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खाटू श्याम जी की कथा | Khatu Shyam | Bhakti Kahani | Hindi Kahani | Moral Stories | Hindi Kahaniya

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नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका अपने चैनल भक्ति में शक्ति पर खाटू श्याम बाबा का

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प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के शिखर जिले में स्थित है खाटू श्याम जी को भगवान श्री

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कृष्णा का अवतार भी माना जाता है देश के करोड़ लोग खाटू श्याम जी की पूजा करते हैं

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खाटू श्याम जी के मंदिर में हर वक्त भक्तों का तांता लगा राहत है और विशेष रूप

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से होली से कुछ दिन पहले सीकर जिले में खाटू श्याम जी का विशाल मेला आयोजित किया

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जाता है जिसमें राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्धालु भी बाबा के दर्शन

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करने आते हैं खाटू श्याम जी की कहानी महाभारत कल से शुरू होती है जिसमें उनका

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नाम परबारिक था बर्बरीक भीम का पुत्र और घटोत्कच का पुत्र था बर्बरी बचपन से ही एक

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बहुत अच्छा योद्धा था बर्बरीक ने अपनी मां से युद्ध कलसी की थी बर्बरीक देवी शक्ति

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का बहुत बड़ा भक्ति था एक बार बार ने देवी शक्ति की कठोर तपस्या की बर्बरीक की कठिन

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तपस्या से देवी शक्ति वहां प्रकट हुई आंखें खोलो पुत्र प्रणाम मेट तुम्हारा

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कल्याण हो पुत्र मैं तुम्हारी तपस्या से अति प्रश्न बोलो क्या वरदान चाहिए

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कृतार्थ कर दिया अब तो बस एक ही अभिलाषा है आप अपना आशीर्वाद मुझमें पर सदैव बनाए

1:30

रखिए जिससे मैं अपना संपूर्ण जीवन दिन दुखियों की सहायता करने में व्यतीत कर

1:36

सुकून तुम सदा दुर्बलों का सहारा बनोगे मैं

1:42

तुम्हें ऐसी शक्ति प्रधान करूंगी

1:57

[संगीत]

2:02

इसी वजह से बर्बरी अजय हो गया बर्बरी अपनी माता के पास पहुंच और देवी शक्ति के दिए

2:09

हुए वरदान के बड़े में उन्हें बताया मां मैं भी गौरव पांडव के युद्ध में जाना

2:14

चाहता हूं मेरे युद्ध में जान की बहुत इच्छा है मां पुत्र बार-बार एक मैं जानती

2:21

हूं तुम एक महान योद्धा हो इसीलिए मैं तुम्हें रोकूंगी नहीं

2:26

पर मुझे वचन दो की तुम्हारे का सहारा बनोगे तुम युद्ध में हारने वाले की तरफ से

2:35

ही लड़ोगे मैं आपको वचन देता हूं मां की मैं युद्ध में हारने वाले की ही तरफ से

2:41

लड़ाई करूंगा अपनी मां को वचन देकर बर्बरीक ने घोड़ी पर स्वर होकर और देवी

2:46

शक्ति के दिए हुए तीन बानो को लेकर रावण हो गया भगवान कृष्णा तो

2:54

अंर्तयामीला होते हुए देख रहे थे भगवान कृष्णा जानते थे की बर्बरीक केवल हरि हुई

3:00

सी की तरफ से ही लड़ेगा और वह यह भी जानते थे की कौरवों को भी बर्बरी कैसे वचन के

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बड़े में पता है बर्बरी कौरवों का सहयोग कर पांडवों का विनाश करते का इस प्रकार जब

3:13

वह कौरवों की तरफ से लड़ेगा तो पांडवों की लाड रही सी कमजोर हो जाएगी उसके बाद वो

3:18

पांडवों की सी में चला जाएगा इस तरह वो दोनों साओ में घूमता ही रहेगा श्री कृष्णा

3:24

को पता था अगर बर्बादी इस युद्ध में शामिल हुआ तो कोई भी सी नहीं जीत पाएगी और अंत

3:31

में कौरव पांडव दोनों का विनाश हो जाएगा और केवल परब्रिक ही शेष र जाएगा इसलिए

3:37

रास्ते में ही श्री कृष्णा ने ब्राह्मण का वेज धरण कर बर्बरी को रॉक बर्बरीक को

3:44

रोकने का अब एक ही उपाय है मुझे बर्बरीक से उसके शीश का दान मांगना होगा श्री

3:50

महावीर योद्धा तुम कौन हो यह कुरुक्षेत्र की रणभूमि है तुम कौरवों और पांडवों के

3:57

युद्ध में क्या कर रहे हो है ब्राह्मण देव मैं घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक हूं मेरा

4:03

प्रणाम स्वीकार कीजिए मैं महाभारत के युद्ध में सम्मिलित होने आया हूं ऐसा कैसे

4:10

हो सकता है पुत्र की तुम मंत्र तीन बाद से युद्ध में सम्मिलित होने जा रहे हो

4:15

ब्राह्मण देव यह बाढ़ कोई साधारण बंद नहीं है इनमें से मंत्र एक बाद भी शत्रु सी को

4:23

परस्त करने के लिए पर्याप्त है और ऐसा करने के बाद बाद वापस तरकश में ही लोट

4:28

आएगा अच्छा तो फिर इस पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को छेद कर दिखाओ जरा बस इतनी सी

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बात ब्राह्मण दे अभी किया देता हूं बर्बरीक ने ब्राह्मण रूपी श्रीकृष्ण की

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चुनौती स्वीकार कर ली बाड़मेर अपने लक्ष्य से तुरंत छुट्टी ही सारे पत्तों को भेद

4:48

डाला और वापस आकर ब्राह्मण रूपी श्रीकृष्ण के पैरों के आसपास चक्कर काटने लगा

4:54

क्योंकि उन्होंने भी एक पत्ता अपने पर के नीचे छुपाया था ब्राह्मण राज अपना पर यहां

5:01

से हटा लीजिए वरना यह आपके पर को भी भेज देगा यह तीर अपने लक्ष्य को पूरा किया

5:07

बिना तरकश में नहीं लौटते हैं पराबादी के तीर अचूक हैं लेकिन अपने निशाने के बड़े

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में खुद बर्बरीक को भी पता नहीं राहत है असली रणभूमि में अगर मैं सभी पांडव भाइयों

5:19

को अलग-अलग कहानी छुपा भी डन ताकि वो बर्बरी का शिकार होने से बैक जैन तब भी

5:25

परभणी के तीर किसी को नहीं छोड़ेंगे ना सूक्तियां से कोई भी नहीं बैक सकता है

5:31

वीर योद्धा मैं तुम्हारे साहस की सारा ना करता हूं मैं तुमसे डांस स्वरूप कुछ

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मांगना चाहता हूं ब्राह्मण राज अगर मेरे बस में होगा तो मैं आपकी इच्छा स्वरूप दान

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की अभिलाषा जरूर पूर्ण करूंगा मैं वचन देता हूं ब्राह्मण राज आप मुझे दान में जो

5:48

भी मांगेंगे मैं आपको माना नहीं करूंगा मुझे तुम्हारा शीश दान चाहिए पुत्र क्या

5:55

तुम ऐसा कर सकते हो आप कौन हैं मुझे अपना परिचय दीजिए आप मुझे ब्राह्मण नहीं दिखाई

6:02

देते कृपया करके मुझे अपने वास्तविक रूप से अवगत कीजिए

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बर्बरीक की प्रार्थना करने पर भगवान कृष्णा अपने रूप में ए जाते हैं बर्बरीक

6:12

उन्हें प्रणाम करता है वासुदेव कृष्णा आप स्वयं मेरे शीश दान के अभिलाषा हेतु

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बर्बरी युद्ध भूमि की पूजा के लिए एक वीर वर्ग क्षेत्रीय के शीश दान की आवश्यकता

6:26

होती है और तुम महावीर महा योद्धा हो अतः मैं तुमसे शीश दान मांगता हूं है वासुदेव

6:34

कृष्णा मैं आपको अपना शिष्य अवश्य दूंगा पर मेरी दो इच्छाएं हैं पहले यह की मेरी

6:41

डे को आप स्वयं अग्नि देंगे और दूसरी इच्छा यह है की मैं अंत तक युद्ध को देखना

6:48

चाहता हूं ऐसा ही होगा

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तुम्हें हरे हुए का सहारा बोलेंगे तुम्हें श्याम नाम से पुकारेंगे मेरे नाम से ही

6:59

तुम्हारी कलयुग में पूजा की जिंदगी कलयुग में खाटू श्याम नाम से तुम्हारी पूजा होगी

7:05

फाल्गुन मा की द्वादशी को बर्बरीक ने अपने शीश का दान दिया बर्बरी को ब्रह्मा जी ने

7:13

एक श्राप दिया था जिसके मुताबिक उनकी मृत्यु पृथ्वी लोक पर भगवान कृष्णा के ही

7:18

हाथों होगी तभी वो श्राप से मुक्त हो पाएंगे बर्बरी का सर युद्ध भूमि के समीप

7:25

ही एक पहाड़ी पर सुशोभित किया गया जहां से बर्बरीक ने महाभारत का संपूर्ण युद्ध देखा

7:31

युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में आपसी बहस होने लगी की युद्ध में विजय का श्री किसको

7:37

जाता है इस पर श्री कृष्णा बोले तुम सबको आपस में विवाद में पढ़ने की कोई आवश्यकता

7:43

नहीं है बर्बरीक कशिश संपूर्ण युद्ध का साक्षी है अतः उससे बेहतर निर्णायक भला

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कौन हो सकता है ठीक है वासुदेव फिर हम इस निर्णय को जन के लिए बर्बरी के पास ही

7:57

चलते हैं तुमने तो युद्ध को बहुत ध्यान से देखा है

8:02

क्या तुम बता सकते हो हम सब वीरों में से इस युद्ध को जितने का श्री किस जाता है

8:08

श्री कृष्णा ने ही इस युद्ध में विजय प्राप्त करने में सबसे महान कार्य किया है

8:13

उनकी शिक्षा उनकी उपस्थित उनकी युद्ध नीति निर्णायक थी मुझे तो युद्ध भूमि में सिर्फ

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वासुदेव कृष्णा का सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखाई दे रहा था जो की शत्रु सी को कैट

8:27

रहा था इस धर्म युद्ध को जितने का संपूर्ण श्री भगवान श्रीकृष्ण को ही जाता है

8:36

तुमने बिल्कुल सही निष्कर्ष दिया है इसके पश्चात सभी पांडव बर्बरी के निर्णय की

8:43

सराहन करते हैं और भगवान कृष्णा से क्षमा मांगते हैं क्योंकि वह जानते थे यदि स्वयं

8:49

वासुदेव ना होते तो यह धर्म युद्ध जितना असंभव था धर्म की विजय स्वयं वासुदेव

8:56

कृष्णा के करण ही हुई थी भगवान कृष्णा के आशीर्वाद से बर्बरी को कलयुग में श्याम

9:02

नाम से पुकार जान लगा आज भी खाटू श्याम जी महाराज के निकॉन भक्ति रोजाना उनके दर्शन

9:08

करने आते हैं और उनसे मां वंचित फल की प्रताप भी करते हैं

9:16

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