कब गिरेंगे सोने के दाम | Gold Price | राजवीर सर | rajveer sir springboard | The Desi Human
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भाई हिंदू धर्म कहां का? इंडिया। जैनिज्म
कहां का? इंडिया। बुद्धिज्म कहां का?
इंडिया। तो इंडियन ओरिजिन के जो भी रिलीजन
थे उनसे एसोसिएटेड जो भी रूलर हुए थे उनसे
संबंधित जो भी इतिहास है वो तो कौन सा हो
गया? एनसीए। इस्लाम भारत में बाहर से आया।
इस्लाम भारत का नहीं था। वो अरब के अंदर
आया। अरब से भारत में आया। तो इस्लाम के
आने के बाद मुसलमान राजाओं के आने के बाद
भारत के अंदर जो कुछ हिस्ट्री है वो कौन
सी मान ली गई? मिडिव। और अंग्रेजों ने कहा
हमारे आने के बाद जो कुछ हिस्ट्री है वह
कौन सी हो गई? मॉडर्न। कितने चतुर और
चालाक तरीके से कितने कनिंग लोग थे वह कि
उन्होंने ये कहा कि भारत मॉडर्न कब हुआ जब
भारत में कौन आए?
इसका मतलब कह रहे थे कि पहले तुम लोग
मॉडर्न धोतियों में जिंदगियां निकल गई
तुम्हारी। ये जो पेंट पहननी सिखाई है। ये
हमने सिखाई है तुम्हें। भाई साहब अंधेरे
में बैठे थे। तुम्हारे देश में लाइट को
लेके आया तो हम लेके आए। घोड़ों पे ऊंटों
पे घूम रहे यदि कोई आपके ट्रेन और बस लेके
आए तो हम लेके आए। कबूतरों से चिट्ठियां
भेज रहे थे। कोई डागर लेके आए तो हम लेके
आए। यह सब अंग्रेजों ने किया। तो उन्होंने
कहा हमने तुम्हारे देश में कौन सी
हिस्ट्री लेके आए हम? मॉडर्न अंग्रेजों पे
डिपेंड करती है। तो मॉडर्न के दो भाग ये
है कि अंग्रेज कैसे आए हमारे देश में?
क्या किया? कैसे आए? कैसे हमारे राजाओं को
उन्होंने हराया? कैसे हमारे राजाओं से
हारे या फाइनली उन्होंने किस प्रकार भारत
पे कब्जा किया? एक पूरा सेगमेंट हम यह
पढ़ते हैं कि अंग्रेजों का भारत पर कब्जा
किस रूप में हुआ था? आइदर ट्रेड के रूप
में और भले उनका एमरलिस्टिक जो एक्सपेंशन
था उनके रूप में हुआ हो पर हम वो दोनों
चीजें पढ़ते हैं। साम्राज्यवादी उनका
विस्तार है वो और उनका जो व्यापारिक
विस्तार हुआ था वो दोनों पढ़ते हैं। जब एक
बार वो इस्टैब्लिश हो गए हमारे देश के
अंदर एकदम उनका रूल ढंग से आ गया था। हमने
उनके खिलाफ लड़ाई लड़ी है। हमने उनके
खिलाफ बाद में नेशनल मूवमेंट चलाया। क्या
चलाया? यह हमारा दूसरा पक्ष है।
तो हम दो पक्षों में बांट के पढ़ते हैं।
अंग्रेजों का देश में आना और अंग्रेजों के
खिलाफ मूवमेंट चलाना। और अंग्रेजों के
खिलाफ मूवमेंट चलाएगा तो अंग्रेज हमारे
देश से चले गए। तो आप ये कह दो अंग्रेजों
का देश में आना और अंग्रेजों का देश से ये
मॉडर्न है। आपके दो भागों के अंदर बांट के
पढ़नी है कि किस प्रकार आए थे और उनको
भेजने के लिए हमने क्या-क्या प्रयास किए।
दो अलग-अलग भागों में बांट के पढ़ते हैं।
यह जब हम पढ़ते हैं इसके अंदर हम यह पढ़ते
हैं कि जब अंग्रेज आए तो उन्होंने हर
प्रकार की अलग-अलग चीजें कैसे उन्होंने
ट्रेड किया होगा? कैसे हमारे यहां के
लोगों से कोई बैटल्स लड़े होंगे या अदर
यूरोपियन कंपनी जो थी उनसे बैटल्स लड़े
होंगे? हम ये भी पढ़ते हैं कि उन्होंने
हमारे एडमिनिस्ट्रेशन में क्या-क्या चेंज
किए थे। अच्छे बुरे अलग चीज है। पर हम यह
तो कहेंगे कि साहब ट्रेन लाए तो वही थे।
क्यों लाए? काम की थी कि नहीं थी? हमारे
पर क्या असर पड़ा? वो एक अलग चीज है। पर
ट्रेन लाए अंग्रेज।
क्यों लाए? काम की थी कि नहीं थी? पर डाक
घर पोस्टल सिस्टम लाए कौन?
अंग्रेज आज दिन तक जो चलती है सही है या
गलत है देश में चलानी है कि नहीं चलानी है
वह हमारा डिसीजन है पर यह जो एजुकेशन
सिस्टम जिसमें हम अब तक पढ़ रहे हैं ये
कौन लेके आए 100 किंतु परंतु हो सकते हैं
आप और मैं इस बात पर बैठ के भी डिस्कस कर
सकते हैं कि सर यह वाला सिस्टम तो बड़ा
बकवास है पर ये बंद कर देना चाहिए क्या सर
ये पूरी तरीके से इसमें हमें हमारी सभ्यता
से काट दिया गया हो जिसमें हमें हमारी
सभ्यता के बारे में पता नहीं हो वो क्यों
पढ़ाया जाए हिस्ट्री पूरी 12वीं तक पढ़ के
आ गए सर हम ग्रेजुएशन कर लेते हैं। हम
कोचिंग्स ले लेते हैं। उसके बावजूद हमें
चार भी वेद के श्लोक नहीं आते। क्योंकि
भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता की जो
जानकारी वेदों के अंदर मिलती है। फिर हम
सब कुछ पढ़ लेते हैं। हम उपनिषदों के बस
10 नाम याद कर पाते। हमें यह नहीं तक नहीं
पता कि उन उपनिषदों के अंदर लिखा हुआ
क्या-क्या है। अच्छे बुरे का पक्ष है।
कहने का कोई यह भी कह सकता है कि सर क्या
कर लेंगे? वेद उपनिषद पढ़ के। पुराना
ज्ञान है। नए पढ़े हैं शायद। दुनिया में आ
रही है। एआई हम पढ़े हुए हैं उपनिषद में।
यह भी तो पक्ष है। आप किधर जा सकते हो? आप
इधर हो, आप इधर हो। यह छोड़िए उस बात को।
पर यह तो आप मानते हो ना कि यह सिस्टम ले
तो कौन आए थे? तो हम तो पहले वाले भाग में
तो हम यह पढ़ते हैं कैसे कैसे लाए। दूसरे
वाले के अंदर के हम उनसे कौन-कौन
कैसे-कैसे लड़े थे। उसमें भी दोनों पक्ष
हैं। हो सकता है आप गांधी जी से सहमत हो
और हो सकता है आप गांधी जी से सहमत नहीं
हो। हो सकता है आप भगत सिंह से सहमत हो और
हो सकता है भगत सिंह से सहमत हैं। पर लड़े
तो थे। लड़ने के तरीके अलग-अलग हो सकते
हैं। आप यह कह सकते हो कि गांधी जी और भगत
सिंह ट्रेन की पटरियों की तरह। ट्रेन की
पटरिया होती है। दोनों साथ-साथ चलती है और
कभी मिलती और नहीं। और दोनों का क्या
टारगेट है कि ट्रेन को लास्ट तक लेकर जाना
है। मैं यह कह सकता हूं गांधी गांधी जी और
भगत सिंह दोनों का टारगेट यह है कि
अंग्रेजों को देश से बाहर निकालना। दोनों
बराबर चल रहे हैं लेकिन फिर भी आपस में
मिलते हैं। कुछ वैसे उनका रहा होगा तो हम
इसको दो भागों में बांट के बढ़ते हैं। भले
बड़ी बात। अब मैंने जब पहले वाला बताया कि
अंग्रेज हमारे देश में कैसे आए थे? तो
सवाल यह है कि क्यों आए थे?
आए क्यों? क्या करने के लिए?
ट्रेड करने के लिए। व्यापार करने के लिए
ना मोटा-मोटा व्यापार करने के लिए मसाले
चाहिए थे उन्हें क्या चाहिए थे मसाले
क्यों क्यों चाहिए थे मसाले
हां
कौन आया था पहला अंग्रेज इधर आने वाला कौन
था
वास्कोडिगम अंग्रेज था
पुर्तगाली था कौन था वो तो
पोर्तुगीज था वो तो चलो इससे एक बात यह तो
पता चली कि पुर्तगाली पहले आ गए थे
अंग्रेज बाद तो हमें पुर्तगालियों के बारे
में भी पढ़ना चाहिए। भले थोड़ा सा पढ़े।
कब आया था वास्कोडिगामा?
1498
जैसा आपने कहा उसके अनुसार यह है कि
वास्कोडि गामा भारत आया था। 1498 में आया
था और मसालों के लिए आया था और उनको अपने
देश के लिए मसालों की आवश्यकता थी। यही
बात है। 1497 में फीका फीका ही खा रहे थे
क्या?
98 में आया वो
भाई। 1498 में आया वास्कोडिगामा
तो 97 96 95 1398 2098 119
उसमें बिना मसालों के खा रहे थे
उसमें क्या था
मतलब एक अचानक 1498 में वास्कोडिगमा ने
कहा मैं मसाले के बिना नहीं खाऊंगा
और ये ये ये अच्छा नहीं लगता। आमलेट मुझे
बिना मसाले के तो एकदम अच्छा नहीं लगता।
उसकी मम्मी ने कहा जा मसाले लिया। उसने
कहा इंडिया जा रहा हूं। आ यार यहां से
मसाले लेके चला गया। ऐसा कुछ हुआ तो
हैं। तो पहले क्यों नहीं आए वो? 98 में ही
क्यों आए? उससे पहले आ जाते। और 1498 में
क्यों? 1398 में आ जाते। 2098 में आ जाते।
क्या ऐसा सोचो इस बात को है ना? थोड़ा सा
रैशन होके सोचो। क्या ऐसा हो सकता है क्या
जिस देश के बारे में वह जानते ही ना हो या
मैं चेंज कर देता हूं जिस देश में वह कभी
आए ही ना हो उस देश को ढूंढने के लिए निकल
जाए भाई यह हो सकता है कि आपके दादाजी
आपको कहे
क्या जयपुर में गलताजी का घाट है
जाना
आप पापा से पूछो गलता जी का घाट कहां है
पता ही नहीं
मतलब दादा जी तो गलता जी घाट जानते थे या
परदादा जी गलता जी घाट जानते थे। दादा जी
और पापा वाली पीढ़ी दोनों भूल गई और
परदादा जी चले गए और पता था जयपुर में
गलता जी का घाट है। आपने एक दिन हिम्मत कर
ली गलता जी के घाट चले गए। कुछ ये है
यूरोपियंस बहुत पहले बहुत पहले बहुत पहले
भारत आया करते थे। सी रूट से आया करते थे।
समुद्री मार्ग से आते मसाले ही लेके जाते।
हम उनके बहुत पहले से दोस्त हैं। कोई
वास्कोडिगामा नहीं जो पता नहीं किस मूर्ख
ने हिस्ट्री लिखी जो थर्ड क्लास से पढ़ाना
शुरू किया कि वास्कोडिगाम ने भारत की खोज
की। हम लाभ क्या कोई गुमशुदा की तलाश
थोड़ी थी जो वास्कोडिगामा आ गया।
हमारे इतिहास के बारे में उनको बहुत
जानकारी थी। बहुत ज्यादा। एक राजा का नाम
यदि कभी आप किसी ने सुना हो सुना किसी ने
नीरो का नाम नीरो। ठीक सुनना देखो बात। है
ना? ध्यान देना। किसी समय यूरोप में
एक बहुत बड़ा एंपायर हुआ जिसका नाम था
रोमन एंपायर्स। रोमन एंपायर की राजधानी है
रोम। पूरे यूरोप को एक ही जगह बैठ के
कंट्रोल किया जाता है। उस जगह का नाम क्या
है?
इस रोम में एक राजा हुआ था। उसका नाम था
नीरो। बड़ा क्रूर टाइप का आदमी था। जनता
को दुख दिया करता था। कहते हैं अकाल पड़ा
हुआ था पर वो मस्त रहा करता था। उसकी वाइफ
दूध से नहाया करती थी। गुलाब की पत्तियों
से नहाया करती थी। जो इजिप्ट से दूध और
गुलाब की पत्तियां मंगवा लिया करता था कि
मेरी पत्नी के नहाने के लिए आना चाहिए।
बच्चे जब भूखे मर रहे थे तो उसकी पत्नी
दूध से नहा रही थी। तो उसके बारे में लिखा
किसी ने कि जब रोम जल रहा था तब नीरो
बांसुरी बजा रहा था। मतलब लोग त्राहिमाम
त्राहिमाम कर रहे हैं। लोग मर रहे हैं। उस
समय नीरो को इस बात से कोई फर्क नहीं
पड़ता। वो अपनी क्या बजा रहा है? बांसुरी
की धुन में मस्त हो गया आदमी। उसको और
किसी चीज के बारे में ध्यान भी नहीं।
इसलिए दुनिया में जब कभी भी कोई भी ऐसा
राजा हुआ जो बहुत क्रूर रहा हो जनता दुखी
रहती हो और उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता हो
तो हमने उसकी तुलना किससे कर दी नीरो कहां
का राजा था रोम कहां का राजा था उसका एक
ऑर्डर जारी किया हुआ है कानून आज भारत में
कानून कौन बनाती है पार्लियामेंट राजा के
टाइम में कानून कौन बनाता था राजा तो रोम
का राजा कौन हुआ नीर उसका एक कानून जारी
है
वह लिखता है कि रोम के जहाज
सोना भरकर भारत जाते हैं। क्या लिखता है?
बोलो।
सोना सोना भरकर भारत जाते
तथा मसाले भरकर रोम वापस आते हैं। क्या
लिखता है?
इसका मतलब एक जहाज सोना भर के कहां पे
गया? भारत सोना उतारा और वापस क्या लेके
गया? ट्रेड पॉलिसी पढ़ रहे हो ना? व्यापार
घाटा है। यह तो
ट्रेड डेफिशिट है। सोने के बदले में
मसाले।
दिया क्या हमने? गोल्ड लिया क्या? तो उसने
कहा भाई साहब यह ट्रेड घाटा है। ऐसे थोड़ी
होता है व्यापार कि दें तो ज्यादा और ले
कम कि भाई अपने को कोई एक चीज लेके आनी थी
कि यह लेके आना था इसके लिए पढ़ाने के लिए
और अगले ने रुपए मांगे कि साहब इसके तो
रुपए मैं लूंगा 10 लाख और हमने कहा दे दे
यार चलो क्लास तो लेनी है भले ही 10 लाख
लग जाए। आप कहोगे सर ये घाटे की बात है।
10 लाख में तो लाख आ जाते हैं सर। इतने
महंगे तो नहीं आते सर या आपको 10 लाख में
तो 100 ला देता सर मैं 10 लाख में तो000
ला देता मैं आपको 10 लाख में तो 10,000 ला
देता इतना महंगा भी नहीं आता इसका मतलब
मैंने चीज के रुपए क्या दे दिए ज्यादा तो
नीर कहता है रोम के जहाज सोना भरकर भारत
जाते हैं और सोना उतार के वहां से मसाले
लेकर आते हैं इस व्यापार पर रोक लगा दी
जाए इस व्यापार पर
यदि नीरों का यह कानून है इसका मतलब उनके
जहाज आ रहे थे ना उनका जहाज तो आ रहा है
पंडिचेरी पडीचेरी बहुत पुराना बहुत पुराना
पोर्ट है रोमन एंपायर वाले बोला करते थे
अरिका मेडू अरिकामेडू से उनके जो जहाज है
सोना भर के तो आते हैं और वापस क्या लेके
जाते हैं क्या लेके जाते हैं मसाला पूरा
है कि सोना भरकर जहाज आते हैं इसका मतलब
जहाज वाला व्यापार हो रहा है इसे दो तीन
बातें पता चल रही है मसाले पहले से जा रहे
थे जहाज वाले रूट से ही मसाले जा रहे थे
इसका मतलब रूट तो पता ही था सी रूट है और
सी रूट की उनको क्या थी जानकारी यही तो
हुआ क्लियर ही है भी रोमन एंपायर कोटा में
बहुत महान रोमन एंपायर रहा आप देख लो रोमन
एंपायर का आज भी कितना इन्फ्लुएंस होगा
यूरोप पे। उसका मैं एग्जांपल देता हूं।
इसी रोम में एक राजा हुआ उसका नाम था
जूलियस सीजर्स। वो पैदा जब हुआ तो उसकी
मम्मी का ऑपरेशन करके उसको बाहर निकाला
गया था। सिजेरियन
सिज़ेरियन बच्चा था। वो जुलियस नाम था।
सिजेरियन हुआ इसलिए नाम ही पड़ गया जुलियस
सीजर्स। क्या नाम पड़ा? उसके नाम पर महीने
का नाम है जुलाई। उसके बाद एक राजा उसका
नाम था अगस्त। इसलिए महीने का नाम क्या
है? अगस्त। अगस्त तो हम हिंदी वालों से
बोलना नहीं आता। अगस्त इसलिए बोलते हैं।
नाम तो उसका अगस्त ही है। हम हिंदी वालों
से बोला नहीं गया। अगस्त हमने कहा अगस्त
अगस्त है ना अगस्त नहीं होगा बस मुंह पलट
नहीं खा रहा जीभ हमारी तो तो हमने अगस्त
किया है बाकी उसका नाम तो क्या है ये तो
असर है उन राजाओं का रोम के राजा क्या रहे
होंगे अच्छा यूरोप का धर्म कौन सा ईसाई
क्रिश्चियन है वो क्रिश्चियन है सारे के
सारे अब जब यूरोप की राजधानी रोम है तो
उनका जो धार्मिक गुरु होगा वो भी कहां पर
बैठेगा रोम रोम की एक कॉलोनी है उसका नाम
है वेटिकन सिटी रोम की कॉलोनी जैसे जयपुर
में मानस सरोवर उसमें बैठता है उनका पॉप।
पूरे यूरोप के लोग यदि मिलने के लिए
जाएंगे साहब पॉप के पास रोम जाओ और रोम
में पॉप कहां बैठता है? वेटिकन सिटी। ये
तो ठीक है साहब। यूरोप दादा है पूरी
दुनिया का। आज भी चलती है उनकी। इसलिए
उन्होंने कॉलोनी को देश घोषित कर रखा है
कि वेटिकन सिटी देश है।
मानसरोवर है। इतना ही मानसरोवर रहती है।
वेटिकन सिटी है। अगलों की चलती है दुनिया
में। तो उन्होंने कहा ना ना सिटी नहीं है
कंट्री वेटिकन सिटी को देश जब देश का नाम
ही वेटिकन सिटी है तो सिटी है
अगले की चलती है तो अगले ने घोषित कर रखा
है अब कोई टाइम में उनकी लैंग्वेज भी थी
रोमन धीरे धीरे धीरे धीरे लोगों ने कहा
अरे ये अंग्रेजों ने किसी ने कहा कि भाई
हम तो यार इधर साइड में पड़े हैं तुमसे और
हम क्यों बोले तुम्हारी किसी ने कहा हम तो
यहां बैठे हैं क्यों बोले किसी ने कहा हम
यहां बैठे हैं क्यों बोले तो सबने
अपनी-अपनी लैंग्वेज बना ली अंग्रेजों ने
कहा हमारी इंग्लिश फ्रांस ने कहा हमारी
फ्रेंच जर्मन एक हमारी जर्मन इटालियन एक
हमारी इटालियन सबकी अलग-अलग हो गई इसलिए
पर आज भी यूरोप की सारी लैंग्वेज आइदर
इंग्लिश और फ्रेंच और जर्मन और पोर्चुगी
कोई भी जो लैंग्वेज है आपकी इन सबको एक
साथ कंबाइंड रूप में बोलते हैं रोमंस
लैंग्वेज
क्या बोलते हैं वे लैंग्वेज वे लैंग्वेज
जो रोमन एंपायर के बाद में अलग-अलग हो गई
थी उन सबको एक साथ क्या बोल दिया जाए तो
रोम का जलवा यह है ना और उनका व्यापार
अपने साथ होता था ये भी क्लियर है एक और
मैं बंदे का नाम बताता हूं यदि आपने किसी
ने सुना हो क्या नाम बताओ बंद प्ली क्या
नाम है प्ली इतिहासकार हुआ एक प्लिनी नाम
करके प्लेनी एक बहुत अच्छा इतिहासकार हुआ
था प्लिनी अपनी बुक में एक बात लिखता है
कि पूरी दुनिया का सोना पूरी दुनिया में
घूमता है भारत में जाकर दफन हो जाता है
भारत में जाकर इकोनमी में आपने पढ़ा होगा
भाई बार्टर सिस्टम होता है बार्टर क्या
कहता है मैं आपको कोई चीज दूंगा आप इनको
देंगे आप इनको देंगे आप इनको यही तो होता
है कि भाई मैं मैंने कहा भाई मेरे तो पास
और कुछ नहीं है। मेरे पास है ना थोड़ी
ज्ञान की बात है। मैं पढ़ा दूंगा। तो आपने
कहा सर हमारे घर पे बाजरा ले लो। आपने
मुझे बाजरा दिया। मैंने आपको पढ़ा दिया।
मैंने बाजरा लेके कपड़े की दुकान वाले को
कहा गया कि यार दो शर्ट तो दे दे। उसने
बाजरा लेके मुझे शर्ट दे दी। यही है बार
सिस्टम और क्या कहता है? तो पूरी दुनिया
इसी प्रकार चलती है। जिसके पास जो है वो
दे दो और उसके पास जो है वो उसे ले लो।
भारत वाले इस मामले में थोड़े चेंज थे। हम
कहते जो है वो तो ले लो। पर हम केवल सोना
लेंगे।
हम केवल सोने के बाद दूसरी कोई भी चीज
स्वीकार करेंगे और वह प्रेम हमारा आज दिन
तक है।
इसलिए सोने की रेट 1 लाख के बाहर निकल गई।
निकल गई सबको पता है तुम्हें यही काम करते
रहते हो तुम रेट रेट ही देखते रहते हो
बैठे-बैठे। लड़कियों तुमने जो Instagram
बना रखा है मुझे सब पता है। तुम क्या
देखती हो उसपे? हैं? ज्वेलरी देखती रहती
हो उसपे तुम। नहीं देखती? हां नहीं देखनी
उसप अपने। तो वह कहते पूरी दुनिया का सोना
पूरी दुनिया में घूमता है पर भारत में
जाकर क्या हो जाता है? दन हो दन हो जाता
है। इसका मतलब है कि भारत वाले केवल सोना
लेते हैं और कोई वस्तु लेते नहीं है। अब
वो नीर वाली बात वापस सही है कि हम मसाले
बेचते हैं जहाज भर के वापस केवल हम सोना
भरते हैं जहाज भरकर। वापस क्या आता है?
मसाले आते हैं। और भारत में आज भी भारत
में कोई भी आदमी सोना नहीं देना चाहेगा।
लेके रखना ही चाहेगा। हम आज भी
इन्वेस्टमेंट का मतलब ही सोना समझते हैं।
है ना? हर कोई यूं अनपढ़ से अनपढ़ आदमी
आकर जाएगा। अरे इस चीज में क्यों रुपए
लगाए? सोना ही ले लेते हैं। सोना
इन्वेस्टमेंट है इसलिए भारत में सोने की
रेट कभी कम नहीं होती। उसकी रेट हमेशा
बढ़ती है। बाकी हर चीज की कम ज्यादा होती
है। ये प्रॉपर्टी की रेट है। प्लॉट आज
महंगा कल सस्ता फसलों की रेट है। है ना?
गवार का भाव आज ज्यादा कल कम। कपास के भाव
आज ज्यादा कल कम। सोना कभी कम नहीं हो
रहा। बढ़ ही रहा है क्योंकि हर आदमी लेना
चाहता है। इसका मतलब डिमांड बढ़ी हुई रहती
है। उसकी डिमांड बढ़ी हुई रहती है। इतनी
ज्यादा सप्लाई होती नहीं है। तो उसकी रेट
हमेशा क्या रहेगी? ज्यादा। तो ये रोमन
एंपायर था। रोमन एंपायर का भारत के साथ
में बाकायदा व्यापार हुआ करता था। पूरी
बुक है अपने साथ व्यापार पर। पेरिप्लस ऑफ
द एररथ्रियन सी। लाल सागर की यात्रा नाम
करके बुक है। लिख के कौन गया? राइटर का
नाम पता नहीं है। पर पेरिप्लस ऑफ द
एरिथियन सी नाम की पूरी की पूरी बुक लिखी
हुई है उन लोगों की। और उसमें भारत के साथ
व्यापार की कई सारी बातें हैं कि कैसे
व्यापार करते थे? कैसे व्यापार नहीं करते
थे। समय का चक्कर घुमा। रोमन एंपायर टूट
गया। रोमन एंपायर दो भागों में बंट गया।
ईस्टर्न रोमन एंपायर। बोलते अभी भी रोमन
एंपायर है पर रोम इधर रह गया। इधर रोम आई
ही नहीं। तब इधर वाले की राजधानी कौन सी
होगी? इधर वाले की राजधानी एक नई चीज आई।
कौन सी राजधानी आई? कॉन्स्टेंट नोपल।
हिंदी वाले अपने को इसी को बोलते हैं
कुस्तुनतुनिया। हिंदी वाले अपने क्या
बोलते हैं? आजकल हम इसी को कहते हैं? एक
देश का नाम सुना है? ट्रकी। तो ट्रकी की
जो राजधानी है वो कौन सी है?
अब जब है ना आपके पास ज्यादा रुपए होते
हैं ना तो आपके पास में रिसोर्सेज भी
ज्यादा होंगे। आपके पास बड़े जहाज हैं,
बड़े व्यापारी हैं। पानी में से जहाज
जाएंगे वो आपका बिजनेस करके आएंगे। तो
एंपायर छोटे होते हैं ना तो रिसोर्सेज
अपने आप में क्या होने लग जाते हैं? कम।
जब रिसोर्सेज कम होने लगे
तो इन लोगों के वो जो बड़े-बड़े जहाज कभी
भारत में आके सोना देके मसाले लेके जाते
थे। अब वो बात इनकी बची नहीं। पर मसाले तो
चाहिए। ठंडे देशों के अंदर मसालों की अधिक
आवश्यकता है। ठंडे देशों में बिना मसालों
के कैसे पार पड़ेगी? अब इनको मसाले कैसे
लिए जाए? तो अब इनका लैंड रूट काम आने
लगा।
भारत है भारत से
पाकिस्तान जाएंगे, अफगानिस्तान जाएंगे,
ईरान जाएंगे, अरब जाएंगे, टर्की होते हुए
ट्रकी तो अब था ही नहीं। टर्की तो आगे बना
है। ये होते हुए इधर घुस जाएंगे। मतलब कुल
मिला के भारत, भारत से सेंट्रल एशिया और
सेंट्रल एशिया से होते हुए आगे कहां घुस
जाएंगे? यूरोप और यहां तक लेके अपने वाले
मसाले जाते। यहां पर आकर दूसरा व्यापारी
मिल जाता वो यहां से लेता और वो कहां
पहुंचा देता?
कोई टाइम में जब एंपायर बड़ा था तब सी रूट
से आ रहे थे। जब एंपायर छोटा हुआ तो कौन
से रूट से आने लगे? बड़े बड़े राजा नहीं
तो बड़ा साम्राज्य नहीं, बड़ा साम्राज्य
नहीं तो बड़े व्यापारी नहीं, बड़े
व्यापारी नहीं तो छोटे-छोटे टुकड़ों में
पहुंचने लग गया। पर जा तो अभी भी रहा था
उनके पास में चीजें पहुंच रही थी उनके पास
में।
इधर यह यूरोप है। यूरोप के इधर बाद में यह
अरबों वाला और यह इलाका शुरू हो जाएगा।
यहां पर मुसलमानों में एक कम्युनिटी थी।
उसका नाम था टर्क
या जिनको हम तुर्क बोलते हैं। टर्क थे और
टर्कों ने यहां पे कब्जा कर लिया आपका।
किस पे?
कुस्तुनिया या कॉन्स्टिट्यूपल जिसको आप
बोलते हो यहां पे कब्जा कर लिया। 14953
कब कब्जा कर लिया? 1453
पहले तो भाई साहब यहां जो अब यह सारे
क्रिश्चियन थे इधर से मुसलमान आए पहले तो
इन क्रिश्चियनों को मारा पकड़ पकड़ के तो
ये भागे इधर चर्चवर्च तोड़े किताबें
विताबें जलाई ढंग से एकदम कत्लेआम मचाए
इधर तो ये तो भाग भूग गए इधर आदमी जान बचा
के तो भाग जाए और मसाले तो फिर भी चाहिए
कहीं बैठने के बिना मसालों के तो कैसे पार
पड़े तुर्क जोरदार ही निकले यह जो रूट था
जिससे इनके मसाले पहुंच रहे थे रूट ब्लॉक
कर दिया और उन्होंने कहा कोई मसालों की
कोई आवश्यकता नहीं और दोबारा कोई इधर से
इधर आया ना व्यापार करने के लिए टांगे
तोड़ेंगे तुम्हारी। इसलिए यहां पर अब
मसाले जाने बंद हो गए। अब राजाओं को लगा
कि वो पुराने वाला सी रूट पकड़े।
भाई सी रूट इतने दिन बंद कर दिया था। है
ना? भाई अपने यह कह दें कि उधर वाले
रास्ते से कोई नहीं निकलेगा। सारे के सारे
इस रास्ते से जाओ। कल को इधर चार गुंडे
आके बैठ जाएंगे। इधर जाओगे टांगे
तोड़ेंगे। अपने कहेंगे वह खुलवाओ।
यही तो होगा। और क्या होगा? वह रूट ढूंढा
जाए। वह पहले अपने जैसे जाते थे। पहले कब
तो बहुत पहले जाते थे। तो रास्ता अब गायब
हो गया। याद नहीं वह कौन सा रास्ता था,
कौन सा रास्ता नहीं। इन दोनों ने घोषणा की
कि भाई जो कोई भारत जाने का रास्ता
ढूंढेगा हम इनाम देंगे। जो कोई भारत जाने
का रास्ता ढूंढेगा उसको हम जहाज भारत जाना
चाहे भाई लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी ना।
यदि कोई लंबी दूरी तय करना चाहता है तो हम
उसको जहाज देंगे। हम उसको हथियार दे
देंगे। हम उसको पैसे दे देंगे। और जाओ
इनाम भी देंगे उसको। कोई नहीं आ रहा। इतना
लंबा कौन जाए? एक होता क्या है? रेगुलर
कोई जाता रहता है ना तो पार पड़ जाती है।
कोई रेगुलर नहीं जाता है तो पार पड़ती
नहीं। मैं सिंपल सा एग्जांपल देता हूं। ये
स्प्रे मोड है। आरएस की आईएस की तैयारी
करवाता है। आरएस के बीच भरे पड़े रहते
हैं। आईएस में तुम इतने से बच्चे हो। कारण
क्योंकि अपने लोगों को अभी तक लगता है
आईएस नहीं होगा। उन्हीं अपने लोगों को
सबको लगता है आरएस तो कर ही लेंगे। ये
लगने की बात है।
है ना? ना आरएस में अभी तक भी लोगों को
लगता है अरे आर एस वो फलाना जी लगे थे हम
भी लग जाएंगे उनके आसपास में कोई ना कोई
लग गया आईएस उनके आसपास में लगा नहीं बाकी
सेम ही तैयारी है क्या अंतर है आरएस और
आईएस में क्या अंतर है पता है तुम्हें
तुम्हारी फीस थोड़ी ज्यादा है
वो इसीलिए ताकि तुम्हें लगे कि अलग
पढ़ाएंगे कुछ
है ना तुम्हें बावड़ा बनाया जा सके और
क्या चेंज करेंगे क्या मैं या कोई दूसरा
मास्टर मॉडर्न इंडिया पढ़ाने के लिए आर एस
के बैच में जाएगा तो वहां यह कहानी ऐसे
नहीं बताएगा वहां चेंज कर देगा कि ना
पुर्तगाल नहीं
हैं डायरेक्ट डच डच करेंगे शुरू तुम आरएस
वाले हो तुम्हें आईएस जितना पढ़ाएंगे ऐसा
हो सकता है कि लक्षता मैम ज्योग्राफी
पढ़ाते समय हिमालय के उनसे थोड़ी नीची कर
दे आरएस वाले बेस कि आईएस में तो 8848
लिखवा के आई थी तुम 40 कर दो 8 मीटर तो खा
जाऊंगी मैं फीस कम मिली है तुम्हारी कैसा
हो सकता है ऐसा हो सकता है कि सर कोई उधर
क्लास में पढ़ाए मिडिवल पढ़ाए और उसके के
अंदर कह दे बाबर का बाप चेंज।
अरे इसके बराबर नहीं बताया जा सकता। क्या
क्या चेंज होगा? उल्टा आर एस में ज्यादा
पढ़ाते हो तो राजस्थान जीके और पढ़ानी
पड़ती है। तुम्हें कम पढ़ाते हैं।
तुम्हारी तो लगती नहीं है।
पर यदि तुम्हारी फीस कम करें तो तुम्हें
एडमिशन ले लेते हो तुम। फिर कुछ ना कुछ
कमी है। आईएस आईएस होता है ना। हां होता
है। आरएस और आईएएस में उतना ही फर्क है
जितना बीड़ी और सिगरेट में।
है ना? राजीव है ना तुम सर? मजा आया ना
तुम्हें
है फर्क है भाई साहब बाकायदा पर चीजें सेम
ही रहती है ये कॉन्फिडेंस की बात मैं कहता
हूं जिस दिन
आपके बहुत पास का कोई बंदा आईएएस लग गया
ना उस दिन आप सब इसी बीच में एडमिशन लेंगे
और लोगों ने लगा नहीं यार ये तो सेम ही है
किया जा सकता है भाई मैं तो इस बार
त्रिलोक सर आए थे क्लास में
उनका डायरेक्ट आईएस ही हुआ आरएस में नहीं
हुआ
अभिषेक जी वो पिछली बार आरएस दिया था
उसमें नहीं हुआ। इस बार आईएस में हो गया।
ऊपर सीढ़ियों में चढ़ते समय ऊपर कानाराम
जी की फोटो लगी हुई है। कानाराम जी का
आरएस में नहीं हुआ था। सीधा आईएस में ही
हो गया था। पर मैं ऐसे खूब सारे जानता हूं
जिनका आईएएस में नहीं हुआ। आरएस में हो
गया था। वास्तव में तो जब आप यह बोलते हो
ना हम आईएएस की तैयारी करते हैं ना आरएस
की तैयारी करते हैं। आप बोलते ही गलत हो।
होना ये चाहिए कि हम सिविल सर्विस की
तैयारी करते हैं। उसके दो है। एक ऑल
इंडिया सर्विस है। एक राजस्थान सर्विस। हम
ऑल इंडिया का पेपर देते हैं हमारा और हम
कोरोना से पहले तक हम ऐसे ही बोलते थे
तुमसे जब कोरोना के बाद वाली पीढ़ी आई है
ना तुमने ये वर्ड यूज़ में लेने शुरू किए
हैं कि हम तो इसकी तैयारी करते हैं और
उसकी तैयारी करते हैं पहले जैसे मुझे याद
है कि एग्जाम दिया तैयारी करने के लिए आया
मैं आरएस के बीच में बैठा आर एस का पेपर
दिया प्री दिया प्री पास हो गया मेंस दिया
मेंस मेंस का पेपर दे दिया रिजल्ट अभी तक
आया नहीं अब मैं क्या करूं मुझे याद है
मैं जैसे मेरा मेंस हुआ था पहला मैं दिलीप
सर के पास गया कि सर ये तो हो गया मेंस तो
हो गया अब क्या करूं मैंने कहा कल आईएस
वाले बैच में जाना इस बार आईएस का फॉर्म
भर दो देना है। फॉर्म भरा एग्जाम पास में
आया सर के पास वापस गए कि सर एग्जाम देना
सर ने कहा नहीं देना ऑप्शनल तैयार हुआ
तुम्हारे नाम अगली बार देना सर फॉर्म भरा
तो कोई बात नहीं तो पढ़ा रहने दे क्या है
अगली बार देना अगली बार दिया वो पेपर कोई
ऐसा सोचता भी नहीं था यार यह पेपर और यह
पेपर अलग-अलग है आईएएस दिया कोई स्टूडेंट
है जिसने आईएएस मान लो मैं मैंने नहीं
दिया उस साल किसी ने दिया उस साल आईएएस
क्या हो सकता है या तो पास या फेल पास हो
गया तो वापस मेंस देता मेंस देने के बाद
वापस अब क्या करूं इतने में आरएस वाली
वैकेंसी फिर आगे आई हुई रहती
वह देता फेल हो गया प्री में फेल हो गया
तो वापस लगता आरएस के आ रखी तो ठीक है
नहीं आ रखी तो वापस पिटी इकोनमी जग्राफी
साइंस और हिस्ट्री ये तो पांच सब्जेक्ट
सेम ही है पढ़ लूंगा जो वैकेंसी आएगी वो
दे लूंगा इसमें इतना क्या सोचना है कि यह
दूं वो दूं अब स्टूडेंट एडमिशन लेता है
आरएस में फिर देता है पटवारी
देता है ग्राम सेवक तुम एडमिशन लेते हो
आईएस में थोड़े दिनों बाद तुम भी
मुस्कुराते हुए कहते हो
सर
चेंज कर दें क्या थोड़ा ट्रैक एकदम बिना
पूछे ट्रैक चेंज कर ही लेते हो उसमें
हमारा क्या पूछना होता है यह का यह उनके
है स्पेन और पुर्तगाल दो बड़े राज्य हैं
उन दो राज्यों के जो राजा और रानी है
उन्होंने अपने लोगों को कहा है कि जाओ और
जाके इंडिया से मसाले लेके आओ कोई सामने
नहीं आ रहा है। एक दिन एक लड़का अपने घर
में आमलेट खा रहा था। उसने अपनी मम्मी से
शिकायत की कि मम्मी इतना फीका आमलेट क्यों
लेके आई हो? ये क्या फीका फीका आमलेट है?
और मम्मी ने रसोई से चिल्लाते हुए कहा कि
इतना ज्यादा स्पाइसी आमलेट चाहिए ना तो
भारत चला जा और भारत से जाकर और मसाले ले
आजा तो डाल दूंगी मैं कहां से लेके आऊं
उसको हिट की बात उसने कहा मम्मी ने डायलॉग
सुना दिए वो गया क्वीन ईसा बेला के पास
किसके पास और क्वीन ईसा बेला को जाकर
क्वीन ईसा बेला मुझे वो जहाज दो मुझे वो
हथियार दो मुझे वो रुपए दो मुझे वो बंदे
दो और मैं इंडिया जाऊंगा और इंडिया जाके
क्या लेके आऊंगा वो जहाज लेके निकला पानी
में चलता जा रहा है चलता जा रहा है चलता
जा रहा है। यह यूरोप है। अब वो चल रहा है,
चल रहा है, चल रहा है। अब उसको यूरोप से
आना था इधर।
पानी में रास्ता पता नहीं चला। वो चला गया
इधर। चलता चलता चलता चलता चलता चलता अचानक
एक जगह उसको कुछ लोग दिखाई दिए। और उतरा
उसने कहा इंडिया पहुंच गया मैं। वहां के
लोगों ने कहा मूर्ख गलत आ गया। जाना था
ईस्ट में आ गया वेस्ट। जाना था ईस्ट में।
आ गया
उसने कहा अब थक गया मैं। जहां आ गया वही
ठीक है। आज के बाद तुम्हारा नाम है वेस्ट
इंडिया।
तुम्हारा नाम क्या है? कोलंबस अमेरिका की
खोज कर गया। वो जानते नहीं थे अमेरिका नाम
के कोई महाद्वीपीय। मसालों के चक्कर में
गलत चले गए। इसलिए अमेरिका की खोज हुई है।
हमारी नहीं हुई।
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