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The good, the bad and the way forward: Raghav Chadha's "objective review" of the Budget

18m 44s3,444 words457 segmentsHindi

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0:00

देश का मिडिल क्लास डिसपॉइंट हुआ। जिस

0:02

स्तर पे महंगाई बढ़ी उस स्तर पे वेजेस

0:04

नहीं बढ़ी। सर हर साल देश का आम आदमी जब

0:07

वित्त मंत्री जी की बजट की स्पीच सुनता है

0:09

तो वो इसलिए नहीं सुनता कि पीएलआई की क्या

0:11

इन्वेस्टमेंट होगी? कौन सा कॉरिडोर बन रहा

0:13

है? देश का आम आदमी सैलरीड क्लास इसलिए

0:16

बजट की स्पीच सुनता है कि उसके अंदर स्लैब

0:18

में कोई रिवीजन होगा। क्या हमारी

0:20

स्टैंडर्ड डिडक्शन की जो हमें डिडक्शन

0:23

मिलती है वो बढ़ेगी। दैट देयर वास नो

0:24

रिलीफ फॉर द मिडिल क्लास। मिडिल क्लास को

0:26

पैंपर करें। नहीं तो मिडिल क्लास एक

0:28

सैंडविच की तरह रिच क्लास और पुअर क्लास

0:31

में दबता चला जा रहा है। जहां यूएस में

0:34

18% ऑफ़ जीडीपी हेल्थ केयर पे खर्च होता

0:36

है। यूके में 12% जर्मनी में 13% क्योंकि

0:39

वो देश जानते हैं कि जान है तो जहान है।

0:42

सरकारी अस्पताल में अगर आप चले जाइए और

0:43

आपको पुरानी जरजर बिल्डिंग मिलेंगी।

0:45

मैसिवली अंडर अंडरस्टार हॉस्पिटल मिलेगा।

0:48

ओवरवर्क डॉक्टर मिलेंगे। इंडिया इज़ वन ऑफ़

0:50

द ओनली कंट्रीज इन मेजर इकॉनमीज़ वेयर 85%

0:54

ऑफ़ आवर फॉर्मल वर्क फोर्स हैज़ ज़ीरो स्टचरी

0:57

इनफ्लेशन प्रोटेक्शन। साथ-साथ मुझे लगता

0:59

है कि एक मिनिमम इनक्रीस बेस्ड ऑन

1:01

इनफ्लेशन होना चाहिए।

1:06

सर अक्सर देखा जाता है जब वित्त मंत्री

1:08

बजट पेश करती हैं तो रूलिंग कोइलेशन के जो

1:10

एमपीज हैं जो ट्रेजरी बेंचेस पर बैठते हैं

1:12

वो सरकार की तारीफ करते हैं और कहते हैं

1:15

कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रांति

1:17

आ जाएगी इस बजट से। और विपक्ष में जो बैठे

1:19

हैं वो अक्सर निंदा करते हैं। कहते हैं

1:21

किसान की कमर तोड़ दी। बहुत महंगाई हो गई।

1:23

अमीर और अमीर हो रहा है। गरीब और गरीब हो

1:25

रहा है। लेकिन मैं आज प्रयास करूंगा कि एक

1:27

ऑब्जेक्टिव एनालिसिस इस बजट का करूं और

1:29

कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म अपना आपके

1:31

माध्यम से वित्त मंत्री को दूं। सर, द

1:33

टाइटल ऑफ़ माई स्पीच इज़ द गुड, द बैड एंड द

1:35

वे फॉरवर्ड। फोर गुड थिंग्स दैट आइ फाउंड

1:38

इन दिस बजट, फोर बैड थिंग्स दैट आई फाउंड

1:40

इन दिस बजट एंड फोर इनोवेटिव सजेशंस टू दी

1:42

ऑनरेबल फाइनेंस मिनिस्टर। सो द फर्स्ट गुड

1:44

थिंग दैट आई फाउंड इन द बजट इज दैट देयर

1:46

वाज़ एन इंक्रीस इन द एसटीटी फॉर डेरिवेटिव

1:49

ट्रेडिंग। यूजुअली सरकार की निंदा हुई इस

1:52

विषय को लेकर मार्केट्स भी गिरी। लेकिन

1:54

मेरा यह मानना है कि इस कदम से

1:55

स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग यानी कि सट्टा

1:57

ट्रेडिंग समाप्त होगी या कम होगी और रिटेल

2:00

इन्वेस्टर जो 90% रिटेल इन्वेस्टर एफएनओ

2:03

सेक्टर में नुकसान भुगतता है फ्यूचर्स एंड

2:05

ऑप्शंस के चलते जुआ खेलता है उसमें आपको

2:09

रिटेल इन्वेस्टर की प्रोटेक्शन का एक

2:11

माध्यम बन सकता है। लेकिन मैं इसी के

2:13

साथ-साथ वित्त मंत्री जी को याद दिलाना

2:15

चाहूंगा कि एसटीटी का जेनेसिस क्या है?

2:17

एसटीटी का जन्म कब हुआ? एसटीटी हमारे

2:20

सीनियर कॉलीग मिस्टर पी चिदंबरम जब

2:22

फाइनेंस मिनिस्टर थे तो उन्होंने

2:24

इंट्रोड्यूस किया एंड इट वाज इंट्रोड्यूस

2:26

टू रिप्लेस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

2:29

ऑन इक्विटीज जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन ऑन

2:31

इक्विटी जीरो था तब एसटीटी को लाया गया कि

2:34

वे एक सिंपल अप फ्रंट लेवी होगी ट्रेड्स

2:37

पर रिगार्डलेस ऑफ प्रॉफिट एंड लॉस लेकिन

2:39

अब सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

2:42

भी लगा दिया एसटीटी भी लगा दिया और रिटेल

2:45

इन्वेस्टर को और तमाम इन्वेस्टर्स को एक

2:47

प्रकार से डिसइेंटिवाइज किया। मैं एक

2:50

सुझाव लाया हूं सरकार के लिए जिससे लॉन्ग

2:53

टर्म हाउसहोल्ड अर्निंग्स बढ़ेंगी। वेल्थ

2:56

क्रिएशन होगा और वेल्थ पार्किंग रियलस्टेट

3:00

और गोल्ड के सेक्टर से निकल कर इक्विटीज

3:02

में आएगी और स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग और कम

3:04

होगी और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट बिहेवियर

3:06

इन्वेस्टर्स का बढ़ेगा। वो की है कि लॉन्ग

3:08

टर्म कैपिटल गेन टैक्स ऑन इक्विटीज शुड बी

3:12

मेड निल इन दिस कंट्री फॉर इंडिविजुअल

3:15

इन्वेस्टर्स। दुनिया की कई ऐसे देश हैं

3:17

जिसके अंदर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

3:19

इक्विटीज पे खासतौर पे शून्य है। जैसे कि

3:21

स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, यूएई,

3:24

न्यूजीलैंड, हांगकांग, कतर, मलेशिया। मैं

3:26

चाहूंगा कि जब एसटीटी बढ़ाया जा रहा है तो

3:28

इसी बजट में ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन

3:32

टैक्स को जीरो किया जाए। सर मेरा दूसरा जो

3:34

मैं सरकार के बजट को एक्नॉलेज करना

3:36

चाहूंगा वो ये है कि कैपेक्स के जो

3:38

एक्सपेंडिचर एलोकेशन होता है उसमें एक

3:41

बढ़ोतरी देके गई। जहां वित्तीय वर्ष 18-19

3:43

में मात्र 3 लाख करोड़ कैप अपेक्स था वो

3:45

इस वित्तीय वर्ष में 12 लाख करोड़ तक

3:47

पहुंचा है। व्हिच इज 4.4% ऑफ द जीडीपी

3:50

व्हिच इज अ गुड स्टेप इट विल हैव अ

3:52

मल्टीप्लायर इफेक्ट एंड इट विल

3:54

प्रायोरिटाइज एसेट क्रिएशन। लेकिन इसके

3:56

साथ-साथ सरकार को 5 साल में क्या कैपेक्स

3:59

वो कौन-कौन से क्षेत्रों में खर्चा करने

4:01

जा रही है उसका एक ब्यौरा देना चाहिए ताकि

4:03

प्राइवेट सेक्टर भी इस कैपेक्स के खर्चे

4:05

को मैच कर सके। सर थर्ड थिंग व्हिच वी

4:07

फाउंड इन द स्पीच ऑफ द फाइनेंस मिनिस्टर

4:09

इज दैट देयर वाज़ अ रिलेटिव रिस्ट्रेंट इन

4:11

मेकिंग बजेटरी अनाउंसमेंट्स फॉर इलेक्शन

4:13

बाउंड स्टेट्स। अक्सर वित्त मंत्री का

4:16

भाषण सुन के आप बता सकते हैं कि कौन से

4:18

राज्यों में चुनाव होने जा रहा है। इस

4:20

स्पीच में उन्होंने थोड़ा सा रिस्ट्रेंट

4:23

एक्सरसाइज किया जिसे मैं एकनॉलेज करता हूं

4:25

और आखिरी अच्छी चीज जो इस बजट में नजर आई

4:27

वो ये था कि एनआरआई की इन्वेस्टमेंट लिमिट

4:29

में एनहांसमेंट हुई। लेकिन मैं बता दूं कि

4:31

जब एफआईआई ने फॉरेन इन्वेस्टर्स ने फॉरेन

4:34

पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने इस देश के

4:36

बाजार से पैसा निकाल लिया और पिछले एक

4:39

वित्तीय वर्ष में 23 बिलियन निकाला तब

4:41

जाकर सरकार जागी और सरकार ने एनआरआई के

4:44

लिए इक्विटी मार्केट का दरवाजा खोलकर उनकी

4:46

इन्वेस्टमेंट लिमिट को 5% से बढ़ा दिया।

4:48

इसमें कोई दो राय नहीं है कि इससे

4:50

इन्वेस्टर्स 32 मिलियन एनआरआई इन्वेस्टर्स

4:53

को अब भारतीय बाजार में पैसा डालने का

4:55

मौका मिलेगा। लेकिन इसी के साथ-साथ सरकार

4:58

को इस पर भी गौर फरमाना चाहिए कि क्यों

5:00

फॉरेन इन्वेस्टर्स भारत से पैसा निकाल

5:02

निकाल कर बाजार को छोड़कर जा रहे हैं। सर

5:04

नाउ आई कम टू द बैड पार्ट ऑफ द बजट।

5:06

फर्स्ट थिंग इज द डे टू जीडीपी क्राइसिस।

5:09

सरकार ने और डेप्ट लेने के लिए कर्जा लेने

5:12

के लिए इस बजट में फार्मूला ही बदल दिया।

5:14

पहले सरकार डेप्ट जब लेती थी तो ओल्ड

5:16

एफआरबीएम रूल्स के तहत 3% ऑफ जीडीपी तक का

5:20

फ्रेश डेप्ट लेती थी। इस बजट में सरकार ने

5:23

उस फार्मूले को बदलकर कहा कि टोटल सरकार

5:25

का डेप्ट जीडीपी का 50% होगा और उस सीमा

5:29

में हम डेप्ट लेंगे। यानी कि दे वांट टू

5:31

प्ले ऑन द डिनोमिनेटर इफेक्ट। फॉर

5:33

एग्जांपल एक साल बजट अगर 12 हमारा जीडीपी

5:36

12% से ग्रो करता है तो उस साल सरकार खूब

5:39

सारा डेप्ट लेके सरकार पे कर्जा लाद सकती

5:42

है जो कि फिस्कल डेफिस 4 6 5% तक भी पहुंच

5:48

सकता है। सर इसी के साथ-साथ मैं बताना

5:50

चाहूंगा कि आज सरकार कहती है कि हमारा डे

5:52

टू जीडीपी रेशियो 56% है। लेकिन ये गलत है

5:55

क्योंकि बहुत सारे ऑफ बैलेंस शीट आइटम्स

5:58

हैं जिसे सरकार डेप्ट में दिखाती ही नहीं

6:00

है। जिस जैसे कि एफसीआई बॉन्ड्स, ओएमसी

6:04

बोंड्स, फर्टिलाइजर, एनएचआई, एनएफएसएस

6:06

यानी कि तमाम तरीके के ऐसे कर्जे हैं

6:09

सरकार के ऊपर जो सरकार अपनी बैलेंस शीट

6:11

में नहीं दिखाती है। सर मैं सरकार को आपके

6:14

माध्यम से ये रिक्वेस्ट करना चाहूंगा कि

6:16

देश का कर्जा और कैसे ना बढ़े इस पर काम

6:19

करें ना कि और कर्जा लेने के लिए हम

6:22

जीडीपी और डेप्ट टू जीडीपी के फार्मूले के

6:24

रेशियोज़ बदलकर और पैसा कर्जे पे ब्याज पर

6:28

लेने का प्रयास करें। सर दूसरी दिक्कत जो

6:30

इस बजट में नजर आई वो ये थी कि इनकम टैक्स

6:32

स्लैब में चेंज नहीं हुआ। सर हर साल देश

6:35

का आम आदमी जब वित्त मंत्री जी की बजट की

6:37

स्पीच सुनता है तो वो इसलिए नहीं सुनता कि

6:40

पीएलआई की क्या इन्वेस्टमेंट होगी? कौन सा

6:42

कॉरिडोर बन रहा है? देश का आम आदमी सैलरीड

6:44

क्लास इसलिए बजट की स्पीच सुनता है कि

6:46

उसके अंदर स्लैब में कोई रिवीजन होगा।

6:48

क्या हमारी स्टैंडर्ड डिडक्शन की जो हमें

6:51

डिडक्शन मिलती है वो बढ़ेगी। लेकिन इस बार

6:53

बजट में देश का आम आदमी और खासतौर पे देश

6:56

का मिडिल क्लास डिसपॉइंट हुआ। पहले ही

6:58

देयर हैज़ बीन अ स्टैग्नेशन इन द सैलरीज।

7:00

इनफ्लेशन 6.8% पे खड़ा है। लेकिन उसके

7:02

बावजूद हमने इस बार कोई स्लैब में या

7:05

स्टैंडर्ड डिडक्शन में चेंज नहीं देखा।

7:07

मैं आपके माध्यम से वित्त मंत्री जी को

7:09

रिक्वेस्ट करना चाहूंगा कि आप इसी बजट में

7:11

अनाउंसमेंट करें कि स्टैंडर्ड डिडक्शन जो

7:14

₹75,000 है उसे बढ़ाकर सैलरीड क्लास के लिए

7:17

₹1.5 लाख किया जाए। सर थर्ड प्रॉब्लम दैट

7:20

वाज़ देयर वि द बजट इज़ दैट देयर वाज़ नो

7:22

रिलीफ फॉर द मिडिल क्लास। सर आफ्टर अ वेरी

7:24

लॉन्ग टाइम इन इंडियास हिस्ट्री द पर्सनल

7:27

इनकम टैक्स कलेक्शन वास मोर देन द

7:30

कॉर्पोरेट इनकम टैक्स कलेक्शन। यानी कि

7:32

इंडिविजुअल्स ने जो इनकम टैक्स भरा वो

7:34

लगभग 11 लाख करोड़ के आसपास भरा और

7:36

कंपनियों ने कॉर्पोरेट ने जो इनकम टैक्स

7:38

भरा वो लगभग 9.8 लाख करोड़। यानी कि

7:41

मैक्सिमम टैक्स आपको इंडिविजुअल्स के इनकम

7:43

टैक्स से मिल रहा है। अब मिडिल क्लास वो

7:46

टैक्स भर रहा है। आज वो दौर आ गया है कि

7:48

हम मिडिल क्लास को अपलिफ्ट करें। मिडिल

7:50

क्लास को पैंपर करें। नहीं तो मिडिल क्लास

7:52

एक सैंडविच की तरह रिच क्लास और पुअर

7:55

क्लास में दबता चला जा रहा है। सर राइजिंग

7:58

कॉस्ट प्रेशर्स के चलते पिछले वित्तीय

8:00

वर्ष में मिडिल क्लास ने देखा कि उसके

8:02

एजुकेशन के खर्चे में 8% की बढ़ोतरी हुई।

8:05

हेल्थ केयर 9% से महंगा हुआ। रेंट 7% से

8:08

फूड 6% से ट्रांसपोर्ट 5% से। मेरा

8:10

रिक्वेस्ट यह है माननीय फाइनेंस मिनिस्टर

8:12

से कि वो इनकम टैक्स में रियायत देकर या

8:15

तो मिडिल क्लास को कोई रिलीफ दें और अगर

8:17

इनकम टैक्स में रियायत नहीं दे सकती हैं

8:19

तो उसकी सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट्स पे

8:22

उसको बेनिफिट दें उसे इंसेंटिव्स दें कि

8:24

वो ज्यादा बचत करे ज्यादा वेल्थ क्रिएशन

8:26

कर पाए। सर फोर्थ प्रॉब्लम इन दिस बजट दैट

8:29

आई फाउंड वाज़ दी बजटरी एलोकेशन टू हेल्थ

8:31

व्हिच इज लो एंड व्हिच सर्टेनली नीड्स अ

8:33

रीलुक। सर आज हमने अपने टोटल गवर्नमेंट

8:35

एक्सपेंडिचर का 2% हेल्थ को एलोकेट किया

8:38

है लगभग 1 लाख करोड़ के आसपास। नेशनल

8:40

हेल्थ पॉलिसी 2017 बताती है सर और सरकार

8:44

का ये अपना ऑब्जेक्टिव रहा है, गोल रहा है

8:46

दैट स्पेंडिंग ऑन पब्लिक हेल्थ शुड बी

8:48

2.5%

8:50

ऑफ जीडीपी।

8:52

आज हम 2026 में खड़े हैं। हमारी पब्लिक

8:55

हेल्थ पे स्पेंडिंग मात्र 5% ऑफ जीडीपी

8:58

है। हम अपने लक्ष्य से कोसों मील्स दूर

9:00

हैं। जहां यूएस में 18% ऑफ जीडीपी हेल्थ

9:03

केयर पे खर्च होता है। यूके में 12%

9:05

जर्मनी में 13% स्वीडन में, नीदरलैंड में,

9:08

डेनमार्क में, जापान में, स्पेन में 10%

9:10

ऑफ जीडीपी खर्च होता है। क्योंकि वो देश

9:12

जानते हैं कि जान है तो जहान है। लेकिन

9:14

हमारे देश में मात्र 5% ऑफ जीडीपी हम अपने

9:18

हेल्थ पे खर्च करते हैं। और इसके चलते आलम

9:20

ये है कि सरकारी अस्पताल में अगर आप चले

9:22

जाइए व्हिच इज द बोन व्हिच इज कॉल्ड द

9:24

बैकबोन ऑफ इंडियास हेल्थ केयर वहां पर

9:26

आपको पुरानी जरजर बिल्डिंग मिलेंगी।

9:28

मैसिवली अंडर अंडरस्ट हॉस्पिटल मिलेगा।

9:31

ओवरवर्क डॉक्टर मिलेंगे। पपुलेशन के हिसाब

9:33

से बेड नहीं मिलेगा। जांच के लिए मशीनें

9:36

नहीं है, दवाइयों की कमी है। और अगर इलाज

9:38

की ऑपरेशन की डेट मिल भी जाए तो वो डेट

9:40

इतनी दूर होती है तब तक मरीज चल बसता है।

9:43

सर द रियलिटी इज दैट कोविड मेड अस रियलाइज

9:46

एंड इट वाज़ अ वेक अप कॉल फॉर इंडियास

9:48

पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आई वांट

9:50

टू आस्क द हाउस टुडे। आर वी प्रिपयर्ड गॉड

9:53

फॉरबेट इफ दे वर टू बी अनदर पेंडेमिक और

9:55

अनदर बिग सॉर्ट ऑफ़ रेजिंग पेंडेमिक इन दिस

9:58

कंट्री एंड द आंसर टू दैट इज़ नो। और

10:00

प्राइवेट अस्पतालों की सर हालात यह हैं कि

10:03

अगर आज आपको प्राइवेट अस्पताल में इलाज

10:05

करना पड़े तो आपको लोन लेना पड़ता है।

10:08

अपने घर के गहने अपना रियलस्टेट एसेट

10:10

बेचकर पता नहीं कितने हजारों लाखों लोग हर

10:14

साल भारत में गरीबी रेखा के नीचे चले जाते

10:16

हैं क्योंकि उन्हें एक हेल्थ इमरजेंसी के

10:18

चलते प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना

10:20

पड़ता है। सर जैसे वन नेशन वन इलेक्शन इस

10:22

देश में लागू किया जा रहा है। वन नेशन वन

10:25

टैक्स की ओर हम बढ़ रहे हैं। वैसे ही वन

10:27

नेशन वन मेडिकल ट्रीटमेंट की ओर बढ़ना

10:29

चाहिए। सबको नंबर वन मेडिकल ट्रीटमेंट देश

10:31

में मिले। ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए। सर

10:33

मेरे चार सुझाव जो आपके माध्यम से मैं

10:35

वित्त मंत्री को देना चाहूंगा। पहला सुझाव

10:37

है पुट ऑल लैंड एंड प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स

10:39

ऑफ इंडिया ऑन ब्लॉकचेन। एक ब्लॉकचेन बेस्ड

10:42

लैंड रजिस्ट्री लेजर बनाइए। पहले 10 मेजर

10:46

राज्यों शहरों से शुरू करिए महानगरों से

10:48

और टिए टू सिटीज से। जिस लेजर में जिस

10:51

ब्लॉकचेन लेजर में हर रिकॉर्ड हर सेल हर

10:54

म्यूटेशन हर इन्हहेरिटेंस को एक डिजिटल

10:57

रिकॉर्ड बुक में डाला जाएगा जो एक

10:58

ब्लॉकचेन लेजर होगा जो टाइम स्टैंप्ड होगा

11:00

टपर प्रूफ होगा 100% ट्रांसपेरेंट होगा और

11:03

रियल टाइम प्रॉपर्टी ट्रैकिंग आप उसे कर

11:06

सकेंगे जिसके चलते इंस्टेंट टाइटल

11:09

वेरिफिकेशन होगा। आज सर हमारा जो

11:11

रियलस्टेट का लैंड एंड प्रॉपर्टी रिकॉर्ड

11:14

का जो बाजार है उसमें अटर केओस है। केओस

11:18

इसलिए है कि लोगों को रजिस्ट्रार के दफ्तर

11:20

के बाहर धक्के लग रहे हैं। दलालों ने उन

11:22

अफसरों पे पूरी तरीके से कब्जा किया हुआ

11:25

है। प्रॉपर्टी टैक्स में चोरी होती है।

11:27

सर्कल रेट को एक्सप्लइट करके कैश में

11:29

प्रॉपर्टीियां खरीदी जाती है। फर्जी कागज,

11:31

कब्जे, टाइटल डिस्प्यूट न जाने क्या-क्या

11:33

चल रहा है। जिसके चलते आज 66% ऑफ इंडिया

11:36

सिविल डिस्प्यूट्स आर लैंड डिस्प्यूट्स।

11:38

45% ऑफ प्रॉपर्टी इज लैक क्लियर टाइटल इन

11:41

इंडिया। इंडिया रैंक्स 133 आउट ऑफ 190 इन

11:44

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एफिशिएंसी। 48% ऑफ

11:47

आवर प्रॉपर्टीज आर अंडर डिस्प्यूट एंड दी

11:49

एवरेज टाइम टेकन बाय सिविल कोर्ट्स टू

11:51

रिसॉल्व दीज़ डिस्प्यूट्स इज़ सेवन इयर्स

11:53

एंड 6.2 करोड़ प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स आर

11:57

पेंडिंग डिजिटाइजेशन। वो तहसीलदार के

11:59

दफ्तर में पड़े हैं या रजिस्ट्रार के दफ्तर

12:01

में उनका डिजिटाइजेशन अभी तक नहीं हुआ। इन

12:03

सारी बीमारियों का एक ही दवा है दैट इज

12:06

नेशनल ब्लॉकचेन रजिस्ट्री जिसके चलते

12:08

प्रॉपर्टी डिस्प्यूट समाप्त होंगे। मिडिल

12:10

क्लास की वेल्थ अनलॉक होगी क्योंकि वह और

12:12

ब्याज पे पैसा ले पाएंगे। प्रॉपर्टी टैक्स

12:14

की कंप्लायंस बढ़ेगी और रीट्स जैसे

12:16

इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स को ब्लॉकचेन

12:18

वेरीिफाइड टाइटल मिलेंगे। उसमें भी

12:20

बढ़ोतरी देखी जाएगी। इसी के साथ-साथ सर

12:22

देश दुनिया के कई देशों ने इसे लागू कर

12:24

दिया है। स्वीडन में ये लागू है। जहां पर

12:26

एक दिन में आप प्रॉपर्टी का ट्रांजैक्शन

12:28

कंप्लीट कर सकते हैं। वहां डिस्प्यूट रेट

12:30

2% है। जॉर्जिया में है जहां 3 दिन में

12:33

प्रॉपर्टी का ट्रांजैक्शन खत्म हो जाता

12:34

है। डिस्प्यूट रेट 1% है। और यूएई में है।

12:37

जहां 10 मिनट में आप अपनी प्रॉपर्टी खरीद

12:39

बेच सकते हैं। वहां डिस्प्यूट रेट 1% से

12:41

भी नीचे और वहां हिंदुस्तान में प्रॉपर्टी

12:43

बेचनी हो तो 2 से छ महीने लगते हैं और 48%

12:47

डिस्प्यूट रेट है। सर मेरा दूसरा सुझाव है

12:49

इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिवीजन एक्ट। भारत

12:52

में वेजेस को इंडेक्सेशन इंडेक्स करिए

12:55

महंगाई से। वित्तीय वर्ष 18 से लेकर

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वित्तीय वर्ष 26 में आप हमने देखा कि रियल

13:00

वेजेस फॉर द सैलरी क्लास में 16% की

13:03

गिरावट आई। ये गिरावट का मतलब इन सालों

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में जितनी महंगाई थी जिस स्तर पे महंगाई

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बढ़ी उस स्तर पे वेजेस नहीं बढ़ी। जिसके

13:11

चलते 16% की गिरावट रियल वेजेस में देखी

13:14

गई। इसीलिए मैंडेटरी वेज इंडेक्सेशन

13:17

फार्मूला इज द नीड ऑफ द आवर एंड द

13:19

गवर्नमेंट मस्ट लुक एट इट। इसके चलते तमाम

13:21

फॉर्मल सेक्टर्स में कॉर्पोरेट शॉप्स,

13:23

फैक्ट्रीज, गिग वर्कर्स सबको इनफ्लेशन

13:26

इंडेक्स वेज ह मिलेगा और सरकार के मुलाजिम

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को तो मिलता ही है। हर साल डियर डियरनेस

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अलाउंस मिलता है। उसके बाद आप हर कुछ

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सालों में पे कमीशन लागू होता है। इस इससे

13:37

आप 20 करोड़ आबादी व्हिच इज 45% ऑफ

13:39

इंडियास टोटल वर्क फोर्स। आप उसे एड्रेस

13:42

कर पाएंगे। सर इसी के साथ-साथ मैं बताना

13:44

चाहता हूं कि दुनिया के कई देशों में यह

13:46

पहले से ही लागू है। यूएस के अंदर सीओएलए

13:50

कॉस्ट ऑफ लिविंग एडजस्टमेंट सिस्टम लागू

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है जिसके अंदर एनुअल और ऑटोमेटिक रिवीजन

13:55

होता है। जर्मनी के अंदर हर 18 से 24

13:58

महीने के अंदर महंगाई के अनुसार सैलरी

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बढ़ा दी जाती है। जापान के अंदर शंटो मेथड

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यूज़ होता है जिसमें एनुअल इनफ इनफ्लेशन

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इंडेक्स वेज ह दी जाती है। और बेल्जियम

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में ऑटोमेटिक इंडेक्सेशन लॉ है जिसमें

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क्वार्टरली बेसिस पर एंप्लाइजस की सैलरी

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बढ़ाई जाती है। सर इंडिया इज़ वन ऑफ द ओनली

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कंट्रीज इन मेजर इकॉनमीज़ वेयर 85% ऑफ़ आवर

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फॉर्मल वर्क फोर्स हैज़ जीरो स्टचरी

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इनफ्लेशन प्रोटेक्शन। वी आर एट दी मर्सी

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ऑफ़ द एंप्लयर डिस्क्रीशन एंड आवर ओन

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नेगोशिएशन पावर टू रेज आवर सैलरीज। इसके

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साथ-साथ मुझे लगता है कि एक मिनिमम

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इनक्रीस बेस्ड ऑन इनफ्लेशन होना चाहिए।

14:32

मेरा थर्ड सुझाव माननीय वित्त मंत्री जी

14:34

को रहेगा कि स्टेट कैपिटल एक्सपेंडिचर की

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मैचिंग ग्रांट मैचिंग फंडिंग सेंटर दें।

14:40

यानी कि हर एक जो राज्य की सरकार कैपेक्स

14:45

पे कैपिटल एक्सपेंडिचर पे एसेट क्रिएशन पे

14:47

खर्च करती है। उसकी मैचिंग ग्रांट ₹1

14:50

केंद्र द्वारा राज्यों को दिया जाना चाहती

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चाहिए। नॉट एज लोन बट एज अ ग्रांट। आज

14:55

स्टेट कैपेक्स में दो बॉटल नेक्स है। पहला

14:57

बॉटल नेक है बोरोइंग कैप। यानी कि कोई भी

15:00

राज्य अपने स्टेट जीडीपी से 3% से ज्यादा

15:03

ब्याज पर पैसा नहीं ले सकता। वो कैपेक्स

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पे नहीं खर्च करता। वो तमाम तरीके के

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ऑपरेशनल खर्चे करता है। और सेकंड प्रॉब्लम

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है कि अगर केंद्र सरकार पैसा देती भी है

15:11

राज्यों को कैपेक्स के लिए वो लोन की सूरत

15:15

में देती है और कंडीशनल लोन कि किस एसेट

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पे कितना खर्च होगा। एक कंडीशनल लोन दिया

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जाता है। मेरा सुझाव है दैट रिप्लेस दिस

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लोन विद कंडीशंस बाय गिवन बाय द सेंटर टू

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ग्रांट विद ट्रस्ट ग्रांट बेस्ड ऑन ट्रस्ट

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बाय द सेंटर। सर सेंटर को आने वाले 5

15:31

वर्षों के लिए डेढ़ लाख करोड़ आवंटित करना

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चाहिए नॉट एज लोन बट एज दी कैपेक्स

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ग्रांट्स ताकि राज्यों में सड़कें बने,

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इरीगेशन नेटवर्क बने, लोकल पावर

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इंफ्रास्ट्रक्चर बने, ड्रिंकिंग वाटर

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सैनिटेशन हो और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में

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एसेट क्रिएशन एसेट फॉर्मेशन किया जाए। एज

15:47

नॉट एज लोन, नॉट ऑन इंटरेस्ट, नॉट विद

15:50

प्रिंसिपल एंड विद नो कंडीशनलिटी। अगर ऐसा

15:52

होता है तो सबसे पहले तो स्टेट की बैलेंस

15:54

शीट में दिस ग्रांट विल नॉट सीट एज डे।

15:57

स्टेट की बैलेंस शीट सुंदर होगी, बेहतर

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होगी। दूसरा खुलकर राज्य कैपेक्स पर खर्च

16:03

कर पाएंगे। थर्ड इट विल बी अ हाई ग्रोथ

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एंड अ हाई जॉब क्रिएटर। ये ग्रोथ

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मल्टीप्लायर और जॉब क्रिएटर के तौर पे इस

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इसे इसका इस्तेमाल होगा। क्योंकि हर एक

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रुपया जो आप कैपेक्स पे खर्च करते हैं

16:14

उससे भारत का जीडीपी 2 से ₹ बढ़ता है इन अ

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स्पैन ऑफ़ थ्री टू फाइव इयर्स। कोपरेटिव

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फेडरलिज्म मजबूत होगा और साथ ही साथ

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स्टेट्स विल बिकम बिल्डर्स एंड नॉट

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बोरोअर्स इन द आईज ऑफ़ द सेंटर। सर मेरा

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चौथा सुझाव जो माननीय वित्त मंत्री जी के

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लिए है वो वो ये है कि लीगलाइज वर्चुअल

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डिजिटल एसेट्स एज एन एसेट क्लास। इंडिया

16:33

में अभी सर वैसे ही डीफैक्टो लीगलाइज

16:36

टैक्सेशन है वर्चुअल डिजिटल एसेट्स यानी

16:38

कि क्रिप्टो करेंसी स्टेबल कॉइन एटसेट्रा

16:41

क्योंकि अगर उनकी खरीद बेच पर कोई मुनाफा

16:43

होता है तो 30% फ्लैट इनकम टैक्स लगता है

16:46

और 1% ट्रांजैक्शन टैक्स जो अपनी वस्तु

16:50

बेच रहा है उसे सरकार को जमा कराना पड़ता

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है। बट दे आर सम हाउ नॉट रिकॉग्नाइज्ड एज

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एन एसेट क्लास। वीडीएस जो वर्चुअल डिजिटल

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एसेट्स हैं इन्हें एसेट क्लास का दर्जा

16:58

नहीं दिया गया। जिसके चलते कोई डेडिकेटेड

17:00

लाइसेंसिंग लॉ नहीं है। कोई क्लियर

17:02

कंज्यूमर या इन्वेस्टर प्रोटेक्शन कानून

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नहीं है। एएमएल कानून यानी कि एंटी मनी

17:07

लॉन्ड्रिंग गाइडलाइंस और डायरेक्शंस इस

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एसेट क्लास के लिए नहीं है। एंड देयर देयर

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इज़ ऑफ कोर्स नो एक्सप्लसिट लीगल

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क्लासिफिकेशन। एज अ रिजल्ट व्हाट हैज़

17:15

हैपेंड इज़ दैट 4.8

17:18

लाख करोड़ ट्रेड इन दिस वर्चुअल डिजिटल

17:21

एसेट्स हैज़ मूव्ड ऑफ शोर। भारत के बाहर

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निकलकर वो अन्य देशों में दुबई, सिंगापुर,

17:27

मलेशिया और अन्य देशों में इसका ट्रेड हो

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रहा है जो भारतीय कर रहे हैं। सेकंड थिंग

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दैट हैज़ हैपेंड इज़ दैट 73% ऑफ इंडियास

17:35

क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम इन फाइनेंसियल

17:37

ईयर 25 हैज़ मूव्ड टू ऑफशोर एक्सचेंजेस।

17:41

व्हाट हैज़ फर्दर हैपेंड इज़ दैट 180

17:44

वर्चुअल डिजिटल एसेट स्टार्टअप्स हैव

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मूव्ड टू कंट्रीज लाइक दुबई एंड सिंगापुर।

17:49

एंड एज अ रिजल्ट जो देश भारत देश के 12

17:52

करोड़ ऐसे लोग हैं जो इन वर्चुअल डिजिटल

17:55

एसेट्स में क्रिप्टो में आरडब्ल्यूए यानी

17:57

कि रियल वर्ल्ड एसेट में स्टेबल कॉइन में

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इन्वेस्ट करना चाहते हैं वो ऑफशोर जाकर

18:01

इन्वेस्ट कर रहे हैं। जरूरत है कि हम

18:03

कंप्लायंस हिंदुस्तान में लागू करें। उसे

18:06

हैवली रेगुलेट करें लेकिन उसे ऑनशोर लाएं।

18:08

इसके चलते अगर ऐसा होता है तो सरकार के

18:11

खजाने में 15 से 2000 करोड़ का इजाफा

18:14

होगा। उन्हें उतना टैक्स मिलेगा। और इसी

18:16

के साथ-साथ मैं सरकार को कहना चाहता दैट

18:18

वी करली टैक्स दी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स

18:22

एज इफ दे आर लीगल बट वी रेगुलेट देम एज इफ

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दे आर इललीगल। मेरा सुझाव है कि इसे हेवली

18:29

रेगुलेट करिए। रिंग फेंस करिए इस

18:31

इकोसिस्टम को। एएमएल गाइडलाइंस यानी कि

18:33

एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून और मजबूत करिए।

18:36

लेकिन प्रोहिबिशन इज नॉट प्रोटेक्शन।

18:39

रेगुलेशन इज प्रोटेक्शन।

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