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THE PLACEBO-द प्लेसिबो हिंदी बुक समरी

1h 16m 24s15,368 words1,801 segmentsHindi

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इंट्रोडक्शन अगर आपसे कोई यह कहे की आप

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अपने दिमाग से किसी भी बीमारी का इलाज कर

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सकते हैं तो आप उसे व्यक्ति को क्या

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कहेंगे हो सकता है आप उसे अंधविश्वासी

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कहें यहां तक की ऐसा भी हो सकता है की कुछ

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लोग उसे पागल भी घोषित करते हैं लेकिन हम

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आपको बताएंगे की ये बात पुरी तरह से गलत

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नहीं है आप अपने दिमाग से किसी बीमारी का

0:21

इलाज भले ही ना कर पे लेकिन हम इतना जरूर

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का सकते हैं की आपके दिमाग की शक्ति के

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बिना कोई भी दवाई आपको ठीक नहीं कर शक्ति

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है बॉलीवुड में एक फिल्म काफी फेमस हुई थी

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जिसका नाम था लूटेरा इस फिल्म में हीरोइन

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यह मां लेती है की वो अब कभी भी अपनी

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बीमारी से ठीक नहीं होगी और जब उसके घर के

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सामने लगे एक पेड़ पर लगा आखिरी पत्ता गिर

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जाएगा तो उसे वक्त वो भी इस दुनिया को

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अलविदा का देगी डॉक्टर उसे ठीक करने की

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बहुत कोशिश करते हैं लेकिन हर डॉक्टर अंत

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में यही कहता है की जब तक मैरिज को ठीक

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नहीं होना चाहे तब तक उसका इलाज किसी भी

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दवाई से किया जाना असंभव है हम अपने दिमाग

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की ताकत को काफी अडं एक्टिवा एक्टिवेट

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करते हैं हालांकि हमने ऐसे कई सारे

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एग्जांपल्स देखें हैं जिनके बड़े में कहा

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जाता था की इन्हें पूरा कर पन असंभव है पर

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हम में से ही कुछ लोगों ने इन्हीं असंभव

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केमोन को संभव करके दिखाए और आज भी हमारे

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सामने ऐसे कई एग्जांपल्स हैं लेकिन हम

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हमेशा से ये मानते आए हैं की इन लोगों को

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विशेष और गॉड गिफ्ट ही बनाया गया है ताकि

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वो कुछ बड़ा कर सकें हमने ये भी मां लिया

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की हो सकता है उन लोगों का दिमाग हमसे कुछ

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अलग हो और इसलिए वो इन चीजों को कर पे हो

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जिन्हें करने के बड़े में हम कभी सोच भी

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नहीं पे थे लेकिन यह बात पुरी तरह से सच

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नहीं है क्योंकि हम सबका दिमाग लगभग एक

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जैसा ही विकसित है तो अगर आप किसी ऐसे

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हिंदी व्यक्ति को देखते हैं जो किसी

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क्षेत्र में बहुत आगे जा चुका है तो आपको

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यह नहीं मानना है की उसका दिमाग अलग है

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आपको बस यह ध्यान में रखना है की उसने

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अपने दिमाग का आपसे ज्यादा इस्तेमाल किया

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है अगर आप भी चाहे तो ऐसे ही बड़े मुकाम

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हासिल कर सकते हैं जरूर है तो आपको अपने

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दिमाग की शक्ति पहचान की तो इसलिए हमें यह

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जानना चाहिए की आखिरकार दिमाग हमारे कम को

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किस प्रकार से प्रभावित करता है वैसे तो

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दिमाग का कम सोचना और अच्छे बुरे डिसीजंस

2:12

को लेना है लेकिन यह दिमाग का एक छोटा सा

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हिस्सा है पर की आप जानते हैं दिमाग का एक

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बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जिसके बड़े में हम

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ज्यादा बात ही नहीं करते दिमाग का ये

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हिस्सा हमारी जिंदगी को बिल्कुल अलग दिशा

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दे सकता है यही हिस्सा हमारे सोने के

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तरीके को ते करते हुए हमें सफल या

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नाकामयाब बनाता है तो दिमाग के इसी गहरी

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राज को हम आपके सामने लेकर आए हैं डॉक्टर

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जो डिस्पेंजा की विश्व प्रसिद्ध किताब यू

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आर डी समरी के जरिए

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आपको ना सिर्फ अपने दिमाग की वास्तविक

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ताकत को पहचान में मदद करेगी बल्कि यह भी

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सिखाएगा की आपके इस तरह अपने दिमाग का

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इस्तेमाल करके जीवन में एक बेहतर मुकाम

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हासिल कर सकते हैं आप यह भी जानेंगे की

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कैसे हमारा दिमाग एक तरह से हमारी किस्मत

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लिखना है और अगर हम इस पर पूरा कंट्रोल रख

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ले तो हमारी दिखने वाले भी हम खुद ही

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होंगे तो चलिए +ibo के बड़े में आपको

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साड़ी जानकारी देने के साथ-साथ कुछ ऐसे

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लोगों की कहानी भी बताना जरूरी है जिनकी

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जिंदगी बादल कर रख दी अमेरिका के एक शहर

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में एक सेन नाम का रिटायर्ड जूते बेचे

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वाला व्यक्ति रहा करता था जिसकी उम्र करीब

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70 साल की होगी उसकी जिंदगी में हेल्प से

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जुड़ी कभी कोई भी समस्या नहीं थी लेकिन एक

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दिन अचानक से उसे यह एहसास हुआ की उसे

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चीजों को निगलने में काफी तकलीफ होती है

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जब वो डॉक्टर के पास गया तो पता लगा की

3:32

उसके गले में कैंसर है ये बात साल 1970 की

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है और उसे वक्त कैंसर का कोई भी इलाज

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मौजूद नहीं था जब स्वयं को यह बात पता चली

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तो वो पुरी तरह से टूट गया और ये मां बैठा

3:43

की अब उसका अंत नजदीक ए चुका है और उसके

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पास अब इस दुनिया को देखने के लिए बहुत ही

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कम वक्त बच्चा है डॉक्टर ने स्वयं से कहा

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की वो उसकी जान बचाने की एक आखरी कोशिश कर

3:53

सकते हैं और इसके लिए स्वयं को सर्जरी

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करनी पड़ेगी पर सर्जरी के बाद स्वयं को एक

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और बुरी खबर मिली उससे बताया गया की उसका

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यह कैंसर लिवर में भी फेल चुका है अब सम

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पुरी तरह से निरसा हो चुका था और उसके

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अंदर जिंदा रहने की कोई उम्मीद नहीं बच्ची

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थी वो अपनी पत्नी के साथ एक नए शहर में

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शिफ्ट हो गया और एक नए डॉक्टर के पास इलाज

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के लिए जान लगा यह नया डॉक्टर एक अलग किम

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का व्यक्ति था जो स्वयं से हमेशा मुस्कुरा

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कर बात करता और उसे हमेशा कहता की वो ठीक

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हो जाएगा इस डॉक्टर से मिलने के बाद से सम

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काफी बेहतर महसूस करने लगा था डॉक्टर और

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स्वयं काफी करीब ए गए थे और वो दोनों एक

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दूसरे के साथ अपनी जिंदगी की बातें किया

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करते एक दिन उसे डॉक्टर ने स्वयं से पूछा

4:32

की क्या कोई ऐसी चीज है जो तुम चाहते हो

4:35

की मैं तुम्हारे लिए करूं तो हमने कहा की

4:38

वह अपनी जिंदगी का आखरी किस्मत सेलिब्रेट

4:40

करना चाहता है और इसलिए उसने डॉक्टर से

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रिक्वेस्ट की की वो कैसे भी करके उसे

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क्रिसमस तक जिंदा रखना की कोशिश करें तो

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उसे डॉक्टर ने स्वयं से वादा किया की वो

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जरूर क्रिसमस तक उसे जिंदा रखेंगे इस घटना

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के बाद स्वयं काफी बेहतर महसूस कर रहा था

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और उसकी हालात में काफी सुधार दिखे रहा था

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अब उसका खाना पीना भी काफी हद तक ठीक हो

4:59

चुका था लेकिन क्रिसमस के एक हफ्ते बाद से

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की तबीयत फिर खराब हो गई डॉक्टर को कुछ

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समझ नहीं ए रहा था की कल तक स्वयं काफी

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अच्छा खास था पर अचानक से ऐसा क्या हो गया

5:09

जो उसकी तबीयत इतनी खराब हो गई डॉक्टर ने

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जब जांच की तब जांच में ऐसा कुछ भी अलग

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सामने नहीं आया और 24 घंटा के अंदर साड़ी

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कोशिशें के बावजूद से की मौत हो गई अब आप

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सोच रहे होंगे की इस तरह तो कैंसर से

5:23

हजारों लोगों की मौत होती है तो इस कैसे

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में ऐसा क्या खास है जो इसके बड़े में हम

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इतनी बातें कर रहे हैं दरअसल स्वयं की मौत

5:31

के बाद जब उसके शरीर की ऑटोप्सी की गई तो

5:34

उसने पाया गया की उसे कैंसर था ही नहीं

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उसके लिवर में बस एक छोटी सी गांठ थी और

5:39

यह गांठ भी इतनी खतरनाक नहीं थी जिसकी वजह

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से उसकी मौत हो जाए इस घटना ने डॉक्टर को

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यह समझाया की किसी मैरिज का ठीक होना या

5:47

ना होना दवाइयां के साथ-साथ उसके विश्वास

5:49

पर भी डिपेंड करता है

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की वो केवल क्रिसमस तक ही जिंदा रहेगा

5:55

क्योंकि डॉक्टर ने उसे कहा था की वो

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क्रिसमस तक उसे जिंदा रख लेंगे इस वजह नया

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विश्वास ए गया था की क्रिसमस तक इस जिंदा

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रहने में कोई दिक्कत नहीं आएगी और इसका

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असर उसकी सेहत पर भी दिखा जब उसकी तबीयत

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काफी ठीक होने लगी थी पर क्रिसमस खत्म

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होने के बाद सामने मां ही मां यह मां लिया

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था की अब वो जिंदा नहीं बैक पाएगा जिसका

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नतीजा ये हुआ की वो केवल एक ऐसी बीमारी के

6:19

बड़े में सोचते हुए मा गया जो उसे कभी थी

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ही नहीं यही से हम बात करना शुरू करेंगे

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नसीबों की चलिए आपको शुरू से बताते हैं की

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आखिरकार +i वो है क्या मेडिकल की भाषा में

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प्लूसिबो का मतलब होता है मैरिज के दिमाग

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में वहां पैदा करके उसे ठीक करना कई बार

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ऐसा देखा गया है की व्यक्ति खुद ही अपने

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आप से हर जाता है और ऐसी हालात में वो कभी

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ठीक ही नहीं हो पता यही वो समय है जब

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नसीबो अपना कम शुरू करता है जब कोई डॉक्टर

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मैरिज से लगातार यह कहे की वह तो बिल्कुल

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ठीक है और जल्दी ही उसे हॉस्पिटल से

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डिस्चार्ज कर दिया जाएगा तो इसका उसे

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मैरिज के दिमाग पर एक पॉजिटिव असर होता है

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और यह असर उसके दिमाग पर इतना गहरा पड़ता

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है की वो धीरे-धीरे ठीक भी होने लगता है

7:01

इसी को हम +i वो कहते हैं हमारा सोने का

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तरीका हमारी हेल्थ को बहुत ज्यादा

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प्रभावित करता है और ये बात कई बार

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अलग-अलग रिसर्च में साबित भी हो चुकी है

7:10

यहां तक की हम कितने साल तक जिएंगे ये

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इसको भी काफी हद तक अफेक्ट करता है इसे एक

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एग्जांपल की मदद से आपको समझते हैं मियो

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क्लीनिक में साल 2002 में एक रिसर्च पुरी

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की गई जो करीब 30 साल पहले शुरू की गई थी

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इस रिसर्च में करीब-करीब 447 लोगों ने

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हिस्सा लिया और 30 सालों तक उनसे लगातार

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उनकी हेल्थ के बड़े में पूछा गया इस

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रिसर्च के अंत में वैज्ञानिकों को यह बात

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पता लगी की वह लोग ज्यादा समय तक जिंदा र

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रहे थे जो ऑप्टिमिस्टिक थे ऑप्टिमिस्टिक

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को हम आसन भाषा में एक आशावादी आदमी का

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सकते हैं ये एक ऐसा इंसान होता है जो किसी

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भी कंडीशन में हमेशा पॉजिटिव रहने के साथ

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साथ हर मुश्किल से मुश्किल हालात में

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उम्मीद की एक किरण ढूंढ ही लेट है इस

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रिसर्च में ये पाया गया की ऑप्टिमिस्टिक

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लोगों के ज्यादा जीने के असर 90% से भी

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अधिक हैं ऐसा इसलिए क्योंकि हमारा दिमाग

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हमारे शरीर को पुरी तरह से कंट्रोल करता

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है और अगर हमारा दिमाग लगातार ये सोचता

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रहे की हमारा लंबे समय तक जीना संभव नहीं

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तो ऐसे में वो इस शरीर को बचाने की ज्यादा

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कोशिश भी नहीं करता है जब भी कोई बीमारी

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शरीर में आई है तो दिमाग में एक बात पहले

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से ही सेट हो जाति है की वो ज्यादा लंबे

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समय तक नहीं जिएगा दिमाग के कंट्रोल करने

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की बात को आप एक और एग्जांपल से समझ सकते

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हैं नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के एक रिसर्च

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में ये पाया गया की जितने लोगों की कीमत

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थेरेपी की जाति है उनमें से लगभग 30% लोग

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कीमोथेरेपी का सिर्फ नाम ही सुनकर उल्टी

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कर देते हैं पर क्या आप जानते हैं की ये

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वही लोग हैं जो कैंसर से अब रिकवर हो चुके

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हैं भले ही की मौत भी अब उनके जीवन का

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हिस्सा नहीं है लेकिन इसकी बावजूद भी उनके

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सामने अगर कोई कीमोथेरेपी की बात भी करता

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है तो उन्हें उल्टी होने लगती है कुछ ऐसे

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पेशेंट भी हैं जो अगर कभी फिर से हॉस्पिटल

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भी जैन तो उनका जी घबराने लगता है और

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उन्हें उल्टियां होने लगती है ऐसा इसलिए

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क्योंकि उनका दिमाग उन पुराने अनुभवों को

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एकदम अच्छी तरह से याद रखना और हमारे शरीर

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में केवल उन एक्सपिरिएंसेसिस के बड़े में

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सोने से ही बदलाव होना शुरू हो जाता है तो

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देखा आपने की दिमाग की ताकत इतनी है की वह

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किसी चीज का असर तब भी दिखा सकता है जब वो

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चीज अल में आपके अंदर हो ही नसीबो को लेकर

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एक और रिसर्च की गई और इस बार रिसर्च

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पार्किंसन बीमारी के मरीज पर की गई थी

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पार्किंसन डिजीज ने आपके दिमाग का एक

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हिस्सा धीरे-धीरे खत्म होने लगता है जिसकी

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वजह से आप अपने हाथों और पैरों की मूवमेंट

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को कंट्रोल नहीं कर पाते और इसलिए आपके

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हाथ और पर कापणे लगता हैं इस रिसर्च को

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करने के लिए वैज्ञानिकों ने इन मरीज से

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कहा की उन्हें एक ऐसी नई दवा दी जा रही है

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जिसकी वजह से उनके शरीर का कांपना कम हो

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जाएगा ऐसा कहकर उन्हें एक इंजेक्शन लगाया

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गया और कुछ दोनों के बाद ये देखा गया की

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लगभग सभी मैरिज के सिम्टम्स अब कुछ ना कुछ

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हद तक कम हुए थे हैरानी की बात तो यह है

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की इनमें से किसी को भी ऐसी कोई विशेष दवा

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नहीं दी गई थी जिसकी वजह से ऐसा हो सके

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उन्हें तो बस नॉर्मल सलाइन का इंजेक्शन

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दिया गया था ताकि उनको ऐसा वहां हो की

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उन्हें एक खास दवाई दी गई है बाद में

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वैज्ञानिकों ने जब इन मरीज के दिमाग को

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देखा तो समझ में आया की इन मरीज के दिमाग

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में डोपमैन पहले से लगभग दोगुना बन रहा था

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ज्यादातर इतने डोपामिन को पैदा करने के

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लिए आपको एक दवाई का बड़ा और स्ट्रांग

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दोस्त देना पड़ता है ये +ibo इफेक्ट ही था

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जिसकी वजह से दिमाग उसे चीज को पैदा करने

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लगा जिससे पैदा करने के लिए एक मैरिज को

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कई साड़ी दवाइयां देनी पड़ती है नसीबो

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इफेक्ट के बड़े में ऐसी कई साड़ी रिसर्च

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हो चुकी है जिम ये पाया गया की दिमाग उन

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हारमोंस को ज्यादा पैदा करने ग गया

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जिन्हें पैदा करने के लिए नॉर्मली किसी भी

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मैरिज को कई साड़ी दवाइयां देनी पड़ती हैं

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हमें यह समझना होगा की आज कई साड़ी

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बीमारियां ऐसी हैं जो पुरी तरह से हमारे

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दिमाग के कंट्रोल में है जैसे की कुछ

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लोगों को डायबिटीज इसलिए होता है क्योंकि

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उनके पेनक्रियाज ने इंसुलिन पैदा करना या

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तो कम कर दिया है या फिर बैंड ही कर दिया

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है यह समझना जरूरी है की इंसुलिन पैदा

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करने का यह प्रोसेस भी दिमाग पर ही डिपेंड

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करता है अगर इस दिमाग पर इंसुलिन पैदा

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करने का जोर डालें तो शायद

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के चलते हमें एक डायबिटिक पेशेंट के अंदर

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भी सुधार देखने को मिल जाए पर इसके लिए

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सही हालात में होना चाहिए केवल तभी हम

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दिमाग के जारी इंसुलिन पैदा करने का असर

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उसे पर दाल सकते हैं

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रासिबो का इतिहास हमने पिछले एपिसोड में

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यह जाना की किस तरह प्रासिबो इफेक्ट की

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मदद से मरीज के जीवन में पॉजिटिव बदलाव

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लाया गया हमने ये भी देखा की कैसे अलग-अलग

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रिसर्च में भी प्लाजन का ये असर पेशंस पर

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हुआ चलिए अब हम जानते हैं की आखिरकार कैसे

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पहले बार ये चीज लोगों के सामने आई और

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किसने पहले बार इस चीज को नोटिस किया

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक अमेरिकी

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सजन हेनरी युद्ध में घायल लोगों का इलाज

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करने का कम किया करते थे पर एक बार उनके

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पास मॉर्फिन दवाई खत्म हो गई मॉर्फिन वो

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दवा है जिसे एक मैरिज को देने के बाद उसे

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दर्द का पता ही नहीं चला हांडी को ये बात

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पता थी की अगर उसने बिना मॉर्फिन दी है

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किसी का इलाज किया तो पेशेंट दर्द के चलते

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शौक में चला जाएगा और इससे उसकी मौत भी हो

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शक्ति है उसने नर्स को कहा की वो पेशेंट

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को एक नॉर्मल सलाइन का इंजेक्शन लगा दे और

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उससे कहे की उसे मॉर्फिन दे दिया गया है

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जैसे ही पेशेंट को मॉर्फिन का झूठ है

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इंजेक्शन लगाया गया वो शांत होने लगा और

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ऐसे व्यवहार करने लगा जैसे की उसे सच में

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मॉर्फिन दी गई है इसके बाद हिंदी न्यूज़

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हैं का ऑपरेशन भी किया और वो ठीक हो गया

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हालांकि उसे दर्द तो हुआ था लेकिन तब भी

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उसे दर्द को उसने बिना ज्यादा तकलीफ के

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सहन कर लिया और शौक में भी नहीं गया हांडी

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को इस बात को लेकर बहुत हैरानी हुई की

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आखिरकार कैसे एक मामले इंजेक्शन इंसान के

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दिमाग में इतना वहां पैदा कर सकता है की

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उसे ऑपरेशन जितना भयंकर दर्द भी महसूस ना

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हो इस घटना के बाद हांडी के पास जब भी

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मॉर्फिन खत्म हुई उसने यही प्रोसीजर

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बार-बार दोहराया ऑपरेशन को एक नॉर्मल

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सलाइन का इंजेक्शन देता और उन्होंने कहता

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की उसे मॉर्फिन दे दिया गया है और इस तरह

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उसने बिना मॉर्फिन के ही कई साड़ी सर्जरीज

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कर दी साल 1955 में हैंडल ने अपना एक

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रिसर्च पेपर पब्लिश किया जिसमें उसने ये

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बात की की किस तरह हमारे थॉट और बिलीव

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सिस्टम से हम फिजिकल रियलिटी को बादल सकते

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हैं ये बात तो ते है की हेनरी से पहले भी

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कई सारे लोगों के जीवन में इस चीज से फर्क

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आया होगा हो सकता है की आपकी जिंदगी में

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भी कभी कोई ऐसी घटना हुई हो जब आपके ऊपर

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भी प्लासी ने अपना सर दिखाए हो इसका सबसे

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बेहतर एग्जांपल एक छोटा बच्चा है जब छोटे

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बच्चे को चोट लगती है तो पहले कुछ सेकंड

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तो वो चुप राहत है और जब घरवालों से चोट

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लगे पर कुछ करने लगे या उसकी चोट लगी हुई

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जगह पर मालिश करने लगे तो बच्चा रोना शुरू

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कर देता है बच्चे को ये बात पता होती है

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की उसके घर वाले ऐसा उसके साथ तब करते हैं

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जब उसे कभी दर्द होता हो तो अगर कभी उसके

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घर वाले ऐसा करते हैं तो इसका मतलब ये है

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की जरूर उसे दर्द हो रहा होगा भले ही उसे

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दर्द ना हो रहा हो इस तरह से वो दर्द को

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महसूस करके रोना शुरू कर देता है तो हमारे

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खाने का मतलब ये है की प्लस ही वो इफेक्ट

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सदियों से हमारे बीच में मौजूद है लेकिन

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इसके बड़े में गहरी रिसर्च 20वीं साड़ी

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में आकर ही शुरू हुई और आज भी इसके ऊपर

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लगातार रिसर्च जारी है की कैसे हमारा

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बिलीव सिस्टम हमारे शरीर पर इतना ज्यादा

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असर दिखा सकता है भारत में ज्यादातर लोग

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साइन बाबा की कहानी जानते हैं की कैसे वो

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अपने बीमा भक्तों को एक विभूति देते थे और

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उससे उनकी बीमारी ठीक हो जाति थी उन

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भक्तों को साइन बाबा पर इतना विश्वास था

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की वो मां ही मां इस बात को मां लेते की

14:14

इस विभूति को अपने सर पर इसे वह ठीक हिंदू

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धर्म के अलावा क्रिश्चियनिटी में भी ऐसे

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कई एग्जांपल्स देखेंगे जहां केवल विश्वास

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के चलते लोगों ने बड़े-बड़े चमत्कार होते

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देखें हैं आज भी वैज्ञानिक रस्सी को

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इफेक्ट की लिमिट के बड़े में सोने में लगे

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हुए हैं वो ये जानना चाहते हैं की आखिरकार

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इस रहस्यमई ताकत की सीमा क्या है और किस

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हद तक इसका अल लोगों पर पढ़ सकता है आपको

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यह जानकर हैरानी होगी की आज कैंसर जैसी

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बड़ी बीमारी में भी प्लासिबो इफेक्ट का

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बहुत बड़ा रोल है और इसलिए कैंसर के मैरिज

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को डॉक्टर हमेशा पॉजिटिव रहने की सलाह

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देते हैं चलिए अब हम लसिवों का उल्टा यानी

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की नसीबों के बड़े में बात करते हुए यह जन

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की कोशिश करते हैं की यह हमारे शरीर पर

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किस तरह का असर करता है अलग-अलग

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सिविलाइजेशन की पुरानी कहानियां में एक

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बात जो सबसे आम है वो ये की उन सब में

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श्राप देने की कहानी बहुत मशहूर होती हैं

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इन कहानियां में हमने कई बार यह देखा है

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की किस तरह एक धार्मिक इंसान दूसरों पर

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नाराज होकर उन्हें श्राप देता है और जिसकी

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वजह से उसे इंसान की तबीयत इतनी बिगड़

15:16

करती है की वो धीरे-धीरे करने ग जाता है

15:18

इतना ही नहीं इस बीमारी का इलाज कोई भी

15:21

डॉक्टर नहीं कर पता साल 1940 में एक

15:24

फिजियोलॉजिस्ट वॉटर रेड फोर्ट ने इन

15:27

कहानियां पर कम करना शुरू किया और अपने इस

15:30

रिसर्च से उन्होंने समझा की किस तरह हमारा

15:32

शरीर और हमारे इमोशन हमें बीमा करने के

15:35

साथ साथ हमें ठीक भी कर सकते हैं वॉटर का

15:38

मानना था की पुरानी कहानियां में लोगों के

15:40

बीमा पढ़ने की वजह केवल और केवल उनके खुद

15:43

के विचार थे वह ऐसा मां चुके थे की क्यों

15:46

की उन्हें श्राप दिया गया है तो उनके साथ

15:48

जरूर कुछ ना कुछ बड़ा ही होगा साल 1960

15:51

में इस तरह की चीजों को नसीबों कहा गया था

15:54

नसीबो इफेक्ट नसीबो इफेक्ट का ठीक उल्टा

15:57

है जहां नसीबो इफेक्ट में आदमी पॉजिटिव

15:59

बातें सुनकर ठीक हो जाता है तो वही नसीबो

16:02

इफेक्ट में एक हेल्दी आदमी भी किसी की

16:04

नेगेटिव बातें सुनकर बीमा पर जाता है

16:06

हालांकि नसीबो इफेक्ट पर रिसर्च बहुत कम

16:09

हुए हैं क्योंकि इससे सर्च के लिए किसी ना

16:11

किसी इंसान को अपनी हेल्थ को खतरे में

16:13

डालना पद सकता है लेकिन तब भी साल 1962 एक

16:16

एक्सपेरिमेंट किया गया जापान में कुछ

16:18

बच्चे ऐसे थे जिनको एक खास पेड़ की पट्टी

16:21

से एलर्जी थी रिसर्च करने वाले लोगों ने

16:23

इन बच्चों के हाथों पर उसे पट्टी को रगड़ा

16:25

और उन्हें बताया की ये पट्टी उन्हें कोई

16:28

नुकसान नहीं करेगी इस रिसर्च में देखा गया

16:30

की उन 13 में से 11 बच्चों के हाथों पर

16:33

किसी तरह का एलर्जिक रिएक्शन नहीं हुआ तो

16:36

एक बार फिर से हमारे सामने सवाल आता है की

16:38

आखिरकार ऐसा कैसे हो गया वैज्ञानिकों ने

16:41

इसी एक्सपेरिमेंट को आगे बढ़ाया और एक बार

16:43

और बच्चों के हाथों पर एक पेट को रगड़ा

16:46

लेकिन इस बात ये एक सामान्य पत्ता था और

16:49

वैज्ञानिकों ने उन बच्चों से कहा की ये

16:51

एलर्जी पैदा करने वाला पता है और उन्हें

16:53

वहां पर हैरान कर देने वाले नतीजा मिले

16:56

वैज्ञानिकों ने देखा की लगभग सभी बच्चों

16:59

में एलर्जी रिएक्शन पे गए भले ही वह अल

17:01

में किसी जहरीले पेट की कांटेक्ट में नहीं

17:03

आए थे हमारे लिए यह बात बहुत हैरान कर

17:06

देने वाली है की हमारा दिमाग इतना ताकतवर

17:09

होता है लेकिन आज हमारे पास इन चीजों को

17:12

साबित करने के लिए बहुत सारे सबूत है

17:13

क्योंकि हम हमारी जिंदगी में भी ऐसे एन

17:16

उद्भव कई बार करते हैं अब हमारे सामने

17:18

सवाल आता है की आखिरकार यह होता कैसे हैं

17:21

नसीबो इफेक्ट हमारे दिमाग में ऐसा क्या

17:23

करता है जिसकी वजह से हमें ऐसे नतीजा

17:25

देखने को मिलते हैं

17:31

नसीबो इफेक्ट का हमारे दिमाग पर असर हमारे

17:34

पिछले दो एपिसोड में जहां हमने देखा की

17:37

+ibo इफेक्ट किन सिचुएशंस में कम करता है

17:39

तो वहीं हमने पैसिव इफेक्ट का ठीक उल्टा

17:42

नसीबो इफेक्ट के बड़े में भी जाना तो अब

17:44

हम अपने इस सफर पर आगे बढ़ते हुए ये समझना

17:47

की कोशिश करते हैं क्या आखिरकार यह चीज

17:49

हमारे दिमाग को कैसे असर करती हैं ऐसे

17:52

क्या करण है जिसकी वजह से ये इतने ताकतवर

17:55

हो जाते हैं दरअसल हमारा दिमाग हमारे पूरे

17:58

जीवन के दौरान अलग-अलग एक्सपीरियंस को

18:00

कलेक्ट करने के साथ ही उन्हें याद भी रख

18:03

लेट है जैसे अगर आपको कभी सर दर्द होता है

18:05

और आप एक्सपीरियंस लेते हैं तो अगली बार

18:07

जब भी आपको सर दर्द होगा तो आपका दिमाग

18:10

आपको इस स्पीडन की तरफ ले जान की कोशिश

18:12

करेगा तो साइबो इफेक्ट को भी आप ऐसे ही

18:14

कुछ समझ सकते हैं इसे हम एसोसिएटिव मेमोरी

18:17

कहते हैं और अगर हम इस प्रोसेस को बार-बार

18:19

करते रहे तो एक वक्त ऐसा आएगा जब आपको

18:22

स्पिन लेने की जरूर ही नहीं पड़ेगी आप

18:25

एक्सीडेंट की जगह अगर कोई भी उसके जैसी

18:27

दिखने वाली टैबलेट ले लेंगे तो भी आपको

18:29

ऐसा लगेगा की आपका दर्द कम हो ऐसा होने का

18:32

करण है एक्सपेक्टेशन

18:35

का एक सबसे जरूरी पार्ट है हम जब भी कोई

18:39

चीज करते हैं तो हमें उसके एक नतीजा की

18:41

उम्मीद होती है ये बात सबको पता है की अगर

18:44

आप आज को हाथ में लेंगे तो आपका हाथ जल

18:47

जाएगा जब आप सर्दियों में ठंडा पानी से

18:49

नहाते हैं तो आप नहाने से ठीक पहले आपके

18:52

शरीर में उसे ठंड को फूल कर सकते हैं

18:53

क्योंकि आपकी शरीर को इसका पहले से

18:56

एक्सपीरियंस है आपके दिमाग को पता है की

18:58

इस ठंडा पानी से उसे कैसा लगे वाला है ठीक

19:01

इस तरह जब आप स्पिन लेते हैं तो आपका

19:03

दिमाग यह माने लगता है की इसका असर उसे

19:06

जरूर दिखेगा यानी की उसे ऐसी उम्मीद होती

19:08

है की यह टैबलेट उसके दर्द को कम कर देगी

19:11

ऐसे कई एग्जांपल्स अर्थराइटिस के मरीज में

19:13

भी बहुत बार देखें गए हैं डॉक्टर ने जब भी

19:16

इन मरीज को कोई नई दवाई दी और उनसे कहा की

19:19

यह दवा बिल्कुल अलग है और उनके दर्द में

19:21

तुरंत असर दिखाने के साथ साथ उनके दर्द को

19:23

कम भी करेगी तो ऐसा पाया गया की 90% से भी

19:26

अधिक मरीज ने ये कहा की नई दवाई के चलते

19:29

ही उनका दर्द कम हुआ है चलिए अब मैं आपको

19:31

आपके दिमाग के अंदर ले चलते हैं और समझते

19:34

हैं यह साड़ी चीज आखिरकार होती कैसे हैं

19:36

शुरुआत करते हैं कंडीशनिंग से यानी की जब

19:40

भी आपके साथ कुछ अलग होता है तो उसका

19:43

सिग्नल आपके दिमाग में जाता है और आपका

19:45

दिमाग उसे सिग्नल का एक रिस्पांस देता है

19:48

ये रिस्पांस कभी आपको फायदा पहुंचना है तो

19:51

कभी नुकसान कौन सा रिस्पांस फायदा

19:53

पहुंचाएगा और कौन सा नुकसान आपका दिमाग

19:55

अपने पुराने एक्सपीरियंस से ये डिसाइड

19:58

करता है एक छोटा बच्चा जिसे यह मालूम नहीं

20:00

की आज में हाथ डालने या किसी गम चीज को

20:03

चुने से उसे चोट ग शक्ति है तो वो उसे

20:05

चुने लगता है लेकिन एक बार जब उसे चोट ग

20:08

जाति है तो उसके बाद उसका दिमाग कभी भी

20:10

उसको यह नहीं कहता की वो गम चीज को हाथ

20:13

लगाएं यानी की हमारे दिमाग का रिस्पांस

20:15

हमें रिवॉर्ड देने के साथ-साथ नुकसान भी

20:18

पहुंच सकता है जब आप किसी चीज को अपने

20:20

दिमाग में मां लेते हैं तो दिमाग वैसे ही

20:23

केमिकल पैदा करता है जैसा उसे चीज के अल

20:25

में होने पर करता यानी की अगर आप यह मां

20:28

लेने की आपने सर दर्द की टैबलेट खाई है तो

20:31

आपका मैगी मां लगा की आपने सच में टैबलेट

20:33

ली है और आपका दिमाग उन सभी केमिकल्स को

20:36

पैदा करेगा जो एस्प्रिन टैबलेट लेने से

20:38

होता है हमारा ये समझना जरूरी है की हमारे

20:42

शरीर के द्वारा निकले गए केमिकल्स हमारे

20:44

शरीर के बीमा होने और हेल्दी होने में

20:46

बहुत हम भूमिका निभाते हैं और इसलिए इन

20:49

केमिकल का रोल बहुत ही जरूरी हो जाता है

20:52

रासिबो इफेक्ट इन्हीं केमिकल्स पर असर

20:54

डालता है नसीबो इफेक्ट का एक और हिस्सा ये

20:57

होता है की जब हम किसी चीज के बड़े में

20:59

जितना ज्यादा इनफॉरमेशन लेते हैं नसीबो

21:01

इफेक्ट उतना ही ज्यादा दिखता है मां लीजिए

21:04

आपने एस्प्रिन टैबलेट के अलग अलग फायदे

21:06

पड़े हैं आपने देखा की स्प्रिंग कितनी डर

21:09

में सर दर्द पर असर करना शुरू कर देती है

21:11

आपको यह भी पता है की अश्विन टैबलेट का

21:14

असर कितनी डर राहत है और आपने यह भी जान

21:17

लिया की एस्पिन टैबलेट लगभग हर तरह के सर

21:19

दर्द पर असर करती है तो अब ये होगा की आप

21:22

अगर कोई दूसरी टैबलेट भी लेंगे जो

21:25

एस्प्रिन नहीं है तब भी आपका दिमाग इस तरह

21:27

से बिहेव करेगा जैसे की आपने वही टैबलेट

21:30

ली है और उसकी मेकैनिज्म भी एस्प्रिन की

21:32

तरह ही हो जाएगी अब एक हम सवाल ये पैदा

21:35

होता है की हम हर रोज 90 हजार अलग-अलग

21:38

विचारों के बड़े में सोचते हैं तो ऐसा

21:40

कैसे संभव है की दिमाग को हर विचार का

21:42

एक्सपीरियंस हो जाए और +i वो इफेक्ट हर

21:45

जगह अपना असर दिखाएं तो अब आपको ये समझना

21:48

होगा की हमारे दिमाग में जो 90 हजार विचार

21:51

हर रोज आते हैं उनमें से 90% हर दिन रिपीट

21:54

होते हैं जैसे हमारे सोनी का तरीका हमारे

21:57

उठने का वक्त हमारे नहाने का तरीका और

22:00

हमारे खाने का तरीका ये सब हर दिन हमारी

22:03

रूटीन में होते हैं और इससे हम हर दिन एक

22:06

जैसी चीज करते हैं जिसकी वजह से हमारा

22:08

बिहेवियर भी रिपीट होने लगता है और यह

22:10

रिपीटिंग बिहेवियर एक ही तरह का

22:12

एक्सपीरियंस पैदा करता है जिससे हमारे

22:15

अंदर रोज एक ही तरह के इमोशंस पैदा होते

22:17

हैं जो प्रतीक को चलते हैं

22:22

नसीबो इफेक्ट का हमारी बॉडी पर असर हमारे

22:26

पिछले एपिसोड में हमने देखा की कैसे

22:28

प्रासिबो इफेक्ट हमारे दिमाग के अंदर कम

22:30

करता है जिसकी वजह से हमें उसके नतीजा

22:33

देखने को मिलते हैं लेकिन किसी बदलाव के

22:36

लिए केवल हमारा दिमाग में कुछ होना काफी

22:38

नहीं है दिमाग के साथ साथ आपके शरीर में

22:41

भी कई साड़ी चीजों का बदलाव होना आवश्यक

22:44

है और तभी हमें उसके नतीजा देखने को मिलते

22:46

हैं साल 1981 में साइकोलॉजिस्ट एलेन लिगर

22:50

ने एक रिसर्च करने की सोची उसे रिसर्च में

22:53

उन्होंने 70 से 80 की उम्र के 8 लोगों को

22:55

बोस्टन में बुलाया उन आठ लोगों को पांच

22:58

दोनों के लिए वहां रखा जान वाला था और

23:01

उनसे यह कहा गया की आपको ऐसे बिहेव करना

23:03

है जैसे की आप फिर से जवान हो गए हैं और

23:06

अब आप अपनी आज की उम्र से कम से कम 22 साल

23:09

छोटे हैं एक और ग्रुप जो की इस उम्र का था

23:12

उन्हें भी यही बात कहीं गई लेकिन उन्हें

23:14

यह नहीं कहा गया की आप यह ना सोच की आप

23:17

बूढ़े नहीं है उन्हें सिर्फ इतना कहा गया

23:19

की आप केवल अपनी जवानी के दोनों के बड़े

23:21

में सोचते रही जब पहले ग्रुप उसे जगह पर

23:24

पहुंच तो उन्होंने देखा की उसके आसपास की

23:27

साड़ी चीजों को इस हिसाब से रखा गया है

23:28

ताकि वो खुद को जवान महसूस कर सके उन्हें

23:32

उसे वक्त फिल्म में और टीवी शो भी वही

23:34

दिखाएं गए जो उनकी जवानी के दोनों में

23:36

चलते थे उनके आपस की बातें भी ऐसी प्रकार

23:39

की ही होती थी इस ग्रुप के लोग देश दुनिया

23:41

के बड़े में वही बातें की यह करते जो उनके

23:43

जवानी के दोनों में घाटी थी 5 दोनों के

23:45

बाद वैज्ञानिकों ने उनके कुछ बैचमेंट्स

23:48

लिए और पाया की पहले ग्रुप दूसरे ग्रुप की

23:50

तो लंबी काफी इंप्रूवमेंट दिखा रहा था इन

23:53

लोगों के वजन और चलने के तरीके में काफी

23:55

बदलाव ए गया था और वो अब ज्यादा बेहतर

23:57

तरीके से चल का रहे थे उनके घुटनों का

24:00

दर्द भी काफी कम हो गया साथ ही उनकी आंखों

24:03

की रोशनी सुनने की क्षमता भी बेहतर हो गई

24:05

थी इतना ही नहीं उनकी याददाश्त भी तेज हो

24:08

गई थी और इस रिसर्च का नतीजा यह निकाला की

24:11

ये लोग इन पांच दोनों में कंपेरटिवली जवान

24:14

हुए हैं लेकिन सवाल उठाता है की ये आखिर

24:16

हुआ कैसे यहां पर इन सभी लोगों ने अपने

24:19

दिमाग को यह समझा दिया था की वह अब जवान

24:22

है के शरीर में भी उनके दिमाग की मदद से

24:24

वैसे केमिकल पैदा करने शुरू किया जो उनके

24:27

जवानी के दोनों में पैदा हुआ करते थे आप

24:30

शायद ये जानते हैं की हमारे शरीर में

24:32

हार्मोन का हमारी जवानी और बुढ़ापे से

24:34

बड़ा जरूरी संबंध होता है ये हार्मोन

24:37

हमारी ग्रोथ और हमारे व्यवहार को बहुत

24:39

ज्यादा इफेक्ट करते हैं समय के साथ-साथ इन

24:42

हार्मोन के लेवल में बदलाव आने लगता है

24:43

इसलिए जब बुढ़ापे के वक्त भी उन लोगों ने

24:46

अपने आप को यह समझाया की वो जवान है तो

24:49

उनके दिमाग में ये मां लिया की वो वाकई

24:51

में जवान है और वो हार्मोन जो जवानी में

24:54

पैदा होते हैं वो भी उनके अंदर अब ज्यादा

24:56

पैदा होने ग गया था लेकिन इन हार्मोन की

24:59

ज्यादा पैदा होने में जी चीज का सबसे बड़ा

25:01

योगदान है वो है हमारा जिन ये जिन ना केवल

25:05

हार्मोन बल्कि हमारे शरीर में होने वाले

25:08

लगभग हर चीज को कंट्रोल करते हैं तो चलिए

25:10

इन जींस के बड़े में हम आपको सर हमारे

25:13

शरीर पर बहुत पड़ता है और हमने पिछले

25:15

एपिसोड में देखा है की कैसे हमारे विचार

25:18

हमारे डीएनए को भी इफेक्ट करते हैं तो एक

25:20

तरह से हम अपने शरीर के इंजीनियर खुद ही

25:22

हैं आपको याद होगा पिछले एपिसोड में हमने

25:25

आपको बताया था की बाहरी एटमॉस्फेयर से जिन

25:27

बादल जाते हैं जी तरह पहाड़ों में सर

25:30

हमारे शरीर पर बहुत पड़ता है और हमने

25:32

पिछले एपिसोड में देखा है की कैसे हमारे

25:34

विचार हमारे डीएनए को भी इफेक्ट करते हैं

25:36

तो एक तरह से हम अपने शरीर के इंजीनियर

25:39

खुद ही हैं आपको याद होगा पिछले एपिसोड

25:41

में हमने आपको बताया था की बाहरी

25:43

एटमॉस्फेयर से जिन बादल जाते हैं जी तरह

25:46

पहाड़ों में रहने वाले जानवरों के बाल

25:48

लंबे होते हैं क्या हम भी अपने जीवन को इस

25:50

तरह से ट्रेन कर सकते हैं की व्यक्ति

25:52

पहाड़ों में ना राहत हो उसके भी बाल लंबे

25:55

हो यानी की क्या ऐसा संभव है की बगैर

25:58

बाहरी सिचुएशन को बदले हम अपने जिन के

26:01

अंदर बदलाव कर दें हमारे इस एपिसोड में हम

26:03

इसी बात के बड़े में चर्चा करेंगे आपको

26:06

जानकर हैरानी होगी लेकिन ऐसा संभव है अगर

26:09

आपकी मेंटल प्रैक्टिस इतनी ज्यादा हो की

26:12

आपका दिमाग आपके अपने थॉट्स पर ज्यादा

26:13

ध्यान दे बजाएं बाहरी वातावरण के तो ऐसे

26:17

में आपका डीएनए और जिन भी इस तरह से बदलने

26:20

लगेंगे और उसके अंदर ऐसे बदलाव आने लगे जी

26:23

तरह के थॉट्स आप अपने दिमाग में सोच रहे

26:25

हो और इस प्रबल फैक्ट के चलते आप एक नए

26:29

तरह के इंसान बन जाएंगे वो भी बिना किसी

26:31

एनवायरनमेंट में बदलाव के लेकिन इसके लिए

26:33

मेंटल प्रैक्टिस की बहुत जरूर होती है

26:35

इसमें आपको अपनी आंखें बैंड करके लगातार

26:38

एक कम को करते हुए ये सोचना है की आप इस

26:41

बदलाव के बाद कैसे होंगे साथ ही साथ आप

26:44

अपने उसे रूप के बड़े में भी सोचिए जी तरह

26:47

की आप नहीं होना चाहते हैं ऐसे में इस भीम

26:50

के दौरान आप अपने भविष्य के कम के बड़े

26:52

में भी सोचते हैं आप यह भी सोचते हैं की

26:55

आप उसे लक्ष्य तक कैसे पहुंचेंगे और

26:57

धीरे-धीरे आप अपने अंदर बदलाव देखने

26:59

लगेंगे चलिए इस मेंटल प्रैक्टिस या

27:02

रिहर्सल के बड़े में थोड़ा और समझते हैं

27:04

मेंटल रिहर्सल में आप एक सपना देखते हैं

27:07

या अपने गोल के बड़े में सोचते हैं और आप

27:10

इसके बड़े में तब तक सोचते रहते हैं जब तक

27:13

यह आपसे फैमिलियर ना हो जाए जैसे-जैसे आप

27:16

अपने दिमाग को ऐसी ट्रेनिंग देते रहेंगे

27:18

वैसे-वैसे आपका दिमाग भी उससे सिचुएशन में

27:21

रहने के लिए आपके शरीर तैयार करता रहेगा

27:23

और आपके डीएनए में भी बदलाव आने लगेंगे

27:26

आपके लगातार फ्यूचर के बड़े में सोने से

27:28

आपके अंदर उसे समय का इमोशन भी ए जाता है

27:31

और इस मोशन के चलते आपका रोज का लुक भी

27:34

बदलने लगता है और यही जिन आपको आपके

27:37

लक्ष्य तक पहचाने में मदद करेंगे अब आपका

27:40

शरीर और दिमाग धीरे धीरे वैसा बने लगता है

27:42

जैसा आप उसे बनाना चाहते थे इसका करण यह

27:46

है की हमारे शरीर को असली एक्सपीरियंस और

27:49

केवल एक धर्म के बीच में अंतर करने का

27:51

तरीका नहीं पता है अगर आप लगातार यह सोचते

27:53

हैं की आपको सर्दी ग रही है तो आपका दिमाग

27:56

इस बात को मां लगा और आपका शरीर वैसे ही

27:59

रिएक्ट करने लगेगा जैसे सच में आपको सर्दी

28:02

ग रही हो फ्यूचर के अपने रूप के बड़े में

28:04

सोचते समय आपको अपने पुराने वर्जन को

28:07

धीरे-धीरे भूलना ही होगा जब आप दिमाग को

28:10

हर वक्त यह बताएंगे की आप अपने आप को

28:12

बदलना चाहते हैं और अपने पुराने रूप को

28:14

धीरे-धीरे छोड़ रहे हैं तो एक वक्त ऐसा

28:16

आएगा जब आपके दिमाग के पास आपकी पुरानी

28:19

बॉडी और दिमाग का कोई रिकॉर्ड ही नहीं

28:21

बचेगा अगर आप एक बार ऐसा करने में सफल हो

28:23

जाते हैं तो आप खुद नसीबो बन चुके होंगे

28:26

मेंटल हरसल की ऐसी कई साड़ी सक्सेसफुल

28:29

कहानी है जो आपको जरूर जानी चाहिए ऐसी ही

28:32

एक कहानी भीतनाम के जय की है जहां पर एक

28:34

कैदी हर रोज अपने दिमाग में गोल्फ खेलते

28:37

और हर दिन ये इमेजिन करता की वो गोल्फ के

28:40

अंदर एक परफेक्ट शॉट मार रहा है जय से

28:42

बाहर आने के बाद जब वो गोल्फ खेलते है तो

28:45

अपने पहले ही शॉर्ट में वो एक परफेक्ट शॉट

28:47

लगता है जब उससे पूछा गया की बिना

28:49

प्रैक्टिस की उसने ये कैसे किया तो उसने

28:51

कहा की उसने प्रैक्टिस तो की थी पर केवल

28:53

अपने दिमाग में ऐसा ही एक एग्जांपल है

28:55

सोवियत ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट नातन शरांश

28:59

की का नातन को सोवित सरकार ने अमेरिका का

29:01

जासूस मानते हुए जय में कैद कर लिया था

29:03

उनके ऊपर लगाया गया ये आप कभी भी साबित

29:06

नहीं हो सका था लेकिन इसकी बावजूद उन्हें

29:09

करीब 9 सालों तक जय में रखा गया और उसमें

29:11

से करीब 400 दोनों तक उन्हें कल कोठरी में

29:14

रखा गया जो की बहुत ही छोटी थी और उसके

29:17

अंदर का टेंपरेचर बहुत कम था जिसकी वजह से

29:19

अंदर काफी ठंड थी उसे दौरान नूतन अपने

29:23

दिमाग में खुद के साथ के किला करते और खुद

29:25

ही अपने अपोनेंट का रोल निभाया करते इस

29:27

तरह से वो धीरे-धीरे अपने चश्मा बहुत

29:30

बेहतर हो गए बाद में जब उन्हें जय से रहा

29:32

किया गया तो वो इजरायल चले गए और जब साल

29:35

1996 में वर्ल्ड के चैंपियन गारी का

29:38

प्रयोग एक के कंपटीशन के लिए इजरायल है तो

29:40

नादान ने उन्हें मैच में हर दिया था मेंटल

29:43

रिहर्सल के कई और भी एग्जांपल्स हमारे पास

29:45

है जिम से कुछ नामी एथलीट भी हैं जिनका यह

29:48

कहना है की रेस से पहले वो हमेशा अपने

29:50

दिमाग में उसे रेस के बड़े में सोचते और

29:53

खुद को ट्रेन करते हैं ऐसा करने से

29:55

धीरे-धीरे वो उसमें बेहतर होते जाते हैं

29:57

बास्केटबॉल चैंपियन माइकल जॉर्डन भी इस

30:00

टेक्निक को फॉलो किया करते थे वो अपने हर

30:03

मठ से पहले अपनी साड़ी स्ट्रेटजी को अपने

30:05

दिमाग में सोचा करते और कोर्ट पर भी वैसे

30:08

ही खेलने थे जैसा उन्होंने अपने दिमाग में

30:10

सोचा था इन सभी एग्जांपल से आपको मेंटल

30:13

रिहर्सल के बड़े में एक सबूत मिलता है की

30:15

फिजिकल प्रैक्टिस के साथ साथ मेंटल

30:18

प्रैक्टिस भी कितनी ज्यादा जरूरी होती है

30:19

इन सब लोगों के अंदर एक खास बात यह है किन

30:23

सब ने अपने बाहरी एनवायरनमेंट को अपने

30:25

दिमाग से पुरी तरह से निकाल दिया जब यह

30:27

लोग अपनी मेंटल रिहर्सल कर रहे थे तब

30:29

मेंटली वह लोग एक अलग ही माहौल में मौजूद

30:31

थे नातन जब अपनी कल कोठी में मेंटल के की

30:35

प्रैक्टिस कर रहे थे तब वह अपने दिमाग को

30:37

यही बोलते थे की वह जय में नहीं बल्कि

30:40

अपने अपोनेंट के सामने के खेल रहे हैं

30:42

धीरे-धीरे उनका दिमाग भी इस चीज को माने

30:44

लगा और इस तरह से उन्होंने चर्च के वर्ल्ड

30:46

चैंपियन को भी हर दिया तो इसी तरह आप भी

30:49

अपने दिमाग को बिना बहादुर एनवायरनमेंट को

30:51

बदलें मेंटल ने हरसल या प्रैक्टिस के जारी

30:54

इस तरह से बना सकते हैं की आपका डीएनए भी

30:56

धीरे-धीरे बदलने ग जाएगा और पेंस का नतीजा

31:00

आपके शरीर पर दिखने लगेगा यानी की हम यह

31:02

का सकते हैं की आपके विचार ही आपकी किस्मत

31:05

को ते करते हैं

31:08

सब कॉन्शियस ब्रेन और +i इफेक्ट न्यू

31:12

यॉर्क सिटी में 36 साल का एक आदमी इवान

31:15

सेंटियागो एक फाइव स्टार होटल के आगे

31:17

चुपचाप खड़ा था उसके साथ में कई सारे

31:19

मीडिया के लोग कैमरे लिए हुए खड़े थे

31:21

लेकिन सेंटियागो उनमें से एक नहीं था उसने

31:24

अपना हाथ अपने पास रखें बैग में दाल रखा

31:26

था और उसे बैग में एक पिस्टल थी सब मीडिया

31:29

वाले लोग वहां इसलिए खड़े थे क्योंकि वहां

31:31

पर एक फॉरेन डिग्निटेरी आने वाला था जो

31:33

उसे होटल से निकालकर सामने खड़ी कर में

31:35

बैठकर जान वाला था जैसे ही वो फॉरेन

31:38

डिग्निटी होटल से बाहर निकाला सब कैमरा

31:40

वाले लोग उसकी फोटो निकालना ग गए लेकिन इस

31:43

वक्त सेंटी एगो ने अपने बैग से बंदूक

31:45

निकालकर उसे आदमी को लगातार तीन बार गली

31:48

मेरी जिससे उसे आदमी की इस वक्त मौत हो गई

31:50

तभी सेंटियागो के पास एक टॉम नाम के

31:52

व्यक्ति आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर

31:55

खाने लगा की मेरे पांच तक गिने तक तुम

31:57

पुरी तरह से रिफ्रेश हो जाओगे और वो पांच

32:00

तक गिनता है ऐसा करते ही सेंटियागो ऐसे

32:02

होश में आया मानो वो नींद से उठाओ बाद में

32:05

पता लगा की सेंटियागो को हिप्नोटाइज किया

32:07

गया था लेकिन क्या ऐसा संभव है की एक आदमी

32:10

को हिप्नोटाइज करके एक अनजान व्यक्ति का

32:13

कत्ल करवा दिया जाए इस पुरी घटना के दौरान

32:15

वहां पर कुछ रिसचर्स भी मौजूद थे जिन्हें

32:18

सेंटियागो एक ही दिन पहले मिला था जब

32:20

उन्होंने 150 लोगों का एक ग्रुप बनाया था

32:22

धीरे-धीरे उनमें से लोगों को छांटना शुरू

32:25

किया गया और उनमें से करीब 10% लोग ऐसे पे

32:28

गए जो हितनोसिस के लिए ससेप्टिबल थे अपने

32:31

ग्रुप को छोटा करने के लिए ये वैज्ञानिक

32:32

इन 20 पार्टिसिपेंट्स को एक रेस्टोरेंट्स

32:35

पे लेकर गए और वहां उन्हें ये बताया गया

32:37

की इस रेस्टोरेंट की कुर्सियां बहुत

32:39

ज्यादा गर्मी है और जैसे ही वो लोग इन

32:41

कुर्सियों पर बैठेंगे तो इतनी ज्यादा

32:43

गर्मी होने के करण वो अपने कपड़े भी

32:45

उतारने लगेंगे उन्होंने ऐसा इसलिए किया

32:47

ताकि वो उन लोगों को बाहर कर सकें जो अब

32:50

तक हिप्नोटाइज होने का नाटक कर रहे थे

32:52

जैसे ही वो 20 लोग कुर्सियों पर बैठे तो

32:55

उनमें से कर लोग बोलने लगे की कुर्सी बहुत

32:57

ज्यादा गम है और ये भी खाने लगे की

33:00

रेस्टोरेंट में बहुत ज्यादा गर्मी होने के

33:01

करण वो अपनी पेंट और शर्ट उतार रहे हैं इस

33:05

टेस्ट को पास करने वाले कर लोगों को अगले

33:07

टेस्ट की और ले जय जहां पर उन्हें कुछ ऐसा

33:10

करने

33:11

के लिए नहीं कर सकता है इन चारों को कहा

33:14

गया की आपको बिल्कुल ठंडा पानी से भरे हुए

33:17

एक बार तब में उतारना है इस बात तब का

33:20

पानी इतना ठंडा था की वो लगभग हमने की

33:22

कागर पर था इन सभी पार्टिसिपेंट्स के

33:25

वेटिंग रेट सब रिकॉर्ड की जा रही थी उन

33:28

चारों लोगों को यह कहा गया की इस बात तब

33:30

का पानी काफी सुहावना है और ये ठंडा तो

33:33

बिल्कुल भी नहीं है जब बारी-बारी से

33:35

उन्हें बात तब में उतारा गया तो उनके शरीर

33:37

में उन बदलावों के देखने की उम्मीद थी जो

33:39

बदलाव नॉर्मली किसी इंसान के इतने ठंडा

33:41

पानी में उतारने पर दिखते हैं इस टेस्ट को

33:43

कोई भी व्यक्ति केवल दिखावे के लिए पास

33:45

नहीं कर सकता था और इसमें पास होने के लिए

33:47

वाकई में आपको हिप्नोटाइज होना पड़ता था

33:49

कर में से तीन पार्टिसिपेंट वाकई में बहुत

33:52

ज्यादा हिप्नोटाइज थे और उनमें से एक था

33:55

सेंटियागो जो करीब 2 मिनट तक उसे वाट तब

33:58

में रुक रहा सेंटियागो की हार्ट रेट इस

34:00

पूरे एक्सपेरिमेंट के दौरान बहुत ज्यादा

34:02

नहीं बधाई थी और उसके फिजिकल टेस्ट से ऐसा

34:04

ग रहा था की वो वाकई में ठंडा पानी की बजे

34:06

एक गुनगुना पानी की बात बैठा है सेंटियागो

34:10

को वहां यह कहकर बुलाया गया था की वहां पर

34:12

एक फिल्म के लिए ऑडिशन चल रहे हैं और

34:14

क्योंकि उसे दिन के ऑडिशन में उपवास हो

34:16

गया इसलिए उसे अगले दिन फिर से आने के लिए

34:18

कहा गया है अगले दिन सेंटियागो वहां पर

34:20

आया तो उसके हाथ में बंदूक देकर उसे कहा

34:23

गया की उसे फौरन डिग्निटेरी को मारना है

34:25

उसे वक्त सेंटियागो को हिप्नोटाइज कर दिया

34:27

जा चुका था फिर बाद में सेंटियागो को जब

34:30

होश में लाया गया और उससे पूछा गया की

34:32

क्या उससे कुछ याद है की उसने क्या किया

34:34

है तो उसने कहा की उसे कुछ भी याद नहीं है

34:37

यह कहानी आपको काफी हैरान कर देने वाली ग

34:39

रही होगी लेकिन ऐसा नामुमकिन नहीं है

34:41

हमारे दिमाग के दो हिस होते हैं एक

34:44

कॉन्शियस और दूसरा सब कॉन्शियस सब

34:48

कॉन्शियस दिमाग का वो हिस्सा होता है जी

34:50

पर हमारा सीधा-सीधा कंट्रोल नहीं होता है

34:52

हम रात को सोते वक्त अपनी पोजीशन बदलते

34:55

रहते हैं यह हमारे सब कंसिस्ट दिमाग के कम

34:57

का ही एक एग्जांपल है लेकिन अब ऐसे कई

35:00

सारे तरीके सामने आने लगे हैं जिम ये पाया

35:02

गया है की हमारे सब कॉन्शियस दिमाग को भी

35:05

हम ट्रेन कर सकते हैं और इसके आधार पर हम

35:08

कुछ कैसे कम कर सकते हैं जो हमारा

35:10

कॉन्शियस मन हमें कभी भी करने की इजाजत

35:12

नहीं देता है सेंटियागो के साथ में भी ऐसा

35:15

ही हुआ क्योंकि उसके सब कॉन्शियस मन को

35:17

ठोकर कर दिया गया था और उसके बाद वो किसी

35:20

का खून करने जैसा कम करने के लिए भी राजी

35:22

हो गया इस सपनोसिस के तीन स्टेज होते हैं

35:24

एक्सेप्ट्स बिलीव और सुरेंद्र सबसे पहले

35:28

हम किसी बात को स्वीकार करते हैं जिसे

35:31

एक्सेप्टेंस कहा जाता है आपने अक्सर

35:33

हिप्नोटाइज करने वाले लोगों को कुछ चीज

35:35

बताते हुए देखा होगा जैसे की आपको अब नींद

35:38

ए रही है आप धीरे-धीरे सो रहे हैं इत्यादि

35:41

एक बार सामने वाला व्यक्ति इन चीजों को

35:44

एक्सेप्ट यानी की स्वीकार कर लेट है तो

35:46

उसके बाद में वो धीरे-धीरे उसका सब

35:48

कॉन्शियस मन इस चीज पर और ज्यादा भरोसा

35:50

करने ग जाता है और अंत में वो सामने वाले

35:53

व्यक्ति के आगे सुरेंद्र कर देता है या

35:56

यूं कहें वो उसे बात को पुरी तरह से मानता

35:58

है और अब उसका दिमाग उसे कंडीशन में ए

36:01

चुका है की वह उसे बताई गई हर चीज को कर

36:03

देगा वह भी बिना कुछ सोच या समझे यह जानना

36:07

जरूरी है की कॉन्शियस दिमाग की बातें आपको

36:10

अक्सर याद नहीं रहती हैं आपको समझना होगा

36:13

की सब कॉन्शियस दिमाग वो हर चीज कर सकता

36:15

है जो हमारा कॉन्शियस दिमाग करता है

36:18

कॉन्शियस दिमाग की चीज़ हमारे दिमाग में

36:20

मेमोरी के तोर पर स्टोर हो जाति हैं पर

36:23

सबकॉन्शियस दिमाग के साथ ऐसा कुछ भी नहीं

36:25

होता आप जब नींद में कोई सपना देखते हैं

36:27

तो अक्सर लोग कहते हैं की उन्हें अपना

36:29

सपना याद नहीं राहत है ऐसा इसलिए क्योंकि

36:32

सपना देखने के दौरान हमारा सब कॉन्शियस

36:35

हिस्सा ज्यादा एक्टिव होता है और इस वजह

36:37

से हमें हमारा सपना ज्यादा याद नहीं राहत

36:40

वहीं सपना में जब हम करवट बदलते हैं तो वो

36:43

भी हमें याद नहीं राहत है क्योंकि ये कम

36:45

भी हमसे हमारे सब कॉन्शियस दिमाग में

36:47

करवाया है तो खाने का अर्थ ये है की ये

36:50

प्रोसेस के अंदर भी हमारे सब कॉन्शियस

36:52

दिमाग को काबू में किया जाता है और इस के

36:54

जारी हम से अलग-अलग कम करवाएं जाते हैं

36:56

जिनका हमें अंदाज़ भी नहीं होता की वो कम

36:59

हमने किया हैं आपको जानकर हैरानी होगी की

37:02

हमारा सब कॉन्शियस मन करीब करीब हमारे

37:05

दिमाग का 95% हिस्सा बन्ना आता है तो वहीं

37:08

हमारा कॉन्शियस दिमाग केवल 5% हिस्सा

37:11

बनाता है तो ऐसे में अगर हमने अपने सब

37:13

कॉन्शियस दिमाग को अपने काबू में कर लिया

37:15

तो हम अपनी जिंदगी को 95% तक हमारे अपने

37:19

अनुसार चला सकते हैं और यही हमारे इस

37:22

एपिसोड का सर है की हमें हमारे सब

37:24

कॉन्शियस मन पर भी प्लस हिबो इफेक्ट का

37:26

इस्तेमाल करना है

37:31

एटीट्यूड बिलीव और परसेप्शन इंडोनेशिया

37:35

में जकार्ता पर के अंदर आपको अक्सर कुछ

37:37

लोग एक करतब दिखाई हुए नजर आएंगे इसमें एक

37:40

12 साल का लड़का भी शामिल है जो कांच को

37:42

खाता और उसे निगल भी लेट है और आज भी वो

37:45

ये कम कर रहा है इतने सालों से ऐसा करने

37:48

के बावजूद उसे कभी भी इससे जुड़ी कोई भी

37:50

बीमारी नहीं हुई ना उसके शरीर में इसकी

37:52

वजह से कोई चोट लगी ये केवल इंडोनेशिया की

37:55

ही बात नहीं है आप पाएंगे की कई सारे लोग

37:58

किसी भगवान में भरोसा रख कर इस तरह की चीज

38:00

किया करते हैं ऐसा नहीं है की ये लोग इन

38:03

चीजों को फेक तरीके से करते हैं इनके ये

38:05

कम डाक्यूमेंट्री है और ये साबित किया गया

38:07

है की ये अपने कम में किसी भी तरह का

38:10

ट्रिक इस्तेमाल नहीं करते हैं भारत में भी

38:13

कुछ ऐसे समुदाय है जिनके अंगारों पर चलने

38:15

का प्रचलन है आज पर कम रखना से पहले ये

38:18

लोग अपने इस्ट देव का नाम लेते हैं और

38:20

उसके बाद आज पर इस तरह चलते हैं मानो वो

38:23

किसी गार्डन में टहल रहे हो पर है रानी की

38:26

बात तो ये है की उन्हें ना तो किसी तरह की

38:28

चोट आई है और ना ही उनके शरीर पर चलने से

38:30

जुड़ी कोई समस्या ही पी जाति है तो हमारा

38:33

सवाल यह उठाता है की आखिरकार यह हुआ कैसे

38:36

दरअसल यह भी प्लस ही वह इफेक्ट का एक भाग

38:38

है अगर हम नसीबो को ध्यान से देखें तो

38:40

पाएंगे की इसे तीन अलग-अलग चीजों से समझा

38:43

जा सकता है पहले एटीट्यूड दूसरा बिलीव या

38:46

श्रद्धा और तीसरा हमारा नजरिया ये लोग जो

38:49

भगवान पर असीम श्रद्धा रखकर यह कम करते

38:51

हैं ये अल में खुद एक तरह के नसीबो हैं और

38:54

वो इस नसीबो इफेक्ट की मदद से अपने शरीर

38:57

को ये समझा देते हैं की भगवान उनकी समस्या

38:59

से रक्षा करेगा जब हम बिलीफ या श्रद्धा की

39:02

बात करते हैं तो हमें यह भी जानना चाहिए

39:04

की आखिरकार हमारा बिलीफ सिस्टम कम कैसे

39:07

करता है ये जरूरी नहीं है की हमारी जिन

39:10

चीजों पर श्रद्धा हो वो हमारे लिए हमेशा

39:12

लॉजिक के साथ हो कई बार ऐसा भी होता है की

39:15

हम किसी विचार को ऊपर ऊपर से स्वीकार कर

39:17

लेते हैं लेकिन अंदर ही अंदर हम ये बात

39:19

मानते हैं की यह चीज संभव नहीं है जैसे हम

39:23

सभी लोग यह कहते हैं की जीना और मरना

39:25

भगवान के हाथ में है लेकिन तब भी जब हमारे

39:27

सामने अल में कोई बड़ी समस्या आई है तो हम

39:30

भगवान के ऊपर मरीज को नहीं छोड़ते बल्कि

39:32

हम अपनी जान बचाने के लिए खुद प्रयास करते

39:34

हैं और अगर आपको इस बिलीव सिस्टम को एक

39:37

नसीबो की तरह इस्तेमाल करना है तो आपको इन

39:39

चीजों पर पुरी तरह से भरोसा करना होगा जब

39:42

कोई मैरिज किसी डॉक्टर के पास जाता है और

39:44

मां लीजिए डॉक्टर उससे कहता है की उसे

39:46

डायबिटीज है तो इस वक्त उसे आदमी के दिमाग

39:48

में डायबिटीज से जुड़ी हुई चीज आने लगती

39:50

हैं वो उसे डॉक्टर को एक्सपर्ट मानते हुए

39:53

ये मां लेट है की डॉक्टर ने जो कुछ भी कहा

39:55

है वो पुरी तरह से सच है और वो अपनी

39:58

किस्मत को भी फिर इस आधार पर देखने लगता

40:00

है वह अपने बिलीव सिस्टम पर पूरा भरोसा

40:02

करते हुए डॉक्टर की उसे बात के सामने

40:05

सुरेंद्र कर देता है क्योंकि एक मैरिज को

40:07

यह बात पता होती है की डॉक्टर उसे कभी भी

40:10

झूठी बीमारी नहीं बताया इस वजह से उसे पर

40:13

पूरा भरोसा करता है ऐसी सिचुएशन में हो

40:15

सकता है की वो मैरिज ऊपर ऊपर से पॉजिटिव

40:18

रहने की कोशिश करें क्योंकि अक्सर डॉक्टर

40:20

अपने मैरिज को पॉजिटिव रहने की सलाह देते

40:22

हैं लेकिन अंदर ही अंदर वह जानता है की

40:25

उसकी

40:26

बटन का कोई असर नहीं पढ़ने वाला यही करण

40:30

है

40:31

ऐसे मरीज पर +i वो इफेक्ट कम नहीं करता है

40:33

लेकिन इंडोनेशिया में जो 12 साल का बच्चा

40:36

है उसे अपने भगवान पर इतना भरोसा है की

40:39

उसके मां के सबसे गहरी कोनी में भी उसे इस

40:41

बात से जुड़ा कोई शक नहीं है की इस कांच

40:44

को खाने से उसे कोई चोट ग भी शक्ति है और

40:47

इस वजह से वो प्लसीबों को अपने हिसाब से

40:49

इस्तेमाल करता है वो अपने भगवान पर वैसा

40:51

ही भरोसा करता है जैसा एक पेशेंट अपने

40:54

डॉक्टर पर हमारे बिलीव सिस्टम के बाद में

40:56

नंबर आता है हमारे एटीट्यूड का हमारा

40:59

एटीट्यूड भी दरअसल हमारे बिलीव सिस्टम से

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ही जुड़ा हुआ होता है एक बार जब हमें किसी

41:04

चीज पर पूरा भरोसा हो जाए तो उसके बाद

41:06

हमारा एटीट्यूड भी इस के अनुसार बदलने

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लगता है जैसे भारत में जो लोग आज पर चलने

41:12

का कल तब दिखाई हैं वो हर दिन आज पर कम

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रखना से पहले अपने भगवान को याद करते हैं

41:17

और इस दौरान उनके मां में एक प्रतिशत भी

41:20

संदेह नहीं होता की वो इसे पर नहीं कर

41:23

पाएंगे उनका एटीट्यूड सालों से ही इस आज

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के प्रति ऐसा ही रहा है

41:27

सबसे बड़ा पहलू यही एटीट्यूड है जो की

41:30

अलग-अलग अलग सिचुएशंस में दिमाग के अंदर

41:32

प्रसिद्ध इफेक्ट को पैदा करता है तो बिलीव

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सिस्टम से शुरू होकर एटीट्यूड तक नसीबों

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फैक्ट के दो हिस बनते हैं तीसरा जरूरी

41:41

हिस्सा जो प्रोसीड को उसका रूप देता है वो

41:44

है हमारा नजरिया जब हमारे सामने कोई घटना

41:47

घटित होती है तो हम उसे अलग नज़रिया से

41:50

देख सकते हैं और हमारे नजरिया के आधार पर

41:52

घटना का पूरा आधार ते करते हैं हमारा

41:55

चीजों को देखने का नजरिया ये ते करता है

41:58

की उसे चीज के प्रति हमारा एटीट्यूड कैसा

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होगा और ये एटीट्यूड हमारे बिलीव सिस्टम

42:03

को बनाता है इन सब की शुरुआत हमारे

42:06

परसेप्शन यानी की नजरिया से ही होती है तो

42:09

अगर आपको अपने अंदर इफेक्ट को जगन है तो

42:12

आपको शुरुआत अपने नजरिया को बदलने से करनी

42:15

होगी यह नजरिया आपके एटीट्यूड को चेंज

42:17

करेगा और आपका एटीट्यूड धीरे-धीरे आपके

42:20

बिलीव सिस्टम को बदलने लगेगा और जब एक बार

42:23

आपका बिलीव सिस्टम बदलने लगेगा तब आप यह

42:25

देखने लगेंगे की आप अपने आप के लिए

42:28

प्रसिद्ध बन चुके हैं और हर मुश्किल समय

42:30

में

42:31

आप अपने आप को उससे बाहर निकालना के लिए

42:32

काबिल बन चुके हैं आप हर दिन अपने आप को

42:35

ट्रांसफॉर्म कर रहे होंगे और यही हमारे

42:38

नसीब बने का उद्देश्य है

42:42

क्वांटम मन रियलिटी क्या रियलिटी का मतलब

42:46

ऐसी चीज जिन्हें हम देख महसूस और समझ सकते

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हैं उनको हमने अब तक रियलिटी मां रखा है

42:52

एक एटम के अंदर क्या घटनाएं होती हैं इसके

42:55

बड़े में अब तक हमें पुरी जानकारी नहीं है

42:57

और इसलिए ये हमारे रियलिटी का हिस्सा नहीं

43:00

है लेकिन रियलिटी की डेफिनेशन इससे बहुत

43:03

आगे होने के साथ ही अल में हमारी सोच से

43:05

भी पैर है और इसके लिए आपको क्वांटम

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फिजिक्स को समझना पड़ेगा आईसेक्ट न्यूटन

43:10

की थ्योरी के आने के बाद उनके प्रिंसिपल्स

43:13

ने हमारे समाज को बादल कर रख दिया था उसे

43:16

वक्त तक यूनिवर्स को दो हसन में बंता गया

43:17

था पहले मटर और दूसरा मन मटर मटर की स्टडी

43:22

का मतलब होता था मैटेरियलिस्टिक दुनिया की

43:24

स्टडी और इसका सिम था विज्ञान के सर पर और

43:27

वहीं दूसरी और दिमाग के बड़े में

43:29

वैज्ञानिक ज्यादा कुछ पता नहीं कर का रहे

43:32

थे उन्हें लगता था की दिमाग के बड़े में

43:34

कुछ भी प्रिडिक्शन करना या कुछ नियम

43:36

निकालना लगभग असंभव है और इसलिए ये जिम्मा

43:39

धर्मगुरुओं ने अपने सर पर ले लिया खाने

43:42

मतलब यह है की अगर हम देखें तो फिजिक्स

43:44

में ग्रेविटेशन लॉस है जिससे हम ब्रह्मांड

43:47

की कई साड़ी घटनाओं को समझा सकते हैं तो

43:49

यहां पर एक नियम के जारी आप एक घटना की

43:52

भविष्यवाणी भी कर सकते हैं और उसको समझ भी

43:55

सकते हैं लेकिन दिमाग के लिए हमने अब तक

43:57

ऐसा कोई फॉर्म मिला या नियम नहीं बनाया है

43:59

लेकिन जब आइंस्टीन आए तो उन्होंने क्वांटम

44:02

फिजिक्स की नीव राखी उन्होंने बताया की एक

44:05

परमाणु के अंदर जो सब एटॉमिक पार्टिकल

44:07

होते हैं उनके बड़े में किसी भी प्रकार का

44:10

नियम देना लगभग असंभव है और सब एटॉमिक

44:13

पार्टिकल्स के बड़े में हम किसी भी तरह की

44:15

भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये

44:17

एक ही समय में किसी भी जगह पर हो सकते हैं

44:19

इसलिए दिमाग और सब एटॉमिक पार्टिकल्स के

44:22

बीच काफी सामान्य अच्छी गई तो इसका मतलब

44:25

ये है की हमारा दिमाग भी ऐसे ही सब एटॉमिक

44:28

पार्टिकल से बना हुआ है और हमारा दिमाग भी

44:30

इंसाफ एटॉमिक पार्टिकल्स की तरह इंफिनिटी

44:33

यानी की अनंत संभावनाओं को खोज सकता है

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इससे समझ में आता है की हम अपने दिमाग को

44:38

किसी भी तरीके से बादल सकते हैं और हमारे

44:40

सब एटॉमिक पार्टिकल्स हमें हमारा मनचाहा

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रूप दे सकते हैं हमारी पर्सनालिटी वैसी हो

44:46

शक्ति है जैसी हमें चाहिए और यह हमारे

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प्लूसिबो बने का सबसे पहले कम है जब आपके

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शरीर के सब एटॉमिक पार्टिकल्स भी उसे

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रियलिटी को मां लेने तब आपका दिमाग अपने

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आप ही आपको सिर्फ ले चलेगा आपके मां में

44:58

ये सवाल ए रहा होगा की क्या बस बैठे-बैठे

45:01

अपने भविष्य के बड़े में सोने से ही आप

45:03

खुद बी खुद ही अपनी उसे मंजिल तक पहुंच

45:05

जाएंगे तो इसका जवाब है जी नहीं आपका ऐसा

45:09

सोचना बिल्कुल ही गलत है अपने आप का +ibo

45:12

होने का मतलब यह नहीं की आप बैठे-बैठे

45:14

केवल अपने सपनों के बड़े में सोचें और ये

45:17

उम्मीद करें की आपके सपना सच हो जाएंगे

45:19

रासिबो का मतलब केवल सोने मंत्र से नहीं

45:21

है इसलिए आपके पूरे शरीर और आपके दिमाग के

45:25

हर एक भाग को आपके गोल पर भरोसा होना

45:27

चाहिए हमारा शरीर अलग-अलग तरह के एटम से

45:30

बना है इन एटम्स के भीतर आपको सब एटॉमिक

45:33

पार्टिकल्स देखने को मिलेंगे वह सब एटॉमिक

45:36

पार्टिकल्स एक फ्रीक्वेंसी पर वाइब्रेट

45:38

करते रहते हैं और आपको अपने दिमाग से पुरी

45:40

तरह से जुड़ने के लिए

45:42

ने सब एटॉमिक पार्टिकल्स के उसे

45:44

फ्रीक्वेंसी पर आना होगा जी फ्रीक्वेंसी

45:46

पर आपके थॉट्स यानी की विचार वाइब्रेट

45:49

करते हैं यह समझना के लिए चलिए हम आपको

45:51

रिजोनेंस का कॉन्सेप्ट समझते हैं

45:53

फ्रीक्वेंसी का मतलब होता है कोई चीज एक

45:56

सेकंड में कितनी बार किसी घटना को रिपीट

45:58

करती है अगर एक पंखा 1 सेकंड में 10 बार

46:01

चक्कर लगता है तो उसकी फ्रीक्वेंसी 10 हो

46:03

जाएगी अगर आपको पंख के साथ रहना है तो

46:06

आपकी फ्रीक्वेंसी भी उतनी ही हनी चाहिए

46:08

ठीक इसी तरह आपको अपने प्लूसिबो के

46:11

इफेक्टिव बनाने के लिए अपने विचारों को भी

46:13

अपने दिमाग की फ्रीक्वेंसी से मिलन होगा

46:15

इससे एक रिजोनेंस पैदा होगा और वो

46:18

रिजोनेंस एक ऐसी एनर्जी पैदा करेगा जो

46:20

एनर्जी आपको बादल कर रख देगी जब आप किसी

46:23

बेहतर विचार के बड़े में सोचते हैं तो

46:25

आपके अंदर की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने लगती है

46:27

और इससे एनर्जी भी बढ़ाने लगती है और यह

46:29

चीज आपको एक ज्यादा क्रिएटिव इंसान बनती

46:32

है इस एनर्जी के जारी आप एक और चीज को

46:34

नोटिस करेंगे की आप धीरे-धीरे एक खास

46:37

एनर्जी वाले लोगों के साथ ही बेहतर फूल

46:39

करेंगे इससे आपके आसपास का सर्किल थी इस

46:42

प्रकार का होगा जी प्रकार की सोच आप

46:45

रखेंगे यानी की वह भी आप ही की तरह

46:47

क्रिएटिव होंगे इससे आपकी क्रिएटिव सोच और

46:50

भी ज्यादा तेजी से बढ़ेगी और अपने आपके

46:52

प्लसीबों बने के लिए सही लोगों की

46:54

फ्रीक्वेंसी रिसीव करना भी उतना ही जरूरी

46:56

है जितना आपने आपकी फ्रीक्वेंसी जब आप कोई

46:59

डिसीजन अपने पूरे गहरी इंटेंशन से लेते

47:01

हैं तो आप अपने सब एटॉमिक पार्टिकल्स की

47:04

फ्रीक्वेंसी को बड़ा देते हैं जिससे आपकी

47:06

एनर्जी बढ़नी है और यहां से आपका दिमाग हर

47:08

चीज को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पता है

47:10

और इसी से आप उसे जगह पर पहुंच जाते हैं

47:13

जहां आप पहुंचाना चाहते थे इसे आप एक

47:16

रेडियो के एग्जांपल से और बेहतर तरीके से

47:18

समझ सकते हैं आप जब रेडियो को ऑन करते हैं

47:21

तो कई बार वो तूने नहीं होता है और इस वजह

47:24

से उसमें आवाज साफ नहीं आई जैसे-जैसे आपकी

47:26

सी रेडियो स्टेशन के पास की को ले जान

47:28

लगता हैं आपको आवाज साफ आने लगती है और

47:31

जैसे ही आप किसी ट्यूनिंग फ्रीक्वेंसी पर

47:33

पहुंच जाते हैं तो आपको बिल्कुल साफ साफ

47:35

आवाज आने लगती है यानी की वह सिग्नल आपके

47:38

पास बिल्कुल बेहतर तरीके से ए रहा है यही

47:41

होता है जब आपके आज और नर्वस सिस्टम के

47:43

साथ जब आप अपनी फ्रीक्वेंसी और अपनी

47:46

एनर्जी को बढ़ते हैं आपके पास अपने आसपास

47:48

की चीजों से आने वाला सिग्नल साफ हो जाता

47:50

है जिससे आप उन्हें और बेहतर तरीके से सिख

47:53

पाते हैं तो दोस्तों हमने हमारी अब तक की

47:56

चर्चा में नसीबो और उसके फैक्ट के बड़े

47:58

में काफी साड़ी बातें की हैं हमने नसीबो

48:01

इफेक्ट के कम करने के तरीके के बड़े में

48:02

भी जानकारी प्राप्त कर ली है हमारी चर्चा

48:05

में हमने नसीबों के हिस्ट्री से शुरुआत

48:07

करके हमारे ब्रेन और बॉडी तक इसका कैसे

48:10

असर होता है इसके बड़े में भी बात की थी

48:12

और इसके बाद हमने ये देखा की कैसे विचारों

48:16

से नसीबो इफेक्ट की शुरुआत होती है

48:17

एटीट्यूड बिलीव सिस्टम और परसेप्शन का इन

48:21

चीजों में क्या योगदान होता है ये भी हमने

48:23

जान लिया और इस चैप्टर में हमने क्वांटम

48:25

मैकेनिक्स के प्रिंसिपल से समझना की कोशिश

48:28

की तो अब बड़ी आई है की हम उन कहानियां को

48:32

जान जो लोगों ने खुद एक्सपीरियंस किया है

48:34

ये ऐसे लोगों की कहानी है जिन्होंने अपने

48:37

आप को प्लसीबों की तरह बनाया और अपने आप

48:39

को पुरी तरह से बादल कर रख दिया तो हमारे

48:42

अगले एपिसोड से हुई पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन

48:45

की कुछ बेहतरीन घटनाओं पर चर्चा करेंगे

48:50

पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन के कुछ एग्जांपल्स

48:53

19 साल

48:57

तक फाइब्रोसिस डिस्प्लेस या कहते हैं इस

49:01

बीमारी में मैरिज की हड्डियां धीरे-धीरे

49:03

कमजोर होने लगती हैं और इससे वो लगातार

49:05

कमजोर होने लगता है हड्डियां कमजोर होने

49:08

के करण इसके मैरिज को फ्रैक्चर बहुत जल्दी

49:11

हो जाते हैं डॉक्टर ने लोरी से कहा था की

49:14

इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है क्योंकि यह

49:16

एक जेनरेटेड कंडीशन है लोरी को पहले बार

49:19

इस बड़े में तब पता लगा जब उसके पैरों में

49:21

बहुत ज्यादा दर्द होने ग गया था और वो

49:24

करीब एक साल तक इसी तरह से उसे दर्द को

49:26

सहन करती चली जा रही थी जब वो डॉक्टर के

49:29

पास गई तो पता लगा की उसकी एक पर की हड्डी

49:31

टूट चुकी थी वह हैरान थी की एक हड्डी

49:34

टूटने के बावजूद भी वह एक साल तक इस तरह

49:36

से उसे मैनेज कर पी थी जब तक लोरी को अपने

49:39

इस कंडीशन के बड़े में पता नहीं था तब तक

49:41

वह भारत में काफी हिस्सा लिया करती थी

49:43

यहां तक की वह बॉडीबिल्डिंग की भी

49:46

ट्रेनिंग ले रही थी लेकिन अपनी बीमारी के

49:48

डायग्नोसिस के बाद उसके डॉक्टर ने उसे

49:50

सलाह दी की उसकी हड्डियां बहुत कमजोर है

49:53

और उसको चलने के लिए भी बैसाखी का सहारा

49:55

लेना चाहिए नहीं तो उसकी हड्डियां टूट

49:58

जाएगी ये खबर सुनने के बाद लोरी और उसके

50:00

परिवार वाले बहुत दुखी हुए क्योंकि उन्हें

50:02

पता था की अब उसकी जिंदगी पहले जैसी

50:04

बिल्कुल नहीं रही है लोरी की जिंदगी पुरी

50:07

तरह से बादल गई थी और अब वो हर बात का

50:09

ध्यान रखना लगी थी उसने चलना फिरना बहुत

50:12

कम कर दिया था और एक्सरसाइज और

50:14

बॉडीबिल्डिंग की ट्रेनिंग की तो बात उसकी

50:16

सोच से भी दूर थी उसके घर वाले उसे कई

50:18

सारे अलग-अलग डॉक्टर के पास लेकर गए लेकिन

50:21

कहानी पर भी उसका कोई इलाज नहीं मिला लोरी

50:24

जब भी किसी भी डॉक्टर के पास जाति तो उसे

50:26

यह उम्मीद होती की शायद इस बार का डॉक्टर

50:28

उसे एक नई उम्मीद देगा और बोलेगा की वह

50:31

ठीक हो शक्ति है लेकिन हर बार उसे निराशा

50:33

ही हाथ लगी लगभग हर डॉक्टर ने उसे यही कहा

50:36

की उसकी इस हालात का कोई इलाज नहीं है

50:38

उनमें से एक डॉक्टर ने तो यह भी का दिया

50:40

की उसे बिल्कुल भी चलना ही नहीं चाहिए और

50:42

पूरे वक्त केवल अपने बिस्तर पर पड़े रहना

50:45

चाहिए इन सब चीजों को सुनकर लोरी बिल्कुल

50:47

टूट चुकी थी वो अपने आप को बहुत ही छोटा

50:50

महसूस कर रही थी और इसके चलते वह डिप्रेशन

50:52

का शिकार भी हो गई ऊपर से लोरी के पिता भी

50:54

एक बहुत ही एग्रेसिव व्यक्ति थे और लोहड़ी

50:57

के बचपन के दोनों में भी वो अपने घर के

50:59

बच्चों को बहुत मारा पिता करते थे और अब

51:01

लोरी की बीमारी की वजह से उसके पिता

51:03

परेशान होकर और ज्यादा एग्रेसिव होने ग गए

51:06

थे इससे पहले की हम इस घटना में आगे बंधन

51:08

हम आपको दिमाग की अलग-अलग कंडीशन के बड़े

51:11

में बताना चाहते हैं जब कोई बच्चा पैदा

51:13

होता है तो उसके दिमाग में डेल्टा ब्रेन

51:15

वाव होती है 12 साल तक आते-आते उनके दिमाग

51:19

में थी तब ब्रेन वाव आने लगती है और जवानी

51:21

के दोनों में उनके अंदर बेताब ब्रेन वाव

51:23

आई है शुरुआत की दो ब्रेनवेव एनालिटिकल मन

51:26

को इतना ज्यादा नहीं बढ़नी है और इसलिए

51:28

बच्चे कोई डिसीजन लेने से पहले बहुत

51:31

ज्यादा सोचते नहीं है उनके साथ जो भी घटना

51:33

होती है वह एक्सपीरियंस को अपने दिमाग में

51:35

बैठा लेते हैं और ये याद रखते हैं की

51:38

उन्हें कौन सा एक्सपीरियंस किस वजह से

51:39

मिला है बच्चों का अपने पेरेंट्स के साथ

51:41

कैसा रिश्ता होगा ये भी इस पर डिपेंड करता

51:44

है अब लोरी के कैसे में भी उसके बचपन की

51:46

ऐसी कई साड़ी यादें थी जिसकी वजह से आज

51:49

उसकी जिंदगी ऐसी हो गई थी इसका में करण यह

51:52

था की जब बचपन में उसके पिता से मारा करते

51:54

तब वह अपने आप को कमजोर और हताश महसूस

51:57

किया करती थी और इस बीमारी की वजह से भी

51:59

वह धीरे-धीरे वैसा ही महसूस करने ग गई थी

52:02

यही वजह थी की लोरी अपनी इस बीमारी से उभर

52:05

ही नहीं का रही थी लेकिन इस बीमारी की वजह

52:07

से लोरी की रियलिटी भी बादल रही थी बीमा

52:10

होने की वजह से उसको हर जगह पर स्पेशल

52:12

ट्रीटमेंट मिलता था बस में सीट मिलने से

52:15

लेकर उसके दोस्तों का उसके लिए लाइन में

52:17

खड़े होने तक एक भीड़ भाड़ वाले

52:19

रेस्टोरेंट में भी उसको स्पेशल ट्रीटमेंट

52:21

मिलता था और धीरे-धीरे वो इस बीमारी पर

52:23

डिपेंड होती जा रही थी क्योंकि उसे इस

52:25

बीमारी से इमोशनल बेनिफिट मिल रहा था जो

52:28

की उसे काफी पसंद ए रहा था और धीरे-धीरे

52:31

यह भी मेरी ही उसकी पहचान बन गई लोरी को

52:34

जब इस चीज का एहसास हुआ तो उसने सोच लिया

52:36

की उसे इस तरह से नहीं रहना है और इसलिए

52:38

उसने अपने आप को बदलने का मां बना लिया और

52:41

वह फिर से भारत में पहले की तरह हिस्सा

52:43

लेने ग गई उसे लगे लगा की अगर वो अपने आप

52:46

को थोड़ा पुश करें तो वो थोड़ी और ज्यादा

52:48

हेल्दी हो जाएगी लेकिन ठीक उल्टा हुआ वो

52:51

और ज्यादा बीमा पद गई इस घटना के बाद लोरी

52:54

का डिप्रेशन और एंजायटी और भी ज्यादा बाढ़

52:56

गई 30 साल की उम्र तक आते-आते लोरी एक

52:59

बूढ़े बुजुर्ग वाली जिंदगी जीने ग गई थी

53:01

वह पूरा दिन बिस्तर पर पड़ी रहती और अब वो

53:04

किसी तरह का कोई कम भी नहीं कर रही थी

53:06

लोरी की बीमारी के बड़े में खास बात यह थी

53:09

की जब वो व्हीलचेयर या बैसाखी का इस्तेमाल

53:11

नहीं करती थी तब वो काफी हेल्दी लगती थी

53:14

लोगों को यकीन भी नहीं होता था की वह

53:16

कमजोर है लेकिन यह सब तब बदला जब साल 2009

53:20

में लोरी इस किताब के लेखक से मिली लोरी

53:23

ने लेखक से सबसे पहले यही सवाल पूछा की

53:25

क्या वाकई में हम अपने दिमाग को और अपने

53:27

शरीर को बादल सकते हैं जब लेखक ने कहा की

53:30

हां तो लोरी पहले बार किसी उम्मीद को देख

53:33

रही थी लोरी ने अपने आप को बदलने के लिए

53:35

उन सभी प्रिंसिपल्स को इस्तेमाल करना शुरू

53:37

किया जो लेखक ने उसे बताए थे उसने अपने

53:39

दिमाग में मेंटल रिहर्सल का कम करना शुरू

53:42

किया और अपने आप का नया रूप बनाने की उसने

53:45

थान ली थी कुछ ही सालों के बाद लोरी बिना

53:47

किसी सहारे के चल रही थी वो काफी खुश थी

53:49

और अब उसने अपने आप को स्वीकार कर लिया था

53:52

अब उसमें बदलाव आना शुरू हो चुका था और जब

53:55

2012 में उसने अपना चेकअप करवाया तो उसे

53:58

डॉक्टर ने बताया की उसकी हालात में काफी

54:00

सुधार हुआ है लोरी ने हर दिन अपने आप को

54:02

बदलने के बड़े में सोचा उसने अपने अंदर का

54:05

एनवायरनमेंट बदला और उसने अपनी पहचान उसे

54:07

बीमारी से अलग बनाई उसने अपनी पढ़ाई फिर

54:10

से शुरू कर दी और अब वो लोगों से बात करने

54:12

में हिचकी जाति नहीं थी अपने नए रूप के

54:15

साथ-साथ वह अपने पास को बदलने की भी कोशिश

54:17

कर रही थी उसने अपनी नई जिंदगी में खुद को

54:20

एकदम हेल्दी माना जिसमें वो अपनी मर्जी के

54:22

भारत खेल शक्ति थी और धीरे-धीरे उसे इस

54:25

बात का विश्वास होने ग गया था की उसके

54:27

सोने से उसकी बॉडी में सुधार ए रहा है और

54:30

इस वजह से अंत में उसके जीने के तरीके में

54:32

भी फर्क ए गया और लोरी उसे बीमारी से पुरी

54:35

तरह से छुटकारा अपने में सफल हुई लोरी के

54:37

बाद एक और इंसान की हम यहां बात करेंगे और

54:39

वह है कैंडिस कैंडिस एक रिलेशनशिप में थी

54:42

जो ठीक नहीं चल रही थी उसके और उसके

54:45

बॉयफ्रेंड के बीच में बहुत ज्यादा झगड़ा

54:47

हुआ करते थे दोनों ही एक दूसरे के ऊपर

54:49

बहुत ज्यादा शक किया करते और इसके चलते

54:52

कैंडीडेज बहुत दुखी और डिप्रैस रहने लगी

54:54

वो अपने इस नए स्ट्रेसफुल इमोशन की एडिक्ट

54:57

बन चुकी थी उसे लगे लगा था की उसकी

54:58

पर्सनालिटी ही ऐसी है यहां हम देख सकते

55:01

हैं की कैसे कैंडिस का एक्सटर्नल

55:02

एनवायरनमेंट उसको कंट्रोल करता है और उसके

55:05

सोने और महसूस करने के तरीके को भी एकत कर

55:07

रहा है उसके इमोशंस बदलने लगे थे और वो इस

55:10

तरह से व्यवहार करने ग गई थी जैसे कोई नसे

55:12

का अट्रैक्ट करता है उसे यह बात तो पता ग

55:15

रही थी की कुछ तो ऐसा है जिसकी वजह से वो

55:17

ऐसा व्यवहार कर रही है और उसे समझ ही नहीं

55:20

ए रहा था की वो ऐसा महसूस क्यों कर रही है

55:22

वो बार-बार वही गलतियां कर रही थी और

55:24

बार-बार वैसे ही एक्सपीरियंस ए रही थी अगर

55:27

हम सही मेन में देखें तो कैंडिस अपने

55:29

बॉयफ्रेंड को अपनी पहचान साबित करने के

55:31

लिए इस्तेमाल कर रही थी वो पहले से ऐसी ही

55:34

लड़की थी लेकिन उसका वो रूप सामने नहीं ए

55:36

रहा था उसकी बॉयफ्रेंड के आने के बाद उसकी

55:38

वह साड़ी चीज सामने ए रही थी धीरे-धीरे वो

55:41

अपनी इन पुरानी यादों को अपनी पर्सनेल्टी

55:43

बनाकर बैठ गई लगातार चलते इस स्ट्रेस की

55:46

वजह से अब उसकी शरीर में भी काफी बदलाव

55:48

आने ग गए थे

55:49

बाल गिरने ग गए उसे सिरदर्द होने ग गया

55:52

नींद नहीं आई थी वतन बढ़ाने ग गया और ऐसे

55:55

कई और लक्षण उसके अंदर देखने ग गए थे

55:57

कैंडिस की बीमारी उसके खुद की वजह से ही

56:00

हुई है अपनी रिलेशनशिप के बड़े में सोचते

56:02

ही वो स्ट्रेस में ए जाति थी लेकिन तब भी

56:04

उसने अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप नहीं किया

56:06

था उसे ये बात पता थी की उसके साथ ऐसा हो

56:09

रहा है कैंडिस चाहती थी की उसके साथ ऐसा

56:12

ना हो और वो अपनी जिंदगी की जिम्मेदारी

56:14

खुद ले लेकिन तब भी वो ऐसा करने में सफल

56:16

नहीं हो का रही थी और उसका शरीर इसकी कीमत

56:19

भगत रहा था साल 2010 में कैंडिस अपने इस

56:22

हालात को लेकर एक डॉक्टर के पास गई और

56:24

वहां पर उसे पता लगा की उसे हाशिमोतो नाम

56:27

की बीमारी हो चुकी है ये एक ऑटो इम्यून

56:29

डिजीज है जिसके अंदर मैरिज का इम्यून

56:31

सिस्टम खुद ही उसकी थायराइड ग्लैंड पर

56:34

हमला करने लगता है जिसकी वजह से शरीर में

56:36

थायराइड की बहुत कमी हो जाति है इस बीमारी

56:39

में मैरिज का वचन लगातार बढ़ता है वह

56:42

डिप्रेशन में रहने लगता है और उससे पहले

56:44

का अटैक आने लगता हैं इतना ही नहीं और भी

56:47

कई साड़ी समस्याएं इसमें देखने को मिलती

56:49

है कंसल्टेशन के दौरान डॉक्टर ने कैंडल्स

56:51

को बताया की उसकी यह हालात जेनेटिक कर्म

56:54

से है और इसमें दवाई कुछ भी असर नहीं

56:56

करेगी उसे महंगी लॉज में ज्यादा पैसे नहीं

56:58

खर्च करने चाहिए और उसे साड़ी उम्र

57:00

थायराइड बीमारी से जुड़ी दवा लेनी पड़ेगी

57:03

इस घटना के बाद कैंडिस पुरी तरह से शौक

57:05

में थी लेकिन अगले ही पाल उसने अपने आप को

57:08

संभाल और इसी वक्त उसने सोच लिया था की वो

57:11

अपनी जिंदगी में बदलाव लाकर रहेगी अगले 5

57:15

मीना के अंदर उसने अपने बॉयफ्रेंड से

57:17

ब्रेकअप कर लिया हालांकि उसने तभी से

57:19

पॉजिटिव सोचना शुरू कर दिया था लेकिन तब

57:21

भी उसकी शरीर को ये बात पता थी की वह बीमा

57:24

है और उसके पॉजिटिव सोने से कोई असर नहीं

57:26

पड़ेगा इसलिए कैंडल्स ने ये माना की उसे

57:29

वो बीमारी है ही नहीं उसने डॉक्टर की

57:31

कहानी बात को जानकारी दिया और अपने आप को

57:33

कहा की बीमा होना और स्वस्थ होना केवल और

57:37

केवल दिमाग का खेल है उसे पूरा भरोसा था

57:40

की उसके दिमाग में नए विचार ए रहे हैं

57:42

जिसकी हेल्थ को और बेहतर करेंगे और अब वो

57:45

एक डिफरेंट एटीट्यूड के साथ बदलाव की

57:47

उम्मीद कर रही थी कैंडिस के बाद चलिए

57:49

बताते हैं आपको एक और इंसान की कहानी

57:51

जिसका नाम है जेनी जेनी की उम्र करीब करीब

57:55

60 वर्ष की है और वो एक बिजनेस वूमेन है

57:57

जो की अपनी कंपनी के साथ-साथ अपने परिवार

58:00

को भी बखूबी संभालती है उसके पांच बच्चे

58:03

हैं और इतनी जिम्मेदारी के चलते उसकी

58:05

जिंदगी काफी हैट्रिक हो गई थी यानी अपने

58:07

आप को हमेशा पुश करती रहती है ताकि वो इन

58:10

सभी जगह पर बेहतर से बेहतर प्रदर्शन कर

58:12

सके उसकी साथी इसलिए उसे सुपर वूमेन कहा

58:15

करते थे लेकिन यह सब जनवरी 2008 में खत्म

58:18

हो गया जब एक बार जर्नी अपने घर जा रही थी

58:21

तो थोड़ी दूरी पर वह अचानक से गिर गई और

58:24

उसे दिन के बाद से वो बिल्कुल भी बेहतर

58:26

महसूस नहीं कर साकी एक ही रात में उसकी

58:28

जिंदगी पुरी तरह से बादल गई जब वो डॉक्टर

58:30

के पास गई तो उसे पता लगा की उसे बड़ी ही

58:33

गंभीर बीमारी है जैसे सेकेंडरी

58:34

प्रोग्रेसिव मल्टीप्लेक्स कहते हैं इसमें

58:37

हमारा इम्यून सिस्टम हमारे नर्वस सिस्टम

58:40

पर अटैक करने लगता है जिसकी वजह से हमारे

58:42

शरीर में कई साड़ी दिक्कत आने लगती है

58:45

बहुत साड़ी कोशिश करने के बाद भी अपने कम

58:48

में उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं का रही थी

58:50

और अब उसकी जिंदगी में हर छोटे से छोटे कम

58:53

के लिए उसे दूसरे लोगों की मदद की जरूर

58:55

पढ़ने लगी लेकिन जेनी ऐसा बिल्कुल नहीं

58:58

होने देने वाली थी उसने धीरे-धीरे अपने

59:00

दिमाग को ट्रेन करना शुरू किया और ये

59:02

मेंटल हर साल वो हर दिन किया करती अपनी

59:04

मेंटल ट्रेनिंग के दौरान जानी अपने आप को

59:07

चलते हुए भागते हुए और वजन उठाते हुए सोचा

59:10

करती इसका सर ये हुआ की थोड़े ही मीना में

59:13

वो धीरे-धीरे चल का रही थी जानी ने अपनी

59:16

इस प्रोसेस को लगातार जारी रखा और अंत में

59:18

बड़े ही हैरतअंगेज तरीके के साथ इस बीमारी

59:21

से उभर कर बाहर ए गई मेडिकल साइंस में इन

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सभी पेशेंस का रिकॉर्ड दर्ज है और आज भी

59:25

बाकी वैज्ञानिकों और डॉक्टर के लिए यह

59:27

कैसे एक रिसर्च कैसे है जिससे वह भी हैरान

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है की कैसे किसी इंसान के सोने मंत्र से

59:33

उसके अंदर की जिन का भी बदलाव किया जा

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सकता है और किसी भी बीमारी से छुटकारा

59:38

पाया जा सकता है और जेनी ने इस बात को

59:40

साबित कर ही दिया

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यू आर प्लस हमने हमारे अब तक के सफर में

59:49

प्लाजन के बड़े में लगभग साड़ी जानकारी

59:52

जान ली है हमने प्रतिबों से मिलने वाली

59:54

कुछ जिंदगियां के बड़े में भी देखा लेकिन

59:56

अब सबसे बड़ा सवाल जो आता है वो ये है की

59:59

आप इस नसीबों को अपने फायदे के लिए कैसे

60:01

इस्तेमाल कर सकते हैं कैसे आप खुद एकसीबों

60:04

की तरह कम कर सकते हैं और अपनी जिंदगी को

60:06

बादल सकते हैं इस किताब का अंतिम उद्देश्य

60:09

यही है की यह आपको +ibo बना सके और अपनी

60:12

जिंदगी में ऐसा व्यक्तित्व हासिल कर सकें

60:14

आप जिसकी आपको तलाश है अब तक आप समझ चुके

60:17

होंगे की प्रति वो कम इसलिए करता है

60:19

क्योंकि एक इंसान उसे चीज में भरोसा कर

60:22

लेट है जो वास्तव में मौजूद ही नहीं होती

60:24

जैसे की एक नकली टैबलेट या कोई दवाई और

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इसकी बावजूद भी उसे वो नतीजा मिलते हैं

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जिसकी उसे उम्मीद है हमने यह भी देखा की

60:32

इस कंडीशन में आदमी अपने आप को इन चीजों

60:34

के सामने पुरी तरह से सुरेंद्र कर देता है

60:37

उसे इसकी आउटकम के बड़े में कोई भी

60:39

जानकारी नहीं होती हमें किसी और से कोई

60:41

उम्मीद होती है और कोई और हमें किसी चीज

60:44

के बड़े में यकीन दिलाता है जैसे की एक

60:47

डॉक्टर के खाने पर हम यह मानते हैं की

60:49

हमें कौन सी बीमारी है और कौन सी नहीं और

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इस हालात में एक बाहरी चीज हमें इफेक्ट कर

60:54

रही है लेकिन हमारा उद्देश्य ये है की हम

60:56

खुद अपने प्लसीबों बने और हम अपने आप को

60:59

अपनी मनचाही दिशा की और ले जा सके पहले के

61:02

एपिसोड में आपने जिन तीन लोगों के बड़े

61:04

में पढ़ा था उन सब ने ये अचीवमेंट तब

61:06

प्राप्त किया जब उन्होंने अपने आप में

61:08

भरोसा करना शुरू किया उन्हें बाहरी शोर से

61:10

हमेशा कुछ अलग ओपिनियन मिले और उन्होंने

61:13

खुद नसीबों बनकर उन सभी बाहरी लोगों को

61:15

गलत साबित किया अब तक की हुई रिसर्च के

61:18

जरिए और लेखक अपने लंबे अनुभव के साथ यह

61:21

का सकते हैं की हम खुद ही प्लासिबो हैं और

61:23

हम ही अपनी जिंदगी में किसी भी तरह के

61:25

होने वाले बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं

61:27

लेकिन हम इतना फोकस्ड कैसे हो सकते हैं तो

61:30

इसके लिए आपको सबसे पहले जो भी चीज असंभव

61:32

लगती है उसको अपने लिए जानी पहचानी बनाया

61:35

उसके बड़े में रिसर्च कीजिए उसके बड़े में

61:37

जानिए और उसे अपने दिमाग में बैठा लीजिए

61:40

और फिर हर दिन अपने आप को उसे तरह का

61:42

व्यक्ति बनते हुए सोचिए और जब आप उसे बड़े

61:45

में सोच रहे हैं तब बाहरी दुनिया से

61:47

बिल्कुल अपने आप को अलग कर दीजिए

61:49

धीरे-धीरे मेंटल रिहर्सल की मदद से आप

61:52

अपने आप में बदलाव देखने लगेंगे भले ही

61:54

आपका बाहरी एनवायरनमेंट कैसा भी हो लेकिन

61:56

तब भी आप अंदर से बदलने लगेंगे और आप हर

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दिन एक नया इंसान बन रहे होंगे इस पुरी

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बात का साथ ये निकलता है की नॉर्मली हमारी

62:04

बाहरी दुनिया हमें अंदर से बादल देती है

62:06

पर हमारी अंदर की दुनिया भी हमें अंदर से

62:09

बादल शक्ति है लेकिन हमें हमारी अंदर की

62:11

दुनिया से खुद को अंदर और बाहर दोनों तरफ

62:14

से बदलना है और इसके लिए आपको सबसे पहले

62:16

जो भी चीज हासिल करनी है उसके ऊपर भरोसा

62:19

रखना शुरू कीजिए अब आपको कोई झूठी गोलियां

62:22

लेने की जरूर नहीं पड़ेगी क्योंकि आप खुद

62:24

नसीब हो बन चुके हैं आपको किसी एक्सटर्नल

62:27

स्टिमुलेशन की जरूर भी नहीं है आप जो भी

62:29

अपने आप को कहेंगे आपका दिमाग वही मां लगा

62:32

अगर आप अपने दिमाग को कहेंगे की आपको दर्द

62:34

नहीं हो रहा है तो आपको दर्द नहीं होगा और

62:37

इसी तरह से आप अपनी बायोलॉजी को बदलने

62:39

लगेंगे आपको एक बड़ी ही रोचक बात बताते

62:42

हैं की अगर हम अपने आसपास देखेंगे तो हम

62:44

पाएंगे की 90% ज्यादा लोग अपने आप में

62:47

भरोसा रखते हैं हर व्यक्ति को अपने ऊपर

62:49

कॉन्फिडेंस होता ही है लेकिन उनका

62:51

कॉन्फिडेंस एक लिमिटेड लेवल तक होता है एक

62:54

स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा इस बात के लिए

62:56

तो कॉन्फिडेंट हो सकता है की वो स्कूल में

62:58

टॉप कर लगा लेकिन उसका इस बात के लिए

63:00

कॉन्फिडेंट होना बहुत मुश्किल है की वो

63:02

बिना स्कूल जाए भी जिंदगी में सफल हो सकता

63:04

है यहां पर हमारे सामने शायद शब्द ए जाता

63:07

है जिसकी वजह से हम किसी चीज में पुरी तरह

63:10

से भरोसा नहीं कर पाते और जब भी हमें कोई

63:12

किसी तरह का ऑप्शन देता है तो हम उसे

63:14

एनालाइज करने ग जाते हैं पर ये शायद हमें

63:18

उसे तरफ बढ़ाने से रोकना है अपने आप को

63:20

प्लासिबो बनाने के लिए आपको सबसे पहले

63:22

अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा फिर

63:24

आपका डिसीजन भले ही कितना ही मुश्किल

63:27

क्यों ना हो आप अपने आप पर भरोसा कायम

63:29

रखें और उसे दिशा में आगे कम बढ़ाना शुरू

63:31

कर दें जब आप एक बार अपनी मेंटल रिहर्सल

63:34

शुरू कर दें उसके बाद आप साथ ही साथ आपके

63:37

अंदर आने वाले बदलावों को भी नोटिस करना

63:39

शुरू कर दें ताकि आप ये जान सके की आप आप

63:43

सही दिशा में आगे बाढ़ रहे हैं साथ ही साथ

63:46

यह पॉजिटिव नतीजा आपकी बिलीव सिस्टम को और

63:48

ज्यादा मजबूत करेंगे और इससे आपको नसीबो

63:51

इफेक्ट और ज्यादा अच्छा देखने को मिलेगा

63:53

और इस तरह से धीरे-धीरे आप अपने आप पर

63:56

पुरी तरह से भरोसा करने ग जाएंगे और उसे

63:58

वक्त आप अपने आप को किसी भी तरह से बादल

64:01

पाएंगे इस तरह से आप अपने आप को प्लासिबो

64:03

बनाने की इस रोमांचक सफर पर पहले कम रख

64:06

चुके होंगे

64:11

मेडिटेशन और मेंटल रिहर्सल आपने अब अपने

64:14

आप को बदलने की शुरुआत करती है लेकिन यह

64:17

प्रोसेस जितना आपको सुनने में आसन ग रहा

64:19

है जरूरी नहीं है की इसे पूरा करना भी

64:21

उतना ही आसन हो क्योंकि अगर अपने आप को

64:24

बदलना इतना आसन होता तो आज हर कोई ऐसा कर

64:27

चुका होता इसे करने के लिए सबसे जरूरी चीज

64:29

है की आप इसकी मेकैनिज्म को अच्छी तरह से

64:32

समझे आपको इसे अच्छी तरह से सीखना होगा

64:34

केवल तभी आप इसका रिजल्ट का सकेंगे चलिए

64:37

आपको ये सीखने हैं की आप किस तरह से अपने

64:40

आप को +i वो बना सकते हैं और इस चीज में

64:43

आपको कम आने वाली मेंटल रिहर्सल को आप

64:45

कैसे परफॉर्म कर सकते हैं सबसे पहले सवाल

64:48

की आपको किस वक्त मेंटल रिहर्सल या

64:50

मेडिटेशन करना है तो इसका जवाब यह है की

64:53

आपको दिन में दो बार मेडिटेशन करना है एक

64:56

सुबह उठने के बाद और दूसरा जवाब सोनी जा

64:59

रहे हो ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप सोते हैं

65:01

तब आपके ब्रेन वाव की स्ट्रक्चर में बदलाव

65:04

आता है और जब आप सुबह जागते हैं तब भी

65:07

आपके ब्रेन वाव के स्ट्रक्चर में बदलाव

65:09

आता है और इन दो समय पर हरसल या मेडिटेशन

65:12

करने पर आप अपने पूरे दिमाग को इस चीज के

65:14

लिए ट्रेन कर पाएंगे या यूं कहें तो इन दो

65:17

वक्त पर आपका सब कॉन्शियस मन आपके हाथ में

65:19

होता है आप उसे केवल तब ही ट्रेन कर सकते

65:22

हैं कई बार आपने देखा होगा की आप नींद में

65:24

होते हैं और कुछ कम करते हैं तो सुबह लगता

65:27

है जैसे की आपने वो कम किया ही ना हो

65:28

क्योंकि इस वक्त आपका सब कॉन्शियस दिमाग

65:31

आप से वो कम करवा रहा होता है ये उदाहरण

65:34

हम लगभग सभी लोगों में देख सकते हैं अब

65:36

बड़ी आई है दूसरी जरूरी सवाल की और वो ये

65:38

है की हमें ये मेडिटेशन कहां करना चाहिए

65:41

तो आपके मेडिटेशन करने के लिए सबसे बेहतर

65:44

जगह वही होगी जहां आपको कोई भी

65:45

डिस्ट्रेक्ट ना करें क्योंकि आपके लिए ये

65:48

बहुत जरूरी है की आप बाहरी दुनिया से अपने

65:50

आप को पुरी तरह से अलग कर दें आपको बाहरी

65:53

दुनिया की बिल्कुल भी भक नहीं हनी चाहिए

65:54

और आप हर दिन इस जगह पर मेडीटते करें यहां

65:58

आपको यह बात ध्यान में रखती है की आपको

66:00

मेडिटेशन अपने बिस्तर पर नहीं करनी है साथ

66:03

ही साथ आपको लेते लेते भी मेडिटेशन नहीं

66:06

करना है आपको कोशिश यह करनी है की या तो

66:09

कुर्सी पर बैठकर फिर जमीन पर बैठकर ही आप

66:12

मेडिटेशन करें केवल तभी आप इसके बेहतर

66:14

नतीजा की उम्मीद कर सकते हैं अगर आप चाहे

66:17

तो आप रिलैक्सिंग शांत और धीमी आवाज में

66:19

कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजा सकते हैं

66:21

लेकिन ध्यान रहे की इसमें लिरिक्स नहीं

66:24

होने चाहिए क्योंकि इससे आपका ध्यान

66:26

भड़काने लगेगा म्यूजिक बजाने का फायदा ये

66:28

भी है की इससे आप अपने आसपास के थोड़े

66:31

बहुत छोड़ शराबी से दूर हो सकते हैं और

66:33

यहां पर एक और बात ध्यान रखना की है की आप

66:35

उसे तरह का म्यूजिक भी ना सुन जिससे आपकी

66:37

कोई याद जुड़ी हो क्योंकि तब आप किसी अलग

66:40

तरह के खयालों में डूबने लगेंगे इस बात का

66:42

भी ध्यान रखें की आपके आसपास कोई भी चीज

66:45

की ज्यादा खुशबू या बदबू ना ए रही हो

66:47

क्योंकि ऐसी चीज आपको बाहरी दुनिया से

66:50

जोड़ शक्ति हैं और जिसके करण आप मेडीटते

66:53

ठीक से नहीं कर पाएंगे साथ ही साथ आपको

66:55

अपनी बॉडी को कंफर्टेबल भी रखना है आपके

66:58

कपड़े कंफर्टेबल होने चाहिए ज्यादा टाइट

67:00

कपड़े ना पहने अपनी घड़ी या दूसरी कोई भी

67:03

प्रकार की ज्वेलरी अगर आपने पहन राखी है

67:05

तो उसे उतार दीजिए कंफर्टेबल कपड़े इसलिए

67:07

जरूरी है क्योंकि यह आपको बाहरी दुनिया से

67:10

पुरी तरह से अलग करने में मदद करेंगे

67:12

मेडिटेशन के दौरान आपका अपने शरीर पर

67:15

ध्यान बिल्कुल नहीं होना चाहिए बीच-बीच

67:17

में हो सकता है की आपको अपने शरीर पर

67:20

खुजली आने जैसी छोटी-छोटी चीज देखने को

67:22

मिल शक्ति हैं लेकिन आपको उन सब पर

67:25

बिल्कुल भी ध्यान नहीं देना है यह चीज बस

67:27

आपको अपनी मेडिटेशन से दूर करने के लिए

67:29

आपके सामने आई रहेगी अगर आप चश्मा पहना

67:32

हैं तो आप उसे भी उतार लीजिए मेंटल

67:35

रिहर्सल या मेडिटेशन शुरू करने से ठीक

67:37

पहले आप पानी पी लेने और बाथरूम भी जाकर

67:40

आएं ताकि मेडिटेशन के दौरान ये सब चीज

67:43

आपको बिल्कुल भी डिस्टर्ब ना करें आप जब

67:45

मेडिटेशन के लिए बैठे हैं तो आपकी कमर

67:47

बिल्कुल सीधी हनी चाहिए आपकी बॉडी रिलैक्स

67:50

हनी चाहिए लेकिन इतनी भी रिलैक्स नहीं की

67:53

आपको नींद ही ए जाए शुरुआत में आप देखेंगे

67:55

की आपको धीरे-धीरे नींद आने लगेगी लेकिन

67:58

इस बात की चिंता मत कीजिए क्योंकि थोड़े

68:00

समय बाद आपके शरीर को उसकी आदत पद जाएगी

68:03

और आप मेडिटेशन पर और ध्यान दे पाएंगे

68:06

धीरे-धीरे आप ऐसी स्टेज में पहुंचेंगे

68:08

जहां पर आप फोकस्ड होंगे लेकिन साथ ही साथ

68:11

रिलैक्स्ड भी आप बाहरी दुनिया से बिल्कुल

68:14

अलग हो जाएंगे और जो म्यूजिक आपके पास बाज

68:16

रहा था वो आपको ऐसा लगे लगेगा जैसे आपसे

68:20

बहुत ज्यादा दूरी पर बाज रहा हो इस वक्त

68:22

समझ लेना चाहिए की आप मेडिटेशन की गहरी

68:24

अवस्था में जा रहे हैं और आपका सब

68:26

कॉन्शियस मन एक्टिव हो रहा है एक और जरूरी

68:29

सवाल जो हमारे दिमाग में आता है वह यह है

68:32

की हमें आखिरकार कितने समय तक मेडिटेशन

68:34

करना चाहिए तो इसका जवाब यह है की आपका

68:37

मेडिटेशन 45 मिनट से 1 घंटे के बीच में

68:40

होना चाहिए मेडिटेशन को सुबह और शाम को

68:43

करने की एक वजह ये भी है की इस समय आपके

68:45

दिमाग में कोई और कम करने के लिए नहीं

68:47

होगा और इस वजह से आप वक्त को लेकर ज्यादा

68:50

सोचेंगे नहीं आप मेडिटेशन के खत्म होने के

68:53

समय के लिए अपनी घड़ी में अलार्म लगा सकते

68:55

हैं ताकि आपके सेशन खत्म होने पर आपको

68:58

उसका पता ग जाए ध्यान रखें समय आपके

69:01

मेडिटेशन में डिस्ट्रक्शन का करण नहीं

69:03

बन्ना चाहिए बाहरी दुनिया के साथ साथ आपको

69:06

समय से भी दूरी बनाकर रखती है मेडिटेशन

69:09

करते वक्त आपके दिमाग में एक और चीज आएगी

69:11

वो यह है की कई बार आपको ऐसा लगेगा की आप

69:14

यह सब क्यों कर रहे हैं आपके दिमाग में

69:16

नेगेटिव ख्याल आने लगेंगे और आपको लगे

69:18

लगेगा की आप कभी बादल ही नहीं सकते हैं

69:20

लेकिन ये सब ख्याल आने एक नॉर्मल सी बात

69:23

है आपको बस इन खयालों की वजह से अपने

69:25

ध्यान को नहीं भड़काने देना है ऐसा इसलिए

69:28

होता है क्योंकि हमारी डिफॉल्ट सेटिंग ऐसी

69:30

हो चुकी है की हम परेशान ना खुश डिप्रेस्ड

69:34

होने को ही जिंदगी मां लेते हैं इस वजह

69:36

हमारी आदत ऐसी बन जाति है की हम किसी ना

69:39

किसी परेशानी को ढूंढते ही रहते हैं अब हम

69:41

आपको बताएंगे की कैसे आप मेडिटेशन के

69:43

दौरान आपके जो नेगेटिव ख्याल ए रहे हैं

69:45

उनसे दूर र सकते हैं जैसा की हमने आपको

69:48

पहले बताया था की बाहरी विचारों को आने से

69:51

रोकने का सबसे बेहतर तरीका ये है की आप

69:53

मेडिटेशन के लिए आने वाला म्यूजिक धीमी

69:56

आवाज में बजाकर सुन डॉक्टर जो डिस्पेंसर

69:59

ने खुद मेडिटेशन के लिए एक विशेष म्यूजिक

70:01

लॉन्च किया है जिसका नाम है यू आर डी बुक

70:04

मेडिटेशन इस म्यूजिक के जारी आप मेडिटेशन

70:07

के दौरान नेगेटिव खयालों को अपने दिमाग

70:09

में आने से बच्चा कर सकते हैं उसकी बात

70:11

आपको यह करना है की आप किस चीज के बड़े

70:13

में अपने दिमाग में सोचते हैं उसके ऊपर

70:15

भरोसा करना शुरू करना है अगर आप जिंदगी

70:18

में कुछ बन्ना चाहते हैं तो मेडिटेशन के

70:20

दौरान अपने आप को वैसा बना हुआ सोचिए और

70:23

अपने दिमाग के किसी भी हिस को ये मत सोने

70:26

दीजिए की आप ऐसा नहीं कर सकते या आप ऐसा

70:29

नहीं बन सकते अपने विचारों के साथ अपना

70:31

रिश्ता मजबूत करें और उसे अपने अपने पहले

70:34

के बिलीफ और नजरिया को बदलने के लिए सबसे

70:37

पहले आपको उसे अपने दिमाग के भीतर से

70:39

हटाना होगा और धीरे-धीरे उसे पुरानी चीज

70:41

को हटाकर नए विचार अपने दिमाग में लाने

70:44

होंगे इससे आप नए विचारों की और जाएंगे और

70:47

पुराने परसेप्शन और बिलीव को धीरे-धीरे

70:49

पीछे छोड़ते जाएंगे हर दिन जब आप मेडिटेशन

70:52

करने बैठे तो उससे पहले पेपर के बीच में

70:54

एक लाइन खींचे और उसके एक तरफ उन चीजों को

70:57

लिखे जिन्हें आप भूलना चाहते हैं और दूसरी

70:59

और उन चीजों को लेकर जिन्हें आप अपनी

71:01

जिंदगी में अपना ना चाहते हैं उसके बाद

71:04

अपने पूरे मेडिटेशन के दौरान उन चीजों को

71:06

पुरी तरह से इग्नोर करें जिन्हें आप अपनी

71:09

जिंदगी से हटाना चाहते हैं और केवल उन

71:11

चीजों को अपने की सोच जिन्हें आप जिंदगी

71:13

में लाना चाहते हैं मेडिटेशन के पहले भाग

71:16

में आप सबसे पहले अपने आप को पुरी तरह

71:18

रिलैक्स कीजिए और सोचिए की आप स्पेस में

71:20

है आप यह सोचिए की आप फर्ज पर नहीं बैठे

71:22

हैं बल्कि आप स्पेस में टायर रहे हैं

71:24

स्पेस आपके पास अनंत तक फैला हुआ है आप यह

71:27

सोचिए की आप यूनिवर्स के बिशन बीच है और

71:30

आपके पास केवल अंधेरा है और कुछ भी नहीं

71:32

धीरे-धीरे आपको ऐसा महसूस होने लगेगा जैसे

71:35

की वो स्पेस या अंतरिक्ष आपकी दिमाग में

71:38

मौजूद है अब आप अपने आप को उसे स्पेस में

71:40

रखें यानी की ऐसा सोच की अब आप इस स्पेस

71:43

में गिरे हुए हैं और आपके शिवाय आपके

71:46

आसपास कुछ भी नहीं है हर तरफ इंफाइनाइट

71:49

लंबाई का स्पेस फैला हुआ है और वहां केवल

71:51

आप मौजूद हैं धीरे-धीरे आप उसे स्पेस की

71:54

एनर्जी को महसूस करने की कोशिश करें और

71:57

अपने शरीर के हर हिस को उसे स्पेस में

71:59

रखकर महसूस करें पहले आप स्पेस की एनर्जी

72:01

को अपने दिमाग के आसपास महसूस करेंगे और

72:04

धीरे-धीरे नीचे आते-आते ये आपके पैरों की

72:07

उंगली तक पहुंच जाएगी अब आप पुरी तरह से

72:09

स्पेस के जो बीच पहुंच चुके हैं मेडिटेशन

72:12

के अगले भाग में आपको अपने एक्सटर्नल

72:14

एनवायरनमेंट को पुरी तरह से दूर कर देना

72:16

है आपको अपने आसपास चल रही किसी भी चीज का

72:18

ध्यान नहीं रखना है और ऐसा रखना के लिए

72:20

कोशिश करें की आपके आसपास कोई भी

72:23

डिस्ट्रक्शन ना हो ऐसी कोई भी चीज ना हो

72:25

जो आपको ये महसूस कराए की आप स्पेस पर

72:28

नहीं बल्कि किसी कमरे में है उसे वक्त ना

72:31

आपके पास समय चल रहा है ना कोई आवाज ना

72:34

कोई इंसान आप बस अपनी सोच में दुबे हुए

72:36

हैं और अपने आप की एनर्जी को महसूस कर रहे

72:39

हैं आपने फ्यूचर के बड़े में सोच रहे हैं

72:41

ना पेस्ट के बड़े में करीब 15 मिनट तक

72:44

आपको इसी तरह से मेडिटेशन करना है

72:46

मेडिटेशन के तीसरी भाग में आपको उसे चीज

72:48

के बड़े में सोचना है जिससे आप बदलना

72:51

चाहते हैं और आप उसे वक्त यह सोचिए की आप

72:54

इसे बादल चुके हैं अब आप एक नई पर्सनालिटी

72:56

अपने वाले हैं उसके बाद आप यह सोचिए की

72:59

आपको किस बिलीव यहां परसेप्शन को अपने

73:01

भीतर रखना है और फिर लगातार उसके बड़े में

73:03

सोचते रहिए मेडिटेशन की सबसे जरूरी स्टेट

73:07

है उसे वक्त आपका सब कॉन्शियस मन एक्टिव

73:09

होता है अगर आप उसे जी तरह से ट्रेन करना

73:11

चाहते हैं वैसे ट्रेन कर सकते हैं अपने आप

73:15

को अपने सबकॉन्शियस मन के सामने सुरेंद्र

73:17

कर दीजिए आपका नया बिलीफ अपने आप ही आपके

73:19

भीतर जान लगेगा इस फीलिंग को अब पुरी तरह

73:22

से याद कर लीजिए और धीरे-धीरे आप वापस

73:24

अपनी दुनिया में आने की कोशिश कीजिए जी

73:27

तरह से आप सब कॉन्शियस लेवल तक गए थे ठीक

73:30

उसका उल्टा करके आपको वापस नॉर्मल दुनिया

73:32

में आना है धीरे-धीरे आपको अपने आसपास की

73:35

चीजों को महसूस करना है और अंत में आपको

73:38

अपनी आंखें खोलने है इस चीज को अपनी रोज

73:40

की आदत बना लीजिए और थोड़े ही समय बाद आप

73:43

देखेंगे की यू आर डी एक्चुअल प्लेसिबो

73:46

यानी की आप ही वास्तविक नसीबो हैं

73:51

कंक्लुजन दोस्तों

73:54

किताब की समरी को सुनने के बाद आप समझ गए

73:57

होंगे की हमारी अल ताकत हमारे खुद के अंदर

74:00

होती है और हमारा दिमाग ही हमारे सफल और

74:03

असफल होने की वजह है हम खुद ही ये डिसाइड

74:05

करते हैं की हमें अपनी जिंदगी में किस

74:07

मुकाम तक पहुंचाना है लेकिन जब हम अपने

74:09

आसपास देखते हैं तो हमें पता लगता है की

74:12

हम अक्सर अपने आप को बाहरी दुनिया से

74:14

अफेक्टेड होने देते हैं हम उनकी ओपिनियन

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को अपने दिमाग में बैठा लेते हैं और फिर

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इस को हम अपनी पर्सनालिटी बना लेते हैं

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अगर कोई व्यक्ति हमें यह कहता है की आप

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देखने में अच्छे नहीं हैं तो हम उसे बात

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को अपने दिमाग में बैठा लेते हैं और फिर

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साड़ी उम्र इस पर्सनालिटी को लेकर आगे

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बढ़ते हैं कोई हमें कहता है की हम कोई कम

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नहीं कर पाएंगे और हम उसे बात को मां लेते

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हैं हम अपने आप पर और हमारी काबिलियत पर

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शक करने ग जाते हैं और यही से हम जिंदगी

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में पीछे रहने ग जाते हैं यह किताब हमें

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सिखाती है की हम जैसे भी हैं वो सिर्फ और

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सिर्फ हमारी खुद की वजह से है और हम अपने

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आप को बादल भी सकते हैं अपने आप को बदलने

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के लिए हमें किसी बाहरी ताकत की जरूर नहीं

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है हमारे दिमाग की ताकत से हम अपने आप को

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और अपनी जिंदगी को आसानी से बादल सकते हैं

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बस जरूर है तो एक फॉक्स मन की इस किताब

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में हमने शिखा की कैसे हम इस फोकस्ड मन को

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बना सकते हैं आज हमारे दिमाग में हर एक

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सेकंड में हजारों खयाल आते हैं अपने आप को

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बदलने के लिए हमारा इन खयालों को कंट्रोल

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करना बहुत जरूरी है क्योंकि ये ख्याल ही

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यह बाद डिसाइड करते हैं की हम फ्यूचर में

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कहां जाएंगे और कैसे बनेंगे ये किताब

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शुरुआत है आपके नए भविष्य की इसमें हमें

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सीखने को मिलता है की कैसे अगर हम अपने आप

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को कोई बात समझा दें और अपने दिमाग को बता

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दें की आपको ये कम कर ही लेंगे तो उसे

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वक्त आपको कोई भी आदमी उसे कम को पूरा

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करने से रॉक नहीं सकता है हमें हमारे

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दिमाग की ताकत का पता लगता है और कैसे

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हमारा दिमाग ना केवल हमारे शरीर में बल्कि

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जेनेटिक लेवल पर भी बदलाव ला सकता है जिन

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जेनेटिक बीमारियों को आज तक इंक्यूरेबल

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यानी कभी ठीक ना हो सके वैसा बता कर हमने

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हमारी जिंदगी को निराशा में जोंक दिया था

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नसीबो इफेक्ट के बाद में समझ में आता है

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की हमारे दिमाग की हिम्मत से हम अपने शरीर

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में किसी भी तरह का बदलाव ला सकते हैं जिन

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बीमारियों का मेडिकल साइंस में कोई इलाज

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नहीं है वो सभी बीमारियां केवल हमारे इस

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फॉक्स मन से ठीक की जा शक्ति हैं ये किताब

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हमें रास्ता दिखाई है की कैसे हम इस फॉक्स

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मन तक पहुंचे और हम खुद एक नसीबो बने तो

76:12

आप हमें कमेंट करके ये जरूर बताएं की

76:14

हमारी ये पेशकश आपको कैसी लगी आगे भी ऐसी

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ही रोचक और इनफॉर्मेटिव बुक समरी सुनने के

76:19

लिए आप बने रहिए

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