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Nityananda Trayodasi Lecture by Loknath Swami Maharaj || Lord Nityananda Prabhu Appearance Day katha

1h 29m 55s8,596 words1,330 segmentsEnglish

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0:00

यह बिल्कुल ऐप उसको आप सभी को

0:08

को बर्थडे विश

0:11

कि नित्यानंद भक्तों का अ

0:13

हुआ है

0:16

कि प्राकृत है अरे यह सब ठीक है

0:20

कि भगवान का हर रोज

0:23

का जन्म हो रहा है

0:26

कि कल बेक जन्मोत्सव था

0:29

हुआ है

0:30

है ताकि नहीं आ

0:33

जो मरा हंद्स्फ्री है

0:37

कि कुछ दिन पहले अद्वैताचार्य है क्या थी

0:41

हो

0:42

कि अद्वैताचार्य का अंशदान

0:45

अपने परिवार का होगा ही और क्या कहते हैं

0:49

सप्तमी यानी अ

0:52

इस प्रकार से द्वादशी तिथि तो आज त्रयोदशी

0:55

है नित्यानंद प्रियदर्शी जी

0:58

कि कबीर पूर्णिमा आएगी गौर पूर्णिमा जिस

1:03

क्रम में अद्वेताचार्य है पहले प्रकट हुए

1:08

फिर नित्यानंद

1:12

कि प्रभु का प्राकट्य और सीरवी चैतन्य

1:16

महाप्रभु का प्राकट्य

1:19

के प्रति थी अब उसी क्रम से हो रही है आप

1:21

1:23

आ जाए हो नित्यानंद त्रयोदशी महासभा की और

1:29

आप भगवान

1:31

की वजह बहुत लोग जानते हैं

1:34

[संगीत]

1:35

में पेशाब रुकता

1:38

कि विश्व कर रूपा जाया जगदीशा हरे अ

1:44

है भागवत में वर्णन है कि नित्यानंद प्रभु

1:47

को

1:50

मैं अब कुछ कम जानते हैं

1:53

में लगभग नहीं जानते हैं

1:56

और फिर नागपुर में आज नित्यानंद त्रयोदशी

1:59

का उत्सव और हम लोग तो मना रहे हैं

2:04

कि इन जरूर चाइना में आज नित्यानंद से

2:07

मनाई जा रही है ईद

2:10

मैं नागपुर से भी आगे चाइना

2:13

है और मांस करो मैं और विश्व हर मैं हूं

2:18

कि भगवान

2:21

यो यो प्रकट हुए हैं

2:23

में चैतन्य महाप्रभु

2:26

कि नित्यानंद प्रभु अ

2:29

है कुछ क्षण अवतार कहा छ्न ढुगों कू गढ़

2:35

छिप गया है

2:38

आज तक किसी को पता भी नहीं लगे कि वह आए

2:41

और अ

2:44

कि वे

2:48

कि भगवान है या भगवान गणेश भगवान के रूप

2:51

में आए साल का पता नहीं लगवाना लगवा ने

2:56

देना चाहते थे भगवान थोड़ा सा

3:00

169 अवतार संजना उदार और भगवान भगवान आए

3:07

लेकिन भक्तों के रूप में नहीं आए फिर हम

3:10

भगवान के रूप में नहीं आया फिर भगवान भक्त

3:14

ही बने तो फिर जाना और भी कठिन है

3:19

में पंक्चर तत्वात्मक कम और अकेले भी नहीं

3:21

आए ऐसे पंच तत्व आत्म कम कृष्णम

3:27

जो भक्त अरु

3:29

थे ₹5 में आया और पांच पांच रूपों में आए

3:36

पंचतत्व की आराधना पंचतत्व कम कृष्ण कृष्ण

3:44

कैसे पंचतत्व

3:47

कि मायापुर में पंचतत्व की आराधना होती है

3:52

राधा माधव के साथ-साथ पंचतत्व की आराधना

3:58

भगवान तत्व समझना आवश्यक है

4:03

[संगीत]

4:05

कि तत्व था हां जो तत्व जानते हैं जन्म

4:09

कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्व तत्व

4:16

यमुना सहित मारुति और

4:20

है तो यहां पंचतत्व कृष्ण अभी आए वह बन गए

4:27

भक्त और रूप में चैतन्य महाप्रभु बन गए

4:31

भक्त रूप पंचतत्व प्रमुख स्तंभ के रूप में

4:36

वीर स्वरूप परम भक्त अरूप बने चैतन्य

4:42

महाप्रभु भक्त स्वरूप बने नित्यानंद प्रभु

4:47

जो भक्त रूप भक्तों स्वरूप

4:51

की प्रभुता बता बने है अद्वैताचार्य

4:59

रफ्ता-रफ्ता आंख सं

5:02

और फिर एक प्रसिद्ध शुद्धता बनाए हैं

5:07

शुरूवात भगवान ने है

5:11

कि श्रीवास बने और भक्त शक्ति कम

5:16

में बात कर सकती हो

5:18

यहां पर है गदाधर मदद कर सकते हैं

5:23

कि राधा रानी की शक्ति भगवान की शक्ति

5:27

आधार अ

5:29

में बने हैं सत्ता बता दूं नारद मुनि भक्त

5:32

है श्रीवास बने हैं

5:36

कि भगवान का एक अवतार

5:39

का आदर्श है पुरूष आंवला कैसे पुरुष अवतार

5:46

कि मैं महा विष्णु ब्रह्मा विष्णु प्रकट

5:48

हुए हैं

5:51

कि अद्वैत विचार के रूप में और फिर बच गए

5:54

भक्त कर ऊपर भक्त स्वरूप

5:58

एक रहस्य तने और नित्यानंद प्रभु भक्त

6:03

स्वरूप

6:05

जो भक्त ध्रुव वक्त स्वरूप भक्तों रूप

6:09

चैतन्य महाप्रभु और भक्त स्वरू नित्यानंद

6:14

प्रभु वराहावतार और अवतार मां-बाप नहीं

6:23

होना चाहिए भगवान का कौन हो सकता लेकिन

6:29

घृणा भगवान

6:32

को प्रगट हो गए थे

6:34

कि अजय ब्रह्म कि अ

6:37

कि ब्रह्मा थी नासिका ही बनी

6:40

कि गर्भ ही इकाई ब्रह्म को हमको छींक आती

6:47

है तो और कुछ निकलता है मारे गए हैं

6:51

में ब्रह्म कोशिकाए तो ब्रह्म के नासिका

6:54

से

6:56

कि भगवान प्रकट हुए हैं

6:59

मैं पहले छोटे आकार की अंगूठी के आकार के

7:03

विरुद्ध उन्हें विराट रूप धारण किया

7:07

परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम्

7:11

धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि वे प्रभु

7:16

अवतार का

7:18

कि यही वह देश होता है मैंने और आधार में

7:24

तो धर्म की स्थापना के अधर्म के साथ

7:27

पृथ्वी की स्थापना करनी पड़ी उनको पृथ्वी

7:31

की स्थापना की

7:33

तो फिर आगे धर्म की स्थापना आ

7:36

हां हां

7:39

है तो यह भक्त रूप और भक्त स्वरूप है

7:45

कि वह भगवान

7:47

कि एक बने बात रूप

7:49

कि दूसरे बने हैं भक्तों शोरूम है

7:54

मैं तुम्हारा भगवान या अ

7:57

जो कछ भगवान या मच्छर भगवान ऐसे कुछ भगवान

8:03

के अवतार है शीघ्र ही

8:06

जो मां बाप ही नहीं है और

8:11

कि विरायक कोई विशेष प्रसंग कोई विशेष

8:15

कार्य

8:17

कि के लिए आए उसको निपट लिया तो अदृश्य हो

8:21

गए फेमिनिस्ट संक्षेप में कोई विस्तृत

8:25

वर्णन नहीं है कुछ क्षणों के लिए प्रकट हो

8:30

गए कुछ दिनों के लिए प्रकट हो गये फिर

8:34

अंतर्धान हो गये ऐसे अवतार लेकिन फिर से

8:39

अवतार भगवान ने वात्सल्यभाव प्राकट्य किसी

8:47

के बन जाते हैं पुत्र रशीद अंसारी उनका

8:52

पति तरह संसार उनका पुत्र या पुत्री है

8:57

लेकिन फिर से था प्राप्त कर रहे थे तो

9:06

की प्रार्थना चौंह तो जो सभी के माता है

9:11

सभी के पिता है वह बन जाते हैं किसी के

9:14

पुत्र मजा आता है

9:17

कि सोनी दयानंद प्रभु भी बन गया ऐसे अ

9:20

के पुत्र बने थे

9:22

में लड़ाई पंडित

9:25

है और पद्मावती के व पुत्र बने थे

9:29

है तो 500 वर्ष फैशन आप

9:35

कुछ कह रहे हैं

9:37

के पास वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु

9:41

नित्यानंद प्रभु प्रगट भए

9:43

कि ऐसा एक बने एक दिन तो सही था एक साल वह

9:47

सही था लेकिन आप तो और भी कई साल बीत गए

9:52

हैं

9:54

के वेतन एवं महाप्रभु के प्राकट्य को ही

9:58

में अब कुछ ही वाला अगले महीने में 526

10:02

वर्ष पूरे होंगे

10:05

कि यह संसार अ 526 व जन्मोत्सव चैतन्य

10:12

महाप्रभु का अविर्भाव उत्सव मनाएगा तो

10:15

जितने महाप्रभु के पहले तो 526

10:20

ए प्लस कितना है विषय

10:24

आज के पहले जत्थे ने महाप्रज्ञा ट्रेन है

10:27

और फिर अभिषेक साल पहले चैतन्य महाप्रभु

10:31

के पहले तो 269 और टी-20 तो तो साढ़े 50

10:38

ए प्लस माइनस बी

10:40

कि तूफान शिफ्ट ईयर्स

10:43

के प्रांत में युद्ध में इस साल पहले

10:47

नित्यानंद प्रभु प्रगट हुए हैं

10:52

मैं तो बस यही नित्यानंद प्रभु ही प्रगट

10:55

नहीं हो रहे हैं या केवल सीरियल गौरांग

11:00

महाप्रभु ही नहीं प्रकट हुए हैं

11:04

ने 500 वर्षारंभ लगभग 500 वर्ष पूर्व हुआ

11:09

था

11:10

हां सर आध्यात्मिक जगत थी प्रकट हुआ है

11:14

है और फिर जब हम भगवान का प्राकटय तो

11:16

भगवान स्वर्ग से प्रकट नहीं होते कुछ लोग

11:22

समझते होंगे अज्ञान के कारण भगवान स्वर्गम

11:26

रहते हैं है वन में रहते हैं तो कुछ

11:33

किंग्डम आफ गोधेड हैं

11:36

को स्वर्ग से भगवान प्रकट नहीं होते

11:39

स्वर्ग में भगवान रहते ही नहीं अब कभी

11:42

विजिट के लिए जाते होंगे स्वर्ग में भगवान

11:47

का निवास वर्ग में नहीं है भगवान तो अपने

11:51

दिव्य जगत में प्रकट होते हैं

11:55

कि अधिकतर अवतार भाई कौन से प्रकट होता है

12:00

अधिकतर अवतार लूंगा भगवान के अवतार है

12:04

उनका निवास स्थान हरि धाम वैकुंठ धाम

12:12

है लेकिन नित्यानंद प्रभु चैतन्य महाप्रभु

12:15

जो प्रकट हुए हैं वह कौन से भी ऊंचा दाम

12:21

कि साकेत धाम है श्री राम का धाम आपके धाम

12:26

वास्तविक 49 वां उर्स आम लोगों का नाम निज

12:33

धाम ने गोलोक धाम घृणित अनंत

12:41

कि चेतन है महाप्रभु नित्यानंद प्रभु

12:45

प्रकाश वर्ष पूर्व सारा गोलोक प्रगट हुआ

12:50

है

12:51

कि मुझे भगवान के उपरांत भगवान के

12:54

प्राकट्य के पहले भगवान का धाम कपड़ा करते

12:57

हैं भगवान का धाम प्रकट हुआ गोलों प्रकट

13:02

हुआ और लोग पति को लोकनायक है

13:10

ओम श्री कृष्णा भी प्रकट हुए और

13:15

कि उनके भ्राता श्री बलराम भी प्रकट हुए

13:19

हैं

13:20

है और भी कई सारे प्रगट में कई सारे कई

13:24

सारा सारा संसार ही आध्यात्मिक संसार ही

13:29

प्रकट हुआ नंद बाबा यशोदा अभी प्रकट हुई

13:33

और आधा भी प्रकट हुई है और कई सारे ग्वाल

13:38

बाल भी प्रकट हुए हैं एक द्वादश है बालों

13:45

का एक समूह है वेतन नित्यानंद प्रभु कि

13:49

बलराम के पार्षद रह तो नित्यानंद प्रभु

13:54

प्रगट हुए तो उनके

13:57

से 12 द्वादश सॉन्ग गोलू भी प्रकट पर मन

14:04

के पार्षद का रूप में है

14:06

में कई सारे प्रकट हुई यहां तक कि कौन भी

14:09

प्रकट हो गए थे

14:12

तो फिर आप को कल्पना आएगी

14:15

कि हम

14:18

तो फिर गांव खुद भी प्रकट हुआ एवं आया

14:21

पूर्व गोकुल है

14:24

कि नमक बीत

14:27

मैं एक अच्छा कर राम जी का

14:30

वो हंसी का अंग है एक चक्र ग्राम में

14:33

बलराम प्रकट हुए एक चक्रण

14:38

कि जो हुआ राधेश नाम का प्रदेश है बंगाल

14:44

में हरिदेव जहां गंगा नहीं बहती है गंगा

14:49

से कुछ दूर का प्रदेश है राधेश

14:55

कि उत्तराखंड देश में एक रोचक राम में

14:59

नित्यानंद प्रभु आज के दिन

15:03

में प्रकट हुए हटाई पंडित और पद्मावती के

15:08

के पुत्र के रूप में अजुन एवं भोजन अधिक

15:14

तो संकीर्तन अध्यक्ष चेतन भागवत के

15:23

प्रारंभ में श्रीमद्भागवत गीता भागवत

15:32

नित्यानंद भागवत कह सकते हैं

15:35

ए नाम तो नहीं दिया भाई साहब

15:38

कि इतने भागवत नहीं है वह

15:41

कि नित्यानंद भागवत है

15:44

है तो

15:46

कि Facebook चांद से इस प्रार्थना क्षेत्र

15:49

भागवत प्रारंभ होता है क्या प्रार्थना है

15:53

कि अ जुबान उम्र लंबी तो भिजवा ओ ओ

15:59

कि अजवाइन और लंबित भुजाओं का नाका मदार

16:02

तो संकीर्तन नहीं कब पितर हो कमल आया था

16:09

शाम को

16:11

यहां पर यह

16:13

में दो व्यक्तियों का

16:16

के दो अवतारों का है

16:18

का वर्णन हो रहा है इसीलिए यहां आओ आराम

16:24

संकीर्तन नहीं कपिल सरोवर जानवर लंबित

16:28

बुजुर्गों दो व्यक्ति व्यक्तियों की लंबी

16:32

भिजवाए थे

16:37

कि दो व्यक्ति संकीर्तन आंदोलन के पिता तो

16:42

वे दो कौन है

16:44

कि चैतन्य महाप्रभु और नित्य आनंदपुर इन

16:48

दोनों को अलग करना कठिन है दो अलग है नहीं

16:54

दोनों में ही

16:57

कि वेद ही नहीं है अब एड है थोड़ा भयभीत

17:02

प्रपात सिर्फ प्रकार दिखते हैं

17:06

अ कृष्ण और बलराम में क्योंकि कृष्ण और

17:10

बलराम ही प्रकट हो रहे हैं गांव निर्णायक

17:12

के रूप में डा

17:14

कि नंदन नंदन झा मीडिया सचिव शुद्ध हो

17:18

इलैहि या रहस्यमई बात है इस कांफ्रेंस हो

17:28

न्यूज़

17:29

ए क्या है नंदन नंदन जाएगी सच्ची सुतैहरी

17:33

रोड से अ

17:35

है जो नंदन नंदन श्री कृष्ण थे वहीं बन गए

17:39

सूची सुत जगन्नाथ सूत्र सच्ची स्वच्छ

17:44

बनाने

17:46

है और बलराम होइल अनीता है और बलराम बने

17:51

हैं नित्यानंद प्रभु बलराम मोह लेता है

17:57

है तो कृष्ण-बलराम को गर्ल्स हम समझ सकते

18:01

हैं तो हम लोग और नेता हैं कभी समझ सकते

18:03

हैं इससे कठिन हो जाता है कृष्ण-बलराम गौर

18:09

निताई तो समझना क्योंकि अ

18:13

जो भक्त बने हैं एक भक्त स्वरूप बने एक

18:15

भक्तों स्वरूप बने अपने को और छिपाए हैं

18:21

अपने भगवत्ता को छिपाए से लिए कठिन होता

18:25

है

18:27

कि भगवान भगवान के रूप में तय जड़ से पता

18:31

लग सकता है देवकी ने कहा था कि आप

18:35

चतुर्भुज रूप में अगर कम्स देखेगा तो समझा

18:39

लेता भगवान इसलिए प्रभु के बावजूद विभाग

18:44

बन जाओ तो फिर आपके भगवत थोड़ी छिप जाएंगी

18:49

अरे मनुष्यों के ही पूजा होती चतुर्भुज

18:55

भगवत भगवत लक्षण

19:03

है कैश व अध्यक्षता समाजसेवी घनश्याम

19:06

शुक्ला कैलाश में प्रवाह है

19:12

9th कृष्ण और बलराम शेयर प्रभुपाद स्थान

19:16

पर लिखे कि

19:17

कि दोनों भगवान है तो उनकी भगवत्ता होती

19:20

भागवत भगवान की क्या होती है भगवत्तत्त्व

19:24

गौतम बुद्ध कहते सुप्रीम पर्सनैलिटी आफ

19:28

गोधेड भागवत भगवान की भगवत्ता है

19:39

कि भगवान कृष्णा

19:42

कि अगर हंड्रेड परसेंट भगवान है और है भी

19:46

तो बलराम 98% भगवान है 2% कृष्ण कृष्ण से

19:55

पहले जो विस्तार हुआ और विस्तार और कई

20:00

सारे सब्सक्राइब इस अश्लील लुट गए लुट

20:12

पहला जो ऑप्शन है वह बलराम

20:19

है तो फिर बलराम हुई ललिता है सब

20:22

कृष्ण-बलराम जैसे अ

20:25

एक सांस में रहे कृष्ण-बलराम लीला के समय

20:30

है

20:31

मैं तो गांव नित्यानंद साथ रहे और साथ

20:35

उन्हें संकीर्तन नहीं कभी तारो संकीर्तन

20:38

आंदोलन की का विस्तार किया गया संकीर्तन

20:43

की स्थापना की और दोनों के बीच है अजवाइन

20:48

और लंबी भुजाओं व दोनों के बीच लंबी

20:52

भिजवाए हैं कितनी लंबी है और तक पहुंचने

20:57

तक पहुंची है

21:00

इस तवा अजान उम्र लंबी बोलो तनक चाय बना

21:04

दो तो दोनों स्वर्ण वर्ण के नित्यानंद

21:10

प्रभु में कुछ रक्त वर्ण सुवर्ण और रक्त

21:12

वर्ण का उल्लेख आता है लालिमा भी पितांबर

21:20

भी है और

21:21

अतुल कनक हेमांग गौरांग जैसे नित्यानंद

21:27

प्रभु भी है और कुछ लाली मां की भी छोटा

21:32

है उनके अंग में और यह दोनों संकीर्तन

21:38

नहीं कप इस तरह दोनों ने संकीर्तन आंदोलन

21:40

की की स्थापना की दोनों संगठित आंदोलन के

21:45

पिता रोकता है फ्रंट पार्ट और कम लायक हैं

21:51

और दोनों की व्याख्या कैसी है कमल कमल है

21:59

अरे भाई नंबर वन अनंतम अरविंद धत अरविंद

22:04

ललायत अक्षर अरविंद ललब कमल की पंखुड़ी

22:11

लेकिन कैसे आया था दो

22:17

कि जब खेल रही कमल की है कमल का पुष्प गुड

22:21

किल रहा है ब्लूमिंग लोटस केवल करने के

22:25

साथ का मामला आया था ऑप्शन कमला कमला कमला

22:34

और विश्वंभरो दोनों भी दोनों विश्वंभर है

22:42

में चैतन्य महाप्रभु का नाम ही नामाकरण

22:44

हुआ तुम का नाम ही दिया थिस फॉर्म भर

22:47

लेकिन है दोनों भी विश्वंभर है और रोजगार

22:51

हो और दोनों का भी

22:55

को श्रेष्ठ ब्राह्मण परिवार में जन्मी हुआ

22:59

और दोनों भी श्रेष्ठ ब्राम्हण है

23:03

कि गौ राजनीति आनंद विजय भैरव योग व

23:08

धर्मपाल ओं प्रयोग धार मा कलिका लें और

23:15

धर्मा नाम संकीर्तन

23:19

है इसका प्रचार-प्रसार करने किया दोनों ने

23:22

पालन किया धर्म की रक्षा की पालन किया

23:27

संकीर्तन नहीं कभी तरो वंदे जगत प्रिय करो

23:32

करुणावतार

23:34

है तो बंदे हम वंदना करते हैं आज के दिन

23:38

भी हम वंदना करते हैं मंदिर जगत प्रिय करो

23:43

और जगत प्रिय करने हेतु जो प्रकट हुए

23:49

मंदिर जगत प्रिय करो करुणावतार ऐसे दोनों

23:57

करुणा की मूर्ति है करुणा के सागर है

24:04

करुणा के अवतार करुणावतार ओ ओ

24:09

कि उनके वंदना करते हैं

24:12

मैं तो दोनों को अभिन्न बताया है

24:17

में चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु

24:20

को दूसरी प्रार्थना में है

24:26

के पंधे

24:28

कि नित्यानंद को संबोधित ओं चैतन्य

24:32

महाप्रभु नित्यानंद प्रभु के साथ प्रकट

24:35

हुए नित्यानंद शहर उदित व उदित व नवोदित

24:42

नित्यानंद को संबोधित ओं गौतम पुष्प बन तो

24:49

कहां प्रकट हुए गौड़ देश में प्रकट हुए

24:51

गौतम पुत्र पवन गौड़ देश में फैन उदित

24:58

उद्दिष्ट

25:00

कि बंगाल को गोद देश करें पञ्चगौड़ एक समय

25:05

भारत का विभाजन द्रविड़ और गौड़

25:10

पंचद्रविड़ थे दक्षिण भारत पंचद्रविड़ पर

25:15

उत्तर भारत पञ्चगौड़ बंगाल

25:22

का बैकग्राउंड ओडिशा उसका बांग्लादेश

25:27

प्रेजेंट बांग्लादेश

25:30

कि यह गौड़ गौड़ उदय पुश पवन तो तो गौड़

25:35

देश में उदित हो रहे हैं और सूर्योदय अवधि

25:39

उदय होता है तो दो उक्त दोनों का उदय हुआ

25:44

है सूर्य और चंद्रमा का उदय हुआ चंद्रोदय

25:49

मंदिर इस्कॉन मंदिर की स्थापना हुई तो

25:57

उसका नाम चंद्रोदय चंद्र का उदय हुआ चंद्र

26:03

पुत्र पवन तो तो एक चंद्र बने एक सूर्य

26:08

सूर्य और चंद्रमा का गौड़ का रुख 30 है

26:13

उसके ऊपर 30 से के पीछे यह ऊपर

26:18

है ऐसे सूर्य और चंद्र का उदय होता गौड़

26:21

का मुद्दा चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद

26:27

प्रभु प्रकट हुए थे

26:29

कि चित्र यह दोनों कैसे हैं बड़े चित्र

26:33

विचित्र है वंडरफुल Amazing अद्भुत चित्र

26:39

श्यामदेव और दोनों ने दिया क्या दिया

26:45

सोमवार को युक्तियुक्त छम छम छम हुआ था

26:52

चमचम शांति शांति शब्द शब्द की उत्पत्ति

26:59

स्वयं इस धातु समुद्रों 1969 में दिया

27:04

मतलब या प्रशांतिधाम मन को शांति

27:10

के विरुद्ध आगे शांति है तो फिर जीवन है

27:14

ना तो मरण ही है या मां शांति

27:19

में प्रवाह शाम दोनों तंबुओं अर्ज प्रकट

27:25

यह दोनों का प्राकट्य चेतन महत्वपूर्ण का

27:28

प्राकट्य किसलिए हुआ था मोहनजोदड़ों हिसार

27:32

के तमाम गुण आइटम अंधा अंधे और पुष्प पवन

27:37

तो एक सूर्य चंद्रमा के रूप में गांव में

27:42

प्रकट हुए ही सूर्य और चंद्रमा क्या करते

27:46

हैं तब उस अंधकार को मिटा अंधकार अंधकार

27:57

पर प्रकाश नहीं होने से अंधकार फैलता है

28:03

लेकिन प्रकाश होने पर भी एक प्रकार का

28:09

अधिकार तो बना ही रहता है और अंधकार होता

28:13

है ब्रह्मज्ञान दमदमा है

28:18

का अभियान जमता माह अज्ञान से उत्पन्न

28:24

अंधेरा तो दो प्रकार के अंधेरे हैं जगत

28:31

सूर्य का प्रभाव प्रकाश नहीं इसलिए दिखाई

28:35

नहीं दे रहा अंधे हैं हम अंधेरा है लेकिन

28:39

सूर्य उदित हुआ तो अंधेरा ही नष्ट-भ्रष्ट

28:44

आम लोगों की दृष्टि नष्ट हुई तब तक उनका

28:51

प्रभाव है

28:54

है इसी लिए बने हैं शुद्र तमोगुणी शूद्र

28:59

होते हैं

29:00

मैं हूं

29:03

है सवा दो

29:05

9th मोनू जाओ चलो नित्यानंद प्रकट होकर

29:10

है तमोगुण से उत्पन्न न जॉब अंधेरा है

29:15

उसका विनाश किया

29:18

कि वह अज्ञान तिमिरांधस्य ज्ञानांजन अकुशल

29:23

आख्यां तै

29:26

कि चक्षुदान दिल उजड़ी जन्म या इस जन्म

29:29

में प्रभु से अ

29:31

है तो यह नित्यानंद प्रभु प्रगट हो रहे

29:35

हैं और ब्रा कृष्णम वंदे जगत गुरुम बलराम

29:43

वन ढेर

29:45

कि जगत करो तो

29:48

कि वे दोनों में कृष्ण और बलराम में बलराम

29:52

बन जाते हैं गुरु तो वहीं बलराम नेता तो

29:57

नित्यानंद प्रभु प्रकट हुए हैं तो वह भी

30:00

बने हैं गुरु गुरु नित्यानंद प्रभु ही

30:07

बलराम आदि गुरु दुग्गड़ ने

30:13

[संगीत]

30:16

कि एक गॉड बलराम गढ़ लालगढ़ में

30:22

हैं तो एक गॉड क्या करते दूसरे गुट की

30:25

सेवा करते हैं

30:27

मैं बलराम यार नित्यानंद प्रभु जो हुआ गॉड

30:34

है लेकिन हो भूमिका निभाते हैं गुरु की

30:40

आधी गुरु की तो फिर कृष्ण की चैतन्य

30:43

महाप्रभु की सेवा करते इतने महाप्रभु के

30:47

सेवक बन जाते हैं और

30:52

मैं अपनी आश्चर्य प्रभु जगत सीखा है और

30:55

अपने आश्रम से सारे संसार को शिक्षा देते

31:00

हैं चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु

31:03

आदिगुरु

31:06

है और फिर

31:08

9th मोंठ उद्धव या राज

31:12

कि चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे

31:15

नमः

31:17

जो हमारी आंखें खोलते हैं दृष्टि देते हैं

31:22

हम

31:23

है तो कृष्ण बलराम जो प्रकट हुए तो पहले

31:31

पहले तरह का प्राकट्य था तब अल्लाह नेता

31:36

बलराम प्रकट हो रहे हैं नित्यानंद के रूप

31:39

में उनके प्राकट्य पहले और बाद में चैतन्य

31:45

महाप्रभु करते हैं

31:48

हैं तो एक अच्छा कर ग्राम में

31:51

ए प्राऊड देश में आज तक

31:55

आज के दिन आज का दिन

31:59

इस महान है

32:02

कि नित्यानंद प्रभु के लिए आज का दिन

32:04

रिजल्ट है हर साल जब यह दिन आता है तो

32:10

बलराम का प्रभाव इस इस दिन पर होता है या

32:18

32:20

कि हम प्रभावित होते हैं

32:24

मैं बलराम की जो प्रभाव है प्रभाव

32:29

कि भाड़ प्रकाश भी है मुझ से भास्कर भी

32:35

होता है भास्कर प्रकाश देने वाला भास्कर

32:40

कि आज

32:43

कि हम कोई प्रकाश मिल रहा है

32:47

है या प्रभाव उनके भाव का भी प्रभाव आज

32:54

अधीन प्रभावित होता है

32:58

कि आप कुछ विशेष अनुभव कर रहा है तू

33:03

थे जब अजान उपभोग कर रहे हो

33:06

है तो बलराम का ही प्रभाव है

33:10

हेलो हाय भल्लाल देव

33:14

कि सनी दयानंद प्रभु जी

33:17

एक बड़े भगवान है तो

33:21

और सुंदर तो होनी चाहिए बड़े सुंदर थे और

33:25

वे बालक थे

33:27

मेरे पस एक चक्कर ग्राम में जन्मे में

33:32

है लेकिन यह बालक सबसे अधिक सुंदर था

33:38

और समुद्री की खान था

33:41

अच्छा हमको तो जरूर पूछेगा भी नहीं है ना

33:45

का सौंदर्य होता क्या है

33:48

इस दिव्य शाम जारी है अलौकिक सौंदर्य है

33:53

कि मैं कुछ जगह थी अलग है सौंदर्य का

33:58

प्रकार ही अलग है ऐसे सौंदर्य को देखने की

34:05

दृष्टि भी अलग चक्षु भी अलग होने चाहिए

34:11

चर्म चक्षुओं से तो कुत्ते की कोई सौंदर्य

34:17

दिखाई देगा है

34:19

ए ब्यूटीफुल डॉग शो

34:24

मैं वीडियो फुल गॉड के बजाय बेटी चार डॉग

34:29

सब कुछ लोग मदद डॉग में जो समझदारी दिखाई

34:32

देता है

34:33

में मदद चर्म चक्षु से

34:37

को देखते हैं तब ब्यूटी इज ना आए जब भी

34:41

होल्डर भी कहते है

34:44

थे ब्यूटी तो मैसेज देखने वाले की आंखों

34:47

में न

34:49

को होती है हम तो हर एक हरेक व्यक्ति या

34:53

उन सारे लोग उस जिस प्रकार का चश्मा पहने

34:58

हुए हैं उस चश्मे से फिर संसारिक समय

35:02

दिखाई पड़ता है उसकी वाट है

35:08

ए मास्टरपीस अब ड्यूटी नंबर प्यार भरे

35:11

संसार में जो भी जीव वह रिहा हो

35:19

का सौंदर्य है

35:22

को अगेन

35:24

कि नित्यानंद प्रभु का शानदार यादव अल्लाह

35:28

तौफीक दे

35:30

का सौंदर्य दिव्या सावधानियां अ

35:34

हैं तो सौंदर्य से भी सभी आकृष्ट है और एक

35:38

बचाकर राम मैं

35:40

कि एक रोज एक चक्र की माताएं अपने अपने

35:44

पुत्रों से उनका स्नेह था ही लेकिन उनसे

35:47

भी अधिक प्रेम उनका

35:50

कि नित्यानंद प्रभु से ना जाने क्यों पता

35:54

नहीं क्यों हम इस बालक में हुआ था वह कौन

35:59

है यह सब आकृष्ट होते हैं

36:04

कि इस नित्यानंद नामक अ

36:07

एक बालक से

36:09

ये सभी माताएं चाहते कि उसको भी गोद में

36:12

लेकर बैठे और बिठाते भी नियुक्तियां रंग

36:19

को

36:20

कि यह बालक जब चलता है तो कई अन्य अध्ययन

36:26

करते करते करते पीछा करते दर्शन झाले

36:33

का पान करते सभी मोहित है

36:38

कि नित्यानंद प्रभु के सौंदर्य से और

36:41

व्यवहार से शरीर हर बात से यह

36:47

सर्वोत्कृष्ट हालत

36:51

कि उसे एक चक्र ग्राम का धन की इस फिल्म

36:55

बाल लीलाओं में

36:57

मैं तेरे मां-बाप होगा इंजमाम ने

36:59

चंद्रगुप्त जब छोटे थे तो

37:02

हैं पालक फैन

37:04

है कि जब भी वर्णन आया है इसमें अधिकतर

37:07

रहा मैंने कई सारी ईएस वृंदावन कृष्ण की

37:14

कि लीलाओं का मंचन किया आ

37:18

को उनकी नाट्य मंडली थी और नित्यानंद

37:22

प्रभु उस नाटक एक दिग्दर्शक किया

37:26

डायरेक्टर या दो

37:29

ए स्टोरी राइटर

37:32

कि हर रोज और सब समय कोई न कोई अपने

37:37

मित्रों को एकत्रित करते हुए

37:42

है और मित्र तो कोई क्रिकेट खेल क्रिकेट

37:45

खेल रहा है कोई कबड्डी कबड्डी कबड्डी कर

37:48

रहा है जैसे कर होता है लेकिन

37:51

कि नित्यानंद प्रभु के मित्र तब एकत्रित

37:54

होते तो उनका अधिकतर समय वृंदावन की लीला

37:59

का मंचन करने में उनका समय बीत जाता है

38:04

कि कृष्णा के प्राकट्य पहले से ही शुरुआत

38:07

करते कैसे पृथ्वी गई गौ माता

38:12

कि बनकर देवताओं के पास छोड़ दो

38:16

कि देवतागण ब्रह्मा के पास ब्रह्मा गैस

38:21

स्विच तस्वीर में विराजमान

38:24

को शुरू अध्यक्ष विष्णु के पास और सारी

38:29

समस्याए कैसी सुनाए मैं परेशान हूं

38:32

धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत धर्म की ग्लानि

38:39

हुई है प्रभु पृथ्वी पर त्यौहार भवति तदा

38:46

आत्मानं अंतर प्रकट होते हो तो प्रभुओं का

38:51

प्रभु ने कैसे कहा था ऐसा नाटक नाटक में

38:55

दिखाता सिर्फ कृष्ण प्रकट होते पकड़ रहा

39:00

हो शुरुआत की फिर नेक्स्ट

39:06

में कृष्ण जन्म का

39:08

कि उन्होंने लीला का मंचन किया

39:11

में वसूले गए कृष्ण को रात और रात क्षेत्र

39:15

को खुल मैं

39:18

है तो वहां के निवासी एक चक्र ग्राम के

39:22

निवासी इन बच्चों के इन खेल-खेल में एन

39:26

कठघरा हुआ खत्म फिर किसी अपने मित्र को

39:33

बनाते उड़ ना बन जाओ

39:35

[संगीत]

39:40

है तो फिर फिर नित्यानंद प्रभु पूतना को

39:44

गोद में लेते हैं और कृष्ण बने हैं अनअदर

39:48

बहुत लुट-लुट लेती नित्यानंद प्रभु

39:58

स्तनपान है

40:00

ए नाटक हो रहा है वहां तो जहर पीते पीते

40:05

उसके साथ

40:08

है तथा करें दुग्धपान के साथ जान ही पी

40:13

लेते और फिर और उनका जो मित्र बना था मर

40:17

गई रे मर गया तो हर रोज कुछ अलग अलग

40:24

हिस्सों को सब्सक्राइब

40:31

कि कल खेल

40:33

कि चलते थे उनके अ

40:36

कि वृंदावन के सहारे मधुर लीलाओं का अ

40:41

में पंक्चर लें यह बाल लीला मैं ही खेल

40:44

चलते थे नित्यानंद प्रभु और उनके मित्रों

40:49

के अ

40:50

है तो कृष्ण लीला के साथ फिर रामलीला का

40:53

भी उन्होंने खेल लिया रामलीला का मंचन

41:00

शुरू किया है

41:02

कि चौके भी अलग-अलग खेल खेलने होते रहते

41:05

हैं

41:06

कि केवल राम लीला समय नहीं हो राम सब कुछ

41:11

दिन के लिए रामलीला और रावण के वध के पहले

41:16

हर रोज एक होता है उस समय उनका तो हर दिन

41:19

चलता था कि इलाज चल रही है

41:23

हैं तो एक दिन राम के अलग-अलग लीलाओं का

41:26

खेल लिया मंचन

41:29

की होते-होते कि लंका मैं युद्ध कांड की

41:35

ली

41:36

याद दिला आए हो रही है

41:39

है तो उस दिन की जो लीला होनी थी सारे

41:44

एक्टर्स को बुलाया नित्यानंद पर बैठो बैठो

41:47

आज आज कौन सा खेल होगा तब सबको समझाया है

41:52

है और कहा कि आज मैं लक्ष्मण बनूंगा ओके

41:58

और नक्षत्रों तुम बनो तुम बनो तुम बनो तुम

42:02

हनुमान ऐसा सबको बता दिया और सबके पास है

42:09

और बताएं क्या क्या वचन कहना है दर्द की

42:15

स्क्रिप्ट

42:17

है अरे बताया था कि या फिर जब रावण मुझे

42:22

धमकाएगा और मेरे पास कोई विशेष अंतर है

42:29

को फेंक देगा तो फिर मैं मर जाऊंगा मरते

42:32

हुए हो जाऊंगा तो आप मित्र क्या करना मुझे

42:36

गोद में लेकर और रोना आ आ

42:41

है और फिर हनुमान को भेज देना हनुमान

42:45

कि तुम जाओ पहाड़ लेकर आना

42:49

कि पिछड़ेगा पहाड़ पर औषधि खोजेगा हनुमान

42:55

को पता नहीं चलेगा कौन से औषधि है ओके तो

42:58

नाटक शुरु हो गया है

43:01

है तो वाह क्या रावण बने थे उन्होंने

43:03

हमारे पास कई कक्ष मान लो

43:07

आप क्या समझते हो

43:10

कि हमारे पास विशेष अश्लाघ्य शीला है इस

43:16

तरह से फूल को फेंक दिया तो उसे के साथ

43:23

नित्यानंद प्रभु बेहोश हो गए और नित्यानंद

43:28

पर लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे थे तो फिर

43:33

सभी रोना भी प्रारंभ किए उनको अ

43:41

थे और लक्ष्मण जाओ नित्यानंद प्रभु थे

43:46

उनकी उनकी उपस्थिति हुई है समाचार सर्वत्र

43:50

फैल गया लड़ाई पंडित और पद्मावती भी वहां

43:54

पहुंच गए थे

43:56

कि अ

43:57

है और बच्चों को रोते हुए देखे तो वह भी

44:00

रोने लगे और बड़े चिंतित और बहुत समय बीत

44:03

गया तो बेहोश अवस्था में ही रहे न रहे हैं

44:08

तो ढूंढ रहे हैं

44:10

कि नित्यानंद प्रभु

44:13

कि सभी जब चिंतित थे तो अब इस स्थिति से

44:17

उनको पुनागर बाई अज्ञान की स्थिति में

44:20

लाना है तो बताया तो था आप क्या करना है

44:24

नेक्स्ट लेकिन सचमुच ही वह बेहोश हो गए तो

44:30

भूल गया क्या करना है घृणा हो लेकिन तो

44:42

सचमुच की कोशिश की

44:45

9th नित्यानंद प्रभु जो बलराम होल नेता आए

44:50

तो व्यापारियों में तो बलराम मेहता किंतु

44:55

रहता योग में पर लक्ष्मण है तो यहां जो

44:58

नित्यानंद प्रभु की भूमिका निभा रहे थे वे

45:03

साक्षात लक्ष्मण ने

45:05

है तो लक्ष्मण तो यह नाटक नहीं था बिल

45:09

नित्यानंद प्रभु के नाटक नहीं रहा वह

45:13

प्रेत आयोग में पहुंच गए ले लंका में

45:16

पहुंच गए और उस लीला में उन्होंने प्रवेश

45:19

किया और बेहोश होकर बेहोश ही रहे राधे की

45:25

लीला जब सचमुच होगी हनुमान जाएंगे और हम

45:31

पहाड़ लाएंगे फिर औषधि उन्होंने कहा था

45:34

मेरे रोशनी को मेरे नाम से मैं जो सॉन्ग

45:38

लूंगा जड़ी-बूटी को तो फिर मैं जाऊंगा तो

45:45

नित्यानंद प्रभु जो अब

45:49

के लक्ष्मण के भाव में आवेश में पा

45:56

कि ग्रेड है प्रयास हो गए थे

45:59

है तो मित्रों को पता नहीं चल वह भूल गया

46:01

नाटक निषेध एंड रामायण मोड यह नाटक तो

46:07

नहीं तो सचमुच हो तो वह भूल गए थे तो फिर

46:14

सब्सक्राइब करना चाहिए हुआ क्या कर सकते

46:18

हैं

46:19

कुछ तो होगा फिर याद आए उन्होंने कहा था

46:22

नित्यानंद प्रभु ने कहा था कि मैं जब एक

46:25

घोष का या

46:27

का रोना भी लगे नंबर भी तो कुछ करना था तो

46:32

क्या करना था तो हनुमान का रोग जो करना था

46:37

है तो हनुमान को भेजें थोड़ी देर में

46:40

हनुमान आगया आगया रहेगा पहाड़ को लेकर आया

46:45

हूं

46:45

कि अगर रख दिया अलंकार है

46:49

है तो फिर एक रुचिक कोई नाम है

46:54

हां हां संजीवनी बूटी का नाम संजीव है

46:58

लेकिन 196 यह के एक डॉक्टर थे हुसैन नामक

47:05

कि वे चढ़े और उन्होंने जो हो यह न मानी

47:10

लेकर आते लेकिन नॉलेज 19 आप देखा तो उनमें

47:13

से कौन सी है

47:15

के अवशेष दी है कौन सी जड़ी बूटी का माय

47:18

उनका पता नहीं चल रहा है तो इसलिए उन्हें

47:20

पार्ट कोटा खिलाया मैं थोड़ी जड़ी-बूटी

47:23

पड़ी जेब में रखे

47:25

के हाथ में बुर्के के रूप में लाख लेकर

47:28

आता है कि महिला या जड़ी बूटी पी गए

47:31

हनुमान पता नहीं लगा पाए थे इसलिए पहाड़

47:34

तोड़ लाएं तो उसे ने फिर जड़ी बूटी लाई और

47:39

तो हुसैन भी एक पात्र था उसमें था से

47:42

जुड़े पहाड़ पर थोड़ी देर में मुसहरी बूटी

47:47

कब ले आए और नासिका के समक्ष पकड़े तो हां

47:53

कर दो

47:55

इस तरह नित्यानंद सौभाग्य हम सभी प्रसन्न

47:58

हुए

48:00

है अरे वाव

48:04

हैं तो इस प्रकार

48:08

है कि लीलाओं का ही है

48:10

की बाल लीलाओं का वर्णन है नित्यानंद

48:13

प्रभु के अ

48:15

कि एक रचाकर ग्राम में जो अ

48:18

याद दिलाएं

48:20

कि नित्यानंद प्रभु जब 12 साल के थे 12

48:23

साल की उम्र के हैं तो उनके घर में

48:28

एक टेक्स परिव्राजकाचार्य मिक्स

48:33

साधु-महात्मा आ जाये

48:36

आ रहे और खूब सेवा की

48:41

कि पढ़ाई पंडित हिसार पद्मावती नहीं होंगे

48:43

इस

48:45

क्या हुआ और क्या हम कर सकते हैं पद्मावती

48:48

और राज पंडित कह रहा है हम आपको क्या

48:52

सहायता कर सकते हैं

48:55

हूं क्या दे सकते आपको तो इस

49:00

एक साधु ने कहा कि और तो कुछ नहीं है बस

49:03

आप के पुत्र को देख सकते हो

49:10

है कि ज्यादा धंधाला तो नहीं मांगूंगा मैं

49:12

पुत्र को दे दो

49:16

मैं चढ़ाई पंडित ने वचन दिया था आप जो भी

49:19

मांगोगे आप जो कहोगे वही मैं दे दूंगा अब

49:25

उन्होंने पुत्र को ही मांगा तो विवश है

49:31

कि भजन बंध है

49:34

कुछ तो दे दिए

49:38

कि विद्यानंद प्रभु को ऑफ

49:41

कि चतुर अधि

49:43

का हिस्सा देव नित्यानंद प्रभु को लेकर

49:47

वहां से जड़ से प्रस्थान किए तो जब

49:50

धीरे-धीरे पता चला दो

49:53

2014 ग्राम में कि ऐसे-ऐसे साधु बाबा आए

49:58

थे और वह नित्यानंद प्रभु को

50:01

के साथ में ले गए तो फिर हम कल्पना ही कर

50:05

सकते हैं जो बालक सभी की आंखों का तारा था

50:12

सेंट्र ऑप्शन जो रहा हूं

50:19

है और फिर लड़ाई पंडित और पद्मावती का तो

50:24

क्या कहना फिर जब नित्यानंद वहां से

50:27

प्रस्थान करने के बाद वैसे ही

50:32

कि इस बालक की कुंडली वगैरह भी देखी थी

50:37

है और तब पता चला

50:40

कि यह बालक साधारण नहीं था यह वाला तो

50:44

साक्षात भगवान बलराम मेह

50:48

थे लेकिन अब तो चिड़िया चुग गई खेत में

50:53

हाथ से निकल गया था गांव से निकाल दिया था

50:58

को खोज रहे थे लेकिन नहीं मिले

51:02

है न कि साधु बाबा में लेना दोस्तों

51:05

नित्यानंद मिले

51:08

9th बिरहा की व्यथा मैं रुपिया

51:13

कि जब कृष्ण-बलराम गए वृंदावन से मथुरा

51:18

है तो यहां

51:20

कि यह है बलराम जहां जन्म अव्वल ही है

51:24

वृंदावन है तो यह वृंदावन से है

51:31

कि अवधी आनंद प्रभु ने अ

51:34

मैं बलराम मोह लेता है प्रस्थान किए तो इस

51:38

ग्राम के वासियों की स्थिति वैसी ही युद्ध

51:42

जैसी इन गोपियों की हुई थी अ

51:44

है 3 महीने लड़ाई पंडित और पद्मावती ने

51:49

भोजन न तो भोजन किया ना तो जल ग्रहण किया

51:52

है

51:53

180 दिमाग नमः नैनीताल नैनीताल नैनीताल का

52:00

टैब कहां होनी ताहिनी ताहिर तथा त्यौहार

52:08

है तो बलराम हो विनीता है अ

52:12

है तो बलराम ही तो बने था नित्यानंद प्रभु

52:14

बने थे नित्यानंद प्रभु तो अब बलराम ने दी

52:19

से भ्रमण किया था तीर्थ यात्रा की थी

52:22

बलराम ने अ

52:24

मैं आपको क्या करूं यह बलराम है तो बलराम

52:26

ने तीर्थ यात्रा की थी कि नित्यानंद

52:29

शिरोमणि तीर्थयात्रा कि अगर की होगी तो

52:33

फिर हम मानेंगे कि फोन मे है बलराम से

52:39

है इसका सबूत है आ नित्यानंद प्रभु भी

52:43

यात्रा की है सारे भारत की यात्रा

52:46

उन्होंने है

52:48

कि इस साथियों के साथ स्वागत किया फिर

52:51

असिस्ट कर रहे थे इस

52:53

की साधना कर रहे थे सत्संग कर रहे थे

52:56

दर्शन कर रहे थे अलग-अलग धर्मों में

53:01

है तो

53:04

है तो इसका भी वर्णन है कई सारे धर्मों का

53:07

नाम इसका आप उसका कई सारे धाम

53:12

कि अ जितने सारे धाम है या बलराम

53:15

जहां-जहां गए थे वहां वाह नित्यानंद प्रभु

53:19

भी गए थे

53:21

कि अयोध्या भी गए और अयोध्या में है

53:26

का विद्रोह भी रहे थे वर्णन है त्रिवेणी

53:30

संगम भी गया वापिस नान भी किए और

53:34

की सारी दक्षिण भारत

53:38

कि यात्रा उन्होंने की

53:41

कि परशुराम से मिले परशुराम

53:46

मैं अखिल भारतवर्ष में आज भी रहते हैं

53:49

कि श्रीलंका एवं

53:52

जी हां

53:54

कि श्रीसैलम

53:56

कि भारत है

53:58

है अरे पहाड़ जा परशुराम उनको मिले कन्या

54:03

तुम्हारी गए शिव-पार्वती को मिले और शिव

54:07

पार्वती ने खूब आराधना की है नित्यानंद

54:11

प्रभु की भोजन खिलाया है

54:15

कि पंढरपुर गए थे

54:18

श्री राम की दीक्षा हुई है इसके पहले

54:21

माधवेंद्रपुरी से मिले थे दक्षिण भारत में

54:24

बहुत समय बिताया सात दिन माधवेंद्रपुरी के

54:28

सॉन्ग में रहे साधु ओं थे को भी और

54:32

नित्यानंद प्रभु भी अ

54:35

एक बड़े प्रभावित है

54:37

कि माधवेंद्र पुरी के संग से

54:41

माधवेंद्रपुरी एक विशिष्ट

54:45

तो अच्छा रहता है भगत है माधुर्य leela1

54:50

के माधुर्य का आस्वादन

54:53

थे जिन्होंने किया जिनसे फीयर

54:59

हां यार गौड़ीय वैष्णव इस जन्म

55:04

कि के प्रवर्तक अगर कोई है

55:08

मैं तो यह मानता भी माधवेंद्रपुरी

55:13

कि उनको सानिध्य उनका सानिध्य

55:15

माधवेंद्रपुरी को प्राप्त हुआ था से

55:18

पंडरपुरा आए

55:20

मैं अंकित दीक्षा हुई

55:23

कि इन से दीक्षा भी

55:25

कि क्या कमल

55:27

कि लक्ष्मी पति उसके भी बलराम ने जो

55:32

आदिगुरु है उन्होंने दीक्षा ली है

55:35

के पंढरपुर में है

55:38

कि लक्ष्मी पति को कहा है कल कोई आ रहा है

55:42

[संगीत]

55:44

हैं यस प्रात काल को जिसको मिला हो गए तो

55:47

पहले व्यक्ति को उसको दिशा देना है

55:53

इस प्रकार की व्यवस्था तो नेक्स्ट डे ई

55:57

कि विद्यानंद हुआ है

56:00

है और लक्ष्मी पति

56:03

कि मैं

56:04

की दुकान में मंत्र कहा

56:09

है और दिशा समारोह इसी प्रकार संपन्न हुआ

56:16

कि अधीक्षक होने के बाद फिर पुणे यह कि

56:20

भगवान अब बलराम के रूप में प्रकट होते हैं

56:24

तुमने जिस व्यक्ति को

56:28

[संगीत]

56:29

थे फिफ्थ लक्ष्मीपति काम मैंने भगवान को

56:33

दिशा दी है कि हो सकता है ऐसा क्यों कार्य

56:36

करवाया मुझे पहले कहा कि जो भी मिलता है

56:39

कल आपके पास आता है उसको दिखे यादव मुझे

56:42

पता पहले होता तो यह वाला आर्म होल नेता

56:47

तो मैं दिशा नहीं देता मई दिशा लेता है

56:55

कि ऐसा क्यों कार्य करवाया अब वह यह

56:59

नित्यानंद प्रभु इतने में आ

57:02

को मार रहे हो

57:04

आ रहे भंडारपुर में दीक्षा अभी लिए और

57:09

कि वहां से प्रस्थान भी की है तो इस

57:12

प्रकार यात्रा करते-करते नित्यानंद प्रभु

57:15

वृंदावन धाम गिद्धौर उनका अपना निजी धाम

57:21

है

57:23

कि तुम आप बलराम भाव में कृष्णा भाव में

57:27

कि आवेश में वह आते

57:32

कि यह कभी नित्यानंद प्रभु के रूप में

57:34

भक्ता वक्त भक्त स्वरूप भक्तों स्वरूप बने

57:39

हैं बलराम बने हैं नित्यानंद भक्त स्वरूप

57:43

तब वह कहां है कृष्ण कहा है कृष्णा

57:48

श्रंगार व नामक स्थान वाह लौटने लगे वहां

57:52

के धूले में कहा है कृष्णा हरे कृष्णा

57:55

कहां कब मिलेंगे कृष्णा राधे कृष्णा

57:59

की हीरोइन का वहां पता चलता है कि यहां

58:02

कृष्ण तो प्रकट हुए कहां है मेरा तन्हा एक

58:05

अरे कहां है मेरा प्रणाम

58:09

मैं तुम्हारा कन्हाई कान्हा तो प्रकट हो

58:12

चुका है इस अवधि में है

58:16

के पीछे समाचार राधा कुंड के तट पर

58:20

को मिलता है उनको तो वहां से प्रस्थान

58:23

करते हैं

58:25

कि नित्यानंद प्रभु नवदीप के लिए अ

58:29

कि नवोदय जब

58:32

में स्थित यंत्र बनाते हैं तो चैतन्य

58:35

महाप्रभु ले जाओ खो जाओ बने हरिदास हरिदास

58:39

ठाकुर को ज्यादा रखो जो एक विशेष व्यक्ति

58:44

का प्रवेश हुआ है नवदीप मैं है

58:48

कि नित्यानंद प्रभु आए अवधि में जाओ खोजो

58:52

तो यह दो प्रभु तो खोजते रहे खोज से रह-रह

58:57

नव-नव घंटे बिताए उन्होंने नवोदित 9 घंटे

59:02

भ्रमण करते रहे लेकिन

59:06

कि निमाई का पता नहीं चला जब मैंने यहां

59:10

पर खूब खोज ढूंढा नहीं मिले तो फिर अ

59:16

कि इतने महापुरुषों के चलो मैं खोजता हूं

59:19

आप मेरे साथ हैं

59:21

है तो उसे इतने महाप्रभु है

59:24

है आगे आगे जा रहे थे और अन्य भत्तों के

59:27

पीछे आ रहे थे तो वह अ

59:31

में प्रसिद्ध है

59:34

का व्यय क्या घर का नाम

59:38

कि नंदन आचार्य इसका उनका जहां

59:42

में इस्कान मंदिर से कुछ ही दूरी पर नंदन

59:46

आचार्य का घर

59:49

कि वह नित्यानंद प्रभु के रहे थे अच्छी

59:52

पैठ है तो चैतन्य महाप्रभु सीधे नंदन

59:57

आचार्य

59:59

कि घर की ओर गए घर में प्रवेश किया

60:02

नित्यानंद प्रभु के साथ

60:05

है कि शायद बलराम के साथ पहला अ

60:10

का मिलन हुआ

60:13

है तो वह अद्भुत मिलन रहा

60:17

है और दूसरों का गाढ़ आलिंगन या ह्यूमन का

60:21

रोमांचित हो ना और

60:24

एक बार लूटना और

60:27

कि ने अद्वितीय

60:30

का वर्णन है

60:31

कि उनके मिलन का तो यह

60:37

है तो चैतन्य महाप्रभु नवोदित में प्रकट

60:40

हुए थे है मायापुर में

60:43

है और एक चक्कर ग्राम में

60:46

का प्राकट्य नित्यानंद प्रभु का भी

60:48

निस्तारण फिर सारे भारतवर्ष का भ्रमण करते

60:51

हुए वृंदावन होते हुए भी नवदीप आए हैं और

60:55

पहली बार इन दोनों का आ

60:59

ए नवोदियन यार नंदना चार घर पर मिलन होता

61:03

है

61:04

मैं तुझे इतने महान होंगे कुछ बीच एक साल

61:07

के होंगे वापिस बहुत अधिक लगाते हैं

61:12

के हिसाब से हो तो अब जो दोनों साथ में

61:17

झुके तो साथ में

61:20

तो फिर रहे और रहेंगे अधिकतर

61:26

है और आप संकीर्तन नहीं का वितरण होगा

61:29

दोनों मिलकर क्या करेंगे संकीर्तन करेंगे

61:32

संकीर्तन आंदोलन की स्थापना करेंगे तो

61:37

श्रीवास आंगन में

61:40

आज शिवानी ठाकुर के घर में

61:43

का संकीर्तन प्रारंभ हुआ है

61:46

हैं तो जहां चैतन्य महाप्रभु नित्यानंद

61:50

प्रभु अनन्य भक्तों के साथ और केवल शुद्ध

61:54

भक्तों के साथ कीर्तन किया करते थे

61:59

है और उसी पैन में चैतन्य महाप्रभु भी मैं

62:04

तो फौरन नटराज है

62:07

है लेकिन नित्यानंद प्रभु भी अपने अपने

62:10

नृत्य के लिए प्रसिद्ध है

62:12

है या जहां नित्यानंद प्रभु नृत्य करते तो

62:19

वहां यह इतने महापौर व प्रकट हो जाते हैं

62:23

कि प्याज नित्यानंद प्रभु का नृत्य ताव

62:26

फिर चैतन्य महाप्रभु का बहाव प्राकट्य

62:28

होता है चेतन ने महापुरुष नित्यानंद प्रभु

62:32

के लिए

62:34

का कीर्तन और नृत्य से नाट्य आकृष्ट होता

62:38

है और स्वयं प्रकट होते हैं

62:45

है तो वह दिलवा रोना पूरा भागे जजमानी

62:49

गौरा मनी जागे भगत समूह लइया साथी मेहलन

62:55

अगर अपराजेय सारे नवोदित भर में उनके एक अ

63:01

है बांग्ला सोंग मैंने लगाए अलावा मेरा

63:05

छोटा सा

63:10

कि अवधी तवा है

63:14

के प्रधान रखेंगे

63:19

है तो यह नित्यानंद ने 537

63:23

को लगाएंगे तो नहीं लेकिन यह नित्यानंद

63:27

प्रभु का नींद आएगी पौधों का मामला कोटि

63:31

चंद्र और शुक्र शीतला हेयर छाया जगत जुड़ा

63:43

है

63:46

ए ए प्यून आइज जगत जुड़ा सवाल नित्यानंद

63:54

चुका है

63:56

कि पापा और है नित्यानंद प्रभुपाद अकरम

63:59

आला नेता विपदाओं का मामला कोटि चंद्र

64:03

शीतल है

64:07

कि नित्यानंद प्रभु के चरण कमल कैसे कोटि

64:12

चंद्र कोटि चंद्र कि जिस अश्लीलता है उतनी

64:17

शीतलता प्रदान करने वाले हैं नित्यानंद

64:21

प्रभु के चरण कमल जैन अनिता यादव इन

64:26

भाइयों राधा कृष्णा पीते इतना नित्यानंद

64:33

प्रभु के बिना गुरु है गुरु है राधाकृष्णन

64:39

पानी देना है

64:41

कि राधा कृष्ण की प्राप्ति नहीं होगी

64:44

नित्यानंद प्रभु के बिना इसीलिए क्या

64:48

करोड़ नौकरी धर्म नीता थाइरॉएड इसलिए ऊ

64:54

की जड़ करी थी

64:57

कि पकड़े रहो दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के

65:01

साथ नित्यानंद प्रभु के चरण कमल

65:05

है जैसा मंदिर नहीं जा वार व्रत कथा जन्म

65:09

गेलौं ताण जिसका संबंध नित्यानंद प्रभु से

65:14

नहीं है नित्यानंद प्रभु के चरणों का

65:17

आश्रय जिनको प्राप्त नहीं है उनका जन्म

65:21

व्यथा के लोगों को

65:24

हेलो व्यूअर्स है

65:27

को व्यर्थ है कि नहीं है सही पशु बड़ा

65:30

दुराचार और कैसा है पशु है दुराचारी पशु

65:39

है

65:40

यहां पर प्रसिद्ध सोच सुविचार होता ही

65:43

नहीं है

65:45

कि अगर नहीं स्मरण दिलाया है

65:48

कि पशु

65:53

कि नीता हिना बल लीला मुखेड़ मंजिल संसार

65:58

सूखे यह जो व्यक्ति अपने मुख से फिर

66:03

अंतरंग में भी नित्यानंद प्रभु का नाम

66:07

नहीं लेता है

66:10

कि विद्या नित्यानंद स्वामी नित्यानंद

66:13

स्वामी नित्यानंद स्वामी नित्यानंद सर

66:16

विदाई विधायक डा

66:22

का नाम नहीं लेता बलि ले मुखेड जिला

66:25

समाचार अशोक के तो उसको उसके संसार

66:30

कि मैं सुख खोजने की वृद्धि बढ़ेगी मजिलस

66:35

अनुसार रसूख है या वह मगना होगा तल्लीन

66:39

रहेगा का यह संसार सुख में

66:44

कि यह सांसारिक सुख प्राप्त करने की

66:46

अधिकारी की इच्छा बढ़ेगी उसकी पापाचारी

66:50

व्यभिचारी भ्रष्टाचारी अनाचारी

66:54

इस संसार में भ्रष्टाचार बढ़ चुका है

66:57

अन्ना एंड कंपनी अन्ना टीम कुछ कर रही है

67:02

उनको पता नहीं है जब तक और नित्यानंद का

67:06

नाम नहीं लेंगे है

67:11

है तब तक भ्रष्टाचार हटना नहीं है

67:15

और कब्रिस्तान 4 को हटाने वाली तो यह टीम

67:18

यहां बैठी है यह टीम हटाएंगे और

67:23

कि भ्रष्टाचार को अनाचार को दो

67:27

और अहंकारी मत हो भैया नेता यह पद्धति पास

67:32

हरियाणा नक्षत्र और सत्य कर ईंधन तो यह सब

67:43

कि अधोगति होगी अहंकार हिम्मत भैया अ

67:49

कि तीरा उनका अहंकार अंकारी में बनेंगे

67:55

है और आशा 13 सत्य करिश्मा ने असत्य को यह

67:58

क्या पाएंगे इस सत्य है

68:01

कि यह संसार में सब बाहर असत्य हो तो उसी

68:06

को फिर सत्य कहते हैं

68:09

के अनुसार सत्य कोई विरोध भी नहीं करता तो

68:13

असत्य ही

68:15

और सत्य के रूप में प्रकाशित होता है

68:20

और दूसरा कोई सुनने में आता ही नहीं है

68:25

हां तो फिर

68:27

कि असद 13 सत्य कर इमानी असत्य कोई

68:34

कि हम देश बॉडी एंड थिस बॉडी में यह शरीर

68:36

हमारे शरीर हम यह क्या है असत्य है लेकिन

68:41

इसी को तो मीन आवेश ऐसा कोई नहीं कहता

68:47

नाटक करते हैं तो मींस अ

68:52

यह तो बड़ा असत्य तो क्या है यह शरीर को

68:57

कि एक बड़ा सत्य बड़ा अ सत्य-असत्य का

69:01

आधार क्या है यह शरीर है इस असत्य शरीर को

69:07

ही सत्य करिश्मा ने असत्य के रूप में

69:12

स्वीकारा है

69:14

कि नीता एरर करुणा हवेची फॉर ब्रज की राधा

69:19

कृष्णा भाई जी को

69:23

है तो इंसान जाता है कि करुणासागर होगी तो

69:27

क्या होगा आ वृद्ध ब्राह्मण महिला वृंदावन

69:30

के राधा-कृष्ण की प्राप्ति होगी

69:35

और सुनाओ

69:36

है इधर अनीता अहिरवार चरणोदक खानी है

69:43

के लिए

69:45

कि नित्यानंद प्रभु के चरणों का आश्रय लो

69:49

नींद आए रोज चरण सत्य ताहरा सेवक नित्य

69:57

निदान अध्यक्ष रॉन नित्यानंद प्रभु के चरण

70:06

क्या है सत्य है

70:09

यहां पर कोई सत्य है तो क्या सत्य है

70:13

नित्यानंद प्रभु के चरण सत्यानंद

70:16

त्यौहारों के चरण सत्य है और ऐसे सत्य को

70:21

स्वीकार करने वाला उनका सेवक भी सत्य है

70:25

और नित्य भी सत्य है नित्य है

70:30

है इसीलिए उन चरणों की आशा है

70:35

है बस

70:37

आ रही है आशा नरोत्तम बड़ा दुखी नीता

70:43

थीमों रखकर सुखी राख रंग चरण रोप आशाओं को

70:54

हां सोना रोहतम

70:56

आप कह रहे हैं हम बड़े दुखी है

71:01

में ही नित्यानंद त्याग करो मुझे सुखी करो

71:05

और अपने चरणों के पास चरणों का आश्रम है

71:11

में रखो

71:13

कि इस प्रकार नित्यानंद स्टार निष्ठा नामक

71:18

दो

71:19

की प्रार्थना प्रार्थना है नरोत्तम दास

71:22

ठाकुर की प्रार्थना नित्यानंद प्रभु के अ

71:27

कि चरणो मैन अ

71:30

है और हम सभी की भी प्रार्थना है आज के

71:35

इन थिस

71:36

का परम पवित्र और

71:39

कि नित्यानंद त्रयोदशी के उपलक्ष्य में है

71:43

है तो संकीर्तन अ

71:46

कि यह दैन दौड़ नित्यानंद की है

71:51

का संगीत नहीं कभी तरह हो और उसमें भी

71:56

कि अ

71:58

9th ने संकीर्तन साथ में किया है नवद्वीप

72:02

मायापुर में में

72:04

थे रीडर ने आप भूल जाते हैं

72:08

कि जगन्नाथ पुरी है

72:11

को चेतावनी महापुरुष या दक्षिण भारत की

72:14

यात्रा की ढहाए रहे जगन्नाथपुरी में

72:18

मैं इतना रन प्रभु

72:21

है जो सदैव एक्शन

72:23

में चैतन्य महाप्रभु का सानिध्य चाहत है

72:29

कि वह भी जाते हैं

72:31

कि जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के समय जाता है

72:34

कि सारे भक्तों को साथ में लेकर जाते हैं

72:40

कि अलग-अलग स्थान के भक्त हैं

72:43

में भक्तों को लेकर नित्यानंद शुरूवात हुई

72:47

चार यह चैतन्य महाप्रभु के दर्शन सा ने

72:51

दिलाई कर्नाटक को

72:55

सोनू निगम का आना-जाना हुआ करता था चैतन्य

72:59

महाप्रभु उनको भूल जाओ जाओ कब से यह हो

73:05

जाओ तुम

73:07

के प्रचार में जाओ

73:10

में रहता है महाप्रभु ने हमको

73:13

का प्रचार करने के लिए नियुक्त किया था

73:17

कि प्योर प्रचार करो यह हरिदास

73:21

और सुनाओ जाओ पे नित्यानंद सुनो प्रति

73:26

घिरेगी हर घर में जाओ तो बस अब कहां हो

73:31

बोलो कृष्णा वो हे कृष्णा कृष्णा शिक्षा

73:36

चैतन्य महाप्रभु यादव नित्यानंद प्रभु

73:42

गुरु गुरु प्रचार करो करो प्रभु

73:51

कि नित्यानंद प्रभु व्यवस्था बनाए थे

73:54

एक अंग्रेज

73:56

मैं वसुंधरा वसुधा नामक भी पत्नी थी

74:01

ए पर्सन आईएस रन ओं

74:03

कि आखिर और नहीं रही तो फिर जान हवा आ

74:08

कि अब बहने थे वह सिस्टर्स आ

74:13

कि कोई कह रहा है कि तय हुआ था

74:18

है तो जानवा के नित्यानंद प्रोग्रेस विद

74:22

है और है

74:25

कि वीरभद्र

74:28

आज हम आपको उनके एक पुत्र और गंगा देवी

74:31

नामक बादशाह बेगम भाग्य प्रज्ञा ट्री उनके

74:34

पुत्र के रूप में और वीरभद्र के दिन के तो

74:40

पुत्र एक पुत्र एक पुत्री भी हम च

74:45

पदयात्रा में है

74:47

कि जब गए थे तो जान हवा के साथ उनका

74:51

ग्रहस्थ आश्रम जहां था

74:54

मैं यहां पर भी हम नित्यानंद प्रभु के

74:57

ग्रहस्थ आश्रम ओं

74:58

कि गांव भी गायब है क्या उनका आश्रम ओं

75:03

आ रहा

75:06

9th नित्यानंद प्रभु जी

75:09

कि उनका प्रचार फितरत

75:11

कि प्रभुदत्त देश हम इसे कहते हैं बंगाल

75:17

का प्रभुदत्त दीया आप प्रभु तो उनके प्रभु

75:20

है नित्य तने महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु ने

75:24

प्रदत्त प्रभु ने दिया हुआ प्रचार का

75:29

क्षेत्र प्रभावित देश नित्यानंद प्रभु है

75:34

है अरे बंगाल ओडिशा भर में प्रचार किया

75:38

करते थे

75:41

है सवा दो

75:44

है तो हरिदास ठाकुर नित्यानंद प्रभु की

75:47

टीम थी प्रचार में दोनों मिलकर जाता है

75:52

शो मोर

75:56

कि मुझे कई सारे

75:58

कि नित्यानंद प्रभु

76:01

ने अवधूत उन क्या विकास अब मलाइका ठीक है

76:06

उनके लाए और उनका व्

76:09

मेरे सारे हावभाव और सारे लीलाएं

76:13

के सारी दास्तां कुल कभी कबिरा है मैं

76:16

इनके साथ जाता थोड़ा-थोड़ा परेशानी में

76:19

परेशान करते हुए मुझसे परेशानी होती है कई

76:24

जाता है तो किसी घर में घुसकर वहां माखन

76:28

चोरी करते उनको मैं बलराम हो माखन की चोरी

76:35

कर ली चोरी करके माखन खाते हो तो दौड़ते

76:39

लेकिन घर के लोग बाहर चोर चोर तो उनको तो

76:44

वह

76:46

कि हरिदास मिलते

76:49

है तो हरिदास की पिटाई होती राघवानी की है

76:54

के प्रधानाचार्य को हरिदासन था जैसा हुआ

76:58

आज वैसा हुआ आज वैसा हुआ आज गांव में हम

77:02

गए तो कई गाय थी तो नीता ने क्या किया

77:09

है तो 2014 किया और पीरियड धूप अधीर

77:15

कि इस गाय के मालिक यौन उन्होंने कैसे

77:20

और अपना क्रोध व्यक्त किया फिर अ

77:25

है या कभी भी गंगा में बाढ़ आती है इनको

77:30

कोई चिंता नहीं है इस नदी में कूद पड़ते

77:34

हैं और उस जल गंगा के जल प्रवाह कैसे

77:39

खेलते घ्र ऐसे गोल-गोल चक्कर काटते हैं

77:45

अनंत शेष है संकर्षण संकर्षण

77:52

कि दूधसागर में

77:54

कि गांव यस है प्रैक्टिस है

77:58

मैं उल्टे नहीं ठहरते हैं

78:01

है अरुण उसके ऊपर फिर अ

78:05

कि भगवान पड़ते है विष्णु तो विष्णु की

78:08

जोश या है वह संघर्ष आनंद से यस तो वहीं

78:14

तो नित्यानंद प्रभु है तो उनके लिए जेल

78:18

में रहना तो जमीन पर रहने की बात है उनके

78:24

लिए जमीन और जल का कोई भी न तो जल का

78:27

अघ्र्य जल में प्रवेश किया हम अ

78:36

को प्लग लेवल से भी ऊंचा पानी मेहरा हमको

78:41

कोई चिंता नहीं है

78:42

और कभी-कभी वह आपकी उम्र क्रोकोडाइल्स

78:45

मगरमच्छ छवि है उनसे दूर पर नहीं जाता है

78:50

उनको पकड़ते हैं उनके साथ खेलते उनके पीठ

78:53

पर बैठते हुए हरिदास है

78:58

कि भगवान को क्या भाई जी

79:02

सेट करो को डायल जो भय उत्पन्न करने वाला

79:06

के भय उत्पन्न ना जिन्होंने किया घड़ियां

79:11

लिया भाई दिखाता है भय उत्पन्न नखत निर्णय

79:18

किया भगवान

79:21

कि उनके लिए क्या भाव है ऐसे घड़ियां से

79:28

इकरार से तो दो

79:31

कि वृषभ रिपोर्ट देते अद्वैताचार्य को आज

79:34

ऐसे हुआ और आज हम गए तो जगह मधाय वे शराबी

79:42

थे

79:44

के बाद विचार न्यूज़ सुना तो कहा कि

79:46

नित्यानंद भी शराबी है अ

79:51

मैं इसको भी नशा तब पूछ शराबी शराबी मिला

79:55

तो कुछ बोर्ड सदस्य एमके दृढ़ है

80:00

जो लौट के घर न

80:03

कि साउथ लीला में भी अ

80:05

अलार्म लगाए महायुद्ध धार जिला का

80:10

हुआ है

80:11

ए सईंया प्रचार कार्य हो रहा है चैतन्य

80:15

महाप्रभु की ओर से प्रचार कार्य कर रहे

80:18

हरिदास और नित्यानंद प्रभु तो जगह मधाय से

80:22

टकरा है दिन

80:25

कि अ

80:27

क्या हुआ तो यह सुनने वालों में से नहीं

80:29

थे जगाए मधाय बड़े दीन-हीन स्पीड है

80:36

महाबीर दो

80:38

कि कैसे होने पर प्रहार किया

80:41

[संगीत]

80:43

कि अ नित्यानंद प्रभु के भार से खून

80:46

निकलने लगा है

80:49

कि यह समाचार थे ने महापौर के पास पहुंचा

80:52

हो तो

80:53

कि इतने महाप्रभु सुधार शाहरुख खान चक्र

80:56

को ले आए तो नित्यानंद सुनाना सुदर्शन

81:00

चक्र को

81:01

हां मेरे पास है तो चक्र नहीं है मेरा हाल

81:05

कहां है मैंने हल को फेंक दिया हूं और

81:09

मैंने

81:11

कि किसको मुसल कोई फैंक दिया हूं

81:16

कि मुसलधार और हलधर अ

81:19

कि यह बलराम के दो क्या है

81:24

कि सशस्त्र है जिस किसी का वध करना है तो

81:28

वह कल से बलराम क्या करते हैं उसको आज में

81:32

खींचते हैं जो पास में आ गए तो दो

81:36

कि उसकी पिटाई करता है बहुत मुश्किल हल से

81:42

पकड़ लिया गले को पकड़कर फिर मुश्किल से

81:45

इसका शिव

81:47

है तो मेरे पास भी तो हथियार नहीं है आया

81:50

अपीयर्ड विद शार्प वेपन से

81:53

कि मैं

81:54

हैं तो आप इस हथियार का उपयोग नहीं कर

81:58

सकते हैं इस योग में सांगोपांग अस्तर

82:03

पार्षद निगम के पार्षद भी आपके

82:07

शस्त्रास्त्र है और हरिनाम ही हरे कृष्णा

82:12

हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम

82:17

हरे राम राम राम हरे हरे यही तो यही हंसता

82:21

है भगवान का सौंदर्य व्यस्त रहते हैं

82:28

कि भगवान के समुद्री को देखकर हिसार आ जाओ

82:31

दुष्ट तथा है हो समाप्त होती बांध का नाम

82:36

शस्त्र रहे हैं

82:38

में भी मिठास से ही है

82:41

एक तारा है शत्रुभाव है

82:46

कि उस माफ होता है

82:49

है और भागता है

82:51

में भक्तों की करुणा

82:54

कि तुम जगह मधाई नहीं आ नित्यानंद प्रभु

82:58

की करुणा को देखा है

83:00

में चैतन्य महाप्रभु तो दूसरे प्रकार की

83:03

करुणा दिखाने के लिए तैयार थे लेकिन

83:07

नित्यानंद प्रभु ने अ

83:11

मैं नहीं भूला आप नाम इस योग में नहीं आ

83:17

हैं तो उनकी करुणा का प्रभाव से है

83:21

कि नित्यानंद प्रभु की करुणा से प्रभावित

83:24

हुए जगह और मधाई है

83:27

है और द्रवित द्रवित हुए हैं

83:33

इस दौरान गिरा मधुर लीला जा रहा करनी

83:37

प्रवेश शीला ह्रदय निर्मल अब हेलो दूं कि

83:43

गौरंगा महाप्रभु के लाया नित्यानंद प्रभु

83:47

की लीलाओं का श्रवण करता है उनके रूप का

83:52

दर्शन करता है उनके करुणा का कोई अनुभव

83:57

करता है तो कृपया निर्मल होता है

84:04

कि पशु पाखी झूरे पाषाण अभी धरे सुंधा रघु

84:11

था नित्यानंद की गुणगान था उनके पिता अरुण

84:18

को

84:20

कि का अनुभव करके पशु-पक्षी झूरे तो यहां

84:24

पशु वध यह

84:27

कि यह दो

84:30

कि तुम झाल जगाए मधाय चले का नाम जगदानंद

84:35

दूसरे माध्वानंद थे जगदानंद जगह और

84:42

माध्वानंद मधुर कितना अच्छा नाम सही है

84:48

है तब है

84:51

कि शॉर्ट फॉर्म है शॉर्ट फॉर्म

84:54

ए हवा माध्वानंद और जगदानंद अ

84:59

है तो उस जगह मधाय है

85:03

में मुद्रित हुए हैं

85:05

की दौड़ नित्यानंद की है

85:08

और करुणा अ

85:10

कि का उन्होंने

85:13

का अनुभव किया तब और जगह विधायक हैं

85:18

कि का उद्धार हुआ है

85:20

कि उन्होंने है

85:23

कि गोलोक एरर प्रेम आधीन हरि नाम संकीर्तन

85:27

85:28

हैं तो कुछ नित्यानंद दोनों भी लाए हैं यह

85:33

अपने धाम का धान तो उसका वितरण शाम दो

85:39

दामों दो या संकीर्तन ही का पितरों दोनों

85:44

ने वितरण किया

85:47

एक अदद उद्धार किया है

85:49

यह सवा दो

85:53

और यदि नहीं नायता से लो हरि नाम में

85:56

सुधार लो देर शाम शुद्ध आय मधुर

86:01

9th दीन हीन व्यक्ति का भी

86:04

में पपीता पी का उद्धार संभव है इस योग

86:09

में

86:10

कि इसके सबूत है जगाई मधाय इसका ज्वलंत

86:14

उदाहरण है जगह मधाय का उद्धार तो यहां पर

86:21

को इज्जत टीम में पड़ रहा गौर निताई का

86:24

गौरव निदान टीम टीम टीम में जब मैं

86:27

नित्यानंद प्रभु की विशेष करुणा का

86:31

प्रदर्शन हुआ है होता है इस

86:36

को जगाए मदारी जैसे पतितों के वह धार में

86:40

है

86:42

कि हमारे उद्धार में भी

86:45

कि हमारे सुधार कर होना है तो किस की कृपा

86:49

से उद्धार होगा नित्यानंद प्रभु की कृपा

86:53

पास है

86:54

कि यह प्रश्र आधार भगवत प्रसाद यादव आदि

86:59

गुरु बलराम नित्यानंद है

87:04

मैं इग्नोर पास हमारा भी अ

87:07

में सुधार होगा और

87:11

को रुपयों का उद्धार किया उन्होंने है

87:15

है और आज भी कर रहे हैं यह नहीं कि आप 500

87:19

वर्ष पूर्व और करके अब इसको पूर्ण विराम

87:24

दिया

87:26

है तो जो प्रकट लीला थी हो तो है

87:30

कि उसका रूपांतरण है

87:33

और अप्रकट लीला में हुआ

87:35

है लेकिन गौनिया के लीला अ

87:39

कि उनका आंदोलन संकीर्तन है

87:43

थे मोमेंट का फैलना

87:46

तो चल ही रहा है तो गौर निताई गौर निताई

87:49

साथ में है गौर निताई के कारण

87:54

है अरे दोनों ने भी कहा था कि अ

87:57

कि यह संकीर्तन अंदोलन है है

88:03

है इसका प्रचार और प्रसार होगा अ

88:06

[संगीत]

88:11

कि ऐसा कीर्तन कर चेतन महापूजा प्रस्थान

88:14

कर रहे थे जगन्नाथ पुरी से

88:17

मैं तुझे देने महाप्रभु आगे बढ़े लेकिन

88:19

नित्यानंद तू वहां का है ऐसा कीर्तन

88:23

क्षेत्र के प्रश्न के समय दक्षिण भारत की

88:27

यात्रा के प्रति कीर्तन एक समय सारे विश्व

88:31

में होगा नित्यानंद प्रभु थे तो प्रति

88:36

ग्राम प्रचार होवे रे नाम नाम सें तिरे

88:43

नाम

88:46

कि आप रहना बाल राम का नाम यह हरे राम हरे

88:50

राम जो है यह राम

88:55

मैं बलराम भी है बलराम ऑयल नेता है

88:59

कि हरिराम नित्यानंद राम ही है

89:04

कि मुझे अब हम

89:06

इस तवा मोरना मेरे नाम का प्रचार होगा

89:08

मतलब हरी कृष्ण था प्रचारों के हरे राम का

89:11

प्रसारण मंत्री कृष्ण का प्रचार होगा राम

89:14

का बलराम का भी प्रचार होगा मेरे नाम का अ

89:19

में सर्वत्र प्रचार मीडिया नाम

89:23

के अनुसार आप प्रचार होते-होते

89:27

मैं यहां भी अ

89:29

का प्रचार हो रहा है

89:31

है अरे जान त्रयोदशी महोत्सव बखिरा और हो

89:41

कि प्योर है

89:47

एक लड़की

89:49

हुआ है

89:52

और सुनाओ

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