Complete Class 12th Accountancy NCERT in ONE SHOT | MUST DO BEFORE BOARD EXAM 2026
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हेलो स्टूडेंट्स कैसे हैं आप सब लोग? एक
चीज जो आप सब मिस करके जाते हो बोर्ड
एग्जामिनेशन में जिसकी वजह से आपके 80 आउट
ऑफ 80 नहीं आते वो है एनसीईआरटी। आप सोचते
हो अकाउंटेंसी में तो एनसीईआरटी में कुछ
नहीं है। एक-एक पॉइंट एक-एक थ्योरी एज इट
इज यहां से आती है। तो थ्योरी पेपर में
लगभग एमसीक्यू जितने भी हैं या कोई
थ्योरिटिकल क्वेश्चन आता है 10 नंबर तक की
थ्योरी पूछी जाती है। आज की इस वीडियो से
10 नंबर कवर होंगे। पेन कुछ नहीं चलाना।
बैठे रहो और सुनते जाओ एक-एक चीज और जो
चीज बोलूंगा मैं नोट कर लो। उसको आपने नोट
करना है। कोई कैलकुलेशन नहीं, कुछ नहीं।
कंप्लीट एनसीईआरटी करा दूंगा। तो थ्योरी
की टेंशन आपकी पूरी खत्म। आपको कहीं से
कुछ भी थ्योरी पढ़ने की कोई जरूरत नहीं
है। कोई किताब आपको नहीं उठानी। सिर्फ एक
वीडियो आपकी पूरी थ्योरी कवर। और ये जो
एनसीईआरटी के अंडरलाइन नोट्स हैं वो मैं
आपको एसपीसीसी ऐप पे फ्री स्टडी मटेरियल
के अंदर डाल दूंगा। आप वहां से अपने खुद
के नोट्स बना सकते हो। ऑलदो कुछ करने की
जरूरत ही नहीं है। यही मेरे साथ-साथ
कुछ-कुछ चीजें इंपॉर्टेंट है। कुछ-कुछ
सेक्शंस इंपॉर्टेंट है जिनको आप यहीं
लिखते चले जाना। यकीन मानो 80 आउट ऑफ 80
आएंगे। अगर आपने ये वीडियो पूरी देख ली
कहीं थ्योरी में एमसीक्यू में नंबर आपके
नहीं कटेंगे। राइट? तो स्टार्ट करते हैं।
सबसे पहले चैप्टर वन से लेकर मैं आपको कैश
फ्लो तक पूरा कराऊंगा। तो सबसे पहले
चैप्टर वन पे आते हैं। तो सबसे पहले लिखा
हुआ है ऑन मेनी इशूज़ अफेक्टिंग
डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ प्रॉफिट। यानी कि जब
आपकी पार्टनरशिप डीड में प्रॉफिट के
बंटवारे में कुछ इशू आ रहा होगा, प्रॉफिट
आपने लिखा ही नहीं किस रेश्यो में बेटेगा
तो उस सिचुएशन में पार्टनरशिप एक्ट 1932
अप्लाई होगा। कोई भी इशू हो वहां पे अगर
डीड साइलेंट है तो पार्टनरशिप एक्ट 1932
अप्लाई होगा। आपको पूरी किताब ना पढ़नी
पड़े तो मैंने एक ही किताब पढ़ के अच्छे
से चीजों को अंडरलाइनिंग करके आप लोगों को
दे दिया है। इससे बाहर कोई थ्योरी ना
सीईटी में पूछा जाएगा ना आपके बोर्ड्स में
पूछा जाएगा। लिख के ले लो। सीयूईटी में
आपको ये इतनी हेल्प देगा। मैं कॉलेज के
अंदर जाता हूं। चाहे राम जस हो, चाहे
क्लास हंसराज हो, चाहे एसआरसीसी हो। बच्चे
बोलते हैं सर जो एनसीईआरटी आप कराते हो
उससे पूरा का पूरा पेपर आता है। तो इसीलिए
मैं करा रहा हूं आपको। मिस मत करना। कहीं
नहीं मिलेगा आपको पूरे YouTube पे।
क्योंकि इसमें पढ़ने में अंडरलाइनिंग करने
में बहुत टाइम लगता है। राइट? अब यहां पे
सब लोग नोट कर लो एक चीज। सेक्शन फोर ऑफ
इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 डिफाइन करता
है पार्टनरशिप के बारे में कि पार्टनरशिप
क्या है? पार्टनरशिप रिलेशनशिप है कुछ
लोगों के बीच जो एग्री करते हैं शेयर
प्रॉफिट करेंगे। किसी बिजनेस का कैरी बाय
ऑल और एनीवन एक्टिंग फॉर ऑल। ध्यान रखना।
पर्सन हु हैव एंटर इंटू पार्टनरशिप विद वन
अनदर आर इंडिविजुअली कॉल्ड एज पार्टनर। हर
एक इंसान को क्या कहा जाता है? पार्टनर
कहा जाता है। और कलेक्टिवली उन्हें क्या
कहा जाता है? फर्म कहा जाता है। द नेम
अंडर व्हिच जिस नाम से बिजनेस को चला रहे
होते हैं उसे बोलते हैं फर्म नेम। और अ
पार्टनरशिप फर्म हैज़ नो सेपरेट लीगल
एंटिटी। ध्यान रखना कोई सेपरेट लीगल
एंटिटी नहीं है। अपार्ट फ्रॉम द पार्टनर्स
कॉन्स्टिट्यूटिंग इट। दस द एसेंशियल फीचर
ऑफ़ पार्टनरशिप आर दो या दो से ज्यादा लोग
होने चाहिए। बहुत इंपॉर्टेंट है। इन अदर
वर्ड्स द मिनिमम नंबर ऑफ़ पार्टनर्स इन अ
फर्म कैन बी टू। कम से कम दो। देयर इज़ हाउ
एवर अ लिमिट ऑफ़ देयर मैक्सिमम नंबर। ध्यान
रखना। द वर्चू ऑफ़ सेक्शन 464 सेक्शन याद
कर लो। लिख लो कॉपी में जो बोलूंगा ना वो
लिख लेना। सेक्शन 464 ऑफ़ कंपनीज़ एक्ट 2013
द सेंट्रल गवर्नमेंट इज़ एमावर्ड। किसको
पावर मिली है? सेंट्रल गवर्नमेंट को पावर
मिली है कि भ वो मैक्सिमम नंबर डिसाइड कर
सके। लेकिन नॉट मोर देन 100। हम तुमको
पावर देते हैं। तुम डिसाइड करो। लेकिन 100
से ज्यादा तो तुम भी डिसाइड नहीं कर सकते
हो। और सेंट्रल गवर्नमेंट ने अभी कितना
फिक्स किया? मैक्सिमम नंबर 50। कोई पूछे
तो मिनिमम दो मैक्सिमम 50। अगली बात है
एग्रीमेंट। कोई ना कोई एग्रीमेंट होना
चाहिए। ओरल हो चाहे रिटन हो। कोई कंपलसरी
नहीं है कि रिटन एग्रीमेंट हो। रिटन
एग्रीमेंट होगा तो भैया उसे पार्टनरशिप
डीड बोलेंगे ताकि कल को कोई अवॉइड करो।
कोई भी क्लास अवॉइड करो। कोई प्रॉब्लम हो
ओरली इंसान बात ना माने। तो इट्स बेटर कि
आप डीड बना लो रिटर्न में। लेकिन जरूरी
नहीं है। इट इज़ नॉट कंपलसरी। कोई ना कोई
बिजनेस होना चाहिए। इफ रोहित एंड देखो ये
पेपर में देखो ऐसा आ सकता है तो हैरानी
नहीं होगी कल को सवाल आ गया तो इफ रोहित
एंड सचिन जॉइंटली परचेस अ प्लॉट ऑफ लैंड
दे बिकम द जॉइंट ओनर ऑफ द प्रॉपर्टी नॉट द
पार्टनर वो जॉइंट ओनर है पार्टनर नहीं है
इफ दे आर इन द बिनेस ऑफ़ परचेस ऑफ़ लैंड एंड
सेल वो रोज का यही काम करते हैं हर बार
खरीदते हैं बेचते हैं खरीदते बेचते हैं तो
उन्हें पार्टनर बोलेंगे अदरवाइज पार्टनर
नहीं बोलेंगे अगला म्यूचुअल एजेंसी ईच
पार्टनर कैरी ऑन द बिनेस द प्रिंसिपल एज
वेल एज एजेंट हर कोई एक दूसरे का
प्रिंसिपल है एक दूसरे का एजेंट है यह
ध्यान रखना
देयर वुड बी नो पार्टनरशिप इफ द एलिमेंट
ऑफ म्यूचुअल एजेंसी साइलेंट। पार्टनरशिप
में सबसेेंट क्या है? बिजनेस। बिजनेस से
होने वाला प्रॉफिट और साथ में म्यूचुअल
एजेंसी। ध्यान रखना। पार्टनरशिप एक्ट
डिस्क्राइब पार्टनरशिप एज अ रिलेशनशिप
बिटवीन पीपल हु अग्री टू शेयर प्रॉफिट ऑफ
अ बिज़नेस। द शेयरिंग ऑफ लॉस इज़ इंप्लाइड।
डेफिनेशन में तो प्रॉफिट की बात करी गई
है। लेकिन लॉस भी होता है लेकिन वो लिखा
नहीं रहता। लॉस इंप्लाइड रहता है। लॉसेस
इज़ेंट। ठीक है? इफ सम पर्सन जॉइन हैंड फॉर
द पर्पस ऑफ सम चैरिटेबल एक्टिविटी पेपर
में सब सवाल पूछा गया। मैं दिल से बोल रहा
हूं बेटा पेपर जहां घुमाता है वो है
एनसीईआरटी। अगर तुमने ये वीडियो पूरी देख
ली मैं फटाफट फटाफट चीख-चीख के आपको ये
चीज करा रहा हूं। आप बैठ के आराम से देख
लो। कुछ-कुछ चीजें हैं जो बता रहा हूं नोट
कर लो। यकीन मानो आपके पेपर में 80 आउट ऑफ
80 है। तुम याद करोगे। ये सेम लाइन पूछी
जाती है। क्योंकि कई बार पेपर में पूछा जा
चुका है कि 40 लोग हैं। एक चैरिटेबल
ट्रस्ट चला रहे हैं। तो क्या वो
पार्टनरशिप है? नहीं। वो पार्टनरशिप नहीं
है क्योंकि उनका मेन मोटिव मोटिव प्रॉफिट
कमाना नहीं है। अगर मैं लायबिलिटी की बात
करूं तो लायबिलिटी पार्टनर्स की अनलिमिटेड
होती है। दिस इंप्ल्लाईज़ दैट हज़ प्राइवेट
एसेट्स कैन आल्सो बी यूज़्ड फॉर पेइंग ऑफ़
फर्म डेप्ट। तो प्राइवेट एसेट को बेच के
हम फर्म डेप्ट की पेमेंट करेंगे। इसलिए
हमारी लायबिलिटी क्या है? अनलिमिटेड है।
पार्टनरशिप डीड क्या है? एक एग्रीमेंट है।
वो ओरल भी हो सकता है, रिटर्न भी हो सकता
है। एंड पार्टनरशिप एक्ट डज़ंट रिक्वायर
दैट एग्रीमेंट मस्ट बी इन राइटिंग। वो कोई
लिखा नहीं होता। लेकिन राइटिंग करोगे तो
अच्छा है। उसको बोलते हैं पार्टनरशिप डी।
इसमें सारी शर्तें पार्टनरशिप की लिखी
रहती हैं। द क्लॉज़ ऑफ़ पार्टनरशिप कैन बी
ऑल्टर्ड। बिल्कुल पार्टनरशिप डीड की जो
शर्तें हैं, जो क्लॉज़ हैं, हम उनको ऑल्टर
कर सकते हैं, सुधार सकते हैं। अगर सारे
पार्टनर्स एग्री करते हैं, तो और यहां पे
देखो काम की बात है। कोई एक भी क्वेश्चन
इससे बाहर ना कभी पूछा गया ना पूछा जाएगा।
तुम भले अलग-अलग ऑथर की बुक खरीद लो।
लेकिन जो पेपर बनाने वाला है वो पेपर
एनसीईआरटी की ही बुक से बनाते हैं और तुम
साल भर नहीं पढ़ते। इसीलिए बोल रहा हूं
इसको। देखो यहां पे ये चीज कितनीेंट है।
दी पार्टनरशिप शुड बी प्रॉपर्ली ड्राफ्टेड
एंड प्रिपयर्ड एस पर द प्रोविज़ंस स्टैंप
पैट। तुम सारे बच्चे क्या सोचते हो सर
पार्टनरशिप डीड तो पार्टनरशिप एक्ट के
अकॉर्डिंग बनता है। नहीं स्टैं्प एक्ट के
अकॉर्डिंग बनता है। अब आप बोलोगे सर तो
हमारी बुक में भी लिखा हुआ भैया पेपर में
आया था उसके बाद बुक वालों ने उसको
रिड्यूस किया। तो पेपर में जो पहली बार
पूछा गया था मेजरिटी बच्चों ने पार्टनरशिप
एक्ट 1932 पे टिक लगाया। जबकि आंसर क्या
था इसका? स्टैंप एक्ट। रजिस्टर्ड ऑफ़ फर्म
से जो रजिस्टर्ड होता है वो स्टंप एक्ट
उसके अकॉर्डिंग पार्टनरशिप डीड बनता है।
डीड में बहुत कहानियां लिखी रहती हैं।
आईओसी, सैलरी, कमीशन, रेशियो सब कुछ डीड
में लिखा रहता है। नाउ प्रोविज़न ऑफ़
पार्टनरशिप एक्ट रेलेवेंट फॉर अकाउंटिंग।
तो पार्टनरशिप एक्ट तो बहुत मोटी है।
उसमें से कौन-कौन से प्रोविज़न काम की है?
सबसे पहला पार्ट प्रॉफिट शेयरिंग रेश्यो।
भाई प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो इक्वल होगा।
चाहे कोई ज्यादा पैसा लगा दे, कम पैसा
लगाए ना लगाए। इंटरेस्ट ऑन कैपिटल तभी
मिलेगा जब प्रॉफिट होगा और रीड में लिखा
है तभी दोगे अगर रीड साइलेंट है। तो कोई
इंटरेस्ट ऑन कैपिटल पार्टनर को नहीं
मिलेगा। नो इन कैपिटल, नो सैलरी, नो
कमीशन, नो इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग चार्ज और
इंटरेस्ट ऑन लोन। अगर किसी पार्टनर ने कोई
लोन दिया है बिजनेस को तो उस पे वो 6% का
6% पर एन का इंटरेस्ट लेगा। लेकिन अगर कोई
लोन लिया है पार्टनर ने तो भैया उसप वो
कोई इंटरेस्ट नहीं देगा। डीड साइलेंट है
तो रेमुनरेशन नो पार्टनर इज़ एंटायल्ड टू
गेट एनी सैलरी। किसी भी प्रकार का सैलरी
रेमुनरेशन पार्टनर को नहीं मिलेगा। इफ अ
पार्टनर डिराइव एनी प्रॉफिट। अगर किसी
पार्टनर ने प्रॉफिट बनाया बिजनेस से हटके
प्रॉफिट कमाया उस पैसे को लेके तो वो पैसा
पूरा का पूरा बिजनेस को लौटाना है। इफ अ
पार्टनर कैरी ऑन एनी बिनेस ऑफ़ सेम नेचर
सेम नेचर का कोई भी बिज़नेस कैरी करते हो
जो कॉम्पिटिटिव है आपके बिजनेस से तो उसको
क्लास वो सारा का सारा पैसा फर्म को देना
पड़ेगा। मतलब मैं और आप एक काम कर रहे
हैं। फिर मैं साइड में अलग से भी वो काम
कर रहा हूं। तो मुझे वहां का पैसा भी आपके
साथ शेयर करना पड़ेगा। भले ही आप उस काम
को नहीं कर रहे तभी मैं फायदा पहुंचाऊंगा
आपको। ऐसा पार्टनरशिप एक्ट 1932 कहता है।
ठीक है? तो देखो ये उसके बाद नेक्स्ट चलते
हैं। एक-एक चीज करेंगे। आपको टेंशन नहीं
लेनी सब कुछ। मैंने जितना अंडरलाइनिंग करा
है वही। अच्छा देयर आर टू मेथड्स बाय
व्हिच द कैपिटल अकाउंट्स आर प्रिपयर्ड। दो
मेथड्स हैं। फिक्स्ड कैपिटल अकाउंट मेथड
और फ्लक्चुएटिंग कैपिटल अकाउंट मेथड।
फिक्स्ड कैपिटल अकाउंट मेथड के अंदर दो
अकाउंट बनते हैं। फिक्स्ड अकाउंट करंट
अकाउंट और कैपिटल अकाउंट। करंट अकाउंट का
डेबिट क्रेडिट दोनों बैलेंस हो सकता है।
लेकिन कैपिटल अकाउंट का हमेशा क्रेडिट
बैलेंस होता है। यहां पे करंट अकाउंट का
बैलेंस जो है वो चेंज होता है। और जो
फिक्स्ड कैपिटल अकाउंट मेथड में जो कैपिटल
अकाउंट का बैलेंस है ना वो चेंज नहीं
होता। जब कोई एडिशनल कैपिटल लगाता है या
कैपिटल को विथड्रॉ करेगा तभी चेंज होगा।
अदरवाइज़ चेंज नहीं होगा। राइट? तो, यह तो
फॉर्मेट हो गया। ये सब तो आपको नहीं करना।
अच्छा, इस पे आते हैं जरा नेक्स्ट
फ्लक्चुएटिंग कैपिटल। अंडर फ्लक्चुएटिंग
कैपिटल मेथड ओनली वन अकाउंट इज़ प्रिपेयर्ड
दैट इज़ कैपिटल अकाउंट। और उसका डेबिट
बैलेंस भी हो सकता है, क्रेडिट बैलेंस भी
हो सकता है, कुछ भी हो सकता है। लेकिन
फिक्स मेथड में जो कैपिटल अकाउंट है, उसका
हमेशा क्रेडिट, क्रेडिट, क्रेडिट बैलेंस
ही रहेगा। प्रॉफिट के बंटवारे के लिए हम
कौन सा अकाउंट बनाते हैं? प्रॉफिट एंड लॉस
एप्रोप्रिएशन अकाउंट। यह एक्सटेंशन है
प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट का। प्रॉफिट एंड
लॉस अकाउंट के बाद बनता है प्रॉफिट एंड
लॉस एप्रोप्रिएशन अकाउंट। इसके अंदर सारे
पार्टनर्स की कमाई और पार्टनर्स के खर्चे
ही लिखे जाते हैं। इट शोज़ हाउ द प्रॉफिट्स
आर एप्रोप्रियट और डिस्ट्रीब्यूट अमंग द
पार्टनर। ये जो प्रॉफिट है वो पार्टनर्स
में कैसे बटेगा? ध्यान रखना। अब ये सब तो
क्लियर है। अब आते हैं जर्नल एंट्रीज पे।
ठीक है? तो सबसे पहला ट्रांसफर करोगे
बैलेंस। जो प्रॉफिट लॉस अकाउंट के अंदर
बैलेंस है उसको ट्रांसफर करोगे तो एंट्री
क्या होगी? प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट डेबिट
टू पीएंडएल एप्रोप्रिएशन अकाउंट। ध्यान
रखना प्रॉफिट को और लॉस के लिए उसका उल्टा
प्रॉफिट एंड लॉस एप्रोप्रिएशन टू पीएंडएल।
इंटरेस्ट ऑन कैपिटल अलाउ करोगे तो
इंटरेस्ट ऑन कैपिटल टू पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट ट्रांसफर करने की एंट्री प्रॉफिट
एंड लॉस एप्रोप्रिएशन टू इंटरेस्ट ऑन
कैपिटल मैंने आपको लाइव रिवीजन के जो
रिवीजन कराया हुआ है उसके अंदर भी मैंने
लाइव रिवीजन के अंदर भी पूरा का पूरा
कांसेप्ट कवर किया है कि अगर कोई भी
इंटरेस्ट पार्टनर को दे रहे हो ट्रांसफर
कर रहे हो तो एप्रोप्रिएशन की एंट्री होगी
पीएनएल एप्रोप्रिएशन टू इंटरेस्ट ऑन
कैपिटल और फिर उसको अलऊ करने की होगी
इंटरेस्ट ऑन कैपिटल अकाउंट इंटरेस्ट ऑन
कैपिटल अकाउंट डेबिट टू पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट फिक्स्ड मेथड है तो करंट अकाउंट
इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग की एंट्री क्या होगी
पार्टनर्स देखो सबसे पहले ड्रॉइंग को जो
चार्ज करेंगे कैपिटल से उसकी एंट्री होगी।
पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट डेबिट टू
इंटरेस्ट एंड ड्रॉइंग। और ट्रांसफर करने
की एंट्री क्या होगी? एप्रोप्रियेशन में
बाय साइड आता है ना इंटरेस्ट ड्रॉइंग। तो
इंटरेस्ट एंड ड्रॉइंग अकाउंट डेबिट टू
पीएंडएल एप्रोप्रिएशन अकाउंट। राइट? बहुत
कुछ है इसलिए फटाफट फटाफट करा रहा हूं
आपको। सैलरी देते हो तो सैलरीज टू
पार्टनर्नस कैपिटल अकाउंट। ट्रांसफर करते
हो एप्रोप्रियेशन में प्रॉफिट एंड लॉस
एप्रोप्रिएशन टू सैलरी अकाउंट। कमीशन को
आपने ट्रांसफर करते हो तो एंट्री होगी
प्रॉफिट एंड लॉस एप्रोप्रियेशन टू कमीशन।
कैपिटल में जाते हो तो कमीशन अकाउंट डेबिट
टू पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट। राइट? उसके
बाद इफ प्रॉफिट अगर आपको प्रॉफिट हो गया
लास्ट में डिविजबल प्रॉफिट तो प्रॉफिट एंड
लॉस एप्रोप्रिएशन टू पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट और लॉस हो गया तो पार्टनर्नस
कैपिटल अकाउंट डेबिट टू प्रॉफिट लॉस
एप्रोप्रिएशन अकाउंट तो ये हो गया आपका
एप्रोप्रिएशन का फॉर्मेट पूरा का पूरा ठीक
है तो बाकी सब थ्योरी है हटाओ जो जो
इंपॉर्टेंट चीजें हैं वो सब करा रहा हूं
इफ विथड्रॉन ऑन द फर्स्ट डे ऑफ़ एव्री मंथ
इंटरेस्ट अगर फर्स्ट डे निकालता है 6.5
एंड ऑफ़ एव्री मंथ एंड में आता है तो 5.5
बिगनिंग में निकालता और मिडिल में निकालता
है तो 6/12 एवरेज पीरियड का फार्मूला हो
गया टाइम लेफ्ट आफ्टर फर्स्ट ड्र ड्रॉइंग
प्लस टाइम लेफ्ट आफ्टर लास्ट ड्रॉइंग
डिवाइड बाय टू ओके ये सब पता है आपको
नेक्स्ट सारा एनसीआरटी हो जाएगा व्हेन
वेरिंग अमाउंट्स आर विथड्रॉन अलग-अलग डेट
पे विथड्रॉ करते हैं तो प्रोडक्ट मेथड यूज़
करते हैं इसका फार्मूला होता है टोटल
प्रोडक्ट इंटू रेट अप 100 * 1/12 ठीक है
यहां लगता है 1/12 जो अलग-अलग डेट पे
अलग-अलग अमाउंट कोई पार्टनर विथड्रॉ करता
है और हर हाफ ईयर में विथड्रॉ करेगा तो
बिगनिंग का 9/12 मिल का 6/12 एंड का 3/12
और अगर हर क्वार्टरली विथड्रॉ करता है
बिगिनिंग का 7.5/12 मिडिल का 6/12 और एंड
का 4.5 / 12 अगर अगला है एडजस्ट पास
एडजस्टमेंट। ऑल दीज़ एक्ट ऑफ ओमिशन एंड
कमीशन। ओमिशन एंड कमीशन नीड एडजस्टमेंट्स
फॉर करेक्शन ऑफ़ देयर इंपैक्ट इंस्टेड ऑफ़
ऑल्टरिंग ओल्ड अकाउंट्स नेसेसरी
एडजस्टमेंट आर मेड। तो आपने एडजस्टमेंट कर
सकते हो। एक तो प्रॉफिट लॉस एप्रोप्रिएशन
से और डायरेक्टली आप उसे कैपिटल अकाउंट के
अंदर एडजस्ट कर सकते हो। तो जनरली हम लोग
क्या करते हैं? एक एडजस्टमेंट एंट्री पास
करते हैं। खैर ये कोई थ्योरी नहीं है। तो
सिर्फ कैलकुलेशन है। तो ये सारी की सारी
चीजें थी। लेकिन इसके अलावा एक चीज और है
गारंटी ऑफ़ प्रॉफिट्स टू अ पार्टनर में।
अगर आपने किसी पार्टनर को गारंटी दी है तो
वो लॉस से बच सकता है। छोटा बच्चा बिजनेस
में सिर्फ और सिर्फ प्रॉफिट के लिए एडमिट
हो सकता है। उसको बुक्स ऑफ अकाउंट
इंस्पेक्ट नहीं करेंगे। एंड सबसेेंट चीज
अगर किसी पार्टनर को गारंटी दी गई है और
कोई कमी पड़ रही है तो वही झेलेगा जिसने
गारंटी दी है। अगर नहीं पता किसने गारंटी
दी है तो रिमेनिंग पार्टनर ने गारंटी दी
होगी वो भी अपनी ओरिजिनल रेश्यो के अंदर।
जो भी उनकी रेश्यो है उसी रेश्यो में नॉट
इक्वल। और इसकी एंड जिसको गारंटी मिली है
उसको क्रेडिट करेंगे और जिसने गारंटी दी
उसको डेबिट करेंगे। बिकॉज़ जिससे माइनस हुआ
जिसने गारंटी दी उससे माइनस हुआ उसको
डेबिट करेंगे। और जिसको मिली उसको प्लस
उसको हम क्या करेंगे? क्रेडिट करेंगे।
रिकॉन्स्टिटिशन ऑफ़ पार्टनरशिप फर्म या
एडमिशन ऑफ़ अ पार्टनर। अब एडमिशन ऑफ़
पार्टनर की बात करें। एनी चेंज इज़ द
एकिस्टिंग एग्रीमेंट्स अकाउंट्स टू
रिकॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप फर्म। कोई
भी एकिस्टिंग एग्रीमेंट में अगर चेंज होता
है तो उसको बोलते हैं पार्टनरशिप फर्म का
पुन निर्माण हो गया। दिस रिजल्ट एंड ऑफ़
एग्ज़िस्टिंग एग्रीमेंट। पुराना एग्रीमेंट
खत्म होगा और नया एग्रीमेंट स्टार्ट हो
जाएगा और जहां पे सारे के सारे पार्टनर्स
को बाइंड करेंगे। हाउएवर द फर्म कंटिन्यू
फर्म चलता रहेगा। द पार्टनर्स ऑफन रिसोर्ट
टू रिकॉन्स्टिट्यूशन ऑफ द फर्म इन वेरियस
वेज़ सच एज एडमिशन। अच्छा रिकॉन्स्टिट्यूशन
कैसे-कैसे होता है? एडमिशन, रिटायरमेंट,
चेंज इन पीएसआर, डेथ इन सब से क्या होता
है? रिकॉन्स्टिट्यूशन होता है। मोड ऑफ
रिकॉन्स्टिट्यूशन मोड क्या-क्या है? किस
तरीके से हो सकता है? नया पार्टनर एडमिट
होगा, पुराना पार्टनर रिटायर होगा, किसी
की डेथ होगी। तो इन सब ये सब रीज़ंस हैं
जिसकी वजह से पुरानी पार्टनरशिप खत्म हो
के नई पार्टनरशिप बनती है। इसको बोलते हैं
मोड ऑफ रिकॉन्स्टिट्यूशन ऑफ पार्टनरशिप
फर्म। अच्छा अब कोई थ्योरी नहीं है इसके
बाद। अच्छा एडमिशन में फिर ये है नया
पार्टनर आएगा तो क्या लेगा? राइट टू शेयर
ऑफ़ एसेट। जो भी बिजनेस के अंदर एसेट्स है
वो सारा का सारा उसमें से उसको हिस्सा
मिलेगा। राइट टू शेयर द प्रॉफिट ऑफ़ द
पार्टनरशिप फर्म। जो भी फर्म प्रॉफिट
कमाएगी उसको वो भी हिस्सा मिलेगा। फॉर द
राइट ऑफ़ एक्वायर शेयर इन द एसेट्स एंड
प्रॉफिट ऑफ़ द पार्टनरशिप फर्म। द पार्टनर
ब्रिंग एन एग्रीगेट अमाउंट ऑफ़ कैपिटल इदर
इन कैश और काइंड। नया पार्टनर उसके लिए
कैपिटल लेके आता है। कैश में भी ला सकता
है, काइंड में भी। मोर एवर इन केस ऑफ़ एनी
एस्टैब्लिश्ड फर्म व्हिच मे बी अर्निंग
मोर प्रॉफिट देन द नॉर्मल रेट ऑफ रिटर्न अ
न्यू पार्टनर इज़ रिक्वायर्ड टू
कंट्रीब्यूट सम एडिशनल अमाउंट इज़ नोन ऐज़
प्रीमियम फॉर गुडविल। जब नया पार्ट जब आप
नॉर्मल प्रॉफिट से ज्यादा कमा रहे हो और
फिर किसी को एडमिट कर रहे हो, तो आप
बोलोगे भैया हम तो बहुत ज्यादा प्रॉफिट
कमा रहे हैं। तुझे कुछ ना कुछ एक्स्ट्रा
पैसे लेके आने पड़ेंगे। जिसको हम लोग क्या
बोलते हैं? प्रीमियम फॉर गुडविल।
प्राइमरली टु कंपनसेट द सैक्रिफाइजिंग
पार्टनर फॉर लॉस ऑफ़ देयर शेयर इन सुपर
प्रॉफ़िट। तो जो भी वह पार्टनर्स जो पुराने
पार्टनर नए पार्टनर के लिए सैक्रिफाइस कर
रहे हैं उसके लिए वो लेके आता है गुडविल
प्रीमियम फॉर गुडविल। और क्योंकि वो
बिजनेस में एसेट्स में भी हिस्सेदारी लेगा
वो पार्टनर बन जाएगा। तो उसके लिए वो क्या
लेके आता है एक क्लास? नया पार्टनर अपनी
कैपिटल लेके आता है। इफ नथिंग इज
स्पेसिफाइड टू हाउ डस न्यू पार्टनर
एक्वायर इज शेयर। नया पार्टनर आ रहा है।
वो अपना हिस्सा किस रेश्यो में लेगा
पुराने पार्टनर से? नहीं पता तो भैया हम
मानेंगे कि वो पुरानी रेश्यो में ही लेगा
जो उनकी पुरानी रेश्यो थी। इसीलिए सिंपल
केस में जो ओल्ड रेशो होती है उसी को हम
लोग क्या मानते हैं? सैक्रिफाइजिंग रेश्यो
मान लेते हैं। फिर ये नई रेशियो की
कैलकुलेशन ये पूरी एनसीआरटी की बुक उठा के
दे दी मैंने तुमको। बस जो जो तुम्हारे काम
का था वो मैंने अंडरलाइनिंग कर लिया। द
रेश्यो इन व्हिच ओल्ड पार्टनर आर एग्री टू
सैक्रिफाइस। ये भी एक नंबर में पूछा गया
है सीबीएसई के पेपर में। वो कौन सा रेश्यो
है जिसमें पुराने पार्टनर सैक्रिफाइस करने
के लिए अगली अग्री कर जाते हैं? नए
पार्टनर के नए पार्टनर के लिए। इसको बोलते
हैं न्यू सैक्रिफाइजिंग रेशियो। इसका
फार्मूला है ओल्ड रेशियो माइनस न्यू
रेश्यो। एज़ स्टेटेड इन अर्लियर द न्यू
पार्टनर इज़ रिक्वायर्ड टू कंपनसेेट द ओल्ड
पार्टनर्स टू फॉर देयर लॉस ऑफ शेयर इन द
सुपर प्रॉफिट ऑफ द फर्म फॉर व्हिच ही
ब्रिंग्स एन एडिशनल अमाउंट एज़ प्रीमियम
फॉर गुडविल दिस अमाउंट इज़ शेयर बाय द
एकिस्टिंग पार्टनर इन द रेशियो इन व्हिच
दे फॉरगो देयर शेयर्स इन फेवर ऑफ़ न्यू
पार्टनर व्हिच इज़ कॉल्ड सैक्रिफाइजिंग
रेशियो। इतना घुमाने की जरूरत क्या है?
सीधे-सीधे बोलो। नया पार्टनर जो भी गुडविल
लेके आएगा पुराने पार्टनर उसको बांटेंगे
आपस में। किस रेशियो में? सैक्रिफाइजिंग
रेशियो में। नया पार्टनर कैपिटल लेके
आएगा। एक एक स्पेशल वीडियो बनाऊंगा जहां
पे मैं सारी की सारी जर्नल एंट्री एक साथ
कराऊंगा। बट फिलहाल बता दूं नया पार्टनर
कैपिटल लेके आता है तो बैंक टू कैपिटल नया
पार्टनर गुडविल लाता है तो बैंक टू
प्रीमियम फॉर गुडविल लाते ही बढ़ जाएगा।
प्रीम फॉर गुड अकाउंट डेबिट टू ए और बीन
सैक्रिफाइजिंग रेशियो गुडविल नहीं लेके
आता तो न्यू पार्टनर्स करंट अकाउंट डेबिट
टू ओल्ड पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट और
गुडविल अगर बैलेंस शीट के अंदर है इट विल
बी रिटर्न ऑफ और गुडविल विथड्रॉ करेगा
ओल्ड पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट डेबिट टू
कैश अकाउंट रिटर्न ऑफ करने की एंट्री होती
है ओल्ड पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट डेबिट टू
गुडविल अकाउंट किस रेश्यो में ओल्ड रेशियो
में बाकी सारी एंट्री किसमें होगी
सैक्रिफाइजिंग रेश्यो के अंदर तो ये हो गई
सारी की सारी कैलकुलेशन हटाओ कैलकुलेशन
सारी की सारी अब आते हैं इसके बाद यह रहा
नेक्स्ट
मीनिंग ऑफ़ गुडविल इट इज़ एन इनटेंजिबल एसेट
इन अदर वर्ड वर्ड गुडविल इज़ द वैल्यू ऑफ़
रेपुटेशन ऑफ़ अ फर्म इन रेस्पेक्ट टू द
प्रॉफिट एक्सपेक्टेड इन फ्यूचर ओवर एंड
अबव द नॉर्मल प्रॉफिट। नॉर्मल प्रॉफिट से
जितना भी ज्यादा कमा रहे हो दैट इज़ कॉल्ड
गुडविल। उसको बोलते हैं सुपर प्रॉफिट। और
सुपर प्रॉफिट अगर ज़ीरो है इट मींस देयर इज़
नो गुडविल। इन सिंपल वर्ड गुडविल कैन बी
डिफाइंड ऐज़ द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ फर्म
एंटीिसिपेट एक्सेस अर्निंग और द कैपिटलाइज़
वैल्यू अटैच टू डिफरेंट डिफरेंट
डिफरेंशियल प्रॉफ़िट कैपेसिटी ऑफ़ द बिज़नेस।
दस गुडविल एक्सिस्ट ओनली व्हेन द फर्म
अर्न सुपर प्रॉफ़िट। ध्यान रखना स्टेटमेंट
ट्रू फॉल्स में पूछा जा सकता है। असरशन
रीजन में पूछा जा सकता है। अगर बिजनेस
सुपर प्रॉफिट कमा रहा है तभी तुम्हारे
बिजनेस की गुडविल होगी। अदरवाइज नहीं
होगी। एनी फर्म दैट अर्न नॉर्मल प्रॉफिट
और इंक्रीिंग लॉसेस हैज़ नो गुडविल। अगर
नॉर्मल प्रॉफिट कमा रहे हो यानी सुपर
प्रॉफिट ज़ीरो है। भाई सीधी सी बात है।
नॉर्मल प्रॉफिट किसको बोलते हैं? मेरा ₹5
लाख बैंक में पड़ा हुआ है। बैंक मुझे हर
साल जो है ₹00 का ब्याज देता है। तो यह जो
₹00 का ब्याज है मेरा नॉर्मल प्रॉफ़िट है।
ठीक है? मैं उस उसको बैंक से निकाल लेता
हूं पैसे को और बिज़नेस करता हूं। हूं।
वहां 7000 कमाता हूं। तो 50 तो मुझे मिल
ही रहा था। अब मैं यहां 70 कमा रहा हूं तो
20,000 का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रहा हूं।
उसको बोलते हैं सुपर प्रॉफिट। वो होगा तभी
गुडविल होगी। फैक्टर्स अफेक्टिंग गुडविल
क्या? नेचर ऑफ़ बिज़नेस। बिज़नेस का नेचर
अच्छा है। है ना? नेचर अच्छा है मतलब प्लस
हाई वैल्यू प्रोडक्ट बना रही है तो भी
गुडविल ज्यादा होगी। अदरवाइज़ गुडविल कम
होगी। अच्छी लोकेशन में बिज़नेस है तो
गुडविल ज्यादा होगी। अदरवाइज़ कम होगी।
एफिशिएंसी ऑफ़ मैनेजमेंट अच्छा मैनेजमेंट
है तो गुडविल अच्छी होगी। खराब मैनेजमेंट
है गुडविल खराब होगी। मार्केट सिचुएशन
मोनोपोली कंडीशन। आप अकेले मालिक हो तो
गुडविल अच्छी होगी। अगर बहुत सारे माल
लेके तो शायद गुड अच्छी नहीं हो। लो
स्पेशल एडवांटेज द फर्म दैट एंजॉय स्पेशल
एडवांटेज लाइक इंपोर्ट लाइसेंस लो रेट
अशर्ड सप्लाई इलेक्ट्रिसिटी लॉन्ग टर्म
कॉन्ट्रैक्ट फॉर सप्लाई मटेरियल वेल नोन
एस कोलैबोरेटर है ना पेटेंट्स ट्रेडमार्क
तो भाई ऐसी कंपनी जिनको ये सारी चीजें
ईजीली मिल जाती हैं उनकी गुडविल ज्यादा
होगी अदरवाइज कम क्यों पड़ती है गुडविल की
जरूरत पड़ती है कोई नया पार्टनर एडमिट
होता है कोई पार्टनर रिटायर होता है किसी
की डेथ होती है रेशियो को चेंज करते हैं
बिनेस बंद कर देते हैं या फिर आप अपना
एमल्गमेशन कर रहे हो दो या दो से ज्यादा
बिज़नेस आपस में जुड़ के एक तीसरा बिज़नेस
बनाते हैं या फिर एक बड़ा बिज़नेस छोटे
बिज़नेस को पूरी तरीके से खा लेता है। उस
सिचुएशन में भी आपको गुडविल की कैलकुलेशन
की जरूरत पड़ती है। अगर मैं मेथड्स की बात
करूं तो आपको पता है तीन तरह के मेथड होते
हैं। एवरेज प्रॉफिट मेथड, सुपर प्रॉफिट
मेथड और कैपिटलाइज़ मेथड। कैपिटलाइजेशन
मेथड। ठीक है? तो एवरेज प्रॉफिट मेथड क्या
है? देखते हैं एक सेकंड। एवरेज प्रॉफिट
मेथड, सुपर प्रॉफिट मेथड और कैपिटलाइजेशन
मेथड। तो, मेथड ऑफ़ वैल्यू्यूएशन ऑफ़
गुडविल। ये रहा मेथड ऑफ़ वैल्यू्यूएशन। ये
रहा एवरेज प्रॉफ़िट, सुपर प्रॉफ़िट और
कैपिटलाइज़ेशन मेथड। एवरेज प्रॉफिट मेथड से
क्या कैसे निकालते हैं गुडविल एवरेज
प्रॉफिट्स इन नंबर ऑफ ईयर परचेस सुपर
प्रॉफिट मेथड से सुपर प्रॉफिट * नंबर ऑफ
ईयर परचेस सुपर प्रॉफिट कैसे निकलेगा
एवरेज माइनस नॉर्मल प्रॉफिट नॉर्मल
प्रॉफिट कैसे निकलेगा कैपिटल एंप्लॉयड
इंटू रेट अप 100 कैपिटल एंप्लॉयड कैसे
निकलेगा एसेट्स माइनस लायबिलिटी या कैपिटल
अकाउंट बैलेंससेस प्लस रिजर्व राइट तो ये
रहा नॉर्मल प्रॉफिट कैसे निकलेगा फर्म की
कैपिटल इंटू रेट अप 100 तो फर्म कैपिटल
इंक्लूड्स पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट बैलेंस
रिज़र्व एंड सरप्लस लेकिन फिक्टीसियस एसेट
और गुडविल को नहीं लेते जब हम कैपिटल
एंप्लॉयड की कैलकुलेट कैलकुलेशन करते
सीयूईटी का मनपसंदीदा सवाल रहता है। ये द
स्टेप्स इनवॉल्व इन द अंडर अंडर दिस मेथड।
तो भ कौन-कौन से स्टेप से कैलकुलेशन की
जाती है? तो सबसे पहले एवरेज प्रॉफिट
निकालो। फिर नॉर्मल प्रॉफिट से सुपर
प्रॉफिट फिर गुडविल। ध्यान रखना एवरेज
प्रॉफिट निकालो। नॉर्मल प्रॉफिट निकालो।
फिर सुपर प्रॉफिट निकलेगा। एवरेज माइनस
नॉर्मल फिर आपका आ जाएगा गुडविल। सुपर
प्रॉफिट नंबर ऑफ ईयर परचेस। तो ये सब तो
हो गया क्लास आपका न्यूमेरिकल पोर्शन। नाउ
तो ये तो हो गया आपका न्यूमेरिकल। अच्छा।
अगला है कैपिटलाइजेशन मेथड। अंडर दिस
मेथड। गुडविल कैन बी कैलकुलेटेड इन टू वेज़
कैपिटलाइजेशन ऑफ़ एवरेज प्रॉफिट,
कैपिटलाइज़ेशन ऑफ़ सुपर प्रॉफिट।
कैपिटलाइजेशन ऑफ़ एवरेज प्रॉफिट से स्टेप्स
क्या-क्या है? तो पहले फार्मूला बताओ क्या
होता है? कैपिटलाइज़ प्रॉफिट माइनस नेट
एसेट। नेट एसेट मतलब एसेट माइनस
लायबिलिटी। कैपिटलाइज़ प्रॉफिट मतलब क्या
होता है? एवरेज प्रॉफिट * 100 / रेट ऑफ
रिटर्न। तो, सबसे पहले एवरेज प्रॉफ़िट
निकालेंगे। फिर कैपिटलाइज़ेशन ऑफ़ एवरेज
प्रॉफ़िट निकालेंगे। फिर फर्म की जो
एक्चुअल कैपिटल है, वह निकालेंगे। और फिर
आपने क्या करना है? कंप्यूट करना है।
कैपिटल ही तो नेट एसेट होता है। फिर आपने
कंप्यूट करना है गुडविल बाय डिडक्टिंग
सेकंड और थर्ड। तो सबसे पहले आप एवरेज
प्रॉफ़िट निकालो। फिर आपने 100 एवरेज
प्रॉफिट टू 100 / रेट ऑफ रिटर्न करो।
कैपिटलाइज़ वैल्यू ऑफ़ बिज़नेस आएगा। उसके
बाद कैपिटल एंप्लॉयड निकालो। और फिर लास्ट
में जो कैपिटलाइज़ वैल्यू ऑफ़ एसेट्स से घटा
दो कैपिटल एंप्लॉयड। आपका गुडविल आ जाएगा
कैपिटाइज़ेशन ऑफ़ सुपर नॉर्मल प्रॉफ़िट से।
अगला है कैपिटलाइज़ेशन ऑफ़ सुपर प्रॉफ़िट। अब
इस सिचुएशन में सबसे पहले कैपिटल निकालो।
फिर नॉर्मल प्रॉफ़िट निकालो। फिर एवरेज
प्रॉफ़िट निकालो। फिर सुपर प्रॉफ़िट निकालो।
फिर सुपर प्रॉफिट * 100/ रेट ऑफ रिटर्न ये
आएगा सुपर प्रॉफिट मेथड से गुडविल का
फार्मूला। इन अदर वर्ड गुडविल इज़
कैपिटलाइज वैल्यू ऑफ़ सुपर प्रॉफिट। द
अमाउंट ऑफ गुडविल वर्क आउट बाय दिस मेथड
इज़ एग्जैक्टली सेम कैलकुलेट बाय
कैपिटलाइजेशन ऑफ़ एवरेज। तो कैपिटलाइजेशन
ऑफ़ सुपर प्रॉफिट मेथड और कैपिटलाइज़ेशन ऑफ़
एवरेज प्रॉफिट मेथड से जो आंसर आएगा
बिल्कुल सेम आएगा। व्हेन न्यू पार्टनर
डज़ंट ब्रिंग एनी गुडविल फॉर कैश। नया
पार्टनर गुडविल लेके नहीं आता तो न्यू
पार्टनर्स करंट अकाउंट डेबिट टू ओल्ड
पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट। लाएगा तो बैंक
अकाउंट डेबिट टू न्यू पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट और फिर लाते ही बढ़ जाएगा नहीं
बैंक अकाउंट डेबिट टू प्रीमियम फॉर गुडविल
नया पार्टनर गुडविल लाएगा और लाते ही बढ़
जाएगा प्रीमियम फॉर गुडविल अकाउंट डेबिट
टू ए और बी पुराने पार्टनर्स में किस
रेश्यो में सैक्रिफाइजिंग रेश्यो के अंदर
व्हेन गुडविल डज नॉट एक्सिस्ट इन द बुक्स
सैक्रिफाइजिंग पार्टनर आर क्रेडिटेड टू
देयर शेयर ऑफ गुडविल एंड न्यू पार्टनर इज़
डेबिटेड तो न्यू टू ओल्ड एंट्री पास होती
है ओल्ड को ही क्या बोलते हैं
सैक्रिफाइजिंग पार्टनर इसलिए न्यू टू
सैक्रिफाइजिंग इन्होंने यहां पे लिख रखा
है। अगला है व्हेन गुडविल एग्ज़िस्ट इन द
बुक्स अगर ओल्ड बैग ओल्ड बुक्स में गुडविल
राइट ऑफ करेंगे ऑल पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट डेबिट टु गुडविल ख़तम बात जन एंट्री
फॉर अंडर दिस मेथड द पार्टनर्स कैपिटल
अकाउंट डेबिट टू गुडविल गुडविल अपीयर इन द
बुक्स रिटन ऑफ नरेशन क्या है गुडविल अपीयर
इन द बुक्स रिटर्न ऑफ गुडविल को हमने राइट
ऑफ कर दिया फॉर न्यू वैल्यू ऑफ़ गुडविल नया
पार्टनर गुडविल लेके नहीं आता तो न्यू टू
ओल्ड हो जाएगा तो जो भी न्यू है इनकम
पार्टनर्स इनकमिंग पार्टनर्स करंट अकाउंट
डेबिट टू सैक्रिफाइजिंग पार्टनर्न कैपिटल
अकाउंट तो न्यू टू ओल्ड तो ओल्ड ही
सैक्रिफाइस करते हैं और जो नया है वो
डेबिट हो जाएगा। ठीक है? तो बस ये कुछ
एंट्रीज हैं। एप्लीकेबिलिटी ऑफ़ एएस 26। अब
ये चीज लिख लो। ये चीज तुम खुद बताना।
तुमने पूरे साल ये चीज कहीं नहीं पढ़ी है।
लेकिन मैं तुम्हें ये चीज भी करा के भेज
रहा हूं कि पेपर में आ गया तो कोई नहीं कर
पाएगा लेकिन तुम कर लोगे। और यही तुम्हें
सीयूईटी में सबसे आगे निकालता है। सीयूईटी
में पेपर आसान आया तो भी टेंशन है। अगर
आसान आ गया तो हर कोई कर लेगा। टफ आया तो
भी टेंशन है। कट ऑफ लो जाएगी। आसान आया तो
भी टेंशन है। कट ऑफ हाई जाएगी। तो पेपर
में वो आप तभी आप सबसे आगे निकलोगे जब वो
सब चीज किसी को नहीं आती और आपको आती है।
तो उन सबके नंबर कम आएंगे पर आपके ज्यादा
आएंगे और आपके एडमिशन हो जाएगा। तो उसमें
से ये एक बहुत जरूरी चीज है। द
एप्लीकेबिलिटी ऑफ़ एएस 26 आपको पता है एएस
26 के अकॉर्डिंग परचेस गुडविल को बुक्स
में दिखाते हैं। सेल्फ जनरेटेड गुडविल को
बुक्स में नहीं दिखाते। तो ये क्या कह रहा
है? ध्यान से समझना। ध्यान से सुनो सारे
बच्चे। एज़ पर द स्टैंडर्ड इंटेंजिबल एसेट
एएस 26 इज़ डिफाइंड ऐज़ एन आइडेंटिफिएबल नॉन
मॉनिटरी विदाउट फिजिकल एग्ज़िस्टेंस। एसेट
हेल्ड फॉर यूज इन द प्रोडक्शन और सप्लाई
गुड्स एंड सर्विज फॉर रेंटल टू अदर्स और
एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पस। सिग्निफिकेंट
रिक्वायरमेंट्स अकॉर्डिंग टू एएस 26 विद
रिस्पेक्ट टू इंटेंजिबल एसेट। तो सबसे
पहला क्या है? इंटेंजिबल एसेट शुड बी
रेग्नाइज़ बाय फुलिंग बाय फुलफिलिंग द
क्राइटेरिया अह रिकॉग्नाइज़ एज़ अंडर एएस
26. एएस 26 कहता है कि कोई भी एसेट
इनटेंजिबल कब होगी? तो, किसी भी एसेट को
वह क्राइटेरिया पूरा करना चाहिए। तभी वह
आप क्लास इनटेंजिबल उसे कह सकते हो। इफ एन
इन एसेट डज़ंट सेटिस्फाई द रेग्नेशन
क्राइटेरिया तो उसको हम लोग खर्चा
मानेंगे। उसको हम गुडविल नहीं मानेंगे।
इंटरनली जनरेटेड गुडविल शुड नॉट बी
रेग्नाइज़। ये तो पढ़ रखा है आपने वही
गुडविल बुक्स में दिखाते हैं। जो परचेस
गुडविल है सेल्फ जनरेटेड को बुक्स में
नहीं दिखाते। अगला है इंटरनली जनरेटेड
ब्रांड क्लास मस्ट हेड्स। ठीक है? एंड
पब्लिशिंग टाइटल एंड अदर अदर सिमिलर इन
सब्सटेंस शुड नॉट बी रेग्नाइज़ एज़
इंटेंजिबल एसेट। इंटरनली जनरेटेड एसेट्स
अदर दन गुडविल ब्रांड एंड मस्ट हेड और
क्लास
मस्ट हेड्स है ना और पब्लिशिंग टाइटल मे
बी रेग्नाइज़ प्रोवाइड बाय देयर सेटिस्फाई
रेग्निशन क्राइटेरिया एज़ प्रिस्राइब बाय
एएस 26 तो देखो किस एसेट को आपने मानना है
इंटेंजिबल एसेट वो एएस 26 आपको बताएगा आप
अपने हिसाब से नहीं मानोगे भले ही अगर
आपने वह खुद बनाई है तब भी खरीदी है तब भी
इंटेंजिबल एसेट शुड बी रिटन ऑफ एज अर्ली
पॉसिबल बट नॉट एक्स एक्सीडिंग एस्टीमेट
लाइफ व्हिच इज़ नॉर्मली शुड नॉट बी बियड 10
ईयर। ध्यान रखना इंटेंजिबल एसेट जितने भी
खरीदी उसे जल्दी से जल्दी आपको राइट ऑफ
करना है बट नॉट एक्सीडिंग द एस्टीमेट
लाइफ। जो एसेट की लाइफ है उससे ज्यादा
नहीं जाना चाहिए। उसके अंदर-अंदर आपको
क्लास उसको राइट ऑफ कर देना है। लेकिन फिर
भी वो 10 साल से ज्यादा नहीं जाना चाहिए।
एएस 26 इंप्ल्लाई दैट परचेस गुडविल को हम
बुक्स में दिखाते हैं। सेल्फ जनरेटेड
गुडविल को बुक्स में नहीं दिखाते और इट
शुड बी रिटन ऑफ इन अ पीरियड नॉट एक्सीडिंग
10 इयर्स। 10 साल के अंदर-अंदर उस परचेस
गुडविल को हमें राइट ऑफ करना है। मतलब कि
बैलेंस शीट से उठा के पीएंडएल के अंदर
भेजना है। और सेल्फ जनरेटेड गुडविल इज़ नॉट
अकाउंटेड। उसको हमें बुक्स में दिखाना ही
नहीं है। जो हमारी सेल्फ जनरेटेड गुडविल
है उसको दिखाना ही नहीं है हमें बुक्स
में। ठीक है? नेक्स्ट है हिडन गुडविल।
समटाइम द वैल्यू ऑफ़ गुडविल इज़ नॉट गिवन अ
टाइम ऑफ़ एडमिशन ऑफ़ अ न्यू पार्टनर। इन सच
सिचुएशन इट हैज़ टू बी इनफर्ड। ध्यान रखना
हिडन गुडविल को ना इनफर्ड गुडविल भी कहते
हैं। इनफर्ड फ्रॉम द अरेंजमेंट ऑफ़ द
कैपिटल एंड प्रॉफ़िट शेयरिंग रेशियो। नए
पार्टनर की कैपिटल और नए पार्टनर की
प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो के मदद से हम वो
गुडविल निकालते हैं। एडजस्टमेंट्स इन
एक्यूमुलेटेड प्रॉफिट लॉसेस सम टाइम अ
फर्म मे हैव एक्यूमुलेटेड प्रॉफिट्स नॉट
गेट ट्रांसफर टू कैपिटल अकाउंट ऑफ़ पार्टनर
दीज़ आर यूजली इन फॉर्म ऑफ़ जनरल रिजर्व
पीएंडएल द न्यू पार्टनर इज़ नॉट एंटाइटल
एनी शेयर इन सच एक्यूमुलेटेड प्रॉफिट्स।
वो आज आया है तो हमारे पास जो भी हमने
पुराना शेयर इकट्ठा किया हुआ है उसमें
उसको कुछ नहीं मिलेगा। दीज़ आर
डिस्ट्रीब्यूट अमंग द पार्टनर्स इन देयर
ओल्ड प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो। कैपिटल
अकाउंट या करंट अकाउंट कहीं भी ट्रांसफर
करो लेकिन ओल्ड प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो
में उसको हम ट्रांसफर करेंगे। ये सब
क्वेश्चन बन जाएंगे बेटा जो मैंने तुमको
करा रखे हैं उस बेसिस पे। रिवैल्यूएशन एट
अ टाइम ऑफ़ एडमिशन ऑफ़ न्यू पार्टनर इज़
ऑलवेज डिस डिज़ायरेबल टू असर्टेन वेदर द
एसेट्स ऑफ़ द फर्म आर शोन इन द बुक्स और
देयर करंट वैल्यू। इन सच केस एसेट्स आर
ओवरस्टेड और अंडरस्टेड। दीज़ आर रिवैल्यूड।
अगर कभी भी कोई भी नया पार्टनर आता है,
कोई पार्टनर रिटायर होता है, किसी की डेथ
होती है या फिर अपनी रेशियो को चेंज करते
हैं। हमें ज़रूरी है हमें निकाल लेना
रिवैल्यूएशन का गेन लॉस कि एसेट और
लायबिलिटी की दोबारा वैल्यू्यूएशन करके
कोई फायदा कोई नुकसान तो नहीं हो रहा। द
गेन और लॉस ऑन रिवैल्यूएशन ऑफ़ ईच एसेट एंड
लायबिलिटी इज़ ट्रांसफरर्ड टू देयर अकाउंट
एंड फाइनली इट्स बैलेंस ट्रांसफर टू
कैपिटल अकाउंट इन ओल्ड प्रॉफिट शेयरिंग
रेशियो। कुल मिला के रिवैल्यूएशन का जो भी
गेन और जो भी लॉस है, वह पुराने पार्टनर्स
में बट जाएगा। उन्हीं की
ओल्ड रेशियो के अंदर। अगला है रिटायरमेंट
एंड डेथ। रिटायरमेंट एंड डेथ। एसेट
रिटायरमेंट के अंदर क्या-क्या? अब जो भी
पार्टनर छोड़ के जा रहा है वो क्या-क्या
लेके जाएगा और उसको एक पब्लिक नोटिस देना
है। तभी उसकी लायबिलिटी बिनेस से खत्म
होगी। जो भी पार्टनर छोड़ के जा रहा है
उसको हम कैपिटल बैलेंस देंगे। क्रेडिट
बैलेंस क्रेडिट बैलेंस ऑफ़ करंट अकाउंट
देंगे। उसके हिस्से की गुडविल देंगे।
एक्यूमुलेट प्रॉफिट देंगे। रिवैल्यूएशन का
गेन जो भी आ रहा है या लॉस आ रहा है
लेंगे। गेन आ रहा है देंगे। हिज़ शेयर ऑफ़
प्रॉफ़िट। उसके हिस्से का प्रॉफिट देना है
अप टू रिटायरमेंट या अप टू डेथ इंटरेस्ट
ऑन कैपिटल देना है सैलरी देना है करंट
अकाउंट का बैलेंस लेना है उससे उसके
हिस्से की गुडविल देनी है जो बैलेंस शीट
में गुडविल है वो लेना है एक्यूमुलेट
लॉसेस को लेना है है ना रिवैल्यूएशन का
गेन दिया था लॉस लेना है आपने और उसका
हिस्से का लॉस लेना है अप टू डेट ऑफ़
प्रॉफिट ड्रॉइंग और इंटरेस्ट ड्रॉइंग ये
सारी चीजें हमें उससे लेनी है। अगर नए
रेशियो की बात करें कंसीडर द फॉलोइंग
सिचुएशन नॉर्मली द कंटिन्यूइंग पार्टनर
एक्वायर द शेयर ऑफ रिटायरिंग पार्टनर इन
देयर ओल्ड प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो ध्यान
रखना जो रिमेनिंग पार्टनर है वो रिटायरिंग
पार्टनर को जो गुडविल देते हैं वो ओल्ड
रेश्यो में देते हैं। ठीक है? एंड देयर इज़
नो नीड टू कंप्यू्यूट द न्यू रेशियो न्यू
रेशियो एज़ इट इज़ सेम एज ओल्ड प्रॉफिट
शेयरिंग रेशियो। ए बी सी तीन पार्टनर बी
चला गया। तो A और C की जो रेश्यो है वही
न्यू रेशियो वही गेनिंग रेशियो। तो ये कह
रहा है आपको कैलकुलेट नहीं करना है। दी
कंटिन्यूइंग पार्टनर मे एक्वायर जो बचे
हुए जो पार्टनर है वो प्रॉफिट ले सकते हैं
रिटायरिंग पार्टनर से डिसीज पार्टनर से।
अगर कुछ नहीं लिखा तो अपनी ही शेयरिंग में
वो रेशियो ले लेंगे। मतलब ए बी सी की
रेशियो 3 1 है। टू वाला चला गया 3:1 में
वो रिमेन जो पार्टनर छोड़ के जा रहा है
उससे शेयर 3:1 में लेंगे। अगर क्वेश्चन
साइलेंट है तो और क्वेश्चन कह रहा है इस
रेशियो में देंगे तो फिर उस रेशियो में दे
दो। द रेशियो इन व्हिच कंटिन्यू पार्टनर
हैव एक्वायर्ड द शेयर फ्रॉम द रिटायरिंग
पार्टनर। तो रिटायरिंग पार्टनर से शेयर ले
रहा है कंटिन्यूइंग पार्टनर तो उसे क्या
बोलते हैं? उस रेश्यो को क्या बोलते हैं?
गेनिंग रेश्यो। और गेनिंग रेशियो का
फार्मूला क्या होता है? न्यू रेश्यो माइनस
ओल्ड रेश्यो।
ठीक है? तो न्यू शेयर माइनस ओल्ड शेयर आ
जाएगा आपका गेनिंग। और ओल्ड शेयर प्लस
एक्वायर शेयर करेंगे तो क्या आ जाएगा
आपका? न्यू रेश्यो। व्हेन गुडविल डज़ंट
अपीयर इन द बुक्स। गुडविल अपीयर नहीं है
बुक्स में। एडिशन पॉइंट में गुडविल है। तो
आप एंट्री क्या पास करोगे? रिमेनिंग टू
रिटायरिंग इन गेनिंग रेशियो या गेनिंग टू
सैक्रिफाइजिंग बोल सकते हैं। जो पार्टनर
गेन कर रहा है वो जो रिटायर कर रहा है वो
नीचे आ जाएगा। किस किस रेशियो में एंट्री
पास होगी? इन गेनिंग रेशियो नॉट
सैक्रिफाइजिंग इन गेनिंग रेशियो। इट मे
आल्सो हैपन दैट एज अ रिजल्ट ऑफ़ डिसीजन ऑन
द न्यू प्रॉफिट शेयरिंग रेशियो अमंग द
रिमेनिंग पार्टनर अ कंटिन्यूइंग पार्टनर
मे आल्सो सैक्रिफाइस। ऐसा भी हो सकता है
कि किसी के जाने से रिमेनिंग पार्टनर गेन
नहीं कर रहे। उसमें से एक बंदा सैक्रिफाइस
और कर रहा है। इट मे हैपन। ऐसा हो सकता है
और उस केस में मैंने समझाया था क्या करना
है? माइनस का साइन जिसका लगा है उसकी साइड
को चेंज कर दो और चेंज करने के बाद
मल्टीप्लाई पूरे फर्म की गुडविल से करो।
तो गेन की जगह कोई पार्टनर सैक्रिफाइस
करता है तो साइड को चेंज करके मल्टीप्लाई
पूरे फर्म की गुडविल से करना है। अगर कोई
पार्टनर बीच से छोड़ के चला जाता है।
नॉर्मली रिटायरमेंट ऑफ़ अ पार्टनर टेक
प्लेस एट द एंड ऑफ़ द एकाउंटिंग ईयर। बट
देयर कैन बी केस व्हेयर अ पार्टनर डिसाइड
टू रिटायर इन द मिडिल ऑफ़ द ईयर। इन सच केस
द क्लेम शैल इंक्लूड द शेयर ऑफ़ प्रॉफिट।
उसके हिस्से का प्रॉफिट देंगे, लॉस चार्ज
करेंगे, आईओसी देंगे। आईओ डी चार्ज
करेंगे, ड्रॉइंग चार्ज करेंगे फ्रॉम द डेट
ऑफ़ लास्ट बैलेंस शीट टू टिल द डेट ऑफ़
रिटायरमेंट। हियर द मेन प्रॉब्लम रिलेट द
कैलकुलेशन ऑफ़ प्रॉफिट कि भ प्रॉफिट कैसे
निकालेंगे? हमारा प्रॉफिट साल के एंड में
आने वाला था। आज आप छोड़ के चले गए तो ये
अंदाजे से प्रॉफिट कैसे निकालेंगे? वो एक
मेन प्रॉब्लम है। अदरवाइज़ कोई प्रॉब्लम
नहीं है। जो छोड़ के जाना चाहता है उसको
उसका पेमेंट कर देंगे। डिस्पोजल ऑफ़ अमाउंट
ड्यू टू रिटायरिंग पार्टनर। कैसे देंगे?
ध्यान रखना। आउटगोइंग पार्टनर अकाउंट इज़
सेटल एज़ पर द टर्म्स ऑफ़ पार्टनरशिप डीड इन
लमसम इमीडिएटली और वेरियस इंस्टॉलमेंट।
तुरंत दे देंगे या किस्तों में दे देंगे।
इसके लिए लोन अकाउंट आपने सीखा हुआ है विद
और विदाउट इंटरेस्ट दे सकते हैं। जो उनके
बीच में एग्री हुआ है वो। लेकिन इन द
एब्सेंस ऑफ़ एग्रीमेंट अगर आपने कोई भी
एग्रीमेंट नहीं बनाया तो कौन सा सेक्शन
लिख लेना। सेक्शन 37 ऑफ़ इंडियन पार्टनरशिप
एक्ट 1932 कहता है इज़ एप्लीकेबल जो कहता
है भैया 6% का इंटरेस्ट मिलेगा जो पार्टनर
छोड़ के जा रहा है उसके बैलेंस पे। ठीक है?
तो रिटायरिंग पार्टनर को पे करोगे कैश। तो
रिटायरिंग पार्टनर्स टू कैश। लोन में
डालोगे रिटायरिंग पार्टनर्स टू रिटायरिंग
पार्टनर्स लोन अकाउंट। दैट्स इट। खत्म।
नेक्स्ट है डेथ ऑफ अ पार्टनर। बिल्कुल सेम
टू सेम जो रिटायरमेंट का कांसेप्ट है सेम
टू सेम वही डेथ का कांसेप्ट है। है ना? तो
क्या लिखा है डेथ में? गेनिंग पार्टनर
कैपिटल अकाउंट टू प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट।
ध्यान रखना रिमेनिंग टू रिटायरिंग है।
इसको गेनिंग टू सैक्रिफाइजिंग भी बोलेंगे।
जो सबसे पहला एक सेकंड एक सबसे पहले
इन्होंने क्या किया? सबसे पहले डिसीज
पार्टनर का शेयर ऑफ प्रॉफिट जो है ना वो
इन्होंने ट्रांसफर किया प्रॉफिट एंड लॉस
में। देखो सबसे पहले जब कभी भी डेथ होती
है जिसकी डेथ हो रही है उसके हिस्से का
प्रॉफिट देने के लिए अभी एंट्री पास करते
हो पीएंडएल सस्पेंस अकाउंट डेबिट टू डिसीज
पार्टनर्स कैपिटल अकाउंट और लॉस हो गया तो
डिसीज पार्टनर कैपिटल अकाउंट डेबिट टू
पीएंडएल सस्पेंस तो ये वही प्रॉफिट को
कैपिटल में डालने की एंट्री है। अब
प्रॉफिट कैसे निकालेंगे? या तो पिछले साल
के बेसिस पे या एवरेज बेसिस पे या फिर
क्लास हम सेल्स बेसिस पे निकाल सकते हैं।
लेटर प्रॉफिट एंड लॉस सस्पेंस अकाउंट इज़
क्लज़। फिर यह जो पीडल सस्पेंस अकाउंट है
उसको क्लज़ करेंगे। तो गेनिंग पार्टनर्स टू
पीएंडएल सस्पेंस या फिर डायरेक्टली एंट्री
कर सकते हो गेनिंग टू डिसीज या फिर
रिमेनिंग टू डिसीज। ठीक है? और यह किसकी
एंट्री थी? जरा मुझे बताओ। किसकी एंट्री
थी? यह एंट्री थी प्रॉफिट लॉस की। ठीक है?
यह क्वेश्चन है। आप चाहो तो अपने आप बना
सकते हो। नेक्स्ट है डिसोल्यूशन। बहुत
इंपॉर्टेंट है। डिसोल्यूशन से ना थ्योरी
आती है बच्चे। तो बहुत जरूरी है।
ध्यान से समझना। दिन-रा मेहनत चल रही है
क्लास। आंखों आंखों की पलकें इतनी भारी हो
गई थोड़ा सा भी झुकाते ही ना ऐसा लगता है
कि ट्रूली बता रहा हूं अपनी रोजी पे खड़ा
हूं। ऐसा लगता है कि खड़े-खड़े यहीं पड़
जाऊं बस नीचे वीडियो बनती रहेगी बाद में
एडिट करके डाल दूंगा। इतनी थकान इतनी बॉडी
टूट चुकी है। लेकिन मैं जानता हूं पांच
दिन बहुत कम होता है अकाउंटेंसी का पूरा
सिलेबस रिवीजन कराने के लिए। स्पेशली जब
आप फिजिकल पढ़ के आए हो सब कुछ दिमाग से
जा चुका है। तो मैं बहुत तन मन धन से आप
लोगों के लिए मेहनत कर रहा हूं। तो प्लीज
थोड़ा सा अच्छे से पढ़ाई करो घर पे। कुछ
दिन और पढ़ लो। सब अच्छे से हो जाएगा। ठीक
है? डोंट वरी। डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप
एज स्टेटेड अर्लियर डिसोल्यूशन ऑफ़
पार्टनरशिप चेंजज़ द एकज़िस्टिंग रिलेशनशिप
इन पार्टनर्स बट फर्म मे कंटिन्यू इट्स
बिज़नेस बिफोर। पहले फर्म चलता था अब नहीं
चलेगा। तो भैया इस सिचुएशन के अंदर
क्या-क्या होगा क्लास? इन अदर द फॉलोइंग
केसेस चेंज इन द एकज़िस्टिंग प्रॉफिट
शेयरिंग रेशियो, एडमिशन ऑफ़ अ न्यू
पार्टनर, रिटायरमेंट, डेथ है ना? ये सारी
चीजें तो रिकॉन्स्टिट्यूशन था यानी
डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप था। लेकिन
डिसोल्यूशन ऑफ़ फर्म में क्या है?
पार्टनरशिप पूरी तरीके से बंद हो चुका है।
अब क्लास। ये देखो डिसोल्यूशन ऑफ अ
पार्टनरशिप फर्म मे टेक प्लेस विदाउट द
इंटरवेंशन ऑफ कोर्ट और बाय कोर्ट ऑर्डर।
ये भी देखो पेपर में सवाल आ चुका है कि भ
डिसोल्यूशन जो होगा क्या वो कोर्ट ऑर्डर
से होगा? सिर्फ नहीं बिना कोर्ट ऑर्डर के
भी हो सकता है, कोर्ट ऑर्डर से भी हो सकता
है। इट मे नोटेड दैट डिसोल्यूशन ऑफ़ फर्म
नेसली ब्रिंग अ डिज़ ऑफ़ पार्टनरशिप। अगर
फर्म बंद हो गई, तो पार्टनरशिप भी समझ लो
खत्म हो गई। हाउएवर पार्टनरशिप वुड नॉट
नेसेसरी द इनवॉल्व ऑफ़ डिसोल्यूशन ऑफ़ फर्म।
अगर पार्टनरशिप खत्म हो गई, तो फर्म खत्म
हो जाएगी। इसकी कोई गारंटी नहीं। लेकिन
फर्म खत्म हो गई तो पार्टनरशिप भी जो खत्म
हो गई।
तो डिसोल्यूशन ऑफ़ फर्म टेक प्लेस इन द
फॉलोइंग वेज़। पहला बाय एग्रीमेंट। बहुत
इंपॉर्टेंट पेज है जो मैं तुम्हें करा रहा
हूं। बाय एग्रीमेंट यानी प्रॉपर एग्रीमेंट
बना के सबकी सहमति लेके बिज़नेस को बंद कर
सकते हैं। बीच में कॉन्ट्रैक्ट बना सकते
हैं आपस में। सेकंड पॉइंट है आपका कंपलसरी
डिसोल्यूशन। जब बंद करना अनिवार्य हो जाए।
जब सारे पार्टनर को छोड़ के सारे पार्टनर
इनॉल्वेंट हो जाए एक को छोड़ के। व्हेन
बिज़नेस ऑफ़ फर्म बिकम इललीगल। इललीगल
बिज़नेस हो गया। और सम व्हेन समवन इवेंट
हैज़ टेकन प्लेस व्हिच मेक्स इट अनलॉफुल
फॉर द पार्टनर्स टू कैरी इन द बिज़नेस। कुछ
ऐसा हो गया जिस जैसे आपका बिजनेस अनलॉफुल
हो जाएगा। कोई नया नियम कानून आ गया भैया
आज के बाद आपका बिज़नेस इललीगल हो गया। ऑन
हैपनिंग ऑफ़ सर्टेन कंटिंजेंसी सर्टेन
इवेंट तो क्या-क्या हो सकता है? जब टर्म
पूरा हो गया है ना तो आप बिज़नेस को बंद कर
दोगे। इट इफ कॉन्स्टिट्यूट टू कैरी ऑन वन
और मोर वेंचर बाय कंप्लीशन देयर फॉर वन और
मोर वेंचर इफ कॉन्सट्यूट टू कैरी एक से
ज्यादा वेंचर कर रहे हो बाय कंप्लीशन देयर
ऑफ या फिर बाय डेथ ऑफ अ पार्टनर एजुकेशन
ऑफ अ पार्टनर एंड सॉल्वेंट डिसोल्यूशन बाय
नोटिस इन सब केस में क्या होता है
डिसोल्यूशन बाय हैपनिंग ऑफ सर्टेन
कंटिंजेंसीज और सर्टेन इवेंट याद है
डिसोल्यूशन बाय नोटिस आप प्रॉपर नोटिस
देके बिज़नेस को बंद कर सकते हो कोर्ट भी
तुम्हारे बिज़नेस को बंद करा सकता है जो
तुम्हारा पार्टनर दिमाग से खराब हो जाए या
परमानेंटली इनकैपेबल हो जाए कि मैं ड्यूटी
नहीं कर सकता है एज अ पार्टनर तो कोर्ट
आपको ऑर्डर देगी भैया अपना बिज़नेस जो है
वह बंद कर लो। जब पार्टनर कोई गलत काम
करेगा और पकड़ा जाएगा मिसकंडक्ट करते हुए
गिल्टी करते हुए पकड़ा जाएगा तब बिज़नेस
बंद होगा। जब क्लास कंटिन्यू कॉन्ट्रैक्ट
को तोड़ रहे हो तो भी आपका बिजनेस बंद हो
जाएगा। पार्टनर ने अपना सारा इंटरेस्ट
किसी थर्ड पार्टी को दे दिया तो भी बिज़नेस
बंद हो जाएगा। मतलब मैं कह रहा हूं भैया
मैं तो पार्टनर हूं लेकिन मैं इसको पावर
दे रहा हूं। यह तुम्हारे साथ रहेगा आज के
बाद। तो भैया ऐसे नहीं कर सकता वो। ठीक
है? व्हेन अ पार्टनर ट्रांसफर द होल ऑफ
हिज इंटरेस्ट। अपना पूरा इंटरेस्ट। आपने
सारी चीजें किसी और को दे दी कि भ यही
मालिक है। अब सब कुछ यही है। तो ऐसा आप
नहीं कर सकते। व्हेन अ बिज़नेस ऑफ़ द फर्म
कैन नॉट बी कैरी। ये कह रहा है कि भैया
अगर आपका बिज़नेस सिर्फ और सिर्फ लॉस में
ही चलेगा। चलेगा तो नहीं तो नहीं चलेगा।
तो कोर्ट कहेगी भैया एक काम करो तू भाई
बंद कर दे। बिज़नेस तेरे से ना हो पाएगा।
डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनरशिप में क्या होता
है? द बिनेस इज़ नॉट टर्मिनेट। बिज़नेस
कंटिन्यू रहता है। यहां पे बिज़नेस बंद हो
जाता है। एसेट्स सेटलमेंट क्या होगा?
एसेट्स एंड लायबिलिटी रिवैल्यूएशन की जाती
है नई बैलेंस शीट बनाते वक्त। और यहां पे
एसेट्स और लायबिलिटी की पेमेंट की जाती
है। कोर्ट इंटरवेंशन डिसीजन ऑफ़ पार्टनरशिप
में कोर्ट इंटरवेंशन नहीं करता लेकिन
डिसीजन ऑफ़ फर्म में कोर्ट इंटरवेंशन करता
है। यहां पार्टनर्स के बीच किसी प्रकार का
रिलेशनशिप इस्टैब्लिश होता है। यहां पे
किसी प्रकार का कोई रिलेशनशिप पार्टनरशिप
का नहीं है। वो एंड हो गया। क्लोज़र ऑफ़
बुक्स डू नॉट रिक्वायर एनी क्लोज़र बिकॉज़
बिज़नेस टर्मिनेट नहीं हुआ। लेकिन यहां पे
बिज़नेस बंद हो गया। तो भाई बुक्स को सबसे
पहले क्लोज करोगे। बेटा ये बहुत ज्यादाेंट
था। सबसे ज्यादा इसका आप प्लीज स्क्रीनशॉट
ले लो। दिस पेज इज वेरी वेरी वेरीेंट। तो
प्लीज इसका स्क्रीनशॉट ले लो।
क्या है जरा देखते हैं। इन द कॉन्टेक्स्ट
इफ शुड बी इट शुड बी नोटेड दैट सब्जेक्ट
टू एग्रीमेंट अमंग द पार्टनर द फॉलोइंग
रूल एज प्रोवाइडेड इन सेक्शन 48 ऑफ
पार्टनरशिप एक्ट 1932 शैल अप्लाई
ट्रीटमेंट ऑफ लॉसेस
लॉसेस इंक्लूडिंग डेफिशिएंसी ऑफ़ कैपिटल
शैल बी पेड फर्स्ट आउट ऑफ प्रॉफिट नेक्स्ट
आउट ऑफ कैपिटल लास्टली क्लास क्या करेंगे
पार्टनर्स देंगे अपनी प्रॉफिट शेयरिंग
रेशियो में ध्यान रखना लॉस का ट्रीटमेंट
क्या होगा लॉस की भरपाई पहले प्रॉफिट से
की जाएगी फिर कैपिटल से फिर जो भी बचेगा
पार्टनर अपनी प्रॉफिट शेयरिंग में उसको
लॉस को बियर करेंगे। एप्लीकेशन ऑफ़ एसेट
बहुतेंट है। ध्यान रखना लिख लो कॉपी में
या कमेंट्स में सारे बच्चे लिखो। सेक्शन
48 सीयूईटी का फेवरेट सवाल था ये। अब इस
साल सैंपल पेपर में भी दे दिया। तो याद
रखना जो सीयूईटी में आ रहा है वो कहीं ना
कहीं सीबीएसई भी उसको अडॉप्ट कर रही है।
तो बी केयरफुल मैं वो सारी चीजें करा के
ही चल रहा हूं आपको। एप्लीकेशन ऑफ़ एसेट्स।
आप एसेट को बेचोगे तो कैसे-कैसे पे करोगे?
पहला इन पेइंग द डेप्ट ऑफ द फर्म टू द
थर्ड पार्टी। पहले पेमेंट थर्ड पार्टी को
होगी। फिर पेमेंट हर पार्टनर जो है उसके
लोन की की जाएगी। फिर कैपिटल की और फिर जो
बचा कुचा पार्टनर्स प्रॉफिट रेशियो में
बांट लेंगे। प्राइवेट डेप्ट और फर्म डेप्ट
के बारे में मैं सिंपल कहानी समझा देता
हूं। मेरे पास प्राइवेट डेप्ट है। ठीक है?
तुम और मैं पार्टनर है। तुम दोनों तुम और
मैं पार्टनर है। मेरे पास प्राइवेट डेप्ट
है और प्राइवेट घर है। प्राइवेट गाड़ी है।
तो मैं प्राइवेट प्रॉपर्टी को बेच के पहले
प्राइवेट डेप्ट की पेमेंट करूंगा। पड़ोसी
की पेमेंट करूंगा। रिश्तेदारों की पेमेंट
करूंगा। उसके बाद जो बचेगा वो मैं बिजनेस
के अंदर लेके आऊंगा। बोलोगे देखो मैं घर
घर बाहर बेच के इतना पैसा लेके आया हूं।
उसी तरीके से फर्म की प्रॉपर्टी को बेच के
पहले फर्म के कर्जों की पेमेंट की जाएगी।
फिर बचा कुचा पार्टनर्स के अंदर बांट दिया
जाएगा और पार्टनर उस पैसे से घर लाएगा और
अपने प्राइवेट डेप्ट की पेमेंट करेगा। तो
यह ध्यान रखना जिसका डेप्ट है उसकी पेमेंट
पहले होती है। प्राइवेट डेप्ट की पेमेंट
पहले प्राइवेट प्रॉपर्टी से करोगे। फर्म
डेप्ट की पेमेंट फिर फर्म प्रॉपर्टी से
करोगे पहले। ठीक है? अभी आधा भी नहीं हुआ
है क्लास। ये इशू ऑफ शर्स बहुत बड़ा
चैप्टर है। ध्यान से अच्छे से समझना
क्योंकि मैं वन शॉट के अंदर पूरी की पूरी
एनसीईआरटी करा रहा हूं। एक-एक चीज एंट्री
वगैरह सब कुछ ऑल द अफेयर्स ऑफ द कंपनी आर
गवर्न एस पर द प्रोविजन ऑफ़ कंपनीज़ एक्ट
2013 द कंपनी मींस अ कंपनी इनकर्पोरेट और
रजिस्टर्ड अंडर द कंपनीज़ एक्ट। 2013 के
अकॉर्डिंग जो भी रजिस्टर्ड हुई है कंपनीज़
एक्ट में उसको हम लोग बोलते हैं कंपनी। और
बेसिकली कंपनी जो बनती है कंपनी की अगर हम
बात करें यहां पे तो सबसे पहली जो चीज है
वो है बॉडी कॉर्पोरेट्स। कंपनी क्या है
क्लास? बॉडी कॉरपोरेट है। अ कंपनी इज़
फॉर्म अकॉर्डिंग टू द प्रोविज़ ऑफ़ लॉ
इनफोर्स फ्रॉम टाइम टाइम। कंपनी बनती
किससे है? लॉ से। सेपरेट लीगल एंटिटी
कानूनी की नजरों में एक अलग पहचान है। आप
मुकद मुकेश अंबानी पे मुकदमा नहीं कर
सकते। क्योंकि मुकेश अंबानी अलग है।
Reliance अलग है। तो Reliance की कानूनी
नजर में अलग पहचान है। आप Reliance के नाम
पे मुकदमा करो। कंपनी में सारे मेंबर्स की
लायबिलिटी लिमिटेड होती है। तभी हर कंपनी
के नाम की आई क्या लिखा रहता है? लिमिटेड।
अगर मैंने किसी कंपनी में ₹1 लाख लगाया तो
मेरा ₹1 लाख डूबेगा। उससे ज्यादा नहीं
जाएगा। पार्टनरशिप में जबकि लायबिलिटी
अनलिमिटेड होती है। परपचुअल सक्सेशन कंपनी
कैन बी टर्मिनेटेड ओनली थ्रू लॉ। कंपनी को
बनाया लॉ के थ्रू जाता है। कंपनी को मारा
भी लॉ के थ्रू जाता है। कंपनी बंद करना
हो, खत्म करना हो, है ना? वाइंड अप करना
हो तो भैया वो लॉ के थ्रू ही होगा। और कोई
तरीका नहीं कंपनी बंद करने का कि छोड़ो
मैं अपनी दुकान का शटर गिरा रहा हूं। मैं
जा रहा हूं। है ना? ऐसा नहीं कह सकते।
आपको प्रॉपर तरीके से एक प्रोसेस होता है।
उसको फॉलो करना पड़ेगा। तब कंपनी जाके बंद
होती है। ठीक है? और परपेचुअल सक्शन कंपनी
हमेशा चलती रहती है। ओनर मर जाए कोई फर्क
नहीं पड़ता। रतन टाटा जी नहीं रहे लेकिन
फिर भी जो टाटा एंटरप्राइजज़ है वो चल रही
है और वो आगे चलती रहेगी हमेशा कंपनी की
क्लास एक सील होती है जिसको बोलते हैं
सिग्नेचर ट्रांसफरेबिलिटी ऑफ़ शेयर्स एक
दूसरे को आप ईजीली शेयर्स को ट्रांसफर कर
सकते हो मे सू ऑड टू बी सूट आप आप एज अ
कंपनी किसी और के ऊपर मुकदमा कर सकते हो
और कंपनी आपके ऊपर भी कोई और मुकदमा कर
सकता है तो कंपनी की सेपरेट लीगल एंटिटी
है कंपनी के टाइम टाइप्स की बात करें पहला
है कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स अब ये सब चीज
देखो एनसीआरटी के अंदर है तो क्या पता पूछ
पूछ लिया जाए तो बिल्कुल भी मिस मत करना।
सीयूईटी तो कुछ भी निचोड़ के पूछ लेता है।
बट 12th में भी धीरे-धीरे पॉलिसी फॉलो हो
रही है। पेपर टफ आ रहे हैं। फिजिकल उसका
तो देखा ही था आपने मैथमेटिक्स का कैसा
हुआ 10थ वालों का। तो कहीं ना कहीं वो भी
सीबीएसई कंडक्ट कराती है। तो सीबीएसई पेपर
टफ भी बना सकती है। तो बी केयरफुल। ठीक
है? मैं डरा नहीं रहा। मैं करा तो सारा
कुछ दूंगा। उसके अंदर से आएगा। लेकिन आपको
पढ़ के चलना पड़ेगा। राइट? हलवा मत समझना
इसको। कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स। इन दिस
केस द लायबिलिटी ऑफ़ इट्स मेंबर इज़ लिमिटेड
टू द एक्सटेंट ऑफ़ नॉमिनल वैल्यू ऑफ़ शेयर्स
सेल्ड बाय देम। आपके पास जितने रुपए के
शेयर्स हैं उसकी जो फेस वैल्यू है ना वो
तो भाई लिमिटेड है वो आपका डूबेगा नहीं वो
तो आपको मिलेगा ही मिलेगा बाकी पार्ट का
क्लास कोई गारंटी नहीं है कंपनी लिमिटेड
बाय गारंटी इन दिस केस द लायबिलिटी ऑफ़ ऑल
मेंबर्स टू द अमाउंट दे अंडरटेक टू
कंट्रीब्यूट द इवेंट ऑफ द कंपनी बीइंग
वाउंड ऑफ तो भैया गारंटी है कि आपका पैसा
जो है वो डूबेगा नहीं लायबिलिटी जो भी
पार्टनर्स की है क्लास वो पार्टनर्स
कंट्रीब्यूट करेंगे जब बिज़नेस बंद होगा तब
इन केस इन दिस केस द लायबिलिटी ऑफ़ इट्स
पार्टनर इज़ लिमिटेड यहां पे पार्टनर की
लायबिलिटी लिमिटेड है। है ना? भाई आपने
जितना पैसा लगाया उतना डूबेगा। उससे
ज्यादा नहीं डूबेगा। अनलिमिटेड कंपनी
व्हेन देयर इज़ नो लिमिट ऑफ़ द लायबिलिटी।
यह अनलिमिटेड कंपनी है। तो यहां पे ये
पार्टनरशिप जैसा हो गया। जितना भी जाएगा
सब कुछ जो है डूब जाएगा। आपको प्राइवेट
प्रॉपर्टी को भी देना पड़ेगा। ऑन द बेसिस
ऑफ़ द फर्म मेंबर। कंपनीज़ आर डिवाइड इंटू
टू कैटेगरीज़। मेंबर के बेसिस पे थ्री
कैटेगरीज़ हैं। सॉरी पब्लिक कंपनी। अ
पब्लिक कंपनी मींस अ कंपनी व्हिच इज़ नॉट अ
प्राइवेट कंपनी। यह डेफिनेशन है। प्राइवेट
कंपनी नहीं है वो पब्लिक कंपनी है।
प्राइवेट कंपनी कौन सी है? जो पब्लिक
कंपनी नहीं है वो प्राइवेट कंपनी है। ऐसा
नहीं। सिर्फ पहले वाले के लिए बोला है।
पब्लिक कंपनी वो कंपनी है जो प्राइवेट
कंपनी नहीं है। और प्राइवेट कंपनी वो
कंपनी है जो शेयर्स को फ्रीली ट्रांसफर
नहीं कर सकते। अ प्राइवेट कंपनी मस्ट हैव
दो पर्सन होने चाहिए। क्लास एटलीस्ट वन
पर्सन इन केस वन पर्सन के अंदर एक पर्सन
होगा। ठीक है? वन पर्सन कंपनी मतलब जहां
पे एक ही इंसान मालिक होगा। लिमिट द नंबर
ऑफ इट्स मेंबर टू 200 एक्सक्लूडिंग
एंप्लाइजज़। तो भैया 200 लोग आपके पास
मैक्सिमम हो सकते हैं। प्राइवेट कंपनी में
मैक्सिमम की लिमिट है। अनगिनत लोग हो सकते
हैं। लेकिन पब्लिक कंपनी में मैक्सिमम
कितने मेंबर होते हैं? 200 और ये
एक्सक्लूडिंग इट्स करंट और पास्ट
एंप्लाइजज़ जो पास्ट एंप्लाइजज़ भी शेयर
होल्डर होते हैं। कंपनी के शेयर लिए होते
हैं। तो उनको काउंट नहीं करेंगे 200 के
अंदर। वन पर्सन कंपनी जहां एक ही कम एक ही
इंसान होगा। सेक्शन टू सब टू क्लॉज़ 62
बताता है कि वन पर्सन कंपनी में एक ही
मेंबर होता है। है ना? रूल थ्री ऑफ़ कंपनीज़
कॉ इनकॉर्पोरेशन रूल 2014 प्रोवाइड करता
है। ओनली अ नेचुरल पर्सन बीइंग एन इंडियन
सिटीजन एंड रेजिडेंट इन इंडिया कैन बी कैन
बी फॉर्म वन पर्सन कंपनी। तो भैया नेचुरल
पर्सन होना चाहिए। इंसान होना चाहिए।
इंडिया का रेजिडेंट होना चाहिए। सिटीजन
होना चाहिए। वही कंपनी बना सकता है। इट
कैन नॉट कैरिड आउट फॉर नॉन बैंकिंग
फाइनेंसियल इन्वेस्टमेंट एक्टिविटी। भैया
ध्यान रखना ये जो 1% कंपनी नॉन बैंकिंग
फाइनेंसियल इन्वेस्टमेंट एक्टिविटी नहीं
कर सकता। पीड अप कैपिटल 50 लाख से ज्यादा
नहीं हो सकती। एवरेज टर्नओवर पिछले 3
सालों में 2 करोड़ से ज्यादा नहीं होनी
चाहिए पर एवरेज। ठीक है? शेयर कैपिटल
कंपनी बीइंग एन आर्टिफिशियल पर्सन कैन नॉट
जनरेट इट्स ओन कैपिटल व्हिच नेसेसरी टू
कलेक्ट फ्रॉम द सेवरल पर्संस। और उन
पर्संस को बोलते हैं शेयरहोल्डर्स। और
उनको जो शेयर इशू करते हैं उसको बोलते हैं
शेयर शेयर का पैसा उनसे जो लेते हैं उसको
बोलते हैं शेयर कैपिटल।
कैटेगराइज़ ऑफ़ शेयर कैपिटल। ऑथराइज़ शेयर
कैपिटल। एक कंपनी लाइफ टाइम में कितने
शेयर इशू कर सकती है? तो ये लाइन ध्यान
रखना। एज़ इट इज़ लाइन आती है। ऑथराइज़्ड
कैपिटल इज़ द अमाउंट ऑफ़ शेयर कैपिटल व्हिच
अ कंपनी इज़ ऑथराइज़्ड टू इशू बाय इट्स
मेमोरेंडम ऑफ़ एसोसिएशन। दी कंपनी कैन नॉट
रेज़ मोर दैन द अमाउंट ऑफ़ कैपिटल। भाई
जितना मेमोरेंडम एसोसिएशन में ठप्पा लग
गया मैक्सिमम उतना ही हम फंड रेज़ कर सकते
हैं जनता से। उससे ज्यादा नहीं। इशूड शेयर
कैपिटल। ऑथराइज़्ड लाइफटाइम में कितना शेयर
इशू कर सकते हो? इशूड आपने इस साल कितने
शेयर्स इशू किए? ऑथराइज़ में से? तो ये
ऑथराइज़ से कम होगा या बराबर होगा? ज्यादा
कभी नहीं होगा। है ना? और लिखा है द
ऑथराइज कैपिटल व्हिच इज नॉट ऑफर्ड फॉर
पब्लिक सब्सक्रिप्शन अनइशू कैपिटल जो
मंगवाया ही नहीं है अभी तक उसको बोलते हैं
अनइशू कैपिटल सब्सक्राइब कैपिटल पार्ट ऑफ
इशू कैपिटल व्हिच हैज़ बीन एक्चुअली
सब्सक्राइब लोगों ने कितने शेयर्स
सब्सक्राइब कर लिया कितने शेयर्स अब बिक
गया वो अंडर सब्सक्रिप्शन भी हो सकता है
शेयर्स की एप्लीकेशन कमाई है तो बराबर आई
है तो फुल्ली सब्सक्राइब ज्यादा आई है तो
ओवर सब्सक्रिप्शन है ना अंडर सब्सक्रिप्शन
में भी मिनिमम सब्सक्रिप्शन 90% का होना
चाहिए ध्यान रखना आगे अच्छा इसके बाद है
नेक्स्ट कॉल्ड अप कैपिटल जो पैसा आपने
मंगवाया है पेड अप कैपिटल शेयर होल्डर ने
जितना पैसा अभी तक पेड कर दिया अनकॉल्ड
कैपिटल शेयर कैपिटल का वो हिस्सा जो अभी
तक मंगवाया नहीं है। ठीक है? तो यह रहा
ऑथराइज़्ड शेयर कैपिटल इसके अंदर इशू आता
है। अनइशुड्ड कैपिटल इशू के अंदर
सब्सक्राइब सब्सक्राइब के अंदर सब्सक्राइब
फुल्ली पेड अप सब्सक्राइब नॉट फुल्ली पेड
अप जो बैलेंस शीट बनाते हैं ना ये बिल्कुल
वैसा ही है। तो शेयर्स में बहुत थ्योरी है
भर-भर के। प्रेफरेंस शेयर्स सेक्शन 43।
ध्यान रखना कौन सा सेक्शन है? सेक्शन 43।
अ प्रेफरेंस शेयर्स इज़ वन। प्रेफरेंस
शेयर्स वो है
प्रेफरेंस शेयर्स इज़ वन व्हिच फुलफिल द
फॉलोइंग कंडीशन। पहली कंडीशन इट कैरीज़ अ
प्रेफरेंशियल रेट ऑफ डिविडेंड। जो यह
प्रेफरेंस शेयर्स होते हैं ना उनप एक
प्रेफरेंस रेट ऑफ डिविडेंड होता है। मतलब
फिक्स्ड रेट ऑफ डिविडेंड जिसको जिसको फेस
वैल्यू पे कैलकुलेट कैलकुलेट करके शेयर
होल्डर्स को उनका डिविडेंड उनको दिया जाता
है। दैट विद रेस्पेक्ट टू इट कैरिफाई
कैरीज़ और विल कैरी ऑन द वाइंडिंग ऑफ द
कंपनी द प्रेफरेंशियल राइट पेमेंट पेमेंट
ऑफ़ कैपिटल बिफोर। देखो यार
नाम से पता चल रहा है प्रेफरेंस शेयर्स।
तो प्रेफरेंस शेयर्स को जब धंधा बंद होगा
तो पहली पेमेंट प्रेफरेंस शेयर्स को की
जाएगी। उसके बाद इक्विटी वालों को बचती है
तो मिलेगी। नहीं बचती तो नहीं मिलेगी।
दूसरी चीज इसमें लिखा है कि प्रेफरेंस
शेयर्स वालों को ना एक फिक्स रेट ऑफ
डिविडेंड मिलता है। तो जब भी आप प्रेफरेंस
शेयर्स देखोगे तो देखोगे 9% प्रेफरेंस
शेयर्स, 7% प्रेफरेंस शेयर्स।
तो यह उनका रेट ऑफ डिविडेंड है। सेक्शन 43
इक्विटी के बारे में बताता है। इक्विटी
शेयर्स इज अ शेयर व्हिच इज नॉट अ
प्रेफरेंस शेयर्स इन अदर वर्ड्स शेयर
व्हिच डू नॉट एंजॉय द प्रेफरेंशियल पेमेंट
ऑफ डिविडेंड। इनको वोटिंग तो मिलेगी लेकिन
इनको एक्स्ट्रा डिविडेंड नहीं मिलेगा और
सबको बाद में प्रॉफिट मिलेगा। फर्म ने
अच्छा कमाया तो मिलेगा। नहीं तो नहीं
मिलेगा। और डिविडेंड ऑन इक्विटी शेयर जो
है फिक्स नहीं होता। मतलब प्रेफरेंस
शेयर्स पे ये फिक्स होता है। अगला है
डिस्ट्रीब्यूशन दी अह सॉरी द इक्विटी शेयर
कैपिटल मे बी वोटिंग राइट और विद इन
डिफरेंशियल राइट टू वोटिंग डिविडेंड
अदरवाइज़ इन अकॉर्डेंस विद सच रूल्स
सब्जेक्ट टू सच कंडीशन मे बी प्रिस्राइब
इन आर्टिकल ऑफ़ एसशन ऑफ़ द कंपनी। तो बेसिक
बातें थी। अगला इशू ऑफ़ शेयर्स में आप
प्रोस्पेक्टस इशू करोगे। ये बहुतेंट। दिस
इज़ द वेरी वेरीेंट स्टेप। ये तुम नहीं पढ़
के जाते लेकिन ये जरूरी है कि कौन-कौन से
स्टेप्स हैं शेयर इशू करने का। पहला इशू
प्रोस्पेक्टस इशू किया जाएगा। फिर
एप्लीकेशन का पैसा मिलेगा। फिर एप्लीकेशन
के पैसे को ध्यान रखना। आप शेयर्स को अलॉट
करोगे। यह चार के चार स्टेप्स हैं। अब
यहां सारे बात ध्यान रखना। दी कंपनी हैज़
टू गेट मिनिमम सब्सक्रिप्शन। कंपनी को कम
से कम सब्सक्रिप्शन मिलेगा विद इन 120 डेज
फ्रॉम द डेट ऑफ इशू ऑफ़ प्रोस्पेक्टस। ये
अलग लाइन है। इसको आप यहीं तक याद रखना कि
कंपनी को जो मिनिमम सब्सक्रिप्शन मिलना
चाहिए, वह डेट ऑफ इशू ऑफ़ प्रोस्पेक्टस से
120 दिन के अंदर मिलना चाहिए। इफ कंपनी
फेल टू रिसीव दी सेम विद इन द सेड पीरियड
द कंपनी कैन नॉट प्रोसीड फॉर द अलॉटमेंट
ऑफ शेयर एप्लीकेशन मनी शुड बी रिटर्न ऑन
30 डेज तो 130 दिन के अंदर उनके एप्लीकेशन
का पैसा उनको लौटा दोगे और उन लोगों को
शेयर्स आप नहीं इशू करोगे
ओके तो बहुत सारी थ्योरी है बेटा अभी
शेयर्स में भर-भर के थ्योरी है। ठीक है?
तो ध्यान से अच्छे से समझना इसको।
चलो नाउ मूविंग टू नेक्स्ट। नेक्स्ट पे
चलते हैं। यह है मिनिमम सब्सक्रिप्शन।
ध्यान रखना कि कम से कम 90% की एप्लीकेशन
आनी ही चाहिए। द मिनिमम अमाउंट दैट इन द
ओपिनियन ऑफ़ डायरेक्टर मस्ट बी रे टू मीट द
नीड ऑफ़ द बिनेस ऑपरेशन। भैया बिज़नेस को
चलाने के लिए इतना पैसा तो आना ही चाहिए।
ठीक है? तो ऑपरेशन ऑफ़ द कंपनी इंटू द
प्राइस ऑफ एनी प्रॉपर्टी परचेस और द परचेस
और टू बी परचेस व्हिच हैज़ टू मेट होली और
पार्टली आउट ऑफ द प्रोसीड ऑफ इशू। तो जो
भी आप इशू कर रहे हो उससे इतना पैसा आपके
पास आना चाहिए। कोई प्रॉपर्टी आपने खरीदी
है उसकी पेमेंट कर सको या खरीद सको।
प्रिलिमिनरी एक्सपेंसेस पेएबल बाय द कंपनी
एनी कमीशन पेएबल इन द कनेक्शन ऑफ़ दीज़ इशू
ऑफ़ शेयर्स। वो खर्चा बियर कर सको। कमीशन
और प्रिलरी एक्सपेंसेस। द रीपेमेंट ऑफ़ मनी
जो उधार लिया वो पैसा आप लौटा सको।
वर्किंग कैपिटल का भी और फिक्स्ड एसेट्स
का भी। ठीक है? इट इज़ टू बी नोटेड दैट
मिनिमम सब्सक्रिप्शन जो है वो 90% से कम
नहीं आना चाहिए। किसका? 90% ऑफ द इशू
अमाउंट अकॉर्डिंग टू द सेबी डिस्क्लोज़र
एंड इन्वेस्टर प्रोटेक्शन गाइडलाइन 2003
200 इफ दिस कंडीशन इज़ नॉट सेटिस्फाई द
कंपनी श कंपनी कंपनी शैल फोर्थ विद रिफंड
द एंटायर सब्सक्रिप्शन रिसीव्ड। इफ डिले
अकर बियड एट डज़ फ्रॉम द क्लोज़र ऑफ़
सब्सक्रिप्शन लिस्ट। द कंपनी शैल बी लायबल
टू पे द इंटरेस्ट 15% पर सेक्शन 32 73 सब
सेक्शन टू कहता है कि भैया अगर 90% की
एप्लीकेशन नहीं आई तो वो सारा का सारा
पैसा लौटा दो शेयर होल्डर को और नहीं
लौटाया अगर आपने 8 दिन तक नहीं लौटाया
सब्सक्रिप्शन लिस्ट जब क्लोज हुआ तब से तो
भैया 15% का ब्याज भी देना पड़ेगा शेयर ऑफ
कंपनी आर इशूड इदर इन पार तो पता है आपको
शेयर्स को पार पे इशू पे प्रीमियम पे किसी
पे भी इशू कर सकता है अकाउंटिंग ट्रीटमेंट
ऑल मनी रिसीव अलोंग द एप्लीकेशन डिपॉजिट
टू स्केेड्यूल बैंक इन अ सेपरेट अकाउंट
ओपन फॉर द पर्पस। ध्यान रखना जब तक देखो
हमें पता है कि 90% की एप्लीकेशन नहीं आई
तो सारा पैसा रिटर्न करना है तो पैसा खर्च
नहीं करेंगे। एक प्रॉपर बैंक अकाउंट में
इकट्ठा करेंगे जब तक 90% का पैसा नहीं
आता। जब सारा पैसा आ गया हमने फुलफिल कर
ली अपनी लायबिलिटी तब उसके बाद क्या
करेंगे? उस पैसे को उस अकाउंट से
निकालेंगे। उस अकाउंट को क्या बोलते हैं?
एस्क्रो अकाउंट। ध्यान रखना। एस क्रो
अकाउंट।
चलो अभी बहुत कुछ है करने के लिए। ठीक है?
अब देखते हैं इसके बाद शेयर्स में अभी और
भी होगा। ये एंट्री है बैक टू एप्लीकेशन
एप्लीकेशन टू कैपिटल एप्लीकेशन सपोर्ट बाय
ब्लॉक देखो ये फुल फॉर्म ध्यान रखना
एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक अमाउंट
एएसबी ठीक है एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय
ब्लॉक अमाउंट द टू पॉइंट्स आरेंट
रिगार्डिंग द कॉल्स ऑन शेयर्स कॉल्स ऑन
शेयर्स ध्यान रखना द अमाउंट ऑफ एनी कॉल
शुड नॉट बी एक्सीड 25% ऑफ़ फेस वैल्यू ऑफ़
शेयर कोई भी कॉल कोई भी किस्त शेयर वैल्यू
शेयर्स की फेस वैल्यू के 25% से ज्यादा
नहीं होनी चाहिए कॉल्स कॉल का अमाउंट ड्यू
करते हो शेयर कॉल टू शेयर शेयर शेयर कॉल
टू शेयर कैपिटल फिर है ना जो भी कॉल
अमाउंट है शेयर फर्स्ट कॉल टू शेयर कैपिटल
फिर बैंक टू शेयर फर्स्ट कॉल या स्टेयर टू
सेकंड कॉल
देखो शेयर्स अगर आप इशू करते हो कुछ बात
को आपने ध्यान रखना है द एप्लीकेशन मनी
शुड बी एटलीस्ट 5% एप्लीकेशन का मनी ना
फेस वैल्यू के 5% कम से कम होने चाहिए
बताओ पता था आपको यह आपने पढ़ा था बुक में
पता था नहीं यही चीज़ करा रहा हूं एक-एक
चीज़ काम की जो कोई नहीं कर पाएगा उसे आप
करोगे इतना ईजी है ना इसको दोबारा देखने
की जरूरत ही नहीं है यहीं पे वीडियो को
देख लो अच्छे से यही लर्न हो जाएगा को
कॉल्स आर टू बी मेड एज़ पर द प्रोविज़न ऑफ़
आर्टिकल ऑफ़ एसोसिएशन। वेयर देयर इज़ नो
आर्टिकल ऑफ़ एसोसिएशन। दो कॉल के बीच में
कम से कम 1 महीने का टाइम होना चाहिए। और
अमाउंट ऑफ कॉल शुड नॉट बी एक्सीड 25%। कॉल
का अमाउंट 25% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
ध्यान रखना कॉल का अमाउंट 25% से ज्यादा
नहीं होना चाहिए। और 14 दिन का नोटिस देना
है शेयर्स को फॉरफिट करने से पहले। और कॉल
मस्ट बी मेड विद द यूनिफॉर्म बेसिस ऑफ़ ऑल
शेयर। एक साथ आप सबसे कॉल मंगाओगे। द
प्रोसीजर फॉर अकाउंटिंग फॉर द इशू ऑफ बोथ
इक्विटी प्रेफरेंस शेयर्स सेम है। शेयर्स
इशू करने का, इक्विटी शेयर इशू करने का,
प्रेफरेंस शेयर इशू करने का ट्रीटमेंट सेम
है। बस प्रेफरेंस शेयर्स इशू करते हो ना,
तो प्रेफरेंस शेयर कैपिटल से पहले एक
प्रेफरेंस से पहले एक परसेंटेज आती है। वो
लगा देना और नाम के आगे लगा देना 12 बैंक
टू इक्विटी शेयर एप्लीकेशन। बैंक टू
प्रेफरेंस शेयर एप्लीकेशन अह अह प्रेफरेंस
शेयर एप्लीकेशन टु शेयर कैपिटल। इक्विटी
शेयर एप्लीकेशन टू शेयर कैपिटल। तो, नाम
के आगे इक्विटी और प्रेफरेंस लगा देना। और
प्रेफरेंस में कई बार परसेंटेज भी गिवन
होता है, तो वह भी आपको लगा देना। ठीक है?
नाउ कॉल्स इन एरियर इट मे हैपन दैट
शेयरल्डर डू नॉट पे द कॉल अमाउंट ऑन ड्यू
डेट व्हेन एनी शेयर फेल टू पे द कॉल का
पैसा नहीं देगा तो कॉल्स इन एरियर का
डेबिट बैलेंस होता है। डेबिट करेंगे उसको।
बस इतनी सी बात है। इफ द आर्टिकल्स आर
साइलेंट इन दिस रिगार्ड द रूल कंटेन इन
टेबल एफ। अगर देखो इंटरेस्ट ऑन कॉल्स इन
एरियर के बारे में नहीं बोला है तो भैया
कॉल्स इन एरियर पे इंटरेस्ट जाता है। टेबल
एफ के अकॉर्डिंग ध्यान रखना टेबल एफ के
अकॉर्डिंग 10% पर एनम और कॉल्स इन एडवांस
पे इंटरेस्ट जाता है 12% पर एनम। ये आउट
ऑफ सिलेबस है बैक टू इंटरेस्ट वाला पॉइंट
है ना इंटरेस्ट एंड कॉल्स इन एरियर का जो
इंटरेस्ट का पॉइंट है वो हमारे सिलेबस से
बाहर है एडवांस क्या है आपने समय से पहले
पैसा दे दिया उस सिचुएशन में कंपनी आपको
इंटरेस्ट देगी 12% किसके अकॉर्डिंग टेबल
एफ के अकॉर्डिंग जो ये बातें आपको ध्यान
रखनी है दी बैलेंस इन कॉल्स इन एरियर
अकाउंट जो है वो सेपरेट आइटम में दिखाएंगे
इक्विटी एंड लायबिलिटी में और अह जो भी
कॉल्स इन एरियर है उसका बैलेंस हम दिखाते
हैं इक्विटी एंड लायबिलिटी में लायबिलिटी
साइड हाउएवर इफ आर्टिकल्स आर साइलेंट ऑन
दिस अकाउंट टेबल एफ इज़ एप्लीकेबल। तो
आर्टिकल साइलेंट है। टेबल एफ एप्लीकेबल
होगा जिस पे कॉल्स इन एडवांस पे इंटरेस्ट
12% ज्यादा नहीं होना चाहिए। इंटरेस्ट को
पेमेंट करेंगे तो एंट्री क्या करेंगे?
इंटरेस्ट टू बैंक। इंटरेस्ट ऑन कॉल्स इन
एडवांस टू बैंक। और रिसीव करेंगे तो बैंक
अकाउंट डेबिट टू इंटरेस्ट ऑन कॉल्स इन
एरियर अकाउंट। एरियर है तो मिलेगा। एडवांस
है तो दोगे। ओवर सब्सक्रिप्शन देयर आर
इंस्टेंसेस व्हेन एप्लीकेशनेशंस फॉर मोर
शेयर्स ऑफ़ कंपनी आर रिसीव्ड देन द नंबर ऑफ़
ऑफर्ड टू द पब्लिक फॉर सब्सक्रिप्शन।
एप्लीकेशन ज्यादा की आ गई। तो उसको बोलते
हैं ओवर सबस्क्रिप्शन। इनके पास दो रास्ते
हैं। कुछ को पूरा दे दो, कुछ को रिजेक्ट
कर दो और कुछ को प्रोराटा बेसिस पे दे दो
और कुछ को कंबाइन कर लो। प्रोराटा और उसका
कंबाइन। मतलब तीन वे हैं। फुल रिजेक्ट और
प्रोराटा यानी कि मिक्स।
नेक्स्ट है अंडर सब्सक्रिप्शन। अंडर
सब्सक्रिप्शन में सारी की सारी एंट्री जो
करोगे वो कम वाले शेयर से करो। इशू किया
इशू किया मान लो 2 लाख। एप्लीकेशन
₹1,90,000 की आई तो सारी एंट्री आप
₹1,90,000 से करोगे। इशू ऑफ शेयर्स एट
प्रीमियम इट इज क्वाइट कॉमन फॉर द शेयर्स
ऑफ फाइनेंशियली स्टोरिंग स्ट्रांग सॉरी
स्ट्रांग एंड वेल मैनेज्ड कंपनी टू बी
इशूड प्रीमियम जो स्ट्रांग कंपनी होती है
वेल मैनेज्ड कंपनी होती है तो वो अपने
शेयर्स का एक्स्ट्रा प्राइस मांगती है
चार्ज करती है उसको बोलते हैं प्रीमियम शो
द टाइटल ये प्रीमियम कहां पे आता है
इक्विटी एंड लायबिलिटीज में रिजर्व एंड
सरप्लस के अंदर यह पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट
है बेटा प्लीज यह पांच के पांच पॉइंट अभी
याद करो मैं शॉर्ट में आपको बताता हूं
क्या-क्या है पांच पॉइंट तो सबसे पहला है
लिख लो अपनी कॉपी में साथ-साथ बहुत
इंपॉर्टेंट है कि जो सिक्योरिटीज प्रीमियम
जनता से लिया गया है वो हम कैसे इशू
करेंगे? फुल्ली पेड अप बोनस शेयर नॉट
पार्टली फुल्ली पेड अप बोनस शेयर और वो
अनइशूड शेयर कैपिटल से ज्यादा नहीं होना
चाहिए। प्रीलिमिनेरी एक्सपेंसेस को राइट
ऑफ करना है। उसके अलावा आपको जो कमीशन पेड
है डिस्काउंट अलाउड ऑन इशू ऑफ डिबेंचर वो
राइट ऑफ करना है। आपको पता है डिस्काउंट
ऑन इशू लॉस ऑन इशू को राइट ऑफ करने की
एंट्री क्या होती है? एसपीआर अकाउंट डेबिट
टू स्टेटमेंट ऑफ सॉरी एसपीआर अकाउंट डेबिट
स्टेटमेंट ऑफ पीएनएल अकाउंट डेबिट टू
डिस्काउंट और लॉस ऑन इशू ऑफ़ डिबेंचर तो
यहीं से राइट ऑफ करते हैं। बोनस शेयर देने
के काम आता है। अपने खुद के शेयर्स खरीदते
हैं बायबैक कर करते हैं शेयर्स को तब काम
आता है प्रीमियम का पैसा। और कंपनी जब
प्रीमियम पे करती है डिबेंचर को प्रेफरेंस
शेयर्स को रिडीम करते वक्त तो वो जो लॉस
है कैपिटल लॉस है उसको हम लोग क्या करते
हैं राइट ऑफ करते हैं सिक्योरिटीज
प्रीमियम रिजर्व अकाउंट से तो ये बात आप
ध्यान रखना ठीक है इशू ऑफ़ शेयर्स ऑफ़
डिस्काउंट तो शेयर्स को डिस्काउंट पे नहीं
इशू किया जाता बहुतेंट लाइन है एज अ जनरल
रूल द कंपनी कैन नॉट ऑर्डिनरी इशू शेयर्स
डिस्काउंट इट कैन बी डू ओनली इन केस ऑफ़ सच
शेयर रीइशू रीइशू करते हुए डिस्काउंट दे
सकती है कंपनी लेकिन फॉर लेकिन इशू पे कोई
डिस्काउंट नहीं होता। नंबर ऑफ़ शेयर्स एसेट
खरीदते हो तो एंट्री क्या होती है? अमाउंट
पेएबल अपॉन इशूइंग प्राइस। एसेट खरीदने की
एंट्री। एसेट टू वेंडर कैश देते हो, वेंडर
टू कैश शेयर देते हो, वेंडर टू शेयर
कैपिटल, शेयर प्रीमियम पे दिया। टू
सिक्योरिटीज़ प्रीमियम, शेयर डिस्काउंट पे
दिया तो भी शेयर शेयर फॉरफिट अकाउंट
डेबिट। ध्यान से समझो। यह भी बच्चे पूछ
लेते हैं। तो, यह भी मैंने करा दिया आपको।
जब कंपनी कुछ खास लोगों को शेयर इशू करती
है आम जनता की जगह पे, उसको बोलते हैं
प्राइवेट प्लेसमेंट। सेक्शन 42 बताता है
इस बारे में। कंपनी एंप्लई से कहती है आप
लंबे समय तक काम करो। हम आपको 5 लाख के
स्टॉक 5000 में दे देंगे। उसके बोलते हैं
ईस्ट आप एंप्लॉय स्टॉक ऑप्शन प्लान लंबे
समय तक टिक के काम करोगे तभी आपको जो है
शेयर सस्ते रेट पे मिलेंगे और आपको वो भी
लेना नहीं लेना आपका ऑप्शन है। मर्जी आपकी
आप मत लो या ले लो। एंप्लॉय स्टॉक ऑप्शन
प्लान फॉल अंडर द ये किस कैटेगरी के अंदर
आता है एंप्लॉय स्टॉक ऑप्शन प्लान स्वेट
इक्विटी शेयर्स के अंदर। जिन लोगों ने
कंपनी के लिए पसीना बहाया है ना कंपनी
उनको फ्री में शेयर देती है। स्वेट
इक्विटी शेयर्स। कंपनी इशुइंग द फॉलोइंग
ऑप्शंस। अ कंपनी इशुइंग द फॉलोइंग ऑप्शन
है टू फुलफिल फुलफिल फॉलोइंग प्रिस्राइब
कंडीशन दी शेयर्स आर ऑफ द सेम क्लास ऑफ
शेयर्स ऑलरेडी इशू जो ईशो आप इशू कर रहे
हो ना ये वही क्लास के शेयर होने चाहिए
उसी टाइप के शेयर होने चाहिए जो आपने पहले
से इशू कर रखा है इट इज ऑथराइज्ड बाय
सेपरेट भ एक स्पेशल रेोल्यूशन में आपके
होना चाहिए ऑर्डिनरी रेोल्यूशन क्या है
क्लास भीड़ 10 में से सात लोग छह लोग बोल
रहे हैं माना जाएगा स्पेशल जो स्पेशल
रेज़ोल्यूशन मतलब मैक्सिमम लोग 75 75% भाई
100 में से 75 लोग मानेंगे तभी काम होगा।
ऑर्डिनरी में 50% होता है। स्पेशल में 75%
नॉट लेस देन वन ईयर एक साल के अंदर सॉरी
एट द डेट ऑफ इशू इलाप्सिंस डेट व्हिच द
कंपनी हैड कमेंस द बिनेस नॉट लेस दैन वन
ईयर एक साल से कम में नहीं होना चाहिए।
ठीक है? दीज़ शेयर्स आर इशू अकॉर्डिंग टू
सेबी रेगुलेशंस और सेबी रेगुलेशन के
अकॉर्डिंग क्लास शेयर्स ये कंपनी इशू
करेगी। तो टर्म्स क्या-क्या है? जिस दिन
एग्रीमेंट साइन किया कि हम आपको 5 साल काम
करोगे शेयर सस्ते में देंगे उसको बोलते
हैं ग्रांट डेट। सॉरी उसको बोलते हैं
ग्रांट। ग्रांट मतलब क्या है? एक ऑप्शन दे
रहे हो कि भ आप शेयर्स ले लेना। 10 लाख के
शेयर्स 1 लाख में ले लेना। जिस दिन पे
एग्रीमेंट बनेगा ग्रांट डेट बोलते हैं।
वेस्टिंग जब तक आपको टिक के काम करना
पड़ेगा। आपको क्यों दे रहे हैं पैसे ताकि
आप टिक के काम करो। बार-बार भागने की
नौटंकी ना करो कि मुझे वहां ज्यादा मिल
रहा है, यहां ज्यादा मिल रहा है। वेस्टिंग
पीरियड वो पीरियड जब तक उसको टिके काम
करना है। एक्साइज यानी कि वो वो डेट जब आप
उसे मान लो आज उसकी कंडीशन पूरी हो गई तो
उसको तुरंत थोड़ी बोलोगे आज शेयर ले ले
भैया टाइम दोगे 15 दिन का 10 दिन का। वो
जो पीरियड है उसको बोलते हैं एक्साइज
पीरियड। और एक्साइज प्राइस कितने रेट में
देना चाहते हो उसको? वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन
मार्केट प्राइस में से इशूइंग प्राइस घटा
दो तो आपको पता पड़ेगा फायदा कितना है
यानी कि वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन कितना है।
फॉरफीचर की एंट्री शेयर कैपिटल अकाउंट
डेबिट टू शेयर फॉर टू शेयर अनपेड कॉल
अकाउंट। यह ध्यान रखना। और फॉरफिट में
प्लस करना लॉट में माइनस वो मत भूलना छोटी
टेबल में द बैलेंस ऑफ़ शेयर फॉरफिट अकाउंट
जो है वह कैपिटल रिजर्व के अंदर चला जाएगा
अंडर मेन हेडिंग रिजर्व सॉरी अ रिजर्व एंड
सरप्लस सबहेड क्या है शेयर कैपिटल
अच्छा वो रिज़र्व एंड सरप्लस क्या है सब
फॉरफिटेड शेयर्स का क्या है वो शेयरहोल्डर
फंड में ही लास्ट में ऐड होता है बैलेंस
शीट के अंदर जो सब्सक्राइब शेयर कैपिटल है
ना
हां ये जो भी बैलेंस पड़ा हुआ है फॉरफिट के
अंदर उसे हम शेयर फॉरफिट में ऐड करते हैं।
पता ही है आपको? आपने एक्सट्रैक्ट ऑफ़
बैलेंस शीट पढ़ रखी है। रीइशू ऑफ़ शेयर्स।
तो कंपनी रीइशू पार, प्रीमियम डिस्काउंट
तीनों में कर सकती है। और जो भी रीशू पैसा
बचता है, वह कहां डालती है? कैपिटल रिजर्व
के अंदर। देखो, एनसीआरटी सारी करा रहा हूं
आपको। अनदरेंट पॉइंट टू बी नोटेड इन दिस
कॉन्टेक्स्ट इज़ दैट द कैपिटल प्रॉफिट
अराइज़ ओनली इन रेस्पेक्ट ऑफ़ फॉरफीचर
शेयर्स रीइशू एंड नॉट ऑल फॉरफिट शेयर्स।
हेंस व्हेन अ पार्ट ऑफ़ फॉरफिट शेयर रीइशू।
देखो अगर रीइशू सारे नहीं किया कम किया तो
प्रपोशननेट वाली कैलकुलेशन करनी है। वही
यहां पे लिखा हुआ है कि अगर आपने कम
शेयर्स रीइशू किए तो प्रपोर्शननेट वाली
कैलकुलेशन जरूर करना। इतने शेयर्स के लिए
इतना पैसा है तो उतने के लिए कितना पैसा
होगा। उस बेसिस पे एनसीआरटी में क्वेश्चन
भी दिया हुआ है। कंपनी अपने ही शेयर्स
मार्केट से खरीदती है। उसको बोलते हैं
बायबैक। उसे कुछ कंडीशन को पूरा करना
पड़ेगा। अपने शेयर्स को मार्केट से खरीदने
के लिए। पहला आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में
लिखा हुआ होगा कंपनी कल को बायबैक कर सकती
है तभी करेगी। स्पेशल रेोल्यूशन पास किया
जाएगा। बायबैक जो है 1 साल के अंदर वो 25%
ऑफ पेड अप कैपिटल और फ्री रिजर्व से
ज्यादा नहीं होना चाहिए। मैक्सिमम बायबैक
आप 25% कर सकते हो। डेप्ट इक्विटी रेशियो
शुड नॉट बी मोर देन 2:1 आपके बायबैक से डे
इक्विटी रेशियो का आइडल रेशियो 2:1 है।
उससे नहीं बढ़ना चाहिए। ठीक है? अगला है
ऑल दी शेयर्स ऑफ़ बायबैक शुड बी फुल्ली पेड
अप। फुल्ली पेड अप शेयर्स को बायबैक
करोगे। और द बायबैक ऑफ़ द शेयर शुड बी
कंप्लीट। 12 महीने के अंदर बायबैक का
प्रोसेस कंप्लीट करना है आपने। और डेट ऑफ़
प्रोसेसिंग द स्पेशल रेोल्यूशन। द कंपनी
शुड फाइल अ सॉल्वेंसी डिक्लेरेशन इन द
रजिस्ट्रार एंड सेबी व्हेन मस्ट बी साइन
व्हिच मस्ट बी साइन एटलीस्ट टू डायरेक्टर
ऑफ़ द कंपनी। भैया आपको लिख के देना पड़ेगा।
ध्यान रखना रजिस्ट्रार ऑफ रजिस्ट्रार एंड
सेबी व्हिच जो साइन करोगे और बोलोगे भैया
हम दिवालिया नहीं होंगे। आपको डिक्लेरेशन
देना पड़ेगा कि भैया हम दिवालिया नहीं
होंगे। अगला है इशू ऑफ़ शेयर्स और रिडम्शन
ऑफ़ डिबेंचर। जान के अच्छा लगेगा। रिडम्शन
ऑफ़ डिबेंचर हमारे सिलेबस का पार्ट
नहीं है। सिर्फ हमारे सिलेबस में इशू ऑफ़
शेयर्स और इशू ऑफ़ डिबेंचर। और इसमें भी
काफी अच्छी-अच्छी थ्योरी है। डिबेंचर है
क्या? द वर्ड डिबेंचर हैज़ बीन डिराइव
फ्रॉम द लैटिन डेबरी। डेबिय से। ठीक है?
डेबियर या डेबरी कुछ भी पढ़ो। व्हिच मींस
टू बोरो। ठीक है? एक रिटन इंस्ट्रूमेंट है
जो क्लास एकनॉलेज करता है डे अंडर द सील
ऑफ़ कंपनी। कंपनी जो है पब्लिक को शेयर इश
डिबेंचर इशू करती है। उनसे पैसे ले लेती
है। अकॉर्डिंग टू सेक्शन लिख लेना। टू टू
क्लॉज़ 30 ऑफ़ कंपनीज़ एक्ट 2013 डिबेंचर
इंक्लूड्स डिबेंचर इन्वेंटरी बॉन्ड एनी
अदर सिक्योरिटी ऑफ़ द कंपनी वेदर
कॉन्स्टिट्यूटिंग अ चार्ज ऑन द एसेट्स ऑफ़
द कंपनी ऑ नॉट। तो डिबेंचर बेसिकली क्या
है? कोई भी डिबेंचर इन्वेंटरी है, बॉन्ड
है और एनी अदर डिबेंचर ऑफ़ कंपनी जो आपसे
क्लास जो व्हिच वेदर क्सटिंग अ चार्ज ऑफ़ द
एसेट ऑ नॉट गिरवी रखे चाहे ना रखे कुल
मिला के कंपनी जो पैसे उधार लेती है जनता
से ना उस कंपनी को उस वो जो कंपनी जो
डॉक्यूमेंट इशू करती है उसी को बोलते हैं
डिबेंचर्स बॉन्ड भी उसी टाइप का उसी टाइप
का है। जनरली सरकार इसको यूज़ करती हैं
आजकल। बॉन्ड है वही डिबेंचर जैसा ही।
शेयर्स और डिबेंचर का सबसे पहला है
ओनरशिप्स। तो शेयर्स जो खरीदता है वह
कंपनी का ओनर है। डिबेंचर खरीदने वाला
कंपनी का ओनर नहीं है। आरओआई शेयर्स पे
डिविडेंड मिलता है। इस पे रेट ऑफ़ इंटरेस्ट
मिलेगा। पेमेंट ऑफ प्रीफिक्स हां
प्रीफिक्स। देखो डिबेंचर होल्डर्स को पैसा
मिलेगा आप पहले और फिर जो बचेगा वो मिलेगा
शेयर होल्डर्स को। ठीक है? क्योंकि
डिबेंचर होल्डर आउटसाइडर है ना उनको पहले
हम क्या करेंगे? पेमेंट करेंगे। फिर बचा
कुछ शेयर्स को करेंगे। कन्वर्ट अच्छा उसके
बाद है
वोटिंग राइट। शेयर होल्डर के पास वोटिंग
राइट होती है। डिबेंचर होल्डर के पास
वोटिंग राइट नहीं होती है। रीपेमेंट ध्यान
रखना रीपेमेंट
नॉर्मली द अमाउंट ऑफ शेयर्स इज़ नॉट रिटर्न
ड्यूरिंग द लाइफ। कंपनी बंद होगी तो कंपनी
बायबैक करेगी शेयर्स को रिटर्न नहीं किया
था। डिबेंचर होल्डर्स का पैसा एक टाइम बाद
उनको रिटर्न कर दिया जाता है। वोटिंग राइट
डिबेंचर होल्डर के पास नहीं होती। शेयर
होल्डर्स के पास होती है सिक्योरिटी। शेयर
सिक्योर नहीं है। कोई चार्ज गिरवी नहीं
है। लेकिन डिबेंचर जो है सिक्योर है।
कन्वर्टेबल डिबेंचर कन्वर्टेबिलिटी।
शेयर्स को जब हम कन्वर्ट कर सकते हैं
डिबेंचर में तो उसको बोलते हैं क्लास
कन्वर्टेबिलिटी। लेकिन ध्यान रखना शेयर्स
कैन नॉट बी कन्वर्टेड इंटू डिबेंचर्स।
वेयर डिबेंचर्स कैन बी कन्वर्टेड इंटू
शेयर्स। इफ द टर्म ऑफ़ इशू सो नॉट प्रोवाइड
दैट इन केस दीज़ आर नोन एज़ कन्वर्टेबल
डिबेंचर। एंड इन दैट केस दीज़ आर नोन एज़
अगर कुछ नहीं लिखा है तो हम क्या मानेंगे?
वो कन्वर्टेबल डिबेंचर्स हैं। फ्रॉम अ
फ्रॉम द पॉइंट ऑफ अ सिक्योरिटी। ये
सिक्योर डिबेंचर वो डिबेंचर है जो आपने
एसेट गिरवी लिया हुआ है। मान लो मैं कंपनी
हूं। मैं जनता को बोल रहा हूं भाई तुम
मुझे ₹1 करोड़ दो। देखो मैं एक करोड़ की
एसेट को गिरवी रख रहा हूं अपने पास। कल को
बिजनेस बंद हो जाएगा, डूब जाएगा। यह पैसा
रहेगा इससे आपको पेमेंट कर देंगे। उसको
बोलते हैं सिक्यर्ड डिबेंचर। और
अनसिक्यर्ड डिबेंचर कौन से होते हैं? कोई
सिक्योरिटी नहीं है। कोई भी सिक्योरिटी
कोई सेफ्टी नहीं है। वो अनसिक्यर्ड है।
पैसा डूब गया तो कुछ नहीं कर पाओगे। फ्रॉम
द पॉइंट ऑफ व्यू टेन्योर। जो भैया रिडीम
हो सकता है वह रिडीमेबल है। जो रिडीम के
लिए मना करती है कंपनी वह नॉन रिडीमेबल
है। कन्वर्टेबिलिटी जो डिबेंचर कन्वर्ट हो
सकते हैं उसको बोलते हैं कन्वर्टेबल
डिबेंचर। जो कन्वर्ट नहीं हो सकते उसको
बोलते हैं नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर।
रजिस्टर्ड डिबेंचर जिनका नाम लिखा हुआ है
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ में रजिस्टर्ड
डिबेंचर जिनका नाम नहीं लिखा हुआ है वो
बियरर डिबेंचर। टाइप ऑफ डिबेंचर ध्यान
रखना। डिबेंचर, पावर प्रीमियम, डिस्काउंट
तीनों पे इशू किया जा सकता है। और डिबेंचर
डिस्काउंट पे इशू किया जाता है। तो
डिस्काउंट इशू ऑफ़ डिबेंचर को हम क्या करते
हैं? डेबिट करते हैं।
डिस्काउंट ऑन इशू ऑफ डिबेंचर टू बी रिटन
ऑफ विद इन 12 मंथ ऑफ द बैलेंस शीट डेट और
पीरियड ऑफ ऑपरेटिंग साइकिल शोन अंडर द अदर
करंट एसेट एंड द पार्ट व्हिच इज़ कर रिटर्न
ऑफ आफ्टर 12 मंथ देखो वो जो भी जो भी
डिस्काउंट ऑन इशू डिबेंचर था 12 साल के
अंदर 12 महीने के अंदर राइट ऑफ कर दो। जो
राइट ऑफ नहीं करोगे वो बैलेंस शीट में नॉन
करंट एसेट के तरह रूप में आपको दिखता चला
जाएगा।
अगला है डिबेंचर इशू एट प्रीमियम द अमाउंट
ऑफ प्रीमियम इज क्रेडिटेड टू सिक्योरिटीज
प्रीमियम रिजर्व एंड द शोन इन द लायबिलिटी
सेट द बैलेंस शीट इन द रिजर्व सप्लाई तो
पता ही है आपको और हां डिबेंचर्स को
शेयर्स में कन्वर्ट कर सकते हो तो वो
कन्वर्टेबल डिबेंचर है कन्वर्ट नहीं कर
सकते तो वो नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर है ओवर
सब्सक्रिप्शन कंपनी एप्लीकेशन ज्यादा की
आती है लेकिन कंपनी उतना ही अलॉट करेगी
जितनी की एप्लीकेशन आई ज्यादा अलॉट नहीं
कर सकते कोलटरल सिक्योरिटी में दो बातें
होती है बैंक से लोन लेते हम लोग और अपनी
प्रिंसिपल सिक्योरिटी के साथ-साथ कुछ
एडिशनल सिक्योरिटी गिरवी रखते हैं बैंक
में। इसको बोलते हैं कोलटरल सिक्योरिटी।
इसमें दो एंट्री होती है। बैंक टू बैंक
लोन, डिबेंचर, सस्पेंस टू पर्सन डिबेंचर।
और अगर क्वेश्चन कहता है कि इसको नहीं
दिखाना है बुक्स में तो बैंक टू बैंक लोन
एंट्री पास करो। एक्सट्रैक्ट ऑफ़ बैलेंस
शीट बनाओ। नॉन करंट लायबिलिटी में देखो
नॉन करंट लायबिलिटी में लॉन्ग टर्म
बोरोइंग वहां पे क्लास एक बोरोइंग का
अमाउंट लिख दो। जितना भी आपने लोन लिया है
वह और जितना गिरवी रखा है डिबेंचर। 9%
डिबेंचर ऑफ़ 100 का एक इतने का गिरवी रखा
है। माइनस डिबेंचर सस्पेंस। देखो ये रहा
फर्स्ट मेथड। नो एंट्री इज़ मेड इन द बुक्स
ऑफ अकाउंट सिंस नो लायबिलिटी इज़ क्रेडिट
बाय सच इशूज़ हाउएवर ऑन द लायबिलिटी साइड
ऑफ़ द बैलेंस शीट बिलो आइटम इज़ गिवन। देखो
इस तरह से बनाना है। बैलेंस शीट बनाना है।
ये रहा फिर हो गया लॉन्ग टर्म लोन नोट्स
अकाउंट्स। लॉन्ग टर्म लोन के अंदर लिखना
है। 10 लाख यहां ये यहां पे जो भी लिखोगे
कट जाएगा। 10 लाख के ऊपर चला जाएगा। कितना
सिंपल है देखो। सेकंड मेथड के अंदर क्या
करना है? दिखाना है। तो बैंक लोन टू बैंक
लोन, बैंक टू बैंक लोन, डिबेंचर सस्पेंस
टू परसेंट डिबेंचर। दो एंट्री पास करोगे
तो यहां भी बैलेंस शीट बनेगी। नॉन करंट
लायबिलिटी लॉन्ग टर्म बोरोइंग नोट नंबर
वन। यहां आ जाओ नोट नंबर वन पे। लॉन्ग
टर्म बोरोइंग ये रहा बैंक लोन ये रहा
10,000 डिबेंचर 100 का एक और उसी से माइनस
करें डिबेंचर उसमें से ये कट जाएगा हमेशा
हमेशा कटेगा हमेशा ऑलवेज तो ये सेम आ
जाएगा जो आपने क्वेश्चन बनाया बिल्कुल सेम
वैसा ही ठीक है टर्म्स ऑफ इशू ऑफ़ डिबेंचर
इशू ऑफ़ डिबेंचर को पार प्रीमियम डिस्काउंट
तीनों में इशू कर सकते हैं रिडीम को पार
और प्रीमियम दो ही शर्तें होती हैं
डिबेंचर्स को इशू करने की एंट्री क्या
होती है बोलो फटाफट जल्दी से बताओ बैंक टू
डिबेंचर एप्लीकेशन डिबेंचर एप्लीकेशन टू
पर्सनल डिबेंचर अकाउंट खत्म प्रीमियम
क्रेडिट डिस्काउंट डेबिट रिडीम प्रीमियम
पे हो रहा है तो बैंक टू डिबेंचर
एप्लीकेशन डिबेंचर एप्लीकेशन अकाउंट डेबिट
लॉस ऑन इशू ऑडिबेंचर अकाउंट डेबिट 2%
डिबेंचर टू टू सिक्योर टू प्रीमियम ऑन
रिडमशन ऑफ डिबेंचर तो ध्यान रखना लॉस ऑन
डिबेंचर देखो डेबिट हो गया लॉस ऑन इशू और
प्रीमियम क्रेडिट हो गया प्रीमियम और
रिडम्शन ऑफ़ डिबेंचर एक कंपनी के लिए
लायबिलिटी है तो वो क्लास नॉन करंट
लायबिलिटी में दिखेगा अंडर हेड लॉन्ग टर्म
बोरोइंग्स के अंदर नॉन करंट लायबिलिटी में
दिखेगा इंटरेस्ट ऑन डिबेंचर कंपनी साल भर
में या साल में दो बार इंटरेस्ट दे सकती
है इंटरेस्ट हमेशा फेस वैल्यू पे कैलकुलेट
किया जाता है और इंटरेस्ट ऑन डिबेंचर की
एंट्री होती है इंटरेस्ट ऑन डिबेंचर
डिबेंचर होल्डर डिबेंचर होल्ड टू बैंक और
स्टेटमेंट ऑफ़ फील्ड अकाउंट डेबिट टू
इंटरेस्ट ऑन डिबेंचर्स अकाउंट ये चार्ज
अगेंस्ट प्रॉफिट है। देना ही देना है।
टीडीएस इज़ नॉट इन आवर सिलेबस। ठीक है?
नेक्स्ट नेक्स्ट। राइटिंग ऑफ लॉस ऑन इशू
ऑफ़ डिबेंचर। डिस्काउंट और लॉस ऑन इफ़
डिबेंचर्स इज़ अ कैपिटल लॉस एंड रिटर्न ऑफ
इन द ईयर व्हेन दे आर एक्चुअली इशू। जब
पहली बार ये हुआ है तभी राइट ऑफ कर देना
है डिस्काउंट और लॉस ऑन इफ़ डिबेंचर को।
जिस साल बना है। कौन किया था? सेक्शन 52
सब सेक्शन टू। राइट ऑफ करने की एंट्री
क्या होती है? फर्स्ट प्रायोरिटी
सिक्योरिटीज़ प्रीमियम रिज़र्व। तो
सिक्योरिटीज प्रीमियम रिजर्व अकाउंट डेबिट
स्टेटमेंट ऑफ पेनल अकाउंट डेबिट टू
डिस्काउंट और लॉस ऑन इशू ऑफ डिबेंचर्स
अकाउंट पहली प्रायोरिटी प्रीमियम में है।
प्रीमियम पैसा नहीं पड़ा तो हम जाएंगे
कहां पे? स्टेटमेंट ऑफ पीएंडएल के अंदर हो
गई हमारी दो बुक कंप्लीट।
10 से 15 मिनट और बैठ जाओ। हमारा जो थर्ड
बुक है ना उसमें भी काफी थ्योरी उसे कर
लेंगे। फाइनेंशियल स्टेटमेंट क्या होता
है? बेसिक एंड फॉर्मल एनुअल रिपोर्ट थ्रू
व्हिच द कॉर्पोरेट मैनेजमेंट कम्युनिकेशन
कम्युनिकेट कुल मिलाके फाइनेंसियल
स्टेटमेंट वो स्टेटमेंट है वो डॉक्यूमेंट
जैसे कंपनी एक लैंग्वेज है अकाउंटिंग क्या
है लैंग्वेज है कंपनी अपनी इनफार्मेशन को
जनता तक पहुंचा सकती है पीएंडएल बैलेंस
शीट नोट्स टू अकाउंट्स ये सारी की सारी
चीजें और कैश फ्लो स्टेटमेंट जो है वो
क्या बोलते हैं फाइनेंशियल स्टेटमेंट
नेचर क्या होता है फैक्ट्स को रिकॉर्ड
किया जाता है एकाउंटिंग कन्वेंशंस परंपरा
रिकॉर्ड की जाती है एकाउंटिंग में बहुत
सारे एजम्पशनंस होते हैं जिनको बोलते हैं
पोस्टुलेट स्टेट्स ध्यान रखना हम ना अगर
हम अकाउंटिंग करेंगे तो हम फ्यूचर में
अपने फाइनेंसियल स्टेटमेंट को किसी और
कंपनी के या खुद की फाइनेंसियल स्टेटमेंट
से कंपेयर भी कर सकते हैं। पर्सनल जजमेंट
अंडर मोर देन वन सरकमस्टेंसेस
फैक्ट एंड फिगर्स प्रेजेंटेड थ्रू द
फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स आर बेस्ड ऑन द
पर्सनल ओपिनियन एस्टीमेट्स एंड जजमेंट। तो
यहां देखो बहुत सारे लोग रहते हैं। सब
अपनी-अपनी ज्ञान देते हैं। अपनी-अपनी राय
बताते हैं। ऑब्जेक्टिव क्या है?
फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स को बनाने का?
इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करना। बिजनेस के सारे
एसेट लायबिलिटी के बारे में। अर्निंग
कैपेसिटी को बताना। बिज़नेस की कैश फ्लो के
बारे में बताना। कितना-किस एक्टिविटी से आ
रहा है जा रहा है। कंपनी की इफेक्टिवनेस
को देखना और कंपनी की वह एक्टिविटीज़ को
चेक करना, इनेशन देना जो उसके बिज़नेस पे
इंपैक्ट डाल सकता है। अकाउंटिंग पॉलिसीज़
को डिस्क्लोज़ करना। कंपनी बनाती है बैलेंस
शीट और स्टेटमेंट ऑफ पीएंडएल। जबकि पहले
आप बैलेंस शीट और पिनल अकाउंट बनाते थे।
एव्री कंपनी रजिस्टर्ड अनदर कंपनीज़ ऑफ़
2013 शैल बी अह शैल प्रिपेयर द बैलेंस शीट
ऑफ़ स्टेटमेंट ऑफ़ पीएंडएल एंड नोट्स
अकाउंट्स। देयर इंटू अकॉर्डिंग टू द
प्रिस्राइब मैनर जो मैनर दिया गया है टू
हार्मोनाइज ताकि सब लोग एक जैसा चीजें समझ
सकें। तो यहां पे देखो दिया हुआ है ये
बैलेंस शीट का पूरा का पूरा फॉर्मेट है।
आई होप आपको बैलेंस शीट का फॉर्मेट अच्छे
से लर्न होगा। फीचर्स की बात करें सारी
कंपनीज़ पे लागू होगा। इंश्योरेंस बैंकिंग
कंपनी ध्यान रखना प्रेजेंटेशन की बात करें
तो जो भी हमने फार्मूला देखा आपने जो
फॉर्मेट देखा इट अप्लाई टू द ऑल इंडियन
कंपनी प्रिपेयरिंग फाइनेंससेस। जो भी
फाइनेंसियल स्टेटमेंट बना रहा है वो ऐसे
ही बनाएगा। इंश्योरेंस और बैंकिंग कंपनी
जो है इसको फॉलो नहीं करती। ठीक है?
क्योंकि भैया उनका अलग है। उनके पास एसेट
में जो होता है वो लोनस होता है।
लायबिलिटी में डिपॉजिट्स होता है तो उनका
अलग तरीके से बनता है और उनके ऊपर क्लास
अलग रेगुलेटरी बॉडी है बैंकों के ऊपर। ठीक
है? बैंकिंग रेगुलेशन डेवलपमेंट अथॉरिटी
या रेगुलेटरी अथॉरिटी। अकॉर्डिंग
अकाउंटिंग स्टैंडर्ड शैल प्रिवेल ओवर द
स्ेड्यूल थर्ड ऑफ़ कंपनीज़। तो देखो
एकाउंटिंग स्टैंडर्ड जो है वो भी आपको
फॉलो करना है। स्ेड्यूल थर्ड तो है ही है
लेकिन एकाउंटिंग स्टैंडर्ड को आपने पहले
फॉलो करना है। डिस्क्लोज़ करना है ऑन द फेस
ऑफ़ द फाइनेंसियल स्टेटमेंट नोट्स टू
अकाउंट्स एंड एसेंशियल्स मैंडेटरी। जो
मैंडेटरी है उसको फ्रंट में ही आपको
फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स में शो करना
पड़ेगा। द टर्म इन द रिवाइज़ स्ेड्यूल थर्ड
विल कैरी द मीनिंग डिफाइंड बाय द
एप्लीकेबल एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स। बैलेंस
टू बी मेंटेन बिटवीन एक्सेसिव डिटेल दैट
मे नॉट बी असिस्ट यूजर। जो भी बैलेंस
मेंटेन कर रहे हो बिटवीन एक्सेसिव डिटेल
दैट मे नॉट रेसिस्ट यूजर ऑफ़ फाइनेंसियल
स्टेटमेंट एंड नॉट प्रोवाइडिंग भाई आपको
सारी इंफॉर्मेशन देनी है ताकि वो ये ना
कहे भाई मेरे को तो कुछ पता ही नहीं चल
रहा क्या है कंपनी के कंपनी के पास
करंट और नॉन करंट एसेट्स का और लायबिलिटी
का बफरकेशन करोगे आप तो बफरर्केशन करने का
मतलब अलग-अलग करना है राउंड ऑफ रूल फॉर
फिगरिंग द प्रेजेंटेशन ऑफ़ फाइनेंसियल
स्टेटमेंट 100 करोड़ से कम का टर्नओवर है
नियरेस्ट 100 थाउजेंड लाख मिलियन और
डेसिमल में जाएगा। 100 करोड़ से ऊपर का
टर्नओवर है तो नियरेस्ट लाख और मिलियंस और
डेसिमल में नियरेस्ट लाख लाइक 50 55.7 लाख
है तो 56 लाख ऐसा कर देना। राउंडिंग ऑफ
रिक्वायरमेंट इज़ मैंडेटरी। ध्यान रखना।
राउंडिंग ऑफ रिक्वायरमेंट जो है वो
मैंडेटरी है। करना ही पड़ेगा। वर्टिकल
फॉर्मेट बैलेंस शीट का मैंडेटरी है। डेबिट
बैलेंस ऑफ़ स्टेटमेंट जो है वो नेगेटिव
फिगर आएगा सरप्लस के अंदर। वैसे पीएंडएल
का डेबिट बैलेंस की ना कोई जगह नहीं है
बैलेंस शीट के अंदर। तो उसे कहां
दिखाएंगे? रिज़र्व एंड सरप्लस में नेगेटिव
बैलेंस में दिखाएंगे। मैंडेटरी एट शेयर
एप्लीकेशन मनी पेंडिंग अलॉटमेंट को
दिखाना। संड्री डेटर संड्री क्रेडिटर्स को
आज हम क्या करते हैं? ट्रेड रिसीवेबल और
ट्रेड पेएबल्स के अंदर दिखाते हैं।
डिस्क्लोज़ ऑफ़ शेयर्स इन द कंपनी हेल्ड बाय
ईच शेयर होल्डर होल्डिंग मोर देन 5% ऑफ़
शेयर्स। जिस इंसान ने कंपनी के 5% से
ज्यादा शेयर खरीदे हैं, उनका नाम अलग से
डिस्क्लोज़ करना है। डिस्क्लोज़र ऑफ द
फॉलोइंग फॉर द पीरियड ऑफ़ फाइव ईयर
इमीडिएटली प्रेजेंट डेट ऑफ़ द बैलेंस शीट।
तो 5 साल तक उसको आपने डिस्क्लोज़ करना है।
क्या-क्या डिस्क्लोज़ करना है? कितने नंबर
ऑफ क्लास और शेयर्स अलॉट हुए हैं उसको।
कितने नंबर और क्लास ऑफ शेयर्स फुल्ली पेड
अप हुआ है बोनस शेयर के रूप में और कंपनी
ने कितना बायबैक करा है शेयर वो सब तो
दिखाना है। तो यार इससे बाहर क्या आएगा?
मैंने हर एक चीज करा दिया आपको। प्रपोज्ड
डिविडेंड कंपनी की जो बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर
होते हैं वो एनुअल जनरल मीटिंग में
डिविडेंड को प्रपोज करते हैं। ठीक है? और
फिर डिक्लेअ करते हैं और फिर उसके 30 दिन
के बाद उसकी पेमेंट की जाती है। प्रपोज्ड
डिविडेंड कहां दिखाया जाता है बैलेंस शीट
में कंट्रीज एंड लायबिलिटी ये लाइन
बहुतेंट है बेटा बहुत-बहुत जरूरी है। दिस
इज़ वेरी वेरीेंट पेपर में आपको देखने को
मिलेगा देखना 24 तारीख को कौन से
अकाउंटिंग स्टैंडर्ड है? एएस फोर
कंटिंजेंसीज़ एंड इवेंट अकरिंग आफ्टर द
बैलेंस शीट डेट प्रिस्राइब दैट प्रपोज्ड
डिविडेंड जो है वो नोट्स अकाउंट्स के अंदर
दिखाएंगे। उसको हम लोग अलग से नोट्स
अकाउंट्स दिखाएंगे। बैलेंस शीट के अंदर
नहीं दिखाएंगे। इन्वेस्टमेंट आर
क्लासिफाइड नॉन करंट और करंट कैटेगरी।
इन्वेस्टमेंट एक्सपेक्टेड टू रियलाइज़ विद
इन 12 मंथ। ठीक है? आर कंसीडर्ड एस करंट
एसेट अंडर करंट एसेट अदर क्लासिफाइड नॉन
करंट इन्वेस्टमेंट जो है वो बैलेंस शीट
में नॉन करंट एसेट्स में जाएगा।
चलो अब ये पॉइंट्स क्या-क्या हैं जरा
देखते हैं ध्यान से। अच्छा ये तो एक क्लास
क्वेश्चन है। ठीक है?
हां ये मतलब बहुतेंट है। इस साल इस साल
दिस इज़ वेरी वेरीेंट। ठीक है? इस साल सारे
बच्चे देखो इस साल ये बहुत जरूरी है बेटा।
देख लेना इस साल
बहुत-बहुत जरूरी है। चेंजेस इन इन्वेंटरी
ऑफ फिनिश गुड्स, डब्ल्यूआईपी और स्टॉक एंड
ट्रेड। तो जो चेंज इन इन्वेंटरी है ना
इसके अंदर तीन चीजें आती हैं। फिनिश
गुड्स, डब्ल्यूआईपी यानी वर्क इन
प्रोग्रेस और स्टॉक इन ट्रेड। द डिफरेंस
बिटवीन ओपनिंग इन्वेंटरी ऑफ़ फिनिश गुड्स,
वर्क इन प्रोग्रेस, स्टॉक इन ट्रेड और
क्लोजिंग इन्वेंटरी ऑफ़ फिनिश गुड्स, वर्क
इन ट्रेड और अह वर्क इन स्टॉक इन ट्रेड और
वर्क इन प्रोग्रेस। एंप्लॉय बेनिफिट
एक्सपेंस, एक्सपेंसेस इंकर्ड ऑन एंप्लई
टुवर्ड्स सैलरी, वेजेस, लीव इनकैशमेंट,
स्टाफ वेलफ़ेयर आर शर्ड अंडर द हेड।
एंप्लॉय बेनिफिट एक्सपेंसेस मे बी फ्यूचर
कैटेगराइज़ इनू डायरेक्ट और इनडायरेक्ट
एक्सपेंस फर्दर कैटेगराइज़ फाइनेंस कॉस्ट
इट इज़ द एक्सपेंस टुवर्ड्स इंटरेस्ट
चार्जेस ड्यूरिंग द ईयर ऑन द बोरोइंग ओनली
द इंटरेस्ट कॉस्ट इज़ शोन बैंक का जो खर्चा
है बैंक चार्जेस इसके अंदर नहीं आएगा इसके
अंदर आएगा लोन जो लिया उस पे आपने जो
खर्चा किया है ना वो सारी की सारी चीजें
ठीक है तो बैंक चार्जेस किसके अंदर आते
हैं देखो अदर एक्सपेंस के अंदर आप मुझे
बताओ इस साल आप मुझे बताओ यहां तक देख भी
रहे हो वीडियो नहीं देख रहे हो शुरू में
ही गायब हो गए हिम्मत हार के इस साल
सीबीएसई के सैंपल वाले पेपर में क्वेश्चन
था कि नहीं था? यह देखो यहीं से आया हुआ
है। एक ही चीज़ है। देखो, अदर फाइनेंसियल
एक्सपेंस सच ऐज़ बैंक चार्जेस आर शोन अंडर
द अदर एक्सपेंस। बैंक चार्जेस फाइनेंस
कॉस्ट में नहीं आएगा। अलग तरीके से घुमा
के पूछेगा, लेकिन वो पूछेगा आपको। ठीक है?
इसके बाद आते हैं नेक्स्ट। यूजज़ ऑफ़
फाइनेंशियल
एक अच्छा, कौन-कौन सी पार्टीज़ हैं? ठीक
है। कौन-कौन सी पार्टीज़ हैं? तो, कंपनी के
फ़ाइनेंसियल स्टेटमेंट्स में इंटरेस्टेड
हैं। द वेरियस यूज़ज़। और क्या-क्या यूजज़ है
औरेंस है फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स का।
रिपोर्ट ऑन स्टेवशिप फंक्शन। ध्यान रखना
स्टेवर्डशिप फंक्शन मतलब फाइनेंसियल
स्टेटमेंट्स रिपोर्ट द परफरेंस ऑफ़ द
मैनेजमेंट टू द शेयरहोल्डर्स द गैप बिटवीन
द मैनेजमेंट परफॉर्मेंस एंड ओनरशिप
एक्सपेक्टेशन जो है वो समझा जा सकता है
फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स से। उसको बोलते
हैं स्टेवर्डशिप। बेसिस ऑफ फिस्कल पॉलिसी
बेसिस ऑफ ग्रांटिंग क्रेडिट उधार देने के
लिए आपको कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी?
फ्यूचर में इन्वेस्टर्स प्रोस्पेक्ट कैसे
कितने इन्वेस्टर्स आएंगे हमारे पास? कैसे
पता चलेगा आपका शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर
कितने होंगे? लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर कितने
होंगे? वैल्यू गाइड टू द वैल्यू ऑफ़ द
इन्वेस्टमेंट ऑलरेडी मेड। तो जो भी
इन्वेस्टमेंट्स हमारे पास है ऑलरेडी उसकी
क्या वैल्यू है? हेल्प्स इन ट्रेड
एसोसिएशन एंड हेल्पिंग अदर मेंबर हेल्प्स
इन स्टॉक एक्सचेंज। ये सारे के सारे जो
पॉइंट्स हैं ये बेसिकली यूजज़ है कि भ
फाइनेंसियल स्टेटमेंट का यूज़ क्या करोगे?
कंपैरिजन के लिए है ना? कंपैरिजन के लिए
भी आप इसे यूज़ कर सकते हो। लोन लेने के
लिए, टैक्सेस पे करने के लिए,
प्रॉफिटेबिलिटी जानने के लिए, वीक पॉइंट,
स्ट्रांग पॉइंट जानने के लिए। लिमिटेशन
क्या है? करंट सिचुएशन को नहीं बताता।
पास्ट को बताता है। एसेट्स कई बार होती
हैं लेकिन वो रियलाइज़ नहीं हो पाती।
बयरर्स से लड़ाई झगड़ा होता रहता है। एक
मैनेजर कहता है इस मेथड से लगाओ। दूसरा
कहता है इस मेथड से लग रहा हो। एग्रीगेटिव
इनफेशन है। यानी सिर्फ आपको इंफॉर्मेशन
देता है। एग्रीगेट इनफेशन देता है। नॉट
डिटेल इनफेशन। हेंस आप जरूरी नहीं कि
डिसीजन मेकिंग में आपकी हेल्प कर पाएंगे।
वाइटल इंफॉर्मेशन मिसिंग। तो सारी
इंफॉर्मेशन ये लोग क्लास नहीं बताते तो
बहुत सारी इंफॉर्मेशन मिसिंग होती है।
क्वालिटेटिव एलिमेंट्स को इग्नोर कर देते
हैं ये और इंटरिम रिपोर्ट होता है।
एक्चुअल रिपोर्ट नहीं होता। सिर्फ अंदाजे
से जो है रिपोर्ट्स बनाए जाते हैं। ओके?
एनालिसिस ऑफ़ फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स में
आते हैं क्या-क्या है? द प्रोसेस ऑफ़
क्रिटिकल इवैल्यूएशन ऑफ़ द फाइनेंशियल
इंफॉर्मेशनेशन कंटेनिंग द फाइनेंसियल
स्टेटमेंट इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड एंड मेक
डिसीजन रिगार्डिंग द ऑपरेशन ऑफ़ द ऑपरेशन
ऑफ़ फर्म इज़ कॉल्ड स्टडी करना। एनालिसिस
करना ताकि एक कंक्लूजन पे पहुंच जाए। उसको
बोलते हैं एनालिसिस। द टर्म फाइनेंसियल
एनालिसिस इंक्लूड्स बोथ एनालिसिस और देखो
ध्यान रखना। अब यह आता है पेपर में।
फाइनेंशियल एनालिसिस के अंदर दोनों चीज़
आती हैं। एनालिसिस भी और इंटरप्रिटेशन भी।
द टर्म एनालिसिस मींस सिंपलीफिकेशन ऑफ
फाइनेंसियल डेटा बाय मेथड बाय मेथोडिकल
क्लासिफिकेशन गिवन इन द फाइनेंसियल
स्टेटमेंट इंटरप्रिटेशन मींस एक्सप्लेनिंग
द मीनिंग और सिग्निफिकेंस ऑफ़ डेटा
इंटरप्रिटेशन करना डेटा बताना स्टडी करना
एनालिसिस उसका डेटा को एक्सप्लेन करना
इंटरप्रिट करना बताना उसको उसको समझ के
आपने क्या डिसाइड किया वो इंटरप्रिटेशन है
ठीक है और दीज़ टू आर कॉम्प्लीमेंट्री जो
ये फाइनेंशियल एनालिसिस के अंदर जो है दो
चीजें हैं एक तो फाइनेंसियल एनालिसिस है
और दूसरा इंटरप्रिटेशन है दो
कॉम्प्लीमेंट्री है। साथ-साथ चलेंगी। ठीक
है? आपने स्टडी किया बट आपने उसको
इंटरप्रिट नहीं किया तो कोई फायदा नहीं।
विदाउट इंटरप्रिटेशन द इंटरप्रिटेशन
विदाउट एनालिसिस इट डिफिकल्ट और इवन इवन
इंपॉसिबल।
ठीक है? डिसीजन मेकिंग इनवॉल् कंपैरिजन
विद द अदर फर्म। अदर फर्म से कंपेयर करते
हैं ना तो उसको बोलते हैं इंटरफॉर्म
कंपैरिजन। वो क्रॉस सेक्शनल एनालिसिस होता
है। और विद फर्म करते हैं अपनी
परफॉर्मेंससेस। उसको टाइम सीरीज एनालिसिस
बोलते हैं या इंट्राफर्म कंपैरिजन बोलते
हैं। बेटा यह पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट है।
लिख लेना। ध्यान से सुना। कंपेयर मैं आपको
24 तारीख की सुबह जो लाइव लूंगा ना पेपर
से पहले मैं आपको उसमें रिवीजन करा के
भेजूंगा। तो डिसीजन मेकिंग इनवॉल्विंग
कंपैरिजन विद अदर फर्म दूसरों से कंपेयर
करते हैं तो क्रॉस सेक्शनल खुद से कंपेयर
करते हैं तो टाइम सीरीज बेनिफिट क्या है?
फाइनेंस फाइनेंसियल एनालिसिस इज़ यूज़फुल
एंड सिग्निफिकेंट टू द डिफरेंट यूज़र्स इन
द फॉलोइंग फाइनेंस मैनेजर टॉप मैनेजमेंट
इन सबको फायदा होता है इससे। ठीक है?
ट्रेड पेएबल को, लेंडर्स को, इन्वेस्टर्स
को, लेबर यूनियन अदर इन सबको फायदा होता
है फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स एनालिसिस से।
तो, अगला पॉइंट क्या था? ये
ऑब्जेक्टिव ऑफ़ एनालिसिस। क्यों ऑब्जेक्ट?
स्टडी क्या करते हैं? तो, एनालिसिस ऑफ़
अंडरटेन टू सर्व टू सर्व द फॉलोइंग पर्पस।
ये सारे के सारे ऑब्जेक्टिव है फाइनेंसियल
स्टेटमेंट्स को एनालिसिस करने का। पहला टु
असेस द करंट प्रॉफ़िटेबिलिटी एंड ऑपरेशनल
एफिशिएंसी ऑफ़ द फ़र्म ऐज़ अ होल ऐज़ वेल ऐज़
इट्स डिफरेंट डिपार्टमेंट। सो एज़ टू जज द
फाइनेंसियल हेल्थ ऑफ़ द फर्म टू असर्टेन द
रिलेटिवेंस ऑफ़ डिफरेंट कॉमोनेंट। जो भी
फाइनेंसियल पोजीशन है उसके अलग-अलग
कॉम्पोनेंट है उनको देखना वो ठीक है नहीं
है ज्यादा है कम है कंपनी की
प्रॉफिटेबिलिटी क्या है कंपनी की एबिलिटी
क्या है शॉर्ट टर्म डेप्ट की पेमेंट करने
की लॉन्ग टर्म डेप्ट की लिक्विडिटी क्या
है कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी क्या है सारी
चीजों को एनालिसिस करना ये लाइन ऐसी है ना
आप अपने आप से बना के लिख सकते हो अगर
थ्योरी आता है तो फाइन फाइनेंसियल
स्टेटमेंट एनालिसिस के तीन टूल्स होते हैं
कंपेरेटिव कॉमन साइज स्टेटमेंट्स और दूसरा
हो गया आपका रेशियोज़ और तीसरा हो गया कैश
फ्लो स्टेटमेंट। ठीक है? ट्रेंड एनालिसिस
किसे बोलते हैं? इट इज़ द टेक्निक ऑफ़
स्टडिंग द ऑपरेशनल रिजल्ट्स फाइनेंसियल
पोजीशन ऑफ़ सेवरल ईयर। कई साल के डाटा को
उठाते हैं और उसके बेसिस पे ट्रेंड
एनालिसिस करते हैं। अगला है रेशियो
एनालिसिस और कैश फ्लो। तो पांच पॉइंट हो
गया। कंपेरेटिव कॉमन साइज, रेशियो, कैश
फ्लो और ट्रेंड। ये ध्यान रखना आप लोग।
रेश्यो भी हो गया, कंपैरेटिव कॉमन साइज भी
हो गया, ट्रेंड एनालिसिस हो गया। है ना?
ये पांच हो गया। एक एक्स्ट्रा भी है
ट्रेंड एनालिसिस जो आप नंबर ऑफ ईयर देख
देखते हो सीरियल वाइज़ और देखते हो ट्रेंड
क्या आ रहा है। ठीक है? कंपैरेटिव
स्टेटमेंट ये रहा। अब ध्यान से समझना आप
कंपैरेटिव स्टेटमेंट कैसे बनाते हो। ऑलदो
इस चैप्टर से थ्योरी नहीं आती है। सबसे
पहले आपने बनाना क्या है? आपको एब्सोल्यूट
फिगर लिखने हैं। सबसे पहले एब्सोल्यूट
चेंज बनाना है। फिर परसेंटेज चेंज बनाना
है। एब्सोल्यूट चेंज का फार्मूला है करंट
ईयर माइनस प्रीवियस ईयर। परसेंटेज चेंज का
फार्मूला है एब्सट्यूट चेंज अप प्रीवियस
ईयर इंट 100। ठीक है? तो इससे थ्योरी आती
नहीं है। इस चैप्टर को तो हटाओ आप। बट फिर
भी और कंपैरेटिव बैलेंस कंपैरेटिव इनकम
स्टेटमेंट भी सेम यही चीज है। है ना? ना
एब्सोल्यूट चेंज और परसेंटेज चेंज।
हां। अब लिमिटेशन क्या है फाइनेंसियल
एनालिसिस का? फाइनेंसियल एनालिसिस डज़ नॉट
कंसीडर द प्राइस लेवल चेंजेस। प्राइस लेवल
चेंजेस को कंसीडर नहीं करता। फाइनेंशियल
एनालिसिस जो है वो मिसलीडिंग हो सकता है।
अकाउंटिंग प्रोसीजर पॉलिसी में क्या चेंज
आया उसके अकॉर्डिंग? क्या पता आपने उस
चेंज को अडॉप्ट ही नहीं किया। पता ही नहीं
है आपको। फाइनेंसियल एनालिसिस जो है वो
रिपोर्ट्स की स्टडी बताता है। बस ये
लिमिटेशन है। आपको पेपर में कैसे आएगा?
व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़ नॉट अ लिमिटेशन?
व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़ अ लिमिटेशन? तो
ध्यान रखना पहला वो प्राइस लेवल चेंजेस को
अडॉप्ट नहीं करता। वो मिसलीडिंग भी हो
सकता है। फाइनेंसियल एनालिसिस जो है वो
सिर्फ रिपोर्ट्स की स्टडी करता है।
मॉनिटरी इनफेशन अलोंग इज़ कंसीडर इन
फाइनेंसियल एनालिसिस व्हाइल नॉन मॉनिटरी
क्वालिटेटिव एस्पेक्ट को इग्नोर किया जाता
है। और बेसिस ऑफ़ कॉनंसेप्ट्स और करंट
पोजीशन को नहीं बताता। हमेशा ये पास्ट के
बारे में बताता है। करंट पोजीशन के बारे
में नहीं बताता।
नेक्स्ट है अकाउंटिंग रेशियोस p/ q के
फॉर्म में आता है और इससे बहुत ज्यादा
थ्योरी नहीं आती। न्यूमेरिकल्स हैं,
फार्मूले हैं बहुत सारे। अच्छा रेशियोज़ के
ऑब्जेक्टिव क्या-क्या हैं? टू नो द एरिया
ऑफ़ द बिनेसेस व्हिच नीड मोर अटेंशन।
अकाउंटिंग रेशियोज़ में सबसे जरूरी है कि
आपको यह पता चल जाता है कहां पे आपको
ज्यादा अटेंशन देना है। टू नो अबाउट द
पोटेंशियल एरिया। कहां पे इंप्रूवमेंट के
चांसेस हैं? टू प्रोवाइड अ डीपर एनालिसिस
ऑफ द प्रॉफिटेबिलिटी, लिक्विडिटी,
सॉल्वेंसी और एफिशिएंसी। इंफॉर्मेशन दिया
जाता है क्रॉस सेक्शनल एनालिसिस का और
इंफॉर्मेशन दिया जाता है क्लास जिससे आप
फ्यूचर में अपने बिजनेस के लिए बहुत सारे
एस्टीमेट्स को बना सकते हैं। मेन एडवांटेज
रेशियोज़ के एडवांटेज क्या है? एफिकसी ऑफ़
डिसीजंस कि आपके डिसीजन कितने अच्छे हैं,
कितने बेटर हैं? सिंपलीफाई कॉम्प्लेक्स
फिगर। कॉम्प्लेक्स फिगर को सिंपलीफाई कर
सकते हैं। एक रिलेशनशिप इस्टैब्लिश कर
सकते हो दो एकाउंटिंग कॉम्पोनेंट के बीच
में। कंपैरेटिव में कंपैरिजन में आसानी
होगी। आइडेंटिफिकेशन ऑफ़ प्रॉब्लम एरियाज
कहां-कहां प्रॉब्लम है उस एरियाज को
आइडेंटिफाई कर सकते हो। स्ट्रेंथ, वीकनेस,
अपॉर्चुनिटी और थ्रेट्स को एनालिसिस कर
सकते हो। वेरियस कंपैरिजन बहुत अलग-अलग
टाइप के कंपैरिजन कर सकते हो। इंट्राफ
कंपैरिजन हो या इंटरफॉर्म। इंटरफॉर्म को
क्रॉ इसे भूलना मत बेटा। बहुतेंट है। लिख
लो कमेंट सेक्शन में। इंटरफॉर्म मतलब
क्रॉस सेक्शनल और इंट्राफ मतलब टाइम सीरीज
एनालिसिस। ठीक है? लिमिटेशन क्या है? है द
लिमिटेशन ऑफ़ रेशियो एनालिसिस व्हिच अराइज़
प्राइमरली फ्रॉम द नेचर ऑफ़ फाइनेंसियल
स्टेटमेंट्स आर अंडर लिमिटेशंस ऑफ़
एकाउंटिंग डाटा। अगर एकाउंटिंग डाटा में
प्रॉब्लम है तो फिर भैया जो रेश्यो आएगा
उसमें भी प्रॉब्लम आएगा। प्राइस लेवल
चेंजज़ को इग्नोर करते हैं। क्वालिटेटिव
एलिमेंट्स को इग्नोर करते हैं। एकाउंटिंग
प्रैक्टिस में चेंज हो सकता है। बहुत सारी
फॉरकास्टिंग करते हैं और फॉरकास्टिंग
जरूरी नहीं कि सही हो। बेटा 12th में ना
होता क्या है? 12th में भले ही न्यूमेरिकल
ज्यादा आए बट सीईटी में ज्यादातर थ्योरी
पूछता है। तो आप करके सारा कुछ चलना। मैं
आपको पूरी एनसीआरटी करा रहा हूं। उसे
फास्ट फॉरवर्ड में देख लेना। जरूर देख
लेना। अब देखो ये चीज कहीं भी आपको कोई
पढ़ाता नहीं लेकिन ये भी पेपर में अगर
पूछा गया था। दो तरह के क्लासिफिकेशन
ट्रेडिंग ट्रेडिशनल क्लासिफिकेशन और
मॉडर्न क्लास यानी कि दूसरा होता है
फंक्शनल क्लासिफिकेशन जिसको मॉडर्न
क्लासिफिकेशन भी आप कहते हो। तो ट्रेडिशनल
क्लासिफिकेशन में ये चार रेशियोज़ होते
हैं। देखो आपको पता ये तीन होते हैं। सॉरी
स्टेटमेंट ऑफ प्रॉफिट लॉस रेशियोज़, बैलेंस
शीट रेश्यो और कंपोजिट रेश्यो। ये रेशियोज़
होते थे। और आजकल रेशियोज़ क्या होते हैं?
आजकल तो सारे रेशियोज़ पता ही है आपको ना।
लिक्विडिटी रेशियो, सॉल्वेंसी रेशियो,
एक्टिविटी रेशियो और प्रॉफिटेबिलिटी
रेशियो। ये लेकिन पुराने क्या होते हैं?
बैलेंस शीट। देखो पहले जो रेश्यो होते थे
वो बहुतेंट है यहां पे। स्टेटमेंट ऑफ़
पीएंडएल, बैलेंस शीट और कंपोजिट रेशियो।
बट आज बहुत अलग-अलग टाइप के रेशियोज़ होते
हैं। करंट रेशियो, क्विक रेशियो, डेप्ट टू
इक्विटी रेशियो जो भी जो भी चार के चार
रेशियो के अंदर जितने भी रेशियो आते हैं,
प्रॉफिटेबिलिटी, सॉल्वेंसी,
एक्टिविटी एट, टर्नओवर और लिक्विडिटी अ
वेरी हाई। अच्छा ये ये भी है क्लास अ वेरी
हाई करंट रेश्यो इंप्लाइस हैवी
इन्वेस्टमेंट इन करंट एसेट व्हिच इज़ नॉट
गुड 2:1 होना चाहिए करंट रेशियो का आइडियल
अगर बहुत ज्यादा है तो भैया इसका मतलब
आपने रिसोर्सेज का प्रॉपर यूटिलाइजेशन
नहीं किया और अगर लो है वो भी डेंजर
सिचुएशन ऑफ़ द बिज़नेस पुट रिस्क ऑफ़ फेसिंग
सिचुएशन वेयर नॉट एबल टू पे शॉर्ट टर्म
डेप्ट। अगर करंट रेशियो बहुत कम है तो
इसके बाद आप शॉर्ट टर्म डेप्ट की पेमेंट
ही नहीं कर पाओगे। तो इसकी आइडल रेशियो
2:1 है। क्विक रेशियो को हम एसेट टेस्ट
रेशियो भी कहते हैं। इसके अंदर से प्रीपेड
एक्सपेंस को घटा देते हैं और इन्वेंटरी को
घटा देते हैं। तो हमारा क्विक एसेट आता
है। क्विक एसेट को लिक्विड एसेट बोलते
हैं। क्विक रेशियो को लिक्विड क्विक
रेशियो को लिक्विड रेश्यो या एसेट टेस्ट
रेशियो भी कहते हैं। इसका आइडल रेशियो जो
है वो 1 होता है। ठीक है? तो ये ध्यान
रखना। डे इक्विटी का भी 2 1 होता है। आइडल
रेशियो। डे इक्विटी रेशियो ये रहा। डेप्ट
इक्विटी रेशियो मेजर करता है रिलेशनशिप
बिटवीन लॉन्ग टर्म डेप्ट और इक्विटी। उसका
आइडल रेशियो क्या है? 2:1 डे इक्विटी
डेप्ट अपॉन इक्विटी इक्विटी मतलब शेयर
होल्डर फंड। शेयर होल्डर फंड में आता है
शेयर कैपिटल रिज़र्व एंड सरप्लस प्लस मनी
रिसीवेंशन शेयर वारेंट प्लेयर एप्लीकेशन
पेंडिंग अलॉटमेंट या इक्विटी शेयर कैपिटल
प्लस प्रेफरेंस शेयर कैपिटल। ये सब आता है
शेयर कैपिटल के अंदर। ठीक है? शेयर होल्डर
फंड आता है नॉन करंट एसेट्स प्लस वर्किंग
कैपिटल माइनस नॉन करंट लायबिलिटी। और
वर्किंग कैपिटल क्या आता है? करंट एसेट
माइनस करंट लायबिलिटी। द रेशियो मेजर्स
डिग्री ऑफ इनडे्टनेस। तो जो डेप्ट टू
इक्विटी रेशियो है वह बताता है कि भाई
कितना कर्जा है आपके पास और कितना खुद का
पैसा आपने लगाया है। ठीक है? हाउएवर फ्रॉम
द पर्सपेक्टिव ऑफ़ ओनर्स ग्रेटर यूज़ ऑफ़
डेप्ट मे हेल्प इंश्योरिंग। ये तो आपने
बीएसटी के अंदर पढ़ा होगा। जैसे-जैसे अपने
कैपिटल स्ट्रक्चर में डेप्ट को ऐड करते
चले जाओगे, तुम्हारा जो अर्निंग पर शेयर
है, वह भी बढ़ता चला जाएगा। सोचो, पूरी
एनसीआरटी की दो-दो बुक मैं कवर करा रहा
हूं। फार्मूले तो मैं आपको अलग से करा ही
दूंगा। जिस दिन पेपर होगा सुबह मैं सारे
फार्मूले रिवीजन कराऊंगा और जो की पॉइंट
है वह भी कराऊंगा। जैसे की पॉइंट क्या है
कि करंट एसेट के अंदर हम लोग इन्वेंटरी
सॉरी सॉरी करंट एसेट के अंदर लूज टूल
स्टोर स्पेयर पार्ट नहीं लेते। तो वो आएगा
आप ले लोगे। आप बोलोगे ये करंट एसेट है।
भाई नहीं लेना वो सब मैं बातें बताऊंगा
आपको। डेप्ट टू कैपिटल एंप्लॉयड लॉन्ग
टर्म डेप्ट अपॉन कैपिटल एंप्लॉयड। अब
कैपिटल एंप्लॉयड का फार्मूला बहुत सारा
होता है। कैपिटल एंप्लॉयड का फार्मूला
लाइक सबसे पहला होता है कैपिटल एंप्लॉयड
का नॉन करंट लायबिलिटी प्लस शेयरहोल्डर
फंड नॉन करंट एसेट प्लस वर्किंग कैपिटल
टोटल लायबिलिटी माइनस करंट लायबिलिटी शेयर
कैपिटल प्लस रिजर्व सरप्लस प्लस लॉन्ग
टर्म डेप्ट प्रोपराइट रेशियो शेयर होल्डर
फंड अपॉन टोटल शेयरहोल्डर फंड अपॉन टोटल
एसेट ठीक है ये हो गया प्रोपराइट रेशियो
यहां पे नेट एसेट लिखा है सॉरी नेट एसेट
ही लिखना ठीक है नेट एसेट मतलब
डेप्रिसिएशन घटाने के बाद टोटल एसेट डे
रेशियो टोटल एसेट अप लॉन्ग टर्म डे हायर
रेशियो इंडिकेट करता है एसेट्स मेनली
फाइनेंस बाय ओनर फंड तो टोटल एसेट अप
लॉन्ग टर्म डेप्ट में अगर टोटल एसेट
ज्यादा है इसका मतलब एसेट्स आपने खुद के
पैसे से खरीदा है। टोटल एसेट कम है तो
एसेट आपने उधार लेके ज्यादा खरीदा है। तो
हर रेश्यो रिलेशनशिप बताता है। इंटरेस्ट
कवर रेशियो कि आपका प्रॉफिट कितना है?
बिफोर इन टैक्स अपॉन एनुअल इंटरेस्ट कितना
है? हायर रेशियो इंश्योर सेफ्टी ऑफ़
इंटरेस्ट ऑन डे। तो ये रेशियो जितना
ज्यादा होगा डिबेंचर होल्डर को उतना ही
संतुष्टि होगा। खुश होंगे कि भ हमें तो
ब्याज हमारा मिल ही जाएगा। जाएगा। कंपनी
के पास प्रॉफिट बहुत ज्यादा है। एक्टिविटी
रेशियोज़ के अंदर ये सारे रेशियोज़ आते हैं।
इन्वेंटरी टर्नओवर रेशियो, सीओजीस अपॉन
एवरेज इन्वेंटरी, ट्रेड रिसीबल टर्नओवर
रेशियो, सेल्स अह मतलब नेट क्रेडिट सेल्स
अपॉन एवरेज ट्रेड रिसीवल, ट्रेड पेएबल
टर्नओवर यो, नेट क्रेडिट परचेस अपॉन एवरेज
ट्रेड पेएबल, नेट एसेट टर्नओवर रेशियो,
रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन अपॉन नेट एसेट।
फिक्स्ड एसेट, टर्नओवर रेशियो, रेवेन्यू
फ्रॉम ऑपरेशन अपॉन नेट फिक्स्ड एसेट्स।
वर्किंग कैपिटल टर्नओवर रेशियो, सेल्स
अपॉन वर्किंग कैपिटल। ठीक है? तो बस वही
सारा लिखा हुआ है।
हम
हां। अब जो आपने यह रेशियो पढ़ा आपने ट्रेड
रिसीवेबल टर्नओवर रेशियो वो अगर आपको
निकालना हो नंबर ऑफ डज़ कि भ कितने दिन में
आप पैसा जो है डेटर से कलेक्ट कर लेते हो
या कलेक्शन पीरियड निकालना हो तो फार्मूला
क्या लगाओगे 1 / ट्रेड रिसीव टर्नओवर
रेशियो इंटू नंबर ऑफ डज़ और मंथ मंथ में
मल्टीप्लाई कर देना 12 से डज़ में
मल्टीप्लाई कर देना 365 से ठीक है ये
ध्यान रखना इसको बोलते हैं कलेक्शन पीरियड
कितने दिन में आप उधारी को कलेक्ट कर लोगे
ठीक है ट्रेड पेएबल टर्नओवर रेशियो का
फार्मूला वही है नेट क्रेडिट परचेस अपॉन
एवरेज ट्रेड पेबल। एवरेज ट्रेड पेबल कैसे
निकलेगा? ओपनिंग क्रेडिटर, ओपनिंग बिल्स
पेबल, क्लोजिंग क्रेडिटर, क्लोजिंग बिल्स
पेबल डिवाइड बाय टू और एवरेज पेमेंट
पीरियड, नंबर ऑफ़ डज़ और मंथ अपॉन ट्रेड
पेएबल टर्नओवर रेशियो। तो नीचे आएगा ट्रेड
पेएबल टर्नओवर रेशियो 1 / ट्रेड पेएबल
टर्नओवर रेशियो इंटू 12 मंथ या 365 डज़।
इसलिए वो ऊपर लिख रखा है। ठीक है? एवरेज
ट्रेड पेएबल अपॉन और ये क्वेश्चन की
प्रैक्टिस अगर करना चाहो तो कर सकते हो।
अच्छे क्वेश्चन दे रखे हैं एनसीईआरटी के
अंदर। बट एनसीईआरटी के जो क्वेश्चंस हैं
वो सारे के सारे मैंने तुम्हें क्लास में
करा दिए हैं ऑलरेडी। रिवीजन करा दिया है।
लाइव सेशन में कवर कर लिया है। तो आपको
थ्योरी थ्योरी कवर करनी है बस। ठीक है? और
मैं एक और वीडियो लेके आऊंगा एग्जामिनेशन
से एक दिन पहले जिसके अंदर मैं छोटी सी
वीडियो बनाऊंगा 15 मिनट की 20 मिनट की
जिसके अंदर मैं पूरे सिलेबस की मोस्ट
एक्सपेक्टेड थ्योरीज जो है उसके अंदर कवर
करा दूंगा। ये तो मैं पूरी एनसीईआरटी करवा
रहा हूं आपको। ए टू जेड मैं मैं जानता हूं
मुझे 80 में से 80 देते हैं बच्चे ला के।
इसलिए मैं सब चीज कराता हूं। अगर मैं
तुम्हें पूरा ही नहीं कराऊंगा तो कैसा आधे
मन से काम करने का कोई फायदा नहीं। तो
एनसीईआरटी बहुत इंपॉर्टेंट है। ये सब ऐसे
ही लिखा नहीं है। ये पता नहीं कितने दिन
लगे हैं इसको अनलाइनिंग करने में। ठीक है?
नेट एसेट और कैपिटल एंप्लॉयड टर्नओवर
रेशियो फार्मूला क्या है? रेवेन्यू फ्रॉम
ऑपरेशन अपॉन कैपिटल एंप्लॉयड। राइट?
कैपिटल एंप्लॉयड टर्नओवर रेशियो व्हिच
स्टडीज़ टर्नओवर ऑफ कैपिटल एंप्लॉयड कि
भैया कैपिटल एंप्लॉयड कितना है और टर्नओवर
कितना है? टर्नओवर कैपिटल एंप्लॉयड कितने
परसेंटेज है? ये बताता है बस। वर्किंग
कैपिटल टर्नओवर रेशियो सेल्स अपॉन वर्किंग
कैपिटल। ठीक है? तो वर्किंग कैपिटल
टर्नओवर रेशियो में आएगा सेल्स अप वर्किंग
कैपिटल। ठीक है? ये हो गया।
हाई टर्नओवर कैपिटल एंप्लॉयड वर्किंग
कैपिटल एंड फिक्स्ड एसेट इज़ गुड साइन। अगर
आपका ज्यादा है रेशियोज़ तो ये अच्छा साइन
है। वैसे टर्नओवर रेशियो ज्यादा है तो ठीक
है। बस बहुत ज्यादा है तो गलती है। ये
सारे के सारे रेशियोज़ हैं। प्रॉफिटेबिलिटी
रेश्यो। बट ये एनसीईआरटी के अंदर है।
सीबीएसई क्या कहता है कि आपको जीपी
रेशियो, ऑपरेटिंग रेशियो, ऑपरेटिंग
प्रॉफिट रेशियो, नेट प्रॉफिट रेशियो, आर
ओआई। बस आपको इतना पढ़ना है। बाकी यह जो
रेशियोज़ हैं ना 6 7 8 9 10 यह नहीं है
आपके सिलेबस के अंदर। ठीक है? तो जीपी
रेशियो जीपी अपॉन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन *
100 एनपी रेशियो एनपी अपॉन रेवेन्यू फ्रॉम
ऑपरेशन * 100 ऑपरेटिंग रेशियो ऑपरेटिंग
कॉस्ट अपॉन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन * 100
ऑपरेटिंग कॉस्ट कैसे निकला? सीओजीएस प्लस
ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस। सीओजीएस कैसे निकलता
है? ओपनिंग स्टॉक प्लस परचेस प्लस
डायरेक्ट एक्सपेंस माइनस क्लोजिंग स्टॉक।
और ऑपरेटिंग एक्सपेंस के अंदर आता है
डेप्रिसिएशन, अनमोटाइजेशन, सेलिंग
डिस्ट्रीब्यूशन, ऑफिस एंड एडमिनिस्ट्रेशन।
और ऑपरेटिंग प्रॉफिट रेशियो का फार्मूला
ऑपरेटिंग प्रॉफिट अप रेवेन्यू फ्रॉम
ऑपरेशंस * 100 ऑपरेटिंग कॉस्ट रेशियो
ऑपरेटिंग प्रॉफिट रेशियो दोनों मिला के
क्या आता है आपको 100% तो अगर आपको 100 से
घटा दोगे दूसरा आपको मिल जाएगा। एनपी
रेशियो नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स ये अकेला
एक ऐसा फार्मूला है जहां पे नेट प्रॉफिट
आफ्टर टैक्स अपॉन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस
* 100 और रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड क्या
होता है? प्रॉफिट बिफोर इंटेंट टैक्स अपॉन
कैपिटल एंप्लॉयड इंटू 100 ठीक है और
कैपिटल एंप्लॉयड पता है कैसे निकला।
प्रॉफिट आफ्टर टैक्स दिया होगा तो आपने
टैक्स ऐड कर देना उसके अंदर।
इंटरेस्ट ऐड कर देना प्रॉफिट बिफोर टैक्स
निकलेगा। हमारा लास्ट चैप्टर कैश फ्लो
स्टेटमेंट। इसके अंदर भी देख लेते हैं।
सबसे पहली बात कौन से
अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के बेसिस पे बनता है।
अकाउंटिंग स्टैंडर्ड थ्री एएस थ्री के
बेसिस पे कैश फ्लो स्टेटमेंट बनेगा। ध्यान
रखना। ठीक है? फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स आर
डिफाइंड एज कंपनीज़ कंपनीज़ एक्ट 2013
सेक्शन टू क्लॉज़ 40 एंड इंक्लूड्स कैश
फ्लो स्टेटमेंट। फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स
के अंदर कैश फ्लो स्टेटमेंट भी आता है। अ
कैश फ्लो स्टेटमेंट प्रोवाइड इनेशन अबाउट
हिस्टोरिकल चेंजज़ इन कैश एंड कैश
इक्विवेलेंट ऑफ़ द एंटरप्राइज बाय
क्लासिफाइंग कैश फ्लोस इनू ऑपरेटिंग,
इन्वेस्टिंग, फाइनेंसिंग। इसके अंदर तीन
एक्टिविटी आती हैं। ऑपरेटिंग,
इन्वेस्टिंग, फाइनेंसिंग। और इसका मेन
ऑब्जेक्टिव है कि भ ऑपरेटिंग से कितना
पैसा आ रहा है और जा रहा है। इन्वेस्टिंग
से कितना आ रहा है, जा रहा है और
फाइनेंसिंग से कितना पैसा आ रहा है, जा
रहा है, उसको चेक करना। कैश फ्लो
स्टेटमेंट शोज़ इनफ्लो, आउटफ्लो ऑफ़ कैश एंड
कैश इक्वल फ्रॉम वेरियस एक्टिविटी लाइक
ऑपरेटिंग, इन्वेस्टिंग और फाइनेंसिंग। ठीक
है? इनफ्लो आउटफ्ल् चेक करना। बेनिफिट
क्या है कैश फ्लो स्टेटमेंट का? आपको पता
रहेगा किस एक्टिविटी से कितना पैसा आ रहा
है, जा रहा है। तो लिक्विडिटी का पता
रहेगा कि भ हमारे पास कितना पैसा बचा हुआ
है। कैश फ्लो की इनेशन रहेगी जिससे क्लास
कंपनी फ्यूचर में कैश कितना जनरेट करना
है, कहां कितना खर्चा करना है, यह पता लगा
सकेगी। इट आल्सो एनहांस द कंपेरेबिलिटी ऑफ
रिपोर्टिंग है ना। आप अपनी ऑपरेटिंग
परफॉर्मेंस को कंपेयर भी कर सकते हो और इट
हेल्प्स इन बैलेंसिंग इट्स कैश फ्लो
इनफ्लो आउट फ्लो को बैलेंस भी कर सकते हो
अगर स्ट्रेंड बनाते हो तो ये लाइन देखना
बहुतेंट ध्यान से सुनो इट्स वेरी
वेरीरीेंट एज़ पर एएस3 कैश कंप्राइ कैश इन
हैंड डिमांड डिपॉजिट विद बैंक्स एंड कैश
इक्विवेलेंट मींस शॉर्ट टर्म हाई लिक्विड
इन्वेस्टमेंट्स दैट आर रेडीली कन्वर्टेबल
इंटू नोन ऐज़ द कैश नोन ऐज़ द अमाउंट ऑफ़ कैश
व्हिच आर सब्जेक्ट टू इनसिग्निफिकेंट
रिस्क ऑफ़ चेंज इन द वैल्यू एन
इन्वेस्टमेंट नॉर्मली क्ल क्लासिफाइज़ अ
कैश एंड कैश इक्विवेलेंट कोई भी इन्वेस्ट
मेंट कैश एंड कैश इक्विवेलेंट क्लासिफाई
करेगा ओनली व्हेन इट हैज़ शॉर्ट टर्म
मैच्योरिटी ऑफ़ से 3 मंथ्स और लेस फ्रॉम द
डेट ऑफ़ एक्वज़िशन। 3 महीने या तीन महीने से
कम का अगर कोई भी इन्वेस्टमेंट है वो कैश
एंड कैश इक्विवेलेंट के अंदर आएगा।
इन्वेस्टमेंट इन शेयर्स आर एक्सक्लूडेड
फ्रॉम कैश एंड कैश इक्विवेलेंट अनलेस दे
आर सब्सटैंशियल कैश इक्विवेलेंट।
इन्वेस्टमेंट्स इन शेयर्स आर एक्सक्लूडेड।
शेयर्स में आपने जो इन्वेस्टमेंट की थी
उसे एक्सक्लूड कर देंगे फ्रॉम कैश
इक्विवेलेंट्स अनलेस दे आर इन सब्सटैंशियल
कैश इक्विवेलेंट। ठीक है? तो शेयर्स को
आपने नहीं लेना है फॉर इन जनरल नहीं लेना
है। फॉर एग्जांपल प्रेफरेंसेस ऑफ़ अ कंपनी
एक्वायर्ड शॉर्टली बिफोर देयर स्पेसिफिक
रिडमशन डेट है ना तुरंत ले लिया आपने
रिडीम होने वाला है वो प्रोवाइडेड देयर इज़
ओनली सिग्निफिकेंट रिस्क ऑफ़ फेल ऑफ़ द
कंपनी टू रिपेयर अमाउंट इट्स मैच्योरिटी।
सिमिलरली शॉर्ट टर्म मार्केट सिक्योरिटी
व्हिच कैन बी रेडीली कन्वर्टेड इंटू कैश
ट्रेड एज़ कैश इक्विवेलेंट। जो 3 महीने के
अंदर कैश में कन्वर्ट हो जाए हम उसको ही
क्या बोलते हैं? कैश एंड कैश इक्विवेलेंट।
शेयर वाली लाइन कह रहा है कि इन जनरल हम
शेयर्स को नहीं मानते। कैश इक्विवेलेंट
क्यों यार? शेयर्स थोड़ी कोई 2-3 महीने के
लिए इशू होता है। लेकिन फिर भी मान लो
आपने 2-3 महीने में शेयर्स के पैसे तो
नहीं मिलेंगे तो उसको कैसे मान लें कैश
एंड कैश इक्विवेलेंट? तो अगर लेकिन अगर
आपने वो शेयर्स खरीदे जो अभी रिडीम होने
वाले हैं अगले महीने 2 महीने 3 महीने के
अंदर-अंदर तो वो कैश फ्लो कैश इक्विवेलेंट
हो जाएगा। अदरवाइज़ वो कैश इक्विवेलेंट
नहीं होगा। कौन से अकॉर्डिंग बनता है?
अकॉर्डिंग टू एस थ्री बनता है। तीन
एक्टिविटीज़ होती हैं। ऑपरेटिंग,
इन्वेस्टिंग और फाइनेंसिंग एक्टिविटी। कैश
फ्लो फ्रॉम ऑपरेटिंग के अंदर क्या आता है?
दीज़ आर द प्रिंसिपल रेवेन्यू जनरेटिंग
एक्टिविटी। ये मेन है, ऑपरेटिंग है। है
ना? ये आपका प्रिंसिपल रेवेन्यू। यहीं से
आ रहा है मेन पैसा आपका। द अमाउंट ऑफ कैश
फ्रॉम ऑपरेशंस इंडिकेट इंटरनल सॉल्वेंसी
लेवल ऑफ़ द कंपनी एंड द की इंडिकेटर ऑफ़
एक्सटेंट टू व्हिच ऑपरेशंस ऑफ़ एंटरप्राइज
हैव जनरेटेड सफिशिएंट कैश। यहां से
एक्चुअली में पैसा आ रहा है। कैश फ्लो
फ्रॉम ऑपरेटिंग एक्टिविटी इज़ प्राइमरी
डिराइव्ड फ्रॉम द मेन एक्टिविटी ऑफ़ द
एंटरप्राइज़।
कैश इनफ्लो फ्रॉम ऑपरेटिंग एक्टिविटी।
पैसा कैसे आएगा? जब आप सामान को बेचोगे,
रॉयल्टी मिलेगी, सर्विस मिलेगी। पैसा कहां
जाएगा? सप्लायर को पेमेंट करोगे, एंप्लॉइज़
को पेमेंट करोगे, जो भी आपने एक्स व जहां
भी पेमेंट करी है, उसका डिफरेंस कैश
ऑपरेटिंग के अंदर आता है। और ये सारा जो
है ना यह डायरेक्ट मेथड के अंदर आता है।
आपको पता है कैश फ्लो के दो मेथड होते
हैं। डायरेक्ट इनडायरेक्ट आपके सिलेबस में
सिर्फ इनडायरेक्ट मेथड है।
कैश आउटफ्लो फ्रॉम इन्वेस्टिंग। तो आप
एसेट्स खरीदोगे, बिल्डिंग, मशीन, फर्नीचर
खरीदोगे, पैसा जाएगा। और इनको बेचोगे तो
पैसा आएगा। है ना? सेल, रिसीप्ट ऑफ़
डिस्पोजल ऑफ़ फिक्स्ड एसेट। एसेट को
बेचोगे, बिल्डिंग मशीन, फर्नीचर बेचोगे।
फाइनेंस से पैसा कैसे आएगा? प्रोसीड फ्रॉम
इशू ऑफ़ शेयर्स, शेयर इशू किया, डिबेंचर
इशू किया, लोन लिया, बैंक ऑफ बढ़ गया। इन
सब से पैसा आएगा, जाएगा कैसे? इंटरेस्ट
पेड, डिविडेंड पेड, लोन को रिपे किया,
शेयरहोल्डर्स को पेमेंट किया, रिडमशन ऑफ़
शेयर्स। तो वो सारा का सारा आउटफ्ल् हो
गया। ट्रीटमेंट ऑफ़ सब पर्टिकुलर आइटम
एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी आइटम। ध्यान रखना
एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी आइटम आर नॉट रेगुलर
फेनोमिन एंड एग्जांपल लॉस ड्यू टू थप्ट
अर्थक्वेक, फ्लड। एक्स्ट्राऑर्डिनरी आइटम
आर नॉन रेकरिंग इन नेचर। है ना? कभी-कभी
होता है तो इसको अलग से आपने प्लस करना
है। इससे जो भी लॉस हुआ ऑपरेटिंग के अंदर
और इसको माइनस करना है। जो भी अगर
इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा उसको हम लोग क्या
करेंगे? माइनस करेंगे। इंटरेस्ट एंड
डिविडेंड फाइनेंसिंग से माइनस ऑपरेटिंग
में प्लस टैक्सेस इनकम और गेन
टैक्सेस मे बी इनकम टैक्स कैपिटल गेन
टैक्स डिविडेंड टैक्स टैक्स। एएस3
रिक्वायर्ड दैट कैश फ्लो अराइजिंग फ्रॉम
टैक्सेस ऑन इनकम शुड बी सेपरेटली
डिस्क्लोज डिस्क्लोज्ड शुड बी क्लासिफाई
एज कैश फ्लो फ्रॉम ऑपरेटिंग एक्टिविटी
अनलेस स्पेसिफाइड आइडेंटिफाई अंडर द
फाइनेंसिंग एक्टिविटी ध्यान से समझना
बहुतेंट टैक्स ऑन ऑपरेटिंग प्रॉफिट शुड बी
क्लासिफाई ऑपरेटिंग कैश फ्लो ऑपरेटिंग
प्रॉफिट पे जो टैक्स लगता है तो वो
ऑपरेटिंग एक्टिविटी में आता है डिविडेंड
टैक्स टैक्स पेड ऑन डिविडेंड जो है वह
फाइनेंसिंग एक्टिविटी में आएगा डिविडेंड
फाइनेंसिंग एक्टिविटी का पार्ट है तो
फाइनेंसिंग एक्टिविटी में आएगा कैपिटल गेन
पे जो टैक्स है वह क्लास आपका इन्वेस्टिंग
एक्टिविटी में आएगा। ये तीनों पॉइंट बहुत
इंपॉर्टेंट है। बच्चा इसे पढ़ के नहीं
जाता तो बस टैक्स को ऑपरेटिंग के अंदर लिख
के आ जाता है। लेकिन टैक्स इन्वेस्टिंग और
फाइनेंसिंग में भी हो सकता है। प्रपोज्ड
डिविडेंड हम पहले ही बात कर चुके हैं।
प्रपोज्ड डिविडेंड एएस4 के अंदर वो
कंटिंजेंसी एंड इवेंट अकरिंग आफ्टर बैलेंस
शीट डेट ये नाम है। यहां से यहां तक एएस
का नाम है। प्रपोज्ड डिविडेंड नोट्स टू
अकाउंट्स के अंदर आएगा। और इसका जो
प्रीवियस ईयर का फिगर है वही ऑपरेटिंग में
प्लस करेंगे। वही फाइनेंसिंग से माइनस
करेंगे। ये ड्रीम नहीं ध्यान। करंट ईयर का
हमें कहीं कुछ लेने की जरूरत नहीं है।
हमें इनडायरेक्ट मेथड ही पढ़ना होता है।
जहां पे हम नेट प्रॉफिट को सबसे ऊपर लिखते
हैं। फिर उसी में सारे के सारे प्लस माइनस
करते हैं। दो मेथड होते हैं। डायरेक्ट
हमें पढ़ना नहीं तो हम स्टेटमेंट ऑफ पेनल
को लेते हैं और उस बेसिस पे हम लोग कैश
फ्लो बनाते हैं। तो बस यहां से कोई थ्योरी
आती नहीं। एमसीक्यू आता है दो नंबर का। बस
खत्म। इसके साथ हमने कोशिश करा कि हम
एनसीईआरटी पूरी की पूरी ए टू जेड अच्छे से
वन शॉट में कवर कर लिया। चिंता मत करो। तो
मैं इसको बिल्कुल कंसाइज करके 15 से 20
मिनट में आपको पूरा का पूरा जितना भी ए टू
जेड थ्योरी है वो भी करा दूंगा आगे आने
वाले वीडियोस में। तो स्टे ट्यून अच्छे से
मेहनत करते रहो, पढ़ते रहो। लाइव क्लासेस
को बिल्कुल भी मिस मत करना। ठीक है? मिलते
हैं नेक्स्ट वीडियो में। ऑल द बेस्ट फॉर
बोर्ड एग्जाम। टिल देन टेक केयर। बाय बाय।
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