Arrange marriage based Noval | سجن کی سجنی | Most Rumantic husband wife love story | Saba voice
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कितना कहा था ना अपने नंगे जिस्म की
नुमाइश मत किया करो। खुद को ढांप कर रखा
करो। रीमा वरना तुम्हारा मुझसे 18 साल
छोटा होने का लिहाज नहीं करूंगा मैं।
लेकिन आज मेरी जान तुम्हें मैं तरसाऊंगा।
जैसे तुम मुझे अपने सीने के नजारे करवा कर
तरसाती और उकसाती हो। नहीं प्लीज ऐसा ना
करें मैं मर जाऊंगी। वो असद के बदन से
छेड़छाड़ करने पर चिलाई दी। और कितनी ही
देर वह उसकी मिन्नत समाजित करती रही। उसकी
टाई से बंधे हाथ की वजह से वह छटपटा भी
नहीं पा रही थी। यहां तक कि अब उसने
जज्बात की शिद्दतों के बढ़ जाने पर तड़पना
शुरू कर दिया। कुछ देर उसे तड़पता देखने
के बाद आखिरकार उसे रीमा की हालत पर तरस आ
ही गया। तभी वह उसके पेट पर लब रखते उसे
अपने लबों में दबाने लगा। उसे लगा आज उसका
दम ही निकल जाएगा। वह आहिस्ता-आहिस्ता
उसकी साड़ी टांगों से ऊपर करता जा रहा था
और अपना हाथ उसने रीमा को मशरूर करने में
लगाया हुआ था। जब अचानक उसने रीमा को
दांतों से काटा कि वह लज्जत भरा दर्द
बर्दाश्त करते सिसक उठी थी। जिस्म बेजान
हुआ था। असद अपने मां-बाप और बहनों के साथ
गांव में रहता। जब उसे शहर में तरक्की
हासिल हुई तो वह अपने मां-बाप और बहनों को
भी इस शहर में साथ ले आया। अपनी बहनों की
उसने अच्छे घर में शादियां की। दोनों
बहनें ब्याह कर एक ही घर में गई थी और
बहुत खुश थी। मगर उसकी बहनें नहीं चाहती
थी कि वह शहर की लड़की से शादी करें
क्योंकि वह जानती थी शहर की लड़कियां तेज
होती हैं। आकर कभी भी उसके बूढ़े मां-बाप
की खिदमत नहीं करेंगी। तभी उन्होंने सोचा
था कि वह उसकी शादी गांव की ही एक कम उम्र
मगर खूबसूरत लड़की से कर देंगे ताकि वह
उनके काबू में भी रहे और उनके मां-बाप की
खिदमत भी करती रहे और उफ तक भी ना करें।
उन्होंने असद को समझा बुझाकर उसकी शादी 17
साला रीमा से कर दी थी। जो यतीम थी उसकी
बहनों की जानने वाली थी और उसका एक सौतेला
भाई भी था जो उसके साथ नहीं रहता था। बस
कभी कबभार मिलता था उससे। जबकि इस बात पर
असद बिल्कुल भी राजी ना था। मगर अपने
मां-बाप के कहे को वह कैसे टाल सकता था।
इसलिए असद जो कि एक बहुत फरमाबरदार बेटा
था। उसने अपने मां-बाप का कहा मानते हुए
रीमा से शादी कर ली। मगर रीमा उससे 18 साल
छोटी थी। यह बात उसको खटक रही थी कि वो आज
होने वाले मरहले से अनजान तो नहीं होगी।
मगर जैसे ही वह उसके करीब गया तो उसे
मालूम हो गया कि वह इस सब के बारे में कुछ
नहीं जानती थी। उसकी आज की रात के अरमानों
पर ओस पड़ी थी। वह भी बुरी तरह। वो सिगरेट
सुलगाने के लिए बाहर बालकनी में निकल गया।
जबकि रीमा ने जो अपने हाथों को मस रही थी
अपने दूल्हे को अपने से दूर जाता देखकर
दिल महसूस सा करके। उसकी बहनों ने उसे
समझाया था अच्छी तरह कि उसको अपनी तरफ
कैसे माइल करना है। मगर वह पहले ही दिन
नाकाम ठहरी थी। उसने दिल में सोच लिया था
कि वह जरूर असद को पाकर रहेगी। सुबह जब वो
लोग नाश्ते के लिए नीचे गए तो उसकी बहनों
ने रीमा से दरियाफ्त किया। क्या असद उसके
पास आया था और उसे छूने की कोशिश की और
अपनी रात सही से गुजारी थी। जिस पर वो
मुंह बनाकर नफी में सर हिला गई। हिचकिचाते
हुए आपी वह जो भी मुझसे पूछ रहे थे मुझे
उन बातों का पता ही नहीं था। मैं क्या
करती? मैं तो चाहती थी वो मेरे करीब आए
मगर वो गुस्से से उठकर बालकनी में चले गए।
उसने एक-एक लफ्ज सच बता दिया था। जिस पर
उसकी दोनों बहनें सर थाम कर रह गई थी। अरे
यह क्या कर दिया तुमने पगली? वो जैसा-जैसा
कहता वैसा-वैसा कर देती। अब से हम तुम्हें
उसको रुझाने की क्लासेस देंगे। और याद
रखना तुम्हें हमारे हर कहे पर अमल करना
होगा। अगर तुमने ऐसे ना किया तो असद
तुम्हें छोड़कर शहर की किसी और शादी लड़की
से शादी कर लेगा। क्या तुम ऐसा चाहती हो?
उसकी बड़ी नंद ने उसकी तरफ देखते हुए
जेरिक निगाहों से पूछा था। जानती थी कि वह
असद को कभी किसी और का होने नहीं देगी।
गांव की लड़कियां अपने मर्दों के मामले
में बहुत हसास होती है। नहीं मैं अपने
शौहर को किसी से भी नहीं बांटूंगी। मैं
उनसे मोहब्बत करती हूं। मैं कैसे अपना
शौहर किसी और को दे दूं? वह एकदम रोते हुए
बोली जब उसकी दूसरी ननंद ने उसका कंधा
थपकते हुए कहा था। बस फिर जैसा हम कहेंगे
वैसा ही करना वरना कोई चुड़ैल आएगी और
तुम्हारे शौहर को ले उड़ेगी और तुम कुछ भी
नहीं कर पाओगी। रोती रह जाओगी। समझी तुम?
वो एकदम से घृकते लहजे में बोली जिस पर
उसने असबात में सर हिलाया था। उसकी नंदी
दो-तीन दिन वहीं रही थी और उसको जो जो
टिप्स बताती थी इन पर वह अच्छी तरह अमल
करने की कोशिश करती मगर उससे असद के सामने
सब गलत हो जाता। अब असद भी जैसे पत्थर का
हो गया था। उसकी तरफ रागब ही नहीं होता
जिस पर वह दिल महसूस करके रह जाती। आखिर
वह ऐसा क्या करे कि उसका शौहर उसकी जानिब
रागब हो जाए। वह रातों को बैठकर सोचा करती
थी। मगर उसके ज़हन में ऐसी कोई बात नहीं
आती थी। वह निहायत सलीकामंद लड़की थी। ना
सिर्फ उसके मां-बाप का ख्याल रखती। उनकी
खिदमत करती बल्कि उसके लिए भी उनके मनपसंद
खाने बनाती ताकि वो उससे कभी नाराज ना हो।
उसे खुश रहा करे और उसे अपने करीब कर ले।
मगर वह क्या जानती थी कि वह उसको खाने
बनाकर खुश तो कर सकती है मगर उसकी
जिस्मानी ख्वाहिशात का क्या असद एक भरपूर
मर था उसे अपनी नफसी ख्वाहिशात के लिए भी
तो कोई चाहिए था जिसके साथ वह अपनी पूरी
जिंदगी गुजार सके मजे ले सके मगर वह अपनी
इस कम उम्र बीवी से क्या कहता उसको तो
सोचते हुए भी शर्म आती उसको अपनी तरफ से
पूरी कोशिशें करते हुए देखकर असद ने उसका
एडमिशन कॉलेज में करवा दिया। वहां जाकर
उसे एक नई दुनिया का मालूम होने लगा था।
असद चाहता था कि वह खुद तालीम हासिल करे।
साथ-साथ उसे ऐसी चीजों का भी शूर हासिल
हो। वो जो खुद उसको नहीं बता सकता था। उसे
कॉलेज जाते हुए छ सात माह बीत चुके। अब वो
काफी बातों के बारे में जान गई थी। उसकी
सहेलियां भी बहुत सी बातें करती जिसका उसे
पहले से मालूम ना होता। जैसे कि बॉयफ्रेंड
की बातें, बॉयफ्रेंड उनको कैसे खुश रखता
है ऐसी बातें। मगर उसका तो शौहर था। उसको
भला बॉयफ्रेंड की क्या जरूरत? हां, वो यह
सब कुछ अपने शौहर पर अप्लाई कर सकती थी।
वो सोच रही थी। आज उसने सोचा था कि वह घर
जाकर कुछ ना कुछ तो जरूर नया करेगी। जिससे
असद उसकी तरफ अट्रैक्ट होगा। मगर वह क्या
जानती थी कि असद उसकी कम उम्र की वजह से
और लड़कियों की जानिब जाने लगा है। आज वह
घर गई तो वह अपने साथ एक लड़की को लेकर
आया था जिसे देखकर वह फटी आंखों से उसे
देखने लगी। वह नहीं जानती थी कि असद उस
लड़की को घर क्यों लाया जब वह खुद ही उसके
पास जाती पूछने लगी थी। यह कौन है? उसने
डरते-डरते सवाल किया था। जब वह खुश दिली
से मुस्कुराते हुए बोला, "यह मेरी बिजनेस
पार्टनर है। इसने मेरी बहुत मदद की है।
इसका शौहर बिजनेस के सिलसिले में बाहर है।
इसलिए यह तीन-चार दिन के लिए यहीं रहेगी।
क्योंकि उनके घर में कल रात ही डाका पड़ा
है। इसलिए उसके पास रहने की जगह नहीं थी।
और मैं इसे अपने घर ले आया। इसके लिए कमरा
तैयार करवा दो अच्छा सा। यह तीन-चार दिन
के लिए हमारी मेहमान बनेगी। उसे नसीहत
करते हुए बोला था जिस पर वह ना चाहते हुए
भी आंसू गले में उतारते उसके लिए कमरा
तैयार करवाने चली गई। काफी देर बाद जब वो
नीचे आई तो उसने देखा कि वो लड़की अभी तक
कहकहे लगा लगा के असद से बातें कर रही थी
और निहायत करीब बैठी थी। उसके इन लोगों का
तो सोने का भी कोई इरादा नहीं लगता था।
असद कमरा तैयार है और मैंने खाना भी लगवा
दिया। अम्मी अब्बू बैठे हुए हैं। आप भी आ
जाए खाने के लिए। वह ना चाहते हुए भी
मुस्कुराते हुए बोली। वह अपनी कड़वाहट
जाहिर करके असद का दिल खुद से इकट्ठा नहीं
करना चाहती थी। तभी उसको देखते हुए बोली
जब वो अपनी दोस्त मेहर को इशारा करते हुए
बोला कि आ जाए खाना खाएं साथ आकर। उसने
डाइनिंग टेबल पर जाकर उसके अम्मी अब्बू से
सलाम किया और फौरन से असद के साथ वाली
कुर्सी पर बैठ गई। वह जो खाना सर्व करवा
रही थी वहीं शश्त खड़ी रह गई कि आखिर उस
लड़की की हिम्मत कैसे हुई उसके साथ बैठने
की। वो उसके सर पर खड़ी होते हुए बोली थी
यह मेरी जगह है। आप उठ के यहां बैठ जाए।
वो साफ सीधे लहजे में बोली। उसका बिल्कुल
इरादा ना था। अपनी जगह किसी और को देने का
जब असद ने अचंभे से उसकी तरफ देखा। क्या
हो गया रीमा? एक जगह ही तो है। कुछ नहीं
होता अगर तुम साथ बैठ जाओगे। वो उसकी तरफ
देखते हुए उसे गिरकते लहजे में बोला। जबकि
उसकी अम्मी भी तंग नजरों से उस नई आई
लड़की को देखकर बोली थी। जिसके लिए उनका
बेटा उनकी बहू को डांट रहा था। असद वो ठीक
ही कह रही है। अपनी जगह किसी और को नहीं
देनी चाहिए। यह तुम्हें भी पता होना चाहिए
और तुम्हारी मेहमान को भी। उसकी अम्मी को
अपनी तरफदारी करते हुए देख उसने दिल में
ही शुक्र किया था। जबकि खुलेआम इतनी
बेइज्जती पर ना चाहते हुए भी मेहर को उठकर
साथ वाली कुर्सी पर बैठना पड़ा था। जबकि
वह उनके दरमियान में बैठ चुकी थी। उसका
दिल खुशी से झूम उठा था। कि अब वो उसकी
जगह नहीं ले पाएगी। मगर यह उसकी खाम खयाली
थी। मेहर जो कि काफी देर से असद के साथ
काम कर रही थी। उसका दिल आ गया था असद पर।
इसलिए अपने शौहर के जाते ही वह डकैती का
बहाना करते हुए असद के सामने अपने दुखड़े
रोने लगी। जिस पर ना चाहते हुए भी असद को
उसे अपने घर लाना पड़ा। वो चाहती थी कि इन
दो-तीन दिनों में वो असद को अपना ऐसा
गविदा कर ले कि वह उसके बगैर रह ही ना पाए
और उसके करीब आ जाए। वह उसे ऐसा जिनसी
ताल्लुक बना ले जिससे वह इससे दूर ना जा
पाए और तब तक वह अपने शौहर को छोड़ देगी।
असद की हो जाएगी हमेशा हमेशा के लिए। मगर
जैसे ही वह उसके घर आई तो उसने अपने से कम
उम्र असद की बीवी को देखा तो इसे अपने
अरमानों पर ओस पड़ती हुई महसूस हुई। मगर
उसे जल्दी ही अंदाजा हो गया था कि असद
उसके इतने भी करीब ना था। इसलिए उसने सोचा
था कि उन दोनों में ऐसा कुछ करेगी जिससे
असद उसका दीवाना हो जाएगा और अपनी बीवी को
छोड़ देगा और हमेशा के लिए वह दोनों एक हो
जाएंगे। इसीलिए उसने पहले आकर रीमा की
कुर्सी पर बैठी ताकि उसकी जगह ले सके। मगर
उसकी सास शायद उसको ज्यादा ही चाहती थी।
इसलिए उसको वहां से उठवा दिया। कोई बात
नहीं। एक ही मामले में वह चौंक गई थी। कोई
बात नहीं। अगले मामले में मैं जरूर जीत
जाऊंगी। वह सोच कर रह गई थी। खाना खाने की
देर थी कि वह लोग फिर से खाना खाकर स्टडी
रूम में चले गए थे। अपने बिजनेस के
मुतालिक बातें करने के लिए। जबकि वो अपने
कमरे में जले पीर की बिल्ली की तरह घूम
रही थी। आखिर क्यों असद उसके साथ ज्यादा
वक्त बिता रहा है। यह चीज उसे सोने नहीं
दे रही थी। रात के 11:00 बज चुके थे। मगर
अभी भी वह नीचे से ऊपर नहीं आया। बस बहुत
हो गया। वह चप्पल पांव में अजती हुई नीचे
गई और दबे कदमों जाकर देखा था। जहां वो
बातें तो काम की ही कर रहे थे। मगर वो
निहायत बेहूदा अंदाज में असद के ऊपर झुकी
हुई थी और इससे कोई फाइल चेक करवा रही थी।
जिस पर रीमा मुट्ठियां बेच कर रह गई थी।
उसकी हिम्मत कैसे हुई थी? उसके शौहर के
इतने करीब आने की वो एकदम अंदर आ गई थी।
असद आप अभी तक जाग रहे हैं। चले ना कमरे
में। मुझे नींद नहीं आ रही। उसके पास जाते
बोली जब उसकी तरफ देखते हुए बोला मैं एक
काम कर रहा हूं। रिमा तुम अपने कमरे में
जाओ और सो जाओ जाके। जब काम खत्म हो जाएगा
मैं खुद आ जाऊंगा। तुम्हें आने की जरूरत
नहीं पड़ेगी। वो करारे लहजे में बोला था।
उसको देखकर साफ अंदाजा हो रहा था कि यकीनन
उसका दिल उसकी बचकाना बातें सुनने का नहीं
बल्कि मेहर जैसी बोल्ड लड़की की बातें
सुनने को तरस रहा था। उसकी बातें सुनकर वो
आंसू पीती रह गई मगर वहीं खड़ी रही। जब
असद ने उसे दोबारा जाने का इशारा किया था।
अब जाओ अभी हम काम करें। तुम हमें
डिस्टर्ब कर रही हो। वह उसको जाने का कहते
बोला था जब मेहर उसे तंजिया देखकर बोली
लगता है तुम्हारी गांव की बीवी को शहरी
बात समझ नहीं आती यहां से जाने का क्या
लोगी मैडम वो आइब्रो उचका कर कहते हुए
तंजिया लहजे में बोली उसकी मुस्कुराहट में
साफ जीत का नशा था कि देख लो तुम बीवी
होते हुए भी उसको तस्खीर नहीं कर पाई और
मैं कल की आई औरत उसे जल्द ही अपनी जानिब
माइल कर लूंगी यह देखकर कर वो टूटे दिल से
अपने कमरे में आई थी। मरेमरे कदमों से
जैसे वह कमरे में दाखिल हुई बेड पर गिर के
बुरी तरह रोने लगी थी। उसे अपनी खूबसूरती
और अपने आप से शदीद नफरत सी महसूस होने
लगी
कि आखिर वो क्यों उसे अपनी तरफ अट्रैक्ट
नहीं कर पा रही थी। क्या फायदा उसकी इस
खूबसूरती का? वो बिलक बिलक कर रोती रही
थी। मगर वो नहीं आया था। काफी देर बाद जब
वह कमरे में दाखिल हुआ तो उसे रोते हुए
देखकर परेशानी से उसकी तरफ बढ़ा था। क्या
हुआ रीमा? तुम रो क्यों रही हो? उसके पास
बैठते वो इसे पिचकारते हुए बोला था। उसे
अच्छी तरह अंदाजा था कि वो रात देर से आया
था। इसलिए रो रही है। तभी मीठे लहजे में
बोला जब वो उसका हाथ झटक गई थी। जाएं आप
अपनी उस होती सोती के पास। देर से आप उसके
पास बैठे थे। आखिर ऐसा क्यों करते हैं आप?
वह सिसक कर बोल रही थी। जब उसकी आंखों से
आंसू साफ कर गया। ऐसी कोई बात नहीं है
मेरी जान। मेरी बीवी तो तुम हो। मतलब
तुम्हें छोड़कर कहीं जा सकता हूं। मैं
उससे तो काम की बातें करनी थी ना। और वो
जरूरी भी थी। उसकी तरफ देखते हुए उसके
बालों में हाथ चलाते बोला। जब उसके सीने
से लग गई थी। अब मैं आपको कहीं नहीं जाने
दूंगी। चुप करके यहां मेरे साथ सो जाइए।
वह इसको धमकाते हुए बोली जिस पर वह हंसते
हुए उसके साथ लेट गया। अभी ही उन्हें लेटे
हुए थोड़ी देर ही हुई थी कि उनके दरवाजे
पर दस्तक हुई। जैसे ही असद ने उठकर दरवाजा
खोला तो मेहर को डरे हुए देखकर वो परेशान
होता उठा। क्या बात है मेहर? तुम रात के
इस वक्त उसकी तरफ देखते हुए तशवीश भरे
लहजे में बोला था। जब वो कपकपाते हुए बोली
वो मुझे डर लग रहा है। असल मैं अकेले नहीं
सो सकती कमरे में। तुम तो जानते हो हमारे
घर अभी कल ही डकैती हुई है। उन लोगों ने
मुझे बांध रखा था और कल का खौफ अभी तक
मेरे ज़हन से नहीं निकला। प्लीज मैं अकेली
नहीं सो सकती। तुम चलो ना मेरे साथ। थोड़ी
देर बातें करना और फिर जब मैं सो जाऊं तो
वापस आ जाना। और मुझे यकीन है तुम्हारी
बीवी को बुरा नहीं लगेगा। वह मासूमियत से
कहते हुए उसे अपने जाल में फंसाते हुए बोल
रही थी। जिस पर वह मान गया था और उसने पलट
कर रीमा की तरफ देखा जो आंखों में
मोटे-मोटे आंसू लिए उसे देख रही थी। कोई
बात नहीं रीमां तुम लेटो। तुम तो नहीं
डरती ना। मैं अभी थोड़ी देर तक इसको सुला
कर आता हूं। यह कहकर कमरे का दरवाजा बंद
करता। वो जा चुका था। जबकि वह रीमा पर एक
नजर भी उछाल कर वहां से उसका हाथ हमें जा
चुकी। पीछे वह फिर भिलक-बिलक कर रोने लगी
थी। आखिर क्यों थी वो इतनी बेबस? रात के
2:00 बज रहे थे। अभी तक वो कमरे में नहीं
लौटा था। वो हिम्मत करती हुई उठी ना चाहते
हुए भी उसके कमरे की तरफ उसके कदम बढ़ने
लगे थे। जैसे ही उसने धीरे से दरवाजा खोला
तो मेहर का हाथ उसकी शर्ट के बटन खो रहा
था। वह उसके अरिया सीने पर हाथ बुरी तरह
फेर रही थी। जबकि उसके लब असद के गालों को
छू रहे थे। यह मंजर देखकर उसके रहे सहे
औसान भी खता हो चुके थे। आखिर वो कैसे
उसके शौहर पर कब्जा जमा सकती थी? यह क्या
कर रही हो तुम? वो गुस्से से धड़ी थी। जब
उसकी धार सुनकर ना असद उठ गया था बल्कि
उसको हैरानी भी नजरों से यहां देखने लगा।
तुम यहां क्या कर रही हो? वो आंखें मलते
बोला यह तो मुझे आपसे पूछना चाहिए कि आप
मुझे कह कर आए थे कि आप थोड़ी देर तक आ
रहे हैं और 2 घंटे से आप यहां आए और आप इस
हालत में इस लड़की के साथ लेटे आपको कोई
शर्म नहीं आती। वह एकदम लर से लहजे में
बोली जिस पर वह नासमझी से अपनी तरफ देखने
लगा था। जहां उसकी शर्ट के सारे बटन खुले
और उसका सीना नंगा नजर आ रहा था। जबकि
उसके झटके से उठते हुए मेहर की तरफ देखा
जो नासमझी की कैफियत में सब समझने की
कोशिश कर रही थी। मैं सोई हुई थी असद।
मुझे अंदाजा नहीं था कि मेरे पास तुम लेटे
हो। शायद मैं समझी कि मेरे शौहर हैं इसलिए
मुझे माफ करना असद। वह आंखों में आंसू लिए
बोली जिस पर असद नफी में सर हिलाकर रह गया
था। कोई बात नहीं ऐसा हो जाता है। वह कहते
हुए उसके कमरे से तेजी से निकल गया था।
पीछे वो हाथों की मुट्ठियां बेंचते हुए
उसके करीब आई थी और एकदम उसके बालों को
दबोचते हुए झटका दिया। खबरदार जो मेरे
शौहर पर बुरी नजर टिकाई। वह सिर्फ मेरे
हैं। अगर तुमने उनको जरा सा भी अपने जाल
में फंसाने की कोशिश की तो यह तुम्हारी
सुनहरी जुल्फों को काट कर रख दूंगी और
तुम्हारा मुंह नोच लूंगी। समझी तुम? झटका
देकर वो उसे वहां से चली गई थी। पीछे मेहर
गुस्से से अपने बेडशीट नोच कर रह गई। यह
तुमने अच्छा नहीं किया। अपने पैर पर खुद
कुल्हाड़ी मारी है। अब देखना मैं तुम्हारे
शौहर को कैसे तुम्हारी आंखों के सामने
अपना बनाती हूं और तुम कुछ नहीं कर पाओगी।
वो चेहरे पर इतराना मुस्कुराहट लिए बोली
जबकि असद जो कमरे में आ चुका था। परेशानी
से उसका इंतजार कर रहा था जो सफेद चेहरे
के साथ कमरे में लौटी थी। मेरी बात सुनो
रीमा। वो उसका हाथ थामने की कोशिश करते
बोला। खबरदार मुझे हाथ में मत लगाइएगा।
मुझे आपकी कोई बात नहीं सुननी। वो उसका
हाथ बुरी तरह झटकते सोने के लिए लेट चुकी
थी। असद ने महसूस किया था। सोते हुए भी
उसका वजूद पूरी तरह हिल रहा था। यकीनन वो
रो रही थी। मगर वो उससे बात करने की कोशिश
ही नहीं कर रही थी। असद ने उसे बहुत बार
पुकारा मगर आगे से खामोशी का पहरा था।
सुबह भी जब वो लोग उठे तो उसने देखा कि
साथ में रीमा मौजूद नहीं थी। यकीनन वो
नीचे जा चुकी होगी नाश्ता बनाने के लिए।
वह जब नक्सक से तैयार होता हुआ नीचे उतरा
तो नाश्ता मेज पर लगा चुकी थी। जबकि वह सब
बैठे नाश्ता शुरू ही करने वाले थे। अपनी
जगह पर बैठते हुए भी उसने असद से कोई बात
नहीं की। असद परेशानी से उसका चेहरा देख
रहा था जो उसके साथ बात करने के लिए तैयार
ना लगती थी। असद जल्दी करो पता है ना
हमारी इंपॉर्टेंट मीटिंग है। मेहर उसकी
तरफ देखते हुए बोली जब वो अपने लब काट कर
रह गई थी। असद मेहर के कहने पर
जल्दी-जल्दी खाना खत्म करने लगा और उसके
साथ ऑफिस के लिए निकल गया। पीछे वह अपने
लब काट के रह गई। आंसू एक बार फिर पलकों
की बाढ़ तोड़कर बाहर आने लगे थे। वो आखिर
किससे मदद तलब करती? वो जानती थी कि मेहर
कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देगी। जरूर
उसके शौहर पर डोरे डालेगी और इसे अपनी तरफ
रागिब करना चाहेगी। अगर उसने इसको तस्खीर
कर लिया तो वह कहां जाएगी? वो यह सोचसच कर
अंदर ही अंदर घुल रही थी। जब उसकी सास ने
उसकी परेशान हाल सूरत देखी तो उसको अपने
कमरे में बुलाया था। उस वक्त उसके ससुर भी
अपने कमरे में मौजूद ना थे। वो दोनों तनहा
थे। जब उसको पिचकारती हुई बोली थी बेटा
मुझे बताओ क्या बात है। उनके कहने की देर
थी कि उसने रोते हुए अलीिफ त ये सारी
कहानी सुना दी। जिस पर वो भी परेशान हुई।
उनका बेटा सीधा साधा था। लेकिन वह किसी
औरत के मामले में पड़ जाता तो वह इसे वापस
लाना यकीनन मुश्किल होता। यह सोच उनके ज़हन
में लहर आई तो वह सर झटके रह गई। बेटा
तुम्हें साबत कदमी से काम लेना होगा। असद
के दिल में अपनी जगह बनानी होगी। मुझे तो
समझ नहीं आता कि उस लड़के के दिमाग में चल
क्या रहा है। क्यों अब तक तुम्हारी तरफ
रागिब नहीं हुआ। इतनी फरमाबरदार बच्ची हो
तुम। वो इसके मुंह को प्यार से चूमते हुए
बोली। जिस पर वह उसकी तरफ देखते हुए बोली
थी मैं क्या करूं अम्मा आप ही बताएं मुझे
कि मैं क्या करूं जिससे वह मेरे साथ सही
से जिंदगी गुजारे मेरी तरफ देखें मोहब्बत
भरी निगाहों से मगर वो है कि मुझे देखते
ही नहीं है उनको तो सिर्फ मेहर जैसी
लड़कियां अच्छी लगती है जो रात को उनके
करीब आई हुई थी बुरी तरह और उन्होंने उसको
कुछ कहा भी नहीं माफ कर दिया वो उनकी तरफ
शिकवा को निगाहों से देखते हुए बोली थी
जिस पर परेशान तो वो भी हुई थी तुम फिकर
मत करो करो बेटी कुछ ना कुछ करते हैं हम
उस लड़की का घर आएगी तो देख लेंगे मगर
बाहर असद उसके साथ अकेला होता है वहां का
हम कुछ कह नहीं सकते वो परेशानी से बोल
रही थी जब वो उठकर अपने कमरे में आ गई अब
उसने सोच लिया था कि वो भी नक्सक से तैयार
रहा करेगी जो जो उसको तरीके आते थे वो सब
आजमाएगी पहले तो वह शर्म खाकर कुछ करने से
बाज आ जाती मगर अब असद ने उसे खुद उकसाया
था कि अब वो वो बुरी बन जाए तो वो बुरी
बनकर दिखाएगी। शाम हो चुकी थी। आज असद
वापस नहीं आया था। वो परेशान थी। रात को
अपने सासससुर को खाना खिलाकर सुला चुकी
थी। रात के 12:00 बजे मेहर और असद घर में
दाखिल हुए। असद कुछ मदहोश सा लग रहा था
जिसे मेहर ने सहारा दिया हुआ था। जैसे वो
लोग अंदर आए। वो तीर की तेजी से उनके पास
पहुंचे थे। यह क्या हुआ है आपको? असद मेरी
तरफ देखें। मगर वह उस वक्त होश में नहीं
था जब उसने कहर भरी निगाहों से मेहर को
देखा था। क्या किया है तुमने उनके साथ?
क्यों नहीं उनको होश आ रहे? इस हालत में
तो नहीं आते पहले यह क्या किया है तुमने
इनके साथ? वो उसको कच्चा चबा जाने वाली
नजरों से देखते हुए बोली जब वो अयार नजरों
से उसको देखते कहने लगी। वो क्या है ना?
हम लोग एक पार्टी में चले गए थे। वहां असद
ने ड्रिंक कर ली। तुम तो जानती हो ना
ड्रिंक करके किसी को होश कहां रहता है और
असद ने मुझसे इजहार मोहब्बत किया देखना
चाहोगी वो उसकी आंखों में आंखें डाले हुए
तंजिया हंसते लहजे में बोल रही थी जिस पर
वो नफी में सर हिला गई तुम झूठ बोल रही हो
मेरे असद ऐसा कभी नहीं कर सकते वो गर्दन
अकड़ाते हुए बोली जब मेहर ने उसको तासुफ
से देखा उसने और अपने फोन पर उंगलियां
चलाते उसने एक वीडियो सामने की जहां असद
उसके ऊपर झुका हुआ। कभी वह उसके गर्दन पर
लब रखता तो कभी उसके लबों को चूमता। यह
देखकर वह टूट कर रह गई थी। असद के ऊपर से
हाथ छूटते लम्हों में नीचे गिरे थे। जब वो
कहकहा लगाकर हंसी। अब बोलो और भी कुछ जाना
बाकी है क्या? वो उसकी तरफ देखते हुए उसे
तंस के तश से घायल करते हुए बोली थी। जिस
पर वह अपना लब काट कर रह गई। और बा
मुश्किल ही असद का बोझ अपने पर मुंतकिल
किया। दफा हो जाओ मेरी नजरों के सामने से
तुम्हें तुम्हें देख लूंगी और असद को
जबरदस्ती उसके हाथ से छुड़वाते हुए अपने
कमरे में ले गई पीछे वो जलती कुड़ती रह गई
क्या थी यह लड़की उसे तो यह सब देखकर यहां
से चले जाना चाहिए था असद को मेरे हवाले
कर देना चाहिए था मगर बहुत पक्की लड़की है
यह बाज नहीं आएगी ऐसी इससे भी ज्यादा कुछ
करना होगा जिससे असद मुकम्मल तौर पर मेरा
हो जाएगा और यह अपनी आंखों से यह सब देखते
हुए खुद असद को छोड़कर चली जाएगी। वो कोई
ऐसा प्लान सोचते हुए बोली जिससे सांप भी
मर जाए और लाठी भी ना टूटती। असद बातों ही
बातों में उसे बता चुका था कि रीमा कम उमर
है जिसकी वजह से वह इस पर अब तक हक नहीं
जमा पाया और उसकी भी काफी नफसी ख्वाहिशात
है। जिन्हें वह पूरा करना चाहता है। जिस
पर वो उसकी दुखी हमदर्द बनते हुए बोली थी।
हम कोई ना कोई राह निकालेंगे। उसके करीब
आना चाहा और उसके लबों पर झुकी। जब असद ने
उसे रोका भी ना था। शायद वह भी यही चाहता
था कि उसे किसी जिस्म की तलाश थी। मगर ज़हन
बार-बार उसको यह ताने दे रहा था कि यह एक
गैर महरम है। जिस पर वह उसे झटके से हटा
गया और मीटिंग से वापसी पर जब वह लोग
बिजनेस डील के सिलसिले में रेस्टोरेंट गए
तो वहां उसने उसको जानबूझकर ड्रिंक करवा
दी। जिस पर वह अपना होश खो बैठा था। और
तभी उसकी बेहोशी का फायदा उठाते उसने
गाड़ी में उसके साथ गंदी गंदी तस्वीर बनवा
ली ताकि वह घर जाकर उसकी बीवी को दिखा सके
और उसकी बीवी खुद उसको छोड़कर चली जाए।
मगर यहां तो सब मामला ही पलट चुका था।
उसकी बीवी यह सब देखकर भी असद को छोड़कर
ना गई। बल्कि उसको लेकर अपने कमरे में साथ
चली गई। पीछे वह अपना मुंह नोचने को आ गई
थी। अब तुम देखती जाओ मैं तुम्हारे साथ
करती क्या हूं। तुम्हारी आंखों के सामने
असद को अपना बनाऊंगी। बस कल की देर है।
अगले दिन उसकी नंदों ने उसको दावत की थी।
वह सारे लोग दावत पर इनवाइटेड थे। जब असद
की कॉल आई कि वह वहां वक्त पर नहीं पहुंच
पाएगा। आज उन लोगों का वहीं रुकने का
इरादा था जबकि असद ने कहा था वो रात को
वहां आ जाएगा। मगर रात हो गई। वो अभी तक
नहीं आया। और उसको दिल ही दिल में यह बात
खटक रही थी कि असद क्यों वहां नहीं आया
था? क्या बात है? मुझे तुम परेशान लग रही
हो लड़की आ जाएगा। वो इतनी परेशान भी ना
हो तुम्हारा ही शौहर है। उसकी नंद उसे
छेड़ते हुए बोली जिस पर वो नफी में सर
हिला गई। आप नहीं जानती उस लड़की को वो
मेरे शौहर को हासिल करना चाहती है और कुछ
ना कुछ करके उन्हें पा लेगी। इसलिए मैं
डरती हूं। रात देर तक जब वह बाहर रहते हैं
तो कुछ अच्छा नहीं होता। वो परेशान कुन
लहजे में बोली जिस पर वो इसे देखकर रह गई
थी। मोहब्बत करने लगी हो असद से। वो उससे
पूछते हुए बोली जिस पर वह आंसू बहाते असहत
भरी मुस्कुराहट से बोली शौहर हैं वो मेरे
उसके पास मेरे लिए कोई चारा भी नहीं था।
वो कंधे उचका गई। यह सब ठीक नहीं है असद
मदहोश सा बोला। और वो असद आज तन्हा था
जिसका फायदा उठाते वो असद के जूस में
जोशीली नशे की दवा मिला गई। जिस पर वो
बेकाबू होते उसे अपने करीब खच चुका था। आओ
ना मेरे पास असद। वो इसकी गोद में बैठकर
ब्लैक नाइटी से उसे जलवे दिखाते बोली, तुम
तुम रीमा हो ना मेरी रीमा। मेहर उस वक्त
खलवत के मौके पर रीमा के जिक्र पर कड़कर
रह गई थी। मगर क्या करती? उसे उस वक्त
अपना मकसद अंजाम देना था। इसलिए फौरन
असबात में सर हिलाते बोली, हां असद मैं
तुम्हारी रीमा ही हूं। उसके इतने कहने की
देर थी कि असद ने मेहर की गर्दन में हाथ
डाले करीब किया और इसे रीमा समझे उसके
नरमो मुलायम हठ चूसने लगा जबकि दूसरा हाथ
वो इसकी नाइटी को सिरकाती उसकी रानयों को
सहला दबा रहा था प्लीज असद यह क्या करें
वो रीमा बनते बोली मगर दिल से चाह रही थी
कि रुको मत असद इससे भी आगे जाओ और मुझे
तस्खीर कर लो मैं ने ड्रामा करने की शुरू
में थोड़ी मजाहमत करने की कोशिश की मगर
अपनी तलब की वजह से उसने असद के गले में
अपनी बाहें डाल दी। अब उसके अंदरूनी
छेड़छाड़ से भरपूर लुत्फंदोज होते हुए
उसकी बाहों में सिसक रही थी। जिस्म
हौले-हौले कपकपा रहा था। उसका दिल कह रहा
था कि वो एक औरत का घर तोड़ रही है। मगर
जिस्म का अंग अंग कह रहा था कि मैं थोड़ा
कर रही हूं। असद कर रहा है। वो तो खुद उसे
रीमा समझ रहा है और उसके करीब आ रहा है।
तनहाई हो दो जवान जिस्म और सबसे बढ़कर नशा
भी हो तो बहकना लाजिम हो जाता है। असद भी
बहक रहा था और क्यों ना बहकता मेहर जैसी
भला का साथ जो था उसने होठों को सक करते
जब वही अमल उसके जिस्म के साथ किया तो
मेहर का एतराज सिसकने में बदल गया। असद अब
मेहर के होठों को चूमते गर्दन पर पहुंचा
और यहां से नीचे उसका सीना छुपा रखा। असद
ने जैसे ही नाइटी हटाई कमरे का दरवाजा
झटके से खुला था और अंदर ना सिर्फ रीमा
बल्कि असद के मां-बाप और बहनें भी आई थी।
रीमा जो मेहर के फोन से आने वाली तस्वीर
देखकर दंग रह गई। फौरन रात के पहर निकलने
लगी। तो उसके जाने की वजह सब ने दरियाफ्त
की थी। जिस पर वह सबको एक-एक बात बता गई
थी। उस पर सभी उसके साथ वापस आए। मेहर को
अंदाजा ना था कि वह सबको हकीकत बताकर अपने
साथ ही ले आएगी। अंदर का मंजर देख उन पर
जैसे कयामत टूट पड़ी और जैसे ही मेहर की
निगाह दरवाजे पर गई तो वह किसी बिजली के
झटके की तरह से असद से दूर हुई थी और
फटाफट खुद को ढकने लगी। यह मैंने कुछ नहीं
किया। मैंने कुछ नहीं किया। वो खौफ से
कपकपाते हुए बोली असद ही मेरे करीब आया
था। मुझे रीमा समझकर मेरे साथ जबरदस्ती
करने लगा। मैंने उसको कहा भी मैं रीमा
नहीं हूं। वो जल्दी से अपनी आंखों में
मगरमच्छ के आंसू लाते बोली। जब उसकी नंद
ने आगे बढ़ते हुए कसकर उसका मुंह थप्पड़ों
से लाल किया। एक के बाद एक थप्पड़ बरसाती
जा रही थी। वो उसके मुंह पर कमीनी क्या हम
अपने भाई को नहीं जानते? तू ही फसाद की
जड़ है। क्यों रहने आई है यहां? वह उसके
बाल दबोचते हुए बोली जिस पर उसका सारा सर
हिल कर रह गया था। मेरा यकीन करो मैंने
कुछ नहीं किया। यही आया था यहां पर मेरे
करीब। वो असद को खुद से दूर धकेलते हुए
बोली जो एक तरफ लड़खड़ाकर नशा उसके सर पर
चढ़ चुका था। जबकि उसके मां-बाप ताबाताबा
करते कमरे से बाहर निकल चुके। जबकि रीमा
पत्थर की मूरत बने असद को देख रही थी।
उसकी बहन ने पानी का भरकर जग लाते हुए असद
के मुंह पर उंडेला जिस पर वह झटके से होश
में आया और आंखों को मसल कर उठा। क्या हो
रहा है यहां? आप सब लोग क्यों इकट्ठे हैं?
वो अपना दर्द से फटता सर थामते बोला। जब
मेहर को अपने करीब अरियां साथ देखकर वो
शश्त रह गया। तुम यहां क्या कर रहे हो? वो
भी इस हालत में मेरे साथ। वो इसको देखते
हुए तनकीदी निगाह से बोला था। मगर जब अपने
ऊपर नजर पड़ी और सबको देखा तो अपनी जगह से
खड़ा हुआ और अपनी बीवी को देखा जो बेयकीन
नजरों से उसे देख रही थी। उसकी आंखों में
क्या कुछ ना था। मान टूट जाने की किरचियां
मोहब्बत का रोग। वो तड़प कर उसकी तरफ
बढ़ा। उसको अपनी सफाई देने के लिए। मगर वो
नफी में सर हिलाते हुए मुसलसल कदम पीछे
लेने लगी। नफरत है मुझे आपसे। कैसे कर
सकते हैं आप मेरे साथ ऐसा? मुझे धोखा देते
रहे और मुझे यह कहते रहे कि मैं छोटी हूं
और दूसरी लड़कियों से मजे लेते रहे। तो है
आपकी मोहब्बत पर, आपकी चॉइस पर। वो यह
कहते हुए उसके मुंह पर एक जोरदार थप्पड़
असद के मुंह पर मारकर अपने कमरे में चली
गई। जबकि उसकी नंदे मेहर को बालों से
दबोचकर उस घर से बाहर निकाल चुकी थी। वो
धड़ रही थी, चिल्ला रही थी कि उसको अपने
पूरे कपड़े तो लेने दो। मगर उन्होंने उसकी
एक ना सुनी और उसे अपने घर से बाहर निकाल
दिया। जबकि अब वह नीचे लांच में अपने
मां-बाप के सामने सर नीचे किए बैठा था।
नजरें शर्म से झुकी थी। उठने के काबिल ना
रही थी। जबकि उसके बाप ने उठकर आगे आते
उसके मुंह पर एक थप्पड़ मारा और यही उसकी
मां ने भी किया था। हमें शर्म आ रही है
तुम्हें अपना बेटा कहते हुए। हमने तुम्हें
शहर इसलिए तो नहीं आने दिया था कि तुम
अपनी तरबियत ही बुला दो। क्या हमने
तुम्हारी यह तरबियत की है कि तुम एक बेटी
की जिंदगी उजाड़ दो और दूसरी के साथ जिना
करो। तुम पर हमें अफसोस है कि तुम हमारी
औलाद हो। यह कहते हुए अपने कमरे में बंद
हो चुके थे। जबकि वह पीछे अपने आप से पूछ
कर रह गया था कि आखिर उसने ऐसा क्यों
किया? अपने करीब मेहर को आने ही क्यों
दिया जिससे वह उसको नशावर दवाई दे रही थी।
ना वह उसको अपने कमरे में दाखिल होने
देता। ना वह उसके दिमाग से छेड़छाड़ करती
और ना वह रीमा समझकर उसके करीब जाता। सब
कुछ गलत हो गया था और जब वह अपने कमरे में
गया तो वह वहां मौजूद नहीं थी बल्कि गेस्ट
रूम में शिफ्ट हुई थी। उसने उससे बात करनी
चाही। दरवाजा खटखटाता रहा। मगर उसने
दरवाजा नहीं खोला था। प्लीज दरवाजा खोलो।
रीमा आई एम सॉरी। यह सब मैंने जानबूझकर
नहीं किया। वो सिसकते बोला। वह पूरी रात
उसके कमरे के बाहर बैठा रहा था। अंदर वह
रोती रही और बाहर वो। सुबह जब वह अपने
कमरे से बाहर निकली तो वह झटके से उठा।
मेरी बात सुनो रीमा। मेरी तरफ देखो तो
सही। मैंने खुद कुछ नहीं किया। उसने ही
मेरे जूस में नशावर दवाई मिलाई थी। वो
उसको अपना यकीन दिलाते हुए बोला। जब वो
उसके पास से गुजरती हुई चली गई थी। उसने
एक दफा भी रुकना मुनासिब ना समझा था। वह
जब उसको वक्त नहीं देता था तो उसके पास भी
अपने कीमती वक्त में से उसके लिए वक्त
नहीं था। अब उसने सोच लिया था अच्छी तरह
कि उसने असद को कैसे तड़पाना है। इसलिए वह
खामोशी से नीचे चली आई और सबके लिए नाश्ता
बनाने लगी। उसके साथ-साथ नंदे भी उसको
खामोशी से देख रही थी। जब वो नाश्ता लगाते
हुए उनके करीब बैठ गई। तुम ठीक हो? उसके
एक नंद ने पूछा था जिस पर हां में सर हिला
गई। थोड़ी देर बाद वह भी नीचे आ चुका था।
नाश्ते के लिए और चोर नजरों से सबको देख
रहा था जो अपने खाने में मगन थे। अचानक
रीमा की आवाज गूंजी थी। अभी मैं शॉपिंग पर
जाना चाहती हूं। क्या आप मुझे ले जाएंगे?
वो उनकी तरफ देखते हुए बोली जिस पर शायद
ही उसने पहली बार जिंदगी में किसी से
फरमाइश की थी। जब वो अचानक बोली हां क्यों
नहीं हम चलते हैं। आज और रात देर से घर
आएंगे। वो अपने भाई को जताते हुए बोल रही
थी और उसको ले जा चुकी थी। सुबह से शाम
होने को आई मगर वह वापस ना आई। असद अब
बेचैन हो चुका था। आज तो वह ऑफिस भी नहीं
गया था। इतना सब कुछ हो जाने के बाद आखिर
वो कैसे ऑफिस चला जाता। ज़हनी सुकून जो
मुयसर ना था। दिल बार-बार हमक कर रीमा के
बारे में सोच रहा था। जो ना जाने उसके
बारे में क्या सोच रही होगी। जैसे ही उसने
निगाह दरवाजे पर डाली तो वो दंग रह गया।
क्योंकि वहां अपनी नंदों के साथ जिस लड़की
को उसने देखा था यकीनन वह रीमा थी। मगर वह
इतनी बदली हुई कैसे लग रही थी? रीमा ने
अपने लंबे घुटनों तक आते बाल कटवाकर कंधे
तक करवा लिए। स्टाइल से कटे बाल उसके
चेहरे पर बहुत खूबसूरत लग रहे थे। जबकि
ऑफिशियल करवाने के बाद उसका चेहरा और
निखरा था। और शॉर्ट शर्ट और पटियाला शलवार
में वह नजर लग जाने की हद तक प्यारी लग
रही थी। उसको इतनी ग्रूमिंग के साथ देख
असद को अपना दिल अपने सीने से बाहर निकलता
महसूस हो रहा था। उसने करीब जाना चाहा और
वह इसको इग्नोर करके वहां से चली गई। जबकि
उसके नंदे हंसती दबाती वो अपने अम्मी
अब्बू से मिलते हुए उन्हें अल्लाह हाफिज
कहकर वहां से जा चुकी थी। जबकि उस रात को
जब वह कमरे में गया तो वो अब भी वहां
मौजूद ना थी। उसने गेस्ट रूम में जाना
चाहा तो वहां का दरवाजा लॉक था। जिस पर वह
दिल महसूस करके रह गया। अब ऐसा रोज होने
लगा। वह बंद सवर कर उसके सामने फिरती थी।
उसका दिल करता उसे छुए मगर वो उसकी तरफ
देखे बगैर उसके पास से ही गुजर जाती और वो
मुट्ठियां बेच कर रह जाता। उसका शिद्दत से
दिल चाहता कि उसके करीब जाए। मगर वो उस पर
एक भी नजरें करम नहीं डालती। एक माह ऐसे
ही गुजर गया था। अब तो विभिन्न पानी की
मछली की तरह उसकी कुर्बत के लिए तड़प रहा
था। एक दिन जब वह नाश्ते के लिए जाने लगा
तो उसकी अम्मी अब्बू टेबल पर मौजूद ना थे।
यकीनन वो जल्द नाश्ता करके जा चुके थे।
कुछ ही देर के बाद वो एक सुनहरी आंचल
लहराते हुए किचन से निकली। उसके आगे झुकते
हुए खाना रखा। उसकी शर्ट का गला निहायत
गहरा था। जिसे देखते हुए उसकी आंखें बाहर
आने वाली हो गई थी। आखिर यह उसने कैसा गला
पहन रखा था। पहले तो उसका गला गर्दन तक
तंग होता मगर आज उसका गला देखकर असद को
अपना गला खुश होता हुआ महसूस हुआ। उसके
अरियां सीने पर नजर पड़ते ही उसने अपने
खुश लबों पर जुबान फेरते हुए उन्हें दर्द
किया। शदीद प्यास जाग चुकी थी। उसके अंदर
उसने उसको ताड़ना चाहा जब वो उसके आगे
नाश्ता रखकर जा चुकी थी। कमर मटकाते उसकी
एक-एक अदा को असद गौर से देख रहा था।
दोपहर को भी वह काम खत्म करके जल्द ही घर
लौट आया। जब उसे खाना दे रही थी तो उसको
खाना देते हुए कई बार उसे अपने दर्शन भी
करवा चुकी थी। जिस पर वह बेचैन हुआ। ऐसा
सिलसिला चल निकला था कि वो एक दिन नहीं कई
दिन चला और कई दिन से वह जब यह महसूस कर
रहा था मगर उसका हौसला नहीं बढ़ रहा था कि
वह उससे बात करे या उससे कहे क्योंकि अब
तो वह उसे घास भी नहीं डालती। यह चीज उसे
बहुत दुख देती थी। उसे लाख बार माफी मांग
चुका था। मगर वह सर झटक कर वहां से चली
जाती। जैसे उसकी बात की कोई अहमियत ही ना
हो उसके लिए। अब वो किसी प्यासे की मानत
घूमता रहता। आज फर्श पर पानी की फिसलन की
वजह से फिसल चुकी और ऐन उसकी गोद में
गिरी। छोड़े मुझे। वो कुसम आई। मगर वह
उसकी नरमाहट महसूस करने में इतना खो चुका
था कि अंदाजा ही ना हुआ कि कब उसके लबों
पर झुक चुका था। वह इसे पीछे धकेलने लगी।
मगर यह सब करना उसके बस की बात कहां थी?
वह इसे छूटना चाह रही थी। जबकि वह इसे खुद
में भीना चाह रहा था। झटके से उसने इसके
होठों पर काटा कि वो सिसक कर उसे छोड़
गया। खबरदार जो मुझे भी उस अपनी मेहर की
तरह समझा। वो उसे मेहर का ताना मार चुकी
थी। जब वो कलस का रह गया। अगले दिन संडे
था। वो नीचे आया तो रीमा कहीं नजर ना आई।
वो पूरा घर देख चुका था। मगर वो कहीं थी
ही नहीं। अब जब वह उसकी तरफ रागिब हुआ तो
फिर वह क्यों उसे तरसा रही थी? अपने
मां-बाप से पूछने की हिम्मत उसमें थी
नहीं। मुंह सुझाए बैठा था। कई घंटे गुजर
चुके जब दोपहर को उसने जब्त के बंधन
तोड़ते अपनी मां से पूछ ही लिया। रीमा
कहां है? आ गई उसकी याद। क्या यह भी याद
है तुम्हें कि वह भी तुम्हारी ही बीवी है।
वाह। मां के गहरे तंज पर वो लब बेच के रह
गया। बाहर गई है घूमने। आ जाएगी उसका
बेचारा सा मुंह देखकर। वो खुद ही बोली
किसके साथ वो आंखें छोटी कर बोला तुमसे
मतलब आएगी तो पूछ लेना वो हुंकारा भरती
वहां से चली गई वो जले पीर की बिल्ली बना
उसका इंतजार करने लगा रात के 9:00 बज चुके
थे और उसकी बस हो चुकी थी और अचानक एक
गाड़ी पोरिश के अंदर पहुंची तो वह दोनों
गाड़ी से बाहर निकले जहां असद जले पीर की
बिल्ली की माने रीमा का ही इंतजार कर रहा
था उसे गैर लड़की के साथ इतनी रात को आता
देख उसका गुस्सा सवा नेज़ पर पहुंचा था और
वह तीर की तेजी से उस तक पहुंचा। कहां थी
तुम सुबह से? ना मेरी कॉल्स उठा रही थी ना
ही मैसेजेस का रिप्लाई कर रही थी और फोन
भी बंद कर दिया। मैं वजह जान सकता हूं इस
सबकी। और कौन है यह बताना पसंद करोगी? वो
गुरकते लहजे के साथ बोला रीमा को। नहीं।
यक लफ्ज़ी जवाब में वो इसके मुंह पर तमाचा
मार गई। वो जलकर खाकस्तर हुआ था। उस लड़के
का एकदम कहकहा निकला। मगर असद की खूनखार
नजरें खुद पर महसूस करके वह सीज फायर के
अंदाज में हाथ खड़े करके रह गया। रीमा
क्या हो गया तुम्हें मना किया था ना
मैंने? सिर्फ लड़कियों को ही दोस्त बनाना
और किसी लड़के को तो बिल्कुल दोस्त नहीं
बनाओगी। खासकर उसे जो मुझे जहर से भी बुरा
लगता है। फिर तुम इस गैर लड़के के साथ
इतनी रात गए बाहर क्या कर रही थी? जिसे हम
जानते भी नहीं। असद उस लड़के को देखते
दांत पस कर खूनखार नजरों से बोला जिससे वह
लड़का उसके दांतों के बीच हो जिस पर उस
लड़के ने सर तस्लीम खम करते बड़े शर्फ की
तरह अपनी तारीफ कब बोलू किए लेकिन आप किस
रिश्ते से मुझे मना कर सकते हैं असद
क्योंकि ना तो आप मेरे बाप हैं और ना भाई
और बीवी तो मुझे आप बिल्कुल नहीं समझते
इसलिए मैं जब चाहूं जिसके साथ चाहूं बाहर
जा सकती हूं आपको बताने की जरूरत नहीं है
मुझे और उसका का नाम उमर है। वो उस लड़के
की तरफ इशारा करते बोली तो वो इसकी खुद
सरी पर ताव खाकर रह गया और इसका हाथ
दबोचा। यह क्या कर रही हो तुम? मतलब जानते
हो अपनी बात का। वो उसकी नजरों में नजरें
गाड़े बोला। वही जो मेरा दिल कह रहा है और
वैसे भी आपको तो अपने मेहर के साथ होना
चाहिए। उसने गलती से आपको यहां मेरे पास
आने की इजाजत कैसे दे दी? कहीं आप उससे
छुपकर तो नहीं मिलकर आते मेरे पास?
क्योंकि रात को उससे डर लगता है। वह भी
तेजी से बोली, क्या बकवास कर रही हो? भला
मैं उससे पूछकर क्यों जाऊंगा? हर जगह और
वो हमारे दरमियान कहां से आ गई? घर से
निकाल तो दिया था। भूल गई तुम। तब से मैं
उसे आज तक नहीं मिला और अपनी मर्जी से मैं
यहां और सुबह से तुम्हारा इंतजार कर रहा
हूं। और तुम इसके साथ बाहर घूम रही हो। वो
भी एक-एक लफ्ज चबाते हुए बोला, तो आप ही
तो रातों तक बाहर रहते थे। मेरा भी फोन
नहीं उठाते थे। क्या मेरे मैसेजेस का जवाब
दिया था? उस दिन जब मैंने रात 2:30 बजे तक
इंतजार की घड़ियां गुजारी। आप तो उसकी
आगोश में मजे ले रहे थे। वह भी उसकी आंखों
में देखकर पूछ बैठी। उस बात पर असद खामोश
हुआ क्योंकि उस बात का उसके पास कोई जवाब
नहीं था। मैं जानती थी। अब मुझे कोई सफाई
देने की जरूरत नहीं। जैसे आप किसी भी के
साथ वक्त गुजार सकते हैं। मैं भी गुजार
सकती हूं। जैसे आज उमैर मुझे मूवी के लिए
ले गया। फिर हमने कैंडल लाइट डिनर किया और
ढेर सारी शॉपिंग की और यकीन जानिए यह आपसे
कई ज्यादा अच्छे हैं। हर किसी को उनके
जैसा होना चाहिए। वो भी उसके दिल पर वार
करती बोली कि वो बिलबिला उठा था रीमा। वो
इसे झंझोड़ कर बोला तो वह झटके से उससे
दूर हुई। प्लीज आप अपनी उस होती सोती के
पास जाएं। वह आपका इंतजार कर रही होगी। और
वैसे भी मैं इतनी खूबसूरत शाम गुजार कर थक
चुकी हूं। और मुझे फ्रेश भी होना है सो
जाए। और हां उमैर को सी ऑफ कर दीजिएगा। वह
अपने दिल पर पैर रखकर कुचलते खुद को और
उसको दोनों को भट्टी में झोंकती अंदर जा
चुकी थी और फौरन कमरे में बंद हुई। यह सब
आज वो कैसे कर आई थी? क्या वो गांव की
रीमा ही थी? उसे खुद पर यकीन नहीं आ रहा
था। शॉपिंग बैग्स कबर्ड में रखती वो नहाने
घुसी क्योंकि अपने आप को शांत करने का उसे
कोई और हल नजर नहीं आया। अब मजा आया था
असद को तड़पाने का। अब देखिए असद मैं करती
क्या हूं। वह हंसते हुए बोली पीछे असद और
उमैर तन्हा रह गए। मेरे ख्याल में अब आपको
भी चले जाना चाहिए क्योंकि वो सादा लफ्जों
में निकल जाने का कर गई। शट अप असद सोच से
धाड़ा। सब कुछ उसी की वजह से हुआ था। मेरे
पर अपना गुस्सा निकालने की बजाय खुद की
गलतियों पर गौर जरूर करना कि आपने कब-कब
उस मासूम का दिल दुखाया। अगर उसके साथ
जिंदगी गुजारनी ही नहीं थी तो शादी क्यों
की उसे? उम्मीद क्यों दिलाई? इतने माह
उसने आपकी मोहब्बत का इंतजार किया और उसे
क्या सिला मिला? कुछ भी नहीं। तो आप भी
उससे बाज पर्स का कोई हक नहीं रखते। उमैर
उसे हकीकत का आईना दिखाता वहां से जा चुका
था। जबकि असद अब समझा था रीमा उसे किस बात
पर खफा है। लेकिन यह तो तय था कि उसे उमैर
के साथ रीमा की मौजूदगी और उसकी खुदसरी
पसंद नहीं आई थी। जब वह नहा रही थी अचानक
लाइट बंद हुई। वह जल्दी से शावर बंद करती
हार्ट अटोल कर टॉवल बांधती अंदाजे से बाहर
निकली। जनरेटर अब तक किसी ने ऑन ही ना
किया। उसे सोच कर कुफत हुई। टॉवल उसके
घुटनों तक आ रहा था। जबकि गीली टिप टिप
करती लटें उसके चेहरे से चिपकी थी। जैसे
उसने कैंडल जला कर रखी। उसे अपने पीछे
किसी की मौजूदगी का एहसास हुआ। वह झटके से
पलटी तो असद को अपने पीछे देख उसकी चीख
निकली जिसे असद ने उसके मुंह पर हथेली
जमाते उसे दीवार से लगाते बंद किया शौहर
हूं तुम्हारा चीख क्यों रही हो उसके दीवार
से टुकराने से टॉवल खिसक कर उसके सीने से
ढलकने वाला था आखिर तुम मुझे नजरअंदाज
कैसे कर सकती हो उसके एक-एक लफ्ज में
शिद्दत पनाह दी जिसे वो रीमा पर लुटा रहा
था असद यह क्या बदतमीजी है आप मेरे कमरे
में इतनी रात को कैसे आ सकते हैं। वह भी
इस हालत में निकले यहां से। वह अपनी हालत
यूं असद के सामने देख मरने के करीब थी।
क्यों? क्यों नहीं आ सकता? तुम पर सिर्फ
मेरा हक है। फिर क्यों दूर रहूं? तुमसे
आखिर बीवी हो तुम मेरी। वो उसके चेहरे को
करीब करता। उस पर अपनी सुलगती गरम सांसे
छोड़ता बोला। तो वो किसी जख्मी परिंदे की
तरह फड़फड़ा कर रह गई। असद खुद नहीं जानता
था कि वह रीमा को इस हालत में देख क्यों
खुद को उसके करीब जाने से रोक नहीं पा रहा
था। ऐसा तो कभी मेहर को देखकर भी नहीं
जज्बात पढ़ के जैसे रीमा को इस हाल में
देखकर बेकाबू हो रहा था। पहले कहां थे? आप
शादी की रात तो धुतकारा मुझे अब क्यों आए
हैं? अब उमैर को देखकर जेलस हो गए क्या?
वो चीख-चीख कर बोलती किसी और का जिक्र
करती उसे पागल कर गई। कौन है वो बोलो। वो
गुस्से से उसका मुंह दबोचते बोला। मेरे
करीब आने का और मुझे पाने का हक सिर्फ
आपको है। लेकिन उमैर से मेरा गहरा ताल्लुक
है। आपके बायस उससे ताल्लुक नहीं तोड़
सकती। रीमा की इतनी सख्त बातें उसे जलाकर
राख कर गई। आखिर वो कैसे उसके अलावा किसी
और को अहमियत दे सकती। उस बात की उसकी अकल
माफ करके रख दी। वो नहीं जानता था उमैर का
उससे रिश्ता। वह गलत समझ बैठा था। अच्छा
ऐसी बात है तो अगर मैं तुम पर अपनी कुर्बत
का लम्ज छोड़ दूं तो क्या तुम्हें वह
अपनाएगा?
वह उसे तंजी अंदाज में देखते बोला। वह
उसके सुर्ख अपील करते लबों को देखते बगैर
सोचे समझे बेकाबू होते झुका। इस बात को
सोचे बगैर कि उमर कोई और नहीं। उसका
सौतेला भाई है। क्या हो गया आपको? उमैर
भाई है मेरा। जैसे वो उससे अलग हुआ वो
चीखी। जब वो होश में आया। व्हाट? यह क्या
कह रही हो? वही जो सच है मगर आप पहले
दूसरों पर रोब तो जमा लें। वो तंग करके
बोली तू इतनी देर से तुम मुझे जला रही थी
वो आइब्रोचकाते बोला क्यों आप मोमबत्ती है
जो जल जाएंगे वो अपने बाल लहराकर उसके
मुंह पर मारती बोली उधर देखो मेरी तरफ मैं
कल भी तुम्हारा था आज भी तुम्हारा हूं
जानता हूं गुनाह हो गया मुझसे मगर मैं
बेहोशी के आलम में था हाथ जोड़कर माफी
मांगता हूं तुमसे नादिम हूं ऐसा कभी नहीं
होगा प्लीज यूं बे एतनाई मत बरतो वो नादिम
लहजे में बोला जब वो ज़रे लब मुस्कुराई।
माफ तो वो उसे कब का कर चुकी थी मगर एहसास
दिलाना तो बाकी था ना। अभी तो मैंने
बेतनाई बर्तनाई शुरू की है और आपकी बस भी
हो गई। वो इसे कमरे से बाहर धक्का देते
बोली यार अब इतनी सजा तो मत करो। रीमा आई
एम सॉरी। अच्छा जी। तो फिर मनाए मुझे मेरा
दिल जीते। यह कह के वो इसे मुश्किल में
डाल गई। तो फिर क्या था? वो रोज उसके लिए
सॉरी के भुक्के लाता। कभी कोई ड्रेस तो
कभी कोई ज्वेलरी। मगर वह मानती ही नहीं
थी। उल्टा उसे डीप गले पहनपन कर रुझाती के
जजाबत की शिद्दत असद के मुंह से धुएं निकल
आते। अभी वह उसके सामने ब्लैक नेट की डीप
गले वाली साड़ी पहन कर आई। नीचे कुछ भी ना
पहन रखा था। उसका गुदास बदन शिद्दत से
अपनी जाने माइल करने वाला था। कम से कम जब
मेरे सामने आओ तो नीचे कुछ पहन कर आया
करो। वरना मैं भूल जाऊंगा कि तुम मुझसे 18
साल छोटी हो। ऐसे ही पटक दूंगा बेड पर
जाकर। वह नाक फैलाते बोला जब वह एक अदा से
कमर से बाल हटाते अपनी बैक लेस कमर छलकाते
बोली तो रोका किसने है? वो आंख मेजते बोली
तो असद की इंतहा बस यहीं तक थी। अगले ही
पल वो इसे बाहों में भरते कमरे में ले गया
था और बेड पर जा पटखा। उसका इस तरह अपने
वजूद को उसके सामने अयां करना असद को पागल
दीवाना बना देता था। पूरी बरहना कमर पर
सिर्फ ब्लाउज की हुक रुकावट थी। वह हर तरह
आज उसे घायल करना चाहती थी। इसलिए अपने
महबूब को अपनी तरफ मायल करने की भरपूर
तैयारी कर रखी थी उसने। मगर दिल में अभी
भी एक डर था। कहीं वो कुछ गलत तो नहीं कर
रही। मगर असद अब सिर्फ उसका है। उस बात का
यकीन उसे हर सिरे से। असद ने अपने हर एक
अमल से दिलाया था। मेरी जान मेरी रीमा।
उसने लपक के उसकी बाहों में भर लिया और
झुक कर उसके हौंडों पर लप रखे। क्या अब तो
तुम सिर्फ मुझे अपना मानती हो ना? मैं सच
में तुमसे मोहब्बत करता हूं रीमा और किसी
से नहीं। मेरा यकीन करो। उसकी दिलस बात पर
रीमा तड़प उठी थी। मैं सिर्फ आपकी हूं
असद। मेरे वजूद पर सिर्फ आपका हक है। वो
उसके करीब हुई। रब का जितना शुक्र करूं
उतना कम है जिसने मुझे तुम जैसी बीवी से
नवाजा। आई एम सो लकी। वह अपना भारी हाथ
उसकी कमर पर रखते बोला, "यह क्या कर रहे
हैं?" वह अनजान बनने का नाटक करते बोली,
जब असद ने खींच कर उसे अपने करीब किया,
तुम्हारे वजूद पर सिर्फ मेरा हक है, तो इस
संगे मरमर से तराशे बदन को मैं क्यों कर
महसूस ना करूं? कितना कहा था अपने नंगे
जिस्म की नुमाइश मत किया करो। खुद को ढाक
कर रखा करो। रीमा वरना तुम्हारा मुझसे 18
साल छोटा होने का भी। मैं लिहाज नहीं
करूंगा। लेकिन आज मेरी जान तुम्हें मैं
तरसाऊंगा जैसे तुम मुझे अपने सीने के
नजारे करवा कर तरसाती और उकसाती हो। वो
इसके हाथ अपने टाई से बांधते बोला नहीं
प्लीज ऐसा ना करें मैं मर जाऊंगी। वो असद
के बदन से छेड़छाड़ करने पर चलाई और कितनी
ही देर वो उसकी मिन्नत समाजत करती रही।
उसकी टाई से बंधे हाथ की वजह से वह छटपटा
भी नहीं पा रही थी। यहां तक कि अब उसने
जज्बात की शिद्दतों के बढ़ जाने पर तड़पना
शुरू कर दिया। कुछ देर उसके तड़पता देखने
के बाद आखिरकार उसे रीमा की हालत पर तरस आ
ही गया। तभी वह उसके पेट पर लब रखते उसे
अपने लबों में दबाने लगा। उसे लगा आज उसका
दम ही निकल जाएगा। वो आहिस्ता-आहिस्ता
उसकी साड़ी से ऊपर करता जा रहा था और अपना
हाथ उसने रीमा को मशहूर करने में लगाया
हुआ था। जब अचानक उसने रीमा को दांतों से
काटा कि वो लज़त भरा दर्द बर्दाश्त करते
सिसक उठी। जिस्म बेजान सा हुआ और वह अपने
हठों से उसकी धतिया गर्दन को छूने लगा।
असद का लम्स पाते ही रीमा की सांसे भारी
होने लगी। असद ने उसकी साड़ी का पल्लू
सिरकाया। भारी सांसों के बायस ऊपर नीचे
होता सीना एक दिलकश मंजर पेश कर रहा था।
अब उसके सीने पर झुककर शिद्दतें लुटाने
लगा। जबकि रीमा भी आंखें बंद करके सुकून
से असद की कुर्बत महसूस करने लगी। उसको
बेड पर लेटाकर वह उसके सीने पर अपना
शिद्दत लुटाता। हाथों ने दोबारा ब्लाउज का
हुक खोलकर उसके वजूद के नशेबो फराज अया कर
दिए। जिसने उसे पागल कर रखा था। वो उसके
हुस्न को सुलगते लम से खराजे तहसीन पेश
करने लगा। रीमा की सिसकियां पूरे कमरे में
गूंज रही थी। वो बेआब मछली की तरह तड़पने
लगी और एक-एक करते वह सारे पर्दे गिराते
चला गया और इसमें समा गया था। आज उसने
अपनी बीवी को हासिल कर लिया था जो उसके
लिए अपना गांव छोड़कर आई और अब उसकी आती
जाती सांस की जमानत बन गई थी। अगली सुबह
जब वह दोनों नाश्ते की मेज पर आई तो उसके
साथ उसकी भलाईं लेने लगी थी। वो उसे देखकर
जान गई थी कि उन दोनों का रिश्ता अब और
मजबूत हो चुका है। आइंदा अगर तुमने मेरी
बेटी को जरा भी रुलाया तो तुम्हारी खैर
नहीं। तुम्हें छोडूंगी नहीं मैं। उसकी मां
उसको डपटते हुए बोली जिस पर वह सर खम करके
रह गया। अब तो उसके बगैर मैं जीने का
तसवुर भी नहीं कर सकता। कोजा कि उसकी
आंखों में आंसू ना लाऊं यह तो नामुमकिन
है। वो उसका हाथ टेबल के नीचे से थामती
हुई बोला जिस पर वो शर्म से दोहरी हुई और
नजर बचाकर उसे घुरकर रह गई। अब खुशियां ही
खुशियां थी हरस और वो दोनों और इनका
खूबसूरत आशियाना। कहानी कैसी लगी? कमेंट
सेक्शन में अपनी कीमती राय का इजहार जरूर
कीजिएगा। मिलते हैं एक नई कहानी के साथ
अगली वीडियो में।
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