Electrochemistry Class 12 Chemistry Chapter 2 One Shot | New NCERT CBSE | Complete chapter
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इलेक्ट्रो आया है इलेक्ट्रिसिटी से और
केमिस्ट्री बोले तो केमिकल चेंजेज
इलेक्ट्रिसिटी और केमिकल चेंजेज के
रिलेशनशिप्स को ही पढ़ते हैं हम इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री कोई होगा
ऑक्सीडेंट तो कोई और होगा रिड्यूस करेगा
दूसरों को
ऑक्सीडक्सी देशन रिडक्शन के खेल में जनरेट
होगा
इलेक्ट्रिसिटी हेलो एवरीवन मुझे उम्मीद है
कि आप सभी अच्छे हैं और आज मैं लेकर आई
हूं इलेक्ट्रो केमिस्ट्री क्लास 12थ
केमिस्ट्री का एक जबरदस्त वीडियो तो कुल
मिला के आने वाला है बहुत ही ज्यादा मजा
और मैं तो इतना ही कह सकती हूं कि इस पूरे
वीडियो को देखने के बाद इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री के कॉन्सेप्ट्स होंगे क्रिस्टल
क्लियर तो मैं हूं रोशनी फ्रॉम लनो हब द
फ्री लर्निंग प्लेटफॉर्म जहां पर आप
फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ्स बायोलॉजी सब कुछ
पढ़ सकते हो अब्सोल्युटली फॉर फ्री एटन
hub.com सो तैयार हैं सभी लोग लेट्स गेट
स्टार्टेड
तो प्यारे बच्चों गेस करो कि क्या पढ़ने
वाले हैं हम इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में नाम
पे अगर फोकस करो इलेक्ट्रो बोले तो
इलेक्ट्रिसिटी से आया होगा केमिस्ट्री तो
अपना केमिस्ट्री केमिकल रिएक्शंस राइट तो
यानी कि इलेक्ट्रो केमिस्ट्री के अंदर हम
पढ़ने वाले हैं इलेक्ट्रिसिटी और केमिकल
रिएक्शंस के बीच का रिलेशन तो हम कह सकते
हैं कि इलेक्ट्रो केमिस्ट्री इज द स्टडी
ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एंड हाउ इट रिलेट्स टू
केमिकल रिएक्शंस तो कुल मिला के कुल मिला
के सार यही है कि इस पूरे लेसन के अंदर हम
दो तरह की कांसेप्ट को पढ़ेंगे दो तरह की
हम बातें करेंगे एक तो हम यह बात करेंगे
कि किस तरह से हम एक केमिकल रिएक्शन से
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट कर सकते हैं दूसरा हम
यह बात करेंगे कि किस तरह से हम
इलेक्ट्रिसिटी से एक केमिकल रिएक्शन को
करवा सकते हैं राइट तो यानी कि या तो हम
केमिकल एनर्जी टू इलेक्ट्रिकल एनर्जी की
बात कर रहे होंगे या फिर हम इलेक्ट्रिकल
एनर्जी टू केमिकल एनर्जी की बात कर रहे
होंगे ठीक अब इलेक्ट्रो केमिस्ट्री का जो
बेस है मतलब ये जो इलेक्ट्रिकल टू केमिकल
केमिकल टू इलेक्ट्रिकल ये जो चीजें हो रही
होंगी ये किस बेसिस पर हो रही होंगी यहां
पर हमारा जो बेस होगा वो होगा रेडॉक्स
रिएक्शंस हम देखेंगे कि इनके अंदर जो
रिएक्शंस एक्चुअली में हो रहे होंगे वो
किस तरह के रिएक्शंस है रेडॉक्स रिएक्शन
जिन-जिन बच्चों के कान खड़े हो रहे हैं कि
यह रेडॉक्स रिएक्शन क्या होता है फटाफट से
जाओ क्लास 11थ केमिस्ट्री रेडॉक्स रिएक्शन
का जो वन शॉर्ट वीडियो मैंने बनाया था
उसको फटाफट से देखो ताकि रेडॉक्स रिएक्शन
के कांसेप्ट में कोई डाउट ना रह जाए ठीक
है ओके तो अब जैसा कि मैं कह रही थी कि
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में हम या तो बात
करेंगे कि हम केमिकल रिएक्शन से
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेंगे ठीक है तो
यहां पे इस तरह के सिचुएशन में हम किस तरह
के केमिकल रिएक्शंस की बात करेंगे
स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शंस जो दूसरा
तरह का सिचुएशन है उसमें हम बात करेंगे कि
इलेक्ट्रिसिटी से हम एक केमिकल रिएक्शन को
करवाएंगे तो इस दौरान हम बात करेंगे नॉन
स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शंस की समझ आई
नहीं आई ढंग से समझते हैं स्पॉन्टेनियस
एंड नॉन स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शंस तो
बच्चों अगर हम बात करें स्पॉन्टेनियस
रिएक्शन स्पॉन्टेनियस मतलब यू नो जो खुद
से ही मोटिवेटेड हो जो खुद से होते रहते
हैं ऐसे रिएक्शंस यानी कि ये वैसे
रिएक्शंस हैं जो खुद से ही एक पर्टिकुलर
डायरेक्शन में प्रोसीड करते रहते हैं और
इन्हें किसी एक्सटर्नल एनर्जी की जरूरत ही
नहीं होती है जैसे कि हमारा सेल्फ
मोटिवेटेड पढ़ाकू बच्चा जो बच्चा खुद से
मोटिवेटेड है उसे खुद से पढ़ाई करनी है वह
क्या करेगा उसे ना तो डांट की जरूरत है ना
धुलाई की जरूरत है ना पिटाई की जरूरत है
ना एग्जाम का डर का जरूरत है ना लालच
दिखाने की जरूरत है वो बच्चा खुद ही
मोटिवेट है तो वो अपना पढ़ाई करते रहेगा
तो ठीक उस पढ़ाकू सेल्फ मोटिवेटेड बच्चे
की तरह है हमारा स्पॉन्टेनियस रिएक्शंस
ठीक है तो अब इन स्पॉन्टेनियस रिएक्शन की
बात हम कहां पे करते हैं जब मैंने बताया
था इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में हम दो तरह की
चीजें पढ़ते हैं पहली चीज क्या होती है कि
केमिकल रिएक्शन से हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट
करते हैं ठीक है तो वहां पर ये केमिकल
रिएक्शन जो है ये खुद से होते हैं इनको हम
जबरदस्ती नहीं करवाते हैं तो यहां पर हम
बात करते हैं स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शन
की जो रिएक्शंस खुद से होते हैं और उनके
होने के दौरान जो हमें एनर्जी मिलती है
उससे हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करवाते हैं
क्लियर अब बात करेंगे नॉन स्पॉन्टेनियस
रिएक्शन की अब सारे बच्चे सेल्फ मोटिवेटेड
थोड़ी ना होते हैं कुछ ऐसे शैतान वाले
बच्चे भी तो होते हैं जिन्हें पढ़ने का मन
ही नहीं करता यार तो ऐसे बच्चों के साथ
क्या होता है ऐसे बच्चों को कई बार डराया
जाता है कि कल एग्जाम है और अगर तुम
एग्जाम में फेल होए तो तुम्हें अगली क्लास
में प्रमोशन नहीं मिलेगा कई बार लालच
दिखाया जाता है कि अगर तुम एग्जाम में पास
हो गए तो तुम्हें नया मोबाइल फोन मिलेगा
और कई बार तो वही डांट पिटाई धुलाई यही सब
काम आती है सो ये सारी चीजें किसका काम
करती है एक एक्सटर्नल पुश का काम करती है
एक एक्सटर्नल एनर्जी का काम करती है उससे
वो बच्चा बेचारा कैसे भी बेमन सही सही
लेकिन रो पीट के वो पढ़ने बैठ जाता है
राइट तो कुछ ऐसी ही हालत होती है नॉन
स्पॉन्टेनियस रिएक्शंस की ये खुद से नहीं
होते हैं लेकिन इनको करवाने के लिए अगर हम
एक एक्सटर्नल एनर्जी प्रोवाइड करें तो यह
प्रोसीड करते हैं एक पर्टिकुलर डायरेक्शन
में ठीक तो नॉन स्पॉन्टेनियस रिएक्शन की
बात हम तब करेंगे जब हम इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री में उस तरह की चीजों की बात
करेंगे जहां पर इलेक्ट्रिसिटी से हम किसी
रिएक्शन को करवाते हैं क्योंकि ये रिएक्शन
भाई खुद से तो होता नहीं है तो हम
इलेक्ट्रिकल एनर्जी से इन्हे वो एक्स्ट्रा
पुश देते हैं हम इन्हें जबरदस्ती करवाते
हैं तो वहां हम बात करेंगे नॉन
स्पॉन्टेनियस रिएक्शंस की ठीक है तो अब ये
स्पॉन्टेनियस और नॉन स्पॉन्टेनियस का मैं
आपको डे टू डे लाइफ से एक एग्जांपल देती
हूं और वो एग्जांपल हम लेंगे पानी का ठीक
है मान लो पहाड़ की एक ऊपर की चोटी में
मैं पानी रख दूं तो क्या होगा वो पानी जो
है पानी गिरा दो मान लो तो वो पानी जो है
खुद से ही ऊपर से नीचे आ जाएगा आएगा डाउन
द हिल वो खुद से आ जाएगा लेकिन वही अगर
मान लो मैं उसी हिल के नीचे पानी रख दूं
तो क्या होगा क्या वो पानी टो ट टट ऊपर
जाएगा पहाड़ के खुद से तो नहीं जाएगा राइट
तो यानी कि जब मैंने नीचे से ऊपर जाने की
बात कर रही हूं तो यह कैसा प्रोसेस है यह
नॉन स्पॉन्टेनियस प्रोसेस है हालांकि अगर
मैं एक मोटर फिट कर दूं तो यह पानी नीचे
से ऊपर भी जा सकता है इनफैक्ट हमारे घरों
में ग्राउंड फ्लोर से एथ फ्लोर 10थ फ्लोर
तक पानी कैसे चढ़ता है मोटर से राइट तो
वहां पर हमने एक एक्सटर्नल एनर्जी
प्रोवाइड कर रखी है जिसके वजह से वो
प्रोसेस हो रहा है सो दैट इज नॉन
स्पॉन्टेनियस बात समझ आई सो कुल मिला के
बच्चों इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में हम ये दो
चीजें पढ़ेंगे पहली चीज हम पढ़ेंगे कि
स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शन से हम
इलेक्ट्रिसिटी कैसे जनरेट करते हैं दूसरा
हम पढ़ेंगे कि इलेक्ट्रिसिटी से हम किस
तरीके से नॉन स्पॉन्टेनियस केमिकल
रिएक्शंस को करवाते हैं क्या इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री पढ़ना जरूरी है बिल्कुल जरूरी
है एक छोटी सी चीज है बैटरी और हम देखेंगे
अगर बैटरी ना हो तो हमारे आसपास की कितनी
सारी चीजें काम नहीं करेंगी चाहे आप घड़ी
ले लो चाहे आप मोबाइल फोन ले लो कैलकुलेट
ले लो लैपटॉप ले लो कैमरा ले लो
इलेक्ट्रिक कार ले लो या फिर टॉयज ही ले
लो इनफैक्ट मेरे घर पे तो मेरी बच्ची के
90 पर टॉयज में कहीं ना कहीं किसी ना किसी
रूप में बैटरी यूज होता है राइट तो ऐसा
नहीं है कि बैटरी ही एक लता एप्लीकेशन है
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री का बट यस बैटरी एक
बहुत इंपॉर्टेंट एप्लीकेशन जरूर है बट
इसके अलावा और भी बहुत सारे एप्लीकेशंस है
जैसे कि एक और अच्छा एप्लीकेशन है
इलेक्ट्रो प्लेटिंग का ो प्लेटिंग क्या
होता है क्या आपने कभी भी अपने घरों में
ऐसी चीजें देखी हैं जैसे कि गोल्ड प्लेटेड
ज्वेलरी बहुत सारे ऐसे गहने होते हैं जो
गोल्ड के नहीं होते हैं लेकिन वो बिल्कुल
गोल्ड के जैसे दिखते हैं क्यों क्योंकि
उनके ऊपर एक गोल्ड की प्लेट लगा दी गई है
मतलब एक सोने की परत डाल दी गई है बहुत
बार होते है कि जो बर्तन होते हैं ना
बिल्कुल चांदी के दिखते हैं बट वो चांदी
के होते नहीं है वो सिल्वर प्लेटेड होते
हैं बहुत बार फर्नीचर्स में आपने देखा
होगा क्रोम प्लेटेड हैंडल्स हैंडल्स में
क्रोम की प्लेटिंग लगी होती है तो यह क्या
है इन सबको हम कहते हैं इलेक्ट्रो
प्लेटिंग मतलब एक मेटल के ऊपर हम एक दूसरे
मेटल की लेयरिंग डाल देते हैं और यह भी
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री का ही कांसेप्ट है
तो अब जब हमें पता ही है कि यार आसपास
इतने तरीके से इलेक्ट्रो केमिस्ट्री हमें
काम आ रहा है तो डेफिनेटली अब हम
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री थोड़ा और ज्यादा
इंटरेस्ट के साथ पढ़ेंगे तो बच्चों
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में हम दो तरह के
सेल्स की बा तो बच्चों सबसे पहले हम
क्लियर करते हैं इलेक्ट्रो केमिस्ट्री के
बेसिक्स को क्योंकि बेसिक्स सही होंगे तभी
तो समझ में आएंगे सारे कॉन्सेप्ट्स और
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री का बेसिक्स लाई करता
है इन रेडॉक्स रिएक्शंस तो इसीलिए फिर से
कह रही हूं अगर रेडॉक्स रिएक्शन बिल्कुल
नहीं पता है तो फटाफट से जाके रेडॉक्स
रिएक्शन का वन शॉर्ट वीडियो देख लो ठीक है
हालांकि जो जरूरत की चीजें हैं वो मैं
यहां पर थोड़ा बहुत कवर करती रहूंगी ठीक
है तो देखो रेडॉक्स रिएक्शन का जो क्या
बोलूं मैं जो बॉटम लाइन था जो सार था वो
यही था कि एवरीवन वांट्स टू बी स्टेबल सब
जो है स्टेबिलिटी
अटेनोक और कॉपर के इस रिएक्शन को ही देख
लो यहां पर जिंक अमीर है इसीलिए जिंक देगा
क्या देगा इलेक्ट्रॉन देगा कॉपर यहां पर
गरीब है तो वो इलेक्ट्रॉन लेगा सिंपल तो
देखो जिंक जो है वो इलेक्ट्रॉन देके zn20
पॉजिटिवली चार्जड बन जा रहा है दूसरी तरफ
उसी इलेक्ट्रॉन को लेके cu2 प् से स बन जा
रहा है अब वहीं अगर मैं कॉपर और सिल्वर का
यह रिएक्शन देखूं तो यहां पर मैं देखती
हूं कि यहां पर तो कॉपर अमीर है और सिल्वर
गरीब है तो इसीलिए कॉपर इलेक्ट्रॉन दे रहा
है और सिल्वर इलेक्ट्रॉन ले रहा है अब आप
बोलोगे कि मैम ऐसे कैसे पहले रिएक्शन में
तो कॉपर गरीब था दूसरे रिएक्शन में आपने
इसको अमीर बना दिया यार गरीब या अमीर तो
रिलेटिव टर्म है फॉर एग्जांपल अगर हम एकदम
सुपर रिच एक बंदे की बात करें और उसके साथ
एक एक मिडिल क्लास बंदा राइट तो अब सुपर
रिच और मिडिल क्लास इन दोनों के बीच में
अमीर कौन है सुपर रिच गरीब कौन है मिडिल
क्लास लेकिन वही अगर ये मिडिल क्लास बंदा
है और एक बहुत ही गरीब आदमी है ठीक है उस
केस में अमीर कौन है मिडिल क्लास और गरीब
कौन है जो एकदम पुअर पर्सन है है ना तो ये
रिलेटिव टर्म है कि भाई हम किन दोनों को
कंपेयर करें तो पहले वाले केस में जिंक और
कॉपर में से जिंक अमीर था कॉपर ग गरीब था
दूसरे वाले एग्जांपल में कॉपर और सिल्वर
में कॉपर अमीर है और सिल्वर गरीब है अब आप
पूछोगे कि हमें पता कैसे चलेगा कि कौन
अमीर है कौन गरीब है इन रिएक्शंस सो
बेसिकली वो हमें बताता है मेटल एक्टिविटी
सीरीज एंड आई नो कि ये कोई नई चीज नहीं है
ठीक है तो ये हमारी एक सीरीज होती है
जिसको हमने क्लास 11थ की केमिस्ट्री में
कई बार पढ़ा है अलग-अलग टॉपिक्स के अंदर
इसीलिए फिर से कह रही हूं कि अगर आपको ये
चीजें नहीं पता है बिल्कुल भी तो जाके एक
बार फटाफट से रेडॉक्स रिएक्शन का वन शॉट
वीडियो देख डालो ठीक है तो ये जो मेटल
एक्टिविटी सीरीज है ना ये हमें एक
सीक्वेंस दे देती है कि यार यह जो है ना
सबसे ज्यादा अमीर है इससे कम ये इससे कम
ये इससे कम ये एंड सो ऑन तो इस सीरीज के
बेसिस पर हम डिसाइड कर सकते हैं कि किसी
भी रिएक्शन में कौन इलेक्ट्रॉन देगा और
कौन इलेक्ट्रॉन लेगा इसी कांसेप्ट के ऊपर
बेस्ड एक छोटा सा एक्सपेरिमेंट करते हैं
ठीक है मान लो मैंने एक कंटेनर लिया उसके
अंदर मैंने डाल दिया कॉपर सल्फेट का
सॉल्यूशन ठीक है cuso4 कॉपर सल्फेट का
सॉल्यूशन ब्लू कलर का होता है प्राइमर
कॉपर की वजह से ठीक है अब इसके अंदर मैंने
जिंक की एक रॉड डाल दी ठीक है जैसे ही
मैंने ऐसा किया तो क्या होगा रिएक्शन होना
शुरू हो जाएगा क्या होगा रिएक्शन एक तरफ
है जिंक और दूसरी तरफ है कॉपर सल्फेट कॉपर
सल्फेट में कॉपर के किस फॉर्म में है co2
प के फॉर्म में है ठीक है तो अब जिंक और
co2 प में क्या रिएक्शन होगा कौन अमीर है
जिंक अमीर है है तो जिंक इलेक्ट्रॉन देगा
कॉपर गरीब है तो वह इलेक्ट्रॉन लेने के
मूड में है उसने वो बोलेगा ठीक है यार
इलेक्ट्रॉन दे दो मैं भी इलेक्ट्रॉन ले
लेता हूं मैं भी स्टेबल हो जाता हूं तो एज
अ रिजल्ट क्या होगा जिंक जो है वो
zn20 से स हो जाएगा राइट तो
एक्सपेरिमेंटली हम देखेंगे कि थोड़ी देर
के बाद वो जो ब्लू कलर का सॉल्यूशन था
उसका ब्लू कलर फेड होता जा रहा है ब्लू
कलर गायब होता जा रहा है क्यों क्योंकि
उसमें से cu2 2 प् जो है वो गायब होता जा
रहा है cu2 प जो है वो
cu2 प् स्टेट में चला जा रहा है यानी कि
वो जो सॉल्यूशन है वो ग्रैजुअली znso4
होता जा रहा है बात समझ आई तो यहां पर इस
रिएक्शन में हो क्या रहा था जिंक
इलेक्ट्रॉन दे रहा था और इसीलिए उसका क्या
हो रहा था ऑक्सीडेशन दूसरी तरफ कॉपर
इलेक्ट्रॉन ले रहा था तो उसका क्या हो रहा
था रिडक्शन और जहां ऑक्सीडेशन और रिडक्शन
साथ-साथ हो उसी को हम कहते हैं रेडॉक्स
रिएक्शन ठीक है जस्ट फॉर योर इंफॉर्मेशन
मैं ये बता दूं कि अगर मान लो मैंने ऐसा
कहा होता अगर मैंने ऐसा कहा होता कि यहां
पर जिंक सल्फेट का सॉल्यूशन है और कॉपर की
रॉड है तब क्या होता जस्ट उल्टा मतलब
मैंने अगर बोला होता कि जिंक सल्फेट का
सॉल्यूशन है और जो रॉड है वो कॉपर की है
यानी कि मैं क्या पूछ रही हूं कि zn20
प्लस कॉपर इसका रिएक्शन क्या होता बहुत से
बच्चे बोलेंगे हां यहां भी ऐसा ही हो जाता
कि zn20 से
zn20 से
उसके पास तो देने के लिए है ही नहीं कुछ
तो जिंक लेगा कैसे बात समझ रहे हो जिंक और
कॉपर के रिएक्शन में जिंक दे सकता है कॉपर
ले सकता है बट उल्टा नहीं हो सकता है राइट
अगर एक बहुत अमीर आदमी है एक बहुत गरीब
आदमी है तो अमीर जो है वो गरीब को देगा
गरीब जो है वो अमीर से लेगा तभी तो दोनों
स्टेबल होंगे अब गरीब के पास ऑलरेडी कुछ
नहीं है और उसके बावजूद भी उसको अगर देना
पड़े तो उसकी तो स्टेबिलिटी और खराब हो
जाएगी राइट तो यह वाला लॉजिक है अब
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री के इस पूरे लेसन के
दौरान हम बात करते रहेंगे ऑक्सीडेशन
रिडक्शन की हम बात करते रहेंगे
इलेक्ट्रोड्स की भी कैथोड एनोड तो इसीलिए
बहुत जरूरी है कि यह बेसिक सी बात आप अपने
दिमाग में फिट कर लो ताकि आगे जाके
कंफ्यूजन ना हो ऑक्सीडेशन हमेशा होता है
एनोड पे रिडक्शन हमेशा होता है कैथोड पे
यह बात ही कुछ ऐसी है कि हमेशा हम इसमें
कंफ्यूज होते रहते हैं कि कहां पे क्या
होता है इसी के लिए एक बहुत ही पॉपुलर
बहुत ही पॉपुलर मेमोरी टिप है जिसे हम
कहते हैं रेड कैट एंड ऑक्स ठीक है रेड कैट
लाल बिल्ली काली बिल्ली तो सुना होगा बट
दिस इज रेड कैट तो रेड बोले तो रिडक्शन
कैट बोले तो कैथोड यानी कि कैथोड में
हमेशा रिडक्शन एन ऑक्स एन बोले तो एनोड
ऑक्स बोले तो ऑक्सीडेशन अब इस पिक्चर को
दिमाग में कर लो सेट ताकि आगे जाके कोई
कंफ्यूजन ना हो अगर एनोड है तो होगा ऑक्सी
अगर कैथोड है तो वहां पे होगा रिडक्शन तो
अब हमारा टारगेट क्या है कि ये जो इस तरह
के रेडॉक्स रिएक्शंस हैं इनसे हम
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करना चाहते हैं मतलब
मेरा टारगेट है केमिकल एनर्जी टू
इलेक्ट्रिकल एनर्जी कौन करेगा ये टारगेट
पूरा इलेक्ट्रोकेमिकल सेल तो चलो अब हम
डिस्कस करेंगे इलेक्ट्रोकेमिकल सेल एक
स्पेसिफिक इलेक्ट्रोकेमिकल सेल लेंगे हम
जिसे हम कहते हैं डैनियल सेल तो डैनियल
सेल में भी हम एक ऐसा सेल लेंगे जो जिंक
कॉपर का सेल है मतलब एक जिंक और एक कॉपर
ये दोनों चीजें इसमें इवॉल्वड है चलो
देखें डैनियल सेल को डिजाइन किया था जॉन
डेनियल ने और उन्हीं के ऊपर इसका नाम पड़ा
डैनियल सेल तो सबसे पहले इसका डिजाइन
देखते हैं कि इसमें होता क्या है तो इसके
अंदर बच्चों होता है दो कंटेनर ऐसे सिंपल
शब्दों में समझो एक कंटेनर जिसके अंदर हम
डाल देते हैं जिंक सल्फेट सॉल्यूशन और
उसमें हम डिप कर देते हैं एक जिंक का रॉड
दूसरे वाले कंटेनर में हम डाल देते हैं
कॉपर सल्फेट सॉल्यूशन और उसमें हम डाल
देते हैं कॉपर का रॉड
ठीक अब जिंक और कॉपर में से अमीर कौन है
जिंक जो अमीर होता है उसे सामान देने की
लगी पड़ी होती है तो वो इलेक्ट्रॉन देना
चाहता है ठीक है तो जिंक के साथ भी कुछ
ऐसा ही होता है तो जो जिंक है रॉड पर जो
जिंक की जो रॉड है उसमें जो जिंक है वो
जिंक इलेक्ट्रॉन देके क्या बन जाता है
zn20 तो ये जो
zn20 zn20 जो है ये सॉल्यूशन में जाता जा
रहा है और रॉड के ऊपर क्या बच जा रहा है
सिर्फ इलेक्ट्रॉन ठीक है क्योंकि वो
इलेक्ट्रॉन दे रहा है तभी zn20 बन रहा है
zn20 अब देखो इस एनोड के ऊपर इलेक्ट्रॉन
जमा होते जा रहे हैं तो ये इलेक्ट्रॉन
क्या करेंगे अब इलेक्ट्रॉन तो ऐसे ही होते
हैं फ्री अगर वेल्ले बैठे कोई अगर इसको
पकड़ के नहीं रखा है तो ये फ्लो करने लगता
है इधर-उधर भागते रहता है तो ये
इलेक्ट्रॉन भी कुछ ऐसा ही करेंगे तो ये
इलेक्ट्रॉन जो है देखो बाहर की जो ये तार
है जो वायर है इस वायर के थ्रू ये टोए
करके पहुंच जाते हैं कहां कॉपर वाले
इलेक्ट्रॉन पे कॉपर वाले रॉड पे ठीक है अब
जैसे ही वहां पर ये इलेक्ट्रॉन पहुंचते
हैं हमें क्या पता है कि जो co2 प आयस
होते हैं जो कॉपर होते हैं वो भूखे होते
हैं इलेक्ट्रॉन के वो इलेक्ट्रॉन को
एक्सेप्ट करना चाहते हैं अब co2 प कहां पर
है इस कंटेनर में सॉल्यूशन में क्योंकि
सॉल्यूशन किस चीज का है कॉपर सल्फेट
सॉल्यूशन है इधर वाले कंटेनर में है ना तो
ये कॉपर सल्फेट का जो co2 प है वो फटाक से
देखेगा कि अरे वाह इतने इलेक्ट्रॉन आ रखे
हैं इस रॉड पे तो ये आके इस इनको एक्सेप्ट
कर लेगा तो co2 प जो है ये इलेक्ट्रॉन को
एक्सेप्ट करके बना लेगा
cu2 प् से cu1 रहा है मतलब इलेक्ट्रॉन गेन
हो रहा है मतलब रिडक्शन हो रहा है रिडक्शन
कौन से इलेक्ट्रोड पे होता है रेड कैट
कैथोड पे तो यानी कि ये मेरा कैथोड है सो
कुल मिला के हो क्या रहा है एनोड में से
जिंक निकलता जा रहा है और कैथोड में कॉपर
डिपॉजिट होता जा रहा है मतलब थोड़ी देर के
बाद सिचुएशन कुछ ऐसा होगा कि जो मेरा
कैथोड है क्योंकि उसमें कॉपर जमा होता जा
रहा है तो वो धीरे-धीरे थिक होता जाएगा
मोटा होता जाएगा दूसरी तरफ जो मेरा जिंक
है जो एनोड है उसमें से जिंक निकलता जा
रहा है तो वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे पतला
होता जाएगा ठीक है अब इसके दौरान हुआ क्या
इस पूरे चीज के दौरान हुआ कुछ यूं कि
इलेक्ट्रॉन फ्लो किए कहां से कहां एनोड से
कैथोड की तरफ इलेक्ट्रॉन जब फ्लो करते हैं
तो क्या होता है इलेक्ट्रिसिटी जनरेट होता
है तो इलेक्ट्रिक करंट का डायरेक्शन क्या
हो जाएगा इलेक्ट्रॉन के फ्लो के जस्ट
अपोजिट वही हमारा वे ऑफ एज्यूमंगा क्शन ऑफ
करंट होता है है ना तो मेरा करंट का
डायरेक्शन क्या हो जाएगा फ्रॉम कैथोड टू
एनोड ठीक है करंट फ्लो कर रहा है इसका
एविडेंस क्या है कि मेरा बल्ब जो है वो
ग्लो कर रहा है बल्ब जल रहा है अब यहां पर
हम कुछ बहुत इंटरेस्टिंग ऑब्जर्व करते हैं
अब हम देखते हैं कि यार बल्ब ग्लो तो किया
बट ग्लो करने के थोड़ी ही देर में वो बल्ब
जो है बुझ गया यानी कि इलेक्ट्रॉन का जो
फ्लो है ये कंटीन्यूअसली नहीं हो रहा था
ये थोड़ी देर के बाद बंद हो गया ऐसा क्यों
हुआ बहुत ध्यान से सुनना एक एकदम स्टोरी
के जैसे सुनो सो दैट सारे कांसेप्ट क्लियर
होते जाएंगे देखो हो कुछ यूं रहा था कि जो
मेरा जिंक वाला कंटेनर था ना उसमें क्या
हो रहा था कि जिंक 2 प्स zn20 जो है वो
ऑक्सीडेशन जैसे-जैसे हो रहा था जिंक का
zn20 मेरा सॉल्यूशन में जमा होता जा रहा
था था राइट ऐसा ही हो रहा था दूसरी तरफ
कॉपर का जब रिडक्शन हो रहा था इधर तो क्या
हो रहा था cu2 प तो भैया रिड्यूस हो जा
रहा था लेकिन जो सल्फेट आयन था कॉपर
सल्फेट का जो सल्फेट आयन था वो तो उसी
सॉल्यूशन में रह जा रहा था तो इसका मतलब
हो कुछ यूं रहा था कि जो मेरे दो कंटेनर्स
थे उसमें एक तरफ zn20 जमा होता जा रहा है
दूसरे तरफ so4 2 माइनस जमा होता जा रहा है
मतलब एक तरफ पॉजिटिव चार्ज जमा होता जा
रहा है दूसरी तरफ नेगेटिव चार्ज जमा होता
जा रहा है पहले क्या था ये सारी कहानी से
पहले दोनों तरफ न्यूट्रल थे एक तरफ कॉपर
सल्फेट था एक तरफ जिंक सल्फेट था सो दोनों
न्यूट्रल थे अब क्या हो रहा है एक तरफ
पॉजिटिव चार्ज बिल्ड अप हो जा रहा है एक
तरफ नेगेटिव चार्ज बिल्ड अप हो जा रहा है
और इन अपोजिट चार्जेस के बिल्ड अप की वजह
से हो क्या रहा है कि इलेक्ट्रॉन का जो
फ्लो है वो रोक दिया जा रहा है क्यों रोक
दिया जा रहा है मान लो जिस तरफ zn20 जमा
हो जा रहा है वो कह रहे है कि यार इतने
सारे तो हम ही पॉजिटिव आयन है अब ॉन को
बाहर जाने की जरूरत क्या है वो इलेक्ट्रॉन
को पकड़ के रख लेंगे इलेक्ट्रॉन जा ही
नहीं पाएगा इलेक्ट्रॉन जाएगा ही नहीं तो
करंट फ्लो ही नहीं करेगा राइट समझ रहे हो
बात को तो कुल मिला कर के क्योंकि इधर
पॉजिटिव और इधर नेगेटिव चार्ज का बिल्ड अप
हो जा रहा है सॉल्यूशन में उसी के वजह से
मेरा ये करंट फ्लो रुक जा रहा है ठीक यानी
कि मुझे एक ऐसी चीज की जरूरत है जो इन
सॉल्यूशंस को न्यूट्रलाइज करें जो ये
एक्स्ट्रा चार्ज बिल्ड अप हो रहा है
उन्हें कम करें अब इसी को देखने का एक और
नजरिया है हम क्या कहते हैं कि भाई करंट
फ्लो तब करता है जब मेरा सर्किट कंप्लीट
होता है फिजिक्स में हम पढ़ते हैं राइट कि
सर्किट कंप्लीट होना चाहिए तभी तो करंट
फ्लो करेगा तो यहां पर अगर हम देखें तो
मेरे जो इलेक्ट्रॉन थे वो कैसे फ्लो कर
रहे थे यूं यूं पूरा सर्किट कंप्लीट नहीं
हो रहा था जैसे यहां से यहां तो वो आ रहा
था बट यहां से यहां जाने का कुछ अता-पता
नहीं है तो हम एक यह भी नजरिया सकता है कि
भैया सर्किट मेरा कंप्लीट ही नहीं हो रहा
है तो फिर कैसे बल्ब ग्लो करेगा
कंटीन्यूअसली सो कुल मिला के अभी यह मेरी
प्रॉब्लम है और इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने
के लिए मुझे एक ऐसी चीज की जरूरत है जो
दोनों तरफ के सॉल्यूशन को न्यूट्रलाइज करे
साथ ही साथ मेरा सर्किट भी कंप्लीट कर दे
और यहीं पर हम इंट्रोड्यूस करते हैं सॉल्ट
ब्रिज सॉल्ट ब्रिज बड़ा देखो इंटरेस्टिंग
सा नाम है ब्रिज क्यों क्योंकि यह इन
दोनों कंटेनर्स को कनेक्ट करता है अब मैं
कंटेनर कंटेनर बोल र हूं इन्हें हम
केमिस्ट्री के टर्म्स में क्या कहते हैं
हाफ सेल हाफ सेल क्यों क्योंकि यह जो पूरा
सेटअप है ये एक सेल है राइट डैनियल सेल है
फॉर एग्जांपल अब इस डैनियल सेल के अंदर ये
एक कंटेनर जो जिंक वाला कंटेनर है उसके
अंदर हो रहा है ऑक्सीडेशन उसे हम कहेंगे
ऑक्सीडेशन हाफ सेल जो कॉपर वाला कंटेनर है
उसके अंदर हो रहा है रिडक्शन उसे हम
कहेंगे रिडक्शन हाफ सेल तो यह सॉल्ट ब्रिज
को ब्रिज इसलिए कहते हैं क्योंकि ये एक यू
शेप का ग्लास का ट्यूब होता है जो यह
ऑक्सीडेशन हाफ सेल और रिडक्शन हाफ सेल को
कनेक्ट करता है ठीक है इसीलिए यह ब्रिज है
सॉल्ट क्यों है क्योंकि इसके अंदर हम
डालते हैं सॉल्ट जो कि एक स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट होता है जैसे
एक चीज होती है जिसे हम कहते हैं अगर अगर
जेल क्यों होती है क्योंकि हमारा परपस यह
है कि ये जो सॉल्ट ब्रिज के अंदर जो सॉल्ट
है ना जैसे मान लो केसी है वो केसी बड़ी
आसानी से मेरा इलेक्ट्रोलाइट के अंदर चला
जाए तो इसीलिए हम इसे एक जेल की तरह एक
चीज सब्सटेंस में रखते हैं जैसे कि अगर
अगर ताकि वो बड़ी आसानी से उस
इलेक्ट्रोलाइट में जा सके ठीक है अब इसका
काम क्या होगा वहां जाके जैसे मान लो कि
मेरे सॉल्ट ब्रिज में केसी है तो केसी
कैसे डिसोसिएट करें k+
cl-1 आयस हैं वो ओबवियसली नेगेटिवली
चार्जड आयस को अट्रैक्ट करेंगे जैसे कि
so4 2इ जो सल्फेट आयस है उन्हें अट्रैक्ट
करेंगे जो
cl-1 2+ को अट्रैक्ट करेंगे तो आप समझ रहे
हो सॉल्ट ब्रिज क्या करेगा तो सॉल्ट ब्रिज
क्या करेगा दोनों तरफ से जिंक इधर से जिंक
प्लस और उधर से सल्फेट के माइनस आयन इनको
अपनी तरफ खींचता रहेगा तो बेसिकली अब इससे
क्या होगा इधर से एक्सेस पॉजिटिव चार्ज
हटता जाएगा इधर से एक्सेस नेगेटिव चार्ज
हटता जाएगा तो
न्यूट्रलिज्म
कंप्लीट ही दिख रहा था क्योंकि बाहर हमने
वायर से कनेक्ट कर रखा था अब जो है एक
इंटरनल सर्किट भी बन गया क्यों बिकॉज ऑफ द
फ्लो ऑफ दीज पॉजिटिव एंड नेगेटिव आयस ये
जो जिंक 2 प्लस है ये जो सल्फेट आयस है
इनके मूवमेंट की वजह से मेरा इंटरनली भी
जो है इनके आयस का फ्लो होने लग गया सो
कुल मिला के देखो मेरा पूरा जो सर्किट है
वो यूं कंप्लीट हो गया है कि नहीं तो
चूंकि मेरा सर्किट कंप्लीट हो गया है करंट
कंटीन्यूअसली फ्लो कर रहा है इसीलिए मेरा
बल्ब जो है वो कंटीन्यूअसली ग्लो कर रहा
है तो बच्चों कुल मिला के हमने क्या देखा
सॉल्ट ब्रिज के इंपॉर्टेंट फंक्शंस क्या
है क्या रोल प्ले करता है सॉल्ट ब्रिज
सबसे पहले तो ये न्यूट्रलिज्म
सर्किट को कंप्लीट करता है सर्किट कंप्लीट
होता है करंट फ्लो होते रहता है बल्ब ग्लो
होते रहता है है ना और तीसरा है इट
रिड्यूस जंक्शन पोटेंशियल मतलब ये जो
दोनों जंक्शन है ना मतलब एक तरफ रिडक्शन
एक तरफ ऑक्सीडेशन इनका जो जंक्शन है इनके
बीच का जो पोटेंशियल का डिफरेंस है उसको
कम करता है क्योंकि जब ये दोनों को
न्यूट्रल करने की कोशिश करता है तो ये यह
भी कोशिश करता है कि एक तरफ बहुत पॉजिटिव
दूसरा तरफ बहुत नेगेटिव ऐसा ना हो ठीक है
तो ये कुछ सॉल्ट ब्रिज की इंपॉर्टेंट
फंक्शन होते हैं जिसके वजह से डेनियल सेल
जो है वो इफेक्टिवली काम कर पाता है तो
कुल मिला के बच्चों डेनियल सेल के इस पूरे
सेटअप में फाइनली हमें देखने को क्या
मिलता है हमें क्या आउटपुट मिलता है इस
पूरे पिक्चर के बाद पूरे पिक्चर के बाद
आउटपुट कुछ यूं होता है कि बल्ब जो है वो
कंटीन्यूअसली ग्लो करता है यानी कि करंट
जो है वो कंटीन्यूअसली फ्लो करते रहता है
यानी कि हमने अपने केमिकल एनर्जी से क्या
जनरेट कर दिया इलेक्ट्रिकल एनर्जी तभी तो
करंट फ्लो कर रही है तो हमारा जो एम था वो
पूरा हो गया ठीक है और क्या होते दिखता है
हमें और हमें ये दिखता है कि जो कॉपर वाली
इलेक्ट्रोड थी कैथोड वो थिक होते जा रही
है क्योंकि इस रिएक्शन के होने के दौरान
कॉपर जो है इस इलेक्ट्रोड में डिपॉजिट
होती जा रही है तो ये इलेक्ट्रोड थिक हो
रहा है दूसरी तरफ जो जिंक वाला इलेक्ट्रोड
था वो पतला होते जा रहा है क्योंकि जिंक
उसमें से निकल निकल के
डिजॉल्ड्रिंग
अभी तक सबको समझ में आ गया ठीक है तो अब
हम एक और स्टेप आगे बढ़ेंगे ठीक है अभी तक
हमने क्या देखा डैनियल सेल में हमने यह
देखा कि यहां पर एनोड और कैथोड के बीच में
पोटेंशियल का फर्क था और उस पोटेंशियल
डिफरेंस की वजह से यहां पर इलेक्ट्रॉन मूव
कर रहे थे करंट फ्लो कर रहा था ठीक है मान
लो कि यह जो पोटेंशियल था उस सेल के अंदर
दैट इज़ e अभी के लिए हमने e मान लिया उसे
अब एक और स्टेप आगे बढ़ के हम कहते हैं कि
लेट्स से कि अब जो है हम एक एक्सटर्नल
पोटेंशियल भी अप्लाई करते हैं अपोजिट टू e
मतलब e की वजह से डैनियल सेल में
इलेक्ट्रॉन कहां से कहां फ्लो कर रहे थे
जिंक इलेक्ट्रोड से कॉपर इलेक्ट्रोड की
तरफ इलेक्ट्रॉन फ्लो कर रहे थे राइट यही
हो रहा था अभी तक अब हम बोल रहे हैं कि
नहीं हमने एक और एक्सटर्नल पोटेंशियल लगा
दिया ऑपोजिट डायरेक्शन में तो ऑपोजिट
डायरेक्शन में लगाया मतलब ये जो एक्सटर्नल
पोटेंशियल है e एक्सटर्नल ये चाहेगा कि
इलेक्ट्रॉन जो है वो कॉपर इलेक्ट्रोड से
जिंक इलेक्ट्रोड की तरफ मूव करें ऐसा ये
चाहेगा है ना अब यहां पर देखो तीन सिचुएशन
आ सकती है एक हो सकता है कि जो मेरा e
एक्सटर्नल है ये e से कम है मतलब ये जो
एक्सटर्नल पोटेंशियल हमने लगाया इसकी
वैल्यू कम है क्योंकि इसकी वैल्यू कम है
तो इसका इतना चलेगा नहीं राइट क्योंकि जो
ज्यादा पावरफुल होता है चलता उसी का है है
ना तो यहां पर चूंकि इसकी वैल्यू कम है तो
इसका इतना चलेगा नहीं तो मेरा जो
इलेक्ट्रॉन का फ्लो है वो एज इट इज पहले
जैसा होता रहेगा यानी कि इलेक्ट्रॉन कहां
से कहां फ्लो करेगा जिंक इलेक्ट्रॉन से
कॉपर इलेक्ट्रोड की तरफ मूव करेगा यानी कि
करंट किस तरफ फ्लो कर रहा है कॉपर
इलेक्ट्रोड से जिंक इलेक्ट्रोड की तरफ ठीक
है जैसा चल रहा था वैसे ही चलेगा अब एक
दूसरा सिचुएशन हो सकता है कि जो e
एक्सटर्नल है वो e के बराबर है अब क्या
होगा e की वजह से मेरे इलेक्ट्रॉन जिंक से
निकल के कॉपर की तरफ जाना चाह रहे हैं
लेकिन दूसरी तरफ से एक हमने ऑपोजिट एक
इक्वल एंड ऑपोजिट पोटेंशियल लगा दिया अब
क्या होगा ये जो मूवमेंट है ये बंद हो
जाएगी
राइट क्योंकि एक प्लस e है जो इधर भेजना
चाह रहा है एक माइनस e है माइनस ही नहीं
एक e एक्सटर्नल है जो इधर भेजना चाह रहा
है दोनों इक्वल एंड अपोजिट है तो एज अ
रिजल्ट क्या होगा कि इलेक्ट्रॉन का फ्लो
नहीं होगा करंट का फ्लो नहीं होगा केमिकल
रिएक्शन नहीं होगा ठीक अब एक तीसरा
सिचुएशन हो सकता है कि जो e एक्सटर्नल है
वो e से भी ज्यादा हो मतलब हमने जो बाहर
से जो एक्सटर्नल पोटेंशियल लगाया वो
ज्यादा है अगर वो ज्यादा है तो उसी का
चलेगा या
राइट क्योंकि वो पावरफुल है तो उसी की
मर्जी चलेगी तो वो क्या कह रहा है क्योंकि
वो अपोजिट टू e है तो वो कह रहा है कि
इलेक्ट्रॉन को फ्लो करना पड़ेगा कॉपर
इलेक्ट्रोड से जिंक इलेक्ट्रोड की तरफ तो
ऐसे केस में क्या होगा जब इलेक्ट्रॉन कॉपर
से जिंक की तरफ फ्लो करेंगे तो मेरा पूरा
जो प्रोसेस था ना डेनियल सेल का वो पूरा
उल्टा हो जाएगा तो अब क्या होगा हम
देखेंगे यहां पर जिंक के इलेक्ट्रोड में
जिंक डिपॉजिट हो रहे होंगे कॉपर के
इलेक्ट्रोड में से कॉपर निकल के आ रहे
होंगे व्हिच इज एगजैक्टली द अपोजिट ऑफ
डेनियल सेल डेनियल सेल में क्या हो रहा था
कि कॉपर का जो इलेक्ट्रोड था उसमें कॉपर
डिपॉजिट हो रहे थे तो वो मोटा हो रहा था
यहां पर क्या होगा कि कॉपर का इलेक्ट्रोड
पतला होता जाएगा जो जिंक का इलेक्ट्रोड है
वो मोटा होता जाएगा और इस सिचुएशन को ही
हम कहते हैं इलेक्ट्रोलिटिक सेल डैनियल
सेल क्या था इलेक्ट्रोकेमिकल सेल था राइट
तो ये जो सिचुएशन हो अगर कभी हम बाहर से
एक एक्सटर्नल ई लगा दें
तो यह मेरा क्या बन जाएगा इलेक्ट्रोलिटिक
सेल क्यों बन जाएगा इलेक्ट्रोलिटिक सेल
में क्या होता है हम इलेक्ट्रिकल एनर्जी
से केमिकल रिएक्शन को करवाते हैं देखो
यहां से बाहर एक ई एक्सटर्नल हमने अप्लाई
किया यानी कि बाहर से इलेक्ट्रिसिटी के
हेल्प से हम एक ऐसे केमिकल रिएक्शन को
करवा रहे हैं जो नॉन स्पॉन्टेनियस है राइट
जिंक 2 प्स से जिंक के स्टेट में जिंक कभी
खुद से नहीं आएगा जिंक अमीर आदमी है वो
इलेक्ट्रॉन देता है वो लेना कभी नहीं
चाहेगा लेकिन जब हम उसको फोर्सफुली
बोलेंगे कि नहीं तू इलेक्ट्रॉन ले तब उसको
लेना ही पड़ेगा है ना तो वैसा ही कुछ हो
रहा है जब हम इलेक्ट्रोलिटिक सेल की बात
करते हैं ठीक है तो फिलहाल अभी हम
इलेक्ट्रोलिटिक सेल डिस्कस नहीं करेंगे ये
मैंने आपको सिर्फ इसलिए बताया ताकि आपके
कॉन्सेप्ट्स क्लियर हो कि कहां से ये
इलेक्ट्रोकेमिकल और इलेक्ट्रोलिटिक सेल के
जो कांसेप्ट है ये आ कहां से रहे हैं राइट
थोड़े टाइम के बाद इनफैक्ट नेक्स्ट वीडियो
में हम इलेक्ट्रोलिटिक सेल को डिटेल में
डिस्कस करेंगे क्लियर है तो बच्चों अभी
हमारा डिस्कशन रहेगा अराउंड
इलेक्ट्रोकेमिकल सेल्स इलेक्ट्रोकेमिकल
सेल्स को हम गलवानिक सेल या वोल्टा सेल भी
कहते हैं ये नाम रखे गए हैं इनके
साइंटिस्ट के नाम के ऊपर गलवानी एंड
वोल्टा तो डेनियल सेल जो कि हम अभी तक
डिस्कस कर रहे थे वो भी गलवानिक सेल का ही
एक एग्जांपल है इनफैक्ट गलवानिक सेल्स
बहुत तरह के हम बना सकते हैं कैसे जैसे
डेनियल सेल जो है ना ये जॉन डेनियल ने
डिजाइन किया था जिंक और कॉपर को लेकर के
तो इसी तरह अगर आप अलग-अलग हाफ सेल के
कॉमिनेशन लोगे जरूरी नहीं हमेशा जिंक और
कॉपर ही लो अलग-अलग कॉमिनेशन बना बना के
आप अलग-अलग गलवानिक सेल्स बना सकते हो ठीक
तो गनवान सेल का वर्किंग तो हमने ऑलरेडी
देख लिया क्योंकि डेनियल सेल का
कंस्ट्रक्शन वर्किंग हमने डिटेल में देखा
और डेनियल सेल भी एक गलवानिक सेल ही है तो
अभी हम क्या करेंगे अभी हम कुछ बहुत
इंपॉर्टेंट टर्म्स और कांसेप्ट समझेंगे
अबाउट गलवानिक सेल्स तो सबसे पहला टर्म जो
हम इंट्रोड्यूस करेंगे वो है रेडॉक्स
कपल्स कपल यानी कि जोड़ी रेडॉक्स जोड़ी
देखो कौन से हैं यहां पर रेडॉक्स कपल्स तो
अभी तक हमने क्या देखा कि यह जो गलवानिक
सेल है इसके अंदर रेडॉक्स रिएक्शन होता है
ठीक है एक तरफ होते रहता है ऑक्सीडेशन और
दूसरे तरफ होते रहता है रिडक्शन सो कुल
मिला के जो नेट इक्वेशन है उसको हम ऐसे
डिनोट कर सकते हैं ठीक है ये जो कॉपर
सॉलिड कॉपर जो है यह कहां पर डिपॉजिट हो
रहा होता है यह डिपॉजिट होते रहता है इस
कैथोड पर और यह जो जिंक है जो zn20 है ये
zn20 कहां से आ रहा होता है ये निकलते जा
रहा होता है यहां से यानी कि एनोड से जिंक
निकलता जा रहा है और इधर कैथोड में जो है
कॉपर डिपॉजिट होता जा रहा है ऐसा ही कुछ
हो रहा है हमारे साथ ठीक है अब अगर हम इस
इक्वेशन को बड़े ध्यान से देखें तो ये
क्या है ये कॉमिनेशन है दो हाफ रिएक्शंस
का कौन से हैं वो दो हाफ रिएक्शंस ये जो
दो हाफ रिएक्शंस है ये कहां पर हो रहे हैं
दो हाफ सेल में जैसे यह एक हाफ सेल
है यह दूसरा हाफ सेल है ठीक है और दोनों
हाफ सेल मिला के एक सेल बना रहे हैं ठीक
है कुछ ऐसा है तो हमारे जो दो हाफ
रिएक्शंस हैं वो कौन-कौन से हैं एक हाफ
रिएक्शन है कि cu2 प जो है ये दो
इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करके बना रहा है
कॉपर यहां पर क्या हो रहा है एडिशन ऑफ
इलेक्ट्रॉन गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन यानी कि यह
क्या है रिडक्शन तो ये रिडक्शन हाफ
रिएक्शन है जो दूसरा हाफ रिएक्शन है वो
क्या है उसमें यह हो रहा है कि जिंक जो है
ये दो इलेक्ट्रॉन लूज करके बना रहा है
zn20 तो यहां पर क्या हो रहा है यहां पर
हो रहा है ऑक्सीडेशन तो ये ऑक्सीडेशन हाफ
रिएक्शन है ठीक है अब अगर बात करें कहां
हो रहा है तो ये रिडक्शन वाला रिएक्शन
कहां पे हो रहा है ये हो रहा है कैथोड
पर ये जो ऑक्सीजन वाले रिएक ऑक्सीडेशन
वाले रिएक्शन की हम बात कर रहे हैं ये
कहां पर हो रहा है ये हो रहा है एनोड पर
राइट कैथोड क्या है जो कॉपर वाला
इलेक्ट्रोड है वो हमारा कैथोड है एनोड
क्या है जो जिंक वाला इलेक्ट्रोड है वो
हमारा एनोड है ठीक है तो ये जो दो पोर्शंस
हैं हाफ सेल्स ये जो दो पोर्शन है मतलब इस
पूरे इक्वेशन के जो दो हावस हैं उन्हें ही
हम कहते हैं हाफ सेल्स या फिर रेडॉक्स
कपल्स यानी कि ये दो ये जोड़ी में हो रहे
हैं राइट एक तरफ कॉपर का चल रहा है तो
दूसरी तरफ तरफ जिंक का चल रहा है तो यह जो
जोड़ी है यह जो कपल है इसी कपल को हम क्या
कहते हैं इसे हम कहते हैं रेडॉक्स
कपल तो बच्चों अब जो दूसरा टर्म हम
इंट्रोड्यूस करेंगे वह है स्टैंडर्ड
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल आगे जाके हम इसे
बहुत फ्रीक्वेंसी
यहीं पर ढंग से समझ लो इसका कांसेप्ट ठीक
है तो इलेक्ट्रोड पोटेंशियल क्या होता है
अभी जब हम डेनियल सेल डिस्कस कर रहे थे तो
हम देख रहे थे कि जो इलेक्ट्रोड था रा
चाहे वो कैथोड हो चाहे वो एनोड हो बट उस
इलेक्ट्रोड और उस इलेक्ट्रोलाइट के बीच
में एक पोटेंशियल डिफरेंस एजिस्ट करता है
जिसे हम इलेक्ट्रोड पोटेंशियल कहते हैं
ठीक है एग्जांपल लेके समझते हैं डेनियल
सेल में चले जाते हैं हम कैथोड पे कैथोड
कौन सा था कॉपर रॉड कॉपर का जो रॉड था वो
हमारा कैथोड था तो उस रॉड की अगर हम कहानी
देखें तो सिचुएशन क्या था उस रॉड के आसपास
जो co2 प् आयस थे कॉपर सल्फेट
इलेक्ट्रोलाइट में उसकी टेंडेंसी क्या थी
कि इस रॉड पे जैसे ही इलेक्ट्रॉन आए हम इन
इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट कर ले राइट तो co2
प जैसे ही उन इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट कर
ले रहा था तो वो उस रॉड में से नेगेटिव
चार्ज ले ले रहा था यानी कि उस रॉड को वो
पॉजिटिवली चार्जड छोड़ दे रहा था तो हम कह
सकते हैं कि जो कैथोड था इट हैड अ पॉजिटिव
पोटेंशियल विद रेस्पेक्ट टू द
इलेक्ट्रोलाइट जो सॉल्यूशन था उसके
रिस्पेक्ट में जो रॉड था वो वो पॉजिटिव
पोटेंशियल पे था
करेक्ट अब बात करते हैं एनोड की यानी कि
जिंक वाले रॉड की बात करते हैं वहां पर
क्या चक्कर चल रहा था वहां पर तो सिचुएशन
कुछ ऐसा था कि भैया जिंक तो अमीर है उसे
इलेक्ट्रॉन लूज करना है तो जिंक क्या कर
रहा था इलेक्ट्रॉन लूज कर रहा था
इलेक्ट्रॉन को तो रॉड पे छोड़ दे रहा था
और zn20 जो है वो सॉल्यूशन पे चला जा रहा
था यानी कि इस केस में क्या हो रहा था जो
रॉड है वो नेगेटिवली चार्जड हो जा रहा था
विद रिस्पेक्ट टू द सॉल्यूशन यानी कि इस
केस में जो मेरा एनोड है दैट इज एट
नेगेटिव पोटेंशियल विद रिस्पेक्ट टू द
इलेक्ट्रोलाइट ठीक तो इसका मतलब डैनियल
सेल के अंदर हम क्या देख रहे हैं कि जो
कैथोड है दैट इज एट पॉजिटिव इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल विद रिस्पेक्ट टू द
इलेक्ट्रोलाइट जो एनोड है दैट इज एट
नेगेटिव पोटेंशियल विद रिस्पेक्ट टू द
इलेक्ट्रोलाइट ठीक अब स्टैंडर्ड
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल क्या होता है
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल इन स्टैंडर्ड
कंडीशंस स्टैंडर्ड कंडीशंस बोले तो जब
टेंपरेचर हो 298 केल्विन जब प्रेशर हो वन
एटमॉस्फेयर और जब कंसंट्रेशन हो यूनिटी
यानी कि जब कंसंट्रेशन हो वन मोलर मतलब वन
मोल्स पर लीटर जब यह वाली सिचुएशन हो तो
हम इलेक्ट्रोड पोटेंशियल को ऐसी सिचुएशन
में कहते हैं स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल ओके अब देखो और भी बहुत सारी
इंपॉर्टेंट चीजें हैं इलेक्ट्रोड इ
पोटेंशियल को जनरली हम कैपिटल e से डिनोट
करते हैं ठीक है लेकिन जब हम स्टैंडर्ड
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल की बात करते हैं तो
वहां पर हम एक नॉट लगा देते हैं ऊपर उसे
हम पढ़ते हैं e नॉ ठीक है अब ये
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल दो तरह के हो सकते
हैं ऑक्सीडेशन पोटेंशियल भी हो सकता है
रिडक्शन पोटेंशियल भी हो सकता है एंड लेट
मी टेल यू इन्हें रटने की जरूरत बिल्कुल
नहीं है बहुत से बच्चे सोचेंगे अच्छा मतलब
ऑक्सीडेशन पोटेंशियल हमेशा पॉजिटिव
रिडक्शन पोटेंशियल हमेशा नेगेटिव नहीं
नहीं नहीं नथिंग कुछ भी ऐसा रटना नहीं है
सिर्फ उतना ही सुनो जो मैं बता रही हूं
उतना समझ में आ गया तो आप सब कुछ हैंडल कर
लोगे ठीक है तो मैं क्या कह रही हूं कि ये
जो इलेक्ट्रोड पोटेंशियल है ये ऑक्सीडेशन
पोटेंशियल भी हो सकता है ये रिडक्शन
पोटेंशियल भी हो सकता है ठीक है अब कहां
पर हम किसकी बात कर रहे हैं वो पता कैसे
चलेगा उसके एनोट से उसे कैसे डिनोट कर रहे
हैं ठीक है अगर मैं स्टैंडर्ड ऑक्सीडेशन
पोटेंशियल की बात कर रही हूं
ठीक है ध्यान से सुनो स्टैंडर्ड ऑक्सीडेशन
पोटेंशियल स्टैंडर्ड है तो नॉट लगेगा
पोटेंशियल है तो e रहेगा e नो तो रहेगा ही
ऑक्सीडेशन है ऑक्सीडेशन मतलब क्या होता है
लॉस ऑफ
इलेक्ट्रॉन यानी कि अगर मेरे पास एक m
मेटल था तो वो इलेक्ट्रॉन लूज करके बन
जाएगा लेट्स से m प्लस तो इसे हम डिनोट
करेंगे e नो और नीचे सब्सक्रिप्ट में
लिखेंगे m से m प्लस इस पर ध्यान न देना
है ठीक है अगर मैं रिडक्शन पोटेंशियल की
बात कर रही हूं इनफैक्ट अगर मैं स्टैंडर्ड
रिडक्शन पोटेंशियल की बात कर रही हूं तो
उसे मैं कैसे डिनोट करूंगी उसे मैं डिनोट
करूंगी e नो बट इस बार मैं नीचे क्या
लिखूंगी m ए प् से m यानी कि पहले मेरे
पास पॉजिटिवली चार्जड था बट अब गेन ऑफ
इलेक्ट्रॉन से मैं बन गया m तो गेन ऑफ
इलेक्ट्रॉन इज रिडक्शन तो सब्सक्रिप्ट को
देख कर के तुम्हें ये आईडिया लगेगा कि मैं
ऑक्सीडेशन पोटेंशियल की बात कर रही हूं
या मैं रिडक्शन पोटेंशियल की बात कर रही
हूं ठीक है यहां तक क्लियर है बहुत बढ़िया
आगे-आगे जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाएंगे मैं
और इंफॉर्मेशन देती जाऊंगी जो आपको
क्वेश्चन सॉल्विंग में भी काम आएगा तो
प्यारे बच्चों अब हम इंट्रोड्यूस करेंगे
थर्ड टर्म व्हिच इज सेल पोटेंशियल सेल
पोटेंशियल क्या होता है अभी तो इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल समझा था इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
क्या था इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोलाइट के
बीच का पोटेंशियल डिफरेंस ठीक है अब मैं
कह रही हूं सेल पोटेंशियल मतलब इस पूरे
सेल में पूरे सेल के अंदर दोनों हाफ सेल्स
आ जाएंगे पूरे सेल का पोटेंशियल क्या हो
जाएगा पोटेंशियल डिफरेंस बिटवीन द टू
इलेक्ट्रोड्स दोनों इलेक्ट्रोड के बीच का
जो पोटेंशियल डिफरेंस है उसको हम कहते हैं
सेल पोटेंशियल ठीक है बोलने का मतलब है हम
एगजैक्टली किसके डिफरेंस की बात कर रहे
हैं हम कह रहे हैं इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
ऑफ द कैथोड और इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ द
एनोड इन दोनों का
डिफरेंस बात समझ आई मतलब जो दो रॉड्स थे
कैथोड और एनोड इसका इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
इसका इलेक्ट्रोड पोटेंशियल और इन दोनों का
जो डिफरेंस है दैट इज द सेल
पोटेंशियल समझ आ रही है बात फॉर्मूले
वगैरह अभी छोड़ दो वो धीरे-धीरे अपने आप
समझ में आएगी अभी कांसेप्ट समझो ठीक है तो
सेल पोटेंशियल को हम मेजर करते हैं
वोल्ट्स में इसको डिनोट करते हैं हम e सेल
से ई सेल क्यों क्योंकि सेल पोटेंशियल का
एक और नाम है जिसे हम कहते हैं ईएमएफ ऑफ द
सेल या फिर सेल ईएमएफ ईएमएफ तो सबको पता
ही होगा इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स ठीक है तो
इसीलिए इसको डिनोट करते हैं कैपिटल e और
सब्सक्रिप्ट में लिखते हैं सेल अच्छा यहां
पर एक और चीज बता दूं जैसे कि मैंने बताया
कि जो ई सेल होता है वो क्या होता है
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ कैथोड माइनस
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ एनोड बेसिकली
दोनों इलेक्ट्रोड के इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
का डिफरेंस अब आप पूछोगे कि मैम दोनों का
ऑक्सीडेशन पोटेंशियल का डिफरेंस या दोनों
का रिडक्शन पोटेंशियल का डिफरेंस यह
क्वेश्चन दिमाग में आ ही सकता है राइट
वैसे तो दोनों में से कुछ भी हो सकता है
लेकिन हम एक कन्वेंशन फॉलो करते हैं कि जब
कभी भी हम कहते हैं इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल तो आप उसको रिडक्शन पोटेंशियल
ही समझ के चलो ऐसा क्यों क्यों का कोई
रीजन नहीं है दिस इज जस्ट अ कन्वेंशन दैट
इज बीइंग फॉलो जहां पर भी आपको ऐसा लिखा
हुआ है कि इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ दिस
एंड दिस इज दिस तो वो इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल का मतलब ही है वी आर टॉकिंग
अबाउट रिडक्शन पोटेंशियल तो चलो बच्चों अब
बात करते हैं रिप्रेजेंटेशन की कैसे
रिप्रेजेंट करते हैं हम गलवेकर्त लंबी
कहानी लिखना तो पॉसिबल नहीं है ठीक है तो
हम क्या करते हैं हम एक वर्टिकल लाइन का
यूज करते हैं पुटिंग अ वर्टिकल लाइन
बिटवीन मेटल एंड द इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन
एंड पुटिंग अ डबल वर्टिकल लाइन बिटवीन द
टू इलेक्ट्रोलाइट्स कनेक्टेड बाय अ सॉल्ट
ब्रिज तो देखो कैसे हम यूज करेंगे तो अगर
मैं नॉर्मल अपने इस डेनियल सेल की बात
करूं ये वाले सेल की तो यहां पर हम कैसे
दिखाएंगे यहां पर हम दिखाएंगे जिंक जिंक
से क्या बन रहा है मेटल मेरा जिंक है ठीक
है तो ये जिंक से क्या बना zn20 ठीक है ये
किस फॉर्म में है एक्वास फॉर्म में है ठीक
है अब इस ये क्या हो गया ये एक
इलेक्ट्रोलाइट हो गया क्योंकि मतलब एक हाफ
सेल के अंदर znso4 वाले इलेक्ट्रोलाइट
वाला पार्ट हो गया जो दूसरा पार्ट है उससे
डिवाइड करने के लिए इसको हम डबल वर्टिकल
लाइन डाल देंगे और दूसरी तरफ क्या हो रहा
होता है है कॉपर यानी कि दूसरी तरफ है cu2
प
एक्वास जो कि रिड्यूस हो रहा है किसमें
कॉपर
में तो कुछ इस तरीके से हम एक गैलवे सेल
को रिप्रेजेंट करते हैं ठीक है यहां पर हम
ये वर्टिकल लाइन यूज करते हैं मेटल और
इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन के बीच में देखो
ये जिंक क्या है ये मेटल है ये zn20 क्या
है ये सॉल्यूशन को डिनोट करता है जिंक
सल्फेट znso4 में ही zn20 के फॉर्म में है
उसी तरह इधर क्या हो रहा है यह सॉल्यूशन
है और फिर यह फिर से मेटल है और यह दोनों
पार्ट जो है यह वाला पार्ट और यह वाला
पार्ट जो है ये सॉल्ट ब्रिज से कनेक्टेड
है तो उसे हम कैसे डिनोट करते हैं यह डबल
वर्टिकल लाइन से ठीक है आई डोंट थिंक कोई
डाउट है चलो ठीक है एक और एग्जांपल लेते
हैं तो यहां पर मैं लेती हूं एक एग्जांपल
टू लेट अस सपोज कि मैं कुछ इस तरीके से एक
सेल को रिप्रेजेंट करूं कॉपर cu2 प्
एक्वास ए प्
एक्स जीी सॉलिड तो यहां पर मैं एक ऐसे सेल
की बात कर रही हूं जिसमें कौन-कौन से
मेटल्स इवॉल्वड है कॉपर एंड सिल्वर ठीक है
अब इस रिप्रेजेंटेशन को देखकर हमारे पास
क्या क्या इंफॉर्मेशन आ रही है इस
रिप्रेजेंटेशन को देखकर साफसाफ हमें क्या
पता चल रहा है कि यहां पर मेरे दो
इलेक्ट्रोड्स है एक कॉपर का इलेक्ट्रोड और
एक सिल्वर का इलेक्ट्रोड अगर हम बात करें
सिल्वर इलेक्ट्रोड की तो इस सिल्वर
इलेक्ट्रोड में क्या हो रहा है सिल्वर
इलेक्ट्रोड में मुझे दिख रहा है कि + जो
है यह इलेक्ट्रॉन लेकर के बना रहा है जी
ठीक है यानी कि गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन हो रहा
है गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन को हम क्या कहते हैं
रिडक्शन तो यानी कि इधर क्या हो रहा है
रिडक्शन हो रहा है यानी कि ये जो सिल्वर
वाला इलेक्ट्रोड है ये किस तरह का
इलेक्ट्रोड है रिडक्शन कहां पर होता है
रेड कैट कैथोड में तो यानी कि यह मेरा
कैथोड है ठीक है अच्छा अब बात करते हैं
कॉपर इलेक्ट्रोड की तो देखो कॉपर
इलेक्ट्रोड में क्या हो रहा है और ये देखो
ये सारी इंफॉर्मेशन मेरे पास कैसे आ रही
है सिर्फ इस रिप्रेजेंटेशन को देख कर के
मैं बता रही हूं इसमें क्या हो रहा है
कॉपर जो है ये बना दे रहा है cu2 प यानी
कि कैसे बनाएगा cu2 प जब ये दो इलेक्ट्रॉन
लूज करेगा यानी कि यहां पर क्या हो रहा है
यहां पर हो रहा है ऑक्सीडेशन यानी कि ये
जो कॉपर वाला इलेक्ट्रोड है ये किसके जैसे
बिहेव कर रहा है ये एनोड की तरह बिहेव कर
रहा
ठीक है बात समझ में आ गई तो देखो
रिप्रेजेंटेशन से ही हम इतनी सारी
इंफॉर्मेशन निकाल लेते हैं ठीक है यहां तक
भी बात सही है अब हम बात करेंगे सेल ईएमएफ
की मान लो इसी वाले सेल की अगर मुझे सेल
ईएमएफ निकालनी हो तो मैं कैसे निकालू मतलब
की सेल पोटेंशियल अगर मुझे निकालना हो तो
मैं सेल पोटेंशियल कैसे निकालू ठीक है
यानी कि ई सेल इससे डिनोट करते हैं हम तो
इसको लिखने के दो तरीके हैं एक ऑप्शन होता
है कि आप ऐसे लिखो e राइट माइनस e लेफ्ट
बहुत लोग इस कन्वेंशन को भी फॉलो करते हैं
क्यों क्योंकि अगर आप डायग्राम को देखो ना
तो राइट साइड पे क्या रहता है कैथोड और
लेफ्ट साइड पे एनोड और जभी भी आप डेनियल
सेल का पिक्चर देखोगे तो वहां पर यही
कन्वेंशन फॉलो होता है कि राइट साइड पे
कैथोड रहता है लेफ्ट साइड पे एनोड रहता है
सो दैट मींस या तो आप ऐसे याद रखो कि भाई
e सेल क्या हो जाएगा e कैथोड माइनस e एनोड
या फिर आप इसे ऐसे याद रखो रखो कि e राइट
माइनस e लेफ्ट कैसे भी करना है व आपकी
मर्जी है ठीक है अब यहां पर एक छोटी सी
बात में फिर से फोकस करूंगी कि जभी भी हम
कहते हैं ई सेल यानी कि सेल पोटेंशियल बाय
डिफॉल्ट सेल पोटेंशियल का मतलब क्या होता
है मैं रिडक्शन पोटेंशियल की बात कर रही
हूं ठीक है तो हम बाय डिफॉल्ट यही मानते
हुए चलेंगे कि अगर सेल पोटेंशियल की बात
हो रही है इसका मतलब रिडक्शन पोटेंशियल की
ही बात हो रही है दिस इज अगेन जस्ट अ
कन्वेंशन तो इसका मतलब जब मैं लिख रही हूं
e कैथोड माइनस e एनोड इसमें मैं कहना यह
चाह रही हूं कैथोड का क्या रिडक्शन
पोटेंशियल या ऑक्सीजन ऑक्सीडेशन पोटेंशियल
रिडक्शन पोटेंशियल तो मैं कहना चाह रही
हूं e रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ
कैथोड माइनस e रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ
एनोड ठीक है ये बहुत बेसिक चीजें हैं
बच्चों बट फिर भी मैं इसे क्लेरिफाई करना
चाहती हूं ताकि डाउट ना जाए दिमाग में ठीक
है अब देखो रिडक्शन पोटेंशियल और
ऑक्सीडेशन पोटेंशियल में फर्क क्या होता
है सिर्फ साइन का मतलब किसी चीज का अगर
ऑक्सीडेशन पोटेंशियल मान लो + 0.5 है तो
उसका रिडक्शन पोटेंशियल होगा - 0.5 इतना
ही फर्क होता है तो अब इसको देखो कई तरीके
से लिख सकते हैं अब e रिडक्शन पोटेंशियल
ऑफ कैथोड को तुम ये भी लिख सकते हो माइनस
e ऑक्सीडेशन पोटेंशियल ऑफ कैथोड ठीक है
उसी तरह इसको ये जो रिडक्शन पोटेंशियल है
इसको माइनस e रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ एनोड
इसको क्या लिख सकते हैं हम इसको भी हम लिख
सकते हैं प्लस e ऑक्सीडेशन पोटेंशियल ऑफ
एनोड तो अगर ऑक्सीडेशन पोटेंशियल के
टर्म्स में लिखना हो तब भी हम इसको ऐसे
लिख सकते हैं सो कुल मिला के मेरे कहने का
मतलब यह था कि जब कभी भी सेल पोटेंशियल
निकालना हो बहुत बार डाउट रहता है कि क्या
फार्मूला होता है तो कंफ्यूज नहीं होना है
सेल पोटेंशियल मतलब मैं तो यही सजेस्ट
करूंगी कि सिंपल सा ये याद रखो कि e कैथोड
माइनस एनोड अब कहीं पर भी अगर बाय डिफॉल्ट
e बोल रहे हैं तो हम क्या चीज की बात कर
रहे हैं रिडक्शन पोटेंशियल की ही बात कर
रहे हैं ठीक है तो चलो वापस मैं अपने इस
एग्जांपल पे चलती हूं ये वाला जो एग्जांपल
था ठीक है तो इस एग्जांपल में अगर मैं सेल
पोटेंशियल का एक्सप्रेशन आपको लिखने कहूं
तो आप क्या लिखोगे e सेल क्या हो जाएगा e
सेल विल बी इक्वल टू e कैथोड माइनस e एनोड
राइट यही होगा यानी कि e कैथोड क्या है
यहां पर अभी अभी तो निकाला था हमने कैथोड
कौन सा है सिल्वर वाला तो यानी कि e ऑफ
सिल्वर वाला इलेक्ट्रोड और उसका क्या
सिल्वर इलेक्ट्रोड का रिडक्शन पोटेंशियल
राइट रिडक्शन मतलब जी प्लस से यह हो जा
रहा है
जी तभी तो रिडक्शन हो रहा है देखो ना
चार्ज कम हो रहा है करेक्ट तो
e+ से ए यानी कि ये मैं क्या बात कर रही
हूं दिस इज द रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ कैथोड
माइनस रि रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ एनोड एनोड
कौन सा है एनोड है कॉपर तो कॉपर में भी हम
रिडक्शन पोटेंशियल कंसीडर करेंगे दैट मींस
cu2 प् स ठीक है तो यहां पर मेरा ई सेल का
जो एक्सप्रेशन है वो ये हो
जाएगा नाउ बच्चों बहुत ध्यान देना है कि
ये जो आप सब्सक्रिप्ट में लिख रहे हो दिस
इज वेरी इंपोर्टेंट क्योंकि ये बता रहा है
कि आप रिडक्शन पोटेंशियल की बात कर रहे हो
या फिर ऑक्सीडेशन पोटेंशियल की बात कर रहे
हो सो उल्टा सीधा कुछ भी लिख दोगे तो ये
गलत हो जाएगा ठीक है
क्लियर हो गया बिल्कुल क्लियर हो गया चलो
आगे बढ़े तो बच्चों यहां तक हमने यह देखा
कि ई सेल यानी कि सेल पोटेंशियल को हम
क्या लिख सकते हैं e कैथोड - e एनोड या
फिर आप इसे e राइट - e लेफ्ट भी लिख सकते
हो बिकॉज़ हमने जो डायग्राम को हम फॉलो
करते आ रहे हैं उसमें कैथोड जो है वो राइट
की तरफ है और एनोड जो है वो लेफ्ट की तरफ
है तो ऐसे भी आप लिख सकते हो लेकिन इसमें
एक प्रॉब्लम है इसमें प्रॉब्लम ये है कि
यार ये तो ठीक है कि चलो सेल ईएमएफ हम ऐसे
निकाल सकते हैं लेकिन हमें हाफ सेल का
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल निकाले कैसे यानी कि
हम ये e कैथोड या फिर e एनोड की वैल्यू
कैसे निकाले हाफ सेल का इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल कैसे डिटरमाइंड करें अगेन यहां
पर आपको मैं ध्यान दिलाऊंगा
कर रही हूं बाय डिफॉल्ट इट मींस कि मैं
हाफ सेल के रिडक्शन पोटेंशियल की बात कर
रही हूं दैट इज द कन्वेंशन दैट वी फॉलो
ठीक है अब इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के
लिए पिक्चर में आ जाता है शी यानी कि
स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड तो ये एक
बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है बहुत इंपॉर्टेंट
कांसेप्ट है और बहुत यूज़फुल भी है तो
देखो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का
जो भी डिजाइन है कंस्ट्रक्शन है वर्किंग
है वो अभी हम पढ़ेंगे डिटेल में बट यह काम
इसलिए आ पाता है क्योंकि हम इसे एक
पर्टिकुलर वैल्यू असाइन करते हैं इसके
पोटेंशियल की हम कहते हैं कि स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का जो पोटेंशियल
होगा यह जरो होगा एट ऑल टेंपरेचर्स ठीक है
अब देखो किस तरीके से हम स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड को बनाते हैं और किस
तरह से इसके हेल्प से हम हाफ सेल के
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल को डिटरमाइंड करते
हैं चलो देखें तो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रोड होता है एक रेफरेंस इलेक्ट्रोड
जिसके हेल्प से हम हाफ सेल्स के
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल को डिटरमाइंड करते
हैं ठीक है इसकी सबसे खास बात यह होती है
कि ये जो है एक कैथोड हाफ सेल की तरह भी
बिहेव करता है और एक एनोड हाफ सेल की तरह
भी बिहेव करता है नाउ दैट इज इंटरेस्टिंग
कैसे जब हम कैथोड हाफ सेल की बात करते हैं
तो कैथोड में क्या होता है रिडक्शन याद है
ना रेड कैट एगजैक्टली तो रिडक्शन बोले तो
गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन यानी कि h+ जो है वो
इलेक्ट्रॉन गेन करके बनाता है
h2 दूसरी तरफ अगर हम एनोड हाफ सेल की बात
करें तो एनोड में क्या होता है ऑक्सीडेशन
एनोक्स याद ही होगा तो यानी कि यहां पर h2
जो है वो इलेक्ट्रॉन लूज करके क्या बना
देता है बना देता है h+ तो यानी कि यहां
पे एक तरफ तो h+ से h2 बन रहा होता है
दूसरी तरफ h2 से h+ भी बन रहा होता है
राइट तो यानी कि ये कैथोड और एनोड दोनों
हाफ सेल्स की तरह काम कर सकते हैं और इससे
भी ज्यादा खास बात तो यह है इस रेफरेंस
इलेक्ट्रोड के बारे में कि इसका जो
स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड पोटेंशियल है मतलब
चाहे स्टैंडर्ड ऑक्सीडेशन पोटेंशियल हो या
स्टैंडर्ड रिडक्शन पोटेंशियल हो दोनों ही
वैल्यू ज़ीरो असाइन है इसे तो इसीलिए आप
देखो यह दोनों ही चाहे एनोड वाला रिएक्शन
ले लो या कैथोड वाला रिएक्शन ले लो e न की
जो वैल्यू है दैट इज जरो इन बोथ द केसेस
तो बच्चों चलो अब देखते हैं कि स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के अंदर होता क्या
है इसका कंस्ट्रक्शन कैसा होता है ठीक है
तो हम लेते हैं एक ग्लास ट्यूब जैसा कि आप
देख रहे हो और इस ग्लास ट्यूब के अंदर हम
डाल देते हैं एक इनर्ट प्लैटिनम
इलेक्ट्रोड प्लैटिनम क्यों लेते हैं हम
क्योंकि प्लैटिनम की एक प्रॉपर्टी होती है
कि ये हाइड्रोजन को जो है अब्जॉर्ब करता
है ठीक है अब इस ग्लास ट्यूब के ऊपर हम एक
स्लिट रखते हैं जहां से हम प्योर
हाइड्रोजन गैस को अंदर भेजते हैं यह प्योर
हाइड्रोजन गैस जो होता है यह वन बार
प्रेशर में होता है और इसे हम अंदर बबल
करते हैं मतलब अंदर इसे हम भेजते हैं जब
हम इसे अंदर भेजते हैं तो क्या होता है जो
प्लैटिनम है वो इस हाइड्रोजन को एब्जॉर्ब
करता है और जो एक्सेस में हाइड्रोजन है
जितना ये एब्जॉर्ब कर पाता है यह करता है
और बाकी जो एक्सेस में हाइड्रोजन है वो
बबल आउट होके निकल जाता है इन द सॉल्यूशन
अब यहां पर एक खास बात है कि ये सॉल्यूशन
क्या है तो यह जो सॉल्यूशन है दैट इज
एसिडिक सॉल्यूशन टू बी मोर स्पेसिफिक
इसमें होता है हाइड्रोक्लोरिक एसिड
hclo2 के फॉर्म में दूसरी तरफ क्या हो रहा
है कि h2 से h+ बन के वो उस सॉल्यूशन में
निकल जा रहा है समझ रहे हो तो बेसिकली एक
स्टेज पर आके एक इक्विलियम सेटअप हो जाता
है बिटवीन h2 एंड h+ एक तरफ h+ से h2 बन
रहा है दूसरी तरफ h2 से h+ बनके वो
सॉल्यूशन में चला जा रहा है राइट एंड दिस
इज वयर वी सी कि एक तरफ ऑक्सीडेशन हो रहा
है तो दूसरी तरफ रिडक्शन हो रहा है
अभी-अभी जो हमने कैथोड और एनोड के
रिएक्शंस देखे थे उसमें भी हमने यही देखा
था राइट कि एक तरफ तो h+ से h2 दूसरी तरफ
h2 से h+ तो कुछ इस तरह का सेटअप होता है
हमारा स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का
तो अब हमें यह देखना है कि इस इलेक्ट्रोड
के हेल्प से हम किस तरीके से हाफ सेल्स के
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल को मेजर करते हैं तो
बच्चों अब स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
क्या होता है यह तो हमने देख लिया अब हम
ये देखने वाले हैं कि ए यानी कि स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का यूज़ करके हम किस
तरीके से इलेक्ट्रोड पोटेंशियल्स मेजर
करते हैं ठीक है तो यहां पर हम देखेंगे
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ मैग्नीशियम
यूजिंग ए ठीक है तो इसे आमतौर पे
लेबोरेटरी पे भी परफॉर्म किया जाता है तो
पहले यहां पर हम कांसेप्ट को समझेंगे कि
इसका कांसेप्चुअली ये कैसे ये मेजरमेंट की
जाती है ठीक है अब कांसेप्चुअली समझने के
लिए सबसे पहले क्या समझना होगा लॉजिक और
सेटअप को ठीक है अच्छा मुझे क्या निकालना
है मुझे मैग्नीशियम का इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल निकालना है इसे निकालने के लिए
हमें एक सेल का सेटअप करना होगा एक
इलेक्ट्रोकेमिकल सेल का सेटअप करना होगा
सेल के सेटअप के लिए क्या एक इलेक्ट्रोड
काफी है नहीं हमें दो इलेक्ट्रोड्स चाहिए
अब जाहिर सी बात है कि भाई मैग्नीशियम का
निकालना है तो एक इलेक्ट्रोड तो
मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड होगा जिसको हम
किसमें डिप कर देंगे लेट अस से कि ये
हमारा मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड है जिसको
हमने डिप कर दिया है मैग्नीशियम सल्फेट
सॉल्यूशन में ठीक है लेकिन दूसरा
इलेक्ट्रोड कौन होगा सो दूसरा इलेक्ट्रोड
होगा स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड यानी
कि ये जो दूसरा वाला इलेक्ट्रोड है वो कौन
होगा वो हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड होगा
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का सेटअप हम कैसे
करते हैं जैसा कि अभी तुरंत हमने पढ़ा ही
था कि भाई एक प्लैटिनम की वायर होती है
जिसके थ्रू हम हाइड्रोजन गैस को बबल करते
हैं और यहां पर हम ले लेते हैं एक एसिड का
सॉल्यूशन ठीक है तो ये हमारा सेटअप है नाउ
प्लीज नोट कि यहां पर सारी चीजें
स्टैंडर्ड कंडीशंस में होंगी क्योंकि हम
यहां पर स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
की बात कर रहे हैं यानी कि जो हाइड्रोजन
गैस होगा वो वन बार एटमॉस्फेरिक प्रेशर
में होगा यहां पर जो अ सॉल्यूशंस जो हैं
ये दोनों ही दोनों ही बीकर में जो
सॉल्यूशन है दे विल बी वन मोलर सॉल्यूशन
ठीक है अच्छा तो ये तो सेटअप हो गया अब इन
दोनों को हमने वायर से कनेक्ट कर दिया और
यहां पे लगा दिया एक वोल्ट मीटर ताकि हम
रीडिंग नोट कर सके क्योंकि जैसे कि मैंने
बताया कि ये मेजर करना जो है दिस इज
बेसिकली एन एक्सपेरिमेंट दैट वी एक्चुअली
परफॉर्म ठीक है और यहां पर हमने सेट कर
दिया हमारा सॉल्ट ब्रिज ठीक तो यानी कि
सेटअप हमारा तैयार है सेटअप हमारा कंप्लीट
है ठीक है अब ये सेटअप हो जाने के बाद में
जो सबसे पहला क्वेश्चन आता है जो सबसे
बड़ा क्वेश्चन आता है वो ये आता है कि भाई
एक तरफ हाइड्रोजन है दूसरी तरफ मैग्नीशियम
है अपने को कैसे पता चलेगा कि भाई कौन है
एनोड और कौन है कैथोड नाउ दैट इज द
बिगेस्ट क्वेश्चन तो पहले उसको
कांसेप्चुअली समझते हैं ठीक है अब आप मुझे
बताओ कि भाई एनोड कौन होगा हमने अभी तक जो
जो भी चीजें पढ़ी है उससे हमने क्या पढ़ा
है कि एनोड कौन होगा वो इलेक्ट्रोड जहां
पर ऑक्सीडेशन हो रहा हो वो होता है एनोड
एन ऑक्स एनोड में होता है ऑक्सीडेशन ठीक
है अच्छा एनोड में ऑक्सीडेशन होता है यानी
कि एनोड में क्या हो रहा होता है जो भी
इलेक्ट्रोड है वो खुद ऑक्सीडो रहा होता है
खुद ऑक्सीडो रहा होता है मतलब वो दूसरे को
रिड्यूस कर रहा होता है एगजैक्टली यानी कि
ये एक ऐसा एलिमेंट होता है जो दूसरे को
रिड्यूस कर पाता है यानी कि जो कंपैरेटिव
स्ट्रांग रिड्यूस एजेंट्स होते हैं यानी
कि इनका जो रिडक्शन पोटेंशियल का जो
वैल्यू होता है वो कैसा होता है नेगेटिव
वैल्यू ऑफ रिडक्शन पोटेंशियल मतलब रिडक्शन
पोटेंशियल का वैल्यू जितना ज्यादा नेगेटिव
है वो उतना स्ट्रांग रिड्यूस एजेंट है
उसका रिड्यूस पावर उतना स्ट्रांग है राइट
तो यानी कि इनका जो है नेगेटिव वैल्यू ऑफ
रिडक्शन पोटेंशियल होगा ठीक है तो ये
बनेगा हमारा एनोड दूसरी तरफ कैथोड में
क्या होता है अब इसको तो पूरा लिखने की
जरूरत नहीं है क्योंकि अब एनोड का समझ में
आ गया तो कैथोड अपने आप ही समझ में आ गया
भाई कैथोड में होता है रिडक्शन तो ओबवियस
सी बात है कि कैथोड में वो पर्टिकुलर
एलिमेंट रहेगा जिसका पोटेंशियल का जो
वैल्यू है वो पॉजिटिव वैल्यू रहेगा ठीक है
नाउ दिस इज अ वेरी वेरी क्रुशल कांसेप्ट
यहां पर इस टॉपिक का सबसे क्रुशल कांसेप्ट
बच्चों यही है अगर ये समझ में आ गया तो
बाकी सारी बातें समझ में आ जाएंगी ठीक है
अच्छा एक्सपेरिमेंट को कैसे करते हैं
एगजैक्टली लैब में वो हम बाद में डिस्कस
करेंगे पहले कांसेप्ट को समझेंगे ये बात
समझ आने के बाद अब हमारा फोकस है हम हमारे
इस पर्टिकुलर सेटअप में जहां पर हमारे पास
एक तरफ है मैग्नीशियम
और दूसरी तरफ है हाइड्रोजन ठीक है अब आप
मुझे बताओ कि भाई जो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रोड होता है जिसके बारे में अभी तक
हम इतनी बातें कर रहे थे तो स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के केस में इसका जो
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल की जो स्टैंडर्ड
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल की जो वैल्यू होती
है वो कितनी होती है ये मान ली जाती है
जीरो राइट क्योंकि इसी को हम रेफरेंस
इलेक्ट्रोड की तरह यूज़ करते हैं ठीक है
अब अगर हम टेबल को देखें तो वहां पर हमें
मैग्नीशियम की जो रिडक्शन पोटेंशियल की
वैल्यू है वो कितनी दिख रही है तो अगर
फटाफट से अगर आप इस टेबल को याद कर लो एक
बार अपने दिमाग में जो आपकी एनसीआरटी
टेक्स्ट बुक में भी दी हुई है यहां पर आप
देखोगे कि स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
0 वोल्ट पर है और अगर मैग्नीशियम को इसमें
आप ढूंढो तो आपको क्या दिखेगा मैग्नीशियम
की वैल्यू है -
2.36 वोल्ट
ठीक है अब यहां पर तो मैं वैल्यूज टेबल्स
देख के आपको समझा रही हूं कांसेप्ट बट जब
आप एक्सपेरिमेंट परफॉर्म करोगे तो ये
वैल्यूज आपको एक्सपेरिमेंटली मिलेंगी ठीक
है मतलब ओबवियसली स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रोड का तो जरो ही होता है हम सबको
पता है ठीक है तो भाई अब हमें क्या पता चल
गया कि भाई मैग्नीशियम का जो वैल्यू है वो
नेगेटिव वैल्यू है व्हिच मींस मैग्नीशियम
का जो इलेक्ट्रोड है यह क्या बनने वाला है
हमारा यहां पे यह बनने वाला है एनोड और यह
जो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड है यह
किसकी तरह बिहेव करेगा यहां पे यह बिहेव
करेगा एज अ कैथोड ठीक है यहां तक बात समझ
में आ गई होगी ठीक है तो यानी कि इस वाले
सेल को अगर हमें रिप्रेजेंट करना हो तो हम
इसे कैसे रिप्रेजेंट करेंगे सबसे पहले
एनोड को लिखेंगे तो एनोड में क्या हो रहा
होगा कि भाई मैग्नीशियम जो है ये
mg2 प् में कन्वर्ट हो रहा होगा अब यह
मैग्नीशियम
सॉलिड और ये जो मैग्नीशियम आयन है ये वन
मोलर
सॉल्यूशन ठीक है ठीक है अब इनके बीच में आ
जाएगा सॉल्ट ब्रिज इसी तरीके से तो
रिप्रेजेंट करते हैं हम किसी भी सेल को है
ना सॉल्ट ब्रिज आ गया अब उधर क्या होगा जो
h+ है जो कि एक्वसस h+
एक्वसोर्स
में हो जाएगा ये कन्वर्ट होने वाला है h2
में जो कि गैसियस फेज में है कितने में है
एटमॉस्फेरिक प्रेशर पे है इसका है वन बार
एटमॉस्फेरिक प्रेशर ठीक है और यह क्या है
प्लेटिनम सॉलिड क्योंकि ये जो है वो सरफेस
प्रोवाइड करता है जिसके ऊपर हमारा
इलेक्ट्रोड प्रेजेंट है ठीक है तो कुछ इस
तरीके
से तो कुछ इस तरीके से हम इस पर्टिकुलर
सेल को रिप्रेजेंट कर सकते हैं तो ये
हमारे सेल का रिप्रेजेंटेशन हो जाएगा ठीक
है अब अगर हमें इस सेल का ईएमएफ निकालना
हो व्हाट विल बी द ईएमएफ ऑफ द
सेल तो आप बताओ ई सेल से हम डिनोट करेंगे
तो ईएमएफ क्या होता है e
कैथोड माइनस e एनोड अब यहां पर हम सब कुछ
स्टैंडर्ड की बात कर रहे हैं राइट तो
स्टैंडर्ड कंडीशंस में सब कुछ हो रहा है
तो सब में हमने e नो डाल दिया ठीक है भाई
अब देखो यहां पे क्या है ई कैथोड कैथोड
यहां पे कौन है स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रो तो भाई ये तो हो गया रो माइनस e
एनोड एनोड की वैल्यू क्या है माइनस 0 -
2.36 तो यानी कि यहां से हमें क्या मिल
गया जो ईएमएफ ऑफ द सेल हो जाएगा दैट विल
बी इक्वल टू +
2.36 वोल्ट राइट ये मैं क्यों बता रही हूं
वही सब मिलियन डॉलर क्वेश्चन है यहां पे
क्योंकि ये कांसेप्ट को समझना ज्यादा
जरूरी है ठीक है इसके बाद मैं बताती हूं
हाउ डू वी एक्चुअली द पोटेंशियल तो इससे
हमें क्या समझ में आया कि जो सेल का जो
ईएमएफ है ना उसके हेल्प से हम e नॉ कैथोड
या e नॉ एनोड निकाल सकते हैं अब इस वाले
सेटअप में मेरा एनोड जो है वो है
मैग्नीशियम जो हम निकालना चाहते हैं राइट
लेकिन e नो कैथोड क्या है जीरो किसी और
केस में हो सकता है कि जो स्टैंडर्ड
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड है वो एनोड की तरह
बिहेव करे राइट और जो हमारा अननोन
पोटेंशियल है वो कैथोड की तरह बिहेव करें
बट वहां पर भी जो है हम इस एक्सप्रेशन से
अपनी वैल्यू निकाल सकते हैं कैसे निकाल
सकते हैं यानी कि कुल मिला के यहां से
हमें ये पता चली कि ये जो मेरा एक्सप्रेशन
है ना इस एक्सप्रेशन में से कैथोड या एनोड
में से किसी एक की वैल्यू किसी एक e नो की
वैल्यू जीरो होनी ही है क्योंकि दोनों में
से कोई एक स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
रहेगा और दूसरा वाला हमें निकालना है और
ये जो ई सेल की जो वैल्यू है ये वैल्यू
एक्सपेरिमेंटली मुझे मुझे ये वोल्ट मीटर
दे देगा राइट क्योंकि ये तो
एक्सपेरिमेंटली हम कैलकुलेट कर रहे हैं
राइट तो अब आपको लॉजिक समझ में आ रहा है
कि मैंने क्यों यह सारी कहानी बताई ये
सारी कहानी इसलिए बताई क्योंकि जब आप
एक्सपेरिमेंटली इलेक्ट्रोड पोटेंशियल मेजर
करते हो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
के हेल्प से तो आप ऐसे ही करते हो
स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड जो है या
तो कैथोड या फिर एनोड की तरह बिहेव करता
है तो आपके पास e नो कैथोड या e नॉ एनोड
में से एक वैल्यू जीरो हो जाती है जो e नॉ
सेल की जो वैल्यू है वो आपको ये वोल्ट टर
दे देता है राइट तो इस तरीके से आप दूसरे
वाले e नो की वैल्यू निकाल लेते हो राइट
तो यहां पर मैंने रिवर्स करके दिखाया
क्योंकि यहां पर ये जो मैग्नीशियम की जो
वैल्यू है ना ये आपको निकालनी थी बेसिकली
एक्सपेरिमेंटली बट मैंने टेबल से इसकी
वैल्यू डायरेक्टली ले ली बट जब आप इस
एक्सपेरिमेंट को परफॉर्म करोगे अब देखो
यहां पे एक बहुत बड़ा क्वेश्चन आता है आप
बोलोगे कि मैम आपने तो टेबल में पहले ही
देख लिया था कि ये - 2.36 है इसीलिए आप
फटाक से बता दिए कि भाई मैग्नीशियम का
ट्रोड जो है ये एनोड की तरह बिहेव करेगा
बट हमें तो पता नहीं होगा कि भाई
मैग्नीशियम एनोड की तरह बिहेव करेगा ये
कैथोड की तरह तो हम क्या करें है ना तो
यहां पर एक बेसिक अंपन आप हमेशा लेके चल
सकते हो कि हमें नहीं पता कौन एनोड है कौन
कैथोड है ठीक है तो हमने अज्यू कर लिया कि
जो स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड है वो
एनोड है और दूसरा वाला कैथोड है ये अजमन
के साथ आप चलो ठीक है अगर आप उस अजमन के
जैसे यहां पर भी अगर हम ये अज्यू कर लेते
कि भाई ये जो हाइड्रोजन है ना ये हमारा
एनोड है और अज्यू कर लेते कि जो
मैग्नीशियम है ये हमारा कैथोड है अगर ऐसा
अज्यू कर भी लेते तो भी क्या होता e सेल
की जो वैल्यू यहां पे आती हम वही वैल्यू
यहां पे लिखते उस केस में भी आप देखते कि
आपका ये जो मैग्नीशियम का जो वैल्यू निकल
के आता वो - 2.36 वोल्ट ही निकल के आता
राइट तो बेसिकली जो साइन जो है ना इसका
करेक्ट प्लस होगा कि माइनस होगा वो करेक्ट
साइन आपको मिल जाएगा लास्ट में ऑल यू नीड
टू रिमेंबर इज e न सेल इज इक्वल टू e
कैथोड - e एनोड ठीक है ये बात पूरी समझ
में आ गई अभी हम नॉट टू वरी एक और
एग्जांपल हम ट्राई करेंगे ठीक है अच्छा
यहां पर आप देख रहे होंगे कि भाई बोल्ड
रेड में कुछ लिखा हुआ है और वो क्या लिखा
है क्यों लिखा है पढ़ लेते हैं इसमें लिखा
है कि इफ द स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल इज नेगेटिव अब जैसे यहां पर जब
हम मैग्नीशियम का स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल निकालेंगे तो फाइनली हमें क्या
मिलेगा मैग्नीशियम का जो स्टैंडर्ड
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल हमें मिलेगा यहां पे
वो क्या होगा दैट इज -
2.36 वोल्ट जैसा यहां पे मिला है तो अगर
यह वैल्यू नेगेटिव होती है इसका मतलब है
हाइड्रोजन गैस इज मोर स्टेबल दन द
रिड्यूस्ड फॉर्म ऑफ द स्पीशीज बड़े ध्यान
से सुनो उसी बात को घुमा फिरा के कहा जा
रहा है ये वैल्यू नेगेटिव है इसका मतलब
क्या है ये वैल्यू नेगेटिव है मतलब
मैग्नीशियम जो है इसका रिड्यूस ंग पावर
काफी ज्यादा है राइट यानी कि यह खुद क्या
होगा यह खुद
ऑक्सीडो खुद यह रिड्यूज नहीं होगा खुद यह
क्या होगा ऑक्सीडो इसका मतलब है रिड्यूस
कौन होगा हाइड्रोजन होगा तो बोलने का मतलब
है जभी भी यह नेगेटिव वैल्यू मिले इसका
मतलब है कि हाइड्रोजन गैस इज़ मोर स्टेबल
दन द रिड्यूस्ड फॉर्म ऑफ़ दिस स्पीशीज
इसीलिए यह रिड्यूस नहीं होगा क्योंकि इसका
जो रिड्यूस्ड फॉर्म है वह कम स्टेबल है
हाइड्रोजन से इसीलिए यह रिड्यूज नहीं होगा
यह क्या होगा यह ऑक्सीडो बोलने का मतलब है
कि ये टेक्स्ट आपको शायद अपनी टेक्स्ट बुक
में देखने को मिले तो कंफ्यूज नहीं होना
है इट इज जस्ट टेलिंग द सेम थिंग इन अ
डिफरेंट वे अब मैं नाक को ऐसे पकड़ूं या
ऐसे घुमा के पकड़ूं बात एक ही है राइट सो
कुछ वैसी ही बात है सो डोंट गेट
कन्फ्यूज्ड विद कॉम्प्लिकेटेड स्टेटमेंट्स
बोलने का मतलब है जब कभी भी e नॉ की जो
वैल्यू है जो पोटेंशियल इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल की वैल्यू नेगेटिव है मतलब उसका
रिड्यूस ंग पावर ज्यादा है वह दूसरों को
रिड्यूस करेगा बट वह खुद
होगा राइट इसका यह भी मतलब है कि
हाइड्रोजन के मुकाबले उसका रिड्यूस्ड
फॉर्म कम स्टेबल है इसीलिए वो अपना
रिड्यूस्ड फॉर्म नहीं बनाएगा क्योंकि वो
खुद रिड्यूस नहीं होगा दूसरे को रिड्यूस
करेगा और वो खुद ऑक्सीडो ठीक है कहानी समझ
में आई आई होप कि आई हैव बीन एबल टू डू
जस्टिस और आपको मैं ये कांसेप्ट समझा पाई
होंगी ठीक है तो अगला देखेंगे एक और
एग्जांपल जहां पर हम मेजर करेंगे
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ कॉपर तो चलो
बच्चों यहां पर हम निकालने वाले हैं
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ ऑफ कॉपर अब सेटअप
मुझे फिर से समझाने की जरूरत नहीं है
हमारा सेटअप में क्या रहेगा एक तरफ कॉपर
का इलेक्ट्रोड इन कॉपर सल्फेट सॉल्यूशन
दूसरी तरफ स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
बट अपने को फिर से ये नहीं पता है कि भाई
कौन एनोड है कौन कैथोड है ठीक है तो जैसा
कि मैंने बताया था हम यहां पर एज्यूम कर
लेंगे यहां पर अब आप कांसेप्ट चूंकि समझ
चुके हो तो मैं सीधा-सीधा इसका बता रही
हूं प्रोसेस कि किस तरीके से हम मेजर करते
हैं ठीक है तो हमने एज्यूम कर लिया कि भाई
जो हमारा स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड
है ये एनोड है यही मैंने आपको बताया था कि
जभी भी हमें नहीं पता है हम अज्यू कर
लेंगे कि स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन
हमारा एनोड है और दूसरा वाला यानी कि कॉपर
जो है वो हमारा कैथोड है ठीक है प्लीज नोट
कि ये हमारा अजमन है ये अंपन हमारा लास्ट
में जाके करेक्ट भी हो सकता है ये अंपन
हमारा लास्ट में जाके इनकरेक्ट भी हो सकता
है ठीक है चलो अब आगे बढ़ेंगे तो अब इस
अंपन को लेते हुए अगर मैं इस सेल को
रिप्रेजेंट करना चाहूं तो ये कैसे
रिप्रेजेंट होगा पहले एनोड लिखेंगे
प्लैटिनम
सॉलिड हाइड्रोजन जो है यह किसमें
हाइड्रोजन जो है वह गैस फॉर्म में रहेगा
ठीक है हाइड्रोजन गैस फॉर्म में रहेगा एट
वन बार प्रेशर ठीक है ये h+ रहेगा जो कि
एक्वसोर्स क्योंकि हम सब कुछ स्टैंडर्ड
कंडीशंस में कर रहे हैं इसके बाद आ जाएगा
सॉल्ट ब्रिज और और इसके बाद आ जाएगा कॉपर
सो cu2 प्स जो कि अगेन वन मोलर सॉल्यूशन
में रहेगा यहां से स ठीक है तो कुछ इस
तरीके से हम इस सेल को रिप्रेजेंट कर सकते
हैं अब देखो ये रिप्रेजेंटेशन भी सही है
कि गलत ये हमें लास्ट में जाके पता चलेगा
ठीक है अच्छा अब हमने क्या देखा था कि e
नो सेल जो होता है वो क्या होता है वो
होता है e नॉ
कैथोड माइनस e नॉ
एनोड ठीक है अब यहां पर e नॉ कैथोड क्या
है जो हमें निकालना है क्योंकि हमने तो
यहां पे कॉपर को माना है e नो कैथोड राइट
तो ये हमारा e नो कैथोड हमें नहीं पता है
e नो एनोड हमारा हो जाएगा जीरो क्योंकि
स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का
पोटेंशियल जीरो होता है e नो सेल की जो
वैल्यू है ये हमें एक्सपेरिमेंटली इस
वोल्ट मीटर के रीडिंग से मिल जाएगी तो जब
हम इस पर्टिकुलर एक्सपेरिमेंट को परफॉर्म
करते हैं तो हमें e नो सेल की वैल्यू
मिलती है लगभग 0.34 वोल्ट ठीक है तो इसका
मतलब यहां से हमें e नॉ कैथोड की जो
वैल्यू मिल रही है दैट इज पॉजिट
0.34 वोल्ट बहुत ध्यान से बच्चों एक चीज
देखना पॉजिटिव वैल्यू मिली है व्हिच मींस
कि यह हमारा कैथोड की तरह बिहेव करेगा अभी
इसके पिछले स्लाइड में मैंने बताया था कि
एनोड की तरह कौन बिहेव करेगा जिसका
पोटेंशियल का वैल्यू नेगेटिव होगा ठीक है
अब अगर मान लो इसका मतलब है कि यहां पर इस
पर्टिकुलर क्वेश्चन में एटलीस्ट हमने जो
अज्यू किया था वो करेक्ट था हमने अज्यू
किया था कि कॉपर कैथोड है तो हमने देखा
हां भाई इसकी जो वैल्यू निकल के आई है वो
पॉजिटिव निकल के आई है यानी कि ये कैथोड
की तरह बिहेव कर सकता है तो हमने जो अज्यू
किया था दैट इज करेक्ट हमारा जो सेल का
रिप्रेजेंटेशन है दैट इज आल्सो करेक्ट ऐसा
हो सकता था कि भाई जब हमने e नो की वैल्यू
निकाली तो हमने देखा कि भाई वैल्यू
नेगेटिव आ रही है नेगेटिव आ रही है मतलब
ये जो वैल्यू है ये हमें बता रही है कि
भाई जिसकी वैल्यू तुमने निकाली है वो एनोड
की तरह बिहेव कर रहा है राइट तो इसका जो
पिछला वाला क्वेश्चन था जहां पर हम
मैग्नीशियम का इलेक्ट्रोड पोटेंशियल निकाल
रहे थे उस केस में इवन इफ अगर हम स्टार्ट
करते ये अज्यू करके कि भाई मैग्नीशियम
कैथोड है लास्ट में जाके हम देखते कि e नो
की जो वैल्यू है ना e नो कैथोड की जो
वैल्यू आती वो नेगेटिव आती व्हिच मींस कि
भाई जो नो तुम निकाले हो ना वो कैथोड की
नहीं है वो एनोड की है राइट बात समझ में आ
गई तो कैथोड बिहेव कर रहा है कि एनोड
बिहेव कर रहा है वो यह वैल्यू ही हमें
लास्ट में बता देती है ठीक है तो यहां पर
फिलहाल हमने जो कॉपर की जो वैल्यू निकाली
यहां पे राइट e नॉ कॉपर की जो वैल्यू हमने
यहां पर एक्सपेरिमेंटली निकाली ये वैल्यू
अगर आप देखोगे तो जो टेबल में कॉपर की
वैल्यू दी हुई है उसके साथ भी आपको मैच
करती हुई दिख रही होगी ठीक है तो
स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड पोटेंशियल अगर किसी
इलेक्ट्रोड का ग्रेटर दन 0 है यानी कि अगर
पॉजिटिव है इसका मतलब है कि उसका
रिड्यूस्ड फॉर्म इज मोर स्टेबल कंपेयर टू
हाइड्रोजन गैस यानी कि यहां पे इस केस में
कॉपर का जो रिड्यूस्ड फॉर्म है वो ज्यादा
स्टेबल है यानी कि कॉपर यहां पे रिड्यूस
होगा एगजैक्टली वही तो होगा क्योंकि कॉपर
यहां पे कैथोड है और कैथोड में क्या होता
है रिडक्शन होता है इसलिए कॉपर यहां पे
रिड्यूस होगा ठीक है तो आई गेस अब इस
एग्जांपल को ले लेने के बाद कांसेप्ट और
क्लियर हो गया होगा तो चलो बच यहां पर हम
निकालने वाले हैं इलेक्ट्रोड पोटेंशियल ऑफ
कॉपर अब सेटअप मुझे फिर से समझाने की
जरूरत नहीं है हमारा सेटअप में क्या रहेगा
एक तरफ कॉपर का इलेक्ट्रोड इन कॉपर सल्फेट
सॉल्यूशन दूसरी तरफ स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रोड बट अपने को फिर से ये नहीं पता
है कि भाई कौन एनोड है कौन कैथोड है ठीक
है तो जैसा कि मैंने बताया था हम यहां पर
एज्यूम कर लेंगे यहां पर अब आप कांसेप्ट
चूंकि समझ चुके हो तो मैं सीधा-सीधा इसका
बता रही हूं प्रोसेस कि किस तरीके से हम
मेजर करते हैं ठीक है तो हमने अज्यू कर
लिया कि भाई जो हमारा स्टैंडर्ड हाइड्रो
इलेक्ट्रोड है ये एनोड है यही मैंने आपको
बताया था कि जभी भी हमें नहीं पता है हम
एज्यूम कर लेंगे कि स्टैंडर्ड हाइड्रोजन
इलेक्ट्रोड हमारा एनोड है और दूसरा वाला
यानी कि कॉपर जो है वो हमारा कैथोड है ठीक
है प्लीज नोट कि ये हमारा एंप्शन है ये
अंपन हमारा लास्ट में जाके करेक्ट भी हो
सकता है ये अंपन हमारा लास्ट में जाके
इनकरेक्ट भी हो सकता है ठीक है चलो अब आगे
बढ़ेंगे तो अब इस अजमन को ले देते हुए अगर
मैं इस सेल को रिप्रेजेंट करना चाहूं तो
ये कैसे रिप्रेजेंट होगा पहले एनोड
लिखेंगे प्लैटिनम
सॉलिड हाइड्रोजन जो है ये किसम हाइड्रोजन
जो है वो गैस फॉर्म में रहेगा ठीक है
हाइड्रोजन गैस फॉर्म में रहेगा एट वन बार
प्रेशर ठीक है ये h+ रहेगा जो कि
एक्वास और वन मोलर सॉल्यूशन क्योंकि हम सब
कुछ स्टैंडर्ड कंडीशंस में कर रहे हैं
इसके बाद आ जाएगा सॉल्ट ब्रिज और इसके बाद
आ जाएगा कॉपर सो cu2 प जो कि अगेन वन मोलर
सॉल्यूशन में रहेगा यहां से स ठीक है तो
कुछ इस तरीके से हम इस सेल को रिप्रेजेंट
कर सकते हैं अब देखो ये रिप्रेजेंटेशन भी
सही है कि गलत ये हमें लास्ट में जाके पता
चलेगा ठीक है अच्छा अब हमने क्या देखा था
कि e न सेल जो होता है वह क्या होता है वो
होता है e नो
कैथोड - e न
एनोड ठीक है अब यहां पर e नॉ कैथोड क्या
है जो हमें निकालना है क्योंकि हमने तो
यहां पे कॉपर को माना है e नॉ कैथोड राइट
तो यह हमारा e नॉ कैथोड हमें नहीं पता है
e नॉ एनोड हमारा हो जाएगा ज़ीरो क्योंकि
स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का
पोटेंशियल ज़ीरो होता है e नॉ सेल की जो
वैल्यू है ये हमें एक्सपेरिमेंटली इस
वोल्ट मीटर के रीडिंग से मिल जाएगी तो जब
हम इस पर्टिकुलर एक्सपेरिमेंट को परफॉर्म
करते हैं तो हमें e नॉ सेल की वैल्यू
मिलती है लगभग 0.34 वोल्ट ठीक है तो इसका
मतलब यहां से हमें e नॉ कैथोड की जो
वैल्यू मिल रही है दैट इज पॉजिटिव
0.34 वोल्ट बहुत ध्यान से बच्चों एक चीज
देखना पॉजिटिव वैल्यू मिली है व्हिच मींस
कि ये हमारा कैथोड की तरह बिहेव करेगा अभी
इसके पिछले स्लाइड में मैंने बताया था कि
एनोड की तरह कौन बिहेव करेगा जिसका
पोटेंशियल का वैल्यू नेगेटिव होगा ठीक है
अब अगर मान लो इसका मतलब है कि यहां पर इस
पर्टिकुलर क्वेश्चन में एटलीस्ट हमने जो
अज्यू किया था वो करेक्ट था हमने अज्यू
किया था कि कॉपर कैथोड है तो हमने देखा
हां भाई इसकी जो वैल्यू निकल के आई है वो
पॉजिटिव निकल के आई है यानी कि ये कैथोड
की तरह बिहेव कर सकता है तो हमने जो अज्यू
किया था दैट इज करेक्ट हमारा जो सेल का
रिप्रेजेंटेशन है दैट इज आल्सो करेक्ट ऐसा
हो सकता था कि भाई जब हमने e नो की वैल्यू
निकाली तो हमने देखा कि भाई वैल्यू
नेगेटिव आ रही है नेगेटिव आ रही है मतलब
ये जो वैल्यू है ये हमें बता रही है कि
भाई जिसकी वैल्यू तुमने निकाली है वो एनोड
की तरह बिहेव कर रहा है राइट तो इसका जो
पिछला वाला क्वेश्चन था जहां पर हम
मैग्नीशियम का इलेक्ट्रोड पोटेंशियल निकाल
रहे थे उस केस में इवन इफ अगर हम स्टार्ट
करते ये अज्यू करके कि भाई मैग्नीशियम
कैथोड है लास्ट में जाके हम देखते कि e नो
की जो वैल्यू है ना e नो कैथोड की जो
वैल्यू आती वो नेगेटिव आती व्हिच मींस कि
भाई जो नोट तुम निकाले हो ना वो कैथोड की
नहीं है वो एनोड की है राइट बात समझ में आ
गई तो कैथोड बिहेव कर रहा है कि एनोड
बिहेव कर रहा है वो ये वैल्यू ही हमें
लास्ट में बता देती है ठीक है तो यहां पर
फिलहाल हमने जो कॉपर की जो वैल्यू निकाली
यहां पे राइट e नॉ कॉपर की जो वैल्यू हमने
यहां पर एक्सपेरिमेंटली निकाली ये वैल्यू
अगर आप देखोगे तो जो टेबल में कॉपर की
वैल्यू दी हुई है उसके साथ भी आपको मैच
करती हुई दिख रही होगी ठीक है तो
स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड पोटेंशियल अगर किसी
इलेक्ट्रोड का ग्रेटर दन जीरो है यानी कि
अगर पॉजिटिव है इसका मतलब है कि उसका
रिड्यूस्ड फॉर्म इज मोर स्टेबल कंपेयर टू
हाइड्रोजन गैस यानी कि यहां पे इस केस में
कॉपर का जो रिड्यूस्ड फॉर्म है वो ज्यादा
स्टेबल है यानी कि कॉपर यहां पे रिड्यूस
होगा एगजैक्टली वही तो होगा क्योंकि कॉपर
यहां पे कैथोड है और कैथोड में क्या होता
है रिडक्शन होता है इसलिए कॉपर यहां पे
रिड्यूस होगा ठीक है तो आई गेस अब इस
एग्जांपल को ले लेने के बाद कांसेप्ट और
क्लियर तो बच्चों अब हम यह पूरे
कॉन्फिडेंटली कह सकते हैं कि इस टेबल के
अंदर जितने भी स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल की वैल्यूज दी हुई है जहां पर
भी स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड पोटेंशियल की
वैल्यू पॉजिटिव है इसका मतलब है कि उनका
जो रिड्यूस्ड फॉर्म है वो हाइड्रोजन से
ज्यादा स्टेबल है तो बच्चों अभी तक हमने
जो भी इलेक्ट्रोड पोटेंशियल डिटरमाइंड
किया वहां पर हम हमेशा एक एंप्शन लेते हुए
चले और वो अंपन ये था कि जितनी भी स्पीशीज
इवॉल्वड है उन सब की कंसंट्रेशन क्या क्या
है यूनिटी वन मोलर कंसंट्रेशन लेकिन क्या
रियलिटी में हमेशा ऐसा होता है ऐसा नहीं
होता है तो यहीं पर हमें काम आता है एक
बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक एक बहुत इंपॉर्टेंट
इक्वेशन जिसे हम कहते हैं नर्ंस इक्वेशन
ओबवियसली इट इज नेम आफ्टर द साइंटिस्ट
जिन्होंने हमें ये इक्वेशन दिया था तो
नर्नस्ट इक्वेशन कहता है कि तुम
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल किसी भी कंसंट्रेशन
में निकाल सकते हो विद द हेल्प ऑफ दिस
इक्वेशन तो नं इक्वेशन कुछ ऐसा होता है कि
e इज इक्वल ट e न e और e नॉ क्या है यहां
पर रिडक्शन पोटेंशियल्स e मतलब रिडक्शन
पोटेंशियल e नॉ बोले तो स्टैंडर्ड रिडक्शन
पोटेंशियल ठीक है सो e = e0 -
rt1 नेचुरल लॉग ऑफ कंसंट्रेशन ऑफ m बाय
कंसंट्रेशन ऑफ़ m n+ तो देखो यहां पर हमने
कंसंट्रेशन वाले टर्म्स को भी इस इक्वेशन
में इंक्लूड कर लिया अब बहुत से बच्चे सोच
रहे होंगे कि मैम यह कहां से कहां से इतना
भारी भरकम सा एक इक्वेशन दिख दिया खुद समझ
नहीं आ रहा है कि t क्या है r क्या है n
क्या है एफ क्या है समझ में आएगा सो
धीरे-धीरे अब हम हर एक चीज को समझेंगे इस
इक्वेशन के एंड लेट मी टेल यू ये सुपर
डुपर इंपॉर्टेंट है क्योंकि आपके
कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स में आपके स्कूल के
एग्जाम्स में ये नर्स इक्वेशन के ऊपर
बेस्ड न्यूमेरिकल्स अक्सर ही पूछे जाते
हैं छोटे शॉर्ट न्यूमेरिकल्स लॉन्ग
न्यूमेरिकल्स हर तरह के न्यूमेरिकल्स पूछे
जा सकते हैं इसीलिए बी एक्स्ट्रा अटेंट
ठीक है तो चलो नं इक्वेशन को थोड़ा डिटेल
में समझते हैं तो सबसे पहले तो समझते हैं
कि नन इक्वेशन में यह जितनी भी चीजें हैं
यह क्या है ठीक है तो चलो एक-एक करके
देखते हैं जैसे यहां पर r है r क्या है r
है गैस कांस्टेंट गैस कांस्टेंट के बारे
में तो हम काफी टाइम से पढ़ते आ रहे हैं
इसकी वैल्यू फिक्स होती है व्हिच इज
8.314 जूल पर केल्विन पर मोल इसके बाद है
t जो कि है टेंपरेचर इन केल्विन इसके बाद
है n n क्या डिनोट करता है n डिनोट करता
है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन कौन से वा
इलेक्ट्रोंस देखो चाहे ऑक्सीडेशन हो रहा
हो या रिडक्शन हो रहा हो जितने नंबर ऑफ
इलेक्ट्रॉन का लेनदेन हुआ जितने नंबर ऑफ
इलेक्ट्रॉन हमने लिए या दिए सो दैट इज द
वैल्यू ऑफ n ठीक है f क्या है f है फराडेज
कांस्टेंट और फैराडे कांस्टेंट की वैल्यू
होती है 96 487 कूलम मोल इवर्स फैराडे
कांस्टेंट के बारे में थोड़ा और डिटेल में
हम डिस्कस करेंगे जब हम इलेक्ट्रोलिसिस के
बारे में डिस्कस करेंगे ठीक है तो चलो ये
f ब हो गया अब क्या बचा अब बचा ये m और
mn3 ठीक है अब ये कंसंट्रेशन ऑफ m ये तो
चूंकि सॉलिड है तो कंसंट्रेशन ऑफ सॉलिड इज
टेकन एज यूनिटी किसी भी सॉलिड का
कंसंट्रेशन हम वन लेते हैं ठीक है
mnnit.ac.in
अब हमें पता है कि न इक्वेशन में कौन-कौन
सी चीजें है यह तो क्लियर हो गया ग्रेट तो
इसका मतलब इसी न इक्वेशन को हम ऐसे भी लिख
सकते
हैं ए प् ए इ इक्व e न m ए प् ए माइनस आटी
डिवा बाय ए ए नेचुरल लग ऑफव बाय
कंसंट्रेशन ऑफ m ए प्स अब मान लो इसी नन
इक्वेशन को हम अप्लाई करते हैं डेनियल सेल
में तो डेनियल सेल में क्या होता है
डेनियल सेल में एक-एक करके बात करेंगे चलो
पहले बात करते हैं कैथोड कैथोड में रहता
है कॉपर जहां पर कॉपर का रिडक्शन हो रहा
होता है ठीक है सो ई कॉपर मतलब ई रिडक्शन
देखो ये सब रिडक्शन पोटेंशियल है
mnnit.ac.in बा nf1 क्या हो जाएगा cu2 प
है यानी कि cu2 प दो इलेक्ट्रॉन और लेगा
कॉपर बनाने के लिए तो यहां पर n की वैल्यू
हो जाएगी ू सो 2f नेचुरल लॉग ऑफ 1 बा
कंसंट्रेशन ऑफ cu2 प ठीक है ऐसे लिख सकते
हैं हम नस्ट इक्वेशन ठीक इसी तरीके से बात
करेंगे एनोड की एनोड में क्या है जिंक तो
एनोड में भी हम रिडक्शन पोटेंशियल की ही
बात कर रहे हैं ठीक है तो इसीलिए फॉर्मेट
वही रखेंगे e2 प् z इ इक्व e
न z2 प् से zn20
की कोशिश करूं इस पूरे सेल का अगर मैं
ईएमएफ निकालूं तो वह क्या हो जाएगा वो हो
जाएगा ई कैथोड यानी कि ई रिडक्शन
पोटेंशियल ऑफ कैथोड कैथोड बोले तो कॉपर
वाला पार्ट तो रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ कैथोड
माइनस रिडक्शन पोटेंशियल ऑफ एनोड ठीक है
यहां तक भी सही है अब कुछ खास बचा नहीं है
अब इसमें हम यही वाली वैल्यू को पुट कर
देंगे ठीक है सेम वैल्यू को बस पुट कर
देंगे तो चलो पुट करते हैं तो इसको हम लिख
सकते हैं e न स2 प् सय माइ आटी बा 2f
नेचुरल लॉग ऑफ 1 डिवाइड बाय cu2 प् का
कंसंट्रेशन माइनस e न
zn20 बा
2f नेचुरल लॉग ऑफव बाय कंसंट्रेशन ऑफ z2
प् ठीक है सिंपल मैथमेटिक्स कुछ खास नहीं
कर रही हूं अब इसको फर्द हम लिख सकते हैं
e सेल इ इक्वल टू ये e नॉ वाले पार्ट को
साथ में डाल देते हैं e न cu2 प् से स - e
न
zn20 बा 2f को कॉमन ले सकते हैं तो अंदर
क्या बचेगा नेचुरल लॉग ऑफ 1 बा cu2
प् माइनस नेचुरल लॉग ऑफव बाय कंसंट्रेशन
ऑफ z 2
प् ठीक है इज इक्वल टू अब देखो e न कैथोड
- e न एनोड इसको हम क्या लिख सकते हैं e
नॉ सेल लिख सकते हैं बिल्कुल लिख सकते हैं
सो e न सेल -
rt2 f अंदर हम क्या लिख सकते हैं इसको
नेचुरल लॉग ऑफ a / b ये a है डिवाइडेड बाय
b है यानी कि ये हो जाएगा कंसंट्रेशन ऑफ
zn20 डिवाइडेड बाय कंसंट्रेशन ऑफ cu2
प् ठीक है तो यह हो जाएगा क्या यह हो
जाएगा मेरा नर्ड इक्वेशन फॉर डेनियल सेल
अब यहां पर एक शॉर्टकट देखो अभी तक हम
किसकी बात कर रहे थे हम बात कर रहे थे
डेनियल सेल की डेनियल सेल का अगर ओवरऑल
रिएक्शन देखो तो कुछ ऐसा होता है
zn20 रिएक्शन को देख के देखो सीधा-सीधा
नर्ड इक्वेशन लिखना बहुत आसान है e सेल इज
e न सेल - rt2 f नेचुरल लॉग ऑफ zn20 मतलब
प्रोडक्ट वाले साइड में जो आयस का
कंसंट्रेशन है डिवाइडेड बाय रिएक्टेंट
वाले साइड पे जो आयन का कंसंट्रेशन है ठीक
है ये समझ में आ गया तो इसको हम और
जनरलाइज कर सकते हैं सो हम कह सकते हैं इन
जनरल कि लेट अस सपोज हमारे पास कोई भी
रिएक्शन है कुछ इस फॉर्मेट का a +
c स प्
डी ठीक है जहां पर ये स्मल ए बी सीडी बता
रहे हैं कितने मोल्स ऑफ वो पर्टिकुलर चीज
जो है वो कंबाइन हो रही है ठीक है इन जनरल
अगर हमारे पास कभी भी एक इस तरह के
फॉर्मेट में रिएक्शन है और मुझे अगर नन
इक्वेशन लिखना हो तो मैं कैसे लिखूंगी e
सेल इ इक्वल ट e न सेल माइ आटी बा
साइड के कंसंट्रेशंस टू द पावर देयर
कोफिया वाले साइड के कंसंट्रेशंस टू द
पावर देयर कफिट नाउ इसे याद रखना है याद
मतलब वैसे रटना नहीं है बट मतलब इस
कांसेप्ट को याद रखना है क्योंकि क्वेश्चन
सॉल्व करते टाइम भी ये कई बार काम आता है
चलो नंस इक्वेशन तो समझ में आया अब ये
जानना जरूरी है कि नर्सड इक्वेशन को हम
कहां कहां यूज कर सकते हैं कैसे-कैसे यूज
कर सकते हैं ईएमएफ ऑफ अ सेल निकालने के
लिए यूज कर सकते हैं बिल्कुल
इक्विलियम कांस्टेंट निकालने के लिए यूज़
कर सकते हैं किसी भी रिएक्शन के गिव्स
एनर्जी को कैलकुलेट करने के लिए भी यूज़
कर सकते हैं कैसे चलो एक-एक करके सारे
कैलकुलेट करते हैं तो चलो सबसे पहले देखते
हैं कि भाई सेल ईएमएफ निकालते कैसे हैं तो
य हमने ना यहां पर एक एग्जांपल ही ले लिया
उससे आसानी होगी रिप्रेजेंट द सेल इन
व्हिच द फॉलोइंग रिएक्शन टेक्स प्लेस
कैलकुलेट इट्स सेल पोटेंशियल इफ सेल e इ
इक्व
3.17
वोल्ट ठीक है
यह सेल क्या है दिस इज बेसिकली e न सेल
यानी कि स्टैंडर्ड सेल पोटेंशियल ठीक है
चलो निकाल के देखते हैं सीधा-सीधा डाल
देंगे क्या नन इक्वेशन सो नन इक्वेशन क्या
कहता है कि e सेल इज इक्व e न सेल माइ आटी
बा
nf1 पर क्या होगा देखो कितने इलेक्ट्रॉन
का लेनदेन हो रहा है दो सो आटी बा 2f
नेचुरल लॉग ऑफ प्रोडक्ट वाले साइड के
कंसंट्रेशंस अब सॉलिड का कंसंट्रेशन तो वन
होता है तो इसीलिए सॉलिड के कंसंट्रेशंस
को इग्नोर मारो ठीक है तो प्रोडक्ट वाले
साइड का कंसंट्रेशन में कंसंट्रेशन ऑफ mg2
प आ जाएगा रिएक्टेंट वाले कंसंट्रेशन के
केस में ये + आ जाएगा लेकिन देखो + का
कोफिया कि ये टू इसके पावर के फॉर्म में आ
जाएगा राइट अभी जस्ट हमने लिखा था
जनरलाइज्ड जो एक्सप्रेशन तो बस उसी को
फॉलो करते हुए हमने ये लिख दिया ठीक है अब
देखो कितना आसान है e न सेल की वैल्यू दी
हुई है
3.17 तो इसको 3.17 डाल देते हैं माइनस अब
देखो आटी f ये सब कुछ कांस्टेंट है तो इन
सबके कांस्टेंट वैल्यू अगर हम डाल देते
हैं अगर नेचुरल लॉग को भी हम लॉग डाल देते
हैं तो इसकी जो वैल्यू निकल के आती है वह
क्या होती है यह rt1 f और यह नेचुरल लॉग
यह सबको अगर साथ में ले लेते हैं तो यहां
पर आता है यह
0.059 बा 2 लॉग ऑफ mg2 प्स का कंसंट्रेशन
यहां पर दिया हुआ है
0.13 तो ये हो जाएगा
0.130 डिवाइडेड बाय सिल्वर आयन का
कंसंट्रेशन भी यहां पर दिया हुआ है
0.001 इसका होल
स्क्वायर ठीक है तो जब इसकी वैल्यू
कैलकुलेट करेंगे तो ये निकल के आएगा 3.17
-21 दैट इज इक्वल टू 2 96 वोल्ट्स तो इस
तरीके से हम नर्स इक्वेशन को यूज करके सेल
ईएमएफ निकाल सकते हैं अब देखना यह है कि
नर्न इक्वेशन की हेल्प से हम इक्विलियम
कांस्टेंट कैसे निकालते हैं किसी रिएक्शन
का बहुत से बच्चों के दिमाग में यह सवाल आ
रहा होगा कि यार हम इक्विलियम के बारे में
तो पढ़ ही नहीं रहे थे तो ये इक्विलियम
कांस्टेंट कहां से आ गया राइट तो सबसे
पहले तो वो समझते हैं कि ये इक्विलियम आया
कहां से तो देखो अगर हम डेनियल सेल की बात
करें तो वहां पर हो क्या रहा रहा था ओवरऑल
ओवरऑल वहां पर यह हो रहा था कि जिंक जो है
वो इलेक्ट्रॉन लूज करके बन रहा था zn20
कॉपर 2 प्स जो है वो इलेक्ट्रॉन को गेन
करके बन रहा था
cu-t ये रिएक्शन था ठीक है तो ये रिएक्शन
जैसे चलते रहता है चलते रहता है चलते रहता
है जैसे-जैसे ये प्रोसेस चलते ही रहता है
क्या होता है जो zn20 का कंसंट्रेशन है वो
बढ़ते रहता है क्योंकि रिएक्शन जो है वो
फॉरवर्ड डायरेक्शन में प्रोसीड कर रहा है
तो 2+ बढ़ते जा रहा है co2 प घटते जा रहा
है जैसे-जैसे ये रिएक्शन प्रोसीड कर रहा
है ऐसे करते करते एक ऐसा टाइम आता है जब
हम देखते हैं कि जो मेरा वोल्ट मटर का जो
रीडिंग है ना वो जीरो रीडिंग है क्यों
क्योंकि एक टाइम पर आने के बाद अब हम
देखते हैं कि जिंक 2 प्स आयन का या कॉपर
टू प्लस आयन के कंसंट्रेशन में कोई चेंज
नहीं हो रहा है एंड दैट इज व्हेन वी से
इक्विलियम इज अटेंड बात समझ आई अब जहां
इक्विलियम अटें हो गया तो वहां पर तो
पिक्चर में इक्विलियम कांस्टेंट को आना ही
है एंड आई एम प्रिटी श्यर आप सबको पता है
कि व्हाट इज इक्विलियम व्हाट इज इक्विलियम
कांस्टेंट क्लास 11थ इक्विलियम में पढ़ा
था नहीं पढ़ा था तो जाओ जाके वन शॉर्ट
वीडियो देखो फिर से तो देखो अब जब हम
इक्विलियम की बात कर रहे हैं तो एट
इक्विलियम क्या होगा नर्ड इक्वेशन अभी तो
हम लिखेंगे बट हम ये देखेंगे इक्विलियम
में ई सेल की वैल्यू जीरो होगी जो सेल का
जो पोटेंशियल है जो सेल का ईएमएफ है
इक्विलियम पर वो जीरो हो होगा ठीक है अभी
तक हमने जो डेनियल सेल देखा था उस डेनियल
सेल का अगर मुझे ओवरऑल रिएक्शन लिखना हो
तो वो रिएक्शन कुछ ऐसा होगा zn20
गिव्स zn20 +
cu0 इक्विलियम कांस्टेंट की बात कर रहे
हैं वहां हम अज्यू कर रहे हैं कि वो स्टेज
आ चुका है जब इन दोनों आयस के बीच में एक
इक्विलियम सेटअप हो चुका है ठीक है तो चलो
अब हम लिखते हैं नस्ट इक्वेशन तो हम इसे
क्या लिख सकते हैं e सेल इ इक्व e न सेल
माइनस अब इसे हम
2 प्लस का कंसंट्रेशन ठीक है अभी-अभी
मैंने क्या बताया कि e सेल की वैल्यू
इक्विलियम पे जीरो होगी तो इसको हम जीरो
लिख सकते हैं ठीक है कुछ और बातें हम चेंज
कर सकते हैं जैसे यहां पर नेचुरल लॉग है
इसको हम कन्वर्ट कर सकते हैं तो बेसिकली
ये हो जाएगा 0 = e नॉ सेल -
2.303 आटी डिवाइडेड बाय n ए
लॉग zn20 का कंसंट्रेशन डिवाइडेड बाय cu2
प का कंसंट्रेशन ठीक है अब देखो यहां पर
अगर हम ध्यान दें सिर्फ इस इक्विलियम
रिएक्शन पर ध्यान दो तो इक्विलियम वाले
चैप्टर में हमने ऑलरेडी यह पढ़ा था कि जब
एक इस तरह का इक्विलियम सेटअप होता है तो
इस इक्विलियम का जो इक्विलियम कांस्टेंट
होता है लेट अस सपोज हम उसे केसी से डिनोट
करते हैं वो क्या हो जाता है कंसंट्रेशन
ऑफ द आयस ऑन द प्रोडक्ट साइड बाय
कंसंट्रेशन ऑफ आयस ऑन द रिएक्टेंट साइड
यही होता है तो यानी कि इस पूरे टर्म को
हम
kc1 सेल को भी इधर ला सकते हैं तो ये हो
जाएगा e नॉ सेल इज इक्वल टू दोनों साइड का
माइनस कैंसिल हो जाएगा तो ये हो जाएगा
2.303
rt1 l
kc3 3rt / f ये सारे कांस्टेंट वैल्यूज
हैं ठीक है तो अगर हम चाहे तो इन सब की
वैल्यूज डाल के कैलकुलेट करके देख सकते
हैं सो दिस विल कम आउट टू बी
0.059 डिवाइड बा n लॉग ऑफ
kc1 सेल की वैल्यू ठीक है अब अगर हम
स्पेसिफिकली बात करते हैं डेनियल सेल के
लिए ठीक है मान लो स्पेसिफिकली हम डेनियल
सेल की अगर बात करें तो इस e न सेल की जो
वैल्यू है ये वैल्यू तो हमारी फिक्स्ड है
राइट क्योंकि हम वोल्ट मीटर रीडिंग से
एक्सपेरिमेंटली निकाल सकते हैं सो दिस
वैल्यू कम्स आउट टू बी 1.1 वोल्ट्स ठीक है
e न सेल की वैल्यू तो यानी कि यहां से हम
l ऑफ c की वैल्यू
kc2 इलेक्ट्रॉन का तो ये n की वैल्यू टू
हो जाएगी तो वेरिएबल क्या बचा सिर्फ
kc4 क्या हो जाएगा 37.2
88 कैसे हुआ ये 1.1 * 2 / 0.059 तो इस
तरीके से हम इक्विलियम कांस्टेंट की
वैल्यू निकाल सकते हैं तो यहां पर याद
रखने लायक एस सच तो कुछ याद रखने की जरूरत
नहीं है बट यस ये जो फार्मूला है बेसिकली
यही हमने डिराइवर किया जो एक रिलेशनशिप शो
कर रहा है e नो सेल और केसी के बीच में
मतलब इक्विलियम कांस्टेंट और सेल
पोटेंशियल स्टैंडर्ड सेल पोटेंशियल के बीच
में तो अब न इक्वेशन के हेल्प से हम देखने
वाले हैं किसको गिव्स फ्री एनर्जी को तो
बच्चों यह बताओ चलो सबका मेमोरी टेस्ट
होगा कि गिव्स फ्री एनर्जी इससे पहले हमने
कहां पढ़ा था क्लास 11थ थर्मोडायनेमिक्स
पढ़ रहे हो ना मेरे साथी तो क्लास 11थ के
थर्मोडायनेमिक्स के वन शॉट में हमने गिब्स
फ्री एनर्जी के बारे में पढ़ा था इन गिब्स
हेलम होल्स इक्वेशन याद है कौन सी इक्वेशन
थी डेल्टा g = डेल्टा h - t डेल्टा ए जहां
पर चेंज इन एंथैल्पी चेंज इन एंट्रॉपिज इन
फ्री एनर्जी जी ये सारी चीजें इवॉल्वड हैं
तो अब हम इस इक्वेशन के डिटेल में तो नहीं
जाएंगे बट सिर्फ यह जान लेंगे कि यहां से
हमें क्या पता चला था हमें यह पता चला था
कि अगर डेल्टा g ग्रेटर दन 0 होती है अगर
फ्री एनर्जी ग्रेटर दन ़ होती है इसका
मतलब मेरा रिएक्शन नॉन स्पॉन्टेनियस है
अगर डेल्टा g लेसन 0 है इसका मतलब मेरा
रिएक्शन स्पॉन्टेनियस है और अगर डेल्टा g
की वैल्यू इक्वल टू 0 है यानी कि रिएक्शन
इक्विलियम पर है ठीक है तो ये ये सारी
बातें हमें डेल्टा जीी के बारे में ऑलरेडी
पता थी यहां पर हम क्या पता करने आए हैं
यहां पर हम यह पता करने आए हैं कि डेल्टा
जी का सेल के ईएमएफ से यानी कि ई सेल से
डेल्टा जीी का क्या लिंक है क्या
रिलेशनशिप है तो बेसिकली नर्नस्ट इक्वेशन
के हेल्प से हम इन दोनों के बीच में एक
रिलेशनशिप एस्टेब्लिश करते हैं जो कहता है
कि डेल्टा g इज इक्वल टू - n सेल ठीक है
एंड दिस इज अ वेरी वेरी इंपोर्टेंट रिलेशन
जो आपको बहुत काम आएगा क्वेश्चंस में
न्यूमेरिकल्स में हर जगह पे तो इसीलिए
ध्यान देना है तो देखो इस रिलेशन से एक
बहुत मजेदार बात पता चलती है कि जब कभी भी
डेल्टा g पॉजिटिव होगा e सेल क्या होगा
नेगेटिव होगा जब कभी भी डेल्टा g नेगेटिव
होगा e सेल क्या होगा पॉजिटिव होगा है ना
मतलब दोनों का रिलेशन ही कुछ ऐसा है ठीक
है अब अगर मैं इसे स्टैंडर्ड फॉर्म में
बात करूं जैसे कि डेल्टा g नॉ विल बी
इक्वल टू - n सेल नॉ तो दोनों तरफ नॉट लग
जाएंगे ठीक है है वो भी क्लियर है अब अगर
मैं इक्विलियम कांस्टेंट के टर्म्स में
लिखना चाहूं तो कैसे लिख सकती हूं द
मोमेंट आई टॉक अबाउट इक्विलियम इसका क्या
मतलब है अगर नर्नस्ट इक्वेशन को हम लिख दे
और हम कहे कि भैया इक्विलियम पर है मेरा
पूरा सिस्टम तो इसका मतलब है e सेल की
वैल्यू जीरो है तो नस्ट इक्वेशन में अगर
हम e सेल को जीरो कर देते हैं तो मुझे
क्या मिलेगा e नॉ सेल विल बी इक्वल टू
nf2 ए ए ऑफ द रेशो ऑफ द कांस ट्रेशन और
रेशो ऑफ़ द कंसंट्रेशन को हम इक्विलियम
कांस्टेंट लिख सकते हैं यानी कि इसे हम
ln2 एन के जहां पर क्याक है k क्या है
इक्विलियम कांस्टेंट है ठीक है अब बहुत से
बच्चों के दिमाग में क्वेश्चंस आ रहे
होंगे कि मैम आपने ये सब कुछ तो बता दिया
लेकिन ये n क्या है f क्या है ये क्या है
यह तो बताओ तो यह तो खैर मैंने पहले भी
बताया है बट फिर से बता देती हूं सो देखो
f क्या है f है फैराडे ज कांस्टेंट n क्या
है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन यानी कि यहां पर जो
एक आयन से मेटल में जा रहा है लेट्स से m
n+ से m बन रहा है तो जितने इलेक्ट्रॉन को
वो एक्सेप्ट कर रहा है n इलेक्ट्रॉन
एक्सेप्ट कर रहा है राइट सो दैट इज़ n तो
जितने भी नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन इवॉल्वड हैं
वो n है जैसे मान लो अगर मैं एग्जांपल
लेती हूं लेट्स से al3 प + 3 इलेक्ट्रॉन
कितने इलेक्ट्रोंस का इवॉल्वमेंट हुआ थ्री
तो n की वैल्यू हो जाएगी थ्री ठीक है f तो
फराडेज कांस्टेंट है r t ये सारे
कांस्टेंट्स हैं जो आपको पता ही है राइट
तो नथिंग न्यू k इक्विलियम कांस्टेंट है
डेल्टा जीी गिव्स फ्री एनर्जी का चेंज है
और ई व्हिच इज ईएमएफ ऑफ द सेल तो यही सारी
चीजें हैं और अब हम इसी कांसेप्ट के ऊपर
बेस्ड कुछ न्यूमेरिकल्स ट्राई करेंगे तभी
यह कांसेप्ट ज्यादा क्लियर होगा तो अब
बारी है क्वेश्चन की देखते हैं पहला
क्वेश्चन राइट द न इक्वेशन एंड ईएफ ऑफ द
फॉलोइंग सेल्स एट 298 केल्विन ठीक है एकएक
करके देखेंगे तो सबसे पहला वाला देखते हैं
यहां पर क्या है ए है और हाइड्रोजन है टीन
है और हाइड्रोजन है ठीक है तो सबसे पहले
तो हम नस इक्वेशन लिख देते हैं इजी रहेगा
करने में ठीक है e सेल इ इक्वल टू e न सेल
-
0.059 बा n ये 0.059 क्यों लिख दिया
क्योंकि वो
2.303 आटी बा f वो सारे कांस्टेंट है तो
सबकी वैल्यू डाल के कैलकुलेटेड वाली
वैल्यू लिख देते हैं इजी रहेगा कैलकुलेट
करने में लॉग ऑफ क्या हो जाएगा देखो इस
अनाउंसड इक्वेशन लिखने से भी पहले ना इसका
इक्वेशन लिख लो वो ज्यादा इजी रहेगा
क्योंकि यहां पर तो क्या दिया हुआ है सेल
का रिप्रेजेंटेशन दिया हुआ है इस
रिप्रेजेंटेशन को देखते हुए हम क्या कह
सकते हैं कि
sns2 प् में चेंज हो रहा है
तो इधर sn2 प् में चेंज हो रहा है लेकिन
साथ ही साथ यहां पर हाइड्रोजन भी है h+ भी
जो है वो h2 में चेंज हो रहा है तो यानी
कि इधर हाइड्रोजन भी है जो h2 में चेंज हो
रहा है ठीक है अब इसको बैलेंस करोगे तो इस
तरह का कुछ हमारा रिएक्शन होगा अब चाहो तो
यहां पर ये सब भी डाल दो ये सॉलिड फॉर्म
में है ठीक है ये गैस फॉर्म में है इस तरह
की चीजें आप डाल सकते हो ठीक है तो लगभग
यह मेरा नेट नेट रिएक्शन हो रहा होगा इस
सेल के अंदर तो अब लॉग ऑफ क्या होगा
प्रोडक्ट साइड के आयस के कंसंट्रेशन यानी
कि sn2 प का कंसंट्रेशन डिवाइडेड बाय
रिएक्टेंट साइड के आयस का कंसंट्रेशन यानी
कि h+ का कंसंट्रेशन और h के h+ के पहले
एक कफिट भी है टू तो ये पावर के फॉर्म में
चला जाएगा ठीक है क्लियर हो गया कैसे लिखा
हमने नर्स इक्वेशन ओके अब मुझे ईएमएफ भी
निकालनी है तो ईएमएफ निकालना तो कोई खास
बात नहीं है इसी में हम बस वैल्यूज पुट
करते चले जाएंगे ठीक है अब देखो सबसे पहले
मुझे e नो सेल की वैल्यू चाहिए ठीक है तो
e न सेल की वैल्यू क्या हो जाएगी यहां पर
चलो देखते हैं पहले e नो सेल की वैल्यू
निकाल लेते हैं सो e नो सेल हो जाएगा e न
कैथोड माइनस e न
एनोड ठीक है तो यहां पर कैथोड क्या है और
यहां पर एनोड क्या है देखो समझो कहां पे
रिडक्शन हो रहा है कहां पे ऑक्सीडेशन तो
वापस इस पे जाते हैं sns2 प बन रहा है
यानी कि लॉस ऑफ इलेक्ट्रॉन हो रहा है यहां
भी यहां पर क्या हो रहा है ऑक्सीडेशन हो
रहा है ऑक्सीडेशन कहां पर होता है एनोड
में होता है तो यानी कि ये एनोड है ठीक है
h+ से बन रहा है ये
h2 कैसे गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन से यानी कि
यहां पर रिडक्शन हो रहा है और रिडक्शन
कहां पे होता है कैथोड में ठीक है सो e न
कैथोड मतलब कैथोड क्या है मेरा हाइड्रोजन
सो बेसिकली ये हो जाएगा e नॉ क्या
हाइड्रोजन का भी रिडक्शन पोटेंशियल हम
लेंगे करेक्ट सो रिडक्शन पोटेंशियल बोले
तो h+ से h2 - e न एनोड एनोड का भी हम
रिडक्शन पोटेंशियल ही कंसीडर करेंगे तो ये
क्या हो जाएगा sn2 प् से
sn1 का क्या होता है उसी के लिए तो ये
टेबल को चिपका रखा है यहां पे ढूंढो यहां
से न का वैल्यू क्या होता है न की वैल्यू
न न ये रहा न सो न का जो e न का वैल्यू
होगा दैट इज
माइनस
0.14 सो यानी कि e नो सेल की वैल्यू मुझे
कितनी मिल गई 0.14 वोल्ट ठीक है तो चलो e
नो सेल तो मिल गया तो एक वैल्यू तो मुझे
मिल गई और क्या-क्या वैल्यूज चाहिए मुझे n
की वैल्यू चाहिए n की वैल्यू क्या हो
जाएगी इस रिएक्शन को देखो कितने
इलेक्ट्रॉन का यहां पर ट्रांसफर हो रहा है
दो इलेक्ट्रॉन का राइट तो इसीलिए n की
वैल्यू यहां पर क्या हो जाएगी n की वैल्यू
हो जाएगी टू ठीक है sn2 प और h+ का
कंसंट्रेशन इस क्वेश्चन में दिया हुआ है
देखो sn2 प का कंसंट्रेशन ये है h+ का
कंसंट्रेशन ये है तो अब मेरे पास सारी
वैल्यूज है और मैं कैलकुलेट कर सकती हूं
तो चलो फिर कैलकुलेट करते हैं तो e सेल
विल बी इक्वल टू
0.14 - 0.05
9/2 l ऑफ
0.05 /
0.02 का होल
स्क्वा ठीक है इसे हम कैलकुलेट करेंगे तो
सेल पोटेंशियल या सेल ईएमएफ निकल के आएगा
078 वोल्ट तो ये हो जाएगा हमारा
आंसर ठीक है समझ आ गया तो अब जो दूसरा
वाला सवाल है वैसे तो चाहो तो आप खुद से
भी ट्राई कर सकते हो और अगर चाहो तो मैं
कुछ हिंट भी दे सकती हूं ठीक है बट ये
पहला वाला समझ में आ गया राइट अगर ये
अच्छे से समझ में आ गया तो दूसरा आप खुद
से कर लोगे आई एम प्रिटी श्यर तो सबसे
पहले हम इस दूसरे क्वेश्चन का रिएक्शन
लिखेंगे रिएक्शन लिखे बिना सॉल्व करना इज
वेरी डिफिकल्ट यहां पर क्या हो रहा है एक
तो ब्रोमीन के साथ कुछ हो रहा है
ऑक्सीडेशन या रिडक्शन उसी तरह और क्या हो
रहा है हाइड्रोजन के साथ हो रहा है तो एक
तरफ ब्रोमीन है और एक तरफ हाइड्रोजन है
ठीक है देखो साफ-साफ दिख रहा है कि यहां
पे क्या हो रहा
है जो ब्रोमीन है वो ब माइनस से चला जा
रहा है किस फॉर्म में br2 में ठीक है सो
मतलब जो रिएक्शन है वो कुछ ऐसा हो रहा है
जो ब माइनस है इधर और इधर है h+ ब माइन से
ये बन जा रहा है br2 और h+ से ये बन जा
रहा है
h2 ठीक है ऐसा कुछ रिएक्शन हो रहा है अब
इसको बैलेंस करने के लिए इधर टू डाल देते
हैं इधर भी टू डाल देते हैं अब ये
बैलेंस्ड है ठीक है देखो ऑक्सीडेशन और
रिडक्शन कहां पे हो रहा है अभी से ही देख
लेते हैं आसान रहेगा ब माइन से यह बन रहा
है br2 यानी कि यह इलेक्ट्रॉन क्या कर रहा
है यहां पे माइनस था करेक्ट तो इसने इस
इलेक्ट्रॉन को लूज कर दिया तभी तो br2 बना
है कि नहीं तो यानी कि लॉस ऑफ इलेक्ट्रॉन
यानी कि यहां पर हो रहा है ऑक्सीडेशन यानी
कि यह ब्रोमीन किस कौन सा वाला बनेगा एनोड
बनेगा h+ से h2 बनने के लिए गेन ऑफ
इलेक्ट्रॉन हो रहा है यानी कि रिडक्शन और
रिडक्शन कहां पर होता है थोड में ठीक है
अगर इतना काम आपने कर लिया तो अब समझ लो
आपका क्वेश्चन जो है ना 70 पर तो सॉल्व ही
हो गया है ज्यादा कुछ बचा नहीं है इस
क्वेश्चन में ठीक है n की वैल्यू भी निकाल
लो लगे हाथ देखो कितने इलेक्ट्रॉन की यहां
पर भी बात हो रही है देखोगे तो दो
इलेक्ट्रॉन की बात हो रही है सो n की
वैल्यू क्या है टू है चलो ये भी सॉर्ट आउट
हो गया अब यहां पर e नो सेल की वैल्यू भी
निकाल लो क्योंकि वो भी चाहिए होता है तो
e नो सेल क्या हो जाएगा e नॉ कैथोड कैथोड
यहां पे हाइड्रोजन है सो हाइड्रोजन का
रिडक्शन
पोटेंशियल माइनस e न एनोड एनोड यहां पर
ब्रोमीन है सो ब्रोमीन का रिडक्शन
पोटेंशियल तो हाइड्रोजन का जो है e नो ये
क्या होगा ये तो जीरो होता है सो दिस विल
बी जीरो और ब्रोमीन का कितना होगा चलो
ब्रोमीन का यहां से निकालते हैं यहां पर
ब्रोमीन है इधर और ब्रोमीन का इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल है
1.09 तो यानी कि e नो सेल की वैल्यू हो
जाएगी -1.0 09 वोल्ट तो ये अब मैंने सारी
चीजें निकाल ली ठीक है अब क्या करना है अब
सिर्फ नस्ट इक्वेशन के फॉर्मूले पे डालना
है तो यह अगर चाहो तो आप खुद से भी कर
सकते हो और बोलोगे तो मैं कर देती हूं चलो
ऊपर कर लेते हैं क्योंकि स्क्रीन पे अब
जगह बची नहीं है तो यहां ऊपर करते हैं सो
e सेल की वैल्यू क्या हो जाएगी e नॉ सेल
यानी कि -
1.09 -
0.059 डिवाइड बा n n की वैल्यू 2 है लॉग
ऑफ क्या हो जाएगा
देखो लॉग ऑफ प्रोडक्ट के साइड कोई आयन है
ही नहीं यहां पर देखो br2 है और h2 है आयन
कुछ भी नहीं है तो सॉलिड वगैरह का तो
कंसंट्रेशन यूनिट ही होता है तो न्यूमरेशन
में वन होगा डिनॉमिनेटर पे h+ भी है और
डिनॉमिनेटर में ब - भी है और दोनों के साथ
टू कफिट भी है तो यानी कि इनका होल
स्क्वायर हो जाएगा ठीक है अब देखो h+ का
कंसंट्रेशन दिया हुआ है
0.03 ब माइन का कंसंट्रेशन दिया हुआ है
0.1
1010 तो यह वाली वैल्यूज डाल के और इसे
कैलकुलेट कर लो तो आंसर आ जाएगा - 1.29
वोल्ट आई होप कि आप ये कैलकुलेशन खुद से
कर लोगे कैलकुलेशन में क्या है कुछ खास तो
है नहीं मेन क्या चीज इंपॉर्टेंट है
अप्रोच कि क्वेश्चन को अप्रोच कैसे करना
है ठीक है वो तो आई एम प्रिटी श्यर ये दो
एग्जांपल से समझ में आ ही गया होगा बहुत
बढ़िया आगे बढ़ते हैं देखते हैं क्वेश्चन
नंबर टू यूजिंग स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल्स प्रेडिक्शन बिटवीन द फॉलोइंग
इज फीजिबल तुम्हें बताना है कि ये रिएक्शन
फीजिबल है भी कि नहीं ठीक है तो रिएक्शन
की फीजिबिलिटी हम किस बेसिस पर बताते हैं
कोई भी रिएक्शन अगर हमारे पास एक रिएक्शन
है और अगर वो रिएक्शन फीजिबल है इसका मतलब
है कि उसका जो डेल्टा g न है यानी कि
गिव्स फ्री एनर्जी जो है दैट इज लेस दन
जीरो तभी क्या होता है वो स्पॉन्टेनियस
रिएक्शन होता है डेल्टा जीी को हम क्या
लिख सकते हैं माइनस n ए न सेल सो दिस इज
लेस दन जीरो ठीक है इसका मतलब
इस पूरे को जीरो से लेस होने के लिए e नो
सेल को पॉजिटिव होना पड़ेगा तभी तो यह
पूरा नेगेटिव ही रहेगा सो दैट मींस e नो
सेल शुड बी ग्रेटर दन
0 ठीक है तो ये कंडीशन है कोई भी रिएक्शन
फीजिबल है कि नहीं यह बताने के लिए मुझे e
नो सेल की वैल्यू निकालनी पड़ेगी ठीक है
अब चलो फर्स्ट क्वेश्चन देखते हैं तो देखो
फर्स्ट क्वेश्चन में मेरे पास क्या-क्या
दिया हुआ है मेरे पास दिया हुआ है fe3 प
और i माइन ठीक है अब देखो fe3 प है मतलब
इसमें ऑलरेडी पॉजिटिव चार्ज है तो ये क्या
करने की इसकी पॉसिबिलिटी है ये इलेक्ट्रॉन
गेन कर सकता है गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन मतलब यह
क्या होगा ये रिडक्शन अंडरगो करेगा ठीक है
इलेक्ट्रॉन गेन कर सकता है ये क्योंकि
सबको तो स्टेबल होना है ये ऑलरेडी 3 प्लस
है और इलेक्ट्रॉन लूज कर देगा तो इसका
पॉजिटिव चार्ज और बढ़ जाएगा तो ये ऐसा कुछ
तो करेगा नहीं इधर i माइनस है ठीक है तो i
माइनस है मतलब इसके पास एक्सेस में
इलेक्ट्रॉन है तो ये अमीर आदमी है ये
इलेक्ट्रॉन देना चाहेगा तो इसका टेंडेंसी
क्या रहेगा टू लूज इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन
लूज करेगा तो यहां पर क्या हो रहा होगा
यहां पर हो रहा होगा
ऑक्सीडेशन ठीक है बात समझ में आ गई ओके अब
जो है हम इस टेबल को रेफर करेंगे ठीक है
टेबल को रेफर करके हम देखेंगे कि इन दोनों
के जो इलेक्ट्रोड पोटेंशियल्स हैं उनकी
वैल्यूज क्या है तभी तो हम e न सेल की
वैल्यू निकाल सकते हैं राइट तो यहां से
मुझे ये समझ में आया कि अगर fe3 प जो है
ये अगर इलेक्ट्रॉन को गेन करता है तो यह
क्या बना देगा fe2 प् आ माइनस की अगर बात
करें यह अगर इलेक्ट्रॉन को लूज करता है तो
यह क्या बना देगा
i2 ठीक है अब इन दोनों ही केस में e नो की
वैल्यू क्या
होगी वो मुझे यह टेबल बताएगा तो चलो टेबल
में देखो यहां पर है fe3
प ठीक है तो fe3 प की वैल्यू कितनी है
0.77
आ माइनस की अगर हम बात करें तो इसकी
वैल्यू है
0.54 ठीक है तो अब यहां पर मैं e नॉ सेल
की वैल्यू निकाल सकती हूं नो सेल क्या
होता है e नॉ कैथोड माइनस e न
एनोड कैथोड कौन होगा जहां पर रिडक्शन हो
रहा है यानी कि यह वाला यह हो जाएगा
कैथोड और यह हो जाएगा एनोड
ठीक है तो ये हो जाएगा e नॉ कैथोड दैट इज
0.77 -
0.54 तो ये वैल्यू कितनी आ जाएगी
0.23 तो नो सेल की वैल्यू क्या आ गई है
पॉजिटिव यानी कि ये कंडीशन सेटिस्फाई हो
गई है इसका मतलब यह वाला जो रिएक्शन है
दिस इज
फीजिबल समझ आई बात हमने क्या किया अप्रोच
समझ में आया कि नहीं दैट इज मोर
इंपोर्टेंट ठीक है अप्रोच समझ में आ गया
बहुत बढ़िया देखते हैं प्रॉब्लम नंबर थ्री
तो क्वेश्चन कहता है कि कैलकुलेट
स्टैंडर्ड सेल पोटेंशियल्स ऑफ गलवानिक सेल
इन व्हिच फॉलोइंग रिएक्शंस टेक प्लेस
कैलकुलेट डेल्टा जीी एंड इक्विलियम
कांस्टेंट ऑफ द रिएक्शन ठीक है सबसे पहला
काम क्या करना होगा इस रिएक्शन को देख
केयह पता करना होगा कि ऑक्सीडेशन कहां पर
हो रहा है और रिडक्शन कहां पर हो रहा है
ठीक है अगर हम क्रोमियम की बात करें तो
देखो क्रोमियम स से क्या बन जा रहा है स
से यह बन जा रहा है cr3
प 3 प् बन जा रहा है यानी कि यह तीन
इलेक्ट्रॉन लूज़ कर रहा है लॉस ऑफ
इलेक्ट्रॉन मतलब यहां पर क्या हो रहा है
ऑक्सीडेशन ठीक है ऑक्सीडेशन कहां पर होता
है एनोड में तो इसके e न एनोड की वैल्यू
नोट कर लेंगे हम तो इसके e न अगेन वही
टेबल को ही फॉलो करेंगे और टेबल से हम
देखेंगे कि इसके e न एनोड की वैल्यू है -
0.74
वोल्ट ठीक है अब बात करते हैं कैडमियम की
कैडमियम 2 प्स से चला जा रहा है कैडमियम
पे ठीक है यानी कि ये क्या कर रहा है
इलेक्ट्रॉन गेन कर रहा है यानी कि यहां पर
क्या हो रहा है रिडक्शन रिडक्शन होता है
कैथोड पे तो इसका भी e नॉट कैथोड हम देख
लेंगे टेबल में से और इसकी वैल्यू देखते
हैं हम कितनी है -
0.40 वोल्ट्स ठीक है ये तो अब पिछले
क्वेश्चन में भी ऐसा ही कर रहे थे तो ये
समझने में मुझे नहीं लगता किसी को कोई
दिक्कत है ये क्लियर है यहां तक बहुत सही
अब मुझे क्या करना है अब मुझे इसका डेल्टा
जीी निकालना है डेल्टा जीी निकालने के लिए
मुझे e सेल की वैल्यू निकालनी पड़ेगी राइट
तो सबसे पहले मैं क्या करूंगी e नॉ सेल की
वैल्यू निकालू जो कि होता है e नॉ
कैथोड माइनस e नॉ
एनोड तो ये हो जाएगा -
0.40 माइन - 0.7 4 तो ये हो जाएगा
0.34 वोल्ट्स ये तो e न सेल निकल गया अब
हम डेल्टा g न निकाल सकते हैं व्हिच विल
बी इक्वल टू - n न
सेल ठीक है अब यहां पर n क्या होगा नंबर
ऑफ इलेक्ट्रॉन कितने होंगे दो होंगे क्या
n की वैल्यू अभी तक हमने जितने क्वेश्चन
किए सब जगह दो था बट यहां दो नहीं है
कैडमियम में फोकस करो देखो थ्री और यहां
पे 2 प्लस यानी कि सिक्स इलेक्ट्रॉन की
बात कर रहे हैं हम यहां पर राइट सिक्स
इलेक्ट्रॉन का यहां पर क्या हो रहा है गेन
हो रहा है राइट तो यानी कि n की वैल्यू
यहां पर सिक्स हो जाएगी तो 6 * f की
वैल्यू फैराडे कांस्टेंट 9
6487 * e न सेल दैट इज
0.34 तो इसका वैल्यू आ जाएगा
-196 7 कि जूल पर
मोल ठीक है ये डेल्टा g न की वैल्यू निकल
गई तो चलो कुछ तो निकल गया डेल्टा g न
निकल गया अब मुझे निकालना है इक्विलियम
कांस्टेंट ठीक है इक्विलियम कांस्टेंट
बोले तो केसी कैसे निकालते हैं हम मुझे
पता है कि एट इक्विलियम e सेल की वैल्यू
हो जाती है रो इसीलिए नं इक्वेशन में e नॉ
सेल जो है ये किसके बराबर हो जाता है
2.303 आटी डिवाइड बा
इक्विलियम कांस्टेंट डिस्कस किया था ठीक
है अब यहां पर यह सब कुछ कांस्टेंट है तो
इसकी डायरेक्ट वैल्यू भी हम डाल सकते हैं
चाहे
तो ठीक है लेकिन अभी चाहे तो ना भी डाले
क्यों अभी बताती हूं देखो नॉ सेल को हम
क्या लिख सकते हैं इस वाले एक्सप्रेशन को
देखो और इस एक्सप्रेशन से हम e नो सेल की
जगह क्या लिख सकते हैं डेल्टा जीी न
डिवाइडेड बाय
n माइनस भी रहेगा सो दिस इज इक्वल टू
2.303 आटी डिवाइड बाय nfc.gov.in
e न सेल की वैल्यू भी हमने निकाल रखी थी
तो डायरेक्ट e नट सेल की वैल्यू डाल दो ये
सारी चीजें कांस्टेंट है तो
kc4 की वैल्यू निकाल लोगे जो कि एंटीलॉग
में आएगा क्योंकि लॉग ऑफ
kc4 आपका आएगा 34.4 196 मैं पूरे
कैलकुलेशन नहीं कर रही हूं बच्चों क्योंकि
फिर उससे बहुत सारा टाइम वेस्ट हो जाएगा
तो kc4 हो जाएगा एंटीलॉग ऑफ
34.4 196 अब ये सारी वैल्यूज एग्जैक्ट
वैल्यूज निकालने के लिए आपको लॉग टेबल
देखनी आनी चाहिए अगर आपको कंफ्यूजन है
उसमें तो एक मैंने वीडियो बनाया हुआ है
हाउ टू रीड अ लॉग टेबल लर्न हब चैनल पे तो
जाके आप उस वीडियो को भी देख सकते हो ठीक
है चलो आगे बढ़े तो बच्चों अब हम डिस्कस
करने वाले हैं एक नया टॉपिक व्हिच इज
कंडक्टेंस ऑफ इलेक्ट्रोलिटिक सॉल्यूशंस तो
अब हम इलेक्ट्रोलिटिक सॉल्यूशंस के
कंडक्टेंस के बारे में डिस्कस करेंगे इसको
समझने के लिए कंडक्टेंस का बेसिक्स क्लियर
करना पड़ेगा कंडक्ट केंस वर्ड का मतलब
होता है एबिलिटी टू कंडक्ट कितना हम करंट
कंडक्ट कर सकते हैं दैट इज़ कंडक्टेंस अगर
आप सबको रेजिस्टेंस पता है रेजिस्टेंस तो
हम फिजिक्स में जम के पढ़ते हैं राइट तो
रेजिस्टेंस पता ही होगा तो रेजिस्टेंस
मतलब जो रेजिस्ट करता है करंट को फ्लो
करने से रोकता है दैट इज रेजिस्टेंट
कंडक्टेंस मतलब जो करंट को फ्लो करवाता है
तो एक तरह से आप कह सकते हो कि कंडक्टेंस
जो है वो रेजिस्टेंस का ही अपोजिट है ठीक
है तो चलो समझते हैं कंडक्टेंस तो
कंडक्टेंस को हम रेजिस्टेंस के साथ-साथ
समझते चलेंगे तो और आसानी होगी हम सभी को
पता है कि रेजिस्टेंस क्या होता है जो
करंट के फ्लो को अपोज करें जो करंट के
फ्लो को रोकने की कोशिश करें दैट इज़
रेजिस्टेंस इन एनी इलेक्ट्रिकल सर्किट
रेजिस्टेंस को हम डिनोट करते हैंप r से
इसे हम मेजर करते हैं ओम्स से और अगर हम
इसके रिलेशनशिप की बात करें तो हम देखते
हैं कि रेजिस्टेंस जो है वह हमेशा
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होता है लेंथ ऑफ़
द कंडक्टर से एंड इन्वर्सली प्रोपोर्शनल
होता होता है एरिया से इनफैक्ट हमारे पास
एक मैथमेटिकल रिलेशन होता है r = रो l / a
जहां पर रो क्या होता है रेजिस्टिविटीज
स्पेसिफिक रेजिस्टेंस भी कहा जाता था ठीक
है अब ठीक इन्हीं लाइंस पे हम डिस्कस करने
वाले हैं कंडक्टेंस ठीक है क्योंकि हर चीज
में देखते रहना कंडक्टेंस बस इसका उल्टा
है कंडक्टेंस क्या है एबिलिटी टू कंडक्ट
मतलब ये रोकेगा नहीं करंट को यह तो बल्कि
चाहेगा कि करंट और फ्लो करें सो दैट इज
कंडक्टेंस तो कंडक्टेंस इज इवर्स ऑफ
रेजिस्टेंस इन रेजिस्टेंस का जस्ट उल्टा
है ठीक है तो इसे हम डिनोट करते हैं
कैपिटल g से तो हम कह सकते हैं कि g = 1 /
r ठीक है यानी कि रेजिस्टेंस का इवर्स
यूनिट क्या है कंडक्टेंस का वो भी हम
इवर्स ही कर देते हैं ठीक है तो जैसे
रेजिस्टेंस को हम ओम से मेजर करते हैं इसे
हम मेजर करते हैं ओम इवर्स जिसे कई बार हम
मोह भी पढ़ते हैं यानी कि m मतलब यूनिट को
ही पलट के लिख दिया हमने इसका एक और
अल्टरनेटिव यूनिट है व्हिच इज़ साइमंस
जिसे हम कैपिटल s से डिनोट करते हैं अब
बारी है इसके मैथमेटिकल एक्सप्रेशन की तो
मैथमेटिकली अगर हम देखें तो g दैट इज़
कंडक्टेंस इज इक्वल ट 1 / r उसे हम लिख
सकते हैं 1 / रो a / l ठीक है तो 1 / रो
जो है यानी कि रेजिस्टिविटीज इवर्स है उसे
हमने एक नया टर्म दे दिया कंडक्टिविटी तो
1 बा रो को हम डिनोट करते हैं एक नए लेट
से जिसे हम कहते हैं कप्पा कंडक्टिविटी के
बेसिस पे हम सब्सटेंसस को तीन कैटेगरी में
क्लासिफाई कर सकते हैं कंडक्टर्स
इंसुलेटर्स एंड सेमीकंडक्टर्स कंडक्टर्स
वो होते हैं जिनकी कंडक्टिविटी बहुत हाई
होती है जैसे कि मेटल्स और उनके एलॉयज
इंसुलेटर्स वो होते हैं जिनकी कंडक्टिविटी
बहुत कम होती है वेरी लो कंडक्टिविटी जैसे
कि ग्लास सेरेमिक्स और सेमीकंडक्टर्स नाम
से ही पता चल रहा है कि वो सेमीकंडक्टर
होते हैं यानी कि उनकी जो कंडक्टिविटी की
वैल्यू है वो कहीं ना कहीं कंडक्टर्स और
इंसुलेटर्स के इंटरमीडिएट रेंज में लाई
करती हैं जैसे कि सिलिकन तो अभी बच्चों हम
थोड़ा डिटेल में समझेंगे कि मेटल्स में
कंडक्टेंस कैसे होता है बेसिकली वी विल
टॉक अबाउट मेटलिक कंडक्टेंस मेटलिक
कंडक्टेंस की अगर हम बात करें तो यह
कंडक्टेंस होता क्यों है क्योंकि मेटल्स
के पास ऐसे चार्ज कैरियर्स होते हैं जो
इधर से उधर भाग सके और कौन होते हैं वो
मेटल्स के अंदर मेटल्स के अंदर वो होते
हैं वैलेंस इलेक्ट्रॉन मतलब जो इलेक्ट्रॉन
सबसे आउटर मोस्ट वाली शेल में है जो जिसको
न्यूक्लियस ने कस के पकड़ा हुआ नहीं है
उसे ज्यादा फ्रीडम है तो वो इधर-उधर भागते
रहता है ठीक है अब मान लो अगर मैं एक कॉपर
की चीज की बात करूं मतलब मेरे पास कोई कुछ
भी सामान है एक कॉपर का ठीक है अब उसके
अंदर एक कॉपर का एटम तो होगा नहीं बहुत
सारे ढेर सारे कॉपर के एटम्स होंगे अब इन
ढेर सारे एटम्स में ढेर सारे वैलेंस
इलेक्ट्रॉन होंगे हर एक एटम में उसके
वैलेंस इलेक्ट्रॉन होंगे और ये जो वैलेंस
इलेक्ट्रॉन हैं ये लूजली हेल्ड है इसीलिए
यह क्या होंगे यह मूव करते रहेंगे दे आर
फ्री टू मूव और अगर आप स्क्रीन पर ब बड़े
ध्यान से देखो तो आप देखो कि ये किस तरीके
से मल्टीपल एटम्स के ऊपर से ये जो वैलेंस
इलेक्ट्रॉन हैं ये किस तरह से इनकी
मूवमेंट चलती रहती है एंड ओवरऑल हमें ऐसी
फीलिंग आ रही है कि लेफ्ट से राइट की तरफ
जो है हमारे इलेक्ट्रॉन मूव करते चले जा
रहे हैं एंड दिस फ्लो ऑफ इलेक्ट्रॉन
कॉन्स्टिट्यूशन इलेक्ट्रिक करंट और यहीं
से कंडक्टिविटी की बात होती है यहीं से
कंडक्टेंस की बात होती है राइट तो मेटलिक
कंडक्टेंस जो है ये कई सारे फैक्टर्स पे
डिपेंड करते हैं जैसे कि नेचर ऑफ द मेटल
स्ट्रक्चर ऑफ द मेटल कि भाई वो मेटल कैसा
है उसका स्ट्रक्चर कैसा है नंबर ऑफ वैलेंस
इलेक्ट्रॉन पर एटम जैसे अगर मैं कॉपर की
बात कर तो कॉपर में कितने वैलेंस
इलेक्ट्रॉन हैं तीसरा टेंपरेचर जैसे-जैसे
टेंपरेचर चेंज होता है वैसे-वैसे मेटलिक
कंडक्टेंस भी चेंज होता है कैसे चलो देखें
तो बच्चों हम देखते हैं कि मेटलिक
कंडक्टेंस जो है इट क्रीजस विथ इंक्रीज इन
टेंपरेचर जैसे-जैसे हम टेंपरेचर बढ़ाते
हैं मेटल की जो कंडक्टेंस होती है वह कम
होती जाती है ऐसा क्यों ऐसा इसलिए क्योंकि
लेट्स टॉक अबाउट रूम टेंपरेचर मतलब मान लो
अभी मैंने टेंपरेचर नहीं बढ़ाया तो क्या
कंडीशन है मेटल के अंदर मेटल के अंदर कुछ
ऐसा हो रहा है कि जो वैलेंस इलेक्ट्रॉन
हैं वो मूव कर रहे हैं एंड दे आर काइंड ऑफ
मूविंग इन अ पर्टिकुलर डायरेक्शन एंड
दैट्ची है अब क्या किया मैंने इसे हीट कर
दिया टेंपरेचर बढ़ा दिया बढ़ा दिया बढ़ा
दिया और बढ़ा दिया तो क्या होगा अब जो
एटम्स हैं राइट आई एम टॉकिंग अबाउट एटम्स
अभी तक क्या हो रहा था कि एटम्स सब
करीब-करीब अपनी जगह पर ही थे हल्का-फुल्का
मूव कर रहे थे लेकिन जैसे ही हम हीट करने
लगते हैं तो जो एटम्स है ना वो खुद ही
बहुत रैंडम मूव करने लग जाते हैं तो एटम्स
खुद ही रैंडम मूव कर रहे हैं तो सोच के
देखो अब इन एटम्स के जो वैलेंस इलेक्ट्रॉन
हैं जब वो मूव करने लग रहे हैं तो यार
इतनी हैफ जर्ड मूवमेंट एटम्स की है ना कि
वो इलेक्ट ॉन्स कहीं ना कहीं अंदर ही फंसे
रह जा रहे हैं तो बेसिकली इस केस में हम
ऐसा नहीं नोटिस कर रहे कि इलेक्ट्रॉन एक
तरफ से दूसरी तरफ मूव कर रहा है वैसा
पॉसिबल ही नहीं हो पा रहा है राइट एंड दैट
इज व्हाई कंडक्टेंस जो है टेंपरेचर के
बढ़ने से डिक्रीज हो जा रही है तो बच्चों
अब हम बात करेंगे इलेक्ट्रोलिटिक
कंडक्टेंस के बारे में ठीक है मेटलिक
कंडक्टेंस समझ में आ गया कि मेटल्स में
कैसे होता है कंडक्टेंस अब हम देखेंगे
इलेक्ट्रोलिटिक कंडक्टेंस बोले तो
कंडक्टेंस ऑफ इलेक्ट्रिसिटी जहां पर
कंडक्ट कौन करता है इलेक्ट्रोलाइट या फिर
आयस सॉल्यूशन के जो आयस हैं वो जब
इलेक्ट्रिसिटी को कंडक्ट करते हैं तब हम
उसे कहते हैं इलेक्ट्रोलिटिक कंडक्टेंस तो
इलेक्ट्रोलिटिक जो है ये इलेक्ट्रोलाइट
वर्ड से आया है ठीक है तो इसको समझने के
लिए एक बहुत ही सिंपल साधारण सा एग्जांपल
लेते हैं पानी का वाटर वाटर में क्या होता
है h2o इसमें h+ oh-my-zsh
ठीक है मतलब ये अपने से करंट जो है वो
बहुत कम पास करती है ठीक है लेकिन जैसे ही
इसी वाटर में हम कोई इलेक्ट्रोलाइट ऐड कर
देते हैं जैसे कि सॉल्ट मान लो
यानी कि
नमक तो चलो डाल देते हैं इसके अंदर खूब
सारा
सॉल्ट और आप जो है अपना ध्यान देते रहना
बल्ब के ऊपर क्योंकि सॉल्ट के डालते ही
कुछ मैजिक होने वाला है बल्ब के लाइट की
इंटेंसिटी पर तो देखो मैं इसे स्टेयर कर
रही हूं सॉल्ट को पानी के अंदर और आप देखो
कि जो बल्ब की इंटेंसिटी है ये बहुत
ज्यादा बढ़ गई है लाइट की इंटेंसिटी बहुत
बढ़ गई है ये बहुत तेजी से जल रहा है बल्ब
राइट
तो इसका क्या मतलब हुआ इसका यह मतलब हुआ
कि सॉल्ट जो है वाटर में मिलकर यह
इलेक्ट्रिसिटी को कंडक्ट कर रहा है एंड
एगजैक्टली यही फैराडे जी ने भी कहा था
उन्होंने कहा था कि कुछ सब्सटेंसस ऐसे
होते हैं जो अपने एक्वास सॉल्यूशन में
इलेक्ट्रिसिटी कंडक्ट करते हैं और उन्हें
हम कहते हैं इलेक्ट्रोलाइट सो दिस
एक्सपेरिमेंट शोज दैट सॉल्ट इज एन
इलेक्ट्रोलाइट तो हमने यहां पर क्या देखा
हमने यहां पर देखा कि सॉल्ट ऐड करते ही
कंडक्टिविटी बढ़ गई राइट तो इस तरह के
कंडक्टेंस को हम कहते हैं इलेक्ट्रोलिटिक
कंडक्टेंस और इलेक्ट्रोलिटिक कंडक्टेंस भी
बहुत सारे फैक्टर्स पर डिपेंड करते हैं
जैसे कि नेचर ऑफ द इलेक्ट्रोलाइट जो हमने
ऐड किया जैसे यहां पर हमने सॉल्ट ऐड किया
तो उसका क्या नेचर है नेचर ऑफ द सॉल्वेंट
यहां पर सॉल्वेंट वाटर था तो उसका कैसा
नेचर है साइज ऑफ द आयस अब जैसे अगर सॉल्ट
ऐड किया तो
हो जाते हैं उसपे भी डिपेंड करेगा
कंसंट्रेशन ऑफ द इलेक्ट्रोलाइट यानी कि उस
पूरे सॉल्यूशन में कितना सॉल्ट है बहुत कम
सॉल्ट है ज्यादा पानी है या बहुत ज्यादा
सॉल्ट है कम पानी है तो क्या कंसंट्रेशन
है एंड फाइनली टेंपरेचर तो बच्चों हमने
मेटलिक कंडक्टेंस और इलेक्ट्रोलिटिक
कंडक्टेंस दोनों पढ़ा तो चलो टाइम है एक
क्विक रीकैप और क्विक कंपैरिजन की अगर बात
करते हैं मेटलिक कंडक्टेंस की तो यहां पर
करंट कैरियर्स होते हैं इलेक्ट्रॉन और
वहीं अगर इलेक्ट्रोलिटिक कंडक्टेंस की बात
करें तो वहां पर करंट करियर्स होते हैं
आयस मेटलिक कंडक्टेंस हमें देखने को मिलता
है मेटल्स के केस में इलेक्ट्रोलिटिक
कंडक्टेंस देखने को मिलता है
इलेक्ट्रोलाइट्स के केस में मेटलिक
कंडक्टेंस की अगर बात करें तो टेंपरेचर के
साथ-साथ इनकी जो कंडक्टेंस है वोह कम होती
जाती है और वहीं अगर हम इलेक्ट्रोलिटिक
कंडक्टेंस की बात करें तो टेंपरेचर के
साथ-साथ यह इंक्रीज होती जाती है मेटलिक
कंडक्टेंस की बात करें तो इनकी
कंडक्टिविटी काफी हाई होती है और वहीं
दूसरी तरफ इलेक्ट्रोलिटिक कंडक्टेंस के
केस में कंडक्टिविटी कंपैरेटिव काफी लो
होती है अब एक बहुत अहम सवाल कि किसी भी
आयोनिक सॉल्यूशन का कंडक्टिविटी हम मेजर
कैसे करें कैसे मेजर करें हम उस सॉल्यूशन
का कंडक्टिविटी अब देखो इतनी देर में हमें
इतना तो समझ आ गया कि कंडक्टिविटी
कंडक्टेंस रेजिस्टेंस ये सारे लिंक्ड
चीजें हैं इनमें से किसी एक की भी वैल्यू
अगर हम मेजर कर लेते हैं तो बाकी वैल्यूज
हम अपने आप डिटरमाइंड कर सकते हैं बट सवाल
वही है कि इनमें से कुछ भी हम मेजर करें
तो कैसे करें क्योंकि हमारे सामने दो बहुत
बड़ी प्रॉब्लम्स हमें दिखती हैं क्या मान
लो अगर मैं रेजिस्टेंस कैलकुलेट करना
चाहूं जैसा कि हमने फिजिक्स में पढ़ा है
राइट रेजिस्टेंस हम सर्किट्स की कैसे
कैलकुलेट कर सकते हैं बहुत सारे तरीके हैं
जैसे कि वट स्टोन ब्रिज एक तरीका है अभी
हम वट स्टोन ब्रिज के डिटेल में नहीं
जाएंगे क्योंकि वो हमने फिजिक्स में
ऑलरेडी पढ़ रखा है बट यहां पर प्रॉब्लम
क्या आती है पहली प्रॉब्लम तो यह आती है
कि चूंकि यहां पर हम सॉल्यूशन के साथ डील
कर रहे हैं हैं राइट तो हम डायरेक्ट करंट
उसमें से पास नहीं कर सकते क्योंकि हम
डीसी अगर पास करेंगे तो सॉल्यूशन का
कंपोजीशन ही चेंज हो जाएगा राइट तो इस
प्रॉब्लम का तो चलो एक सॉल्यूशन ये निकल
आता है कि डीसी के बदले में हम यहां पर
अल्टरनेटिंग करंट यानी कि एसी का यूज करते
हैं चलो एक प्रॉब्लम सॉल्व हुआ दूसरी
प्रॉब्लम ये है कि चूंकि हम यहां पर
सॉल्यूशन के साथ डील कर रहे हैं तो यार
तार लगा के ऐसे सर्किट कैसे बनाए वो तो
बना नहीं सकते क्योंकि ये सॉल्यूशन है है
ना तो क्या करें तो यहां पर हम यूज़ करते
हैं एक स्पेशली डिजाइंड वेसल जिसको हम
कहते हैं कंडक्टिविटी सेल तो चलो
कंडक्टिविटी सेल को थोड़ा और डिटेल में
समझते हैं तो कंडक्टिविटी सेल के अंदर हम
डाल देते हैं दो प्लैटिनम के इलेक्ट्रोड्स
जिनको हम प्लैटिनम बैक ब्लैक से कोटिंग कर
देते हैं इन दोनों इलेक्ट्रोड्स को हम कुछ
इस तरीके से अरेंज करते हैं कि इन दोनों
के बीच का डिस्टेंस होता है l और इन दोनों
का क्रॉस सेक्शनल एरिया होता है a ठीक है
तो अब जो इस सेल के अंदर जो सॉल्यूशन है
वो सॉल्यूशन इन दो दोनों इलेक्ट्रोड्स के
बीच वाले जगह में ही कन्फाइंड रहता है
मतलब मान लो यह दो इलेक्ट्रोड्स हैं तो
इनके बीच का जो जगह है इतने से जगह में वो
मेरा पूरा सॉल्यूशन रहेगा ठीक है तो अब
अगर मान लो इस सेटअप के साथ मैं आपको
पूछती हूं कि ये जो पूरा सेटअप है ये कैसा
दिख रहा है एक ऐसे सिलेंडर कल ट्यूब के
जैसा दिख रहा है जिसकी लेंथ है l और जिसका
क्रॉस सेक्शनल एरिया है a तो इसका अगर इस
कॉलम का अगर मुझे रेजिस्टेंस निकालना हो
तो कैसे निकलेगा r = रो l पता है हमें ठीक
है अब मेरा एम क्या है इस सॉल्यूशन का
कंडक्टिविटी निकालना तो इसको कंडक्टिविटी
के फॉर्म में कैसे लिख सकते हैं
कंडक्टिविटी क्या होता है वन बाय
रेजिस्टिविटीज
बा ए है यानी कि इन दोनों इलेक्ट्रोड्स के
बीच का लेंथ और इनका क्रॉस सेक्शन ये जो
रेशियो है इसको हम कहते हैं सेल कांस्टेंट
मतलब कंडक्टिविटी सेल के अंदर यह a / l का
जो रेशियो है यह कांस्टेंट मेंटेन रहता है
इसीलिए इसको हमने एक अलग नाम दे दिया है
सेल कांस्टेंट तो फाइनली एक बार ये
कंडक्टिविटी सेल का कांसेप्ट आ जाने से अब
हम व्ट स्टोन ब्रिज का कांसेप्ट लगा के
इसका रेजिस्टेंस आराम से निकाल सकते हैं
इनफैक्ट और वहीं से हम इस आयोनिक सॉल्यूशन
की कंडक्टिविटी भी निकाल सकते हैं तो वट
स्टोन ब्रिज आई होप सबको पता है क्या होता
है r1 / r2 = r3 / r4 फिजिक्स में यार
बहुत बार ी पढ़ा है तो अगर याद नहीं है तो
आई थिंक यू कैन रेफर द फिजिक्स वीडियोस
ठीक है तो यहां पर हमारा मुद्दा कुछ और है
अब कंडक्टिविटी ऑफ आयोनिक सॉल्यूशन हमने
निकाल लिया इस तरीके से बट उसको ज्यादा
इफेक्टिव बनाने के लिए हमने एक नया टर्म
इंट्रोड्यूस किया यहां पर जिसे हम कहते
हैं मोलर
कंडक्टिविटी तो बच्चों सबसे पहला जो सवाल
हमारे दिमाग में आता है कि मोलर
कंडक्टिविटी को इंट्रोड्यूस कराने की
जरूरत क्यों पड़ी कंडक्टिविटी तो था ही
हमारे पास क्या वह काफी नहीं था व इसलिए
जरूरत पड़ी क्योंकि जो कंडक्टिविटी है
हमने क्या नोटिस किया कि कंडक्टिविटी ऑफ
सॉल्यूशंस ऑफ डिफरेंट इलेक्ट्रोलाइट्स इन
द सेम सॉल्वेंट एट अ गिवन टेंपरेचर डिफर
करता था क्यों क्योंकि आयस के जो चार्ज है
वो अलग है उनके साइज अलग हैं आयस के
कंसंट्रेशन अलग हैं कितनी आसानी से आयस
मूव कर पा रहे हैं वो भी अलग है तो इन
सारी चीजों की वजह से हम नोटिस कर रहे थे
कि इवन दो हम सेम सॉल्वेंट पे एक
पर्टिकुलर टेंपरेचर पे कंडक्ट टिविटी देख
रहे थे बट अलग-अलग सॉल्यूशंस की
कंडक्टिविटी अलग आ रही थी तो हमें लगा
मोलर कंडक्टिविटी विल बी अ गुड आईडिया ठीक
है सो मोलर कंडक्टिविटी को बच्चों हम
डिनोट करते हैं लडा ए से देखो ये लडा
थोड़ा अलग तरीके से लिखा हुआ है इसको ना
कैपिटल लडा हम कहते हैं ठीक है तो इसका
थोड़ा सा मैथमेटिकल एस्पेक्ट देखते हैं
ठीक है अभी तक हमने क्या देखा था कि
रेजिस्टेंस क्या होता है रो ए बा ए ये
सबको पता है ठीक है रेजिस्टेंस क्या होता
है वन बाय कंडक्टेंस कंडक्टेंस और
रेजिस्टेंस एक दूसरे के अपोजिट होते हैं
मतलब इवर्स होते हैं ठीक है तो इसको मैं
क्या लिख सकती हूं 1
अपज सो दिस कैन बी रिटन एस मैं इस रो के
जगह क्या लिख सकती हूं वन बाय कंडक्टिविटी
कंडक्टिविटी को कप्पा से डिनोट करते हैं
एल बा
ए ठीक है यहां तक कोई डाउट कोई डाउट नहीं
है अब चलो बात करते हैं कंडक्टिविटी की
अभी मैं किस कौन से कंडक्टिविटी की बात कर
रही हूं नॉर्मल कंडक्टिविटी जिसे हम कप्पा
से डिनोट करते हैं सो यह कप्पा क्या हो
जाएगा अगर यह रिलेशन को देखो सो कप्पा विल
बी इक्वल टू l डिवाइड बाय
आ यानी कि / r * l बा a अब ये लेंथ बाय
एरिया जो है ना लेंथ बिटवीन द
इलेक्ट्रोड्स और एरिया ऑफ क्रॉस सेक्शन ये
जो रेशियो है इट रिमेंस कांस्टेंट इसीलिए
हम इसे सेल कांस्टेंट भी कहते हैं सो दिस
बिकम इक्वल टू सेल कांस्टेंट डिवाइडेड बाय
r दैट इज
रेजिस्टेंस ठीक यह हो गया मेरा नॉर्मल
कंडक्टिविटी अब बात करते हैं मोलर
कंडक्टिविटी की जैसा कि मैंने मोला बोला
इसे हम लडा ए से डिनोट करते हैं इसे कैसे
डिफाइन करते हैं दिस इज कंडक्टिविटी पर
यूनिट कंसंट्रेशन मतलब मोलर कंडक्टिविटी
मतलब
कंडक्टिविटी फॉर वन मोलर सॉल्यूशन मतलब
सॉल्यूशन का जो कंसंट्रेशन है पर यूनिट
कंसंट्रेशन पे जब हम कंडक्टिविटी बताते
हैं तो उसे हम मोलर कंडक्टिविटी कहते हैं
ठीक है तो अगर कप्पा की बात करो यानी कि
कंडक्टिविटी की तो इसका यूनिट होता है
साइमन मीटर इवर्स कंसंट्रेशन की अगर हम
बात करें तो इसका यूनिट होता है मोल पर
मीटर क्यूब ठीक है कई बार ये कंसंट्रेशन
आपके क्वेश्चन में थोड़ा घुमा के दिया हुआ
रहता है जैसे फॉर एग्जांपल कंसंट्रेशन की
बात करें तो कई बार मोलेरिटी आ जाती है
पिक्चर में सो मोलर क्या होता है नंबर ऑफ
मोल्स पर यूनिट वॉल्यूम राइट बट मोलेरिटी
जब डिफाइन करते हैं तो हम वॉल्यूम को लीटर
में लेते हैं बट यहां पर जो c है ये मीटर
क्यूब में होता है ठीक है तो इसीलिए यह
बात ध्यान रखनी है कि ये मीटर क्यूब और
लीटर के कन्वर्जन के लिए एक 1000 का
फैक्टर आएगा ठीक है तो उस बात को ध्यान
में रखनी है तो बेसिकली ये 1 मोल पर मीटर
क्यूब को आप क्या लिख सकते हो मोलालिटी *
1000 लीटर पर मीटर क
ठीक है तो इस तरीके से हम मोलर
कंडक्टिविटी को पिक्चर में लेकर के आ गए
तो चलो कंडक्टिविटी के कांसेप्ट के ऊपर एक
क्वेश्चन देखते हैं इलेक्ट्रिकल
रेजिस्टेंस ऑफ अ कॉलम ऑफ
0.05 मोल पर लीटर एओ सॉल्यूशन ऑफ डायमीटर
1 सेमी एंड लेंथ 50 सेमी इज 5.55 * 10 टू
पावर 3 ओम्स ठीक है तो यहां पर क्या दिया
हुआ है रेजिस्टेंस की वैल्यू दी हुई है
लेंथ की वैल्यू दी हुई है डायमीटर दिया
हुआ है अब डायमीटर दिया हुआ है तो फिर
क्रॉस सेक्शन एरिया कितना हो जाएगा पा * r
स् दैट इज
1/2 स्क्वायर इतना सेंटीमीटर स्क्वायर
एरिया हो जाएगा अब मुझे निकालना क्या-क्या
है फाइंड आउट करना है रेजिस्टिविटीज
इन सब की वैल्यूज हमें निकालनी है ठीक है
तो एक-एक करके शुरुआत करते हैं सबसे पहले
तो बात करेंगे रेजिस्टिविटीज
r /
l यहां पे रेजिस्टेंस दिया हुआ है
5.55 * 10 टू पावर 3 ओम्स एरिया है पा दैट
इज़ 3.14 * 1/2 को हम लिख सकते हैं
0.5 स् तो ये एरिया हो गया डिवाइडेड बाय
लेंथ दिया हुआ है 50 सेमी अब आप पूछोगे कि
हम यूनिट्स को सेंटीमीटर में क्यों रख रहे
हैं क्योंकि सब कुछ सेंटीमीटर में है
डायमीटर भी सेंटीमीटर में है और लेंथ भी
सेंटीमीटर में है तो हम इसे भी सब कुछ को
सेंटीमीटर में ही छोड़ देते हैं इसे
कैलकुलेट करेंगे तो रो की वैल्यू आएगी
87.325900
87.325900
कंसंट्रेशन कौन से यूनिट में चाहिए मुझे
चाहिए मोल्स पर मीटर क्यूब नहीं मोल्स पर
सेंटीमीटर क्यूब में चाहिए मुझे क्योंकि
यहां पर मैं मीटर के साथ डील नहीं कर रही
हूं सेंटीमीटर के साथ डील कर रही हूं
करेक्ट तो ये आ जाए मुझे ये चाहिए मोल पर
सेंटीमीटर क्यूब के टर्म्स में तो ये
कितना हो जाएगा ये हो जाएगा
0.05 डिवा बा 1000 मोल पर सेंटीमीटर क तो
ये वैल्यू यहां पे डाल देंगे कप्पा की
वैल्यू हो जाएगी
0148 डिवाइडेड बाय कंसंट्रेशन हो जाएगा 05
डिवाइड बा
1000 तो यह वैल्यू आ जाएगी
29.6 साइमन सेंटीमीटर स्क्वायर मोल
इवर्स तो बच्चों यहां पर हम एक बहुत
इंपॉर्टेंट कांसेप्चुअल टॉपिक डिस्कस
करेंगे कि मेरा जो कंडक्टिविटी है व
कंसंट्रेशन के साथ कैसे चेंज होता है ठीक
है मतलब यहां पर हम दो चीजें डिस्कस
करेंगे एक तो कंडक्टिविटी का
और दूसरा मोलर कंडक्टिविटी का वेरिएशन
कंडक्टिविटी बोले तो कप्पा मोलर
कंडक्टिविटी बोले तो लडा ए ठीक है तो
दोनों की वेरिएशन देखेंगे एंड वेरी
इंटरेस्टिंग हम ये देखते हैं कि जो कप्पा
है यानी कि जो कंडक्टिविटी है चाहे वीक
इलेक्ट्रोलाइट हो चाहे स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट हो दोनों के ही केस में
जैसे-जैसे कंसंट्रेशन बढ़ेगा वैसे-वैसे
कंडक्टिविटी बढ़ेगा जैसे-जैसे कंसंट्रेशन
घटेगा वैसे-वैसे कंडक्टिविटी घटेगा लेकिन
जैसे ही हम मोलर कंडक्टिविटी की बात करते
हैं यानी कि लडा m वहां पर हम देखते हैं
कि जैसे-जैसे कंसंट्रेशन बढ़ता है
वैसे-वैसे मोलर कंडक्टिविटी घटता है
जैसे-जैसे कंसंट्रेशन घटता है वैसे-वैसे
मोलर कंडक्टिविटी बढ़ता है अब यहां पर
बहुत से बच्चों के दिमाग में ये क्वेश्चन
आ रहा होगा कि ऐसा क्यों कंडक्टिविटी और
मोलर कंडक्टिविटी का जो वेरिएशन है
कंसंट्रेशन के साथ वो बिल्कुल अपोजिट जा
रहा है तो इसी को अब हम समझेंगे डिटेल में
वन आफ आफ्टर अनदर तो बच्चों अब सबसे पहले
हम देखेंगे कंडक्टिविटी का वेरिएशन विद
कंसंट्रेशन तो सबसे पहले तो यह देख लो कि
कैसे वैरी करता है कंडक्टिविटी
कंडक्टिविटी बोले तो कप्पा कप्पा जो है यह
कंसंट्रेशन के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल
होता है यानी कि अगर कंसंट्रेशन बढ़ेगा तो
कंडक्टिविटी बढ़ेगा कंसंट्रेशन घटेगा
कंडक्टिविटी घटेगा एंड दिस इज ट्रू फॉर
बोथ स्ट्रांग एंड वीक इलेक्ट्रोलाइट्स
दोनों स्ट्रांग और वीक इलेक्ट्रोलाइट्स के
लिए ये ट्रू है ठीक है अब देखना ये है कि
ऐसा क्यों होता है ठीक है जब मैं कहती हूं
कि कंसंट्रेशन बढ़ रहा है किसका
कंसंट्रेशन बढ़ रहा है मतलब उस सॉल्यूशन
का जो आयस है उनका कंसंट्रेशन बढ़ रहा है
मान लो मैं बात करती हूं पानी में मैंने
सॉल्ट डाला अब अगर मैं सॉल्ट और डालती
जाऊं तो क्या हो रहा है उस सॉल्यूशन के
अंदर na0
जदा लोग हैं जो करंट को कैरी कर सके
ज्यादा लोग हैं तो ज्यादा करंट कैरी
करेंगे तो मेरी ओबवियसली कंडक्टिविटी
बढ़ेगी राइट सिंपल सा लॉजिक है ठीक है तो
समझना यह है कि जो कप्पा होता है जो
कंडक्टिविटी होता है यह डिपेंड करता है
नंबर ऑफ आयस पर यूनिट वॉल्यूम पे कि एक
पर्टिकुलर वॉल्यूम में कितने आयस हैं जो
करंट को कैरी कर सके वो उसी पे डिपेंड
करता है तो अगर आप कंसंट्रेशन बढ़ाते
जाओगे तो कंडक्टिविटी बढ़ेगा कंसंट्रेशन
घटा दोगे कंडक्टिविटी भी घट जाएगा ठीक है
सिंपल था यहां तक अब हम इसी चीज को थोड़े
दूसरे ढंग से देखेंगे अब हम कंसंट्रेशन की
बात नहीं करेंगे हम बात करेंगे किसकी
डाइल्यूशन की अब मैं ऐसे कहूंगी कि मान लो
मैंने डाइल्यूशन बढ़ा दिया मतलब मैंने एक
सॉल्यूशन को और ज्यादा डाइल्यूट कर दिया
उसमें और ज्यादा सॉल्वेंट ऐड कर दिया तब
क्या होगा तो अभी जो है मैं क्या कर रही
हूं मैं उसमें आयस ऐड नहीं कर रही हूं
मतलब जो काम करने वाले लोग थे ना उनको ऐड
नहीं कर रही हूं मैं उसमें बल्कि सॉल्वेंट
ऐड कर दे रही हूं उससे क्या होगा जो नंबर
ऑफ आयस पर यूनिट वॉल्यूम है वो घट जाएगा
क्योंकि वॉल्यूम बढ़ जा रहा है बट आयस तो
उतने ही हैं तो पर यूनिट वॉल्यूम नंबर ऑफ
आयस कम हो गए कैसे ये देखो मान लो मेरे
प्लास यह ग्लास है जिसमें इतना थोड़ा सा
पानी है और मैंने इसके अंदर देखो चार चने
डाल दिए हैं ठीक है सो कंसीडर देम एज
पार्टिकल्स तो फोर पार्टिकल्स हैं अभी
मेरे पास इस पानी में ठीक है देखो कुछ
समझाने के लिए बता रही हूं यह मैं अब
मैंने क्या किया कि इसमें मैंने थोड़ा सा
और पानी ऐड कर दिया तो मैंने इसको क्या
किया और डाइल्यूट बना दिया तो डाइल्यूट कर
देने के बाद क्या हुआ अभी भी इसमें
पार्टिकल्स चार ही हैं बट पर यूनिट
वॉल्यूम मेरा पार्टिकल क्या हो गया और कम
हो गया पहले इतने से पानी में चार
पार्टिकल था अब इतना पानी में भी चार ही
पार्टिकल है सो नंबर ऑफ़ आयस पर यूनिट
वॉल्यूम क्या हो गया कम हो गया और
कंडक्टिविटी यानी कि कप्पा किस पे डिपेंड
करता है नंबर ऑफ आयस पर यूनिट वॉल्यूम
चूंकि वो कम हो गया तो डाइल्यूशन पे
कंडक्टिविटी भी कम हो जाएगा तो एक तरीके
से हम यह कंक्लूजन
सेंट्रेशन बढ़ेगा तो कंडक्टिविटी बढ़ेगा
कंसंट्रेशन घटेगा कंडक्टिविटी घटेगा
डाइल्यूशन के टर्म्स में बात करेंगे तो
डाइल्यूशन बढ़ेगा तो कंडक्टिविटी घटेगा
डाइल्यूशन घटेगा तो कंडक्टिविटी बढ़ेगा तो
हम कह सकते हैं कि डाइल्यूशन और
कंसंट्रेशन ये दोनों जो है इन्वर्सली
प्रोपोर्शनल है मतलब कभी भी सॉल्यूशन को
डाइल्यूट कर रहे हैं इसका मतलब उसमें हम
पानी ऐड करते चले जा रहे हैं तो उस
सॉल्यूशन का कंसंट्रेशन कम होता चला जा
रहा है राइट यहां तक क्लियर है अमेजिंग अब
यहां पर हम स्पेसिफिकली डिस्कस करेंगे
स्ट्रांग और वीक इलेक्ट्रोलाइट को ठीक है
तो अगर हम इसे ग्राफिकली देखें तो देखो
स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट और वीक
इलेक्ट्रोलाइट दोनों का ही जो ग्राफ है वो
साफ-साफ बता रहा है कि कंसंट्रेशन
जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे कंडक्ट
विटी बढ़ रही है कंसंट्रेशन घट रहा है
कंडक्टिविटी घट रही है बट दोनों ग्राफ में
हमें एक फर्क दिख रहा है और वह है दोनों
ग्राफ का स्लोप में फर्क है स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट्स के केस में हम देख रहे
हैं बड़ी तेजी से बढ़ रहा है या बड़ी तेजी
से घट रहा है जैसे भी आप कह लो मतलब अगर
हम डिक्रीज इन कंसंट्रेशन की बात करें तो
हम देखते हैं जैसे-जैसे कंसंट्रेशन कम हो
रहा है वैसे-वैसे कंडक्टिविटी कम हो रही
है बड़ी तेजी से इन केस ऑफ स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट ठीक है ऐसा क्यों ओबवियसली
जब हम डाइल्यूट कर देते हैं कंसंट्रेशन कम
हो जाता है तो नंबर ऑफ आयस पर यूनिट
वॉल्यूम कम हो जाता है इसीलिए कंडक्टिविटी
कम हो जाती है ठीक है तो यह तो समझ आ गया
सोचने वाली बात है कि वीक इलेक्ट्रोलाइट
के केस में यह जो डिक्रीज है यह धीरे-धीरे
क्यों हो रहा है जब आप कंसंट्रेशन को कम
कर रहे हो तो यह धीरे-धीरे क्यों कम हो
रहा है वो इसलिए क्योंकि वीक
इलेक्ट्रोलाइट क्या होता है वीक
इलेक्ट्रोलाइट स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट की
तरह कंपलीटली डिसोसिएट नहीं करते हैं जो
स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वो पूरी
तरह से खुद से डिसोसिएट कर जाते हैं अपने
आयस में बट वीक इलेक्ट्रोलाइट के केस में
ऐसा नहीं होता है जैसे मान लो अगर हम एक
वीक एसिड का एग्जांपल ले एसिटिक एसिड
ch3cooh ये खुद से पूरा h+ और ch3coo -
में डिसोसिएट नहीं करता है जब हम इसे
डाइल्यूट कर देते हैं डाइल्यूशन जब इसका
होता है तो क्या होता है इसका जो
डिसोसिएशन है वो भी इंक्रीज होने लगता है
पहले ये खुद से टूट नहीं रहे थे बट अब
पानी में लाने से क्या हो रहा है ये टूटने
भी लग जा रहे हैं तो यहां पर क्या हो रहा
है इले वीक इलेक्ट्रोलाइट के केस में
डाइल्यूशन होने पर मेरे जो नंबर ऑफ आयस
हैं वो पहले से थोड़े बढ़ जा रहे हैं
हालांकि ओवरऑल नंबर ऑफ आयस पर यूनिट
वॉल्यूम यहां पर भी रिड्यूस हो रहा है
क्योंकि जब हम डाइल्यूट कर देते हैं तो
वॉल्यूम को भी हम बहुत ज्यादा बढ़ा देते
हैं राइट क्योंकि एकदम से वॉल्यूम बढ़
जाता है सॉल्यूशन का सो नेट नेट तो यहां
पर भी नंबर ऑफ आयस पर यूनिट वॉल्यूम
डिक्रीज ही हो रहा है इसीलिए नेट नेट यहां
पर कंडक्टिविटी डिक्रीज ही हो रही है बट
उतनी तेजी से डिक्रीज नहीं हो रही है
जितनी तेजी से यह स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट
के केस में डिक्रीज हो रही थी तो अब ये
क्लियर हो जाने के बाद हमें अब देखना है
कि मोलर कंडक्टिविटी का वेरिएशन कैसे होता
है पहले तो ये समझो मोलर कंडक्टिविटी क्या
होता है मोलर कंडक्टिविटी बोले तो
कंडक्टिविटी पर यूनिट मोलर सॉल्यूशन मतलब
जब हम ये अज्यू करके चल रहे हैं कि उस
सॉल्यूशन के अंदर 1 मोल ऑफ सॉल्यूट है ठीक
है यहां पर जो इंटरेस्टिंग चीज हमें देखने
को मिलती है वह यह है कि यहां पे बिल्कुल
अपोजिट होता है कंसंट्रेशन जैसे-जैसे
बढ़ता है मोलर कंडक्टिविटी वैसे-वैसे
डिक्रीज होती है कंसंट्रेशन जैसे-जैसे
घटता है मोलर कंडक्टिविटी वैसे-वैसे
इंक्रीज होती है तो अब यह बहुत ही एक
इंटरेस्टिंग सा अ फैक्ट है तो इसे समझना
बहुत जरूरी है कि ऐसा क्यों होता है तो
चलो देखते हैं तो बच्चों अब हम इसे
ग्राफिकली देखेंगे फॉर स्ट्रांग एंड वीक
इलेक्ट्रोलाइट्स अगर आप स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट का ग्राफ देखो तो आप क्या
देखोगे कि जो मोलर कंडक्टिविटी है वो
डाइल्यूशन के साथ-साथ इंक्रीज हो रही है
लेकिन बहुत धीरे-धीरे स्लोली इंक्रीज हो
रही है वहीं अगर आप वीक इलेक्ट्रोलाइट के
ग्राफ पे फोकस करो तो आप देखोगे जैसे-जैसे
डाइल्यूशन हो रहा है तो ग्राफ जो है ना
मोलर कंडक्टिविटी जो है ये बहुत रैपिड
इंक्रीज हो रही है राइट तो ऐसा क्यों हो
रहा है ये वेरिएशन क्यों है चलो समझते हैं
सबसे पहले बात करेंगे हम स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट के केस में और इसी के दौरान
हम डिस्कस करेंगे एक बहुत इंपॉर्टेंट लॉ
जिसे हम कहते हैं कॉल रस्ट लॉ तो बच्चों
अभी-अभी मैंने बताया था थोड़ी देर पहले कि
मोलर कंडक्टिविटी जो है यह क्या होता है
कंडक्टिविटी पर यूनिट कंसंट्रेशन कप्पा
बाय सी ठीक है अब देखो थोड़ा ध्यान से
देखो कि यह कंसंट्रेशन क्या होता है
कंसंट्रेशन बोले तो नंबर ऑफ मोल्स ऑफ याद
है सॉल्यूशन वाले चैप्टर में पढ़ा था नंबर
ऑफ मोल्स ऑफ सॉल्यूट डिवाइडेड बाय वॉल्यूम
पर यूनिट वॉल्यूम जैसे मोलेरिटी वगैरह भी
हम देखते हैं ना कंसंट्रेशन मेजर करने के
लिए अब यहां पर हम बात कर रहे हैं वन मोलर
सॉल्यूशन की तो अगर मैं वन मोलर सॉल्यूशन
की बात कर रही हूं तो मैं यह कहना चाहती
हूं कि मेरा कंसंट्रेशन ऐसा होना चाहिए कि
वन मोलर ऑफ सॉल्यूट तो नंबर ऑफ मोल्स मेरा
वन है पर यूनिट वॉल्यूम ऑफ द सॉल्यूशन ठीक
है सो विद दिस लॉजिक लडा ए जो कि मोलर
कंडक्टिविटी है उसको मैं क्या लिख सकती
हूं कप्पा * 1 बा c की जगह मैं v लिख सकती
हूं तो ये हो जाएगा कप्पा * v अब ये जो
रिलेशन है ना यह बहुत इ ट है यहां पर इस
कॉन्टेक्स्ट में जब हम मोलर कंडक्टिविटी
के वेरिएशन को समझने की कोशिश कर रहे हैं
ठीक है अब इसके वेरिएशन को समझेंगे तो लेट
अस सपोज कि मैं पहले सिनेरियो की बात कर
रही हूं जब हम डाइल्यूशन इंक्रीज कर रहे
हैं ऑन डाइल्यूशन यानी कि ऑन डाइल्यूशन का
मतलब क्या होता है कि हम एक सॉल्यूशन में
उसका सॉल्वेंट बढ़ाते चले जा रहे हैं सो
डाइल्यूशन बढ़ाने का मतलब किसके बराबर
होता है कंसंट्रेशन को घ घ घटाने के बराबर
होता है यानी कि उसमें जो सॉल्यूट है उसका
कंसंट्रेशन घटता जा रहा है क्योंकि मैं
उसमें पानी ज्यादा मिलाते जा रही हूं राइट
तो यानी कि हम इसे जब डाइल्यूट ज्यादा कर
रहे हैं तो इन अ वे हम कह रहे हैं कि इसका
कंसंट्रेशन जो है उस सॉल्यूशन का जो
कंसंट्रेशन है दैट इज डिक्रीजिंग ठीक है
तो डाइल्यूट करने पे होगा क्या अब देखो
डाइल्यूट करने पे मेरा वॉल्यूम तो फॉर
श्यर इंक्रीज होगा क्योंकि मैं उसमें और
सॉल्वेंट मिला रही हूं तो वॉल्यूम फॉर
श्यर इंक्रीज हो रहा है कप्पा के साथ क्या
हो रहा है कंडक्टिविटी अभी-अभी डिस्कस
किया था थोड़ी देर पहले नॉर्मल
कंडक्टिविटी का वेरिएशन तो हम लोग डिस्कस
कर चुके हैं राइट तो उसमें हमने क्या देखा
था कि जब हम इसको डाइल्यूट कर देते हैं तो
चूंकि कंसंट्रेशन कम हो जाता है तो नंबर
ऑफ आयस पर यूनिट वॉल्यूम कम हो जाता है तो
इसीलिए कप्पा भी कम हो जाता है
कंडक्टिविटी कम हो जाती है राइट तो देखो
यहां पर एक दुविधा आ गई कि यार ये जो मोलर
कंडक्टिविटी है ये मोलर कंडक्टिविटी किसके
किसके ऊपर डिपेंड करता है है कप्पा और v
पे अब यहां पे हो क्या रहा है डाइल्यूशन
बढ़ाने पे कप्पा घट रहा है और वॉल्यूम बढ़
रहा है तो भाई मोलर कंडक्टिविटी के साथ
क्या होगा यह घटेगा कि बढ़ेगा क्योंकि ये
दो चीजों पे डिपेंड करता है एक बढ़ रहा है
और एक घट रहा है तो यहां पर ये डिसीजन
लेने के लिए हमने एक्सपेरिमेंटल रिजल्ट्स
का यूज किया तो एक्सपेरिमेंटली ऐसा पाया
गया है कि जो वॉल्यूम का इंक्रीज करने का
जो ये फैक्टर है दिस इज मोर इफेक्टिव ठीक
है मतलब ये ये डिसाइडिंग फैक्टर है मतलब
वॉल्यूम जो है वो ज्यादा बढ़ रहा है
कंपेयर्ड टू जितना कि इसका कप्पा घट रहा
है इन अ वे ठीक है तो मतलब ये मेरा डिसीजन
मेकर है ये v जो बढ़ रहा है यही मेरा क्या
है डिसीजन मेकर
है ये डिसीजन मेकर है इसका मतलब है कि
यहां पर v अगर बढ़ रहा है तो इसका मतलब
यहां पर मोलर कंडक्टिविटी क्या होगा
बढ़ेगा ठीक है तो इसका मतलब हमने क्या
देखा यहां पर जब हम डाइल्यूशन बढ़ा रहे
हैं यानी कि जब हम कंसंट्रेशन को घटा रहे
हैं तो उस समय मोलर कंडक्टिविटी जो है वो
इंक्रीज हो रही है ठीक है ठीक उसी तरह से
जब हम डाइल्यूशन को कम करेंगे यानी कि
कंसंट्रेशन को बढ़ाएंगे तो उस समय मोलर
कंडक्टिविटी कम हो जाएगी तो चलो अब
स्पेसिफिकली बात करते हैं ग्राफ की फॉर
स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट्स तो अगर स्ट्रांग
इलेक्ट्रोलाइट के ग्राफ को देखें हम ध्यान
से जैसे यहां पर ये केसी स्ट्रंग
इलेक्ट्रोलाइट तो इसके ग्राफ को अगर तुम
देखो तो कैसा है ग्राफ इट इज अ स्ट्रेट
लाइन ठीक है बट एट द सेम टाइम हम क्या देख
रहे हैं कि ग्राफ हमें यह बता रहा है कि
जो लडा ए है जो मोलर कंडक्टिविटी है इट
इंक्रीजस स्लोली विद डाइल्यूशन डाइल्यूशन
मतलब देखो ये जो एक्स एक्सिस है इसके
अबाउट हमने क्या दिया है सी यानी कि
कंसंट्रेशन ठीक है डाइल्यूशन इंक्रीज हो
रहा है मतलब कंसंट्रेशन घट रहा है ठीक है
तो देखो जैसे-जैसे कंसंट्रेशन घट रहा है
या फिर डाइल्यूशन इंक्रीज हो रहा है तो
क्या हो रहा है इसकी जो वैल्यू है यह बढ़
तो रही है ओबवियसली मोलर कंडक्टिविटी बढ़
रही है विथ डाइल्यूशन मतलब इस तरफ जाओ तो
सी इज इंक्रीजिंग कंसंट्रेशन इंक्रीजस
इसका मतलब अगर इस तरफ आओगे तो क्या होगा
डाइल्यूशन बढ़ रहा है तो जैसे-जैसे
डाइल्यूशन को बढ़ा रहे हैं वैसे-वैसे मोलर
कंडक्टिविटी बढ़ रही है लेकिन स्लोली बहुत
रैपिड नहीं बढ़ रही है ठीक है अब ये जो
ग्राफ है ना ग्राफ का अगर हम एग्जैक्ट
रिलेशन देखें जिसके बेसिस पर यह ग्राफ
बनाया गया है तो व रिलेशन कुछ ऐसा कहता है
कि ल m इ इक्व ट कि लन m - ए ू पावर
1/2 ठीक है तो अगर इस इक्वेशन को थोड़ा
ज्यादा ध्यान से देखो तो यह इक्वेशन किस
फॉर्मेट में है y = mx3 वाले फॉर्मेट में
है ठीक है जहां पर c की वैल्यू क्या है ल
m0 है और y =
mx8 लाइन और इसीलिए देखो ग्राफ भी हमें
कैसा मिला है एक स्ट्रेट लाइन मिला है तो
c की वैल्यू न है और m यानी कि स्लोप की
वैल्यू कितनी है यहां पर स्लोप की वैल्यू
है -
ए नेगेटिव स्लोप इसीलिए देखो जो लाइन है
ना वो यूं घट रही है गिरते जा रही है
क्योंकि इसका नेगेटिव स्लोप है ठीक है बात
समझ में आई तो ये तो है इसका इक्वेशन अब
इस इक्वेशन के अंदर कुछ चीजें हैं जो हमें
नहीं पता कि वो क्या है जैसे कि एक तो यह
कांस्टेंट ए यह कांस्टेंट ए क्या है चलो
समझते
हैं तो यह ए जो है यह एक कांस्टेंट है
जिसकी वैल्यू डिपेंड करती है
इलेक्ट्रोलाइट पे सो इट इज अ कांस्टेंट
दैट डिपेंड्स ऑन द टाइप ऑफ इलेक्ट्रोलाइट
कि इसकी वैल्यू कितनी होगी ये
इलेक्ट्रोलाइट के ऊपर डिपेंड करेगा बोलने
का मतलब है कि अह इलेक्ट्रोलाइट जैसे
इलेक्ट्रोलाइट क्या है जैसे
naclo4 की बात कर रहे हैं तो वह एंड ऑफ़ द
डे तो वह डिसोसिएट होगा राइट तो जैसे मेरे
पास अलग-अलग टाइप के इलेक्ट्रोलाइट्स हो
सकते हैं जैसे
naclo4 टाइप के इलेक्ट्रोलाइट्स हो सकते
हैं ठीक है और देखो यह सारे अलग-अलग टाइप
के इलेक्ट्रोलाइट है मतलब अगर मैं
naclo3 की बात करूं तो ये ca2 प और
cl-1 टाइप इलेक्ट्रोलाइट कहेंगे अगर मैं
mgso4 की बात करूं तो ये कैसे टूटेगा mg2
+ so4 2 - तो यानी कि ये टूट टाइप ऑफ
इलेक्ट्रोल लाइट है तो इस तरीके से बेस्ड
ऑन की इसके कैटालन और एनायत कैसे चार्जेस
हैं डिसोसिएशन होने पे उसके बेसिस पे हम
उस इलेक्ट्रोलाइट को अलग-अलग टाइप में
कैटेगरी इज करते हैं ठीक है जैसे यहां पर
मैंने 1 2 1 2 2 टाइप इलेक्ट्रोलाइट्स में
कैटेगरी इज किया ठीक है अब वन वन टाइप के
जितने भी इलेक्ट्रोलाइट्स होंगे इन सब की
एक ही वैल्यू सेम होगी 21 टाइप के जितने
भी इलेक्ट्रोलाइट्स होंगे इन सबके a की
वैल्यू सेम होगी उसी तरह टूटू टाइप के
जितने भी इलेक्ट्रोलाइट्स होंगे उन सबके
लिए ए की वैल्यू बराबर
होगी ठीक है तो यह इंफॉर्मेशन थी इस
कांस्टेंट ए के बारे में ओके चलो यह भी
समझ आया अब बात करेंगे हम एक और नई चीज के
बारे में जो कि है लडा न अब यह भी कुछ नया
सा दिख रहा है ये लन क्या है लडा एन पता
है क्या है ये है लिमिटिंग मोलर
कंडक्टिविटी या फिर टिंग वैल्यू ऑफ मोलर
कंडक्टिविटी तो यह है
लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी अब ये लिमिटिंग
मोलर कंडक्टिविटी का क्या कांसेप्ट है
इसका ये कांसेप्ट है कि जब सी की वैल्यू
लगभग जीरो के बराबर पहुंच जाए मतलब ये
कंसंट्रेशन जब एकदम घटते घटते घटते घटते
घटते क्लोज टू जीरो आ जाए इसका मतलब है
कंसंट्रेशन क्लोज टू जीरो आ गया है इसका
मतलब इसको हमने
दिया है मतलब उसमें हमने इतना ज्यादा पानी
डाल दिया है कि उसमें सॉल्यूट अब नाम के
वास्ते रह गया है ठीक है तो c टेंड्स टू
जीरो का मतलब है कि वो इंफाइटिंग
तो मोलर कंडक्टिविटी की जो वैल्यू है वो
एक पर्टिकुलर वैल्यू आएगी देखो ये ग्राफ
को अगर देखो तो ये जो वैल्यू है ना मोलर
कंडक्टिविटी की व्हिच करेस्पॉन्ड्स टू सी
टेंडिंग टू जीरो इस वैल्यू को हम कहते हैं
है लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी इक्वेशन के
टर्म्स में समझो जब c की वैल्यू जीरो हो
जाएगी तो यह पूरा टर्म जीरो हो जाएगा तो
उस केस में देखो व्हेन c जो है ये लगभग
जीरो हो जाएगा तो उस केस में मोलर
कंडक्टिविटी की वैल्यू हो जाएगी लडा नॉट
राइट सो मोलर कंडक्टिविटी की जो ये
लिमिटिंग वैल्यू है जब
इनफाइनों हम लडा m0 से डिनोट करते हैं ठीक
है जब
इनफाइकिल में प्रैक्टिकली उस समय क्या
होता है सो प्रैक्टिकली उस टाइम पर क्या
हो जाता है हमने चूंकि इतना ज्यादा
डाइल्यूट कर दिया है कि उसके अंदर के जो
आयस थे जो कैटा एंस और
एनायत से बहुत दूर चले गए हैं बहुत ज्यादा
डाइल्यूट कर देने से वही होगा बहुत ज्यादा
डाइल्यूट कर दिया है और उसमें दो चार आयस
पड़े हुए हैं एक दूसरे से बहुत दूर है तो
चूंकि वो इतने दूर है दैट दे स्टार्ट
कंट्रीब्यूटिंग
इंडिपेंडेंटली ठीक है तो यही होता है एट
इंफाइटिंग
है
कलरशो नाम के साइंटिस्ट ने यह जो ईम नॉट
की वैल्यू है लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी
की जो वैल्यू है इसको ऑब्जर्व किया बहुत
सारे स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए और
उन्होंने एक रेगुलेरिटी नोटिस किया एक
पैटर्न ऑब्जर्व किया और इसी ऑब्जर्वेशन के
ऊपर बेस करके उन्होंने अपना लॉ निकाला
जिसे हम कहते हैं कॉलर लॉ ऑफ इंडिपेंडेंट
माइग्रेशन ऑफ आयस तो चलो देखते हैं यह लॉ
क्या है
कॉलरशिप मोलर कंडक्टिविटी ऑफ एन
इलेक्ट्रोलाइट इज इक्वल टू द सम ऑफ द
लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटीज ऑफ द
एनायुम का मतलब है कि किसी भी
इलेक्ट्रोलाइट का लेट अस सपोज
है उसका लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी प्लस
इसके जितने एना आयस हैं उनका लिमिटिंग
मोलर कंडक्टिविटी इन दोनों का सम जो है वो
इस इलेक्ट्रोलाइट का लिमिटिंग मोलर
कंडक्टिविटी होगा अगर हम किसी ऐसे
इलेक्ट्रोलाइट की बात कर रहे हैं जिसके
अंदर लेट्स से न्यू प्लस नंबर ऑफ कटाय हैं
न्यू माइनस नंबर ऑफ एनायतो उसका जो
लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी होगा वो कितना
होगा टोटल लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी ऑफ द
कटाय यानी कि न्यू प् मल्टीप्ला बाय लड नॉ
प् मतलब एक-एक कटाय का जो लिमिटिंग मोलर
कंडक्टिविटी है मल्टीप्ला बाय द टोटल नंबर
ऑफ कटाय उसी तरीके से टोटल नंबर ऑफ
एनायुम नॉ माइनस और इन दोनों का सम जो है
दैट विल बी द लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी
ऑफ द इलेक्ट्रोलाइट अब यहां पे न्यू लडा
यूज़ हो रहा है बोलके क कॉम्प्लिकेटेड लग
रहा है है बट कुछ कॉम्प्लिकेटेड है नहीं
बोलने का मतलब है जितने उसमें कटाय है
जितने उसमें
अनायर कंडक्टिविटी को उन सबके लिमिटिंग
मोलर कंडक्टिविटी को जब आप ऐड करोगे तब
आपको उस इलेक्ट्रोलाइट का लिमिटिंग मोलर
कंडक्टिविटी मिल जाएगा अब बात करने वाले
हैं हम वीक इलेक्ट्रोलाइट्स के बारे में
तो वीक इलेक्ट्रोलाइट्स का अगर हम ग्राफ
देखें तो हम क्या देखते हैं इंफाइटिंग
इज ऑलमोस्ट जीरो उस केस में देखो ग्राफ
कहां जा रहा है बिल्कुल ऊपर चला जा रहा है
तो उस केस में मेरा जो लिमिटिंग मोलर
कंडक्टिविटी की जो वैल्यू है दैट इज लाइक
वेरी हाई बहुत हाई वैल्यू है वो राइट अब
इंफाइटिंग
हैं मतलब उसमें हमने खूब सारा सॉल्वेंट
डाल दिया है तो क्या हो गया है वो कंप्लीट
डिसोसिएट हो चुका होगा बाय द टाइम इट इज
इंफाइटिंग
मुझे अगर इसके लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी
की वैल्यू निकालनी है इट इज वेरी डिफिकल्ट
टू फाइंड मेजर इट एक्युरेटली और यहीं पर
हम फिर से
कॉलरशिप मोलर कंडक्टिविटी की वैल्यू
निकालते हैं मान लो हम किसी वीक
इलेक्ट्रोलाइट का एग्जांपल लेते हैं लेट
अस टॉक अबाउट
ch3cooh दैट इज एसिटिक एसिड ठीक है ये एक
वीक इलेक्ट्रोलाइट है हालांकि जब ये
डिसोसिएट करेगा तो ये क्या बनाएगा ch3coo
- + h+ लेकिन चूंकि ये वीक है इसीलिए यह
खुद से पूरी तरह से डिसोसिएट करता नहीं है
ठीक है तो मान लो इनिशियली अगर मैंने इसका
कंसंट्रेशन c रखा इसका रो और इसका
रो तो कुछ टाइम के बाद क्या होगा यह थोड़ा
डिसोसिएट कर जाएगा तो ये c * 1 - लडा हो
जाएगा एजूमिन लैडा मेरा डिसोसिएशन
कांस्टेंट है डोंट आस्क में दीज क्वेश्चंस
कि ये कहां से आ रहा है कांसेप्ट ये सब
हमने इक्विलियम में पढ़ रखा है यहां पर
मैं एक क्विक रीकैप करा रही हं हो ताकि
वीक इलेक्ट्रोलाइट्स वाला केस आपको समझ आए
ठीक है तो कुछ टाइम के बाद ये जितना
डिसोसिएट कर जाएगा जैसे इसमें कितना घटा
ये पहले c था अब ये c - c अल्फा हो गया तो
ये जो माइनस c अल्फा इसमें से हुआ वो c
अल्फा इधर जाके ऐड होगा इन सबका उतना ही
बढ़ जाएगा आयोनिक कंसंट्रेशन ठीक है अब
चूंकि ये इक्विलियम पर है तो इसका
इक्विलियम कांस्टेंट क्या हो जाएगा c
अल्फा * स अल्फा दैट मींस कंसंट्रेशन ऑफ
ऑफ द प्रोडक्ट्स डिवाइडेड बाय c माइ स अफ
तो इसे हम लिख सकते हैं c स् अल्फा स्क्वा
डिवाइड बा c * 1 - अल्फा तो c और c कैंसिल
हो गया तो ये हो जाएगा c अल्फा स्क्वा
डिवाइडेड बाय 1 - अल्फा तो यहां पर अल्फा
क्या है अल्फा है डिग्री ऑफ डिसोसिएशन ठीक
है और सी यहां पर क्या है सी है
कंसंट्रेशन तो वीक इलेक्ट्रोलाइट के
डिसोसिएशन के बा बारे में ये इंफॉर्मेशन
तो हमारे पास ऑलरेडी थी बट यहां पर हमें
क्या इवॉल्व करना है यहां पर मोलर
कंडक्टिविटी के कांसेप्ट को तो अल्फा जो
है जो डिग्री ऑफ डिसोसिएशन है जैसे कि
मैंने बताया देखो स्ट्रांग इलेक्ट्रोलाइट
के केस में ना उनके डिसोसिएशन पे कोई फर्क
नहीं पड़ता है क्योंकि वो तो खुद ही
डिसोसिएट हो जाते हैं राइट बट वीक
इलेक्ट्रोलाइट के केस में जैसे-जैसे हम
उन्हें डाइल्यूट करते हैं तो उनका
डिसोसिएशन भी थोड़ा बढ़ जाता है तो यहां
पर जो डिसोसिएशन कांस्टेंट है अल्फा इसको
हम एप्रोक्सीमेट क्या लिख सकते हैं मोलर
कंडक्टिविटी डिवाइडेड बाय मोलर
कंडक्टिविटी व्हेन कंसंट्रेशन इज रो इसको
हम ऐसे लिख सकते हैं ये लडा ए क्या है
मोलर कंडक्टिविटी एट एनी कंसंट्रेशन c एंड
लडा ए न क्या है मोलर कंडक्टिविटी व्हेन
कंसंट्रेशन टेंड्स टू जीरो यानी कि
लिमिटिंग वैल्यू ऑफ मोलर
कंडक्टिविटी ठीक है ऐसा हम इस डिसोसिएशन
कांस्टेंट को लिख सकते हैं तो अगर इसी
वैल्यू को हम ऊपर वाले एक्सप्रेशन में पुट
कर दें तो डिसोसिएशन तो के जो इक्विलियम
कांस्टेंट है यह क्या हो जाएगा स इन लडा ए
बाय लम ए न का होल स्क्वायर डिवाइडेड बाय
1 माइनस
लडा ए डिवाइडेड बाय लडा ए न तो इसे हम लिख
सकते हैं सी लडा ए स्क डिवाइडेड बाय लम ए
न
स्क्वा 1 लडा ए न माइनस लडा ए डिवाइडेड
बाय लडा
एन तो ये लडा एन और यहां से एक लडा एन कट
जाएगा तो ये हो जाएगा c ल ए स् डिवाइड बाय
लम
एन * लड एन - ल ए तो ये रिलेशनशिप हो जाता
है के यानी कि इक्विलियम कांस्टेंट के साथ
मोलर कंडक्टिविटी का चलो एक क्वेश्चन
देखते हैं कैलकुलेट न फॉर c एंड mgso4 तो
यहां पर हम सीधा-सीधा कॉल रश लॉ लगाएंगे
तो कॉल रश लॉ के हिसाब से नॉ ऑफ एनी
इलेक्ट्रोलाइट जैसे कि cacl2 क्या हो
जाएगा इनके आयस का टोटल कंडक्टिविटी का सम
तो इसमें कौन-कौन से आयन है ca2 प् है और
कौन से आयन है
cl-cl 2 जब डिसोसिएट करेगा तो ये क्या
बनाएगा ca2 प + 2cl - ठीक है तो यानी कि
ये क्या हो जाए आएगा ल m0 ऑफ ca2 प ् 2
टाइम्स ऑफ ल m0 ऑफ
c-r का लॉ तो अब देखो यह ल m0 की जो
वैल्यू है c 2+ के लिए कितना है ca2 प इज
हियर तो इसकी वैल्यू है 119 और cl-35
3 सो दिस विल कम आउट टु बी
2716 साइमन सेमी स् पर मोल अब यहां पर एक
सवाल और था कि मुझे em0 की वैल्यू निकालनी
है mgso4 के लिए भी अब mgso4 कैसे
डिसोसिएट करेगा पहले तो यह देखो यह
डिसोसिएट करेगा mg2 प + so4 2 इस तरीके से
तो यह क्या हो जाएगा mg2 प जो आयस है इनकी
जो लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी होगी प्लस
so4 2 - जो आयस है इनकी जो मोलर
कंडक्टिविटी होगी इन दोनों का सम ठीक है
तो mg2 प की देखो कितनी है 106 so4 - की
कितनी है 160 तो ये हो जाएगा 106 +
1060 यानी कि
266 साइमन सेंटीमीटर स् पर
मोल तो है ना कॉल रश लॉ काम की चीज कितनी
आसानी से हम लिमिटिंग मोलर कंडक्टिविटी की
वैल्यूज निकाल पा रहे हैं
अब देखते हैं प्रॉब्लम नंबर टू
कंडक्टिविटी ऑफ 0.20 मोलर सॉल्यूशन ऑफ
kc2 48 साइमन सेंटीमीटर इवर्स कैलकुलेट
इट्स मोलर कंडक्टिविटी तो मुझे यहां पर
मोलर कंडक्टिविटी निकालनी है हमें क्या
पता है मोलर कंडक्टिविटी क्या होता है
नॉर्मल कंडक्टिविटी डिवाइडेड बाय
कंसंट्रेशन ठीक है तो यहां पर 0.20 मोलर
सॉल्यूशन यानी कि यह क्या दिया हुआ है
कंसंट्रे
और इसकी कंडक्टिविटी की वैल्यू भी दी हुई
है यानी कि कप्पा की वैल्यू दी हुई है ठीक
है तो यहां पर करना क्या है कुछ खास नहीं
करना है ये जो कंसंट्रेशन है ये मोलर के
फॉर्म में दिया हुआ है मतलब मोलेरिटी के
फॉर्म में दिया हुआ है बट मुझे यह
कंसंट्रेशन किस यूनिट में चाहिए होगा
चूंकि मेरे पास कंडक्टिविटी साइमन
सेंटीमीटर इनवर्ट में दिया हुआ है इसलिए
मुझे ये मोलेरिटी भी मोल्स पर सेंटीमीटर
क्यूब में चाहिए होगा ठीक है तो इसीलिए
यहां पर एक 1000 का फैक्टर आ जाएगा बस तो
पपा की वैल्यू तो डाल देंगे
0.024 डिवाइडेड बाय कंसंट्रेशन हो जाएगा
0.20 डिवाइडेड बाय
1000 तो ये हो जाएगा 124 साइमन सेंटीमीटर
स्क्वा पर
मोल इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स यह वो वाले
सेल्स होते हैं जिनके अंदर हम इलेक्ट्रिकल
एनर्जी को कन्वर्ट करते हैं केमिकल एनर्जी
में आप सभी को याद होगा जब हमने इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री की शुरुआत की थी तो स्टार्टिंग
में मैंने बताया था कि यहां पर हम ब्रॉडली
दो तरह की चीजों की बात करेंगे पहला ऐसे
सेल्स जो कन्वर्ट करते हैं केमिकल एनर्जी
टू इलेक्ट्रिकल एनर्जी जैसे कि
इलेक्ट्रोकेमिकल सेल्स दूसरा ऐसे सेल्स जो
कन्वर्ट करते हैं इलेक्ट्रिकल एनर्जी टू
केमिकल एनर्जी जैसे कि इलेक्ट्रोलिटिक
सेल्स जो कि हम पढ़ने वाले हैं ठीक है तो
यहां पर होता कुछ यूं है कि इलेक्ट्रिसिटी
से यानी कि एक्सटर्नली इलेक्ट्रिकल एनर्जी
प्रोवाइड करके हम एक केमिकल रिएक्शन को
अकर कर ते हैं यानी कि यह किस तरह का
केमिकल रिएक्शन है जो खुद से नहीं होता है
यह बिल्कुल उस नौटी बच्चे की तरह है जिसको
पढ़ने का बिल्कुल मन नहीं करता है खुद से
तो वो सेल्फ मोटिवेटेड बिल्कुल नहीं होता
है तो वो पढ़ता कैसे है जब उसके ऊपर एक
एक्सटर्नल प्रेशर लगाया जाता है चाहे वो
एग्जाम का डर हो चाहे वो लालच हो चाहे वो
डाट हो चाहे वो पिटाई हो सम एक्सटर्नल
फोर्स उसके ऊपर लगाना पड़ता है ताकि वह
पढ़ाई करे तो ये उसी तरह का केमिकल
रिएक्शन है और ऐसे रिएक्शंस को हम क्या
कहते हैं नॉन स्पॉन्टेनियस केमिकल
रिएक्शंस
ठीक अब चले जाते हैं थोड़ा सा डेल्टा जी
की वैल्यू पे यानी कि गिब्स फ्री एनर्जी
आप मुझे ये बताओ कि अगर ये रिएक्शंस नॉन
स्पॉन्टेनियस है तो डेल्टा g की वैल्यू
कैसी होनी चाहिए ग्रेटर दन 0 होनी चाहिए
बिल्कुल चलो अब आप मुझे ये बताओ कि अगर
डेल्टा जीी की वैल्यू ग्रेटर दन 0 है तो e
सेल यानी कि सेल पोटेंशियल या फिर जिसे आप
ईएमएफ ऑफ द सेल कहते हो उसकी वैल्यू कैसी
होगी पॉजिटिव या नेगेटिव सो सोचो सोचो
सोचो डेल्टा g और e सेल इन दोनों में क्या
रिलेशन है कि डेल्टा g = -
nf3 पॉजिटिव तो e सेल नेगेटिव तो यानी कि
इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स के केस में e सेल की
जो वैल्यू होगी वो कैसी होगी वो नेगेटिव
होगी तो इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स के अंदर
होता है इलेक्ट्रोलिसिस और इलेक्ट्रोलिसिस
में क्या होता है वही तो पढ़ेंगे अभी
डिटेल में है ना तो ये जो इलेक्ट्रोलिसिस
है ये वर्ड को अगर आप ध्यान दो ना इस वर्ड
को अगर आप तोड़ दो तो आप देखोगे इलेक्ट्रो
कहां से आया है इलेक्ट्रिसिटी से लिसिस का
मतलब होता है ब्रेक डाउन कोई चीज को तोड़
देना तो होता क्या है यहां पर कि
इलेक्ट्रिसिटी से जो है हम इलेक्ट्रोलाइट
का ब्रेकडाउन करते हैं इलेक्ट्रोलाइट मतलब
सपोज
एक कैथोड रहता है एक एनोड रहता है बट इस
केस में दोनों को हम सेम सॉल्यूशन के अंदर
ही डिप करते हैं जैसे अगर आप इलेक्ट्रो
केमिकल सेल्स को याद करोगे तो वहां पे
क्या होता था दो अलग-अलग कंटेनर होते थे
दो अलग-अलग हाफ सेल्स होते थे राइट एक तरफ
कॉपर का सेटअप एक तरफ जिंक का सेटअप यहां
पर क्या होगा जो दोनों इलेक्ट्रोड्स होंगे
वो सेम सॉल्यूशन या फिर सेम इलेक्ट्रोलाइट
में ही डिप्ड होंगे ठीक है चलो डिटेल में
समझते हैं इलेक्ट्रोलिसिस इलेक्ट्रोलिसिस
के प्रोसेस को यूज करके हम काफी सारी
चीजें कर सकते हैं तो यहां पर हम दो
एप्लीकेशंस देखेंगे पहला कॉपर
प्यूरिफाई थी कि इलेक्ट्रो
पलेटिनस बहुत सारे हमारे घर में डेकर
आइटम्स होते हैं बहुत सारे ऐसे ज्वेलरी
होते हैं जो प्लेटेड होते हैं जैसे गोल्ड
के नहीं होते बट उसमें गोल्ड की प्लेटिंग
होती है बहुत सारे क्रोम प्लेटेड हैंडल्स
होते हैं बहुत सारे ऐसे डेकर के आइटम्स
होते हैं जिनके ऊपर कोई चीज की प्लेटिंग
या फिर कोई चीज की परत लगी हुई होती है तो
ये इलेक्ट्रो प्लेटिंग भी जो है वो
इलेक्ट्रोलिसिस का ही एक एप्लीकेशन है ठीक
है तो चलो सबसे पहले डिस्कस करेंगे हम
प्यूरीफाइड सॉल्यूशन अब इसी कंटेनर के
अंदर हम दोनों इलेक्ट्रोड्स डिप कर देते
हैं ये दोनों इलेक्ट्रोड्स किस चीज के बने
होते हैं दोनों कॉपर इलेक्ट्रोड्स हम डिप
कर देते हैं ठीक है ओके समझ आ गई बात अब
क्या होगा अब होगा कुछ यूं इसको हम कनेक्ट
करेंगे एक बैटरी से नाउ दिस इज द मोस्ट
इंपॉर्टेंट पार्ट क्योंकि इलेक्ट्रोकेमिकल
सेल में हम ऐसा नहीं करते थे क्योंकि वहां
पर हम अपनी तरफ से पोटेंशियल प्रोवाइड
नहीं करते थे राइट इलेक्ट्रिसिटी हम
प्रोवाइड नहीं करते थे राइट वहां तो जनरेट
होती थी बट यहां पर क्या है इलेक्ट्रिकल
एनर्जी हम प्रोवाइड करेंगे तो कैसे
प्रोवाइड करेंगे बैटरी से तो इसीलिए हमने
क्या किया दोनों इलेक्ट्रोड्स को कनेक्ट
कर दिया एक बैटरी से इस तरह से कनेक्ट
किया कि एनोड जो है वो पॉजिटिव टर्मिनल से
कनेक्टेड है कैथोड जो है वो नेगेटिव
टर्मिनल से कनेक्टेड है क्लियर है यहां तक
तो यही सेटअप है हमारा अब जो कैथोड है वो
नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्टेड है तो कैथोड
के ऊपर क्या है नेगेटिव चार्जेस हैं चूंकि
नेगेटिव चार्जेस हैं तो कैथोड की तरफ कौन
अट्रैक्ट होगा पॉजिटिव चार्जेस ऑब् वियस
अब देखो हमारा जो सॉल्यूशन है उसमें क्या
है कॉपर से सल्फेट यानी कि उसमें cu2 प
आयस हैं और सल्फेट आयस है so4 2 - ठीक है
तो पॉजिटिव आयस कौन से हैं cu2 प ये किसकी
तरफ अट्रैक्ट होंगे कैथोड की तरफ क्योंकि
उनमें नेगेटिव चार्ज है राइट अब ये co2 प
क्या करना चाहेगा यार सबको स्टेबिलिटी
चाहिए ना हमें तो पता ही है स्टेबिलिटी की
कहानी तो co2 प हमेशा यही चाहेगा कि यार
मुझे ना कहीं पे तो दो इलेक्ट्रॉन मिल जाए
और मैं cu1 जाऊं हमें कॉपर बन जाऊं स्टेबल
हो जाऊं राइट तो बस वही हो रहा है कैथोड
में क्या हो रहा है ये co2 प् कैथोड जा
रहा है उससे इलेक्ट्रॉन ले रहा है और कॉपर
बन जा रहा है और कॉपर बनके वह कैथोड में
डिपॉजिट हो जा रहा है ठीक है ये है कहानी
कैथोड की तो इसका मतलब कैथोड में हो क्या
रहा है cu2 प जो है इलेक्ट्रॉन गेन कर रहा
है गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन बोले तो रिडक्शन और
हमें तो पहले से ही पता था रेड कैट यानी
कि कैथोड में हमेशा रिडक्शन होता है तो
देखो सारी बातें मिलती जा रही है तो कैथोड
में कॉपर डिपॉजिट होते जा रहा है कैथोड
में रिडक्शन हो रहा है क्लियर है पूरा
पिक्चर ग्रेट अब देखते हैं एनोड की कहानी
एनोड में क्या होता है एन ऑक्स यानी कि
ऑक्सीडेशन तो क्या होगा एनोड में एनोड का
जो कॉपर है वो क्या करेगा वो दो
इलेक्ट्रॉन लूज करेगा दो इलेक्ट्रॉन वो दे
देगा और दो इलेक्ट्रॉन देके वो क्या बन
जाएगा cu2 प और ये cu2 प कहां जाएगा
ओबवियसली सॉल्यूशन में तो मतलब पिक्चर
क्या हो रहा है एनोड में हो रहा है
ऑक्सीडेशन कैथोड में हो रहा है रिडक्शन वो
तो है बट ओवरऑल यहां पर कहानी क्या हो रही
है कहानी कुछ ऐसी हो रही है कि एनोड में
से cu2 प निकल रहा है सॉल्यूशन में और वही
co2 प दो इलेक्ट्रॉन लेके कैथोड में जाके
डिपॉजिट हो जा रहा है राइट तो अगर बहुत
सिंपल शब्दों में सोचो तो कुछ यूं हो रहा
है कि इधर का एनोड का कॉपर निकल के आ जा
रहा है और कैथोड में कॉपर जमा होता जा रहा
है तो विथ टाइम क्या होगा मेरा जो कैथोड
है वो और थिक होता जाएगा उधर कॉपर जमा हो
रहा है जो मेरा एनोड है वो थिन होता जाएगा
क्योंकि वहां से जो है cu2 प निकलता जा
रहा है यहां तक समझ आई अब देखो कि यह कॉपर
के
प्यूरिफाईज हैं ठीक है तो मैं क्या करूंगी
कि उस इंपोर कॉपर को अपना एनोड बना दूंगी
एनोड बना देने से क्या क्या होगा कि उसमें
से जितना भी कॉपर है ना वह कॉपर निकल के आ
जाएगा और कहां चला जाएगा कैथोड में चला
जाएगा तो इसका मतलब इस ये रिएक्शन
जैसे-जैसे होता रहेगा उस इंपोर कॉपर में
से सारा कॉपर निकल के आता रहेगा और कैथोड
में जमा होता जाएगा तो बेसिकली जो मेरा
कैथोड रहेगा वो क्या हो जाएगा वो बिल्कुल
प्योर कॉपर रहेगा तो इस तरीके से हम इंपोर
कॉपर से प्योर कॉपर निकाल सकते हैं एंड
दैट इज हाउ वी डू
इलेक्ट्रोलिसिस में होता क्या है वो तो
समझ में आ गया है अब एग्जांपल लेते हैं
इलेक्ट्रो प्लेटिंग का जैसा कि मैंने
बताया इलेक्ट्रो प्लेटिंग में क्या होता
है किसी एक चीज के ऊपर हम एक दूसरे मेटल
की कोटिंग डाल देते हैं ठीक है एग्जांपल
लेते हैं लेट अस सपोज मेरे हाथ में ये
ग्लास है ठीक है अब मैं चाह रही हूं कि इस
ग्लास के ऊपर मैं एक कॉपर की कोटिंग डाल
दूं ठीक है तो उससे क्या होगा ये ग्लास
कॉपर का तो नहीं होगा बट ये देखने में
बिल्कुल एक तांबे के ग्लास जैसा लगेगा एक
कॉपर के ग्लास जैसा देखने में लगेगा चाहे
तो हम इसके ऊपर सिल्वर की कोटिंग भी डाल
सकते हैं गोल्ड की कोटिंग भी डाल सकते हैं
राइट तो उसमें हम करेंगे क्या तो हम चाहते
क्या है हम बेसिकली यह चाहते हैं कि जो
कॉपर है ना वो इसके ऊपर आके डिपॉजिट हो
जाए और अपनी एक लेयर बना दे यही हम चाहते
हैं राइट तो इसका मतलब है मैं क्या करूंगी
जिसके ऊपर मुझे कॉपर को डिपॉजिट कराना है
उसे मैं कौन सा इलेक्ट्रोड बनाऊंगी उसे
मैं कैथोड बनाऊंगी क्योंकि कैथोड में आकर
के मेरे कॉपर डिपॉजिट होते रहते हैं है ना
तो इसीलिए जिस भी ऑब्जेक्ट की प्लेटिंग
करनी है चाहे वो ग्लास हो चम्मच हो की हो
कोई भी डेकर आइटम हो उसको हम बनाते हैं
कैथोड ठीक है और एनोड में हम क्या लेते
हैं जिसकी कोटिंग डालनी है यानी कि जैसे
अगर मुझे इसके ऊपर कॉपर की कोटिंग डालनी
है तो एनोड में हम कॉपर लेंगे अब सवाल ये
उठता है कि सॉल्यूशन क्या लेंगे
इलेक्ट्रोलाइट क्या लेंगे वो हम उसी मेटल
का कोई सॉल्ट सॉल्यूशन लेंगे जिसकी हम
कोटिंग डाल रहे हैं जैसे यहां पर मैं कॉपर
की कोटिंग डालना चाह रही हूं तो सॉल्यूशन
भी मैं कॉपर सल्फेट ही लूंगी या फिर कॉपर
का कोई भी सॉल्ट सॉल्यूशन लूंगी ठीक है ले
लिया होगा क्या अब होगा तो वही एनोड में
ऑक्सीडेशन और कैथोड में रिडक्शन सिंपल
देखो प्रोसेस वही रहेगा यहां पर क्या होगा
एनोड में ऑक्सीडेशन होगा ऑक्सीडेशन होगा
तो क्या होगा कॉपर क्या करेगा इलेक्ट्रॉन
लूज करेगा और बन जाएगा cu2 प तो वो
सॉल्यूशन में आ जाएगा कैथोड में क्या होगा
ये cu2 प कैथोड के पास जाएगा कैथोड के पास
नेगेटिव चार्जेस होंगे क्योंकि कैथोड
किससे कनेक्टेड है नेगेटिव टर्मिनल ऑफ द
बैटरी तो उसके वजह से ये उस नेगेटिव चार्ज
को एक्सेप्ट करेगा और बन जाएगा कॉपर और इस
तरह से कॉपर जो है कैथोड में डिपॉजिट होता
रहेगा और जिस भी ऑब्जेक्ट के ऊपर मुझे
लेयर डालनी है उसके ऊपर कॉपर की एक लेयर
डल चुकी होगी अब इलेक्ट्रोलिसिस का
कांसेप्ट तो हमें समझ में आ गया बट अब
सवाल ये था कि इलेक्ट्रोलिसिस के इस
कांसेप्ट को हम क्वांटिफाई कैसे करें इसको
हम मेजरेबल कैसे बनाए इन द सेंस कि
इलेक्ट्रोलिसिस के कांसेप्ट से मुझे यह
समझ में आ गया कि हां भाई ठीक है कैथोड
में मेरा कॉपर जो है वो डिपॉजिट होते रहता
है मतलब फॉर एग्जांपल कोई भी मेटल मेरा
डिपॉजिट होते रहता है ठीक है वो बात समझ
में आ गई बट कितना कॉपर डिपॉजिट हो रहा है
कितना कॉपर डिपॉजिट होगा यह कौन से
फैक्टर्स पे डिपेंड करता है उसका क्या तो
माइकल फैराडे ने कुछ लॉज दिए थे उन्होंने
फराडेज फर्स्ट लॉ और सेकंड लॉ दिया था जो
इन क्वेश्चंस का आंसर करता है इनफैक्ट
माइकल फैरड ये पहले ऐसे साइंटिस्ट थे
जिन्होंने इलेक्ट्रोलिसिस के क्वांटिटेशन
एस्पेक्ट को स्टडी किया सबसे पहले देखेंगे
फराडेज फर्स्ट लॉ फराडेज फर्स्ट लॉ ये
कहता है कि द अमाउंट ऑफ केमिकल रिएक्शन
दैट हैपेंस एट एन इलेक्ट्रोड किसी भी एक
इलेक्ट्रोड पे कितना केमिकल रिएक्शन हो
रहा है दैट इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
द अमाउंट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी दैट इज पास्ड
थ्रू द इलेक्ट्रोलाइट यानी कि अब
इलेक्ट्रोड जो है वो किसी इलेक्ट्रोलाइट
में ही डिप किया हुआ है ठीक है अब उस
इलेक्ट्रोड में कितना केमिकल रिएक्शन होगा
उसमें कितना कॉपर डिपॉजिट होगा यह डिपेंड
करता है कि हमने कितना इलेक्ट्रिसिटी पास
किया है उस इलेक्ट्रोलाइट के थ्रू ठीक है
तो अगर हम यह कॉपर वाला ही सेटअप का
एग्जांपल लेते हैं तो लेट अस सपोज कि हमने
इलेक्ट्रिसिटी पास किया हमने करंट पास
किया बहुत थोड़े सी देर के लिए जरा सी देर
के लिए करंट पास किया तो उस केस में मेरे
कैथोड में कॉपर भी जरा सा ही डिपॉजिट होगा
राइट क्योंकि मेरा ये जो रिएक्शन है ये
हुआ ही थोड़ी देर के लिए अगर मैंने बहुत
देर तक इसमें करंट पास किया तो क्या होगा
कॉपर भी ज्यादा डिपॉजिट होगा राइट तो
बेसिकली ये दो चीजों पे डिपेंड कर रहा है
कि कितना करंट पास किया और कितनी देर के
लिए करंट पास किया राइट तो इन अ वे हम ये
कह सकते हैं कि कितना वेट ऑफ कॉपर डिपॉजिट
होगा दैट इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू q
दैट इज चार्ज और चार्ज मतलब करंट इंटू
टाइम दैट इज़ i * t राइट और ये ड क्या है
यहां पर कितना कॉपर का वेट इस इलेक्ट्रोड
में डिपॉजिट होगा ठीक है तो ये तो था
फैराडे का फर्स्ट लॉ अब चलो देखते हैं
सेकंड लॉ में उन्होंने क्या कहा अब मान लो
हमारे पास कुछ ऐसा सेटअप है जिसमें दो
डिफरेंट मेटल्स या दो डिफरेंट चीजों को
हमने ले रखा है लेट अस सपोज एक कंटेनर के
अंदर कॉपर के इलेक्ट्रोड्स हैं और कॉपर
सल्फेट का सॉल्यूशन है दूसरे कंटेनर के
अंदर सिल्वर के इलेक्ट्रोड्स हैं और
सिल्वर का सॉल्यूशन है लेकिन इन दोनों को
हमने कनेक्ट कर रखा है सेम बैटरी से तो
इसका मतलब है दोनों तरफ जो है सेम
क्वांटिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी जा रही है बट
क्या इसका यह मतलब है कि इस तरफ कैथोड में
जितना कॉपर डिपॉजिट होगा और इस तरफ कैथोड
में जितना सिल्वर डिपॉजिट होगा वह दोनों
सेम होगा बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं ऐसा
क्यों हालांकि सेम इलेक्ट्रिसिटी पास हो
रही है दोनों के इलेक्ट्रोलिटिक सॉल्यूशन
पे लेकिन यार कॉपर और सिल्वर यह दोनों तो
दो अलग अलग ही चीजें हैं दोनों की
प्रॉपर्टीज अलग हैं दोनों का रिएक्शन करने
का जो टेंडेंसी है वह अलग है दोनों को
रिएक्ट करने की जो स्पीड है जो नेचर है जो
प्रॉपर्टी है वो अलग है तो इसीलिए दोनों
को हम सेम क्वांटिटी में तो एक्सपेक्ट
नहीं कर सकते हैं और इसी के बारे में था
फैराडे का सेकंड लॉ तो फैराडे सेकंड लॉ ये
कहता है कि द अमाउंट ऑफ डिफरेंट सब्सटेंसस
लिबरे व्हेन सेम अमाउंट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी
इज पास्ड थ्रू द इलेक्ट्रोलिटिक सॉल्यूशन
इज डायरेक्ट ली प्रोपोर्शनल टू देयर
केमिकल इक्विवेलेंट वेट्स यानी कि कितना
कॉपर और कितना सिल्वर डिपॉजिट होगा यह
डिपेंड करेगा इनके इक्विवेलेंट वेट पर मान
लो कॉपर डिपॉजिट हो रहा है w1 मतलब w1 वेट
ऑफ कॉपर इज गेटिंग डिपॉजिटेड w2 वेट ऑफ
सिल्वर इज गेटिंग डिपॉजिटेड तो w1 / w2
क्या हो जाएगा e1 / e2 जहां पर e1 और e2
क्या है इक्विवेलेंट वेट ऑफ कॉपर एंड
सिल्वर ठीक है अब बहुत से बच्चे पूछेंगे
कि मैम ये इक्विवेलेंट वेट क्या होता है
तो मैं बताऊंगी कि इक्विवेलेंट वेट तो
मैंने क्लास 11थ में पढ़ाया था राइट बट
एनीवेज एक बार रीकैप कर देती हूं
इक्विवेलेंट वेट होता है एटॉमिक वेट
डिवाइडेड बाय वैलेंसी फैक्टर अब आप पूछोगे
वैलेंसी फैक्टर क्या होता है कोई भी मेटल
आयन जितने इलेक्ट्रॉन एक्सेप्ट करता है वो
जो नंबर होता है दैट इज वैलेंसी फैक्टर
फॉर एग्जांपल अगर मैं बात करूं zn20 जिंक
2+ आयन की तो यह दो इलेक्ट्रॉन एक्सेप्ट
करके जिंक बनाता है तो इसका वैलेंसी
फैक्टर हो जाएगा टू अगर मैं बात करूं al3
प की ये तीन इलेक्ट्रॉन एक्सेप्ट करके
बनाएगा एलुमिनियम तो इसका वैलेंसी फैक्टर
हो जाएगा थ्री ठीक है तो ये था फराडेज
सेकंड लॉ तो फराडेज लॉज को समझने के लिए
थोड़ा एग्जांपल लेके कुछ और डिटेल समझते
हैं जैसे कि एक एग्जांपल लेते हैं मान
लेते हैं कि ये सिल्वर आयन है सिल्वर के
सॉल्यूशन में जो आयन है दैट इज + ये
इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करके बना देता है
सिल्वर ठीक है अब यहां पर हम इसके
क्वांटिटेशन एस्पेक्ट की बात करेंगे कि यह
बनने में कितना चार्ज चाहिए होगा कितनी
इलेक्ट्रिसिटी चाहिए होगी हम उस एस्पेक्ट
में बात करेंगे ठीक है तो यहां पर हम क्या
देखते हैं कि न मोल ऑफ इलेक्ट्रॉन इज
रिक्वायर्ड फॉर रिडक्शन ऑफ 1 मोल
+ यहां पर + से ए बन रहा है तो बेसिकली हो
क्या रहा है यहां पर हो रहा है रिडक्शन तो
1 मोल + को रिड्यूस करने के लिए मुझे
कितना इलेक्ट्रॉन चाहिए न मोल इलेक्ट्रॉन
चाहिए ठीक है अब अगर मैं यह कैलकुलेट कर
लू कि इस न मोल इलेक्ट्रॉन में टोटल चार्ज
कितना है इस न मोल इलेक्ट्रॉन में कितना
चार्ज है अगर वो कैलकुलेट कर लिया इसका
मतलब उतना चार्ज मुझे पास करवाना है इस
रिडक्शन को करवाने के लिए ठीक है तो यानी
कि अब मेरा टारगेट क्या है टू कैलकुलेट
चार्ज ऑन न मोल इलेक्ट्रॉन
तो बच्चों ये बताओ एक इलेक्ट्रॉन में
कितना चार्ज होता है 1.6 * 10 टू द पावर
-1 कूलम और 1 मोल में कितने इलेक्ट्रॉन
होते हैं
6.022 * 10 टू पावर 23 तो इसे अगर हम
कैलकुलेट करें तो यह वैल्यू निकल के आती
है 96 487 कूलम पर
मोल और इनफैक्ट इसी वैल्यू को चार्ज ऑन 1
मोल इलेक्ट्रॉन जो ये वैल्यू है इस वैल्यू
को ही हम कहते हैं इतनी क्वा ऑफ
इलेक्ट्रिसिटी को हम कहते हैं फैराडे और
इस वैल्यू को हम कहते हैं फैराडे
कांस्टेंट जिसे हम ए से डिनोट करते हैं
चकि ये पूरा कांसेप्ट फैराडे ने दिया था
इसीलिए इस कांस्टेंट को हमने फैराडे के
ऊपर ही इसका नाम रख दिया तो इसीलिए आप
देखोगे कि 1f को जो है हमेशा हम उसकी
वैल्यू कितनी डालते हैं नाइ कई बार हम इसे
एप्रोक्सीमेट कर देते हैं ताकि कैलकुलेशन
थोड़ा इजी हो जाए इसे हम
96500 कूलम पर मोल भी ले सकते हैं फॉर
इजियर कैलक ले ठीक है अब यहां पर एक
एग्जांपल और लेते हैं अब हम एग्जांपल लेते
हैं एलुमिनियम का लेट अस सपोज एलुमिनियम
3+ जो है ये तीन इलेक्ट्रॉन लेकर के बना
देता है सॉलिड एलुमिनियम ठीक है तो अगर
मैं आपसे पूछूं कि इस रिएक्शन को होने के
लिए यहां पर क्या हो रहा है गेन ऑफ
इलेक्ट्रॉन यानी कि यहां पर भी हो रहा है
रिडक्शन अब मैं अगर आपसे पूछूं कि इस
रिडक्शन को होने के लिए कितनी
इलेक्ट्रिसिटी चाहिए होगी कितना चार्ज पास
करवाना पड़ेगा इलेक्ट्रॉन लाइट के थ्रू
कैसे बताओगे देखो साफ-साफ दिख रहा है कि 1
मोल एलुमिनियम को रिड्यूस करने के लिए
मुझे 3 मोल्स ऑफ इलेक्ट्रॉन चाहिए राइट तो
यहां पर मुझे क्या कैलकुलेट करना पड़ेगा
मुझे कैलकुलेट करना पड़ेगा चार्ज ऑन 3
मोल्स ऑफ इलेक्ट्रॉन और शॉर्टकट सब कुछ
इतना डिटेल में करने की जरूरत नहीं है 1
मोल इलेक्ट्रॉन में कितना चार्ज होता है f
3 मोल इलेक्ट्रॉन में कितना चार्ज होगा
3f सिंपल यानी कि 3f दैट इज़ 3 * 96
487 इतना कूलंब ऑफ़ चार्ज जो है मुझे इसके
थ्रू पास करवाना होगा ताकि यह रिडक्शन हो
सके तो चलो बच्चों देखते हैं एक क्वेश्चन
अस सॉल्यूशन ऑफ़ कॉपर सल्फेट इज़
इलेक्ट्रोलाइज्ड फॉर 10 मिनट्स विथ अ करंट
ऑफ़ 1.5 एंपियर व्हाट इज़ द मास ऑफ़ कॉपर
डिपॉजिटेड एट द कैथोड तो फैरेज फर्स्ट लॉ
को याद करो कितना मास डिपॉजिट हो कॉपर का
ये किस पर डिपेंड करेगा यह चार्ज पर
डिपेंड करेगा ठीक है और चार्ज क्या होता
है चार्ज होता है करंट इनटू टाइम ठीक है
तो यहां पर क्या दिया हुआ है टाइम दिया
हुआ है सो टाइम इज 10 मिनट्स इसे सेकंड्स
में कन्वर्ट कर ले तो यह हो जाएगा
600 सेकंड्स करंट यहां पर दिया हुआ है 1.5
एंपियर ठीक है तो यानी कि हम चार्ज बड़ी
आसानी से निकाल सकते हैं तो चार्ज कितना
कितना हो जाएगा i * t दैट इज 1.5 * 600
दैट इज इक्वल टू 900 कूलम तो इतना चार्ज
निकल गया अब मुझे निकालना क्या है कि
कितना मास ऑफ कॉपर डिपॉजिट होगा कैथोड पे
ठीक है रिएक्शन क्या हो रहा है cuso4 का
सॉल्यूशन है यानी कि कॉपर जो है cuso4 में
cu2 प के फॉर्म में है ये दो इलेक्ट्रॉन
लेकर के बना देगा कॉपर तभी तो यह वाला
कॉपर कैथोड में डिपॉजिट होगा है कि नहीं
तो अब इस रिएक्शन को होने के लिए इस
रिडक्शन को होने के लिए मुझे कितने कितना
चार्ज चाहिए मुझे चाहिए 2f चार्ज क्योंकि
मुझे ू मोल इलेक्ट्रॉन चाहिए राइट तो यानी
कि मुझे
2f के बराबर इलेक्ट्रिसिटी या फिर चार्ज
चाहिए कुछ भी कह लो इतनी इलेक्ट्रिसिटी या
फिर इतना चार्ज मुझे पास करवाना
होगा ठीक है तो हम एक तरीके से यह कह सकते
हैं कि 2f चार्ज
कराने से या 2f इलेक्ट्रिसिटी पास कराने
से कितना कॉपर डिपॉजिट हो रहा है न मोल ऑफ
कॉपर इज डिपॉजिटेड ठीक है जैसे कैथोड में
जो कॉपर डिपॉजिट हो रहा है एक मोल कॉपर
कैथोड में तब डिपॉजिट हो रहा है जब हम 2f
के बराबर चार्ज पास करवा रहे हैं ठीक है
यहां पर हमारे पास कितना चार्ज है 900
कूलम तो फिर जब हम 900 कूलम चार्ज पास
करवाएंगे तो क्या
होगा तो कितना मोल ऑफ कॉपर डिपॉजिट होगा
राइट हमें यही कैलकुलेट करना है तो कितना
हो जाएगा ये हो जाएगा 1 डिवाइडेड बाय 2f ए
की जगह हम फैराडे कांस्टेंट की वैल्यू डाल
देंगे दैट इज 96 487 इन 900 कूलम ठीक है
अब देखो यहां पर मैंने क्या लिखा है न मोल
कॉपर ठीक है अब इस न मोल की जगह आप क्या
कर सकते
हो अब इससे जो आपको आंसर मिलेगा दैट विल
एक्चुअली टेल यू कि कितना मोलस ऑफ
कॉपर डिपॉजिट होगा ठीक है 2f पास कराने से
1 मोल कॉपर डिपॉजिट होगा 900 कूलम पास
कराने से इतना मोल्स ऑफ कॉपर डिपॉजिट होगा
अब नंबर ऑफ मोल्स मिल गया तब तो आप बता ही
सकते हो कि मास कितना होगा राइट क्योंकि
नंबर ऑफ मास मोल्स क्या होता है गिवन मास
डिवाइडेड बाय एटॉमिक मास उतना तो आप कर ही
लोगे है कि नहीं तो इस तरीके से आप इसको
फर्द कैलकुलेट करके आंसर निकाल सकते हो
एंड आई होप आप ये आंसर अब निकाल लोगे राइट
तो इससे आपको मिल जाएगा कितने मोल्स ऑफ
कॉपर डिपॉजिट होंगे और उसके बाद आप निकाल
लोगे कितना मास ऑफ कॉपर डिपॉजिट होगा अब
इलेक्ट्रोलिसिस के प्रोसेस को तो हमने समझ
लिया अब देखने की बारी है कि
इलेक्ट्रोलिसिस के प्रोडक्ट्स कैसे बनते
हैं और कौन से फैक्टर्स के ऊपर डिपेंड
करता है इलेक्ट्रोलिसिस के प्रोडक्ट्स तो
यहां पर हम तीन ऐसे फैक्टर्स डिस्कस
करेंगे पहला फैक्टर है नेचर ऑफ द मटेरियल
गेटिंग इलेक्ट्रोलाइज्ड मतलब जो चीज
इलेक्ट्रोलाइजर है उसका नेचर कैसा है मतलब
इलेक्ट्रोलिटिक सेल के अंदर जो भी चीजें
हैं उसका रिड्यूस ंग पावर
है जितने इलेक्ट्रोड्स है उनके इलेक्ट्रोड
पोटेंशियल्स कितने हैं राइट तो इसके ऊपर
डिपेंड करेगा दूसरा फैक्टर है नेचर ऑफ द
इलेक्ट्रोड अब जो इलेक्ट्रोड है व इनर्ट
किस्म का भी हो सकता है यानी कि जो रिएक्ट
ना करे जो रिएक्शन में पार्टिसिपेट ना करे
जैसे कि प्लैटिनम का इलेक्ट्रोड दूसरी तरफ
कुछ रिएक्टिव इलेक्ट्रोड्स भी हो सकते हैं
जो खुद भी रिएक्शन में पार्टिसिपेट करें
अब डिपेंडिंग ऑन कि मेरा इलेक्ट्रोड इनर्ट
है या रिएक्टिव मेरा प्रोडक्ट में इंपैक्ट
आ जाएगा राइट
तीसरा फैक्टर है काइनेटिक्स ऑफ द रिएक्शन
कई बार कुछ ऐसे प्रोसेसेस होते हैं जो एस
सच तो फीजिबल होते हैं जो एस सच पॉसिबल
होते हैं लेकिन वो इतने स्लो होते हैं
काइनेटिकली कि वो ऑलमोस्ट ना के बराबर हो
रहे होते हैं मतलब वो इतने ही स्लो होते
हैं और ऐसे केसेस में क्या होता है कि
हमें बाहर से बहुत सारा एक्स्ट्रा
पोटेंशियल भी अप्लाई करना पड़ता है जिसे
हम ओवर पोटेंशियल कहते हैं तो यह भी एक
फैक्टर होता है जो डिसाइड करता है कि
इलेक्ट्रोलिसिस का प्रोडक्ट कैसा होगा
क्योंकि बहुत सारे ऐसे रिएक्शंस जो होने
चाहिए थे बट इस ओवर पोटेंशियल के चक्कर
में वह एक्चुअली में होते नहीं है तो कोई
रिएक्शन होने वाला था बट हुआ नहीं तो
ओबवियसली मेरे प्रोडक्ट में तो फर्क पड़
जाएगा राइट तो ये कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं
जिसके ऊपर बेस करके हम बता सकते हैं कि
इलेक्ट्रोलिसिस के प्रोडक्ट्स क्या होंगे
तो चलो एक एग्जांपल लेते हैं बात करते हैं
मोल्टन
क्या प्रोडक्ट्स बनने की पॉसिबिलिटीज है
ठीक है तो मेरे पास क्या है सिर्फ मोल्टन
होने के लिए ये एक इलेक्ट्रॉन लेके ए बना
देगा यानी कि गेन ऑफ इलेक्ट्रॉन तो ये
क्या है क्या हो रहा है फिलहाल ये हो रहा
है रिडक्शन चकि ये रिडक्शन हो रहा है तो
यह कहां पर होगा यह होगा कैथोड
पर बचा क्या स माइ स माइ को अगर हम देखें
इसके पास एक इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा है तो
ये क्या करेगा इलेक्ट्रॉन को लूज करके
क्लोरीन गैस बना
देगा ठीक है तो यहां पर क्या हो रहा है
यहां पर हो रहा है ऑक्सीडेशन चूंकि
ऑक्सीडेशन हो रहा है तो ऑक्सीडेशन कहां पर
होगा ये होगा एनोड में ठीक है सो कुल मिला
के अगर हम इन दोनों रिएक्शंस को देखें तो
हमारे प्रोडक्ट्स क्या बन रहे हैं ए बन
रहा है एक प्रोडक्ट cl2 बन रहा है दूसरा
प्रोडक्ट तो यानी कि इस इलेक्ट्रोलिसिस के
जो पॉसिबल प्रोडक्ट्स है वो क्या-क्या है
सोडियम और
cl2 सिंपल था चलो अब इसी को थोड़ा सा और
घुमाते हैं अब मैंने बोला कि लेट्स से कि
मैं इलेक्ट्रोलिसिस करती हूं एक्वास
पॉसिबिलिटी है पहले बात करेंगे कैथोड की
कैथोड में क्या होगा रिडक्शन तो पहले तो
यह देखेंगे कि यहां पे ना कैथोड में एक से
ज्यादा पॉसिबिलिटीज पॉसिबल है ठीक है एक
तो पॉसिबल ये है कि na0 जो है ये एक
इलेक्ट्रॉन गेन करके बना ले ए ठीक है ये
एक पॉसिबिलिटी है स माइ इलेक्ट्रॉन गेन तो
करेगा नहीं क्योंकि वो ऑलरेडी नेगेटिव है
लेकिन h+ जो है ये भी इलेक्ट्रॉन गेन कर
सकता है और गेन करके बना लेगा h2
गैस
राइट तो इस तरह से मेरे पास ये दो
पॉसिबिलिटीज है अब यार डिसाइड ये करना है
कि अब दोनों चीजें तो होंगी नहीं तो इन
दोनों में से कौन सा रिएक्शन एक्चुअली में
होगा कैथोड में अब वो बताने के लिए मुझे
इन दोनों रिएक्शन के e नॉ की वैल्यू देखनी
पड़ेगी तो सोडियम अब हाइड्रोजन के केस में
स्टैंडर्ड हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड याद है ना
इसके केस में तो इलेक्ट्रोड पोटेंशियल
क्या होगा जीरो क्योंकि हम इसको रेफरेंस
मानते हैं सोडियम की अगर हम बात करें तो
इसका जो इलेक्ट्रोड पोटेंशियल होगा दैट इज
- 2.71 वोल्ट्स कहां से आया टेबल से आया
ओबवियसली हम रट के तो बैठेंगे नहीं ये
सारी वैल्यूज है ना तो इसका e नो - 2.71
है ठीक है अब e नो की वैल्यू दे देने के
बाद क्या आप बता सकते हो कि कौन सा
रिएक्शन एक्चुअली में होगा कैथोड पे e नो
की वैल्यू अगर नेगेटिव होती है तो क्या
होता है इसका क्या मतलब होता है इसका मतलब
होता है कि इसका जो रिड्यूस्ड फॉर्म है
जैसे सोडियम का जो रिड्यूस्ड फॉर्म है वो
क्या होगा दैट इज लेस स्टेबल देन
हाइड्रोजन e नो की वैल्यू जभी भी नेगेटिव
आती है इसका मतलब ही यही होता है कि इसका
यानी कि यहां पर सोडियम का जो रिड्यूस्ड
फॉर्म होगा वो हाइड्रोजन से कम स्टेबल
होगा तो जो जिसका रिड्यूस्ड फॉर्म कम
स्टेबल है वो रिडक्शन अटर गो क्यों करेगा
यानी कि इस केस में इसका नेगेटिव वैल्यू
ये शो कर रहा है कि इसका जो रिड्यूस्ड
फॉर्म
है वह लेस स्टेबल
होगा चूंकि लेस स्टेबल होगा तो फिर भैया
मैं रिड्यूस्ड फॉर्म में जाऊ क्यों राइट
सबको तो स्टेबल होना है राइट तो यानी कि
सोडियम जो है रिडक्शन अंडरगो नहीं करेगा
तो कौन सा रिएक्शन ज्यादा फेवरेबल होगा ये
वाला ठीक है तो कैथोड में कौन सा वाला
रिएक्शन होगा ये हाइड्रोजन वाला रिएक्शन
विल एक्चुअली टेक प्लेस इन कैथोड ठीक है
अच्छा अब अगर मुझे कैथोड का नेट रिएक्शन
लिखना हो तो कैसे लिखेंगे ये नेट रिएक्शन
नहीं है क्योंकि हमने शुरुआत h+ से थोड़ी
ना की थी h+ तो h2o के अंदर था राइट वो तो
मैंने यहां पर ऐसे लिखा था बट एक्चुअली
हमने शुरुआत किस चीज से की थी
naclo3 है h2o से मुझे क्या मिल जाएगा
मुझे मिल जाएगा हाफ
h2 गैस ठीक है प्लस
- कैसे इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करके मतलब
इस h2o में क्या था h+ प्स - ओ माइन एज इट
इज रहेगा h+ के बदले में h+ ने इलेक्ट्रॉन
एक्सेप्ट करके यह बना दिया तो यह मेरा
कैथोड का नेट रिएक्शन हो जाएगा ठीक है यह
बात समझ में आ गई बहुत सही अब बात करेंगे
हम एनोड की तो एनोड की भी सबसे पहले हम
डिस्कस करेंगे पॉसिबिलिटी क्योंकि यहां पर
भी एक से ज्यादा पॉसिबिलिटीज
है एक पॉसिबिलिटी यह हो सकती है कि जो स
माइनस है यह इलेक्ट्रॉन लूज करके बना दे
cl2 दूसरी पॉसिबिलिटी यह हो सकती है य ओ
माइनस यह भी इलेक्ट्रॉन लूज कर सकता है इन
द सेंस दूसरा पॉसिबिलिटी कुछ ऐसा हो सकता
है कि जो वाटर है ना यह बना दे o2 प्स ए
प् प्स फ इले
ऐसी भी एक पॉसिबिलिटी है ठीक है तो अब ये
दोनों पॉसिबिलिटी है मेरे पास लेकिन इसमें
से कौन सा वाला रिएक्शन होगा फिर से वही
सवाल तो उसके लिए फिर से मुझे e नो की
वैल्यू चाहिए इन दोनों के लिए ठीक है तो
अगर मैं स माइन की बात करूं तो इसके e नो
की जो वैल्यू है दैट इज 1.36 वोल्ट और अगर
मैं h2o की बात करूं तो यहां पर e नो की
जो वैल्यू है दैट इज
1.23 वोल्ट्स
ठीक है ये दोनों वैल्यूज है अब ये बताओ इन
वैल्यूज के पता होने के बाद हम कैसे
डिसाइड करेंगे कि एनोड में इन दोनों में
से कौन सा प्रोसेस होगा अब चूंकि एनोड है
तो एनोड में क्या होगा रिडक्शन तो होगा
नहीं एनोड में होगा
ऑक्सीडेशन ठीक है तो इसका मतलब इन दोनों
में से देखो e नो की वैल्यू जिसकी कम है
उसका रिड्यूस्ड फॉर्म जो है कम स्टेबल
होगा राइट दैट इज व्हाट वी अंडरस्टैंड
जैसे यहां पर भी देखो हाइड्रोजन का जीरो
था ये इसका सोडियम का जीरो से कम था तो
इसीलिए इसका रिड्यूस्ड फॉर्म लेस स्टेबल
था तो यहां पर भी जिसकी वैल्यू कम है इस
उसका रिड्यूस्ड फॉर्म जो है वो लेस स्टेबल
होगा यानी कि वो रिडक्शन अंडर गो नहीं
करेगा तो वो क्या अंडरगो करेगा ऑक्सीडेशन
तो यानी कि दोनों में से जिसकी वैल्यू कम
है वो ऑक्सीडेशन अंडरगो करेगा यानी कि
जिसकी वैल्यू कम है वो एनोड पे रिएक्शन
होगा तो वैल्यू कम किसकी है इसकी कम है तो
यानी कि यही वाला जो रिएक्शन है आइडियल
यही वाला रिएक्शन जो है होना
चाहिए ठीक है यहां तक क्लियर है यह
रिएक्शन होना चाहिए अभी तक लेकिन यहां पर
एक प्रॉब्लम आ जाती है और वो प्रॉब्लम यह
आ जाती है कि यह वाला जो रिएक्शन है जो
हमें लग रहा है कि होना चाहिए इस वाले
रिएक्शन में ऑक्सीजन इवॉल्वड है और हम
नोटिस करते हैं कि ऑक्सीजन के साथ जो है
पोटेंशियल का इशू है यानी कि ये एक ऐसा
रिएक्शन है मैंने बताया था याद
इलेक्ट्रोलिसिस प्रोडक्ट के तीसरे फैक्टर
में कि कभी-कभी क्या होता है कि रिएक्शन
फीजिबल तो होता है बट काइनेटिकली वो इतने
स्लो होते हैं कि उनको मतलब रिएक्शन को
करवाने के लिए हमें खूब सारा एक्स्ट्रा
पोटेंशियल डालना पड़ता है जिसे हम ओवर
पोटेंशियल कहते हैं तो इस रिएक्शन के साथ
वही ओवर पोटेंशियल वाली प्रॉब्लम है तो
हालांकि e नो के वैल्यू के हिसाब से इसी
रिएक्शन को होना चाहिए था एनोड पर बट व
पोटेंशियल की प्रॉब्लम की वजह से यह वाला
रिएक्शन जो है वो एनोड पर नहीं होगा तो
एनोड पर कौन सा रिएक्शन होगा एनोड पर ये
वाला रिएक्शन होगा तो इसका मतलब अगर हम
ओवरऑल कैथोड एनोड सबको कंसीडर करते हुए
अगर हम ओवरऑल नेट रिएक्शन की बात करें
ओवरऑल रिएक्शन कैसा होगा ओवरऑल रिएक्शन
मेरा कुछ ऐसा होगा ये स माइ कहां से आया
है
कि वहां पर h2o था ठीक है तो
naclo4 h2 मिला था प्लस - मिला था एनोड के
अंदर हमें क्या प्रोडक्ट्स मिले हमें cl2
मिले हाफ cl2 मिला हमें और इस
फाइनली प्रोडक्ट्स मुझे क्या-क्या मिले
मुझे cl2 मिला प्रोडक्ट
में मुझे h2 मिला एज अ प्रोडक्ट और मुझे
क्या मिला
na-k में लिख दिया राइट तो देखो जब मोल्टन
मोमेंट हमारे पास ज्यादा रिएक्टेंट्स हैं
इसका मतलब हमारे पास ज्यादा आयस के ऑप्शन
है इसका मतलब हमारे पास ज्यादा
पॉसिबिलिटीज हैं कैथोड और एनोड पे ठीक है
बट इन प्रोडक्ट्स को
प्रेडिक्शन ट्राई करते हैं प्रॉब्लम नंबर
वन हाउ मच चार्ज इज रिक्वायर्ड फॉर द
फॉलोइंग रिडक्शंस 1 मोल ऑफ al3 + 2al अब
al3 प से
al0 तीन इलेक्ट्रॉन एक्सेप्ट करके ही
बनाएगा
तो यानी कि इस केस में मुझे कितने चार्ज
की जरूरत पड़ रही है इस रिडक्शन के लिए 3
मोल इलेक्ट्रॉन चार्ज की यानी कि 3f चार्ज
की दैट इज 3 * 96
487 दैट इज इक्वल टू 28 9461 कूलम इतने
चार्ज की मुझे जरूरत पड़ेगी वही 1 मोल ऑफ
cu2 प2 स cu2 प् से स कैसे बनेगा दो
इलेक्ट्रॉन लेकर के तो इस रिडक्शन के लिए
मुझ कितने चार्ज की जरूरत पड़ेगी इसके लिए
मुझे जरूरत पड़ेगी 2 मोल इलेक्ट्रॉन में
जितना चार्ज है यानी कि 2f दैट इज 2 * 96
487 दैट इज इक्वल टू
192 974 कूलम इतने चार्ज की जरूरत पड़ेगी
देखते हैं प्रॉब्लम नंबर टू हाउ मच
इलेक्ट्रिसिटी इन टर्म्स ऑफ फैराडे इज
रिक्वायर्ड टू प्रोड्यूस 20 ग्राम्स ऑफ
कैल्शियम फ्रॉम मोल्टन cacl2 अब देखो
cacl2 डिसोसिएट कैसे कर cacl2 से मुझे अगर
कैल्शियम चाहिए cacl2 में कैल्शियम किस
फॉर्म में है ca2 प फॉर्म में ca2 प्लस जब
दो इलेक्ट्रॉन लेगा तभी वो कैल्शियम
बनाएगा ठीक है अब मुझे बताना है कि कितना
इस अब देखो इस रिएक्शन को होने के लिए
कितने इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत है इस
रिएक्शन को होने के लिए 2f इलेक्ट्रिसिटी
की जरूरत है ठीक है अब 2f इलेक्ट्रिसिटी
प्रोवाइड करने से कितना कैल्शियम बन रहा
है मोल कैल्शियम
न मोल कैल्शियम मतलब कितना ग्राम कैल्शियम
जितना इसका एटॉमिक वेट है च इज 40
ग्रामस ठीक है तो इसका मतलब जब
हम 40 ग्रामस ऑफ कैल्शियम को पा रहे हैं
तो हम कितनी इलेक्ट्रिसिटी दे रहे हैं 2f
चार्ज हम पास करवा रहे हैं तो अगर मुझे 20
ग्राम ऑफ कैल्शियम चाहिए तो मुझे कितना
चार्ज पास कराना होगा 2f बा 40 *
20 दैट इज इक्वल टू f दैट इज 96 487 कूलम
ऑफ चार्ज मुझे पास कराना होगा या इतना
इलेक्ट्रिसिटी मुझे पास कराना होगा तो
बच्चों फाइनली हमने इलेक्ट्रोकेमिकल सेल्स
और इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स दोनों ही डिटेल
में समझ लिया है तो चलो फटाफट देखते हैं
एक कंपैरिजन बिटवीन द टू और उसी के साथ हो
जाएगा एक क्विक रीकैप तो अगर हम बात करें
गलवानिक सेल्स यानी कि इलेक्ट्रो केमिकल
सेल्स की तो ये कन्वर्ट करते हैं केमिकल
एनर्जी टू इलेक्ट्रिकल एनर्जी दूसरी तरफ
इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स कन्वर्ट करते हैं
इलेक्ट्रिकल एनर्जी टू केमिकल एनर्जी अगर
बात करें हम गलवानिक सेल्स की तो यहां पर
वर्क इज डन बाय द सेल सेल जो है वो काम
करता है और इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस करता
है दूसरी तरफ अगर हम बात करें
इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स की तो यहां पर वर्क
इज डन ऑन द सेल सेल काम नहीं करता है यहां
पर हम बाहर से जो एक्सटर्नल इलेक्ट्रिकल
एनर्जी प्रोवाइड करते हैं वह सेल के ऊपर
काम करता है और केमिकल रिएक्शंस अकर
करवाता है अगर बात करें डेल्टा g की
वैल्यू की तो इलेक्ट्रोकेमिकल सेल्स यानी
कि
गैल्वेनोमीटर
तरफ अगर हम इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स की बात
करें तो यहां पर हम डील कर रहे होते हैं
विथ नॉन स्पॉन्टेनियस रिएक्शंस देयर फॉर
डेल्टा g इज ग्रेटर दन 0 अगर सेटअप की बात
करें तो इलेक्ट्रोकेमिकल सेल यानी कि
गैलवे एक सेल में दो सेपरेट हाफ सेल्स
होते हैं तो दो इलेक्ट्रोड्स दो सेपरेट
हाफ सेल्स में डिप्ड होते हैं दूसरी तरफ
अगर हम इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स की बात करें
तो यहां पर दोनों इलेक्ट्रोड सेम सेल के
अंदर ही डिप्ड होते हैं अगर बात करें
गलवानिक सेल की तो यहां पर हम देखते हैं
कि एनोड नेगेटिव होता है क्यों क्योंकि इट
हैज अ नेगेटिव पोटेंशियल विद रेस्पेक्ट टू
द सॉल्यूशन
तो यहां पर गैल्वेद में एनोड होता है
नेगेटिव और कैथोड होता है पॉजिटिव दूसरी
तरफ अगर हम बात करते हैं इलेक्ट्रोलिटिक
सेल की तो यहां पर कैथोड होता है नेगेटिव
क्यों क्योंकि यह नेगेटिव टर्मिनल ऑफ़ द
बैटरी से कनेक्टेड होता है और एनड होता है
पॉजिटिव तो बच्चों अब हम बात करने वाले
हैं बैटरी की याद है जब इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री बिल्कुल शुरुआत की थी मैंने तो
मैंने सबसे पहला एप्लीकेशन बताया था बैटरी
का क्योंकि बैटरी से हमारे आसपास की बहुत
सारी चीजें चाहे क्लॉक है चाहे मोबाइल है
चाहे लैपटॉप है चाहे कैमरा है ऐसी बहुत
सारी हमारी डे टू डे लाइफ की चीजें ऑपरेट
होती हैं तो इट इज वेरी इंपॉर्टेंट कि हम
बैटरी के वर्किंग को समझे तो बैटरी होता
क्या है अ सेल और मोर दन अ सेल कनेक्टेड
इन सीरीज जब एक या एक से ज्यादा सेल्स
सीरीज में कनेक्टेड होते हैं तो हमें
मिलता है एक बैटरी तो अगर बैटरी के बात
करें तो यह क्या करते हैं मतलब बेसिकली यह
करते क्या हैं तो यह इलेक्ट्रिसिटी जन रेट
करते हैं राइट यानी कि ये किस तरह के सेल
है यह
गैल्वेनोमीटर
रिचार्जेबल होना चाहिए अ बैटरी लॉन्ग
लास्टिंग होना चाहिए एनवायरमेंटल पोल्यूशन
क्रिएट नहीं करना चाहिए तो इस तरह की आपकी
एक लंबी सी विश लिस्ट होगी जिसके अंदर एक
बहुत इंपॉर्टेंट फीचर जो हम बैटरी में
चाहते हैं वो ये भी होगा कि इसकी जो
वोल्टेज है ये वैरी नहीं करनी चाहिए जब हम
इसे यूज कर रहे हैं ठीक है तो इस तरह के
जो फीचर्स हमारे लिए डिजायरेबल है किसी भी
बैटरी में इनको ध्यान में रखते हुए बहुत
तरह के बैटरीज डिजाइन किए गए हालांकि हर
जगह जो बेसिक कांसेप्ट है वो वही है
रेडॉक्स रिएक्शन के थ्रू जो एनर्जी जनरेट
होगी उससे हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेंगे
एंड
दैट्ची है तो चलो देखते हैं बैटरीज दो तरह
के होते हैं प्राइमरी बैटरीज एंड सेकेंडरी
बैटरीज तो सबसे पहले समझते हैं प्राइमरी
बैटरी तो प्राइमरी बैटरीज क्या होती हैं
यह वैसी बैटरीज होती हैं जिनके अंदर
रिएक्शन एक ही बार होता है और उसको आप एक
पीरियड ऑफ़ टाइम के लिए यूज़ कर लेने के
बाद आप दोबारा रीयूज नहीं कर सकते हो इसका
यह मतलब है कि जैसे आपने देखा होगा बहुत
बार क्या होता है जो बैटरीज आप लेते हो
मार्केट से उसको आपने जैसे घड़ी के अंदर
जो बैटरी होती है आपने घड़ी में लगाया कुछ
टाइम तक वो चलता है कुछ महीने वो बैटरी
आराम से चलती है यूज़ होते रहती है होते
रहती है होते रहती है बट एक बार जैसे ही
उसका वो पूरा पीरियड खत्म हो गया पीरियड
इन द सेंस एक बार जैसे ही वो पूरा रिएक्शन
जितना हो सकता था वो खत्म हो गया उसके बाद
हम उसको दोबारा रीयूज नहीं कर सकते हैं तो
उसके बाद आपको बैटरी चेंज करनी पड़ती है
ठीक है तो ये होती है प्राइमरी बैटरीज तो
यहां पर कोई भी बैटरी को रिचार्जिंग वाला
फंडा होता नहीं है तो प्राइमरी बैटरीज के
वर्किंग को समझने के लिए कुछ एग्जांपल्स
लेते हैं प्राइमरी बैटरीज का तो एक बहुत
बढ़िया एग्जांपल है ड्राई सेल जो हम अपने
आसपास बहुत सारी चीजों में यूज़ करते हैं
दूसरा एग्जांपल डिस्कस करेंगे हम मरकरी
सेल जो जो भी कई सारी चीजों में यूज़ होता
है तो चलो सबसे पहले डिस्कस करते हैं
ड्राई सेल जिसे हम ले क्लच सेल भी कहते
हैं नेम आफ्टर द साइंटिस्ट जिन्होंने इसे
डिजाइन किया था तो किसी भी सेल के वर्किंग
को समझने के लिए सबसे पहले तो हमें ये
जानना होता है कि उस सेल के अंदर कैथोड
एनोड और इलेक्ट्रोलाइट कौन-कौन से हैं ठीक
है तो यहां भी हम वही करेंगे ड्राई सेल को
समझने के लिए जो सबसे इजी चीज आप सोच सकते
हो वो है जो बैटरीज हम अपने आसपास यूज
करते हैं ये ये बैटरीज कुछ ऐसी दिखती हैं
राइट अगर ये बैटरी का स्ट्रक्चर आपके
दिमाग में है तो देखो ड्राई सेल बड़ी
आसानी से समझ में आएगा तो ड्राई सेल के
अंदर एनोड होता है जिंक का एक कंटेनर इसी
शेप का ऐसे सिलेंडर कल शेप का एक जिंक
कंटेनर होता है जो एनोड की तरह काम करता
है और इसके बीच में एक रॉड होती है कार्बन
की जिसके आसपास मैंगनीज ऑक्साइड और कार्बन
का पाउडर होता है वो काम करता है कैथोड की
तरह ठीक है अब आप पूछोगे कि यहां पर
इलेक्ट्रोलाइट क्या होता है इलेक्ट्रोलाइट
यह कैथोड और एनोड के बीच में फीड होता है
और यहां पर इलेक्ट्रोलाइट होता है एक
पेस्ट जो कि बना होता है nh4cl और z zncl2
इन दोनों को मिलाकर मतलब अमोनियम क्लोराइड
और जिंक क्लोराइड का पेस्ट जो है वो यहां
पर इलेक्ट्रोलाइट की तरह काम करता है ठीक
तो लगभग सेटअप समझ में आ गया ओके अब
रिएक्शन की बात करते हैं तो वैसे तो देखो
यहां भी वही होता है एनोड पे ऑक्सीडेशन
कैथोड पे रिडक्शन ठीक है लेकिन जो एक्चुअल
रिएक्शंस होते हैं वो काफी
कॉम्प्लेक्शन के अंदर तो अभी हम नहीं घुस
बट एटलीस्ट एक सिंपलर फॉर्म में हम चीजों
को समझ सकते हैं एनोड की अगर बात करें तो
वहां होता है ऑक्सीडेशन यानी कि लॉस ऑफ
इलेक्ट्रॉन एनोड क्या था मेरा बताओ जिंक
का कंटेनर तो जिंक क्या होता है
इलेक्ट्रॉन लूज करके बना देता है zn20 ठीक
है तो हो गया ऑक्सीडेशन जिंक का ओके अब
बात करते हैं कैथोड की कैथोड क्या था मेरा
कार्बन का रॉड जिसके आसपास क्या था mno2
मैंगनीज ऑक्साइड का पाउडर तो रिड्यूस कौन
होता है मैंगनीज मैंगनीज ऑक्साइड में
मैंगनीज जो है वो + 4 ऑक्सीडेशन स्टेट में
है और जब यह रिडक्शन अंडरगो करता है उसके
बाद इसका ऑक्सीडेशन स्टेट हो जाता है + 3
क्योंकि यह बना लेता है
mno2 पे होता है रिडक्शन तो लगभग
ऑक्सीडेशन रिडक्शन समझ में आ गया लेकिन
जैसा कि मैंने बताया यहां पे चीजें इतनी
सिंपल होती नहीं है बहुत
कॉम्प्लेक्शन से मुझे zn20 मिला दूसरे
रिएक्शन से मुझे nh3 यानी कि अमोनिया मिला
अब ये अमोनिया और zn20
आपस में मिलक के
कॉम्प्लेक्टेड में नहीं जाएंगे तो अभी के
लिए एक और बात जाननी जरूरी है कि ये जो
ड्राई सेल होता है इसका पोटेंशियल इज नियर
1.5 वोल्ट्स इनफैक्ट मेरे हाथ में जो ये
बैटरी है अगर इसमें भी आप फोकस करो तो आप
देखोगे कि इसमें मेंशन रहता है कि दिस इज
1.5 वोल्ट आप चाहो तो ये आप अपने घर पे भी
किसी बैटरी पे चेक कर सकते हो एक और
प्राइमरी बैटरी की बात करेंगे जो कि है
मरकरी सेल तो मरकरी सेल अक्सर ही जो लो
करंट
डिवाइसेज कि रिस्ट वॉचेस जैसे कि हियरिंग
एड्स तो ऐसी जगहों पे हम मरकरी सेल का
यूज़ करते हैं तो सबसे पहले देखेंगे यहां
पर एनोड कैथोड और इलेक्ट्रोलाइट क्या होते
हैं तो बात करते हैं एनोड की तो एनोड यहां
पर होता है जिंक मरकरी अमलगम एलॉय ठीक है
कैथोड की अगर बात करें तो कैथोड यहां पर
होता है h यानी कि मरकरी का ऑक्साइड और
कार्बन ये दोनों एक्ट करते हैं ये दोनों
साथ में मिलकर के एक्ट करते हैं एज कैथोड
अब बात करते हैं इलेक्ट्रोलाइट की तो
इलेक्ट्रोलाइट यहां पर भी एक पेस्ट होता
है उस पेस्ट में क्या-क्या होता है k यानी
कि पोटेशियम हाइड्रोक्साइड और
zno2 हो ग तो अगर एक बार पता चल गया एनोड
कैथोड और इलेक्ट्रोलाइट क्या है उसके बाद
वी आर रेडी टू सी द रिएक्शंस रिएक्शंस
जैसा कि मैंने पहले भी बताया है काफी
कॉम्प्लेक्टेड में नहीं जाएंगे बट यस
ओवरऑल रिएक्शन जरूर देखेंगे तो मैंने
बताया एनोड मेरा जिंक था कैथोड मेरा
hg1 +
hgoals.in क्शन हो रहा है उसका रिएक्शन
कुछ ऐसा हो रहा है राइट तो कुछ इस तरीके
से यह मरकरी सेल काम करती है इसके बारे
में खास बात यह है कि इसका जो पोटेंशियल
होता है दैट इज अराउंड 1.35 वोल्ट्स और
इसके लाइफ टाइम में यह वोल्टेज कांस्टेंट
रहती है ये 1.35 वोल्ट्स रिमन कांस्टेंट
एक जाहिर सा सवाल जो सबके दिमाग में आता
है कि ये पोटेंशियल कांस्टेंट क्यों रह
रहा है जब हम सेल को यूज कर रहे हैं तो यह
वैरी क्यों नहीं कर रहा है राइट तो आपने
ध्यान या होगा कि ये जो हम बना रहे हैं
सेल जैसे मरकरी सेल भी हमने बनाया यहां पर
हम इनका कंस्ट्रक्शन कुछ ऐसे ही करते हैं
कि आयन का इवॉल्वमेंट ही ना हो जैसे
सॉल्यूशन में आयन होते हैं राइट और
जैसे-जैसे रिएक्शन प्रोसीड करता है तो उन
आयस का कंसंट्रेशन चेंज होते रहता है राइट
किसी आयन का कंसंट्रेशन घट रहा होता है
किसी का बढ़ रहा होता है बट यहां पर ना वो
सॉल्यूशन के अंदर आयन का इवॉल्वमेंट है ही
नहीं और उसी वजह से जो है हमारा पोटेंशियल
कांस्टेंट रहता है तो बच्चों अब बात
करेंगे हम सेकेंडरी बैटरीज की आई एम
प्रिटी श्यर प्राइमरी बैटरीज के बारे में
जानने के बाद आपने गेस कर ही लिया होगा कि
सेकेंडरी बैटरीज क्या होती हैं यह वैसे
बैटरीज होती हैं जिनको हम रीयूज कर सकते
हैं जैसे एक बार हमने यूज किया वो पूरा
बैटरी डिस्चार्ज हो गया उसके बाद हम उस
बैटरी को चार्ज कर सकते हैं कैसे चार्ज कर
सकते हैं करंट पास करके इन द ऑपोजिट
डायरेक्शन और हम उसे वापस से चार्ज कर
सकते हैं वापस से रीयूज कर सकते हैं तो
यानी कि जब हम सेकेंडरी बैटरीज की बात
करेंगे तो यहां पर हम चार्जिंग और
डिस्चार्ज ंग इन दोनों साइकिल्स की बात
करेंगे तो चलो अब एक सेकेंडरी बैटरी का
एग्जांपल लेते हैं और यहां पर हम एग्जांपल
लेंगे लेड स्टोरेज बैटरी का कहां पर काम
आती है इस तरह की बैटरीज जैसे कि
ऑटोमोबाइल्स में जैसे कि इनवर्टर्स में हम
लोग कई बार घर पे इन्वर्टर रखते हैं राइट
पावर बैकअप के लिए तो आपने देखा होगा कि
इन इनवर्टर्स को हम चार्ज कर सकते हैं
राइट रिचार्ज होते हैं ये ठीक है तो यहां
पर भी सबसे पहले वही बातें करेंगे कि एनोड
क्या है कैथोड क्या है इलेक्ट्रोलाइट क्या
है तो एनोड की अगर हम बात करें तो यहां पर
एनोड होता है लेड कैथोड की बात करें तो
कैथोड में होता है अ ग्रिड ऑफ लेड मतलब
बहुत सारे लेड अलोंग विद लेड ऑक्साइड pbo2
ये एक्ट करता है एज कैथोड इलेक्ट्रोलाइट
की अगर बात करें तो यहां पर हम एक एसिड का
सॉल्यूशन लेते हैं व्हिच इज सल्फ्यूरिक
एसिड इनफैक्ट उसका भी एक फिक्स्ड
कंसंट्रेशन होता है लगभग 38 पर सॉल्यूशन
ऑफ सल्फ्यूरिक एसिड यहां पर इलेक्ट्रोलाइट
का काम करता है ठीक है तो चलो अब रिएक्शंस
देखते हैं तो चलो सबसे पहले बात करेंगे कि
ये जो लेड स्टोरेज बैटरी है इसके
डिस्चार्ज और चार्जिंग के दौरान होता क्या
है तो जब इसके डिस्चार्ज ंग हो रही होती
है इसका मतलब है द बैटरी इज इन यूज जब हम
उस बैटरी को यूज कर रहे होते हैं तो वो
डिस्चार्ज होते रहता है क्वाइट लॉजिकल
राइट अब जब हम इसे यूज कर रहे होते हैं तो
ये कैसे बिहेव करता है ये बिहेव करता है
जस्ट लाइक अ गलवानिक सेल या फिर
इलेक्ट्रोकेमिकल सेल क्योंकि जब हम इसे
यूज कर रहे होते हैं तो क्या होता है इसके
अंदर केमिकल रिएक्शंस हो रहे होते हैं और
उन केमिकल रिएक्शन से इलेक्ट्रिसिटी जनरेट
हो रही होती है और हम उसी इलेक्ट्रिसिटी
को यूज़ कर रहे होते हैं फॉर सो मेनी ऑफ
आवर डिवाइसेज ठीक है बात क्लियर है अब
रिएक्शंस की बात करते हैं रिएक्शन बच्चा
वही सेम कहानी एनोड पे ऑक्सीडेशन कैथोड पे
रिडक्शन एनोड क्या था मेरा लेड था देखो
लेड से ये क्या बन गया ऑक्सीडो के लेड
सल्फेट रिडक्शन की बात करें अगर कैथोड पे
क्या हो रहा है pbo2 लेड ऑक्साइड था कैथोड
पे वो भी देखो क्या बना दिया लेड सल्फेट
तो ये ऑक्सीडेशन रिडक्शन की रिएक्शन हो
रही हैं अब इन रिएक्शंस को अगर आप थोड़ा
गौर से देखो तो आप देखोगे कि हर जगह हम
क्या यूज कर रहे हैं सल्फेट आयस हाइड्रोजन
आयस ये चीजें यूज़ हो रही है और ये मुझे
कहां से मिल रही हैं इलेक्ट्रोलाइट से
क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट में है सल्फ्यूरिक
एसिड व्हिच इज h2so 4 ठीक है अब जैसे-जैसे
ये रिएक्शंस होते रहेंगे मेरा सल्फ्यूरिक
एसिड जो है वो डीकंपोज होता रहेगा होता
रहेगा होता रहेगा एक ऐसा टाइम आएगा जब
मेरा सल्फ्यूरिक एसिड ऑलमोस्ट डीकंपोज हो
चुका होगा और उसे रिप्लेस करने की जरूरत
होगी करेक्ट और यहीं पर हम बात करते हैं
चार्जिंग की यानी कि जैसे ही वो
सल्फ्यूरिक एसिड का स्टॉक खत्म हो जाएगा
तो फिर मेरा बैटरी यूज करने लायक ही नहीं
रहेगा वो एफिशिएंसी शो ही नहीं करेगा
क्योंकि वो रिएक्शंस हो नहीं रहे होंगे
राइट तो अब क्या करें अब शुरू होगा हमारा
चार्जिंग का प्रोसेस चार्जिंग के प्रोसेस
के दौरान हम क्या करेंगे एगजैक्टली अपोजिट
रिएक्शन करवाएंगे अगर इन्हीं रिएक्शन को
मैं उल्टा उल्टा कर दूं मतलब प्रोडक्ट को
रिएक्टेंट की तरफ ले आऊ रिएक्टेंट को
प्रोडक्ट की तरफ ले आऊ ऑलमोस्ट ठीक है अगर
एगजैक्टली उल्टा कर दूं इन रिएक्शंस को तो
क्या होगा मेरा सल्फ्यूरिक एसिड का स्टॉक
फिर से बन जाएगा है कि नहीं यहां पर
सल्फ्यूरिक एसिड को यूज कर लिया था उल्टा
कर दूंगी तो सल्फ्यूरिक एसिड फिर से बन
जाएगा बट यह रिवर्स में कैसे कर रही हूं
रिवर्स मैं बेसिकली ऐसे कर रही हूं कि अब
मैं इलेक्ट्रिक करंट को पास करके ये
रिवर्स रिएक्शंस को अकर करवा रही हूं
क्योंकि देखो ना डिस्चार्ज ंग के टाइम पे
जो रिएक्शंस हो रहे थे वो तो स्पॉन्टेनियस
रिएक्शंस थे वो खुद से हो रहे थे बट अब
मुझे इन रिएक्शंस को उल्टे डायरेक्शन में
करवाना है बट वो क्यों होंगे हम तो ऐसे ही
होते हैं तो उल्टे डायरेक्शन में कराने के
लिए मुझे एक एक्सटर्नल सोर्स से
इलेक्ट्रिसिटी देनी पड़ेगी मुझे
इलेक्ट्रिक करंट पास कराना होगा एंड दिस
इज एगजैक्टली व्हाट हैपेंस ड्यूरिंग
चार्जिंग इसीलिए देखो चार्जिंग के जो
रिएक्शंस हैं वो डिस्चार्ज के रिएक्शंस के
ठीक उल्टे हैं तो इसका मतलब चार्जिंग के
टाइम पर
मेरा यह जो बैटरी है यह किस तरह के सेल की
तरह काम कर रहा है एब्सलूट इट इज वर्किंग
लाइक एन इलेक्ट्रोलिटिक सेल क्योंकि
चार्जिंग के टाइम पर क्या हो रहा है कि हम
इसमें से करंट पास करवा के नॉन
स्पॉन्टेनियस केमिकल रिएक्शंस को अकर करवा
रहे हैं इनफैक्ट अगर मैं प्रैक्टिकल एक
एग्जांपल से रिलेट करूं जैसा कि मैंने
बताया कि इस तरह की लेड स्टोरेज बैटरीज को
हम ऑटोमोबाइल्स में भी यूज करते हैं तो
ऑटोमोबाइल में भी जब चार्जिंग की बारी आती
है तो यह एक्स्ट टर्नल सोर्स क्या होता है
कार का इंजन कार के इंजन से मुझे यह
एक्सटर्नल जो इलेक्ट्रिकल एनर्जी चाहिए वो
मुझे मिलती है जिससे मेरा यह पूरा
चार्जिंग का प्रोसेस चलते रहता है ठीक है
सो आई होप विद दिस चार्जिंग और
डिसचार्जिंग ऑफ अ लेड स्टोरेज बैटरी इज
क्लियर तो बच्चा पाटी अब हम डिस्कस करने
वाले हैं फ्यूल सेल्स अब ये फ्यूल सेल्स
क्या होते
हैं नाम से पता चल रहा है कि यह फ्यूल से
कुछ तो फ्यूल का यूज कर ते हैं तो देखो यह
एक तरह के
गैल्वेद ऐसे केमिकल रिएक्शंस होंगे जिससे
हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेंगे ये केमिकल
रिएक्शंस यहां पर क्या होंगे इन केमिकल
रिएक्शंस को यहां पर हम करेंगे यूजिंग
फ्यूल्स कुछ ऐसे फ्यूल्स जैसे कि
हाइड्रोजन जैसे कि मीथेन जैसे कि मेथेनॉल
जिनके कंबशन से खूब सारी एनर्जी रिलीज
होती है इनके कंबशन कराएंगे हम इन केमिकल
रिएक्शंस में और फिर उससे जो एनर्जी रिलीज
होगी उससे हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेंगे
और यही काम होता है फ्यूल सेल्स का ठीक है
फ्यूल सेल्स इतने पॉपुलर क्यों हैं मतलब
इनके बारे में हम इतना क्यों पढ़ रहे हैं
दैट इज बिकॉज़ ऐसे तो हम इन फ्यूल से
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट थर्मल पावर प्लांट्स
में भी करते हैं वहां पर भी हम वही करते
हैं कोल वगैरह से हम इलेक्ट्रिसिटी जनरेट
करते हैं बट उसका एक बहुत बड़ा
डिसएडवांटेज यह होता है कि उससे
एनवायरमेंटल पोल्यूशन बहुत ज्यादा होता है
और फ्यूल सेल्स के केस में पोल्यूशन फ्री
है सो सबसे बड़ा एडवांटेज ये है दूसरा
एडवांटेज ये भी है कि जो फ्यूल सेल्स की
जो एफिशिएंसी है वो थर्मल पावर प्लांट्स
के मुकाबले काफी ज्यादा है मतलब अगर एक
थर्मल पावर प्लांट की एफिशिएंसी 40 पर है
तो एक फ्यूल सेल की एफिशिएंसी इज ऑलमोस्ट
70 पर तो इतना ज्यादा एफिशिएंसी का भी
फर्क है तो चलो समझते हैं कि एक फ्यूल सेल
कैसे काम करता है तो यहां पर हम डिस्कस
करेंगे एक ऐसे फ्यूल सेल की जो हाइड्रोजन
और ऑक्सीजन को यूज करके प्रोड्यूस करता है
इलेक्ट्रिसिटी तो चलो देखते हैं कि ये
फ्यूल सेल काम कैसे करता है तो फ फल सेल
में हम कुछ यूं करते हैं कि जो एनोड है उस
एनोड के अंदर हम डाल देते हैं फ्यूल को
फॉर एग्जांपल यहां पर मेरा फ्यूल
हाइड्रोजन है तो हाइड्रोजन फ्यूल को हम
डाल देते हैं एनोड में ठीक है अच्छा एनोड
और कैथोड के बीच में हम एक पार्टीशन बना
देते हैं एक मेंब्रेन बना देते हैं बट वो
भी एक खास तरीके का मेंब्रेन होता है जिसे
हम कहते हैं प्रोटॉन एक्सचेंज मेंब्रेन
यानी कि ये ऐसा मेंब्रेन है जो सिर्फ
प्रोटॉन को अपने थ्रू जाने देता है दैट इज
सिर्फ h+ को अपने थ्रू जाने देगा और किसी
को जाने नहीं देगा ठीक है अब क्या होगा
मैंने हाइड्रोजन को एनोड के थ्रू अंदर
घुसाया ठीक है अब इन हाइड्रोजन में से
इलेक्ट्रॉन निकल जाएगा ठीक है क्यों क्यों
निकल जाएगा इलेक्ट्रॉन एनोड में क्या होता
है ऑक्सीडेशन होता है ऑक्सीडेशन मतलब लॉस
ऑफ इलेक्ट्रॉन करेक्ट तो हाइड्रोजन जो है
इलेक्ट्रॉन लूज करेगा तो हाइड्रोजन क्या
बन जाएगा h+ ये h+ जो है इस मेंब्रेन के
थ्रू पार होके कहां पहुंच जाएगा कैथोड में
पहुंच जाएगा लेकिन बेचारा इलेक्ट्रॉन ॉन
का क्या वो तो नहीं पार हो सकता है
क्योंकि ये मेंब्रेन इलेक्ट्रॉन को तो
अलाव नहीं करेगा तो इधर जो है एनोड की तरफ
इलेक्ट्रॉन जमा होते जाएंगे तो ये
इलेक्ट्रॉन कहेगा कि ठीक है मैं तो
इलेक्ट्रॉन हूं अगर मुझे किसी ने पकड़
नहीं रखा है तो मैं वायर के थ्रू सर्किट
के थ्रू फ्लो कर जाऊंगा तो इलेक्ट्रॉन वही
करता है जो सर्किट बना हुआ है उस सर्किट
के थ्रू इलेक्ट्रॉन फ्लो करके चला जाता है
और इलेक्ट्रॉन भी वापस जाके पहुंचता कहां
पर है कैथोड पर ठीक है तो इसका मतलब
मेंब्रेन के थ्रू h+ पहुंचा बाहर वायर के
थ्रू इलेक्ट्रॉन पहुंचा और कैथोड का जो
इनलेट था उसमें हमने क्या डाल रखा था
उसमें हमने ऑक्सीजन डाल रखा था इसीलिए
मैंने बोला था ये फ्यूल सेल क्या यूज करता
है h2 और o2 तो कैथोड में एनीवेज हमने o2
डाल रखा था तो अब कैथोड में क्या होगा ये
ऑक्सीजन ये इलेक्ट्रॉन ये h+ ये सारे मिल
कर के क्या बना देंगे वाटर h2o बनाएंगे और
साथ में खूब सारी हीट एनर्जी रिलीज होगी
एंड दिस इज एगजैक्टली हाउ द फ्यूल सेल
वर्क्स तो यहां पर देखो इलेक्ट्रिसिटी
कैसे जनरेट हुई इलेक्ट्रॉन के फ्लो से
इलेक्ट्रॉन के मूवमेंट से इलेक्ट्रिक करंट
जनरेट हुआ राइट तो ओवरऑल अगर फ्यूल सेल के
रिएक्शन को देखें तो द रिएक्शन इज़ प्रिटी
सिंपल h2 + o2 गिव्स h2o यही हो रहा था
एंड साथ में खूब सारी हीट एनर्जी भी रिलीज
हो रही थी तो फाइनली बच्चा पार्टी हमारी
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री का आखिरी टॉपिक
व्हिच इज़ कोरोजन कोरोजन के बारे में हमने
जूनियर क्लासेस में भी पढ़ रखा है लेकिन
एक बार फिर से इनके रिएक्शंस को इलेक्ट्रो
केमिस्ट्री के नजरिए से देख लेंगे कोरोजन
क्या होता है मेटलिक ऑब्जेक्ट्स के ऊपर कई
बार हम देखते हैं किसी दूसरे चीज के
ऑक्साइड की या सल्फेट की एक लेयर आ जाती
है स्पेशली हम लोहे के सामान में ये अक्सर
नोटिस करते हैं जैसे आपके घर में अगर कोई
पुरानी लोहे की बाल्टी हो या कोई भी लोहे
का सामान हो जिसको बहुत टाइम से आपने बाहर
छोड़ दिया हो मतलब व्हिच वाज एक्सपोज्ड टू
एयर या वाटर फॉर अ लॉन्ग टाइम तो हम क्या
देखते हैं कि उसके ऊपर ना एक रेडिश
ऑरेंजिश ब्राउनिश टाइप के कलर की ना एक
लेयर पड़ जाती है जिसे हम रस्ट कहते हैं
तो इसीलिए हम कहते हैं रस्टिंग ऑफ आयरन
इनफैक्ट आपने देखा होगा कि अगर आपके घर
में कोई चांदी का सामान हो जिसको आप
रेगुलरली यूज करते हो धीरे-धीरे धीरे-धीरे
जो शाइन है उसकी वो कम होने लगती है और
उसके ऊपर भी ना एक ब्लैकिश टाइप की लेयर आ
जाती है जिसे हम कहते हैं टर्निंग ऑफ
सिल्वर मतलब सिल्वर जो है वो टर्निया है
तो इन सब में होता क्या है इन सब में होता
ये है कि मेटल के ऊपर जो है एक और लेयर आ
जाती है और वो लेयर किससे बनती है मेटल के
ऑक्साइड से कई बार मेटल के सल्फेट से वो
लेयर बन जाती है और इसी प्रोसेस को हम
कहते हैं कोरोजन ठीक है तो चलो अब कोरोजन
के रिएक्शंस को देखते हैं थोड़ा सा
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री के नजरिए से तो अब
रिएक्शंस के साथ देखते हैं कोरोजन को तो
मान लो कोई भी मेरा एक ऑब्जेक्ट है जिस
परे कोरोजन हो रहा है तो उस ऑब्जेक्ट के
किसी एक पर्टिकुलर स्पॉट पे जस्ट समझने के
लिए समझो एक पर्टिकुलर स्पॉट पर क्या होता
है एक स्पॉट पर होता है ऑक्सी डेशन ठीक है
और उस स्पॉट को हम क्या कहेंगे वो स्पॉट
जो है वो एनोड की तरह बिहेव करेगा क्योंकि
एनोड में ही तो ऑक्सीडेशन होता है तो
बेसिकली उस एनोड में किस तरह का रिएक्शन
हो रहा होगा लेट्स सपोज कि हम आयरन की बात
कर रहे हैं ठीक है तो वहां पर आयरन जो है
वो ऑक्सीडो यानी कि आयरन जो है इलेक्ट्रॉन
लूज करके बना देगा fe2 प ठीक है तो एनोड
में कुछ इस तरह का रिएक्शन चल रहा होगा अब
आयरन के ऑक्सीडो से जो इलेक्ट्रॉन लूज हुए
जो इलेक्ट्रॉन रिलीज हुए उनका क्या वो
इलेक्ट्रॉन क्या करेंगे अब यह जो
इलेक्ट्रॉन हैं यह इलेक्ट्रोंस अ इस मेटल
के अंदर से ट्रेवल करके किसी और स्पॉट पे
चले जाएंगे ठीक है लेट अस सपोज ये किसी और
स्पॉट पे चले गए जस्ट इमेजिनरी इसको समझने
के लिए कांसेप्ट को समझो तो जो इलेक्ट्रॉन
एनोड के स्पॉट में रिलीज हुए थे वो मेटल
से मूव करते हुए चले जाएंगे किसी एक दूसरे
स्पॉट पे जहां पर जाके वो क्या करेंगे वो
जो दूसरा स्पॉट है ना वो स्पॉट एक्चुअली
है कैथोड वहां पर यही वाले इलेक्ट्रॉन
जाएंगे और वहां पर क्या करेंगे वहां पर
ऑक्सीजन है ठीक है ऑक्सीजन को ये कर देंगे
रिड्यूस सो बेसिकली ऑक्सीजन
प् 4h प प्लस फर इलेक्ट्रॉन ये सारे मिलकर
के बना देंगे 2 h2o एक सेकंड बहुत से
लोगों को समझ नहीं आया होगा कि क्या हुआ
मैं समझाती हूं ठीक है तो बेसिकली क्या
हुआ कि एक पर्टिकुलर स्पॉट पे जो जो आयरन
है वो ऑक्सीडो गया ठीक है ऑक्सीडो जैसे ही
ऑक्सीडो नि इलेक्ट्रॉन लूज किया अब ये जो
इलेक्ट्रॉन लूज किया अब इस इक्वेशन को ना
बैलेंस करने के लिए लेट अस से इसको भी मैं
टू से मल्टीप्लाई कर देती हूं अब जिन
इलेक्ट्रॉन सस को आयरन ने लूज किया ये
इलेक्ट्रॉन मेटल के थ्रू ट्रेवल कर कर के
एक दूसरे स्पॉट पे पहुंच गए तो देखो ये
इलेक्ट्रॉन ये वाले इलेक्ट्रॉन है ठीक है
अब ये कैथोड वाले स्पॉट पे पहुंच गए वहां
पर कौन बैठा हुआ था वहां पर था ऑक्सीजन और
वहां पर कौन था h+ ये h+ कहां से आया ये
एक बहुत इंपॉर्टेंट बात है h+ कहां से आया
अब देखो ये कोरोजन किसी भी ऑब्जेक्ट में
कब होता है व्हेन इट इज एक्सपोज्ड टू एयर
राइट व्हेन इट इज एक्सपोज्ड टू वाटर व्हेन
इट इज एक्सपोज्ड टू एयर तभी होता है इसमें
कोरोजन ऑक्सीडेशन तभी होता है ठीक है तो
ये h+ कहां से आया एयर में जो co2 है वो
co2 जब वाटर के साथ मिलता है ये कार्बन
डाइऑक्साइड कहां पर था एयर में था तो एयर
के अंदर जो कार्बन डाइऑक्साइड है वो जब
मॉइश्चर के साथ मिलता है तो वह बनाता है
h2co 3 और इस h2co 3 के अंदर ही क्या होता
है h+ hco3 - तो ये जो h+ है वो इस h2co 3
के अंदर से आता है तो यहां पर ना कोई एक
रिएक्शन नहीं हो रहा होता है राइट क्योंकि
एयर में क्या है ऑक्सीजन भी है कार्बन
डाइऑक्साइड है मॉइश्चर भी है इतनी सारी
चीजें हैं राइट और सभी लोग अपना-अपना काम
कर रहे हैं तो कैथोड पे जो दूसरा पॉइंट है
कैथोड के पॉइंट पर क्या हो रहा है यह वाले
इलेक्ट्रॉन आ रहे हैं वहां पर यह h+ भी हो
रहे होते हैं ठीक है और वहां पर ऑक्सीजन
भी हो रहा होता है और यह सब लोग मिला कर
के क्या बना देते हैं h2o बना देते हैं तो
इस तरह से कोरोजन के दौरान एनोड में
ऑक्सीडेशन हो रहा होता है और कैथोड में हो
रहा होता है
रिडक्शन ठीक है तो इसीलिए मैंने बोला
कोरोजन के भी जो रिएक्शंस होते हैं दे आर
बेसिकली दीज रेडॉक्स रिएक्शंस जो हम
इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में पढ़ रहे हैं सो
नेक नेट अगर मुझे कोरोजन का रिएक्शन लिखना
हो नेट रिएक्शन ठीक है एनोड कैथोड नहीं
पूरा का पूरा अगर एक साथ में लिखना हो तो
क्या हो रहा है आयरन जो है वो ऑक्सीजन के
साथ मिल कर के और h+ के साथ मिल कर के ठीक
है ऑक्सीजन कहां से आया एयर में है तभी तो
ऑक्सीडो रहा है h+ कहां से आया कार्बन
डाइऑक्साइड और वाटर के मिलने से जो h2co 3
बनता है उसमें से h+ आया ठीक है तो ये
सारी चीजें मिलकर के क्या बनाते हैं fe2 प
+
h2o ठीक है तो अब इसे बैलेंस कर देते हैं
हम तो कुछ इस तरीके से मैंने इसको बैलेंस
कर दिया ठीक है ये मेरा नेट नेट रिएक्शन
है जो कोरोजन के दौरान हो रहा है लेकिन
यहीं पे रुक नहीं रहा है इसका भी फर्द
ऑक्सीडेशन हो रहा है ठीक है फर्द
ऑक्सीडेशन कैसे अब जैसे मान लो यहां पर ये
जो f 2+ बना इस fe2 प का क्या हो रहा है
ये fe2 प फर्द एटमॉस्फेरिक ऑक्सीजन के साथ
मिलक के ऑक्सीडो रहा है ठीक है सो मतलब ये
जो fe2 प यहां पर
बना जो 22o यहां पर बना ये सब कुछ
एटमॉस्फेरिक ऑक्सीजन के साथ फिर से मिल
रहा है और ये क्या बना रहा है fe2 o3 + 4h
प और ये जो है इसी को हम देखते हैं एज अ
लेयर ऑफ रस्ट ऑन आयरन आर्टिकल्स आयरन की
चीजों के ऊपर जो रस्ट होता है वो रस्ट
बेसिकली यही होता है ठीक ठीक है बात समझ
में आईगी हो क्या रहा है मतलब ओबवियसली ये
प्रोसेसेस बहुत सिंपल प्रोसेस तो नहीं है
कि भाई दो चीजें मिली और तीसरा चीज बन गया
ऐसा तो नहीं है यहां पे दो तीन चार चीजों
का मतलब वो रहता है मतलब रिएक्शंस रहते
हैं उनके आपस में बट एटलीस्ट ओवरऑल आपको
समझ में आना चाहिए कि किस तरह से कोरोजन
में रेडॉक्स रिएक्शन हो रहा है एक स्पॉट
पर हो रहा है ऑक्सीडेशन आयरन का तो दूसरे
स्पॉट पर हो रहा है रिडक्शन ऑक्सीजन का
ठीक है तो इस तरह से ये एक रेडॉक्स
रिएक्शन की तरह बिहेव अब भाई कोरोजन क्या
होता है ये तो आपने समझ लिया बच्चों लेकिन
कोरोजन को प्रिवेंट करना बहुत क्रुशल होता
है क्यों क्योंकि इससे बहुत सारे
एक्सीडेंट्स हो सकते हैं एक्सीडेंट्स बोले
तो अब देखो कोरोजन मेटल्स में होता है अब
मेटल्स को हम ढेर सारे कंस्ट्रक्शन पर्पसस
के लिए यूज करते हैं अब जैसे मान लो कि
कोई बहुत बड़ा सा ब्रिज बना हुआ है अब वो
जिन मेटल्स से उसके पार्ट्स बने हुए हैं
अगर वो कोरोट कर जाए तो क्या हो सकता है
ब्रिज का कोलैक्स हो सकता है मशीनरी
फेलियर हो सकती है राइट तो इस तरह के
एक्सीडेंट्स को प्रिवेंट करने के लिए हमें
मेटल्स को कोरोड़ करने से प्रिवेंट करना
होगा अब इसे हम कैसे कर सकते हैं तो
प्रिवेंशन ऑफ कोरोजन जो है इज वेरी वेरी
इंपोर्टेंट तो अभी हम देखेंगे तीन ऐसे
तरीके जिससे हम मेटल्स को कोड करने से बचा
सकते हैं सबसे पहला तरीका है कि भाई उस
मेटल के ऊपर पेंट कर दो ठीक है जैसे ही एक
पेंट का लेयर आ गया तो क्या हो जाएगा कि
वो जो मेटल है वो सराउंडिंग एयर या वाटर
के साथ रिएक्ट नहीं कर पाएगा तो कोरोजन
नहीं होगा राइट तो या तो उसे पेंट कर दो
या फिर उसे किसी केमिकल से उसके ऊपर एक
लेयर डाल दो ये पहला तरीका हो गया दूसरा
तरीका हुआ कि भाई उस मेटल के ऊपर किसी
दूसरे मेटल का लेयर डाल दो सच दैट वो
दूसरा मेटल जो है वो इनर्ट हो इनर्ट मतलब
जो रिएक्ट ना करता हो एगजैक्टली जैसे मान
लो कि जिंक है टीन है ये जो है ये वाटर या
एयर के साथ रिएक्ट नहीं करते हैं तो इस
तरह के मेटल्स का एक लेयर डाल दो इससे
क्या होगा कि भाई जो जिस मेटल को मुझे
बचाना था वो तो अंदर है उसके ऊपर जिंक का
लेयर अब जिंक जो है यह तो रिएक्ट करेगा
नहीं तो इसका मतलब कोरोजन होने से बच गया
इनफैक्ट जिंक के इस तरह की लेयरिंग डालने
की इस प्रोसेस को हम कहते हैं
गैल्वो केमिकल प्रोसेस मतलब अभी ये जो हम
पूरा जो इलेक्ट्रोकेमिकल सेल का जो
कांसेप्ट पढ़ रहे थे उसी कांसेप्ट के ऊपर
बेस्ड है ये प्रोसेस जहां पर हम एक
सैक्रिफिशियल एनोड का यूज करते हैं अब आप
बोलोगे ये कौन सा एनोड है एक ऐसा एनोड जो
काफी सैक्रिफाइस करता है कोरोजन को
प्रिवेंट करने के लिए क्या सैक्रिफाइस
करता है तो समझते हैं हम क्या करते हैं एक
ऐसे मेटल को चूज करते हैं एनोड बनाने के
लिए जिसका इलेक्ट्रोड पोटेंशियल नेगेटिव
हो ठीक है बड़े ध्यान से सुनना एक ऐसा
मेटल चुनते हैं जैसे कि जिंक मैग्नीशियम
इस तरह का एक ऐसा मेटल चुनते हैं जिसका
इलेक्ट्रोड पोटेंशियल का वैल्यू क्या हो
नेगेटिव हो इसका मतलब क्या है बताओ इसका
क्या मतलब है इसका रिडक्शन पोटेंशियल जो
है वो नेगेटिव है इसका मतलब क्या है कि
इनका रिड्यूस ंग पावर जो है वो काफी
ज्यादा है यानी कि ये दूसरों को रिड्यूस
कर सकते हैं यानी कि ये खुद क्या होंगे ये
खुद
ऑक्सीडो राइट यानी कि इनका खुद का
ऑक्सीडेशन हो रहा होगा राइट तो इस तरह के
मेटल को हम एनोड बना देते हैं ऐसे भी हमें
पता है कि एनोड में क्या होता है
ऑक्सीडेशन एन ऑक्स एनोड में ऑक्सीडेशन
होता है ठीक है तो इस तरह के मेटल को हमने
एनोड बना दिया अब इनका ऑक्सीडेशन होता रहा
मान लो कि हमने जिंक को चूज किया ठीक है
अब जिंक इलेक्ट्रोड जो है वो आपका एनोड बन
गया जैसे ही एनोड बन गया तो क्या होने लगा
जिंक का ऑक्सीडेशन होने लगा यानी कि जिंक
जो है वो zn20 में कन्वर्ट होने लगा राइट
जैसे ही जिंक zn20 में कन्वर्ट होता जा
रहा है तो क्या हो रहा है इस पूरे प्रोसेस
के दौरान इस इलेक्ट्रोड में से जिंक जाता
जा रहा है zn20 में इलेक्ट्रोलाइट जो है
उसमें जाता जा रहा है तो इसका मतलब ये जो
इलेक्ट्रोड है ये धीरे-धीरे पतला होता जा
रहा है यानी कि इस प्रोसेस के दौरान ये जो
इलेक्ट्रोड है ये कंज्यूम होता जा रहा है
राइट यानी कि इस प्रोसेस के दौरान यह जो
एनोड है यह खुद का सैक्रिफाइस कर रहा है
इसीलिए इसको हम सैक्रिफिशियल एनोड कहते
हैं ठीक है अच्छा चलो ये तो समझ में आ गया
कि भाई zn20 में कन्वर्ट हो रहा है लेकिन
साथ में दो इलेक्ट्रॉन भी तो निकल रहे हैं
ये इलेक्ट्रॉन कहां जा रहे हैं ट्रैवल
करके पहुंच जा रहे हैं कैथोड पे ठीक है अब
कैथोड पे इन इलेक्ट्रॉन के पहुंच जाने की
वजह से क्या हो रहा है कि वहां पर जो
कैथोड है वो कैथोड कौन से मेटल का बना है
जिस मेटल को हम कोरोजन से बचाना चाहते हैं
अब इन इलेक्ट्रॉन के पहुंच जाने की वजह से
वो जो कैथोड है वो कैथोड भी अपने
सराउंडिंग एयर या वाटर के साथ रिएक्ट नहीं
कर पा रहा है और इस तरीके से जो कोरोजन है
वो प्रिवेंट हो रही है ठीक है तो ये था
हमारा तीसरा तरीका तो ये तीन कुछ ऐसे
तरीके थे जिसके हेल्प से हम कोरोजन को
प्रिवेंट कर सकते हैं लनो हब एक ऐसा फ्री
लर्निंग प्लेटफार्म जहां पर आपको मिलते
हैं वीडियोस
नोट्स एनसीआरटी सॉल्यूशंस
सैंपल पेपर्स एंड ऑनलाइन टेस्ट्स एब्सलूट
फ्री ऑफ कॉस्ट इतना ही नहीं लर्न हब क्लास
11 12
youtube1 क्लास 11थ के बच्चों के लिए
अथर्व बैच मंडे टू फ्राइडे एट 4:30 पीएम
और क्लास 12थ के बच्चों के लिए अनंत बैच
मंडे टू फ्राइडे एट 6 पए अगर आप या आपके
जान पहचान का कोई तैयारी कर रहा है नीट या
जेई का तो हमारे
youtube2 जीत जेई पे जीत का कंप्लीट कोर्स
अब्सोल्युटली फॉर फ्री इनमें चैप्टर्स की
डिटेल्स पलेनेस लाइव क्लासेस ढेर सारे
क्वेश्चंस और प्रीवियस ईयर क्वेश्चंस
डिटेल में कवर्ड है और तो और यू कैन आस्क
ऑल योर डाउट्स एब्सलूट फॉर फ्री एट आस्क
क्वेश्चन सेक्शन ऑफ लर्न हब हमारा ए पप भी
है आप वन ऑन वन क्लास लेना चाहते हो तो है
लर्न हब स्वयं एट अ वेरी अफोर्डेबल प्राइस
लर्न हब फ्री है पर बेस्ट
है तो बच्चा बाटी इसी के साथ खत्म कर डाला
है हमने इलेक्ट्रो केमिस्ट्री और मुझे
पूरी उम्मीद है कि इलेक्ट्रो केमिस्ट्री
के इन दोनों वीडियोस को देखने के बाद आपके
कॉन्सेप्ट्स हुए होंगे क्रिस्टल क्लियर और
अगर ऐसा हुआ है तो कमेंट्स पे जरूर लिखें
कि कंसेप्ट हुआ क्रिस्टल क्लियर और मैं
आपको जल्दी ही मिलती हूं एक नए वीडियो के
साथ एक नए टॉपिक के साथ तब तक के लिए स्टे
होम स्टे सेफ टेक केयर बाय बाय
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