हिंदी दक्षता / 2nd yr / marathon vdo/all 5 units in 1 vdo
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आज की इस वीडियो में हम करेंगे डीएलएड
सेकंड एयर का हिंदी और सब्जेक्ट जिसका नाम
जो है इस बार हिंदी दक्षता है ठीक है और
इसकी जो यूनिट वन है इकाई एक है उसका नाम
है हिंदी भाषा इसका मतलब सीधा है की ये जो
इकाई वन है इसमें सिर्फ और सिर्फ हिंदी
भाषा के बड़े में बात होगी की हिंदी भाषा
जो है वो कहां से आई कैसे आई वो जो
स्टार्टिंग में कैसी थी और अब उसके अंदर
क्या-क्या बदलाव आए हैं समय के साथ-साथ
चाचा चेंज आए तो बेसिकली हिंदी भाषा को
लेकर ही हमारी पुरी ये जो यूनिट है वो
रहेगी तो शुरू करते इस यूनिट को पहले
टॉपिक है हिंदी का ऐतिहासिक सफर जैसा की
मैंने बताया हिंदी भाषा की बात हो रही है
तो हिंदी का ऐतिहासिक यानी हिस्ट्री क्या
रही है उसमें उर्दू हिंदुस्तानी अंग्रेजी
प्रांतीय प्रदेशी प्रभाव प्रांतीय प्रभाव
पर हिंदी को चेंज किया गया है अपने हिसाब
से
तो चलिए इस टॉपिक को हम लेते हैं
तो क्या है जो हिंदुस्तानी भाषा है उसके
अवधारणा ही है एक ही ट्रक भाषा जैसा की
महात्मा गांधी ने कहा था की जो
हिंदुस्तानी भाषा है वो कोई एक भाषा नहीं
है बल्कि एक ही कृत है जब हम का देते हैं
इसका मतलब होता है उसके अंदर बहुत साड़ी
चीज इंक्लूड हो जाति है तो फिर हिंदी भाषा
के अंदर भी बहुत सी चीज इंक्लूड हो गई
जैसे की ऊपर था हमारा टॉपिक उर्दू
अंग्रेजी के शब्द संस्कृत के शब्द तो वो
टोटल मिलकर बन रही हमारी हिंदुस्तानी भाषा
इसमें क्या है उर्दू संस्कृत देसी विदेशी
अंग्रेजी के कुछ शब्दों का संगठित रूप भी
है जैसा की आपने पहले भी किया होगा देशज
शब्द कौन से होते हैं तत्सम तद्भव ये सारे
शब्द जो है हम हिंदुस्तानी भाषा में
प्रयोग करते हैं
जब इसमें संस्कृत के शब्दों प्रयोग होता
है यानी तब हम तत्सम क्या देते हैं तब
साहित्य हिंदी और अरबी जब हम अरबी भाषा की
बात करें तो उसमें फारसी और तुर्की के
शब्दों को यानी की वह तद्भव का हम जो है
वो प्रयोग करते हैं जिसे हम उर्दू का देते
हैं हिंदी जो है वो उर्दू में केवल लिपि
का अंतर है देखिए हिंदी और उर्दू दोनों
में सिर्फ लिपिक जो है वो अंतर है यानी की
जो हम हिंदी है वो लिखने हैं देवनागरी में
और जो उर्दू लिखने हैं वो है फारसी में ये
आपके सीटेट में भी क्वेश्चंस आता है तो यह
आपका फेस्टिवल नॉलेज भी यहां पर है तो एक
ही भाषा में जो होती है ना दो-दो शायरियां
हैं यहां पर शैली की बात करें एक है हिंदी
शैली दूसरी है और दूसरा ली लेकिन है तो
दोनों ही हिंदुस्तानी भाषा जब हम
हिंदुस्तानी भाषा बोल रहे हैं तो उसमें
उर्दू के शब्द भी इंक्लूड है हिंदुस्तानी
और उर्दू
के अरबी फारसी के शब्दों को भी चौड़ा गया
है
तो इसमें ना संस्कृत शब्दावली का अधिक
प्रयोग
उदाहरण देख लीजिए एग्जांपल से आपको जरूर
समझ में आएगा एग्जाम में आपको एग्जांपल
जरूर लेने हैं मैं हर बार कहती हूं अभी भी
कहती हूं और मैं साथ ही साथ आपको प्रोवाइड
भी कर रही हूं तो जो यह हिंदुस्तानी भाषा
है जिसे महात्मा गांधी ने एक ही कृत भाषा
कहा इसका हम उदाहरण कैसे देंगे तो यहां पर
देखिए जब हम एक शब्द मतलब एक लाइन बोलते
हैं आई पधारिए तो ये होता है संस्कृत
शब्दावली हमारी युक्त हिंदी है इसमें
संस्कृत की शब्दावली उसे की इसी को हम ऐसे
बोलते हैं आई तशरीफ़ रखिए तो ये हो गया
अरबी फारसी हिंदी है ना
या उर्दू का लीजिए या फिर हम कहीं कहेंगे
आई बैठिए तो ये होता है बोलचाल का रूप
हिंदुस्तानी ठीक है तो जब हम हमने ना बोला
आई पधारिए ये भी कुछ ज्यादा ही और लगता है
ऐसे कौन बोलना है आजकल आई पधारिए तेरे को
ज्यादा ही बोलते हैं की ये तो कुछ ज्यादा
ही हिंदी बोल रहा है या फिर आई तशरीफ़
रखिए तो ये बहुत ज्यादा उर्दू हो जाता है
तो हम क्या कर देते हैं इन दोनों को छोड़
और तीसरा जो आम बोलचाल की भाषा है हमारी
आई बैठिए ऐसे बोल देते हैं ठीक है हिंदी
जो है वह हमारी राजभाषा है जो की 14
सितंबर 1949 को बनाई हुई और जो इसका
अनुच्छेद है बहुत इंपॉर्टेंट यह 343 को
आपको याद रखना है सीटेट में भी इससे
क्वेश्चन आता है
अब हिंदी भाषा क्षेत्र की बात कर लेते
क्योंकि हिंदी भाषा की बात हो रही है तो
उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार
हिमाचल या फिर हरियाणा हो गया दिल्ली
अंडमान निकोबार यहां पर अनेक जो है वो
हिंदी भाषा की बोलियां बोली जाति हैं
हिंदी भाषा पर हम अंग्रेजी प्रभाव भी
देखते हैं जैसे की अंतरराष्ट्रीय स्वरूप
इससे हमें ये पता चला है की जो हमारी
हिंदी भाषा है वो ना केवल हिंदुस्तान में
बल्कि विदेश में भी प्रचलित है तो यहां पर
अंतरराष्ट्रीय स्वरूप जी है उसका वो बादल
जाता है इसीलिए देखिए कई देश में ना हिंदी
भाषा प्रयोग होता है जैसे की फिजियो देश
है मॉरीशस सूरीनाम कनाडा नेपाल आदि तो इन
देश को आप याद रखेंगे यहां पर भी हिंदी
बोली जाति है हिंदी भाषा इतनी महान है
देखिए की विदेश में भी ये बोली बोली जा
रही है इस भाषा का प्रयोग हो रहा है तो इस
टॉपिक में हमें यही साड़ी चीज बतानी थी की
हिंदी भाषा की क्या-क्या जो है
कैसे वो आई कैसे उसका जो है इतिहास रहा
उसका और कैसी है यह हमारी हिंदी भाषा तो
ये हमने देख लिया आगे चलते हैं अगला टॉपिक
हिंदी यानी अलग तरह की हिंदी है इसके अंदर
कौन-कौन सी हिंदी करेंगे हम व्यवहारी
हिंदी बोलचाल में हिंदी ये दोनों ही से है
उसके बाद माना हिंदी साहित्य हिंदी और
हिंदी भाषा का सरलीकरण
है की आम लोग भी इसे बोलते हैं तो सबसे
पहले व्यवहारिक हिंदी कर लेते हैं
जो व्यवहारी हिंदी होती इसी को हम बोलचाल
की हिंदी भी कहते हैं दोनों ही चीज से हैं
अगर बोलचाल की भाषा है आप का दो इसे
व्यवहारी हिंदी होती है और अगर व्यवहारी
इंद्री पूछे तो आप का दो जो आम बोलचाल की
भाषा होती है वो व्यवहारिक हिंदी होती है
दोनों ही से है कोई डिफरेंस नहीं है देखिए
जी भाषा को समझना वह प्रयोग करने में
सुगंधा वी सरलता होती है यानी इजी होता है
हमें जी भाषा को बोलना और समझना वही तो
बोलचाल की भाषा कहलानी है अतः यही
व्यवहारिक भाषा भी कहलानी है तो दूसरा
पॉइंट ये भी है की जनसाधारण जी भाषा को
व्यवहार अथवा प्रयोग में ले वही होती है
व्यवहारी या फिर प्रयोग भाषा तो हमारी
हिंदी भी तो ऐसी है ना जो जनसाधारण है
ज्यादा से ज्यादा लोग इसी को प्रयोग में
ला रहे हैं हिंदी उर्दू हिंदुस्तानी वी
अंग्रेजी
अब रहित अंग्रेजी शब्द अब यहां पर देख
लीजिए हिंदी अजय व्यवहार है हम इसको पढ़
लेते हैं की किस तरीके से ही बाहर में आई
है पहले क्या है बोलचाल के लिए प्रयोग
होगी ऐसा मतलब ऐसी होगी वो भाषा जिसे हम
बोलचाल में प्रयोग करें ठीक है दूसरी चीज
साहित्य सृजन यानी जो लिटरेचर होगा
साहित्य होगा चाहे कविताएं कहानी और
उपन्यास लिखे जैन वो भी उसे भाषा में बहुत
ज्यादा लिखे जाए तो आप देखेंगे हिंदी अल
लिटरेचर इतना ज्यादा है की मतलब आपका जीवन
निकाल जाएगा पर आप सारे ग्रंथ सारे
उपन्यास कहानी कविताएं नहीं पढ़ पाएंगे
अकेले प्रेमचंद जितना सर लिख के चले गए
हैं की उनको भी पढ़ पन जो है बहुत ही
मुश्किल हो जाता है किसी प्रयोजन यानी कोई
भी प्रयोजन के लिए जैसे आजीवी चलने के लिए
आप उसे भाषा प्रयोग कर सकते हैं बिल्कुल
और साथ ही साथ प्रशासन व्यवसाय वैज्ञानिक
और जनसंचार के लिए वो प्रयोग होती तो
हिंदी भाषा है आप देखिए प्रशासन में हमारी
उसे होती है व्यवसाय यानी रोजगार जो है
उसमें वैज्ञानिक भी और जानसन कर तो हो ही
रहा है न्यूज़पेपर हिंदी में छठे हैं और
न्यूज़ भी हिंदी में आई है और सभी लोग
इसको समझते भी हैं
है तो यह थी हमारी व्यवहारी हिंदी या फिर
बोलचाल की हिंदी अब बात करते माना हिंदी
की तो माना हिंदी क्या होता है थोड़ा सा
अलग हो जाता है देखिए श्रेष्ठ और सीट
लोडेड द्वारा प्रयुक्त तथा व्याकरण संवत
भाषा के रूप को मानव कहते हैं पहले चीज तो
ये की भाषा का वह रूप जो बहुत ही
सुषेक्षित लोगों द्वारा बोला जाए और उसमें
व्याकरण संवत कोई भी गलतियां नहीं हनी
चाहिए तब हम कहेंगे की वो मानक भाषा है अब
हिंदी की बात करें तो वर्तमान में हिंदी
की मानव भाषा खड़ी बोली है आज का टाइम पर
कोई भी जो है वह जो हमारी हिंदी है ना तो
उसको संस्कृत बोलना है पूरा और ना ही
उर्दू तो मिक्स करके बोलना है जिसे हम
कहते हैं खड़ी बोली तो वो खड़ी बोली ही
क्या है हमारी भाषा है
सर्वश्वीकृत मानव स्वीकृत यानी सभी के
द्वारा ही स्वीकृत की जाए हर इंसान जो है
यहां पर वह स्वीकृति देता है हिंदी को
समझना है यहां पर शिक्षा का मध्य होना
चाहिए और कामकाज की भाषा भी ये हनी चाहिए
तभी हम कहेंगे की वो भाषा है तो हिंदी के
साथ तो बिल्कुल ऐसा ही है मतलब शिक्षा भी
तो मिलती है हिंदी मीडियम में और कामकाज
के लिए भी हिंदी प्रयोग हो रही है
तीन चयन होते हैं देखिए तीन चयन कौन-कौन
से हैं वह देख लीजिए की हम किसी भी भाषा
को हम मानव कब बोलेंगे
इसको क्या कर दी हमने स्वीट प्रीति
जो है अगर हम किसी को भी बोलते हैं वो समझ
रहा है या कोई हमें बोल रहा है तो हम समझ
रहे हैं उसे पर न्यूज़ अगर हिंदी में ए
रहे हैं हम पढ़ रहे हैं सुन रहे हैं तो ये
सारे क्या हमारी क्या हो गए फिर हम कहेंगे
की हां ये भाषा जो है वो मानक है तो यहां
पर सिद्ध होता है की हिंदी भाषा भी क्या
है माना भाषा है अब बात करेंगे साहित्य
हिंदी की तो कोई बड़ी चीज नहीं है साहित्य
हिंदी क्या हुआ ऐसे हिंदी जिसमें साहित्य
सृजन किया जाए ये देखिए साहित्य सृजन में
प्रायोजित यानी साहित्य की रचना करने के
लिए इस भाषा का प्रयोग हो रहा है या नहीं
ऑफ कोर्स हो रहा है मैंने अभी-अभी बताया
है की हिंदी में इतना ज्यादा साहित्य है
की आपका जीवन निकाल जाएगा लेकिन आप सर
साहित्य नहीं पढ़ पाएंगे
पठान वी लेखन में भी यह सरल होना चाहिए
समाज कल्याण हेतु साहित्य होना चाहिए और
समझो दर्पण होता है वह तो साहित्य होता ही
है तो जब भाषा ऐसी हो की समाज इसको पढ़े
और समझे तभी तुम कहेंगे की वो साहित्य
भाषा है तो जो हिंदी भाषा है उसके साहित्य
लोग पढ़ने हैं समझते हैं समाज की बुराइयों
को देखते हैं फिर उसे कैसे हटाना है ये
जानते हैं तो ये इसलिए हमारी हिंदी भाषा
क्या हो गई साहित्य भाषा यहां पर सिद्ध हो
गई अभी चलते हैं अगला जो हमारा टॉपिक है
इसी टॉपिक से हिंदी भाषा का सरलीकरण बनाम
ग्राहता अब्राहम क्या है मतलब आपको ये
बताना है की ये जो हिंदी भाषा है वो क्यों
इतनी सरल है भाई उसका इतना सरल कैसे हो
गया उसका
विदेश में भी बोली जा रही है ना केवल
हिंदुस्तान में बल्कि विदेश में भी बोली
जा रही है अभी मैंने बताए थे आपको तो देख
लेते हैं की क्या है
ध्यान से सुनिएगा कहानी की तरह संस्कृत है
जो हमारी संस्कृति जो की कई भाषण की जननी
है ठीक है कठिन वी कनिष्ठ होने के करण जान
सामान्य द्वारा इस भाषा में संप्रेषण करना
कठिन था बिल्कुल जो हमारी संस्कृत है
जिससे हमारी हिंदी भी आई है जो संस्कृत है
ना वह बहुत ही ज्यादा कठिन थी और हम आम
लोग तो उसे कर ही नहीं सकते थे अभी भी
देखो जब कोई संस्कृत बोलना है या फिर हम
पढ़ने हैं तो हंसी ए जाति है लोगों को
इतनी कठिन भाषा है ना की हम बोल नहीं
पाएंगे उसको जल साधारण में या फिर उसमें
संप्रेषण नहीं हो पाएगा संस्कृत न्यूज़
पेपर छाप दो कितने लोग समझ पाएंगे सभी लोग
नहीं समझ पाएंगे क्योंकि बिल्कुल ही
संस्कृत और डायवोर्ना तो उसमें उर्दू
शब्दों में ना तो अंग्रेजी इस शब्दों में
है ना तो कैसे समझेंगे लेकिन जो हिंदी का
न्यूज़ पेपर आता है उसमें उर्दू शब्द होते
हैं इंग्लिश टीवी कुछ शब्द होते हैं ऑफिस
वगैरा तो पढ़ने और हम समझ जाते हैं इसी
प्रकार में प्रकृति अपभ्रंश आदिवासी
यह सब क्या हुई विलुप्त हो गई निरंतर समय
गुजरते के साथ-साथ लोगों ने ऐसी भाषा को
जन्म दिया या फिर आरंभ किया जिसे वे आसानी
से बोल सकें यह कहानी की तरह समझो देखो
फिर टाइम तू टाइम लोग चेंज करते रहे
और फिर चेंज करते रहते लोगों ने ऐसी भाषा
को जन्म दे दिया जो इस समझना में इजी हो
और बोलने भी और व्यवहार में ला सकें जिससे
अंतर्गत हिंदी भाषा में जन्म लिया तो अब
ये जो है हिंदी भाषा का सर्वेकरण यहां पर
हो गया
संस्कृत के साथ-साथ पंजाबी मराठी गुजराती
आदि ने भी हिंदी भाषा के विकास में सहयोग
दिया है देखिए समाचार विश्लेषण तक में
कोर्ट मिश्रित हिंदी प्रयोग होता है मैंने
पहले बता दिया न्यूज़पेपर वगैरा में संचार
मध्य की प्रमुख भाषा क्या है हिंदी है
धारावाहिकोटि प्रदर्शन में हिंदी भाषा का
प्रयोग होता है जितने भी सीरियल आते हैं
हमारे ये स बहू वाले ड्रामा सारे हिंदी
में ए रहे हैं एक रूपी या रस ना होकर भी
व्यवहारिक भाषा रूपन का मिश्रण इसे
जनस्विति प्राप्त हो जाता है क्यों भाई
क्योंकि हिंदी में ना लोग अपने तरीके से
अपनी शब्द दाल देते हैं और फिर कहते हैं
की चलो ये हो गई हिंदी तो स्वीकृति हिंदी
को मिल जाति है अगर हम कहते की आज से सभी
को संस्कृत बोलना है तो क्या यह पॉसिबल है
बिल्कुल नहीं है संचार मध्य के करण हिंदी
भाषा का बड़ी तेजी से ही तट संता में
सरलीकरण की और हो रहा है
ना जी भाषा में तो समझो वो बहुत तेजी से
ही फेल रहा है संचार
उसके बाद केवल अखिल भारतीय नहीं यानी इसे
भारत में ही नहीं वैश्विक स्वीकृति भी
प्राप्त हो रही है क्योंकि विदेश में भी
इसे बोला जा रहा है जैसे-जैसे हिंदी भाषा
का रूप सरल होता जा रहा है वैसे-वैसे
लोगों द्वारा इसे ग्रहण भी करना आसन हो
रहा है और इसे ही हम कहते हैं भाषा का
सरलीकरण या फिर तो आई होप की आपको ये
टॉपिक यहां पर क्लियर हुआ होगा की हिंदी
भाषा सरलीकरण या फिर क्या है आगे चलते हैं
हिंदी भाषा के गन और सीमाएं अभी हिंदी
भाषा के बड़े में काफी कुछ पढ़ लिया हमने
अब जो देख लेते हैं हम थोड़ा सा रिजल्ट
निकलते हैं की क्या-क्या फायदे हैं और
क्या-क्या
गन हैं भाई तभी तो ये इतनी ज्यादा फेमस है
ध्वनि के अनुरूप लिपि और कॉन के नाम है
इसमें वर्णमाला का वर्गीकरण बहुत अच्छे से
किया गया है स्वर और व्यंजन में लिपि
चिन्नू की पर्याप्त मंत्र जितनी भी हमें
चिन्ह चाहिए मात्राएं चाहिए वो साड़ी यहां
पर हैं बिल्कुल
बहुत सर ऑप्शन मिलता है
व्यंजन चिन्होेती जो है वह सरिता भी है
सुपत्यता यानी पढ़ने में बहुत ही इजी है
उच्चारण वी लिपि में सामान्य यानी की जो
जैसा हम बोलते हैं वैसे ही उसकी लिपि है
सार्थक ध्वनि प्रति व्यवस्था अन्य भाषा के
शब्दों को हिंदी भाषा की प्रकृति के
अनुरूप परिवर्तित करना तो ये भी इसका
फायदा है की अन्य भाषण को भी अपने अंदर
समाहित कर लेती है लेकिन बात करें सीमाओं
की तो हम भी इसके कुछ नुकसान या फिर
सीमाएं भी हैं जो यहां पर पांच मैंने लिखे
हैं पहले
ये बड़ी दिक्कत है की एक ही ध्वनि के लिए
हमें ऑप्शन इतने सारे हैं की समझ में नहीं
आता क्या करना है जैसे आर को ऐसे राम
लिखोगे तो आर ऐसा बनेगा करमाली तो यह ऊपर
चला जाएगा
ड्रम ये दो भागन में बन जाएगा तो ये चीज
जो है वो प्रैक्टिस करते करते बच्चे को आई
है
समझना बच्चों को तो यह सीमा भी है जब भी
आप पेपर में सीमाएं करेंगे तो यह जो है
एग्जांपल जरूर
ब्रह्म उत्पन्न सेकंड ब्रह्म उत्पन्न
ब्रह्म उत्पन्न हो जाता है लेखन में कैसे
देखिए
इसमें आधा चोर मिला हुआ है तो अब ये लिखे
ये दिक्कत होती है ऐसे ही इंडिया में भी
दिक्कत हो जाति है आगे है हमारा शिरोरेखा
प्रयोग में मनमानी यह जो शिरोरेखा होती है
मतलब लाइन डालने होती है जब हम कुछ भी
लिखने हैं जैसे मैंने आम लिखा तो ऊपर लाइन
डालनी है तो इसमें मनमानी है की आपको लाइन
डालनी है लेकिन कुछ लोग लाइन नहीं भी
डालते हैं तो समझ में नहीं आता की लाइन
डालना ठीक है या नहीं वैसे अगर बताया जाए
बिल्कुल
टूटी देखो जैसे की यह हां हां है तो इसमें
तो हमने चंद्र बिंदी लगा दी लेकिन जब बात
करें पंप की तो अब हम यहां पर बिंदी लगे
या फिर आधा मुंह लगाएं क्योंकि ये भी
साउंड करेगा पंप ये भी साउंड अरेरा पंप तो
यहां पे अनुस्वार लगे या अनुनसिक लगे समझ
में नहीं आता तो ये भी इसकी दिक्कत है आगे
चलते हैं अगला टॉपिक है हमारा बहुभाषिकता
का अर्थ और महत्व बहुभाषिता क्या है ध्यान
से सुनिएगा इंपॉर्टेंट है क्वेश्चन जरूर
आएगा ऐसा स्थान या देश जहां पर बहुत साड़ी
भाषा बोली जाति हैं हर भाषा बोलने की
आजादी होती है प्रचलन हो और ए से अधिक
भाषा में पढ़ सकते हैं या बोल और समझ सकते
हैं ऐसी जगह को हम कहते हैं बहुभाषिकता
वाली जगह
स्थिति है
जबकि इसे प्रयोग करने वाला बहुभाषी भाषा
प्रवक्ता होता है
तो बहुवश्यकता कहां पर है भारत में तो यह
क्या
महत्व देख लेते हैं यहां पर महत्व यह हो
जाएगा की सभी बच्चों को अभिव्यक्ति के
अवसर मिलेंगे चाहे वो कोई भी भाषा बोलना
हूं बोलना कौशल का भी आप होगा क्योंकि जब
आजादी मिल जाति है ना अपनी भाषा में बोलने
की तो जो बोलना कौशल है वो अपने आप ही
बाहर आता है प्रत्येक भाषा उसे सम्मान
मिलेगा
भाषाई विविधता को शिक्षक वीडियो में
प्रयोग किया जा सकता है बहुभाषिकता हमारी
पहचान और अस्मिता को भी निर्धारण देती है
अभिव्यक्ति में आत्मविश्वास आता है ज्ञान
का विस्तार होता है और व्यापार साहित्य भी
मिलता है
जैसे इंडिया में हम हिंदी भी पढ़ने हैं
इंग्लिश में पढ़ने हैं और मैथिली भी पढ़ने
हैं तो फिर अगर मैथिली पढ़ रहे हैं मैथिली
भाषा अगर हमें ए गई तो फिर हम मैथिली
साहित्य भी पढ़ेंगे ना मैथली भाषा में
कौन-कौन लेखक हैं उन्होंने क्या-क्या लिखा
है उसे भाषा की कहानी उसे भाषा में भी
रामायण लिखी है उसे भी पढ़ेंगे तो साहित्य
भी हमारा बाढ़ जाता है और ज्ञान भी आगे
चलते हैं भारतीय शिक्षा नीति में भाषा का
स्थान यहां पर हमें जो में चीज है वो है
त्रिभाषा सूत्र की संकल्पना और
क्रियान्वयंत्रिभाषा सूत्र क्या था और
इसको कैसे लागू किया गया तो सबसे पहले बात
करेंगे स्टार्टिंग की 1956 में केंद्रीय
शिक्षा और सलाहकार बोर्ड यानी की कब बोलते
हैं इसको बहुत इंपॉर्टेंट है सीटेट के लिए
भी बहुत इंपॉर्टेंट है ये इसके द्वारा जो
है भाषा संबंधी समस्या का विचार किया गया
और समाधान के लिए त्रिभाषा सूत्र प्रस्तुत
सॉरी किया गया इसका क्या मतलब है की
क्योंकि हमारा देश कैसा था बहुभाषिकता
वाला अभी हमने पढ़ा तो इस तरह से मौलिक
प्रॉब्लम भी क्रिएट कर रहा था की हम कैसे
जो है अपनी शिक्षा में भाषण को लाइन तो
क्या हुआ कब ने 1956 में बताया की हम
त्रिभाषा सूत्र लेंगे अब ये क्या था तीन
भाषण पर बाल दिया जा रहा था यहां पर
इसीलिए इसे कहते हैं त्रिभाषा सूत्र या
फिर फ्री लैंग्वेज फॉर्मूला पहले भाषा जो
होगी वो तो मातृभाषा या फिर क्षेत्रीय
भाषा होगी जहां से भी बच्चा आया है उसकी
वो अपनी भाषा सेकंड भाषा हिंदी होगी लेकिन
उन राज्यों में जहां पर आधुनिक हिंदी भाषी
राज्यों में सॉरी जहां पर हिंदी बोली जाति
है वहां पर ना दूसरी अन्य भाषा होगी और
कोई भी विदेशी भाषा इंग्लिश मां लो और
जहां पर तीसरी होगी
और जहां पर हिंदी नहीं बोली जाति है फिर
वहां पर तो हिंदी बोली ही जाएगी और साथ ही
साथ क्या अंग्रेजी भी आएगी और साथ ही साथ
मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा
आनी चाहिए
कोई इसमें कन्फ्यूजन वाली बात नहीं तीन
भाषण याद रखो क्षेत्रीय भाषा संघ की भाषा
हिंदी और दूसरी विदेशी भाषा जो है
अंग्रेजी इन तीन भाषण पर ही बाल दिया गया
अब क्या 1962 में मुख्यमंत्री ने इस
सम्मेलन में क्या किया एक सम्मेलन हुआ
मंत्रियों का मुख्यमंत्री का हर राज्य के
और उन्होंने स्वीकृति दे दी लेकिन फिर भी
क्या हुआ जटिलता के करण ये जो थ्री
लैंग्वेज फॉर्मूला है वो ठीक से कम नहीं
किया आईएसपी बुनियादी सिद्धांत पढ़िए बहुत
इंपॉर्टेंट है यह तीन जो हमारे फार्मूले
हैं तीन लैंग्वेज के सर आई भाषा के रूप
में हिंदी का महत्व किया जाएगा अंग्रेजी
का क्रियाशील ज्ञान आवश्यक होना चाहिए
हिंदी अंग्रेजी आरंभ करने का स्टार जो है
वो डिसाइड होना चाहिए अच्छी का आधार पर
अन्य भाषण भी पढ़ सकते हो जैसा की आप
लैंग्वेज कोर्स बाद में कर सकते हो ठीक है
अपना आंसर जो है वह रेडी करना है तो
नेक्स्ट टॉपिक हमारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या
2005 के अनुसार त्वचा का पाठ्यक्रम स्वरूप
और अपेक्षा लास्ट टॉपिक है ध्यान से समझना
इन्होंने कहा है की जो हमारा 2005 का
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या है नेशनल जो करिकुलम
फ्रेम पहले भी पढ़ चुके 2005 इसमें से
जोड़ना सीटेट में 100% क्वेश्चन आते हैं
दो-तीन क्वेश्चन आते हैं नेशनल करिकुलम
फ्रेमवर्क 2005 लेकिन जो ये हमारा हिंदी
में टॉपिक है वो है भाषा का पाठ्यक्रम
हमसे भाषा की बात करेंगे की 2005 में जो
पाठ्यचर्या लाई गई उसके अंदर भाषा के लिए
क्या-क्या कहा गया है तो देख लीजिए
क्या-क्या कहा गया है यहां पर पॉइंट वाइस
मैंने आंसर दे दिए हैं आपको पहले चीज
इन्होंने बोली है 2005 में जो फिल्म आया
है वहां पर भाषा के बड़े में की राष्ट्रीय
पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 में बहुभाषिकता
निहित है मतलब वह बाल देता है
सचिन घरेलू भाषा स्कूल में मध्य होने से
बिल्कुल की जो घर की भाषा होती है
क्षेत्रीय भाषा होती है वो थ्री लैंग्वेज
में भी तो था उसको हमें बाल देना है थर्ड
घरेलू भाषा को सम्मान दो अगर बच्चा अपनी
घरेलू भाषा बोल रहा है क्लास में तो उसको
डांटना या प्रताड़ित नहीं करना है उसको
सपोर्ट करना है और अदर लैंग्वेज भी इसको
सीखनी है
यहां पर की प्राथमिक स्टार पर मातृभाषा
में ही शिक्षा देना पर्याप्त होगा जो अभी
हमारा नया जो आया है ना अभी शिक्षा नीति
आयोग उसमें भी यह बात बोली रही है लेकिन
अभी हालांकि वो लागू नहीं हुई है इसलिए हम
2005 वाला ही यहां पर पढ़ रहे हैं
त्रिभाषा पर इन्होंने बाल दिया बिल्कुल
देखिए जो त्रिभाषा फॉर्मूला पहले भी लाया
गया था लेकिन ठीक से कम नहीं किया तो 2005
में दोबारा से उन्होंने बोला की हां भाई
इस पर कम करो उसके बाद आवश्यकता अनुसार
भाषण का अध्ययन किया जाना चाहिए अगर
आवश्यकता है तो आप विदेशी भाषण को भी पढ़ो
संस्कृत भाषा का अध्ययन भी आवश्यक है ताकि
उसको भी बचाया रख सके क्योंकि हमारी सर
साहित्य जो है पुराना और संस्कृति संस्कृत
में ही है उच्च स्टारों पर शास्त्री और
विदेशी भाषण को परिचय में लाया जा सकता है
तो हमारा जो 2005 जो फ्रेमवर्क है करिकुलम
का वहां पर लैंग्वेज से रिलेटेड यही बातें
बोली गई थी तो यह सारे पॉइंट वाइस मैंने
दे दी है
तो यहां पर यूनिट वन आपका हिंदी का खत्म
होता है
आज इस वीडियो में हम हिंदी दक्षता या फिर
जो भी हमारा हिंदी शिक्षक है सेकंड एयर का
उसका इकाई दो करेंगे इससे पहले इकाई जो है
हम फिनिश कर चुके हैं तो इकाई दो में जो
है पूरा आपका ग्रामेटिकल पार्ट है आप चाहे
तो इसे इंडिविजुअल भी दे सकते हैं मैं
पहले भी वीडियो बना चुकी हूं जैसे समास हो
गया अलंकार हो गए लेकिन अगर आप वैसे नहीं
देखना चाहते और सिलेबस के अकॉर्डिंग ही
देखना है तो फिर आप यह पुरी वीडियो ध्यान
से देखें इसमें आपके अलंकार समाज जो भी है
टॉपिक इस सिलेबस में आपके वह पूरा आपका
क्लियर हो जाएगा यहां पे ठीक है
शुरू करते हैं इसको इसका नाम ही क्या है
हमारी इकाई का भाषा सौंदर्य अवधारणा
प्रकार एवं महत्व की जो हमारी लैंग्वेज है
उसकी सुंदरता क्या है और इस एक कॉन्सेप्ट
इस टाइप और इसे महत्व
[संगीत]
निश्चित अर्थ हो वही शब्द कहलाता है तो ये
होता है शब्द हमारा अब इसके अंदर अव्यय की
बात की जाए तो वे शब्द जिनके रूप में लिंग
वचन कारक कल पुरुष आदि के करण कोई
परिवर्तन नहीं आता ठीक है अर्थात जो सदा
अपने मूल रूप में ही बने रहते हैं चाहे
लिंग चेंज हो जाए वचन चेंज हो जाए लेकिन
जो हमारा
शब्द होगा वह चेंज नहीं होगा
दौड़ता है राम तेज दौड़ता है ठीक दौड़ता
है अगर मैं ये कहूं सीमा दौड़ती है तो
यहां पर दौड़ता दौड़ती हो गया लेकिन जो
तेज शब्द है वो तेज ही रहेगा तो वो क्या
है अव्यय है या फिर अविकारी शब्द है तो
संबंधबोधक जो शब्द होते हैं वो भी अविकारी
होते हैं
समुच्चयबोधक जिसमें आदि बोधन जो शब्द होते
हैं आहऑफ ये सब भी कैसे होते हैं अविकारी
होते हैं निपट हो गया जैसे भी
ये जो भी शब्द है इसको किसी भी लिंग
परिवर्तन से कोई फर्क नहीं पड़ता ये भी बे
ही रहेगा तो बहुत से ऐसे शब्द हैं जिनको
लिंग वगैरा वचन वगैरा से कोई फर्क नहीं
पड़ता ये होते हैं हमारे अविकारी शब्द ठीक
है आगे चलते हैं संधि तो संधि क्या होती
है संधि शब्द का अर्थ है मेल यानी जुड़ा
हुआ अब इसके अंदर भी क्या होते हैं हमारे
प्रकार होते हैं तो सबसे पहले होता है
स्वर संधि स्वर संधि में क्या होता है
उसे हम कहते हैं स्वर संधि
से चेंज आया है इसलिए इस स्वर संधि
अरे व्यंजन संधि इसमें क्या होता है
व्यंजन के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने
से उसे व्यंजन में जो परिवर्तन होता है वो
होता है व्यंजन संधि जैसे आप देख लो आधा
के और फिर यहां भी कोई एन ए नहीं है जी है
यानी की व्यंजन है तो दीप जमा ड्रेस बन
गया और ये दोनों ही यहां पर आगे चल के भी
व्यंजन में ही परिवर्तित हुए हैं तो ये हो
गया हमारा व्यंजन संधि ऐसी उत और नाती में
उन्नति हो गया ठीक है आगे चलिए संधि
ये उत्तर के बाद किसी स्वर अथवा व्यंजन के
आगे आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता
है वो तभी सर्व संधि जैसे विसर्ग आपको पता
होना ये दो बिंदिया होती हैं जो
मां जमानत
को हटाकर क्या कर दिया हमारे आगे क्या ग
गया
मनोरथ वैसे ही मानो जमा हर मनोहर
नेक्स्ट है इसमें अर्थ की दृष्टि से
परस्पर स्वतंत्र संबंध रखना वाले दो या दो
से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य स्वतंत्र
शब्द की रचना करते हैं दो शब्द मिलेंगे और
कोई तीसरा ही शब्द बनेगा और उसका अर्थ भी
अलग होगा उन दोनों से तो ये होता है समास
इसके बाद जो है वो ज्यादा इंपॉर्टेंट है
पहले तत्पुरुष समास इसमें क्या होता है को
से के द्वारा या फिर आदि का लप हो जाता है
यानी है जाता है कैसे हटा है देखो रसोई का
घर
यहां से क्या बन गया रसोई घर तो अब यह केक
गया तो ये हो गया हमारा तत्पुरुष समास ठीक
है
समूह का दिशा होता है और पहले पद संख्या
होता है सबसे इजी समाज सही है हमारा
द्विगु समास इसमें जो होता है
यह भी इजी है बहुत इजी है बस आपको
माता-पिता इसमें द्वंद समास हो गया
बहुत ही इजी तरीके से बता रही हूं मैं और
शॉर्ट में बता रही हूं ताकि आप पहचान सके
सीटेट में भी और अगर आपके डीएलएड के पेपर
में आते हैं एग्जांपल लिखने के लिए तो आप
समास है इसमें पहले पद जो होता है प्रधान
होता है और अव्यय होता है वही अविकारी
होता है पहले पीछे कुछ भी चेंज होता है
पहले पद जो है वो चेंज नहीं होगा जैसे
प्रत्येक वर्ष
तो ये बन गया प्रति वर्ष यह जो प्रति है
यह कभी चेंज नहीं होगा वर्ष वर्षों बन
सकता है लेकिन प्रति कभी चेंज नहीं होगा
प्रति और कुछ बन सकता है प्लूरल या फिर
सिंगल
नहीं बन सकता ठीक है इस तरह से हो गया यथा
समय यानी समय के अनुसार नेक्स्ट कर्मधारय
समास इसमें क्या होता है पूर्व पद वी
उत्तर पद में विशेषण और विशेष्य संबंध
होता है यह भी इजी है आप लोगों से इतना
याद रखना है
विशेषण
आत्मा
ऐसी आत्मा जो महान हो तो विशेषण
नेक्स्ट बहुव्रीहि समास इसमें दोनों होते
हैं और अन्य पद अर्थ होता है मतलब इसमें
दोनों ही जो उसका अर्थ तीसरी पद से
बिल्कुल भी नहीं मिलेगा जो इसका आंसर होगा
जैसे
पीतांबर पीला है अंबर जिसका अंबर पीला हो
यहां पर पीतांबर बन गया लेकिन पीतांबर है
और कांग्रेस
के दशानन तो दशानन कौन है रावण है कर है
जिसकी चतुर्भुज हो गया चतुर्भुज कौन है
हमारे ये मैं शॉप वाली चतुर्भुज की बात
नहीं कर रही हूं विष्णु को भी चतुर्भुज
कहते हैं क्योंकि कर भुजाएं होती हैं
जो किसी शब्द प्रारंभ में लगता हैं
निर्माण करते उदाहरण के लिए
उपसर्ग कौन-कौन सा है
वे शब्द के अंत में जुड़ने पर उसके अर्थ
में परिवर्तन लेट हैं
जैसे ही
अहंकार अपनापन और मोरटा इसमें प्रत्यय
क्या है अहंकार में है का मतलब
इसमें है अपनापन में पान है
अब आपके शब्द खत्म हो रहे हैं पड़ा की बात
करेंगे पद विचार में आपको चांद पढ़ना है
दोहा रोल चौपाई और कवित सवैया सोरठा धन
श्री मुक्त श्रद्धांजलि चांद आदि मतलब और
भी चीज हैं बट ये आपके सिलेबस में है तो
ध्यान से समझिएगा आपके लिए न्यू होगा
क्योंकि इससे पहले चांद दोहेड़ा तो स्कूल
में आई डोंट थिंक की इतना ज्यादा पढ़ने
हैं
चांद क्या होता है आडंबर प्रवाह तथा आवरण
किसी रचना के प्रत्येक पद में मात्राओं
अथवा वर्णों की नित संख्या
चांद में पहले प्रेयर आता है आपका दोहा
दोहा आपने सुना भी होगा कबीर ए रहीम का
बिहार का
तृतीय चरण में 13-13 मात्राएं और द्वितीय
चतुर्थ चरण में 11 द्वारा मात्राएं होती
है वह दोहा कहलाता है
मेरी भाव बड़ा हारो राधा नगरी सोई जतन की
जय परेशान
की पहले और तीसरी चरण में 13 मात्राएं तो
यह हो गया पहले चरण यहां पर यह 13
मात्राएं होगी और तीसरा चरण तो यह है
तीसरा क्योंकि यह तीसरा यह दूसरा हो गया
और यहां पर भी कितनी होगी 13 मात्राएं
होगी बाकी यहां पर 11 और यहां पर 11
मात्राएं होगी तो पहले और तृतीय चरण में
13-13 मात्राएं होगी और चौथ और दूसरे में
सॉरी पहले
ठीक है
आप ध्यान से सुनेंगे
छोटी
और ऋषि इन्हें तो हम एक दिन मंत्र इनके
अलावा जो होती है जैसे बड़ा ए हो गया
दो और यह बड़ी आई की मंत्र है री पे तो
मेरी दो और दो कर हो गए यहां पर भाव यहां
पे दोनों ही छोटे एन जुड़े हुए हैं तो
यहां पे दो ही आएगी
बड़ा में कितने आएंगे कर हो जाएगी क्योंकि
बड़ा ए है दोनों में भी कितने हो जाएगी
आपकी दो हो जाएगी यहां पर कर और फिर राधा
में भी
नगरी में देखिए कितनी होगी दो तीन और दो
पांच और सोए कितनी मात्राएं हो जाएंगे
[संगीत]
हां आज समझ लेंगे ना आपको सीटेट में भी
दिक्कत नहीं होगी
तो मां पर ए की मंत्र है तो अब हम इसे तू
हमारी सिंगल मंत्र में नहीं आता तो दो हो
गए की मंत्र है तो दो कर हो गए यहां पे
उसके बाद भाव में दो ही आएंगे क्योंकि और
जुड़ा हुआ है छोटा एन है
बड़ा में फिर से कर हो जाएगी बड़ा और
दो तीन अब इसको बोलते हैं
बिल्कुल तो आपने देखा पहले चरण में कितनी
मात्राएं हुई आपकी 13 इस तरीके से इस वाली
में दूसरी में फिर तीसरी में 13 और चौथी
में 11 आप देखेंगे जो दोहा रोल चौपाई सब
आई थी ना इसमें सिर्फ मात्राओं का ही फर्क
है और आपको यही याद रखना है
नेक्स्ट चलिए रोल तो रोल जो होता है इस
चांद में कर चरण होते हैं कर चरण ऊपर भी
थे नीचे भी अब कर चरण ए रहे हैं इसके
प्रत्येक चरण में 11 और 13 मात्राएं होती
हैं और कल मिला हो जाति है 24 तो जैसे
यहां पर इन्होंने कर चरण होंगे तो ये
रिचार्ज चरण और इसमें इन्होंने कहा है की
पहले चरण में 11 तो ये रहा पहले चरण जैसे
मैंने ऊपर आपको काउंट कराई थी मंत्र आप
यहां पे काउंट करेंगे उसके बाद यहां पे 11
होगी और इधर होगी 13 और इन दोनों को मिलकर
बन जाएंगे हमारी 24 मात्राएं और हर जगह
ऐसी हो गई यहां पे भी इस चरण में भी इस
चरण में भी और 24 24 मात्राएं हर चरण में
होगी और इसे हम कहते हैं रोल ठीक है तो यह
दोहा नहीं है दोहा अलग है दोहे में क्या
होता है पहले और तीसरी में 13 मात्राएं
दूसरा चौथ में 11 मात्राएं चलिए
किताबें होती हैं पुरानी
मात्राएं बहुत इंपॉर्टेंट है कई बार
क्वेश्चन और अदर टीचिंग एग्जाम में भी आता
है
चौपाई क्या होता है चरण में 16-16
मात्राएं होती है और अंत में दो गुरु शुभ
मैन जाते हैं
वह
चरण में देखेंगे कर चरण दे रहे चारों में
ही कितनी मात्राएं होगी 16-16 होगी और अंत
में क्या होता है शुभ गन माना जाता है
यानी पढ़ने में लाया था इसे गाना पछताना
समान सूजन इस टाइप का होता है तो ये होती
है चौपाई अब देखते हैं कविता
सॉरी
[संगीत]
कर चरणों वाले चांद होते हैं ठीक है जैसे
देख लीजिए दुरी भरे अति शोभित श्याम ज
तैसी बने सर छोटी
होते हैं तो इसमें कर चांद और ए जाएंगे
नीचे मैंने पूरा कंप्लीट नहीं किया इसको
काफी बड़ा था ये आप बस याद रखिए की किसमे
कितनी मात्राएं होती हैं और कितने वर्ण
होते हैं सोरठा क्या होता है इसमें पहले
और तीसरी चरण में 11 11 मात्राएं होती हैं
और दूसरे और चौथ चरण में 13 मात्राएं होते
हैं बिल्कुल दोहे का उल्टा दोहे में क्या
था पहले और तीसरी में 13 मंत्र थी इसमें
क्या है
नेक्स्ट धनश्री प्रत्येक चरण में 31 वर्ण
हो और 16 वर्ण वी 15 वर्णों पर यति हो अंत
में गुरु हो तो यह हो गया हमारा एग्जांपल
धन श्री राम 16 वर्ण ये रहे उसके बाद यदि
मतलब क्या है अगले लाइन पर होगी और फिर 15
वर्णों यानी पहले लाइन में 16 वर्ण दूसरी
में 15 वर्ण वर्ण मैंने बता दिया आपको
व्यंजन जो होते हमारे ये होते हैं तो इनको
जिन लेंगे
बहुत ही अच्छी चीज है ये चांद आधुनिक युग
में चांदो के नियमों से मुक्त हृदय मुक्त
उच्च वास मानते हैं बिल्कुल देखिए क्या है
ये इसका मतलब ये है आज के टाइम पर जो
हमारी कविताएं लिखी जाति है उसमें चांद
दोहा यह
लाइन में 16 मात्राएं तो वह अपनी कविता को
खुलकर लिखेगा कैसे तो यह चीज अभी
ले सकते हैं जैसे यहां पर निराला जी कविता
एग्जांपल दिया हुआ है
हमारा कैलेंडर
दरवाजे के लिए भी आया है और
पट देती बार-बार है मतलब एक तरह से गगन को
छुपाने के लिए भी आया है जैसे धक देते हैं
किसी चीज को उसके लिए भी आया है तो एक ही
शब्द हो तो श्लेष अलंकार होता है
इसमें क्या होता है की समाज ध्वनि की
आवृत्ति बार-बार होती है जैसे चारों चंद्र
की चंचल करने तो आवृत्ति बार-बार हो रही
है
उसके बाद उपमा अलंकार यहां पर मैं एक
वास्तु या प्राणी तुलना दूसरी वास्तु से
या फिर प्राणी से करते हैं जैसे नीलिमा
चंद्रमा जैसी सुंदर है नीलिमा को हमने
चंद्रमा से उपमा कर दी उसकी ठीक है अब
नेक्स्ट देखिए
अपमान का आरो ओपन होता है और अत्यंत
सामान्य के करण मतलब बहुत ही ज्यादा
सामान्य बताई जैसे मैया में मैया में
चंद्र खिलौना लियो ये नहीं का रहे हैं की
चंद्र जैसा खिलौना यह का रहे हैं की चंद्र
खिलौना नहीं हो इतनी ज्यादा समांतर कर दे
की चंद्र खिलौना ही मुझे दे दो
अतिश्ती में क्या होता है किसी वास्तु को
पदार्थ अथवा प्रथम का वर्णन लोक सीमा से
बढ़कर कर दे मतलब हद से ज्यादा जब बड़ा
चड्ढा और बात का दे तो होती है अलंकार
जैसे की बालों को खोलकर मत चला करो दिन
में रास्ता भूल जाएगा सूरज भला ऐसा होता
है
अगला अर्थ रजिस्ट्रेशन
मुहावरे और लोकोक्तियां शब्द शक्ति
उच्चारण उसके अर्थ को समझना के बीच एक और
प्रत्यक्ष भीम होती है वही होती है शब्द
शक्ति जैसे शब्द उसे सुनते ही मार्ट समझ
जैन उदाहरण के लिए सरदार पटेल महान थे तो
इसका सीधा स्पष्ट सी बातें की वो महान थे
लेकिन अगर मैं कहूं सरदार पटेल लो पुरुष
थे तो इसका मतलब यह तो लोहे के थे इसका
मतलब यह है की लोहे जैसे दृढ़ थे तो
शब्दों में शक्ति होती है जिसे हम पढ़कर
समझ जाते हैं
शब्द शक्ति के प्रकार होते हैं पहले है
अभिधा अभिधा मतलब सभी शब्दों के नाम वाची
यानी साक्षात अज मतलब जो नाम है इस से हम
पहचान ले जैसे की गे हैं तो अगर कोई गे
बोले तो हमारे मन में जाता है
कोई और शब्द बोल देते हैं जैसे की मधुर
अगर मैंने कहा मधु कहा है तो मधु गे थोड़ी
ना बन रही मतलब गे के गन हैं उसमें गे
जैसी और सीधी साधु है है ना तो ये होता है
लक्ष्मी आता है व्यंजन व्यंजन में क्या
होता है मुख्य आरती या फिर आभास से भिन्न
किसी विशेष अर्थ की प्रतिनिधि अबोध मतलब
यहां पे तो थोड़ा डिफिकल्ट वाला हिंदी ए
जाता है हमारा जैसे रहमान पानी रखिए पानी
बिन सब सुन पानी बिन मोती मानुष चुन तो
यहां पर कुछ अलग ही साथ दी जा रही होती है
हमें शब्दों के मध्य से या फिर वाक्य के
मध्य से जैसे यहां पर पानी का मुख्य अर्थ
तो जल है तो अभी अर्थ नहीं लगा सकते पानी
का अर्थ क्रांति प्रतिष्ठा आदि के रूप में
भी है की चीज चली जाए
किसी विशेष
तो लोकप्रिय घटना द्वारा मुंह से निकली
हुई बात जिसे हम कहावत भी का देते हैं तो
यह क्या होता है की इसके अंतर्गत भी ना
मुहावरे जैसे ही अर्थ अलग निकलते हैं
लेकिन
जो है बिना वाक्य प्रयोग के भी अर्थ दे
शक्ति है ठीक है उदाहरण के लिए अंधो में
आना राजा तो मूर्ख के बीच अगर साधारण
जानकारी भी है तो वो अंधो में आना राजा है
लोगों में यह बड़ी दिक्कत होती है मुहावरा
और अंतर नहीं पता होता देख लीजिए जो
मुहावरे होते हैं ना उनका अर्थ वाक्य के
साथ ही पता चलेगा लेकिन लोकृतियां जो है
ना बिना वाक्य के भी अपना अर्थ दे देंगे
जैसे अंधो में कान्हा राजा यह भी अर्थ है
कोई अंधा है कोई अंधा का देश है वहां पर
कोई कम है तो वो राजा है
तो आप वहां पर बहुत सारे मुहावरे
लोकोक्तियां देख सकते हैं
नेक्स्ट टॉपिक है भाव की दृष्टि से अभाव
दृष्टि से लेते हैं शब्दों को इसमें आएंगे
रस उसकी अवधारणा महत्व प्रकाश तो काफी
शास्त्र में साहित्य के पठान पार्थन में
जो आनंद मिले वही रस होता है यानी रस मतलब
आनंद इस रस को अनुभव किया जा सकता है भारत
मनी जो है उन्होंने कहा है की विभव अनुभव
व्यभिचार भाव संयुक्त दृश्य निष्पत्ति है
अर्थात विभाग अनुभव या बेचारी भाव के
सहयोग से ही रस इन निष्पत्ति होती है तो
अब महत्व क्या है काव्या रचना में ही
आवश्यक है
काव्या सुंदरता बढ़नी है से आनंद मिलता है
और दर्शन रूप से मुक्त हो जाते हैं
इंपॉर्टेंट है वह टोटल
संयुक्त और वियोग संयुक्त में अगर मिलन की
बात हो अभियोग में क्या होता है
वो याद रहे हैं वो है हंसना या फिर हाई
यानी कहानी भी जितने भी जो वगैरा होते हैं
जिससे बाढ़ और हमें हंसी आई तो वहां पर
कौन सा रस होगा हाथ से रस होगा फिर आता है
यानी देश प्रेम की बात की जाए आपको आगे
बढ़ाने की बात की जाए तो वीर रस की बात
होगी
किसी चीज को दया ए जाति है तो वहां पर
करूं रस होता है फिर आता है
जिसमें क्रोध
फिर आता है भयानक रस स्थाई भाव है भाई
यानी डर और किस चीज को पढ़ कर हमें डर
उत्पन्न हो हमारे मां में तो वो होता है
भयाना रस अब देखते हैं वीभत्स रस क्या
होता है स्थाई भाव होता है घृणा या जिन
किसी चीज ऐसी लाइन जिससे जिसमें पढ़ और
हमें घर आए या फिर धीन की बात की जा रही
हो मतलब कुछ गांधी सी बात की जा रही हो तो
वीभत्स रस होता है फिर आता है अद्भुत रस
जिसमें आश्चर्य हो हमें किसी चीज को शांत
रस में क्या होता है विराट और त्याग की
भावना होती है त्याग देना शांत रहना तो
प्रशांत रस और फिर आता है हमारा वात्सल्य
रस जिसका स्थाई भाव है इसने यानी माता
पिता का प्रेम अगर चला रहा हो किसी लाइन
में चाहे वो कृष्णा का यशोदा के लिए हो या
यशोदा माता का कृष्णा के लिए हो तो वहां
पर क्या होगा हमारा
कोई भी ऐसा ग्रेविटी
में अलग से वीडियो बना दूंगी उसके लिए
वीडियो तबीयत खराब होने से थोड़ा लेट हो
गई है अब मैं कोशिश करूंगी की रेगुलर
वीडियो आप तक पहुंच जाए
आज की वीडियो में हम हिंदी दक्षता का इकाई
तीन करेंगे इससे पहले हम इकाई एक और दो कर
चुके हैं तो इकाई तीन जिसका नाम है हिंदी
साहित्य का परिचय
भी जो है यहां से काफी सारे बनकर आएंगे तो
स्टार्ट करते हैं इस वीडियो को सबसे पहले
जो टॉपिक है आपके सिलेबस में वो है भाषा
और साहित्य यानी पहले लैंग्वेज को जान
लीजिए और भाषा क्योंकि हम हिंदी दक्षता
पढ़ रहे हैं तो ऑब्वियस सी बात है हिंदी
लैंग्वेज की यहां पर बात की जा रही है और
जो साहित्य है लिटरेचर है वह भी हिंदी का
ही है तो यहां पर क्या है अगर हम भाषा और
साहित्य की बात करें तो यह दोनों ही एक ही
दो पहलू होते हैं अगर भाषा नहीं होगी तो
साहित्य कैसे रचा जाएगा और यदि साहित्य है
तो फिर उसे डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेज में
भी अनुवाद किया जा सकता
है तो भाषा का विकास भी अपने आप ही होने
लगता है और यदि हमारे पास साहित्य
को सुना है सिर्फ मां लीजिए तो फिर क्या
करेंगे हम उसको
उसको और अच्छी भाषा में लिखकर भाषा में भी
उसका विकास करेंगे
और भाषा जो है वह वैज्ञानिक शब्द है या
दीवार की जाए तो क्योंकि भाषा हो रही तो
मां लीजिए साहित्य है आपने अपनी नानी दादी
से एक कुछ भी कहानी सनी तो अब आप उसको
सुनाया था तो उसमें आप भाषा में क्या
करेंगे जब आप लेंगे तो उसमें वैज्ञानिक
तरीके से भाषा का प्रयोग करेंगे ताकि
पढ़ने वाला प्रभावित होश से और साहित्यकार
भी इसे रचना का जन्म यहां से होता है
पढ़ने और लिखने और अभिव्यक्ति की क्षमता
भाषा में साहित्य द्वारा
योगदान माना जाता है तो यह संबंध हमारी
भाषा और साहित्य के अंदर अब चाहे
लिटरेचर के साथ वही रिलेशन है
अब देखिए साहित्य और समाज में संबंध अगला
टॉपिक है तो साहित्य क्या होता है हमने
ऊपर पढ़ लिया जितने भी हमारा लिटरेचर है
कहानी उपन्यास कविताएं गद्य पद्य सब कुछ
जो है हमारा साहित्य है और समाज यानी की
सोसाइटी उन दोनों अंदर जो है क्या रिलेशंस
है वह हमें बताना है
अनुभव करते हैं एक्सपीरियंस करता है इस से
भारत होता है साहित्य और इसीलिए दोनों के
अंदर होता है गहरा संबंध ठीक है समाज अंदर
रहकर हम कुछ नोटिस करते हैं एक्सपीरियंस
करते हैं उसके बाद हमारे बीच से कोई
साहित्यकार भी बन जाता है जो उन चीजों को
देता है बता देता है तो वह संबंध होता है
बिल्कुल डायरेक्ट होता है
साहित्य में व्यक्ति और समाज की
प्रवृत्तियां का समन्वय होता है ठीक है
समाज के दर्पण के रूप में साहित्य समाज
जैसे आप खड़े होते हैं और अपने आप को
देखते हैं अपनी अच्छाइयां भी बुराइयां भी
इस तरीके से साहित्य भी है जो इस समाज के
लिए आईने का कम करती है यदि हम साहित्य
पढ़ने हैं तो समाज अच्छा
जरूरी है कहां क्या सही होना चाहिए
भ्रष्टाचार को लेकर कोई कहानी पड़ी आपने
कहानी गबन आपने प्रेमचंद की पड़ी हो तो
आपको पता चलेगा करप्शन किस तरीके से कम
करता है तो साहित्य के अंदर समाज की
कुरीतियां को भी शामिल किया जाता है और
अच्छाइयों को भी
उपयुक्त समाधान और सुझाव और इतना ही नहीं
जिसे प्रॉब्लम्स दिखाई जाति है इसके
साथ-साथ साहित्य के मध्य से उसे सुझाव भी
कई बार बता दिए जाते हैं और यथार्थ की
समस्याओं को यह उजियार्थ यानी जो रियल
लाइफ में होता है प्रॉब्लम्स उनको ये नहीं
थी इमेजिनरी कुछ चल रहा है तो कल्पनाओं की
दुनिया से हटकर जो साहित्य है एक अच्छा
साहित्य है वो क्या होता है यथार्थ की
समस्याओं पर आधारित होता है
हिंदी साहित्य तो हिंदी साहित्य की बात की
जाए हिंदी क्या है हमारे देश की विस्तृत
भूभाग में फैली हुई है यदि ज्यादा देखा
जाए तो हिंदी फैली हुई है जिससे हिंदी
साहित्य भी फैला हुआ है हिंदी भाषा में
रचित विविध विधाएं टूटी हिंदी में बहुत
साड़ी विधाओं में लिखा गया है ना सिर्फ
कहानी बल्कि नाटक उपन्यास कविताएं संस्मरण
चित्र
रेखाओं में हिंदी के भाषा में लिटरेचर
लिखा गया
संस्कृत को भी माना जाता है तो संस्कृत
में भी बहुत साड़ी रचनाएं आपको देखने को
मिल जाएगी प्राचीन कल की
प्रत्यय बोली में भाषा
बोली में भी इसका महत्व है जैसे टीटीसी
क्षेत्र में कोई बोली बोली जाति है तो
वहां भी हिंदी कहानी ना कहानी रूप में
समावेश हो जाति है विश्व भर में भी
साहित्य मतलब पूरे वर्ल्डवाइड आप दे
इन्हें प्रेमचंद को पढ़ने वाले और
प्रेमचंद के दीवाने मतलब आपको मिल जाएंगे
जैसे शेक्सपियर अगर बात की जाए इंग्लिश
लिटरेचर में तो हमारे प्रेमचंद को भी आप
देखेंगे की वर्ल्ड वाइड उनको पढ़ा जाता है
और सिर्फ प्रेमचंद ही नहीं और भी बहुत
साड़ी रचनाएं हैं हमारी जो विश्व भर में
ख्याति मिली है उनको तो इसलिए हिंदी
साहित्य जो है हमारे लिए काफी फेमस है और
इंपॉर्टेंट है
अब हम पढ़ेंगे हिंदी साहित्य का कल विभाजन
जैसे इतिहास में कल विभाजन होता है इतने
से इतना टाइम इतने से इतना टाइम इस राजा
का तो इस तरीके से हमारे हिंदी साहित्यकार
भी इतिहास को कल विभाजित किया जाएगा
आदिकाल जो है हजारी प्रसाद द्विवेदी ने यह
नाम दिया था इस को और इसे वीर रहा था कल
भी कहा जाता है प्रारंभिक कल भी कहा जाता
है और भी कई सारे नाम हैं इस विशेषताएं
इंपॉर्टेंट है पेपर में ना कल विभाजन के
साथ इस विशेषता पूछेगा की किस कल की क्या
विशेषता थी तो इस वाले ट्रायल की आदि दाल
की जो विशेषता है वो ये है इसमें रासो
काव्या की परंपरा है रस से भरे हुए आपको
मिलेंगे इसके अंदर जितनी भी रचनाएं होगी
वीर और शिंदे यहां पर प्रधानता है
राष्ट्रीय भावना का भाव है क्योंकि
प्राचीन कल की बात हो रही है आदिकाल काफी
पुराना अदरक समय 1375 भी तो काफी पीछे में
राष्ट्रवाद की भावना इतनी ज्यादा लोगों
में थी नहीं तो राष्ट्रीय भावना वहां पर
नहीं दिखती जनजीवन से भी संपर्क नहीं है
मतलब लोगों का यथार्थ वहां पर आपको कब
मिलेगा थोड़ा इमेजिनरी ज्यादा मिल जाएगा
और शिल्प विधान यानी एकदम शिल्प से जीत जो
साहित्य होता है ना वह आपको इस टाइम का
पढ़ने को मिल जाएगा
और इसीलिए आचार्य रामचंद्र शुक्ला ने इसे
धर्म का रस आत्मा रूप भी बोला है इसके
विशेषताएं क्या है इसके अंदर गुरु महिमा
बहुजन हिताय लोगों के हिट के लिए और नीति
काव्या आदर्शवाद का यहां पर आपको देखने के
लिए मिलेगा
आगे चलेंगे रीतिकाल तो रीतिकाल क्या है
रितिक तत्व की प्रधानता के करण ही से
रीतिकाल कहा जाता है रीति होता है एक तरह
से आप का लीजिए लगाव जुड़ाव प्रेम का
लीजिए ठीक है तो इसके अंदर जो विशेषताएं
तो श्रृंगार दिखता है यानी आपको श्रृंगार
रस यहां पर मिलेगा जिसके अंदर संयुक्त
दोनों ही पक्ष मिल सकते हैं
अलंकार युक्त बहुत साड़ी रचनाएं हैं
अलंकार और खूब प्रयोग किया गया है जिसमें
मतलब अपनी प्रेमिका को इतना बड़ा चड्ढा के
बोल देते हैं अलंकारों का मतलब क्या होता
है सजा देना ना साहित्य को
प्रधानता मिल जाएगी नई प्रति यहां पर
दृष्टिकोण
है अगला जो कल हमारा आधुनिक कल जो 1900 से
शुरू हुआ और अभी तक आप मां सकते हैं की चल
रहा है इस अभियंत कुछ नहीं है तो यह क्या
इसमें आधुनिकता केंद्र में है मॉडर्न
आईटीआई अब ए रही है केंद्र में विशेषताएं
क्या है देश भक्ति अब 1900 से बाद इबादत
है तो ऑफ कोर्स हम समझ सकते हैं की यहां
पर देश भक्ति की भावना भी लोगों के अंदर ए
गई है नवीनता का समन्वय कुछ मॉडर्न चीज
रूढ़िवादियों को खत्म करके नई चीजों को
अपने के लिए जोर दिया गया है जनजीवन का
चित्र अब लोगों के बड़े में लिखा जा रहा
है प्रकृति चित्रण नेचर इस कल में ही
प्रेमचंद हुए हैं जिन्होंने इतने
बड़े-बड़े महाकाव्य और रचनाएं रची हैं और
खड़ी बोली का यहां पर प्रयोग किया गया है
गद्य में और ब्रिज भाषा में कविताएं लिखी
गई हैं ज्यादातर
ऐसा नहीं है
हमारे कल विभाजन अब है हमारे मुख्य
साहित्यकार जितने भी सिलेबस में
साहित्यकार है मैं आपको वहां पर वह सारे
कराऊंगी पेपर में सारे नहीं आएंगे दो
आएंगे ऑप्शन करके कर ए जाएंगे तो आपको जो
है इस हिसाब से तैयार करना है जब मैं
क्वेश्चन पेपर सॉल्व करवाऊंगी तो फिर मैं
आपको बता दूंगी की कौन सी इंपॉर्टेंट लेटर
को कभी है जिनको आप डेफिनेटली करके जैन जो
क्वेश्चन पेपर में आपको देखने को मिलेगा
ही मिलेगा तो सबसे पहले
तो रुद्रा शाह द्वारा कभी भूषण की पदवी
इनको मिली थी और शिवराज भूषण ग्रंथ की
इन्होंने रचना की थी और जो बहुत
इंपॉर्टेंट साहित्य विशेषताएं मतलब जो यह
साहित्य लिखने हैं उसमें क्या-क्या होता
है तो राष्ट्रीयता की भावना होती है
संस्कृति का प्रेम होता है धर्म प्रेम
होता है सामाजिकता होता है और प्रकृति
चित्रण होता है तो यह चीज इनके साहित्य
में होती है आप इनको एक्सप्लेन करके
एग्जाम में लिखेंगे फिर आते हैं सूरदास
1478 ई में इनका जन्म हुआ था और यह आपने
सुना होगा सूरदास के पद तो पड़ा के लिए
विख्यात है ये और भी इनकी जो रचनाएं हैं
वो है
सुरसरावली साहित्य लहरी प्रतिदिन के
काव्या हैं
साहित्य विशेषताएं क्या है भक्ति
काव्या जी गया जा सके और ब्रिज भाषा का
प्रयोग ही अपनी रचनाओं में करते हैं
तो 1535 ई में राजापुर में इनका जन्म हुआ
था यह भक्ति कल के कवि हैं इन्होंने
दोहावली कवितावली गीतावली रामचरितमाना
जैसे मुख्य रचनाएं रची हैं इनकी साहित्य
विशेषताएं रामगढ़ स्वरूप जो है क्योंकि
रामचरितमानस्ली है तो आप समझ ही शक्ति है
राम के स्वरूप के ऊपर अपने रचनाएं लिखने
थे
आपको भक्ति का स्वरूप मिल जाएगा रस
मिलेंगे
है अगले जो साहित्यकार है हमारी वह है
मेरा इनका नाम तो आपने जरूर सुना होगा
1555 संवत में राजस्थान के पास इनका जन्म
हुआ था बचपन से ही कृष्णा की आराधिका थी
और साहित्य विशेषताएं क्या भक्ति भावना
टूटी भगवान की भक्ति भावनाओं वाला साहित्य
ही रखेंगे भाव बहुत ही इमोशंस भरे हुए
इनके साहित्य की जितनी भी रचनाएं हैं वो
हैं सामाजिकता है उसमें वियोग वर्णन यानी
दूर होना क्योंकि ये कृष्णा से पुरी
जिंदगी मतलब प्रेम करती रही भक्ति वाला
लेकिन मिल नहीं पी तो वियोग का काफी लिखा
है इन्होंने और सरस मधुर भाषा का प्रयोग
इन्होंने अपनी रचनाओं में किया है
वह है कबीर तो कबीर आजम हुआ 1398 ई में
इनका जन्म हुआ था यह काफी उदार थे
सत्यवादी थी निर्भीक और आडंबर के विरोधी
यह जो प्रारंभ कांड
गुरु की महत्व यानी टीचर जो होता है जीवन
में उनके ऊपर इन्होंने काफी लिखा है आपने
ट्रावेरिया दोहे सुन होंगे जिसमें से दोहा
टीचर के गुरु के ऊपर भी है आपने जरूर सुना
होगा तो आप एग्जांपल भी यहां पर दाल सकते
हैं प्रेम की महत्व पर लिखा है माया के
प्रति सावधान और आडंबर का विरोध तो
इन्होंने किया है आप बंदर ने
आप इसको डर कर लीजिएगा नेक्स्ट चलिए रहीम
तो यह बहुमुखी व्यक्तित्व थे और रहीम
सत्संग
इनकी प्रमुख रचनाएं हैं साहित्य विशेषताओं
में नीति की प्रधानता मिलेगी आपको दैनिक
जीवन की अनुभूतियां पर आधारित चीज यह
लिखने थे भक्ति और श्रृंगार और भाषा जो है
वो कई भाषण में इन्होंने लिखा है और चांदो
का खूब प्रयोग किया
साहित्य विशेषताएं हैं उनकी श्रृंगार
वर्णन
चित्रण जैसे जैसे
प्रयोग किया है
फिर आते हैं जयशंकर प्रसाद और इन्होंने
क्या किया झरना लिखा अपनी रचना और फिर
वहीं से शुरू हुआ छायावादी काव्या इनका
छायावादी कवि ने इन्होंने झरना के भाषण
दिया और इसके अलावा जो इनकी रचनाएं हैं वो
है लहर आंसू कामिनी चंद्रगुप्त स्कंदगुप्त
तो यह सारे इनकी प्रमुख रचनाएं हैं
साहित्य विशेषताओं की बात की जाए तो
सौंदर्य प्रति इनका आकर्षण था तो उसके
बड़े में इन्होंने काफी लिखा है
व्यक्तिवाद है यानी
मेनिजाम को ये मानते हैं इंसान के बड़े
में लिखने ही यथार्थ के बड़े में लिखने
हैं
अतीत राज लिखने हैं संस्कृति दृष्टिकोण पर
भी ये अपनी रचनाएं जो है इन्होंने की है
उसके बाद आते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी
निराला जी यह भी बहू ही साहित्यकार है कई
विषयों पर इन्होंने लिखा है इनके जो फेमस
रचनाएं हैं उनमें से कुकुरमुत्ता अप्सरा
अनामिका बेल इन थी प्रमुख जो है वह रचनाएं
हैं आप उसे अप्सरा कर लीजिएगा अपराधती से
साहित्य विशेषताएं क्या होगी रहस्यवाद पर
लेते हैं मतलब इतनी गंभीर और मतलब काफी
गंभीरता पूर्व ही लिखने हैं राष्ट्रीयता
की भावना होती है इनकी रचनाओं में आत्म
विव्यक्ति यानी मां के अंदर जो इमोशंस आते
हैं उसको ही लिख देते हैं नई सौंदर्य का
भी इन्होंने वर्णन किया है फिर आते हैं
सुमित्रानंदन पेंट प्रकृति प्रेमी रही
संवेदनशील कवि हैं और इन्होंने जो लिखा है
प्रमुख रचनाएं वो है ग्रंथि जोशना शिल्पी
वीणा इत्यादि इनकी प्रमुख रचनाएं हैं
साहित्य विशेषताओं की बात करें तो प्रकृति
अच्छी तरह किया है कल्पना आधारित चीज लिखी
हैं लो मंडल की भावना के हिसाब से लिखा है
रहस्यवाद पर संस्कृत निशीथ खड़ी बोली में
इन्होंने अपने रचनाओं को लिखा है यह जो
मैं साहित्य विशेषताएं बता रही हूं ना यह
बहुत जरूरी है आपके सिलेबस में दिया गया
है की इन कवियों के बड़े में जब आप
क्वेश्चन अटेंड करेंगे ना मैं तब भी बता
दूंगी आपको और अभी भी बता देती हूं की जब
भी ऐसे जैसे लेखक के ऊपर आएगा तो आप पहले
उनका जीवन परिचय इन्हें उसके बाद उनके कुछ
प्रमुख रचनाएं लिखी हुई उसके बाद साहित्य
विशेषताएं लेकिन जो इस क्वेश्चन का क्या
है दिल है हट है तो आप इसको जरूर लिखेंगे
अब देखिए अगले जो हमारे महादेवा वर्मा
यदुनी मीरा भी इनको कहा जाता है इन्होंने
रश्मि नीरज निहार दीप शिखा प्रमुख रचनाएं
हैं इनकी साहित्य विशेषताएं क्या है पीड़ा
और वेदना पर लिखा है इन्होंने आत्मनूहूति
रहस्यवाद प्रकृति
तो यह साड़ी चीज महादेवा के महादेवा वर्मा
जी के साहित्य में आपको देखने को मिलेगी
बात करेंगे हम तो प्रमुख लेखक की अगर बात
करें तो पहले आते हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र
जो 1850 से 85 रहे इनका जन्मकशी में हुआ
था और आधुनिक हिंदी साहित्य में बहुत ही
महत्वपूर्ण मैन जाते हैं अगर हम इनकी
प्रमुख नैटको की बात करें तो इन्होंने कुछ
नाटक लिखे हैं और जैसे की सत्य हरिश्चंद्र
श्री चंद्रावली भारत दुर्दशा जैसे नाटक
काफी फेमस है इनके साहित्य विशेषताएं फिर
से देख लीजिए अब भारतीय
चेतन होती है इनकी जो भी साहित्य लिखने
हैं उसमें भारतीय संस्कृति की झलक मिलती
है समाज सुधार का वहां पर
देखने को मिलता है
तो मुझे प्रेमचंद के बड़े में जितना ही
रहे उतना ही कम है
1880 से 1936 के बीच ही रहे और वाराणसी
में इनका लमही नाम के गांव में जन्म हुआ
था इनका मूल नाम जो था वह धनपत राय था और
इन्होंने जितनी भी कहानी लिखी हैं उन्हें
मानसरोवर में पिरोए गया है जो की आठ भागन
में विभाजित है इसके अलावा कुछ उपन्यासों
की बात करें तो प्रेमाश्रम गबन गोदान जैसी
रचनाएं इनकी मतलब वर्ल्ड फेमस रचनाएं हैं
गोदान को तो महाकाव्य का आप देखिए दर्ज
दिया जाता है साहित्य विशेषताएं चित्रण
करते हैं मतलब मर्म अगर आप प्रेमचंद की
रचनाओं को पढ़ेंगे तो ऐसा लगेगा की आप जी
रहे हैं उसको कृषक दूरदर्शन
से उनके साथ जो भी बड़ा होता रहा था उन
सबके बड़े में दलित की समस्या
एकदम सरल होती है आसानी से समझ ए जाति है
चलिए नेक्स्ट हजारी प्रसाद द्विवेदी तो
1960 से 1979 ई तक रहे हैं अशोक के फूल
कल्पित
टूटल पाव साहित्य सहचार्य इनकी प्रमुख
रचनाएं हैं साहित्य विशेषता क्या खड़ी
बोली प्रयोग करते हैं आलोचनात्मक वर्णन
शैली का प्रयोग करते हैं आज आलोचना
अगर कोई चीज गलत है तो गलत कहना वर्णन
करना अच्छे से वर्णन करते हैं व्यंजन करना
और व्यास शैली में ये
अपनी रचनाएं लिखने हैं फिर आते हैं
धर्मवीर भारती 1926 में राजन में इलाहाबाद
में हुआ था और इनको चिंतामणि घोष पुरस्कार
से सम्मानित भी किया गया है
फेमस उपन्यास है
और यह इनकी प्रमुख रचनाएं भी हैं साहित्य
विशेषताएं क्या यह सामाजिक समस्या के ऊपर
लिखने हैं
इनकी नई सौंदर्य का चित्रण
फिर हमारे भगवती चरण वर्मा 1903 से 81 तक
पद्मभूषण का समाज भी इनको मिल चुका है
इनकी जो रचनाएं हैं चित्रलेखा रेखा टेढ़ा
मधे रास्ते दीवानों की हंसी तो यह इनकी
प्रमुख रचनाएं हैं साहित्य विशेषताओं की
बात की जाए तो राष्ट्रीयता की भावना सरल
भाषा संवाद शैली साहित्यलोचना
को आपको मिल जाएंगे
विशेषताएं और कुछ रचनाएं याद करने पढ़ेंगे
आपको थोड़ा सा जीवन परिचय ताकि आप इंट्रो
दे सकें तो ज्यादा टेंशन लेने की जरूर
नहीं है अगर आपको ज्यादा याद नहीं रहती तो
जो भी मन में अभी मैंने आपको पटाया तो दो
कर तो आई गई होगी की सरल भाषा होती है और
प्रकृति चित्रण होता है यह सब तो आप किसी
भी लेखक के अंदर ले सकते हैं
आसपास की चीज नेचर
भी उन्हें चीजों पर लिखने हैं
वह है बाल साहित्य बहुत इंपॉर्टेंट
क्वेश्चन 100% आएगा
इस प्रकार की पुस्तक जिन्हें रचनाकार
बालको के मानसिक स्टार की अनुरूप तथा उनकी
रुचियां और अभिरुचियों को ध्यान में रखना
है यह बाल कोठी आवश्यकताओं की पूर्ति करने
वाला होता है बच्चों को पढ़कर उनको शिक्षा
देना उनको उसे लाइफ अपनी लाइफ में कुछ
उतारना तो यह होता है बाल साहित्य जो
बालों के अनुसार उसकी भाषा ऐसे नहीं हनी
चाहिए की संस्कृत में बच्चे को समझ ही
नहीं ए रहा या फिर वो इतना बड़ा इतनी बड़ी
कहानी है की बच्चा बर हो रहा है सुन ही
नहीं रहा है तो बच्चे के अनुसार और फिर
उसके लिए जरूरी हो और उससे उससे कुछ फायदा
मिले तो ऐसा साहित्य जो होता है वो बाल
साहित्य उदाहरण के लिए आप देखेंगे आपने भी
अपने बचपन में पंचतंत्र की किताबें पड़ी
होगी जिसमें जंगलों की इतनी बढ़िया और
मजेदार कहानी होती थी जिसके विष्णु शर्मा
और आपने अगर पढ़ाओ
बहुत ही बढ़िया कहानी है मैंने तो पड़ी थी
दोनों
वो नारायण पंडित जी हैं तो यह आप उदाहरण
जरूर लिखे
आगे देखिए आवश्यकता वी महत्व
की आवश्यकता क्यों है महत्व क्या है पढ़
लीजिए बालको की व्यक्तित्व अपूर्ण विकास
करने के लिए नैतिक विकास में सहायक
क्योंकि कई बार कहानी पढ़े हुए बच्चे
झूठ नहीं बोलना सच बोलना है कहानी में जो
नायर करता है ना फिर वो बच्चा भी करना
चाहता है दूसरों की मदद करना है है ना
बड़ों का सम्मान करना है पढ़ाई करनी है यह
साड़ी चीज वो सीखने हैं अच्छी आदत तो ए
निर्माण होता है की कहानी में जो अच्छा
लड़का था वह ऐसे से डरता था तो मैं भी
करूंगा तो इस तरीके से बच्चे सीखने हैं
जीवन मूल्य अभी आप होता है भाषा में भी
सहायक होता है भाषा में मनोरंजन यानी उनके
एंटरटेनमेंट के लिए अच्छा हो जाता है
कहानी पढ़ना पंचतंत्र और हितोपदेश बच्चों
को जरूर देनी चाहिए बचपन में पढ़ने के लिए
भावात्मक विकास होता है उनका सामाजिक
विकास
हो जाता है
फिर आता है बाल साहित्य के प्रकार जो इन
दो भागन में विभाजित दृष्टि से और विद्या
इस दृष्टि से सबसे पहले हम तथ्य की दृष्टि
से लेते हैं की बाल साहित्य कितने प्रकार
होता है तो कई प्रकार
जो विषय है वो जैसे की भजन संबंधित तथ्य
हो सकता है खाने से रिलेटेड कोई कहानी है
वस्त्र संबंधी परिवार और मित्रों से
रिलेटेड तथ्यों सकते हैं पशु पक्षियों
वाली कहानी हो शक्ति है जल जीवन जैसे मछली
हो रही उनके बड़े में हो शक्ति है खेल
संबंधी तथ्य त्योहार से संबंधित तथ्य हो
सकता है जीवन मूल्य से संबंधित और अच्छी
आदतों से संबंधित भी तथ्य हो सकते हैं
ना कहानी में बाल साहित्य में वह यहां पर
आप लोरी भी का सकते हैं कविताएं कहानी
निबंध एकांकी जो आपने भी एनसीईआरटी में
पढ़ा होगा एकांकी जो पापा को गए पढ़ा था
आपने
तो वह ए सकता है
अगला टॉपिक है पाठ्य पुस्तकों में डिफरेंस
तो आपको पहले भी पता होगा पाठ्य पुस्तक
मिल जाता है वो होती है पट्टी पुस्तक
की किताब पढ़ लो इस लेटर की किताब पढ़ लो
वो होते हैं पूरा किताबें तो दे लीजिए
डिफरेंस क्या होता है पाठ्य पुस्तक जो
होता है विषय का पूर्ण ज्ञान देने के लिए
गहन अध्ययन करने के लिए होते हैं जबकि
पाठ्यपुस्तकों को पूर्ति करने के लिए पूरा
पुस्तक होती हैं मतलब जो आपका पाठ्यपुस्तक
है एक तो वो सिलेबस अकॉर्डिंग होगा लेकिन
अगर कोई कमी र गई है तो वो पूरा कौन करेगा
ज्ञान अर्जन में सहायक ज्ञान को अर्जित
करने में आपके लिए पाठ्य पुस्तक जरूरी है
और यह ज्ञान की स्थाई और व्यवहारी बनाना
अगर आप पूरा पुस्तकें पढ़े तो ध्यान तो
होगा लेकिन वो स्थाई हो जाएगी क्योंकि आप
एक्स्ट्रा मेहनत ये पढ़ेंगे ना कोई चीज
रिसर्च करके पढ़ेंगे सर्च करके पढ़ेंगे
यदि इसे पूछ इस समझेंगे तो वो ज्यादा
स्थाई हो जाएगा इससे क्या होता है भाषिक
तत्वों पर अधिक बाल होता है पाठ्य पुस्तक
में सेट पूरा तैयार किया जाता है पुरी
कमेटी के द्वारा और पुस्तक वचन पर आधारित
होती हैं फिर इसमें गहन अध्ययन की पुस्तक
होती हैं इसमें जरूर पाटन की पढ़ लीजिए
यहां पर तीव्रता से भी आप अध्ययन कर सकते
हैं
और पूरा पुस्तक के स्वाध्याय की आदत डालते
हैं
आगे देखिए बाल साहित्य की रचना के
सिद्धांत की बाल साहित्य को रचते समय जब
आप बाल साहित्य रैक रहे हैं कोई कहानी लिख
रहे हैं किसी बच्चे के लिए तो किन-किन बटन
का ध्यान रखेंगे किस बेसिस पर वो लिखा
जाएगा तो पहले
सिद्धांत की वो जो आप कहानी ले रहे हैं जो
भी लिटरेचर है बाल साहित्य है उसमें जो
केंद्र में होगा वो बालक होना चाहिए बच्चा
होना चाहिए क्रिया केंद्रीय यात्रा का
सिद्धांत उसमें क्रियाएं हनी चाहिए सा
संबंधता का सिद्धांत
होना चाहिए हर चीज दूसरी चीज से इंटरनेट
हनी चाहिए
साड़ी चीज आकर्षक होना चाहिए भाषा तत्व
निर्माण सिद्धांत होना चाहिए
है और कौन-कौन से प्रकाशित प्रकाशन
प्रकाशक हैं जो पब्लिश करते हैं उनकेटाबों
को तो पहले सबसे पहले जो साहित्यकार मन
मुंशी प्रेमचंद हुई मां लीजिए उन्होंने
बाल साहित्य काफी लिखा है आपने खुद भी
उनकी कहानी पड़ी होगी जिसमें से एक है
बुद्धि कटी पांच परमेश्वर ईद रहा तो जरूर
पड़ी होगी दो वेलोसिटी तथा भी आपने जरूर
पड़ी होगी तो ये बाल साहित्य क्योंकि
इसमें बच्चों के मनोविज्ञान के ऊपर लिखा
गया है और बच्चे इन्हें कुछ ना कुछ सीखने
हैं इसके अलावा रवींद्रनाथ टैगोर ने भोला
राजा तोता की कहानी ये साड़ी चीज लिखी हैं
विष्णु शर्मा का पंचतंत्र यहां भी ए सकता
है नारायण पंडित अभी तो प्रदेश भी यहां आप
दाल सकते हैं तो ये थे प्रमुख साहित्यकार
अब हम देखते हैं प्रमुख प्रकाशक यानी जो
पब्लिश करते हैं उनको तो एक ही चिल्ड्रन
ट्रस्ट स्थापना हुई थी 1957 में किसने की
थी केशव शंकर पीला ही नहीं और यह जो
प्रकाशक रही खुद भी कुछ बाल साहित्य लिखना
है या प्रकाशित करता है जिम से है जहाज
अनोखे रिश्ते महान व्यक्तित्व
ट्रस्ट है एनबीटी और 1957 में ही हिस्ट्री
की स्थापना हुई थी इस कार्य क्या है
प्रकाशन करना
पब्लिश करना
बाल साहित्य बढ़ावा देना विश्व पुस्तक
मेला का आयोजन नई दिल्ली में
आप ध्यान रखेंगे
फिर ए रहा है साहित्य पुरस्कार यानी
लिटरेचर से रिलेटेड जो इंडिया में
पुरस्कार दिए जाते हैं वह तो साहित्य
क्षेत्र में जो पुरस्कार प्रधान किया जाते
हैं वह होते हैं साहित्य पुरस्कार उदाहरण
के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार ज्ञान पीठ
पुरस्कार हिंदी अकादमी पुरस्कार आपने सुन
होंगे इसके बाद है राष्ट्र कवि थे अवधारणा
यानी राष्ट्र कवि कौन होता है
तो जिन कवियों ने राष्ट्रभावना से ओटीपी
रचनाएं थी जिन भी कवियों ने देश के लिए
राष्ट्र के लिए रचनाएं रची वो होते हैं
हमारे राष्ट्र कवि तो राष्ट्र कवि की
पहचान क्या है मतलब राष्ट्र कवि कौन होगा
परपरी उसको संबंध और ज्ञान होगा की इतिहास
में क्या चीज
अपने देश को अच्छे से समझ पाएगा और उसके
लिए लिख पाएगा कविताएं घटनाओं का परिणाम
की जितनी भी घटनाएं हुई उसका रिजल्ट क्या
निकाला तो उसे बेस पर भी वह अपनी कविताएं
रचित करेगा अपने देशवासियों ए भीतर निहित
महत्व का ज्ञान उसको अपने देश से जुड़ा
होगा अपने देश के लोगों के बड़े में वह
जानता होगा तभी वह देश के लिए कविताएं लिख
पाएगा और लोग उसे खुद से कनेक्ट कर पाएंगे
अतीत को देखते हुए भविष्य साकेत कर का रहा
हो की जो अतीत में कुछ गलत किया और परिणाम
गलत हुआ तो वह दोबारा रिपीट ना हो देश इस
संस्कृतियों को समेत क्योंकि देश हमारा
देश अगर बात करें तो बहुत ही विविधताओं
वाला है तो पूरे देश को समेटना एक कविता
के अंदर बहुत ही बड़ी बात हो जाति है तो
जो ऐसा कर पता है वो कहलाता है राष्ट्र
कवि तो सबके बस की बात तो है नहीं वो भी
बन जाए
अब कुछ इंपॉर्टेंट कवियों के यहां पर किया
गया है जिसमें से एक है माखनलाल चतुर्वेदी
1888 ई में जन्म हुआ था 1968 में का
देहांत हुआ था जन्मे इनका मध्य प्रदेश में
हुआ था बाबा नमक गांव में इन्होंने
कौन-कौन सी भाषा में अध्ययन किया है
अंग्रेजी संस्कृत गुजराती मराठी बांग्ला
इत्यादि भाषण में इन्होंने अध्ययन किया है
सामान्य परिवार में जीवन यापन हुआ था इनका
और जो में चीज है की पुरस्कृत कृतियां
मतलब कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं इन्हें
और किन किन चीजों
विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें डिलीट की
उपाधि दी गई सबसे पहले तो उसके बाद भारत
सरकार द्वारा पदम भूषण दिया गया
उन्होंने लिखा उसे पर उनको साहित्य अकादमी
पुरस्कार मिला और हम किरीतीनी पर इन्हें
देव पुरस्कार मिला
अगले हमारे मैथिली शरण गुप्त इनका 3 अगस्त
186 में उत्तर प्रदेश
ध्यान देते थे इसलिए पढ़ाई में एकदम
नॉर्मल स्टूडेंट से
और इन्होंने क्या क्या इन्होंने जो लिखा
है उसमें क्या होता था पवित्रता नैतिक और
मानवीय संबंधों की रक्षा इनके प्रमुख गन
थे और यह साहित्य में उनके देखने को मिलता
है
की राज्यसभा का सदस्य इनको मनोनीत किया
गया था दादा नाम से इनको पुकार जाता था और
साहित्य के उपाधि मिली थी और सम्मान में
मैथिली शरण गुप्त अभिनंदन ग्रंथ जो है वह
लाया गया
और राष्ट्रकवि पदवी इनको महात्मा गांधी
द्वारा दिया गया और इस इनका जन्म जो हुआ
था ना तीन अगस्त को तो इस अगर इस तीन
अगस्त ओम राष्ट्र कवि दिवस के रूप में भी
मानते हैं तो इतने महान थे हमारे ये कवि
आदला जो हमारा है रामधारी रामधारी सिंह
दिनकर 1908 में इनका जन्म हुआ था और 74
में देहांत हो गया बेगूसराय जिला बिहार
में इंदिरा जान हुआ था इन्हें आधुनिक युग
के श्रेष्ठ वीर रस कहते हैं संस्कृत भाषा
में इन्होंने गहन अध्ययन किया है यह
सलाहकार अध्यापक और पति के रूप में भी
कार्य कर चुके हैं इसके अलावा इन्होंने जो
पुरस्कार वगैरा मिले हैं वो दे लीजिए
क्योंकि क्वेश्चन आएगा और यह पुरस्कार का
भी पूछेगा तो पदम विभूषण मिला है इन्हें
और संस्कृति के कर अध्याय जॉइंट रचना है
उसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार
मिला कुरुक्षेत्र जो इन्होंने लिखी किताब
उसमें जो है पुस्तकों में शामिल किया गया
है
है तो यह भी अपने आप में बहुत बड़ी बात हो
जाति है अगला टॉपिक है साहित्य अकादमी
पुरस्कार की जो लिटरेचर लिटरेचर से
रिलेटेड जो पुरस्कार है वह इंडिया में
कौन-कौन से हैं और उसके अंदर क्या-क्या
होता है तो स्वतंत्रता प्रताप से पहले से
ही पर्याप्त प्रयास किया जा रहा था की
साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसा कोई मंच हो
जो लेखन को और साहित्यकारों को इनाम दे या
फिर उनको बढ़ावा दे जैसे अवार्ड वगैरा
होते हैं तो क्या हुआ सबसे पहले 1952 में
अक्षर राष्ट्र अकादमी बनाई गई
लेकिन फॉर्मूली रूप से औपचारिक रूप से यह
जो साहित्य साहित्य अकादमी
1954 में हुई थी यह प्रतिवर्ष प्रत्यय
भाषा में यानी हर साल हर भाषा में
प्रकाशित जो सबसे सर्वोत्कृष्ट होती है
सर्वोच्च सबसे अच्छी होती है साहित्य कृति
होती है उसे पुरस्कार मिलता है यह वाला
साहित्य क्षेत्र में बड़ा ही महत्वपूर्ण
योगदान है इसका पहले बार यह पुरस्कार 1955
में जब दिया गया था तो इसकी जो राशि थी वह
5000 रुपए थे ठीक है
50000 तक 2013
बिना पर दिया गया
देखिए गद्य काव्या नाटक बाल साहित्य
सम्मान हास्य व्यंग आदि किसी भी क्षेत्र
में निम्न जो है पुरस्कार प्रधान किया जा
सकते हैं जैसे की आप ए होता है हिंदी
अकादमी शलाका मतलब हिंदी अकादमी के अंदर
ही डिफरेंट चीजों के लिए डिफरेंट डिफरेंट
आपको मिल जाएगा तो हिंदी एक आदमी शीला
समान में आपको ₹50000 राशि मिलती है हिंदी
अकादमी विशिष्ट योगदान सम्मान 50000 हिंदी
अकादमी काव्या सम्मान अगर आपने कोई कविता
ऐसी दी है तो फिर 50000 और फिर वृद्धि
विद्या सम्मान में भी प्रसाद 50000 और यदि
आपने हिंदी अकादमी बाल साहित्य सम्मान
आपको मिल जाए अपने ऐसी कोई बाल साहित्य
लिख दिया है जो बहुत ही ज्यादा मतलब दम ही
एक क्रांति लाडी है तो फिर वहां पर आपको
लाख रुपए तक का इनाम जो है दिया जाता है
2009 और 10 में यह सम्मान जिनको मिले हैं
उनके नाम मैंने यहां पर लिखे हैं कुछ तो
मैंने उदाहरण ये उदाहरण है चिल्ली में तो
हिंदी अकादमी विशिष्ट योगदान सम्मान मिला
था प्रोफेसर मुजीब रिजवी को और हिंदी
अकादमी काव्या सम्मान मिला था डॉक्टर
कन्हैया लाल नंदन को तो यह हमारा हिंदी
अकादमी पुरस्कार अब आता है ज्ञानपीठ
पुरस्कार या आपने जरूर सुना होगा ज्ञानपीठ
पुरस्कार यह क्या होता है की भारतीय
साहित्य सर्वोच्च पुरस्कार है ये इसलिए
नाम सुना होगा आपने यह क्या है की संविधान
में जो हमारी 22 भाषण को मान्यता दी गई है
या लिखे गए हैं यदि उन 22 भाषण में से
किसी भी भाषा के क्षेत्र में आपने अपनी
रचना की है जो अत्यंत ही प्रभावशाली है तो
आपको यह पुरस्कार मिल सकता है इसमें क्या
होती है
प्रशांत पत्र मिलता है
पहले जो ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में
मलयालम के लेखक हमारे सेंटर कुरुख उनको
दिया गया
और इस ज्ञानपीठ पुरस्कार को बनाने के लिए
इस मंच को मनाने मतलब बनाने के लिए कई
गोष्ठियों टेढ़ी मीटिंग की गई इतिहास में
बड़े-बड़े विद्वानों ने बहुत विचार किया
और उसके बाद ये जो ज्ञानपीठ पुरस्कार है
और फिर ये अपने स्वरूप में आया तो ये थे
हमारे प्रमुख हिंदी लिटरेचर के पुरस्कार
जो की मैंने सारे यहां पर कर दिए हैं तो
ये यहां पर यूनिट थ्री आपकी हिंदी की खत्म
हो जाएगी और इसके बाद में यूनिट फोर और
फाइव जल्दी ही कर दूंगी इस वीडियो में हम
हिंदी दक्षता का इकाई कर करेंगे जिसका नाम
है चिंतन कौशल तो यह बिल्कुल ही नया है
टॉपिक आपके लिए चिंतन कौशल इसको आप
इंग्लिश में
का सकते हैं कोई नई चीज नहीं है
आप बहुत अच्छे से जानते हैं चिंतन का मतलब
क्या होता है सोचना या विचार करना तो
बच्चों को जो क्लास में हम पढ़ते हैं उनके
अंदर भी डेवलप हो
की वह थिंकिंग कर शक्ति
तो देखिए इसको शुरू करेंगे सबसे पहले हम
महत्व और प्रकार की बात करेंगे उससे पहले
हम थोड़ा सा देखेंगे की चिंतन कौशल का
मतलब क्या है चिंतन का मतलब क्या है तो
चिंतन जो है वो मानव की स्वाभाविक भीम है
कोई भी इंसान हो वो कुछ ना कुछ तो सोचता
ही है चिंतन तो करता ही है तो ये बहुत ही
नेचुरल सी चीज है इंसानों के लिए और
समस्या के निवारण हेतु मां लीजिए कोई
प्रॉब्लम हुई लाइफ में तो उसका सॉल्यूशन
उने के लिए सोचते हैं समझते हैं इमेजिनेशन
करते हैं और विचार करते हैं तो यह सब भी
क्या है थिंकिंग है किसी भी कार्य से
पूर्व मतलब कोई भी कम आप करने जा रहे हैं
उससे पहले आप परिणाम के बड़े में सोच लेते
हैं की अगर मैं ये करूंगा तो फिर क्या
होगा तो यह भी क्या है
आप चिंतन ही कर रहे हैं और भीम के पूर्व
अनुभव पर विचार की पहले अगर किसी ने ऐसा
किया था तो क्या रिजल्ट निकाला था तो मैं
कैसे करूं की उसमें बेहतर हो तो यह साड़ी
चीज सोचना किसी भी कम को करने से पहले
चिंतन द्वारा अधिक कार्य अच्छा होता है
बिल्कुल अगर आप किसी कम को करने से पहले
थोड़ा सोचते हैं उसके बड़े में उसके लिए
एक्सपीरियंस देखते हैं तो फिर वो कम आपका
बेहतर तरीके से होता है
एक उच्च ज्ञान आत्मा भीम होती है जो यह
चिंतन है इसके अंदर कल्पना स्मृति अनुमान
मानसिक क्रियाएं शामिल की जाति हैं तो यह
है आपका थिंकिंग स्किल अब बात करेंगे इसके
महत्व की
क्यों जरूरी है यह क्या महत्व है
की समस्या के समाधान के तत्परता में सहायक
कोई भी प्रॉब्लम हो उसे समाधान में चिंतन
कौशल आपका कम आएगा फिर स्वयं प्रस्तुति
में सहायक खुद अप प्रेजेंट करने के लिए भी
चिंतन बहुत जरूरी है
सृजनात्मक वृद्धि होती है जब आप चीजों को
नए तरीके से सोचते हैं बनाते हैं या विचार
करते हैं अपने मन में और फिर प्रेजेंट
करते हैं तो इससे क्या होती है
अगर आप चीजों को सोचते हैं विचार करते हैं
तो
समस्या के कर्म की पहचान कर सकेंगे योजना
यानी की अगर आप प्लानिंग करना चाहते तो
उसके लिए भी आपके लिए चिंतन कम आएगा
आत्मविश्वास में वृद्धि होगी समीक्षा और
आलोचना करने में भी आपको सहायता मिलेगी तो
यह आपके महत्व हो गया बात करेंगे प्रकार
की थी ये जो चिंतन है चिंतन कौशल है यह
कितने प्रकार का होता है पहले जो प्रकार
है वो है तारक चिंतन टार्टड का मतलब होता
है की तर्कों के आधार पर बात करना लॉजिक
बात करना तो टर्न के साथ एक सही निष्कर्ष
पर पहुंचाना ये नहीं कुछ का दिया और हमने
मां लिया अपना दिमाग लगाया ही नहीं थी ऐसा
क्यों तो तारक विटारा के विचार ना और फिर
सही निष्कर्ष पर पहुंचाना चिंतन द्वारा
समस्या का समाधान खोजना छिपे हुए अर्थ पर
विचार करना
वैज्ञानिक सिद्ध वैज्ञानिक चिंतन होता है
जैसे विज्ञान में किसी भी चीज को लॉजिकली
प्रूफ किया जाता है इस तरीके से तारक
चिंतन में भी आपको ये चीज इंक्लूड करते
हैं
और विद्यार्थियों के लिए आप क्या कर सकते
हैं की तारक विदाउट प्रतियोगिताएं करवा
सकते हैं जिसमें कर टन कैसे जैसे प्रश्नों
को शामिल किया जा सकता है अगला जो आपका है
समस्यात्मक चिंतन समस्या चिंतन में क्या
होता है की समस्या समाधान हेतु चिंतन किया
जाता है बच्चों को कोई समस्या दे दी जाति
है और फिर उसका समाधान करने के लिए बच्चे
चिंतन करते हैं या विचार करते हैं इसमें
पूर्व अनुभव से मदद ले जा शक्ति हैं नई
पाठ्य वास्तु में समस्या का समाधान जैसे
कोई नई चीज मिली नहीं पिता मिली तो उसमें
जो प्रॉब्लम्स है उसको सॉल्व करना विभिन्न
सकता है
विपरीत परिस्थितियों में भी सहज बना राहत
है की प्रॉब्लम्स आई है तो कोई बात नहीं
हम चिंतन करेंगे सोचेंगे विचारेंगे
और कोई हाल निकाल लेंगे
समस्या रोग या दोष का पता लगाना ठीक जो
प्रॉब्लम है उसका पता लगाना निदान
हो रही है वह क्यों हो रही है उसका रीजन
जानना हो फिर उसको ठीक करना निदान करना
समस्या वी उसके कर्म का चिंतन किया जाता
है यहां पर जैसे की भाषा सीखने में कठिनाई
हो रही है किसी छात्र को तो फिर वहां पर
हम निदानात्मक चिंतन करेंगे
सही उपचार देंगे जैसे अभ्यास करवाना लेखन
वचन इत्यादि कार्य
समझना विभिन्न कहानियां और कविताओं द्वारा
अभ्यास करवा सकते हैं बच्चों को विचारों
भावों और तथ्यों की तुलना करवा सकते हैं
और गंभीरता पूर्व चिंतन यहां पर शामिल
किया जाता है
अगला प्रकार है सृजनात्मक चिंतन तो
सृजनात्मक चिंतन का मतलब होता है नई चीजों
रचनाओं और विचारों को उत्पन्न करना सृजन
करना है मतलब नई चीज लानी है तो नई चीज
ऐसे तो नहीं ए जाएगी पहले मन में सोचेंगे
ना कुछ ना कुछ तो कल्पना प्रदत मतलब पहले
इमेजिनेशन करता है बच्चा सोचता है उसके
बाद कोई नई रचना वो करता है अनुभवों से
उत्पन्न सूचनाओं का भी महत्व होता है
इसमें पुरानी अनुभव भी कम आएंगे उसे थे यह
व्यक्ति पर यानी सब्जेक्टिव होता है हर
बच्चे का अलग और इसके लिए हम क्या कर सकते
हैं क्लास रूम में मुक्त अंत वाले जो
प्रश्न है बच्चों से जैसे कुछ कहानी हैं
उसमें से ऐसे क्वेश्चन पूछना जिसका आंसर
जो है वह सब अलग-अलग दें हर बच्चा अपने
विचार हिसाब से सोचते थे तो ऐसे क्वेश्चन
ओपन
अस्थि विधियां की बच्चों के अंदर आप ये जो
चिंतन कौशल है इसका विकास कैसे करेंगे
कौन-कौन सी विधियां हैं तो पहले जो मेथड
है वो परी चर्चा का लीजिए डिस्कशन का
लीजिए ये सरल विधि है इसमें विद्यार्थी जो
करते हैं आपस में चर्चा या परिचर्चा करते
हैं और अध्यापक के साथ भी करते हैं मतलब
दो टाइप से ये हो शक्ति है इसमें क्या
होता है की संप्रत्ययतीय विषय में चिंतन
जो भी कॉन्सेप्ट है उसके बड़े में बातें
मतलब सोचना और फिर बोलना
शुरू होगा और और में क्या होगा इसका
समाधान आपको मिलेगा या कोई ना कोई ऐसा
पहलू मिल जाएगा जो उसको ठीक-ठाक कर दे यह
मोती श्रवण विचार और अभिव्यक्ति कवि विकास
करता है डिस्ट्रक्शन मेथड फिर जो अगला
मेथड है
इसको इंग्लिश में
यह क्या
औपचारिक विधि है यह फॉर्मल मेथड है जिसमें
लॉजिक पर बात की जाति है डिबेट क्या होता
है पक्ष में भी बोलना है विपक्ष में भी
बोलना है तो दोनों चीजों को ठीक से दे
लेना की सही कितना है गलत इतना है पूर्व
निर्धारित विषय पर चिंतन पहले से ही कोई
विषय दे दिया जाता है और फिर उसे पर बच्चे
सोचते हैं और फिर डिबेट करते हैं वाद
विवाद द्वारा अभिव्यक्ति में चिंतन का
विकास होता है की अगर बच्चे जब डिबेट करते
हैं तो उनके चिंतन का ऑब्वियस सी बात है
विकास होगा क्योंकि बोलने से पहले वो कुछ
ना कुछ सोचेंगे पक्ष में भी सोचेंगे
विपक्ष में भी सोचेंगे और इससे वह भी
बनेंगे तो यह हो गया आपका वाद विवाद मेथड
फिर आता है प्रश्नोत्तरी विधि अब इसमें
क्या होता है की अध्यापक द्वारा प्रश्न वी
विद्यार्थियों द्वारा उत्तर का चिंतन मां
लो टीचर ने क्वेश्चन पूछ लिया हमने बच्चों
से कोई क्वेश्चन पूछ लिया अब बच्चे उसका
आंसर ढूंढने के लिए अपने मन में थिंकिंग
करना स्टार्ट कर देंगे उसके बाद आता है
प्रत्येक विद्या में इसका क्रमबद्ध प्रयोग
चाहे कहानी हो चाहे कविता हो निबंध हो कुछ
भी हो वहां पर हम प्रश्न पूछ कर इसका
प्रयोग मेथड का कर सकते हैं
पहले बच्चे मन में सोचेंगे उसे बाद
लिखेंगे उसका आंसर ठीक है हम कहते हैं ना
मां लीजिए हमने कोई क्वेश्चन बोला फिर हम
कहते चलो 5 मिनट सोच लो उसके बाद लिखना
स्टार्ट कर देना तो बच्चे 5 मिनट तक अपने
मन में चिंतन करना शुरू कर देते हैं और
फिर आंसर को जो है वो लिखने हैं जैसा की
आप लोग भी डीएलएड एग्जाम जब देंगे तो यही
करेंगे क्वेश्चन को पढ़ेंगे दिमाग में
फ्रेम करेंगे आंसर और फिर पेज पर उतरेंगे
महत्वपूर्ण विधि है यह प्रश्न उत्तर वाली
और पाठ के अंत में जो प्रश्न दिए गए हैं
अभ्यास करवा के बच्चों को क्या करवा सकते
हैं
अगला जो मेथड है वह संक्षेपण मेथड यानी की
संक्षेपण वो बोलते हैं सर इसका अर्थ होता
है
अगर आप किसी बड़ी चीज को पढ़ने हैं और
उसका सर बना लेते हैं मतलब मां लीजिए आपने
चार-पांच पेज और निबंध पढ़ा और असेंबली
में खड़े होते दो दो-तीन मिनट में आपने
पूरा बता दिया की उसे अंदर क्या था तो ये
रत तो है तो ये कल है मल्लेख के अतिरिक्त
कुछ नहीं मतलब जो आपने बहुत लंबा पढ़ा था
और आपने जो सर बनाया संक्षेपण दिया उसमें
जो है ना उसका पूरा निचोड़ हो रहा मतलब
एक्स्ट्रा चीज बिल्कुल भी नहीं होगी किसी
भी विषय की संक्षेप में विजय अभी विवेचना
करना कोई भी विषय हो कोई भी टॉपिक हो उसका
संक्षेप यानी बहुत ही कम शब्दों में और
पूरा हो भी जाए ऐसे बोलना
जैसे की मैं आपको यूनिट वाइस पढ़ा रही हूं
नोट्स बना कर तो यह भी तरह से संज पड़े
हुआ क्योंकि अगर पूरा ही आप किताबें से और
रेफरल किताबें से पढ़ेंगे तो बहुत ही लंबा
हो जाएगा और अभी हम क्या करें संक्षेपण
मेथड से पढ़ रहे हैं तो मैंने संक्षेप में
आपको यूनिट बना दे दी है आप समझ रहे हैं
आप पढ़ रहे हैं तो ये भी एग्जांपल हो सकता
है की नोट्स बनाना
थोड़ी कठिन होती है तो जो हम संक्षेप में
सरल भाषा हनी चाहिए कम से कम शब्दों में
अधिक बटन को समझना
फिर आता है पल्लवन विधि या फिर भाव
विस्तार का लीजिए यह उसका थोड़ा उल्टा है
इसमें क्या होता है किसी भी कथन को
विस्तार के साथ लिखना मतलब एक छोटी सी
लाइन पड़ी और फिर उसको विस्तार से आपने
दो-तीन मिनट तक समझाया तो ये होता है आपका
पल्लवन या फिर भाव स्टार इसमें कथन को सरल
बनाने
शब्द ही कई बार ऐसा होता है की खाने को वो
शब्द है लेकिन उसके व्याख्या जो होती है
वो कर पांच लाइनें में होती है
कठिन वाक्य को संप्रत्यय को तोड़ और सरल
शब्दावली में बताना जो कठिन शब्द होते हैं
उनको तोड़-तोड़ के बताना काव्या को
स्पष्टीकरण जैसे की कविताएं जो होती हैं
वो कम शब्द
होता है वह बहुत ज्यादा बड़ा होता है
इससे क्या होता है
विकास होता है की बच्चा की और फिर दिमाग
में अर्थ क्या है कहां-कहां यह लागू होगा
ठीक है तो यह आपका हो गया पल्लवन विधि फिर
आता है विश्लेषण विधि इसमें क्या होता है
विश्लेषण करना
उसका अध्यापक द्वारा स्पष्टीकरण
के आवश्यकता होती है शिक्षक के उपरांत की
जान वाली चिंतन भीम
इसमें छिपे हुए अर्थ विचार और भाव को
पहचाना जाता है और विश्लेषणात्मक चिंतन
में भी यहां से विकास होता है जो की बच्चा
क्रिटिकल मन में सोचना शुरू करेगा तो
ओबवियसली उसका थिंकिंग का मेथड जो है वो
विकास की और जाएगा
फिरना विधि
किसी भी वास्तु व्यक्ति को क्या करना है
असमानता वी सामान्य बताना किसी भी वास्तु
या दो बीच में क्या-क्या सेमिलेरिटीज हैं
क्या-क्या डिफरेंस है यही होती है
कंपैरिजन यही होता है तुलना तो एक वास्तु
की विशेषताओं को किसी अन्य वास्तु की
विशेषता से मापन और क्या होता है
क्योंकि जब हम तुलना करेंगे तो हम यह
पढ़ेंगे इस व्यक्ति में क्या-क्या गन हैं
इस व्यक्ति में और फिर हम सिमिलरिटीज
डिफरेंस
फिर आता है आपका दृष्टांत विधि इसमें क्या
करते हैं उदाहरण देकर समझते हैं तो उदाहरण
द्वारा अपनी बात को पुष्टि करना दृष्टांत
कहलानी है इसमें पुरानी प्रमाण प्रमाणिक
घटना से जोड़कर समझना आज जो पटना है उसको
पहले पुरानी किसी एग्जांपल से बता देंगे
उसके बाद पढ़ाएंगे यह बहुत ही आकर्षित और
रुचिकर होती है इसमें दूसरों को समझना में
सफलता मिलती है की सामने वाला क्या का रहा
है इससे सृजनात्मक का भी विकास होता है
अगला जो मेथड है वह भूमिका निर्वहन मेथड
इसमें क्या होता है की व्यक्ति या
विद्यार्थी किसी पत्र की भूमिका निभाते
हैं
भूमि अनिवार्य है ना डायलॉग होता है ना
जैसे तो वह क्या करते हैं की उनके डायलॉग
को बोलते हैं तो ऐसे क्या होता है किरदार
में अपने अनुभव भी जोड़ने हैं की मां
लीजिए वो सीता का रोल या राम का रोल कर
रहे हैं तो फिर उसमें वो अपने भी
एक्सपीरियंस जोड़ देंगे इससे चिंतन कौशल
का डेफिनेटली वे आप होगा तो विभिन्न
स्थितियां में अपने विचार और चिंतन का
अवसर हो करेंगे स्वयं करके सिली और स्थाई
ज्ञान होता है क्योंकि वो खुद किसी कोई
कहानी के अंदर वो रोल प्ले कर रहे हैं तो
वो कहानी कभी नहीं भूलेंगे फिर वो जिंदगी
भर उनको याद रहेगा किरदार ये भूमिका पर
चिंतन के उपरांत अभिव्यक्ति फिर जो भी
उनको मिला होगा किरदार या पत्र की अगर
आपको राम का रोल मिला है तो राम के बड़े
में पढ़ेंगे जानेंगे और उसे बाद ही उनके
डायलॉग
का विचार जो है वह इकट्ठा कर लेंगे और
उससे कोई ना कोई रिजल्ट निकलेंगे
फिर आता है आत्म चिंतन के आधार पर रचना अब
आत्म चिंतन क्या होता है स्वयं निरीक्षण
या आत्म निरीक्षण यानी खुद ही निरीक्षण
करना एक्सप्लेन करना एक्सप्लोर करना चीजों
को इसमें क्या होता है अपने अनुभव के आधार
पर हम हल्क खोजने हैं हमने जो लाइफ में
एक्सपीरियंस किया अकॉर्डिंग हम किसी भी
प्रॉब्लम का सॉल्यूशन को जाएंगे
सॉल्यूशन मतलब की लिखेंगे या रचना करेंगे
आप यह भी का सकते हैं इससे मनोदशा का पता
चला है की कौन सा इंसान किस मनोदशा से
गुर्जर रहा है
जैसे कोई लेखक है या कवि है जो बहुत ही सब
पोयम्स लिखना है तुम बता सकते हैं मनोदशा
कैसी सड़नेस वाली है तो छात्रों में चिंतन
कौशल का विकास हम करवा सकते हैं आत्म
चिंतन के द्वारा और क्षमताओं का भी ज्ञान
हमें हो जाएगा की बच्चे में कमियां
क्या-क्या है कहां पर बच्चा हमारा पीछे है
फिर आता है रचना की स्थिति
[संगीत]
के अनुसार लिखेगा विभिन्न स्थिति
जैसे रोजमर्रा के अनुभव आपस में घटना मां
लीजिए कोई घटना घाटी है आपके देश में या
स्कूल में मां लीजिए कोई घटना घाट गई या
किसी न्यूज़पेपर में आपने पढ़ा की किसी
स्कूल में जो है
भूकंप आया तो फिर ऐसी घटना हुई तो ऐसे हम
विषय देंगे बच्चों को और फिर बोलेंगे आप
इस पर निबंध लिखो कोई कविता लिखो कहानी
लिखो या ये जो भूकंप आया ऐसे में बच्चों
को क्या करना चाहिए ये लिखो तो इन सब में
बच्चा क्या करेगा चिंतन कौशल का विकास
करेगा स्वयं करके सीखेगा पठान कौशल का भी
आप होगा यदि और हम कैसे दे सकते हैं उनको
स्थितियां हम बोल सकते हैं यदि आप जनरल
में फैंस जो तो अब आप क्या करोगे तो यह जो
क्वेश्चन हम दे रहे हैं यह क्या है
विभिन्न स्थितियां में प्रसंगी रचना करवा
रहे हैं हम यदि आप इस तरीके से हम और भी
क्वेश्चन दे सकते हैं यदि आप प्रधानमंत्री
होते तो आप कौन-कौन सी नीतियां करते हैं
बच्चों के लिए क्या करते तो ऐसे ऐसे
क्वेश्चन हम यहां पर दे सकते हैं
अब जो हमारा एक कुछ मतलब हिंदी के बहुत
सारे विधायक दी जा रही हैं और फिर हमें यह
बताना है की अधिगम क्रियाएं मतलब लर्निंग
प्रोसेस में हम कौन-कौन सी एक्टिविटी को
उसे कर सकते हैं तो पेपर में क्वेश्चन
आएगा तो ऐसे ही आएगा की आप कुछ ऐसी विधाओं
विधाएं लिखे जो की अधिगम क्रियो के लिए
पाठ योजना यानी जो लेसन प्लेन बनाते हैं
वहां पर हम उसे करेंगे तो सबसे पहले पत्र
लेखन पत्र लेखन आपको पता है पत्र क्या
होते हैं पत्र में जो जरूरी चीज हैं मैं
वही बताऊंगा आपको जैसे शिष्टाचार आधार यह
साड़ी चीज वहां पर इंक्लूड हनी चाहिए अब
जो इंपॉर्टेंट चीज है की आप अधिगम क्रिया
में कैसे शामिल करेंगे कैसे वो हम देख
लेते हैं तो सबसे पहले विभिन्न पत्रों के
नमूने दिखाएंगे हम बच्चों को ताकि वो देख
पे और बेहतर पत्र लिख पाएं
पोस्ट कार्ड पर हम प्रैक्टिस कराएंगे जो
रियल वाला पोस्ट कार्ड होता है
फिर पत्र औपचारिक और अनौपचारिक दोनों रूपन
का ज्ञान हम उनको देंगे की औपचारिक पत्र
कैसे लिखने हैं अनौपचारिक पत्र कैसे लिखने
हैं त्योहार पर बधाई संदेशवाएं श्याम पाठ
पर गलत पत्र लिखकर हम बच्चों से पूछिए
कहां रहती है आप ठीक करो तो इन चीजों के
द्वारा हम पत्र लेखन जो है बच्चों का ठीक
कर सकते हैं क्लासरूम के अंदर उसके बाद
आता है अनुच्छेद तो अनुच्छेद क्या है
निबंध का ही ये लघु रूप है जो निबंध होता
है उसका ये छोटा रूप होता है अनुच्छेद
अनुच्छेद आपने भी पढ़े होंगे पेपर में भी
कई बार अनुच्छेद ए जाता है फिर उसमें से
क्वेश्चन करने होते तो वही होता है
अनुच्छेद
इसमें क्या होता है की आरंभ में पूर्व
परिचित विषय चुना जब स्टार्ट करेंगे आप
बच्चों को अनुच्छेद वाला कम करना तो पहले
कुछ ऐसे विषय चंगे जींस बच्चे रूबरू हो और
उदाहरण
अच्छा तो अब क्लास रूम में हम कैसे अपने
लेसन प्लेन में इसको इंक्लूड करेंगे पहले
कुछ पंक्तियां अध्यापक बताएं मां लीजिए
टीचर मैं खड़ी हूं क्लास में मैं कुछ
लाइंस बोलूंगी कविता की फिर बोलूंगी अब आप
बताओ
र्ड लाइन क्या हनी चाहिए तो इस तरीके से
हम कड़वा सकते हैं सेकंड कविता का विषय और
उदाहरण दिया जा सकता है की मैंने कहा
कविता का टॉपिक जो है वह है पढ़ाई अब इसके
ऊपर आप कविता बना और उदाहरण भी दे सकते
हैं की पढ़ाई से रिलेटेड कोई कविता
बना
की कविताओं से परिचित करना बच्चों को
डिफरेंट टाइप ऑफ जो पोयम्स होती है उससे
हम इंट्रोड्यूस कराएंगे और कविता शिक्षक
संबंधित प्रश्न पूछना की कोई कविता आपने
पढ़ाई हो क्लासरूम
कविता से रिलेटेड
होंगे
इसके बाद आता है आपका संवाद संवाद में
क्या होता है अपने विचारों को एक से दूसरी
जगह पर प्रेषित करना संप्रेषण का ही मध्य
है इसमें विविध विधाओं का संवाद में बदलना
चाहे कविता हो कहानी हो निबंध हो कुछ भी
रचना हो उसे आप संवाद में बादल सकते हैं
मां लीजिए क्लास में कोई कहानी है कोई
चैप्टर पटना है तो आप क्या करेंगे की उसे
कहानी में जितने भी पत्र हैं क्लास रूम
में बांट देंगे बच्चों को और इस तरीके से
पढ़ाएंगे
रोल प्ले द्वारा पढ़ाएंगे ठीक है
विद्यार्थियों द्वारा
बच्चों से बोलेंगे की आप जैसे कोई कहानी
है शेर और चीते की तो हम बोल सकते हैं की
आप शेर हो आप चिता हो आपको
उसको प्रमोट करना है मोटिवेट करना है
गद्दे रचना होती है इसको हम कैसे ला सकते
हैं क्लास रूम में तो चित्र द्वारा कहानी
बावा सकते हैं
या फिर कहानी में परिवर्तन लाना की कहानी
है लेकिन हम एक कहानी सुना दी फिर हम
बोलेंगे नहीं मां लो इसमें जो है वो शेर
मारा नहीं तो अब आगे क्या होगा चेंज कर
दिया हमने उसके अंदर
आप खुद ही इमेजिन करो और एक कहानी लिखो
विविध शब्दों से कहानी फिर हमने दो-तीन
शब्द दे दिए 10-12 शब्द दे दिए और बोला की
अब कहानी बना जिनके अंदर ये शब्द भी
प्रयोग होने चाहिए
तो इस तरीके से आप क्लासरूम के अंदर इन
उसे कर सकते हैं ताकि बच्चा चिंतन कौशल
में आगे बढ़
फिर है निबंध तो निबंध क्या होता है
विचारों को पूर्णतः मौलिक रूप से शृंखलावत
तरीके से लिखना मतलब सीरीज से लिखना जो
मौलिक रूप से हो ठीक है तो इसमें क्या
होता है
त्योहार आने वाला हो तो हम कैसे चलो होली
पर निबंध लिखो होली आने वाली है तो बच्चा
उसको जानता है वो उसकी तैयारी कर रहा है
तो बेहतर निबंध
चर्चा द्वारा निबंध या हम का सकते हैं की
क्लासरूम में डिस्कशन कर लो टॉपिक आपने दे
दिया और उसके बाद चलो निबंध लिखो फिर बाद
में बात ये पश्चात इसी विषय पर निबंध ना
मां लीजिए कोई डिबेट हुई किसी टॉपिक पे
फिर बाद में हमने कहा चलो इसी विषय पर आप
निबंध ऐसे राइटिंग कर लो ऐसे राइटिंग
कंपटीशन भी होते हैं वो भी करवा सकते हैं
विषय से संबंधित संकेत बिंदु दे देना मां
लीजिए कोई निबंध लिखवाना उससे पहले आप
क्या करेंगे की प्वाइंट्स दे दें बच्चों
को और बच्चा जो भी कम करेगा तो करनी ही है
फिर आता है नाटक लेखन में क्या होता है
दृश्य काव्या चरित्र होती है
वो वचन करेगा या अभिव्यक्ति करेगा नाटक के
मध्य से कहानी पढ़वाना
जाता है
उसके बाद आता है आपका कथा चित्र कथा चित्र
में क्या होता है किसी भी कहानी यह कथा को
चित्र मध्य से प्रेजेंट करना यह होता कथा
चित्र अब क्लास रूम में कैसे इसको उसे
करेंगे कैसे यह चीज हम बढ़ाएंगे
कथा चित्र कैसे बच्चों
प्रयोग करेंगे और उससे अकॉर्डिंग हम कहानी
को पढ़ाएंगे और क्या कर सकते हैं समूह
बनाकर विद्यार्थियों द्वारा प्रेजेंटेशन
करो
संवाद द्वारा चित्र प्रस्तुतीकरण
अभी हम चित्र और प्रेजेंटेशन कर सकते जैसे
आपने देखा होगा किंडरगार्डन के जो बच्चे
होते हैं वो मां लीजिए बच्चा है वह फ्लावर
बन गया है और एक पेड़ बन गया है तो और फिर
वो अपने डायलॉग बोल रहा है तो चित्र भी
प्रस्तुत हो रहा है सामने और वो संवाद भी
कर रहा है तो इस तरीके से कथा चित्र आप
उसे कर सकते हैं और दृश्य सामग्री प्रयोग
करके हुई हम कथा क्षेत्र जो है क्लासरूम
के अंदर ला सकते हैं तो ये आपने यूनिट फोर
था आई होप आपको यह यूनिट समझ में आई होगी
इसके बाद बहुत ही जल्द में यूनिट फाइव
लेकर आऊंगी और ये जो सिलेबस है आपका यहां
पर कर हो जाएगा इकाई पांच करेंगे जिसका
नाम है हिंदी भाषा और समसायिकता तो यहां
पर हिंदी भाषा और उससे रिलेटेड जितनी भी
रिसेंट की चीज होती हैं जो हिंदी भाषा के
साथ-साथ चलती हैं या रहती है या सदा रही
हैं उनके बड़े में बात करेंगे तो पहले जो
टॉपिक है वैश्वीकरण और हिंदी भाषा और
या फिर आप का लीजिए महत्व क्या है और
प्रसाद किस तरीके से हिंदी भाषा का हुआ है
पूरे विश्व के स्टार पर इसकी बात हम यहां
पर करेंगे
तो सबसे पहले देख लीजिए वैश्वीकरण और
हिंदी भाषा का क्या संबंध है तो वैश्वीकरण
का मतलब होता है विश्व का एकीकरण मतलब की
विश्व के सरस जितने भी देश हैं विश्व के
या का लीजिए जितने भी समाज है वो सब मिलकर
एक समाज का निर्माण करते हैं मतलब पूरे
विश्व को जोड़ देते हैं तो ऐसे में
वैश्वीकरण और हिंदी भाषा की आवश्यकता
क्यों हैं वैश्वीकरण के अंदर हिंदी भाषा
किस प्रकार से महत्व रखती है बेसिकली हमको
यहां पर यह बताना है तो पहले चीज थी
अंतरराष्ट्रीय एकीकरण में कुछ ही भाषण
व्याप्त है
यदि आप देखेंगे इंटरनेशनली तो कुछ ही ऐसी
लैंग्वेज है जिनको जो है मान्यता दी गई है
या फिर का लीजिए इंपॉर्टेंट मिलती है और
उन भाषण में से एक भाषा हमारी हिंदी भी है
इसलिए वैष्णवी स्टार पर हिंदी भाषा
महत्वपूर्ण हो जाति है फिर आता है रोमन
लिपि में भी हिंदी भाषा के विज्ञापन यदि
आप विज्ञापन एडवरटाइजमेंट वगैरा देखेंगे
तो आप देखेंगे लिपि चाहे रोमन के इस्तेमाल
की गई हो अल्फाबेटिकल इस्तेमाल
जो हिंदी भाषा हमारी तत्कालीन
परिस्थितियों
समाज में चेंज आते रहे हिंदी भाषा ने भी
खुद को चेंज किया अकॉर्डिंग तू टाइम जैसे
पहले संस्कृत थी फिर उससे हिंदी
साधारण निकली फिर सरल हिंदी
तो बिल्कुल खड़ी बोली और हिंदी ऐसी भाषा
है जो ना केवल उर्दू के शब्दों को बल्कि
अंग्रेजी के शब्दों को भी खुद के अंदर
समाहित कर लेती है जैसा की आपने तत्सम और
तद्भव शब्दों में भी पढ़ा होगा साथ ही साथ
हिंदी की बड़े भूभाग पर पहुंच क्योंकि
विश्व व्यापी भाषा है तो मॉरीशस जैसे देश
में भी हिंदी भाषा का बहुत ही प्रचलन है
गतिशील और समृद्ध भाषा है गतिशील यानी
टाइम के साथ और समय के साथ और दूसरे दूसरे
स्थान पर भी एक गतिशील रखती है रिगिड नहीं
है
तो इस तरीके से जो वैश्वीकरण में हिंदी
भाषा महत्वपूर्ण बन जाति है और किन-किन
साधनों से बंटी है यह देख लीजिए तो
व्यापार में यह कम आएगी हिंदी भाषा और जो
महत्व है वैश्वीकरण में व्यापार क्योंकि
अब वैश्वीकरण है तो व्यापार भी एक देश का
दूसरे देश से हो रहा है तो कुछ ना कुछ
कांबिनेशन भी होगा तो व्यापार और
पत्रकारिता के मध्य से अनुवाद कार्य जो हो
रहा है वो हो रहा है पूरे विश्व इस स्टार
पर हिंदी साहित्य जो है वो अंग्रेजी में
ट्रांसलेट हो रहा है अंग्रेजी इस साहित्य
जो है इंग्लिश हिंदी में मतलब ट्रांसलेट
हो रहे अनुवाद हो रहे हैं तो इस तरीके से
भी महत्वपूर्ण बन जाता है कंप्यूटर में भी
हिंदी के फोंट जो है अब ए गए हैं संस्कृति
का आदान-प्रदान हो रहा है जो भारतीय
संस्कृति हिंदी संस्कृति है और अब हम
देखेंगे
की वैश्वीकरण और हिंदी अप्रसार किन
माध्यमों से विश्व में जो हिंदी का प्रसार
वह हो रहा है एक तो वेब मीडिया द्वारा हो
रहा है सीधी सी बात है मीडिया के द्वारा
जो प्रसार पूरे विश्व में हो रहा है पूरे
विश्व मीडिया कम कर रही है यहां एक खबर
वहां वहां की खबर यहां फिल्मों के द्वारा
कुछ ऐसी महान फिल्में जो है बॉलीवुड में
बन जाति हैं फिर अंग्रेजी में ट्रांसलेट
किया जाता है और फिर देखा जाता है या किसी
और भाषा में इस तरीके से अन्य भाषण की
फिल्मों को हम हिंदी में अनुवाद कर के
देखते हैं व्यापार द्वारा प्रसार हो रहा
है क्योंकि व्यापार दूसरे देश के बीच हो
रहा है इसलिए भाषा भी जा रही है विदेशी
विश्वविद्यालय द्वारा प्रसार जितने भी
इंटरनेशनली ये यूनिवर्सिटी जब बन रही है
वहां पर भाषण को चुन्नी का और पढ़ने का
अवसर स्टूडेंट को दिया जा रहा है
आगे चलते हैं टॉपिक
सुना होगा जनरलिज्म कहते हैं जिसको
इंग्लिश में और जर्नलिज्म शब्द का मतलब ही
होता है दैनिक अब हम देखेंगे
दर्पण होता है जो पत्र एटा होती है इसके
अंदर क्या होता है समाज में जितनी भी
घटनाएं घाट रही हैं वो दिखाई जाति हैं
जैसे साहित्य होता है ना बिल्कुल वैसे ही
तो हिंदी शब्द ने इसकी डेफिनेशन दी है और
कहा है की पत्रकार का कम या व्यवसाय ही
पत्रकार देता है की जो जनरलिस्ट होता है
पत्रकार होता है आपने देखिए उनके जो कम है
ना वही जर्नलिज्म है सीधी सी बात है जो
सच्चाई है जो घटना समाज में घाट रही है वो
लोगों को दिखाना जो मीडिया इतनी हो शक्ति
है न्यूज़पेपर के थ्रू भी हो शक्ति है बस
वो इसकसौटी पर सही उतारे थी लोगों का सही
खबर पहुंचे ना की मसाला मिर्च
अब इसका महत्व क्या है भाई पत्रकारिता का
सामाजिक महत्व है तो क्योंकि समाज से
जुड़ी घटना और समस्याएं पता चल जाति है
हमें फिर आरती महत्व अर्थव्यवस्था से
रिलेटेड भी जितने भी उतार और चढ़ा होते
हैं वो भी हमें पता चल जाता है लाभ हनी
क्या करना चाहिए किसने क्या किया ये साड़ी
चीज पता चल जाति है राजनीति महत्वपूर्ण
पहचान होती है कौन सी पार्टी क्या कर रही
है किस नेता ने क्या कर दिया साड़ी चीज
हमें मिल जाति हैं कलात्मक क्षेत्र में
जैसे नृत्य ऊर्जा प्रयत्न हो गया कौन
अच्छे सिंगर हैं कौन बढ़िया वाला है किसने
कैसा डांस किया साड़ी कलाएं हम जो हैं
यहां पर जान पाएंगे वैज्ञानिक महत्वपूर्ण
खोज और जो भी शोध कार्य हो रहे हैं वह
कहां तक हो रहे हैं कितनी प्रताप हुई है
कैसी मशीनस ए चुकी हैं कैसी आने की
संभावनाएं हैं तो ऐसे वैज्ञानिक पहलू भी
इसके महत्व बन जाते हैं
फिर आई है विशेषताएं तो विशेषताएं क्या है
भाई पत्रकारिता इस सबसे पहले शीघ्रतम लोधन
घटनाएं या फिर का लीजिए समाचार को
पहुंचाना उसके बाद ये समाज दर्पण है तो
समाज के अच्छाई और बुराई दोनों ही चीज ये
दिखाई हैं सत्य घटनाओं को प्रस्तुत करना
लोकतंत्र चौथ स्तंभ भी इसको माना जाता है
लोकतंत्र के तीन स्तंभ तो होते ही ये
लेकिन जो चौथ स्तंभ है वो हम इसको
पत्रकारिता को मां सकते हैं फिर होता है
छिपे हुए तथ्यों को उजागर करना जो तथ्य
छिपे हुए हैं या फिर छिपने की कोशिश की जा
रही है उनको उजागर करना देश विदेश का
ज्ञान जनता तक पहुंचाना बहुमति से
प्रवृत्ति होती है मतलब किसी टॉपिक पर यह
नहीं टिकरा होता हर टॉपिक को यह लेकर चला
है जान चेतन वी मां चेतन स्वस्थ
जनमत जो है वो निर्माण होती है पत्रकारिता
अच्छे से हो और स्वस्थ मनोरंजन का साधन भी
है यदि आप खाली हैं तो एक अच्छा टाइम जो
होगा आप यहां पर इन्वेस्ट कर सकते हैं
फिर आता है अनुवाद वी अनुवाद तो अनुवाद
क्या होता है हिंदी में इसको ट्रांसलेशन
कहते हैं यह तत्सम शब्द से बना है जिसका
जो था पुनः कथन जी आर्थिक पुनः कथन या फिर
पुनरुक्ति यानी दोबारा कहना और इंग्लिश
में ट्रांसलेशन जो लैटिन शब्द अर्थ है
दूसरी और ले जाना मतलब ए स्थान से दूसरी
और ले जाना तो इन दोनों भाषण से आपको क्या
समझ में ए रहा है अर्थो से की किसी एक चीज
और दूसरे ले जाना पहुंचाना दोबारा से
बताना है ना ये साड़ी चीज क्लियर हो रही
हैं तो इसका जो सीधा सा अर्थ निकलता है वो
ये है की एक भाषा में कहीं गई बात को
दूसरी भाषा में अभी व्यक्त करना यही होता
है ना ट्रांसलेशन आपने भी किया होगा स्कूल
टाइम पे
हिंदू तू इंग्लिश ट्रांसलेशन इंग्लिश तू
हिंदी ट्रांसलेशन जब आपने 10 से ओनली और
किया होंगे तो इसमें क्या होता है दो भाषण
होती है एक होती है स्रोत भाषा और एक होती
है आपकी लक्ष्य भाषा तो स्रोत भाषा मतलब
है जी भाषा में वो पहले से मूल चीज है और
लक्ष्य भाषा का मतलब है जिसमें आपको
अनुवाद करना है ठीक है तो जैसे अगर आपको
हिंदी आई है आपके पास हिंदी किताब है तो
वो है आपकी स्रोत भाषा अब आप उसको
ट्रांसलेट करेंगे अंग्रेजी में तो
अंग्रेजी हो गई
अब इसमें ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी
डेफिनेशन दी है अनुवाद की और कहां है की
अनुवाद वह भीम है अथवा भीम है जिसके
द्वारा एक भाषा में कहीं गई बात को दूसरी
भाषा में रूपांतरित किया जाता है सिंपल सी
ये डेफिनेशन याद कर लेने आप अब ये बताइए
अनुवाद के महत्व क्या है उपयोगिता क्या है
मतलब क्या फायदे हैं क्यों कधे हम अनुवाद
तो पहले चीज अन्य देश के लिए वैज्ञानिक
नीति ज्ञान और अनुसंधान की प्रताप की यदि
देश में किसी भी तरीके का कम हुआ है
वैज्ञानिक ने कहा या फिर शोध कार्य हुआ है
तो फिर वो इस देश सीमित ना रहे भाषा की
बंदी से वहां पर ना हो अनुवाद करके वो
वैश्विक स्टार पर पहुंचे फिर भारतीय
संस्कृति और राष्ट्रीय एकता ताकि जो
भारतीय संस्कृति है कलर है जो यहां का और
जो पूरे
अखंडता की जो बात करता है हमारे देश तो
ऐसा ना हो चुकी हमारे देश के अंदर ही
डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेज उसे होते हैं तो
ऐसा ना हो की जो साउथ के हैं वह सिर्फ
साउथ की लैंग्वेज ही पढ़ रहे हैं उनको पता
ही नहीं की ऊपर क्या हो रहा है नॉर्थ में
क्या हो रहा है दिल्ली में क्या हो रहा है
मुंबई में क्या हो रहा है तो ऊपर से नीचे
पूरा माहौल बना रहे पता रहे की कहां पर
कैसा साहित्य लिखा जा रहा है कौन सी किताब
कितनी पड़ी जा रही है यदि कोई अच्छी किताब
है तो उसको पढ़ने का सब का हक है तो
डिफरेंट लैंग्वेज में वह अनुवाद हो और सभी
लोग उसको पढ़ सके
फिर आता शिक्षा में विस्तार यानी जितना
यदि हम अनुवाद करते हैं या किसी और भाषा
इस से तो हमारे लिए शिक्षा के स्टार उतने
ही ज्यादा बाढ़ जाते हैं कार्यालय में भी
जो है डिफरेंट कार्यालय हैं तो वहां पर
अनुवाद से कम आसानी से चल जाएगा उद्योग और
व्यापार में भी महत्वपूर्ण है ये
संचार मध्य में ताकि संचार संप्रेषण कर
सके हम ज्ञान में वृद्धि होगा डिफरेंट
लैंग्वेज सीखने से हमें डिफरेंट लैंग्वेज
अब पूरा लिटरेचर भी मिल जाता है पढ़ने के
लिए विभिन्न भाषण के साहित्य की जानकारी
हो जाएगी
पत्रकारिता में महत्वपूर्ण
है तो हर समाज को उसके भाषा से सरलता
पूर्व क्या है जो भी इनफॉरमेशन है वह मिल
जाए फिर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी
महत्व होता है आपने देखा
होती है तो वहां पर ट्रांसलेटर साथ में
होता है और जो भी नजन है वहां पर अपना
भाषण देते हैं और फिर उसको जो है
ट्रांसलेट यूनिवर्सल लैंग्वेज में बताया
जाता है ताकि सभी लोग समझ सके वहां पर
क्या बात हो रही है
ट्रांसलेटर ज्योति ट्रांसलेशन का कम करता
है तो अनुवाद का
मध्य है जिससे अनुवाद होगा अब अनुवाद
कार्य
कौन सी दो भाषा वही आप स्रोत भाषा जो आपको
आई ही आई है दूसरी भाषा जिसमें आपको करना
है कन्वर्ट मां लीजिए आपको हिंदी को
इंग्लिश में करना है आपको हिंदी तो आई है
लेकिन इंग्लिश नहीं आई तो फिर आपके पास
लक्ष्य ही नहीं है तो आप कैसे अनुवाद
बनेंगे तो दो भाषण का होना जरूरी है साथ
ही साथ विवेक होना चाहिए शब्द एवं अर्थ
संपादन आदि तत्व
यंत्र यानी ये कोई इंसान भी हो सकता है या
कोई यंत्र भी हो सकता है जैसे हमने
कंप्यूटर में या मोबाइल में कुछ हिंदी में
और उसने ट्रांसलेट कर दिया लेकिन वो जो
ट्रांसलेट करेगा वो बहुत ही अच्छे से
अर्थो को समझकर ऐसा ना हो की इंग्लिश में
जो बात लिखी रही है वो हिंदी में लिखने पर
बादल जाए चेंज वहां पर नहीं आने चाहिए
व्याकरण शब्द ज्ञान भाषा प्रकृति स्रोत
भाषा और लक्ष्य भाषा इन सब का अच्छा ज्ञान
होना चाहिए अनुवादक को चाहे वह कोई यंत्र
हो चाहे वह कोई व्यक्ति हो ठीक है आगे
चलिए अनुवादक के गन पेपर में ये क्वेश्चन
ए जाता है की अच्छे अनुवादक में क्या-क्या
गन होने चाहिए तो पहले उसका स्रोत और
लक्ष्य भाषा पर समाज अधिकारों जितना उसे
स्रोत भाषा आई है ना उतने ही अच्छे से
लक्ष्य भाषा भी आनी चाहिए क्योंकि जी
लैंग्वेज में हमको करना है ट्रांसलेट उसकी
भी तो जानकारी हनी जरूरी है ना उसके बाद
विविध विषयों का ज्ञान मतलब अब कंटेंट
क्या है यह हमें नहीं पता हमें बस
ट्रांसलेट करना है तो कई बार ये शब्द होता
है ना उसके अलग-अलग मीनिंग होते हैं मतलब
अर्थशास्त्र में उसका अलग ही मीनिंग होगा
जैसे एक गुड है गुड्स का लीजिए तो
इकोनॉमिक्स में तुम पढ़ने गुड्स मतलब समाज
होता है वैसे हम जानते हैं गुड मतलब
विषयों का ज्ञान होना चाहिए की अगर यहां
पर उसे हो रहा है तो इसका ये मतलब होगा
अगर यहां उसे हो रहा है तो ये मतलब होगा
अर्थ बौद्ध क्षमता अर्थ को ग्रहण करने की
अच्छी हनी चाहिए उसको
परिभाषित शब्दावली
होती है उसे एक ऐसी वोकैबलरी होती है वह
भी पता होना चाहिए सृजनात्मक प्रतिभा हनी
चाहिए की अच्छे से जी तरीके से स्रोत भाषा
में लिखा हुआ है वो लक्ष्य भाषा में भी ले
सके शब्दकोश उपयोग और ओशो की जानकारी
डिक्शनरी कैसे उसे करते हैं ये भी उनको
पता होना चाहिए और अनुवाद कार्य में वो
निपुण हूं मतलब उसको थोड़ा बहुत
एक्सपीरियंस भी होना चाहिए आगे चलते हैं
वो समीक्षा या आलोचना तो क्या होता है
समीक्षा करना या फिर आलोचना करना तो इसका
सीधा सा मतलब है साहित्य के स्वरूप का
विश्लेषण करना मतलब कुछ भी आपने पढ़ा कोई
कहानी पड़ी हुई उपन्यास पड़ा उसके बाद
उसका विश्लेषण किया की उसमें क्या-क्या
अच्छा है क्या-क्या बड़ा है और क्या बेहतर
हो सकता था ये साड़ी चीज जब आप करते हैं
तो ये होती है समीक्षा करना तो ये गन और
दोष दोनों की विवेचना होता है आलोचना मतलब
होता है
देखना तो अच्छे से देखना पेनी नजरों से
देखना तो डॉक्टर श्याम सुंदर दास ने इसकी
परिभाषा दी और कहा की यदि हम साहित्य को
जीवन की व्याख्या मैन तो आलोचना को उसे
व्याख्या की व्याख्या मानना पड़ेगा
ठीक है तो यहां से यह चीज भी क्लियर हो
जाति है अब उद्देश्य क्या है
विश्लेषण किया जाता है
निर्माण हो सके अगर हम आलोचना
छठ जाएगी और साहित्य जो है वो अच्छा
निर्माण होगा सत्य निराकरण जितना भी उसमें
सत्य है गलत है उसको हटाए जा सके रचना के
विशेष गुना की पहचान की जाए क्वालिटी
रुचि को सही दिशा प्रधान करना की जो पढ़
रहे हैं उनको अच्छी डायरेक्शन मिले
पॉजिटिव चीज पढ़े साहित्य के सौंदर्य की
अभिव्यक्ति साहित्य में जो सुंदरता है वो
आलोचना और समीक्षा करने से बाहर आई है की
ये इसके अंदर अच्छी चीज थी भाषा वृत्त और
कलात्मक को दर्शन की उसे लिटरेचर के अंदर
क्या-क्या भाषा और कल से रिलेटेड सुंदरता
थी भाव और विचारों की व्यापक पृष्ठभूमि को
पहचाना की लिटरेचर के अंदर क्या भाव थे
किस भाव से लिखा गया था या फिर क्या विचार
प्रस्तुत करने की लेखक कोशिश कर रहा है
फिर आता है भाभी संस्कार में सुधार आलोचना
की जाएगी तो जो साहित्य में गलत ए रहा है
वह छठ जाएगा
और बेहतर की उम्मीद तो होगी जितनी ज्यादा
हम समीक्षा करेंगे उतना ही बेहतर साहित्य
हमारा बनेगा
नेक्स्ट तत्व विश्लेषण तत्व विश्लेषण क्या
होता है अब तत्व विश्लेषण के संदर्भ में
पाठ्य वास्तु जो भी पाठ्य पुस्तक है या
पाठ्य वास्तु है जो सिलेबस पढ़ना के लिए
उसे होता है तो पाठ्य वास्तु को छोटी
किंतु सार्थक इकाइयों में विभक्ति करके
प्रत्येक खंड का मूल्यांकन करना चाहिए की
जो भी पाठ्य वास्तु है उसको पहले
छोटे-छोटे यूनिट्स में बांट लीजिए उसके
बाद उसका क्या करिए मूल्यांकन इवेलुएट
इडियट की क्या यह यूनिट्स हमारी पुरी
पाठ्यक्रम को या पाठ्य तत्व को पूरा करती
है या नहीं करती गन और दोष को दर्शन और
वहां पर हम जितने भी गन हैं और दोष है वो
सब वहां पर इकट्ठा कर लेंगे तो विश्लेषण
कर लेंगे ऊपर किया था तो तत्व विश्लेषण के
आधार क्या हो सकते हैं एक तो सामाजिक आधार
की जो पाठ्यपुस्तक है या जो भी मटेरियल है
पढ़ना के लिए उसके अंदर समाज से रिलेटेड
चीज हैं या नहीं क्योंकि बच्चा सामाजिक है
हमने पढ़ा है की मनुष्य सामाजिक प्राणी है
तो समाज से जुड़ना चाहिए फिर आरती आधार
होना चाहिए
उसे पेज भी मतलब अच्छे हो और इतना किफायती
भी हो की बच्चा उसको अफोर्ड कर सके फिर
मनोवैज्ञानिक आधार की उसमें जो कंटेंट है
उसको पढ़ने के बाद जो बालक है वो किस
प्रकार से चिंतन मनन करता है अपने दिमाग
में कहानी कोई नेगेटिव चीज तो उसके दिमाग
में नहीं आई इस ऊपर तो इस चीज का ध्यान
देना फिर संस्कृति आधार बच्चे के अंदर
आदर्श और मूल्य को जागृत करने के लिए यह
वाला आधार होता है की उसके अंदर संस्कार
संस्कृति से प्यार यह साड़ी चीज भी आएं और
अपनी संस्कृति अच्छी चीज जो है बच्चा उसको
सखी है उसके बाद बहुत ही आधार यानी बच्चे
भी बौद्धिक क्षमता के अनुसार ही
पाठ्यवस्तु तैयार हनी चाहिए
और
फिर होता है
पाठ्य पुस्तक का आकर पाठ्य पुस्तक ना तो
बहुत ज्यादा लंबी हनी चाहिए ना ही बहुत
ज्यादा छोटी हनी चाहिए मुद्रण वही पैसों
से रिलेटेड है आवरण उसके अंदर आसपास के
वातावरण की चीज हो पाठों का आकर ठीक होना
चाहिए चित्रांकन उसमें अच्छी खासी चित्र
होने चाहिए और प्राइमरी लेवल के लिए है तो
और भी कलरफुल जो चित्र वहां पर उसे होने
चाहिए तो ये बाहरी तत्व है आंतरिक तत्व की
बात करें तो उद्देश्य अनुरूपता की जो
सिलेबस है उसके अकॉर्डिंग
पुस्तक पुरी करती है या नहीं करती फिर
विषय की विविधता हनी चाहिए रोचकता हनी
चाहिए इंट्रस्टेबल हनी चाहिए वो जीवन से
संबंधित
में होता भी अगर आपने पड़ी हो तो
क्रमबद्धता हनी चाहिए की कम से बच्चा
सीखेगा सरल से कठिन की और जाएगा ना की
कठिन से सरल की और
सार्थकता होती पढ़ने के बाद बच्चे को जीवन
में कम आए इवेलुएशन में कम आए
उसमें बहुत साड़ी शैलियां प्रयोग की जानी
चाहिए मां लीजिए कोई कोई
कहानी
हनी चाहिए कोई निबंध होना चाहिए कोई कविता
हनी चाहिए
वह महिलाओं से ज्यादा पढ़ने हैं या ज्यादा
इंटेलिजेंट होते हैं
तो ऐसी बातें नहीं कहीं जानी चाहिए
उसके बाद आई भाषा शिक्षक में क्रियात्मक
अनुसंधान तो आपने यह पहले भी पढ़ा होगा और
फाइल भी बनाई होगी इसकी एक्शन रिसर्च इस
को कहते हैं इसमें क्या होता है समस्या
समाधान की चिंतनशील प्रतिशील भीम प्रोसेस
है जिसके अंदर क्या होता है समस्या का
समाधान मां लीजिए कोई प्रॉब्लम है किस चीज
में पढ़ना से रिलेटेड सिस्टम में कोई
प्रॉब्लम है तो उसके बड़े में सोचना और
फिर पॉजिटिव चेंज लाना यह क्रिया द्वारा
अनुसंधान परिस्थितियों एवं सामाजिक
कार्यवाही के विभिन्न प्रभावों पर किया
जाता है
इसके ऊपर किया जाता है
मां लीजिए आप को कोई कक्षा मिलती है
जिसमें कुछ बच्चे जो हिंदी नहीं पढ़ का
रहे हैं तो सबसे पहले तो आप उनके कर्म को
जन की कोशिश करेंगे तो करण क्या हो सकते
हैं एक तो ध्वनियों को ना समझना की वो
ध्वनि नहीं समझ रहे या प्रयास वी ध्यान वह
जो है प्रयास या ध्यान नहीं कर रहे हैं तो
ऐसे में आप क्या करेंगे करण पता लगाएंगे
हो सकता है उसकी मातृभाषा कुछ और हो किसी
ऐसे बैकग्राउंड से ए रहा हो जहां पर भाषा
का प्रयोग किसी और तरीके से होता है तुम
करण जानेंगे फिर उसका निदान यानी की
सॉल्यूशन करें कैसे करेंगे प्रयास करेंगे
उसे पर थोड़ा ध्यान देंगे
और भी बहुत सी चीज आप क्लास में कर सकते
हैं
आप सेल दे सकते हैं उनको एक्स्ट्रा टाइम
के लिए लोक करवा सकते हैं उसके बाद आता है
महत्व
जरूरी है यह पहले समस्या का समाधान करता
है
मतलब जरूरी नहीं ए रही है बस यही चला
रहेगा अगर नवीनता की जरूर है तुम पढ़ेंगे
एक्शन रिसर्च
स्कूली समस्या पर यह केंद्रित होता है
स्कूल में जितनी प्रॉब्लम होती है ये
बेसिकली उसे पर होता है सही ऑडियो में
पारस्परिक क्रिया को बढ़ता है आपस में
मिलजुल का कम करना है क्योंकि एक्शन
रिसर्च है तो सारे मिलकर कम करते हो फिर
प्रॉब्लम निकलते हैं और उसका सॉल्यूशन भी
शिक्षकों के बीच जागरूकता यह पैदा करता है
की शिक्षा
कम करेगा
अनुसंधान का क्षेत्र में यह कम पड़ेगा
पटना है वह सकता है फिर पाठ्यक्रम संबंधी
चीजों पाठ्यक्रम है वह किस तरीके
अनुसंधान जो है वो किया जाता है मूल्यांकन
के लिए की इवेलुएशन करना मूल्यांकन किस
तरीके से किया जाए तो वहां भी रिसर्च होगी
की कौन सा तरीका अच्छा है या कोई नया
तरीका अपनाना हो प्रशासनिक प्रशासन के कम
स्कूल का पूरा कम प्रशासन से चला है तो
वहां पर अगर कोई प्रॉब्लम है स्टाफ में
मैनेजमेंट में तो वहां पर जो कमी है उसको
पूरा किया जाएगा फिर वेबसाइट की जितना जो
भी व्यवसाय है क्योंकि स्कूल की बात हो
रही है तो टीचिंग की ही बात हो रही थी जो
व्यवसाय है वहां पर कोई कमी तो नहीं ए रही
कहानी ऐसा तो नहीं थी टीचर की सैलरी इतनी
कम है की वो अपनी जरूर को ही नहीं पूरा कर
का रहा है कहानी पर तो वो ठीक से नहीं पढ़
का रहा तो मतलब व्यवसाय में जो ये टीचर और
व्यवसाय हैं कहानी इसके अंदर कोई कमी हो
तो वहां पर भी रिसर्च का एक बैकग्राउंड र
जाता है तो इन सभी क्षेत्र में एक्शन
रिसर्च हो सकते हैं यह क्षेत्र उनके हैं
और जो मैं बोलती हूं आपको पेपर में वह
पूरा एक्सप्लेन करके आना है और बहुत ही
जल्द आपके पेपर भी स्टार्ट होने वाले हैं
तो आप जो है ध्यान दें थोड़ा और अच्छे से
पढ़ाई करें
[संगीत]
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