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Re-Charge Full Theory | Accounts 12

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FULL TRANSCRIPT

0:00

व्हाट्स अप एवरीवन वेलकम बैक टू द चैनल

0:03

गाइस अब बारी आ गई है पूरे के पूरे

0:06

अकाउंट्स का थरिटिकल पोर्शन देखने की और

0:09

आज काफी मेहनत करनी है बहुत सारी चीजें हम

0:12

लोग करने वाले हैं बट स्टार्टिंग विद द

0:14

थ्योरी पोर्शन ताकि ये एक बार हो जाए

0:16

चीजें खत्म है तो चलिए जल्दी से थ्योरी

0:18

पोर्शन शुरू करते हैं क्योंकि बैकग्राउंड

0:20

पूरा वाइट है तो मुझे थोड़ा सा डार्क रखना

0:23

पड़ेगा तो थोड़ा सा डार्क आ रहा होगा बट

0:25

काम चलाओ क्योंकि ये क्लियर दिखना चाहिए

0:27

मैं क्लियर दिखूं ना दिखूं वो मैटर नहीं

0:29

करता तो चलिए चलिए जल्दी से शुरू करते हैं

0:31

और सारा थ्योरी पोर्शन फटाफट से कंप्लीट

0:34

कर देते हैं। लेट्स

0:40

[संगीत]

0:47

[संगीत]

0:49

बिगेन। चलो बेटा शुरू करते हैं बच्चों।

0:52

फटाफट से सबसे पहले हमारे पास पार्टनरशिप

0:54

का मीनिंग आ रहा है। ठीक है? पार्टनरशिप

0:57

के मीनिंग की अगर हम बात करें तो यहां पे

0:59

कुछ बेसिक-बेसिक सी चीजें दी हुई है। जैसे

1:02

सबसे पहले बेसिक डेफिनेशन है कि

1:03

पार्टनरशिप इज़ अ रिलेशन ऑफ म्यूचुअल

1:07

ट्रस्ट एंड फेथ। है ना? तो पार्टनर्स में

1:10

क्या होता है कि म्यूचुअल ट्रस्ट एंड फेथ

1:11

का रिलेशन शो करने के लिए ही हमारे पास

1:14

पार्टनरशिप बनाई जाती है। पार्टनरशिप

1:16

हमेशा म्यूचुअल ट्रस्ट के ऊपर, म्यूचुअल

1:18

एजेंसी के ऊपर बेस्ड होती है। जिसके अंदर

1:20

एक पार्टनर दूसरे पार्टनर पे भरोसा करके

1:22

ही बिज़नेस शुरू करता है। राइट? अच्छा। अब

1:26

हमारे पास ये सवाल आता है क्या सर

1:28

पार्टनर्स और पार्टनरशिप सेपरेट लीगल

1:31

एंटिटी है या नहीं है? तो ये क्या बोलता

1:33

है? देखो अगर आप अकाउंटिंग की बात करो तो

1:35

ऑफ़ कोर्स एक सेपरेट बिज़नेस है। लेकिन अगर

1:38

आप लीगल पॉइंट ऑफ़ व्यू से बात करो अगर आप

1:41

लीगल पॉइंट ऑफ़ व्यू से बात करो तो

1:42

पार्टनरशिप और पार्टनरशिप फर्म लीगल

1:45

सेपरेट एंटिटी नहीं है। एक ही है। मतलब जब

1:49

अगर कोई डिस्प्यूट होगा ना तो कोर्ट तो ये

1:52

बोलेगा भाई साहब फर्म और पार्टनर एक ही

1:54

है। अलग-अलग नहीं है। लेकिन जब हम

1:55

अकाउंट्स बनाते हैं तो फिर हम अलग-अलग

1:57

उसको कंसीडर करते हैं। ठीक हो गया बेटा?

2:00

इसके बाद सर एग्जैक्ट डेफिनेशन ऑफ

2:02

पार्टनरशिप क्या है? ये सेक्शन याद करना

2:04

है। सेक्शन फोर ऑफ द इंडियन पार्टनरशिप

2:07

एक्ट डिफाइन क्या डिफाइन करती है

2:10

पार्टनरशिप? ये बोलती है पार्टनरशिप इज़ द

2:13

रिलेशन बिटवीन पर्संस। पार्टनरशिप क्या

2:16

है? ये एक रिलेशन है बिटवीन पर्संस हु हैव

2:20

एग्रीड टू शेयर द प्रॉफिट्स। जिन्होंने

2:23

प्रॉफिट शेयर करने को एग्री करा है। ऑफ अ

2:26

बिज़नेस। बिज़नेस होना बहुत इंपॉर्टेंट है

2:28

बच्चों। अगर हमने मिलजुल के कोई संपत्ति

2:30

खरीद ली चार लोगों ने तो क्या वो

2:32

पार्टनरशिप हो गई? द आंसर इज नो। संपत्ति

2:34

खरीदना को ओनरशिप होती है। पार्टनरशिप

2:37

नहीं होती। ठीक है? तो बिनेस होना बहुतेंट

2:39

है। अब या तो वो बिज़नेस सारे चलाएं। सपोज़

2:42

तीन पार्टनर हैं। चिंटू, चिंटी, बंटी। या

2:46

तो ये बिज़नेस सारे चलाएं। ये तीनों मिलके

2:48

चलाएं या फिर कोई एक भी चलाएगा तो सबके

2:51

लिए एक्ट करेगा। एनी ऑफ़ देम एक्टिंग फॉर

2:53

ऑल। ठीक हो गया बेटा?

2:56

इसके बाद बच्चों कुछ मेन फीचर्स हैं। जैसे

2:58

पार्टनरशिप में दो या दो से ज्यादा लोग हो

3:00

सकते हैं। कम से कम दो लोग होने चाहिए।

3:03

एटलीस्ट टू पर्संस होने चाहिए। अब जो

3:05

पर्संस हैं वो पर्संस कौन नहीं हो सकते?

3:09

माइनर नहीं हो सकते। यानी 18 साल से कम

3:11

पार्टनर नहीं हो सकता। अनसाउंड माइंड नहीं

3:14

हो सकते। यानी वो बिल्कुल फिट होने चाहिए।

3:16

माइंड में कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए।

3:18

डिसक्वालिफाइड बाय लॉ नहीं होने चाहिए।

3:20

डिसक्वालिफाइड बाय लॉ कौन-कौन है? जैसे

3:23

हमारे क्रिमिनल्स हो गए जो अभी जेल में

3:25

हैं। राइट? तो इस तरीके के लोग नहीं हो

3:27

सकते या एलियन एनिमीज़ हो गए। एलियन एनिमी

3:30

का क्या मतलब होता है? कोई ऐसा कंट्री

3:32

जिससे हमारा वॉर चल रहा है। तो उसके

3:34

सिटीजन को अभी हम अपना पार्टनर नहीं बना

3:37

सकते। तो एलियन एनिमीज़ हो गए। ल्यूनेटिक

3:39

पर्संस हो गए जो पागल हैं, इनसॉल्वेंट हो

3:42

गए वो नहीं हो सकते। तो ये ध्यान रखना

3:44

माइनर नहीं होना चाहिए। अनसाउंड माइंड

3:46

नहीं होना चाहिए। और पर्सन डिसक्वालिफाइड

3:47

बाय लॉ नहीं होना चाहिए। उसके बाद बच्चों

3:50

पार्टनरशिप में कम से कम दो पार्टनर्स

3:52

होने चाहिए। ये तो बता दिया गया। मैक्सिमम

3:54

कितने होने चाहिए? तो देखो यहां पे ध्यान

3:57

रखना है कि पार्टनरशिप एक्ट डिफाइन ही

3:59

नहीं करता कि मैक्सिमम नंबर ऑफ पार्टनर्स

4:01

कितने होने चाहिए। पार्टनरशिप एक्ट ये

4:04

बोलता है कि सेंट्रल गवर्नमेंट प्रिस्राइब

4:06

करे। तो सेंट्रल गवर्नमेंट ने कंपनी रूल्स

4:09

में यानी कंपनीज़ एक्ट में ये बताया है कि

4:12

मैक्सिमम पार्टनर्स फिलहाल कितने होने

4:14

चाहिए? 50। ठीक है? तो रूल 10 ऑफ द कंपनीज़

4:19

रूल्स गवर्नमेंट ने बताया। सेंट्रल

4:21

गवर्नमेंट ने बताया कि मैक्सिमम पार्टनर्स

4:23

50 हो सकते हैं। तो एक्ट प्रिस्राइब नहीं

4:26

कर रहा लेकिन गवर्नमेंट ने प्रिस्राइब करा

4:28

है कि मिनिमम टू मैक्सिमम 50 हो सकते हैं।

4:31

डन सर। आगे आसान है। पहला फीचर टू और मोर

4:35

पर्संस हो गए। क्या माइनर कभी भी पार्टनर

4:37

नहीं हो सकता? बेटा नॉर्मली नहीं हो सकता।

4:39

माइनर कैन नॉट बी एडमिटेड एज अ पार्टनर।

4:42

लेकिन हां वो प्रॉफिट्स में पार्टिसिपेट

4:44

कर सकता है। अगर आप उसको प्रॉफिट देना

4:45

चाहो तो वो दे सकते हो। उसके बाद बेटा

4:47

एग्रीमेंट होना जरूरी है। पार्टनरशिप बिना

4:49

एग्रीमेंट के नहीं बनेगा। इट मस्ट कम इंटू

4:51

एकिस्टेंस बाय एन एग्रीमेंट। तीसरा बिनेस

4:54

होना चाहिए। प्रॉफिट मोटिव होना चाहिए।

4:56

तभी वो पार्टनरशिप कहलाएगा। फिर प्रॉफिट्स

4:58

का शेयरिंग होना चाहिए। सही है या नहीं

5:00

है? कि पार्टनर्स जो हैं प्रॉफिट शेयर कर

5:03

रहे हो। लेकिन एक बात ध्यान रखना बच्चों।

5:06

इसमें एक बात बहुत इंपॉर्टेंट है। वो क्या

5:09

है?

5:10

5:11

एग्रीमेंट मस्ट बी एम्ड एट शेयरिंग द

5:14

प्रॉफिट्स ऑफ द बिजनेस। कि आपको प्रॉफिट

5:18

शेयर करने हैं। ठीक है? लेकिन एक चीज लिखी

5:22

हुई है। इट इज़ नॉट नेसेसरी दैट ऑल

5:26

पार्टनर्स शुड शेयर द लॉसेस आल्सो। जरूरी

5:29

नहीं है। सारे पार्टनर्स प्रॉफिट बांटें।

5:31

ये तो जरूरी है। लेकिन सारे पार्टनर लॉस

5:33

बांटें ये जरूरी नहीं है। आप एक आधे

5:35

पार्टनर को गारंटी कर सकते हो कि आपको

5:36

प्रॉफिट ही प्रॉफिट होगा। लॉस नहीं होगा।

5:38

वो चलेगा। तो ध्यान रखना सारे पार्टनर

5:40

प्रॉफिट बांटें ये तो जरूरी है लेकिन लॉस

5:42

बांटें ऐसा जरूरी नहीं है। उसके बाद बेटा

5:45

रिलेशनशिप कैसा होता है? प्रिंसिपल ऑफ

5:46

एजेंट का। हर पार्टनर एक दूसरे का

5:49

प्रिंसिपल भी है और हर पार्टनर एक दूसरे

5:52

का एजेंट भी है। प्रिंसिपल ने जो कहा वो

5:54

एजेंट को मानना पड़ेगा। एजेंट ने जो किया

5:56

उसके लिए प्रिंसिपल जिम्मेदार है। यानी एक

5:58

दूसरे को रिप्रेजेंट भी करते हैं। ठीक हो

6:01

गया जी? परफेक्ट। उसके बाद बिज़नेस कैरिड

6:03

ऑन बाय ऑल और एनीवन ऑफ़ देम एक्टिंग फॉर

6:05

ऑल। सब भी कर सकते हैं बिनेस मिलके या कोई

6:07

एक भी कर सकता है जो सबके लिए एक्ट करेगा।

6:09

नो सेपरेट एग्ज़िस्टेंस। ये मैंने आपको

6:11

पीछे बता दिया। पार्टनरशिप फर्म का कोई भी

6:13

ऐसा सेपरेट एग्ज़िस्टेंस नहीं होता है। वो

6:16

एक ही है। ठीक है जी?

6:20

परफेक्ट। राइट्स ऑफ़ अ पार्टनर। पार्टनर को

6:23

क्या-क्या राइट्स हैं? तो बच्चों, बहुत

6:25

सारे राइट्स हैं। लेकिन आप एक बार सारे के

6:27

सारे रीड करके चलना कि एमसीक्यू में आ

6:29

जाता है कि कौन सा राइट नहीं है। जैसे

6:31

सबसे पहला प्रॉफिट्स और लॉसेस बांटने का

6:33

राइट है। दूसरा बिनेस को चलाने का अधिकार

6:36

है। तीसरा राइट है कि वो कंसल्ट कर सकता

6:40

है पार्टनरशिप बिज़नेस के रिलेटेड। कुछ भी

6:42

उसको कंसल्टेशन चाहिए वो पूछ सकता है,

6:44

डिस्कस कर सकता है, इंस्पेक्शन कर सकता है

6:46

बुक्स ऑफ अकाउंट्स का कि सही से बन रहे

6:48

हैं या नहीं बन रहे हैं। हर पार्टनर को

6:50

राइट है कि वो डिसअ कर दे एडमिशन। यानी

6:53

अगर एक भी पार्टनर ने बोला ना कि नए

6:55

पार्टनर का एडमिशन नहीं होना तो नहीं होगा

6:57

भाई। डिसअ कर सकता है। ठीक है? हर पार्टनर

7:00

जॉइंट ओनर है पार्टनरशिप प्रॉपर्टी का।

7:02

जितनी भी पार्टनरशिप प्रॉपर्टी है उसका

7:04

ओनर हर पार्टनर है। अगर किसी पार्टनर ने

7:07

लोन दिया है फ़र्म को तो उसको इंटरेस्ट ऑन

7:10

लोन मिलने का अधिकार है। या तो स्पेसिफाई

7:12

कर लो। स्पेसिफाई नहीं है तो 6% पर एनम के

7:15

हिसाब से। अगर कोई पार्टनर फर्म के बिहाफ

7:17

पे कोई खर्चा करता है तो उसको इंडेमनीिफाई

7:20

किया जाए। यह उसका अधिकार है। इंडेमनिफाई

7:22

का मतलब पैसा वापस दिया जाए उसका। और हर

7:25

पार्टनर जब चाहे तब एक नोटिस देके रिटायर

7:28

हो सकता है। यह उसका अधिकार है। ठीक है

7:30

बेटा?

7:32

इसके बाद आता है बच्चों लिमिटेड लायबिलिटी

7:35

पार्टनरशिप। ध्यान रखना लिमिटेड लायबिलिटी

7:37

पार्टनरशिप के लिए सेपरेट एक्ट बना एलएलपी

7:39

एक्ट। अब सर ये एलएलपी है क्या? बच्चों

7:42

एलएलपी जो है ये एक ऐसी पार्टनरशिप है

7:45

जिसके अंदर बहुत सारे फीचर्स कंपनी के

7:47

हैं। ठीक है सर? बहुत सारे फीचर्स कंपनी

7:49

के हैं। कैसे? जैसे लिमिटेड लायबिलिटी

7:51

पार्टनरशिप जो है उसका अंदर एक तो सेपरेट

7:54

लीगल एंटिटी है। इसका मतलब बिनेस अलग और

7:56

ओनर्स अलग। लोग कंपनी क्यों बनाते हैं?

7:58

सेपरेट लीगल एंटिटी की वजह से। सोल

8:00

प्रोपराइटरशिप हो गया, पार्टनरशिप हो गया।

8:02

इसके अंदर आपके पर्सनल एसेट्स रिस्क पे

8:04

होते हैं कि बिजनेस ने लोन लिया, नहीं

8:06

चुका पाया तो आपके पर्सनल एसेट्स तक

8:08

बिकेंगे। कंपनीज़ में ऐसा नहीं होता। आपकी

8:11

जितनी लायबिलिटी है, जितना कैपिटल आपने

8:13

लगाया है, बस उतने के लिए ही आप लायबल हो।

8:15

उससे ज्यादा के लिए आप लायबल नहीं हो। तो

8:18

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप में भी ऐसा

8:20

ही होता है कि ये सेपरेट लीगल एंटिटी है।

8:22

तो जितना आप कैपिटल कंट्रीब्यूट करोगे, बस

8:24

उतने के लिए ही लायबल हो। तो सर फिर कंपनी

8:26

क्यों नहीं बनाई? बेटा कंपनी में पेपर

8:28

वर्क बहुत है। कंप्लायंसेस बहुत है। इसमें

8:30

कंपैरेटिवली कम है। तो कंप्लायंसेस पेपर

8:33

वर्क पार्टनरशिप जैसा बेनिफिट्स कंपनी

8:35

जैसे तो क्यों ना एलएलपी बना लिया जाए। तो

8:37

आजकल ये बहुत पॉपुलर फॉर्म ऑफ़ बिज़नेस है।

8:40

आप जितने भी कॉमर्स में बिग फोर्स देखते

8:42

हो ना बिग फोर्स का बहुत नाम है। जो हमारी

8:44

टॉप फोर बिनेस एंड अकाउंटिंग फर्म्स हैं।

8:47

पीडब्ल्यू डेलॉयट आपने नाम सुना होगा ईवाई

8:50

है ना केपीएमजी। तो ये सारी की सारी

8:53

एलएलपीस हैं। देखो क्या

8:55

है? एलएलपी मींस अ पार्टनरशिप फॉर्म्ड एंड

8:58

रजिस्टर्ड अंडर दिस एक्ट। नेचर ऑफ़ एलएलपी

9:02

क्या होता है? एलएलपी इज़ अ बॉडी

9:03

कॉर्पोरेट। बॉडी कॉर्पोरेट का मतलब कि ये

9:05

एक सेपरेट लीगल एंटिटी है। देखो सेपरेट

9:07

लीगल एंटिटी। इसका रजिस्ट्रेशन हुआ हुआ

9:09

है। रजिस्ट्रेशन कंपलसरी होता है बेटा

9:11

इसका। परपीचुअल सक्सेशन है। यानी मेंबर्स

9:14

आते जाते हैं। लेकिन इसको फर्क नहीं

9:16

पड़ता। क्या-क्या मेन डिफरेंस है? अब देखो

9:19

एप्लीकेबल लॉ कौन सा है? पार्टनरशिप में

9:22

पार्टनरशिप एक्ट चलता है। एलएलपी में

9:24

एलएलपी एक्ट लगता है। रजिस्ट्रेशन

9:25

पार्टनरशिप का ऑप्शनल है। उसका कंपलसरी

9:27

है। पार्टनरशिप एग्रीमेंट से बनती है। वो

9:30

लॉ से बनती है। क्या पार्टनरशिप में बॉडी

9:32

कॉर्पोरेट जो है वो पार्टनर हो सकता है?

9:35

बॉडी कॉर्पोरेट का मतलब क्या होता है

9:36

बच्चों? क्या कोई और कंपनी जो फॉरेन में

9:40

भी रजिस्टर्ड है क्या वो पार्टनर हो सकती

9:42

है? तो इसके अंदर बॉडी कॉर्पोरेट जो है वो

9:44

पार्टनर नहीं हो सकता। लेकिन उसके अंदर हो

9:47

सकता है। इसकी सेपरेट लीगल एंटिटी नहीं

9:49

है। उसकी सेपरेट लीगल एंटिटी है।

9:51

पार्टनरशिप में परपचुअल सक्सेशन नहीं

9:53

होता। वहां पे परमेपचुअल सक्सेशन होता है।

9:56

नंबर ऑफ़ पार्टनर दो से 50 उधर दो से

9:58

मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है। ओनरशिप ऑफ़

10:01

एसेट्स फर्म जो है वो एसेट ओन नहीं करती।

10:05

पार्टनर्स ओन करते हैं। एलएलबी खुद अपने

10:07

एसेट्स ओन करती है। लायबिलिटी यहां पे

10:09

अनलिमिटेड वहां पे लिमिटेड। ठीक है बेटा?

10:12

इसके बाद वी हैव पार्टनरशिप डीड।

10:14

पार्टनरशिप डीड क्या होता है बच्चों?

10:15

पार्टनरशिप एक एग्रीमेंट है जिसके अंदर

10:17

पार्टनरशिप के सारे टर्म्स एंड कंडीशंस

10:19

लिखे होते हैं। ये ओरल भी हो सकता है,

10:21

रिटर्न भी हो सकता है लेकिन प्रेफरेबली

10:23

रिटर्न होना चाहिए। इसका दूसरा नाम बच्चों

10:25

आर्टिकल्स ऑफ़ पार्टनरशिप भी होता है।

10:27

पार्टनरशिप डीड के अंदर क्या-क्या चीजें

10:29

आती हैं? देखो, नेम एंड एड्रेस ऑफ़ द फर्म।

10:31

पार्टनर्स का नेम एंड एड्रेस, क्या बिनेस

10:33

करते हैं? कितना कैपिटल लगाया है?

10:35

इंटरेस्ट ऑन कैपिटल कितना? ड्रॉइंग्स

10:37

कितना? इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग्स कितना?

10:38

प्रॉफ़िट्स कैसे बांटेंगे? सैलरी कैसे

10:40

बांटेंगे? गुडविल कैसे इवैल्यूएट करेंगे?

10:43

अकाउंटिंग पीरियड कौन सा कंसीडर करने वाले

10:45

हैं? तो ये सब बच्चों पार्टनरशिप डीड के

10:48

अंदर लिखा होता है। कोई भी 5 7 10 आपको

10:51

याद कर लेने हैं। देखो कितने सारे 20

10:53

पॉइंट्स हैं। ठीक है? परफेक्ट। बढ़िया सर।

10:57

अब बेटा पार्टनरशिप डीड क्यों इंपॉर्टेंट

11:00

है? पार्टनरशिप डीड बेटा इसलिए इंपॉर्टेंट

11:02

है। देखो पहले बोल रहा है कि लॉ कंपलसरी

11:04

नहीं करता लेकिन बोलता है कि होगा तो

11:06

अच्छा है। है ना? क्यों? क्योंकि ये आपकी

11:09

राइट्स, ड्यूटीज, लायबिलिटीज़ के बारे में

11:11

बताता है। कोई भी मिसअंडरस्टैंडिंग नहीं

11:13

होती। अगर कोई डिस्प्यूट होगा भी तो डीड

11:16

को पढ़ के आसानी से वो डिस्प्यूट सॉल्व

11:18

किया जा सकता है। तो हमेशा बोला जाता है

11:20

कि रिटन डीड हो तो बहुत अच्छी बात है। अगर

11:23

डीड नहीं होगी तो क्या रूल्स चलेंगे बेटा?

11:25

रूल्स मैंने आपको बताए हुए हैं। प्रॉफिट्स

11:27

और लॉसेस कैसे बटेंगे? बराबर-बराबर।

11:29

इंटरेस्ट ऑन कैपिटल नहीं मिलेगा। इंटरेस्ट

11:31

ऑन ड्रॉइंग्स चार्ज नहीं होगा। कोई सैलरी

11:33

वगैरह नहीं मिलेगी। इंटरेस्ट ऑन लोन फर्म

11:35

पे करेगी 6% के हिसाब से। जाए फर्म को

11:39

लॉसेस भी क्यों ना हो। ठीक है? उसके बाद

11:42

बिना कंसेंट के सारे पार्टनर्स के कंसेंट

11:45

के कोई भी न्यू पार्टनर एडमिट नहीं हो

11:47

सकता।

11:51

परफेक्ट। बिना डीड के बच्चों हर पार्टनर

11:53

बिज़नेस में कंडक्ट कर सकता है और बिनेस की

11:56

बुक्स को इंस्पेक्ट भी कर सकता है। देन वी

11:59

हैव पीएंडएल एप्रोप्रिएशन अकाउंट का

12:00

क्या-क्या फीचर्स हैं बच्चों? पीएंडएल

12:02

एप्रोप्रिएशन अकाउंट। पीएंडएल का

12:04

एक्सटेंशन कहलाता है। यह पार्टनरशिप

12:06

फर्म्स बनाती है। सिर्फ और कोई नहीं

12:08

बनाता। नॉमिनल अकाउंट है डेबिट ऑल

12:10

एक्सपेंसेस, क्रेडिट ऑल इनकम्स एंड गेंस।

12:12

उसके बाद बच्चों हमारे पास इसका काम क्या

12:14

है? प्रॉफिट को डिस्ट्रीब्यूट करना। और

12:16

जितनी भी एंट्रीज हैं वो पार्टनरशिप डीड

12:19

के हिसाब से करी जाती है। इसके बाद आता है

12:22

बच्चों रिकॉन्स्टिट्यूशन किसको बोलते हैं?

12:24

रिकॉनस्टिट्यूशन बोलते हैं जब पुराना

12:26

एग्रीमेंट खत्म हो जाए और नया एग्रीमेंट

12:28

पिक्चर में आए उसको हम रिकॉन्स्टिट्यूशन

12:30

बोलते हैं। बोल रहा है पार्टनरशिप इज़ अ

12:32

रिजल्ट ऑफ़ एग्रीमेंट बिटवीन पर्संस जो

12:34

प्रॉफिट को बांटेंगे। अगर कोई भी चेंज

12:36

होगा एग्रीमेंट में तो पुराने वाला खत्म

12:39

होगा और नया एग्रीमेंट बनेगा। इसी को हम

12:41

रिकॉन्स्टिट्यूशन बोलते हैं।

12:42

रिकॉन्स्टिट्यूशन कब-क होता है? बस ये याद

12:44

रखना। कब-कब होता है? चेंज इन पीएसआर हो

12:47

जब रेश्यो चेंज हो। ये आपका चैप्टर भी है।

12:49

जब एडमिशन हो ये भी आपका चैप्टर है। जब

12:52

रिटायरमेंट हो ये भी आपका चैप्टर है। किसी

12:54

पार्टनर की डेथ हो जाए ये भी आपका चैप्टर

12:56

है। तो चार तो आपके चैप्टर्स ही हैं जब

12:58

रिकॉन्स्टिट्यूशन होगा। चेंज इन पीएसआर

13:01

एडमिशन, रिटायरमेंट, डेथ। लेकिन सीबीएसई

13:04

पूछता है पांचवा बताओ क्या है? तो वो है

13:06

एमल्गमेशन। ध्यान रखना। एमल्गमेशन का मतलब

13:09

होता है बच्चों जब दो फर्म्स मिलके एक

13:12

फर्म बनाती है उसको एमल्गमेशन बोल देते

13:14

हैं। डन। अच्छा जी। चेंज इन प्रॉफिट

13:17

शेयरिंग रेशियो में क्या-क्या

13:18

एडजस्टमेंट्स होती हैं? तो ऐसे ही है। कुछ

13:20

काम का नहीं है। सैक्रिफाइजिंग रेशियो का

13:21

फार्मूला याद रखना। ओल्ड माइनस न्यू।

13:23

गेनिंग का न्यू माइनस ओल्ड। चलो गुडविल

13:26

क्या होता है सर? गुडविल की डेफिनेशन याद

13:28

रखनी है बच्चों। ये लॉर्ड एल्डन वाली

13:30

डेफिनेशन याद कर लेना। एग्जाम में आएगा तो

13:32

यही लिख के आना। गुडविल क्या है? गुडविल

13:34

इज़ नथिंग मोर देन द प्रोबेबिलिटी। गुडविल

13:36

एक प्रोबेबिलिटी है। दैट ओल्ड कस्टमर्स

13:38

विल रिसोर्ट टू ओल्ड प्लेस। कि पुराना

13:40

कस्टमर वापस उसी दुकान पे आएगा जिससे उसने

13:43

पहले सामान लिया था। वो क्यों आ रहा है?

13:46

क्योंकि आपने गुडविल बनाई है, रेपुटेशन

13:48

बनाई है। फीचर्स क्या हैं गुडविल के?

13:50

इनटेंजिबल एसेट है। यानी आप जो गुडविल है

13:53

उसको देख नहीं सकते। आप सिर्फ उसको फील कर

13:55

सकते हो। वैल्यूुएबल एसेट है। इसकी वैल्यू

13:58

लग सकती है। ये बिनेस को ज्यादा पैसा

14:00

कमाने में हेल्प करता है एक नॉर्मल बिज़नेस

14:02

से। इसकी वैल्यू कॉन्सेंटली ऊपर नीचे ऊपर

14:05

नीचे होती रहती है। ठीक है बेटा? देखो बोल

14:08

रहा है व्हाइल गुडविल डज़ नॉट डेप्रिशिएट।

14:10

ये डेप्रिशिएट नहीं होता। लेकिन फिर भी

14:12

वैल्यू टाइम के साथ ऊपर नीचे ऊपर नीचे

14:15

होती रहती है अर्निंग्स के हिसाब से। ठीक

14:17

है? इट इज़ वैल्यूुएबल ओनली व्हेन द एंटायर

14:20

बिज़नेस इज़ सोल्ड। गुडविल को हम पार्ट्स

14:22

में नहीं बेच सकते। ये तभी चलेगी जब

14:24

बिज़नेस पूरा का पूरा बेचा जाएगा। ठीक है?

14:27

क्या गुडविल की हम एग्जैक्ट वैल्यू लगा

14:29

सकते हैं?

14:30

नहीं। नेचर ऑफ़ गुडविल क्या है बच्चों?

14:33

गुडविल एक इंटेंजिबल एसेट है। ध्यान रखना।

14:35

एग्जाम में कई बार लिखा आता है गुडविल इज़

14:37

अ फिक्टीशियस एसेट। ट्रू और फॉल्स। तो आप

14:39

बोलोगे फॉल्स। फिक्टिशियस नहीं है,

14:42

इनटेंजिबल है। ठीक है? उसके बाद कौन-कौन

14:45

सी चीजों से गुडविल इंपैक्ट होता है? सबसे

14:47

पहले लोकेशन। आपका लोकेशन अच्छा है या

14:50

नहीं है? लोकेशन अच्छा है तो गुडविल जल्दी

14:52

बनेगा। दूसरा एफिशिएंसी मैनेजमेंट कितना

14:54

एफिशिएंट है। जितना एफिशिएंट मैनेजमेंट

14:57

होगा उतना ज्यादा प्रॉफिट कमाओगे, उतना

14:59

गुडविल ज्यादा होगा। बिनेस को चलते हुए

15:02

कितना टाइम हो गया है? लोंजिविटी ऑफ़ द

15:04

बिज़नेस कितना टाइम हो चुका है। जितने समय

15:06

से बिज़नेस चल रहा होगा, उतना रेपुटेशन

15:08

ज्यादा होगा बिज़नेस का। नेचर ऑफ द गुड्स

15:10

कौन सा बिजनेस कौन से गुड्स में डील करता

15:13

है? अगर वो डेली यूज़ के गुड्स हैं तो फिर

15:15

उनके अच्छे प्रॉफिट्स बन रहे होंगे। तो

15:17

इनकी डिमांड स्टेबल रहती है। तो इनकी

15:19

ज्यादा गुडविल होती है। लेकिन फैंसी गुड्स

15:22

हैं अगर तो डिमांड ऊपर नीचे होती है तो

15:24

फिर गुडविल भी इतनी स्टेबल नहीं होती।

15:26

लाइसेंस है या नहीं है? अगर आपके पास

15:28

लाइसेंस है तो गुडविल ज्यादा होगी।

15:29

लाइसेंस नहीं है तो गुडविल ज्यादा नहीं

15:31

होगी। ठीक है? अगर आपकी मोनोपोली है तो

15:34

पक्के प्रॉफिट्स होंगे तो गुडविल ऑफ कोर्स

15:36

होगी ही होगी। है ना?

15:39

रिस्क इनवॉल्वड अगर ज्यादा रिस्क है तो

15:41

गुडविल भी कम होगी। ऊपर नीचे होगी। तो

15:44

बहुत सारे फैक्टर्स हैं। कोई भी पांच

15:46

फैक्टर्स आपको याद होने चाहिए। ठीक है?

15:49

इसका भी स्क्रीनशॉट ले

15:51

लो। ट्रेंड ऑफ प्रॉफिट कैसा है? फ्यूचर

15:54

में कंपटीशन है या नहीं है? कैपिटल कितनी

15:56

लगी हुई है? राइट? तो ये सब आपको पता होने

15:59

चाहिए। अब गुडविल कौन-कौन सी होती है?

16:01

परचेस्ड और सेल्फ जनरेटेड। परचेस्ड कौन सी

16:04

होती है? जिसका आप पैसा देते हो जो बुक्स

16:05

ऑफ़ अकाउंट्स में दिखाई देती है जिसको आप

16:07

राइट ऑफ करते हो हर चैप्टर में। है ना? और

16:09

सेल्फ जनरेटेड आपकी खुद की गुडविल। इसको

16:11

इनहेरेंट गुडविल भी बोल देते हैं। तो

16:14

परचेस्ड गुडविल आपको नॉर्मली कैसे देखने

16:17

को मिलता है? गुडविल कैसे निकालते हो?

16:20

देखो, बोल रहा है एसेट्स माइनस लायबिलिटीज़

16:22

इज़ रेफर्ड टू एज़ परचेस्ड गुडविल। सर, ऐसे

16:25

कैसे? भाई, देखो, सीधी-सीधी सी बात है।

16:31

आपने जो पेमेंट करा

16:34

है ये लाइन ध्यान रखना। द एक्सेस ऑफ परचेस

16:39

कंसीडरेशन ओवर नेट एसेट्स। इसको हम गुडविल

16:43

बोलते हैं। एक्सेस ऑफ़ परचेस कंसीडरेशन ओवर

16:45

नेट एसेट्स। नेट एसेट्स हैं ये एसेट्स

16:47

माइनस लायबिलिटी। सपोज़ ₹10 के एसेट है। ₹3

16:51

की लायबिलिटी है तो बिज़नेस ₹7 का हो गया।

16:53

नेट एसेट ₹7 के हो गए। और आपने खरीदा है

16:57

इसको परचेस कंसीडरेशन है ₹9 का। तो सात

17:01

वाली चीज के आप नौ दे रहे हो तो ₹2 किस

17:04

चीज के दे रहे हो? वो गुडविल है। ठीक है?

17:06

तो परचेस गुडविल कैसे कैलकुलेट होती है? द

17:09

एक्सिस ऑफ़ परचेस कंसीडरेशन ओवर नेट

17:12

एसेट्स। सही है? ये ध्यान लाइन ध्यान

17:15

रखना। ये आपको एमसीक्यू में देखने को मिल

17:17

सकती है। फीचर्स बताओ परचेस गुडविल के। जब

17:20

आप परचेस खरीद जब आप बिनेस परचेस करते हो

17:23

तब आपको देखने को मिलेगी। बुक्स ऑफ

17:26

अकाउंट्स में हमारे पास ये रिकॉर्ड करी

17:28

जाती है। ठीक है? बैलेंस शीट में एसेट के

17:30

तरीके से दिखाई जाती है और इसको अमोरेटाइज

17:33

कर दिया जाता है एट द अर्लियस्ट। सही है

17:36

जी। सेल्फ जनरेटेड कौन सी होती है? जो

17:37

सेल्फ जनरेटेड गुडविल आपकी खुद की होती

17:39

है। वो हमने पीछे पढ़ ली। इंटरनली जनरेट

17:42

होती है। अकाउंटिंग स्टैंडर्ड 26 इंडिया

17:45

ईएस 36 अ 38 इनटेंजिबल एसेट ये बोलता है

17:48

कि इसको रिकॉर्ड नहीं करना। ये अकाउंटिंग

17:50

स्टैंडर्ड और इंडिया ईएस याद रखना। ठीक

17:53

है? गुडविल को कब-कब वैल्यू करा जाएगा

17:56

बच्चों ये आप जानते हो। जब प्रॉफिट

17:58

शेयरिंग रेशियो चेंज होगा या न्यू पार्टनर

18:00

आएगा या पार्टनर की रिटायरमेंट डेथ होगी

18:02

या फर्म बेची जाएगी या फर्म का अमेल्गमेशन

18:04

होगा। ठीक है? मेथड्स क्या-क्या हैं? ये

18:07

सब हमने पढ़ लिया है। एवरेज प्रॉफिट, सुपर

18:09

प्रॉफिट, कैपिटलाइजेशन। इसमें तो बस

18:11

फार्मूलाज़ हैं। ठीक

18:18

है? इसके बाद बच्चों बोल रहा है एडमिशन

18:21

में जब एक पार्टनर का एडमिशन होता है, तो

18:23

उसको क्या-क्या राइट्स मिलते हैं? सबसे

18:25

पहला राइट्स कि वो प्रॉफिट शेयर करेगा।

18:27

दूसरा राइट्स वो एसेट्स के ओनरशिप भी शेयर

18:31

करने वाला है। ठीक है? लेकिन उसके साथ-साथ

18:33

वो लायबल भी हो जाएगा लायबिलिटी के लिए।

18:36

ये भी डन है सर। एडमिशन में क्या-क्या

18:38

करते हो आप? ये सब आपको पता ही है। इसमें

18:41

कुछ खास काम नहीं है। इसके बाद बेटा हमारे

18:45

पास लिखा हुआ है रिटायरमेंट ऑफ़ अ पार्टनर।

18:47

जब एक रिटायरिंग पार्टनर होगा तो वो

18:49

क्या-क्या लेके जाएगा? अपना गुडविल का

18:51

हिस्सा, अपना रिजर्व्स का हिस्सा, अपना

18:54

रिवैल्यूएशन में प्रॉफिट या लॉस। ये सब

18:56

चीजें ठीक है। क्या-क्या पढ़ना है हमें

18:57

रिटायरमेंट में? ये आ गया। इसके बाद हमारे

19:00

पास आता है बच्चों डिसोल्यूशन। कि

19:02

डिसोल्यूशन का क्या मतलब है? क्या फर्क

19:06

है? तो देखो दो चीजें हैं। डिसोल्यूशन ऑफ़

19:09

पार्टनरशिप और डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप

19:10

फर्म। डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप का मतलब

19:13

होता है बस पार्टनरशिप का खत्म होना।

19:15

पुराने एग्रीमेंट का खत्म होना। उसको हम

19:17

डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप बोलते हैं।

19:18

डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप फर्म का क्या

19:20

मतलब होता है? बिनेस का ही बंद हो जाना।

19:22

तो ध्यान रखना बिज़नेस बंद होने के लिए

19:24

पार्टनरशिप फर्म का डिॉल्व होना जरूरी है।

19:27

पुराना एग्रीमेंट खत्म। नया एग्रीमेंट बन

19:28

रहा है वो डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप है।

19:30

देखो लिखा हुआ है डिसोल्यूशन ऑफ़

19:32

पार्टनरशिप मींस टर्मिनेशन ऑफ़ ओल्ड

19:33

पार्टनरशिप एग्रीमेंट और नया बनेगा। राइट?

19:36

जबकि डिसोल्यूशन ऑफ़ फर्म मींस क्लोज्ड

19:39

डाउन ऑफ द बिनेस। ठीक है बेटा? डिसोल्यूशन

19:42

जो

19:43

है पार्टनरशिप का पार्टनरशिप का मतलब

19:47

पुराना एग्रीमेंट खत्म कब-कब होगा अगर

19:49

रेशो चेंज होगा एडमिशन होगा रिटायरमेंट

19:52

होगा किसी बिनेस को निकाल दिया जाएगा

19:54

एक्सपशन होगा किसी पार्टनर की डेथ होगी

19:57

इनसॉल्वेंसी होगी किसी पार्टनर की या फिर

20:00

पार्टनरशिप का टाइम पीरियड खत्म हो गया

20:02

क्योंकि फिक्स्ड टाइम पीरियड वाली

20:03

पार्टनरशिप भी तो होती है वो खत्म हो गया

20:05

तब भी पुराना खत्म फिर नया बनेगा लेकिन

20:08

फर्म कब बंद होगी अब देखो बच्चों फर्म

20:11

फर्म बंद करने के क्या-क्या तरीके हैं?

20:13

सबसे पहले विदाउट द इंटरवेंशन ऑफ कोर्ट

20:16

जिसमें आपको कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। खुद

20:19

ही फर्म बंद हो जाएगी। कब? बाय म्यूचुअल

20:21

एग्रीमेंट। आपने अपने हिसाब से खुद ही

20:24

एग्रीमेंट करके डिॉल्व कर दिया कि हमने

20:26

बिज़नेस करा था। अब हमने बहुत कर लिया। अब

20:29

नहीं चला पा रहे। बस बंद कर दो। तो

20:30

म्यूचुअली कर दिया। इसमें कोर्ट की जरूरत

20:32

नहीं पड़ती। कंपलसरीली डिसोल्यूशन।

20:34

कंपलसरीली कब होता है? जब सारे के सारे

20:37

पार्टनर जो हैं वो इनसॉल्वेंट हो जाए।

20:40

सारे के सारे पार्टनर जो हैं वो

20:42

इनसॉल्वेंट हो जाए या फिर बिजनेस अनलॉफुल

20:45

हो जाए तो भी यह क्या हो

20:49

जाएगा? बिनेस डिॉल्व हो जाएगा या फिर कोई

20:53

इवेंट हो जाए। क्या इवेंट हो जाए? पार्टनर

20:56

कोई इनसॉल्वेंट हो जाए। डेथ हो जाए किसी

20:58

पार्टनर की। आपका जो ऑब्जेक्ट है वो

21:01

फुलफिल हो जाए या टाइम पीरियड एक्सपायर हो

21:03

जाए। है ना? या नोटिस देके भी आप लोग अगर

21:06

चाहो तो पार्टनरशिप को डिॉल्व कर सकते हो।

21:10

ठीक है जी। परफेक्ट। अब कोर्ट कब ऑर्डर

21:13

देता है? तो सबसे पहले तो आप ये ध्यान

21:15

रखना कि बिना कोर्ट के इंटरवेंशन के कब कब

21:18

हो सकता है? म्यूचुअल एग्रीमेंट से।

21:20

कंपलसरी हो सकता है कब? जब सारे पार्टनर्स

21:23

या कोई एक पार्टनर इनसॉल्वेंट हो जाए। या

21:25

फर्म का जो बिजनेस है वो अनलॉफुल हो जाए।

21:28

या इसमें से कोई एक इवेंट हो जाए,

21:29

इनसॉल्वेंसी हो जाए, डेथ हो जाए पार्टनर

21:31

की। ऑब्जेक्ट जिसके लिए पार्टनरशिप बनाई

21:33

थी वो फुलफिल हो जाए। टाइम पीरियड

21:35

एक्सपायर हो जाए। राइट? अच्छा कोर्ट को कब

21:38

आना पड़ता है? कोर्ट में जाके कब

21:40

पार्टनरशिप डिॉल्व होती है? कोर्ट में

21:42

जाके पार्टनरशिप डिॉल्व होती है बेटा? जब

21:44

कोई पार्टनर अनसाउंड माइंड हो जाए। पागल

21:47

हो जाए तो फिर बाकी पार्टनर कोर्ट में

21:49

जाते हैं। जज साहब को बोलते हैं कि साहब

21:51

ये तो अनसाउंड माइंड है। अब इससे

21:52

एग्रीमेंट भी नहीं कर पा रहे। आप ही ऑर्डर

21:54

दो। इसको बंद कराओ। ठीक है? जब एक पार्टनर

21:57

कुछ सूट फाइल कर दे कि मैं तो इनकैपेबल

22:00

हूं। मैं अपनी ड्यूटी नहीं निभा सकता।

22:02

कोर्ट में जाके बोल दे तो फिर जज साहब

22:04

बोलेंगे ठीक है बिज़नेस बंद करो। ऐसा हो

22:05

सकता है। जब एक पार्टनर मिसकंडक्ट करता

22:09

हुआ पाया जाए कि भैया ये नुकसान कर सकता

22:12

है पार्टनरशिप में और खुद से जा नहीं रहा

22:14

तो बाकी पार्टनर कोर्ट में जाके बोलेंगे

22:16

जज साहब इसको प्लीज बंद करा दो है ना? कोई

22:18

ब्रीच कर दे पार्टनर एग्रीमेंट का।

22:20

एग्रीमेंट तोड़ दे। ब्रीच का मतलब होता है

22:22

तोड़ना। एग्रीमेंट को फॉलो ना करना। ठीक

22:25

है? या फिर अपना पूरा का पूरा हित किसी

22:27

तीसरी पार्टी को बेच दे। अपना शेयर किसी

22:30

थर्ड पार्टी को बेच दे या कोर्ट को लगे कि

22:32

भाई बिजनेस में लॉस ही हो रहे हैं। बिजनेस

22:34

में प्रॉफिट कभी होने ही नहीं वाले। तब भी

22:36

कोर्ट ऑर्डर दे सकता है कि बंद कर दो। ठीक

22:39

है? परफेक्ट। तो ये सब कोर्ट के ऑर्डर्स

22:41

पे बिनेस बंद हो सकता है। ठीक हो गया

22:45

बेटा? उसके बाद एक बेसिक सा डिफरेंस है।

22:48

डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप में सिर्फ

22:50

एग्रीमेंट चेंज होगा। फर्म में फर्म ही

22:52

बंद हो जाएगी। इसमें बिज़नेस चलता रहता है।

22:54

उसमें बिज़नेस नहीं चलता। ठीक है? इसमें जो

22:57

पार्टनर्स के रिलेशन है वो नए फॉर्म में

22:59

बनेंगे। वहां पे रिलेशंस खत्म हो जाते

23:01

हैं। यहां पे बुक्स ऑफ अकाउंट्स क्लोज

23:03

नहीं होती वहां पे क्लोज होती हैं। यहां

23:06

पे एसेट्स और लायबिलिटीज़ को बेचते नहीं

23:08

है। बस रिवैल्यू करते हैं। प्रॉफिट्स और

23:10

लॉसेस को डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। वहां पे

23:12

एसेट्स और लायबिलिटीज़ का सेटलमेंट फाइनल

23:14

कर दिया जाता है। ठीक है? डिसोल्यूशन ऑफ़

23:17

पार्टनरशिप से जरूरी नहीं है कि फर्म भी

23:19

बंद होगी। लेकिन फर्म से ऑफ कोर्स

23:20

पार्टनरशिप भी बंद हो जाएगी। इसके अंदर

23:23

कोई कोर्ट का इंटरवेंशन नहीं है। वहां पे

23:25

कोर्ट का इंटरवेंशन हो सकता है।

23:27

डिसोल्यूशन के अकाउंट्स कैसे सेटल करते

23:29

हैं बच्चों? इस बात का भी प्लीज ध्यान

23:31

रखना। बहुत ध्यान से। बहुत बहुत ध्यान से।

23:34

देखो क्या बोल रहा है? सेक्शन 48 ये चीज

23:38

आपसे पूछ सकता है थ्योरी में। सेक्शन 48

23:41

ने ये बताया है कि मोड ऑफ सेटलमेंट क्या

23:44

रहने वाला है? क्या-क्या मोड ऑफ सेटलमेंट

23:47

रहने वाला है? सबसे पहले ध्यान रखना द

23:50

अमाउंट ऑफ लॉस इंक्लूजिंग द डेफिशिएंसी ऑफ़

23:53

द कैपिटल शैल बी पेड आउट ऑफ प्रॉफिट। सबसे

23:56

पहले तो आपको जो भी कैपिटल पेमेंट करना है

23:58

या जो भी पेमेंट करना है वो आउट ऑफ

24:00

प्रॉफिट होगा। उसके बाद आउट ऑफ कैपिटल

24:03

होगा। और लास्टली अगर फिर भी पैसा कम पड़

24:07

गया तो पार्टनर अपने घर से लेके आएंगे।

24:09

यानी आपको कोई भी पेमेंट करना है लॉस का

24:12

तो सबसे पहले प्रॉफिट में से होगा।

24:14

प्रॉफिट कम पड़ गया तो कैपिटल में से

24:15

होगा। वो भी कम पड़ गया तो फिर पार्टनर्स

24:17

घर से लेके आएंगे। पैसा तो देना ही है। है

24:19

ना? उसके बाद अमाउंट रियलाइज़्ड फ्रॉम द

24:21

सेल ऑफ़ एसेट। जो आप एसेट बेचोगे उससे जो

24:24

पैसा आएगा सॉरी जो आप एसेट बेचोगे उससे जो

24:29

पैसा आएगा वो कैसे यूटिलाइज़ होगा? सबसे

24:32

पहले उस पैसे से कर्जे चुकाए जाएंगे। उसके

24:36

बाद अगर कोई लोंसवों्स हैं वो पे करे

24:38

जाएंगे। है ना? पार्टनर्स के लोंस पे करे

24:41

जाएंगे। यानी सबसे पहले तो आउटसाइडर का

24:43

पैसा। उसके बाद जो पार्टनर से लोन लिए हुए

24:46

हैं वो चुकाए जाएंगे। उसके बाद पार्टनर का

24:48

कैपिटल का पेमेंट करा जाएगा। उसके बाद कुछ

24:51

बच गया तो पार्टनर्स आपस में बांट लेंगे।

24:54

ये ऑर्डर ध्यान रखना। पहले आउटसाइड डेप्ट

24:56

को चुकाया जाएगा। फिर पार्टनर्स के लोन को

24:58

चुकाया जाएगा। फिर पार्टनर्स का कैपिटल पे

25:00

करा जाएगा और फिर भी कुछ बच गया तो

25:01

प्रॉफिट्स के फॉर्म में बांट लेंगे। ठीक

25:03

है बेटा? उसके बाद आ रहा है फर्म के कर्जे

25:07

और प्राइवेट कर्जे। इसमें क्या फर्क होता

25:09

है? देखो डेप्ट जो फर्म ने पे करने हैं

25:11

उसको हम फर्म डेप्ट बोलते हैं। और जो

25:13

पार्टनर ने अपनी कैपेसिटी में पे करने हैं

25:15

उसको हम प्राइवेट डेप्ट्स बोल देते हैं।

25:19

ठीक हो गया बेटा? ओके परफेक्ट। डन सर ये

25:23

बात तो समझ गए।

25:26

डन। ये एक छोटा सा डिफरेंस है। ये तो बस

25:29

रीड ओनली है। वैसे एक बार पढ़ लेना।

25:31

क्या-क्या बनता है इसमें रियलाइजेशन लोन

25:34

अकाउंट दोनों तरीके का। पार्टनर कैपिटल

25:35

अकाउंट, कैश और बैंक अकाउंट। चलो। जनरल

25:39

एंट्रीज तो हमने अलग से पढ़ी हुई है

25:42

सारी। जनरल एंट्रीज की हमें जरूरत नहीं

25:50

है। इसके बाद बच्चों हमारे पास आता है

25:53

कंपनी क्या है? व्हाट इज अ कंपनी? जो हम

25:56

कंपनी में मेनली थ्योरी पढ़ते हैं। तो

25:58

कंपनी की डेफिनेशन याद रखना बच्चों। सबसे

26:00

पहले आर्टिफिशियल पर्सन है जो लॉ से बना

26:02

है। यानी कि रजिस्ट्रेशन होगा तो ही

26:04

बनेगा। सेपरेट लीगल एंटिटी है। परपचुअल

26:06

सक्सेशन है। कॉमन सील है। सेपरेट लीगल

26:09

एंटिटी का मतलब कंपनी अलग है। उसके ओनर्स

26:11

अलग हैं। कंपनी अपने नाम से एग्रीमेंट कर

26:14

सकती है। संपत्ति खरीद सकती है। किसी के

26:16

ऊपर केस कर सकती है। कुछ भी कर सकती है

26:18

कंपनी। सेपरेट लीगल एंटिटी है। ठीक है?

26:19

परपचुअल सक्सेशन मेंबर्स आते-जाते रहेंगे।

26:22

कंपनी फॉरएवर चलेगी। कॉमन सील सिग्नेचर को

26:24

बोलते हैं। ठीक है? कंपनी आर्टिफिशियल

26:26

पर्सन होगी। सेपरेट लीगल एंटिटी होगी।

26:29

सेपरेट लीगल एंटिटी का मतलब अपने नाम से

26:31

बैंक अकाउंट खोल सकती है। अपने नाम से

26:33

संपत्ति खरीद सकती है। किसी भी

26:34

कॉन्ट्रैक्ट में एंटर कर सकती है। परपचुअल

26:37

एकिस्टेंस है। किसी भी मेंबर की डेथ हो

26:40

जाए, रिटायरमेंट हो जाए, पागल हो जाए,

26:41

इनॉल्वेंट हो जाए, कंपनी को फर्क नहीं

26:43

पड़ता। कंपनी चलती रहेगी। लिमिटेड

26:46

लायबिलिटी कंपनी की जो लायबिलिटी है, आपने

26:48

जितना पैसा लगाया है, उतनी ही है। बस आपकी

26:50

लायबिलिटी कंपनी के टवर्ड्स उतनी ही है।

26:52

सपोज मैंने ₹10 लगाए हैं और मैंने आठ दे

26:55

दिए हैं। तो बस मैं ₹2 के लिए और लायबल

26:57

हूं। उससे ज्यादा के लिए लायबल नहीं हूं।

26:59

कॉमन सील सिग्नेचर को बोलते हैं क्या

27:01

कंपनी में हम शेयर्स को ट्रांसफर कर सकते

27:04

हैं? बिल्कुल कर सकते हैं प्राइवेट कंपनीज़

27:06

को छोड़ के। तो प्राइवेट कंपनीज़ में

27:08

शेयर्स ट्रांसफर नहीं होते। पब्लिक कंपनीज़

27:10

में हो जाते हैं। कंपनी में बच्चों

27:12

मैनेजमेंट अलग है। ओनरशिप अलग है। ठीक है?

27:15

कितने तरीके की कंपनीज़ होती हैं बेटा?

27:17

अनलिमिटेड कंपनी, कंपनी लिमिटेड बाय

27:20

गारंटी, कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स।

27:22

अनलिमिटेड का मतलब क्या है? जिसके अंदर जो

27:25

लायबिलिटी ऑफ़ द पार्टनर्स हैं वो

27:26

अनलिमिटेड है। ठीक है? यह हमें जनरली कम

27:30

देखने को मिलती है। जनरली कम देखने को

27:32

मिलती है। ठीक है? उसके बाद कंपनी लिमिटेड

27:35

बाय गारंटी। इसमें क्या होता है कि

27:37

लायबिलिटी आपने जितनी गारंटी करी है उतनी

27:40

होती है कि मैंने गारंटी कर दी कि भैया

27:42

कंपनी को अगर लॉस होगा तो ₹25 लाख तक की

27:45

गारंटी मेरी है। मैं लायबल हूं। यह होती

27:48

है कंपनी लिमिटेड बाय गारंटी। और यह हमें

27:50

सबसे ज्यादा देखने को मिलती है कंपनी

27:52

लिमिटेड बाय शेयर्स। प्राइवेट कंपनी जिसके

27:54

अंदर सिर्फ प्राइवेट हाउसहोल्ड्स होंगे।

27:56

उन्होंने पैसा लगाया है। जितना-जितना उनका

27:58

अनपेड कैपिटल है उतना लायबल है। पब्लिक

28:01

कंपनी जिसके अंदर जनता पैसा लगाती है।

28:03

पब्लिक में शेयर्स बेचे जाते हैं। और

28:05

ओपीसी यानी वन पर्सन कंपनी जिसमें एक ही

28:07

इंडिविजुअल जैसे सोल प्रोपराइटर होता है

28:10

बस वो खुद को एज अ कंपनी रजिस्टर कर देता

28:12

है। उसको हम वन पर्सन कंपनी बोलते हैं। तो

28:14

ध्यान रखना अनलिमिटेड कंपनी कौन सी होती

28:16

है? जिसके अंदर कोई लिमिट नहीं होती

28:19

लायबिलिटी की ऑफ़ द मेंबर्स पे। बहुत

28:21

ज्यादा रिस्क होता है। तो दीज़ आर नॉट

28:23

फाउंड इन इंडिया। कंपनी लिमिटेड बाय

28:25

गारंटी में आपने जितने की गारंटी करी है

28:28

बस उतने के लिए ही आप लायबल हो। और कंपनी

28:30

लिमिटेड बाय शेयर्स में तो शेयर्स के ऊपर

28:32

डिपेंड करता है। अब आ गया प्राइवेट कंपनी

28:34

और पब्लिक कंपनी। ठीक है? ये स्क्रीनशॉट

28:37

लो। मैं आपको डिफरेंस नीचे से समझाता हूं।

28:40

देखो प्राइवेट कंपनी में ध्यान रखना

28:42

मिनिमम दो मैक्सिमम 200 मेंबर्स होंगे। दो

28:45

से 200 पब्लिक में सेवन से अनलिमिटेड। ये

28:48

ध्यान रखना। क्लास 11th में पढ़ा होगा

28:50

लेकिन फिर से एक बार रिवाइज़ कर लो। क्या

28:51

प्राइवेट कंपनी पब्लिक से पैसा रेज कर

28:54

सकती है? नहीं। इट कैन नॉट इनवाइट पब्लिक।

28:56

पब्लिक कंपनी कर सकती है। क्या प्राइवेट

28:58

कंपनी के शेयर्स ट्रांसफर हो सकते हैं?

29:00

नहीं हो सकते। पब्लिक के हो सकते हैं।

29:02

क्या प्राइवेट कंपनी को आर्टिकल्स बनाना

29:05

नेसेसरी होता है? बिल्कुल नेसेसरी होता

29:06

है। वहां पे नेसेसरी नहीं है। ठीक है?

29:09

नंबर ऑफ़ डायरेक्टर्स जिसमें कम से कम दो

29:11

उसमें कम से कम तीन। ये बहुत इंपॉर्टेंट

29:13

है। अपने नाम के पीछे प्राइवेट कंपनी

29:16

प्राइवेट लिमिटेड लगाएगी और पब्लिक कंपनी

29:18

खाली लिमिटेड लगाएगी। ओपीसी क्या होता है

29:20

बच्चों? वन पर्सन कंपनी ध्यान रखना ये

29:23

2013 से ही आया। उससे पहले नहीं होता था।

29:25

तो कंपनीज़ एक्ट 2013 ने एक नई एंटिटी को

29:27

एक्सिस्ट करा जिसका नाम है ओपीसी। वन

29:30

पर्सन कंपनी जिसमें एक ही मेंबर होगा। ठीक

29:32

है? अब मेंबर कौन होना चाहिए भाई? अ मेंबर

29:36

हु इज़ एन इंडियन सिटीजन एंड रेजिडेंट।

29:38

यानी कोई आउटसाइडर नहीं हो सकता। इंडियन

29:40

सिटीजन होना चाहिए। इंडियन रेजिडेंट भी

29:42

होना चाहिए। ठीक

29:43

है? बढ़िया सर। इसका पेड अप कैपिटल शुड नॉट

29:47

एक्सीड ₹ लैक्स। और इसका टर्नओवर ऑफ़ थ्री

29:50

इयर्स शुड नॉट एक्सीड ₹ करोड़। एवरेज एवरेज

29:54

टर्नओवर बच्चों ₹2 करोड़ से ऊपर नहीं जाना

29:56

चाहिए। तो पेड अप शेयर कैपिटल याद रखना 50

29:58

लाख और टर्नओवर जो है एवरेज पिछले तीन

30:01

सालों का 2 करोड़ से ऊपर नहीं जाना चाहिए।

30:05

दूसरा ओपीसी चैरिटेबल पर्पस के लिए नहीं

30:07

बन सकता। सिर्फ बिज़नेस के लिए ही बनेगा।

30:10

क्या ओपीसी खुद को कन्वर्ट कर सकता है

30:12

पब्लिक या प्राइवेट कंपनी में? 2 साल से

30:14

पहले नहीं कर सकता। 2 साल के बाद कर

30:16

पाएगा। ठीक है बेटा। अच्छा जी।

30:25

लेकिन सर अगर पहले ही ये लिमिट क्रॉस हो

30:28

जाए। अगर ये 50 लाख से ऊपर जा रहा है या

30:30

टर्नओवर 2 करोड़ से ऊपर जा रहा है फिर तब

30:32

हो जाएगा। ठीक है। बढ़िया सर। इसके बाद

30:37

बेटा हमारे पास लिस्टेड और अनलिस्टेड

30:39

कंपनी कौन सी होती है? लिस्टेड कंपनी वो

30:42

होती हैं जिसके शेयर्स किसी भी स्टॉक

30:44

एक्सचेंज पे लिस्टेड हैं। वो पब्लिक को

30:46

शेयर्स इशू करती है। अनलिस्टेड वो होती है

30:48

यानी जिसके शेयर्स अभी तक लिस्टेड नहीं

30:51

है। ठीक

30:53

है? मीनिंग ऑफ शेयर्स। शेयर्स आप समझते

30:56

हो। शेयर्स क्या होता है? जो टोटल कैपिटल

30:57

ऑफ द कंपनी है, उसको छोटे पार्ट्स में

30:59

बांटा जाता है। तो उसको शेयर्स बोलते हैं।

31:01

शेयर्स कौन-कौन से होते हैं? प्रेफरेंस

31:03

शेयर्स, इक्विटी शेयर्स। ये भी आपको पता

31:05

है। ठीक है? शेयर्स कौन-कौन से होते हैं?

31:08

प्रेफरेंस और इक्विटी।

31:11

ठीक है? एक बात और ध्यान रखना जो सेल्स ऑफ़

31:14

गुड्स एक्ट है, शेयर्स ऑफ़ अ कंपनी आर

31:16

ट्रीटेड एज़ गुड्स। सेल्स ऑफ़ गुड्स एक्ट

31:19

वहां पे शेयर्स को गुड्स कंसीडर करता है।

31:21

कितने तरीके के शेयर्स हैं? प्रेफरेंस और

31:23

इक्विटी। प्रेफरेंस शेयर्स कौन से होते

31:25

हैं? जिनको प्रेफरेंशियल राइट मिलता है कि

31:27

डिविडेंड भी पहले मिलेगा इक्विटी से। और

31:30

उसके साथ-साथ कंपनी जब वाउंड अप होगी तो

31:32

कैपिटल भी पहले मिलेगा। लेकिन इनको वोटिंग

31:34

राइट्स नहीं होते। इक्विटी शेयर्स को

31:36

वोटिंग राइट्स होते हैं। उसके बाद बच्चों

31:38

प्रेफरेंस शेयर्स की कुछ कैटेगरीज हैं।

31:40

जैसे क्यूम्युलेटिव और नॉन क्यूम्युलेटिव।

31:43

क्यूम्युलेटिव का मतलब क्या होता है? कि

31:45

अगर पिछले किसी सालों में इनको डिविडेंड

31:47

नहीं मिला तो अगले साल ऐड करके दे देंगे।

31:49

उसको क्यूम्युलेटिव बोलते हैं। नॉन

31:51

क्यूम्युलेटिव कौन से होते हैं? जिसमें

31:53

ऐसा नहीं होता कि पिछले साल नहीं मिला तो

31:55

ऐड करके देंगे। ऐसा इसमें नहीं होता। वो

31:57

रह जाता है तो रह जाता है। ठीक है? तो

31:59

क्यूम्युलेटिव में ऐड करके मिलता है। नॉन

32:01

क्यूलेटिव में ऐड करके नहीं मिलता।

32:03

पार्टिसिपेटिंग और नॉन पार्टिसिपेटिंग।

32:05

पार्टिसिपेटिंग कौन से होते हैं कि अगर

32:07

कोई सरप्लस प्रॉफिट हुआ, एडिशनल प्रॉफिट

32:09

हुआ तो उसमें भी पार्टिसिपेट करेंगे। नॉन

32:12

पार्टिसिपेटिंग में ऐसा नहीं होता। उनका

32:13

जो फिक्स्ड है बस उतना ही मिलेगा। सरप्लस

32:15

से उनको कोई भी लेना देना नहीं है। ठीक

32:18

है? रिडीमेबल इररिडीमेबल कौन से होते हैं?

32:21

रिडीमेबल होते हैं जो एक फिक्स्ड पीरियड

32:22

में रिडीम हो जाते हैं। उनको रिडीमेबल

32:24

बोलते हैं। यानी कंपनी उनका पेमेंट कर

32:26

देती है। और इररिडीमेबल होते हैं कि यहां

32:28

इनका कोई फिक्स टाइम पीरियड नहीं होता। ये

32:30

वाइंड अप पे ही जब कंपनी बंद होगी तभी

32:32

इनका पेमेंट होगा। उसके बाद कन्वर्टेबल

32:35

नॉन कन्वर्टेबल कौन से हैं? जो इक्विटी

32:37

में कन्वर्ट हो जाएंगे वो कन्वर्टेबल। जो

32:39

कन्वर्ट नहीं हो सकते वो नॉन

32:42

कन्वर्टेबल। इक्विटी शेयर्स हमने देख ही

32:44

लिए। ठीक है? देखो जी प्रेफरेंस कौन से

32:48

हैं जिनको फिक्स्ड रेट ऑफ़ डिविडेंड मिलता

32:50

है। इक्विटी कौन से हैं जिस पे कोई

32:52

फिक्स्ड रेट ऑफ़ डिविडेंड नहीं होता।

32:53

एरियर्स ऑफ़ डिविडेंड बच्चों अगर

32:55

क्यूम्युलेटिव है तो उसमें ऐड ऑन हो के

32:57

मिल जाएगा। इक्विटी में ऐसा कुछ भी पर्पस

32:59

नहीं है। प्रेफरेंशियल राइट होता है क्या?

33:01

पेमेंट ऑफ डिविडेंड में इनको होता है।

33:04

उनका डिविडेंड हमेशा प्रेफरेंस के बाद ही

33:06

दिया जाएगा। पेमेंट ऑफ कैपिटल में भी पहले

33:09

इनका होगा बाद में उनका होगा। वोटिंग

33:11

राइट्स इनको वोटिंग राइट्स नहीं होते।

33:12

उनको वोटिंग राइट्स होते हैं। पार्टिसिपेट

33:15

करते हैं क्या मैनेजमेंट में? ये वो करते

33:17

हैं। ये नहीं करते। ठीक है? फिर शेयर

33:20

कैपिटल कितने तरीके का होता है बच्चों?

33:22

ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल। इसी को हम

33:24

रजिस्टर्ड भी बोलते हैं, नॉमिनल भी बोलते

33:26

हैं। ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल वो है जो कंपनी

33:28

के एमओए में लिखा होता है। इट रेफर्स टू द

33:30

अमाउंट व्हिच इज़ स्टेटेड इन द मेमोरेंडम

33:32

ऑफ एसोसिएशन। ठीक है? ये कंपनी के एमओए

33:36

में लिखा होता है। इशूड कैपिटल कौन सा

33:39

होता है? जो एक्चुअल में पब्लिक में इशू

33:42

किया जाता है। अच्छा ये ध्यान रखना कई बार

33:44

ये पूछता है कि जो इशूड है वो किसका पार्ट

33:47

है? तो ध्यान रखना इशूड इज़ द पार्ट ऑफ़

33:49

ऑथराइज़्ड कैपिटल व्हिच इज़ ऑफर्ड टू द

33:52

पब्लिक। ठीक है? सब्सक्राइब्ड क्या है? जो

33:55

पब्लिक ने एक्चुअल में सब्सक्राइब करा। यह

33:57

किसका पार्ट है? इट इज़ अ पार्ट ऑफ इशूड

33:59

कैपिटल व्हिच हैज़ बीन सब्सक्राइब बाय द

34:01

पब्लिक। अब सब्सक्राइब में दो होते हैं।

34:04

फुल्ली पेड, नॉट फुल्ली पेड। फुल्ली पेड

34:06

तब होता है जब पूरा पैसा मिल गया। नॉट

34:08

फुल्ली पेड कब होता है? जब पूरा पैसा मिला

34:10

नहीं या कंपनी ने अभी मांगा ही नहीं। ठीक

34:13

है? कॉल्ड अप कैपिटल किसको बोलते हैं? ने

34:15

जितना पैसा कंपनी ने अभी तक कॉल कर लिया

34:17

है। डायरेक्टर्स ने कॉल कर लिया है। जैसे

34:19

10 में से अभी ₹6 मांगे तो वही कॉल्ड अप

34:22

है। चार अभी अनकॉल्ड है। पेड अप का मतलब

34:24

कि कॉल्ड अप में से कितना पैसा एक्चुअली

34:26

मिल गया है। ध्यान रखना इट इज़ दैट पोर्शन

34:29

ऑफ़ कॉल्ड अप कैपिटल व्हिच हैज़ बीन

34:31

एक्चुअली रिसीव्ड। ठीक है? रिजर्व कैपिटल

34:36

किसको बोलते हैं बच्चों? यह बहुत

34:37

इंपॉर्टेंट है। ध्यान रखना है रिजर्व

34:39

कैपिटल में ओनली एन अनलिमिटेड कंपनी

34:42

हैविंग अ शेयर कैपिटल व्हाइल कन्वर्टिंग

34:44

इंटू अ लिमिटेड कंपनी मे हैव अ रिजर्व

34:47

कैपिटल। इसका मतलब ये वो कैपिटल होता है

34:50

जो कंपनी अपने पास रिजर्व कर सकती है।

34:52

कंपनी बोलती है कि हम इस पैसे को मांगेंगे

34:54

ही नहीं। तब मांगेंगे जब कंपनी वाइंड अप

34:56

हो रही होगी। उसको हम रिजर्व कैपिटल बोल

34:58

देते हैं। ठीक हो

35:01

गया? और कैपिटल रिजर्व तो आप जानते ही हो।

35:05

कैपिटल रिजर्व क्या होता है? वो सारे

35:06

रिजर्व्स जो कैपिटल प्रॉफिट में से बनाए

35:09

जाते हैं उनको हम कैपिटल रिजर्व बोलते

35:11

हैं। सर कैपिटल प्रॉफिट कौन-कौन से होते

35:13

हैं? कोई एसेट बेचा तो प्रॉफिट हुआ। कोई

35:16

फिक्स्ड एसेट्स का हमने रिवैल्यूएशन करा

35:18

तब हो गया। प्रीमियम आया कोई इशू ऑफ

35:20

शेयर्स और डिबेंचर्स पे। ठीक हो गया बेटा?

35:23

सही है

35:24

क्या? एग्जांपल ये सब दो-तीन याद रख लेना

35:28

बस। ठीक है? ये सबसे प्रॉफिट जो होगा वो

35:30

कैपिटल रिजर्व में जा सकता है। दोनों में

35:33

फर्क देखो। रिजर्व कैपिटल क्या है? द

35:36

पोर्शन ऑफ़ अनकॉल्ड कैपिटल जो हम मांगेंगे

35:38

ही नहीं। एक्सेप्ट इन द इवेंट ऑफ़ वाइंडिंग

35:40

अप। और कैपिटल रिजर्व क्या है? जो कैपिटल

35:43

प्रॉफिट में से बनाया जाएगा। क्या रिजर्व

35:45

कैपिटल नेसेसरी होता है? नहीं। क्या

35:47

कैपिटल रिज़र्व नेसेसरी होता है? यस।

35:49

रेज़ोल्यूशन इसके लिए रेज़ोल्यूशन चाहिए

35:51

होता है। बोर्ड को बताना पड़ता है।

35:53

डायरेक्टर्स को बताना पड़ता है कि हम

35:55

रिज़र्व कैपिटल बना रहे हैं। उसके लिए कोई

35:57

रेज़ोल्यूशन नहीं चाहिए। ठीक हो गया बेटा।

35:59

परफेक्ट है। ओके। जल्दी से स्क्रीनशॉट लो।

36:03

यह बैलेंस शीट में नहीं आता। वो बैलेंस

36:04

शीट में रिजर्व सरप्लस में आ जाता है। ये

36:07

सिर्फ वाइंड अप पे काम आता है। वो कैपिटल

36:09

लॉसेस में यूज़ कर सकते हो या बोनस शेयर्स

36:11

देने में भी यूज़ कर सकते हो। ठीक है? उसके

36:15

बाद ऑथराइज़्ड और इशूड में एक छोटा सा

36:16

डिफरेंस लिखा हुआ है। ये भी रीड ओनली है।

36:18

आप एक बार रीड कर लेना। ठीक है जी?

36:21

परफेक्ट। अब शेयर्स कैसे-कैसे इशू करते

36:23

हो? प्राइवेट प्लेसमेंट में। प्राइवेट

36:25

प्लेसमेंट का क्या मतलब होता है? जब आप

36:27

शेयर्स कुछ सेलेक्टिव इंडिविजुअल्स को

36:29

देते हो उसको प्राइवेट प्लेसमेंट बोलते

36:31

हैं। पब्लिक सब्सक्रिप्शन जब आप जनता को

36:33

देते हो फॉर कंसीडरेशन अदर दैन कैश जब आप

36:36

वेंडर को देते हो। कुछ सामान खरीदते हो

36:37

उसके बदले में उसको शेयर्स देते हो। तो

36:39

प्राइवेट प्लेसमेंट क्या है? द प्रमोटर्स

36:42

ऑफ़ द कंपनी आर कॉन्फिडेंट ऑफ़ रेिंग कैपिटल

36:44

थ्रू प्राइवेट सोर्सेस एंड कांटेक्ट्स। तो

36:46

जब प्राइवेट सोर्सेस और कॉन्टैक्ट्स को

36:48

शेयर्स दिए जाते हैं तो उसको हम प्राइवेट

36:50

प्लेसमेंट बोल देते हैं।

36:53

ठीक है? परफेक्ट है जी। देखो लिखा हुआ है

36:56

इन केस ऑफ़ प्राइवेट प्लेसमेंट ऑफ़ शेयर्स

36:58

अलॉटज़ विल नॉट सेल द शेयर्स फॉर अ मिनिमम

37:01

पीरियड ऑफ़ 3 इयर्स। 3 साल का लॉक इन

37:04

पीरियड होता है बच्चों प्राइवेट प्लेसमेंट

37:07

के अंदर। ठीक है? उसके बाद वी हैव स्वेट

37:10

इक्विटी शेयर्स। स्वेट इक्विटी शेयर्स कौन

37:12

से होते हैं? स्वेट इक्विटी शेयर्स का

37:14

मतलब वो शेयर्स जो उन लोगों को दिए जाते

37:17

हैं जिन्होंने अपना पसीना बहाया है कंपनी

37:19

के लिए। मेहनत करी है कंपनी के लिए। वो

37:21

कौन लोग हैं? कंपनीज़ के एंप्लाइजज़,

37:22

डायरेक्टर्स। अ कंपनी में इशू स्वेट

37:24

इक्विटी शेयर्स। स्वेट इक्विटी शेयर्स

37:27

मींस इक्विटी शेयर्स इशूड बाय द कंपनी टू

37:29

इट्स एंप्लाइजज़ और डायरेक्टर्स एट अ

37:31

डिस्काउंट और फॉर कंसीडरेशन अदर दैन कैश।

37:34

या तो डिस्काउंट में या फिर उनकी सर्विज

37:36

के बदले में दिए जाते हैं जो उन्होंने

37:38

अपनी सर्विसेज दी हैं। ठीक है? परफेक्ट।

37:41

लेकिन ये जो शेयर्स हैं ये भी 3 साल से

37:43

पहले बेचे नहीं जा सकते। ठीक हो गया बेटा?

37:47

परफेक्ट है या नहीं है? परफेक्ट सर। तो

37:50

स्वेट इक्विटी शेयर सस्ते में ऑफर किए

37:52

जाते हैं। और ईशॉप क्या होता है? व्हाट इज़

37:55

एंप्लई स्टॉक ऑप्शन प्लान? एंप्लई स्टॉक

37:58

ऑप्शन प्लान ये होता है बच्चों जहां पे

38:01

देखो ऑप्शन है ये एक। ये क्या है? ये एक

38:04

ऑप्शन है। देखो एंप्लई स्टॉक ऑप्शन मींस द

38:08

ऑप्शन गिवेन टू द डायरेक्टर्स, ऑफिसर्स

38:11

एंड एंप्लाइजज़

38:13

टू परचेस और सब्सक्राइब एट अ फ्यूचर डेट।

38:16

द सिक्योरिटी ऑफर्ड बाय द कंपनी एट अ

38:19

प्रीडटरमिन प्राइस व्हिच यूजुअली इज़ लोअर

38:21

देन द मार्केट प्राइस। यानी स्टॉक ऑप्शन

38:24

जो है एक ऑप्शन है जो एंप्लाइजज़ को दिया

38:27

जाता है कि आप किसी भी फ्यूचर डेट पे जो

38:31

स्पेसिफाइड फ्यूचर डेट होगी कंपनी के

38:33

शेयर्स को सब्सक्राइब कर पाओगे एक

38:36

स्पेसिफाइड प्राइस पे। यानी कि प्राइस

38:38

चाहे कुछ भी हो मार्केट में उस टाइम। आज

38:40

जो हम स्पेसिफाई कर रहे हैं उस प्राइस पे

38:42

आप मार्केट में उन शेयर्स को सब्सक्राइब

38:45

कर पाओगे। तो नॉर्मली क्योंकि प्राइस तो

38:46

बढ़ता ही है ना शेयर्स का तो डिस्काउंटेड

38:48

में ही मिल जाते हैं ये भी। तो एंप्लई

38:50

स्टॉक ऑप्शन एक ऑप्शन है जो किसको मिलता

38:52

है? ये देखो ऑब्लिगेशन नहीं है। ऐसा नहीं

38:54

है कि लेने ही लेने हैं। ऑप्शन है जो होल

38:57

टाइम डायरेक्टर्स को, ऑफिसर्स को,

38:58

एंप्लाइजज़ को दिया जाएगा कि आप परचेस कर

39:00

सकते हो किसी भी फ्यूचर डेट पे

39:02

सिक्योरिटीज़ एट अ प्रीडटरिंड प्राइस। और

39:05

वो प्राइस नॉर्मली कम होता है मार्केट

39:07

प्राइस से। ठीक है बेटा? ये वॉलंटरी स्कीम

39:10

होती है। इच्छा है कि आप चाहो तो ले सकते

39:12

हो नहीं तो नहीं लेना। और ईसोप में भी लॉक

39:15

इन होता है। देखो क्या लिखा हुआ है?

39:16

शेयर्स अलॉटेड अंडर दिस स्कीम शैल बी

39:18

लॉक्ड इन फॉर अ मिनिमम पीरियड ऑफ़ वन ईयर।

39:20

एक साल से पहले आप इनको भी बेच नहीं सकते।

39:24

ठीक है

39:26

जी। बढ़िया हो गया सर। अच्छा ईशॉप क्यों

39:30

दिया जाता है? एंप्लाइजज़ को इंस्पायर करने

39:33

के लिए, लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएट करने के

39:35

लिए, एंप्लाइजज़ के लिए बेनिफिट्स क्रिएट

39:37

करने के लिए। तो ये सारी चीजें होती हैं।

39:39

पब्लिक सब्सक्रिप्शन बच्चों आप जानते ही

39:41

हो। भाई सबसे पहले प्रोस्पेक्टस इशू करना,

39:44

फिर एप्लीकेशन रिसीव करना, अलॉटमेंट करना,

39:46

फिर कॉल्स मांगना। ये हमारा बेसिक

39:56

है। कुछ छोटी-छोटी सी चीजें हैं बेटा इसके

39:58

अंदर भी। जैसे द अमाउंट टू बी कॉल्ड ऑन

40:01

एप्लीकेशन, अलॉटमेंट या कॉल शैल नॉट

40:03

एक्सीड 25% ऑफ द इशू। 25% से ऊपर नहीं

40:06

होना चाहिए। जितना भी अमाउंट ऑफ शेयर्स है

40:09

वो फुल्ली कॉल्ड अप कर लेना है आपने 12

40:10

महीने के अंदर-अंदर। जब आपने अलॉट करा है

40:13

उससे 12 महीने के अंदर-अंदर आपको कर लेना

40:15

है। कम से कम 1 महीने का इंटरवल होना

40:17

चाहिए दो कॉल्स के बीच में। शेयरहोल्डर को

40:20

कम से कम 14 डेज पहले नोटिस देना पड़ेगा

40:22

कि अमाउंट दे दो आप। और जो कॉल्स हैं वो

40:24

यूनिफॉर्म बेसिस पे ही आपने मांगनी है। अन

40:26

बहुत उल्टी सीधी बेसिस पे नहीं मांगनी।

40:29

ठीक है? उसके बाद आता है बेटा प्रीलिमिनरी

40:31

एक्सपेंसेस। किसको बोलते हैं? जो कंपनी को

40:33

बनाने में खर्चे आते हैं उनको हम

40:35

प्रिलिमिनरी एक्सपेंसेस बोल देते हैं। सही

40:38

हो गया बेटा? फिर फॉर फीचर आ गया। उससे

40:41

पहले कॉल्स इन सिनेरियर्स। कॉल्स इन

40:42

एडवांस। कॉल्स इन एररियर्स क्या है? अगर

40:44

कोई शेयरहोल्डर अपना पैसा नहीं दे पाता।

40:46

कॉल्स इन एडवांस क्या है? जब वो एडवांस

40:48

में दे देता है। ये डेबिट बैलेंस है। ये

40:49

क्रेडिट बैलेंस है। ठीक है? इस पे

40:52

इंटरेस्ट 10% उस पे इंटरेस्ट 12% ये

40:54

मैक्सिमम है। ओके? उसके बाद जो इंटरेस्ट

40:58

ऑन कॉल्स इन एररियर्स हैं ये कंपनी के लिए

41:01

इनकम है। वो कंपनी के लिए एक्सपेंस है।

41:03

राइट? ये कहां दिखाया जाता है? कि कहां

41:06

दिखाया जाता है? कॉल्स सिनेरियर्स

41:08

सब्सक्राइब्ड कैपिटल में से माइनस करके।

41:11

है ना? और वो कहां दिखाया जाता है? अदर

41:14

करंट लायबिलिटीज़ में। उसके बाद बच्चों

41:16

डिबेंचर्स आ गया। डिबेंचर्स क्या है

41:18

हमारे? डिबेंचर्स से एक ऑब्लिगेशन है।

41:21

डिबेंचर एक ऑब्लिगेशन है कंपनी का कि

41:23

कंपनी पैसा ले रही है और वो फ्यूचर में पे

41:26

कर देगी। राइट? डिबेंचर इंक्लूड डिबेंचर

41:29

स्टॉक, बोंड्स, एनी सिक्योरिटीज़ जो चार्ज

41:32

भी बना सकती है और नहीं भी बना सकती।

41:34

कैरेक्टरिस्टिक्स क्या है? कंपनी इशू करती

41:36

है सर्टिफिकेट के फॉर्म में। एकनॉलेजमेंट

41:38

ऑफ़ डेप्ट है कि ठीक है हमने कर्जा लिया

41:40

है। डिबेंचर कंपनी की सील के अंडर इशू करे

41:43

जाते हैं। यानी कॉमन सील के अंडर इशू करे

41:45

जाते हैं। इसमें कॉन्ट्रैक्ट ऑफ रीपेमेंट

41:47

होता है कि फ्यूचर में पे किया जाएगा।

41:49

राइट? देखो लिखा हुआ है नो कंपनी इज़ अलाउड

41:52

टू इशू डिबेंचर्स हैविंग मैच्योरिटी डेट

41:54

ऑफ़ मोर देन 10 इयर्स। 10 साल से ज्यादा

41:56

नॉर्मली डिबेंचर का टाइम पीरियड नहीं

41:59

होता। लेकिन अगर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है

42:02

तो वो 10 साल से ज्यादा का डिबेंचर इशू कर

42:04

सकती है। लेकिन वो 30 से ज्यादा नहीं होना

42:06

चाहिए। ठीक है? ओके। उसके बाद बेटा

42:09

डिबेंचर का कूपन रेट किसको बोलते हैं हम?

42:12

इंटरेस्ट को। इंटरेस्ट को हम लोग कूपन रेट

42:14

भी बोलते हैं। सही हो गया

42:17

बेटा। बाकी तो ऐसा ही है। कितने तरीके के

42:20

डिबेंचर्स होते हैं बच्चों? सिक्यर्ड

42:23

डिबेंचर्स, अनसिक्यर्ड डिबेंचर्स।

42:24

सिक्यर्ड को ही मॉर्गेज बोलते हैं।

42:26

अनसिक्यर्ड को ही नेकेड बोलते हैं। ठीक

42:28

है? तो सिक्यर्ड कौन से हैं? जिनको बैक

42:31

किया जाता है किसी ना किसी एसेट से। यानी

42:34

कि अगर डिबेंचर का पेमेंट नहीं कर पाई

42:36

कंपनी तो ये एसेट बिकेगा और पैसा मिलेगा।

42:38

उसको सिक्यर्ड बोलते हैं। अनसिक्यर्ड कौन

42:40

से होते हैं? जिसके अंदर ऐसी कोई

42:41

सिक्योरिटी नहीं रखी जाती। तो ये

42:43

अनसिक्यर्ड होते हैं। ठीक है? ये हमें

42:45

यूजुअली देखने को नहीं मिलते। यूजुअली

42:47

हमें सिक्यर्ड ही देखने को मिलते हैं

42:48

बेटा। उसके बाद कौन से आ रहे हैं?

42:50

रजिस्टर्ड डिबेंचर्स और बियरर्डर

42:52

डिबेंचर्स। रजिस्टर्ड कौन से होते हैं? जो

42:54

रजिस्ट्रार के पास एंट्री होती है जिनकी।

42:58

जो रजिस्ट्रार के पास एंट्री है अगर आपको

43:00

ट्रांसफर करने हैं तो रजिस्ट्रार के पास

43:02

जाकर एंट्री करानी पड़ेगी। ठीक है? यह

43:04

फ्रीली ट्रांसफरेबल नहीं होते। लेकिन

43:06

बियरर कौन से हैं? जिनकी कोई एंट्री नहीं

43:08

है और फ्रीली ट्रांसफरल है। जिसको चाहे

43:10

उसको आप ट्रांसफर कर सकते हो। फिर

43:12

रिडीमेबल इररिडीमेबल रिडीमेबल कौन से होते

43:14

हैं? जो एक स्पेसिफाइड पीरियड में इनकी

43:17

पेमेंट हो जाती है। और इररिडीमेबल कौन से

43:19

होते हैं? जो ड्यूरिंग द लाइफ टाइम कंपनी

43:21

पे नहीं करती। वाइंड अप के टाइम पे ही पे

43:23

करेगी। कन्वर्टेबल कौन से हैं जो एक

43:25

फिक्स्ड टाइम के बाद शेयर्स में कन्वर्ट

43:27

हो सकते हैं और नॉन कन्वर्टेबल कौन से

43:29

होते हैं जो कन्वर्ट नहीं हो सकते। ठीक हो

43:32

गया बेटा? फिर शेयर डिबेंचर में डिफरेंस

43:35

है। शेयर बेटा ओनर्स फंड का पार्ट है।

43:37

डिबेंचर बोरोड फंड का पार्ट है।

43:39

शेयरहोल्डर को डिविडेंड मिलेगा। डिबेंचर

43:41

होल्डर को इंटरेस्ट मिलेगा। राइट?

43:44

डिविडेंड ऊपर नीचे होता है। डिबेंचर पे

43:46

इंटरेस्ट फिक्स्ड होता है। सही हो गया

43:49

क्या बच्चों?

43:50

ऐसे ही कुछ छोटे-छोटे पॉइंट्स और हैं। ये

43:52

भी आप एक बार रीड ओनली है। स्क्रीनशॉट ले

43:54

लो बस। सिर्फ रीड ओनली है कि एक को वोटिंग

43:56

राइट्स होते हैं। उसको वोटिंग राइट्स कुछ

43:57

नहीं होते। राइट? शेयर्स हमेशा अनसिक्यर्ड

44:00

होते हैं। वो सिक्यर्ड भी हो सकते हैं। है

44:02

ना? चलो। अच्छा एक पॉइंट ये भी इंपॉर्टेंट

44:06

है कि शेयर्स जो हैं वो डिस्काउंट पे इशू

44:08

नहीं होते। स्वेट इक्विटी शेयर्स को छोड़

44:10

के। वहां पे ऐसा नहीं है। वो डिस्काउंट पे

44:12

इशू हो सकते हैं। अब इशू ऑफ़ डिबेंचर्स में

44:14

आपने पढ़ा ही हुआ है। राइट? परफेक्ट। बस

44:18

यहां पे ध्यान रखना। मिनिमम सब्सक्रिप्शन

44:20

जो है डिबेंचर्स में 75% होता है। सेबी के

44:23

हिसाब से शेयर्स में 90% होता है मिनिमम

44:25

सब्सक्रिप्शन। डिबेंचर्स में 75% होता है।

44:28

अब यहां तक होती है बच्चों हमारी पूरी

44:31

पार्टनरशिप और पूरी की पूरी कंपनी की

44:33

थ्योरी। ठीक है? इसके बाद हमारे पास

44:36

एनालिसिस में बेटा थ्योरी में सिर्फ मेनली

44:38

चैप्टर नंबर टू है जो मैंने आपको पहले

44:40

कराया हुआ है। वो फिर भी मैं इसके साथ

44:42

अटैच कर देता हूं ताकि आप चैप्टर नंबर टू

44:44

भी एक बार रिवाइज कर पाओ। मेनली हमारी

44:46

थ्योरी यहीं से बनती है। यहीं से पूछी

44:48

जाएगी। तो मुझे उम्मीद है कि आपकी सारी

44:50

थ्योरी रिवाइज़ हो जाएगी और आपको काफी कुछ

44:52

नया भी इसमें पढ़ने को मिला होगा। छोड़ आप

44:54

इसमें कुछ भी नहीं सकते। सब इंपॉर्टेंट

44:56

है। ये अच्छे तरीके से पढ़ना ही है। ठीक

44:58

है? तो पार्टनरशिप की थ्योरी डन, कंपनी की

45:01

थ्योरी डन, एनालिसिस की थ्योरी भी डन है।

45:04

इसके बाद अब काफी सारी चीजें आज करनी है।

45:07

आज जितनी-जितने क्वेश्चंस कराऊंगा सारे

45:09

बहुत ध्यान से करेंगे और उसको कंप्लीट

45:11

करेंगे। ठीक है? थैंक यू सो मच एवरीवन।

45:14

कीप ग्रोइंग, कीप ग्लोइंग, कीप स्माइलिंग।

45:17

एंड अब आप कंटिन्यू करो। कौन सा पार्ट?

45:19

एनालिसिस का चैप्टर नंबर टू। चैप्टर नंबर

45:22

टू प्योरली थ्यरिटिकल चैप्टर है। एक

45:25

डिफरेंस इसके अंदर मोस्टेंट है। वो बहुत

45:28

ध्यान से करना है। बाकी सब आपके लिए बहुत

45:30

इजी है। दूसरी बात बेटा जब ये चैप्टर आप

45:32

पढ़ोगे तो मैं आपको बेसिक समझा रहा हूं।

45:35

फिर जो भी बुक आप यूज़ करते हो, जिस भी ऑथर

45:37

की बुक आप यूज़ करते हो, उसको खोल के थोड़ा

45:39

सा उसमें से आप लर्निंग पार्ट कर लेना।

45:41

ठीक है? आओ शुरू करते हैं। सबसे पहले होता

45:44

है बच्चों फाइनशियल स्टेटमेंट। एनालिसिस

45:47

का मतलब क्या होता है? तो एनालिसिस में

45:49

बच्चों सीधी-सीधी सी बातें हैं कि हमने

45:51

फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स बनाने सीखे। हमने

45:54

सीखा कि कैसे बैलेंस शीट बनता है। हमने

45:56

सीखा कि कैसे पीएंडएल बनता है। हमने सीखा

45:58

कि कैसे कैश फ्लो बनता है। कैश फ्लो एक

46:00

बार तो कराया ही है मैंने। कैश फ्लो कैसे

46:02

बनता है। वो सब आपने सीखा। अब उन सारी

46:05

स्टेटमेंट्स को कंपेयर करना ताकि ये पता

46:09

चले कि ग्रोथ है या नहीं है। रीड करना

46:12

पढ़ना आना चाहिए कि कैसे बैलेंस शीट पढ़ी

46:14

जाती है। कैसे पीएंडएल पढ़ा जाता है। उनकी

46:17

स्टडी करना यानी प्रॉपर्ली वहां से आप कुछ

46:20

ना कुछ रिजल्ट्स निकाल पाओ। वहां से कुछ

46:22

ना कुछ डाटा निकाल पाओ और उसको समझना ताकि

46:25

आपको यह समझ में आए कि आपकी पॉलिसीज, आपकी

46:28

प्लानिंग सब अच्छी है भी या नहीं है और

46:30

फ्यूचर में कैसे करनी है। इसी को हम

46:32

फाइनशियल स्टेटमेंट एनालिसिस बोलते हैं।

46:35

तो एनालिसिस में आप कंपेयर करते हो, रीड

46:39

करते हो, स्टडी करते हो, अंडरस्टैंड करते

46:41

हो। सारी की सारी फाइनशियल स्टेटमेंट्स ऑफ

46:44

अ कंपनी। ठीक है? फिर कुछ छोटे-छोटे

46:47

टाइप्स आते हैं एनालिसिस के। सबसे पहला

46:50

आता है बच्चों एक्सटर्नल एनालिसिस, इंटरनल

46:53

एनालिसिस। एक्सटर्नल एनालिसिस नाम में ही

46:56

है। वो लोग करते हैं व्हिच इज डन बाय

46:58

आउटसाइडर्स जो हमारे ऑर्गेनाइजेशन का

47:01

पार्ट ही नहीं है। जितने लोग हमारे

47:03

ऑर्गेनाइजेशनंस का हिस्सा ही नहीं है।

47:05

जैसे आपका इन्वेस्टर आउटसाइडर है। आपका

47:08

बैंक आउटसाइडर है। आपका क्रेडिटर आउटसाइडर

47:12

है। अब सर ये स्टडी क्यों करेगा बैंकर?

47:15

भाई बैंकर इसलिए करेगा क्योंकि उसने आपको

47:16

लोन देना है। पैसा देना है। तो वो स्टडी

47:18

तो करेगा ना कि ये कंपनी है कैसी?

47:20

क्रेडिटर ने आपको उधार देना है। स्टडी तो

47:22

करेगा ना कि दूं या ना दूं। उसके बाद

47:24

गवर्नमेंट एजेंसीज़ कि टैक्स वगैरह सही से

47:26

करते हैं या नहीं करते हैं। रिसर्चरर्स जो

47:28

आपके बारे में रिसर्च कर रहे हैं वो। तो

47:30

जितने भी आउटसाइडर्स क्लास 11th में भी हम

47:33

लोग इसको पढ़ते हैं एक्सटर्नल यूज़र्स के

47:35

नाम से। याद है कि अकाउंट्स के दो यूज़र्स

47:37

होते हैं। एक्सटर्नल इंटरनल। तो जो

47:39

एक्सटर्नल यूज़र्स होंगे वो जो एनालिसिस

47:41

करेंगे उसको एक्सटर्नल एनालिसिस बोला

47:43

जाएगा। इंटरनल एनालिसिस क्या है

47:46

बच्चों? जो ओनर और मैनेजमेंट करेगा। ओनर

47:50

कौन होगा हमारे पास? ओनर होगा बेटा हम लोग

47:52

का मेनली मालिक लोग जिसका बिजनेस है जिसकी

47:54

कंपनी है और मैनेजमेंट। ये लोग जो स्टडी

47:57

करेंगे उसको हम इंटरनल एनालिसिस का पार्ट

48:00

मानेंगे। इसके बाद आती है बच्चों

48:02

हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल। यही सबसे

48:04

इंपॉर्टेंट है। ये सावधान इंडिया है।

48:06

एग्जाम में सबसे ज्यादा यही आती हैं। इसको

48:08

अभी देखते हैं। देन वी हैव

48:11

इंट्राफर्म जिसको हम टाइम

48:15

सीरीज जिसको हम

48:19

टाइम सीरीज और ट्रेंड एनालिसिस भी बोलते

48:22

हैं। और इंटरफर्म जिसको हम क्रॉस सेक्शनल

48:25

भी बोलते हैं। देखो सबसे पहले यह समझो कि

48:28

इंट्रा क्या होता है? इंट्रा का मतलब होता

48:31

है बेटा विद इन द सेम

48:34

फर्म। विद इन

48:37

द सेम फर्म। इसका मतलब मैं अपनी फर्म के

48:41

अंदर ही सारा डाटा एनालाइज कर रहा हूं कि

48:44

भाई पिछले साल मेरा नॉन करंट एसेट कितने

48:46

का था प्रीवियस ईयर में? इस साल कितने का

48:49

है? तो 1 साल, 2 साल, 3 साल जितने भी साल

48:52

की आपको स्टडी करनी है। जब आप अपनी ही

48:54

ऑर्गेनाइजेशन के अंदर-अंदर चीजों को पढ़

48:56

रहे हो, एनालाइज कर रहे हो, स्टडी कर रहे

48:58

हो वो होगा इंट्राफर्म एनालिसिस। वहीं पे

49:01

अगर मैं ये देखूं कि मेरी कंपनी का ग्रॉस

49:04

प्रॉफिट कितना है? मेरी कंपनी

49:07

का और किसी दूसरी कंपनी का कितना है? यानी

49:12

जब मैं अपनी कंपनी का जीपी किसी दूसरी

49:15

कंपनी की जीपी के साथ कंपेयर कर रहा हूं,

49:17

एनालाइज कर रहा हूं, उसको बोलेंगे

49:19

इंटरफर्म। तो इंटरफर्म का मतलब होता है जो

49:22

दो फर्म्स के बीच में कंपैरिजन होता है।

49:24

दो कंपनीज़ के बीच में कंपैरिजन होता है।

49:27

और इंट्रा क्या होता है? जो सेम फर्म के

49:29

बीच में होता है। बेटा। इंट्रा को ही टाइम

49:31

सीरीज़ भी बोलते हैं या ट्रेंड एनालिसिस भी

49:33

बोलते हैं। और इंटर को हम क्रॉस सेक्शनल

49:35

भी बोलते हैं। एमसीक्यू जरूर आ जाते हैं

49:37

कि इसका दूसरा नाम क्या है? इसका दूसरा

49:39

नाम क्या है? तो याद कर लेना एक बार। ठीक

49:41

है? अब इस पे चलते हैं। हॉरिजॉन्टल

49:44

एनालिसिस क्या होती है? हॉरिजॉन्टल को ही

49:46

हम लोग डायनेमिक भी बोलते हैं। और वर्टिकल

49:48

एनालिसिस क्या होती है? इसको हम लोग

49:50

स्टैटिक भी बोलते हैं। तो पहले आप

49:52

स्क्रीनशॉट लो फिर मैं आपको समझाता हूं।

49:53

हॉरिजॉन्टल और

49:56

वर्टिकल। देखो

49:58

बच्चों ये होती है हमारे पास हॉरिजॉन्टल

50:01

एनालिसिस और वर्टिकल एनालिसिस। जो भी

50:04

एनालिसिस दो या दो से ज्यादा साल की करी

50:08

जाएगी कि प्रीवियस ईयर में इतना करंट ईयर

50:10

में इतना देखो दो साल की एनालिसिस कर रहा

50:12

हूं ना इसको हम हॉरिजॉन्टल बोलते हैं। तो

50:14

हॉरिजॉन्टल में दो या दो से ज्यादा सालों

50:18

का जब कंपैरिजन होगा उसको हॉरिजॉन्टल

50:21

एनालिसिस बोलेंगे। अगर एक ही साल का हो

50:23

रहा है, वन अकाउंटिंग ईयर का हो रहा है तो

50:26

उसको हम क्या बोल देते हैं? वर्टिकल

50:27

एनालिसिस बोल देते हैं। जैसे आपने

50:29

कंपैरेटिव स्टेटमेंट बनाया। सपोज़ आपने

50:31

कंपैरेटिव PNL बनाया। तो कंपैरेटिव PNL

50:34

में क्या करोगे? करंट ईयर और प्रीवियस ईयर

50:37

दोनों होगा ना? A और B फिर C निकलेगा B -

50:40

A करके। फिर D निकलेगा C / A * 100 करके।

50:43

तो ऐसे चलता है। देखो कंपैरेटिव भी। पहले

50:45

A फिर B फिर C फिर D ऐसे चलता है ना? तो

50:48

इस तरीके से चल रहा है और दो सालों का

50:50

डेटा कंपेयर होता है। तो कंपैरेटिव

50:52

स्टेटमेंट्स भी हॉरिजॉन्टल का ही एग्जांपल

50:54

है। वहीं पे अगर मैं पीएंडएल का एक कॉमन

50:57

साइज़ बनाऊं तो कॉमन साइज़ में आपको क्या

50:59

करना होता है? बस एक बेस लेना होता है।

51:01

आपने एक बेस ले लिया वो आरएफओ हो गया। तो

51:03

आरएफओ / RFO * 100 पहला आ गया। फिर अदर

51:06

इनकम अप RFO * 100 दूसरा आ गया। फिर

51:09

एक्सपेंसेस / RFO * 100 तीसरा आ गया। फिर

51:12

उसके बाद लास्ट में प्रॉफिट अप RFO * 100

51:14

तो अल्टीमेटली ऐसे चल रहा है और एक ही साल

51:16

की बात हो रही है तो कॉमन साइज वर्टिकल का

51:19

एग्जांपल होता है बच्चों। है ना? तो जब आप

51:21

एक ही साल का डेटा एनालाइज कर रहे हो उसको

51:23

आप वर्टिकल एनालिसिस बोलते हो। दो साल का

51:26

कर रहे हो तो हॉरिजॉन्टल बोलते हो। आइटम्स

51:29

इसमें सेम आइटम्स की स्टडी होती है बेटा।

51:31

जैसे हम जब कंपैरेटिव बनाते हैं तो आरएफओ

51:34

को आरएफओ से कंपेयर करेंगे। प्रीवियस और

51:36

करंट। है ना? उसके बाद इस तरीके से अदर

51:38

इनकम को अदर इनकम से कंपेयर करेंगे।

51:40

प्रीवियस और करंट। तो सेम आइटम की स्टडी

51:43

होती है। जबकि कॉमन साइज में अलग-अलग

51:45

आइटम्स होती हैं। सेम ईयर में ही। पहले

51:47

आरएफओ फिर अदर इनकम, फिर एक्सपेंसेस, फिर

51:49

प्रॉफिट, फिर टैक्स, फिर प्रॉफिट आफ्टर

51:51

टैक्स। अलग-अलग आइटम्स होती हैं। ये आ

51:53

गया। ये बच्चों एब्सोल्यूट फॉर्म में भी

51:56

होता है और परसेंटेज फॉर्म में भी होता

51:58

है। कंपैरेटिव देखते हो अमाउंट में भी

52:00

होता है, परसेंटेज में भी होता है। ये

52:02

सिर्फ परसेंटेज में होता है। ये सिर्फ और

52:05

सिर्फ परसेंटेज में हो जाता है। उसके बाद

52:08

बेटा स्टेटमेंट में

52:10

यहां पर हम लोग कंपैरेटिव स्टेटमेंट ले

52:12

लेते हैं या ट्रेंड एनालिसिस ले लेते हैं।

52:15

भाई कंपैरेटिव स्टेटमेंट और ट्रेंड

52:16

एनालिसिस इसी में आता है। इधर कॉमन साइज

52:19

आता है। ठीक है? अदर नेम इसको बच्चों

52:22

डायनेमिक बोलते हैं। इसको बच्चों स्टैटिक

52:24

बोलते हैं। एक को डायनेमिक बोला जाता है।

52:26

एक को स्टैटिक बोला जाता है। डायनेमिक

52:28

क्यों? क्योंकि दो सालों के बीच में

52:29

कंपैरिजन हो रहा है। स्टैटिक क्यों?

52:30

क्योंकि एक ही साल के बीच में हो रहा है।

52:32

इसका भी स्क्रीनशॉट ले लो बच्चों।

52:35

डन। यही सबसे इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है इस

52:37

चैप्टर में से। बढ़िया।

52:40

अब हमारे पास आ रहा है कि देखो ये सात आठ

52:43

सात आठ पॉइंटर्स हैं। आपको कोई भी तीन

52:45

पॉइंट्स जो आपको इजी लगे अपनी बुक में से

52:47

याद कर लेने हैं बेटा। कोई भी तीन-तीन

52:49

पॉइंट्स क्योंकि तीन नंबर से ऊपर का

52:51

थ्योरी नहीं आने वाला। तो आपको कोई भी

52:53

तीन-तीन पॉइंट्स जो हैं याद कर लेने हैं।

52:54

देखो क्या दिया हुआ है? बोल रहा है पर्पस

52:56

क्या है एनालिसिस का? हम एनालिसिस क्यों

52:59

कर रहे हैं? व्हाई? तो ये बेटा लर्निंग

53:01

वाला पार्ट है। सारे के सारी पॉइंटर्स मैं

53:03

आपको समझा रहा हूं। कोई भी तीन जो आसानी

53:05

से याद कर सको कर लेना। टू मेजर द अर्निंग

53:08

कैपेसिटी। हम लोग ये एनालाइज करते हैं कि

53:11

हमारी प्रॉफिटेबिलिटी क्या है? हम कितना

53:13

पैसा कमा सकते हैं? हम अलग-अलग रेशियोज़

53:15

निकालते हैं ना प्रॉफिटेबिलिटी रेशियोज़

53:16

वो। क्यों निकालते हैं? एनालाइज़ करने के

53:18

लिए। राइट? टू मेज़र द सॉल्वेंसी। हम लॉन्ग

53:22

टर्म पोजीशन चेक करते हैं कि कंपनी अपने

53:24

लॉन्ग टर्म बोरोइंग्स पे कर भी पाएगी या

53:26

नहीं कर पाएगी। स्टडी करके ही तो पता

53:28

चलेगा। उसके बाद टू मेज़र द फाइनेंशियल

53:30

स्ट्रेंथ। हम बैलेंस शीट को अच्छे से

53:32

कंपेयर करते हैं। कंपैरेटिव स्टेटमेंट्स

53:34

बनाते हैं। कॉमन साइज स्टेटमेंट्स बनाते

53:36

हैं। उससे हमें पता चलता है रेशोज़ निकालते

53:38

हैं। उससे हमें स्ट्रेंथ पता चलती है।

53:40

बैलेंस शीट की डे इक्विटी क्या है? टोटल

53:42

एसेट्स टू डे क्या है? मल्टीपल रेशियोज़

53:44

निकालते हो ना? चौथा टू मेक कंपैरेटिव

53:47

स्टडी। ये मैंने आपको अभी ऊपर ही बता दिया

53:49

ताकि आप कंपेयर कर पाओ। पांचवा कैपेबिलिटी

53:52

पता लग सके कि पेमेंट कर भी पाएंगे या

53:54

नहीं कर पाएंगे। है ना? बिज़नेस के ट्रेंड

53:57

देखना कि पहले साल क्या, फिर अगले साल

53:59

क्या, फिर अगले साल क्या, फिर उससे अगले

54:00

साल क्या? ये सब एनालिसिस से ही पता

54:02

चलेगा। टू जज द एफिशिएंसी ऑफ़ मैनेजमेंट।

54:06

जब हम एनालाइज़ करेंगे बच्चों, तो जितने

54:08

पॉजिटिव रिजल्ट्स आ रहे होंगे, उतना

54:10

एफिशिएंट है मैनेजमेंट। जितने नेगेटिव

54:12

रिजल्ट्स आ रहे होंगे, उतना इनफिशिएंट है

54:14

मैनेजमेंट। तो मैनेजमेंट की एफिशिएंसी जज

54:18

करने के लिए भी एनालिसिस करी जाती है।

54:21

उसके बाद यूज़फुल इनेशन देना यूज़र्स को।

54:24

जितने भी यूज़र्स हैं चाहे वो इंटरनल हो,

54:26

चाहे वो एक्सटर्नल हो, सबको देने के लिए

54:27

एनालिसिस किया जाता है। परफेक्ट। चलो

54:32

सर। इसके बाद आता है बच्चों, क्यों

54:35

इंपॉर्टेंट है एनालाइज़ करना? व्हाई इट इज़

54:38

वेरीेंट टू एनालाइज़। तो देखो सब कुछ आ

54:40

जाता

54:42

है। मैनेजमेंट के लिए क्यों इंपॉर्टेंट

54:44

है? टू चेक द परफॉर्मेंस। ताकि हम

54:48

परफॉर्मेंस चेक कर सकें। इन्वेस्टर के लिए

54:51

क्यों इंपॉर्टेंट है? ताकि वो कंपनी की

54:54

पोजीशन चेक कर पाए कि हम इसको पैसा दें भी

54:57

या ना दें। क्रेडिटर के लिए क्यों

54:59

इंपॉर्टेंट है? ताकि वो क्रेडिट वर्दीनेस

55:02

चेक कर पाए कि ये कंपनी क्रेडिट वर्दी भी

55:06

है या नहीं है। गवर्नमेंट के लिए क्यों

55:08

इंपॉर्टेंट है? ताकि वो टैक्स कंप्लायंस

55:11

देख पाए कि कंपनी टैक्स कंप्लायंस या लीगल

55:14

कंप्लायंसेस फॉलो करती भी है या नहीं करती

55:17

है। तो टैक्स कंप्लायंसेस लीगल

55:19

कंप्लायंसेस के लिए। फाइनेंसियल

55:20

इंस्टीटशंस के लिए क्यों? फाइनेंसियल

55:22

इंस्टीटशंस भी बच्चों मेनली क्रेडिट

55:24

वर्दीनेस ही देखते हैं कि कंपनी की क्या

55:26

पोजीशंस हैं। तो देखो बहुत सारी पार्टीज

55:29

के लिए अलग-अलगेंस है इसकी। है ना?

55:31

एंप्लाइजज़ के लिए क्यों? ताकि वो देख पाएं

55:34

कि ये कंपनी हमारी सैलरी वगैरह भी टाइम पे

55:35

दे देगी या नहीं दे देगी? स्टॉक एक्सचेंज

55:37

अथॉरिटीज़ के लिए क्यों? कि अगर ये कंपनी

55:40

हमारे यहां लिस्टेड कंपनी है, शेयर वगैरह

55:42

इशू करने के लिए आएगी तो क्या ये कंपनी

55:44

सही भी है? भागुक तो नहीं जाएगी। टैक्सेशन

55:46

अथॉरिटीज़ के लिए क्यों? वही टैक्स

55:48

कंप्लायंस सही से हो रहा है या नहीं हो

55:50

रहा है? अदर पार्टीज के लिए क्यों? ताकि

55:52

पता लग सके कंपनी एक्चुअल में प्रॉफिटेबल

55:55

है। कंपनी की फाइनेंसियल पोजीशन क्या है?

55:57

कंपनी की पब्लिक रिलेशंस कैसे हैं? कंपनी

56:00

की परफॉर्मेंस कैसी है? गोल्स कैसे हैं?

56:02

तो सबके लिए कुछ ना कुछ पर्पस होता है चेक

56:04

करने का फाइनेंसियल एनालिसिस को। ठीक है

56:09

बेटा? ये सबसे इंपॉर्टेंट आता है कि

56:12

क्या-क्या लिमिटेशंस हैं फाइनशियल

56:14

स्टेटमेंट्स एनालिसिस की। क्या-क्या

56:16

लिमिटेशंस इसके अंदर आ जाती हैं बच्चों?

56:18

सबसे पहले फाइनशियल स्टेटमेंट्स आर

56:21

अफेक्टेड बाय विंडो ड्रेसिंग। विंडो

56:23

ड्रेसिंग का मतलब होता है बच्चों

56:25

मैनपुलेशन करना। देखो कई बार कंपनीज़

56:29

इन्वेस्टमेंट लेने के लिए कई बार अपने आप

56:32

को ओवर प्रॉफिटेबल दिखा देती हैं या कई

56:36

बार प्रॉफिट्स को अंडरस्टेट कर देती हैं।

56:39

तो ओवरस्टेटमेंट भी होती है,

56:40

अंडरस्टेटमेंट भी होती है। प्रॉफिट्स को

56:42

ऊपर नीचे किया जाता है। तो जो ये

56:44

मैनपुलेशंस होती है ना बच्चों, इसको हम

56:46

विंडो ड्रेसिंग बोलते हैं। तो फाइनेंसियल

56:48

स्टेटमेंट्स कई बार विंडो ड्रेसिंग से

56:50

अफेक्टेड होती हैं। उसके बाद जितनी भी

56:52

फ़ेंसियल स्टेटमेंट्स हैं, वह प्राइस लेवल

56:55

में कितना चेंज है, यह रिफ्लेक्ट नहीं

56:57

करती। एक्चुअल में तो हम टोटल अमाउंट ले

56:59

लेते हैं ना, बस। भाई, हम लोग फ़ेंसियल में

57:01

क्या लिखते हैं? प्राइस इंटू क्वांटिटी,

57:03

टोटल सेल। उसमें कितना बदलाव प्राइस की

57:05

वजह से है, कितना क्वांटिटी की वजह से है,

57:07

वो कोई भी रिफ्लेक्ट नहीं करता। तो, हमारा

57:09

काम यहां पे इनफ्लेशन डिफ्लेशन दिखाना

57:11

नहीं है। हमारा काम तो सिर्फ प्रॉफिट या

57:12

लॉस निकालना है। यह भी इसकी एक लिमिटेशन

57:15

में आ जाता है। तीसरा बच्चों, डिफरेंट

57:17

अकाउंटिंग पॉलिसीज़। अब आप देखते हो ना

57:19

डेप्रिसिएशन के अलग-अलग मेथड्स हैं।

57:21

इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन के अलग-अलग मेथड्स

57:23

हैं। इसी तरीके से एकाउंटिंग में बहुत

57:25

सारी चीजें हैं जिनके अलग-अलग मेथड्स हैं।

57:27

तो कोई कुछ लगा रहा है, कोई कुछ लगा रहा

57:29

है, कोई कुछ लगा रहा है। फिर कंपैरिजन

57:30

कैसे करूं? तो कंपैरिजन पॉसिबल नहीं हो

57:33

पाता। उसके बाद पर्सनल एबिलिटी पे डिपेंड

57:35

करता है कि एनालिस्ट कितने अच्छे से

57:37

एनालाइज कर रहा है। किसी ने बहुत बढ़िया

57:39

से करी। कोई नहीं कर पाया। यह भी प्रॉब्लम

57:41

है। उसके बाद डिफिकल्टी इन फॉरकास्टिंग।

57:44

सिर्फ अकाउंटिंग के बेसिस पर बेटा आप

57:46

फॉरकास्ट नहीं कर सकते कोई भी चीज। तो

57:48

बहुत सारी ऐसी कंपनीज़ हैं जो चीजें अच्छी

57:51

दिखा रही है। आप कैसे फॉरकास्ट करोगे?

57:53

लाइक फॉर एग्जांपल गुडविल ही है या एवरेज

57:55

प्रॉफिट ही है। अब सपोज़ करो किसी कंपनी का

57:57

पहले साल प्रॉफिट 10,000 है। फिर 20,000

58:00

है। फिर 3,000 है। ये है कंपनी A. एक

58:05

कंपनी B है। पहले साल 30 फिर 20 फिर 10।

58:10

अगर आप एवरेज करोगे तो 60/ 3 20,000 का

58:15

एवरेज आएगा। यहां भी एवरेज करोगे तो 60/ 3

58:20

20,000 का एवरेज यहां आ जाएगा। तो देखो

58:22

एवरेज प्रॉफिट के हिसाब से तो दोनों

58:24

कंपनियां एक ही है। एक ही तरीके से चल रही

58:26

है। लेकिन अगर रियल देखा जाए तो ये तो

58:28

कंपनी ग्रो कर रही है। हर साल प्रॉफिट बढ़

58:30

रहा है और ये डूबती जा रही है। हर साल

58:32

प्रॉफिट कम हो रहा है। तो एवरेज प्रॉफिट

58:35

के बेसिस पे आप कैसे फॉरकास्टिंग करोगे?

58:37

दिक्कत है या नहीं है? नेक्स्ट लैक ऑफ

58:39

क्वालिटेटिव एनालिसिस। अकाउंटिंग में हम

58:42

क्वालिटेटिव जैसी चीजें लिखते ही नहीं

58:44

हैं। बच्चों अगर आपका आज मूड खराब है और

58:47

आप सही से सेल्स नहीं कर पा रहे।

58:49

अकाउंटिंग में लिखा ही नहीं आपने। मैनेजर

58:51

के बीच में एंप्लाइजज़ के बीच में गजेस हो

58:53

गए। उन्होंने ठीक से काम ही नहीं किया।

58:55

लिखा ही नहीं है आपने। आपकी पूरी टीम

58:57

स्ट्राइक पे चली गई। बहुत सारा नुकसान

58:59

हुआ। लिखा ही नहीं आपने। तो ये

59:00

क्वालिटेटिव जैसी चीजें बच्चों लिखते ही

59:02

नहीं है। ये भी एक लिमिटेशन है। उसके बाद

59:05

सिंगल ईयर एनालिसिस का बस लिमिटेड यूज़ हो

59:08

सकता है। बहुत ज्यादा एक्सटेंडेड यूज़ नहीं

59:10

हो सकता क्योंकि हर साल चीजें चेंज हो

59:12

जाती हैं। तो आपको हर साल दोबारा एनालिसिस

59:14

दोबारा खर्चा करना ही पड़ेगा। तो कोई भी

59:17

बच्चों रीड सारी लिमिटेशंस करनी है लेकिन

59:20

लर्न कोई भी तीन-चार लिमिटेशंस आप कर सकते

59:23

हो। ओ तो तीनचार लिमिटेशंस

59:26

तीनचारेंस करते हुए आपका चैप्टर ये हो

59:30

जाएगा समाप्त। सर छोटा सा चैप्टर है।

59:32

बिल्कुल बच्चों छोटू सा चैप्टर है। नन्ना

59:35

सा चैप्टर है। ये हमने कंप्लीट कर लिया।

59:37

थैंक यू सो मच गाइस फॉर जॉइनिंग इन। आई एम

59:39

गना सी यू ऑल वेरी वेरीरी सून। टिल देन

59:41

सी। टेक केयर। बाय-ब। कीप ग्रोइंग, कीप

59:43

ग्लोइंग एंड कीप स्माइलिंग।

59:46

[संगीत]

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