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पुरानी हवेली | PURANI HAVELI | HINDI KAHANIYA | HINDI STORIES

19m 23s2,704 words365 segmentsHindi

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0:05

यह कहानी है पूनपुर गांव की जो इतना

0:08

खूबसूरत था कि बस लोग देखते ही रह जाते

0:12

थे। वहां के लोग भी बहुत सरल और सादे थे।

0:16

लेकिन उस गांव में एक हवेली थी जिसके पास

0:20

जाने से लोग कतराते थे क्योंकि वहां वो

0:23

थी।

0:24

लगता है बारिश शुरू हो रही है। अरे

0:27

जल्दी-जल्दी चल स्वामी। हां हां चल रहा

0:30

हूं। लेकिन तू ये हवेली की तरफ क्यों ले

0:32

जा रहा है भाई? अरे ये छोटा रास्ता है ना?

0:36

हां ये बात तो है। चल जल्दी चल।

0:40

लेकिन जैसे ही वो लोग हवेली के पास पहुंचे

0:43

तो बारिश बहुत तेज हो गई और ओले भी गिरने

0:46

लगे।

0:47

हे भगवान ओले गिरने लगे। अरे भैया मेरा तो

0:51

सिर ही फूट जाएगा इन ओलों से। हां। अरे

0:53

जल्दी कोई छत ढूंढ। अरे अरे सामने वो

0:56

हवेली है ना इसमें चलते हैं चल। अरे नहीं

0:59

नहीं भैया उस हवेली में मत जा। अरे तुझे

1:01

रुकना है तो रुक लेकिन मैं तो जा रहा हूं

1:04

अंदर। मुझे चोट खाने का कोई शौक नहीं है

1:06

समझा?

1:15

[संगीत]

1:17

और फिर उन्होंने नजर घुमाकर हवेली को

1:20

देखा। हवेली इतनी पुरानी थी जितना पुराना

1:23

गांव लेकिन इतनी पुरानी होने के बावजूद वो

1:27

जजर नहीं थी लेकिन हां डरावनी जरूर थी।

1:31

अरे यार ये बारिश के चक्कर में हम कहां

1:33

आकर रुक गए? जल्दी बारिश रुके तो हम यहां

1:37

से भागे। अरे भाई ये आवाज किसकी है? कौन

1:40

सी आवाज? हे भाई मजाक मत कर यार।

1:44

ये कौन आ गया? कि कौन आ गया? कि कौन आ

1:49

गया?

1:50

उन लोगों ने घूम कर देखा तो हवेली के एक

1:53

कोने में अजीब सी बुढ़िया बैठी थी जिसके

1:56

सफेद बाल खुले हुए थे और वो कुछ बड़बड़ा

2:00

रही थी। दोनों डर से कांप उठे और फौरन

2:04

बाहर भागे। बाहर अभी भी ओले गिर रहे थे।

2:07

लेकिन इस बार वो ओलों की चोट खाते हुए

2:10

अपने घर की तरफ भाग गए।

2:12

हे भैया राम। हे भैया लोग सही कहते हैं

2:16

सोनी। अरे वहां कुछ है भैया। हे भैया मैं

2:20

तो कसम खाता हूं। अब उस तरफ नहीं जाऊंगा

2:22

भैया।

2:23

पूरनपुर गांव में कुछ दिन बाद एक बड़ी

2:26

अजीब घटना हुई। गांव में चार नए लोग

2:29

पहुंचे। एक नौजवान जोड़े के साथ दो नौजवान

2:33

लड़के और

2:34

अरे भाई आप लोग कौन हैं? और इस गांव में

2:38

कैसे आना हुआ?

2:40

नमस्ते। मेरा नाम राजीव है। यह मेरी पत्नी

2:43

रिया है। और यह मेरे भाई हैं रमन और

2:46

प्रेम। हम यहां अपनी हवेली को बेचने आए

2:49

हैं जो गांव में पूर्व में है। हां हवेली

2:54

हे भैया

2:56

कौन सी हवेली? वो वो जो बरगद के पेड़ के

3:00

पास वाली वो वही ना।

3:03

हां हां वही हमारे दादाजी की थी। अब हम

3:07

उसे बेचना चाहते हैं।

3:09

ये सुनकर मुखिया हैरान हो गया और गांव

3:12

वालों की भीड़ जमा हो गई। सब फुसफुसाने

3:15

लगे। तभी मुखिया सीरियस होकर बोला

3:19

बेटा वो हवेली आज भी गांव के डर का कारण

3:23

है। वहां एक बुढ़िया दिखती है अजीब सी।

3:29

कोई नहीं जानता कि वो असली है या आत्मा

3:32

है। कोई भूत है। पता नहीं या फिर हमारा

3:37

वहम है।

3:40

गांव में ऐसी अफवाहएं आम होती हैं। हमने

3:43

भी शहर में ऐसे किस्से खूब सुने। अगर वहां

3:45

कोई बुढ़िया होती तो अब तक किसी ने वीडियो

3:48

बना लिया होता ना।

3:50

मैं तो वहां की तस्वीरें Instagram पर

3:52

डालूंगी। कौन डरता है भूत से?

3:54

हम सब आज ही हवेली में जाकर देखेंगे और कल

3:57

ही उसके कागज फाइनल कर लेंगे।

3:59

रामू और स्वामी भी वहां खड़े थे। दोनों की

4:02

आंखों में डर था। लेकिन आखिर वो बोल ही

4:05

पड़े।

4:06

भाई साहब मत जाइए। हमने अपनी आंखों से

4:09

देखा है उसे। वो औरत इंसान नहीं लगती।

4:12

हां। उसके पास जाने से जान पे बनाती है।

4:16

हां बता रहा।

4:18

अगर वो हवेली मेरी है तो मुझे ये देखना

4:21

चाहिए ना कि उसमें क्या है।

4:23

ये कहकर वो चारों हवेली की ओर बढ़े। जैसे

4:26

ही वो हवेली के पास पहुंचे सब ने उसे

4:29

निहारा। हवेली पुरानी जरूर थी। लेकिन उसकी

4:32

दीवारों पर एक अजीब किस्म की चमक थी। वाओ!

4:36

यह हवेली तो किसी राजमहल जैसी लगती है।

4:39

इतनी मजबूत दीवारें कितनी भव्य है।

4:42

यार ये बेचेंगे तो करोड़ों मिलेंगे भाई।

4:45

चलो अंदर चलते हैं। मैं तो इसका वीडियो

4:47

बना रहा हूं।

4:48

जैसे ही वो अंदर घुसे एक ठंडी हवा का

4:51

झोंका आया। जैसे किसी ने उन्हें छुआ हो।

4:55

लेकिन चारों ने नजरअंदाज किया। अंदर का

4:58

हॉल अब भी चमक रहा था। जैसे समय ने उसे

5:01

छुआ ही ना हो। राजीव वहां खड़ा होकर बोला,

5:05

"स सोचो यार इतने बड़े हॉल में लोग रहते

5:09

होंगे। वाओ यार।

5:12

सीरियस व्हाट अ रॉयल लाइफ।

5:16

लेकिन यार ये कैसी आवाज है? कि कौन आ गया?

5:22

ये कौन आ गया। ये कौन आ गया।

5:26

कोई बोल रहा है शायद।

5:27

चलो उस तरफ चलते हैं। देखती हूं कौन इतनी

5:30

एक्टिंग कर रहा है। चारों उस कोने की ओर

5:32

बढ़ी। लेकिन वहां कुछ नहीं था। तभी

5:35

चमगादड़ों का एक झुंड छत से निकला। रिया

5:38

चीख पड़ी।

5:46

अरे बाप रे सांप। अरे भागो भाई। हे भगवान

5:51

ये हवेली तो जंगल हो रखी है।

5:54

अफवाहों का भूत और असली जानवरों का आतंक।

5:58

राजीव, रिया, रमन और प्रेम। हवेली के

6:01

सुंदरता और रहस्यमई माहौल से प्रभावित

6:04

होकर वहां से निकलने ही वाले थे कि अचानक

6:07

हवेली के अंदर एक अंधेरे कोने में कुछ

6:10

हिलता डुलता दिखा। सभी की निगाहें उस कोने

6:13

की ओर मुड़ी वहां एक औरत बैठी थी। उसी

6:16

हवेली की वही रहस्यमई बुढ़िया जिसकी बातें

6:20

गांव वाले करते थे। खुले सफेद बाल, सूखी

6:23

सिलवटों वाली त्वचा और पथराई आंखें। वो वो

6:27

देखो वो वहां कोई है। अच्छा चल चलते हैं।

6:32

ये वही बुढ़िया लगती है। नहीं यार अब जब

6:35

सामने दिख रही है तो बात करनी चाहिए।

6:38

प्रिया साहस करके धीरे-धीरे उस बुढ़िया के

6:40

पास गई। जैसे ही वो पास पहुंची, बुढ़िया

6:43

अचानक कांपती हुई खड़ी हो गई। आप कौन है?

6:48

यहां क्या कर रही हैं? तुम लोग क्यों आए

6:51

हो? यहां क्यों आए हो? यहां कोई नहीं आता।

6:54

फिर तुम क्यों आए हो?

6:56

हम हम इस हवेली को बेचने आए हैं। ये हमारे

7:00

दादा की हवेली है। और अब

7:02

मैं मैं खजाने की रखवाली कर रही हूं।

7:08

खजाना

7:10

हां बहुत साल पहले मैंने इस हवेली में

7:13

खजाना छुपाया था। पर अब याद नहीं कहां रखा

7:17

है। कहां दफना दिया समझ नहीं आता। बुढ़िया

7:21

के खजाना शब्द ने चारों के मन में एक साथ

7:24

बिजली की तरह लालच जगा दिया। उनकी आंखों

7:27

में अब हवेली की कीमत से ज्यादा उस अदृश्य

7:30

खजाने की चमक तैरने लगी।

7:33

अगर ये खजाने की बात सच हुई तो हम

7:35

करोड़पति बन सकते हैं भाई। और जब खजाना

7:38

मिल जाए इस बुढ़िया को यहां से निकाल

7:40

फेकेंगे। डराने के अलावा करते क्या है ये?

7:43

बिल्कुल भाई। पहले मिठास फिर लात

7:48

चलो खोजना शुरू करें।

7:51

अम्मा वो खजाना कहां है? क्या पता वो सब

7:55

लोग पूरी हवेली में खजाना ढूंढने लगे।

7:58

बुढ़िया भी दीवारों को थपथपाती जमीन को

8:01

सूंघती जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रही

8:04

हो। लेकिन 4 घंटे तक पूरी हवेली छान मारने

8:07

के बाद भी कुछ नहीं मिला। अब तो रात होने

8:10

वाली है यार। कुछ नहीं मिला। शायद ये औरत

8:13

पागल है।

8:14

हम कल फिर आएंगे। तब तक आप याद करने की

8:17

कोशिश करना कि वो खजाना कहां है।

8:20

चारों लोग गांव लौट आए। गांव वालों को जब

8:22

ये पता चला कि उन्होंने बुढ़िया से बात की

8:25

और खजाने की भी बात सुनी। तो पूरा गांव

8:28

भौचक्का रह गया।

8:30

क्या? तुमने उससे बात की?

8:32

उसने सच में खजाने की बात कही।

8:35

हम बरसों से डरते आए हैं उस हवेली से और

8:39

तुम लोग खजाना ढूंढ रहे हो। अगर सच में

8:42

खजाना हुआ तो हम सबको फायदा होगा फिर। कल

8:46

चलो हमारे साथ। अगर कोई खजाना मिला तो

8:48

हिस्सा मिलेगा।

8:50

गांव वाले पहले तो हिचकिचाए लेकिन हिस्सा

8:53

शब्द सुनकर उनकी आंखों में भी चमक आ गई।

8:58

[संगीत]

8:59

अगले दिन राजीव, रमन, प्रेम, रिया के साथ

9:02

गांव के 101 लोग भी हवेली पहुंचे।

9:06

वो देखो भाई वही बुढ़िया हे भगवान मुझे

9:10

यकीन नहीं हो रहा है मैं यहां वापस आ गया।

9:13

चलो सब आज इस हवेली का कोना कोना उलट डालो

9:16

चलो।

9:18

लोगों ने हवेली के हर कोने को अच्छी तरह

9:20

देखा। यहां तक कि बाहर बगीचे में खुदाई भी

9:24

शुरू कर दी। कुछ घंटे बीते लेकिन कहीं कुछ

9:27

नहीं मिला। तभी रामू की नजर हवेली के

9:30

पिछले हिस्से पर गई। जहां छत का एक हिस्सा

9:33

टूट कर गिरा हुआ था। अरे ओ भैया इधर आओ

9:37

देखो। अरे यहां कुछ है शायद। कहां? अरे ये

9:41

मलबा हटाओ। इसके नीचे कुछ है?

9:43

सब ने मिलकर मलबा हटाया और नीचे एक पुराना

9:47

पत्थर निकला जो जमीन से अलग दिख रहा था।

9:50

जैसे ही उसे हटाया गया नीचे सीढ़ियां

9:53

दिखाई दी। एक तहखाने की ओर जाने वाली।

9:56

तहखाना ये तो बिल्कुल फिल्मी सीन बन गया।

10:00

चलो अंदर।

10:01

वो लोग बारी-बारी तहखाने में उतरे।

10:05

तहखाने में घुप अंधेरा था। सीलन भरी हवा

10:09

और मकड़ी के जाले। सब ने अपनी मोबाइल की

10:12

फ्लैश लाइट जलाकर जगह-जगह टटोला। तभी रमन

10:15

की नजर एक लोहे के पुराने संदूक पर पड़ी।

10:19

ओए इधर देखो यार। कुछ मिला है? एक संदूक।

10:22

अरे यार जल्दी निकालो इसे यार।

10:25

संदूक भारी था। लेकिन गांव वालों की मदद

10:28

से बाहर ले आया गया। जैसे ही बुढ़िया ने

10:31

उसे देखा वो पागलों की तरह झूमने लगी।

10:34

मिल गया मेरा खजाना। मिल गया मेरा खजाना।

10:38

हां मेरा खजाना।

10:41

चारों लोग एक्साइटेड हो गए। अब उन्होंने

10:43

फटाफट संदूक खोला। लेकिन उसके अंदर जो था

10:47

वो देखकर सबकी रूह कांप गई।

10:51

ये क्या है?

10:54

ये ये तो किसी बच्चे का कंकाल है।

10:59

चारों तुरंत पीछे हट गए। लेकिन बुढ़िया

11:01

संदूक को पकड़ कर बैठ गई और उसकी आंखों से

11:04

आंसू बहने लगे।

11:06

ये क्या है? तुमने तो कहा था खजाना है।

11:09

जवाब दो ये क्या है?

11:11

बताती हूं। बताती हूं। सारा सच बताती हूं।

11:16

बुढ़िया ने बताना शुरू किया कि उसका नाम

11:19

गौरी था। एक समय में जवान, सुंदर और

11:22

भोलीभाली गौरी अपने पति और ससुर के साथ इस

11:26

हवेली में रहती थी। पर किसे पता था कि जिस

11:29

घर को वो स्वर्ग समझती थी वो एक दिन उसका

11:32

नर्क बन जाएगा।

11:35

बाबूजी वो आपकी बहू ना मां बन गई। देखिए

11:38

बेटी हुई है। कितनी सुंदर है ना?

11:42

क्या कहा बेटी? तुझे शर्म नहीं आती। हैं?

11:47

हमारे खानदान में बेटी नहीं होती। बेटा

11:50

चाहिए था बेटा। मुझे तो इससे बात भी नहीं

11:53

करनी। निकम्मी औरत।

11:56

गौरी के पति ने ना तो बेटी को गोद में

11:58

लिया ना कभी उसकी शक्ल देखी। बच्ची के

12:01

जन्म के साथ ही मानो हवेली का हर कोना

12:05

ठंडा और बेरंग हो गया। गौरी अकेली पड़ गई।

12:09

अपनी नन्ही जान को सीने से लगाकर हर दिन

12:12

अपमान और तानों से लड़ती।

12:14

बाबा मैं क्या करूं? मुझे बेटा चाहिए। कोई

12:18

उपाय बताओ।

12:19

उपाय है

12:21

अपनी बेटी की बलि चढ़ाओ।

12:26

रक्त की आग में पुत्र की राख से जन्म

12:29

होगा।

12:31

उसने बिना कुछ सोचे तांत्रिक की बात मान

12:34

ली। एक रात

12:36

[संगीत]

12:38

हवेली के तहखाने में जहां अंधेरा रहता था,

12:42

वहीं उसने अपनी ही बेटी की हत्या कर दी।

12:45

उसके साथ उसका ससुर और दो नौकर भी थे। सब

12:49

ने देखा लेकिन सब चुप थे। उधर गौरी की आंख

12:52

खुली तो बच्ची को ना देखकर तड़प उठी। मेरी

12:56

बच्ची कहां है? वो तो मेरे साथ थी। गौरी

12:59

उसे हर जगह ढूंढते हुए।

13:04

आखिरकार तहखाने की ओर भागी।

13:09

और वहां का नजारा देख चीख पड़ी।

13:12

नहीं ये क्या कर लिया तुमने?

13:14

बच्ची गौरी पागल हो गई। उसके भीतर की मां

13:18

जल उठी। उसी तहखाने में पड़ा एक बड़ा चाकू

13:22

उठाया और एक-एक करके सबका खात्मा कर दिया।

13:26

मेरी बच्ची के खून से कोई बेटा नहीं

13:28

मिलेगा तुझे। सिर्फ अभिशाप लगेगा तुझे। सब

13:32

मारे गए।

13:34

और गौरी वहीं तहखाने में अपनी मरी हुई

13:37

बच्ची की लाश को सीने से लगाए घंटों बैठी

13:40

रही। शायद कई दिन और फिर एक दिन उसने उस

13:43

नन्ही लाश को एक संदूक में बंद किया जैसे

13:46

वो कोई खजाना हो। सो जा मेरी रानी अब कोई

13:52

तुझे नहीं छीन सकता। तू मेरा अनमोल खजाना

13:58

है। वो संदूक लेकर वहीं तहखाने में बैठी

14:02

रही। वक्त के साथ सब बदल गया। हवेली

14:05

सुनसान हो गई। और जब वो एक दिन ऊपर आई तो

14:08

छत का एक हिस्सा गिर पड़ा। तहखाने का

14:11

रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया। गौरी ऊपर

14:14

रह गई और संदूक नीचे छुप गया। यादें

14:17

धुंधली हो गई। पर उसका पागलपन वही रहा।

14:20

गौरी की आंखों से आंसू झर रहे थे। सामने

14:23

बैठे राजीव, रिया, रमन और प्रेम सन्न थे।

14:27

जैसे किसी ने उनकी जुबान छीन ली हो। ये,

14:31

ये सब सच है? हां यह मेरा खजाना है। मेरी

14:36

बेटी, मेरी जान, मेरी दुनिया।

14:41

पागल औरत यह खजाना है। हड्डियां और सड़ती

14:44

यादें हैं।

14:45

राजीव वो संदूक को लात मारकर दूर फेंक

14:48

देता है। यह देखकर उस बुढ़िया को बहुत तेज

14:51

गुस्सा आ गया। वो पागलों की तरह चिल्लाने

14:53

लगी। नहीं, यह मेरी बच्ची है। तेरी हिम्मत

14:57

कैसे हुई मेरी बच्ची को लात मारने की? वो

15:00

पगलाई हुई औरत अब उस संदूक को गोद में

15:02

लेकर हवेली के अंदर की ओर भागी। उसकी

15:05

चीखें हवेली की दीवारों से टकरा कर लौट

15:08

रही थी। मेरा खजाना, मेरी बेटी मुझसे कोई

15:12

नहीं छीन सकता।

15:14

अरे अब बहुत हो गया। पागल औरत ने दिमाग

15:16

खराब कर दिया है। इसको निकालो यहां से।

15:18

फिर इस हवेली को बेच डालते हैं। चलो। हां

15:21

यार। खजाना तो निकला नहीं। अब हवेली

15:23

बेचेंगे। चलो।

15:25

सब ने सोचा कि किसी भी तरह बुढ़िया को

15:28

पकड़ कर बाहर फेंक देंगे। लेकिन उन्हें

15:30

नहीं पता था कि यह इतना भी आसान नहीं

15:33

होगा। वो लोग हवेली के अंदर की तरफ जाते

15:36

हैं तो अचानक राजीव फर्श पर बिछे कालीन पर

15:39

पैर रखता है और गड्ढे में गिर जाता है जो

15:42

कालीन से ढका था।

15:44

राजीव कहां गए तुम? ये क्या हो रहा है?

15:49

ये ये सब उस पगली औरत का जाल है। अरे भागो

15:53

यहां से भैया। रिया एक कमरे में भागती है

15:56

लेकिन वहां का दरवाजा बंद हो जाता है और

15:59

अंदर से सैकड़ों चूहे निकल आते हैं। रिया

16:02

चीखने लगती है। उधर प्रेम जैसे तैसे भागता

16:05

है लेकिन गलियारे में फिसल जाता है

16:08

क्योंकि फर्श पर तेल फैला हुआ था। तुम लोग

16:11

मेरा खजाना नहीं छीन सकते। बुढ़िया अपने

16:15

बिछाए जालों से बहुत खुश थी। पर उसी समय

16:18

गांव के और लोग भी वहां पहुंच गए।

16:20

उन्होंने सब कुछ देखा और एक साथ मिलकर

16:23

बुढ़िया को पकड़ने की कोशिश की।

16:26

अरे अब बस तुमने बहुत डर फैलाया। अब

16:28

तुम्हें रुकना होगा।

16:30

बहुत संघर्ष के बाद बुढ़िया को पकड़ लिया

16:32

गया। राजीव उठ खड़ा हुआ और बोला

16:36

मैं मैं पुलिस बुलाता हूं। हां ये औरत

16:39

पागल है। हमें मारना चाहती थी।

16:47

[प्रशंसा]

16:48

पुलिस जल्दी ही पहुंच गई। अ सर हम तो ये

16:51

हवेली बेचने आए थे। ये औरत हम पर हमला कर

16:53

रही थी। पागल है सर ये।

16:56

हां मैं पागल हूं। लेकिन ये हवेली मेरी

16:59

है। मेरे खून से सींची गई है। तुम लोग इसे

17:02

अपना कहते हो। क्या सबूत है तुम्हारे पास?

17:06

पुलिस को बुढ़िया की बात सही लगी। इसीलिए

17:09

उन्होंने उनसे कागज मांगे, सबूत मांगे।

17:12

लेकिन चारों लोगों के पास कुछ नहीं था। ना

17:15

कोई दस्तावेज, ना कोई अधिकार। गांव वाले

17:18

भी अब शंका से भर उठे।

17:20

राजीव बताओ इस हवेली का इतिहास क्या है?

17:23

बोलो।

17:24

वो वो

17:27

हम तो बस अरे वो वो क्या कर रहा है? हैं?

17:31

हमें फ़ करके तूने बुलाया ना? लेकिन अब लग

17:34

रहा है कि तेरा झूठ पकड़ में आ चुका है। अब

17:37

चुपचाप सच बोल दे। वरना सीधे जेल ले

17:40

जाएंगे तन्ने।

17:42

हां। अह हमने हवेली पर कब्ज़ा करने की

17:45

कोशिश की थी ताकि उसे किसी फॉरेनर को

17:47

बेचकर पैसे कमा सकें। हां, हमें किसी ने

17:52

यहां के बारे में बताया था तो हमने सोचा

17:54

कि गांव वालों को बेवकूफ़ बना कर अपना काम

17:57

निकाल लेंगे।

17:58

हमें माफ़ कर दीजिए।

18:00

हैं? माफी। हां, जरूर मिलेगी ना माफी। चलो

18:04

सीधे थाने। चलो वहीं करेंगे तुम्हें सब

18:07

माफ़। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया

18:10

और फिर रामू आगे आया। उसने सबको देखा और

18:14

बोला

18:16

इतनी बड़ी कहानी हो गई। हमें आज पता चल

18:20

रहा है। देखो भैया गांव वालों मुझे लगता

18:24

है कि हमें इस बच्ची का जो है अंतिम

18:27

संस्कार करना चाहिए। ये जरूरी है भैया।

18:31

सबने मिलकर उस मासूम बच्ची की अस्थियों का

18:34

विधि पूर्वक अंतिम संस्कार किया। बुढ़िया

18:37

फूट-फूट कर रोती रही। उसकी सालों की पीड़ा

18:41

अब बह रही थी। उसके बाद पुलिस ने बुढ़िया

18:44

को एक मानसिक चिकित्सालय भेज दिया। पर

18:46

कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। गांव वालों ने

18:49

उस हवेली को एक बालिका विद्यालय में बदल

18:52

दिया। बाहर एक पट्टिका लगी। जिस पर लिखा

18:56

था गौरी कन्या विद्यालय एक मां की याद

18:59

में।

19:00

[संगीत]

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