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Globalisation and the Indian Economy | New One Shot | Class 10 Economics 2025--26

24m 30s4,044 words547 segmentsHindi

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हेलो दोस्तों, आज की वीडियो में हम सभी

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लोग पढ़ेंगे इकोनॉमिक का चैप्टर

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ग्लोबलाइजेशन एंड द इंडियन इकोनॉमी। इस

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चैप्टर को कंटिन्यू करने से पहले हम पीछे

0:09

का एक टर्म एमएसी के बारे में जानेंगे

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जिससे आप आगे का चैप्टर आसानी से समझ

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पाएंगे। तो बात करते हैं एमएसी। एमएसी का

0:18

फुल फॉर्म है मल्टीीनेशनल कॉरपोरेशन और

0:20

जितनी भी एमएसी कंपनियां होती हैं, वह

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पार्टनरशिप करती हैं लोकल कंपनी से। यानी

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कि वह हाथ मिलाती हैं लोकल कंपनीज़ से और

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एमएसी कंपनियां लोकल कंपनीज़ को हायर करती

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हैं फॉर सप्लाई के लिए। एमएसी का सीधा सा

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मतलब है कि यह अपने से छोटी कंपनियों को

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हायर करती हैं अपनी ग्रोथ कराने के लिए।

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आइए चलते हैं टॉपिक पे। व्हाट इज

0:42

ग्लोबलाइजेशन? ग्लोबलाइजेशन क्या होता है?

0:44

ग्लोबलाइजेशन एक ऐसा प्रोसेस यानी कि एक

0:47

ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देशों के बीच में

0:50

बहुत तेजी से जोड़ने का काम करती है।

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पिछले 20 30 साल से देखा जा रहा है कि

0:55

एमएसी कंपनियां सस्ती जगहों पर दिख रही

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हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि एमएसी कंपनियां

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अपना ही फायदा चाहती हैं कम पैसे में। और

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यह भी देखा जा रहा है एमएसी लोगों के

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द्वारा फॉरेन इन्वेस्टमेंट बहुत तेजी से

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बढ़ाया जा रहा है सस्ती जगहों पर। यही

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नहीं बल्कि साथ ही साथ फॉरेन ट्रेड को भी

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बढ़ावा दिया जा रहा है और जो अपनी एमएसी

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है वह कंट्रोल कर रही है फॉरेन ट्रेड के

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बड़े हिस्से को जिससे क्या हो रहा है कि

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अपने संसार में यानी कि अपने वर्ल्ड में

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बहुत सारे रीजन है वह सब भी कनेक्टेड हो

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रहे हैं ग्लोबलाइजेशन की मदद से। इसके

1:26

अलावा भी ज्यादा से ज्यादा गुड्स एंड

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सर्विसेस, इन्वेस्टमेंट एंड टेक्नोलॉजी

1:31

इससे भी देशों को जोड़ा जा रहा है। एक

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तरीके से और भी देशों को जोड़ा जाता है

1:35

मूवमेंट ऑफ पीपल करके यानी कि पीपल का

1:38

माइग्रेशन मेरा मतलब कि इधर से उधर जाकर

1:41

सर्च करने के लिए जैसे बेटर इनकम, बेटर

1:44

जॉब, बेटर एजुकेशन। पिछले 10 सालों से जो

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पीपल की माइग्रेशन थी, वह उतनी तेज नहीं

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बढ़ पाई देशों के बीच में। इस वजह से

1:54

क्योंकि बहुत सारी पाबंदियां लगा दी गई।

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एक शब्द में बोलूं जितने लोग जा रहे थे

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बेटर इनकम, बेटर जॉब्स, बेटर एजुकेशन के

2:01

लिए अब वह लोग नहीं जा सकते क्योंकि

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पाबंदियां लगा दी गई हैं। पूरी तरह से

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नहीं लेकिन लगा दी गई हैं। एक एग्जांपल

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देख लेते हैं। इंडिया में एक

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मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है जिसका नाम है

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Ford मोटर्स। और यह जो कंपनी है यह सिर्फ

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इंडियन मार्केट के लिए ही कार नहीं बनाती

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बल्कि इसके जितने भी कॉमोनेंट्स हैं वह

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अलग-अलग देशों में एक्सपोर्ट कर देती है।

2:21

तो यह सब कैसे पॉसिबल हो पाया? तो यह सब

2:23

पॉसिबल हो पाया ग्लोबलाइजेशन की मदद से।

2:26

अगर आपने यहां तक वीडियोस को देखी है तो

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वीडियोस को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब

2:30

जरूर करिएगा। अपनी अगली टॉपिक है फैक्टर

2:33

दैट हैव इनेबल्ड ग्लोबलाइजेशन। तो इसमें

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पढ़ेंगे उन फैक्टर्स के बारे में जिसने

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ग्लोबलाइजेशन को बढ़ावा दिया। फिर से

2:40

ग्लोबलाइजेशन। आखिर यह होता क्या है? आइए

2:43

वन वर्ड में बताता हूं। ग्लोबलाइजेशन यानी

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कि वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें

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आप आईडिया, नॉलेज, इंफॉर्मेशन, गुड्स एंड

2:49

सर्विसेज पूरे संसार में दे सकते हो या

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फिर ले भी सकते हो। ग्लोबलाइजेशन की मदद

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से। अगर ग्लोबलाइजेशन नहीं होता तो यह

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पॉसिबल नहीं था। दूसरे कंट्री से अपने

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कंट्री में सामान लाना या अपने कंट्री से

3:02

दूसरे कंट्री में सामान भेजना यह पॉसिबल

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नहीं हो पाता। अब बात करते हैं टेक्नोलॉजी

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के बारे में। इसमें देखा जाए तो बहुत तेजी

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से इंप्रूवमेंट हुआ है टेक्नोलॉजी में।

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इसके पीछे का कारण है ग्लोबलाइजेशन। हम

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सभी लोग पिछले 50 सालों से देखते हुए आ

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रहे हैं कि बहुत सारे इंप्रूवमेंट हुए हैं

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ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी में। इसमें

3:18

क्या इंप्रूवमेंट हुआ है कि बहुत तेजी से

3:20

डिलीवरी हो रही है ऑफ गुड्स यानी कि

3:22

सामानों की लंबी-लंबी दूरियों पर वो भी

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सिर्फ लोअर कास्ट यानी कि कम दामों पर। और

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हाल ही के समय में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र

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में टेलीकम्युनिकेशंस कंप्यूटर इंटरनेट उन

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सब ने बहुत तेजी से ग्लोबलाइजेशन को मदद

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की है चेंज करने के लिए और

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टेलीकम्युनिकेशन ने फैसिलिटीज दी

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टेलीग्राफ टेलीफोन मोबाइल फोन और पैक इन

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सभी का उपयोग करके हम किसी से भी कांटेक्ट

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कर सकते थे अराउंड द वर्ल्ड और यह सब

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जितनी भी डिवाइसेस थी यह सब चलती थी

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सेटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद से

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लिबरलाइजेशन ऑफ फॉरेन ट्रेड एंड फॉरेन

3:52

इन्वेस्टमेंट पॉलिसी यह लिबरलाइजेशन क्या

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होता है इसका सीधा सा मतलब मतलब है कि

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किसी व्यापार के ऊपर से बैरियर यानी कि

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बाधाएं और रिस्ट्रिक्शन यानी कि पाबंदियां

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को हटा दिया जाता है सरकार के द्वारा तब

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वह लिबरलाइजेशन होता है। और फॉरेन ट्रेड

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का मतलब कि विदेशी व्यापार। फॉरेन

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इन्वेस्टमेंट का मतलब कि बाहरी

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इन्वेस्टमेंट। इस वाली टॉपिक में क्या

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होता है कि एक चाइनीज़ टॉय है जो कि इंडिया

4:13

मार्केट में बहुत तेजी से बिक रहा है। वह

4:15

भी बहुत सस्ते दामों पर और सभी लोग खरीद

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भी रहे हैं। इसका मेन कारण यह है कि जो

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टॉयज हैं बहुत सस्ते हैं। अगर मान लीजिए

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जो चाइनीस टॉयज इंडिया में आ रहे हैं अगर

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अपनी भारत सरकार उस पर टैक्स लगा दे तो

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क्या होगा? सिंपल सी बात है आप भी कहोगे

4:27

कि जो चाइनीस टॉय हैं उसके प्राइस बढ़

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जाएंगे और जब चाइनीस टॉय के प्राइस बढ़

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जाएंगे। सिंपल सा है कि अब वह सस्ते भी

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नहीं रह गए। इससे होगा क्या कि जो भारतीय

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खिलौने हैं अब वह अभी बिकना स्टार्ट हो

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जाएंगे। क्योंकि जो चाइनीज़ टॉय हैं, वह तो

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महंगे हो गए ना। और यह जो एग्जांपल था,

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बहुत अच्छा एग्जांपल था ट्रेड बैरियर्स

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का। अब यह ट्रेड बैरियर्स क्या होता है?

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आइए जानते हैं। इसका मतलब है व्यापार पर

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रुकावट। और यह जो व्यापार पर रुकावटें

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होती हैं, यह सब गवर्नमेंट के द्वारा किया

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जाता है। और जो गवर्नमेंट है, वह ट्रेड

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बैरियर को इंक्रीज़ यानी कि बढ़ा सकती है

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और ट्रेड बैरियर को घटा यानी कि डिक्रीज

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भी कर सकती है। सिंपल सा मतलब है कि

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रुकावटों को बढ़ा भी सकती है, घटा भी सकती

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है। इससे रिजल्ट क्या मिलेगा कि यह डिसाइड

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हो जाएगा कि किस प्रकार का सामान और

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प्रत्येक का कितना प्राइस होगा। यह भी बात

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कर लेते हैं कि जो ट्रेड बैरियर था आफ्टर

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इंडिपेंडेंस यानी कि आजादी के बाद कैसा

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था। इसमें क्या होता है कि जो अपनी भारत

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सरकार है आजादी के बाद कुछ बैरियर्स यानी

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कि कुछ बाधाओं को लगा देती है फॉरेन ट्रेड

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यानी कि विदेशी व्यापार पर और फॉरेन

5:22

इन्वेस्टमेंट पर। इस बैरियर को लगाना बहुत

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इंपॉर्टेंट था क्योंकि अपने डोमेस्टिक

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प्रोड्यूसर को प्रोटेक्ट करना था फॉरेन

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कंपटीशन से। फॉरेन कंपटीशन का मतलब कि

5:31

विदेश के लोग अपने इंडिया में आएंगे और

5:33

यहां पर भी प्रोड्यूसर स्टार्ट करेंगे। जो

5:35

कि विदेश के लोग हैं उनके पास अच्छी

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टेक्नोलॉजी होगी। जिससे क्या होगा कि वह

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गुड्स एंड सर्विज सस्ते दामों पर दे

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पाएंगे और जो अपने इंडिया में डोमेस्टिक

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लोग हैं उनके पास अच्छी खासी टेक्नोलॉजी

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नहीं होने के कारण वह लोग फटाफट से गुड्स

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एंड सर्विज नहीं प्रोवाइड करा पाएंगे और

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सस्ते दामों पर भी। सो सीधा सा मतलब है जो

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डोमेस्टिक प्रोड्यूसर है वह हैंडल नहीं कर

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पाएगा विदेशी कंपटीशन। इंडस्ट्रीज वेयर

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जस्ट कमिंग अप इन द 1950 एंड 1960। यानी

5:59

कि इंडस्ट्रीज लोग भी आने लगी थी 1915 एंड

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1960 में और इसको भी अलाउड नहीं किया गया

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इंडिया में। इसको इसलिए अलाउड नहीं किया

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गया अगर इंडस्ट्रीज लोग आ जाएंगे तो

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डोमेस्टिक प्रोड्यूसर का क्या होगा? यह सब

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देखते ही देखते इंडिया ने कुछ आवश्यक

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चीजों को ही अलाउड कर दिया इंडिया में

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लाने के लिए। जैसे कि मशीनरी,

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फर्टिलाइज़र्स, पेट्रोलियम और एक

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इंपॉर्टेंट बात जितनी भी डेवलप्ड कंट्रीज

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हैं उन्होंने भी शुरुआती समय में अपने

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लोकल प्रोड्यूसर को अलग-अलग तरीके से

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प्रोटेक्शन दिया है। तो अब बात करते हैं

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अगली टॉपिक की न्यू इकोनॉमिक पॉलिसी 1991।

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स्टार्टिंग के समय में 1991 में इंडिया ने

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कुछ पॉलिसी को बनाया। इस पॉलिसी में यह

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डिसाइड किया गया कि अब समय आ गया है जितने

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भी इंडियन प्रोड्यूसर हैं उनको कंपटीशन

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कराया जाए अराउंड द ग्लोब यानी कि फॉरेन

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कंट्री से। इससे रिजल्ट क्या मिलेगा कि

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जितने भी इंडियन प्रोड्यूसर हैं वह लोग

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कंपटीशन करेंगे विदेशी व्यापार से जिससे

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होगा क्या कि जितने भी भारतीय प्रोड्यूसर

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हैं वह लोग अपनी क्वालिटी को इंप्रूव करते

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जाएंगे और यह जितनी भी डिसीजन थी उसको

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सपोर्ट किया जा रहा था पावरफुल इंटरनेशनल

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ऑर्गेनाइजेशन के जरिए जैसे कि डब्ल्यूटीओ

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वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यह क्या होता

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है पढ़ने की जरूरत नहीं है सिलेबस में

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नहीं है यही नहीं बल्कि जितने भी बैरियर्स

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थे फॉरेन ट्रेड और फॉरेन इन्वेस्टमेंट पे

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उसको भी कहीं ना कहीं लार्ज मात्रा में

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हटा दिया गया था इससे तो होगा क्या कि

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जितने भी गुड्स यानी कि सामान है उसको हम

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इंपोर्ट या एक्सपोर्ट कर सकते हैं आसानी

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से। सीधा सा मतलब है कि इंडिया से बाहर

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बेच सकते हैं और इंडिया से बाहर की सामान

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मंगा सकते हैं आसानी से। और जब बैरियर को

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हटा दिया जाए तो फॉरेन कंपनीज़ यानी कि

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जितनी भी विदेशी कंपनियांज हैं अब वह अपनी

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फैक्ट्रीज, ऑफिस को इंडिया में सेटअप कर

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सकती हैं आसानी से। और यह चैप्टर यहीं पे

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समाप्त होता है। और यह कुछ इंपॉर्टेंट

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टर्म्स हैं जो कि एग्जाम पॉइंट ऑफ व्यू से

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बहुत इंपॉर्टेंट है। आप इसको नोट इट डाउन

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कर लीजिएगा। एक बात और अगर आपको नोट्स

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डाउनलोड करने हैं तो आप डिस्क्रिप्शन

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बॉक्स को चेक आउट करिए। यहां पर नोट्स

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अवेलेबल है इस चैप्टर का। तो जाकर फटाफट

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से डाउनलोड कर लीजिएगा। साथ ही साथ मुझे

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सब्सक्राइब भी कर लीजिएगा। और हां मुझे

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Instagram पर भी फॉलो कर लीजिएगा। वहां पर

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मजे से बातें करते हैं। तो चलिए ऐसी न्यू

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वीडियोस में मिलते हैं। हम तब तक के लिए

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टाटा बाय-बाय। जय हिंद, वंदे मातरम एंड

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टेक केयर। बाय-बाय।

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हेलो बच्चों, तो वेलकम बैक टू माय चैनल।

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इस वीडियो का भले ही थोड़ा सा वह आपको लगे

8:11

देखने में क्वालिटी खराब लेकिन कंटेंट

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बहुत ही अच्छा हम देंगे। अभी मेरे पास वो

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फैसिलिटी नहीं है जो बड़ा यूटबर करता है

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लेकिन आपको समझाने में कोई भी कमी नहीं

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छोड़ेगी। तो आज हमारा टॉपिक है

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ग्लोबलाइजेशन।

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इकोनॉमिक्स का क्लास 10 का चैप्टर फोर। तो

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पहला ही टॉपिक है व्हाट इज ग्लोबलाइजेशन?

8:32

तो ग्लोबलाइजेशन है क्या? ग्लोबलाइजेशन

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मींस द वर्ल्ड बिकम मोर कनेक्टेड थ्रू।

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इसका मतलब यह है ग्लोबलाइजेशन मतलब कि

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वर्ल्ड जो है सिर्फ इंडिया नहीं पूरा

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वर्ल्ड में हम एक दूसरे कंट्री के साथ

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कैसे कनेक्ट रह सकते हैं? थ्रू। तो किस

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तरह रह सकते हैं? ट्रेड और गुड्स सर्विसेस

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यानी कि एक ट्रेड के थ्रू रह सकते हैं।

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कोई चीज का भी ट्रेड हो सकता है। बहुत

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सारा चीज इंडिया से एक्सपोर्ट होता है।

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बहुत सारा इंपोर्ट होता है। उसके थ्रू।

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गुड्स यानी कि

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चीजें जो होती है जैसे कि कपड़ा हो गया

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कुछ भी हो गया गुड्स एंड सर्विसेस बहुत

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सारा सर्विस होता है जैसे कि बहुत सारा

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आईटीए होता है जो कि बाहर वाले कंट्री से

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हायर करते हैं ज्यादा पैसा देके तो वो सब

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सर्विज के थ्रू हो सकता है डेवलपमेंट ऑफ़

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पीपल यानी पीपल का डेवलपमेंट जैसे कि बहुत

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सारे लोग हैं उसके पास डेवलपमेंट उसको दिख

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रहा है कि इंडिया में मेरा डेवलपमेंट नहीं

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हो सकता है तो वह विदेश शिफ्ट हो रहा है

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जैसे कि फॉर एग्जांपल हम विराट कोहली का

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ले सकते हैं। विराट कोहली रिसेंटली में ही

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वो कनाडा शिफ्ट होने का आई थिंक आप अगर

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यूज़ करते होंगे Twitter तो उस पे ट्वीट

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किए थे वो

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फॉलो ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड मनी। वो मनी को

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इन्वेस्ट करके और फॉलो करके वह बाहर में

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शिफ्ट सब हो रहे हैं। तो बेसिकली

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ग्लोबलाइजेशन का मतलब यही था कि आप दूसरे

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कंट्री के साथ कनेक्ट कैसे हो सकते हैं।

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शेयरिंग ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड आइडियाज़। आप

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दूसरे कंट्री को आईडिया दे सकते हैं।

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टेक्नोलॉजी के थ्रू कनेक्ट हो सकते हैं।

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जैसे कि आपके पास अगर कोई भी चीज का

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क्वालिटी है तो

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विदेशी कंपनी आपको हायर कर लेगी एक अच्छे

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बजट पे एक अच्छे पैसे दे के तो यह भी एक

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टॉपिक था।

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सो समथिंग मेड इन वन कंट्री कैन ईजीली बी

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सोल्ड और यूज्ड इन अनदर। तो इससे फायदा यह

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है कि अगर एक कंट्री को अच्छी चीज बनाती

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है तो दूसरे कंट्री को वह चीज मिल सकता

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है। सुविधा हो सकता है एक्सपोर्ट करके। तो

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इससे सारा चीज देखिए यहां पे क्लियरली

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लिखा गया है ईली बी सोल्ड और यूज्ड इन एन

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अदर यानी अदर अनदर कंट्री में वो यूज़ हो

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सकता है ईजीली। एग्जांपल योर मोबाइल फोन

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बहुत सारा मोबाइल फोन चाइना से आता है।

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यूएसए से Apple यूएसए का है। इंडिया में

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बहुत ज्यादा यूज़ होता है अभी।

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माइट बी डिजाइन इन द यूएस मेड इन चाइना

10:59

एंड सोल्ड इन इंडिया यानी बहुत सारा है

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डिजाइन करता है यूएस में बनाता है चाइना

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में और बेचता है इंडिया में

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तो नेक्स्ट टॉपिक है हम लोग का

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रोल ऑफ एमएसी

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क्या है एम पहले आता है यहां पे कि एमएसी

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है क्या रोल तो बाद में पढ़ेंगे पहले

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एमएसी क्या है एमएसी जो है मल्टीपल

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कोपरेशन है या आप मल्टीपल कंपनीज़ भी बोल

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सकते हैं। बहुत सारा कंपनी तो इसका रोल

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क्या होता है? ये समझते हैं हम लोग। एमएसी

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आर द कंपनीज़ दैट ऑपरेट इन मेनी कंट्री।

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यानी कुछ ऐसे कंट्रीियां है जो कि भले ही

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इसका ओरिजिन कहीं से भी हो लेकिन बहुत

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सारा कंट्री में चल रहा है ये कंपनी। फॉर

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एग्जांपल आप देख सकते हैं Apple का। Apple

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का डिस्प्ले कहीं और बनता है। उसका बॉडी

11:53

कहीं और बनता है। सप्लाई कहीं और होता है।

11:56

उसका कैमरा कहीं और बनता है। और आपके

11:59

नॉलेज के लिए आपको बता दें कि एप्पल का

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पार्ट बनाने में एक पार्ट बनाने में

12:05

इंडिया का भी हाथ है। एग्जैक्ट हमको पता

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नहीं है कौन सा पार्ट बना रहा है। लेकिन

12:10

कुछ तो था ध्यान में नहीं है। आप आपको अगर

12:14

पता है तो आप कमेंट करके बताइए क्या वो है

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चीज़।

12:18

तो इस तरह कंपनीज जो है मेनी कंट्री में

12:21

चलती रहती है। तो दे सेट अप फैक्ट्रीज और

12:25

ऑफिस वेयर। तो वो फैक्ट्री और ऑफिस वहां

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पे बना देते हैं अलग-अलग कंट्री में। इससे

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क्या होता है? इसका रोल क्या होता है? तो

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इससे यह होता है लेबर इज चीपर। यानी कि

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लेबर जो है कम प्राइस में काम करने के लिए

12:42

मिल जाते हैं। रॉ मटेरियल आर अवेलेबल। रॉ

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मटेरियल अवेलेबल हो जाता है ईजीली। तभी तो

12:48

वहां पर कंपनी वो सेटअप कर रही है। वरना

12:51

दूसरे कंट्री में कोई क्यों सेटअप करेगा

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महंगा दे के? ये एक हो जाता है। फिर

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मार्केट्स आर लार्ज यानी मार्केट बड़ा बड़ा

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मार्केट जैसे कि आप देख सकते हैं हम लोग

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जो वायर यूज़ करते हैं घर में वो जापान का

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बना हुआ होता है। वो एंकर सबका वो जापानी

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कंपनी है। तो सोचिए जापान का कंपनी का हम

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यूज़ यहां पे कर रहे हैं। इसका मतलब क्या

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है? मार्केट यहां पे अच्छा है। अब आपको भी

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आई थिंक अगर ध्यान में होगा या फिर आप चेक

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कीजिएगा घर में काफी सारा चीज आपका एंकर

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यूज़ होता है। वायर इलेक्ट्रिक डिवाइसेस

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बहुत सारा होता है। तो यहां पे मार्केट

13:24

बड़ा है तभी तो कोई यहां पे इन्वेस्टमेंट

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कर रहा है। वरना क्यों करेगा कोई? तो

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नेक्स्ट है हम लोग का हाउ डू दे

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प्रोड्यूस? तो वह प्रोड्यूस कैसे करते

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हैं? दे डू नॉट अलाउ मेक एवरीथिंग इन वन

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प्लेस।

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वह एक ही जगह पर अलाउ नहीं करते हैं बनाने

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के लिए। वह अलग-अलग जगह पर करते हैं। तभी

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तो अलग-अलग जगह पे कंपनियां उसकी चलेगी।

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तो वो क्या करते हैं? दे स्प्रेड

13:54

प्रोडक्शन अक्रॉस कंट्री। वो प्रोडक्शन को

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बढ़ा देते हैं। स्प्रेड करते हैं। कंट्री

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के हिसाब से। चूज़ चीपेस्ट एंड बेस्ट

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लोकेशन। वह सस्ता और बढ़िया जगह खोजता है।

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जैसे कि

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बिहार में भी आप देख सकते हैं फॉर

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एग्जांपल बिहार का हम लेते हैं तो बिहार

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में बहुत अच्छी-अच्छी जगह है जैसे कि आपका

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हो गया पटनालंदा

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ये सब कुछ-कुछ ऐसी जगह हैं जो कि एक अच्छी

14:22

जगह है और बिहार आप ऐसे मान सकते हैं अंडर

14:26

डेवलप्ड है स्टेट तो काफी चीपेस्ट

14:30

प्राइसेस में सारा चीज मिल जाता है और

14:32

लोकेशन भी अच्छा मिल जाता है। तो नेक्स्ट

14:36

है कनेक्ट सप्लायर्स वर्ल्ड वाइड। तो वहां

14:41

से वह कनेक्ट कर सकता है सप्लायर को

14:43

वर्ल्ड वाइड। जैसे कि यहां पे हम लोग का

14:46

फॉर एग्जांपल है सबसे बड़ा आई थिंक आप

14:50

एग्जांपल Tata का ले सकते हैं। Tata का आप

14:52

देख सकते हैं मोटर्स और गाड़ियां जो है वो

14:56

मुझे लगता है कि काफी ज्यादा यूज़ किया

14:58

जाता है अनदर कंट्री में भी।

15:02

तो यह भी एक एग्जांपल है कि वहां पर एक

15:05

मार्केट अच्छा बनाने के लिए तो कोई वहां

15:07

पर गया है। वरना क्यों जाएगा कोई?

15:10

तो दिस क्रिएट ग्लोबल प्रोडक्शन नेटवर्क।

15:13

तो आपको आई थिंक अंदाजा हो गया होगा कि

15:16

ग्लोबल ग्लोबलाइजेशन होता क्या है? कैसे

15:19

यूज़ होता है? आई थिंक यहां पे आपको ये समझ

15:23

गया होगा यहां पे आपको इतना टॉपिक जो हम

15:25

बताएं अभी।

15:27

तो नेक्स्ट है हम लोग का फॉरेन

15:30

इन्वेस्टमेंट। तो फॉरेन इन्वेस्टमेंट होता

15:32

क्या है? यह देखते हैं। व्हेन एन एमएसी

15:35

इन्वेस्ट मनी इन अनदर कंट्री इट इज कॉल्ड

15:38

फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट या फिर

15:40

एफडीआई। एमएसी का मतलब आपको ऊपर बता ही

15:43

दिए कि इसका होता है। यहां पे आप देख सकते

15:46

हैं मल्टीपल

15:49

मल्टीीनेशनल कॉरपोरेशन या कंपनीज़।

15:54

तो यह क्या होता है? एमएसी जब अनदर कंट्री

15:57

में इन्वेस्टमेंट करती है तो उसे फॉरेन

16:00

डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट भी कहा जाता है। दे

16:02

इन्वेस्ट टू वो इन्वेस्ट क्यों करते हैं?

16:06

कुछ तो उसमें प्रॉफ़िट होगा तभी तो

16:07

इन्वेस्ट कर रहा है कोई। तो अर्न मोर

16:10

प्रॉफ़िट ज़्यादा पैसा बनाने के लिए

16:15

रिड्यूस प्रोडक्शन कॉस्ट

16:19

दाम घटाने के लिए ऐसा कह सकते हैं कि

16:21

ज्यादा अगर कोई चीज बिक्री होगा तो उसका

16:23

दाम घटा दिया जाता है। ताकि और ज्यादा वह

16:25

बिक सके।

16:28

एक्सपेंड मार्केट मार्केट को अपना बढ़ाने

16:30

के लिए नाम बढ़ाने के लिए।

16:33

नेक्स्ट है एफडीआई ब्रिंग्स एफडीआई ब्रिंग

16:38

क्या वह लाता है एफडीआई क्या लाता है वह

16:41

जो है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट वह

16:43

क्या लाता है तो वह अपने साथ लाता है

16:47

टेक्नोलॉजी

16:49

जॉब्स एंड बेटर क्वालिटी प्रोडक्ट्स

16:54

तो ये तीन चीज वह बेसिकली लाता है बट

16:58

समथिंग आल्सो प्रेशर ऑन स्मॉल कंपनीज़

17:02

स्मॉल कंपनी जो है उसके ऊपर प्रेशर बन

17:05

जाता है क्योंकि कोई भी आप जैसा कि आप कभी

17:08

भी कुछ सामान लेने जाइएगा तो आप क्या फॉलो

17:11

कीजिएगा देखिएगा कंपनी का ब्रांड ब्रांड

17:13

कौन सा है ब्रांड के पीछे इसलिए जाते हैं

17:15

क्योंकि ब्रांड कभी भी अपना प्राइसेस

17:20

अक्सर डाउन नहीं करता है चाहे उसका

17:22

प्रोडक्ट नहीं बिके क्योंकि वो क्वालिटी

17:24

में कुछ भी कंप्रोमाइज नहीं करना चाहता है

17:27

तो होता क्या है तो स्मॉल कंपनी जो है

17:31

उसको अपना प्राइसेस डाउन करना पड़ जाता

17:34

है। वरना सोचिए सेम ही प्राइस में अगर एक

17:37

टॉप ब्रांड का मिलेगा और एक नॉर्मल ब्रांड

17:40

का मिलेगा आपको चीज तो आप क्या लीजिएगा?

17:42

टॉप ब्रांड ही लीजिएगा ऑब्वियसली। तो

17:45

कंपनी को कम प्रॉफिट में स्मॉल कंपनीज़ को

17:49

काम करना पड़ता है। तो यह एक प्रेशर बन

17:50

जाता है।

17:53

नेक्स्ट है हाउ ग्लोबलाइजेशन हैपेंस?

17:55

ग्लोबलाइजेशन

17:57

ग्रो बिकॉज़ ऑफ क्यों मतलब ग्लोबलाइजेशन

18:01

क्यों ग्रो करता है? क्योंकि

18:04

टेक्नोलॉजी पहला है टेक्नोलॉजी टॉपिक।

18:06

इसमें आता है फास्ट ट्रांसपोर्ट। जैसे कि

18:09

हो गया शिप्स एंड प्ल्स। नेक्स्ट है

18:13

इंस्टेंट कम्युनिकेशन। इंटरनेट मोबाइल।

18:16

मोबाइल और इंटरनेट के थ्रू डल कनेक्ट कर

18:18

सकते हैं। नेक्स्ट है लिबरलिज्म। दिस मींस

18:23

रिमूव ऑफ ट्रेड बैरियर। आप लिबरलाइजेशन का

18:26

मतलब है ट्रेड बैरियर को हसका देना। ट्रेड

18:29

बैरियर यह होता है कि एक ट्रेड बैरियर

18:30

लिमिट कर देता है कि आप इतना कहीं लिमिट

18:34

में ट्रेड कर सकते हैं। आप दूसरे कंट्री

18:36

में ट्रेड नहीं कर सकते हैं। तो वो ट्रेड

18:37

बैरियर को लिबरलाइजेशन हसका देता है जो कि

18:40

इंडिया में भी हंसका दिया गया है।

18:43

अर्लियर इंडिया हैड हाई इंपोर्ट टैक्सेस

18:48

एंड

18:50

रिस्ट्रिकशंस। तो पहले अरर्लियर बहुत पहले

18:54

था कि हाई इंपोर्ट टैक्स टैक्स अगर

18:56

इंपोर्ट कोई सामान आप कर रहे हैं तो वह

18:58

हाई टैक्सेस लेता था और रिस्ट्रिकशंस भी

19:01

उसका बहुत था। उसका नियम कानून बहुत था।

19:03

तो वह हस्का दिया गया है। आफ्टर 1991

19:07

मेनी बैरियर्स वेयर रिड्यूस्ड एलॉय। मतलब

19:11

कि बैरियर काफी सारा हसका दिया गया है।

19:14

इज़ियर इंपोर्ट्स अ फॉरेन कंपनी टू

19:18

इन्वेस्ट। फॉरेन कंपनी अब इन्वेस्ट कर

19:20

सकते हैं इंडिया में।

19:22

इजी हो गया इंपोर्ट करना विदेशी कंपनी को

19:25

एंड मोर

19:28

कंपटीशन भी ज्यादा बहुत बढ़ गया मोर

19:30

कंपटीशंस।

19:32

नेक्स्ट है हम लोग का डब्ल्यूटीओ वर्ल्ड

19:36

ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन। डब्ल्यू टीओ

19:40

मेक अ रूल फॉर इंटरनल ट्रेड इंटरनेशनल

19:44

ट्रेड। तो वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन एक

19:47

रूल बनाया इंटरनेशनल ट्रेड के लिए इट वांट

19:52

फ्री फेयर ट्रेड इट मतलब उसको फ्री फेयर

19:56

ट्रेड चाहिए कोई भी रिस्ट्रिक्शन नहीं

19:59

चाहिए टैक्सेशन

20:01

नहीं चाहिए इसलिए वो इस तरह का नियम बनाए

20:05

बट डेवलपिंग कंट्रीज से रूल ऑफ एन फेवर

20:10

रिच नेशंस तो डेवलपिंग कंट्री यानी जो

20:14

अंडर अभी डेवलपमेंट में जो डेवलपमेंट हो

20:16

रहा है कंट्री

20:18

उनका कहना यह था कि यह फेवर करता है सिर्फ

20:20

उसी कंट्री को जो कि एक रिच नेशन है। जैसे

20:25

यूएसए हो गया, चाइना हो गया। ये सब पास

20:27

आपका रशिया हो गया। सब पास पैसा ज्यादा

20:29

है। तो बोल रहा था कि ये सब पास ये रूल

20:32

फॉलो करता है। ये कहना था उन लोग का

20:36

इन इंपैक्ट ऑफ़ ग्लोबलाइजेशन ऑन इंडिया।

20:39

पॉजिटिव एक्टिविटी। पॉजिटिव एक्टिविटी

20:42

क्या आ रहा ग्लोबलाइजेशन इंडिया में तो

20:44

मोर चॉइससेस ऑफ कस्टमर्स कंज्यूमर्स वही

20:48

कस्टमर कंज्यूमर एक ही चीज हुआ तो चॉइस बढ़

20:51

गया हम लोग के पास कि नहीं लेदर का जैकेट

20:55

पहनेंगे हम खादी पहनेंगे ऊनी पहनेंगे तो

20:57

अलग-अलग कंपनी से अलग-अलग कंट्री से वो

21:00

ट्रेड हो के आता है तभी तो चॉइस है हम लोग

21:02

के पास बेटर क्वालिटी लो प्राइस बढ़िया

21:05

सामान कम दाम में मिलता है मोर जॉब

21:08

स्पेशली सर्विस एंड सम इंडस्ट्रीज ग्रोथ

21:11

इन आईटी सेक्टर्स मोर फॉरेन इन्वेस्टमेंट

21:15

होता है। अब इसका नेगेटिविटी क्या है?

21:18

नेगेटिव इफ़ेक्ट स्मॉल इंडस्ट्रीज स्ट्रगल

21:22

टू कंप्लीट छोटा कम क्या कहते हैं?

21:25

इंडस्ट्री जो वो स्ट्रगल कर रहा है टू

21:28

उसको कंपीट करने में यानी कंपटीशन देने

21:31

में। सम वर्कर गेट लो वेजेस इंश्योर जॉब।

21:35

मतलब कम पैसा मिलता है और उसका जॉब का

21:38

इंश्योर कुछ भी नहीं है। प्रॉफिट मोस्टली

21:42

गो टू एमएसी मतलब प्रॉफिट एमएसी को ज्यादा

21:45

चल जाता है। फार्मर एंड स्मॉल प्रोड्यूसर

21:48

मेनी सफर मे सफर मतलब उसको सफर कर रहा है

21:53

कि उसको अच्छा पैसा नहीं मिलता है उसका

21:57

सामान का क्योंकि इंडिया में अगर ज्यादा

22:00

कोई पैसा ले रहा है जैसे कि आप खादी कपड़ा

22:03

किनिएगा तो काफी महंगा आएगा अभी भी लेकिन

22:06

वही आप विदेशी कपड़ा किनिएगा तो सस्ता

22:08

आएगा तो इंडिया में अगर आपका सामान ही

22:11

नहीं बिक रहा है तो फार्मर को इस चीज का

22:14

तो सफर करना ही पड़ेगा ना तो फार्मर सफर

22:17

कर रहा है कि उसका धान का रेट देखिए अभी

22:19

भी बहुत नीचे है और क्या कहते हैं उसका जो

22:23

बीज आता है क्रॉप आता है बुनने में वो

22:24

बहुत महंगा है क्योंकि वो फॉरेन ट्रेड का

22:27

है मतलब विदेश से आता है वो उसका बीज काफी

22:30

सारा काफी इंडिया में भी बनता है तो यह एक

22:33

सफर देखने को मिलता है

22:38

हु बेनिफिट द मोस्ट बेनिफिट सबसे ज्यादा

22:40

किसको मिलता है स्किल्ड वर्कर बिग कंपनीज़

22:43

अर्बन कंज्यूमर्स

22:45

इंडस्ट्रियल लिंक टू टेक्नोलॉजी टीईसीएच

22:49

का मतलब है टेक्नोलॉजी

22:52

दोज़ हु स्ट्रगल मोर स्मॉल शॉपकीपर स्मॉल

22:56

मैन्युफैक्चरर्स

22:57

अनस्किल्ड वर्कर्स ये सबको स्ट्रगल करना

23:00

पड़ रहा है

23:03

फेयर ग्लोबलाइजेशन व्हाट शुड बी डन

23:06

ग्लोबलाइजेशन फेयर तरीका से होना चाहिए

23:09

मतलब इक्वल तरीका से होना चाहिए तो उसके

23:10

लिए क्या कर सकते हैं टू मेक ग्लोबलाइजेशन

23:13

फेयर गवर्नमेंट शुड प्रोटेक्ट स्मॉल

23:16

प्रोड्यूसर प्रोटेक्ट करना चाहिए स्माल

23:18

प्रोड्यूसर को इंश्योर फेयर वेजेस सबको

23:21

इक्वल प्राइिस मिलना चाहिए मतलब इक्वल

23:23

वेजेस मिलना चाहिए फॉलो

23:28

लेवर्स लेबर लॉ लेबर का एक लॉ बनाया गया

23:31

होगा अगर आप रिमेंबर करेंगे पिछले चैप्टर

23:33

में कि 8 घंटा से अधिक कोई भी काम नहीं

23:37

करेगा तो वह सब फॉलो नहीं करता है काफी

23:39

कंपनियां

23:40

सपोर्ट लोकल इंडस्ट्रीज इंश्योर

23:44

टेक्निकल बिजनेसेस

23:47

ट्रेड यूनियन पीपल मूवमेंट आल्सो पुश फॉर

23:50

फेयरनेस तो यह सब जरूरी है फेयर

23:53

ग्लोबलाइजेशन के लिए तो आई होप ये चैप्टर

23:56

आपको समझ में आया होगा चैप्टर बेसिकली

23:59

यहीं तक था इसमें काफी सारे पॉइंट देख

24:03

सकते हैं आप कोई भी टॉपिक है वो पॉइंट

24:04

वाइज़ दिया गया है तो आप इसी एग्जैक्टली

24:08

इसी तरह एग्जाम में लिख के आइए नंबर आपका

24:10

कहीं भी नहीं कटेगा और आपको नोट्स चाहिए

24:13

इसके रिगार्डिंग शॉर्ट नोट्स चाहिए या फिर

24:16

आपको वो क्या कहते हैं? अभी तो आ रहा है

24:19

वो एक पेपर में पूरा चैप्टर कंप्लीट। आपको

24:21

कुछ भी चाहिए कमेंट कीजिए। हम आपको

24:24

प्रोवाइड करेंगे। हैव ए गुड डे। थैंक यू

24:26

फॉर वाचिंग द वीडियो।

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