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Naino Mein Baap Bindu Ko Samaan Lo ...Kaise ??- Beyond Sound

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0:02

ओम

0:04

शांति। आज हम संडे की मुरली लेंगे और बाबा

0:09

ने जो कहा है

0:11

कि निर्वाण स्थिति में स्थित हो जाए

0:15

क्योंकि

0:17

स्वयं निर्वाण स्थिति में होंगे तब दूसरों

0:24

को निर्वाण धाम में पहुंचा सकेंगे। तो

0:28

निर्वाण स्थिति और निर्वाण धाम एक ही है

0:31

बाबा के लिए। है ना? तो निर्वाण स्थिति

0:35

में होंगे तब दूसरों को निर्वाण धाम में

0:39

पहुंचा

0:41

सकेंगे। तो इसका मीनिंग क्या है? निर्वाण

0:43

स्थिति क्या है? वाणी से परे की स्थिति।

0:48

मतलब सिर्फ यह रिकॉग्नाइज करना, यह

0:52

पहचानना कि जो प्रेजेंस ऑफ अवेयरनेस है वो

0:57

सदैव प्रेजेंट

0:59

है। सभी अनुभवों के

1:03

पीछे है ना

1:08

वो

1:10

निर्वाण स्थिति अभी

1:14

आप आप कौन?

1:17

संकल्पों से बना हुआ पर्सन

1:21

नहीं सिर्फ कॉन्शियसनेस कॉन्शियसनेस को

1:24

जान सकती है।

1:27

थॉट फीलिंग संस्कार सेंसेशन से बना हुआ यह

1:34

माइंड बॉडी नहीं जान

1:36

सकता। प्योर अवेयरनेस को अवेयरनेस ही

1:40

अवेयरनेस को जान सकती है। है ना? सूर्य ही

1:44

सूर्य को जान सकता है।

1:48

तो सदैव अपनी रोशनी से चमकने वाला मतलब

1:54

नोइंग लाइट से अपने आप को जानने वाला

1:58

जिसको किसी भी चीज की जरूरत नहीं है ना मन

2:01

की जरूरत है ना संकल्पों की जरूरत है अपने

2:04

आप को जानने के लिए तो प्योर अवेयरनेस जो

2:08

कि अपने आप को जानती

2:11

है अपने अनुभवों से जो आते जाते रहते हैं

2:15

उसके सामने सामने राइट बैकग्राउंड में

2:19

प्योर अवेयरनेस एवर प्रेजेंट है। तो

2:22

लिटरली जैसे ही थॉट सिंक हुआ तो मैं

2:28

ऑलरेडी अपने एवर प्रेजेंट सत्य में हूं।

2:32

राइट? तो ऐसे देखें जैसे बाबा जो एवर

2:37

प्रेजेंट प्योर बीइंग है। है ना? सब मनों

2:41

का फादर है। सब मनों का एसेंस है।

2:46

वो एक क्वेश्चन पूछता

2:49

है कि हे मन पॉज

2:55

रुको तो एक जैसे

2:58

कि इकबाल है तो वो हमेशा ही अमिताभ पर

3:03

अपने आप को क्योंकि इकबाल समझता है तो

3:06

जैसे एक स्टेप पीछे लेता है

3:09

राइट अपने अनुभव से संकल्पों के फीलिंग के

3:14

सेंस सेशन के अनुभव से, कर्मेंद्रियों के

3:17

अनुभव से एक स्टेप पीछे लेता

3:20

है। तो जो इन संकल्पों को जानता है प्योर

3:25

प्रेजेंस ऑफ अवेयरनेस वो खुद एक संकल्प

3:29

नहीं

3:30

है। है

3:32

ना? इसलिए एक स्टेप पीछे

3:35

लें। जैसे कि संकल्प एक स्टेप पीछे आया तो

3:39

देखा एकदम साइलेंस है। डूब जाता है उसमें।

3:45

ऐसे

3:47

ही जो फीलिंग्स को जानता है वह खुद एक

3:50

फीलिंग नहीं है। जो सेंसेशंस को जानता है

3:54

वो खुद एक सेंसेशन नहीं

3:57

है। जो अपना अनुभव

4:01

है वाणी से परे का सत्य वाणी से परे की

4:05

स्थिति मतलब

4:07

संकल्प सेंसेशनंस इमोशंस कर्मेंद्रियों के

4:12

शोर से परे की स्थिति निर्वाण

4:16

स्थिति एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड है। सभी

4:19

ये चेंजिंग अनुभवों का राइट तो मन सोच

4:23

सकता है मैं 5 साल का था 10 साल का हूं या

4:26

कल ब्रेकफास्ट खाया आज अभी लंच खाया फिर

4:32

अभी ना स्नैक्स खाए जो भी है

4:37

[संगीत]

4:39

अनुभव जो भी जिसने भी इन सभी चेंजिंग

4:42

अनुभवों को एक्सपीरियंस किया क्योंकि पांच

4:45

साल के बॉडी थी माइंड की भाषा में तो उस

4:49

वक्त सोच, बिलीव्स, सेंसेशनंस, थॉट्स,

4:54

इमोशन सब अलग थे। पर एक चीज थी जो अलग

4:57

नहीं थी जो कभी चेंज नहीं हुई। वो है एवर

5:00

प्रेजेंट साइलेंट प्रेजेंस। फिर 10 साल की

5:04

हुई बॉडी, फीलिंग्स, थॉट्स, एक्सपीरियंसेस

5:08

सब कुछ चेंज हुआ। बट एवर प्रेजेंट

5:11

बैकग्राउंड सेम

5:15

एकजेक्टली फिर चाहे वह कल का ब्रेकफास्ट

5:18

ही क्यों नहीं था उस वक्त थॉट्स फीलिंग्स

5:20

इमोशन सेंसेशंस कर्मेंद्रियों का अनुभव

5:22

अलग था पर सेम

5:25

एग्जैक्टली एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड सेम

5:28

अभी बोलते बोलते थॉट्स फीलिंग सेंसेशंस

5:33

कर्मेंद्र्रियों का अनुभव बदलता जा रहा है

5:36

पर जो निर्वाण स्थिति है जो वाणी से परे

5:39

की स्थिति है। वही निर्वाण धाम है जो बाबा

5:42

ने कहा कि वो एक्सपीर वो जो है वो एक

5:47

एक्सपीरियंस नहीं है। ये एक एक्सपीरियंस

5:50

नहीं है। एक्सपीरियंस होते हैं थॉट्स,

5:53

फीलिंग्स, सेंसेशंस, कर्मेंद्रियां जो

5:56

बदलते रहते हैं। यह अनुभव अलग है। और यह

6:01

प्रेजेंस जो उसके पीछे है बैकग्राउंड में

6:05

उसको हम उसको अगर मन सल फीलिंग में ढूंढने

6:08

की कोशिश करेगा कि सूक्ष्म फीलिंग में

6:10

ढूंढूं कि मैं कौन हूं या किसी अच्छे थॉट

6:14

में ढूंढूं कि मैं कौन हूं नहीं ढूंढ

6:16

पाएगा क्योंकि वो ना थॉट है ना फीलिंग है

6:19

ना इमोशन है ना सेंसेशन है ना

6:21

कर्मेंद्रियां है जस्ट साइलेंट बैकग्राउंड

6:25

है सभी चेंजिंग अनुभवों

6:29

का एवर नेवर प्रेजेंट कुछ भी बदल जाए

6:32

अनुभव में फ्लीटिंग है ये सारे

6:36

अनुभव सूक्ष्म एक क्षण भर के लिए आते हैं

6:40

चले जाते हैं आते हैं अंदर ही मर्ज हो

6:42

जाते हैं ऊपर आते हैं मर्ज हो जाते हैं पर

6:44

एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड साइलेंट प्रेजेंस

6:48

सेम है ना तो इट्स

6:51

लाइक यह देखें कि हर मन की एक्टिविटी

6:55

अलग-अलग है 8 बिलियन माइंड्स की एक्टिविटी

6:58

अलग-अलग पर सभी मनों का फादर साइलेंट

7:02

प्रेजेंस एक ही है। है ना? तो बाबा बोल

7:06

रहे हैं मुझे देखो अपने आप को एक्टिविटी

7:10

समझ कर उसका ओनर बनके फिर अपने आप को

7:14

एक्टिविटी समझ कर फिर मुझे देखने की कोशिश

7:18

करोगे नहीं जान पाओगे।

7:21

यह जो थॉट

7:24

है इमेज के साथ अटैच होकर सेंसेशन के साथ

7:28

अटैच होकर अपने आप को पर्सन समझता है उससे

7:31

मर जाओ तो तुम्हें पता चलेगा कि पीछे

7:35

साइलेंट प्रेजेंस साइलेंट बैकग्राउंड मैं

7:38

ही हूं। मैं कहीं दूर नहीं हूं तुमसे।

7:41

तुम्हें लगता है कि मैं बहुत दूर देश से

7:44

आया हूं। है ना? क्योंकि तुम संकल्प के

7:47

माध्यम से इमेजेस के माध्यम से अपने आप को

7:50

बहुत दूर समझते हो और साकार फीलिंग साकार

7:56

कॉरपोरियल थॉट्स कॉरपोरियल फीलिंग्स

7:59

में अपने आप को एक पर्सन मान के उस अनुसार

8:03

फिर कॉरपोरियल इमेजिनरी दुनिया भी अपने

8:05

अराउंड बनाकर मुझसे अलग समझते हो तो मैं

8:10

तुमको स्वप्न में आके जगाता हूं

8:13

तुम्हारे कि तुम अपने आप को जो यह मेरे

8:17

केस में ऋणी या बॉडी माइंड समझ कर चल रहे

8:20

हो यह कुछ भी नहीं है। यह एक्सिस्ट नहीं

8:23

करता। यह माइंड बॉडी का

8:27

कॉम्बिनेशन सेंसेशन और थॉट्स का और

8:30

कर्मेंद्रियों का पैकेज, संस्कारों का

8:32

पैकेज नॉन एकिस्टेंट है। यह सिर्फ माइंड

8:37

है। राइट? और माइंड का अपना कोई

8:42

भी सेपरेट लाइफ नहीं है। यह इमेजिनेशन

8:47

है। जब यह इमेजिनेशन डिॉल्व होगी तब पता

8:51

चलेगा करण करावनहार जियदान देने वाला एक

8:56

परमात्मा ही

8:58

है। और तुम हे मन मैं सूर्य और तुम मेरे

9:03

चंद्रमा हो। राइट? मैं तुमको अपने प्रकाश

9:07

से मैं ही तो हूं जो

9:11

सारे मनों

9:14

को अपनी रोशनी देता हूं। जो मन मेरी रोशनी

9:20

लेते

9:20

हैं मतलब जो मन उस रोशनी को ग्रहण कर पाते

9:28

हैं वो बिल्कुल परमात्मा की लाइट उस जैसे

9:34

छलनी के थ्रू उस माइंड की छलनी के थ्रू

9:37

शाइन करती है। राइट?

9:41

किसी ने बहुत ब्यूटीफुल इमेज इसके साथ

9:43

शेयर की कि हम उसको ऐसे भी कह सकते हैं कि

9:48

वह माइंड्स छलनी के समान है जो कि

9:50

परमात्मा की लाइट उनके थ्रू शाइन होती है।

9:53

अब्सोलुटली ब्यूटीफुल है ना और वो मन जो

9:58

अपने आप को पर्सन समझते हैं। मैं अलग हूं।

10:01

मेरी अपनी पहचान है। मैं इस दुनिया में

10:04

रहता हूं। मेरा परिवार है, मेरा काम है,

10:07

मेरे थॉट्स हैं, मेरे फीलिंग्स हैं, मेरे

10:09

इमोशंस हैं। वो ब्लॉक्ड माइंड्स होते हैं।

10:13

वो परमात्मा की लाइट को ना तो अब्सॉर्ब कर

10:15

पाते हैं इसलिए वो सफर करते हैं फिर।

10:19

क्योंकि वो सोचते हैं अलग, अपनी एक पहचान,

10:22

घमंडी, अपनी एक पहचान, अलग बनाकर चलते

10:25

हैं। अपनी इमेजिनरी दुनिया में। फिर

10:28

इमेजिनेशन में ही इमेजिनरी कैरेक्टर के

10:31

रूप में जैसे कि वह सफरिंग होती है। है

10:35

ना? तब परमात्मा बोलते हैं कि नहीं पहले

10:38

हे मन बिल्कुल डिॉल्व हो

10:42

जाओ। बिल्कुल क्षमा में हे परवाने बिल्कुल

10:47

जल जाओ। मतलब खुद क्षमा बन जाओ। है ना? तो

10:51

फिर जैसे उसको माइंड को पता चलता है कि वो

10:56

कुछ नहीं है अपना अलग अस्तित्व बाबा ही है

10:58

वो ना चलाए तो एक शेफ होता है ना किच

11:02

रेस्टोरेंट में अगर चकू को वो ना उठाए तो

11:06

चकू पड़े पड़े जंग खा लेगा ड्रर के अंदर

11:09

तो बाबा वो शेफ है चकू वो माइंड है जिसका

11:12

इस केस में नाम है रेनी जिंदा नहीं है

11:15

अपने राइट में पर जिसका नाम है इस केस में

11:18

अगर परमात्मा इस चकू को इस माइंड को यूज़

11:20

यूज़

11:22

करेगा तो चकू शाइन करता

11:25

रहेगा। है ना? शार्प रहेगा। पर अगर

11:29

परमात्मा यूज़ नहीं करेगा तो जंग लग जाएगी।

11:32

एकदम ब्लंट हो जाएगा। है ना? उसकी धार भी

11:36

चली जाएगी। तो इसलिए परमात्मा का निमित्त

11:40

मतलब निमित्त भाव भी नहीं है उसमें

11:43

क्योंकि वो उसका अपना अलग अस्तित्व ही

11:45

नहीं है। तो निमित्त भाव भी नहीं है।

11:47

कर्मातीत मुरली में बाबा ने बहुत

11:49

ब्यूटीफुली ये चीज बोली है कि निमित्त तो

11:52

है पर निमित्त का भाव भी नहीं है। तो वो

11:54

निमित्त भाव भी नहीं होगा उसमें कि मैं

11:56

निमित्त हूं। है ना? वो बस ऐसे चकू है।

12:01

लाइफलेस जब तक शेफ ने हाथ में उठाया नहीं

12:04

और चलाया नहीं तब तक उसमें जान नहीं है।

12:07

है ना? तो ऐसे ही जब तक बाबा ने इस मन को

12:11

यूज किया नहीं तब तक वो जैसे कि मरा वो

12:15

बिल्कुल जैसे कि डोरमेंट है। पर बाबा की

12:19

लाइट से जो मन रेडी है अब्सॉर्ब करने के

12:21

लिए तो वो चलता है। तब बाबा ने कहा यह

12:24

निर्वाण स्थिति में पता चलता है प्योर

12:27

साइलेंस जहां कोई नाम नहीं कोई सेंसेशन का

12:32

अनुभव से पहचान नहीं।

12:36

पहचान नहीं है ना कोई भी थॉट्स से पहचान

12:42

नहीं कोई भी फीलिंग से पहचान नहीं वो है

12:47

निर्वाण स्थिति वाणी से परे की स्थिति है

12:52

ना तो बाबा ने कहा जो खुद उसमें स्थित

12:55

होंगे तब दूसरों को मतलब दूसरे

12:59

मन निर्वाण धाम में पहुंच सकेंगे पहुंचना

13:03

मतलब फिर जो मन मन परमात्मा में डिॉल्व हो

13:06

गया। फिर परमात्मा की

13:10

लाइट उन मनों तक भी पहुंचेगी। है ना? तो

13:14

यह बाबा का बहुत ब्यूटीफुल कहने का मीनिंग

13:18

है। तो बाबा ने आज यह भी बोला है स्व की

13:21

स्थिति में भी चार बातें विशेष चेक करो।

13:25

इसको कहेंगे तीव्र

13:28

पुरुषार्थ। पहले यह चेक करो कि निमित्त

13:33

भाव है।

13:36

हम निमित्त भाव है क्योंकि निमित्त भाव

13:41

उसी का हो सकता है जिसने अपने ट्रू नेचर

13:44

को रिकॉग्नाइज कर लिया है, पहचान लिया है।

13:48

है ना? यह कोई स्पेशल इवेंट नहीं है अपने

13:52

ट्रू नेचर को पहचानना कि कोई स्पेशल इवेंट

13:55

है जो कई सालों की प्रैक्टिस के बाद पता

13:59

चलेगा। यह कोई स्पेशल इवेंट नहीं है जो

14:02

फ्यूचर में होगा। है ना? या डिपेंड करता

14:07

है माइंड की एक्टिविटी बंद होगी तो मैं

14:09

अपने आप को पहचानूंगी। और माइंड क्या

14:12

अच्छा करेगा तो मैं अपने आप को पहचानूंगी

14:15

या चुप होगा तो मैं अपने आप को पहचानूंगी।

14:18

नहीं नॉट एट ऑल। है ना? क्योंकि

14:23

अगर फ्यूचर में है अपने ट्रू नेचर को

14:27

पहचानना तो एक सूक्ष्म टेंशन हमेशा रहेगी।

14:33

एक सूक्ष्म एक्सपेक्टेशन सूक्ष्म है

14:36

बहुत। यह जो पर्सनल माइंड है यह

14:40

कास्टेंटली सूक्ष्म टेंशन और एक्सपेक्टेशन

14:43

में रहेगा। है ना? क्योंकि यह

14:47

हमेशा आपको स्टेट ऑफ फ्यूचर में रखेगा। मन

14:53

को कहीं ना कहीं थॉट की तरफ या सेंसेशंस

14:56

की तरफ खींचा हुआ रखेगा। उसको पीछे सिंक

14:59

नहीं होने देगा। राइट बिहाइंड जो

15:02

बैकग्राउंड है साइलेंस उसमें सिंक नहीं

15:04

होने देगा। है ना? एक डिसटिस्फेक्शन

15:07

कंटीन्यूअसली बना रहेगा। क्योंकि फ्यूचर

15:10

में है मेरा परफेक्शन को रिकॉग्नाइज

15:14

करना। मेरे ट्रू नेचर को रिकॉग्निशन जो है

15:17

वो फ्यूचर में है। कहीं नेक्स्ट मोमेंट

15:20

में। जब तक ये पुराने संस्कार खत्म नहीं

15:24

होंगे तब तक मैं वो अपने आप को बोल तो रही

15:28

हूं मैं परफेक्ट हूं।

15:30

पर अभी तक सोच रही नहीं जब तक यह खत्म

15:33

नहीं होंगे पुराने

15:34

संस्कार तब तक मैं मुक्ति धाम नहीं जा

15:39

पाऊंगी। अरे मुक्ति धाम मतलब अपने ट्रू

15:42

निर्वाण स्थिति से ही तो देख रहे हैं

15:46

बाबा दिखा रहे हैं निराकारी मन को कि तुम

15:50

फ्यूचर में मत रहो। फ्यूचर कुछ नहीं है।

15:53

अपने नेचर को मुझे देखकर रिकॉग्नाइज करो।

15:57

पहचानो मुझे देखो। तो अपने आप को पहचान

16:00

जाओगे कि तुम मुझसे अलग नहीं

16:05

हो। एकदम मेरे प्यार में घुलमिल जाओगे।

16:09

इतना राइट? तब बाबा ने कहा ये है रियल

16:14

निमित्त मेरापन नहीं। तो यही तो मेरापन है

16:17

जो सूक्ष्म टेंशन कायम रखता है। सूक्ष्म

16:21

असंतुष्टता को कायम रखता

16:24

है कि मैं कहीं फ्यूचर

16:27

नेक्स्ट में जाकर अपने आप को

16:31

पहचानूंगी। बहुत मेहनत करने के बाद कहीं

16:35

मैं अपने सत्य को ढूंढ पाऊंगी। वो

16:38

कास्टेंट सीकिंग में रखता

16:41

है। है ना? तो बाबा ने कहा साधारण लोगों

16:46

का तो मैं और मेरा भी साधारण है। मेरी

16:49

गाड़ी, मेरा घर, मेरी बॉडी, मेरे रिश्ते

16:51

ये तो साधारण मैंपन है। ये तो सभी को पता

16:54

है। राइट? मोटा-मोटा है। लेकिन ब्राह्मण

16:58

जीवन का मैं और मेरापन बहुत सूक्ष्म

17:03

है। और क्या सूक्ष्म है वो मैं और मेरापन

17:06

किससे है?

17:07

मेरे

17:08

थॉट्स, मेरी

17:10

फीलिंग्स, मेरी

17:12

सेंसेशंस, मेरे

17:14

इमोशंस, मेरे कर्मेंद्रियों का

17:17

अनुभव। छोटा सा एग्जांपल दूंगी। कितना इजी

17:21

है जो बाबा एक्चुअल में हमें बताना चाह

17:23

रहे हैं ना थोड़ा सा पढ़कर कि बहुत

17:27

सूक्ष्म और रॉयल है ब्राह्मणों का।

17:30

बाहर की दुनिया मतलब मन के अनुसार जो बाहर

17:34

की दुनिया है उसमें सभी जानते हैं कि मेरा

17:38

घर, मेरी गाड़ी ये सब बहुत अटैचमेंट्स

17:41

हैं। ये सब बातें तो ज्ञान में आने की

17:43

जरूरत नहीं है उसको समझने के लिए। वो सब

17:45

जानते हैं। राइट? पर जब बाबा ज्ञान सुना

17:48

रहे

17:49

हैं तो बाबा जब ज्ञान सुना रहे हैं तो

17:52

चाहते हैं मन अपनी

17:55

सेपरेट सेंस ऑफ सेपरेशन से ही मर जाए।

18:00

राइट। तो जब बाबा ने कहा

18:07

कि बस नैनों में बिंदु बाप को समा दो।

18:11

नैनों में देखने की बिंदी समाई हुई है ना।

18:15

ऐसे ही सदा नैनों में बिंदु बाप को समालो।

18:19

समाना आता है। आता है या फिट नहीं होता

18:23

है। अब नैनों में बिंदु बाप को संभालो।

18:25

मतलब बाबा इस सीइंग थ्रू द आईज। बाबा इन

18:28

आंखों के थ्रू देख रहे

18:31

हैं। सेपरेट आइडेंटिटी जो मन को यूज करती

18:34

है, वह बोलती है मैं इन आंखों के साथ देख

18:36

रही हूं। बाबा बोलते हैं मैं इन आंखों के

18:39

थ्रू देख रहा हूं। एक थ्रू है और एक विद

18:44

है। सेपरेट पर्सन बोलता है। थॉट बोलता है।

18:49

मैं इन आंखों के साथ देख रही हूं। मैं इन

18:51

कानों के साथ सुन रही हूं। मैं इस मुख के

18:55

साथ बोल रही हूं। नहीं बाबा इन आंखों के

18:58

थ्रू देख रहा है तो कैसे

19:01

देखेगा? बाबा इन कानों के सूथू सुन रहा है

19:04

तो कैसे सुनेगा? तो आई रिमेंबर वॉक पे गई

19:10

थी। है ना? अब ये रिलेटिव भाषा बोल रही

19:13

हूं। वॉक पर गई थी। तो वॉक पे एक तरफ यहां

19:18

पे एक स्ट्रीम है। एक नदी बहती है साइड

19:21

में और एक तरफ रोड है जहां ट्रैफिक चलता

19:24

है। है ना? तो गाड़ी की आवाजें आती है। तो

19:28

वॉक पे बस यही भान है कि बाबा है जो राइट

19:32

बिहाइंड बैकग्राउंड ऑफ ऑल द चेंजिंग

19:35

एक्सपीरियंसेस, थॉट्स, फीलिंग्स, इमोशंस,

19:38

कर्मेंद्रियां से जो दिख रहा है। इल्यूजन

19:41

के रूप में पेड़, नदी, सड़क, गाड़ियां,

19:46

बिल्डिंग्स, अह, स्ट्रीट्स सब दिख रहा है।

19:50

स्थूल आंखों

19:53

के को जो दिखता है। राइट? पर ऐसे भी भान

19:56

है पीछे बाबा ही है। जैसे आंखों के पीछे

20:00

कानों से सुनने वाला टाइम स्पेस में नहीं

20:02

है बाबा। इस इस

20:07

पर्सनल माइंड बॉडी की जो दुनिया है यह और

20:11

यह खुद बॉडी माइंड और उसकी जो दुनिया जो

20:13

दिखती है इस इस बॉडी माइंड को वो जैसे कि

20:17

बाबा जो पॉइंट है ना डायमेंशनलेस पॉइंट वो

20:21

जैसे बाबा पीछे ही है। है ना?

20:26

और जैसे बाबा

20:27

[संगीत]

20:29

को स्थूल चीजें नहीं दिख रही है। अगर बाबा

20:32

ने कहा ना नैनों में बाबा को समा लिया तो

20:35

फिर बाबा को कैसे दिखेगा। नैनों में बिंदु

20:38

बाप को समाया तो पता चला कि एक्चुअल

20:42

में बाबा के लिए यह जो बाहर नदी की ये

20:47

साइड में एक तरफ नदी की आवाज बह रही है।

20:49

बहुत सुंदर लग रहा है मन को और एक तरफ

20:52

बच्चे चिल्ला रहे थे पीछे पार्क है तो वो

20:55

भी आवाज सुनाई दे रही है। एक तरफ ट्रैफिक

20:57

की आवाज सुनाई दे रही है। अब जैसे ही देखा

21:00

यह तो पर्सनल माइंड के अनुसार अलग-अलग

21:03

आवाज को नाम दिया। बच्चों की आवाज, नदी के

21:06

झरने की आवाज और ट्रैफिक की आवाज। अगर

21:10

बाबा सुन रहा है तो ना तो वो नाम देगा

21:14

इसको कि ये नदी की आवाज है या ये बच्चों

21:17

की आवाज है या ये ट्रैफिक की आवाज है या

21:19

ये अच्छी नहीं लग रही है आवाज। और ये आवाज

21:22

कितनी रिलैक्सिंग आवाज है। ऐसा कुछ भी

21:26

नहीं। बाबा को कैसे सुनाई देगा? वाइब्रेशन

21:30

ऑफ साउंड ऑफ साउंड भी नहीं है। सिर्फ एक

21:34

अगर बोलना भी है मान लीजिए समझने के लिए

21:37

तो वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड। कोई अलग-अलग नाम

21:40

नहीं है साउंड का कि यह बच्चों की

21:42

चिल्लाने की आवाज है या नदी की आवाज है या

21:44

सड़क के ट्रैफिक की आवाज है। नो जस्ट अ

21:47

वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड। नीदर गुड नर बैड। ना

21:52

तो प्लेजेंट है ना अनप्लेजेंट है। बस

21:55

साउंड है। जस्ट वाइब्रेशन ऑफ

21:59

साउंड। राइट? तो लिटरली जैसे बाबा बाबा

22:03

बिंदु को नैनों में समाया तो फिर ऐसे ही

22:06

लगा ऐसे ही यूज़ होगा कान। तो अपने आप ही

22:09

जैसे कि दिख सुनाई सब दे रहा है कि ये

22:13

बच्चे की आवाज मन उसके ऊपर लेबल लगा रहा

22:15

है थॉट के साथ और नदी की आवाज कितनी

22:18

रिलैक्सिंग उसके साथ फीलिंग भी ऐड कर रहा

22:20

है और ट्रैफिक की आवाज कितनी गंदी वो भी

22:23

ऐड कर रहा है थॉट और कर्मेंद्रियों का

22:26

कॉम्बिनेशन सब तरफ चल रहा है पर क्योंकि

22:29

बाबा बिंदु नैनों में समाया तो फिर ऐसा

22:33

महसूस हुआ जस्ट वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड सो

22:37

ब्यूटीफुल

22:38

सब

22:40

कुछ कोई अगर नाम ना दो, लेबल ना लगाओ,

22:43

डिस्क्रिप्शन ना दो तो ब्यूटीफुल

22:46

एक्सपीरियंस। ऐसा लगा बाबा जैसे कि इस

22:49

माइंड को थैंक यू बोल रहा है कि देखो हे

22:54

मन कि तुम्हारे

22:57

द्वारा कि ये ह्यूमन

23:01

एक्सपीरियंस कितना ब्यूटीफुल है। है ना?

23:06

पर बाबा तो अनटच है। बाबा तो इनफिनिट

23:09

बीइंग है। पर तुम इस ह्यूमन एक्सपीरियंस

23:12

को भी एंजॉय कर सकते हो बिना नाम लेबल

23:15

लगाए। हे

23:18

मन बाबा थैंक यू बोलता

23:21

है। और मन को इतना ब्यूटीफुल लगा बाबा का

23:25

ये बात। मन ने कहा बाबा थैंक यू आपका जो

23:30

आपने मुझे मेरी कर्मेंद्र्रियों को

23:32

प्यूरिफाई कर दिया।

23:35

है ना? पहले तो मन मैं मन जैसे लेबल लगाकर

23:40

थॉट्स को अच्छा बुरा लेबल लगाकर उसको नाम

23:42

देकर कि ये बच्चों की ये नदी की ये

23:45

ट्रैफिक की अलग-अलग लेबल लगाकर साउंड

23:48

वाइब्रेशन के ऊपर उसको अच्छा और बुरा बोल

23:50

रहा

23:51

था। तो अब तो जैसे बॉम्ब भी गिर जाए तो भी

23:55

एक आवाज

23:58

है। तो एक वाइब्रेशन ऑफ साउंड है। तो अब

24:02

पता चला कि कैसे अगर डिस्ट्रक्शन का सीन

24:06

भी आता है तो उसमें आवाज कैसे सुनाई देगी?

24:10

आवाज है सिर्फ कि यह कर्मेंद्र्रियों का

24:14

प्यूरिफिकेशन है

24:16

ना तो बाबा को नैनों में बाप बिंदु को समा

24:20

दिया तो बिंदी समाई हुई है ना इसलिए

24:23

बिल्कुल जैसे माइंड डिॉल्व हो जाता है

24:26

परमात्मा फिर जैसे परमात्मा कर्मेंद्रियों

24:29

को और मन को यूज कर रहा है फिर देखा बाबा

24:33

कैसे देख रहा होगा है ना तो बाबा की नजर

24:38

से देखा तो बाबा को लिए अलग-अलग चीजें

24:42

अलग-अलग नाम रूप नहीं दिख रहे हैं। बाबा

24:44

के लिए वो कचरा नहीं पड़ा है स्ट्रीट के

24:46

ऊपर या बाबा के लिए एक जला हुआ पेड़ है।

24:50

एक हरा भरा पेड़ है तो उसके लिए जला हुआ

24:52

पेड़ ना हरा भरा पेड़ कोई मायने नहीं रखता

24:56

है उसके लिए। तो जैसे कि स्थूल आंखों से

25:00

देखते हुए भी कुछ नहीं दिखा। मतलब बाबा को

25:04

क्या दिख रहा होगा?

25:07

तो बाबा के साथ देखा तो एकदम इतना

25:09

अप्रिसिएशन आया जो कुछ भी है यह एक

25:13

वाइब्रेशनल एक्टिविटी है जिसको

25:16

कर्मेंद्रियों ने एक अलग-अलग नाम एक

25:19

अलग-अलग शेप एक अलग-अलग साइज एक

25:23

अलग-अलग सब कुछ जैसे एक कार्व आउट किया

25:27

है। है ना? एक एक कारीगर होता है। एक

25:30

मूर्ति को रचता है। पत्थर से एक पत्थर की

25:35

पत्थर के स्लैब से काट काट के मूर्ति को

25:38

रचता है। ऐसे ही ये कर्मेंद्र्रियां है जो

25:40

काट काट के चीजों को जैसे वाइबेशंस को

25:44

जैसे अलग-अलग रूप और नाम देती हैं। राइट?

25:47

ऐसा महसूस हुआ बाबा बिंदु जब नैनों में

25:50

समाया हुआ होता है तो ऐसी फीलिंग आई कि ये

25:54

वाइब्रेशनल एक्टिविटी को भी कैसे कि जैसे

25:57

अलग-अलग कर्मेंद्रियों के द्वारा फॉर्म

26:01

रंग शेप साइज दिया और फिर थॉट ने लेबल

26:06

लगाया और एक-एक चीज की जैसे अपनी एक

26:08

इंडिपेंडेंट एकिस्टेंस हो गई। तो ऐसे लगा

26:12

कि वाकई

26:14

में सतयुग की जो बाबा बोलते हैं ना चमकीली

26:17

ड्रेस जो बाबा ने ऊपर बोला है कि सतयुग की

26:20

चमकीली ड्रेस ये ये पहनने के लिए रेडी हो

26:24

तुम दिखाई दे रही है तुमको स्पष्ट गोल्डन

26:27

ड्रेस बाबा बोलते हैं ना कई बार सतयुग के

26:30

पेड़ दिखाई देंगे तब समझ आया कि सतयुग के

26:33

पेड़ दिखाई देंगे मतलब यह है कि वह पेड़

26:36

देखते हुए भी उसके पीछे की सच्चाई पता

26:38

होगी

26:40

कि एक वाइब्रेशनल एक्टिविटी है जिसको

26:44

कर्मेंद्रियों ने जैसे कि साइट, साउंड,

26:49

टेस्ट, टच और स्मेल। तो इस केस में

26:52

साइट और

26:56

और क्या बोलते हैं?

26:58

टच और स्मेल ने जैसे कि वो कार्व आउट किए

27:03

हैं अलग-अलग चीजें वाइबेशंस की एक्टिविटी

27:07

में कर्मेंद्रियों के थ्रू देखते हैं तो

27:09

वो ऐसे दिखती है। राइट? तो ऐसा महसूस हुआ

27:13

कि बाबा बिंदु को जब नैनों में समाया तो

27:17

सत्य भी पता है पीछे का जो दिख रहा है उन

27:20

चीजों का। पर चीजें जैसे दिख रही है अब वो

27:24

धोखा नहीं दे पा रही

27:26

हैं। पर जैसे कि ट्रांसपेरेंट हो जाता है

27:30

सब कुछ। उसका सत्य दिख रहा है। देखते हुए

27:33

भी पीछे दिख रहा है अंडरस्टैंडिंग की आंख

27:36

से कि बाबा के लिए ये सब वाइब्रेशनल

27:40

एक्टिविटी है। पर जब ह्यूमन माइंड के

27:43

पॉइंट ऑफ व्यू से देखते हैं तो जैसे कि

27:46

बाबा नैनों में समाया हुआ है तो इल्लुजन

27:49

जो है वो शेप साइज रंग रूप नाम लेबल गायब

27:53

नहीं हो रहा है। पर अंडरस्टैंडिंग से इतना

27:56

क्लियरली दिख रहा है कि यह चीज जैसे दिख

27:58

रही है वैसे नहीं है।

28:01

है

28:02

ना?

28:04

तो रियलिटी है। उसकी वाइब्रेशनल एक्टिविटी

28:08

उसकी रियलिटी है। तो वो जो शेप साइज कलर

28:12

फॉर्म दिख रहा है वो रियलिटी नहीं है

28:14

उसकी। तो जैसे-जैसे ये जब हम है ना

28:19

स्पेशली नेचर वॉक है। इन इस टाइम में बहुत

28:23

इजी होता है बाबा बिंदु जब नैनों में

28:26

समाया हुआ होता है बाबा के साथ देखना।

28:29

राइट? राइट? तो बाबा को कैसे दिख रहा है?

28:31

देखते हुए भी नहीं दिख रहा है। सुनते हुए

28:34

भी नहीं सुनाई दे रहा है। ये इसका मीनिंग

28:37

है एक्चुअल में। फिर अब उसको

28:41

डे टू डे लिविंग में भी कैसे बाबा ने जब

28:43

कहा कि

28:46

तीन बातें सुनी निमित्त, निर्माण और

28:49

निर्माण तो चौथी बात फिर निर्माण स्थिति

28:52

का अनुभव होता है। तो जब निमित्त बनी मतलब

28:55

मन मर चुका।

28:57

अब मेरे को बाबा मैं वो चकू हूं। बाबा

29:01

उठाएगा तो चलेगा। नहीं उठाएगा तो जंग पड़

29:05

जाएगी उसमें। तो बाबा चलाएगा तो चलेगा।

29:09

राइट? तो वो निमित्त भाव उसमें मैं

29:12

निमित्त हूं कभी भाव नहीं है। है ना? तो

29:16

वो निमित्तता की समझ तो उसमें निर्माणता

29:19

अपने आप आती है। क्यों? क्योंकि सभी मनों

29:21

का एसेंस तो बाबा ही है ना। सभी मनों का

29:24

बाप तो एक ही है ना। तो सभी मन चाहे

29:27

एक्टिविटी मन की थॉट्स, फीलिंग्स, इमोशन,

29:30

सेंसेशन और कर्मेंद्रियों का अनुभव सभी मन

29:32

अलग-अलग है। पर उस मन के पीछे का जो बाप

29:36

है जो सत्य एक है वो प्योर साइलेंट

29:40

प्रेजेंस

29:42

बाबा वो सत्य सभी का मनो का एक है। राइट?

29:48

तो जब ये क्लियर हो गया तो फिर निर्माणता

29:52

अपने आप आएगी ना। फिर मैं अलग, तू अलग,

29:55

तेरा खराब हो तो मेरा अच्छा हो ऐसा नहीं

29:58

होगा। राइट? तो वो निर्माणता मतलब फिर

30:02

उससे जो कंस्ट्रक्ट होगी दुनिया, उस

30:04

फीलिंग से जो रिश्ते होंगे, अनुभव होंगे

30:08

रिश्तों

30:09

के वो रिश्ते बहुत सुंदर होंगे। तो

30:13

पहले अपने

30:16

अपने पास्ट अपने पास्ट मतलब अपने पैकेज ऑफ़

30:20

थॉट्स फीलिंग्स इमोशन सेंसेशन और

30:22

कन्वेनियर का जो पैकेज है जिसमें मेरे केस

30:24

में नाम है री वो मर गया तो फिर साइलेंट

30:29

प्रेजेंस प्योर साइलेंट प्रेजेंस जैसे ही

30:31

वो मन मरा तो सारे ही मन एक साथ मर जाते

30:35

हैं। जैसे अगर मैं यह मैंपन नहीं जो बाबा

30:39

ने बोला ना मैंपन और मेरापन बहुत सूक्ष्म

30:41

है ब्राह्मण जीवन में और यह मैंपन और

30:44

मेरापन है संस्कारों से सेंसेशन से फीलिंग

30:48

से थॉट से अगर मैं भी थॉट्स हूं तो आपको

30:51

भी थॉट आपके रूप उस थॉट के रूप में

30:54

देखूंगी। मैं सेंसेशनंस हूं तो आपको भी

30:56

आपके सेंसेशंस के रूप में देखूंगी। राइट?

30:59

पर मैं ही थॉट नहीं, सेंसेशन नहीं। में

31:01

कुछ भी नहीं तो आप भी कुछ भी नहीं एज अ

31:04

पर्सन माइंड तो पीछे कौन सबके बाप राइट तो

31:08

बाप ही सत्य है एक तो फिर जब उस सत्य से

31:12

देखेंगे ना तो फिर रिश्ते कैसे होंगे उसका

31:14

भी एक एग्जांपल देते हैं ना इनफैक्ट लाइफ

31:18

बहुत सुंदर हो जाती है एक होता है कि हम

31:22

साक्षी

31:23

होकर अंदर की तरफ जाते हैं। अपने उस

31:27

साइलेंस को जानते हैं जो सभी का एक समान

31:29

है। राइट? उस साइलेंस को निर्वाण स्थिति

31:33

को जानकर फिर वापस एक्शन में आते हैं। ऐसा

31:36

नहीं कि बस डिटच हो गए। दुनिया से ये

31:40

संकल्पों से कॉरपोरियल फीलिंग की। दुनिया

31:43

से बनी हुई दुनिया से साक्षी हो गए। बस अब

31:45

आना ही नहीं वापस इस दुनिया में। नो। अपने

31:49

सत्य को जानकर फिर वापस

31:52

इनकर्पोरियल फीलिंग्स के

31:55

साथ। तो फिर दुनिया एंजेलिक महसूस होगी।

31:58

है ना? तो सूक्ष्म वतन यही बनाना है। किसी

32:02

ने मुझे मुरली का एक्चुअल में पॉइंट भेजा

32:04

है जिसमें उन्होंने बाबा ने क्लियरली बोला

32:07

है कि सूक्ष्म वतन की रचना यहीं होनी है।

32:11

एंजेलिक वर्ल्ड यही बनना है। तो

32:15

कैसे

32:17

बाबा स्थूल माइंड

32:21

मरा बाबा प्योर साइलेंस सभी मनों के पीछे

32:25

का सत्य है। एक ही बाप है सभी मनों का। तो

32:29

वह साइलेंस अब इस मन को अगर चलाता है तो

32:33

उसको सभी मन की एक्टिविटी के पीछे का सत्य

32:36

साइलेंट बैकग्राउंड दिखता है। जो बाबा ने

32:38

अभी कुछ दिन साकार मुरली में पहले बोला एक

32:41

दूसरे से बात करते हुए पीछे बाप को

32:44

देखो। राइट? तो फिर वो एंजल एक वर्ल्ड हो

32:47

गया। तो छोटा सा

32:51

एग्जांपल किसी ने

32:54

कहा बहुत क्लोज रिलेशनशिप है तो उन्होंने

32:58

कहा स्टॉक मार्केट बहुत ऊपर नीचे हो रहा

33:02

है। वो पॉलिसीज जो बन रही हैं अभी टेरिफ्स

33:07

लग रहे हैं। सब कुछ ऊपर नीचे हो रहा है।

33:10

पूरी दुनिया में स्टॉक मार्केट ऊपर नीचे

33:12

हो रहा है। और मेरा तो टाइम आ गया है

33:13

बेचने का। फिक्स्ड है। मुझे तो बेचना ही

33:17

पड़ेगा उस टाइम पे। तो वो बड़ी टेंशन कर

33:20

रहे थे और थोड़े टाइम

33:23

बाद उन्होंने आके बताया कि आज तो एकदम रॉक

33:27

बॉटम है और आज मेरा स्टॉक में स्टॉक बिक

33:30

गया।

33:31

राइट? और फिर नेक्स्ट

33:34

डे 40% स्टॉक मार्केट ऊपर हो गया। राइट?

33:40

और ये आपको बहुत डे टू डे लाइफ की लिविंग

33:42

में बता रही हूं ताकि हर लेवल पे हम देख

33:44

सकें। कैसे हम एंजेलिक देखते हैं। सेम

33:48

दुनिया तो स्टॉक मार्केट एकदम ऊपर चला गया

33:52

40% तो उन्होंने जब बेचा रॉक बॉटम पे एकदम

33:57

नीचे की प्राइस पे और नेक्स्ट दिन उनकी

34:00

स्टॉक प्राइस 40% ऊपर चली गई।

34:03

तो

34:05

फिर उन्होंने जैसे शेयर किया पास के ही

34:09

कोई रिश्ते में है तो उन्होंने शेयर किया

34:13

तो तो ये अंदर ही अंदर बड़ी अंदर ही अंदर

34:17

मतलब बाबा ही है थॉट्स फीलिंग्स इमोशन

34:21

सेंसेशंस के पीछे जो बाबा साइलेंट

34:23

प्रेजेंस है मन बाबा के अंदर डूब गया जैसे

34:27

एक बार तो उनकी बात सुनते-सुनते मन डूबा

34:30

बाबा के अंदर तो देखा ना तो कोई नाम है ना

34:36

तो कोई रूप है ना ही

34:41

कोई थॉट्स की ये बनी हुई दुनिया है ना ही

34:45

कोई इमेजेस की बनी हुई दुनिया है ना ही

34:48

कोई बॉडीज है एकदम प्योर बैकग्राउंड ऑफ़

34:53

साइलेंस तो पहले देखा मन कहीं फ्लक्चुएट

34:57

तो नहीं हो रहा ऊपर

35:00

नीचे पहले चेक किया अगर ये थॉट्स फीलिंग्स

35:03

ही मैं नहीं पीछे का साइलेंट बैकग्राउंड

35:06

मैं हूं। फिर देखा तो उसमें से जो शब्द

35:10

निकले अब ऐसा नहीं कि अंदर ही बैठ जाना

35:12

है। मुक्ति धाम के गेट खुल गए। मैं तो

35:15

संकल्पस फीलिंग थॉट इमोशन से पीछे जाकर

35:18

मुक्ति धाम में बैठी हूं। और फिर ये सामने

35:20

वाला अब बस अब दुनिया से कट गई। नो। अब

35:23

फिर वापस शब्दों में आई। और जब शब्द निकले

35:26

उसमें मैं नहीं थी। मैं मतलब ये नाम रूप

35:28

नहीं था।

35:30

लिटरली ऐसे लगता है जैसे बाबा बोल रहा है।

35:33

तो उनको पूछा

35:36

कि फ्लक्चुएशन हो रहा है।

35:40

तो उस्मान ने कहा हां लॉस हो गया

35:45

ना। कल ही स्टॉक मार्केट टाइम हुआ और मुझे

35:49

बेचना हुआ और आज स्टॉक प्राइस ऊपर चली गई।

35:54

तो तो एक बात जैसे कि बाबा

35:57

ने पहले तो देखा कि वह भी उस उस

36:01

फ्लक्चुएटिंग माइंड के पीछे भी कौन है।

36:03

जैसे बाबा ने बोला ना सिर्फ बाप को देखो

36:06

तो बाबा को ही देखा तो उस फ्लक्चुएटिंग

36:09

माइंड के पीछे देखा तो वो बाबा की लाइट को

36:11

कैच नहीं कर पा रहा था। इसलिए वह अपने

36:14

आपको अलग पर्सन मान के वह स्टॉक मार्केट

36:18

की दुनिया अपनी थॉट्स की दुनिया में

36:20

इमेजिनरी दुनिया में अपने आप को पर्सन मान

36:22

के लॉस गेन के चक्कर में फंसा हुआ समझ रहा

36:25

था।

36:27

तो जैसे कि बाबा इस मन को यूज़ करके उसको

36:32

कहते हैं

36:35

कि बाबा कहते हैं मतलब क्या है? कोई बाबा

36:38

कोई बॉडी में एंटर नहीं होता है। कहने का

36:41

मतलब है कि बाबा की क्वालिटी बाबा के गुण

36:44

जैसे बोलते हैं फिर मन के द्वारा बाबा के

36:47

गुण रिफ्लेक्ट होते हैं तो बाबा ने बाबा

36:50

के गुणों ने जैसे बात की और बाबा के

36:53

संस्कारों ने जैसे बोला

36:56

कि आप अगर एक इमेजिनरी खेल

37:01

खेलेंगे तो उन्होंने कहा खेल मैं तो बहुत

37:04

ऊपर नीचे हो रहा हूं अभी। मैंने कहा क्या

37:06

फर्क पड़ता है? खेल ही तो है। खेल खेल

37:08

लेते हैं। आप देख लेना। आपको ठीक लगता है

37:10

तो ठीक नहीं तो छोड़ देना। तो बोले अच्छा

37:13

ठीक है। तो कहा कि अच्छा थोड़ी देर के लिए

37:17

आप समझो कि कोई पास्ट नहीं

37:21

है। ना ही कोई फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस है।

37:25

है ना? कोई लास्ट सेकंड का भी पास्ट थॉट

37:27

नहीं है कि पास्ट में यह शेयर प्राइस थी।

37:31

2 दिन पहले तो इतनी थी। फिर आज इतने में

37:34

कल इतने में बिक गया। और फिर आज वापस और

37:38

इतना ऊपर चला गया है ना तो वो पास्ट क्या

37:42

था और फ्यूचर जो एक्सपेक्टेशन थी उस दोनों

37:47

को थोड़ी देर के लिए 10 सेकंड 10 सेकंड

37:50

नहीं 5 मिनट के लिए हटा

37:52

दो। मैंने कहा अच्छा उन्होंने 5 मिनट के

37:56

लिए हटा दिया। मैंने कहा अब चेक करो

37:59

आप जो भी जिस पर भी

38:01

बिका क्या कोई लॉस या प्रॉफिट था?

38:06

तो कहा नहीं अगर आप ऐसे बोलोगे तब तो कहां

38:08

से लॉस प्रॉफिट है ही नहीं लॉस ना प्रॉफिट

38:11

है ना तो ना प्रॉफिट ना लॉस ये तो जो भी

38:14

आया वो तो वही होना था वही हुआ तो इट वास

38:20

सो इंटरेस्टिंग टू सी जब खुद अपने इस

38:24

पैकेज ऑफ़ संस्कार कॉल्ड ऋणी जिसको नाम

38:27

दिया ऋणी उसके पीछे के सत्य को देखा

38:30

साइलेंट प्रेजेंस जैसे बाबा चला रहा है

38:33

बाबा के संस्कार चला रहे

38:35

हैं। उसको भी उसका पैकेज ऑफ़ संस्कार नहीं

38:41

देखा। आत्मा क्या है? बंडल ऑफ़ संस्कार ही

38:43

तो है। तो वो बंडल ऑफ़ संस्कार नहीं है। तो

38:45

उसके पीछे कौन है? बाबा

38:49

है। तो जैसे बाबा को देखा। फिर उसके बाद

38:53

ये जो आईडिया अपने आप ही

38:55

आया। और क्योंकि उसमें बाबा की फीलिंग

38:58

इन्फ्यूज थी। उस एक्सपेरिमेंट में। कोई

39:01

मैं उसको ज्यादा सिखाने के लिए वो भान

39:04

नहीं कर रहा था। पर लिटरली बाबा का

39:06

संस्कार इस मन को चला रहा है और बाबा का

39:09

बाबा ही जैसे उस मन को सुनवा रहा है।

39:13

तो जैसे कि उसकी एक सेकंड में सारी टेंशन

39:18

सारा स्ट्रेस

39:20

डिॉल्व है ना। अब किसी केस में हो सकता है

39:24

ना भी हो। इट डजंट मैटर।

39:27

क्योंकि व्हाट इजेंट इज कि जो बीज बोना था

39:32

बाबा ने बो दिया राइट टाइम पर अपने आप

39:35

इमर्ज हो जाएगा। आपने जैसे वो बाबा ने

39:38

जैसे वो एक्सपेरिमेंट बाबा के संस्कारों

39:40

ने जैसे इस मन के थ्रू एक्सपेरिमेंट किया

39:42

और वही छोड़ दिया। नो एक्सपेक्टेशन कि वो

39:45

उनको समझ आए नहीं आए कुछ भी नहीं। बट

39:49

लिटरली इट

39:51

वास अ फीलिंग स्ट्रांग क्लियर सीइंग कि जब

39:56

बाबा बिंदु नैनों में समाया हुआ होता है

40:01

मतलब उसके संस्कार मन को चला रहे होते हैं

40:05

और पुरा ये जो मनुष्यता के संस्कार की

40:09

ड्रेस टाइट नहीं पहनी हुई होती है। अपना

40:13

नेकेड बीइंग इन्हीं थॉट्स फीलिंग्स के

40:17

पीछे का सत्य पता होता है।

40:20

तब ऐसा महसूस होता है

40:26

कि अगर वह पुराने थॉट्स फीलिंग्स खुद मतलब

40:30

ये मन के भी अपने खुद के भी आए पर उसको ओन

40:34

ओनरशिप लेने वाला वो सूक्ष्म ब्राह्मण

40:37

वाला बाबा ने जो बोला वो मैंपन मेरापन

40:39

नहीं था उन फीलिंग्स थॉट्स के साथ उसको ओन

40:42

करने वाला कोई नहीं था तो लिटरली बाबा के

40:45

संस्कार टेकओवर कर लेते हैं मन को और फिर

40:49

बाबा के संस्कार जो बोलते हैं ना उसमें

40:52

पावर होती है।

40:55

तो यह पूरा इसीलिए सब शेयर बाबा करवा रहे

40:59

हैं और कर रहे हैं क्योंकि करण करावनहार

41:02

एक ही

41:04

है। अलग-अलग जो माइंड अवेलेबल है उसके लिए

41:10

बिल्कुल अपने आप को 100%

41:15

सरेंडर उसके थ्रू बाबा की लाइफ शाइन

41:18

करेगी। राइट? तब बाबा ने कहा जो निर्वाण

41:21

स्थिति में होंगे तब दूसरों को भी निर्वाण

41:24

धाम में पहुंचा सकेंगे। और फिर बेहद यही

41:28

बेहद की वैराग्य वृत्ति भी है। राइट? जहां

41:32

जीरो मैंपन है। किसी भी संकल्प फीलिंग

41:35

सेंसेशन से। है ना? अपना ये भी छोटा सा

41:38

अनुभव बताएगी कि सेंसेशन में भी आया पर

41:40

सेंसेशन से भी मैंपन नहीं। ये नहीं कि

41:44

मैंपन मैं नहीं हूं। मैं नहीं हूं। मैं

41:46

नहीं हूं। ऐसे भी नहीं है। अपना समझ कर

41:49

फिर बोल रही हूं मैं नहीं हूं। मैं नहीं

41:50

हूं। नो अपना लग ही नहीं रहा है। क्योंकि

41:56

साइलेंट बीइंग जो बाबा है वो क्या सेंसेशन

41:59

को जानता होगा? नहीं

42:02

जानता है ना। तो जब बाबा नहीं जानता तो जो

42:06

बाबा का नहीं वो मन का

42:09

नहीं। जो बाबा का एक्सपीरियंस वो मन का

42:12

एक्सपीरियंस। तो रिजेक्ट रिजेक्ट नहीं कर

42:15

रहे हैं, डिनाई नहीं कर रहे हैं वो

42:17

सेंसेशंस जो बहुत स्ट्रांगली आती हैं किसी

42:20

के दुख दर्द को

42:22

देखकर उससे भी ओनर कोई नहीं है। साक्षी

42:26

होने वाला भी इनफैक्ट ओनर ही नहीं है उसका

42:30

कोई। है ना? तो फिर लगता है कि जैसे कोई

42:34

उन सेंसेशंस को कोई ओनर नहीं मिला तो वो

42:36

अपने आप ही न्यूट्रल लगकर डिॉल्व हो जाती

42:39

है। फिर बाबा के संस्कार टेक ओवर कर लेते

42:42

हैं माइंड को। है ना? फिर बाबा के संस्कार

42:46

चलाते हैं। तो ये है बेहद का

42:49

वैराग्य। गाड़ी से वैराग्य, घर से

42:52

वैराग्य, बॉडी से वैराग्य, संबंधों से

42:55

वैराग्य। ये तो मोटा-मोटा बाबा बोलते हैं

42:57

साधारण लोग भी करते हैं। सूक्ष्म वैराग्य

43:03

सूक्ष्म

43:05

अ एकदम

43:09

डिटचमेंट नहीं क्या बोला बाबा ने जो शब्द

43:11

यूज़ किया वो सूक्ष्म निमित्त भाव वो चेक

43:16

करो। ट्रस्टी ऑफ थॉट्स, ट्रस्टी ऑफ

43:18

फीलिंग्स, ट्रस्टी ऑफ इमोशंस, ट्रस्टी ऑफ

43:22

सेंसेशनंस।

43:24

ट्रस्टी ऑफ़ कर्मेंद्र्रियों का अनुभव जो

43:26

अनुभव शुरू में शेयर

43:28

किया। यह है

43:31

एकदम बिल्कुल

43:36

सूक्ष्म। बेहद की वैराग्य

43:40

वृत्त। है ना? तो यह जानना अपने आप को कि

43:43

आई एम नॉट एनी एक्सपीरियंस। मैं आई एम जो

43:48

हूं आई

43:50

एम कोट अनकोट अनुभव नहीं है। बट सभी

43:54

चेंजिंग अनुभवों का बैकग्राउंड

44:00

है। राइट? जब यह समझ लिया तब फ्यूचर में

44:04

मुझे अपने आप को और परफेक्ट होता हुआ

44:07

देखना है। यह एक्सपेक्टेशन सूक्ष्म बांध

44:09

कर रखेगी।

44:12

बाबा ही है जो चला रहा है मन को हर घड़ी

44:15

उसके

44:16

संस्कार दैट्स

44:19

इट बाबा को कैसे दिखेगा बाबा कैसे सुनेगा

44:23

ऐसे ही बाबा कैसे टेस्ट

44:26

करेगा है ना तो जैसे कि बाबा ही कहते हैं

44:30

थैंक यू मन है ना

44:33

कि तुम सब अपने मेमोरी में स्वाद होते हुए

44:36

भी

44:40

टेस्ट करते हुए भी तुमको स्वाद मेरी कंपनी

44:43

से आ रहा है। राइट? तो बाबा ये नहीं बोल

44:47

रहे कि टेस्ट को रिजेक्ट करो।

44:50

नो कि टेस्ट नहीं आना चाहिए। नो टेस्ट पता

44:53

तो है ना मेमोरी में। मेमोरी है। ठीक है?

44:56

इमेजिनरी मेमोरी है। सब कुछ इमेजिनेशन ही

44:59

है। वैसे भी तो बाबा कह रहे हैं कि

45:04

टेस्ट होते हुए भी सुख तुम मुझसे लो। मेरी

45:08

कंपनी से लो।

45:10

है ना? तो टेस्ट आएगा। इट्स ओके। इट्स

45:13

फाइन। नाम उसको दे रहा है चॉकलेट का टेस्ट

45:16

या चाय का टेस्ट। इट्स

45:18

ओके। नो प्रॉब्लम। बट सुख

45:23

मतलब अपने आप को ये मत बोलो कि ये मैं

45:26

हूं। ये मुझे पसंद है। मुझे नहीं। वो

45:30

थॉट्स भी आ रहे हैं। उनसे भी पीछे देखो।

45:32

उन थॉट्स से भी पीछे कौन? उन थॉट्स को भी

45:35

देखने वाला कौन?

45:38

कोई भी नहीं है। उन थॉट्स का ओनर ही नहीं

45:42

है। बस आने दो और मर्ज होने दो थॉट्स को।

45:47

ओनर नहीं है उसका कोई। बस मुझे देखते

45:50

रहो। मुझे देखते रहो मतलब साइलेंट

45:53

प्रेजेंस। जिसके बिना ये कोई भी मनों के

45:58

अनुभव पॉसिबल नहीं है। कोई भी मन में जान

46:02

नहीं आ

46:03

सकती। तो बाबा के लिए जो

46:07

माइंड्स को दिखता है वह बाबा कभी

46:09

डायरेक्टली अनुभव नहीं करता है क्योंकि

46:11

इनफिनिट कैन ओनली एक्सपीरियंस द इनफिनिट

46:15

अनंत सिर्फ अनंत को अनुभव कर सकता है। है

46:20

ना?

46:22

पर जैसे सूर्य की लाइट से अर्थ के ऊपर कोई

46:27

भी एक्टिविटी चल रही है। सूर्य को टच नहीं

46:30

करती है। चाहे वॉर चल रहा है, चाहे पार्टी

46:33

चल रही है, चाहे कोई साधु जंगल में बैठ

46:36

के तपस्या कर रहा है या चाहे कोई खून कर

46:40

रहा है अर्थ पर। सूर्य चमक रहा है इसलिए

46:43

अर्थ पे जीवन है। मिसाल के तौर पर। ऐसे ही

46:48

बाबा की लाइट शाइन कर रही है। इसलिए

46:50

माइंड्स की एक्टिविटीज चल रही है। माइंड

46:54

के पॉइंट ऑफ व्यू

46:56

से ऐसे लगता है

47:00

कि ये सब चीजें जैसे दिख रही हैं वैसे

47:04

हैं। है ना? पर बाबा के पॉइंट ऑफ व्यू से

47:07

ये सब एक वाइब्रेशनल एक्टिविटी है। राइट?

47:12

तो जब यह क्लेरिटी आने लगती है तो जो मन

47:14

इस सत्य को जान जाता है तो वो फॉर्म्स के

47:17

खेल से, आकारों के खेल से, मन के आकारों

47:22

के खेल से, साउंड के खेल से, वाणी से परे

47:26

के सत्य को बैकग्राउंड में ही बाबा है।

47:29

पहचान जाता

47:31

है। है ना? और फिर वो बाबा का एक बहुत

47:34

ब्यूटीफुल इंस्ट्रूमेंट बन जाता है वो

47:36

माइंड। फिर बाबा के संस्कार उस माइंड को

47:39

चलाते हैं। राइट? तो यह है ब्यूटीफुल बेहद

47:45

की वैराग्य वृत्ति। तो जीवन को वापस वाणी

47:50

से परे के सत्य को जानकर मन उसमें डूब कर

47:55

फिर बाबा वापस उस माइंड को यूज़ करता है।

47:58

और फिर एक्चुअल में लाइफ इज अ ब्यूटीफुल

48:00

थिंग देन। है ना? ये हमने जो छोटे-छोटे

48:04

एक्सपीरियंसेस शेयर किए हैं। आप पूरे दिन

48:07

ऐसे जी रहे हैं। दिस इज

48:11

लिविंग इन

48:15

हेवन। परमात्मा के संस्कारों के साथ जीना

48:19

स्वर्गीय जीवन है।

48:23

ओम शांति।

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