? लोंगिट्यूडनल वेव।
रॉकेट प्रोपेल्शन इज बेस्ड ऑन। ठीक है?
जैसे मान लो कि ये कोई हमारा रॉकेट है।
ठीक है? तो यहां से गैसेस जो है वो बाहर
की तरफ जा रही हैं। और रॉकेट खुद ऊपर जा
रहा है। तो यहां पे कौन सा जो है वो
प्रिंसिपल लगेगा? जिस मोमेंटम के साथ
गैसेस यहां से बाहर निकलती हैं, उसी
मोमेंटम के साथ हमारा रॉकेट जो है वो ऊपर
जाता है। तो मोमेंटम की बात हो रही है। तो
इसका मतलब यहां पे हमारा कौन सा कांसेप्ट
लगेगा? कंजर्वेशन ऑफ लीनियर मोमेंटम। जिस
मोमेंटम के साथ गैसें बाहर निकलती हैं,
गैसें उतना ही मोमेंटम रॉकेट के ऊपर
अपवर्ड डायरेक्शन में जाती है। और यहां से
यह भी याद रखना कि रॉकेट के ऊपर जो अपवर्ड
फोर्स लगती है, उसको थ्रस्ट भी बोलते हैं।
तो ये भी कई बार पूछ देता है कि रॉकेट के
ऊपर जो अपवर्ड डायरेक्शन में फोर्स लगती
है उसको क्या बोलते हैं? नेक्स्ट आता है
हमारे पास इफ द नॉर्मल रिएक्शन इज डबल।
आपको पता है कि फोर्स ऑफ़ फ्रिक्शन जो होती
है वो डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होती है
नॉर्मल रिएक्शन R के। और जब प्रपोशनैलिटी
का साइन हटाते हैं तो यहां पे कांस्टेंट आ
जाता है r यहां पे कांस्टेंट एक मिनट
यहां पे एक कांस्टेंट आता है जिसको बोलते
हैं μ और साथ में आ जाता है m μ का मतलब
होता है कोफिशिएंट ऑफ फ्रिक्शन इसको कहते
हैं क्या कोफिशिएंट ऑफ फ्रिक्शन कहता है
कोफिशिएंट ऑफ फ्रिक्शन किसके ऊपर डिपेंड
करेगा अब आप खुद सोचो कि कोफिशिएंट ऑफ
फ्रिक्शन क्या है कोफिशिएंट ऑफ फ्रिक्शन
एक कांस्टेंट है क्योंकि फिजिक्स में आप
ये चीज कितनी बार पढ़ चुके हो कि जब आप एक
कांस्टेंट को हटा हटाते हो तभी
प्रोपोर्शनैलिटी का साइन जब प्रोपोशनलिटी
का साइन हटता है तो कांस्टेंट लग जाता है।
तो जब आप खुद सोचोगे प्रोपोर्शनलिटी का ये
f इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू n था तो
इक्वल टू का साइन कब आया होगा जब ये
कांस्टेंट हुआ तो जब आपका μ कांस्टेंट है
तो कांस्टेंट को कांस्टेंट को क्या लेना
देना जो है वो नॉर्मल रिएक्शन से
कांस्टेंट को नॉर्मल रिएक्शन से कोई लेना
देना नहीं है वो कांस्टेंट है जैसे
रेजिस्टिविटी जो होती है वो नेचर ऑफ़ द
मटेरियल के ऊपर डिपेंड करती है। इसी तरीके
से जो हमारी फोर्स ऑफ़ फ्रिक्शन होती है वो
नॉर्मल रिएक्शन R के ऊपर डिपेंड करती है।
दो सरफेस के बीच में लगने वाली फोर्स के
ऊपर डिपेंड करती है ना कि हमारे किसके
ऊपर? कोफिशिएंट ऑफ़ फ्रिक्शन के ऊपर। तो
यहां पे ये आएगा रिमेन अनचेंज। ठीक है?
नेक्स्ट अभी-अभी मैंने आपको बताया। देखो
उसके ऊपर एक क्वेश्चन और आ गया कि मोमेंटम
और काइनेटिक एनर्जी को आप आपस में कैसे
रिलेट करते हो? अभी मैंने बताया कि जो
एनर्जी होती है वो होती है किसके बराबर?
P² / 2m। अभी मैंने आपको कहा कि एनर्जी
एनर्जी को हम किसके बराबर लिख सकते हैं?
एनर्जी को हम किसके बराबर लिख सकते हैं?
p² / p² / 2m p² / 2m के बराबर जो है वह
हम एनर्जी को क्या कर सकते हैं? लिख सकते
हैं। नेक्स्ट मोमेंट ऑफ इनर्शिया इन
रोटेशनल मोशन इज एनास टू मास इन लीनियर
मोमेंटम। याद रखना मोशन इन अ स्ट्रेट
लाइन। मोशन इन अ स्ट्रेट लाइन जिसको हम
कहते हैं लीनियर मोशन। कि कोई बॉडी जो है
वो सीधा चल रही है स्ट्रेट लाइन में। तो
अगर कोई बॉडी जो है वो स्ट्रेट लाइन में
चल रही है। उस केस में हम क्या बोलेंगे?
उसके पास क्या है? मास है। क्या है? मास
है। तो मास को मास बोलते हैं। बट कहां पे?
लीनियर मोशन में। रोटेशनल मोशन में हम लीन
मास को मास नहीं बोलते। लीनियर मोशन में
रोटेशनल मोशन में रोटेशनल मोशन में हम जो
है RM रोटेशनल मोशन में हम मास को बोलते
हैं मोमेंट ऑफ मोमेंट ऑफ
मोमेंट ऑफ इनर्शिया। मोमेंट ऑफ इनर्शिया
जिसको I से क्या करते हैं? रिप्रेजेंट
करते हैं। तो लीनियर मोशन में जो काम करता
है कौन? लीनियर मोशन में जो काम करता है
कौन? मास। वो काम रोटेशनल मोशन के अंदर
कौन करता है? मोमेंट ऑफ इनर्शिया। तो यहां
पे ये ट्रू ही बोलेंगे हम। क्यों? क्योंकि
मोमेंट ऑफ इनर्शिया इन रोटेशनल मोशन इज़
एनालॉगी टू मास इन लीनियर मोमेंटम।
बिल्कुल। क्योंकि वहां पे जो लीनियर
मोमेंटम में मास का काम करता है यहां पे।
ये अब फिर डायमेंशन फार्मूले के ऊपर
क्वेश्चन आ गया। तो डायमेंशन फार्मूला जो
है वो आपको आना चाहिए निकालना। डायमेंशन
फार्मूले के लिए पहले आपको ये पता होना
चाहिए कि वो रिलेशन किसके बराबर है। देखो
क्वेश्चन देखो।
क्वेश्चन है द यूनिट ऑफ इंपल्स इज सेम एज
अब यहां पे डायमेंशन नहीं पूछ रहा है।
यूनिट पूछ रहा है। ध्यान से देखो।
हमारा जो इंपल्स होता है I इंपल्स का मतलब
क्या होता है? वो फोर्स जो किसी बॉडी के
ऊपर बहुत ही कम टाइम के लिए एक्ट करती है।
उसको हम क्या बोलते हैं? इंपल्स। और
इंपल्स का फार्मूला क्या होता है? फोर्स *
टाइम। फोर्स को टाइम से जब मल्टीप्लाई
करते हैं तो इंपल्स है। ठीक है? जैसे फॉर
एग्जांपल फोर्स लगी शॉर्ट टाइम के लिए
लगी। तो शॉर्ट टाइम के लिए लगी तो हम क्या
बोलेंगे कि यहां पे हमारा क्या लग रहा है?
इंपल्स लग रहा है। अब हमें यूनिट निकालनी
है। अब यूनिट कैसे निकलेगी? देखो फोर्स
किसके बराबर होती है? मास * एक्सीलरेशन।
और साथ में कौन आ जाएगा? टाइम आ जाएगा। अब
आपको पता है कि मास को किससे रिप्रेजेंट
करते हैं? केजी से। एक्सीलरेशन की यूनिट
क्या होती है? एक्सीलरेशन की यूनिट होती
है मीटर पर सेकंड स्क्वायर और टाइम की
क्या होती है? सेकंड। अब देखो यहां पे ये
आ जाएगा kg = m यहां पे देखो दोनों के
बेसिस सेम है तो पावर माइनस हो जाएगी तो
kgs की पावर कितना हो जाएगा? -1 तो इंपल्स
की यूनिट क्या निकल के आई? केजी मीटर s
इनवर्स। ठीक है? अब देखो यहां पे एनर्जी।
अब एनर्जी की तो यूनिट आपको पता है कि जूल
होती है। ये तो इंपल्स से मिलती जुलती
नहीं है। लीनियर मोमेंटम किसके बराबर होता
है? आपको पता है कि मोमेंटम को P से
रिप्रेजेंट करते हैं। वो होता है मास *
वेलोसिटी। मास को किससे रिप्रेजेंट करते
हैं? केजी से। वेलोसिटी को किससे
रिप्रेजेंट करते हैं? मीटर पर सेकंड की
पावर -1। फस गया। अगले ऑप्शन पे जाना ही
नहीं है। क्यों अगले ऑप्शन पे जाके अपना
टाइम वेस्ट करें? तो हमारा आंसर क्या
होगा? लीनियर मोमेंटम। अदरवाइज आपको पता
है वेलोसिटी की यूनिट क्या होती है? मीटर
पर सेकंड की पावर -1 और पावर की जो यूनिट
होती है वो क्या होती है? वाट होती है।
मैंने बोला था यह स्टार्टिंग में चीज कि
एक क्वेश्चन से 10-10 क्वेश्चन जो है वो
निकल के आएंगे। ठीक है ना? ए सो के रात को
सो के सुबह आपके सामने आके नहीं खड़े हो
जाते। यहां पे बहुत ही ज्यादा हमारी जो है
वो मेहनत लगती है। हमें पता है कि
एग्जामिनर कहां से क्वेश्चन जो है वो क्या
कर सकता है? अराइज़ कर सकता है। नेक्स्ट
देखो। नेक्स्ट आता है हमारा द एक्सीलरेशन
ऑफ़ ए बॉडी। द एक्सीलरेशन ऑफ़ ए बॉडी मूविंग
विद कॉन्सेंट स्पीड इन अ सर्कल। अब देखो
ये रोटेशनल मोशन का टॉपिक है। तो यहां पे
आपको ये पता होना चाहिए कि जब कोई बॉडी
सर्कुलर मोशन में घूमती है। जब कोई बॉडी
सर्कुलर मोशन में घूमती है तो उसकी स्पीड
तो कांस्टेंट रहती है। उसकी स्पीड जो वो
क्या रहती है? कांस्टेंट मतलब सेम रहती
है। बट उसकी वेलोसिटी चेंज होती है।
क्यों? क्योंकि उसकी डायरेक्शन हर पॉइंट
पे चेंज होती रहती है। तो एक चीज तो आपको
ये पता चली कि जब कोई बॉडी सर्कुलर मोशन
में घूम रही है, उसकी स्पीड सेम रहती है।
वेलोसिटी क्या होती है? चेंज होती है। बट
यहां पे भी आपको ये पता होना चाहिए कि
देयर इज़ ए रिलेशनशिप बिटवीन लीनियर
वेलोसिटी एंड एंगुलर वेलोसिटी। तो वो क्या
होता है? वो होता है v = v = r ओमेगा
स्क्वायर। तो ये रिलेशन जो है वो हम
डिराइव भी करते हैं। बट यहां पे के दो बार
कम से कम ये क्वेश्चन रिपीट हुआ है और
कहीं और जगह पे भी मैंने इस क्वेश्चन को
देखा था। तो अभी ये डिराइव कैसे हुआ वो तो
हम बता नहीं सकते। बट फिलहाल जो है वो आप
इतना याद रखो कि जब कोई बॉडी सर्कुलर मोशन
में घूम रही है तो उसके पास कौन सी
वेलोसिटी होगी? r ओमेगा स्क्वायर।
इफ द वेलोसिटी ऑफ़ ए बॉडी इज डबल द
काइनेटिक एनर्जी बिकम कह रहा है कि अगर
बॉडी की वेलोसिटी को डबल कर दिया जाए तो
काइनेटिक एनर्जी के ऊपर क्या फर्क पड़ेगा?
आपको पता है कि जब कोई बॉडी मोशन में होती
है तो तब उसके पास जो एनर्जी होती है उसको
क्या बोलते हैं? काइनेटिक एनर्जी। और
काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला क्या होता
है? KE = काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला
क्या होता है? KE = 1 / 2 1 / 2mv²
तो ध्यान से देखो। तो 1 / 2 की जगह पे 1 /
2 ही बचा। m की जगह पे M ही रहा। तो यहां
पे क्वेश्चन में वो कह रहा है कि वेलोसिटी
को डबल कर दिया। डबल का मतलब हो गया v की
जगह पे टू आएगा। तो जब टू का स्क्वायर
करेंगे तो वो कितना आ जाएगा? फोर। तो इसका
मतलब 1 / 2 m और साथ में कितना हो गया?
फोर। तो 1 / 2 सेम ही रहा। एक्स्ट्रा चीज
क्या आ गई? फोर। तो इसका मतलब अगर आप
वेलोसिटी को डबल करोगे। डबल मतलब v का
स्क्वायर। v का स्क्वायर मतलब 2 का
स्क्वायर। 2 का स्क्वायर मतलब फोर। तो
काइनेटिक एनर्जी कितनी हो जाएगी? फोर
टाइम्स। तो ये चीज आपको अगर काइनेटिक
एनर्जी का फार्मूला आपको पता था, तो ये
चीज़ यहां से आप क्वेश्चन उड़ा सकते थे।
नेक्स्ट
इफ m इज द मास ऑफ द अर्थ इफ m इज दी मास
ऑफ दी अर्थ एंड r इज दी रेडियस देन द
रेश्यो ऑफ़ g कहता है कि अगर m जो है वो
मास है किसका अर्थ का और उसके बाद r जो है
वो रेडियस है किसका अर्थ का m जो है वो
मास है किसका अर्थ का r जो है वो रेडियस
है किसका अर्थ का तो बताओ g टू g का
रेश्यो क्या होगा तीन नंबर में भी आया हुआ
है क्वेश्चन और दो नंबर में भी आया हुआ है
और एक नंबर में भी ये क्वेश्चन आया हुआ
है। ठीक है? तो यहां से आपको ये चीज पता
होनी चाहिए कि यहां पे देखो यहां पे ऊपर आ
जाएगा स्माल जी और नीचे आ जाएगा कैपिटल g।
बच्चा-बच्चा जानता है कि स्माल जी की
वैल्यू जो होती है वो होती है कैपिटल gिटल
g / r का स्क्वायर एक्सीलरेशन ड्यू टू
ग्रेविटी। तो नीचे आ जाएगा कैपिटल g। अब
कैपिटल g से कैपिटल g कैंसिल हो गया। और
यहां पे ये क्या निकल के आ गया? m / r का
स्क्वायर। ठीक है? तो कहां पे है? m / r
का स्क्वायर। ये है m / r का स्क्वायर।
नेक्स्ट आ गया हमारा द रूट मीन स्क्वेयर
वेलोसिटी ऑफ़ ए परफेक्ट गैस। अगर एक गैस है
तो आपको पता है कि गैस के पास तीन तरह की
वेलोसिटी होती है। पहली वेलोसिटी होती है
RMS, Vrms और दूसरी होती है VMP
और चौथी होती है V एवरेज।
अगर एक गैस का मॉलिक्यूल मूव करता है तो
उसके पास तीन तरह की वेलोसिटी होती है।
आरएमएस मतलब रूट मीन स्क्वेयर वेलोसिटी ऑफ़
गैस मॉलिक्यूल मोस्ट प्रोबेबल वेलोसिटी ऑफ़
गैस मॉलिक्यूल एवरेज वेलोसिटी ऑफ़ गैस
मॉलिक्यूल। तो रूट मीन स्क्वायर वेलोसिटी
का जो फार्मूला होता है वो होता है
3rt
3rt/m मोस्ट प्रोबेबल वेलोसिटी का
फार्मूला होता है
2rt
2rt अप mवर वेलोसिटी का जो फार्मूला होता
है वो होता है
8rt अंडर 8rt अप पाई और साथ में क्या हो
गया m तो यहां से ये दो भी आप याद रखो बट
पूछा है आर एमएस का तो आर एमएस का क्या हो
जाएगा फार्मूला अंडर रूट अंडर रूट 3rt अप
m जो है वो हो जाएगा। ठीक है? उसके बाद
आता है हमारे पास फर्स्ट लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक इज द लॉ ऑफ़। बचपन से सुनते
आए हैं कि एनर्जी कैन नेदर बी क्रिएटेड नर
बी डिस्ट्रॉय बट इट कैन बी ट्रांसफर फ्रॉम
वन फॉर्म टू अनदर। तो किसकी बात करता है?
फर्स्ट लॉ ऑफ़
फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक। एनर्जी की
बात करता है।
एनर्जी की। ठीक है? द डायमेंशन फिर आ गया
डायमेंशन फॉर्मूले के ऊपर क्वेश्चन। मैंने
कहा था कि सरफेस टेंशन का अलग ही बताऊंगा
आपको। ठीक है? अब देखो आपको पता है कि
सरफेस टेंशन जो होती है वो होती है सरफेस
टेंशन का फार्मूला होता है फोर्स पर यूनिट
लेंथ। ठीक है? पानी का जो अपर सरफेस होता
है कई बार क्या होता है कि उसमें
इमंबैलेंस फोर्सेस एक्ट करती है। जिसकी
वजह से वहां पे टेंशन प्रोड्यूस होती है।
जिसको सरफेस टेंशन बोलते हैं। फार्मूला
याद रखो। s = f / l का मतलब हो गया लेंथ।
f का मतलब हो गया एरिया। बार-बार यह बताया
है कि एनर्जी का डायमेंशन फार्मूला याद
रखो डायरेक्ट। ml² ml² t की पावर -2 फोर्स
का डायमेंशन फार्मूला mlt - 2 क्यों ये दो
डायमेंशन फार्मूले याद करने को बोल रहा
हूं? क्योंकि इनसे बहुत सारे डायमेंशन
फार्मूले निकल के आ जाते हैं। फोर्स का
डायमेंशन फार्मूला क्या होता है? ml²
और साथ में हो गया ml² एक मिनट यहां पे
ml² नहीं आएगा।
यहां पे आएगा m
lt की पावर - 2 और नीचे कितना आ जाएगा? l
अब आपको पता है ये l ऊपर जाएगा तो इस तो l
की पावर 1 है। इस l की पावर -1 तो l तो
ज़ीरो हो गया। तो यहां पे बचा m l की पावर
0 t की पावर -2 तो l की पावर 0 को लिखो ना
लिखो एक ही फर्क है। देखो m l की पावर 0 t
की पावर -2 इज द डायमेंशन फार्मूला ऑफ़ द
सरफेस टेंशन। व्हिच ऑफ द फॉलोइंग इज अ
सेल्फ एडजस्टिंग फोर्स? एक पहाड़ है बड़ा
सारा।
मैं उसके ऊपर फोर्स तो लगा रहा हूं बट वो
हिल नहीं रहा। क्यों नहीं हिल रहा?
क्योंकि उसके इंटरनल एक फोर्स एक्ट कर रही
है। जो उसको जो उसको जो जो मेरे मोशन को
क्या कर रही है? रेजिस्ट कर रही है। मैं
चाहता हूं कि पहाड़ मोशन में आ जाए। बट
पहाड़ अपने अंदर एक ऐसी फोर्स डेवलप कर
रहा है जो चाहता है कि वो मोशन में ना आए।
तो आपको पता है कि अगर एक बॉडी रेस्ट पे
है तो आप उसके ऊपर फोर्स लगा रहे हो। बट
वो मूव नहीं हो रहा तो उस केस में कौन सी
फोर्स एक्ट करती है? स्टैटिक फ्रिक्शन।
ठीक है ना? स्टैटिक फ्रिक्शन इज अ सेल्फ
एडजस्टिंग फोर्स। और आपको पता है कि जब
हमारा बॉडी जस्ट मूव होती है मतलब हिलती
है अपनी जगह से उस वक्त जो फ्रिक्शन आती
है उसको लिमिटिंग फ्रिक्शन। और जब एक बार
वो मोशन में आके मूव होना शुरू हो जाए तेज
तेज तेज तेज़ तो डायनेमिक फ्रिक्शन।
नेक्स्ट आता है मूवमेंट ऑफ इनर्शिया ऑफ़ ए
बॉडी डिपेंड अपॉन। तो आपको पता है कि जब
एक बॉडी रोटेशनल मोशन में होती है तो वो
चाहती है कि वो अपने रोटेशनल मोशन को
मेंटेन करके रखे। तो अगर उसके रोटेशनल
मोशन को आप चेंज करने की कोशिश करोगे तो
वो उसको क्या करेगी? अपोज करेगी। तो आपको
डायरेक्ट पता होना चाहिए कि जो हमारा
मोमेंट ऑफ इनर्शिया होता है वो होता है I
= mr²।
तो मोमेंट ऑफ इनर्शिया का क्या फार्मूला
होता है हमारे पास? मोमेंट ऑफ इनर्शिया का
फार्मूला होता है हमारे पास I = mr²
m क्या है हमारा? मास ऑफ़ द सिस्टम। R जो
है वो हमारा क्या है? रेडियस। ठीक है? तो
ध्यान से देखो। तो मोमेंट ऑफ इनर्शिया
किसके ऊपर डिपेंड कर रहा है? मास के ऊपर।
रेडियस के ऊपर। मास के ऊपर डिपेंड कर रहा
है। मास के डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ मास के ऊपर
भी डिपेंड कर रहा है क्योंकि मास ही है।
पोजीशन ऑफ़ एक्सिस के ऊपर डिपेंड कर रहा
है। क्योंकि r का मतलब होता है पोजीशन ऑफ़
एक्सिस कि वो कितना किसी एक्सिस से कितना
दूर घूम रहा है। तो यहां पे एंगुलर स्पीड
की जो है वो कहीं पे बात नहीं हो रही। तो
मोमेंट ऑफ इनर्शिया जो है वो एंगुलर स्पीड
के ऊपर डिपेंड नहीं करता। उसके बाद आता है
व्हिच ऑफ द फॉलोइंग इज इंडिपेंडेंट ऑफ द
मास ऑफ द अर्थ। अब आपको पता है कि जो
एक होती है ऑर्बिटल वेलोसिटी मतलब वो
वेलोसिटी जो हमें चाहिए एक सेटेलाइट को
अर्थ के ऑर्बिट में इंसर्ट करने के लिए
उसका जो फार्मूला होता है वो होता है अंडर
रूट gm/
r एक होती है एस्केप वेलोसिटी जिसका
फार्मूला होता है वो वेलोसिटी जिस
वेलोसिटी से हम सेटेलाइट को अगर स्पेस में
फेंकेंगे तो वो अर्थ का ग्रेविटेशनल फील्ड
पार करके स्पेस में चली जाएगी। ठीक है? और
एस्केप वेलोसिटी का फ़ूला क्या होता है?
2gm / r अभी-अभी मैंने बताया कि g की
वैल्यू कितनी होती है? g की वैल्यू होती
है gmे
/ r का स्क्वायर। gm / r का स्क्वायर।
क्या तीनों के तीनों फार्मूलों में मास
है? बिल्कुल है। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़
इंडिपेंडेंट ऑफ़ द मास? V तो मास के ऊपर
डिपेंड कर रहा है क्योंकि इसके फार्मूले
में मास है। G जो है वो मास के ऊपर डिपेंड
कर रहा है। याद रखना इसी में जब हम GM
वगैरह पुट करते हैं ना तो वो 9.8 निकल के
आता है। तो क्या इसमें मास है? बिल्कुल
है। तो तीनों के तीनों तो मास के ऊपर
डिपेंड कर रहे हैं। तो आंसर क्या होगा? नन
ऑफ दिस। तो एक क्वेश्चन आपको यहां से एक
और याद रखना है कि एस्केप वेलोसिटी की जो
वैल्यू होती है वो होती है 11.2
11.2 कि.मी. पर सेकंड। और जो ऑर्बिटल
वेलोसिटी की वैल्यू होती है वो होती है
कितनी? 7.9
7.9 कि.मी. पर सेकंड। और याद रखना कि जो
एस्केप वेलोसिटी जो होती है वो होती है
किसके बराबर? अंडर रूट टू टाइमस ऑफ
ऑर्बिटल वेलोसिटी। कहा था कि एक क्वेश्चन
से 10 क्वेश्चन बनाऊंगा। देखो उसके बाद
आता है हमारे पास व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग कैन
बी ज़ीरो व्हेन ए पार्टिकल इज़ इन मोशन?
डिस्प्लेसमेंट वेक्टर है। तो देखने से ही
पता चल गया कि वेक्टर जीरो हो सकता है। तो
मैं यहां से चल चलता चलता चलता चलता यहां
गया। यहां से चलता चलता चलता चलता यहां पे
आया। तो जो मेरा फाइनल था वही मेरा
इनिशियल बन गया। तो फाइनल माइनस इनिशियल
कितना हो जाएगा? ज़ीरो। तो डिस्प्लेसमेंट
जो है वो ज़ीरो हो सकता है। स्पीड वेक्टर
है ज़ीरो नहीं हो सकती। डिस्टेंस वेक्टर है
ज़ीरो नहीं हो सकता। तो नन ऑफ़ दिस तो है ही
नहीं। चलो। उसके बाद पाथ ऑफ द पाथ ट्रेस्ड
बाय अ प्रोजेक्टाइल इज कॉल्ड जब हम किसी
बॉडी को स्पेस में फेंक देते हैं ना कि चल
उसके बाद सच दैट कि वो ग्रेविटी के
इन्फ्लुएंस में आके ही मूव करती रहे तब हम
कहते हैं कि उसके अंदर कौन सा मोशन होता
है? प्रोजेक्टाइल मोशन। अब देखो यहां से
मैंने इसको गिराया तो ये यहां पे आया। तो
ये जो इसने रास्ता ट्रेवल किया ना कहता है
कि इस रास्ते को फिजिक्स की लैंग्वेज में
क्या कहेंगे? तो याद रखना इसको बोलते हैं
ट्रेजेक्टरी।
उसके बाद आता है व्हिच ऑफ द फॉलोइंग इज
नॉट एन एग्जांपल ऑफ न्यूटन थर्ड लॉ ऑफ
मोशन। ठीक है? अब देखो वाकिंग वाकिंग में
क्या होता है कि एक बंदा अपने पांव जो है
वो पीछे मारता है। खुद आगे जाता है। तो एक
फोर्स पीछे लग रही है। एक आगे धकेल रही
है। यहां पे तो होगा। उसके बाद साइकिलिंग
में भी आपको पता है न्यूटन का थर्ड लॉ
मोशन थर्ड लॉ मोशन अवे होता है। स्किडिंग
में जो है वो आपका न्यूटन का थर्ड लॉ ऑफ़
मोशन अवे होता है। देखो बोट से अगर आप
छलांग लगाओगे ना तो देखो कि बोट पीछे
जाएगी। तो वहां पे तो थर्ड लॉ अप्लाई हो
जाता है। बट बोट के ऊपर आप वॉक करोगे तो
एज इट इज आपको नहीं दिखेगा कि मतलब थर्ड
लॉ अप्लाई हो रहा है या नहीं। नेक्स्ट आता
है द रोटेशनल काइनेटिक एनर्जी ऑफ ए बॉडी
इज गिवन बाय कहा था जबेंट क्वेश्चन की
वीडियो लाई थी तो वहां पे कहा था कि
रोटेशनल मोशन और जो हमारा लीनियर मोशन
होता है उनके बीच में कंपैरिजन के ऊपर
क्वेश्चन पूछ सकता है। तो यहां पे ये
क्वेश्चन तीन नंबर में भी आया हुआ है और
ऑब्जेक्टिव टाइप में भी आया हुआ है। ठीक
है? तो आपको ये पता होना चाहिए कि
काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला होता है KE =
KE = 1 / 2 1 / 2mv² बट हमें काइनेटिक
एनर्जी को लिखना है किसमें? रोटेशनल मोशन
में। आपको पता है रोटेशनल मोशन में मास को
किससे रिप्रेजेंट करते हैं? मोमेंट ऑफ
इनर्शिया से। तो इसकी जगह पे I आ गया।
वेलोसिटी को किससे रिप्रेजेंट करते हैं?
एंगुलर वेलोसिटी से। तो इसकी जगह पे ओमेगा
का स्क्वायर आ गया। तो काइनेटिक एनर्जी को
रोटेशनल मोशन में कैसे लिखेंगे? 1 / 2i
ओमेगा स्क्वायर 1 / 2i ओमेगा स्क्वायर तो
ये होगा तो कुछ चीजें आप याद रखो कुछ
चीजें आप याद रखो क्या कौन सी चीज याद
रखोगे
लीनियर मोशन में आपको पता है कि
डिस्प्लेसमेंट को s बोलते हैं एंगुलर
रोटेशनल मोशन में डिस्प्लेसमेंट को
डिस्प्लेसमेंट नहीं बोलते एंगुलर
डिस्प्लेसमेंट थीटा बोलते हैं लीनियर मोशन
में वेलोसिटी को वेलोसिटी बोलते हैं।
रोटेशनल मोशन में वेलोसिटी को एंगुलर
वेलोसिटी ओमेगा बोलते हैं। लीनियर
वेलोसिटी में एक्सीलरेशन को एक्सीलरेशन
बोलते हैं। बट यहां पे एक्सीलरेशन को
अल्फा बोलते हैं। एंगुलर एक्सीलरेशन। तो,
यह कंपैरिजन आपको करना आना चाहिए। व्हिच
लॉ डिस्क्राइब दी ऑर्बिट ऑफ़ प्लनेट अराउंड
दी सन। तो, न्यूटन तो कोई बात नहीं करता।
किरचोफ तो मतलब इलेक्ट्रिसिटी में है।
फराडे तो मतलब इंडक्शन की बात करता है। तो
कैप्लर लॉ होगा इसका आंसर। क्योंकि आपको
पता है कि ग्रेविटेशन में कैपिलर लॉ ही है
जो यह कहता है कि सारे प्लनेट्स जो है वो
अर्थ के ऑर्बिट में घूमते हैं। जिसमें
पहले लॉ को आप क्या कहते हो? पहले लॉ को
आप कहते हो लॉ ऑफ़ पहले लॉ को आप कहते हो
लॉ ऑफ़ ऑर्बिट जो आपको किसके बारे में
बताता है? ऑर्बिट के बराबर। दूसरा लॉ को
कहते हैं लॉ ऑफ़ एरिया। जो एरिया के बारे
में बताता है। तीसरे लॉ को आप कहते हो लॉ
ऑफ़ टाइम पीरियड। जो आपको क्या करता है?
टाइम पीरियड के बारे में बताता है। तो
आपको क्या करना है कि इन तीनों चीजों को
याद रखनी है। कई बार डायरेक्ट पेपरों में
पूछ देता है कि कौन सा लॉ है जो लॉ ऑफ़
टाइम पीरियड के बारे में बात करता है।
उसके बाद व्हिच ऑफ़ न्यूटन लॉ हेल्प इन
फाइंडिंग दी फोर्स। अब देखो इसके ऊपर
क्वेश्चन बार-बार रिपीट हो रहा था। तो
इसलिए मैंने इसके ऊपर दो क्वेश्चन लेके आ
गया मैं। कौन सा? एक है व्हिच ऑफ़ न्यूटन
लॉ हेल्प इन फाइंडिंग दी फोर्स? तो आपको
पता है कि सेकंड लॉ ही है जो फोर्स की बात
करता है क्योंकि अकॉर्डिंग टू न्यूटन
सेकंड लॉ F जो है वो किसके बराबर होता है?
ma के बराबर होता है। नेक्स्ट
लिमिटिंग फ्रिक्शन किसके ऊपर डिपेंड करती
है? तो आपको पता है कि जो फोर्स ऑफ़
फ्रिक्शन होती है वो डायरेक्टली
प्रपोर्शनल होती है। किसके? नॉर्मल
रिएक्शन R के। अभी बताया नॉर्मल रिएक्शन
का मतलब क्या होता है? कि दो बॉडीज जब
कांटेक्ट में होती है तो उनके बीच में जो
फोर्स एक्ट करती है उसको क्या बोलते हैं?
नॉर्मल रिएक्शन R। तो नॉर्मल रिएक्शन के
ऊपर क्या करती है? फोर्स ऑफ फ्रिक्शन
डिपेंड करती है। एरिया ऑफ कांटेक्ट के ऊपर
डिपेंड नहीं करती। वॉल्यूम के ऊपर डिपेंड
नहीं करती। कलर के ऊपर डिपेंड नहीं करती।
किसके ऊपर डिपेंड करती है? नॉर्मल रिएक्शन
आर के ऊपर। नेक्स्ट आता है हमारे पास
व्हिच ऑफ़ टाइप ऑफ हीट ट्रांसफर टेक प्लेस
व्हेन बोइलिंग वाटर टेक इन ए पॉट। अब देखो
जैसे फॉर एग्जांपल यहां पे आपने कोई एक
कंटेनर रखा हुआ है। इस कंटेनर में आपने
लिया हुआ है पानी। पानी लिया हुआ है। तो
नीचे से जो है वो आप क्या कर रहे हो कि
यहां पर मान लो कि आपने आग जला के रखी है।
यहां से आग जो है वो यहां तक पहुंची और वो
पानी क्या हुआ? गर्म हुआ। आपने देखा होगा
कि जब पानी गर्म होता है तो पानी के
मॉलिक्यूल्स क्या करते हैं? मोशन करते
हैं। नीचे वाले मॉलिक्यूल ऊपर जाते हैं।
ऊपर वाले मॉलिक्यूल नीचे आते हैं। ऐसे
लगता है कि बड़बड़ बड़बड़ पानी पानी क्या
करता है? आवाज निकालता है, मूव करता है।
कभी पानी नीचे का ऊपर जाता है, ऊपर का
पानी नीचे जाता है। तो जब मॉलिक्यूल का
एक्चुअल मोशन होता है तो उस एक्चुअल मोशन
को हम क्या बोलते हैं? कन्वेक्शन। तो याद
रखना कि लिक्विड के केस में लिक्विड के
केस में कौन सी लिक्विड के केस में जब हीट
फ्लो करती है तो उसको क्या बोलते हैं?
कन्वेक्शन। और सॉलिड के केस में जब हीट
फ्लो करती है तो उसको बोलते हैं कंडक्शन।
देखो ये कंटेनर है। यहां नीचे से यहां
नीचे से जो आग यहां नीचे से जो हीट निकल
के यहां से यहां नीचे से जो हीट निकल के
कंटेनर तक जा रही है उसको बोलते हैं
रेडिएशन। क्या बोलते हैं रेडिएशन? या जो
सन से लाइट हमारे तक पहुंच रही है वो है
रेडिएशन। तो ये जो हमारा कंटेनर गर्म हो
रहा है। कंटेनर गर्म होने का मतलब क्या
है? कि सॉलिड में हीट जा रही है। तो जब
सॉलिड में हीट फ्लो करती है तो उसको क्या
बोलते हैं? कंडक्शन। और जब आपकी हीट जो है
वो लिक्विड तक पहुंच जाती है तो उसको क्या
बोलते हैं? कन्विक्शन। ठीक है?
एसआई यूनिट ऑफ एोग। देखो आपको पता है कि
फिजिक्स में कुछ कांस्टेंट ऐसे होते हैं
जो डायमेंशन लेस होते हैं। बट यहां पे
हमारे पास बात कर रहा है किसकी? एोगड्रो
कांस्टेंट की। तो याद रखना कि एोगड्रो
कांस्टेंट जो होता है वो डायमेंशन लेस
नहीं होता। इसकी यूनिट होती है क्या? मोल
इनवर्स। ठीक है? मोल इनवर्स इसकी क्या
होती है? यूनिट होती है। नेक्स्ट होता है
डायमेंशन। फिर आ गया डायमेंशन फार्मूले के
ऊपर क्वेश्चन। और ये डायमेंशन फार्मूले के
ऊपर क्वेश्चन जो हमारे पास है ना ये कई
बार याद रखना कि पेपरों में निकालने के
लिए तीन नंबर का क्वेश्चन अलग से पूछ देता
है कि ड्राइव दी एक्सप्रेशन फॉर दी
फार्मूला फॉर दी डायमेंशनल फार्मूला ऑफ़
यूनिवर्सल ग्रेविटेशनल कांस्टेंट। आपको
पता है कि न्यूटन के लॉ से f जो होता है
वो किसके बराबर होता है? कैपिटल gिटल gm1
* m2 / r का स्क्वायर अकॉर्डिंग टू न्यूटन
यूनिवर्सल लॉ ऑफ़ ग्रेविटेशन। तो यहां से
देखो हमें g की वैल्यू निकालनी है। तो ये
हो जाएगा f r² ठीक है? तो यहां पे खाली g
बचना चाहिए। ये m1 m2 नीचे आ जाएगा। m1 और
m2 जो है वो हमारा क्या आ गया? नीचे आ
गया। और इधर क्या बच गया हमारा? कैपिटल g।
तो क्योंकि हमें कैपिटल g का डायमेंशनल
फार्मूला निकालना है। f का डायमेंशनल
फार्मूला अभी बताया था। क्या होता है? ml²
ml की पावर -2 r² का मतलब क्या हो गया?
रेडियस का स्क्वायर। और रेडियस को किस में
मेजर करते हैं? लेंथ में। तो ये हो जाएगा
लेंथ का स्क्वायर और डिवाइडेड बाय क्या आ
गया हमारा? m1 * m2 m1 * m2 को हम क्या
लिख सकते हैं? m² क्योंकि इस m का भी
डायमेंशन फार्मूला m ही होगा। इस मास का
भी डायमेंशन फार्मूला m ही होगा। तो m *
mm का स्क्वायर। तो इस m को ऊपर लेके जाओ
तो ये हो जाएगा m की पावर कुछ नहीं है तो
m की पावर 1 तो यहां पे l की पावर कितना
हो गया? l की पावर 1 और l की पावर 2 कितना
हो गया? l की पावर 3 और यहां पे हो गया t
की पावर कितना हो गया? -2 t की पावर -2 और
इस m को ऊपर लेके जाओगे तो ये हो जाएगा m
की पावर कितना -2 अब देखो m की पावर वन
उधर बच गया हमारा कौन उधर बच गया हमारा g
m की पावर 1 में से m की पावर -2 निकाले
तो कितना बचा m की पावर माइनस वन एल की
पावर यहां पे कितना बचा थ्री और यहां पे
क्या बचा t की पावर -2 तो क्या आया m की
पावर टू ये देखो m की पावर -1 l की पावर 2
और t की पावर माइनस 3 ठीक है तो ऐसे
उड़ाते हैं डायमेंशन फार्मूले नेक्स्ट आ
आगे देखो वैल्यू ऑफ़ एक्सीलरेशन ड्यू टू
ग्रेविटी। अब देखो केप्लर ने ये कहा था कि
हमारी प्लनेट जो होती है वो एग्जैक्ट जो
होती है वो स्फेरिकल नहीं होती बल्कि उसकी
इलिप्टिकल शेप होती है। तो इलिप्टिकल शेप
में ये आ गया हमारा उसका कौन सा? पोल। ये
आ गया पोल। और ये आ गया हमारा कौन सा?
इक्वेटर। ठीक है? ये आ गया उसका ये आ गया
अर्थ का इक्वेटर। और ये आ गया हमारा अर्थ
का सेंटर। तो याद रखना पोल के ऊपर पोल के
ऊपर g की पोल के ऊपर जो g की वैल्यू होती
है वो क्या होती है? मैक्सिमम होती है।
इक्वेटर के ऊपर इक्वेटर के ऊपर जो g की
वैल्यू होती है वो क्या होती है? मिनिमम
होती है। क्या होती है? मिनिमम होती है।
और सेंटर में सेंटर में जो g की वैल्यू
होती है वो कितनी होती है? ज़ीरो होती है।
तो तीन क्वेश्चन जो है वो यहीं से बन गए।
क्या कि अर्थ के सरफेस के ऊपर g की वैल्यू
9.8 होती है। अर्थ के सरफेस से ऊपर जाओगे
तो कम होगी। नीचे जाओगे तो कम होगी।
इक्वेटर पे मिनिमम होगी। पोल पे मैक्सिमम
होगी। सेंटर पे जीरो होगी। सीधा मतलब इसको
याद रखो। स्माल g की वैल्यू स्माल g की
वैल्यू अर्थ के सरफेस पे 9.8 होती है।
अर्थ के सरफेस से ऊपर जाएंगे घटेगी। नीचे
जाएंगे घटेगी। सेंटर पे कितनी हो जाएगी?
जीरो। पोल्स पे क्या होगी? मैक्सिमम।
इक्वेटर पे मिनिमम। तो मैक्सिमम का पूछ
रहा है तो मैक्सिमम कहां पे होगी? पोल पे।
पोटेंशियल एनर्जी ऑफ़ ए सिंपल पेंडुलम। अब
देखो ये आ गया एक सिंपल पेंडुलम। अब आपको
पता है कि जब सिंपल पेंडुलम ऑसिलेट करता
है तो यहां से यहां जाएगा।
फिर यहां से यहां जाएगा। ये होती है इसकी
मीन पोजीशन।
ये होती है इसकी कौन सी पोजीशन? एक्सट्रीम
पोजीशन। कभी वो मीन पोजीशन से एक्सट्रीम
पोजीशन पे जाएगा। कभी एक्सट्रीम पोजीशन से
मीन पोजीशन पे आएगा। अब आप खुद सोचो कि जब
वो मीन पोजीशन से एक्सट्रीम पोजीशन पे
जाएगा तो थोड़ी देर के लिए रुकेगा। तो जब
वो रुकेगा तो उसकी काइनेटिक एनर्जी जीरो
होगी। तो इसका मतलब एक्सट्रीम पोजीशन पे
इसकी काइनेटिक एनर्जी क्या हो जाएगी?
जीरो। बट इसकी कौन सी एनर्जी यहां पे
मैक्सिमम हो जाएगी? पोटेंशियल एनर्जी। तो
याद रखना कि एक्सट्रीम पोजीशन पे
पोटेंशियल एनर्जी क्या होती है? मैक्सिमम
होती है क्योंकि बॉडी के पास पोटेंशियल
एनर्जी आती ही उसकी पोजीशन के चेंज होने
की वजह से है। तो उसकी पोजीशन चेंज होगी
तो तभी उसके पास पोटेंशियल एनर्जी आएगी।
नेक्स्ट आता है हमारे पास अकॉर्डिंग टू
बोइल्स लॉ। अब आपको पता है कि केमिस्ट्री
में या फिजिक्स में काइनेटिक थ्योरी ऑफ़
गैस में एक लॉ होता है बोइल्स लॉ। वो
बोल्स लॉ क्या कहता है? वो बोल्स लॉ ये
कहता है के गैस का जो वॉल्यूम होता है वो
इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होता है प्रेशर के।
तो अगर आप प्रेशर बढ़ाओगे अगर आप प्रेशर
बढ़ाओगे तो आपका वॉल्यूम क्या होगा? कम
होगा। बट इसके लिए जैसे ओम्स लॉ में हम
कुछ स्पेसिफिक कंडीशंस लेके चलते हैं। तो
यहां पे भी हमें कुछ स्पेसिफिक कंडीशन ही
लेके चलना पड़ता है। वो कौन सी स्पेसिफिक
कंडीशन होती है कि हमारा टेंपरेचर जो है
वो क्या रहता है? कांस्टेंट रहता है। ठीक
है? तो टेंपरेचर जब कांस्टेंट रहेगा तो
तभी हमारा बोइल लॉ जो है वो क्या होगा?
अप्लाई होगा। नेक्स्ट कहता है कि इन
काइनेटिक थ्योरी द एवरेज काइनेटिक एनर्जी
ऑफ़ अ गैस मॉलिक्यूल। अब आपको पता है कि
यहां पे अगर हमारे पास बहुत सारे गैस के
मॉलिक्यूल हैं तो जब आप इन गैस के
मॉलिक्यूल को हीट करोगे तो हीट करने के
बाद उनकी उनका उनके पास एनर्जी आ जाएगी।
तो जब उनके पास एनर्जी आ जाएगी तो वो
फास्ट मूव करेंगे। फास्ट मूव करेंगे तो
उनकी काइनेटिक एनर्जी जो है वो क्या हो
जाएगी? बढ़ जाएगी। ठीक है? तो यहां पे ये
क्या कह रहा है? इन काइनेटिक एनर्जी
थ्योरी द एवरेज काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ अ गैस
मॉलिक्यूल प्रोपोर्शनल टू टेंपरेचर। तो ये
आपको कई बार क्वेश्चन भी पूछता है कि
काइनेटिक एनर्जी जो है वो कैसे रिलेट होती
है? तो याद रखना काइनेटिक एनर्जी जो होती
है वो टेंपरेचर के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल
होती है। तो अगर आप टेंपरेचर बढ़ाओगे तो
काइनेटिक एनर्जी बढ़ेगी। ठीक है? उसके बाद
आता है इन सिंपल हार्मोनिक मोशन। तो याद
रखना कि जब पार्टिकल सिंपल हार्मोनिक मोशन
करता है। सिंपल हार्मोनिक मोशन कैसे? अपनी
मीन पोजीशन से एक्सट्रीम पे गया, फिर मीन
पे आया, एक्सट्रीम पे गया, फिर मीन पे
आया। टू एंड फ्रॉम मोशन को क्या बोलते
हैं? सिंपल हार्मोनिक मोशन। तो याद रखना
जब हमारा पार्टिकल सिंपल हार्मोनिक मोशन
करता है तो उस केस में जो उसकी एक्सीलरेशन
होती है वो होती है - ओमेगा स्क्वायर x और
ये लॉन्ग में भी मैंने इंपॉर्टेंट में
बताया था कि इसकी एक्सप्रेशन ड्राइव कैसे
करते हैं आएगा पेपर में तो आप खुद सोचो कि
एक्सीलरेशन जो है वो किसके ऊपर डिपेंड कर
रही है पोजीशन के ऊपर। डिस्प्लेसमेंट के
ऊपर डिस्प्लेसमेंट बढ़ेगा तो एक्सीलरेशन
बढ़ेगी। तो यहां पे आंसर में क्या आएगा?
डिस्प्लेसमेंट। उसके बाद होता है द टाइम
पीरियड ऑफ़ ए सिंपल पेंडुलम। आपको पता है
कि मैंने आपको यह बताया है कि t इक्वल टु
होता है हमारे पास किसके बराबर? 2pi t =
2pi होता है और
/
/ g तो आप खुद सोचो कि सिंपल पेंडुलम का
जो टाइम पीरियड होता है टाइम पीरियड का
मतलब क्या हो गया कि सिंपल पेंडुलम का बॉब
अपनी मीन पोजीशन से एक्सट्रीम पे गया। तो
फिर उसको एक्सट्रीम से मीन में आने में
कितना टाइम लगा? उसको क्या बोलते हैं?
टाइम पीरियड। ठीक है? आप खुद सोचोगे टाइम
पीरियड में एक एल आ रहा है, एक जी आ रहा
है। तो इसका मतलब जो हमारा टाइम पीरियड
होता है वो एल के ऊपर भी डिपेंड करता है।
जी के ऊपर भी डिपेंड करता है। तो मास ऑफ द
बॉब के ऊपर डिपेंड नहीं करता। लेंथ ऑफ द
पेंडुलम के ऊपर डिपेंड करता है।
एंप्लीट्यूड के ऊपर नहीं डिपेंड करता।
डेंसिटी के ऊपर डिपेंड नहीं करता। जो चीज
फार्मूले में आएगी उसी के ऊपर डिपेंड करता
है। एस्केप वेलोसिटी। अभी-अभी बताया कि
एस्केप वेलोसिटी की वैल्यू होती है 9.8 9
सॉरी एस्केप वेलोसिटी की वैल्यू होती है
11.2 कि.मी. पर सेकंड और यहां पे ये देखो
ये किसकी वैल्यू थी? ये थी ऑर्बिटल
वेलोसिटी की वैल्यू। ठीक है? तो साथ-साथ
आपको याद करके डायमेंशन फार्मूला ऑफ़
प्रेशर। लास्ट क्वेश्चन शुरू डायमेंशन
फार्मूले से। खत्म भी डायमेंशन फार्मूले
से। तो सोचो आप खुद कि हमारा डायमेंशन
फार्मूला जो होता है वो कितना इंपॉर्टेंट
रोल जो है वो क्या करता है? प्ले करता है।
आपको पता है कि प्रेशर का मतलब क्या होता
है? फोर्स
पर यूनिट एरिया। तो जब आप किसी एरिया के
ऊपर क्या लगाते हो? फोर्स लगाते हो तो हम
कहते हैं प्रेशर। जैसे मैं इसको दबा रहा
हूं यहां पे तो एरिया के ऊपर फोर्स लगी।
तो मैं बोलूंगा कि यहां पे क्या एग्जर्ट
हुआ है? प्रेशर। प्रेशर हो गया फोर्स अप
एरिया। अगेन मैं 10 बार आपको बता चुका हूं
कि एनर्जी का डायमेंशन फार्मूला होता है
ml² t की पावर -2 फोर्स का होता है mlt -
2 ठीक है तो फोर्स का क्या होता है m lt
की पावर -2 और एरिया का मतलब क्या होता है
लेंथ * ब्रेड्थ लेंथ * ब्रेड्थ लेंथ को
लेंथ ही लिखेंगे ब्रेड्थ को भी लेंथ ही
लिखेंगे तो ये हो जाएगा लेंथ का स्क्वायर
तो जब आप लेंथ को नीचे से ऊपर लेके जाओगे
तो इसकी पावर नेगेटिव हो जाएगी तो ये हो
जाएगा m l तो यहां पे हो जाएगा l की पावर
-2 और साथ में हो जाएगा t की पावर -2 तो
ध्यान से देखो तो यहां पे क्या आ जाएगा m
l की पावर वन में से l की पावर -2 गए तो
पीछे कितना बचे l की पावर -1 और साथ में
क्या बचा t की पावर -2 तो l की पावर -1 t
की पावर -2 m की m की पावर 1 l की पावर -1
l की पावर -1 t की पावर -2 इज दी डायमेंशन
फार्मूला। ठीक है? तो इसलिए जो है वो अगर
आपको डायमेंशन फार्मूले ड्राइव करना आते
हैं तो ये क्वेश्चन कुछ भी नहीं है। हवा
में जो है वो आप क्या करोगे? इन
क्वेश्चनों को अड़ाओगे। तो पेपर से पहले इन
क्वेश्चनों को एक बार जो है वो जरूर देख
के जाना। तो एक चीज मैं आपको और बताना भूल
गया यहां पे कि याद रखना जैसे एनर्जी का
जो डायमेंशन फार्मूला आता है ना चाहे वो
जितनी भी टाइप की एनर्जी हो चाहे वो
काइनेटिक एनर्जी हो
चाहे वो पोटेंशियल एनर्जी हो चाहे वो
रोटेशनल एनर्जी हो
चाहे वो रोटेशनल एनर्जी हो चाहे वो
ट्रांजिशनल एनर्जी हो कोई सी भी एनर्जी हो
हर तरह की एनर्जी की जो यूनिट होती है वो
जूल होती है और हर तरह की एनर्जी की जो
डायमेंशन फार्मूला होता है वो क्या होता
है? सेम होता है। तो ये चीज पता होनी
चाहिए। उसके बाद कई बार मैंने देखा है कम
से कम पांच साल अगर आज तक 10 साल पेपर हुए
हैं ना तो उन 10 साल के एग्जाम्स में कम
से कम पांच बार ये क्वेश्चन जो है वो
रिपीट हुआ है। आप मना करोगे 2025 के पेपर
में आता है। फिर
2025 का विंटर जोोन के पेपर में भी आता
है। समर ज़ोन के पेपर में भी आता है। 2023
के अंदर भी आता है। क्योंकि इंटीग्रेशन का
क्वेश्चन होता है। तो इंटीग्रेशन को टैकल
करना थोड़ा मुश्किल होता है। तो इस
क्वेश्चन को मैं आपको बता देता हूं कि
फोर्स की वैल्यू कितनी गिवन है यहां पे इस
क्वेश्चन में? फोर्स की वैल्यू गिवन है
0.5x
+ 10 तो ये गिवन है किसकी? फोर्स की
वैल्यू। खुद कह रहा है कि फोर्स = 0.5x
+ 10 तो किसी बॉडी के ऊपर इतनी फोर्स लगती
है। किसी पार्टी के ऊपर लगती है। और यहां
पे फोर्स को हमने न्यूटन में लिया हुआ है
और x को मीटर में लिया हुआ है। तो हमें
निकालना है वर्क डन। अब आप खुद सोचो कि जब
आप किसी बॉडी के ऊपर फोर्स लगाओगे तो जब
हमने उसके ऊपर फोर्स लगाई तो मान लो कि
स्टार्टिंग में उसका डिस्प्लेसमेंट था
कितना? जीरो। और बाद में उसका
डिस्प्लेसमेंट कितना हो गया? टू।
स्टार्टिंग में हमारी बॉडी जो थी वो यहां
पे थी। यहां पे थी। तो जब स्टार्टिंग में
उसका डिस्प्लेसमेंट कितना था? जीरो। तो
हमारी बॉडी के ऊपर जब हमने फोर्स लगाई तो
हमारी बॉडी यहां से यहां पे पहुंच गई। तो
उसका इनिशियल डिस्प्लेसमेंट था ज़ीरो। तो
फाइनल डिस्प्लेसमेंट कितना हो गया? टू।
हमें ये निकालना है कि यहां से यहां तक जो
उसके ऊपर वर्क डन हुआ है उस वर्क डन की
वैल्यू हमें कैलकुलेट करनी है। अब आपको
पता है कि वर्क डन का जो फार्मूला होता है
वो होता है फोर्स
* डिस्प्लेसमेंट। वर्क का फार्मूला क्या
होता है? फोर्स * डिस्प्लेसमेंट। बट ये
फार्मूला हमारा तभी अप्लाई होता है जब
फोर्स की वैल्यू क्या हो? सेम हो।
डिस्प्लेसमेंट की वैल्यू क्या हो? सेम हो।
अब मुझे आप खुद ये चीज बताओ के यहां पे
फोर्स की वैल्यू कितनी गिवन है? f = 0.5x
अब मुझे बताओ कि x = 1 से लेके x = 2 के
बीच में x की कोई भी वैल्यू हो सकती है।
जब वन रखोगे तो फोर्स अलग निकल के आएगी।
टू रखोगे तो फोर्स अलग निकल के आएगी। 1.11
रखोगे तो फोर्स अलग निकल के आएगी। तो आपको
पता है कि वेरिएबल फोर्सर्सेस का वर्क डन
कैसे निकलता है? इंटीग्रेशन से निकलता है।
तो इंटीग्रेशन वाला फार्मूला लगाओ वर्क डन
वाला। आपको पता है कि एक तो वर्क डन का
फार्मूला होता है। वर्क इक्व फोर्स *
डिस्प्लेसमेंट। ये फार्मूला तभी लगता है
जब फोर्स की वैल्यू सेम हो। मान लो हमारी
बॉडी यहां से यहां पे पहुंच गई। यहां पे
यहां पे पहुंच गई। यहां पे इसके ऊपर फोर्स
लग रही थी 5 न्यूटन की। यहां तक इसके ऊपर
फोर्स जो है वो कितनी लगती रही? 5 न्यूटन
ही लगती रही। तब हमारा ये वाला फार्मूला
अप्लाई होगा। बट यहां पे तो फोर्स की
वैल्यू अलग है। यहां पे जब ये आगे बढ़ यहां
पे फोर्स की वैल्यू अलग है। यहां पे फोर्स
की वैल्यू अलग है। क्योंकि यहां पे फोर्स
जो है वो फंक्शन है किसका? x का। तो यहां
पे हम फार्मूला यूज़ करते हैं इंटीग्रल
fdx।
ठीक है? और इंटीग्रेशन के बाहर हम लिमिट
लिख लिमिट को लगाते हैं कि हम कहां से
कहां पे जा रहे हैं। तो स्टार्टिंग में
हमारा डिस्प्लेसमेंट था ज़ीरो और बाद में
कितना था? टू। ठीक है? तो ये वाला
फार्मूला लगा के हम इसका आंसर क्या
करेंगे? कैलकुलेट करेंगे। ठीक है? तो कैसे
कैलकुलेट करेंगे? देखो
देखो हमारा जो है वो हमारा वर्क डन का जो
फार्मूला होता है हमारी फोर्स जो है वो
कितनी गिवन है f = f = f = 0.5x
0.5x
+ 0.5x
0.5x + 10 0.5x + 10 तो हमारा वर्क डन का
क्या फार्मूला होता है? वर्क डन का
फार्मूला होता है इंटीग्रेशन इंटीग्रेशन 0
टू 0 टू 2 और साथ में क्या हो जाएगा f dx
स्माल डिस्प्लेसमेंट ठीक है तो वर्क डन
क्या निकल के आ गया इंटीग्रल यहां पे बाहर
आएगा इंटीग्रेशन 0 टू 2 अंदर फोर्स की
वैल्यू रखो फोर्स की वैल्यू क्या है फोर्स
की वैल्यू है 0.5x
+ 10 तो इसको ब्रैकेट में रखा और बाहर
क्या आ गया dx बाहर क्या आ गया हमारा dx
ठीक है? अब अगर
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