Naino Mein Baap Bindu Ko Samaan Lo ...Kaise ??- Beyond Sound
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ओम
शांति। आज हम संडे की मुरली लेंगे और बाबा
ने जो कहा है
कि निर्वाण स्थिति में स्थित हो जाए
क्योंकि
स्वयं निर्वाण स्थिति में होंगे तब दूसरों
को निर्वाण धाम में पहुंचा सकेंगे। तो
निर्वाण स्थिति और निर्वाण धाम एक ही है
बाबा के लिए। है ना? तो निर्वाण स्थिति
में होंगे तब दूसरों को निर्वाण धाम में
पहुंचा
सकेंगे। तो इसका मीनिंग क्या है? निर्वाण
स्थिति क्या है? वाणी से परे की स्थिति।
मतलब सिर्फ यह रिकॉग्नाइज करना, यह
पहचानना कि जो प्रेजेंस ऑफ अवेयरनेस है वो
सदैव प्रेजेंट
है। सभी अनुभवों के
पीछे है ना
वो
निर्वाण स्थिति अभी
आप आप कौन?
संकल्पों से बना हुआ पर्सन
नहीं सिर्फ कॉन्शियसनेस कॉन्शियसनेस को
जान सकती है।
थॉट फीलिंग संस्कार सेंसेशन से बना हुआ यह
माइंड बॉडी नहीं जान
सकता। प्योर अवेयरनेस को अवेयरनेस ही
अवेयरनेस को जान सकती है। है ना? सूर्य ही
सूर्य को जान सकता है।
तो सदैव अपनी रोशनी से चमकने वाला मतलब
नोइंग लाइट से अपने आप को जानने वाला
जिसको किसी भी चीज की जरूरत नहीं है ना मन
की जरूरत है ना संकल्पों की जरूरत है अपने
आप को जानने के लिए तो प्योर अवेयरनेस जो
कि अपने आप को जानती
है अपने अनुभवों से जो आते जाते रहते हैं
उसके सामने सामने राइट बैकग्राउंड में
प्योर अवेयरनेस एवर प्रेजेंट है। तो
लिटरली जैसे ही थॉट सिंक हुआ तो मैं
ऑलरेडी अपने एवर प्रेजेंट सत्य में हूं।
राइट? तो ऐसे देखें जैसे बाबा जो एवर
प्रेजेंट प्योर बीइंग है। है ना? सब मनों
का फादर है। सब मनों का एसेंस है।
वो एक क्वेश्चन पूछता
है कि हे मन पॉज
रुको तो एक जैसे
कि इकबाल है तो वो हमेशा ही अमिताभ पर
अपने आप को क्योंकि इकबाल समझता है तो
जैसे एक स्टेप पीछे लेता है
राइट अपने अनुभव से संकल्पों के फीलिंग के
सेंस सेशन के अनुभव से, कर्मेंद्रियों के
अनुभव से एक स्टेप पीछे लेता
है। तो जो इन संकल्पों को जानता है प्योर
प्रेजेंस ऑफ अवेयरनेस वो खुद एक संकल्प
नहीं
है। है
ना? इसलिए एक स्टेप पीछे
लें। जैसे कि संकल्प एक स्टेप पीछे आया तो
देखा एकदम साइलेंस है। डूब जाता है उसमें।
ऐसे
ही जो फीलिंग्स को जानता है वह खुद एक
फीलिंग नहीं है। जो सेंसेशंस को जानता है
वो खुद एक सेंसेशन नहीं
है। जो अपना अनुभव
है वाणी से परे का सत्य वाणी से परे की
स्थिति मतलब
संकल्प सेंसेशनंस इमोशंस कर्मेंद्रियों के
शोर से परे की स्थिति निर्वाण
स्थिति एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड है। सभी
ये चेंजिंग अनुभवों का राइट तो मन सोच
सकता है मैं 5 साल का था 10 साल का हूं या
कल ब्रेकफास्ट खाया आज अभी लंच खाया फिर
अभी ना स्नैक्स खाए जो भी है
[संगीत]
अनुभव जो भी जिसने भी इन सभी चेंजिंग
अनुभवों को एक्सपीरियंस किया क्योंकि पांच
साल के बॉडी थी माइंड की भाषा में तो उस
वक्त सोच, बिलीव्स, सेंसेशनंस, थॉट्स,
इमोशन सब अलग थे। पर एक चीज थी जो अलग
नहीं थी जो कभी चेंज नहीं हुई। वो है एवर
प्रेजेंट साइलेंट प्रेजेंस। फिर 10 साल की
हुई बॉडी, फीलिंग्स, थॉट्स, एक्सपीरियंसेस
सब कुछ चेंज हुआ। बट एवर प्रेजेंट
बैकग्राउंड सेम
एकजेक्टली फिर चाहे वह कल का ब्रेकफास्ट
ही क्यों नहीं था उस वक्त थॉट्स फीलिंग्स
इमोशन सेंसेशंस कर्मेंद्रियों का अनुभव
अलग था पर सेम
एग्जैक्टली एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड सेम
अभी बोलते बोलते थॉट्स फीलिंग सेंसेशंस
कर्मेंद्र्रियों का अनुभव बदलता जा रहा है
पर जो निर्वाण स्थिति है जो वाणी से परे
की स्थिति है। वही निर्वाण धाम है जो बाबा
ने कहा कि वो एक्सपीर वो जो है वो एक
एक्सपीरियंस नहीं है। ये एक एक्सपीरियंस
नहीं है। एक्सपीरियंस होते हैं थॉट्स,
फीलिंग्स, सेंसेशंस, कर्मेंद्रियां जो
बदलते रहते हैं। यह अनुभव अलग है। और यह
प्रेजेंस जो उसके पीछे है बैकग्राउंड में
उसको हम उसको अगर मन सल फीलिंग में ढूंढने
की कोशिश करेगा कि सूक्ष्म फीलिंग में
ढूंढूं कि मैं कौन हूं या किसी अच्छे थॉट
में ढूंढूं कि मैं कौन हूं नहीं ढूंढ
पाएगा क्योंकि वो ना थॉट है ना फीलिंग है
ना इमोशन है ना सेंसेशन है ना
कर्मेंद्रियां है जस्ट साइलेंट बैकग्राउंड
है सभी चेंजिंग अनुभवों
का एवर नेवर प्रेजेंट कुछ भी बदल जाए
अनुभव में फ्लीटिंग है ये सारे
अनुभव सूक्ष्म एक क्षण भर के लिए आते हैं
चले जाते हैं आते हैं अंदर ही मर्ज हो
जाते हैं ऊपर आते हैं मर्ज हो जाते हैं पर
एवर प्रेजेंट बैकग्राउंड साइलेंट प्रेजेंस
सेम है ना तो इट्स
लाइक यह देखें कि हर मन की एक्टिविटी
अलग-अलग है 8 बिलियन माइंड्स की एक्टिविटी
अलग-अलग पर सभी मनों का फादर साइलेंट
प्रेजेंस एक ही है। है ना? तो बाबा बोल
रहे हैं मुझे देखो अपने आप को एक्टिविटी
समझ कर उसका ओनर बनके फिर अपने आप को
एक्टिविटी समझ कर फिर मुझे देखने की कोशिश
करोगे नहीं जान पाओगे।
यह जो थॉट
है इमेज के साथ अटैच होकर सेंसेशन के साथ
अटैच होकर अपने आप को पर्सन समझता है उससे
मर जाओ तो तुम्हें पता चलेगा कि पीछे
साइलेंट प्रेजेंस साइलेंट बैकग्राउंड मैं
ही हूं। मैं कहीं दूर नहीं हूं तुमसे।
तुम्हें लगता है कि मैं बहुत दूर देश से
आया हूं। है ना? क्योंकि तुम संकल्प के
माध्यम से इमेजेस के माध्यम से अपने आप को
बहुत दूर समझते हो और साकार फीलिंग साकार
कॉरपोरियल थॉट्स कॉरपोरियल फीलिंग्स
में अपने आप को एक पर्सन मान के उस अनुसार
फिर कॉरपोरियल इमेजिनरी दुनिया भी अपने
अराउंड बनाकर मुझसे अलग समझते हो तो मैं
तुमको स्वप्न में आके जगाता हूं
तुम्हारे कि तुम अपने आप को जो यह मेरे
केस में ऋणी या बॉडी माइंड समझ कर चल रहे
हो यह कुछ भी नहीं है। यह एक्सिस्ट नहीं
करता। यह माइंड बॉडी का
कॉम्बिनेशन सेंसेशन और थॉट्स का और
कर्मेंद्रियों का पैकेज, संस्कारों का
पैकेज नॉन एकिस्टेंट है। यह सिर्फ माइंड
है। राइट? और माइंड का अपना कोई
भी सेपरेट लाइफ नहीं है। यह इमेजिनेशन
है। जब यह इमेजिनेशन डिॉल्व होगी तब पता
चलेगा करण करावनहार जियदान देने वाला एक
परमात्मा ही
है। और तुम हे मन मैं सूर्य और तुम मेरे
चंद्रमा हो। राइट? मैं तुमको अपने प्रकाश
से मैं ही तो हूं जो
सारे मनों
को अपनी रोशनी देता हूं। जो मन मेरी रोशनी
लेते
हैं मतलब जो मन उस रोशनी को ग्रहण कर पाते
हैं वो बिल्कुल परमात्मा की लाइट उस जैसे
छलनी के थ्रू उस माइंड की छलनी के थ्रू
शाइन करती है। राइट?
किसी ने बहुत ब्यूटीफुल इमेज इसके साथ
शेयर की कि हम उसको ऐसे भी कह सकते हैं कि
वह माइंड्स छलनी के समान है जो कि
परमात्मा की लाइट उनके थ्रू शाइन होती है।
अब्सोलुटली ब्यूटीफुल है ना और वो मन जो
अपने आप को पर्सन समझते हैं। मैं अलग हूं।
मेरी अपनी पहचान है। मैं इस दुनिया में
रहता हूं। मेरा परिवार है, मेरा काम है,
मेरे थॉट्स हैं, मेरे फीलिंग्स हैं, मेरे
इमोशंस हैं। वो ब्लॉक्ड माइंड्स होते हैं।
वो परमात्मा की लाइट को ना तो अब्सॉर्ब कर
पाते हैं इसलिए वो सफर करते हैं फिर।
क्योंकि वो सोचते हैं अलग, अपनी एक पहचान,
घमंडी, अपनी एक पहचान, अलग बनाकर चलते
हैं। अपनी इमेजिनरी दुनिया में। फिर
इमेजिनेशन में ही इमेजिनरी कैरेक्टर के
रूप में जैसे कि वह सफरिंग होती है। है
ना? तब परमात्मा बोलते हैं कि नहीं पहले
हे मन बिल्कुल डिॉल्व हो
जाओ। बिल्कुल क्षमा में हे परवाने बिल्कुल
जल जाओ। मतलब खुद क्षमा बन जाओ। है ना? तो
फिर जैसे उसको माइंड को पता चलता है कि वो
कुछ नहीं है अपना अलग अस्तित्व बाबा ही है
वो ना चलाए तो एक शेफ होता है ना किच
रेस्टोरेंट में अगर चकू को वो ना उठाए तो
चकू पड़े पड़े जंग खा लेगा ड्रर के अंदर
तो बाबा वो शेफ है चकू वो माइंड है जिसका
इस केस में नाम है रेनी जिंदा नहीं है
अपने राइट में पर जिसका नाम है इस केस में
अगर परमात्मा इस चकू को इस माइंड को यूज़
यूज़
करेगा तो चकू शाइन करता
रहेगा। है ना? शार्प रहेगा। पर अगर
परमात्मा यूज़ नहीं करेगा तो जंग लग जाएगी।
एकदम ब्लंट हो जाएगा। है ना? उसकी धार भी
चली जाएगी। तो इसलिए परमात्मा का निमित्त
मतलब निमित्त भाव भी नहीं है उसमें
क्योंकि वो उसका अपना अलग अस्तित्व ही
नहीं है। तो निमित्त भाव भी नहीं है।
कर्मातीत मुरली में बाबा ने बहुत
ब्यूटीफुली ये चीज बोली है कि निमित्त तो
है पर निमित्त का भाव भी नहीं है। तो वो
निमित्त भाव भी नहीं होगा उसमें कि मैं
निमित्त हूं। है ना? वो बस ऐसे चकू है।
लाइफलेस जब तक शेफ ने हाथ में उठाया नहीं
और चलाया नहीं तब तक उसमें जान नहीं है।
है ना? तो ऐसे ही जब तक बाबा ने इस मन को
यूज किया नहीं तब तक वो जैसे कि मरा वो
बिल्कुल जैसे कि डोरमेंट है। पर बाबा की
लाइट से जो मन रेडी है अब्सॉर्ब करने के
लिए तो वो चलता है। तब बाबा ने कहा यह
निर्वाण स्थिति में पता चलता है प्योर
साइलेंस जहां कोई नाम नहीं कोई सेंसेशन का
अनुभव से पहचान नहीं।
पहचान नहीं है ना कोई भी थॉट्स से पहचान
नहीं कोई भी फीलिंग से पहचान नहीं वो है
निर्वाण स्थिति वाणी से परे की स्थिति है
ना तो बाबा ने कहा जो खुद उसमें स्थित
होंगे तब दूसरों को मतलब दूसरे
मन निर्वाण धाम में पहुंच सकेंगे पहुंचना
मतलब फिर जो मन मन परमात्मा में डिॉल्व हो
गया। फिर परमात्मा की
लाइट उन मनों तक भी पहुंचेगी। है ना? तो
यह बाबा का बहुत ब्यूटीफुल कहने का मीनिंग
है। तो बाबा ने आज यह भी बोला है स्व की
स्थिति में भी चार बातें विशेष चेक करो।
इसको कहेंगे तीव्र
पुरुषार्थ। पहले यह चेक करो कि निमित्त
भाव है।
हम निमित्त भाव है क्योंकि निमित्त भाव
उसी का हो सकता है जिसने अपने ट्रू नेचर
को रिकॉग्नाइज कर लिया है, पहचान लिया है।
है ना? यह कोई स्पेशल इवेंट नहीं है अपने
ट्रू नेचर को पहचानना कि कोई स्पेशल इवेंट
है जो कई सालों की प्रैक्टिस के बाद पता
चलेगा। यह कोई स्पेशल इवेंट नहीं है जो
फ्यूचर में होगा। है ना? या डिपेंड करता
है माइंड की एक्टिविटी बंद होगी तो मैं
अपने आप को पहचानूंगी। और माइंड क्या
अच्छा करेगा तो मैं अपने आप को पहचानूंगी
या चुप होगा तो मैं अपने आप को पहचानूंगी।
नहीं नॉट एट ऑल। है ना? क्योंकि
अगर फ्यूचर में है अपने ट्रू नेचर को
पहचानना तो एक सूक्ष्म टेंशन हमेशा रहेगी।
एक सूक्ष्म एक्सपेक्टेशन सूक्ष्म है
बहुत। यह जो पर्सनल माइंड है यह
कास्टेंटली सूक्ष्म टेंशन और एक्सपेक्टेशन
में रहेगा। है ना? क्योंकि यह
हमेशा आपको स्टेट ऑफ फ्यूचर में रखेगा। मन
को कहीं ना कहीं थॉट की तरफ या सेंसेशंस
की तरफ खींचा हुआ रखेगा। उसको पीछे सिंक
नहीं होने देगा। राइट बिहाइंड जो
बैकग्राउंड है साइलेंस उसमें सिंक नहीं
होने देगा। है ना? एक डिसटिस्फेक्शन
कंटीन्यूअसली बना रहेगा। क्योंकि फ्यूचर
में है मेरा परफेक्शन को रिकॉग्नाइज
करना। मेरे ट्रू नेचर को रिकॉग्निशन जो है
वो फ्यूचर में है। कहीं नेक्स्ट मोमेंट
में। जब तक ये पुराने संस्कार खत्म नहीं
होंगे तब तक मैं वो अपने आप को बोल तो रही
हूं मैं परफेक्ट हूं।
पर अभी तक सोच रही नहीं जब तक यह खत्म
नहीं होंगे पुराने
संस्कार तब तक मैं मुक्ति धाम नहीं जा
पाऊंगी। अरे मुक्ति धाम मतलब अपने ट्रू
निर्वाण स्थिति से ही तो देख रहे हैं
बाबा दिखा रहे हैं निराकारी मन को कि तुम
फ्यूचर में मत रहो। फ्यूचर कुछ नहीं है।
अपने नेचर को मुझे देखकर रिकॉग्नाइज करो।
पहचानो मुझे देखो। तो अपने आप को पहचान
जाओगे कि तुम मुझसे अलग नहीं
हो। एकदम मेरे प्यार में घुलमिल जाओगे।
इतना राइट? तब बाबा ने कहा ये है रियल
निमित्त मेरापन नहीं। तो यही तो मेरापन है
जो सूक्ष्म टेंशन कायम रखता है। सूक्ष्म
असंतुष्टता को कायम रखता
है कि मैं कहीं फ्यूचर
नेक्स्ट में जाकर अपने आप को
पहचानूंगी। बहुत मेहनत करने के बाद कहीं
मैं अपने सत्य को ढूंढ पाऊंगी। वो
कास्टेंट सीकिंग में रखता
है। है ना? तो बाबा ने कहा साधारण लोगों
का तो मैं और मेरा भी साधारण है। मेरी
गाड़ी, मेरा घर, मेरी बॉडी, मेरे रिश्ते
ये तो साधारण मैंपन है। ये तो सभी को पता
है। राइट? मोटा-मोटा है। लेकिन ब्राह्मण
जीवन का मैं और मेरापन बहुत सूक्ष्म
है। और क्या सूक्ष्म है वो मैं और मेरापन
किससे है?
मेरे
थॉट्स, मेरी
फीलिंग्स, मेरी
सेंसेशंस, मेरे
इमोशंस, मेरे कर्मेंद्रियों का
अनुभव। छोटा सा एग्जांपल दूंगी। कितना इजी
है जो बाबा एक्चुअल में हमें बताना चाह
रहे हैं ना थोड़ा सा पढ़कर कि बहुत
सूक्ष्म और रॉयल है ब्राह्मणों का।
बाहर की दुनिया मतलब मन के अनुसार जो बाहर
की दुनिया है उसमें सभी जानते हैं कि मेरा
घर, मेरी गाड़ी ये सब बहुत अटैचमेंट्स
हैं। ये सब बातें तो ज्ञान में आने की
जरूरत नहीं है उसको समझने के लिए। वो सब
जानते हैं। राइट? पर जब बाबा ज्ञान सुना
रहे
हैं तो बाबा जब ज्ञान सुना रहे हैं तो
चाहते हैं मन अपनी
सेपरेट सेंस ऑफ सेपरेशन से ही मर जाए।
राइट। तो जब बाबा ने कहा
कि बस नैनों में बिंदु बाप को समा दो।
नैनों में देखने की बिंदी समाई हुई है ना।
ऐसे ही सदा नैनों में बिंदु बाप को समालो।
समाना आता है। आता है या फिट नहीं होता
है। अब नैनों में बिंदु बाप को संभालो।
मतलब बाबा इस सीइंग थ्रू द आईज। बाबा इन
आंखों के थ्रू देख रहे
हैं। सेपरेट आइडेंटिटी जो मन को यूज करती
है, वह बोलती है मैं इन आंखों के साथ देख
रही हूं। बाबा बोलते हैं मैं इन आंखों के
थ्रू देख रहा हूं। एक थ्रू है और एक विद
है। सेपरेट पर्सन बोलता है। थॉट बोलता है।
मैं इन आंखों के साथ देख रही हूं। मैं इन
कानों के साथ सुन रही हूं। मैं इस मुख के
साथ बोल रही हूं। नहीं बाबा इन आंखों के
थ्रू देख रहा है तो कैसे
देखेगा? बाबा इन कानों के सूथू सुन रहा है
तो कैसे सुनेगा? तो आई रिमेंबर वॉक पे गई
थी। है ना? अब ये रिलेटिव भाषा बोल रही
हूं। वॉक पर गई थी। तो वॉक पे एक तरफ यहां
पे एक स्ट्रीम है। एक नदी बहती है साइड
में और एक तरफ रोड है जहां ट्रैफिक चलता
है। है ना? तो गाड़ी की आवाजें आती है। तो
वॉक पे बस यही भान है कि बाबा है जो राइट
बिहाइंड बैकग्राउंड ऑफ ऑल द चेंजिंग
एक्सपीरियंसेस, थॉट्स, फीलिंग्स, इमोशंस,
कर्मेंद्रियां से जो दिख रहा है। इल्यूजन
के रूप में पेड़, नदी, सड़क, गाड़ियां,
बिल्डिंग्स, अह, स्ट्रीट्स सब दिख रहा है।
स्थूल आंखों
के को जो दिखता है। राइट? पर ऐसे भी भान
है पीछे बाबा ही है। जैसे आंखों के पीछे
कानों से सुनने वाला टाइम स्पेस में नहीं
है बाबा। इस इस
पर्सनल माइंड बॉडी की जो दुनिया है यह और
यह खुद बॉडी माइंड और उसकी जो दुनिया जो
दिखती है इस इस बॉडी माइंड को वो जैसे कि
बाबा जो पॉइंट है ना डायमेंशनलेस पॉइंट वो
जैसे बाबा पीछे ही है। है ना?
और जैसे बाबा
[संगीत]
को स्थूल चीजें नहीं दिख रही है। अगर बाबा
ने कहा ना नैनों में बाबा को समा लिया तो
फिर बाबा को कैसे दिखेगा। नैनों में बिंदु
बाप को समाया तो पता चला कि एक्चुअल
में बाबा के लिए यह जो बाहर नदी की ये
साइड में एक तरफ नदी की आवाज बह रही है।
बहुत सुंदर लग रहा है मन को और एक तरफ
बच्चे चिल्ला रहे थे पीछे पार्क है तो वो
भी आवाज सुनाई दे रही है। एक तरफ ट्रैफिक
की आवाज सुनाई दे रही है। अब जैसे ही देखा
यह तो पर्सनल माइंड के अनुसार अलग-अलग
आवाज को नाम दिया। बच्चों की आवाज, नदी के
झरने की आवाज और ट्रैफिक की आवाज। अगर
बाबा सुन रहा है तो ना तो वो नाम देगा
इसको कि ये नदी की आवाज है या ये बच्चों
की आवाज है या ये ट्रैफिक की आवाज है या
ये अच्छी नहीं लग रही है आवाज। और ये आवाज
कितनी रिलैक्सिंग आवाज है। ऐसा कुछ भी
नहीं। बाबा को कैसे सुनाई देगा? वाइब्रेशन
ऑफ साउंड ऑफ साउंड भी नहीं है। सिर्फ एक
अगर बोलना भी है मान लीजिए समझने के लिए
तो वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड। कोई अलग-अलग नाम
नहीं है साउंड का कि यह बच्चों की
चिल्लाने की आवाज है या नदी की आवाज है या
सड़क के ट्रैफिक की आवाज है। नो जस्ट अ
वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड। नीदर गुड नर बैड। ना
तो प्लेजेंट है ना अनप्लेजेंट है। बस
साउंड है। जस्ट वाइब्रेशन ऑफ
साउंड। राइट? तो लिटरली जैसे बाबा बाबा
बिंदु को नैनों में समाया तो फिर ऐसे ही
लगा ऐसे ही यूज़ होगा कान। तो अपने आप ही
जैसे कि दिख सुनाई सब दे रहा है कि ये
बच्चे की आवाज मन उसके ऊपर लेबल लगा रहा
है थॉट के साथ और नदी की आवाज कितनी
रिलैक्सिंग उसके साथ फीलिंग भी ऐड कर रहा
है और ट्रैफिक की आवाज कितनी गंदी वो भी
ऐड कर रहा है थॉट और कर्मेंद्रियों का
कॉम्बिनेशन सब तरफ चल रहा है पर क्योंकि
बाबा बिंदु नैनों में समाया तो फिर ऐसा
महसूस हुआ जस्ट वाइब्रेशन ऑफ़ साउंड सो
ब्यूटीफुल
सब
कुछ कोई अगर नाम ना दो, लेबल ना लगाओ,
डिस्क्रिप्शन ना दो तो ब्यूटीफुल
एक्सपीरियंस। ऐसा लगा बाबा जैसे कि इस
माइंड को थैंक यू बोल रहा है कि देखो हे
मन कि तुम्हारे
द्वारा कि ये ह्यूमन
एक्सपीरियंस कितना ब्यूटीफुल है। है ना?
पर बाबा तो अनटच है। बाबा तो इनफिनिट
बीइंग है। पर तुम इस ह्यूमन एक्सपीरियंस
को भी एंजॉय कर सकते हो बिना नाम लेबल
लगाए। हे
मन बाबा थैंक यू बोलता
है। और मन को इतना ब्यूटीफुल लगा बाबा का
ये बात। मन ने कहा बाबा थैंक यू आपका जो
आपने मुझे मेरी कर्मेंद्र्रियों को
प्यूरिफाई कर दिया।
है ना? पहले तो मन मैं मन जैसे लेबल लगाकर
थॉट्स को अच्छा बुरा लेबल लगाकर उसको नाम
देकर कि ये बच्चों की ये नदी की ये
ट्रैफिक की अलग-अलग लेबल लगाकर साउंड
वाइब्रेशन के ऊपर उसको अच्छा और बुरा बोल
रहा
था। तो अब तो जैसे बॉम्ब भी गिर जाए तो भी
एक आवाज
है। तो एक वाइब्रेशन ऑफ साउंड है। तो अब
पता चला कि कैसे अगर डिस्ट्रक्शन का सीन
भी आता है तो उसमें आवाज कैसे सुनाई देगी?
आवाज है सिर्फ कि यह कर्मेंद्र्रियों का
प्यूरिफिकेशन है
ना तो बाबा को नैनों में बाप बिंदु को समा
दिया तो बिंदी समाई हुई है ना इसलिए
बिल्कुल जैसे माइंड डिॉल्व हो जाता है
परमात्मा फिर जैसे परमात्मा कर्मेंद्रियों
को और मन को यूज कर रहा है फिर देखा बाबा
कैसे देख रहा होगा है ना तो बाबा की नजर
से देखा तो बाबा को लिए अलग-अलग चीजें
अलग-अलग नाम रूप नहीं दिख रहे हैं। बाबा
के लिए वो कचरा नहीं पड़ा है स्ट्रीट के
ऊपर या बाबा के लिए एक जला हुआ पेड़ है।
एक हरा भरा पेड़ है तो उसके लिए जला हुआ
पेड़ ना हरा भरा पेड़ कोई मायने नहीं रखता
है उसके लिए। तो जैसे कि स्थूल आंखों से
देखते हुए भी कुछ नहीं दिखा। मतलब बाबा को
क्या दिख रहा होगा?
तो बाबा के साथ देखा तो एकदम इतना
अप्रिसिएशन आया जो कुछ भी है यह एक
वाइब्रेशनल एक्टिविटी है जिसको
कर्मेंद्रियों ने एक अलग-अलग नाम एक
अलग-अलग शेप एक अलग-अलग साइज एक
अलग-अलग सब कुछ जैसे एक कार्व आउट किया
है। है ना? एक एक कारीगर होता है। एक
मूर्ति को रचता है। पत्थर से एक पत्थर की
पत्थर के स्लैब से काट काट के मूर्ति को
रचता है। ऐसे ही ये कर्मेंद्र्रियां है जो
काट काट के चीजों को जैसे वाइबेशंस को
जैसे अलग-अलग रूप और नाम देती हैं। राइट?
ऐसा महसूस हुआ बाबा बिंदु जब नैनों में
समाया हुआ होता है तो ऐसी फीलिंग आई कि ये
वाइब्रेशनल एक्टिविटी को भी कैसे कि जैसे
अलग-अलग कर्मेंद्रियों के द्वारा फॉर्म
रंग शेप साइज दिया और फिर थॉट ने लेबल
लगाया और एक-एक चीज की जैसे अपनी एक
इंडिपेंडेंट एकिस्टेंस हो गई। तो ऐसे लगा
कि वाकई
में सतयुग की जो बाबा बोलते हैं ना चमकीली
ड्रेस जो बाबा ने ऊपर बोला है कि सतयुग की
चमकीली ड्रेस ये ये पहनने के लिए रेडी हो
तुम दिखाई दे रही है तुमको स्पष्ट गोल्डन
ड्रेस बाबा बोलते हैं ना कई बार सतयुग के
पेड़ दिखाई देंगे तब समझ आया कि सतयुग के
पेड़ दिखाई देंगे मतलब यह है कि वह पेड़
देखते हुए भी उसके पीछे की सच्चाई पता
होगी
कि एक वाइब्रेशनल एक्टिविटी है जिसको
कर्मेंद्रियों ने जैसे कि साइट, साउंड,
टेस्ट, टच और स्मेल। तो इस केस में
साइट और
और क्या बोलते हैं?
टच और स्मेल ने जैसे कि वो कार्व आउट किए
हैं अलग-अलग चीजें वाइबेशंस की एक्टिविटी
में कर्मेंद्रियों के थ्रू देखते हैं तो
वो ऐसे दिखती है। राइट? तो ऐसा महसूस हुआ
कि बाबा बिंदु को जब नैनों में समाया तो
सत्य भी पता है पीछे का जो दिख रहा है उन
चीजों का। पर चीजें जैसे दिख रही है अब वो
धोखा नहीं दे पा रही
हैं। पर जैसे कि ट्रांसपेरेंट हो जाता है
सब कुछ। उसका सत्य दिख रहा है। देखते हुए
भी पीछे दिख रहा है अंडरस्टैंडिंग की आंख
से कि बाबा के लिए ये सब वाइब्रेशनल
एक्टिविटी है। पर जब ह्यूमन माइंड के
पॉइंट ऑफ व्यू से देखते हैं तो जैसे कि
बाबा नैनों में समाया हुआ है तो इल्लुजन
जो है वो शेप साइज रंग रूप नाम लेबल गायब
नहीं हो रहा है। पर अंडरस्टैंडिंग से इतना
क्लियरली दिख रहा है कि यह चीज जैसे दिख
रही है वैसे नहीं है।
है
ना?
तो रियलिटी है। उसकी वाइब्रेशनल एक्टिविटी
उसकी रियलिटी है। तो वो जो शेप साइज कलर
फॉर्म दिख रहा है वो रियलिटी नहीं है
उसकी। तो जैसे-जैसे ये जब हम है ना
स्पेशली नेचर वॉक है। इन इस टाइम में बहुत
इजी होता है बाबा बिंदु जब नैनों में
समाया हुआ होता है बाबा के साथ देखना।
राइट? राइट? तो बाबा को कैसे दिख रहा है?
देखते हुए भी नहीं दिख रहा है। सुनते हुए
भी नहीं सुनाई दे रहा है। ये इसका मीनिंग
है एक्चुअल में। फिर अब उसको
डे टू डे लिविंग में भी कैसे बाबा ने जब
कहा कि
तीन बातें सुनी निमित्त, निर्माण और
निर्माण तो चौथी बात फिर निर्माण स्थिति
का अनुभव होता है। तो जब निमित्त बनी मतलब
मन मर चुका।
अब मेरे को बाबा मैं वो चकू हूं। बाबा
उठाएगा तो चलेगा। नहीं उठाएगा तो जंग पड़
जाएगी उसमें। तो बाबा चलाएगा तो चलेगा।
राइट? तो वो निमित्त भाव उसमें मैं
निमित्त हूं कभी भाव नहीं है। है ना? तो
वो निमित्तता की समझ तो उसमें निर्माणता
अपने आप आती है। क्यों? क्योंकि सभी मनों
का एसेंस तो बाबा ही है ना। सभी मनों का
बाप तो एक ही है ना। तो सभी मन चाहे
एक्टिविटी मन की थॉट्स, फीलिंग्स, इमोशन,
सेंसेशन और कर्मेंद्रियों का अनुभव सभी मन
अलग-अलग है। पर उस मन के पीछे का जो बाप
है जो सत्य एक है वो प्योर साइलेंट
प्रेजेंस
बाबा वो सत्य सभी का मनो का एक है। राइट?
तो जब ये क्लियर हो गया तो फिर निर्माणता
अपने आप आएगी ना। फिर मैं अलग, तू अलग,
तेरा खराब हो तो मेरा अच्छा हो ऐसा नहीं
होगा। राइट? तो वो निर्माणता मतलब फिर
उससे जो कंस्ट्रक्ट होगी दुनिया, उस
फीलिंग से जो रिश्ते होंगे, अनुभव होंगे
रिश्तों
के वो रिश्ते बहुत सुंदर होंगे। तो
पहले अपने
अपने पास्ट अपने पास्ट मतलब अपने पैकेज ऑफ़
थॉट्स फीलिंग्स इमोशन सेंसेशन और
कन्वेनियर का जो पैकेज है जिसमें मेरे केस
में नाम है री वो मर गया तो फिर साइलेंट
प्रेजेंस प्योर साइलेंट प्रेजेंस जैसे ही
वो मन मरा तो सारे ही मन एक साथ मर जाते
हैं। जैसे अगर मैं यह मैंपन नहीं जो बाबा
ने बोला ना मैंपन और मेरापन बहुत सूक्ष्म
है ब्राह्मण जीवन में और यह मैंपन और
मेरापन है संस्कारों से सेंसेशन से फीलिंग
से थॉट से अगर मैं भी थॉट्स हूं तो आपको
भी थॉट आपके रूप उस थॉट के रूप में
देखूंगी। मैं सेंसेशनंस हूं तो आपको भी
आपके सेंसेशंस के रूप में देखूंगी। राइट?
पर मैं ही थॉट नहीं, सेंसेशन नहीं। में
कुछ भी नहीं तो आप भी कुछ भी नहीं एज अ
पर्सन माइंड तो पीछे कौन सबके बाप राइट तो
बाप ही सत्य है एक तो फिर जब उस सत्य से
देखेंगे ना तो फिर रिश्ते कैसे होंगे उसका
भी एक एग्जांपल देते हैं ना इनफैक्ट लाइफ
बहुत सुंदर हो जाती है एक होता है कि हम
साक्षी
होकर अंदर की तरफ जाते हैं। अपने उस
साइलेंस को जानते हैं जो सभी का एक समान
है। राइट? उस साइलेंस को निर्वाण स्थिति
को जानकर फिर वापस एक्शन में आते हैं। ऐसा
नहीं कि बस डिटच हो गए। दुनिया से ये
संकल्पों से कॉरपोरियल फीलिंग की। दुनिया
से बनी हुई दुनिया से साक्षी हो गए। बस अब
आना ही नहीं वापस इस दुनिया में। नो। अपने
सत्य को जानकर फिर वापस
इनकर्पोरियल फीलिंग्स के
साथ। तो फिर दुनिया एंजेलिक महसूस होगी।
है ना? तो सूक्ष्म वतन यही बनाना है। किसी
ने मुझे मुरली का एक्चुअल में पॉइंट भेजा
है जिसमें उन्होंने बाबा ने क्लियरली बोला
है कि सूक्ष्म वतन की रचना यहीं होनी है।
एंजेलिक वर्ल्ड यही बनना है। तो
कैसे
बाबा स्थूल माइंड
मरा बाबा प्योर साइलेंस सभी मनों के पीछे
का सत्य है। एक ही बाप है सभी मनों का। तो
वह साइलेंस अब इस मन को अगर चलाता है तो
उसको सभी मन की एक्टिविटी के पीछे का सत्य
साइलेंट बैकग्राउंड दिखता है। जो बाबा ने
अभी कुछ दिन साकार मुरली में पहले बोला एक
दूसरे से बात करते हुए पीछे बाप को
देखो। राइट? तो फिर वो एंजल एक वर्ल्ड हो
गया। तो छोटा सा
एग्जांपल किसी ने
कहा बहुत क्लोज रिलेशनशिप है तो उन्होंने
कहा स्टॉक मार्केट बहुत ऊपर नीचे हो रहा
है। वो पॉलिसीज जो बन रही हैं अभी टेरिफ्स
लग रहे हैं। सब कुछ ऊपर नीचे हो रहा है।
पूरी दुनिया में स्टॉक मार्केट ऊपर नीचे
हो रहा है। और मेरा तो टाइम आ गया है
बेचने का। फिक्स्ड है। मुझे तो बेचना ही
पड़ेगा उस टाइम पे। तो वो बड़ी टेंशन कर
रहे थे और थोड़े टाइम
बाद उन्होंने आके बताया कि आज तो एकदम रॉक
बॉटम है और आज मेरा स्टॉक में स्टॉक बिक
गया।
राइट? और फिर नेक्स्ट
डे 40% स्टॉक मार्केट ऊपर हो गया। राइट?
और ये आपको बहुत डे टू डे लाइफ की लिविंग
में बता रही हूं ताकि हर लेवल पे हम देख
सकें। कैसे हम एंजेलिक देखते हैं। सेम
दुनिया तो स्टॉक मार्केट एकदम ऊपर चला गया
40% तो उन्होंने जब बेचा रॉक बॉटम पे एकदम
नीचे की प्राइस पे और नेक्स्ट दिन उनकी
स्टॉक प्राइस 40% ऊपर चली गई।
तो
फिर उन्होंने जैसे शेयर किया पास के ही
कोई रिश्ते में है तो उन्होंने शेयर किया
तो तो ये अंदर ही अंदर बड़ी अंदर ही अंदर
मतलब बाबा ही है थॉट्स फीलिंग्स इमोशन
सेंसेशंस के पीछे जो बाबा साइलेंट
प्रेजेंस है मन बाबा के अंदर डूब गया जैसे
एक बार तो उनकी बात सुनते-सुनते मन डूबा
बाबा के अंदर तो देखा ना तो कोई नाम है ना
तो कोई रूप है ना ही
कोई थॉट्स की ये बनी हुई दुनिया है ना ही
कोई इमेजेस की बनी हुई दुनिया है ना ही
कोई बॉडीज है एकदम प्योर बैकग्राउंड ऑफ़
साइलेंस तो पहले देखा मन कहीं फ्लक्चुएट
तो नहीं हो रहा ऊपर
नीचे पहले चेक किया अगर ये थॉट्स फीलिंग्स
ही मैं नहीं पीछे का साइलेंट बैकग्राउंड
मैं हूं। फिर देखा तो उसमें से जो शब्द
निकले अब ऐसा नहीं कि अंदर ही बैठ जाना
है। मुक्ति धाम के गेट खुल गए। मैं तो
संकल्पस फीलिंग थॉट इमोशन से पीछे जाकर
मुक्ति धाम में बैठी हूं। और फिर ये सामने
वाला अब बस अब दुनिया से कट गई। नो। अब
फिर वापस शब्दों में आई। और जब शब्द निकले
उसमें मैं नहीं थी। मैं मतलब ये नाम रूप
नहीं था।
लिटरली ऐसे लगता है जैसे बाबा बोल रहा है।
तो उनको पूछा
कि फ्लक्चुएशन हो रहा है।
तो उस्मान ने कहा हां लॉस हो गया
ना। कल ही स्टॉक मार्केट टाइम हुआ और मुझे
बेचना हुआ और आज स्टॉक प्राइस ऊपर चली गई।
तो तो एक बात जैसे कि बाबा
ने पहले तो देखा कि वह भी उस उस
फ्लक्चुएटिंग माइंड के पीछे भी कौन है।
जैसे बाबा ने बोला ना सिर्फ बाप को देखो
तो बाबा को ही देखा तो उस फ्लक्चुएटिंग
माइंड के पीछे देखा तो वो बाबा की लाइट को
कैच नहीं कर पा रहा था। इसलिए वह अपने
आपको अलग पर्सन मान के वह स्टॉक मार्केट
की दुनिया अपनी थॉट्स की दुनिया में
इमेजिनरी दुनिया में अपने आप को पर्सन मान
के लॉस गेन के चक्कर में फंसा हुआ समझ रहा
था।
तो जैसे कि बाबा इस मन को यूज़ करके उसको
कहते हैं
कि बाबा कहते हैं मतलब क्या है? कोई बाबा
कोई बॉडी में एंटर नहीं होता है। कहने का
मतलब है कि बाबा की क्वालिटी बाबा के गुण
जैसे बोलते हैं फिर मन के द्वारा बाबा के
गुण रिफ्लेक्ट होते हैं तो बाबा ने बाबा
के गुणों ने जैसे बात की और बाबा के
संस्कारों ने जैसे बोला
कि आप अगर एक इमेजिनरी खेल
खेलेंगे तो उन्होंने कहा खेल मैं तो बहुत
ऊपर नीचे हो रहा हूं अभी। मैंने कहा क्या
फर्क पड़ता है? खेल ही तो है। खेल खेल
लेते हैं। आप देख लेना। आपको ठीक लगता है
तो ठीक नहीं तो छोड़ देना। तो बोले अच्छा
ठीक है। तो कहा कि अच्छा थोड़ी देर के लिए
आप समझो कि कोई पास्ट नहीं
है। ना ही कोई फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस है।
है ना? कोई लास्ट सेकंड का भी पास्ट थॉट
नहीं है कि पास्ट में यह शेयर प्राइस थी।
2 दिन पहले तो इतनी थी। फिर आज इतने में
कल इतने में बिक गया। और फिर आज वापस और
इतना ऊपर चला गया है ना तो वो पास्ट क्या
था और फ्यूचर जो एक्सपेक्टेशन थी उस दोनों
को थोड़ी देर के लिए 10 सेकंड 10 सेकंड
नहीं 5 मिनट के लिए हटा
दो। मैंने कहा अच्छा उन्होंने 5 मिनट के
लिए हटा दिया। मैंने कहा अब चेक करो
आप जो भी जिस पर भी
बिका क्या कोई लॉस या प्रॉफिट था?
तो कहा नहीं अगर आप ऐसे बोलोगे तब तो कहां
से लॉस प्रॉफिट है ही नहीं लॉस ना प्रॉफिट
है ना तो ना प्रॉफिट ना लॉस ये तो जो भी
आया वो तो वही होना था वही हुआ तो इट वास
सो इंटरेस्टिंग टू सी जब खुद अपने इस
पैकेज ऑफ़ संस्कार कॉल्ड ऋणी जिसको नाम
दिया ऋणी उसके पीछे के सत्य को देखा
साइलेंट प्रेजेंस जैसे बाबा चला रहा है
बाबा के संस्कार चला रहे
हैं। उसको भी उसका पैकेज ऑफ़ संस्कार नहीं
देखा। आत्मा क्या है? बंडल ऑफ़ संस्कार ही
तो है। तो वो बंडल ऑफ़ संस्कार नहीं है। तो
उसके पीछे कौन है? बाबा
है। तो जैसे बाबा को देखा। फिर उसके बाद
ये जो आईडिया अपने आप ही
आया। और क्योंकि उसमें बाबा की फीलिंग
इन्फ्यूज थी। उस एक्सपेरिमेंट में। कोई
मैं उसको ज्यादा सिखाने के लिए वो भान
नहीं कर रहा था। पर लिटरली बाबा का
संस्कार इस मन को चला रहा है और बाबा का
बाबा ही जैसे उस मन को सुनवा रहा है।
तो जैसे कि उसकी एक सेकंड में सारी टेंशन
सारा स्ट्रेस
डिॉल्व है ना। अब किसी केस में हो सकता है
ना भी हो। इट डजंट मैटर।
क्योंकि व्हाट इजेंट इज कि जो बीज बोना था
बाबा ने बो दिया राइट टाइम पर अपने आप
इमर्ज हो जाएगा। आपने जैसे वो बाबा ने
जैसे वो एक्सपेरिमेंट बाबा के संस्कारों
ने जैसे इस मन के थ्रू एक्सपेरिमेंट किया
और वही छोड़ दिया। नो एक्सपेक्टेशन कि वो
उनको समझ आए नहीं आए कुछ भी नहीं। बट
लिटरली इट
वास अ फीलिंग स्ट्रांग क्लियर सीइंग कि जब
बाबा बिंदु नैनों में समाया हुआ होता है
मतलब उसके संस्कार मन को चला रहे होते हैं
और पुरा ये जो मनुष्यता के संस्कार की
ड्रेस टाइट नहीं पहनी हुई होती है। अपना
नेकेड बीइंग इन्हीं थॉट्स फीलिंग्स के
पीछे का सत्य पता होता है।
तब ऐसा महसूस होता है
कि अगर वह पुराने थॉट्स फीलिंग्स खुद मतलब
ये मन के भी अपने खुद के भी आए पर उसको ओन
ओनरशिप लेने वाला वो सूक्ष्म ब्राह्मण
वाला बाबा ने जो बोला वो मैंपन मेरापन
नहीं था उन फीलिंग्स थॉट्स के साथ उसको ओन
करने वाला कोई नहीं था तो लिटरली बाबा के
संस्कार टेकओवर कर लेते हैं मन को और फिर
बाबा के संस्कार जो बोलते हैं ना उसमें
पावर होती है।
तो यह पूरा इसीलिए सब शेयर बाबा करवा रहे
हैं और कर रहे हैं क्योंकि करण करावनहार
एक ही
है। अलग-अलग जो माइंड अवेलेबल है उसके लिए
बिल्कुल अपने आप को 100%
सरेंडर उसके थ्रू बाबा की लाइफ शाइन
करेगी। राइट? तब बाबा ने कहा जो निर्वाण
स्थिति में होंगे तब दूसरों को भी निर्वाण
धाम में पहुंचा सकेंगे। और फिर बेहद यही
बेहद की वैराग्य वृत्ति भी है। राइट? जहां
जीरो मैंपन है। किसी भी संकल्प फीलिंग
सेंसेशन से। है ना? अपना ये भी छोटा सा
अनुभव बताएगी कि सेंसेशन में भी आया पर
सेंसेशन से भी मैंपन नहीं। ये नहीं कि
मैंपन मैं नहीं हूं। मैं नहीं हूं। मैं
नहीं हूं। ऐसे भी नहीं है। अपना समझ कर
फिर बोल रही हूं मैं नहीं हूं। मैं नहीं
हूं। नो अपना लग ही नहीं रहा है। क्योंकि
साइलेंट बीइंग जो बाबा है वो क्या सेंसेशन
को जानता होगा? नहीं
जानता है ना। तो जब बाबा नहीं जानता तो जो
बाबा का नहीं वो मन का
नहीं। जो बाबा का एक्सपीरियंस वो मन का
एक्सपीरियंस। तो रिजेक्ट रिजेक्ट नहीं कर
रहे हैं, डिनाई नहीं कर रहे हैं वो
सेंसेशंस जो बहुत स्ट्रांगली आती हैं किसी
के दुख दर्द को
देखकर उससे भी ओनर कोई नहीं है। साक्षी
होने वाला भी इनफैक्ट ओनर ही नहीं है उसका
कोई। है ना? तो फिर लगता है कि जैसे कोई
उन सेंसेशंस को कोई ओनर नहीं मिला तो वो
अपने आप ही न्यूट्रल लगकर डिॉल्व हो जाती
है। फिर बाबा के संस्कार टेक ओवर कर लेते
हैं माइंड को। है ना? फिर बाबा के संस्कार
चलाते हैं। तो ये है बेहद का
वैराग्य। गाड़ी से वैराग्य, घर से
वैराग्य, बॉडी से वैराग्य, संबंधों से
वैराग्य। ये तो मोटा-मोटा बाबा बोलते हैं
साधारण लोग भी करते हैं। सूक्ष्म वैराग्य
सूक्ष्म
अ एकदम
डिटचमेंट नहीं क्या बोला बाबा ने जो शब्द
यूज़ किया वो सूक्ष्म निमित्त भाव वो चेक
करो। ट्रस्टी ऑफ थॉट्स, ट्रस्टी ऑफ
फीलिंग्स, ट्रस्टी ऑफ इमोशंस, ट्रस्टी ऑफ
सेंसेशनंस।
ट्रस्टी ऑफ़ कर्मेंद्र्रियों का अनुभव जो
अनुभव शुरू में शेयर
किया। यह है
एकदम बिल्कुल
सूक्ष्म। बेहद की वैराग्य
वृत्त। है ना? तो यह जानना अपने आप को कि
आई एम नॉट एनी एक्सपीरियंस। मैं आई एम जो
हूं आई
एम कोट अनकोट अनुभव नहीं है। बट सभी
चेंजिंग अनुभवों का बैकग्राउंड
है। राइट? जब यह समझ लिया तब फ्यूचर में
मुझे अपने आप को और परफेक्ट होता हुआ
देखना है। यह एक्सपेक्टेशन सूक्ष्म बांध
कर रखेगी।
बाबा ही है जो चला रहा है मन को हर घड़ी
उसके
संस्कार दैट्स
इट बाबा को कैसे दिखेगा बाबा कैसे सुनेगा
ऐसे ही बाबा कैसे टेस्ट
करेगा है ना तो जैसे कि बाबा ही कहते हैं
थैंक यू मन है ना
कि तुम सब अपने मेमोरी में स्वाद होते हुए
भी
टेस्ट करते हुए भी तुमको स्वाद मेरी कंपनी
से आ रहा है। राइट? तो बाबा ये नहीं बोल
रहे कि टेस्ट को रिजेक्ट करो।
नो कि टेस्ट नहीं आना चाहिए। नो टेस्ट पता
तो है ना मेमोरी में। मेमोरी है। ठीक है?
इमेजिनरी मेमोरी है। सब कुछ इमेजिनेशन ही
है। वैसे भी तो बाबा कह रहे हैं कि
टेस्ट होते हुए भी सुख तुम मुझसे लो। मेरी
कंपनी से लो।
है ना? तो टेस्ट आएगा। इट्स ओके। इट्स
फाइन। नाम उसको दे रहा है चॉकलेट का टेस्ट
या चाय का टेस्ट। इट्स
ओके। नो प्रॉब्लम। बट सुख
मतलब अपने आप को ये मत बोलो कि ये मैं
हूं। ये मुझे पसंद है। मुझे नहीं। वो
थॉट्स भी आ रहे हैं। उनसे भी पीछे देखो।
उन थॉट्स से भी पीछे कौन? उन थॉट्स को भी
देखने वाला कौन?
कोई भी नहीं है। उन थॉट्स का ओनर ही नहीं
है। बस आने दो और मर्ज होने दो थॉट्स को।
ओनर नहीं है उसका कोई। बस मुझे देखते
रहो। मुझे देखते रहो मतलब साइलेंट
प्रेजेंस। जिसके बिना ये कोई भी मनों के
अनुभव पॉसिबल नहीं है। कोई भी मन में जान
नहीं आ
सकती। तो बाबा के लिए जो
माइंड्स को दिखता है वह बाबा कभी
डायरेक्टली अनुभव नहीं करता है क्योंकि
इनफिनिट कैन ओनली एक्सपीरियंस द इनफिनिट
अनंत सिर्फ अनंत को अनुभव कर सकता है। है
ना?
पर जैसे सूर्य की लाइट से अर्थ के ऊपर कोई
भी एक्टिविटी चल रही है। सूर्य को टच नहीं
करती है। चाहे वॉर चल रहा है, चाहे पार्टी
चल रही है, चाहे कोई साधु जंगल में बैठ
के तपस्या कर रहा है या चाहे कोई खून कर
रहा है अर्थ पर। सूर्य चमक रहा है इसलिए
अर्थ पे जीवन है। मिसाल के तौर पर। ऐसे ही
बाबा की लाइट शाइन कर रही है। इसलिए
माइंड्स की एक्टिविटीज चल रही है। माइंड
के पॉइंट ऑफ व्यू
से ऐसे लगता है
कि ये सब चीजें जैसे दिख रही हैं वैसे
हैं। है ना? पर बाबा के पॉइंट ऑफ व्यू से
ये सब एक वाइब्रेशनल एक्टिविटी है। राइट?
तो जब यह क्लेरिटी आने लगती है तो जो मन
इस सत्य को जान जाता है तो वो फॉर्म्स के
खेल से, आकारों के खेल से, मन के आकारों
के खेल से, साउंड के खेल से, वाणी से परे
के सत्य को बैकग्राउंड में ही बाबा है।
पहचान जाता
है। है ना? और फिर वो बाबा का एक बहुत
ब्यूटीफुल इंस्ट्रूमेंट बन जाता है वो
माइंड। फिर बाबा के संस्कार उस माइंड को
चलाते हैं। राइट? तो यह है ब्यूटीफुल बेहद
की वैराग्य वृत्ति। तो जीवन को वापस वाणी
से परे के सत्य को जानकर मन उसमें डूब कर
फिर बाबा वापस उस माइंड को यूज़ करता है।
और फिर एक्चुअल में लाइफ इज अ ब्यूटीफुल
थिंग देन। है ना? ये हमने जो छोटे-छोटे
एक्सपीरियंसेस शेयर किए हैं। आप पूरे दिन
ऐसे जी रहे हैं। दिस इज
लिविंग इन
हेवन। परमात्मा के संस्कारों के साथ जीना
स्वर्गीय जीवन है।
ओम शांति।
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