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हिंदी दक्षता / 2nd yr / marathon vdo/all 5 units in 1 vdo

2h 16m 48s19,052 words2,533 segmentsHindi

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आज की इस वीडियो में हम करेंगे डीएलएड

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सेकंड एयर का हिंदी और सब्जेक्ट जिसका नाम

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जो है इस बार हिंदी दक्षता है ठीक है और

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इसकी जो यूनिट वन है इकाई एक है उसका नाम

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है हिंदी भाषा इसका मतलब सीधा है की ये जो

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इकाई वन है इसमें सिर्फ और सिर्फ हिंदी

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भाषा के बड़े में बात होगी की हिंदी भाषा

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जो है वो कहां से आई कैसे आई वो जो

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स्टार्टिंग में कैसी थी और अब उसके अंदर

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क्या-क्या बदलाव आए हैं समय के साथ-साथ

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चाचा चेंज आए तो बेसिकली हिंदी भाषा को

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लेकर ही हमारी पुरी ये जो यूनिट है वो

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रहेगी तो शुरू करते इस यूनिट को पहले

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टॉपिक है हिंदी का ऐतिहासिक सफर जैसा की

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मैंने बताया हिंदी भाषा की बात हो रही है

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तो हिंदी का ऐतिहासिक यानी हिस्ट्री क्या

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रही है उसमें उर्दू हिंदुस्तानी अंग्रेजी

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प्रांतीय प्रदेशी प्रभाव प्रांतीय प्रभाव

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पर हिंदी को चेंज किया गया है अपने हिसाब

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से

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तो चलिए इस टॉपिक को हम लेते हैं

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तो क्या है जो हिंदुस्तानी भाषा है उसके

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अवधारणा ही है एक ही ट्रक भाषा जैसा की

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महात्मा गांधी ने कहा था की जो

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हिंदुस्तानी भाषा है वो कोई एक भाषा नहीं

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है बल्कि एक ही कृत है जब हम का देते हैं

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इसका मतलब होता है उसके अंदर बहुत साड़ी

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चीज इंक्लूड हो जाति है तो फिर हिंदी भाषा

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के अंदर भी बहुत सी चीज इंक्लूड हो गई

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जैसे की ऊपर था हमारा टॉपिक उर्दू

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अंग्रेजी के शब्द संस्कृत के शब्द तो वो

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टोटल मिलकर बन रही हमारी हिंदुस्तानी भाषा

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इसमें क्या है उर्दू संस्कृत देसी विदेशी

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अंग्रेजी के कुछ शब्दों का संगठित रूप भी

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है जैसा की आपने पहले भी किया होगा देशज

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शब्द कौन से होते हैं तत्सम तद्भव ये सारे

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शब्द जो है हम हिंदुस्तानी भाषा में

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प्रयोग करते हैं

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जब इसमें संस्कृत के शब्दों प्रयोग होता

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है यानी तब हम तत्सम क्या देते हैं तब

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साहित्य हिंदी और अरबी जब हम अरबी भाषा की

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बात करें तो उसमें फारसी और तुर्की के

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शब्दों को यानी की वह तद्भव का हम जो है

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वो प्रयोग करते हैं जिसे हम उर्दू का देते

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हैं हिंदी जो है वो उर्दू में केवल लिपि

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का अंतर है देखिए हिंदी और उर्दू दोनों

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में सिर्फ लिपिक जो है वो अंतर है यानी की

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जो हम हिंदी है वो लिखने हैं देवनागरी में

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और जो उर्दू लिखने हैं वो है फारसी में ये

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आपके सीटेट में भी क्वेश्चंस आता है तो यह

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आपका फेस्टिवल नॉलेज भी यहां पर है तो एक

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ही भाषा में जो होती है ना दो-दो शायरियां

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हैं यहां पर शैली की बात करें एक है हिंदी

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शैली दूसरी है और दूसरा ली लेकिन है तो

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दोनों ही हिंदुस्तानी भाषा जब हम

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हिंदुस्तानी भाषा बोल रहे हैं तो उसमें

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उर्दू के शब्द भी इंक्लूड है हिंदुस्तानी

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और उर्दू

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के अरबी फारसी के शब्दों को भी चौड़ा गया

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है

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तो इसमें ना संस्कृत शब्दावली का अधिक

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प्रयोग

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उदाहरण देख लीजिए एग्जांपल से आपको जरूर

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समझ में आएगा एग्जाम में आपको एग्जांपल

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जरूर लेने हैं मैं हर बार कहती हूं अभी भी

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कहती हूं और मैं साथ ही साथ आपको प्रोवाइड

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भी कर रही हूं तो जो यह हिंदुस्तानी भाषा

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है जिसे महात्मा गांधी ने एक ही कृत भाषा

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कहा इसका हम उदाहरण कैसे देंगे तो यहां पर

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देखिए जब हम एक शब्द मतलब एक लाइन बोलते

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हैं आई पधारिए तो ये होता है संस्कृत

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शब्दावली हमारी युक्त हिंदी है इसमें

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संस्कृत की शब्दावली उसे की इसी को हम ऐसे

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बोलते हैं आई तशरीफ़ रखिए तो ये हो गया

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अरबी फारसी हिंदी है ना

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या उर्दू का लीजिए या फिर हम कहीं कहेंगे

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आई बैठिए तो ये होता है बोलचाल का रूप

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हिंदुस्तानी ठीक है तो जब हम हमने ना बोला

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आई पधारिए ये भी कुछ ज्यादा ही और लगता है

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ऐसे कौन बोलना है आजकल आई पधारिए तेरे को

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ज्यादा ही बोलते हैं की ये तो कुछ ज्यादा

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ही हिंदी बोल रहा है या फिर आई तशरीफ़

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रखिए तो ये बहुत ज्यादा उर्दू हो जाता है

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तो हम क्या कर देते हैं इन दोनों को छोड़

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और तीसरा जो आम बोलचाल की भाषा है हमारी

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आई बैठिए ऐसे बोल देते हैं ठीक है हिंदी

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जो है वह हमारी राजभाषा है जो की 14

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सितंबर 1949 को बनाई हुई और जो इसका

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अनुच्छेद है बहुत इंपॉर्टेंट यह 343 को

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आपको याद रखना है सीटेट में भी इससे

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क्वेश्चन आता है

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अब हिंदी भाषा क्षेत्र की बात कर लेते

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क्योंकि हिंदी भाषा की बात हो रही है तो

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उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार

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हिमाचल या फिर हरियाणा हो गया दिल्ली

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अंडमान निकोबार यहां पर अनेक जो है वो

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हिंदी भाषा की बोलियां बोली जाति हैं

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हिंदी भाषा पर हम अंग्रेजी प्रभाव भी

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देखते हैं जैसे की अंतरराष्ट्रीय स्वरूप

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इससे हमें ये पता चला है की जो हमारी

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हिंदी भाषा है वो ना केवल हिंदुस्तान में

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बल्कि विदेश में भी प्रचलित है तो यहां पर

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अंतरराष्ट्रीय स्वरूप जी है उसका वो बादल

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जाता है इसीलिए देखिए कई देश में ना हिंदी

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भाषा प्रयोग होता है जैसे की फिजियो देश

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है मॉरीशस सूरीनाम कनाडा नेपाल आदि तो इन

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देश को आप याद रखेंगे यहां पर भी हिंदी

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बोली जाति है हिंदी भाषा इतनी महान है

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देखिए की विदेश में भी ये बोली बोली जा

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रही है इस भाषा का प्रयोग हो रहा है तो इस

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टॉपिक में हमें यही साड़ी चीज बतानी थी की

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हिंदी भाषा की क्या-क्या जो है

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कैसे वो आई कैसे उसका जो है इतिहास रहा

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उसका और कैसी है यह हमारी हिंदी भाषा तो

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ये हमने देख लिया आगे चलते हैं अगला टॉपिक

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हिंदी यानी अलग तरह की हिंदी है इसके अंदर

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कौन-कौन सी हिंदी करेंगे हम व्यवहारी

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हिंदी बोलचाल में हिंदी ये दोनों ही से है

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उसके बाद माना हिंदी साहित्य हिंदी और

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हिंदी भाषा का सरलीकरण

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है की आम लोग भी इसे बोलते हैं तो सबसे

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पहले व्यवहारिक हिंदी कर लेते हैं

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जो व्यवहारी हिंदी होती इसी को हम बोलचाल

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की हिंदी भी कहते हैं दोनों ही चीज से हैं

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अगर बोलचाल की भाषा है आप का दो इसे

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व्यवहारी हिंदी होती है और अगर व्यवहारी

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इंद्री पूछे तो आप का दो जो आम बोलचाल की

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भाषा होती है वो व्यवहारिक हिंदी होती है

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दोनों ही से है कोई डिफरेंस नहीं है देखिए

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जी भाषा को समझना वह प्रयोग करने में

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सुगंधा वी सरलता होती है यानी इजी होता है

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हमें जी भाषा को बोलना और समझना वही तो

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बोलचाल की भाषा कहलानी है अतः यही

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व्यवहारिक भाषा भी कहलानी है तो दूसरा

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पॉइंट ये भी है की जनसाधारण जी भाषा को

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व्यवहार अथवा प्रयोग में ले वही होती है

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व्यवहारी या फिर प्रयोग भाषा तो हमारी

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हिंदी भी तो ऐसी है ना जो जनसाधारण है

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ज्यादा से ज्यादा लोग इसी को प्रयोग में

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ला रहे हैं हिंदी उर्दू हिंदुस्तानी वी

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अंग्रेजी

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अब रहित अंग्रेजी शब्द अब यहां पर देख

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लीजिए हिंदी अजय व्यवहार है हम इसको पढ़

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लेते हैं की किस तरीके से ही बाहर में आई

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है पहले क्या है बोलचाल के लिए प्रयोग

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होगी ऐसा मतलब ऐसी होगी वो भाषा जिसे हम

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बोलचाल में प्रयोग करें ठीक है दूसरी चीज

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साहित्य सृजन यानी जो लिटरेचर होगा

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साहित्य होगा चाहे कविताएं कहानी और

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उपन्यास लिखे जैन वो भी उसे भाषा में बहुत

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ज्यादा लिखे जाए तो आप देखेंगे हिंदी अल

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लिटरेचर इतना ज्यादा है की मतलब आपका जीवन

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निकाल जाएगा पर आप सारे ग्रंथ सारे

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उपन्यास कहानी कविताएं नहीं पढ़ पाएंगे

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अकेले प्रेमचंद जितना सर लिख के चले गए

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हैं की उनको भी पढ़ पन जो है बहुत ही

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मुश्किल हो जाता है किसी प्रयोजन यानी कोई

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भी प्रयोजन के लिए जैसे आजीवी चलने के लिए

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आप उसे भाषा प्रयोग कर सकते हैं बिल्कुल

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और साथ ही साथ प्रशासन व्यवसाय वैज्ञानिक

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और जनसंचार के लिए वो प्रयोग होती तो

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हिंदी भाषा है आप देखिए प्रशासन में हमारी

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उसे होती है व्यवसाय यानी रोजगार जो है

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उसमें वैज्ञानिक भी और जानसन कर तो हो ही

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रहा है न्यूज़पेपर हिंदी में छठे हैं और

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न्यूज़ भी हिंदी में आई है और सभी लोग

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इसको समझते भी हैं

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है तो यह थी हमारी व्यवहारी हिंदी या फिर

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बोलचाल की हिंदी अब बात करते माना हिंदी

8:00

की तो माना हिंदी क्या होता है थोड़ा सा

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अलग हो जाता है देखिए श्रेष्ठ और सीट

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लोडेड द्वारा प्रयुक्त तथा व्याकरण संवत

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भाषा के रूप को मानव कहते हैं पहले चीज तो

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ये की भाषा का वह रूप जो बहुत ही

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सुषेक्षित लोगों द्वारा बोला जाए और उसमें

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व्याकरण संवत कोई भी गलतियां नहीं हनी

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चाहिए तब हम कहेंगे की वो मानक भाषा है अब

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हिंदी की बात करें तो वर्तमान में हिंदी

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की मानव भाषा खड़ी बोली है आज का टाइम पर

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कोई भी जो है वह जो हमारी हिंदी है ना तो

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उसको संस्कृत बोलना है पूरा और ना ही

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उर्दू तो मिक्स करके बोलना है जिसे हम

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कहते हैं खड़ी बोली तो वो खड़ी बोली ही

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क्या है हमारी भाषा है

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सर्वश्वीकृत मानव स्वीकृत यानी सभी के

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द्वारा ही स्वीकृत की जाए हर इंसान जो है

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यहां पर वह स्वीकृति देता है हिंदी को

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समझना है यहां पर शिक्षा का मध्य होना

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चाहिए और कामकाज की भाषा भी ये हनी चाहिए

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तभी हम कहेंगे की वो भाषा है तो हिंदी के

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साथ तो बिल्कुल ऐसा ही है मतलब शिक्षा भी

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तो मिलती है हिंदी मीडियम में और कामकाज

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के लिए भी हिंदी प्रयोग हो रही है

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तीन चयन होते हैं देखिए तीन चयन कौन-कौन

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से हैं वह देख लीजिए की हम किसी भी भाषा

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को हम मानव कब बोलेंगे

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इसको क्या कर दी हमने स्वीट प्रीति

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जो है अगर हम किसी को भी बोलते हैं वो समझ

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रहा है या कोई हमें बोल रहा है तो हम समझ

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रहे हैं उसे पर न्यूज़ अगर हिंदी में ए

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रहे हैं हम पढ़ रहे हैं सुन रहे हैं तो ये

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सारे क्या हमारी क्या हो गए फिर हम कहेंगे

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की हां ये भाषा जो है वो मानक है तो यहां

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पर सिद्ध होता है की हिंदी भाषा भी क्या

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है माना भाषा है अब बात करेंगे साहित्य

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हिंदी की तो कोई बड़ी चीज नहीं है साहित्य

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हिंदी क्या हुआ ऐसे हिंदी जिसमें साहित्य

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सृजन किया जाए ये देखिए साहित्य सृजन में

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प्रायोजित यानी साहित्य की रचना करने के

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लिए इस भाषा का प्रयोग हो रहा है या नहीं

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ऑफ कोर्स हो रहा है मैंने अभी-अभी बताया

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है की हिंदी में इतना ज्यादा साहित्य है

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की आपका जीवन निकाल जाएगा लेकिन आप सर

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साहित्य नहीं पढ़ पाएंगे

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पठान वी लेखन में भी यह सरल होना चाहिए

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समाज कल्याण हेतु साहित्य होना चाहिए और

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समझो दर्पण होता है वह तो साहित्य होता ही

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है तो जब भाषा ऐसी हो की समाज इसको पढ़े

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और समझे तभी तुम कहेंगे की वो साहित्य

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भाषा है तो जो हिंदी भाषा है उसके साहित्य

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लोग पढ़ने हैं समझते हैं समाज की बुराइयों

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को देखते हैं फिर उसे कैसे हटाना है ये

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जानते हैं तो ये इसलिए हमारी हिंदी भाषा

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क्या हो गई साहित्य भाषा यहां पर सिद्ध हो

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गई अभी चलते हैं अगला जो हमारा टॉपिक है

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इसी टॉपिक से हिंदी भाषा का सरलीकरण बनाम

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ग्राहता अब्राहम क्या है मतलब आपको ये

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बताना है की ये जो हिंदी भाषा है वो क्यों

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इतनी सरल है भाई उसका इतना सरल कैसे हो

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गया उसका

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विदेश में भी बोली जा रही है ना केवल

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हिंदुस्तान में बल्कि विदेश में भी बोली

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जा रही है अभी मैंने बताए थे आपको तो देख

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लेते हैं की क्या है

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ध्यान से सुनिएगा कहानी की तरह संस्कृत है

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जो हमारी संस्कृति जो की कई भाषण की जननी

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है ठीक है कठिन वी कनिष्ठ होने के करण जान

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सामान्य द्वारा इस भाषा में संप्रेषण करना

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कठिन था बिल्कुल जो हमारी संस्कृत है

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जिससे हमारी हिंदी भी आई है जो संस्कृत है

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ना वह बहुत ही ज्यादा कठिन थी और हम आम

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लोग तो उसे कर ही नहीं सकते थे अभी भी

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देखो जब कोई संस्कृत बोलना है या फिर हम

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पढ़ने हैं तो हंसी ए जाति है लोगों को

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इतनी कठिन भाषा है ना की हम बोल नहीं

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पाएंगे उसको जल साधारण में या फिर उसमें

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संप्रेषण नहीं हो पाएगा संस्कृत न्यूज़

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पेपर छाप दो कितने लोग समझ पाएंगे सभी लोग

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नहीं समझ पाएंगे क्योंकि बिल्कुल ही

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संस्कृत और डायवोर्ना तो उसमें उर्दू

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शब्दों में ना तो अंग्रेजी इस शब्दों में

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है ना तो कैसे समझेंगे लेकिन जो हिंदी का

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न्यूज़ पेपर आता है उसमें उर्दू शब्द होते

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हैं इंग्लिश टीवी कुछ शब्द होते हैं ऑफिस

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वगैरा तो पढ़ने और हम समझ जाते हैं इसी

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प्रकार में प्रकृति अपभ्रंश आदिवासी

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यह सब क्या हुई विलुप्त हो गई निरंतर समय

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गुजरते के साथ-साथ लोगों ने ऐसी भाषा को

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जन्म दिया या फिर आरंभ किया जिसे वे आसानी

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से बोल सकें यह कहानी की तरह समझो देखो

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फिर टाइम तू टाइम लोग चेंज करते रहे

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और फिर चेंज करते रहते लोगों ने ऐसी भाषा

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को जन्म दे दिया जो इस समझना में इजी हो

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और बोलने भी और व्यवहार में ला सकें जिससे

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अंतर्गत हिंदी भाषा में जन्म लिया तो अब

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ये जो है हिंदी भाषा का सर्वेकरण यहां पर

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हो गया

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संस्कृत के साथ-साथ पंजाबी मराठी गुजराती

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आदि ने भी हिंदी भाषा के विकास में सहयोग

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दिया है देखिए समाचार विश्लेषण तक में

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कोर्ट मिश्रित हिंदी प्रयोग होता है मैंने

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पहले बता दिया न्यूज़पेपर वगैरा में संचार

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मध्य की प्रमुख भाषा क्या है हिंदी है

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धारावाहिकोटि प्रदर्शन में हिंदी भाषा का

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प्रयोग होता है जितने भी सीरियल आते हैं

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हमारे ये स बहू वाले ड्रामा सारे हिंदी

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में ए रहे हैं एक रूपी या रस ना होकर भी

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व्यवहारिक भाषा रूपन का मिश्रण इसे

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जनस्विति प्राप्त हो जाता है क्यों भाई

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क्योंकि हिंदी में ना लोग अपने तरीके से

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अपनी शब्द दाल देते हैं और फिर कहते हैं

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की चलो ये हो गई हिंदी तो स्वीकृति हिंदी

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को मिल जाति है अगर हम कहते की आज से सभी

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को संस्कृत बोलना है तो क्या यह पॉसिबल है

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बिल्कुल नहीं है संचार मध्य के करण हिंदी

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भाषा का बड़ी तेजी से ही तट संता में

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सरलीकरण की और हो रहा है

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ना जी भाषा में तो समझो वो बहुत तेजी से

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ही फेल रहा है संचार

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उसके बाद केवल अखिल भारतीय नहीं यानी इसे

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भारत में ही नहीं वैश्विक स्वीकृति भी

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प्राप्त हो रही है क्योंकि विदेश में भी

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इसे बोला जा रहा है जैसे-जैसे हिंदी भाषा

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का रूप सरल होता जा रहा है वैसे-वैसे

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लोगों द्वारा इसे ग्रहण भी करना आसन हो

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रहा है और इसे ही हम कहते हैं भाषा का

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सरलीकरण या फिर तो आई होप की आपको ये

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टॉपिक यहां पर क्लियर हुआ होगा की हिंदी

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भाषा सरलीकरण या फिर क्या है आगे चलते हैं

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हिंदी भाषा के गन और सीमाएं अभी हिंदी

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भाषा के बड़े में काफी कुछ पढ़ लिया हमने

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अब जो देख लेते हैं हम थोड़ा सा रिजल्ट

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निकलते हैं की क्या-क्या फायदे हैं और

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क्या-क्या

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गन हैं भाई तभी तो ये इतनी ज्यादा फेमस है

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ध्वनि के अनुरूप लिपि और कॉन के नाम है

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इसमें वर्णमाला का वर्गीकरण बहुत अच्छे से

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किया गया है स्वर और व्यंजन में लिपि

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चिन्नू की पर्याप्त मंत्र जितनी भी हमें

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चिन्ह चाहिए मात्राएं चाहिए वो साड़ी यहां

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पर हैं बिल्कुल

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बहुत सर ऑप्शन मिलता है

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व्यंजन चिन्होेती जो है वह सरिता भी है

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सुपत्यता यानी पढ़ने में बहुत ही इजी है

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उच्चारण वी लिपि में सामान्य यानी की जो

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जैसा हम बोलते हैं वैसे ही उसकी लिपि है

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सार्थक ध्वनि प्रति व्यवस्था अन्य भाषा के

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शब्दों को हिंदी भाषा की प्रकृति के

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अनुरूप परिवर्तित करना तो ये भी इसका

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फायदा है की अन्य भाषण को भी अपने अंदर

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समाहित कर लेती है लेकिन बात करें सीमाओं

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की तो हम भी इसके कुछ नुकसान या फिर

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सीमाएं भी हैं जो यहां पर पांच मैंने लिखे

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हैं पहले

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ये बड़ी दिक्कत है की एक ही ध्वनि के लिए

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हमें ऑप्शन इतने सारे हैं की समझ में नहीं

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आता क्या करना है जैसे आर को ऐसे राम

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लिखोगे तो आर ऐसा बनेगा करमाली तो यह ऊपर

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चला जाएगा

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ड्रम ये दो भागन में बन जाएगा तो ये चीज

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जो है वो प्रैक्टिस करते करते बच्चे को आई

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है

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समझना बच्चों को तो यह सीमा भी है जब भी

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आप पेपर में सीमाएं करेंगे तो यह जो है

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एग्जांपल जरूर

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ब्रह्म उत्पन्न सेकंड ब्रह्म उत्पन्न

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ब्रह्म उत्पन्न हो जाता है लेखन में कैसे

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देखिए

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इसमें आधा चोर मिला हुआ है तो अब ये लिखे

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ये दिक्कत होती है ऐसे ही इंडिया में भी

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दिक्कत हो जाति है आगे है हमारा शिरोरेखा

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प्रयोग में मनमानी यह जो शिरोरेखा होती है

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मतलब लाइन डालने होती है जब हम कुछ भी

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लिखने हैं जैसे मैंने आम लिखा तो ऊपर लाइन

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डालनी है तो इसमें मनमानी है की आपको लाइन

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डालनी है लेकिन कुछ लोग लाइन नहीं भी

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डालते हैं तो समझ में नहीं आता की लाइन

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डालना ठीक है या नहीं वैसे अगर बताया जाए

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बिल्कुल

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टूटी देखो जैसे की यह हां हां है तो इसमें

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तो हमने चंद्र बिंदी लगा दी लेकिन जब बात

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करें पंप की तो अब हम यहां पर बिंदी लगे

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या फिर आधा मुंह लगाएं क्योंकि ये भी

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साउंड करेगा पंप ये भी साउंड अरेरा पंप तो

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यहां पे अनुस्वार लगे या अनुनसिक लगे समझ

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में नहीं आता तो ये भी इसकी दिक्कत है आगे

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चलते हैं अगला टॉपिक है हमारा बहुभाषिकता

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का अर्थ और महत्व बहुभाषिता क्या है ध्यान

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से सुनिएगा इंपॉर्टेंट है क्वेश्चन जरूर

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आएगा ऐसा स्थान या देश जहां पर बहुत साड़ी

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भाषा बोली जाति हैं हर भाषा बोलने की

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आजादी होती है प्रचलन हो और ए से अधिक

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भाषा में पढ़ सकते हैं या बोल और समझ सकते

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हैं ऐसी जगह को हम कहते हैं बहुभाषिकता

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वाली जगह

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स्थिति है

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जबकि इसे प्रयोग करने वाला बहुभाषी भाषा

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प्रवक्ता होता है

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तो बहुवश्यकता कहां पर है भारत में तो यह

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क्या

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महत्व देख लेते हैं यहां पर महत्व यह हो

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जाएगा की सभी बच्चों को अभिव्यक्ति के

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अवसर मिलेंगे चाहे वो कोई भी भाषा बोलना

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हूं बोलना कौशल का भी आप होगा क्योंकि जब

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आजादी मिल जाति है ना अपनी भाषा में बोलने

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की तो जो बोलना कौशल है वो अपने आप ही

18:14

बाहर आता है प्रत्येक भाषा उसे सम्मान

18:17

मिलेगा

18:18

भाषाई विविधता को शिक्षक वीडियो में

18:20

प्रयोग किया जा सकता है बहुभाषिकता हमारी

18:23

पहचान और अस्मिता को भी निर्धारण देती है

18:26

अभिव्यक्ति में आत्मविश्वास आता है ज्ञान

18:30

का विस्तार होता है और व्यापार साहित्य भी

18:33

मिलता है

18:39

जैसे इंडिया में हम हिंदी भी पढ़ने हैं

18:41

इंग्लिश में पढ़ने हैं और मैथिली भी पढ़ने

18:44

हैं तो फिर अगर मैथिली पढ़ रहे हैं मैथिली

18:46

भाषा अगर हमें ए गई तो फिर हम मैथिली

18:48

साहित्य भी पढ़ेंगे ना मैथली भाषा में

18:50

कौन-कौन लेखक हैं उन्होंने क्या-क्या लिखा

18:52

है उसे भाषा की कहानी उसे भाषा में भी

18:54

रामायण लिखी है उसे भी पढ़ेंगे तो साहित्य

18:57

भी हमारा बाढ़ जाता है और ज्ञान भी आगे

19:00

चलते हैं भारतीय शिक्षा नीति में भाषा का

19:02

स्थान यहां पर हमें जो में चीज है वो है

19:04

त्रिभाषा सूत्र की संकल्पना और

19:07

क्रियान्वयंत्रिभाषा सूत्र क्या था और

19:09

इसको कैसे लागू किया गया तो सबसे पहले बात

19:11

करेंगे स्टार्टिंग की 1956 में केंद्रीय

19:14

शिक्षा और सलाहकार बोर्ड यानी की कब बोलते

19:18

हैं इसको बहुत इंपॉर्टेंट है सीटेट के लिए

19:20

भी बहुत इंपॉर्टेंट है ये इसके द्वारा जो

19:23

है भाषा संबंधी समस्या का विचार किया गया

19:26

और समाधान के लिए त्रिभाषा सूत्र प्रस्तुत

19:29

सॉरी किया गया इसका क्या मतलब है की

19:33

क्योंकि हमारा देश कैसा था बहुभाषिकता

19:35

वाला अभी हमने पढ़ा तो इस तरह से मौलिक

19:37

प्रॉब्लम भी क्रिएट कर रहा था की हम कैसे

19:39

जो है अपनी शिक्षा में भाषण को लाइन तो

19:42

क्या हुआ कब ने 1956 में बताया की हम

19:45

त्रिभाषा सूत्र लेंगे अब ये क्या था तीन

19:48

भाषण पर बाल दिया जा रहा था यहां पर

19:49

इसीलिए इसे कहते हैं त्रिभाषा सूत्र या

19:51

फिर फ्री लैंग्वेज फॉर्मूला पहले भाषा जो

19:54

होगी वो तो मातृभाषा या फिर क्षेत्रीय

19:56

भाषा होगी जहां से भी बच्चा आया है उसकी

19:58

वो अपनी भाषा सेकंड भाषा हिंदी होगी लेकिन

20:02

उन राज्यों में जहां पर आधुनिक हिंदी भाषी

20:05

राज्यों में सॉरी जहां पर हिंदी बोली जाति

20:08

है वहां पर ना दूसरी अन्य भाषा होगी और

20:11

कोई भी विदेशी भाषा इंग्लिश मां लो और

20:13

जहां पर तीसरी होगी

20:17

और जहां पर हिंदी नहीं बोली जाति है फिर

20:21

वहां पर तो हिंदी बोली ही जाएगी और साथ ही

20:24

साथ क्या अंग्रेजी भी आएगी और साथ ही साथ

20:26

मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा

20:29

आनी चाहिए

20:34

कोई इसमें कन्फ्यूजन वाली बात नहीं तीन

20:37

भाषण याद रखो क्षेत्रीय भाषा संघ की भाषा

20:39

हिंदी और दूसरी विदेशी भाषा जो है

20:41

अंग्रेजी इन तीन भाषण पर ही बाल दिया गया

20:44

अब क्या 1962 में मुख्यमंत्री ने इस

20:47

सम्मेलन में क्या किया एक सम्मेलन हुआ

20:49

मंत्रियों का मुख्यमंत्री का हर राज्य के

20:51

और उन्होंने स्वीकृति दे दी लेकिन फिर भी

20:54

क्या हुआ जटिलता के करण ये जो थ्री

20:56

लैंग्वेज फॉर्मूला है वो ठीक से कम नहीं

20:58

किया आईएसपी बुनियादी सिद्धांत पढ़िए बहुत

21:00

इंपॉर्टेंट है यह तीन जो हमारे फार्मूले

21:02

हैं तीन लैंग्वेज के सर आई भाषा के रूप

21:05

में हिंदी का महत्व किया जाएगा अंग्रेजी

21:08

का क्रियाशील ज्ञान आवश्यक होना चाहिए

21:10

हिंदी अंग्रेजी आरंभ करने का स्टार जो है

21:13

वो डिसाइड होना चाहिए अच्छी का आधार पर

21:16

अन्य भाषण भी पढ़ सकते हो जैसा की आप

21:19

लैंग्वेज कोर्स बाद में कर सकते हो ठीक है

21:26

अपना आंसर जो है वह रेडी करना है तो

21:30

नेक्स्ट टॉपिक हमारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या

21:32

2005 के अनुसार त्वचा का पाठ्यक्रम स्वरूप

21:36

और अपेक्षा लास्ट टॉपिक है ध्यान से समझना

21:38

इन्होंने कहा है की जो हमारा 2005 का

21:41

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या है नेशनल जो करिकुलम

21:43

फ्रेम पहले भी पढ़ चुके 2005 इसमें से

21:47

जोड़ना सीटेट में 100% क्वेश्चन आते हैं

21:50

दो-तीन क्वेश्चन आते हैं नेशनल करिकुलम

21:53

फ्रेमवर्क 2005 लेकिन जो ये हमारा हिंदी

21:56

में टॉपिक है वो है भाषा का पाठ्यक्रम

21:58

हमसे भाषा की बात करेंगे की 2005 में जो

22:01

पाठ्यचर्या लाई गई उसके अंदर भाषा के लिए

22:04

क्या-क्या कहा गया है तो देख लीजिए

22:06

क्या-क्या कहा गया है यहां पर पॉइंट वाइस

22:08

मैंने आंसर दे दिए हैं आपको पहले चीज

22:10

इन्होंने बोली है 2005 में जो फिल्म आया

22:12

है वहां पर भाषा के बड़े में की राष्ट्रीय

22:15

पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 में बहुभाषिकता

22:19

निहित है मतलब वह बाल देता है

22:25

सचिन घरेलू भाषा स्कूल में मध्य होने से

22:29

बिल्कुल की जो घर की भाषा होती है

22:31

क्षेत्रीय भाषा होती है वो थ्री लैंग्वेज

22:33

में भी तो था उसको हमें बाल देना है थर्ड

22:36

घरेलू भाषा को सम्मान दो अगर बच्चा अपनी

22:38

घरेलू भाषा बोल रहा है क्लास में तो उसको

22:40

डांटना या प्रताड़ित नहीं करना है उसको

22:42

सपोर्ट करना है और अदर लैंग्वेज भी इसको

22:45

सीखनी है

22:47

यहां पर की प्राथमिक स्टार पर मातृभाषा

22:49

में ही शिक्षा देना पर्याप्त होगा जो अभी

22:52

हमारा नया जो आया है ना अभी शिक्षा नीति

22:55

आयोग उसमें भी यह बात बोली रही है लेकिन

22:57

अभी हालांकि वो लागू नहीं हुई है इसलिए हम

22:59

2005 वाला ही यहां पर पढ़ रहे हैं

23:01

त्रिभाषा पर इन्होंने बाल दिया बिल्कुल

23:03

देखिए जो त्रिभाषा फॉर्मूला पहले भी लाया

23:06

गया था लेकिन ठीक से कम नहीं किया तो 2005

23:09

में दोबारा से उन्होंने बोला की हां भाई

23:10

इस पर कम करो उसके बाद आवश्यकता अनुसार

23:13

भाषण का अध्ययन किया जाना चाहिए अगर

23:16

आवश्यकता है तो आप विदेशी भाषण को भी पढ़ो

23:18

संस्कृत भाषा का अध्ययन भी आवश्यक है ताकि

23:21

उसको भी बचाया रख सके क्योंकि हमारी सर

23:23

साहित्य जो है पुराना और संस्कृति संस्कृत

23:25

में ही है उच्च स्टारों पर शास्त्री और

23:28

विदेशी भाषण को परिचय में लाया जा सकता है

23:31

तो हमारा जो 2005 जो फ्रेमवर्क है करिकुलम

23:34

का वहां पर लैंग्वेज से रिलेटेड यही बातें

23:37

बोली गई थी तो यह सारे पॉइंट वाइस मैंने

23:39

दे दी है

23:42

तो यहां पर यूनिट वन आपका हिंदी का खत्म

23:45

होता है

23:47

आज इस वीडियो में हम हिंदी दक्षता या फिर

23:50

जो भी हमारा हिंदी शिक्षक है सेकंड एयर का

23:53

उसका इकाई दो करेंगे इससे पहले इकाई जो है

23:56

हम फिनिश कर चुके हैं तो इकाई दो में जो

23:59

है पूरा आपका ग्रामेटिकल पार्ट है आप चाहे

24:02

तो इसे इंडिविजुअल भी दे सकते हैं मैं

24:04

पहले भी वीडियो बना चुकी हूं जैसे समास हो

24:07

गया अलंकार हो गए लेकिन अगर आप वैसे नहीं

24:10

देखना चाहते और सिलेबस के अकॉर्डिंग ही

24:12

देखना है तो फिर आप यह पुरी वीडियो ध्यान

24:14

से देखें इसमें आपके अलंकार समाज जो भी है

24:17

टॉपिक इस सिलेबस में आपके वह पूरा आपका

24:21

क्लियर हो जाएगा यहां पे ठीक है

24:24

शुरू करते हैं इसको इसका नाम ही क्या है

24:26

हमारी इकाई का भाषा सौंदर्य अवधारणा

24:30

प्रकार एवं महत्व की जो हमारी लैंग्वेज है

24:33

उसकी सुंदरता क्या है और इस एक कॉन्सेप्ट

24:35

इस टाइप और इसे महत्व

24:50

[संगीत]

25:09

निश्चित अर्थ हो वही शब्द कहलाता है तो ये

25:13

होता है शब्द हमारा अब इसके अंदर अव्यय की

25:16

बात की जाए तो वे शब्द जिनके रूप में लिंग

25:19

वचन कारक कल पुरुष आदि के करण कोई

25:22

परिवर्तन नहीं आता ठीक है अर्थात जो सदा

25:26

अपने मूल रूप में ही बने रहते हैं चाहे

25:29

लिंग चेंज हो जाए वचन चेंज हो जाए लेकिन

25:31

जो हमारा

25:32

शब्द होगा वह चेंज नहीं होगा

25:56

दौड़ता है राम तेज दौड़ता है ठीक दौड़ता

25:59

है अगर मैं ये कहूं सीमा दौड़ती है तो

26:03

यहां पर दौड़ता दौड़ती हो गया लेकिन जो

26:05

तेज शब्द है वो तेज ही रहेगा तो वो क्या

26:08

है अव्यय है या फिर अविकारी शब्द है तो

26:11

संबंधबोधक जो शब्द होते हैं वो भी अविकारी

26:13

होते हैं

26:14

समुच्चयबोधक जिसमें आदि बोधन जो शब्द होते

26:16

हैं आहऑफ ये सब भी कैसे होते हैं अविकारी

26:20

होते हैं निपट हो गया जैसे भी

26:23

ये जो भी शब्द है इसको किसी भी लिंग

26:26

परिवर्तन से कोई फर्क नहीं पड़ता ये भी बे

26:29

ही रहेगा तो बहुत से ऐसे शब्द हैं जिनको

26:31

लिंग वगैरा वचन वगैरा से कोई फर्क नहीं

26:34

पड़ता ये होते हैं हमारे अविकारी शब्द ठीक

26:36

है आगे चलते हैं संधि तो संधि क्या होती

26:39

है संधि शब्द का अर्थ है मेल यानी जुड़ा

26:42

हुआ अब इसके अंदर भी क्या होते हैं हमारे

26:45

प्रकार होते हैं तो सबसे पहले होता है

26:47

स्वर संधि स्वर संधि में क्या होता है

26:52

उसे हम कहते हैं स्वर संधि

27:11

से चेंज आया है इसलिए इस स्वर संधि

27:15

अरे व्यंजन संधि इसमें क्या होता है

27:18

व्यंजन के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने

27:20

से उसे व्यंजन में जो परिवर्तन होता है वो

27:23

होता है व्यंजन संधि जैसे आप देख लो आधा

27:26

के और फिर यहां भी कोई एन ए नहीं है जी है

27:30

यानी की व्यंजन है तो दीप जमा ड्रेस बन

27:33

गया और ये दोनों ही यहां पर आगे चल के भी

27:36

व्यंजन में ही परिवर्तित हुए हैं तो ये हो

27:38

गया हमारा व्यंजन संधि ऐसी उत और नाती में

27:41

उन्नति हो गया ठीक है आगे चलिए संधि

27:46

ये उत्तर के बाद किसी स्वर अथवा व्यंजन के

27:49

आगे आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता

27:51

है वो तभी सर्व संधि जैसे विसर्ग आपको पता

27:54

होना ये दो बिंदिया होती हैं जो

27:56

मां जमानत

28:00

को हटाकर क्या कर दिया हमारे आगे क्या ग

28:03

गया

28:05

मनोरथ वैसे ही मानो जमा हर मनोहर

28:28

नेक्स्ट है इसमें अर्थ की दृष्टि से

28:31

परस्पर स्वतंत्र संबंध रखना वाले दो या दो

28:35

से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य स्वतंत्र

28:37

शब्द की रचना करते हैं दो शब्द मिलेंगे और

28:41

कोई तीसरा ही शब्द बनेगा और उसका अर्थ भी

28:43

अलग होगा उन दोनों से तो ये होता है समास

28:46

इसके बाद जो है वो ज्यादा इंपॉर्टेंट है

28:48

पहले तत्पुरुष समास इसमें क्या होता है को

28:52

से के द्वारा या फिर आदि का लप हो जाता है

28:55

यानी है जाता है कैसे हटा है देखो रसोई का

28:58

घर

29:00

यहां से क्या बन गया रसोई घर तो अब यह केक

29:08

गया तो ये हो गया हमारा तत्पुरुष समास ठीक

29:12

है

29:15

समूह का दिशा होता है और पहले पद संख्या

29:17

होता है सबसे इजी समाज सही है हमारा

29:20

द्विगु समास इसमें जो होता है

29:37

यह भी इजी है बहुत इजी है बस आपको

29:43

माता-पिता इसमें द्वंद समास हो गया

29:47

बहुत ही इजी तरीके से बता रही हूं मैं और

29:49

शॉर्ट में बता रही हूं ताकि आप पहचान सके

29:51

सीटेट में भी और अगर आपके डीएलएड के पेपर

29:54

में आते हैं एग्जांपल लिखने के लिए तो आप

29:58

समास है इसमें पहले पद जो होता है प्रधान

30:01

होता है और अव्यय होता है वही अविकारी

30:04

होता है पहले पीछे कुछ भी चेंज होता है

30:06

पहले पद जो है वो चेंज नहीं होगा जैसे

30:09

प्रत्येक वर्ष

30:12

तो ये बन गया प्रति वर्ष यह जो प्रति है

30:15

यह कभी चेंज नहीं होगा वर्ष वर्षों बन

30:17

सकता है लेकिन प्रति कभी चेंज नहीं होगा

30:19

प्रति और कुछ बन सकता है प्लूरल या फिर

30:21

सिंगल

30:24

नहीं बन सकता ठीक है इस तरह से हो गया यथा

30:27

समय यानी समय के अनुसार नेक्स्ट कर्मधारय

30:31

समास इसमें क्या होता है पूर्व पद वी

30:33

उत्तर पद में विशेषण और विशेष्य संबंध

30:35

होता है यह भी इजी है आप लोगों से इतना

30:38

याद रखना है

30:41

विशेषण

30:53

आत्मा

30:54

ऐसी आत्मा जो महान हो तो विशेषण

31:00

नेक्स्ट बहुव्रीहि समास इसमें दोनों होते

31:03

हैं और अन्य पद अर्थ होता है मतलब इसमें

31:06

दोनों ही जो उसका अर्थ तीसरी पद से

31:09

बिल्कुल भी नहीं मिलेगा जो इसका आंसर होगा

31:11

जैसे

31:13

पीतांबर पीला है अंबर जिसका अंबर पीला हो

31:17

यहां पर पीतांबर बन गया लेकिन पीतांबर है

31:21

और कांग्रेस

31:26

के दशानन तो दशानन कौन है रावण है कर है

31:30

जिसकी चतुर्भुज हो गया चतुर्भुज कौन है

31:34

हमारे ये मैं शॉप वाली चतुर्भुज की बात

31:36

नहीं कर रही हूं विष्णु को भी चतुर्भुज

31:38

कहते हैं क्योंकि कर भुजाएं होती हैं

31:46

जो किसी शब्द प्रारंभ में लगता हैं

31:52

निर्माण करते उदाहरण के लिए

31:58

उपसर्ग कौन-कौन सा है

32:03

वे शब्द के अंत में जुड़ने पर उसके अर्थ

32:06

में परिवर्तन लेट हैं

32:08

जैसे ही

32:10

अहंकार अपनापन और मोरटा इसमें प्रत्यय

32:14

क्या है अहंकार में है का मतलब

32:21

इसमें है अपनापन में पान है

32:29

अब आपके शब्द खत्म हो रहे हैं पड़ा की बात

32:32

करेंगे पद विचार में आपको चांद पढ़ना है

32:35

दोहा रोल चौपाई और कवित सवैया सोरठा धन

32:40

श्री मुक्त श्रद्धांजलि चांद आदि मतलब और

32:43

भी चीज हैं बट ये आपके सिलेबस में है तो

32:46

ध्यान से समझिएगा आपके लिए न्यू होगा

32:48

क्योंकि इससे पहले चांद दोहेड़ा तो स्कूल

32:50

में आई डोंट थिंक की इतना ज्यादा पढ़ने

32:53

हैं

32:57

चांद क्या होता है आडंबर प्रवाह तथा आवरण

33:00

किसी रचना के प्रत्येक पद में मात्राओं

33:03

अथवा वर्णों की नित संख्या

33:27

चांद में पहले प्रेयर आता है आपका दोहा

33:29

दोहा आपने सुना भी होगा कबीर ए रहीम का

33:32

बिहार का

33:34

तृतीय चरण में 13-13 मात्राएं और द्वितीय

33:37

चतुर्थ चरण में 11 द्वारा मात्राएं होती

33:39

है वह दोहा कहलाता है

33:46

मेरी भाव बड़ा हारो राधा नगरी सोई जतन की

33:51

जय परेशान

33:55

की पहले और तीसरी चरण में 13 मात्राएं तो

33:58

यह हो गया पहले चरण यहां पर यह 13

34:00

मात्राएं होगी और तीसरा चरण तो यह है

34:03

तीसरा क्योंकि यह तीसरा यह दूसरा हो गया

34:05

और यहां पर भी कितनी होगी 13 मात्राएं

34:09

होगी बाकी यहां पर 11 और यहां पर 11

34:11

मात्राएं होगी तो पहले और तृतीय चरण में

34:14

13-13 मात्राएं होगी और चौथ और दूसरे में

34:17

सॉरी पहले

34:19

ठीक है

34:27

आप ध्यान से सुनेंगे

34:30

छोटी

34:33

और ऋषि इन्हें तो हम एक दिन मंत्र इनके

34:37

अलावा जो होती है जैसे बड़ा ए हो गया

34:55

दो और यह बड़ी आई की मंत्र है री पे तो

34:58

मेरी दो और दो कर हो गए यहां पर भाव यहां

35:01

पे दोनों ही छोटे एन जुड़े हुए हैं तो

35:03

यहां पे दो ही आएगी

35:05

बड़ा में कितने आएंगे कर हो जाएगी क्योंकि

35:08

बड़ा ए है दोनों में भी कितने हो जाएगी

35:11

आपकी दो हो जाएगी यहां पर कर और फिर राधा

35:15

में भी

35:16

नगरी में देखिए कितनी होगी दो तीन और दो

35:21

पांच और सोए कितनी मात्राएं हो जाएंगे

35:47

[संगीत]

35:50

हां आज समझ लेंगे ना आपको सीटेट में भी

35:53

दिक्कत नहीं होगी

36:07

तो मां पर ए की मंत्र है तो अब हम इसे तू

36:10

हमारी सिंगल मंत्र में नहीं आता तो दो हो

36:15

गए की मंत्र है तो दो कर हो गए यहां पे

36:18

उसके बाद भाव में दो ही आएंगे क्योंकि और

36:21

जुड़ा हुआ है छोटा एन है

36:25

बड़ा में फिर से कर हो जाएगी बड़ा और

36:29

दो तीन अब इसको बोलते हैं

36:33

बिल्कुल तो आपने देखा पहले चरण में कितनी

36:37

मात्राएं हुई आपकी 13 इस तरीके से इस वाली

36:40

में दूसरी में फिर तीसरी में 13 और चौथी

36:43

में 11 आप देखेंगे जो दोहा रोल चौपाई सब

36:46

आई थी ना इसमें सिर्फ मात्राओं का ही फर्क

36:48

है और आपको यही याद रखना है

36:55

नेक्स्ट चलिए रोल तो रोल जो होता है इस

36:57

चांद में कर चरण होते हैं कर चरण ऊपर भी

37:00

थे नीचे भी अब कर चरण ए रहे हैं इसके

37:03

प्रत्येक चरण में 11 और 13 मात्राएं होती

37:05

हैं और कल मिला हो जाति है 24 तो जैसे

37:08

यहां पर इन्होंने कर चरण होंगे तो ये

37:10

रिचार्ज चरण और इसमें इन्होंने कहा है की

37:13

पहले चरण में 11 तो ये रहा पहले चरण जैसे

37:15

मैंने ऊपर आपको काउंट कराई थी मंत्र आप

37:18

यहां पे काउंट करेंगे उसके बाद यहां पे 11

37:20

होगी और इधर होगी 13 और इन दोनों को मिलकर

37:23

बन जाएंगे हमारी 24 मात्राएं और हर जगह

37:25

ऐसी हो गई यहां पे भी इस चरण में भी इस

37:28

चरण में भी और 24 24 मात्राएं हर चरण में

37:31

होगी और इसे हम कहते हैं रोल ठीक है तो यह

37:34

दोहा नहीं है दोहा अलग है दोहे में क्या

37:36

होता है पहले और तीसरी में 13 मात्राएं

37:39

दूसरा चौथ में 11 मात्राएं चलिए

37:47

किताबें होती हैं पुरानी

37:52

मात्राएं बहुत इंपॉर्टेंट है कई बार

37:55

क्वेश्चन और अदर टीचिंग एग्जाम में भी आता

37:57

है

37:58

चौपाई क्या होता है चरण में 16-16

38:02

मात्राएं होती है और अंत में दो गुरु शुभ

38:04

मैन जाते हैं

38:06

वह

38:08

चरण में देखेंगे कर चरण दे रहे चारों में

38:12

ही कितनी मात्राएं होगी 16-16 होगी और अंत

38:15

में क्या होता है शुभ गन माना जाता है

38:17

यानी पढ़ने में लाया था इसे गाना पछताना

38:21

समान सूजन इस टाइप का होता है तो ये होती

38:24

है चौपाई अब देखते हैं कविता

38:28

सॉरी

39:13

[संगीत]

39:21

कर चरणों वाले चांद होते हैं ठीक है जैसे

39:24

देख लीजिए दुरी भरे अति शोभित श्याम ज

39:28

तैसी बने सर छोटी

39:43

होते हैं तो इसमें कर चांद और ए जाएंगे

39:46

नीचे मैंने पूरा कंप्लीट नहीं किया इसको

39:49

काफी बड़ा था ये आप बस याद रखिए की किसमे

39:52

कितनी मात्राएं होती हैं और कितने वर्ण

39:54

होते हैं सोरठा क्या होता है इसमें पहले

39:56

और तीसरी चरण में 11 11 मात्राएं होती हैं

39:58

और दूसरे और चौथ चरण में 13 मात्राएं होते

40:01

हैं बिल्कुल दोहे का उल्टा दोहे में क्या

40:04

था पहले और तीसरी में 13 मंत्र थी इसमें

40:06

क्या है

40:18

नेक्स्ट धनश्री प्रत्येक चरण में 31 वर्ण

40:22

हो और 16 वर्ण वी 15 वर्णों पर यति हो अंत

40:25

में गुरु हो तो यह हो गया हमारा एग्जांपल

40:28

धन श्री राम 16 वर्ण ये रहे उसके बाद यदि

40:31

मतलब क्या है अगले लाइन पर होगी और फिर 15

40:35

वर्णों यानी पहले लाइन में 16 वर्ण दूसरी

40:37

में 15 वर्ण वर्ण मैंने बता दिया आपको

40:39

व्यंजन जो होते हमारे ये होते हैं तो इनको

40:43

जिन लेंगे

40:45

बहुत ही अच्छी चीज है ये चांद आधुनिक युग

40:48

में चांदो के नियमों से मुक्त हृदय मुक्त

40:52

उच्च वास मानते हैं बिल्कुल देखिए क्या है

40:54

ये इसका मतलब ये है आज के टाइम पर जो

40:56

हमारी कविताएं लिखी जाति है उसमें चांद

40:59

दोहा यह

41:03

लाइन में 16 मात्राएं तो वह अपनी कविता को

41:06

खुलकर लिखेगा कैसे तो यह चीज अभी

41:11

ले सकते हैं जैसे यहां पर निराला जी कविता

41:14

एग्जांपल दिया हुआ है

41:36

हमारा कैलेंडर

42:00

दरवाजे के लिए भी आया है और

42:04

पट देती बार-बार है मतलब एक तरह से गगन को

42:08

छुपाने के लिए भी आया है जैसे धक देते हैं

42:10

किसी चीज को उसके लिए भी आया है तो एक ही

42:14

शब्द हो तो श्लेष अलंकार होता है

42:18

इसमें क्या होता है की समाज ध्वनि की

42:21

आवृत्ति बार-बार होती है जैसे चारों चंद्र

42:23

की चंचल करने तो आवृत्ति बार-बार हो रही

42:26

है

42:27

उसके बाद उपमा अलंकार यहां पर मैं एक

42:30

वास्तु या प्राणी तुलना दूसरी वास्तु से

42:32

या फिर प्राणी से करते हैं जैसे नीलिमा

42:34

चंद्रमा जैसी सुंदर है नीलिमा को हमने

42:36

चंद्रमा से उपमा कर दी उसकी ठीक है अब

42:39

नेक्स्ट देखिए

42:42

अपमान का आरो ओपन होता है और अत्यंत

42:46

सामान्य के करण मतलब बहुत ही ज्यादा

42:47

सामान्य बताई जैसे मैया में मैया में

42:50

चंद्र खिलौना लियो ये नहीं का रहे हैं की

42:52

चंद्र जैसा खिलौना यह का रहे हैं की चंद्र

42:54

खिलौना नहीं हो इतनी ज्यादा समांतर कर दे

42:56

की चंद्र खिलौना ही मुझे दे दो

42:58

अतिश्ती में क्या होता है किसी वास्तु को

43:00

पदार्थ अथवा प्रथम का वर्णन लोक सीमा से

43:03

बढ़कर कर दे मतलब हद से ज्यादा जब बड़ा

43:05

चड्ढा और बात का दे तो होती है अलंकार

43:08

जैसे की बालों को खोलकर मत चला करो दिन

43:10

में रास्ता भूल जाएगा सूरज भला ऐसा होता

43:13

है

43:45

अगला अर्थ रजिस्ट्रेशन

43:48

मुहावरे और लोकोक्तियां शब्द शक्ति

43:51

उच्चारण उसके अर्थ को समझना के बीच एक और

43:54

प्रत्यक्ष भीम होती है वही होती है शब्द

43:56

शक्ति जैसे शब्द उसे सुनते ही मार्ट समझ

43:58

जैन उदाहरण के लिए सरदार पटेल महान थे तो

44:03

इसका सीधा स्पष्ट सी बातें की वो महान थे

44:05

लेकिन अगर मैं कहूं सरदार पटेल लो पुरुष

44:07

थे तो इसका मतलब यह तो लोहे के थे इसका

44:10

मतलब यह है की लोहे जैसे दृढ़ थे तो

44:13

शब्दों में शक्ति होती है जिसे हम पढ़कर

44:15

समझ जाते हैं

44:18

शब्द शक्ति के प्रकार होते हैं पहले है

44:20

अभिधा अभिधा मतलब सभी शब्दों के नाम वाची

44:23

यानी साक्षात अज मतलब जो नाम है इस से हम

44:25

पहचान ले जैसे की गे हैं तो अगर कोई गे

44:28

बोले तो हमारे मन में जाता है

44:38

कोई और शब्द बोल देते हैं जैसे की मधुर

44:43

अगर मैंने कहा मधु कहा है तो मधु गे थोड़ी

44:46

ना बन रही मतलब गे के गन हैं उसमें गे

44:49

जैसी और सीधी साधु है है ना तो ये होता है

44:52

लक्ष्मी आता है व्यंजन व्यंजन में क्या

44:56

होता है मुख्य आरती या फिर आभास से भिन्न

44:58

किसी विशेष अर्थ की प्रतिनिधि अबोध मतलब

45:00

यहां पे तो थोड़ा डिफिकल्ट वाला हिंदी ए

45:03

जाता है हमारा जैसे रहमान पानी रखिए पानी

45:06

बिन सब सुन पानी बिन मोती मानुष चुन तो

45:09

यहां पर कुछ अलग ही साथ दी जा रही होती है

45:12

हमें शब्दों के मध्य से या फिर वाक्य के

45:15

मध्य से जैसे यहां पर पानी का मुख्य अर्थ

45:18

तो जल है तो अभी अर्थ नहीं लगा सकते पानी

45:22

का अर्थ क्रांति प्रतिष्ठा आदि के रूप में

45:25

भी है की चीज चली जाए

45:33

किसी विशेष

45:59

तो लोकप्रिय घटना द्वारा मुंह से निकली

46:02

हुई बात जिसे हम कहावत भी का देते हैं तो

46:04

यह क्या होता है की इसके अंतर्गत भी ना

46:07

मुहावरे जैसे ही अर्थ अलग निकलते हैं

46:09

लेकिन

46:10

जो है बिना वाक्य प्रयोग के भी अर्थ दे

46:13

शक्ति है ठीक है उदाहरण के लिए अंधो में

46:15

आना राजा तो मूर्ख के बीच अगर साधारण

46:18

जानकारी भी है तो वो अंधो में आना राजा है

46:21

लोगों में यह बड़ी दिक्कत होती है मुहावरा

46:24

और अंतर नहीं पता होता देख लीजिए जो

46:27

मुहावरे होते हैं ना उनका अर्थ वाक्य के

46:29

साथ ही पता चलेगा लेकिन लोकृतियां जो है

46:31

ना बिना वाक्य के भी अपना अर्थ दे देंगे

46:33

जैसे अंधो में कान्हा राजा यह भी अर्थ है

46:35

कोई अंधा है कोई अंधा का देश है वहां पर

46:37

कोई कम है तो वो राजा है

46:49

तो आप वहां पर बहुत सारे मुहावरे

46:51

लोकोक्तियां देख सकते हैं

46:53

नेक्स्ट टॉपिक है भाव की दृष्टि से अभाव

46:56

दृष्टि से लेते हैं शब्दों को इसमें आएंगे

46:58

रस उसकी अवधारणा महत्व प्रकाश तो काफी

47:02

शास्त्र में साहित्य के पठान पार्थन में

47:04

जो आनंद मिले वही रस होता है यानी रस मतलब

47:06

आनंद इस रस को अनुभव किया जा सकता है भारत

47:10

मनी जो है उन्होंने कहा है की विभव अनुभव

47:14

व्यभिचार भाव संयुक्त दृश्य निष्पत्ति है

47:17

अर्थात विभाग अनुभव या बेचारी भाव के

47:20

सहयोग से ही रस इन निष्पत्ति होती है तो

47:24

अब महत्व क्या है काव्या रचना में ही

47:26

आवश्यक है

47:29

काव्या सुंदरता बढ़नी है से आनंद मिलता है

47:32

और दर्शन रूप से मुक्त हो जाते हैं

47:34

इंपॉर्टेंट है वह टोटल

47:44

संयुक्त और वियोग संयुक्त में अगर मिलन की

47:48

बात हो अभियोग में क्या होता है

47:54

वो याद रहे हैं वो है हंसना या फिर हाई

47:57

यानी कहानी भी जितने भी जो वगैरा होते हैं

47:59

जिससे बाढ़ और हमें हंसी आई तो वहां पर

48:01

कौन सा रस होगा हाथ से रस होगा फिर आता है

48:05

यानी देश प्रेम की बात की जाए आपको आगे

48:08

बढ़ाने की बात की जाए तो वीर रस की बात

48:10

होगी

48:14

किसी चीज को दया ए जाति है तो वहां पर

48:17

करूं रस होता है फिर आता है

48:22

जिसमें क्रोध

48:28

फिर आता है भयानक रस स्थाई भाव है भाई

48:30

यानी डर और किस चीज को पढ़ कर हमें डर

48:33

उत्पन्न हो हमारे मां में तो वो होता है

48:35

भयाना रस अब देखते हैं वीभत्स रस क्या

48:37

होता है स्थाई भाव होता है घृणा या जिन

48:39

किसी चीज ऐसी लाइन जिससे जिसमें पढ़ और

48:42

हमें घर आए या फिर धीन की बात की जा रही

48:45

हो मतलब कुछ गांधी सी बात की जा रही हो तो

48:47

वीभत्स रस होता है फिर आता है अद्भुत रस

48:50

जिसमें आश्चर्य हो हमें किसी चीज को शांत

48:53

रस में क्या होता है विराट और त्याग की

48:55

भावना होती है त्याग देना शांत रहना तो

48:58

प्रशांत रस और फिर आता है हमारा वात्सल्य

49:01

रस जिसका स्थाई भाव है इसने यानी माता

49:04

पिता का प्रेम अगर चला रहा हो किसी लाइन

49:06

में चाहे वो कृष्णा का यशोदा के लिए हो या

49:09

यशोदा माता का कृष्णा के लिए हो तो वहां

49:12

पर क्या होगा हमारा

49:23

कोई भी ऐसा ग्रेविटी

49:28

में अलग से वीडियो बना दूंगी उसके लिए

49:31

वीडियो तबीयत खराब होने से थोड़ा लेट हो

49:35

गई है अब मैं कोशिश करूंगी की रेगुलर

49:37

वीडियो आप तक पहुंच जाए

49:40

आज की वीडियो में हम हिंदी दक्षता का इकाई

49:43

तीन करेंगे इससे पहले हम इकाई एक और दो कर

49:46

चुके हैं तो इकाई तीन जिसका नाम है हिंदी

49:50

साहित्य का परिचय

49:59

भी जो है यहां से काफी सारे बनकर आएंगे तो

50:03

स्टार्ट करते हैं इस वीडियो को सबसे पहले

50:06

जो टॉपिक है आपके सिलेबस में वो है भाषा

50:09

और साहित्य यानी पहले लैंग्वेज को जान

50:12

लीजिए और भाषा क्योंकि हम हिंदी दक्षता

50:14

पढ़ रहे हैं तो ऑब्वियस सी बात है हिंदी

50:16

लैंग्वेज की यहां पर बात की जा रही है और

50:20

जो साहित्य है लिटरेचर है वह भी हिंदी का

50:23

ही है तो यहां पर क्या है अगर हम भाषा और

50:26

साहित्य की बात करें तो यह दोनों ही एक ही

50:29

दो पहलू होते हैं अगर भाषा नहीं होगी तो

50:32

साहित्य कैसे रचा जाएगा और यदि साहित्य है

50:35

तो फिर उसे डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेज में

50:39

भी अनुवाद किया जा सकता

50:56

है तो भाषा का विकास भी अपने आप ही होने

50:59

लगता है और यदि हमारे पास साहित्य

51:02

को सुना है सिर्फ मां लीजिए तो फिर क्या

51:06

करेंगे हम उसको

51:08

उसको और अच्छी भाषा में लिखकर भाषा में भी

51:12

उसका विकास करेंगे

51:17

और भाषा जो है वह वैज्ञानिक शब्द है या

51:20

दीवार की जाए तो क्योंकि भाषा हो रही तो

51:24

मां लीजिए साहित्य है आपने अपनी नानी दादी

51:26

से एक कुछ भी कहानी सनी तो अब आप उसको

51:31

सुनाया था तो उसमें आप भाषा में क्या

51:35

करेंगे जब आप लेंगे तो उसमें वैज्ञानिक

51:37

तरीके से भाषा का प्रयोग करेंगे ताकि

51:39

पढ़ने वाला प्रभावित होश से और साहित्यकार

51:43

भी इसे रचना का जन्म यहां से होता है

51:46

पढ़ने और लिखने और अभिव्यक्ति की क्षमता

51:48

भाषा में साहित्य द्वारा

51:55

योगदान माना जाता है तो यह संबंध हमारी

51:59

भाषा और साहित्य के अंदर अब चाहे

52:02

लिटरेचर के साथ वही रिलेशन है

52:11

अब देखिए साहित्य और समाज में संबंध अगला

52:15

टॉपिक है तो साहित्य क्या होता है हमने

52:17

ऊपर पढ़ लिया जितने भी हमारा लिटरेचर है

52:19

कहानी उपन्यास कविताएं गद्य पद्य सब कुछ

52:23

जो है हमारा साहित्य है और समाज यानी की

52:26

सोसाइटी उन दोनों अंदर जो है क्या रिलेशंस

52:31

है वह हमें बताना है

52:34

अनुभव करते हैं एक्सपीरियंस करता है इस से

52:37

भारत होता है साहित्य और इसीलिए दोनों के

52:41

अंदर होता है गहरा संबंध ठीक है समाज अंदर

52:44

रहकर हम कुछ नोटिस करते हैं एक्सपीरियंस

52:46

करते हैं उसके बाद हमारे बीच से कोई

52:49

साहित्यकार भी बन जाता है जो उन चीजों को

52:52

देता है बता देता है तो वह संबंध होता है

52:55

बिल्कुल डायरेक्ट होता है

52:58

साहित्य में व्यक्ति और समाज की

53:00

प्रवृत्तियां का समन्वय होता है ठीक है

53:02

समाज के दर्पण के रूप में साहित्य समाज

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जैसे आप खड़े होते हैं और अपने आप को

53:09

देखते हैं अपनी अच्छाइयां भी बुराइयां भी

53:12

इस तरीके से साहित्य भी है जो इस समाज के

53:15

लिए आईने का कम करती है यदि हम साहित्य

53:18

पढ़ने हैं तो समाज अच्छा

53:20

जरूरी है कहां क्या सही होना चाहिए

53:24

भ्रष्टाचार को लेकर कोई कहानी पड़ी आपने

53:27

कहानी गबन आपने प्रेमचंद की पड़ी हो तो

53:30

आपको पता चलेगा करप्शन किस तरीके से कम

53:32

करता है तो साहित्य के अंदर समाज की

53:35

कुरीतियां को भी शामिल किया जाता है और

53:37

अच्छाइयों को भी

53:39

उपयुक्त समाधान और सुझाव और इतना ही नहीं

53:42

जिसे प्रॉब्लम्स दिखाई जाति है इसके

53:44

साथ-साथ साहित्य के मध्य से उसे सुझाव भी

53:47

कई बार बता दिए जाते हैं और यथार्थ की

53:50

समस्याओं को यह उजियार्थ यानी जो रियल

53:53

लाइफ में होता है प्रॉब्लम्स उनको ये नहीं

53:56

थी इमेजिनरी कुछ चल रहा है तो कल्पनाओं की

54:00

दुनिया से हटकर जो साहित्य है एक अच्छा

54:02

साहित्य है वो क्या होता है यथार्थ की

54:05

समस्याओं पर आधारित होता है

54:09

हिंदी साहित्य तो हिंदी साहित्य की बात की

54:12

जाए हिंदी क्या है हमारे देश की विस्तृत

54:15

भूभाग में फैली हुई है यदि ज्यादा देखा

54:18

जाए तो हिंदी फैली हुई है जिससे हिंदी

54:20

साहित्य भी फैला हुआ है हिंदी भाषा में

54:23

रचित विविध विधाएं टूटी हिंदी में बहुत

54:25

साड़ी विधाओं में लिखा गया है ना सिर्फ

54:28

कहानी बल्कि नाटक उपन्यास कविताएं संस्मरण

54:32

चित्र

54:36

रेखाओं में हिंदी के भाषा में लिटरेचर

54:39

लिखा गया

54:51

संस्कृत को भी माना जाता है तो संस्कृत

54:54

में भी बहुत साड़ी रचनाएं आपको देखने को

54:57

मिल जाएगी प्राचीन कल की

54:59

प्रत्यय बोली में भाषा

55:02

बोली में भी इसका महत्व है जैसे टीटीसी

55:06

क्षेत्र में कोई बोली बोली जाति है तो

55:07

वहां भी हिंदी कहानी ना कहानी रूप में

55:09

समावेश हो जाति है विश्व भर में भी

55:13

साहित्य मतलब पूरे वर्ल्डवाइड आप दे

55:16

इन्हें प्रेमचंद को पढ़ने वाले और

55:17

प्रेमचंद के दीवाने मतलब आपको मिल जाएंगे

55:20

जैसे शेक्सपियर अगर बात की जाए इंग्लिश

55:23

लिटरेचर में तो हमारे प्रेमचंद को भी आप

55:27

देखेंगे की वर्ल्ड वाइड उनको पढ़ा जाता है

55:29

और सिर्फ प्रेमचंद ही नहीं और भी बहुत

55:31

साड़ी रचनाएं हैं हमारी जो विश्व भर में

55:33

ख्याति मिली है उनको तो इसलिए हिंदी

55:35

साहित्य जो है हमारे लिए काफी फेमस है और

55:38

इंपॉर्टेंट है

55:41

अब हम पढ़ेंगे हिंदी साहित्य का कल विभाजन

55:44

जैसे इतिहास में कल विभाजन होता है इतने

55:47

से इतना टाइम इतने से इतना टाइम इस राजा

55:49

का तो इस तरीके से हमारे हिंदी साहित्यकार

55:52

भी इतिहास को कल विभाजित किया जाएगा

56:21

आदिकाल जो है हजारी प्रसाद द्विवेदी ने यह

56:24

नाम दिया था इस को और इसे वीर रहा था कल

56:27

भी कहा जाता है प्रारंभिक कल भी कहा जाता

56:29

है और भी कई सारे नाम हैं इस विशेषताएं

56:33

इंपॉर्टेंट है पेपर में ना कल विभाजन के

56:35

साथ इस विशेषता पूछेगा की किस कल की क्या

56:38

विशेषता थी तो इस वाले ट्रायल की आदि दाल

56:40

की जो विशेषता है वो ये है इसमें रासो

56:43

काव्या की परंपरा है रस से भरे हुए आपको

56:45

मिलेंगे इसके अंदर जितनी भी रचनाएं होगी

56:47

वीर और शिंदे यहां पर प्रधानता है

56:51

राष्ट्रीय भावना का भाव है क्योंकि

56:53

प्राचीन कल की बात हो रही है आदिकाल काफी

56:56

पुराना अदरक समय 1375 भी तो काफी पीछे में

57:00

राष्ट्रवाद की भावना इतनी ज्यादा लोगों

57:02

में थी नहीं तो राष्ट्रीय भावना वहां पर

57:04

नहीं दिखती जनजीवन से भी संपर्क नहीं है

57:06

मतलब लोगों का यथार्थ वहां पर आपको कब

57:09

मिलेगा थोड़ा इमेजिनरी ज्यादा मिल जाएगा

57:11

और शिल्प विधान यानी एकदम शिल्प से जीत जो

57:15

साहित्य होता है ना वह आपको इस टाइम का

57:17

पढ़ने को मिल जाएगा

57:30

और इसीलिए आचार्य रामचंद्र शुक्ला ने इसे

57:33

धर्म का रस आत्मा रूप भी बोला है इसके

57:36

विशेषताएं क्या है इसके अंदर गुरु महिमा

57:48

बहुजन हिताय लोगों के हिट के लिए और नीति

57:51

काव्या आदर्शवाद का यहां पर आपको देखने के

57:53

लिए मिलेगा

57:55

आगे चलेंगे रीतिकाल तो रीतिकाल क्या है

57:59

रितिक तत्व की प्रधानता के करण ही से

58:01

रीतिकाल कहा जाता है रीति होता है एक तरह

58:04

से आप का लीजिए लगाव जुड़ाव प्रेम का

58:08

लीजिए ठीक है तो इसके अंदर जो विशेषताएं

58:11

तो श्रृंगार दिखता है यानी आपको श्रृंगार

58:13

रस यहां पर मिलेगा जिसके अंदर संयुक्त

58:15

दोनों ही पक्ष मिल सकते हैं

58:19

अलंकार युक्त बहुत साड़ी रचनाएं हैं

58:22

अलंकार और खूब प्रयोग किया गया है जिसमें

58:24

मतलब अपनी प्रेमिका को इतना बड़ा चड्ढा के

58:27

बोल देते हैं अलंकारों का मतलब क्या होता

58:29

है सजा देना ना साहित्य को

58:32

प्रधानता मिल जाएगी नई प्रति यहां पर

58:35

दृष्टिकोण

58:45

है अगला जो कल हमारा आधुनिक कल जो 1900 से

58:48

शुरू हुआ और अभी तक आप मां सकते हैं की चल

58:51

रहा है इस अभियंत कुछ नहीं है तो यह क्या

58:54

इसमें आधुनिकता केंद्र में है मॉडर्न

58:56

आईटीआई अब ए रही है केंद्र में विशेषताएं

58:58

क्या है देश भक्ति अब 1900 से बाद इबादत

59:02

है तो ऑफ कोर्स हम समझ सकते हैं की यहां

59:04

पर देश भक्ति की भावना भी लोगों के अंदर ए

59:07

गई है नवीनता का समन्वय कुछ मॉडर्न चीज

59:10

रूढ़िवादियों को खत्म करके नई चीजों को

59:13

अपने के लिए जोर दिया गया है जनजीवन का

59:16

चित्र अब लोगों के बड़े में लिखा जा रहा

59:18

है प्रकृति चित्रण नेचर इस कल में ही

59:22

प्रेमचंद हुए हैं जिन्होंने इतने

59:23

बड़े-बड़े महाकाव्य और रचनाएं रची हैं और

59:27

खड़ी बोली का यहां पर प्रयोग किया गया है

59:29

गद्य में और ब्रिज भाषा में कविताएं लिखी

59:31

गई हैं ज्यादातर

59:34

ऐसा नहीं है

59:39

हमारे कल विभाजन अब है हमारे मुख्य

59:42

साहित्यकार जितने भी सिलेबस में

59:45

साहित्यकार है मैं आपको वहां पर वह सारे

59:47

कराऊंगी पेपर में सारे नहीं आएंगे दो

59:50

आएंगे ऑप्शन करके कर ए जाएंगे तो आपको जो

59:53

है इस हिसाब से तैयार करना है जब मैं

59:55

क्वेश्चन पेपर सॉल्व करवाऊंगी तो फिर मैं

59:58

आपको बता दूंगी की कौन सी इंपॉर्टेंट लेटर

60:00

को कभी है जिनको आप डेफिनेटली करके जैन जो

60:03

क्वेश्चन पेपर में आपको देखने को मिलेगा

60:06

ही मिलेगा तो सबसे पहले

60:10

तो रुद्रा शाह द्वारा कभी भूषण की पदवी

60:13

इनको मिली थी और शिवराज भूषण ग्रंथ की

60:17

इन्होंने रचना की थी और जो बहुत

60:19

इंपॉर्टेंट साहित्य विशेषताएं मतलब जो यह

60:21

साहित्य लिखने हैं उसमें क्या-क्या होता

60:22

है तो राष्ट्रीयता की भावना होती है

60:24

संस्कृति का प्रेम होता है धर्म प्रेम

60:27

होता है सामाजिकता होता है और प्रकृति

60:30

चित्रण होता है तो यह चीज इनके साहित्य

60:33

में होती है आप इनको एक्सप्लेन करके

60:34

एग्जाम में लिखेंगे फिर आते हैं सूरदास

60:37

1478 ई में इनका जन्म हुआ था और यह आपने

60:42

सुना होगा सूरदास के पद तो पड़ा के लिए

60:45

विख्यात है ये और भी इनकी जो रचनाएं हैं

60:47

वो है

60:48

सुरसरावली साहित्य लहरी प्रतिदिन के

60:51

काव्या हैं

60:52

साहित्य विशेषताएं क्या है भक्ति

60:57

काव्या जी गया जा सके और ब्रिज भाषा का

61:01

प्रयोग ही अपनी रचनाओं में करते हैं

61:04

तो 1535 ई में राजापुर में इनका जन्म हुआ

61:08

था यह भक्ति कल के कवि हैं इन्होंने

61:10

दोहावली कवितावली गीतावली रामचरितमाना

61:14

जैसे मुख्य रचनाएं रची हैं इनकी साहित्य

61:16

विशेषताएं रामगढ़ स्वरूप जो है क्योंकि

61:19

रामचरितमानस्ली है तो आप समझ ही शक्ति है

61:21

राम के स्वरूप के ऊपर अपने रचनाएं लिखने

61:24

थे

61:26

आपको भक्ति का स्वरूप मिल जाएगा रस

61:30

मिलेंगे

61:37

है अगले जो साहित्यकार है हमारी वह है

61:39

मेरा इनका नाम तो आपने जरूर सुना होगा

61:42

1555 संवत में राजस्थान के पास इनका जन्म

61:45

हुआ था बचपन से ही कृष्णा की आराधिका थी

61:47

और साहित्य विशेषताएं क्या भक्ति भावना

61:50

टूटी भगवान की भक्ति भावनाओं वाला साहित्य

61:54

ही रखेंगे भाव बहुत ही इमोशंस भरे हुए

61:57

इनके साहित्य की जितनी भी रचनाएं हैं वो

62:00

हैं सामाजिकता है उसमें वियोग वर्णन यानी

62:02

दूर होना क्योंकि ये कृष्णा से पुरी

62:05

जिंदगी मतलब प्रेम करती रही भक्ति वाला

62:08

लेकिन मिल नहीं पी तो वियोग का काफी लिखा

62:10

है इन्होंने और सरस मधुर भाषा का प्रयोग

62:13

इन्होंने अपनी रचनाओं में किया है

62:17

वह है कबीर तो कबीर आजम हुआ 1398 ई में

62:21

इनका जन्म हुआ था यह काफी उदार थे

62:23

सत्यवादी थी निर्भीक और आडंबर के विरोधी

62:26

यह जो प्रारंभ कांड

62:35

गुरु की महत्व यानी टीचर जो होता है जीवन

62:38

में उनके ऊपर इन्होंने काफी लिखा है आपने

62:41

ट्रावेरिया दोहे सुन होंगे जिसमें से दोहा

62:44

टीचर के गुरु के ऊपर भी है आपने जरूर सुना

62:47

होगा तो आप एग्जांपल भी यहां पर दाल सकते

62:49

हैं प्रेम की महत्व पर लिखा है माया के

62:52

प्रति सावधान और आडंबर का विरोध तो

62:54

इन्होंने किया है आप बंदर ने

62:58

आप इसको डर कर लीजिएगा नेक्स्ट चलिए रहीम

63:03

तो यह बहुमुखी व्यक्तित्व थे और रहीम

63:06

सत्संग

63:08

इनकी प्रमुख रचनाएं हैं साहित्य विशेषताओं

63:11

में नीति की प्रधानता मिलेगी आपको दैनिक

63:14

जीवन की अनुभूतियां पर आधारित चीज यह

63:16

लिखने थे भक्ति और श्रृंगार और भाषा जो है

63:19

वो कई भाषण में इन्होंने लिखा है और चांदो

63:21

का खूब प्रयोग किया

63:25

साहित्य विशेषताएं हैं उनकी श्रृंगार

63:28

वर्णन

63:31

चित्रण जैसे जैसे

63:41

प्रयोग किया है

63:45

फिर आते हैं जयशंकर प्रसाद और इन्होंने

63:49

क्या किया झरना लिखा अपनी रचना और फिर

63:51

वहीं से शुरू हुआ छायावादी काव्या इनका

63:55

छायावादी कवि ने इन्होंने झरना के भाषण

63:57

दिया और इसके अलावा जो इनकी रचनाएं हैं वो

64:00

है लहर आंसू कामिनी चंद्रगुप्त स्कंदगुप्त

64:04

तो यह सारे इनकी प्रमुख रचनाएं हैं

64:06

साहित्य विशेषताओं की बात की जाए तो

64:09

सौंदर्य प्रति इनका आकर्षण था तो उसके

64:11

बड़े में इन्होंने काफी लिखा है

64:13

व्यक्तिवाद है यानी

64:15

मेनिजाम को ये मानते हैं इंसान के बड़े

64:18

में लिखने ही यथार्थ के बड़े में लिखने

64:20

हैं

64:22

अतीत राज लिखने हैं संस्कृति दृष्टिकोण पर

64:25

भी ये अपनी रचनाएं जो है इन्होंने की है

64:28

उसके बाद आते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी

64:30

निराला जी यह भी बहू ही साहित्यकार है कई

64:34

विषयों पर इन्होंने लिखा है इनके जो फेमस

64:36

रचनाएं हैं उनमें से कुकुरमुत्ता अप्सरा

64:43

अनामिका बेल इन थी प्रमुख जो है वह रचनाएं

64:46

हैं आप उसे अप्सरा कर लीजिएगा अपराधती से

64:50

साहित्य विशेषताएं क्या होगी रहस्यवाद पर

64:53

लेते हैं मतलब इतनी गंभीर और मतलब काफी

64:57

गंभीरता पूर्व ही लिखने हैं राष्ट्रीयता

64:59

की भावना होती है इनकी रचनाओं में आत्म

65:02

विव्यक्ति यानी मां के अंदर जो इमोशंस आते

65:04

हैं उसको ही लिख देते हैं नई सौंदर्य का

65:07

भी इन्होंने वर्णन किया है फिर आते हैं

65:10

सुमित्रानंदन पेंट प्रकृति प्रेमी रही

65:13

संवेदनशील कवि हैं और इन्होंने जो लिखा है

65:16

प्रमुख रचनाएं वो है ग्रंथि जोशना शिल्पी

65:18

वीणा इत्यादि इनकी प्रमुख रचनाएं हैं

65:21

साहित्य विशेषताओं की बात करें तो प्रकृति

65:24

अच्छी तरह किया है कल्पना आधारित चीज लिखी

65:27

हैं लो मंडल की भावना के हिसाब से लिखा है

65:30

रहस्यवाद पर संस्कृत निशीथ खड़ी बोली में

65:34

इन्होंने अपने रचनाओं को लिखा है यह जो

65:37

मैं साहित्य विशेषताएं बता रही हूं ना यह

65:38

बहुत जरूरी है आपके सिलेबस में दिया गया

65:40

है की इन कवियों के बड़े में जब आप

65:43

क्वेश्चन अटेंड करेंगे ना मैं तब भी बता

65:45

दूंगी आपको और अभी भी बता देती हूं की जब

65:48

भी ऐसे जैसे लेखक के ऊपर आएगा तो आप पहले

65:51

उनका जीवन परिचय इन्हें उसके बाद उनके कुछ

65:53

प्रमुख रचनाएं लिखी हुई उसके बाद साहित्य

65:56

विशेषताएं लेकिन जो इस क्वेश्चन का क्या

65:59

है दिल है हट है तो आप इसको जरूर लिखेंगे

66:03

अब देखिए अगले जो हमारे महादेवा वर्मा

66:06

यदुनी मीरा भी इनको कहा जाता है इन्होंने

66:09

रश्मि नीरज निहार दीप शिखा प्रमुख रचनाएं

66:12

हैं इनकी साहित्य विशेषताएं क्या है पीड़ा

66:15

और वेदना पर लिखा है इन्होंने आत्मनूहूति

66:18

रहस्यवाद प्रकृति

66:22

तो यह साड़ी चीज महादेवा के महादेवा वर्मा

66:25

जी के साहित्य में आपको देखने को मिलेगी

66:30

बात करेंगे हम तो प्रमुख लेखक की अगर बात

66:33

करें तो पहले आते हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र

66:35

जो 1850 से 85 रहे इनका जन्मकशी में हुआ

66:39

था और आधुनिक हिंदी साहित्य में बहुत ही

66:42

महत्वपूर्ण मैन जाते हैं अगर हम इनकी

66:45

प्रमुख नैटको की बात करें तो इन्होंने कुछ

66:47

नाटक लिखे हैं और जैसे की सत्य हरिश्चंद्र

66:50

श्री चंद्रावली भारत दुर्दशा जैसे नाटक

66:54

काफी फेमस है इनके साहित्य विशेषताएं फिर

66:56

से देख लीजिए अब भारतीय

67:00

चेतन होती है इनकी जो भी साहित्य लिखने

67:04

हैं उसमें भारतीय संस्कृति की झलक मिलती

67:06

है समाज सुधार का वहां पर

67:10

देखने को मिलता है

67:17

तो मुझे प्रेमचंद के बड़े में जितना ही

67:19

रहे उतना ही कम है

67:21

1880 से 1936 के बीच ही रहे और वाराणसी

67:25

में इनका लमही नाम के गांव में जन्म हुआ

67:28

था इनका मूल नाम जो था वह धनपत राय था और

67:31

इन्होंने जितनी भी कहानी लिखी हैं उन्हें

67:33

मानसरोवर में पिरोए गया है जो की आठ भागन

67:36

में विभाजित है इसके अलावा कुछ उपन्यासों

67:39

की बात करें तो प्रेमाश्रम गबन गोदान जैसी

67:41

रचनाएं इनकी मतलब वर्ल्ड फेमस रचनाएं हैं

67:45

गोदान को तो महाकाव्य का आप देखिए दर्ज

67:49

दिया जाता है साहित्य विशेषताएं चित्रण

67:52

करते हैं मतलब मर्म अगर आप प्रेमचंद की

67:54

रचनाओं को पढ़ेंगे तो ऐसा लगेगा की आप जी

67:57

रहे हैं उसको कृषक दूरदर्शन

68:01

से उनके साथ जो भी बड़ा होता रहा था उन

68:04

सबके बड़े में दलित की समस्या

68:13

एकदम सरल होती है आसानी से समझ ए जाति है

68:20

चलिए नेक्स्ट हजारी प्रसाद द्विवेदी तो

68:22

1960 से 1979 ई तक रहे हैं अशोक के फूल

68:27

कल्पित

68:29

टूटल पाव साहित्य सहचार्य इनकी प्रमुख

68:32

रचनाएं हैं साहित्य विशेषता क्या खड़ी

68:34

बोली प्रयोग करते हैं आलोचनात्मक वर्णन

68:37

शैली का प्रयोग करते हैं आज आलोचना

68:41

अगर कोई चीज गलत है तो गलत कहना वर्णन

68:45

करना अच्छे से वर्णन करते हैं व्यंजन करना

68:48

और व्यास शैली में ये

68:51

अपनी रचनाएं लिखने हैं फिर आते हैं

68:54

धर्मवीर भारती 1926 में राजन में इलाहाबाद

68:56

में हुआ था और इनको चिंतामणि घोष पुरस्कार

68:59

से सम्मानित भी किया गया है

69:05

फेमस उपन्यास है

69:10

और यह इनकी प्रमुख रचनाएं भी हैं साहित्य

69:13

विशेषताएं क्या यह सामाजिक समस्या के ऊपर

69:15

लिखने हैं

69:20

इनकी नई सौंदर्य का चित्रण

69:25

फिर हमारे भगवती चरण वर्मा 1903 से 81 तक

69:29

पद्मभूषण का समाज भी इनको मिल चुका है

69:32

इनकी जो रचनाएं हैं चित्रलेखा रेखा टेढ़ा

69:37

मधे रास्ते दीवानों की हंसी तो यह इनकी

69:40

प्रमुख रचनाएं हैं साहित्य विशेषताओं की

69:42

बात की जाए तो राष्ट्रीयता की भावना सरल

69:45

भाषा संवाद शैली साहित्यलोचना

69:49

को आपको मिल जाएंगे

69:59

विशेषताएं और कुछ रचनाएं याद करने पढ़ेंगे

70:03

आपको थोड़ा सा जीवन परिचय ताकि आप इंट्रो

70:05

दे सकें तो ज्यादा टेंशन लेने की जरूर

70:08

नहीं है अगर आपको ज्यादा याद नहीं रहती तो

70:11

जो भी मन में अभी मैंने आपको पटाया तो दो

70:14

कर तो आई गई होगी की सरल भाषा होती है और

70:17

प्रकृति चित्रण होता है यह सब तो आप किसी

70:20

भी लेखक के अंदर ले सकते हैं

70:23

आसपास की चीज नेचर

70:28

भी उन्हें चीजों पर लिखने हैं

70:31

वह है बाल साहित्य बहुत इंपॉर्टेंट

70:34

क्वेश्चन 100% आएगा

70:44

इस प्रकार की पुस्तक जिन्हें रचनाकार

70:47

बालको के मानसिक स्टार की अनुरूप तथा उनकी

70:50

रुचियां और अभिरुचियों को ध्यान में रखना

70:54

है यह बाल कोठी आवश्यकताओं की पूर्ति करने

70:56

वाला होता है बच्चों को पढ़कर उनको शिक्षा

71:00

देना उनको उसे लाइफ अपनी लाइफ में कुछ

71:04

उतारना तो यह होता है बाल साहित्य जो

71:07

बालों के अनुसार उसकी भाषा ऐसे नहीं हनी

71:09

चाहिए की संस्कृत में बच्चे को समझ ही

71:12

नहीं ए रहा या फिर वो इतना बड़ा इतनी बड़ी

71:14

कहानी है की बच्चा बर हो रहा है सुन ही

71:16

नहीं रहा है तो बच्चे के अनुसार और फिर

71:19

उसके लिए जरूरी हो और उससे उससे कुछ फायदा

71:21

मिले तो ऐसा साहित्य जो होता है वो बाल

71:24

साहित्य उदाहरण के लिए आप देखेंगे आपने भी

71:27

अपने बचपन में पंचतंत्र की किताबें पड़ी

71:30

होगी जिसमें जंगलों की इतनी बढ़िया और

71:31

मजेदार कहानी होती थी जिसके विष्णु शर्मा

71:35

और आपने अगर पढ़ाओ

71:42

बहुत ही बढ़िया कहानी है मैंने तो पड़ी थी

71:44

दोनों

71:49

वो नारायण पंडित जी हैं तो यह आप उदाहरण

71:52

जरूर लिखे

71:54

आगे देखिए आवश्यकता वी महत्व

71:57

की आवश्यकता क्यों है महत्व क्या है पढ़

72:00

लीजिए बालको की व्यक्तित्व अपूर्ण विकास

72:02

करने के लिए नैतिक विकास में सहायक

72:05

क्योंकि कई बार कहानी पढ़े हुए बच्चे

72:07

झूठ नहीं बोलना सच बोलना है कहानी में जो

72:11

नायर करता है ना फिर वो बच्चा भी करना

72:13

चाहता है दूसरों की मदद करना है है ना

72:16

बड़ों का सम्मान करना है पढ़ाई करनी है यह

72:19

साड़ी चीज वो सीखने हैं अच्छी आदत तो ए

72:22

निर्माण होता है की कहानी में जो अच्छा

72:24

लड़का था वह ऐसे से डरता था तो मैं भी

72:26

करूंगा तो इस तरीके से बच्चे सीखने हैं

72:28

जीवन मूल्य अभी आप होता है भाषा में भी

72:31

सहायक होता है भाषा में मनोरंजन यानी उनके

72:34

एंटरटेनमेंट के लिए अच्छा हो जाता है

72:36

कहानी पढ़ना पंचतंत्र और हितोपदेश बच्चों

72:39

को जरूर देनी चाहिए बचपन में पढ़ने के लिए

72:41

भावात्मक विकास होता है उनका सामाजिक

72:44

विकास

72:45

हो जाता है

72:48

फिर आता है बाल साहित्य के प्रकार जो इन

72:50

दो भागन में विभाजित दृष्टि से और विद्या

72:53

इस दृष्टि से सबसे पहले हम तथ्य की दृष्टि

72:56

से लेते हैं की बाल साहित्य कितने प्रकार

72:58

होता है तो कई प्रकार

73:01

जो विषय है वो जैसे की भजन संबंधित तथ्य

73:05

हो सकता है खाने से रिलेटेड कोई कहानी है

73:08

वस्त्र संबंधी परिवार और मित्रों से

73:12

रिलेटेड तथ्यों सकते हैं पशु पक्षियों

73:14

वाली कहानी हो शक्ति है जल जीवन जैसे मछली

73:17

हो रही उनके बड़े में हो शक्ति है खेल

73:20

संबंधी तथ्य त्योहार से संबंधित तथ्य हो

73:23

सकता है जीवन मूल्य से संबंधित और अच्छी

73:25

आदतों से संबंधित भी तथ्य हो सकते हैं

73:29

ना कहानी में बाल साहित्य में वह यहां पर

73:37

आप लोरी भी का सकते हैं कविताएं कहानी

73:40

निबंध एकांकी जो आपने भी एनसीईआरटी में

73:43

पढ़ा होगा एकांकी जो पापा को गए पढ़ा था

73:47

आपने

73:48

तो वह ए सकता है

74:01

अगला टॉपिक है पाठ्य पुस्तकों में डिफरेंस

74:05

तो आपको पहले भी पता होगा पाठ्य पुस्तक

74:10

मिल जाता है वो होती है पट्टी पुस्तक

74:17

की किताब पढ़ लो इस लेटर की किताब पढ़ लो

74:20

वो होते हैं पूरा किताबें तो दे लीजिए

74:22

डिफरेंस क्या होता है पाठ्य पुस्तक जो

74:24

होता है विषय का पूर्ण ज्ञान देने के लिए

74:26

गहन अध्ययन करने के लिए होते हैं जबकि

74:31

पाठ्यपुस्तकों को पूर्ति करने के लिए पूरा

74:33

पुस्तक होती हैं मतलब जो आपका पाठ्यपुस्तक

74:36

है एक तो वो सिलेबस अकॉर्डिंग होगा लेकिन

74:38

अगर कोई कमी र गई है तो वो पूरा कौन करेगा

74:46

ज्ञान अर्जन में सहायक ज्ञान को अर्जित

74:49

करने में आपके लिए पाठ्य पुस्तक जरूरी है

74:51

और यह ज्ञान की स्थाई और व्यवहारी बनाना

74:54

अगर आप पूरा पुस्तकें पढ़े तो ध्यान तो

74:57

होगा लेकिन वो स्थाई हो जाएगी क्योंकि आप

74:59

एक्स्ट्रा मेहनत ये पढ़ेंगे ना कोई चीज

75:01

रिसर्च करके पढ़ेंगे सर्च करके पढ़ेंगे

75:03

यदि इसे पूछ इस समझेंगे तो वो ज्यादा

75:06

स्थाई हो जाएगा इससे क्या होता है भाषिक

75:09

तत्वों पर अधिक बाल होता है पाठ्य पुस्तक

75:10

में सेट पूरा तैयार किया जाता है पुरी

75:12

कमेटी के द्वारा और पुस्तक वचन पर आधारित

75:16

होती हैं फिर इसमें गहन अध्ययन की पुस्तक

75:19

होती हैं इसमें जरूर पाटन की पढ़ लीजिए

75:26

यहां पर तीव्रता से भी आप अध्ययन कर सकते

75:29

हैं

75:32

और पूरा पुस्तक के स्वाध्याय की आदत डालते

75:35

हैं

75:40

आगे देखिए बाल साहित्य की रचना के

75:43

सिद्धांत की बाल साहित्य को रचते समय जब

75:47

आप बाल साहित्य रैक रहे हैं कोई कहानी लिख

75:48

रहे हैं किसी बच्चे के लिए तो किन-किन बटन

75:50

का ध्यान रखेंगे किस बेसिस पर वो लिखा

75:52

जाएगा तो पहले

75:54

सिद्धांत की वो जो आप कहानी ले रहे हैं जो

75:58

भी लिटरेचर है बाल साहित्य है उसमें जो

76:00

केंद्र में होगा वो बालक होना चाहिए बच्चा

76:02

होना चाहिए क्रिया केंद्रीय यात्रा का

76:05

सिद्धांत उसमें क्रियाएं हनी चाहिए सा

76:07

संबंधता का सिद्धांत

76:10

होना चाहिए हर चीज दूसरी चीज से इंटरनेट

76:13

हनी चाहिए

76:17

साड़ी चीज आकर्षक होना चाहिए भाषा तत्व

76:22

निर्माण सिद्धांत होना चाहिए

76:45

है और कौन-कौन से प्रकाशित प्रकाशन

76:48

प्रकाशक हैं जो पब्लिश करते हैं उनकेटाबों

76:51

को तो पहले सबसे पहले जो साहित्यकार मन

76:53

मुंशी प्रेमचंद हुई मां लीजिए उन्होंने

76:55

बाल साहित्य काफी लिखा है आपने खुद भी

76:58

उनकी कहानी पड़ी होगी जिसमें से एक है

76:59

बुद्धि कटी पांच परमेश्वर ईद रहा तो जरूर

77:04

पड़ी होगी दो वेलोसिटी तथा भी आपने जरूर

77:06

पड़ी होगी तो ये बाल साहित्य क्योंकि

77:08

इसमें बच्चों के मनोविज्ञान के ऊपर लिखा

77:09

गया है और बच्चे इन्हें कुछ ना कुछ सीखने

77:12

हैं इसके अलावा रवींद्रनाथ टैगोर ने भोला

77:15

राजा तोता की कहानी ये साड़ी चीज लिखी हैं

77:17

विष्णु शर्मा का पंचतंत्र यहां भी ए सकता

77:20

है नारायण पंडित अभी तो प्रदेश भी यहां आप

77:23

दाल सकते हैं तो ये थे प्रमुख साहित्यकार

77:25

अब हम देखते हैं प्रमुख प्रकाशक यानी जो

77:28

पब्लिश करते हैं उनको तो एक ही चिल्ड्रन

77:30

ट्रस्ट स्थापना हुई थी 1957 में किसने की

77:34

थी केशव शंकर पीला ही नहीं और यह जो

77:37

प्रकाशक रही खुद भी कुछ बाल साहित्य लिखना

77:39

है या प्रकाशित करता है जिम से है जहाज

77:42

अनोखे रिश्ते महान व्यक्तित्व

77:46

ट्रस्ट है एनबीटी और 1957 में ही हिस्ट्री

77:50

की स्थापना हुई थी इस कार्य क्या है

77:52

प्रकाशन करना

77:57

पब्लिश करना

78:02

बाल साहित्य बढ़ावा देना विश्व पुस्तक

78:05

मेला का आयोजन नई दिल्ली में

78:09

आप ध्यान रखेंगे

78:13

फिर ए रहा है साहित्य पुरस्कार यानी

78:15

लिटरेचर से रिलेटेड जो इंडिया में

78:17

पुरस्कार दिए जाते हैं वह तो साहित्य

78:20

क्षेत्र में जो पुरस्कार प्रधान किया जाते

78:22

हैं वह होते हैं साहित्य पुरस्कार उदाहरण

78:24

के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार ज्ञान पीठ

78:28

पुरस्कार हिंदी अकादमी पुरस्कार आपने सुन

78:30

होंगे इसके बाद है राष्ट्र कवि थे अवधारणा

78:33

यानी राष्ट्र कवि कौन होता है

78:35

तो जिन कवियों ने राष्ट्रभावना से ओटीपी

78:38

रचनाएं थी जिन भी कवियों ने देश के लिए

78:41

राष्ट्र के लिए रचनाएं रची वो होते हैं

78:44

हमारे राष्ट्र कवि तो राष्ट्र कवि की

78:46

पहचान क्या है मतलब राष्ट्र कवि कौन होगा

78:52

परपरी उसको संबंध और ज्ञान होगा की इतिहास

78:56

में क्या चीज

78:58

अपने देश को अच्छे से समझ पाएगा और उसके

79:01

लिए लिख पाएगा कविताएं घटनाओं का परिणाम

79:05

की जितनी भी घटनाएं हुई उसका रिजल्ट क्या

79:08

निकाला तो उसे बेस पर भी वह अपनी कविताएं

79:11

रचित करेगा अपने देशवासियों ए भीतर निहित

79:14

महत्व का ज्ञान उसको अपने देश से जुड़ा

79:17

होगा अपने देश के लोगों के बड़े में वह

79:19

जानता होगा तभी वह देश के लिए कविताएं लिख

79:22

पाएगा और लोग उसे खुद से कनेक्ट कर पाएंगे

79:25

अतीत को देखते हुए भविष्य साकेत कर का रहा

79:28

हो की जो अतीत में कुछ गलत किया और परिणाम

79:31

गलत हुआ तो वह दोबारा रिपीट ना हो देश इस

79:35

संस्कृतियों को समेत क्योंकि देश हमारा

79:38

देश अगर बात करें तो बहुत ही विविधताओं

79:40

वाला है तो पूरे देश को समेटना एक कविता

79:44

के अंदर बहुत ही बड़ी बात हो जाति है तो

79:47

जो ऐसा कर पता है वो कहलाता है राष्ट्र

79:51

कवि तो सबके बस की बात तो है नहीं वो भी

79:54

बन जाए

79:56

अब कुछ इंपॉर्टेंट कवियों के यहां पर किया

79:59

गया है जिसमें से एक है माखनलाल चतुर्वेदी

80:02

1888 ई में जन्म हुआ था 1968 में का

80:05

देहांत हुआ था जन्मे इनका मध्य प्रदेश में

80:07

हुआ था बाबा नमक गांव में इन्होंने

80:10

कौन-कौन सी भाषा में अध्ययन किया है

80:12

अंग्रेजी संस्कृत गुजराती मराठी बांग्ला

80:14

इत्यादि भाषण में इन्होंने अध्ययन किया है

80:17

सामान्य परिवार में जीवन यापन हुआ था इनका

80:20

और जो में चीज है की पुरस्कृत कृतियां

80:23

मतलब कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं इन्हें

80:25

और किन किन चीजों

80:28

विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें डिलीट की

80:31

उपाधि दी गई सबसे पहले तो उसके बाद भारत

80:33

सरकार द्वारा पदम भूषण दिया गया

80:36

उन्होंने लिखा उसे पर उनको साहित्य अकादमी

80:39

पुरस्कार मिला और हम किरीतीनी पर इन्हें

80:42

देव पुरस्कार मिला

80:44

अगले हमारे मैथिली शरण गुप्त इनका 3 अगस्त

80:48

186 में उत्तर प्रदेश

80:51

ध्यान देते थे इसलिए पढ़ाई में एकदम

80:54

नॉर्मल स्टूडेंट से

80:55

और इन्होंने क्या क्या इन्होंने जो लिखा

80:59

है उसमें क्या होता था पवित्रता नैतिक और

81:01

मानवीय संबंधों की रक्षा इनके प्रमुख गन

81:04

थे और यह साहित्य में उनके देखने को मिलता

81:06

है

81:07

की राज्यसभा का सदस्य इनको मनोनीत किया

81:10

गया था दादा नाम से इनको पुकार जाता था और

81:14

साहित्य के उपाधि मिली थी और सम्मान में

81:17

मैथिली शरण गुप्त अभिनंदन ग्रंथ जो है वह

81:20

लाया गया

81:23

और राष्ट्रकवि पदवी इनको महात्मा गांधी

81:25

द्वारा दिया गया और इस इनका जन्म जो हुआ

81:29

था ना तीन अगस्त को तो इस अगर इस तीन

81:31

अगस्त ओम राष्ट्र कवि दिवस के रूप में भी

81:33

मानते हैं तो इतने महान थे हमारे ये कवि

81:37

आदला जो हमारा है रामधारी रामधारी सिंह

81:39

दिनकर 1908 में इनका जन्म हुआ था और 74

81:42

में देहांत हो गया बेगूसराय जिला बिहार

81:44

में इंदिरा जान हुआ था इन्हें आधुनिक युग

81:47

के श्रेष्ठ वीर रस कहते हैं संस्कृत भाषा

81:52

में इन्होंने गहन अध्ययन किया है यह

81:54

सलाहकार अध्यापक और पति के रूप में भी

81:57

कार्य कर चुके हैं इसके अलावा इन्होंने जो

82:00

पुरस्कार वगैरा मिले हैं वो दे लीजिए

82:01

क्योंकि क्वेश्चन आएगा और यह पुरस्कार का

82:04

भी पूछेगा तो पदम विभूषण मिला है इन्हें

82:07

और संस्कृति के कर अध्याय जॉइंट रचना है

82:11

उसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार

82:14

मिला कुरुक्षेत्र जो इन्होंने लिखी किताब

82:17

उसमें जो है पुस्तकों में शामिल किया गया

82:20

है

82:22

है तो यह भी अपने आप में बहुत बड़ी बात हो

82:24

जाति है अगला टॉपिक है साहित्य अकादमी

82:26

पुरस्कार की जो लिटरेचर लिटरेचर से

82:29

रिलेटेड जो पुरस्कार है वह इंडिया में

82:32

कौन-कौन से हैं और उसके अंदर क्या-क्या

82:34

होता है तो स्वतंत्रता प्रताप से पहले से

82:37

ही पर्याप्त प्रयास किया जा रहा था की

82:40

साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसा कोई मंच हो

82:43

जो लेखन को और साहित्यकारों को इनाम दे या

82:48

फिर उनको बढ़ावा दे जैसे अवार्ड वगैरा

82:50

होते हैं तो क्या हुआ सबसे पहले 1952 में

82:53

अक्षर राष्ट्र अकादमी बनाई गई

82:56

लेकिन फॉर्मूली रूप से औपचारिक रूप से यह

82:59

जो साहित्य साहित्य अकादमी

83:03

1954 में हुई थी यह प्रतिवर्ष प्रत्यय

83:06

भाषा में यानी हर साल हर भाषा में

83:09

प्रकाशित जो सबसे सर्वोत्कृष्ट होती है

83:12

सर्वोच्च सबसे अच्छी होती है साहित्य कृति

83:15

होती है उसे पुरस्कार मिलता है यह वाला

83:17

साहित्य क्षेत्र में बड़ा ही महत्वपूर्ण

83:19

योगदान है इसका पहले बार यह पुरस्कार 1955

83:22

में जब दिया गया था तो इसकी जो राशि थी वह

83:26

5000 रुपए थे ठीक है

83:30

50000 तक 2013

83:43

बिना पर दिया गया

83:51

देखिए गद्य काव्या नाटक बाल साहित्य

83:55

सम्मान हास्य व्यंग आदि किसी भी क्षेत्र

83:58

में निम्न जो है पुरस्कार प्रधान किया जा

84:01

सकते हैं जैसे की आप ए होता है हिंदी

84:03

अकादमी शलाका मतलब हिंदी अकादमी के अंदर

84:06

ही डिफरेंट चीजों के लिए डिफरेंट डिफरेंट

84:08

आपको मिल जाएगा तो हिंदी एक आदमी शीला

84:11

समान में आपको ₹50000 राशि मिलती है हिंदी

84:14

अकादमी विशिष्ट योगदान सम्मान 50000 हिंदी

84:17

अकादमी काव्या सम्मान अगर आपने कोई कविता

84:19

ऐसी दी है तो फिर 50000 और फिर वृद्धि

84:22

विद्या सम्मान में भी प्रसाद 50000 और यदि

84:25

आपने हिंदी अकादमी बाल साहित्य सम्मान

84:27

आपको मिल जाए अपने ऐसी कोई बाल साहित्य

84:30

लिख दिया है जो बहुत ही ज्यादा मतलब दम ही

84:33

एक क्रांति लाडी है तो फिर वहां पर आपको

84:37

लाख रुपए तक का इनाम जो है दिया जाता है

84:40

2009 और 10 में यह सम्मान जिनको मिले हैं

84:43

उनके नाम मैंने यहां पर लिखे हैं कुछ तो

84:46

मैंने उदाहरण ये उदाहरण है चिल्ली में तो

84:48

हिंदी अकादमी विशिष्ट योगदान सम्मान मिला

84:51

था प्रोफेसर मुजीब रिजवी को और हिंदी

84:53

अकादमी काव्या सम्मान मिला था डॉक्टर

84:55

कन्हैया लाल नंदन को तो यह हमारा हिंदी

84:58

अकादमी पुरस्कार अब आता है ज्ञानपीठ

85:01

पुरस्कार या आपने जरूर सुना होगा ज्ञानपीठ

85:04

पुरस्कार यह क्या होता है की भारतीय

85:06

साहित्य सर्वोच्च पुरस्कार है ये इसलिए

85:09

नाम सुना होगा आपने यह क्या है की संविधान

85:12

में जो हमारी 22 भाषण को मान्यता दी गई है

85:15

या लिखे गए हैं यदि उन 22 भाषण में से

85:18

किसी भी भाषा के क्षेत्र में आपने अपनी

85:20

रचना की है जो अत्यंत ही प्रभावशाली है तो

85:24

आपको यह पुरस्कार मिल सकता है इसमें क्या

85:27

होती है

85:28

प्रशांत पत्र मिलता है

85:35

पहले जो ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में

85:38

मलयालम के लेखक हमारे सेंटर कुरुख उनको

85:42

दिया गया

85:51

और इस ज्ञानपीठ पुरस्कार को बनाने के लिए

85:54

इस मंच को मनाने मतलब बनाने के लिए कई

85:58

गोष्ठियों टेढ़ी मीटिंग की गई इतिहास में

86:00

बड़े-बड़े विद्वानों ने बहुत विचार किया

86:02

और उसके बाद ये जो ज्ञानपीठ पुरस्कार है

86:05

और फिर ये अपने स्वरूप में आया तो ये थे

86:09

हमारे प्रमुख हिंदी लिटरेचर के पुरस्कार

86:12

जो की मैंने सारे यहां पर कर दिए हैं तो

86:15

ये यहां पर यूनिट थ्री आपकी हिंदी की खत्म

86:18

हो जाएगी और इसके बाद में यूनिट फोर और

86:21

फाइव जल्दी ही कर दूंगी इस वीडियो में हम

86:24

हिंदी दक्षता का इकाई कर करेंगे जिसका नाम

86:27

है चिंतन कौशल तो यह बिल्कुल ही नया है

86:31

टॉपिक आपके लिए चिंतन कौशल इसको आप

86:34

इंग्लिश में

86:35

का सकते हैं कोई नई चीज नहीं है

86:39

आप बहुत अच्छे से जानते हैं चिंतन का मतलब

86:42

क्या होता है सोचना या विचार करना तो

86:46

बच्चों को जो क्लास में हम पढ़ते हैं उनके

86:49

अंदर भी डेवलप हो

86:51

की वह थिंकिंग कर शक्ति

86:59

तो देखिए इसको शुरू करेंगे सबसे पहले हम

87:01

महत्व और प्रकार की बात करेंगे उससे पहले

87:04

हम थोड़ा सा देखेंगे की चिंतन कौशल का

87:06

मतलब क्या है चिंतन का मतलब क्या है तो

87:09

चिंतन जो है वो मानव की स्वाभाविक भीम है

87:11

कोई भी इंसान हो वो कुछ ना कुछ तो सोचता

87:14

ही है चिंतन तो करता ही है तो ये बहुत ही

87:17

नेचुरल सी चीज है इंसानों के लिए और

87:20

समस्या के निवारण हेतु मां लीजिए कोई

87:23

प्रॉब्लम हुई लाइफ में तो उसका सॉल्यूशन

87:25

उने के लिए सोचते हैं समझते हैं इमेजिनेशन

87:29

करते हैं और विचार करते हैं तो यह सब भी

87:32

क्या है थिंकिंग है किसी भी कार्य से

87:34

पूर्व मतलब कोई भी कम आप करने जा रहे हैं

87:36

उससे पहले आप परिणाम के बड़े में सोच लेते

87:39

हैं की अगर मैं ये करूंगा तो फिर क्या

87:41

होगा तो यह भी क्या है

87:44

आप चिंतन ही कर रहे हैं और भीम के पूर्व

87:47

अनुभव पर विचार की पहले अगर किसी ने ऐसा

87:50

किया था तो क्या रिजल्ट निकाला था तो मैं

87:53

कैसे करूं की उसमें बेहतर हो तो यह साड़ी

87:56

चीज सोचना किसी भी कम को करने से पहले

88:00

चिंतन द्वारा अधिक कार्य अच्छा होता है

88:02

बिल्कुल अगर आप किसी कम को करने से पहले

88:04

थोड़ा सोचते हैं उसके बड़े में उसके लिए

88:07

एक्सपीरियंस देखते हैं तो फिर वो कम आपका

88:09

बेहतर तरीके से होता है

88:12

एक उच्च ज्ञान आत्मा भीम होती है जो यह

88:15

चिंतन है इसके अंदर कल्पना स्मृति अनुमान

88:18

मानसिक क्रियाएं शामिल की जाति हैं तो यह

88:21

है आपका थिंकिंग स्किल अब बात करेंगे इसके

88:24

महत्व की

88:26

क्यों जरूरी है यह क्या महत्व है

88:30

की समस्या के समाधान के तत्परता में सहायक

88:33

कोई भी प्रॉब्लम हो उसे समाधान में चिंतन

88:38

कौशल आपका कम आएगा फिर स्वयं प्रस्तुति

88:41

में सहायक खुद अप प्रेजेंट करने के लिए भी

88:44

चिंतन बहुत जरूरी है

88:46

सृजनात्मक वृद्धि होती है जब आप चीजों को

88:49

नए तरीके से सोचते हैं बनाते हैं या विचार

88:52

करते हैं अपने मन में और फिर प्रेजेंट

88:55

करते हैं तो इससे क्या होती है

89:12

अगर आप चीजों को सोचते हैं विचार करते हैं

89:16

तो

89:17

समस्या के कर्म की पहचान कर सकेंगे योजना

89:20

यानी की अगर आप प्लानिंग करना चाहते तो

89:23

उसके लिए भी आपके लिए चिंतन कम आएगा

89:25

आत्मविश्वास में वृद्धि होगी समीक्षा और

89:28

आलोचना करने में भी आपको सहायता मिलेगी तो

89:31

यह आपके महत्व हो गया बात करेंगे प्रकार

89:34

की थी ये जो चिंतन है चिंतन कौशल है यह

89:37

कितने प्रकार का होता है पहले जो प्रकार

89:39

है वो है तारक चिंतन टार्टड का मतलब होता

89:42

है की तर्कों के आधार पर बात करना लॉजिक

89:45

बात करना तो टर्न के साथ एक सही निष्कर्ष

89:48

पर पहुंचाना ये नहीं कुछ का दिया और हमने

89:51

मां लिया अपना दिमाग लगाया ही नहीं थी ऐसा

89:54

क्यों तो तारक विटारा के विचार ना और फिर

89:57

सही निष्कर्ष पर पहुंचाना चिंतन द्वारा

90:00

समस्या का समाधान खोजना छिपे हुए अर्थ पर

90:04

विचार करना

90:05

वैज्ञानिक सिद्ध वैज्ञानिक चिंतन होता है

90:08

जैसे विज्ञान में किसी भी चीज को लॉजिकली

90:10

प्रूफ किया जाता है इस तरीके से तारक

90:13

चिंतन में भी आपको ये चीज इंक्लूड करते

90:15

हैं

90:16

और विद्यार्थियों के लिए आप क्या कर सकते

90:19

हैं की तारक विदाउट प्रतियोगिताएं करवा

90:21

सकते हैं जिसमें कर टन कैसे जैसे प्रश्नों

90:24

को शामिल किया जा सकता है अगला जो आपका है

90:27

समस्यात्मक चिंतन समस्या चिंतन में क्या

90:30

होता है की समस्या समाधान हेतु चिंतन किया

90:34

जाता है बच्चों को कोई समस्या दे दी जाति

90:36

है और फिर उसका समाधान करने के लिए बच्चे

90:38

चिंतन करते हैं या विचार करते हैं इसमें

90:41

पूर्व अनुभव से मदद ले जा शक्ति हैं नई

90:44

पाठ्य वास्तु में समस्या का समाधान जैसे

90:46

कोई नई चीज मिली नहीं पिता मिली तो उसमें

90:49

जो प्रॉब्लम्स है उसको सॉल्व करना विभिन्न

90:52

सकता है

90:54

विपरीत परिस्थितियों में भी सहज बना राहत

90:57

है की प्रॉब्लम्स आई है तो कोई बात नहीं

90:59

हम चिंतन करेंगे सोचेंगे विचारेंगे

91:02

और कोई हाल निकाल लेंगे

91:09

समस्या रोग या दोष का पता लगाना ठीक जो

91:12

प्रॉब्लम है उसका पता लगाना निदान

91:19

हो रही है वह क्यों हो रही है उसका रीजन

91:22

जानना हो फिर उसको ठीक करना निदान करना

91:25

समस्या वी उसके कर्म का चिंतन किया जाता

91:28

है यहां पर जैसे की भाषा सीखने में कठिनाई

91:31

हो रही है किसी छात्र को तो फिर वहां पर

91:34

हम निदानात्मक चिंतन करेंगे

91:37

सही उपचार देंगे जैसे अभ्यास करवाना लेखन

91:40

वचन इत्यादि कार्य

92:03

समझना विभिन्न कहानियां और कविताओं द्वारा

92:06

अभ्यास करवा सकते हैं बच्चों को विचारों

92:10

भावों और तथ्यों की तुलना करवा सकते हैं

92:12

और गंभीरता पूर्व चिंतन यहां पर शामिल

92:15

किया जाता है

92:18

अगला प्रकार है सृजनात्मक चिंतन तो

92:21

सृजनात्मक चिंतन का मतलब होता है नई चीजों

92:25

रचनाओं और विचारों को उत्पन्न करना सृजन

92:27

करना है मतलब नई चीज लानी है तो नई चीज

92:30

ऐसे तो नहीं ए जाएगी पहले मन में सोचेंगे

92:32

ना कुछ ना कुछ तो कल्पना प्रदत मतलब पहले

92:35

इमेजिनेशन करता है बच्चा सोचता है उसके

92:37

बाद कोई नई रचना वो करता है अनुभवों से

92:41

उत्पन्न सूचनाओं का भी महत्व होता है

92:42

इसमें पुरानी अनुभव भी कम आएंगे उसे थे यह

92:46

व्यक्ति पर यानी सब्जेक्टिव होता है हर

92:48

बच्चे का अलग और इसके लिए हम क्या कर सकते

92:52

हैं क्लास रूम में मुक्त अंत वाले जो

92:56

प्रश्न है बच्चों से जैसे कुछ कहानी हैं

93:00

उसमें से ऐसे क्वेश्चन पूछना जिसका आंसर

93:03

जो है वह सब अलग-अलग दें हर बच्चा अपने

93:05

विचार हिसाब से सोचते थे तो ऐसे क्वेश्चन

93:08

ओपन

93:12

अस्थि विधियां की बच्चों के अंदर आप ये जो

93:15

चिंतन कौशल है इसका विकास कैसे करेंगे

93:18

कौन-कौन सी विधियां हैं तो पहले जो मेथड

93:21

है वो परी चर्चा का लीजिए डिस्कशन का

93:23

लीजिए ये सरल विधि है इसमें विद्यार्थी जो

93:27

करते हैं आपस में चर्चा या परिचर्चा करते

93:29

हैं और अध्यापक के साथ भी करते हैं मतलब

93:31

दो टाइप से ये हो शक्ति है इसमें क्या

93:34

होता है की संप्रत्ययतीय विषय में चिंतन

93:36

जो भी कॉन्सेप्ट है उसके बड़े में बातें

93:39

मतलब सोचना और फिर बोलना

93:44

शुरू होगा और और में क्या होगा इसका

93:47

समाधान आपको मिलेगा या कोई ना कोई ऐसा

93:50

पहलू मिल जाएगा जो उसको ठीक-ठाक कर दे यह

93:54

मोती श्रवण विचार और अभिव्यक्ति कवि विकास

93:58

करता है डिस्ट्रक्शन मेथड फिर जो अगला

94:01

मेथड है

94:03

इसको इंग्लिश में

94:06

यह क्या

94:07

औपचारिक विधि है यह फॉर्मल मेथड है जिसमें

94:10

लॉजिक पर बात की जाति है डिबेट क्या होता

94:12

है पक्ष में भी बोलना है विपक्ष में भी

94:14

बोलना है तो दोनों चीजों को ठीक से दे

94:17

लेना की सही कितना है गलत इतना है पूर्व

94:20

निर्धारित विषय पर चिंतन पहले से ही कोई

94:22

विषय दे दिया जाता है और फिर उसे पर बच्चे

94:24

सोचते हैं और फिर डिबेट करते हैं वाद

94:28

विवाद द्वारा अभिव्यक्ति में चिंतन का

94:30

विकास होता है की अगर बच्चे जब डिबेट करते

94:32

हैं तो उनके चिंतन का ऑब्वियस सी बात है

94:34

विकास होगा क्योंकि बोलने से पहले वो कुछ

94:37

ना कुछ सोचेंगे पक्ष में भी सोचेंगे

94:39

विपक्ष में भी सोचेंगे और इससे वह भी

94:42

बनेंगे तो यह हो गया आपका वाद विवाद मेथड

94:46

फिर आता है प्रश्नोत्तरी विधि अब इसमें

94:48

क्या होता है की अध्यापक द्वारा प्रश्न वी

94:52

विद्यार्थियों द्वारा उत्तर का चिंतन मां

94:54

लो टीचर ने क्वेश्चन पूछ लिया हमने बच्चों

94:56

से कोई क्वेश्चन पूछ लिया अब बच्चे उसका

94:58

आंसर ढूंढने के लिए अपने मन में थिंकिंग

95:01

करना स्टार्ट कर देंगे उसके बाद आता है

95:03

प्रत्येक विद्या में इसका क्रमबद्ध प्रयोग

95:05

चाहे कहानी हो चाहे कविता हो निबंध हो कुछ

95:09

भी हो वहां पर हम प्रश्न पूछ कर इसका

95:11

प्रयोग मेथड का कर सकते हैं

95:15

पहले बच्चे मन में सोचेंगे उसे बाद

95:18

लिखेंगे उसका आंसर ठीक है हम कहते हैं ना

95:21

मां लीजिए हमने कोई क्वेश्चन बोला फिर हम

95:23

कहते चलो 5 मिनट सोच लो उसके बाद लिखना

95:25

स्टार्ट कर देना तो बच्चे 5 मिनट तक अपने

95:27

मन में चिंतन करना शुरू कर देते हैं और

95:30

फिर आंसर को जो है वो लिखने हैं जैसा की

95:33

आप लोग भी डीएलएड एग्जाम जब देंगे तो यही

95:35

करेंगे क्वेश्चन को पढ़ेंगे दिमाग में

95:38

फ्रेम करेंगे आंसर और फिर पेज पर उतरेंगे

95:42

महत्वपूर्ण विधि है यह प्रश्न उत्तर वाली

95:44

और पाठ के अंत में जो प्रश्न दिए गए हैं

95:47

अभ्यास करवा के बच्चों को क्या करवा सकते

95:49

हैं

95:53

अगला जो मेथड है वह संक्षेपण मेथड यानी की

95:56

संक्षेपण वो बोलते हैं सर इसका अर्थ होता

96:00

है

96:03

अगर आप किसी बड़ी चीज को पढ़ने हैं और

96:06

उसका सर बना लेते हैं मतलब मां लीजिए आपने

96:08

चार-पांच पेज और निबंध पढ़ा और असेंबली

96:11

में खड़े होते दो दो-तीन मिनट में आपने

96:13

पूरा बता दिया की उसे अंदर क्या था तो ये

96:15

रत तो है तो ये कल है मल्लेख के अतिरिक्त

96:19

कुछ नहीं मतलब जो आपने बहुत लंबा पढ़ा था

96:22

और आपने जो सर बनाया संक्षेपण दिया उसमें

96:26

जो है ना उसका पूरा निचोड़ हो रहा मतलब

96:29

एक्स्ट्रा चीज बिल्कुल भी नहीं होगी किसी

96:32

भी विषय की संक्षेप में विजय अभी विवेचना

96:35

करना कोई भी विषय हो कोई भी टॉपिक हो उसका

96:38

संक्षेप यानी बहुत ही कम शब्दों में और

96:40

पूरा हो भी जाए ऐसे बोलना

96:43

जैसे की मैं आपको यूनिट वाइस पढ़ा रही हूं

96:46

नोट्स बना कर तो यह भी तरह से संज पड़े

96:48

हुआ क्योंकि अगर पूरा ही आप किताबें से और

96:51

रेफरल किताबें से पढ़ेंगे तो बहुत ही लंबा

96:54

हो जाएगा और अभी हम क्या करें संक्षेपण

96:56

मेथड से पढ़ रहे हैं तो मैंने संक्षेप में

96:59

आपको यूनिट बना दे दी है आप समझ रहे हैं

97:01

आप पढ़ रहे हैं तो ये भी एग्जांपल हो सकता

97:03

है की नोट्स बनाना

97:07

थोड़ी कठिन होती है तो जो हम संक्षेप में

97:10

सरल भाषा हनी चाहिए कम से कम शब्दों में

97:14

अधिक बटन को समझना

97:17

फिर आता है पल्लवन विधि या फिर भाव

97:19

विस्तार का लीजिए यह उसका थोड़ा उल्टा है

97:21

इसमें क्या होता है किसी भी कथन को

97:23

विस्तार के साथ लिखना मतलब एक छोटी सी

97:26

लाइन पड़ी और फिर उसको विस्तार से आपने

97:28

दो-तीन मिनट तक समझाया तो ये होता है आपका

97:31

पल्लवन या फिर भाव स्टार इसमें कथन को सरल

97:34

बनाने

97:37

शब्द ही कई बार ऐसा होता है की खाने को वो

97:41

शब्द है लेकिन उसके व्याख्या जो होती है

97:43

वो कर पांच लाइनें में होती है

97:45

कठिन वाक्य को संप्रत्यय को तोड़ और सरल

97:49

शब्दावली में बताना जो कठिन शब्द होते हैं

97:51

उनको तोड़-तोड़ के बताना काव्या को

97:54

स्पष्टीकरण जैसे की कविताएं जो होती हैं

97:56

वो कम शब्द

97:58

होता है वह बहुत ज्यादा बड़ा होता है

98:07

इससे क्या होता है

98:10

विकास होता है की बच्चा की और फिर दिमाग

98:14

में अर्थ क्या है कहां-कहां यह लागू होगा

98:17

ठीक है तो यह आपका हो गया पल्लवन विधि फिर

98:20

आता है विश्लेषण विधि इसमें क्या होता है

98:24

विश्लेषण करना

98:29

उसका अध्यापक द्वारा स्पष्टीकरण

98:35

के आवश्यकता होती है शिक्षक के उपरांत की

98:39

जान वाली चिंतन भीम

98:45

इसमें छिपे हुए अर्थ विचार और भाव को

98:47

पहचाना जाता है और विश्लेषणात्मक चिंतन

98:50

में भी यहां से विकास होता है जो की बच्चा

98:52

क्रिटिकल मन में सोचना शुरू करेगा तो

98:54

ओबवियसली उसका थिंकिंग का मेथड जो है वो

98:56

विकास की और जाएगा

98:58

फिरना विधि

99:01

किसी भी वास्तु व्यक्ति को क्या करना है

99:04

असमानता वी सामान्य बताना किसी भी वास्तु

99:08

या दो बीच में क्या-क्या सेमिलेरिटीज हैं

99:11

क्या-क्या डिफरेंस है यही होती है

99:13

कंपैरिजन यही होता है तुलना तो एक वास्तु

99:16

की विशेषताओं को किसी अन्य वास्तु की

99:18

विशेषता से मापन और क्या होता है

99:22

क्योंकि जब हम तुलना करेंगे तो हम यह

99:25

पढ़ेंगे इस व्यक्ति में क्या-क्या गन हैं

99:26

इस व्यक्ति में और फिर हम सिमिलरिटीज

99:29

डिफरेंस

99:56

फिर आता है आपका दृष्टांत विधि इसमें क्या

99:59

करते हैं उदाहरण देकर समझते हैं तो उदाहरण

100:02

द्वारा अपनी बात को पुष्टि करना दृष्टांत

100:05

कहलानी है इसमें पुरानी प्रमाण प्रमाणिक

100:08

घटना से जोड़कर समझना आज जो पटना है उसको

100:11

पहले पुरानी किसी एग्जांपल से बता देंगे

100:14

उसके बाद पढ़ाएंगे यह बहुत ही आकर्षित और

100:17

रुचिकर होती है इसमें दूसरों को समझना में

100:20

सफलता मिलती है की सामने वाला क्या का रहा

100:22

है इससे सृजनात्मक का भी विकास होता है

100:26

अगला जो मेथड है वह भूमिका निर्वहन मेथड

100:29

इसमें क्या होता है की व्यक्ति या

100:31

विद्यार्थी किसी पत्र की भूमिका निभाते

100:34

हैं

100:35

भूमि अनिवार्य है ना डायलॉग होता है ना

100:38

जैसे तो वह क्या करते हैं की उनके डायलॉग

100:41

को बोलते हैं तो ऐसे क्या होता है किरदार

100:44

में अपने अनुभव भी जोड़ने हैं की मां

100:46

लीजिए वो सीता का रोल या राम का रोल कर

100:48

रहे हैं तो फिर उसमें वो अपने भी

100:50

एक्सपीरियंस जोड़ देंगे इससे चिंतन कौशल

100:52

का डेफिनेटली वे आप होगा तो विभिन्न

100:55

स्थितियां में अपने विचार और चिंतन का

100:57

अवसर हो करेंगे स्वयं करके सिली और स्थाई

101:00

ज्ञान होता है क्योंकि वो खुद किसी कोई

101:03

कहानी के अंदर वो रोल प्ले कर रहे हैं तो

101:06

वो कहानी कभी नहीं भूलेंगे फिर वो जिंदगी

101:09

भर उनको याद रहेगा किरदार ये भूमिका पर

101:12

चिंतन के उपरांत अभिव्यक्ति फिर जो भी

101:14

उनको मिला होगा किरदार या पत्र की अगर

101:17

आपको राम का रोल मिला है तो राम के बड़े

101:19

में पढ़ेंगे जानेंगे और उसे बाद ही उनके

101:23

डायलॉग

101:43

का विचार जो है वह इकट्ठा कर लेंगे और

101:46

उससे कोई ना कोई रिजल्ट निकलेंगे

102:00

फिर आता है आत्म चिंतन के आधार पर रचना अब

102:03

आत्म चिंतन क्या होता है स्वयं निरीक्षण

102:06

या आत्म निरीक्षण यानी खुद ही निरीक्षण

102:09

करना एक्सप्लेन करना एक्सप्लोर करना चीजों

102:12

को इसमें क्या होता है अपने अनुभव के आधार

102:15

पर हम हल्क खोजने हैं हमने जो लाइफ में

102:17

एक्सपीरियंस किया अकॉर्डिंग हम किसी भी

102:20

प्रॉब्लम का सॉल्यूशन को जाएंगे

102:24

सॉल्यूशन मतलब की लिखेंगे या रचना करेंगे

102:27

आप यह भी का सकते हैं इससे मनोदशा का पता

102:29

चला है की कौन सा इंसान किस मनोदशा से

102:32

गुर्जर रहा है

102:34

जैसे कोई लेखक है या कवि है जो बहुत ही सब

102:38

पोयम्स लिखना है तुम बता सकते हैं मनोदशा

102:40

कैसी सड़नेस वाली है तो छात्रों में चिंतन

102:44

कौशल का विकास हम करवा सकते हैं आत्म

102:46

चिंतन के द्वारा और क्षमताओं का भी ज्ञान

102:49

हमें हो जाएगा की बच्चे में कमियां

102:51

क्या-क्या है कहां पर बच्चा हमारा पीछे है

102:53

फिर आता है रचना की स्थिति

103:07

[संगीत]

103:11

के अनुसार लिखेगा विभिन्न स्थिति

103:18

जैसे रोजमर्रा के अनुभव आपस में घटना मां

103:22

लीजिए कोई घटना घाटी है आपके देश में या

103:25

स्कूल में मां लीजिए कोई घटना घाट गई या

103:27

किसी न्यूज़पेपर में आपने पढ़ा की किसी

103:29

स्कूल में जो है

103:31

भूकंप आया तो फिर ऐसी घटना हुई तो ऐसे हम

103:36

विषय देंगे बच्चों को और फिर बोलेंगे आप

103:38

इस पर निबंध लिखो कोई कविता लिखो कहानी

103:40

लिखो या ये जो भूकंप आया ऐसे में बच्चों

103:43

को क्या करना चाहिए ये लिखो तो इन सब में

103:46

बच्चा क्या करेगा चिंतन कौशल का विकास

103:48

करेगा स्वयं करके सीखेगा पठान कौशल का भी

103:51

आप होगा यदि और हम कैसे दे सकते हैं उनको

103:55

स्थितियां हम बोल सकते हैं यदि आप जनरल

103:58

में फैंस जो तो अब आप क्या करोगे तो यह जो

104:01

क्वेश्चन हम दे रहे हैं यह क्या है

104:02

विभिन्न स्थितियां में प्रसंगी रचना करवा

104:04

रहे हैं हम यदि आप इस तरीके से हम और भी

104:08

क्वेश्चन दे सकते हैं यदि आप प्रधानमंत्री

104:10

होते तो आप कौन-कौन सी नीतियां करते हैं

104:12

बच्चों के लिए क्या करते तो ऐसे ऐसे

104:14

क्वेश्चन हम यहां पर दे सकते हैं

104:18

अब जो हमारा एक कुछ मतलब हिंदी के बहुत

104:23

सारे विधायक दी जा रही हैं और फिर हमें यह

104:25

बताना है की अधिगम क्रियाएं मतलब लर्निंग

104:28

प्रोसेस में हम कौन-कौन सी एक्टिविटी को

104:30

उसे कर सकते हैं तो पेपर में क्वेश्चन

104:32

आएगा तो ऐसे ही आएगा की आप कुछ ऐसी विधाओं

104:37

विधाएं लिखे जो की अधिगम क्रियो के लिए

104:40

पाठ योजना यानी जो लेसन प्लेन बनाते हैं

104:42

वहां पर हम उसे करेंगे तो सबसे पहले पत्र

104:46

लेखन पत्र लेखन आपको पता है पत्र क्या

104:48

होते हैं पत्र में जो जरूरी चीज हैं मैं

104:51

वही बताऊंगा आपको जैसे शिष्टाचार आधार यह

104:54

साड़ी चीज वहां पर इंक्लूड हनी चाहिए अब

104:56

जो इंपॉर्टेंट चीज है की आप अधिगम क्रिया

104:58

में कैसे शामिल करेंगे कैसे वो हम देख

105:01

लेते हैं तो सबसे पहले विभिन्न पत्रों के

105:04

नमूने दिखाएंगे हम बच्चों को ताकि वो देख

105:06

पे और बेहतर पत्र लिख पाएं

105:10

पोस्ट कार्ड पर हम प्रैक्टिस कराएंगे जो

105:13

रियल वाला पोस्ट कार्ड होता है

105:15

फिर पत्र औपचारिक और अनौपचारिक दोनों रूपन

105:19

का ज्ञान हम उनको देंगे की औपचारिक पत्र

105:21

कैसे लिखने हैं अनौपचारिक पत्र कैसे लिखने

105:24

हैं त्योहार पर बधाई संदेशवाएं श्याम पाठ

105:28

पर गलत पत्र लिखकर हम बच्चों से पूछिए

105:30

कहां रहती है आप ठीक करो तो इन चीजों के

105:33

द्वारा हम पत्र लेखन जो है बच्चों का ठीक

105:36

कर सकते हैं क्लासरूम के अंदर उसके बाद

105:39

आता है अनुच्छेद तो अनुच्छेद क्या है

105:41

निबंध का ही ये लघु रूप है जो निबंध होता

105:44

है उसका ये छोटा रूप होता है अनुच्छेद

105:47

अनुच्छेद आपने भी पढ़े होंगे पेपर में भी

105:50

कई बार अनुच्छेद ए जाता है फिर उसमें से

105:52

क्वेश्चन करने होते तो वही होता है

105:53

अनुच्छेद

105:55

इसमें क्या होता है की आरंभ में पूर्व

105:57

परिचित विषय चुना जब स्टार्ट करेंगे आप

105:59

बच्चों को अनुच्छेद वाला कम करना तो पहले

106:02

कुछ ऐसे विषय चंगे जींस बच्चे रूबरू हो और

106:06

उदाहरण

106:43

अच्छा तो अब क्लास रूम में हम कैसे अपने

106:45

लेसन प्लेन में इसको इंक्लूड करेंगे पहले

106:48

कुछ पंक्तियां अध्यापक बताएं मां लीजिए

106:50

टीचर मैं खड़ी हूं क्लास में मैं कुछ

106:52

लाइंस बोलूंगी कविता की फिर बोलूंगी अब आप

106:55

बताओ

106:56

र्ड लाइन क्या हनी चाहिए तो इस तरीके से

106:59

हम कड़वा सकते हैं सेकंड कविता का विषय और

107:02

उदाहरण दिया जा सकता है की मैंने कहा

107:04

कविता का टॉपिक जो है वह है पढ़ाई अब इसके

107:08

ऊपर आप कविता बना और उदाहरण भी दे सकते

107:10

हैं की पढ़ाई से रिलेटेड कोई कविता

107:21

बना

107:23

की कविताओं से परिचित करना बच्चों को

107:26

डिफरेंट टाइप ऑफ जो पोयम्स होती है उससे

107:28

हम इंट्रोड्यूस कराएंगे और कविता शिक्षक

107:32

संबंधित प्रश्न पूछना की कोई कविता आपने

107:35

पढ़ाई हो क्लासरूम

107:40

कविता से रिलेटेड

107:43

होंगे

107:44

इसके बाद आता है आपका संवाद संवाद में

107:48

क्या होता है अपने विचारों को एक से दूसरी

107:50

जगह पर प्रेषित करना संप्रेषण का ही मध्य

107:52

है इसमें विविध विधाओं का संवाद में बदलना

107:55

चाहे कविता हो कहानी हो निबंध हो कुछ भी

107:59

रचना हो उसे आप संवाद में बादल सकते हैं

108:05

मां लीजिए क्लास में कोई कहानी है कोई

108:08

चैप्टर पटना है तो आप क्या करेंगे की उसे

108:11

कहानी में जितने भी पत्र हैं क्लास रूम

108:13

में बांट देंगे बच्चों को और इस तरीके से

108:14

पढ़ाएंगे

108:16

रोल प्ले द्वारा पढ़ाएंगे ठीक है

108:19

विद्यार्थियों द्वारा

108:22

बच्चों से बोलेंगे की आप जैसे कोई कहानी

108:26

है शेर और चीते की तो हम बोल सकते हैं की

108:29

आप शेर हो आप चिता हो आपको

108:38

उसको प्रमोट करना है मोटिवेट करना है

108:44

गद्दे रचना होती है इसको हम कैसे ला सकते

108:48

हैं क्लास रूम में तो चित्र द्वारा कहानी

108:50

बावा सकते हैं

109:07

या फिर कहानी में परिवर्तन लाना की कहानी

109:10

है लेकिन हम एक कहानी सुना दी फिर हम

109:12

बोलेंगे नहीं मां लो इसमें जो है वो शेर

109:14

मारा नहीं तो अब आगे क्या होगा चेंज कर

109:17

दिया हमने उसके अंदर

109:20

आप खुद ही इमेजिन करो और एक कहानी लिखो

109:23

विविध शब्दों से कहानी फिर हमने दो-तीन

109:25

शब्द दे दिए 10-12 शब्द दे दिए और बोला की

109:27

अब कहानी बना जिनके अंदर ये शब्द भी

109:30

प्रयोग होने चाहिए

109:33

तो इस तरीके से आप क्लासरूम के अंदर इन

109:36

उसे कर सकते हैं ताकि बच्चा चिंतन कौशल

109:39

में आगे बढ़

109:41

फिर है निबंध तो निबंध क्या होता है

109:43

विचारों को पूर्णतः मौलिक रूप से शृंखलावत

109:46

तरीके से लिखना मतलब सीरीज से लिखना जो

109:49

मौलिक रूप से हो ठीक है तो इसमें क्या

109:52

होता है

110:00

त्योहार आने वाला हो तो हम कैसे चलो होली

110:03

पर निबंध लिखो होली आने वाली है तो बच्चा

110:05

उसको जानता है वो उसकी तैयारी कर रहा है

110:08

तो बेहतर निबंध

110:10

चर्चा द्वारा निबंध या हम का सकते हैं की

110:13

क्लासरूम में डिस्कशन कर लो टॉपिक आपने दे

110:15

दिया और उसके बाद चलो निबंध लिखो फिर बाद

110:18

में बात ये पश्चात इसी विषय पर निबंध ना

110:21

मां लीजिए कोई डिबेट हुई किसी टॉपिक पे

110:22

फिर बाद में हमने कहा चलो इसी विषय पर आप

110:24

निबंध ऐसे राइटिंग कर लो ऐसे राइटिंग

110:27

कंपटीशन भी होते हैं वो भी करवा सकते हैं

110:29

विषय से संबंधित संकेत बिंदु दे देना मां

110:33

लीजिए कोई निबंध लिखवाना उससे पहले आप

110:34

क्या करेंगे की प्वाइंट्स दे दें बच्चों

110:36

को और बच्चा जो भी कम करेगा तो करनी ही है

110:42

फिर आता है नाटक लेखन में क्या होता है

110:45

दृश्य काव्या चरित्र होती है

110:58

वो वचन करेगा या अभिव्यक्ति करेगा नाटक के

111:02

मध्य से कहानी पढ़वाना

111:08

जाता है

111:22

उसके बाद आता है आपका कथा चित्र कथा चित्र

111:26

में क्या होता है किसी भी कहानी यह कथा को

111:28

चित्र मध्य से प्रेजेंट करना यह होता कथा

111:32

चित्र अब क्लास रूम में कैसे इसको उसे

111:34

करेंगे कैसे यह चीज हम बढ़ाएंगे

111:36

कथा चित्र कैसे बच्चों

111:45

प्रयोग करेंगे और उससे अकॉर्डिंग हम कहानी

111:48

को पढ़ाएंगे और क्या कर सकते हैं समूह

111:51

बनाकर विद्यार्थियों द्वारा प्रेजेंटेशन

111:53

करो

112:10

संवाद द्वारा चित्र प्रस्तुतीकरण

112:13

अभी हम चित्र और प्रेजेंटेशन कर सकते जैसे

112:16

आपने देखा होगा किंडरगार्डन के जो बच्चे

112:18

होते हैं वो मां लीजिए बच्चा है वह फ्लावर

112:20

बन गया है और एक पेड़ बन गया है तो और फिर

112:24

वो अपने डायलॉग बोल रहा है तो चित्र भी

112:26

प्रस्तुत हो रहा है सामने और वो संवाद भी

112:28

कर रहा है तो इस तरीके से कथा चित्र आप

112:30

उसे कर सकते हैं और दृश्य सामग्री प्रयोग

112:33

करके हुई हम कथा क्षेत्र जो है क्लासरूम

112:35

के अंदर ला सकते हैं तो ये आपने यूनिट फोर

112:38

था आई होप आपको यह यूनिट समझ में आई होगी

112:41

इसके बाद बहुत ही जल्द में यूनिट फाइव

112:43

लेकर आऊंगी और ये जो सिलेबस है आपका यहां

112:46

पर कर हो जाएगा इकाई पांच करेंगे जिसका

112:51

नाम है हिंदी भाषा और समसायिकता तो यहां

112:54

पर हिंदी भाषा और उससे रिलेटेड जितनी भी

112:58

रिसेंट की चीज होती हैं जो हिंदी भाषा के

113:01

साथ-साथ चलती हैं या रहती है या सदा रही

113:04

हैं उनके बड़े में बात करेंगे तो पहले जो

113:07

टॉपिक है वैश्वीकरण और हिंदी भाषा और

113:11

या फिर आप का लीजिए महत्व क्या है और

113:15

प्रसाद किस तरीके से हिंदी भाषा का हुआ है

113:17

पूरे विश्व के स्टार पर इसकी बात हम यहां

113:20

पर करेंगे

113:22

तो सबसे पहले देख लीजिए वैश्वीकरण और

113:25

हिंदी भाषा का क्या संबंध है तो वैश्वीकरण

113:28

का मतलब होता है विश्व का एकीकरण मतलब की

113:31

विश्व के सरस जितने भी देश हैं विश्व के

113:34

या का लीजिए जितने भी समाज है वो सब मिलकर

113:37

एक समाज का निर्माण करते हैं मतलब पूरे

113:40

विश्व को जोड़ देते हैं तो ऐसे में

113:43

वैश्वीकरण और हिंदी भाषा की आवश्यकता

113:45

क्यों हैं वैश्वीकरण के अंदर हिंदी भाषा

113:47

किस प्रकार से महत्व रखती है बेसिकली हमको

113:50

यहां पर यह बताना है तो पहले चीज थी

113:52

अंतरराष्ट्रीय एकीकरण में कुछ ही भाषण

113:55

व्याप्त है

113:56

यदि आप देखेंगे इंटरनेशनली तो कुछ ही ऐसी

114:00

लैंग्वेज है जिनको जो है मान्यता दी गई है

114:03

या फिर का लीजिए इंपॉर्टेंट मिलती है और

114:06

उन भाषण में से एक भाषा हमारी हिंदी भी है

114:10

इसलिए वैष्णवी स्टार पर हिंदी भाषा

114:12

महत्वपूर्ण हो जाति है फिर आता है रोमन

114:15

लिपि में भी हिंदी भाषा के विज्ञापन यदि

114:18

आप विज्ञापन एडवरटाइजमेंट वगैरा देखेंगे

114:22

तो आप देखेंगे लिपि चाहे रोमन के इस्तेमाल

114:24

की गई हो अल्फाबेटिकल इस्तेमाल

114:36

जो हिंदी भाषा हमारी तत्कालीन

114:38

परिस्थितियों

114:39

समाज में चेंज आते रहे हिंदी भाषा ने भी

114:42

खुद को चेंज किया अकॉर्डिंग तू टाइम जैसे

114:45

पहले संस्कृत थी फिर उससे हिंदी

114:48

साधारण निकली फिर सरल हिंदी

114:51

तो बिल्कुल खड़ी बोली और हिंदी ऐसी भाषा

114:55

है जो ना केवल उर्दू के शब्दों को बल्कि

114:57

अंग्रेजी के शब्दों को भी खुद के अंदर

115:00

समाहित कर लेती है जैसा की आपने तत्सम और

115:03

तद्भव शब्दों में भी पढ़ा होगा साथ ही साथ

115:06

हिंदी की बड़े भूभाग पर पहुंच क्योंकि

115:08

विश्व व्यापी भाषा है तो मॉरीशस जैसे देश

115:11

में भी हिंदी भाषा का बहुत ही प्रचलन है

115:14

गतिशील और समृद्ध भाषा है गतिशील यानी

115:17

टाइम के साथ और समय के साथ और दूसरे दूसरे

115:21

स्थान पर भी एक गतिशील रखती है रिगिड नहीं

115:24

है

115:29

तो इस तरीके से जो वैश्वीकरण में हिंदी

115:31

भाषा महत्वपूर्ण बन जाति है और किन-किन

115:34

साधनों से बंटी है यह देख लीजिए तो

115:37

व्यापार में यह कम आएगी हिंदी भाषा और जो

115:40

महत्व है वैश्वीकरण में व्यापार क्योंकि

115:42

अब वैश्वीकरण है तो व्यापार भी एक देश का

115:45

दूसरे देश से हो रहा है तो कुछ ना कुछ

115:47

कांबिनेशन भी होगा तो व्यापार और

115:50

पत्रकारिता के मध्य से अनुवाद कार्य जो हो

115:53

रहा है वो हो रहा है पूरे विश्व इस स्टार

115:55

पर हिंदी साहित्य जो है वो अंग्रेजी में

115:57

ट्रांसलेट हो रहा है अंग्रेजी इस साहित्य

115:59

जो है इंग्लिश हिंदी में मतलब ट्रांसलेट

116:01

हो रहे अनुवाद हो रहे हैं तो इस तरीके से

116:04

भी महत्वपूर्ण बन जाता है कंप्यूटर में भी

116:06

हिंदी के फोंट जो है अब ए गए हैं संस्कृति

116:09

का आदान-प्रदान हो रहा है जो भारतीय

116:11

संस्कृति हिंदी संस्कृति है और अब हम

116:14

देखेंगे

116:15

की वैश्वीकरण और हिंदी अप्रसार किन

116:18

माध्यमों से विश्व में जो हिंदी का प्रसार

116:20

वह हो रहा है एक तो वेब मीडिया द्वारा हो

116:23

रहा है सीधी सी बात है मीडिया के द्वारा

116:25

जो प्रसार पूरे विश्व में हो रहा है पूरे

116:28

विश्व मीडिया कम कर रही है यहां एक खबर

116:30

वहां वहां की खबर यहां फिल्मों के द्वारा

116:33

कुछ ऐसी महान फिल्में जो है बॉलीवुड में

116:35

बन जाति हैं फिर अंग्रेजी में ट्रांसलेट

116:37

किया जाता है और फिर देखा जाता है या किसी

116:40

और भाषा में इस तरीके से अन्य भाषण की

116:42

फिल्मों को हम हिंदी में अनुवाद कर के

116:45

देखते हैं व्यापार द्वारा प्रसार हो रहा

116:48

है क्योंकि व्यापार दूसरे देश के बीच हो

116:50

रहा है इसलिए भाषा भी जा रही है विदेशी

116:52

विश्वविद्यालय द्वारा प्रसार जितने भी

116:54

इंटरनेशनली ये यूनिवर्सिटी जब बन रही है

116:57

वहां पर भाषण को चुन्नी का और पढ़ने का

117:00

अवसर स्टूडेंट को दिया जा रहा है

117:03

आगे चलते हैं टॉपिक

117:06

सुना होगा जनरलिज्म कहते हैं जिसको

117:09

इंग्लिश में और जर्नलिज्म शब्द का मतलब ही

117:12

होता है दैनिक अब हम देखेंगे

117:14

दर्पण होता है जो पत्र एटा होती है इसके

117:18

अंदर क्या होता है समाज में जितनी भी

117:19

घटनाएं घाट रही हैं वो दिखाई जाति हैं

117:22

जैसे साहित्य होता है ना बिल्कुल वैसे ही

117:24

तो हिंदी शब्द ने इसकी डेफिनेशन दी है और

117:27

कहा है की पत्रकार का कम या व्यवसाय ही

117:29

पत्रकार देता है की जो जनरलिस्ट होता है

117:32

पत्रकार होता है आपने देखिए उनके जो कम है

117:36

ना वही जर्नलिज्म है सीधी सी बात है जो

117:39

सच्चाई है जो घटना समाज में घाट रही है वो

117:41

लोगों को दिखाना जो मीडिया इतनी हो शक्ति

117:44

है न्यूज़पेपर के थ्रू भी हो शक्ति है बस

117:47

वो इसकसौटी पर सही उतारे थी लोगों का सही

117:50

खबर पहुंचे ना की मसाला मिर्च

117:53

अब इसका महत्व क्या है भाई पत्रकारिता का

117:56

सामाजिक महत्व है तो क्योंकि समाज से

117:58

जुड़ी घटना और समस्याएं पता चल जाति है

118:01

हमें फिर आरती महत्व अर्थव्यवस्था से

118:04

रिलेटेड भी जितने भी उतार और चढ़ा होते

118:06

हैं वो भी हमें पता चल जाता है लाभ हनी

118:08

क्या करना चाहिए किसने क्या किया ये साड़ी

118:11

चीज पता चल जाति है राजनीति महत्वपूर्ण

118:15

पहचान होती है कौन सी पार्टी क्या कर रही

118:18

है किस नेता ने क्या कर दिया साड़ी चीज

118:20

हमें मिल जाति हैं कलात्मक क्षेत्र में

118:23

जैसे नृत्य ऊर्जा प्रयत्न हो गया कौन

118:26

अच्छे सिंगर हैं कौन बढ़िया वाला है किसने

118:28

कैसा डांस किया साड़ी कलाएं हम जो हैं

118:31

यहां पर जान पाएंगे वैज्ञानिक महत्वपूर्ण

118:34

खोज और जो भी शोध कार्य हो रहे हैं वह

118:37

कहां तक हो रहे हैं कितनी प्रताप हुई है

118:39

कैसी मशीनस ए चुकी हैं कैसी आने की

118:41

संभावनाएं हैं तो ऐसे वैज्ञानिक पहलू भी

118:44

इसके महत्व बन जाते हैं

118:47

फिर आई है विशेषताएं तो विशेषताएं क्या है

118:50

भाई पत्रकारिता इस सबसे पहले शीघ्रतम लोधन

118:53

घटनाएं या फिर का लीजिए समाचार को

118:55

पहुंचाना उसके बाद ये समाज दर्पण है तो

118:58

समाज के अच्छाई और बुराई दोनों ही चीज ये

119:01

दिखाई हैं सत्य घटनाओं को प्रस्तुत करना

119:04

लोकतंत्र चौथ स्तंभ भी इसको माना जाता है

119:07

लोकतंत्र के तीन स्तंभ तो होते ही ये

119:09

लेकिन जो चौथ स्तंभ है वो हम इसको

119:11

पत्रकारिता को मां सकते हैं फिर होता है

119:14

छिपे हुए तथ्यों को उजागर करना जो तथ्य

119:17

छिपे हुए हैं या फिर छिपने की कोशिश की जा

119:19

रही है उनको उजागर करना देश विदेश का

119:22

ज्ञान जनता तक पहुंचाना बहुमति से

119:24

प्रवृत्ति होती है मतलब किसी टॉपिक पर यह

119:27

नहीं टिकरा होता हर टॉपिक को यह लेकर चला

119:29

है जान चेतन वी मां चेतन स्वस्थ

119:34

जनमत जो है वो निर्माण होती है पत्रकारिता

119:37

अच्छे से हो और स्वस्थ मनोरंजन का साधन भी

119:40

है यदि आप खाली हैं तो एक अच्छा टाइम जो

119:43

होगा आप यहां पर इन्वेस्ट कर सकते हैं

119:47

फिर आता है अनुवाद वी अनुवाद तो अनुवाद

119:51

क्या होता है हिंदी में इसको ट्रांसलेशन

119:53

कहते हैं यह तत्सम शब्द से बना है जिसका

119:56

जो था पुनः कथन जी आर्थिक पुनः कथन या फिर

120:00

पुनरुक्ति यानी दोबारा कहना और इंग्लिश

120:03

में ट्रांसलेशन जो लैटिन शब्द अर्थ है

120:06

दूसरी और ले जाना मतलब ए स्थान से दूसरी

120:09

और ले जाना तो इन दोनों भाषण से आपको क्या

120:12

समझ में ए रहा है अर्थो से की किसी एक चीज

120:14

और दूसरे ले जाना पहुंचाना दोबारा से

120:17

बताना है ना ये साड़ी चीज क्लियर हो रही

120:18

हैं तो इसका जो सीधा सा अर्थ निकलता है वो

120:22

ये है की एक भाषा में कहीं गई बात को

120:25

दूसरी भाषा में अभी व्यक्त करना यही होता

120:28

है ना ट्रांसलेशन आपने भी किया होगा स्कूल

120:30

टाइम पे

120:32

हिंदू तू इंग्लिश ट्रांसलेशन इंग्लिश तू

120:34

हिंदी ट्रांसलेशन जब आपने 10 से ओनली और

120:37

किया होंगे तो इसमें क्या होता है दो भाषण

120:39

होती है एक होती है स्रोत भाषा और एक होती

120:42

है आपकी लक्ष्य भाषा तो स्रोत भाषा मतलब

120:46

है जी भाषा में वो पहले से मूल चीज है और

120:49

लक्ष्य भाषा का मतलब है जिसमें आपको

120:51

अनुवाद करना है ठीक है तो जैसे अगर आपको

120:54

हिंदी आई है आपके पास हिंदी किताब है तो

120:57

वो है आपकी स्रोत भाषा अब आप उसको

121:00

ट्रांसलेट करेंगे अंग्रेजी में तो

121:02

अंग्रेजी हो गई

121:07

अब इसमें ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी

121:09

डेफिनेशन दी है अनुवाद की और कहां है की

121:12

अनुवाद वह भीम है अथवा भीम है जिसके

121:15

द्वारा एक भाषा में कहीं गई बात को दूसरी

121:18

भाषा में रूपांतरित किया जाता है सिंपल सी

121:20

ये डेफिनेशन याद कर लेने आप अब ये बताइए

121:23

अनुवाद के महत्व क्या है उपयोगिता क्या है

121:25

मतलब क्या फायदे हैं क्यों कधे हम अनुवाद

121:27

तो पहले चीज अन्य देश के लिए वैज्ञानिक

121:30

नीति ज्ञान और अनुसंधान की प्रताप की यदि

121:34

देश में किसी भी तरीके का कम हुआ है

121:36

वैज्ञानिक ने कहा या फिर शोध कार्य हुआ है

121:38

तो फिर वो इस देश सीमित ना रहे भाषा की

121:42

बंदी से वहां पर ना हो अनुवाद करके वो

121:45

वैश्विक स्टार पर पहुंचे फिर भारतीय

121:47

संस्कृति और राष्ट्रीय एकता ताकि जो

121:50

भारतीय संस्कृति है कलर है जो यहां का और

121:52

जो पूरे

121:55

अखंडता की जो बात करता है हमारे देश तो

121:58

ऐसा ना हो चुकी हमारे देश के अंदर ही

122:00

डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेज उसे होते हैं तो

122:02

ऐसा ना हो की जो साउथ के हैं वह सिर्फ

122:05

साउथ की लैंग्वेज ही पढ़ रहे हैं उनको पता

122:06

ही नहीं की ऊपर क्या हो रहा है नॉर्थ में

122:08

क्या हो रहा है दिल्ली में क्या हो रहा है

122:10

मुंबई में क्या हो रहा है तो ऊपर से नीचे

122:13

पूरा माहौल बना रहे पता रहे की कहां पर

122:16

कैसा साहित्य लिखा जा रहा है कौन सी किताब

122:18

कितनी पड़ी जा रही है यदि कोई अच्छी किताब

122:20

है तो उसको पढ़ने का सब का हक है तो

122:23

डिफरेंट लैंग्वेज में वह अनुवाद हो और सभी

122:26

लोग उसको पढ़ सके

122:28

फिर आता शिक्षा में विस्तार यानी जितना

122:31

यदि हम अनुवाद करते हैं या किसी और भाषा

122:34

इस से तो हमारे लिए शिक्षा के स्टार उतने

122:36

ही ज्यादा बाढ़ जाते हैं कार्यालय में भी

122:39

जो है डिफरेंट कार्यालय हैं तो वहां पर

122:42

अनुवाद से कम आसानी से चल जाएगा उद्योग और

122:45

व्यापार में भी महत्वपूर्ण है ये

122:48

संचार मध्य में ताकि संचार संप्रेषण कर

122:52

सके हम ज्ञान में वृद्धि होगा डिफरेंट

122:55

लैंग्वेज सीखने से हमें डिफरेंट लैंग्वेज

122:57

अब पूरा लिटरेचर भी मिल जाता है पढ़ने के

122:59

लिए विभिन्न भाषण के साहित्य की जानकारी

123:02

हो जाएगी

123:05

पत्रकारिता में महत्वपूर्ण

123:08

है तो हर समाज को उसके भाषा से सरलता

123:12

पूर्व क्या है जो भी इनफॉरमेशन है वह मिल

123:16

जाए फिर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी

123:19

महत्व होता है आपने देखा

123:21

होती है तो वहां पर ट्रांसलेटर साथ में

123:24

होता है और जो भी नजन है वहां पर अपना

123:27

भाषण देते हैं और फिर उसको जो है

123:29

ट्रांसलेट यूनिवर्सल लैंग्वेज में बताया

123:32

जाता है ताकि सभी लोग समझ सके वहां पर

123:34

क्या बात हो रही है

123:40

ट्रांसलेटर ज्योति ट्रांसलेशन का कम करता

123:43

है तो अनुवाद का

123:45

मध्य है जिससे अनुवाद होगा अब अनुवाद

123:49

कार्य

123:54

कौन सी दो भाषा वही आप स्रोत भाषा जो आपको

123:58

आई ही आई है दूसरी भाषा जिसमें आपको करना

124:01

है कन्वर्ट मां लीजिए आपको हिंदी को

124:03

इंग्लिश में करना है आपको हिंदी तो आई है

124:04

लेकिन इंग्लिश नहीं आई तो फिर आपके पास

124:07

लक्ष्य ही नहीं है तो आप कैसे अनुवाद

124:09

बनेंगे तो दो भाषण का होना जरूरी है साथ

124:12

ही साथ विवेक होना चाहिए शब्द एवं अर्थ

124:14

संपादन आदि तत्व

124:16

यंत्र यानी ये कोई इंसान भी हो सकता है या

124:19

कोई यंत्र भी हो सकता है जैसे हमने

124:20

कंप्यूटर में या मोबाइल में कुछ हिंदी में

124:23

और उसने ट्रांसलेट कर दिया लेकिन वो जो

124:26

ट्रांसलेट करेगा वो बहुत ही अच्छे से

124:28

अर्थो को समझकर ऐसा ना हो की इंग्लिश में

124:30

जो बात लिखी रही है वो हिंदी में लिखने पर

124:32

बादल जाए चेंज वहां पर नहीं आने चाहिए

124:36

व्याकरण शब्द ज्ञान भाषा प्रकृति स्रोत

124:39

भाषा और लक्ष्य भाषा इन सब का अच्छा ज्ञान

124:42

होना चाहिए अनुवादक को चाहे वह कोई यंत्र

124:45

हो चाहे वह कोई व्यक्ति हो ठीक है आगे

124:49

चलिए अनुवादक के गन पेपर में ये क्वेश्चन

124:51

ए जाता है की अच्छे अनुवादक में क्या-क्या

124:54

गन होने चाहिए तो पहले उसका स्रोत और

124:57

लक्ष्य भाषा पर समाज अधिकारों जितना उसे

125:00

स्रोत भाषा आई है ना उतने ही अच्छे से

125:02

लक्ष्य भाषा भी आनी चाहिए क्योंकि जी

125:04

लैंग्वेज में हमको करना है ट्रांसलेट उसकी

125:06

भी तो जानकारी हनी जरूरी है ना उसके बाद

125:08

विविध विषयों का ज्ञान मतलब अब कंटेंट

125:11

क्या है यह हमें नहीं पता हमें बस

125:14

ट्रांसलेट करना है तो कई बार ये शब्द होता

125:16

है ना उसके अलग-अलग मीनिंग होते हैं मतलब

125:19

अर्थशास्त्र में उसका अलग ही मीनिंग होगा

125:22

जैसे एक गुड है गुड्स का लीजिए तो

125:24

इकोनॉमिक्स में तुम पढ़ने गुड्स मतलब समाज

125:27

होता है वैसे हम जानते हैं गुड मतलब

125:32

विषयों का ज्ञान होना चाहिए की अगर यहां

125:35

पर उसे हो रहा है तो इसका ये मतलब होगा

125:36

अगर यहां उसे हो रहा है तो ये मतलब होगा

125:38

अर्थ बौद्ध क्षमता अर्थ को ग्रहण करने की

125:42

अच्छी हनी चाहिए उसको

125:48

परिभाषित शब्दावली

125:50

होती है उसे एक ऐसी वोकैबलरी होती है वह

125:53

भी पता होना चाहिए सृजनात्मक प्रतिभा हनी

125:56

चाहिए की अच्छे से जी तरीके से स्रोत भाषा

125:58

में लिखा हुआ है वो लक्ष्य भाषा में भी ले

126:01

सके शब्दकोश उपयोग और ओशो की जानकारी

126:04

डिक्शनरी कैसे उसे करते हैं ये भी उनको

126:06

पता होना चाहिए और अनुवाद कार्य में वो

126:08

निपुण हूं मतलब उसको थोड़ा बहुत

126:10

एक्सपीरियंस भी होना चाहिए आगे चलते हैं

126:13

वो समीक्षा या आलोचना तो क्या होता है

126:16

समीक्षा करना या फिर आलोचना करना तो इसका

126:19

सीधा सा मतलब है साहित्य के स्वरूप का

126:21

विश्लेषण करना मतलब कुछ भी आपने पढ़ा कोई

126:24

कहानी पड़ी हुई उपन्यास पड़ा उसके बाद

126:27

उसका विश्लेषण किया की उसमें क्या-क्या

126:29

अच्छा है क्या-क्या बड़ा है और क्या बेहतर

126:32

हो सकता था ये साड़ी चीज जब आप करते हैं

126:35

तो ये होती है समीक्षा करना तो ये गन और

126:38

दोष दोनों की विवेचना होता है आलोचना मतलब

126:40

होता है

126:42

देखना तो अच्छे से देखना पेनी नजरों से

126:45

देखना तो डॉक्टर श्याम सुंदर दास ने इसकी

126:48

परिभाषा दी और कहा की यदि हम साहित्य को

126:50

जीवन की व्याख्या मैन तो आलोचना को उसे

126:53

व्याख्या की व्याख्या मानना पड़ेगा

126:56

ठीक है तो यहां से यह चीज भी क्लियर हो

126:59

जाति है अब उद्देश्य क्या है

127:02

विश्लेषण किया जाता है

127:04

निर्माण हो सके अगर हम आलोचना

127:08

छठ जाएगी और साहित्य जो है वो अच्छा

127:10

निर्माण होगा सत्य निराकरण जितना भी उसमें

127:13

सत्य है गलत है उसको हटाए जा सके रचना के

127:16

विशेष गुना की पहचान की जाए क्वालिटी

127:20

रुचि को सही दिशा प्रधान करना की जो पढ़

127:23

रहे हैं उनको अच्छी डायरेक्शन मिले

127:25

पॉजिटिव चीज पढ़े साहित्य के सौंदर्य की

127:28

अभिव्यक्ति साहित्य में जो सुंदरता है वो

127:30

आलोचना और समीक्षा करने से बाहर आई है की

127:33

ये इसके अंदर अच्छी चीज थी भाषा वृत्त और

127:37

कलात्मक को दर्शन की उसे लिटरेचर के अंदर

127:40

क्या-क्या भाषा और कल से रिलेटेड सुंदरता

127:43

थी भाव और विचारों की व्यापक पृष्ठभूमि को

127:47

पहचाना की लिटरेचर के अंदर क्या भाव थे

127:50

किस भाव से लिखा गया था या फिर क्या विचार

127:52

प्रस्तुत करने की लेखक कोशिश कर रहा है

127:55

फिर आता है भाभी संस्कार में सुधार आलोचना

127:59

की जाएगी तो जो साहित्य में गलत ए रहा है

128:01

वह छठ जाएगा

128:13

और बेहतर की उम्मीद तो होगी जितनी ज्यादा

128:17

हम समीक्षा करेंगे उतना ही बेहतर साहित्य

128:20

हमारा बनेगा

128:22

नेक्स्ट तत्व विश्लेषण तत्व विश्लेषण क्या

128:25

होता है अब तत्व विश्लेषण के संदर्भ में

128:28

पाठ्य वास्तु जो भी पाठ्य पुस्तक है या

128:31

पाठ्य वास्तु है जो सिलेबस पढ़ना के लिए

128:33

उसे होता है तो पाठ्य वास्तु को छोटी

128:36

किंतु सार्थक इकाइयों में विभक्ति करके

128:38

प्रत्येक खंड का मूल्यांकन करना चाहिए की

128:41

जो भी पाठ्य वास्तु है उसको पहले

128:43

छोटे-छोटे यूनिट्स में बांट लीजिए उसके

128:45

बाद उसका क्या करिए मूल्यांकन इवेलुएट

128:48

इडियट की क्या यह यूनिट्स हमारी पुरी

128:51

पाठ्यक्रम को या पाठ्य तत्व को पूरा करती

128:53

है या नहीं करती गन और दोष को दर्शन और

128:56

वहां पर हम जितने भी गन हैं और दोष है वो

128:59

सब वहां पर इकट्ठा कर लेंगे तो विश्लेषण

129:02

कर लेंगे ऊपर किया था तो तत्व विश्लेषण के

129:06

आधार क्या हो सकते हैं एक तो सामाजिक आधार

129:09

की जो पाठ्यपुस्तक है या जो भी मटेरियल है

129:12

पढ़ना के लिए उसके अंदर समाज से रिलेटेड

129:14

चीज हैं या नहीं क्योंकि बच्चा सामाजिक है

129:17

हमने पढ़ा है की मनुष्य सामाजिक प्राणी है

129:20

तो समाज से जुड़ना चाहिए फिर आरती आधार

129:24

होना चाहिए

129:27

उसे पेज भी मतलब अच्छे हो और इतना किफायती

129:32

भी हो की बच्चा उसको अफोर्ड कर सके फिर

129:35

मनोवैज्ञानिक आधार की उसमें जो कंटेंट है

129:38

उसको पढ़ने के बाद जो बालक है वो किस

129:41

प्रकार से चिंतन मनन करता है अपने दिमाग

129:43

में कहानी कोई नेगेटिव चीज तो उसके दिमाग

129:45

में नहीं आई इस ऊपर तो इस चीज का ध्यान

129:48

देना फिर संस्कृति आधार बच्चे के अंदर

129:51

आदर्श और मूल्य को जागृत करने के लिए यह

129:54

वाला आधार होता है की उसके अंदर संस्कार

129:56

संस्कृति से प्यार यह साड़ी चीज भी आएं और

130:00

अपनी संस्कृति अच्छी चीज जो है बच्चा उसको

130:03

सखी है उसके बाद बहुत ही आधार यानी बच्चे

130:05

भी बौद्धिक क्षमता के अनुसार ही

130:07

पाठ्यवस्तु तैयार हनी चाहिए

130:38

और

130:41

फिर होता है

130:43

पाठ्य पुस्तक का आकर पाठ्य पुस्तक ना तो

130:46

बहुत ज्यादा लंबी हनी चाहिए ना ही बहुत

130:47

ज्यादा छोटी हनी चाहिए मुद्रण वही पैसों

130:50

से रिलेटेड है आवरण उसके अंदर आसपास के

130:53

वातावरण की चीज हो पाठों का आकर ठीक होना

130:56

चाहिए चित्रांकन उसमें अच्छी खासी चित्र

130:59

होने चाहिए और प्राइमरी लेवल के लिए है तो

131:01

और भी कलरफुल जो चित्र वहां पर उसे होने

131:04

चाहिए तो ये बाहरी तत्व है आंतरिक तत्व की

131:07

बात करें तो उद्देश्य अनुरूपता की जो

131:09

सिलेबस है उसके अकॉर्डिंग

131:12

पुस्तक पुरी करती है या नहीं करती फिर

131:15

विषय की विविधता हनी चाहिए रोचकता हनी

131:18

चाहिए इंट्रस्टेबल हनी चाहिए वो जीवन से

131:21

संबंधित

131:24

में होता भी अगर आपने पड़ी हो तो

131:27

क्रमबद्धता हनी चाहिए की कम से बच्चा

131:30

सीखेगा सरल से कठिन की और जाएगा ना की

131:33

कठिन से सरल की और

131:36

सार्थकता होती पढ़ने के बाद बच्चे को जीवन

131:39

में कम आए इवेलुएशन में कम आए

131:42

उसमें बहुत साड़ी शैलियां प्रयोग की जानी

131:45

चाहिए मां लीजिए कोई कोई

131:48

कहानी

131:52

हनी चाहिए कोई निबंध होना चाहिए कोई कविता

131:55

हनी चाहिए

132:02

वह महिलाओं से ज्यादा पढ़ने हैं या ज्यादा

132:05

इंटेलिजेंट होते हैं

132:07

तो ऐसी बातें नहीं कहीं जानी चाहिए

132:11

उसके बाद आई भाषा शिक्षक में क्रियात्मक

132:14

अनुसंधान तो आपने यह पहले भी पढ़ा होगा और

132:18

फाइल भी बनाई होगी इसकी एक्शन रिसर्च इस

132:21

को कहते हैं इसमें क्या होता है समस्या

132:23

समाधान की चिंतनशील प्रतिशील भीम प्रोसेस

132:26

है जिसके अंदर क्या होता है समस्या का

132:29

समाधान मां लीजिए कोई प्रॉब्लम है किस चीज

132:33

में पढ़ना से रिलेटेड सिस्टम में कोई

132:35

प्रॉब्लम है तो उसके बड़े में सोचना और

132:38

फिर पॉजिटिव चेंज लाना यह क्रिया द्वारा

133:13

अनुसंधान परिस्थितियों एवं सामाजिक

133:16

कार्यवाही के विभिन्न प्रभावों पर किया

133:19

जाता है

133:29

इसके ऊपर किया जाता है

133:37

मां लीजिए आप को कोई कक्षा मिलती है

133:40

जिसमें कुछ बच्चे जो हिंदी नहीं पढ़ का

133:41

रहे हैं तो सबसे पहले तो आप उनके कर्म को

133:44

जन की कोशिश करेंगे तो करण क्या हो सकते

133:47

हैं एक तो ध्वनियों को ना समझना की वो

133:49

ध्वनि नहीं समझ रहे या प्रयास वी ध्यान वह

133:52

जो है प्रयास या ध्यान नहीं कर रहे हैं तो

133:54

ऐसे में आप क्या करेंगे करण पता लगाएंगे

133:56

हो सकता है उसकी मातृभाषा कुछ और हो किसी

134:00

ऐसे बैकग्राउंड से ए रहा हो जहां पर भाषा

134:02

का प्रयोग किसी और तरीके से होता है तुम

134:04

करण जानेंगे फिर उसका निदान यानी की

134:07

सॉल्यूशन करें कैसे करेंगे प्रयास करेंगे

134:11

उसे पर थोड़ा ध्यान देंगे

134:14

और भी बहुत सी चीज आप क्लास में कर सकते

134:16

हैं

134:18

आप सेल दे सकते हैं उनको एक्स्ट्रा टाइम

134:20

के लिए लोक करवा सकते हैं उसके बाद आता है

134:24

महत्व

134:27

जरूरी है यह पहले समस्या का समाधान करता

134:30

है

134:33

मतलब जरूरी नहीं ए रही है बस यही चला

134:36

रहेगा अगर नवीनता की जरूर है तुम पढ़ेंगे

134:39

एक्शन रिसर्च

134:41

स्कूली समस्या पर यह केंद्रित होता है

134:43

स्कूल में जितनी प्रॉब्लम होती है ये

134:45

बेसिकली उसे पर होता है सही ऑडियो में

134:48

पारस्परिक क्रिया को बढ़ता है आपस में

134:50

मिलजुल का कम करना है क्योंकि एक्शन

134:52

रिसर्च है तो सारे मिलकर कम करते हो फिर

134:54

प्रॉब्लम निकलते हैं और उसका सॉल्यूशन भी

134:56

शिक्षकों के बीच जागरूकता यह पैदा करता है

134:59

की शिक्षा

135:02

कम करेगा

135:08

अनुसंधान का क्षेत्र में यह कम पड़ेगा

135:18

पटना है वह सकता है फिर पाठ्यक्रम संबंधी

135:21

चीजों पाठ्यक्रम है वह किस तरीके

135:34

अनुसंधान जो है वो किया जाता है मूल्यांकन

135:37

के लिए की इवेलुएशन करना मूल्यांकन किस

135:39

तरीके से किया जाए तो वहां भी रिसर्च होगी

135:41

की कौन सा तरीका अच्छा है या कोई नया

135:44

तरीका अपनाना हो प्रशासनिक प्रशासन के कम

135:46

स्कूल का पूरा कम प्रशासन से चला है तो

135:49

वहां पर अगर कोई प्रॉब्लम है स्टाफ में

135:51

मैनेजमेंट में तो वहां पर जो कमी है उसको

135:54

पूरा किया जाएगा फिर वेबसाइट की जितना जो

135:57

भी व्यवसाय है क्योंकि स्कूल की बात हो

135:59

रही है तो टीचिंग की ही बात हो रही थी जो

136:01

व्यवसाय है वहां पर कोई कमी तो नहीं ए रही

136:03

कहानी ऐसा तो नहीं थी टीचर की सैलरी इतनी

136:05

कम है की वो अपनी जरूर को ही नहीं पूरा कर

136:08

का रहा है कहानी पर तो वो ठीक से नहीं पढ़

136:11

का रहा तो मतलब व्यवसाय में जो ये टीचर और

136:13

व्यवसाय हैं कहानी इसके अंदर कोई कमी हो

136:15

तो वहां पर भी रिसर्च का एक बैकग्राउंड र

136:18

जाता है तो इन सभी क्षेत्र में एक्शन

136:20

रिसर्च हो सकते हैं यह क्षेत्र उनके हैं

136:29

और जो मैं बोलती हूं आपको पेपर में वह

136:31

पूरा एक्सप्लेन करके आना है और बहुत ही

136:34

जल्द आपके पेपर भी स्टार्ट होने वाले हैं

136:36

तो आप जो है ध्यान दें थोड़ा और अच्छे से

136:40

पढ़ाई करें

136:41

[संगीत]

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