Ancient History of India Series | Lecture 14: Gupta Empire Economy and Art & Culture | GS History
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गुप्ता एंपायर
इकॉनमी आर्ट एंड
कल्चर गुप्ता एंपायर के फर्स्ट पार्ट में
हमने गुप्ता साम्राज्य की पॉलिटिकल
हिस्ट्री एडमिनिस्ट्रेटिव जीनियस और सोशल
लाइफ को समझा था आज हम बात करेंगे उनकी
इकॉनमी आर्ट आर्किटेक्चर कॉइंस लिटरेचर और
साइंटिफिक एडवांसमेंट्स की और साथ ही
जानेंगे गुप्ता जज की कुछ कमियों के बारे
में तो चलिए शुरुआत करते हैं इकोनॉमिक
लाइफ से इकोनॉमिक लाइफ
गुप्ता एंपायर की इकॉनमी बड़ी रोबट थी
एग्रीकल्चर ट्रेड क्राफ्ट सभी में तेजी आई
थी इसी प्रोस्पेरिटी के कारण गुप्ता
पीरियड को गोल्डन एज कहा जाता है स्कॉलर्स
का मानना है कि गुप्ता पीरियड में स्टेट
ही सारे लैंड का ओरिजिनल ओनर होता था
पहाड़पुर कॉपर प्लेट इंक्रिप्शन से भी
एक्सक्लूसिव स्टेट ओनरशिप का पता चलता है
इकोनॉमिक पॉइंट ऑफ व्यू से लैंड को फाइव
टाइप्स में बांटा गया था क्षेत्र त्र भूमि
कल्ट वेशन के लिए वास्तु भूमि रेजिडेंस के
लिए चारागाह भूमि पाश्चर लैंड के लिए अप
राहता भूमि फॉरेस्ट के लिए और खिला भूमि
वेस्टलैंड होता था पुना प्लेट इंक्रिप्शन
के अनुसार रेगुलर लैंड सर्वेस भी होते थे
और पुस्त पाला नाम के ऑफिशियल डिस्ट्रिक्ट
में होने वाले सारे लैंड ट्रांजैक्शंस का
रिकॉर्ड रखते
थे ट्रेड एंड कॉमर्स में भी गुप्ता पीरियड
बहुत आगे था बंगाल के फाइन क्लोथ्स बिहार
का इंडिगो बनारस सिल्क हिमालयन सेंट्स
साउथ का सैंडल वुड और स्पाइसेज रोम से
साउथ ईस्ट एशिया तक एक्सपोर्ट होते थे
ईस्ट कोस्ट के ताम्र लिप्त घंटासाला
कंडूरा पोर्ट से साउथ ईस्ट एजिन ट्रेड
होता था वहीं वेस्ट कोस्ट के भरूच सोपारा
कैंबे पोर्ट से मेडिटरेनियन और वेस्ट
एशियन ट्रेड होता था प्रॉस्परस ट्रेड एंड
कॉमर्स के कारण गुप्ता जज अपने गोल्ड
कॉइंस के लिए बहुत फेमस है
आइए देखते हैं गुप्ता
कॉइंस गुप्ता रूलर ने प्राचीन भारतीय
इतिहास में सबसे ज्यादा गोल्ड कॉइंस इशू
किए थे पर गोल्ड कंटेंट के टर्म्स में
गुप्ता कॉइंस कुशाना कॉइन से कम प्योर थे
गुप्ता के गोल्ड कॉइंस को दिनार कहा जाता
था यह कॉइंस नूमिसमेटिक और आर्टिस्टिक
एक्सीलेंस के इनक्रेडिबल एग्जांपल्स है
गुप्ता कॉइंस उस समय के वैल्यूज बिलीव्स
सोशो इकोनॉमिक लाइफ और प्रॉप टी के
सिंबल्स भी हैं चंद्रगुप्ता द फर्स्ट के
समय हमें चंद्रगुप्ता द फर्स्ट कुमारा
देवी टाइप गोल्ड कॉइंस मिलते हैं
चंद्रगुप्ता द फर्स्ट के बाद समुद्र
गुप्ता ने बहुत तरह के कॉइंस इशू किए
उन्होंने गरुड़ा या ईगल टाइप कॉइन
धनुर्धारी या आर्चर टाइप कॉइन अश्वमेधा या
हॉर्स सैक्रिफाइस टाइप कॉइन व्या ग्रहण या
टाइगर स्लेयर टाइप कॉइन और वीणा वादन यानी
वीणा प्लेइंग टाइप कॉइंस इशू किए यह कॉइंस
उनकी आचि स्किल्स करेज और लव फॉर म्यूजिक
को भी दर्शाता है उनके बाद चंद्रगुप्ता द
सेकंड ने अश्वर रोही टाइप छत्र दारी टाइप
चक्र विक्रमा टाइप इत्यादि कॉइंस इशू किए
वही कुमारगुप्ता द फर्स्ट ने खड़क धारी
टाइप गजरो टाइप सिंह निहत टाइप खंग निहत
टाइप यानी राइनोसिलेरोमा
गुप्ता द फर्स्ट कार्तिकेय भगवान के
फॉलोअर थे कुमार गुप्ता द फर्स्ट के बाद
स्कंद गुप्ता के समय हंस के हमले से
इकॉनमी चरमरा गई थी इसीलिए उनके द्वारा कम
टाइप के कॉइंस इशू किए गए गुप्ता कॉइंस
में कुशाना इन्फ्लुएंस तो जरूर दिखता है
पर उन्होंने कई नए तरह के कॉइंस भी इशू
किए
थे उनसे पहले के कॉइंस में जहां किंग
आर्चर लायन स्लेयर हॉर्स राइडर इत्यादि
मार्शल पोज में दिखा करते थे वहीं बाद के
कॉइंस में मैरिज वीणा प्लेइंग अश्वमेधा
यज्ञ जैसे सींस भी देखे जा सकते हैं इन
कॉइंस में गॉड्स एंड गॉडेस की इमेजेस भी
खूब मात्रा में देखने को मिलती हैं ऐसे
सुपीरियर डिजाइंड कॉइंस आगे चलकर पूरे
भारत में कहीं देखने को नहीं मिलते
हैं गोल्ड के अलावा गुप्ता किंग्स ने
सिल्वर कॉइंस को भी इशू किया यह कॉइंस
लोकल एक्सचेंज में अधिक उपयोग होता था
जहां तक कॉपर कॉइंस की बात है कु ना के
कंपैरिजन में गुप्ता ने बहुत कम कॉपर
कॉइंस इशू किए कॉइंस के बाद अब हम आर्ट
एंड कल्चर की बात कर लेते हैं जो गुप्ता
पीरियड में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया था
आर्ट एंड आर्किटेक्चर अंडर
गुप्ता गुप्ता पीरियड में आर्ट एंड
आर्किटेक्चर में ट्रिमेंडस प्रोग्रेस
देखने को मिलता है कुछ स्कॉलर्स इसे
रेनेसांस पीरियड भी कहते हैं पर ध्यान
देने वाली बात यह है कि इससे पहले कोई
डार्क एज नहीं था अनलाइक यूरोप इसीलिए
गुप्ता पी पीरियड पिछले सारे इंटेलेक्चुअल
और आर्टिस्टिक ट्रेडिशनल मिने माना जा
सकता है गुप्ता आर्ट एंड आर्किटेक्चर को
हम टेंपल्स स्तूपस और स्कल्पचर के माध्यम
से बेहतर समझ सकते
हैं तो चलिए शुरुआत करते हैं स्ट्रक्चरल
टेंपल से गुप्ता पीरियड से पहले रॉक का
टेंपल्स प्रचलन में थे पर स्ट्रक्चरल
टेंपल के एवल्यूशन के कारण ब्रिक और स्टोन
ब्लॉक्स की मदद से माउंटेन से दूर भी
टेंपल बनाया जा सकता था
गौर करने वाली बात है कि नगर स्टाइल ऑफ
टेंपल आर्किटेक्चर इसी समय डेवलप हुआ था
देवगढ़ उत्तर प्रदेश का दसावतार टेंपल नगर
स्टाइल का वन ऑफ दी ओल्डेस्ट सर्वाइविंग
एग्जांपल है इसे एक रेज्ड रेक्टेंगल
प्लेटफार्म पर बनाया गया है यहां पंचायतन
प्लान का यूज किया गया है जिसमें मेन
श्राइन चार सब्सिडियरी श्राइन से सराउंडेड
होती है इसी पीरियड में भीतरगांव टेंपल का
भी कंस्ट्रक्शन हुआ था जो एंटायस से बनाया
गया है सेकंड टेंपल्स के अलावा गुप्ता
पीरियड में कई स्तूपस भी बनवाए गए थे लद
गुप्ता पीरियड में स्तूप कंस्ट्रक्शन में
डिक्लाइन देखा जाता है पर सारनाथ का धम्मक
स्तूप गुप्ता आर्किटेक्चर का इंपॉर्टेंट
एग्जांपल है इसे ओरिजनली मोरियन एंपायर
अशोका के पीरियड में बनवाया गया था पर
गुप्ता पीरियड में इसका लार्ज स्केल
रिनोवेशन करवाया गया था थर्डली गुप्ता
पीरियड अपने स्कल्पचर्स के लिए बहुत फेमस
है
इस पीरियड में इंडिजन मथुरा और सारनाथ
स्कूल ऑफ स्कल्पचर ने गांधा स्कूल को
रिप्लेस करना शुरू कर दिया था जहां गांधा
स्कूल में ग्रे सैंड स्टोन के साथ ग्रीक
इन्फ्लुएंस देखने को मिलता था वहीं मथुरा
स्कूल में रेड सैंड स्टोन के साथ इंडिजन
स्टाइल का यूज होता था एग्जांपल के लिए
मथुरा स्कूल के अंदर हमें अभय मुद्रा में
बुद्ध के बहुत सुंदर स्कल्पचर्स देखने को
मिलते हैं वहीं सारनाथ स्कूल ऑफ स्कल्पचर
को म मथुरा स्कूल से ज्यादा रिफाइंड माना
जाता है मथुरा स्कूल के कंपैरिजन में
सारनाथ स्कूल में आइडल की ड्रेपरी यानी
कपड़ों में बहुत कम फोल्ड्स देखने को
मिलते हैं उदाहरण के लिए सारनाथ का
स्टैंडिंग बुद्धा गुप्ता आर्ट का वन ऑफ द
बेस्ट
स्पेसिमेन
भगवानों की मूर्ति देखने को मिलती है
उदयगिरी केव्स के एंट्रेंस पर वराह द
ग्रेट बोर की मूर्ति भी गुप्त स्कल्पचर्स
का शानदार नमूना
आर्ट एंड आर्किटेक्चर के साथ-साथ गुप्ता
पीरियड की मेटालर्जिकल प्रास भी कमाल की
थी एग्जांपल के लिए दिल्ली के कुतुब
कॉम्प्लेक्शन तक नहीं है वहीं लिटरेचर के
फील्ड में गुप्ता पीरियड आज भी प्रॉमिनेंट
पोजीशन होल्ड करता है आइए देखते हैं
लिटरेचर इन गुप्ता पीरियड गुप्ता पीरियड
में संस्कृत वन ऑफ द मोस्ट प्रॉमिनेंट
लैंग्वेजेस बन गई थी संस्कृत पोएट्री
ड्रामा एपिक्स नई ऊंचाइयों को छूने लगी थी
इसके अलावा साइंटिफिक लिटरेचर की तो बात
ही कुछ अलग थी इसको अच्छे से समझने के लिए
हम लिटरेचर को तीन पार्ट्स में डिवाइड कर
सकते हैं पहला है रिलीजस लिटरेचर हिंदू
टेक्स्ट में आज की पुराणा की रचना इसी समय
हुई थी इनमें भागवत विष्णु वायु और मत्स्य
पुराणा मोस्ट इंपॉर्टेंट पुराणा है
महाभारत और रामायण एपिक्स को फाइनल टच इसी
पीरियड में दिया गया था इसी प्रकार कई
बुद्धिस्ट और जैन टेक्स्ट भी इसी समय लिखे
गए थे जो आज भी रेलीवेंस रखते हैं
एग्जांपल के लिए बुद्ध घोष द्वारा लिखित
विशुद्धि मग्गा और जैन ऑथर सिद्ध सेना
द्वारा रचित न्याय वतम प्रमुख
है दूसरा है सेकुलर लिटरेचर सेकुलर
लिटरेचर के फील्ड में आपने किंग
चंद्रगुप्ता द सेकंड के नवरत्नों में से
एक कालिदास का नाम तो जरूर सुना होगा
कालिदास के ब्रिलियंट कंपोजिशंस के लिए
उन्हें शेक्सपियर ऑफ इंडिया भी कहा जाता
है उनके मास्टरपीस संस्कृत ड्रामा
अभिज्ञान शाकुंतलम को वर्ल्ड के 100 बेस्ट
बुक्स में कंसीडर किया जाता है इस ड्रामा
में उन्होंने शकुंतला नाम की लेडी की लाइफ
में चल रहे ऑडील्स को बहुत ड्रामे इज्ड
तरीके से पेश किया है इसके अलावा उन्होंने
ऋतु सहरा जैसी पोयम्स मालविका अग्नि
मित्रम मेघदूतम कुमार संभवम और रघुवंशम
जैसे क्लासिकल ड्रामा लिखे वैशाख दत्ता भी
इस समय के सेलिब्रेटेड ऑथर में से एक थे
जिन्होंने संस्कृत ड्रामा मुद्रा राक्षस
और देवीचंद्रगुप्तम लिखा वहीं किरत अर्जुन
भैरवी द्वारा काव्य दर्शा दश कुमार चरिता
दंडित द्वारा पंचतंत्र विष्णु शर्मा
द्वारा कामसूत्र वात्स्यायना द्वारा और
अमर कोष नाम की डिक्शनरी बुद्धिस्ट ऑथर
अमर सिंहा द्वारा लिखे
गए तीसरा सेक्शन है साइंटिफिक
लिटरेचर गुप्ता पीरियड मैथमेटिक्स
एस्ट्रोनॉमी एस्ट्रोलॉजी मेडिसिन के
क्षेत्र में भी काफी आगे था आर्य भट्ट ने
अपनी किताब आर्य भटिया में कई
महत्त्वपूर्ण खोज के बारे में लिखा था
उनके हिसाब से अर्थ स्फेरिकल था और अपने
एक्सिस पर घूमता था और पाई की वैल्यू 3.14
थी उन्होंने ही दुनिया को जीरो का
कांसेप्ट दिया वहीं पंच सिद्धांतिका में
वर मेर ने पांच एस्ट्रोनॉमिकली सिस्टम्स
का जिक्र किया बृहद जातिका नाम की किताब
एस्ट्रोलॉजी के फील्ड में उनका
रिमार्केटिंग
जियोग्राफी आर्किटेक्चर वेदर एनिमल्स
मैरिज ओनस इत्यादि पर विस्तार से चर्चा
की मेडिसिन के फील्ड में वाघ भट्टा ने
अष्टांग सम ग्रह यानी समरी ऑफ एट ब्रांचेस
ऑफ मेडिसिन नाम की बुक लिखी जिसके कारण
उन्हें ग्रेट मेडिकल ट्रियो ऑफ एंसेट
इंडिया में गिना जाता है बाकी दो मेडिकल
जीनियस चरक और सुश्रुत को बोला जाता
है अब तक हमने गुप्ता पीरियड के डिफरेंट
अचीवमेंट की बात की पर इस वजह से क्या इसे
गोल्डन एज कहा जाना
चाहिए आइए देखते हैं गुप्ता पीरियड गोल्डन
एज ऑफ इंडिया मिथ और
रियलिटी गहराई में एनालिसिस करने पर पता
चलता है कि पैन नॉर्थ इंडियन एंपायर फॉरेन
रूल से फ्रीडम पीस एंड प्रोस्पेरिटी लोअर
टैक्स बर्डन ऑन पीपल माइल्ड पनिशमेंट
रिलीजस टोलरेंस आर्ट लिटरेचर साइंटिफिक
एडवांसमेंट के नजरिए से देखा जाए तो
गुप्ता पीरियड को बिल्कुल एक गोल्डन एज
कहा जा सकता है पर विमेन के स्टेटस में
डिक्लाइन सती और अनटचेबिलिटी की शुरुआत
फ्यूड टेंडेंसीज का डेवलपमेंट और कास्ट
रिजिंग में बढ़ोतरी की बात करें तो गुप्ता
पीरियड को सोशल इंजस्टिस और
इनविगो गुप्ता साम्राज्य एसिंट इंडिया के
ग्लोरियस एंपायर में से एक था इस समय शुरू
हुए कई इंटेलेक्चुअल ट्रेडीशंस आज भी
इंडियन सोसाइटी इकॉनमी और वैल्यूज को शेप
कर रहे हैं
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