Nityananda Trayodasi Lecture by Loknath Swami Maharaj || Lord Nityananda Prabhu Appearance Day katha
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यह बिल्कुल ऐप उसको आप सभी को
को बर्थडे विश
कि नित्यानंद भक्तों का अ
हुआ है
कि प्राकृत है अरे यह सब ठीक है
कि भगवान का हर रोज
का जन्म हो रहा है
कि कल बेक जन्मोत्सव था
हुआ है
है ताकि नहीं आ
जो मरा हंद्स्फ्री है
कि कुछ दिन पहले अद्वैताचार्य है क्या थी
हो
कि अद्वैताचार्य का अंशदान
अपने परिवार का होगा ही और क्या कहते हैं
सप्तमी यानी अ
इस प्रकार से द्वादशी तिथि तो आज त्रयोदशी
है नित्यानंद प्रियदर्शी जी
कि कबीर पूर्णिमा आएगी गौर पूर्णिमा जिस
क्रम में अद्वेताचार्य है पहले प्रकट हुए
फिर नित्यानंद
कि प्रभु का प्राकट्य और सीरवी चैतन्य
महाप्रभु का प्राकट्य
के प्रति थी अब उसी क्रम से हो रही है आप
अ
आ जाए हो नित्यानंद त्रयोदशी महासभा की और
आप भगवान
की वजह बहुत लोग जानते हैं
[संगीत]
में पेशाब रुकता
कि विश्व कर रूपा जाया जगदीशा हरे अ
है भागवत में वर्णन है कि नित्यानंद प्रभु
को
मैं अब कुछ कम जानते हैं
में लगभग नहीं जानते हैं
और फिर नागपुर में आज नित्यानंद त्रयोदशी
का उत्सव और हम लोग तो मना रहे हैं
कि इन जरूर चाइना में आज नित्यानंद से
मनाई जा रही है ईद
मैं नागपुर से भी आगे चाइना
है और मांस करो मैं और विश्व हर मैं हूं
कि भगवान
यो यो प्रकट हुए हैं
में चैतन्य महाप्रभु
कि नित्यानंद प्रभु अ
है कुछ क्षण अवतार कहा छ्न ढुगों कू गढ़
छिप गया है
आज तक किसी को पता भी नहीं लगे कि वह आए
और अ
कि वे
कि भगवान है या भगवान गणेश भगवान के रूप
में आए साल का पता नहीं लगवाना लगवा ने
देना चाहते थे भगवान थोड़ा सा
169 अवतार संजना उदार और भगवान भगवान आए
लेकिन भक्तों के रूप में नहीं आए फिर हम
भगवान के रूप में नहीं आया फिर भगवान भक्त
ही बने तो फिर जाना और भी कठिन है
में पंक्चर तत्वात्मक कम और अकेले भी नहीं
आए ऐसे पंच तत्व आत्म कम कृष्णम
जो भक्त अरु
थे ₹5 में आया और पांच पांच रूपों में आए
पंचतत्व की आराधना पंचतत्व कम कृष्ण कृष्ण
कैसे पंचतत्व
कि मायापुर में पंचतत्व की आराधना होती है
राधा माधव के साथ-साथ पंचतत्व की आराधना
भगवान तत्व समझना आवश्यक है
[संगीत]
कि तत्व था हां जो तत्व जानते हैं जन्म
कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्व तत्व
यमुना सहित मारुति और
है तो यहां पंचतत्व कृष्ण अभी आए वह बन गए
भक्त और रूप में चैतन्य महाप्रभु बन गए
भक्त रूप पंचतत्व प्रमुख स्तंभ के रूप में
वीर स्वरूप परम भक्त अरूप बने चैतन्य
महाप्रभु भक्त स्वरूप बने नित्यानंद प्रभु
जो भक्त रूप भक्तों स्वरूप
की प्रभुता बता बने है अद्वैताचार्य
रफ्ता-रफ्ता आंख सं
और फिर एक प्रसिद्ध शुद्धता बनाए हैं
शुरूवात भगवान ने है
कि श्रीवास बने और भक्त शक्ति कम
में बात कर सकती हो
यहां पर है गदाधर मदद कर सकते हैं
कि राधा रानी की शक्ति भगवान की शक्ति
आधार अ
में बने हैं सत्ता बता दूं नारद मुनि भक्त
है श्रीवास बने हैं
कि भगवान का एक अवतार
का आदर्श है पुरूष आंवला कैसे पुरुष अवतार
कि मैं महा विष्णु ब्रह्मा विष्णु प्रकट
हुए हैं
कि अद्वैत विचार के रूप में और फिर बच गए
भक्त कर ऊपर भक्त स्वरूप
एक रहस्य तने और नित्यानंद प्रभु भक्त
स्वरूप
जो भक्त ध्रुव वक्त स्वरूप भक्तों रूप
चैतन्य महाप्रभु और भक्त स्वरू नित्यानंद
प्रभु वराहावतार और अवतार मां-बाप नहीं
होना चाहिए भगवान का कौन हो सकता लेकिन
घृणा भगवान
को प्रगट हो गए थे
कि अजय ब्रह्म कि अ
कि ब्रह्मा थी नासिका ही बनी
कि गर्भ ही इकाई ब्रह्म को हमको छींक आती
है तो और कुछ निकलता है मारे गए हैं
में ब्रह्म कोशिकाए तो ब्रह्म के नासिका
से
कि भगवान प्रकट हुए हैं
मैं पहले छोटे आकार की अंगूठी के आकार के
विरुद्ध उन्हें विराट रूप धारण किया
परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम्
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि वे प्रभु
अवतार का
कि यही वह देश होता है मैंने और आधार में
तो धर्म की स्थापना के अधर्म के साथ
पृथ्वी की स्थापना करनी पड़ी उनको पृथ्वी
की स्थापना की
तो फिर आगे धर्म की स्थापना आ
हां हां
है तो यह भक्त रूप और भक्त स्वरूप है
कि वह भगवान
कि एक बने बात रूप
कि दूसरे बने हैं भक्तों शोरूम है
मैं तुम्हारा भगवान या अ
जो कछ भगवान या मच्छर भगवान ऐसे कुछ भगवान
के अवतार है शीघ्र ही
जो मां बाप ही नहीं है और
कि विरायक कोई विशेष प्रसंग कोई विशेष
कार्य
कि के लिए आए उसको निपट लिया तो अदृश्य हो
गए फेमिनिस्ट संक्षेप में कोई विस्तृत
वर्णन नहीं है कुछ क्षणों के लिए प्रकट हो
गए कुछ दिनों के लिए प्रकट हो गये फिर
अंतर्धान हो गये ऐसे अवतार लेकिन फिर से
अवतार भगवान ने वात्सल्यभाव प्राकट्य किसी
के बन जाते हैं पुत्र रशीद अंसारी उनका
पति तरह संसार उनका पुत्र या पुत्री है
लेकिन फिर से था प्राप्त कर रहे थे तो
की प्रार्थना चौंह तो जो सभी के माता है
सभी के पिता है वह बन जाते हैं किसी के
पुत्र मजा आता है
कि सोनी दयानंद प्रभु भी बन गया ऐसे अ
के पुत्र बने थे
में लड़ाई पंडित
है और पद्मावती के व पुत्र बने थे
है तो 500 वर्ष फैशन आप
कुछ कह रहे हैं
के पास वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु
नित्यानंद प्रभु प्रगट भए
कि ऐसा एक बने एक दिन तो सही था एक साल वह
सही था लेकिन आप तो और भी कई साल बीत गए
हैं
के वेतन एवं महाप्रभु के प्राकट्य को ही
में अब कुछ ही वाला अगले महीने में 526
वर्ष पूरे होंगे
कि यह संसार अ 526 व जन्मोत्सव चैतन्य
महाप्रभु का अविर्भाव उत्सव मनाएगा तो
जितने महाप्रभु के पहले तो 526
ए प्लस कितना है विषय
आज के पहले जत्थे ने महाप्रज्ञा ट्रेन है
और फिर अभिषेक साल पहले चैतन्य महाप्रभु
के पहले तो 269 और टी-20 तो तो साढ़े 50
ए प्लस माइनस बी
कि तूफान शिफ्ट ईयर्स
के प्रांत में युद्ध में इस साल पहले
नित्यानंद प्रभु प्रगट हुए हैं
मैं तो बस यही नित्यानंद प्रभु ही प्रगट
नहीं हो रहे हैं या केवल सीरियल गौरांग
महाप्रभु ही नहीं प्रकट हुए हैं
ने 500 वर्षारंभ लगभग 500 वर्ष पूर्व हुआ
था
हां सर आध्यात्मिक जगत थी प्रकट हुआ है
है और फिर जब हम भगवान का प्राकटय तो
भगवान स्वर्ग से प्रकट नहीं होते कुछ लोग
समझते होंगे अज्ञान के कारण भगवान स्वर्गम
रहते हैं है वन में रहते हैं तो कुछ
किंग्डम आफ गोधेड हैं
को स्वर्ग से भगवान प्रकट नहीं होते
स्वर्ग में भगवान रहते ही नहीं अब कभी
विजिट के लिए जाते होंगे स्वर्ग में भगवान
का निवास वर्ग में नहीं है भगवान तो अपने
दिव्य जगत में प्रकट होते हैं
कि अधिकतर अवतार भाई कौन से प्रकट होता है
अधिकतर अवतार लूंगा भगवान के अवतार है
उनका निवास स्थान हरि धाम वैकुंठ धाम
है लेकिन नित्यानंद प्रभु चैतन्य महाप्रभु
जो प्रकट हुए हैं वह कौन से भी ऊंचा दाम
कि साकेत धाम है श्री राम का धाम आपके धाम
वास्तविक 49 वां उर्स आम लोगों का नाम निज
धाम ने गोलोक धाम घृणित अनंत
कि चेतन है महाप्रभु नित्यानंद प्रभु
प्रकाश वर्ष पूर्व सारा गोलोक प्रगट हुआ
है
कि मुझे भगवान के उपरांत भगवान के
प्राकट्य के पहले भगवान का धाम कपड़ा करते
हैं भगवान का धाम प्रकट हुआ गोलों प्रकट
हुआ और लोग पति को लोकनायक है
ओम श्री कृष्णा भी प्रकट हुए और
कि उनके भ्राता श्री बलराम भी प्रकट हुए
हैं
है और भी कई सारे प्रगट में कई सारे कई
सारा सारा संसार ही आध्यात्मिक संसार ही
प्रकट हुआ नंद बाबा यशोदा अभी प्रकट हुई
और आधा भी प्रकट हुई है और कई सारे ग्वाल
बाल भी प्रकट हुए हैं एक द्वादश है बालों
का एक समूह है वेतन नित्यानंद प्रभु कि
बलराम के पार्षद रह तो नित्यानंद प्रभु
प्रगट हुए तो उनके
से 12 द्वादश सॉन्ग गोलू भी प्रकट पर मन
के पार्षद का रूप में है
में कई सारे प्रकट हुई यहां तक कि कौन भी
प्रकट हो गए थे
तो फिर आप को कल्पना आएगी
कि हम
तो फिर गांव खुद भी प्रकट हुआ एवं आया
पूर्व गोकुल है
कि नमक बीत
मैं एक अच्छा कर राम जी का
वो हंसी का अंग है एक चक्र ग्राम में
बलराम प्रकट हुए एक चक्रण
कि जो हुआ राधेश नाम का प्रदेश है बंगाल
में हरिदेव जहां गंगा नहीं बहती है गंगा
से कुछ दूर का प्रदेश है राधेश
कि उत्तराखंड देश में एक रोचक राम में
नित्यानंद प्रभु आज के दिन
में प्रकट हुए हटाई पंडित और पद्मावती के
के पुत्र के रूप में अजुन एवं भोजन अधिक
तो संकीर्तन अध्यक्ष चेतन भागवत के
प्रारंभ में श्रीमद्भागवत गीता भागवत
नित्यानंद भागवत कह सकते हैं
ए नाम तो नहीं दिया भाई साहब
कि इतने भागवत नहीं है वह
कि नित्यानंद भागवत है
है तो
कि Facebook चांद से इस प्रार्थना क्षेत्र
भागवत प्रारंभ होता है क्या प्रार्थना है
कि अ जुबान उम्र लंबी तो भिजवा ओ ओ
कि अजवाइन और लंबित भुजाओं का नाका मदार
तो संकीर्तन नहीं कब पितर हो कमल आया था
शाम को
यहां पर यह
में दो व्यक्तियों का
के दो अवतारों का है
का वर्णन हो रहा है इसीलिए यहां आओ आराम
संकीर्तन नहीं कपिल सरोवर जानवर लंबित
बुजुर्गों दो व्यक्ति व्यक्तियों की लंबी
भिजवाए थे
कि दो व्यक्ति संकीर्तन आंदोलन के पिता तो
वे दो कौन है
कि चैतन्य महाप्रभु और नित्य आनंदपुर इन
दोनों को अलग करना कठिन है दो अलग है नहीं
दोनों में ही
कि वेद ही नहीं है अब एड है थोड़ा भयभीत
प्रपात सिर्फ प्रकार दिखते हैं
अ कृष्ण और बलराम में क्योंकि कृष्ण और
बलराम ही प्रकट हो रहे हैं गांव निर्णायक
के रूप में डा
कि नंदन नंदन झा मीडिया सचिव शुद्ध हो
इलैहि या रहस्यमई बात है इस कांफ्रेंस हो
न्यूज़
ए क्या है नंदन नंदन जाएगी सच्ची सुतैहरी
रोड से अ
है जो नंदन नंदन श्री कृष्ण थे वहीं बन गए
सूची सुत जगन्नाथ सूत्र सच्ची स्वच्छ
बनाने
है और बलराम होइल अनीता है और बलराम बने
हैं नित्यानंद प्रभु बलराम मोह लेता है
है तो कृष्ण-बलराम को गर्ल्स हम समझ सकते
हैं तो हम लोग और नेता हैं कभी समझ सकते
हैं इससे कठिन हो जाता है कृष्ण-बलराम गौर
निताई तो समझना क्योंकि अ
जो भक्त बने हैं एक भक्त स्वरूप बने एक
भक्तों स्वरूप बने अपने को और छिपाए हैं
अपने भगवत्ता को छिपाए से लिए कठिन होता
है
कि भगवान भगवान के रूप में तय जड़ से पता
लग सकता है देवकी ने कहा था कि आप
चतुर्भुज रूप में अगर कम्स देखेगा तो समझा
लेता भगवान इसलिए प्रभु के बावजूद विभाग
बन जाओ तो फिर आपके भगवत थोड़ी छिप जाएंगी
अरे मनुष्यों के ही पूजा होती चतुर्भुज
भगवत भगवत लक्षण
है कैश व अध्यक्षता समाजसेवी घनश्याम
शुक्ला कैलाश में प्रवाह है
9th कृष्ण और बलराम शेयर प्रभुपाद स्थान
पर लिखे कि
कि दोनों भगवान है तो उनकी भगवत्ता होती
भागवत भगवान की क्या होती है भगवत्तत्त्व
गौतम बुद्ध कहते सुप्रीम पर्सनैलिटी आफ
गोधेड भागवत भगवान की भगवत्ता है
कि भगवान कृष्णा
कि अगर हंड्रेड परसेंट भगवान है और है भी
तो बलराम 98% भगवान है 2% कृष्ण कृष्ण से
पहले जो विस्तार हुआ और विस्तार और कई
सारे सब्सक्राइब इस अश्लील लुट गए लुट
पहला जो ऑप्शन है वह बलराम
है तो फिर बलराम हुई ललिता है सब
कृष्ण-बलराम जैसे अ
एक सांस में रहे कृष्ण-बलराम लीला के समय
है
मैं तो गांव नित्यानंद साथ रहे और साथ
उन्हें संकीर्तन नहीं कभी तारो संकीर्तन
आंदोलन की का विस्तार किया गया संकीर्तन
की स्थापना की और दोनों के बीच है अजवाइन
और लंबी भुजाओं व दोनों के बीच लंबी
भिजवाए हैं कितनी लंबी है और तक पहुंचने
तक पहुंची है
इस तवा अजान उम्र लंबी बोलो तनक चाय बना
दो तो दोनों स्वर्ण वर्ण के नित्यानंद
प्रभु में कुछ रक्त वर्ण सुवर्ण और रक्त
वर्ण का उल्लेख आता है लालिमा भी पितांबर
भी है और
अतुल कनक हेमांग गौरांग जैसे नित्यानंद
प्रभु भी है और कुछ लाली मां की भी छोटा
है उनके अंग में और यह दोनों संकीर्तन
नहीं कप इस तरह दोनों ने संकीर्तन आंदोलन
की की स्थापना की दोनों संगठित आंदोलन के
पिता रोकता है फ्रंट पार्ट और कम लायक हैं
और दोनों की व्याख्या कैसी है कमल कमल है
अरे भाई नंबर वन अनंतम अरविंद धत अरविंद
ललायत अक्षर अरविंद ललब कमल की पंखुड़ी
लेकिन कैसे आया था दो
कि जब खेल रही कमल की है कमल का पुष्प गुड
किल रहा है ब्लूमिंग लोटस केवल करने के
साथ का मामला आया था ऑप्शन कमला कमला कमला
और विश्वंभरो दोनों भी दोनों विश्वंभर है
में चैतन्य महाप्रभु का नाम ही नामाकरण
हुआ तुम का नाम ही दिया थिस फॉर्म भर
लेकिन है दोनों भी विश्वंभर है और रोजगार
हो और दोनों का भी
को श्रेष्ठ ब्राह्मण परिवार में जन्मी हुआ
और दोनों भी श्रेष्ठ ब्राम्हण है
कि गौ राजनीति आनंद विजय भैरव योग व
धर्मपाल ओं प्रयोग धार मा कलिका लें और
धर्मा नाम संकीर्तन
है इसका प्रचार-प्रसार करने किया दोनों ने
पालन किया धर्म की रक्षा की पालन किया
संकीर्तन नहीं कभी तरो वंदे जगत प्रिय करो
करुणावतार
है तो बंदे हम वंदना करते हैं आज के दिन
भी हम वंदना करते हैं मंदिर जगत प्रिय करो
और जगत प्रिय करने हेतु जो प्रकट हुए
मंदिर जगत प्रिय करो करुणावतार ऐसे दोनों
करुणा की मूर्ति है करुणा के सागर है
करुणा के अवतार करुणावतार ओ ओ
कि उनके वंदना करते हैं
मैं तो दोनों को अभिन्न बताया है
में चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु
को दूसरी प्रार्थना में है
के पंधे
कि नित्यानंद को संबोधित ओं चैतन्य
महाप्रभु नित्यानंद प्रभु के साथ प्रकट
हुए नित्यानंद शहर उदित व उदित व नवोदित
नित्यानंद को संबोधित ओं गौतम पुष्प बन तो
कहां प्रकट हुए गौड़ देश में प्रकट हुए
गौतम पुत्र पवन गौड़ देश में फैन उदित
उद्दिष्ट
कि बंगाल को गोद देश करें पञ्चगौड़ एक समय
भारत का विभाजन द्रविड़ और गौड़
पंचद्रविड़ थे दक्षिण भारत पंचद्रविड़ पर
उत्तर भारत पञ्चगौड़ बंगाल
का बैकग्राउंड ओडिशा उसका बांग्लादेश
प्रेजेंट बांग्लादेश
कि यह गौड़ गौड़ उदय पुश पवन तो तो गौड़
देश में उदित हो रहे हैं और सूर्योदय अवधि
उदय होता है तो दो उक्त दोनों का उदय हुआ
है सूर्य और चंद्रमा का उदय हुआ चंद्रोदय
मंदिर इस्कॉन मंदिर की स्थापना हुई तो
उसका नाम चंद्रोदय चंद्र का उदय हुआ चंद्र
पुत्र पवन तो तो एक चंद्र बने एक सूर्य
सूर्य और चंद्रमा का गौड़ का रुख 30 है
उसके ऊपर 30 से के पीछे यह ऊपर
है ऐसे सूर्य और चंद्र का उदय होता गौड़
का मुद्दा चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद
प्रभु प्रकट हुए थे
कि चित्र यह दोनों कैसे हैं बड़े चित्र
विचित्र है वंडरफुल Amazing अद्भुत चित्र
श्यामदेव और दोनों ने दिया क्या दिया
सोमवार को युक्तियुक्त छम छम छम हुआ था
चमचम शांति शांति शब्द शब्द की उत्पत्ति
स्वयं इस धातु समुद्रों 1969 में दिया
मतलब या प्रशांतिधाम मन को शांति
के विरुद्ध आगे शांति है तो फिर जीवन है
ना तो मरण ही है या मां शांति
में प्रवाह शाम दोनों तंबुओं अर्ज प्रकट
यह दोनों का प्राकट्य चेतन महत्वपूर्ण का
प्राकट्य किसलिए हुआ था मोहनजोदड़ों हिसार
के तमाम गुण आइटम अंधा अंधे और पुष्प पवन
तो एक सूर्य चंद्रमा के रूप में गांव में
प्रकट हुए ही सूर्य और चंद्रमा क्या करते
हैं तब उस अंधकार को मिटा अंधकार अंधकार
पर प्रकाश नहीं होने से अंधकार फैलता है
लेकिन प्रकाश होने पर भी एक प्रकार का
अधिकार तो बना ही रहता है और अंधकार होता
है ब्रह्मज्ञान दमदमा है
का अभियान जमता माह अज्ञान से उत्पन्न
अंधेरा तो दो प्रकार के अंधेरे हैं जगत
सूर्य का प्रभाव प्रकाश नहीं इसलिए दिखाई
नहीं दे रहा अंधे हैं हम अंधेरा है लेकिन
सूर्य उदित हुआ तो अंधेरा ही नष्ट-भ्रष्ट
आम लोगों की दृष्टि नष्ट हुई तब तक उनका
प्रभाव है
है इसी लिए बने हैं शुद्र तमोगुणी शूद्र
होते हैं
मैं हूं
है सवा दो
9th मोनू जाओ चलो नित्यानंद प्रकट होकर
है तमोगुण से उत्पन्न न जॉब अंधेरा है
उसका विनाश किया
कि वह अज्ञान तिमिरांधस्य ज्ञानांजन अकुशल
आख्यां तै
कि चक्षुदान दिल उजड़ी जन्म या इस जन्म
में प्रभु से अ
है तो यह नित्यानंद प्रभु प्रगट हो रहे
हैं और ब्रा कृष्णम वंदे जगत गुरुम बलराम
वन ढेर
कि जगत करो तो
कि वे दोनों में कृष्ण और बलराम में बलराम
बन जाते हैं गुरु तो वहीं बलराम नेता तो
नित्यानंद प्रभु प्रकट हुए हैं तो वह भी
बने हैं गुरु गुरु नित्यानंद प्रभु ही
बलराम आदि गुरु दुग्गड़ ने
[संगीत]
कि एक गॉड बलराम गढ़ लालगढ़ में
हैं तो एक गॉड क्या करते दूसरे गुट की
सेवा करते हैं
मैं बलराम यार नित्यानंद प्रभु जो हुआ गॉड
है लेकिन हो भूमिका निभाते हैं गुरु की
आधी गुरु की तो फिर कृष्ण की चैतन्य
महाप्रभु की सेवा करते इतने महाप्रभु के
सेवक बन जाते हैं और
मैं अपनी आश्चर्य प्रभु जगत सीखा है और
अपने आश्रम से सारे संसार को शिक्षा देते
हैं चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु
आदिगुरु
है और फिर
9th मोंठ उद्धव या राज
कि चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे
नमः
जो हमारी आंखें खोलते हैं दृष्टि देते हैं
हम
है तो कृष्ण बलराम जो प्रकट हुए तो पहले
पहले तरह का प्राकट्य था तब अल्लाह नेता
बलराम प्रकट हो रहे हैं नित्यानंद के रूप
में उनके प्राकट्य पहले और बाद में चैतन्य
महाप्रभु करते हैं
हैं तो एक अच्छा कर ग्राम में
ए प्राऊड देश में आज तक
आज के दिन आज का दिन
इस महान है
कि नित्यानंद प्रभु के लिए आज का दिन
रिजल्ट है हर साल जब यह दिन आता है तो
बलराम का प्रभाव इस इस दिन पर होता है या
अ
कि हम प्रभावित होते हैं
मैं बलराम की जो प्रभाव है प्रभाव
कि भाड़ प्रकाश भी है मुझ से भास्कर भी
होता है भास्कर प्रकाश देने वाला भास्कर
कि आज
कि हम कोई प्रकाश मिल रहा है
है या प्रभाव उनके भाव का भी प्रभाव आज
अधीन प्रभावित होता है
कि आप कुछ विशेष अनुभव कर रहा है तू
थे जब अजान उपभोग कर रहे हो
है तो बलराम का ही प्रभाव है
हेलो हाय भल्लाल देव
कि सनी दयानंद प्रभु जी
एक बड़े भगवान है तो
और सुंदर तो होनी चाहिए बड़े सुंदर थे और
वे बालक थे
मेरे पस एक चक्कर ग्राम में जन्मे में
है लेकिन यह बालक सबसे अधिक सुंदर था
और समुद्री की खान था
अच्छा हमको तो जरूर पूछेगा भी नहीं है ना
का सौंदर्य होता क्या है
इस दिव्य शाम जारी है अलौकिक सौंदर्य है
कि मैं कुछ जगह थी अलग है सौंदर्य का
प्रकार ही अलग है ऐसे सौंदर्य को देखने की
दृष्टि भी अलग चक्षु भी अलग होने चाहिए
चर्म चक्षुओं से तो कुत्ते की कोई सौंदर्य
दिखाई देगा है
ए ब्यूटीफुल डॉग शो
मैं वीडियो फुल गॉड के बजाय बेटी चार डॉग
सब कुछ लोग मदद डॉग में जो समझदारी दिखाई
देता है
में मदद चर्म चक्षु से
को देखते हैं तब ब्यूटी इज ना आए जब भी
होल्डर भी कहते है
थे ब्यूटी तो मैसेज देखने वाले की आंखों
में न
को होती है हम तो हर एक हरेक व्यक्ति या
उन सारे लोग उस जिस प्रकार का चश्मा पहने
हुए हैं उस चश्मे से फिर संसारिक समय
दिखाई पड़ता है उसकी वाट है
ए मास्टरपीस अब ड्यूटी नंबर प्यार भरे
संसार में जो भी जीव वह रिहा हो
का सौंदर्य है
को अगेन
कि नित्यानंद प्रभु का शानदार यादव अल्लाह
तौफीक दे
का सौंदर्य दिव्या सावधानियां अ
हैं तो सौंदर्य से भी सभी आकृष्ट है और एक
बचाकर राम मैं
कि एक रोज एक चक्र की माताएं अपने अपने
पुत्रों से उनका स्नेह था ही लेकिन उनसे
भी अधिक प्रेम उनका
कि नित्यानंद प्रभु से ना जाने क्यों पता
नहीं क्यों हम इस बालक में हुआ था वह कौन
है यह सब आकृष्ट होते हैं
कि इस नित्यानंद नामक अ
एक बालक से
ये सभी माताएं चाहते कि उसको भी गोद में
लेकर बैठे और बिठाते भी नियुक्तियां रंग
को
कि यह बालक जब चलता है तो कई अन्य अध्ययन
करते करते करते पीछा करते दर्शन झाले
का पान करते सभी मोहित है
कि नित्यानंद प्रभु के सौंदर्य से और
व्यवहार से शरीर हर बात से यह
सर्वोत्कृष्ट हालत
कि उसे एक चक्र ग्राम का धन की इस फिल्म
बाल लीलाओं में
मैं तेरे मां-बाप होगा इंजमाम ने
चंद्रगुप्त जब छोटे थे तो
हैं पालक फैन
है कि जब भी वर्णन आया है इसमें अधिकतर
रहा मैंने कई सारी ईएस वृंदावन कृष्ण की
कि लीलाओं का मंचन किया आ
को उनकी नाट्य मंडली थी और नित्यानंद
प्रभु उस नाटक एक दिग्दर्शक किया
डायरेक्टर या दो
ए स्टोरी राइटर
कि हर रोज और सब समय कोई न कोई अपने
मित्रों को एकत्रित करते हुए
है और मित्र तो कोई क्रिकेट खेल क्रिकेट
खेल रहा है कोई कबड्डी कबड्डी कबड्डी कर
रहा है जैसे कर होता है लेकिन
कि नित्यानंद प्रभु के मित्र तब एकत्रित
होते तो उनका अधिकतर समय वृंदावन की लीला
का मंचन करने में उनका समय बीत जाता है
कि कृष्णा के प्राकट्य पहले से ही शुरुआत
करते कैसे पृथ्वी गई गौ माता
कि बनकर देवताओं के पास छोड़ दो
कि देवतागण ब्रह्मा के पास ब्रह्मा गैस
स्विच तस्वीर में विराजमान
को शुरू अध्यक्ष विष्णु के पास और सारी
समस्याए कैसी सुनाए मैं परेशान हूं
धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत धर्म की ग्लानि
हुई है प्रभु पृथ्वी पर त्यौहार भवति तदा
आत्मानं अंतर प्रकट होते हो तो प्रभुओं का
प्रभु ने कैसे कहा था ऐसा नाटक नाटक में
दिखाता सिर्फ कृष्ण प्रकट होते पकड़ रहा
हो शुरुआत की फिर नेक्स्ट
में कृष्ण जन्म का
कि उन्होंने लीला का मंचन किया
में वसूले गए कृष्ण को रात और रात क्षेत्र
को खुल मैं
है तो वहां के निवासी एक चक्र ग्राम के
निवासी इन बच्चों के इन खेल-खेल में एन
कठघरा हुआ खत्म फिर किसी अपने मित्र को
बनाते उड़ ना बन जाओ
[संगीत]
है तो फिर फिर नित्यानंद प्रभु पूतना को
गोद में लेते हैं और कृष्ण बने हैं अनअदर
बहुत लुट-लुट लेती नित्यानंद प्रभु
स्तनपान है
ए नाटक हो रहा है वहां तो जहर पीते पीते
उसके साथ
है तथा करें दुग्धपान के साथ जान ही पी
लेते और फिर और उनका जो मित्र बना था मर
गई रे मर गया तो हर रोज कुछ अलग अलग
हिस्सों को सब्सक्राइब
कि कल खेल
कि चलते थे उनके अ
कि वृंदावन के सहारे मधुर लीलाओं का अ
में पंक्चर लें यह बाल लीला मैं ही खेल
चलते थे नित्यानंद प्रभु और उनके मित्रों
के अ
है तो कृष्ण लीला के साथ फिर रामलीला का
भी उन्होंने खेल लिया रामलीला का मंचन
शुरू किया है
कि चौके भी अलग-अलग खेल खेलने होते रहते
हैं
कि केवल राम लीला समय नहीं हो राम सब कुछ
दिन के लिए रामलीला और रावण के वध के पहले
हर रोज एक होता है उस समय उनका तो हर दिन
चलता था कि इलाज चल रही है
हैं तो एक दिन राम के अलग-अलग लीलाओं का
खेल लिया मंचन
की होते-होते कि लंका मैं युद्ध कांड की
ली
याद दिला आए हो रही है
है तो उस दिन की जो लीला होनी थी सारे
एक्टर्स को बुलाया नित्यानंद पर बैठो बैठो
आज आज कौन सा खेल होगा तब सबको समझाया है
है और कहा कि आज मैं लक्ष्मण बनूंगा ओके
और नक्षत्रों तुम बनो तुम बनो तुम बनो तुम
हनुमान ऐसा सबको बता दिया और सबके पास है
और बताएं क्या क्या वचन कहना है दर्द की
स्क्रिप्ट
है अरे बताया था कि या फिर जब रावण मुझे
धमकाएगा और मेरे पास कोई विशेष अंतर है
को फेंक देगा तो फिर मैं मर जाऊंगा मरते
हुए हो जाऊंगा तो आप मित्र क्या करना मुझे
गोद में लेकर और रोना आ आ
है और फिर हनुमान को भेज देना हनुमान
कि तुम जाओ पहाड़ लेकर आना
कि पिछड़ेगा पहाड़ पर औषधि खोजेगा हनुमान
को पता नहीं चलेगा कौन से औषधि है ओके तो
नाटक शुरु हो गया है
है तो वाह क्या रावण बने थे उन्होंने
हमारे पास कई कक्ष मान लो
आप क्या समझते हो
कि हमारे पास विशेष अश्लाघ्य शीला है इस
तरह से फूल को फेंक दिया तो उसे के साथ
नित्यानंद प्रभु बेहोश हो गए और नित्यानंद
पर लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे थे तो फिर
सभी रोना भी प्रारंभ किए उनको अ
थे और लक्ष्मण जाओ नित्यानंद प्रभु थे
उनकी उनकी उपस्थिति हुई है समाचार सर्वत्र
फैल गया लड़ाई पंडित और पद्मावती भी वहां
पहुंच गए थे
कि अ
है और बच्चों को रोते हुए देखे तो वह भी
रोने लगे और बड़े चिंतित और बहुत समय बीत
गया तो बेहोश अवस्था में ही रहे न रहे हैं
तो ढूंढ रहे हैं
कि नित्यानंद प्रभु
कि सभी जब चिंतित थे तो अब इस स्थिति से
उनको पुनागर बाई अज्ञान की स्थिति में
लाना है तो बताया तो था आप क्या करना है
नेक्स्ट लेकिन सचमुच ही वह बेहोश हो गए तो
भूल गया क्या करना है घृणा हो लेकिन तो
सचमुच की कोशिश की
9th नित्यानंद प्रभु जो बलराम होल नेता आए
तो व्यापारियों में तो बलराम मेहता किंतु
रहता योग में पर लक्ष्मण है तो यहां जो
नित्यानंद प्रभु की भूमिका निभा रहे थे वे
साक्षात लक्ष्मण ने
है तो लक्ष्मण तो यह नाटक नहीं था बिल
नित्यानंद प्रभु के नाटक नहीं रहा वह
प्रेत आयोग में पहुंच गए ले लंका में
पहुंच गए और उस लीला में उन्होंने प्रवेश
किया और बेहोश होकर बेहोश ही रहे राधे की
लीला जब सचमुच होगी हनुमान जाएंगे और हम
पहाड़ लाएंगे फिर औषधि उन्होंने कहा था
मेरे रोशनी को मेरे नाम से मैं जो सॉन्ग
लूंगा जड़ी-बूटी को तो फिर मैं जाऊंगा तो
नित्यानंद प्रभु जो अब
के लक्ष्मण के भाव में आवेश में पा
कि ग्रेड है प्रयास हो गए थे
है तो मित्रों को पता नहीं चल वह भूल गया
नाटक निषेध एंड रामायण मोड यह नाटक तो
नहीं तो सचमुच हो तो वह भूल गए थे तो फिर
सब्सक्राइब करना चाहिए हुआ क्या कर सकते
हैं
कुछ तो होगा फिर याद आए उन्होंने कहा था
नित्यानंद प्रभु ने कहा था कि मैं जब एक
घोष का या
का रोना भी लगे नंबर भी तो कुछ करना था तो
क्या करना था तो हनुमान का रोग जो करना था
है तो हनुमान को भेजें थोड़ी देर में
हनुमान आगया आगया रहेगा पहाड़ को लेकर आया
हूं
कि अगर रख दिया अलंकार है
है तो फिर एक रुचिक कोई नाम है
हां हां संजीवनी बूटी का नाम संजीव है
लेकिन 196 यह के एक डॉक्टर थे हुसैन नामक
कि वे चढ़े और उन्होंने जो हो यह न मानी
लेकर आते लेकिन नॉलेज 19 आप देखा तो उनमें
से कौन सी है
के अवशेष दी है कौन सी जड़ी बूटी का माय
उनका पता नहीं चल रहा है तो इसलिए उन्हें
पार्ट कोटा खिलाया मैं थोड़ी जड़ी-बूटी
पड़ी जेब में रखे
के हाथ में बुर्के के रूप में लाख लेकर
आता है कि महिला या जड़ी बूटी पी गए
हनुमान पता नहीं लगा पाए थे इसलिए पहाड़
तोड़ लाएं तो उसे ने फिर जड़ी बूटी लाई और
तो हुसैन भी एक पात्र था उसमें था से
जुड़े पहाड़ पर थोड़ी देर में मुसहरी बूटी
कब ले आए और नासिका के समक्ष पकड़े तो हां
कर दो
इस तरह नित्यानंद सौभाग्य हम सभी प्रसन्न
हुए
है अरे वाव
हैं तो इस प्रकार
है कि लीलाओं का ही है
की बाल लीलाओं का वर्णन है नित्यानंद
प्रभु के अ
कि एक रचाकर ग्राम में जो अ
याद दिलाएं
कि नित्यानंद प्रभु जब 12 साल के थे 12
साल की उम्र के हैं तो उनके घर में
एक टेक्स परिव्राजकाचार्य मिक्स
साधु-महात्मा आ जाये
आ रहे और खूब सेवा की
कि पढ़ाई पंडित हिसार पद्मावती नहीं होंगे
इस
क्या हुआ और क्या हम कर सकते हैं पद्मावती
और राज पंडित कह रहा है हम आपको क्या
सहायता कर सकते हैं
हूं क्या दे सकते आपको तो इस
एक साधु ने कहा कि और तो कुछ नहीं है बस
आप के पुत्र को देख सकते हो
है कि ज्यादा धंधाला तो नहीं मांगूंगा मैं
पुत्र को दे दो
मैं चढ़ाई पंडित ने वचन दिया था आप जो भी
मांगोगे आप जो कहोगे वही मैं दे दूंगा अब
उन्होंने पुत्र को ही मांगा तो विवश है
कि भजन बंध है
कुछ तो दे दिए
कि विद्यानंद प्रभु को ऑफ
कि चतुर अधि
का हिस्सा देव नित्यानंद प्रभु को लेकर
वहां से जड़ से प्रस्थान किए तो जब
धीरे-धीरे पता चला दो
2014 ग्राम में कि ऐसे-ऐसे साधु बाबा आए
थे और वह नित्यानंद प्रभु को
के साथ में ले गए तो फिर हम कल्पना ही कर
सकते हैं जो बालक सभी की आंखों का तारा था
सेंट्र ऑप्शन जो रहा हूं
है और फिर लड़ाई पंडित और पद्मावती का तो
क्या कहना फिर जब नित्यानंद वहां से
प्रस्थान करने के बाद वैसे ही
कि इस बालक की कुंडली वगैरह भी देखी थी
है और तब पता चला
कि यह बालक साधारण नहीं था यह वाला तो
साक्षात भगवान बलराम मेह
थे लेकिन अब तो चिड़िया चुग गई खेत में
हाथ से निकल गया था गांव से निकाल दिया था
को खोज रहे थे लेकिन नहीं मिले
है न कि साधु बाबा में लेना दोस्तों
नित्यानंद मिले
9th बिरहा की व्यथा मैं रुपिया
कि जब कृष्ण-बलराम गए वृंदावन से मथुरा
है तो यहां
कि यह है बलराम जहां जन्म अव्वल ही है
वृंदावन है तो यह वृंदावन से है
कि अवधी आनंद प्रभु ने अ
मैं बलराम मोह लेता है प्रस्थान किए तो इस
ग्राम के वासियों की स्थिति वैसी ही युद्ध
जैसी इन गोपियों की हुई थी अ
है 3 महीने लड़ाई पंडित और पद्मावती ने
भोजन न तो भोजन किया ना तो जल ग्रहण किया
है
180 दिमाग नमः नैनीताल नैनीताल नैनीताल का
टैब कहां होनी ताहिनी ताहिर तथा त्यौहार
है तो बलराम हो विनीता है अ
है तो बलराम ही तो बने था नित्यानंद प्रभु
बने थे नित्यानंद प्रभु तो अब बलराम ने दी
से भ्रमण किया था तीर्थ यात्रा की थी
बलराम ने अ
मैं आपको क्या करूं यह बलराम है तो बलराम
ने तीर्थ यात्रा की थी कि नित्यानंद
शिरोमणि तीर्थयात्रा कि अगर की होगी तो
फिर हम मानेंगे कि फोन मे है बलराम से
है इसका सबूत है आ नित्यानंद प्रभु भी
यात्रा की है सारे भारत की यात्रा
उन्होंने है
कि इस साथियों के साथ स्वागत किया फिर
असिस्ट कर रहे थे इस
की साधना कर रहे थे सत्संग कर रहे थे
दर्शन कर रहे थे अलग-अलग धर्मों में
है तो
है तो इसका भी वर्णन है कई सारे धर्मों का
नाम इसका आप उसका कई सारे धाम
कि अ जितने सारे धाम है या बलराम
जहां-जहां गए थे वहां वाह नित्यानंद प्रभु
भी गए थे
कि अयोध्या भी गए और अयोध्या में है
का विद्रोह भी रहे थे वर्णन है त्रिवेणी
संगम भी गया वापिस नान भी किए और
की सारी दक्षिण भारत
कि यात्रा उन्होंने की
कि परशुराम से मिले परशुराम
मैं अखिल भारतवर्ष में आज भी रहते हैं
कि श्रीलंका एवं
जी हां
कि श्रीसैलम
कि भारत है
है अरे पहाड़ जा परशुराम उनको मिले कन्या
तुम्हारी गए शिव-पार्वती को मिले और शिव
पार्वती ने खूब आराधना की है नित्यानंद
प्रभु की भोजन खिलाया है
कि पंढरपुर गए थे
श्री राम की दीक्षा हुई है इसके पहले
माधवेंद्रपुरी से मिले थे दक्षिण भारत में
बहुत समय बिताया सात दिन माधवेंद्रपुरी के
सॉन्ग में रहे साधु ओं थे को भी और
नित्यानंद प्रभु भी अ
एक बड़े प्रभावित है
कि माधवेंद्र पुरी के संग से
माधवेंद्रपुरी एक विशिष्ट
तो अच्छा रहता है भगत है माधुर्य leela1
के माधुर्य का आस्वादन
थे जिन्होंने किया जिनसे फीयर
हां यार गौड़ीय वैष्णव इस जन्म
कि के प्रवर्तक अगर कोई है
मैं तो यह मानता भी माधवेंद्रपुरी
कि उनको सानिध्य उनका सानिध्य
माधवेंद्रपुरी को प्राप्त हुआ था से
पंडरपुरा आए
मैं अंकित दीक्षा हुई
कि इन से दीक्षा भी
कि क्या कमल
कि लक्ष्मी पति उसके भी बलराम ने जो
आदिगुरु है उन्होंने दीक्षा ली है
के पंढरपुर में है
कि लक्ष्मी पति को कहा है कल कोई आ रहा है
[संगीत]
हैं यस प्रात काल को जिसको मिला हो गए तो
पहले व्यक्ति को उसको दिशा देना है
इस प्रकार की व्यवस्था तो नेक्स्ट डे ई
कि विद्यानंद हुआ है
है और लक्ष्मी पति
कि मैं
की दुकान में मंत्र कहा
है और दिशा समारोह इसी प्रकार संपन्न हुआ
कि अधीक्षक होने के बाद फिर पुणे यह कि
भगवान अब बलराम के रूप में प्रकट होते हैं
तुमने जिस व्यक्ति को
[संगीत]
थे फिफ्थ लक्ष्मीपति काम मैंने भगवान को
दिशा दी है कि हो सकता है ऐसा क्यों कार्य
करवाया मुझे पहले कहा कि जो भी मिलता है
कल आपके पास आता है उसको दिखे यादव मुझे
पता पहले होता तो यह वाला आर्म होल नेता
तो मैं दिशा नहीं देता मई दिशा लेता है
कि ऐसा क्यों कार्य करवाया अब वह यह
नित्यानंद प्रभु इतने में आ
को मार रहे हो
आ रहे भंडारपुर में दीक्षा अभी लिए और
कि वहां से प्रस्थान भी की है तो इस
प्रकार यात्रा करते-करते नित्यानंद प्रभु
वृंदावन धाम गिद्धौर उनका अपना निजी धाम
है
कि तुम आप बलराम भाव में कृष्णा भाव में
कि आवेश में वह आते
कि यह कभी नित्यानंद प्रभु के रूप में
भक्ता वक्त भक्त स्वरूप भक्तों स्वरूप बने
हैं बलराम बने हैं नित्यानंद भक्त स्वरूप
तब वह कहां है कृष्ण कहा है कृष्णा
श्रंगार व नामक स्थान वाह लौटने लगे वहां
के धूले में कहा है कृष्णा हरे कृष्णा
कहां कब मिलेंगे कृष्णा राधे कृष्णा
की हीरोइन का वहां पता चलता है कि यहां
कृष्ण तो प्रकट हुए कहां है मेरा तन्हा एक
अरे कहां है मेरा प्रणाम
मैं तुम्हारा कन्हाई कान्हा तो प्रकट हो
चुका है इस अवधि में है
के पीछे समाचार राधा कुंड के तट पर
को मिलता है उनको तो वहां से प्रस्थान
करते हैं
कि नित्यानंद प्रभु नवदीप के लिए अ
कि नवोदय जब
में स्थित यंत्र बनाते हैं तो चैतन्य
महाप्रभु ले जाओ खो जाओ बने हरिदास हरिदास
ठाकुर को ज्यादा रखो जो एक विशेष व्यक्ति
का प्रवेश हुआ है नवदीप मैं है
कि नित्यानंद प्रभु आए अवधि में जाओ खोजो
तो यह दो प्रभु तो खोजते रहे खोज से रह-रह
नव-नव घंटे बिताए उन्होंने नवोदित 9 घंटे
भ्रमण करते रहे लेकिन
कि निमाई का पता नहीं चला जब मैंने यहां
पर खूब खोज ढूंढा नहीं मिले तो फिर अ
कि इतने महापुरुषों के चलो मैं खोजता हूं
आप मेरे साथ हैं
है तो उसे इतने महाप्रभु है
है आगे आगे जा रहे थे और अन्य भत्तों के
पीछे आ रहे थे तो वह अ
में प्रसिद्ध है
का व्यय क्या घर का नाम
कि नंदन आचार्य इसका उनका जहां
में इस्कान मंदिर से कुछ ही दूरी पर नंदन
आचार्य का घर
कि वह नित्यानंद प्रभु के रहे थे अच्छी
पैठ है तो चैतन्य महाप्रभु सीधे नंदन
आचार्य
कि घर की ओर गए घर में प्रवेश किया
नित्यानंद प्रभु के साथ
है कि शायद बलराम के साथ पहला अ
का मिलन हुआ
है तो वह अद्भुत मिलन रहा
है और दूसरों का गाढ़ आलिंगन या ह्यूमन का
रोमांचित हो ना और
एक बार लूटना और
कि ने अद्वितीय
का वर्णन है
कि उनके मिलन का तो यह
है तो चैतन्य महाप्रभु नवोदित में प्रकट
हुए थे है मायापुर में
है और एक चक्कर ग्राम में
का प्राकट्य नित्यानंद प्रभु का भी
निस्तारण फिर सारे भारतवर्ष का भ्रमण करते
हुए वृंदावन होते हुए भी नवदीप आए हैं और
पहली बार इन दोनों का आ
ए नवोदियन यार नंदना चार घर पर मिलन होता
है
मैं तुझे इतने महान होंगे कुछ बीच एक साल
के होंगे वापिस बहुत अधिक लगाते हैं
के हिसाब से हो तो अब जो दोनों साथ में
झुके तो साथ में
तो फिर रहे और रहेंगे अधिकतर
है और आप संकीर्तन नहीं का वितरण होगा
दोनों मिलकर क्या करेंगे संकीर्तन करेंगे
संकीर्तन आंदोलन की स्थापना करेंगे तो
श्रीवास आंगन में
आज शिवानी ठाकुर के घर में
का संकीर्तन प्रारंभ हुआ है
हैं तो जहां चैतन्य महाप्रभु नित्यानंद
प्रभु अनन्य भक्तों के साथ और केवल शुद्ध
भक्तों के साथ कीर्तन किया करते थे
है और उसी पैन में चैतन्य महाप्रभु भी मैं
तो फौरन नटराज है
है लेकिन नित्यानंद प्रभु भी अपने अपने
नृत्य के लिए प्रसिद्ध है
है या जहां नित्यानंद प्रभु नृत्य करते तो
वहां यह इतने महापौर व प्रकट हो जाते हैं
कि प्याज नित्यानंद प्रभु का नृत्य ताव
फिर चैतन्य महाप्रभु का बहाव प्राकट्य
होता है चेतन ने महापुरुष नित्यानंद प्रभु
के लिए
का कीर्तन और नृत्य से नाट्य आकृष्ट होता
है और स्वयं प्रकट होते हैं
है तो वह दिलवा रोना पूरा भागे जजमानी
गौरा मनी जागे भगत समूह लइया साथी मेहलन
अगर अपराजेय सारे नवोदित भर में उनके एक अ
है बांग्ला सोंग मैंने लगाए अलावा मेरा
छोटा सा
कि अवधी तवा है
के प्रधान रखेंगे
है तो यह नित्यानंद ने 537
को लगाएंगे तो नहीं लेकिन यह नित्यानंद
प्रभु का नींद आएगी पौधों का मामला कोटि
चंद्र और शुक्र शीतला हेयर छाया जगत जुड़ा
है
ए ए प्यून आइज जगत जुड़ा सवाल नित्यानंद
चुका है
कि पापा और है नित्यानंद प्रभुपाद अकरम
आला नेता विपदाओं का मामला कोटि चंद्र
शीतल है
कि नित्यानंद प्रभु के चरण कमल कैसे कोटि
चंद्र कोटि चंद्र कि जिस अश्लीलता है उतनी
शीतलता प्रदान करने वाले हैं नित्यानंद
प्रभु के चरण कमल जैन अनिता यादव इन
भाइयों राधा कृष्णा पीते इतना नित्यानंद
प्रभु के बिना गुरु है गुरु है राधाकृष्णन
पानी देना है
कि राधा कृष्ण की प्राप्ति नहीं होगी
नित्यानंद प्रभु के बिना इसीलिए क्या
करोड़ नौकरी धर्म नीता थाइरॉएड इसलिए ऊ
की जड़ करी थी
कि पकड़े रहो दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के
साथ नित्यानंद प्रभु के चरण कमल
है जैसा मंदिर नहीं जा वार व्रत कथा जन्म
गेलौं ताण जिसका संबंध नित्यानंद प्रभु से
नहीं है नित्यानंद प्रभु के चरणों का
आश्रय जिनको प्राप्त नहीं है उनका जन्म
व्यथा के लोगों को
हेलो व्यूअर्स है
को व्यर्थ है कि नहीं है सही पशु बड़ा
दुराचार और कैसा है पशु है दुराचारी पशु
है
यहां पर प्रसिद्ध सोच सुविचार होता ही
नहीं है
कि अगर नहीं स्मरण दिलाया है
कि पशु
कि नीता हिना बल लीला मुखेड़ मंजिल संसार
सूखे यह जो व्यक्ति अपने मुख से फिर
अंतरंग में भी नित्यानंद प्रभु का नाम
नहीं लेता है
कि विद्या नित्यानंद स्वामी नित्यानंद
स्वामी नित्यानंद स्वामी नित्यानंद सर
विदाई विधायक डा
का नाम नहीं लेता बलि ले मुखेड जिला
समाचार अशोक के तो उसको उसके संसार
कि मैं सुख खोजने की वृद्धि बढ़ेगी मजिलस
अनुसार रसूख है या वह मगना होगा तल्लीन
रहेगा का यह संसार सुख में
कि यह सांसारिक सुख प्राप्त करने की
अधिकारी की इच्छा बढ़ेगी उसकी पापाचारी
व्यभिचारी भ्रष्टाचारी अनाचारी
इस संसार में भ्रष्टाचार बढ़ चुका है
अन्ना एंड कंपनी अन्ना टीम कुछ कर रही है
उनको पता नहीं है जब तक और नित्यानंद का
नाम नहीं लेंगे है
है तब तक भ्रष्टाचार हटना नहीं है
और कब्रिस्तान 4 को हटाने वाली तो यह टीम
यहां बैठी है यह टीम हटाएंगे और
कि भ्रष्टाचार को अनाचार को दो
और अहंकारी मत हो भैया नेता यह पद्धति पास
हरियाणा नक्षत्र और सत्य कर ईंधन तो यह सब
कि अधोगति होगी अहंकार हिम्मत भैया अ
कि तीरा उनका अहंकार अंकारी में बनेंगे
है और आशा 13 सत्य करिश्मा ने असत्य को यह
क्या पाएंगे इस सत्य है
कि यह संसार में सब बाहर असत्य हो तो उसी
को फिर सत्य कहते हैं
के अनुसार सत्य कोई विरोध भी नहीं करता तो
असत्य ही
और सत्य के रूप में प्रकाशित होता है
और दूसरा कोई सुनने में आता ही नहीं है
हां तो फिर
कि असद 13 सत्य कर इमानी असत्य कोई
कि हम देश बॉडी एंड थिस बॉडी में यह शरीर
हमारे शरीर हम यह क्या है असत्य है लेकिन
इसी को तो मीन आवेश ऐसा कोई नहीं कहता
नाटक करते हैं तो मींस अ
यह तो बड़ा असत्य तो क्या है यह शरीर को
कि एक बड़ा सत्य बड़ा अ सत्य-असत्य का
आधार क्या है यह शरीर है इस असत्य शरीर को
ही सत्य करिश्मा ने असत्य के रूप में
स्वीकारा है
कि नीता एरर करुणा हवेची फॉर ब्रज की राधा
कृष्णा भाई जी को
है तो इंसान जाता है कि करुणासागर होगी तो
क्या होगा आ वृद्ध ब्राह्मण महिला वृंदावन
के राधा-कृष्ण की प्राप्ति होगी
और सुनाओ
है इधर अनीता अहिरवार चरणोदक खानी है
के लिए
कि नित्यानंद प्रभु के चरणों का आश्रय लो
नींद आए रोज चरण सत्य ताहरा सेवक नित्य
निदान अध्यक्ष रॉन नित्यानंद प्रभु के चरण
क्या है सत्य है
यहां पर कोई सत्य है तो क्या सत्य है
नित्यानंद प्रभु के चरण सत्यानंद
त्यौहारों के चरण सत्य है और ऐसे सत्य को
स्वीकार करने वाला उनका सेवक भी सत्य है
और नित्य भी सत्य है नित्य है
है इसीलिए उन चरणों की आशा है
है बस
आ रही है आशा नरोत्तम बड़ा दुखी नीता
थीमों रखकर सुखी राख रंग चरण रोप आशाओं को
हां सोना रोहतम
आप कह रहे हैं हम बड़े दुखी है
में ही नित्यानंद त्याग करो मुझे सुखी करो
और अपने चरणों के पास चरणों का आश्रम है
में रखो
कि इस प्रकार नित्यानंद स्टार निष्ठा नामक
दो
की प्रार्थना प्रार्थना है नरोत्तम दास
ठाकुर की प्रार्थना नित्यानंद प्रभु के अ
कि चरणो मैन अ
है और हम सभी की भी प्रार्थना है आज के
इन थिस
का परम पवित्र और
कि नित्यानंद त्रयोदशी के उपलक्ष्य में है
है तो संकीर्तन अ
कि यह दैन दौड़ नित्यानंद की है
का संगीत नहीं कभी तरह हो और उसमें भी
कि अ
9th ने संकीर्तन साथ में किया है नवद्वीप
मायापुर में में
थे रीडर ने आप भूल जाते हैं
कि जगन्नाथ पुरी है
को चेतावनी महापुरुष या दक्षिण भारत की
यात्रा की ढहाए रहे जगन्नाथपुरी में
मैं इतना रन प्रभु
है जो सदैव एक्शन
में चैतन्य महाप्रभु का सानिध्य चाहत है
कि वह भी जाते हैं
कि जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के समय जाता है
कि सारे भक्तों को साथ में लेकर जाते हैं
कि अलग-अलग स्थान के भक्त हैं
में भक्तों को लेकर नित्यानंद शुरूवात हुई
चार यह चैतन्य महाप्रभु के दर्शन सा ने
दिलाई कर्नाटक को
सोनू निगम का आना-जाना हुआ करता था चैतन्य
महाप्रभु उनको भूल जाओ जाओ कब से यह हो
जाओ तुम
के प्रचार में जाओ
में रहता है महाप्रभु ने हमको
का प्रचार करने के लिए नियुक्त किया था
कि प्योर प्रचार करो यह हरिदास
और सुनाओ जाओ पे नित्यानंद सुनो प्रति
घिरेगी हर घर में जाओ तो बस अब कहां हो
बोलो कृष्णा वो हे कृष्णा कृष्णा शिक्षा
चैतन्य महाप्रभु यादव नित्यानंद प्रभु
गुरु गुरु प्रचार करो करो प्रभु
कि नित्यानंद प्रभु व्यवस्था बनाए थे
एक अंग्रेज
मैं वसुंधरा वसुधा नामक भी पत्नी थी
ए पर्सन आईएस रन ओं
कि आखिर और नहीं रही तो फिर जान हवा आ
कि अब बहने थे वह सिस्टर्स आ
कि कोई कह रहा है कि तय हुआ था
है तो जानवा के नित्यानंद प्रोग्रेस विद
है और है
कि वीरभद्र
आज हम आपको उनके एक पुत्र और गंगा देवी
नामक बादशाह बेगम भाग्य प्रज्ञा ट्री उनके
पुत्र के रूप में और वीरभद्र के दिन के तो
पुत्र एक पुत्र एक पुत्री भी हम च
पदयात्रा में है
कि जब गए थे तो जान हवा के साथ उनका
ग्रहस्थ आश्रम जहां था
मैं यहां पर भी हम नित्यानंद प्रभु के
ग्रहस्थ आश्रम ओं
कि गांव भी गायब है क्या उनका आश्रम ओं
आ रहा
9th नित्यानंद प्रभु जी
कि उनका प्रचार फितरत
कि प्रभुदत्त देश हम इसे कहते हैं बंगाल
का प्रभुदत्त दीया आप प्रभु तो उनके प्रभु
है नित्य तने महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु ने
प्रदत्त प्रभु ने दिया हुआ प्रचार का
क्षेत्र प्रभावित देश नित्यानंद प्रभु है
है अरे बंगाल ओडिशा भर में प्रचार किया
करते थे
है सवा दो
है तो हरिदास ठाकुर नित्यानंद प्रभु की
टीम थी प्रचार में दोनों मिलकर जाता है
शो मोर
कि मुझे कई सारे
कि नित्यानंद प्रभु
ने अवधूत उन क्या विकास अब मलाइका ठीक है
उनके लाए और उनका व्
मेरे सारे हावभाव और सारे लीलाएं
के सारी दास्तां कुल कभी कबिरा है मैं
इनके साथ जाता थोड़ा-थोड़ा परेशानी में
परेशान करते हुए मुझसे परेशानी होती है कई
जाता है तो किसी घर में घुसकर वहां माखन
चोरी करते उनको मैं बलराम हो माखन की चोरी
कर ली चोरी करके माखन खाते हो तो दौड़ते
लेकिन घर के लोग बाहर चोर चोर तो उनको तो
वह
कि हरिदास मिलते
है तो हरिदास की पिटाई होती राघवानी की है
के प्रधानाचार्य को हरिदासन था जैसा हुआ
आज वैसा हुआ आज वैसा हुआ आज गांव में हम
गए तो कई गाय थी तो नीता ने क्या किया
है तो 2014 किया और पीरियड धूप अधीर
कि इस गाय के मालिक यौन उन्होंने कैसे
और अपना क्रोध व्यक्त किया फिर अ
है या कभी भी गंगा में बाढ़ आती है इनको
कोई चिंता नहीं है इस नदी में कूद पड़ते
हैं और उस जल गंगा के जल प्रवाह कैसे
खेलते घ्र ऐसे गोल-गोल चक्कर काटते हैं
अनंत शेष है संकर्षण संकर्षण
कि दूधसागर में
कि गांव यस है प्रैक्टिस है
मैं उल्टे नहीं ठहरते हैं
है अरुण उसके ऊपर फिर अ
कि भगवान पड़ते है विष्णु तो विष्णु की
जोश या है वह संघर्ष आनंद से यस तो वहीं
तो नित्यानंद प्रभु है तो उनके लिए जेल
में रहना तो जमीन पर रहने की बात है उनके
लिए जमीन और जल का कोई भी न तो जल का
अघ्र्य जल में प्रवेश किया हम अ
को प्लग लेवल से भी ऊंचा पानी मेहरा हमको
कोई चिंता नहीं है
और कभी-कभी वह आपकी उम्र क्रोकोडाइल्स
मगरमच्छ छवि है उनसे दूर पर नहीं जाता है
उनको पकड़ते हैं उनके साथ खेलते उनके पीठ
पर बैठते हुए हरिदास है
कि भगवान को क्या भाई जी
सेट करो को डायल जो भय उत्पन्न करने वाला
के भय उत्पन्न ना जिन्होंने किया घड़ियां
लिया भाई दिखाता है भय उत्पन्न नखत निर्णय
किया भगवान
कि उनके लिए क्या भाव है ऐसे घड़ियां से
इकरार से तो दो
कि वृषभ रिपोर्ट देते अद्वैताचार्य को आज
ऐसे हुआ और आज हम गए तो जगह मधाय वे शराबी
थे
के बाद विचार न्यूज़ सुना तो कहा कि
नित्यानंद भी शराबी है अ
मैं इसको भी नशा तब पूछ शराबी शराबी मिला
तो कुछ बोर्ड सदस्य एमके दृढ़ है
जो लौट के घर न
कि साउथ लीला में भी अ
अलार्म लगाए महायुद्ध धार जिला का
हुआ है
ए सईंया प्रचार कार्य हो रहा है चैतन्य
महाप्रभु की ओर से प्रचार कार्य कर रहे
हरिदास और नित्यानंद प्रभु तो जगह मधाय से
टकरा है दिन
कि अ
क्या हुआ तो यह सुनने वालों में से नहीं
थे जगाए मधाय बड़े दीन-हीन स्पीड है
महाबीर दो
कि कैसे होने पर प्रहार किया
[संगीत]
कि अ नित्यानंद प्रभु के भार से खून
निकलने लगा है
कि यह समाचार थे ने महापौर के पास पहुंचा
हो तो
कि इतने महाप्रभु सुधार शाहरुख खान चक्र
को ले आए तो नित्यानंद सुनाना सुदर्शन
चक्र को
हां मेरे पास है तो चक्र नहीं है मेरा हाल
कहां है मैंने हल को फेंक दिया हूं और
मैंने
कि किसको मुसल कोई फैंक दिया हूं
कि मुसलधार और हलधर अ
कि यह बलराम के दो क्या है
कि सशस्त्र है जिस किसी का वध करना है तो
वह कल से बलराम क्या करते हैं उसको आज में
खींचते हैं जो पास में आ गए तो दो
कि उसकी पिटाई करता है बहुत मुश्किल हल से
पकड़ लिया गले को पकड़कर फिर मुश्किल से
इसका शिव
है तो मेरे पास भी तो हथियार नहीं है आया
अपीयर्ड विद शार्प वेपन से
कि मैं
हैं तो आप इस हथियार का उपयोग नहीं कर
सकते हैं इस योग में सांगोपांग अस्तर
पार्षद निगम के पार्षद भी आपके
शस्त्रास्त्र है और हरिनाम ही हरे कृष्णा
हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम
हरे राम राम राम हरे हरे यही तो यही हंसता
है भगवान का सौंदर्य व्यस्त रहते हैं
कि भगवान के समुद्री को देखकर हिसार आ जाओ
दुष्ट तथा है हो समाप्त होती बांध का नाम
शस्त्र रहे हैं
में भी मिठास से ही है
एक तारा है शत्रुभाव है
कि उस माफ होता है
है और भागता है
में भक्तों की करुणा
कि तुम जगह मधाई नहीं आ नित्यानंद प्रभु
की करुणा को देखा है
में चैतन्य महाप्रभु तो दूसरे प्रकार की
करुणा दिखाने के लिए तैयार थे लेकिन
नित्यानंद प्रभु ने अ
मैं नहीं भूला आप नाम इस योग में नहीं आ
हैं तो उनकी करुणा का प्रभाव से है
कि नित्यानंद प्रभु की करुणा से प्रभावित
हुए जगह और मधाई है
है और द्रवित द्रवित हुए हैं
इस दौरान गिरा मधुर लीला जा रहा करनी
प्रवेश शीला ह्रदय निर्मल अब हेलो दूं कि
गौरंगा महाप्रभु के लाया नित्यानंद प्रभु
की लीलाओं का श्रवण करता है उनके रूप का
दर्शन करता है उनके करुणा का कोई अनुभव
करता है तो कृपया निर्मल होता है
कि पशु पाखी झूरे पाषाण अभी धरे सुंधा रघु
था नित्यानंद की गुणगान था उनके पिता अरुण
को
कि का अनुभव करके पशु-पक्षी झूरे तो यहां
पशु वध यह
कि यह दो
कि तुम झाल जगाए मधाय चले का नाम जगदानंद
दूसरे माध्वानंद थे जगदानंद जगह और
माध्वानंद मधुर कितना अच्छा नाम सही है
है तब है
कि शॉर्ट फॉर्म है शॉर्ट फॉर्म
ए हवा माध्वानंद और जगदानंद अ
है तो उस जगह मधाय है
में मुद्रित हुए हैं
की दौड़ नित्यानंद की है
और करुणा अ
कि का उन्होंने
का अनुभव किया तब और जगह विधायक हैं
कि का उद्धार हुआ है
कि उन्होंने है
कि गोलोक एरर प्रेम आधीन हरि नाम संकीर्तन
अ
हैं तो कुछ नित्यानंद दोनों भी लाए हैं यह
अपने धाम का धान तो उसका वितरण शाम दो
दामों दो या संकीर्तन ही का पितरों दोनों
ने वितरण किया
एक अदद उद्धार किया है
यह सवा दो
और यदि नहीं नायता से लो हरि नाम में
सुधार लो देर शाम शुद्ध आय मधुर
9th दीन हीन व्यक्ति का भी
में पपीता पी का उद्धार संभव है इस योग
में
कि इसके सबूत है जगाई मधाय इसका ज्वलंत
उदाहरण है जगह मधाय का उद्धार तो यहां पर
को इज्जत टीम में पड़ रहा गौर निताई का
गौरव निदान टीम टीम टीम में जब मैं
नित्यानंद प्रभु की विशेष करुणा का
प्रदर्शन हुआ है होता है इस
को जगाए मदारी जैसे पतितों के वह धार में
है
कि हमारे उद्धार में भी
कि हमारे सुधार कर होना है तो किस की कृपा
से उद्धार होगा नित्यानंद प्रभु की कृपा
पास है
कि यह प्रश्र आधार भगवत प्रसाद यादव आदि
गुरु बलराम नित्यानंद है
मैं इग्नोर पास हमारा भी अ
में सुधार होगा और
को रुपयों का उद्धार किया उन्होंने है
है और आज भी कर रहे हैं यह नहीं कि आप 500
वर्ष पूर्व और करके अब इसको पूर्ण विराम
दिया
है तो जो प्रकट लीला थी हो तो है
कि उसका रूपांतरण है
और अप्रकट लीला में हुआ
है लेकिन गौनिया के लीला अ
कि उनका आंदोलन संकीर्तन है
थे मोमेंट का फैलना
तो चल ही रहा है तो गौर निताई गौर निताई
साथ में है गौर निताई के कारण
है अरे दोनों ने भी कहा था कि अ
कि यह संकीर्तन अंदोलन है है
है इसका प्रचार और प्रसार होगा अ
[संगीत]
कि ऐसा कीर्तन कर चेतन महापूजा प्रस्थान
कर रहे थे जगन्नाथ पुरी से
मैं तुझे देने महाप्रभु आगे बढ़े लेकिन
नित्यानंद तू वहां का है ऐसा कीर्तन
क्षेत्र के प्रश्न के समय दक्षिण भारत की
यात्रा के प्रति कीर्तन एक समय सारे विश्व
में होगा नित्यानंद प्रभु थे तो प्रति
ग्राम प्रचार होवे रे नाम नाम सें तिरे
नाम
कि आप रहना बाल राम का नाम यह हरे राम हरे
राम जो है यह राम
मैं बलराम भी है बलराम ऑयल नेता है
कि हरिराम नित्यानंद राम ही है
कि मुझे अब हम
इस तवा मोरना मेरे नाम का प्रचार होगा
मतलब हरी कृष्ण था प्रचारों के हरे राम का
प्रसारण मंत्री कृष्ण का प्रचार होगा राम
का बलराम का भी प्रचार होगा मेरे नाम का अ
में सर्वत्र प्रचार मीडिया नाम
के अनुसार आप प्रचार होते-होते
मैं यहां भी अ
का प्रचार हो रहा है
है अरे जान त्रयोदशी महोत्सव बखिरा और हो
कि प्योर है
एक लड़की
हुआ है
और सुनाओ
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