Jansher ke wapasi|Shams alhayaa|Episode:2|#HusnyKanwal|romantic Urdu novel| Arrogant hero
FULL TRANSCRIPT
अस्सलाम वालेकुम एंड वेलकम टू आवर चैनल
नवेल्स बाय हुसन कमल। मैं हूं आपकी होस्ट
फातिमा। कैसे हैं प्यारे लीडर्स? उम्मीद
करती हूं खैरियत से होंगे। तो मैं हाजिर
हुई हूं नवेल शमसुल हया की एपिसोड नंबर टू
लेकर। तो आइए बगैर किसी ताखर के शुरू करते
हैं। शीशे में वह अपना अक्स कितनी देर
देखता रहा कोई अंदाजा नहीं। रोज मामूल की
तरह तैयार होकर वो 17 साला लड़का
यूनिवर्सिटी पहुंच गया था। एक तूफान था जो
खामोश लबों के पीछे बंद बांधे हुए था।
नहीं जानता क्यों। लेकिन बार-बार अब अपना
सेल निकालकर उसकी स्क्रीन देख रहा था। अब
कोई मैसेज नहीं आया था। कोई कॉल नहीं।
शायद वह आखिरी कॉल थी उस लड़की की जानिब
से और आखिरी
मैसेज। कहां गुम हो जा शेर टीचर तुम्हारा
नाम कब से कॉल कर रहे हैं? कहने को दो दिन
गुजर गए थे उसकी पहली और आखिरी कॉल को।
लेकिन दिमाग अभी भी नॉर्मलिटी की तरफ नहीं
आ रहा था। बारहा यही ख्याल आता कि अब तक
तो उसका निकाह हो चुका होगा। अब तक तो वह
मौजम की बीवी बन चुकी होगी।
वह अभी भी यही सोच रहा था बैठकर। जब बराबर
में बैठी लड़की ने अपना पेन उसके दूदिया
हाथ पर हल्के से मारते हुए उसे मुतवज्जा
किया। उप्स सॉरी। हल्का सा मुस्कुरा कर
गोया हुआ। जिस पर उस लड़की के चेहरे पर
बड़ी शर्मीली सी मुस्कुराहट बिखरी। वो 17
साला लड़का खूबसूरती में अपनी मिसाल आप
था। बहुत कम ही वह किसी से बात किया करता
था। लेकिन इसके बावजूद भी सिर्फ उसके
बराबर में बैठने के लिए क्लास की लड़कियों
की अक्सर लड़ाई हो जाया करती थी। इतने
खूबसूरत लड़के की अभी तक कोई गर्लफ्रेंड
नहीं है। इस बात पर लोगों को एतबार नहीं
आता था। ज्यादातर का यही कहना था कि उसकी
गर्लफ्रेंड है लेकिन लॉन्ग डिस्टेंस
रिलेशनशिप वाला मामला
है। जितने मुंह उतनी बातें मगर एक चीज तो
सबने देख रखी थी कि यूनिवर्सिटी की कई
खूबसूरत लड़कियां उस पे ट्राई मार चुकी
थी। मगर वह संगदिल जरा भाव नहीं देता था।
जी सर। अब उसने सामने टीचर की जानिब देखा।
चलते हैं अगले सीन की जानिब। वक्त को जैसे
पंख लगे हं। एक साल देखते ही देखते गुजर
गया। इस साल के दौरान में किसी कजन ने उसे
कभी कॉल नहीं की। हां, एक-दो बार शुरू में
दादी ने की थी, लेकिन उसने रिसीव ना की,
तो उन्होंने भी करना छोड़ दी। बाप को तो
दूसरी शादी के बाद वह कभी याद ही नहीं आता
था। वह तो बस उसके अकाउंट में पैसे
ट्रांसफर करवा देने को अपना फर्ज अदा कर
देना समझते थे। 25 दिसंबर करीब थी जिसके
सबब उसे यूनिवर्सिटी से छुट्टियां मिली
थी। उसने सोचा क्यों ना अब घर जाकर सबको
मना ले। इल्म था उसे कि सब बहुत नाराज हैं
उससे। बरीरा नाम का कांटा तो वैसे भी नहीं
रहा है अब उसकी जिंदगी में। इसलिए वापस
जाने में कैसे हिचकिचाहट।
सबको सरप्राइज देने की नियत से वह बगैर
बताए पाकिस्तान वापसी की टिकट बुक करा
चुका था। इस बार जब वह कपड़े पैकिंग कर
रहा था तो बहुत खुश था कि अब कोई भी उसे
उस मोटी और काली लड़की के नाम से मंसूब
नहीं करेगा। कोई उसके नाम से उसे नहीं
छेड़ेगा। कोई नहीं कहेगा कि उसका ख्याल
रखो। यह तुम्हारी मंगेतर है। अब वह आजाद
होगा। जिसे चाहे पसंद करे, जिससे चाहे
शादी करे। कोई रोक-टोक नहीं। कोई पाबंदी
लगाने वाला नहीं। अब सिर्फ उसकी मर्जी
चलेगी उसकी जिंदगी पर। अब अगला सीन वो
एयरपोर्ट पर वेटिंग एरिया में बैठा हुआ
था। डार्क मेरून कलर की टीशर्ट पर ब्लैक
जैकेट और ब्लैक पट पहने वो काफी खूबसूरत
लग रहा था। निहायत जाजिब नजर कि हर गुजरता
शख्स उसे देखता हुआ जा रहा था। खासतौर पर
लड़कियां। हालत तो यह थी कि रिसेप्शन पर
खड़ी दो लड़कियां उसे देख कर एक दूसरे के
कान में फुसफुसाकर हंस रही थी और जब भी वह
नजर उठाकर देखता तो शर्मीली सी मुस्कुराहट
पास करती। वो बहुत मनमौजी सा बंदा था।
बहुत कम लोगों पर ही वह नजर भर कर देखने
का करम करता था। उस लम्हे भी वो
इर्द-गिर्द की सताइशी निगाहों से बेनियाज
होकर अपने मोबाइल में पुराने मैसेजेस
डिलीट करने में लगा हुआ था।
जब एक मैसेज पर आकर उसका हाथ रुका। आई लव
यू जाशिर। मैंने जब से होश संभाला है,
सिर्फ तुमसे मोहब्बत की है। प्लीज आ जाओ।
मैं जानती हूं मैं अतीका की तरह खूबसूरत
नहीं हूं। ना ही बाकी और लड़कियों की तरह
दुबली पतली हूं। लेकिन मैं डाइटिंग कर रही
हूं। अब तो मैंने आलू भी खाना छोड़ दिए
हैं। फ्रेंच फ्र्राइ, बर्गर कुछ नहीं खाया
काफी वक्त से। यकीन करो मैंने सब खाना
छोड़ दिया। सिर्फ तुम्हारी खातिर। मेरा
वजन जल्दी कम हो जाएगा। तुम्हें मेरी वजह
से शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं पड़ेगी
लोगों के सामने। प्लीज वापस आ जाओ। यह
मैसेज पहली बार उसकी नजरों के आगे आया था।
शायद यह उस रात किए गए 200 मैसेजेस में से
एक था जिन्हें उसने कभी पढ़ने की जहमत भी
नहीं की थी। वो उस मैसेज को कुछ लम्हे यूं
ही देखता रहा। हम इसे वाकई लगता है यह
पतली हो सकती है और चाचा तो मरने वाले हैं
थे ना। उनका क्या? ड्रामेबाज कहीं के।
दोनों बाप बेटे के ड्रामे खत्म ही नहीं
होते। मैं पहुंच जाता जज्बाती होकर तो
अपनी मोटी और काली बेटी मेरे सर पर ला
देते जिंदगी भर के लिए। बेचारे मौजम भाई
इन बाप बेटी के हाथों बलि का बकरा बन गए।
अब जिंदगी भर इन्हीं का बोझ उठाकर फिरते
रहेंगे। वो ज़रे लब जल कुकड़े अंदाज में
बड़बड़ा रहा था। नहीं जानता क्यों लेकिन उस
मैसेज को डिलीट नहीं किया। कुछ चीजें और
कुछ अमल बेवजह ही होते हैं शायद। चलते हैं
अगले सीन की जानिब। पाकिस्तान पहुंच गया
था। एयरपोर्ट से नाजमाबाद का सफर इतना दूर
तो नहीं था लेकिन ट्रैफिक की वजह से एक
घंटा खौर हो चुका था। गाड़ियों का धुआं,
ट्रैफिक का शोर, आग बरसाता सूरज, शदीद
गर्मी, पसीनों से शराबोर हालत। आते-जाते
बच्चे जो भीख मांग रहे थे, हर चीज उसका सर
भारी कर रही थी। एक साल बाहर रहने की वजह
से उसे कहां आदत रही थी शोर, शराबे और
ट्रैफिक जैम की। गाड़ी रोड पर चल नहीं रही
थी। सिर्फ घसीट रही थी। एक लम्हे के लिए
चलती और फिर 15 मिनट के लिए रुक जाती।
उसके सर में अब दर्द होने लगा था। अभी
गाड़ी ठुक जाती। पागल है क्या? गाड़ी
अल्लाह अल्लाह करके चली ही थी कि अचानक
ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाया। अचानक
ब्रेक लगने पर उस नौजवान का चेहरा आगे
वाली सीट से टकराया। नाक बुरी तरह फूटी
थी। एक लम्हे के लिए उसका सर टकरा गया था।
अभी वह अपनी नाक मसलते हुए सीधा होकर बैठा
भी नहीं था कि उसने टैक्सी ड्राइवर को जोर
से चीखते और गालियां देते हुए सुना। साथ
ही उसने खिड़की से एक बाइक वाले को गुजरता
हुआ देखा। शायद उसी पर टैक्सी ड्राइवर चीख
रहा था। लेकिन उस लड़के से ज्यादा उसके
पीछे बैठी लड़की उसकी तवज्जा का मरकज बन
गई थी। वो काई रंग की टीशर्ट पर वाइट कलर
की ओपन शर्ट और ब्लू जींस पहने हुए थी।
कानों में ना तो झुमकियां थी ना हाथों में
चूड़ियां ना पांव में पाजेब थी ना आंखों
में काजल ना बालों में चोटी थी ना चेहरे
पर शर्मीली सी मुस्कुराहट वो बहुत अलग नजर
आ रही थी आज बहुत मुनफरीद सी जब टैक्सी
ड्राइवर उन्हें गालियां दे रहा था तो वह
खिलखिला कर हंस रही थी और यूं उसे जिंदा
दिल लोगों की तरह हंसते हुए पहली बार देख
रहा था वह उसके बाल अब पहले की तरह कमर को
मुकम्मल ढांके हुए नहीं थे। वो सिर्फ कंधे
से हल्का सा नीचे थे और उस जालिमा ने
उन्हें तबाही मचाने के लिए खुला छोड़ रखा
था। वो अपनी ही मस्ती में मगन हवा में
सरसराते हुए उसके चेहरे पर बार-बार आ रहे
थे। वो बाइक वाला लड़का टैक्सी ड्राइवर से
बचने के लिए बड़ी स्पीड में गाड़ी निकाल
गया था। जहांश शेर ने अब फौरन ही खिड़की
से मुंह निकालकर पीछे की जानिब देखा था।
जहां वह बाइक वाला गया था। वह बाइक वाला
लड़की साथ होने के बावजूद फुटपाथ पर गाड़ी
चलाकर इस रश के एरिया में से निकाल रहा
था। जिस पर जांच शेर का उसकी अकल पर मातम
करने का दिल किया और उससे कहीं ज्यादा उस
लड़की पर जो उसके पीछे बैठी हुई थी बड़ी
शान से। माना पूरे एक साल बाद देखा था। वो
भी सिर्फ एक झलक। लेकिन अपनी रीत बरकरार
रखते हुए खून जला गई थी वो लड़की बुरी तरह
उसका। सुबह के 10:00 बजे का टाइम था। वो
यूं किसके साथ घूमती फिर रही थी रोडों पर?
वह भी पाकिस्तान से रहकर गया था। अच्छे से
जानता था कि सुबह की टाइमिंग में स्कूल
कॉलेजेस की लड़कियां वालिदैन की आंखों में
धूल झोंक कर अपने बॉयफ्रेंड के साथ डेट
मारने निकलती है। खासतौर पर 9 101 की
टाइमिंग के दौरानिया में। और हुलिया क्या
बना रखा था उस लड़की ने अपना? ना सर पे
दुपट्टा था, ना खुद को चादर में लिपटा था,
ना हाथों में चूड़ियां थी, ना आंखों में
काजल था। बाल भी कटवा दिए थे। वह तो जैसे
बिल्कुल बदल गई हो। चलो अब रिवर्स करते
हैं। तेजी से हर चीज अब वापस पीछे की
जानिब जा रही है। उसकी टैक्सी वापस
एयरपोर्ट पर पहुंची। वो टैक्सी से उतरकर
उल्टे पांव लेता एरोप्लेन में पहुंचा।
एरोप्लेन बैकवर्ड में उड़कर कोरिया
पहुंचा। वो उल्टा चलता हुआ वापस वेटिंग
रूम में पहुंचा। वेटिंग रूम से उठकर उल्टा
चलता हुआ अपनी गाड़ी में बैठा। फिर वहां
से उल्टा चलता हुआ हॉस्टल के रूम में
पहुंचा। यहां तक कि वह वापस अपने बेड पर
लेट गया। और अब चलते हैं दूसरी जानिब। टीन
डब्बे वाला, भूसी टुकड़े वाला, रद्दी पेपर
वाला, टीन डब्बे वाला। सुबह उठने के लिए
अलार्म लगाने की जरूरत नहीं थी उसे। तीन
डब्बे वाला काफी होता था इस काम के लिए।
अगर फिर भी वह ढीठ बनकर सोती रहती तो एक
के बाद एक अलार्म बचता था उसे उठाने के
लिए।
ताजाताजा सब्जी वाला भिंडी है, आलू है,
गोभी है, टमाटर है, प्याज है, गाजर है। आ
जाओ बाजी आ जाओ। ताजा सब्जी ले लो। कान
छेदने वाला ₹100 किलो बाल। ₹100 किलो बाल
चटपटी चाट वाला। गोलगप्पे वाला आया।
गोलगप्पे वाला आया। टू डू टूडू। यह
गोलगप्पे वाला सुबह ही सुबह कहां से आ
गया? बाकी सारे अलार्म तो ठीक थे। लेकिन
यह गोलगप्पे और चटपटी चाट वाला सुबह 8:00
बजे कहां से आ गए? और बस उसका दिमाग खटका
और वह तेजी से उठकर बैठी। टाइम पर नजर
डाली तो पौ:45 हो रहे थे। आंखें फटने को
हुई। दिल जोर से धड़का। 9:00 बजे पेपर
स्टार्ट होना था उसका। उसके मैट्रिक के
एग्जाम्स चल रहे थे। कल पूरी रात पढ़ाई
करने की वजह से सुबह उसकी आंख ही नहीं
खुली। कितने वक्त से वह दुआ कर रही थी कि
पेपर्स हो जाए, पेपर्स हो जाए ताकि वो
आयशा की शादी एंजॉय कर सके। मगर कमबख्त
पेपर्स की तारीख डिले होते उन्हीं दिनों
में आन पड़ी जब आयशा के वलीमे का दिन था।
आयशा शादी होकर हैदराबाद गई थी। सब वलीमे
के लिए कल दोपहर से हैदराबाद के लिए निकल
गए
थे। सिर्फ वो और उसकी वालदा रुके थे घर
में। पेपर्स की वजह से वो कहां शिरकत कर
सकी थी आयशा के वलीमे में। वो बर् की तेजी
से उठी। ना कपड़े चेंज किए, ना मुंह धोया,
नाश्ता किया, ना अपनी वालदा को उठाने की
जहमत की। बस तेजी से अपना सामान लेकर बाहर
निकली। बाल बनाने का वक्त नहीं था तो
उन्हें खुला ही छोड़ दिया। वरना पीछे के
बालों में छोटी पोनी बन जाया करती थी।
उसके बटरफ्लाई कटिंग हुई थी बालों में।
उनका रंग भी बिल्कुल स्याह था। काली घटा
की मानत कि जिस पर छाए फिर वह उनकी छाया
से निकलना ना चाहे। निहायत घने और रेशमी
बाल थे उसके। सारे पेपर्स देने वह मौजम के
साथ ही गई थी। वह बेचारा तो अपनी बहन के
वलीमे में जाते वक्त भी परेशान था उसके
लिए कि वह अकेले पेपर देने कैसे जाएगी।
लेकिन उसने भरोसा दिलाया था कि वो मैनेज
कर लेगी और यह मैनेज किया था उसने कि
10:00 बज रहे थे और वह रोड पर परेशान हाल
खड़ी थी किसी टैक्सी के इंतजार में। 1
घंटा हो चुका था पेपर स्टार्ट हुए। हर
लम्हा जैसे उसकी जान पे भारी था। पूरे साल
मेहनत की थी उसने। हेलो तुम्हारा पेपर
नहीं था आज? फिर यहां क्या कर रही हो?
टैक्सी वाला तो नहीं आया लेकिन मौजम का
सबसे अच्छा दोस्त और उनका पड़ोसी ताबिश
बाइक पर वहां आ पहुंचा था। मुझे स्कूल
छोड़ देगा यार। वैसे ही बहुत लेट हो गई
हूं। आज सूरज क्या मशरिक की जगह मगरिब से
निकल आया था? जो बरीरा हसन उससे मदद मांग
रही थी। वह भी निहायत मिन्नती लहजे में।
सिर्फ 5 मिनट में छोड़ दूंगा। जल्दी बैठ।
मुकाबिल के पूरे एतमाद अंदाज में कहते ही
वह बगैर एक लम्हे सोचे तेजी से उसके पीछे
बैठी। वो भी बिल्कुल लड़कों वाले अंदाज
में। दोनों पांव बाइक की अलग-अलग साइड पर
रखकर। वो जानता था कि वो ऐसे ही बैठती है।
मौजम के साथ बहुत बार आते-जाते देखा था
उसे। मजबूती से पकड़ लो क्योंकि हमारा यह
रॉकेट अब तुम्हारे बोट जाकर ही रुकेगा।
उसके कहते ही बरीरा ने तेजी से उसके दोनों
कंधों पर अपने दोनों हाथ रखे और फिर उसकी
घड़ी स्टार्ट हुई और उसने इतनी खतरनाक
बाइक चलाना शुरू की कि ना वह फुटपाथ देख
रहा था और ना ही वह ट्रैफिक देख रहा था।
ना कोई सिग्नल देख रहा था ना ही सामने से
आती किसी गाड़ी को। उसकी बाइक हवा के
घोड़े पर सवार थी। यहां तक के उसने आधे
घंटे के सफर को सिर्फ 15 मिनट में तय कर
दिया था। इतनी रैश ड्राइविंग करके लाया था
उसे।
स्कूल पहुंचते ही जहां उसका बोर्ड पड़ा
था, फौरन उतरी और तेजी से भागते हुए अंदर
बढ़ी क्योंकि सेकंड लास्ट पेपर था इसलिए
उसे पता था कि उसका क्लासरूम कौन सा है।
पूरे स्कूल में सन्नाटा तारी था। पेपर
शुरू हुए 1 घंटे से ज्यादा हो चुका था और
वह भागती हुई आ रही थी। फर्श पर उसके
जूतों के पड़ने पर धमक पैदा हो रही थी। वह
ऐसे भाग रही थी जैसे दिल वाले दुल्हनिया
में सिमरन राज के लिए भागती है। बस फर्क
इतना था कि वह हीरो से सहारा लेने के लिए
भागने के बजाय खुद हीरो बनने के लिए भाग
रही थी। अपने फ्यूचर के गोल्स के लिए,
अपनी लाइफ के लिए, अपनी जिंदगी की असल
कामयाबी के लिए। वो कोई पतली दुबबली लड़की
नहीं थी। वह थोड़ी हेल्दी थी। इसलिए जब वह
भाग रही थी तो उसका सांस भी ज्यादा फूल
रहा था। लेकिन यह पेपर उसके लिए जिंदगी और
मौत की जंग से ज्यादा अहम था। इसलिए वह एक
लम्हे के लिए भी रुक नहीं रही थी। वो तेजी
से सीढ़ियों की जानिब भागी। उसका रूम थर्ड
फ्लोर पर था। थर्ड फ्लोर पहुंचने के बाद
उसकी क्लास सबसे कोने पर थी। इसलिए वह
भागते हुए बड़े से कॉरिडोर पार कर रही थी
और जब वह उस कॉरिडोर को पार कर रही थी। इस
दौरान जितनी भी क्लासें बीच में थी उनमें
मौजूद लड़कियां उसे भागते हुए देख रही थी।
वह भागती हुई लड़की पूरे ही फ्लोर की
तवज्जा का मरकज बन गई थी। भागते-भागते
उसकी हालत खराब हो गई थी। जब वह क्लास रूम
के दरवाजे पर पहुंची तो वह गहरे-गहरे सांस
ले रही थी। जल्दी अंदर आए। पेपर शुरू हो
चुका है कब का। टीचर ने उसे देखते ही तेजी
से अंदर आने का कहा। वो अपना चेहरा जो
पसीनों से भीग रहा था। अपने बाजू की
आस्तीन से रगड़कर साफ करती फौरन ही अपनी
जगह पर जाकर बैठी। वह हाथी कांपती अब पेपर
शुरू कर रही थी। लेकिन यह उसके पूरे साल
की मेहनत थी और वह सवा घंटा लेट हो चुकी
थी पहले ही। इसलिए अब उसका हाथ पेपर पर
ऐसे चल रहा था कि एक लम्हे के लिए भी
रुकने के लिए तैयार नहीं था। पूरे पेपर के
दौरान उसका दिल भारी ही रहा। यही डर उस पर
हावी रहा कि पेपर की टाइमिंग खत्म हो गई
और वह कंप्लीट ना कर सकी तो इसी खौफ से
उसका हाथ डबल स्पीड से चलता रहा। यह तो
शुक्र था कि इंग्लिश का पेपर था और उसने
खुद भी जहानत के साथ वह सवालात पहले किए
जो उसे रटे हुए थे। मैम सिर्फ 5 मिनट बेल
रिंग हो गई थी। बहुत सी लड़कियां तो पहले
ही जा चुकी थी। आधी क्लास तो खाली थी। बस
वही थी जिसका पेन अभी तक चलता चला जा रहा
था। टीचर से 5 मिनट लेने के बाद उसने अपना
काम जारी रखा। टीचर ने भी दे दिया था
क्योंकि वह देख चुकी थी। वह लड़की चीटिंग
के आश्रय में नहीं बैठी हुई। वो अपनी
मेहनत से कर रही है। स्कूल यूनिफार्म तक
पहनकर नहीं आई थी वह। आखिरी वर्ड लिखने के
बाद जब उसने अपने इर्दगिर्द देखा तो पूरी
क्लास खाली थी। सामने टीचर बैठी हुई
पेपर्स की अरेंजमेंट करती नजर आ रही थी।
वो अकेली थी पूरी क्लास में लेकिन वो
मुतमई थी और खुश भी क्योंकि उसका पेपर
काफी अच्छा हुआ था लेट आने के बावजूद भी।
टीचर को पेपर देने के
बाद अब वो अपनी एक-एक करके उंगलियां चटका
रही थी। फिर अपनी गर्दन को आड़ा टेढ़ा
किया तो उसमें से भी चटक की हल्की सी आवाज
महसूस हुई थी। तू अभी तक यहीं है? वह
स्कूल से बाहर यही सोचते हुए निकली थी कि
चिंची रिक्शा ले लेगी मेन रोड से। मगर
दरवाजे के बाहर ही ताबिश को खड़ा पाकर
चौकी। हां, सोचा 2 घंटे ही तो हैं। वेट कर
लेता हूं। मुझे कौन सा कहीं जाना है? वो
उसे देखकर फौरन ही अपनी बाइक से टेक हटाकर
कह रहा था। 2 घंटे से गर्मी में मेरा
इंतजार कर रहे हो। पागल तो नहीं हो?
मुकाबिल बेयकीनी से मुस्कुराते हुए कह रही
थी। साथ-साथ उसके लहजे में थोड़ी डपट भी
थी। तुम्हें आज पता चला है? वो हंसते हुए
कहता अब गाड़ी स्टार्ट कर रहा था। नहीं
पता तो पहली मुलाकात में ही चल गया था। बस
कंफर्म आज हुआ है। मुकाबिल भी हंसते हुए
कहती अब उसके पीछे बैठ गई थी। बैठते वक्त
वही लड़कों वाला अंदाज। पेपर कैसा हुआ?
थोड़ी देर तक सफर खामोशी से जारी रहा। फिर
उस वजाहत से मालामाल नौजवान ने उस अजनबी
सी खामोशी को खुद आगे बढ़कर तोड़ा। सवाल
करने पर बजाय जवाब आने के उल्टा उसे अपने
कंधे पर बरीरा का सर टिकता महसूस हुआ। एक
लम्हे के लिए उसे झटका लगा। करंट सा जो
उसके पूरे जिस्म में सराइयत कर गया था
लम्हा भर में। वो बुरी तरह थकी हुई थी।
बाइक पर बैठते ही जैसे ही ठंडी हवा उसके
चेहरे पर लगी, उसे नींद आने लगी और पता ही
नहीं चला कब झोंके लेते हुए उसने ताबिश के
कंधे पर सर रख
दिया। उस नौजवान की बाइक अब खुद ही
आहिस्ता चलने लगी थी। इतनी आहिस्ता, इतनी
आहिस्ता कि बराबर से गधा गाड़ी वाला भी
उससे आगे निकल जाए। आधे घंटे का सफर 50
मिनट में तय करके वह घर पहुंच ही गया था
उसे लेकर।
ओए शैतान की नानी उठो घर आ गया है। उस
नौजवान ने हल्का सा अपना कंधा उचकाते हुए
आहिस्तगी के साथ कहा जिस पर बरीरा की आंख
खुली। घर आ भी गया। वाह यार कितनी तेज
गाड़ी चलाते हो तुम। पता है मैं भी बहुत
जल्द रेसिंग सीखने वाली हूं। ताबिश ने उसे
बाइक से उतरते वक्त कहते सुना। वो अपनी
बात कहती उसका कंधा थपथपाती हुई अंदर की
जानिब चल दी। इस बात से बेखबर के अंदर एक
परदेसी आया हुआ है। बड़ी अम्मी को उसके
लिए बार-बार दरवाजा खोलने आने में हमेशा
चिढ़ होती थी। ना वह खुद आती थी ना वो
अपनी बच्चियों को आने देती थी कि वो उसकी
नौकर नहीं है जो उसके लिए आकर दरवाजा
खोलें। फिर दादी बूढ़ी थी। वो कहां इतनी
दूर चलकर आएंगी? उसके लिए दरवाजा खोल लें।
और मां का भी यही हाल था। शौहर की बीमारी
के सबब बहुत कम उम्र में ही उन पर बुढ़ापा
आ गया था। सच है। औरत की जवानी मर्द की दी
हुई आजाइश और मोहब्बत का देन होती है। अगर
मर्द उसे यह ना दे पाए तो बहुत जल्द वह
बूढ़ी हो जाती है। कहने को एक दरवाजा
खोलने आना कोई बड़ी बात नहीं है। और जवान
लड़कियों के लिए तो बिल्कुल नहीं। लेकिन
जब आप जॉइंट फैमिली में रह रहे हो तो बड़ी
चुपाचापी चलती है कि मेरे बच्चे क्यों
तेरे लिए दरवाजा खोलने आए? क्या हम नौकर
लगे हैं? एक बार इस दरवाजा खोलने की लड़ाई
पर उसे स्कूल से आने के बाद बाहर ही खड़ा
रहना पड़ गया था पूरे दिन। जिसके सबब मौजम
ने उसके लिए अलग से दरवाजे की चाबी बनवा
दी थी। वह चाबी से दरवाजा खोलकर अंदर आई
और बहुत आहिस्तगी के साथ अपने पीछे दरवाजा
बंद कर दिया। उसे प्यास लग रही थी तो वह
डायरेक्ट किचन की जानिब आई पानी पीने के
लिए। पानी का कूलर कल दोपहर का भरा हुआ
था। तो उसे पता था उसमें ठंडा पानी नहीं
मिलेगा। इसलिए उसने फ्रिज खोलना चाहा
लेकिन अगले ही लम्हे चौकी। जब देखा कि
फ्रिज तो लॉक है। आ यह चंडालन औरत एक दिन
मुझे पागल कर देगी। वो फ्रिज का दरवाजा
निहायत गुस्से से
खोलकर अपने बालों में दोनों हाथ ले जाकर
उन्हें जड़ से पकड़ कर झिंझोड़ते हुए
निहायत चिड़चिड़े से लहजे में बोल रही थी।
शदीद गर्मी में फ्रिज को लॉक कौन लगाकर
जाता है? सिवाय उसकी तालाक चालाक ताई के।
क्योंकि अब घर उनके शौहर और बेटे की कमाई
से चलता था। इसीलिए हर चीज पर वह इसी तरह
हक जताती थी। बरीरा की लैंग्वेज में कहा
जाए तो गुंडा राज था उनका। दादी भी अब
उनके सामने भीगी बिल्ली बनकर ही रहती थी।
ठीक है बच्चू और करो लॉक। वो भी बरीरा हसन
थी। शायद भूल गई थी तैयबा बेगम। उसने भी
फिर ना आओ देखा ना ताओ देखा और हावन दस्ता
का स्टील का डंडा उठाकर लाई और लॉक पर
धड़ाधड़ मारना शुरू कर दिया। उसे फर्क
नहीं पड़ता था फ्रिज टूटे या बचे। अकल से
पैदल लड़की यह क्या कर रही हो तुम? और
अचानक पीछे से आने वाली बरहम आवाज पर उसका
हाथ रुका। वो बिल्कुल मुंजमिद सी हो गई
थी। यह वो आवाज थी जिसे वो करोड़ों लोगों
में भी पहचान सकती थी। हां पापा मेरा
निकाह करना चाहते हैं। तो प्लीज आ जाओ
वरना ये लोग मेरा निकाह मौजम भाई से पढ़वा
रहे हैं। उफ तुम बाप बेटी के ड्रामे खत्म
ही नहीं होते। दुनिया की सारी खूबसूरत
लड़कियों को छोड़कर क्या तुम जैसी मोटी और
काली ही रह गई है मेरे लिए। मंगनी के नाम
पर जिंदगी भर पैसा खाया तुमने और तुम्हारे
बाप ने मेरा। अब मेरी बची कुची खुशियां और
ख्वाब भी खा जाना चाहती हो। अभी उम्र ही
क्या है मेरी? थोड़ा तो जी लेने दो मुझे
यार। मेरा भी हक है जिंदगी की खुशियों पर।
क्या जान लगा रखा है। अच्छा है करो किसी
और से निकाह और जान छोड़ो
मेरी। मैं नहीं आने वाला तुम्हारे लिए।
कभी भी नहीं। अगर बूढ़ी होना चाहती हो
मेरे इंतजार में तो बैठी रहो। मुझे कोई
ऐतराज नहीं। लेकिन मुझसे किसी चीज की
उम्मीद ना रखना बरीरा। अब कॉल या मैसेज
किया तो ब्लॉक कर दूंगा। वो रूह को छल्ली
कर देने वाले जुमले एक साल गुजरने के
बावजूद भी उसके कानों में गूंज रहे थे आज
भी। बरीरा हिल नहीं सकी थी। कितनी देर पलट
कर देखना तो बहुत दूर की बात ठहरा। तो एक
साल बाद वह संगदिल और बेरहम शख्स लौट आया
था। वो रोना नहीं चाहती थी। इस पूरे साल
में उसने खुद को बहुत मजबूत कर लिया था।
लेकिन जैसे ही उस हरजाई की आवाज सुनी
आंखें भर आई। मुझे दो इसे। वो कहता हुआ भी
एक कदम ही आगे बढ़ा था उसके करीब आकर डंडा
लेने के लिए कि बाहर से दरवाजा खुलने की
आवाज आई। हम वापस आ गए। वो मुअज्जम की
ऐलानिया आवाज थी जो उसके कानों की समाद से
टकराई। वो स्टील का डंडा वहीं फर्श पर
फेंक कर तेजी से बाहर की जानिब भागी। उसके
अचानक भागने पर जाशर हैरान हुआ। अम्मी
बेफिक्र हो जाए मेरे हाथ में ही है सामान।
वह सामान से भरा बैग कंधे पर टंगाए घर में
दाखिल हुआ था। उसकी तवज्जा पीछे की जानिब
थी। अभी वह बोल ही रहा था जब सामने से उसे
कोई अपनी जानिब भागते हुए आता महसूस हुआ।
उसके आगे के अल्फाज़ मुंह में ही कहीं खो
गए। जब वह अचानक से आकर उसके सीने से लगी।
दिल जोर से धड़का। इतना जोर से कि लगा बाहर
निकल आएगा। उसने अपने दोनों हाथों की
मुट्ठियां मजबूती से भेंच ली। जबकि उस
पुरकशिश सी लड़की ने उसकी कमर के गिर्द
अपने हाथों से हिसार बांधा। उसने मुकम्मल
जकड़ लिया था उसे और उससे कहीं ज्यादा
उसके दिमाग और रूह को वक्त जैसे थम गया था
या पता नहीं उसे लगा। वो पतला दुबला जाजिब
नजर हसीन सा लड़का था। आंखों पर गोल
चश्मा, खड़े नकुश बाल जल से पीछे सेट किए
हुए। लाइट पिंक रंग के कुर्ता शलवार में
मलबूस। वह ज्यादातर कमीज शलवार ही पहना
करता था। वह खानदान का सबसे बड़ा पोता था।
इसलिए उसका रोबो दबदबा ही अलग था सब पर।
अरीब साहब के मुकाबले उसकी कमाई डबल थी तो
देखा जाए तो पूरा घर उसी की कमाई से चलता
था। यही वजह थी कि तैयबा बेगम ने अब खुद
को घर की महारानी समझना शुरू कर दिया था।
ऐसे क्यों चिपक रही हो जैसे सालों बाद
मिली हो। तैयबा बेगम मुंह बसूर कर बोली
उनकी आवाज पर मौजम हवासों में लौटा। क्या
हुआ बच्चा? और बस उसका बरीरा से सवाल करना
था कि सामने से जवाब खुद के सामने से जवाब
खुद चलता हुआ उसकी नजरों के सामने
आया। जाशेर जाशेर को अचानक घर में देखते
ही सबकी आंखें हैरत से फैली। सब उसे देख
रहे थे। लेकिन वो सिर्फ बरीरा को देख रहा
था जो उस लम्हे मौजम के सीने से लगी हुई
थी। मौजम ने जाशर को देखा। जाशर ने बरीरा
को देखा। फिर अगली कारदार निगाह मौजम पर
डाली। हां, इल्म था कि जब वापस लौटेगा तो
अब वो मौजम के निकाह में होगी। फिर भी
इतनी आग क्यों लग रही थी सीने में? वो उसे
पसंद नहीं करता था। वो तो उसे एक आंख नहीं
भाती थी। मोटी और काली कहीं की। फिर वह
क्या था जो दिल में आग लगा रहा था जो उसे
अपनी मुट्ठियां भेंचने पर मजबूर कर रहा
था। जो उसकी आंखों में पहली बार मौजम के
लिए खार ला रहा था। कैसे रो रही थी मोबाइल
पर? कैसे मिन्नतें कर रही थी। कैसे
मैसेजेस किए किए थे कि प्यार करती है। और
आज सिर्फ एक साल बाद कैसे धड़ल्ले से उसी
के सामने दूसरे मर्द के सीने से लगी हुई
थी। उसमें तो बड़ों का शर्मोहाज तक बाकी
ना रहा था। कुड़ते हुए यही सोचता मुड़कर
जाने लगा था अंदर की जानिब। कि अगले ही पल
उसकी कानों की समाद से बड़ी अम्मी के
अल्फाज़ टकराए। अल्लाह अल्लाह छोड़ भी दो
अपने भाई को अब और भी काम करने हैं उसने।
सारा सामान गाड़ी में पड़ा है।
भाई उसने बड़ी अम्मी के पूरे जुमले में
मौजूद एक लफज़ को बेयकीनी से दोहराया और
फिर तेजी से पलट कर दोबारा मौजम और बरीरा
की जानिब देखा। राफे तुम संभालो यहां पर।
मैं जरा बरीरा को कमरे में छोड़कर आता
हूं। मौजम ने अपने भाई की जानिब देख
हाकिमाना अंदाज में कहा। जी भाई। राफे
अपनी मदद के लिए जुमर का हाथ खींचते हुए
बाहर ले गया था। जबकि मुअज्जम ने बहुत
आहिस्तगी के साथ उसे अपने सीने से हटाया।
फिर उसका हाथ जाशेर के सामने ही अपने हाथ
में मजबूती से पकड़ कर उसके बराबर से
गुजरता हुआ बरीरा को वहां से लेकर चला
गया। जाशेर बेटा अचानक कैसे आ गए तुम?
तैयबा बेगम फौरन ही जाशर की खुशामत करने
लगी क्योंकि वही वाहिद जरिया था बरीरा
नामी बला से उनके बेटे की जान छुड़ाने का।
वरना उन्हें डर था कि अगर यह छिपकली की
तरह ऐसे ही चिपकी रही उनके बेटे से तो
कहीं आखिर में उनका कमाऊ बेटा ही ना ले
उड़े। उनके अलावा किसी ने भी बात नहीं की
थी जा शेर से। बात करना तो दूर ठहरा। उसे
ऐसे इग्नोर किया जैसे देखा तक ना हो। जब
वो आया था तो दरवाजा खोलने यासमीन साहिबा
आई थी। मगर उन्होंने झूठे मुंह से पानी तक
ना पूछा। बस उसके लिए दरवाजा खोला और फिर
अंदर चली गई। फिलहाल उसे कौन सा फर्क
पड़ता था जो वो इतनी तवज्जो देता उनकी
नाराजगी को। वैसे भी वह बरीरा की मां थी
और उनका पूरा घर हमेशा उसी के पैसों पर
पला था। वह बहुत हकारत और कमतरी की निगाह
से देखता था उनकी फैमिली को। उसके नजदीक
उन लोगों का मुंह तो वैसे भी बनना था
क्योंकि उसने अपने वालिद से पैसे दादी को
भेजने के बजाय अपना बैंक अकाउंट बनवाकर
उसमें ट्रांसफर करवाना शुरू कर दिए थे दो
सालों से। यह जानने के बाद कि मौजम और
बरीरा का निकाह नहीं हुआ। वह मजीद अपने
दिमाग में चलने वाले इस ख्याल पर पुख्ता
हो गया था कि एक साल पहले जो निकाह
जल्दबाजी में करवाया जा रहा था वो दरअसल
उससे पैसे लूटने का एक तरीका था। यकीनन
निकाह हो जाने के बाद बरीरा की जिम्मेदारी
उसके सर आ जाती और फिर बरीरा बीवी होने के
नाते उससे हर थोड़े दिन बाद पैसे मांगने
लगती। कभी अपने बाप की बीमारी का रोना
रोकर तो कभी स्कूल की फीस भरने का कहकर।
कराची शहर के इलाके नाजिमाबाद में उनका
तीन मंजला घर बना हुआ था। वो लोग मिडिल
क्लास तबके से ताल्लुक रखते थे। जबकि
जहांश के वालिद तबरेज साहब डिफेंस के
इलाके में रहते थे अपनी दूसरी बीवी और
बच्चों के साथ। दूसरी बीवी से उनके दो
बच्चे थे। एक बेटा सदाम सात साल का और
बेटी नाजनीन 4 साल की। क्योंकि सदाम और
नाजनीन एसी में रहने वाले बच्चे थे। इसलिए
वह बहुत कम ही अपनी दादी के घर
आते। नाजनीन को रोना लग जाता था दादी के
घर आते ही। इसी बहाने से भरपूर फायदा
उठाकर तबरेज साहब की दूसरी बेगम ने अम्मा
के घर ईद पर भी आकर झांकना छोड़ दिया था।
जब उसकी वालदा थी तो तबरेज साहब की मां
मां ही खत्म नहीं होती थी हर मामले में।
और जब से दूसरी बेगम लाए थे मां को पूछना
ही भूल बैठे थे। अब तो जैसे मुंह से चू भी
ना निकलती हो किसी बात पर। और यही वजह थी
कि जहां शेर के दिल से उनकी मोहब्बत
बिल्कुल खत्म हो गई थी। कि अगर इसी तरह
उसकी मां के साथ रह लेते तो आज वह बिन मां
का ना होता। तो आज उसके दिल में सबके लिए
इतनी नफरत भी ना होती। वो जब एक साल बाद
छुट्टियों में लौटता तो बड़ी अम्मी के
कॉलर से भरकर दिए हुए गर्म पानी की जगह तो
बड़ी अम्मी के कूलर से भरकर दिए हुए गर्म
पानी की जगह उसकी मां खानों से टेबल से जा
रही होती और वह मजे से बैठकर उनके साथ
बातें करते हुए खाता।
दादी जान कहां है? वो पानी एक सांस में
पीते हुए पूछ रहा था। दूसरी टैक्सी में
साथ ही आ रहे थे हमारे। फिर सोमल को
छोड़ने के लिए निकल गए। आते होंगे मां
बेटे सोमल की फैमिली को छोड़कर। उनके बेटे
से मुराद अरीब साहब थे। अपनी बड़ी अम्मी
की बात सुन उसने पानी का गिलास टेबल पर रख
दिया। साथ ही उसकी निगाह सीढ़ियों की
जानिब गई। मौजम अभी तक लौटा क्यों नहीं?
अचानक उसके दिल में यह ख्याल आया था।
अच्छा बड़ी अम्मी मैं जरा थक गया हूं।
थोड़ा अपने कमरे में जाकर आराम कर लेता
हूं। दादी जान आ जाए तो मुझे बुलवा
लीजिएगा किसी से। बड़ी अम्मी की बातें तो
जारी थी मगर उसे कब इंटरेस्ट था सुनने में
कि कैसे आयशा आयशा की शादी और वलीमा हुआ
है। कैसे वह उसे बुलाना चाहती थी लेकिन
बच्चों ने और अरीब साहब ने बुलाने नहीं
दिया। उसे कोई नाराजगी नहीं थी। ना ही वह
कोई इंटरेस्टेड था। उसका सारा दिमाग तो
सिर्फ ऊपर की जानिब लगा हुआ था कि मौजम
अभी तक लौटा क्यों नहीं। तबा बेगम अभी
बातें कर ही रही थी कि वह अचानक खड़ा हुआ
और आहिस्तगी से अपनी बात कहता। बगैर उनका
कोई जवाब सुनने की जहमत किए तेजी से
सीढ़ियों की जानिब बढ़ गया। ग्राउंड फ्लोर
पर अम्मा का कमरा, किचन, बड़ा सा लाउंज और
दो गेस्ट रूम थे। सीढ़ियों से चढ़ते ही
पहले टेरेस पड़ता। फिर सीधे हाथ पर एक
कमरा, फिर दूसरा कमरा और फिर सामने की
जानिब तीसरा कमरा। और बीच का बड़ा सा
एरिया खाली था। जिसे सोफे और एलसीडी लगाकर
खूबसूरत सा लांच बना दिया
था। जबकि उल्टे हाथ पर सीढ़ियां थी।
फर्स्ट और सेकंड फ्लोर एक जैसे ही बने हुए
थे। थर्ड फ्लोर पर छत थी। फर्स्ट फ्लोर पर
टेरेस के बराबर वाला कमरा लड़कों का था।
मौजम और राफे। उसके बराबर वाला अरीब साहब
और उनकी बेगम का। और जो सामने की जानिब
नजर आता वो आयशा और जुमर का था। जबकि
सेकंड फ्लोर पर टेरेस के बाद जो पहला कमरा
पड़ता था वह हसन साहब और उनकी बीवी का
था। दूसरा उसी लाइन में जो आगे जाकर था वो
बरीरा का था और जो बिल्कुल सामने की जानिब
पड़ता था वो वैसे तो तबरेज साहब का कमरा
हुआ करता था लेकिन वो तो यहां से कब के
चले गए थे लेकिन बाप के घर में कब्जे के
लिए अपना कुछ सामान वह उसी कमरे में
छोड़कर गए थे। जब जाश छोटा था तो वह दादी
के साथ रहता। लेकिन जैसे ही उसने होश
संभाला अपने वालिद का कमरा ले लिया। वो
तेजी से सीढ़ियां फलांगता हुआ सेकंड फ्लोर
पर पहुंचा था। दानिस्ता तौर पर वहां
पहुंचकर वो टेरेस के आगे रुका और गहरी
सांस ली और फिर खुद को नॉर्मल करके
आहिस्ता-आहिस्ता कदम बढ़ाते हुए गुजरने
लगा अपने कमरे की जानिब और उसका अंदाज
बिल्कुल यूं था जैसे वो बस गुजर रहा हो।
लेकिन निगाह उसकी तैयार थी बरीरा के कमरे
में झांकने के लिए। यह क्या हो रहा है?
इरादा तो यही था कि बस देखते हुए गुजर
जाएगा।
लेकिन जो मंजर उसकी आंखों ने देखा उसके
बाद वह गुजर ना सका
आगे। उसके एक तप चढ़ रही थी तो दूसरी उतर
रही थी। गुस्से से मुट्ठियां भेंचता वो
बरीरा के कमरे में घुस गया था। तो जी जनाब
यह थी सेकंड एपिसोड। तो मुझे तो यह नवेल
का टॉपिक बेइंतहा पसंद है। आप लोगों को
पता है मतलब अब जो मोस्ट फेवरेट नवेल है
ना मुझे लगता है वो यही होगा क्योंकि
वुमेन एंपावरमेंट पे कुछ भी लिखो ना अगर
सही बिल्कुल लिखा हो मतलब पॉजिटिव वे में
तो हर चीज को मद्देनजर रखकर तो वो उससे
बेहतरीन टॉपिक कोई नहीं हो सकता। और फिर
मतलब ऐसी लड़कियां हमारे मुशरे में तो
बहुत ज्यादा हैं कि जिनको उनके रंग की वजह
से या उनके मोटापे की वजह से उनको मतलब
बुली किया जाता है और उनके लिए जिस तरह से
घर वाले भी उनके लिए वो बने होते हैं कि
भाई तुम यह करो तुम वो करो और फिर जिस तरह
से जाशर का कररेक्टर दिखाया हुआ है। यहां
पे जाशर का देखा जाए तो उसने उसका कोई
कसूर नहीं है। मतलब बचपन उसका भी थोड़ा
ट्रोमेटिक रहा है कि मां उसकी चली गई
जल्दी छोड़ के तो उसको कोई समझाने वाला
नहीं था। और फिर जाहिर है जॉइंट फैमिली
में जब बच्चे रहते हैं तो उनके दिमाग इसी
तरह के हो जाते हैं। लेकिन जो बाकी फैमिली
है या बाहर के लोग हैं जब बरीरा को इस तरह
कहें तो फिर तो बुरा लगता है। अब जैसे
उसकी तैयबा ताई है तो वो एक नेगेटिव
कररेक्टर है एज यूजुअल जिस तरह से होता
है। तो मुझे तो बहुत अच्छा लगा कि बरीरा
जो है वो सेल्फ इंडिपेंडेंट बनना चाहती
है। वो अपने पांव पे खड़ी हो के कुछ करना
चाहती है। एंड आई होप कि आगे यही हो। वो
टिपिकल मासूम लड़कियों की तरह मजलूम
लड़कियों की तरह ना हो। तो राइटर ने अभी
तक बहुत अच्छा लिखा है। मुझे इसका
कैरेक्टर बहुत ज्यादा पसंद आया बरीरा का
अभी तक के मतलब इतना वेल ऑर्गेनाइज्ड
कैरेक्टर है यह उसका के एक साल पहले वो
क्या थी और एक साल में उस इंसल्ट ने उसको
कितना बदल दिया। लेट्स सी नेक्स्ट में
क्या होता है। एंड आई जस्ट होप के बहुत
अच्छा रहे बरीरा का कररेक्टर। इसी तरह से
वो अपने अपने लिए जो है वो लड़ती रहे। तो
क्योंकि इतने टॉक्सिक माहौल में इंसान जब
रहता है ना तो या तो वो डिप्रेशन में चला
जाता है। मतलब बहुत ज्यादा वो फिर जुल्म
बर्दाश्त कर करके ना वो इसी का आदी हो
जाता है। या फिर जब वो बागी हो जाता है तो
बरीरा बागी वाली स्टेज में है। बागी नहीं
कह सकते मतलब तमीज तहजीब के अंदर ही रहती
है ना वो और मुझे मौजम और उसका जो रिलेशन
है बरीरा का वो बहुत अच्छा लगा। मतलब
कितना क्यूट सा है और ताबिश भी मुझे बहुत
अच्छा लगा। अभी तक जो मुझे अच्छा नहीं लग
रहा मुझे जान शेर अच्छा नहीं लग रहा। तो
है तो हीरो जान शेरी एनीवेज तो क्या कर
सकते हैं लेकिन देखते हैं नेक्स्ट में वह
भी सही हो जाएगा इतना बुरा वह भी नहीं है
तो आप लोगों के क्या रिव्यूज हैं ज्यादा
से ज्यादा रिव्यूज दिया करें तो कमेंट्स
में और आपस में मतलब राइटर के लिए कोई
पैगाम हो वह बताया करें तो मिलते हैं
नेक्स्ट एपिसोड में तब तक के लिए अल्लाह
हाफिज चैनल को जरूर सब्सक्राइब करिएगा
मिलते हैं बाय
UNLOCK MORE
Sign up free to access premium features
INTERACTIVE VIEWER
Watch the video with synced subtitles, adjustable overlay, and full playback control.
AI SUMMARY
Get an instant AI-generated summary of the video content, key points, and takeaways.
TRANSLATE
Translate the transcript to 100+ languages with one click. Download in any format.
MIND MAP
Visualize the transcript as an interactive mind map. Understand structure at a glance.
CHAT WITH TRANSCRIPT
Ask questions about the video content. Get answers powered by AI directly from the transcript.
GET MORE FROM YOUR TRANSCRIPTS
Sign up for free and unlock interactive viewer, AI summaries, translations, mind maps, and more. No credit card required.