₹1 Lakh/Month from ONE Digital Product (Step-by-Step Roadmap) | Vaibhav Kadnar
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सिर्फ एक बार बनाओ और बार-बार बेचो। यही
है डिजिटल प्रोडक्ट्स का असली गेम। सोचो
आपने एक कोर्स बनाया है या फिर टेंपलेट
बनाया या फिर एक ई-बुक बनाई है। आपने उस
पे बस एक बारी मेहनत की। आपने उसका कंटेंट
अच्छे से लिखा। उसकी पैकेजिंग अच्छे से की
और उसका एक प्राइस सेट किया। अब वही सेम
चीज आप 10 लोगों को बेचते हो, 100 लोगों
को बेचते हो और हजार लोगों को बेचते हो।
इसे आपको बार-बार बनाना नहीं पड़ता। उसकी
डिलीवरी नहीं करनी पड़ती और उसका सपोर्ट
भी मिनिमल होता है। लेकिन उस एक बार बनाए
हुए प्रोडक्ट के हर सेल पे आपको पैसा जरूर
आता है। और इसी के रिलेटेड एक बिजनेस
प्लान मैं आज आपको बताने वाला हूं जिसे
कहते हैं डिजिटल प्रोडक्ट्स। इनफैक्ट जब
आपने यह वीडियो प्ले किया तो हो सकता है
आपने भी किसी ना किसी कोर सेलर, टेंपलेट
सेलर या फिर किसी कोच की ऐड जरूर देखी
होगी। स्टेप बाय स्टेप इस वीडियो में मैं
आपको आगे जाके बताने वाला हूं। लेकिन उससे
पहले समझते हैं कि एक डिजिटल प्रोडक्ट
होता क्या है? उसकी आखिर टाइप्स क्या-क्या
होती है? आप सबसे पहले फंडा समझो कि
डिजिटल प्रोडक्ट मतलब कोई भी ऐसी चीज जो
ऑनलाइन डिलीवर हो सके बिना किसी फिजिकल
शिपिंग के। आपको किसी भी टाइप की पैकेजिंग
नहीं करनी, किसी भी टाइप का कूरियर नहीं
करना, किसी भी टाइप की इन्वेंटरी नहीं
रखनी। डायरेक्टली जब कस्टमर बाय करता है
तो उसे इंस्टेंट एक्सेस मिल जाता है। और
इसमें कई सारे अलग-अलग टाइप्स होते हैं
जिसमें सबसे पहला टाइप है ऑनलाइन कोर्सेज।
अगर आपके पास कोई भी ऐसी स्किल है जैसे
वीडियो एडिटिंग, मार्केटिंग, कुकिंग,
फाइनेंस, फिटनेस चाहे कोई भी स्किल आपको
आती हो उसके आप स्ट्रक्चरर्ड वीडियोस को
एक पैकेज में कन्वर्ट कर सकते हो और जिससे
आपका बनता है कोर्स। उसके बाद दूसरा टाइप
आता है टेंप्लेट्स एंड डिजिटल डाउनलोड्स
जिसमें आप नोशन टेंपल्लेट्स, कैनवा
टेंपल्लेट्स, एक्सेल शीट्स, रे्यूेस,
फॉर्मेट्स, प्रेजेंटेशन डेक्स कुछ भी बेच
सकते हो। उसके बाद तीसरा टाइप आता है
ई-बुक्स एंड गाइड्स। अगर आपके पास किसी भी
टॉपिक के ऊपर एकदम डीप नॉलेज है तो उसे
लिख दो। उसका एक पीडीएफ बनाओ। उस पे एक
प्राइस लगाओ और इंस्टेंटली सेल करना शुरू
कर दो। एंड चौथा टाइप आता है सॉफ्टवेयर्स
एंड टूल्स। अगर आप कोड कर सकते हो या फिर
किसी डेवलपर से बनवा सकते हो तो आप अपना
खुद का एक सैस प्रोडक्ट यानी सॉफ्टवेयर एज
अ सर्विस प्रोडक्ट भी बना सकते हो। या फिर
चाहे तो आप एक प्लगइन क्रिएट कर सकते हो
Google Chrome के लिए या फिर एक ऐप भी बना
सकते हो। और फिर आता है इसका पांचवा टाइप
व्हिच इज़ मेंबरशिप एंड पेड कम्युनिटी। फॉर
एग्जांपल मान लो आप यहां पे एक वीडियो
एडिटर्स की कम्युनिटी क्रिएट कर सकते हो।
जहां पे सारे के सारे वीडियो एडिटर्स हैं
और अगर आपको कोई भी क्लाइंट वर्क आता है
तो आप उस कम्युनिटी में शेयर करते हो और
अपना खुद का एक कमीशन चार्ज करते हो। और
फिर आता है डिजिटल प्रोडक्ट्स का सिक्स
टाइप व्हिच इज कोचिंग एंड कंसल्टिंग। जहां
पे आप वन ऑन वन कोचिंग या फिर ग्रुप कॉल्स
भी कर सकते हो। जनरली जितने भी सारे लोग
फिटनेस में है वो अभी इस चीज को कर रहे
हैं। यानी ऑल इन ऑल फंडा यह है कि अगर
आपके पास किसी भी टाइप का नॉलेज है, स्किल
है या फिर कोई भी स्यूशन है जो लोगों की
प्रॉब्लम सॉल्व कर सकता है तो आप उसका एक
डिजिटल प्रोडक्ट बना सकते हो। अब सवाल
सबसे बड़ा यह आता है कि इसे बनाए कैसे? और
यहीं पर बहुत सारे लोग कंफ्यूज हो जाते
हैं कि क्या बनाऊं? कैसे बनाऊं? कितना
डिटेल्ड होना चाहिए? प्लेटफार्म कैसा होना
चाहिए? रिलैक्स। मैं आपको ना एक सिंपल
फ्रेमवर्क देने वाला हूं। इस फ्रेमवर्क को
अगर आप फॉलो करोगे तो इस वीडियो के एंड तक
आपका डिजिटल प्रोडक्ट बन के रेडी हो जाएगा
और इन फैक्ट आप इसे डायरेक्टली सेल भी कर
पाओगे। अब शुरू से शुरू करते हैं। सबसे
पहले समझते हैं कि एक डिजिटल प्रोडक्ट
बनाना कैसे है। तो यहां पे स्टेप नंबर वन
आती है किसी भी प्रॉब्लम को पिक करो। देखो
आपको इस माइंडसेट में घुसना पड़ेगा कि लोग
प्रोडक्ट्स नहीं खरीदते। लोग एक्चुअली में
सॉलशंस खरीदते हैं। तो सबसे पहले सोचो कि
आपकी जो ऑडियंस है या फिर जिस भी एज ग्रुप
को आप टारगेट कर रहे हो वो किस चीज से
स्ट्रगल कर रहे होंगे। जैसे फॉर एग्जांपल
मुझे वीडियो एडिटिंग नहीं आती। शायद यह
उनकी प्रॉब्लम हो सकती है या फिर
रेज्यूुमे बनाना नहीं आता या फिर इंटरव्यू
पे बात कैसे करनी है वो नहीं पता। ये उनकी
प्रॉब्लम हो सकती है। या फिर किसी की
प्रॉब्लम हो सकती है कि मेरे Instagram या
फिर YouTube पर फॉलोवर्स नहीं बढ़ रहे। तो
यहां पे आपका काम आता है किसी भी एक
स्पेसिफिक प्रॉब्लम को पिक करना जो आप
सॉल्व कर सकते हो। उसके बाद आता है हमारा
स्टेप नंबर टू व्हिच इज पैकेज द सॉल्यूशन।
अब यह जो आपका सलूशन है ना उसे आपको एक
स्पेसिफिक फॉर्मेट में देना पड़ेगा। अगर
आपका सलूशन स्टेप बाय स्टेप सिखाना
रिक्वायर करता है तो आपको एक कोर्स बनाना
पड़ेगा। अब उसके बाद अगर आपका सलूशन बस एक
बार समझ के उसे बार-बार यूज़ करना है तो
उसका एक टेंपलेट या फिर टूल बनाओ। या फिर
अगर आपका स्यूशन रीडिंग से सिखाया जा सकता
है तो उसका एक ई-बुक गाइड बनाओ। याद रखना
आपको फॉर्मेट वही चूज़ करना है जो प्रॉब्लम
के साथ मैच करे। उसके बाद आती है हमारी
स्टेप नंबर थ्री आउटकम को क्रिस्टल क्लियर
रखो। अब यहां पे ना बहुत सारे लोग गलती कर
देते हैं। फॉर एग्जांपल मान लो वो कोई ऐसे
कोर्स बेच रहे हैं जिसमें है कि गेट सिक्स
पैक एब्स विद इन सिक्स मंथ्स। मस्त
प्लानिंग। अब यहां पे होता क्या है ना लोग
जनरली प्रोडक्ट्स के फीचर बता देते हैं कि
इसमें 10 वीडियोस आपको मिलेंगी, पांच
टेंपलेट्स मिलेंगे, दो बोनसेस मिलेंगे।
लेकिन अगर आप एक कस्टमर के पॉइंट ऑफ व्यू
से देखोगे तो कस्टमर को फीचर से कोई मतलब
ही नहीं होता। कस्टमर को बस आउटकम चाहिए
होता है कि यह कोर्स करने के बाद मेरे
लाइफ में क्या होगा? तो जो आपका मेन पॉइंट
था कि गेट सिक्स पैक एब्स इन सिक्स मंथ्स
वो कस्टमर का एक आउटकम है। क्लियर
क्रिस्टल क्लियर आउटकम है। इसी तरह आपको
आपके कोर्स के लिए एक क्रिस्टल क्लियर
आउटकम सोचना पड़ेगा। फॉर एग्जांपल इस
कोर्स को करने के बाद आप अपना पहला
फ्रीलांस क्लाइंट ढूंढ पाओगे। या फिर इस
टेंपलेट को यूज़ करके आप बस 1 घंटे में
अपना खुद का एक प्रोफेशनल रे्यूमे बना
लोगे। आपका आउटकम जितना क्लियर होगा उतनी
ही ईजीली आप इस प्रोडक्ट को सेल कर पाओगे।
उसके बाद आती है स्टेप नंबर फोर सिंपल
टूल्स को यूज करो। बहुत ज्यादा लोग ना इसे
कॉम्प्लिकेट कर देते हैं। मान लो आपको
अपना कोर्स बनाना है तो उसे अपने फोन से
रिकॉर्ड करो। कोई हाई एंड कैमरा की कोई
जरूरत नहीं होती और एक सिंपल पीपीटी के
साथ अपने पॉइंट्स को एक्सप्लेन करो। और
अगर आपको टेंपलेट बनाना है तो कैनवा,
नोशन, Google शीट्स जैसे फ्री टूल्स यूज़
करो। देखो बहुत बार ना हम लोग शोशाबाजी और
तामझाम में बहुत फंस जाते हैं कि मैं एक
अच्छा कैमरा लूंगा, अच्छी लाइट्स लूंगा।
तभी जाके मैं अपना कोर्स बनाऊंगा। मैं
आपको एक एग्जांपल देता हूं। इंडिया के वन
ऑफ द बिगेस्ट कोर्स सेलर अंकुर वारी को यह
अपने फोन के कैमरा से शूट करते हैं और एक
सिंपल Google शीट में एक्सप्लेन करते हैं।
मैंने खुद ने भी उनके कई सारे कोर्सर्सेस
पहले भी लिए हुए हैं और अगर आप फॉर्मेट
देखोगे तो बहुत सिंपल फॉर्मेट होता है। वो
कोई भी हाई एंड सिस्टम यूज़ नहीं करते। लोग
अक्सर इसी चीज में फंस जाते हैं कि वो
पहले ही कोर्स से परफेक्शन ढूंढने की
शुरुआत करते हैं। पहले कोर से परफेक्शन
ढूंढना शुरू कर दोगे तो कभी आप अपने कोर्स
को कंप्लीट ही नहीं कर पाओगे या फिर इवन
शुरू भी नहीं कर पाओगे। तो अपने दिमाग में
ना इस चीज को फिक्स कर लो कि पहले वर्जन
का काम परफेक्ट होना नहीं है। उसका काम बस
है एकिस्ट करना। आपको बस एक कोर्स बनाने
की आदत डालना। बाद में जैसे-जैसे आपको
यूज़र्स का फीडबैक मिले वैसे आप इंप्रूव कर
सकते हो। अब इसके बाद आती है फिफ्थ स्टेप
और सबसेेंट स्टेप व्हिच इज प्राइस डिसाइड
करो। मेजॉरिटी केसेस में जितने भी सारे
लोगों से मैंने बात की है उनका यही
प्रॉब्लम हुआ है कि या तो वो प्राइस बहुत
ज्यादा कम सेट कर देते हैं या फिर बहुत
ज्यादा सेट कर देते हैं। अपनी प्राइस सेट
करने का ना एक बड़ा सिंपल फार्मूला होता
है। अपने प्रोडक्ट की वैल्यू देखो मार्केट
को देखो और एक ऐसा प्राइस सेट करो जो
तुम्हें भी सही लगे और एक बायर को भी
जस्टिफाइड लगे। 299 से लेकर ₹29,000 तक आप
कुछ भी यूज कर सकते हो। लेकिन यह प्राइस
डिपेंड करती है आपके प्रोडक्ट के डेप्थ और
उसके आउटकम पे। इस चीज को ना ऐसे देखो कि
अगर आप ₹300 किसी से मांग रहे हो तो क्या
आप उसके लाइफ में ₹3000 की वैल्यू दे रहे
हो? अगर जवाब हां आता है तो मूव अहेड विथ
दैट प्राइसिंग। और जितने भी सारे बिगिनर्स
इस वीडियो को देख रहे हैं उनको मैं बस एक
छोटा सजेशन देना चाहता हूं कि 499 से 299
के बीच से ही शुरू करो। जैसे-जैसे आपको
ट्रैक्शन आएगा, जैसे-जैसे यह सेल्स
बढ़ेगी, वैसे-वैसे प्राइस धीरे-धीरे
बढ़ाओ। अब एक बार आपका प्रोडक्ट बन गया,
तो आपके दिमाग में और एक क्वेश्चन आएगा कि
इसकी सेल्स कहां से करनी है? देखो
प्रोडक्ट बनाना ना बहुत इजी पार्ट है
लेकिन असली गेम तब शुरू होता है जब उसे
बेचना पड़ता है। जनरली लोग क्या करते हैं?
उनका प्रोडक्ट बनाते हैं। उसकी लिंक रेडी
करते हैं। उसकी एक प्राइस सेट करते हैं और
फिर कहते हैं कि चलो Instagram स्टोरी पे
पोस्ट कर देता हूं और कह देता हूं कि लिंक
इन बायो इसे जाके यहां से परचेस कर लेना।
स्टोरी पे थोड़े बहुत लाइक्स आते हैं।
अपने ही दोस्तों से दो-चार डीएम आ जाते
हैं। एक आधी सेल भी आ जाती है लेकिन उसके
बाद आगे कुछ कंटिन्यू नहीं होता। आप सोचते
हो शायद रोज स्टोरी डालूंगा, रोज पोस्ट
करूंगा तो ट्रैक्शन आएगा। लेकिन इससे कुछ
भी नहीं होने वाला। उसके बाद आएगा तो बस
फ्रस्ट्रेशन और यह फ्रस्ट्रेशन ऑलमोस्ट हर
एक इंसान को आता है जो ऑनलाइन डिजिटली सेल
करना चाहता है क्योंकि लोगों के पास
जेनुइनली बहुत ज्यादा वैल्यूुएबल प्रोडक्ट
है लेकिन मार्केटिंग का सिस्टम ही नहीं है
और देखा जाए तो इसकी मार्केटिंग करना भी
उतना इजी नहीं है क्योंकि कंटेंट बनाना
पड़ता है रील्स बनाने पड़ते हैं शॉट्स
क्राउज़र्स थ्रेड्स हर जगह पे आपको
प्रेजेंट रहना पड़ता है। एक टाइप से एक
ऑडियंस बिल्ड करनी पड़ती है जिसमें महीनों
लग जाते हैं और मान लो आपने इन सारी चीजों
को बायपास करके एक ऐड चलाने का सोचा तो
भाई ऐड के लिए चाहिए होता है जेब में पैसे
यानी बजट ऊपर से सिर्फ पैसे और बजट होने
से कुछ नहीं होता वहां पे स्किल्स भी लगती
है टेस्टिंग भी करना पड़ता है आगे का
सेटअप भी करना पड़ता है और यह सारी चीजें
ना खुद से करना पॉसिबल नहीं है कि
प्रोडक्ट भी तुम कर रहे हो मार्केटिंग भी
तुम कर रहे हो सेल्स भी तुम कर रहे हो और
सपोर्ट भी तुम कर रहे हो और इस स्टेज पे
ना या तो क्रिएटर्स थक जाते हैं या फिर
इसे छोड़ देते हैं या फिर मंथली सेल्स
इतनी ज्यादा स्लो हो जाती है कि यार पूरा
का पूरा मोटिवेशन ही खत्म हो जाता है।
लेकिन यहीं पे असली गेम शुरू होता है
डिस्ट्रीब्यूशन इस वर्ड का। आपका प्रोडक्ट
ना सिर्फ 20% ऑफ द गेम होता है। बाकी 80%
होता है उसका डिस्ट्रीब्यूशन। और
डिस्ट्रीब्यूशन अगर आपको क्रैक करना है तो
इस सिंपल सी लाइन को आपको समझना पड़ेगा कि
खुद कमी मत बेचो। लोगों से बुलवाओ और उनसे
बिकवाओ। और इसी चीज को कहते हैं एक
एफिलिएट मॉडल। मैंने इस एफिलिएट मॉडल वाले
पार्ट को आपको एक सिंपल वे में समझाता
हूं। सोचो आपने एक चाय की दुकान खोली है।
अब आपको चाय बेचनी है तो आपके पास दो
ऑप्शंस हैं। ऑप्शन नंबर वन, आप खुद बाहर
खड़े होते हो और चिल्लाते हो कि चाय ले
लो, चाय ले लो। मेरी चाय सबसे ज्यादा
बेस्ट है। आप वहां पर बैठे-बैठे थक जाओगे,
गला बैठ जाएगा और कितने लोगों तक पहुंच
पाओगे? लिमिटेड नंबर ऑफ पीपल। लेकिन वहीं
पे आता है हमारा ऑप्शन नंबर टू, व्हिच इज
एन एफिलिएट मॉडल। आप 10 लोगों को बोलते हो
कि भाई मेरी दुकान से ना चाय दिलवा दे
किसी को भी। और जितना बिकेगा उसका 20%
तेरा। अब इससे क्या होगा? आपकी जगह पर 10
लोग प्रमोट करेंगे। उनका अपना खुद का
नेटवर्क होता है। उनके अपने खुद के दोस्त
होते हैं। उनकी अपनी खुद की एक रीच होती
है। आपको बस दुकान पर बैठे-बैठे चाय बनाना
है और सेल्स ऑटोमेटिकली आती रहेगी। इसे
कहते हैं एक एफिलिएट मॉडल जहां पे आप
सिर्फ एक प्रोडक्ट बनाते हो और दूसरे
लोगों को कहते हो कि इसे प्रमोट करें
जिसके बदले में उन्हें कमीशन मिलता है। अब
इसी सिंपल प्रोसेस को आप डिजिटल
प्रोडक्ट्स पे अप्लाई करके देखो। मान लो
आपने कोर्स बनाया ₹29 का। अब आपने 50
एफिलिएट्स को बोला कि यह कोर्स को प्रमोट
करो और हर सेल पर आपको ₹900 मिलेंगे। अब
वो 50 लोग मिलके अपनी ऑडियंस को बता रहे
हैं, रील्स बना रहे हैं। सबको डीएम्स कर
करके बता रहे हैं कि भाई देखो यह एक नया
प्रोडक्ट आया है मार्केट में इसे ट्राई
करके देखो। हो सकता है वो अपने खुद के
WhatsApp ग्रुप्स में भी उस प्रोडक्ट को
शेयर कर रहे हैं। यानी अभी आपके पास 50
लोगों की मार्केटिंग टीम हो गई। अब जितना
भी सेल यह 50 लोग आपके लिए लेके आएंगे
उसके बाद ही आपको इन्हें एफिलिएट पेमेंट
देना है। पहले आपको कोई भी कॉस्ट इन्हें
नहीं देनी। जनरल केसेस में एड्स में क्या
होता है? आपको पहले पैसे डालने पड़ते हैं।
फिर आपको बस उम्मीद लगाए रखनी होती है कि
भाई सेल आ जाए। एफिलिएट में उल्टा होता
है। एफिलिएट में पहले सेल आती है। फिर
उसका कमीशन आपको देना होता है। अगर कोई भी
सेल नहीं आई तो आप जीरो कमीशन देते हो।
इसीलिए यह जो एफिलिएट मॉडल है ना वो
क्रिएटर्स के लिए बेस्ट है। पहली चीज तो
आपको कोई मार्केटिंग एक्सपर्ट बनने की कोई
जरूरत नहीं होती। दूसरी चीज आपके पास एक
आर्मी होती है जो उस प्रोडक्ट को बेच रही
है। और तीसरी चीज आप सिर्फ और सिर्फ
प्रोडक्ट की क्वालिटी पे फोकस कर सकते हो।
क्योंकि डिस्ट्रीब्यूशन का पार्ट जो है जो
सबसे मेजर पार्ट होता है वो कोई और हैंडल
कर रहा है। आपकी सेल बढ़ती रहेगी लेकिन
आपका काम बस यही होगा कि आपको बेस्ट ऑफ द
बेस्ट प्रोडक्ट बनाना है। अब आपके दिमाग
में ना यह सवाल आ रहा होगा कि भाई ये
एफिलिएट्स मिलेंगे कहां से? इसका सिस्टम
कैसे सेट होगा? ट्रैकिंग कौन करेगा कि
किसने कितना बेचा? इसका पेआउट कैसे मैनेज
करेंगे? अब जब मैंने अपनी ई-बुक ल्च की
थी, तब मेरे भी दिमाग में आईडिया आया था
कि क्यों ना मैं इसे एफिलिएट्स थ्रू
बेचूं? और उस टाइम पे मेरे भी दिमाग में
यही सेम क्वेश्चंस बार-बार आ रहे थे। फिर
जो सब करते हैं, मैंने वही किया। मैं
इंटरनेट पे गया। मैंने कई सारे अलग-अलग
प्लेटफॉर्म्स ट्राई करके देखे। लेकिन किसी
भी प्लेटफार्म से मैं सेटिस्फाइड नहीं था।
कोई बहुत ज्यादा चार्ज कर रहा था तो कोई
प्लेटफार्म उतना ज्यादा फीचर्स प्रोवाइड
ही नहीं कर रहा था। तभी मुझे मिला एक
प्लेटफार्म जिसका नाम है सेलियो आईक्यू।
अब सेलियो आक्यू बेसिकली एक स्मार्ट
एफिलिएट प्लेटफार्म है जो स्पेसिफिकली
आपकी और मेरे जैसे डिजिटल क्रिएटर्स के
लिए बनाया गया है। इसमें बस आप अपने
प्रोडक्ट को लिस्ट करते हो जैसे आप Amazon
पे लिस्ट करते हो। उसके बाद यह जो
एफिलिएट्स हैं वो आपके प्रोडक्ट को प्रमोट
करते हैं। उसकी सेल होने पर जो कमीशन आता
है वह ऑटोमेटिकली एफिलिएट्स को जाता है और
बाकी बची हुई अमाउंट आपको आ जाती है। यानी
आपको किसी भी चीज का ट्रैक रखने की कोई
जरूरत नहीं पड़ती। अब बाकी सारी बातें
साइड में रखो। मैं आपको बस सेल यू आईक्यू
के कुछ की फीचर्स समझाता हूं जो एक्चुअली
आपकी और मेरे जैसे सेलर के पर्पस्पेक्टिव
से बहुत इंपॉर्टेंट है। पहला फीचर है
इंस्टेंट मार्केट प्लेस एक्सपोज़र। जब भी
आप अपने प्रोडक्ट को सेल यू आईक्यू पे
लिस्ट करते हो तो ऑटोमेटिकली उनके एफिलिएट
मार्केट प्लेस पर आप आ जाते हो। मतलब आपको
ना एफिलिएट्स को ढूंढने नहीं जाना पड़ता
कि भाई मेरे प्रोडक्ट को प्रमोट करवा दे।
एफिलिएट्स खुद आपका प्रोडक्ट देखते हैं।
पसंद आए तो उसे प्रमोट भी करते हैं। यानी
आपका काम सिर्फ प्रोडक्ट बनाना है और उसे
सेल यो आईक्यू पे लिस्ट करना है। जो भी
डिस्ट्रीब्यूशन में लगने वाली चीजें हैं,
जितना भी नेटवर्क लगने वाला है, वह ऑलरेडी
वहां पर रेडी है। उसके बाद दूसरा फीचर आता
है एi पावर्ड एफिलिएट मैचिंग। यह बड़ा एक
इंटरेस्टिंग फीचर है क्योंकि सेलियो
आईक्यू रैंडमली एफिलिएट्स नहीं भेजता आपके
प्रोडक्ट पे। उनका यह जो स्मार्ट मैचिंग
सिस्टम है वो परफॉर्मेंस और ट्रैफिक
क्वालिटी का डाटा यूज करके एफिलिएट्स को
मैच करता है। मतलब मान लो अगर आपका
प्रोडक्ट फाइनेंस नीश में है तो वो
फाइनेंस ऑडियंस वाले एफिलिएट्स को आपके
प्रोडक्ट दिखाएगा। यह देखने में बहुत छोटा
फीचर लगता है लेकिन यह आपके कन्वर्जन रेट
को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है। उसके बाद
तीसरा फीचर आता है ट्रस्ट स्कोर सिस्टम।
एक टाइप से इसे आप समझ लो कि यह फ्रॉड
रोकने का एक सिस्टम है। हर यूजर का ना एक
डायनामिक ट्रस्ट स्कोर होता है। बेस्ड ऑन
डिस्प्यूट्स, रिफंड्स, बिहेवियर्स। अब अगर
कोई भी एफिलिएट या फिर बायर थोड़ा सा शेडी
है या फिर फ्लैग्ड है तो सिस्टम उसे
ऑटोमेटिकली हटा देता है। जितने भी सारे ये
लो क्वालिटी ट्रैफिक वाले एफिलिएट्स होते
हैं ना वो रिस्ट्रिक्ट हो जाते हैं। इस
छोटे से फीचर से आपका जो रिफंड का हेडक है
ना वह भी कम हो जाएगा। क्योंकि जब भी कोई
बायर अगर ऐसा स्पॉट हो जाता है कि जो
बार-बार रिफंड मांग रहा है तो सिस्टम उसे
फ्लैग कर देगा और उसे प्लेटफार्म से हटा
देगा। उसके बाद चौथा फीचर है सेवन डे
फास्ट पे आउट्स। यह फीचर आपके लिए और आपके
एफिलिएट्स के लिए बहुत ज्यादाेंट है
क्योंकि बहुत सारे प्लेटफॉर्म्स मंथली या
फिर बाय मंथली प्लान करते हैं। यानी आपको
पैसा मिलता है 30 या फिर 15 दिन बाद।
लेकिन सेलू आईक्यू हर सात दिनों में
पेमेंट प्रोसेस करता है। यानी मंडे से
संडे की सेल्स ट्यूसडे को प्रोसेस हो जाती
है और थर्सडे तक आपके अकाउंट में आ जाती
है। अब इससे होता क्या है कि इमीडिएटली
पैसे अकाउंट में आने के बाद आपके
एफिलिएट्स भी मोटिवेटेड रहते हैं और आप भी
मोटिवेटेड रहते हो। तो जो आपकी पूरी सेल
साइकिल होती है वह बहुत ज्यादा फास्ट हो
जाती है। उसके बाद पांचवा फीचर है मल्टी
करेंसी वॉलेट। सेल आईक्यू में आपको आईएआर
और यूएसजी दोनों का सपोर्ट मिलता है।
इंडिया में आप ray से डायरेक्ट पेमेंट
करवा सकते हो और अगर आप इंटरनेशनल
पेमेंट्स एक्सेप्ट कर रहे हो तो उसके लिए
PayPal है। तो बेसिकली अगर आपका प्रोडक्ट
ग्लोबल ऑडियंस के लिए है तो आपके दोनों
मार्केट कवर हो जाते हैं सिर्फ एक ही
डैशबोर्ड से। उसके बाद सिक्स्थ फीचर आता
है डन फॉर यू फननेल्स एंड प्रोमो एसेट्स।
यह फीचर ना एफिलिएट्स के लिए लेकिन यह
तुम्हें इनडायरेक्टली एक टाइप से बेनिफिट
करता है। देखो जब भी आप किसी भी प्रोडक्ट
को सेलिंग के लिए लिस्ट करते हो तो उसके
साथ-साथ आप प्रमोशनल मटेरियल भी वहां पर
अपलोड कर सकते हो। जैसे क्रिएटिव, स्वाइप
फाइल, ईमेल टेंपल्लेट्स, लैंडिंग पेज की
कॉपी कुछ भी। और जो एफिलिएट्स होते हैं जो
आपके प्रोडक्ट को बेचने वाले हैं उनको एक
रेडी एसेट मिल जाती है। उनको कुछ ज्यादा
बनाना नहीं पड़ता। वो सीधा प्रमोट करना
शुरू कर सकते हैं। उसके बाद सेवंथ फीचर है
ए कन्वर्जन इंसाइट्स। सेलियो आक्यू का एi
इंजन पैटर्न्स भी एनालाइज करता है। देखो
कौन सा ट्रैफिक सोर्स बेस्ट कन्वर्ट हो
रहा है, कौन से टाइम पे ज्यादा सेल आ रही
है, प्राइिंग कैसे एडजस्ट करनी चाहिए? इस
सारे डाटा के लिए आपको एक्चुअल एक्शननेबल
इनसाइट्स मिलते रहते हैं। उसके बाद एथ
फीचर आता है कंप्लीट फ्रॉड प्रोटेक्शन। तो
बेसिकली सेल यू आईक्यू पे आप सेलर के तौर
पे क्या कर रहे हो? बस प्रोडक्ट लिस्ट कर
रहे हो और कमीशन सेट कर रहे हो। उसके बाद
अपनी एसेट्स अपलोड कर रहे हो। बाकी जितना
भी सारा काम है जैसे एफिलिएट मैचिंग,
ट्रैकिंग, पे आउट्स, फ्रॉड प्रोटेक्शन सब
कुछ आपका प्लेटफार्म आपके लिए हैंडल करता
है। आपका फोकस ना बस दो चीजों पे होना
चाहिए। प्रोडक्ट की क्वालिटी और एफिलिएट
के साथ रिलेशनशिप। अब मैं आपको एग्जैक्टली
एक डेमो करके दिखाता हूं कि अपने प्रोडक्ट
को यहां पे लिस्ट कैसे करना है। तो जैसे
ही आप डिस्क्रिप्शन में जो सेलू आईक्यू की
लिंक है उस पे क्लिक करोगे तो आप सीधा इस
वाले पेज पे आ जाओगे। यहां पे आपको ज्यादा
कुछ नहीं करना है। बस यहां पे गेट
स्टार्टेड फॉर फ्री पे क्लिक कर देना।
उसके बाद आपको यहां पे नीचे बस साइन अप पे
क्लिक कर देना है। अब यहां पे बस आपको
यहां पे कुछ बेसिक डिटेल्स पूछी जाएगी।
जैसे मेरा नाम क्या है? मैं यहां पे नाम
ऐड कर देता हूं। मेरा ईमेल एड्रेस ऐड कर
देता हूं। उसके बाद मेरा फोन नंबर एंड देन
आपको एक पासवर्ड सेट करना है उसके लिए।
ठीक है? ये करने के बाद मैं इस पे बस
क्लिक कर देता हूं और साइन अप कर देता
हूं। उसके बाद आपके ईमेल आईडी पे एक ओटीपी
आ जाएगा जिसे आपको बस यहां पे डालना है।
ठीक है? उसके बाद वेरीफाई ओटीपी पे क्लिक
कर दो। एंड देन आप यहां पे आ जाओगे। अब इस
डैशबोर्ड को देख के ज्यादा डरना मत। यहां
पे प्रोडक्ट लिस्ट करना बहुत ज्यादा सिंपल
है। आपको बस यहां पे माय आपको बस यहां पे
लेफ्ट साइड में माय प्रोडक्ट पे क्लिक कर
देना है और उसके बाद इधर राइट साइड में ऐड
न्यू प्रोडक्ट पे क्लिक करना है। उसके बाद
आपको प्रोडक्ट को नाम देना है। जैसे मैं
देता हूं 100K हसल जो मेरी ई-बुक का नाम
है। उसके बाद कैटेगरी सेलेक्ट करता हूं।
यह है अफिलिएट मार्केटिंग में। उसके बाद
सब कैटेगरी सेलेक्ट करता हूं। इसके लिए
अवेलेबल नहीं है। तो मैं आगे बढ़ जाऊंगा
और वहां पे सेलेक्ट करूंगा कंटेंट की टाइप
को व्हिच इज़ एन ई-बुक। तो मैंने ई-बुक
यहां पे एंटर कर दिया। और यहां पे मैंने
लिखा Instagram और उसके बाद राइट साइड में
आपको कीवर्ड मिलेगा जहां पे आपको वो बुक
किस चीज के रिलेटेड है वो लिखना है या फिर
आपका जो भी कंटेंट है वो किस चीज के
रिलेटेड है वो लिखना है जैसे मेरी बुक है
Instagram ग्रोथ
हैक और उसके बाद आपको नीचे ये
डिस्क्रिप्शन वाले बॉक्स में एक छोटा सा
डिस्क्रिप्शन लिख देना है आपके बुक के
रिलेटेड तो मैं फटाफट उसे भी लिख देता
हूं। अब इसे लिखवाने के लिए आप सीधा चार्ट
जीपीटी का यूज़ कर सकते हो। ज्यादा दिमाग
मत लगाना। आप बस अपना प्रोडक्ट चार्ज
जीपीटी को बता दो और वो आपको एक क्लियर
डिस्क्रिप्शन लिख के देगा। या फिर इनफैक्ट
अगर आपने कोई ई-बुक बनाई है तो वो भी आप
सीधा चैट जीपीटी को दे दोगे और उसको
बोलोगे कि इस बुक में जो कंटेंट है उसके
लिए मुझे एक डिस्क्रिप्शन बना के दो तो वो
भी इमीडिएटली बना के दे देगा। उसके बाद
नीचे एक औरेंट चीज आती है व्हिच इज़
लाइसेंस टाइप। अगर आप पर्सनल यूज़ सेलेक्ट
करते हो तो आप इससे एफिलिएट प्रोग्राम रन
नहीं कर पाओगे। अगर आपको एफिलिएट
प्रोग्राम रन करना है तो नीचे एक्सटेंडेड
वाला ऑप्शन सेलेक्ट करना पड़ेगा। उसके बाद
नीचे आओ और प्राइिंग सेलेक्ट करो। अब सेल
टाइप पे आप सेलेक्ट कर सकते हो पेड
सब्सक्रिप्शन बेस्ड है क्या है मैं यहां
पे पेड सेलेक्ट कर रहा हूं उसके बाद
करेंसी सेट करना बहुत इंपॉर्टेंट चीज है
क्योंकि एक बार आपने अपनी करेंसी सेट कर
दी तो आप उसे चेंज नहीं कर पाओगे तो
क्लियरली इसे पहले ही चेक करना कि आप
आईएआर में बेचना चाहते हो या फिर यूएस
डॉलर में बेचना चाहते हो मैं यहां पे
आईएआर में बेचना चाहते हो तो मैंने यहां
पे यह ऐड कर दिया उसके बाद मेरी बुक की
रेगुलर प्राइस मान लो ₹499 होती है मैंने
वो डाल दी और अभी जो सेल चल रहा है उसकी
प्राइस मान लो मैंने ₹299 कर देते उसके
बाद नीचे प्राइस इंक्लूड्स टैक्सेस का
ऑप्शन आता है। जहां पर आपको यह मेंशन करना
है कि इंक्लूडिंग टैक्स देनी है प्राइस या
फिर एक्सक्लूडिंग टैक्स देनी है। अगर आप
इंक्लूडिंग टैक्स दे रहे हो मैं तो हमेशा
कहता हूं कि इंक्लूडिंग टैक्स दिया करो
क्योंकि इससे क्या होता है कि बयर को एंड
पेज पे जाने के बाद झटका नहीं लगता है कि
भाई ₹30-40 ₹50 जो भी आपकी टैक्स के हिसाब
से प्राइस होती है वो एक्स्ट्रा लग रही
है। तो मैं हमेशा सजेस्ट करता हूं कि
इंक्लूडिंग टैक्स दे दो। कोई ना वो 18%
15% जो भी आपका टैक्स ब्रैकेट होगा वो
थोड़ा सा बियर कर लो। देयर इज़ नो प्रॉब्लम
विथ दैट। बट इस छोटे से मूव की वजह से
आपका कन्वर्जन बहुत ज्यादा बढ़ेगा। उसके
बाद अगर आपको सेल्स लिमिट करनी है तो आप
कर सकते हो। मुझे कुछ नहीं कराना है। तो
मैंने जीरो लिमिट रख दिया है यहां पे। एंड
फिर आता है आपका रिफंड पीरियड। रिफंड
पीरियड सेट कर दो। मैं तो कहता हूं 15 से
20 दिन के आसपास आप रिफंड पीरियड रख सकते
हो ताकि इंसान अगर टेस्ट आउट करके देखना
चाहता है आपका टेंपलेट या फिर प्रोडक्ट तो
वो देख सकता है। अगर आप यह रिफंड पीरियड
बहुत कम रखोगे तो इससे भी आपका कन्वर्शन
रेट बहुत कम हो सकता है। सो मेक श्योर आप
एक डिसेंट अमाउंट ऑफ रिफंड पीरियड या फिर
रिफंड डज़ रखो। देन कमिंग डाउन टू द
डिलीवरी सेटिंग। अब यहां पे आपको एक्सेस
यूआरएल देना है। यानी वो यूआरएल जहां पे
आपका प्रोडक्ट है। अब मेरी ई-बुक मैंने
ड्राइव पे अपलोड करके रखी है। तो मैं एक
ड्राइव की लिंक डाल दूंगा यहां पे। तो ये
यहां पे मैंने अपने ड्राइव की लिंक डाल
दी। अगर आप चाहो तो फाइल भी यहां से
सेलेक्ट कर सकते हो अगर आपको अपलोड करनी
है तो। ये यहां से मैंने अपनी फाइल भी
सेलेक्ट कर ली। अब अगर आपके ड्राइव लिंक
पे कोई पासवर्ड आपने सेट किया हुआ है तो
वो आपको यहां पे एडमिन एक्सेस में डालना
पड़ेगा। क्योंकि सेल्यू आईक्यू एक बार
आपका प्रोडक्ट भी चेक करता है वेरीफाई
करने के लिए कि क्या वो लेजिटमेट प्रोडक्ट
है या फिर नहीं। तो अगर आपके कोई पासवर्ड
सेट होगा तो मेक श्योर आप उसे यहां पे ऐड
कर दो वरना आपका प्रोडक्ट अप्रूव नहीं
होगा। फिर उसके बाद आपको एक सपोर्ट का
ईमेल देना है। फॉर एग्जांपल सपोर्ट का
ईमेल मैं अपना खुद का ईमेल आईडी दूंगा। तो
यह मैंने ऐड कर दिया। सपोर्ट यूआरएल आपको
डालना है तो आप डाल सकते हो अगर आपकी
वेबसाइट है। वरना सपोर्ट ईमेल से भी काम
चल जाता है। फिर नीचे आने के बाद आपको एक
ऑप्शन मिलता है ईमेल एंड वेबिनार
इंटीग्रेशन का। यह अभी के लिए अपने काम का
नहीं है क्योंकि हम लोग ई-बुक सेल कर रहे
हैं। अगर आप कोई वन ऑन वन कंसल्टेशन कर
रहे हो या फिर किसी बड़े ग्रुप ऑफ पीपल को
एड्रेस कर रहे हो तो उस टाइम पे आपके लिए
ये बहुत इंपॉर्टेंट चीज होगी। आप बस यहां
पे न्यू कनेक्शन पे सेट करके एक नया
इंटीग्रेशन यहां पे कर सकते हो। एंड लास्ट
में आता है लीगल एंड एडिशनल इनेशन। ये
सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है। अभी यहां पे
आपको एक ओनरशिप टाइप सेलेक्ट करनी है कि
आप खुद उसके क्रिएटर हो। आपने खुद ने वो
ई-बुक बनाई है या फिर आपने कहीं से वो
बनवा के ली है और उसके राइट्स हैं आपके
पास। तो मैं यहां पे क्रिएटर हूं खुद तो
मैं यहां पे क्रिएटर या फिर ओनर लिख
दूंगा। उसके बाद एआई डिस्क्लोज़र आता है कि
क्या इस बुक को बनाने में किसी भी टाइप का
एआई यूज़ किया गया था या फिर आपके प्रोडक्ट
को बनाने में किसी भी टाइप का एआई यूज़
किया गया था तो मैं यहां पे नो लिख दूंगा।
फिर आते हैं हमारे टर्म्स एंड कंडीशंस।
अभी टर्म्स एंड कंडीशन जनरेट करवाने के
लिए भी आप फटाफट जाके चैट जीपीटी से ये
टर्म्स एंड कंडीशंस बनवा सकते हो। तो
टर्म्स एंड कंडीशंस में मान लो अगर आपको
चीजें डालनी है तो मैंने यहां पे जैसे
डाला हुआ है कि दिस प्रोडक्ट इज अ डिजिटल
कॉपी। तो आप फिजिकल कॉपी एक्सपेक्ट ना
करो। तो ऐसी वाली चीज आप यहां पर ऐड कर
सकते हो। उसके बाद अगर आपको पर्सनल यूज़ का
भी कोई टर्म्स एंड कंडीशन डालनी है कि इसे
आप वापस इस ई-बुक को आप आगे चलके वापस
किसी को बेच नहीं सकते तो वो भी आप डाल
सकते हो यहां पे। उसके बाद अगर आपके पास
कोई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स है तो
उसे भी आप यहां पे ऐड कर सकते हो। एंड
लास्ट में आता है कस्टम रिफंड पॉलिसीज एंड
टर्म्स एंड कंडीशंस। तो मैंने ऊपर ऑलरेडी
मेंशन कर दिया था कि 15 डेज का मैं रिफंड
पॉलिसी एक्सेप्ट करता हूं। तो वो आप अगर
चाहो तो वापस यहां पे रिपीट कर सकते हो
वरना उसकी कोई जरूरत नहीं है। उसके बाद बस
इस चेक लिस्ट पे क्लिक मारना है आपको और
फिर क्रिएट प्रोडक्ट पे क्लिक कर देना है।
ओके एक चीज रह गई थी मुझे ऐड करना व्हिच
वाज़ द इमेज ऑफ द प्रोडक्ट। वो फटाफट ऐड कर
देते हैं। एंड प्रोडक्ट का स्टेटस मैं
यहां पे क्लिक करके अवेलेबल कर देता हूं।
उसके बाद आपको नीचे दो चार ऑप्शंस मिल
जाते हैं। जैसे कि आपको कस्टमर का फोन
नंबर चाहिए, कस्टमर का एड्रेस चाहिए। अगर
आपको वो चीजें रिक्वायर्ड है तो आप यहां
पे क्लिक कर सकते हो। अगर नहीं तो मत
क्लिक करना। डायरेक्टली क्रिएट प्रोडक्ट
पे क्लिक कर देना।
ठीक है? तो यह मेरा प्रोडक्ट क्रिएट हो
चुका है। तो यह आपने अपने प्रोडक्ट को
लिस्ट कर दिया। उसके बाद माय एफिलिएट्स पे
चले जाओ।
यहां पे आपको जितने भी सारे लोग आपके
एफिलिएट बनने के लिए अप्लाई करने वाले
रहेंगे वो यहां पे दिख जाएंगे। उन्हें आप
यहीं से अप्रूव कर सकते हो। उसके बाद
लेफ्ट साइड में जो कस्टमर्स टैब है उसमें
आपको जिन-जिन लोगों ने आपकी बुक खरीदी है
वो उनका भी डाटा मिल जाएगा। ऐसे करके आप
मल्टीपल प्रोडक्ट्स भी यहां पर लिस्ट डाउन
कर सकते हो। उसी के साथ-साथ यहां पर आपके
प्रोडक्ट को बेचने के आपके पास दो रास्ते
मिलते हैं। अब या तो आप इस प्रोडक्ट की एक
लिंक जनरेट करवा के खुद एफिलिएट्स को दे
सकते हो या फिर एक बार आपका प्रोडक्ट
अप्रूव हो जाए तो वही कुछ इस तरीके से
यहां पे दिखेगा। जैसे फॉर एग्जांपल
पूर्वेश का यह सिक्स फिगर इंटरनेट एंपायर
वाला जो प्रोडक्ट है मैं उसकी व्यू
डिटेल्स पे क्लिक करूंगा। अगर मान लो मैं
एक एफिलिएट हूं तो और उसके बाद मैं यहां
पे प्रमोट दिस ऑफर पे क्लिक कर दूंगा। और
उसके बाद मुझे वहां पर एक लिंक मिल जाएगी
एज एन एफिलिएट मैं उस ऑफर को कॉपी कर सकता
हूं और बाकी लोगों को सेल कर सकता हूं। अब
आपको जनरेट करनी है एफिलिएट्स के लिए एक
ऑफर। तो आप ऑफर के टैब पे क्लिक करोगे
लेफ्ट साइड में और उसके बाद ऐड अ न्यू ऑफर
पे क्लिक कर दोगे। उसके बाद मैं बोलूंगा
एक ऑफर जनरेट करता हूं ईकst्री।
ऐसे करके एक और ऑफर मैंने बना दी। अगर
आपको कोई इमेज सेलेक्ट करनी है तो वो इमेज
सेलेक्ट कर लो। यहां पे मैं इसको कोई और
इमेज दे देता हूं। चलो ये मेरे वीडियो का
एक थंबनेल था वो मैं ओके ये काफी बड़ा
थंबनेल हो गया
अगर लगे तो मैं 100 के हसल वाली एक
हसल वाली एक पुरानी मेरी इमेज ये डाल देता
हूं यहां पे। ठीक है? ये मैंने यहां पे
डाल दिया। अब उसके बाद डिटेल में आपको
लिखना है कि आपकी ऑफर क्या होने वाली है।
यह मैंने यहां पे अपनी ऑफर पेस्ट कर दी।
और उसके बाद यहां पे कैटेगरी में मैंने
एफिलिएट मार्केटिंग सेलेक्ट कर लिया।
कीवर्ड में मैंने Instagram ग्रोथ कर दिया
वापस।
और सेल्स पेज का यूएल यूआरएल मैंने वापस
से यहां पर डाल दिया। ये लो मेरे सेल्स
पेज का यूआरएल
और उसके बाद करेंसी मैंने आईएआर सेलेक्ट
कर ली। अवेलेबल स्टेटस अवेलेबल कर दिया।
स्टार्ट टाइम और एंड टाइम आप यहां पे
सेलेक्ट कर सकते हो। एंड टाइम मैंने इतना
सेलेक्ट कर लिया। अब मैंने कंटिन्यू टू
स्टेप टू कर दिया।
ओके। स्टार्ट डेट इज़ दिस।
उसके बाद मैंने कंटिन्यू पे क्लिक कर दिया
और फिर मैं आ गया इस वाले पेज पे। यहां पे
कोई भी चीज आपको चेक करने की जरूरत नहीं
है। अफिलिएट प्रोग्रामिंग सेटअप डिसेबल्ड
है। अभी उसे मैं इनेबल कर दूंगा। जैसे अभी
मैंने जस्ट बनाई थी वो सारी इनफेशन मैं
यहां पे ऐड कर देता हूं। एंड क्रिएट ऑफर
पेज एंड सेटअप कर दिया। यह मेरी एक
एफिलिएट ऑफर अभी जनरेट हो चुकी है। व्हिच
इज़ नोन एस ई-बुकst करके। अब यहां पे मैंने
कोई प्रोडक्ट ऐड नहीं किया। मैं बस
प्रोडक्ट पे क्लिक करूंगा और एक प्रोडक्ट
ऐड करूंगा। जो मेरा 100 के हसल है वो
मैंने प्रोडक्ट यहां पे ऐड कर दिया। अपसेल
का अगर आपको पेज बनाना है तो वो भी क्रिएट
कर सकते हो। और ये एफिलिएट प्रोग्राम
कमीशन रेट परसेंटेज आप यहीं से डिसाइड कर
सकते हो कि आपको कितना परसेंटेज में देना
है। मैं यहां पे नया शुरू कर रहा हूं
इसलिए मैं 50% दे रहा हूं कमीशन और मैंने
यहां पे सेव पे क्लिक कर दिया। तो ये मेरा
प्रोडक्ट यहां पे बन चुका है अभी। ठीक है?
अब मैं इसकी डायरेक्ट प्रमोशनल लिंक को
यहीं से डायरेक्ट कॉपी कर सकता हूं। अब इस
कॉपी की गई लिंक को मैं या तो अपने जो
नेटवर्क है या मेरे कोई दोस्त यार रहेंगे
मैं उनको भेज सकता हूं और बोल सकता हूं कि
भाई इसका 50% तुझे मिलेगा किसी को सेल
करवा दे या फिर आपकी जो ऑफर है वो यहां पे
टॉप ऑफर वाले सेलियो आईक्यू के पूरे एक
सेक्शन में भी आपको मिल जाएगी या फिर आपकी
जो ऑफर है वो सेलियो आईक्यू के मार्केट
प्लेस में भी आपको मिल जाएगी तो देखा
कितना ज्यादा सिंपल है इसे क्रिएट करना
आपको बस ऐसे ही करके एक-एक प्रोडक्ट को
अपने लाइव करना है यहां पे और आप
एफिलिएट्स थ्रू बहुत ज्यादा ज्यादा इनकम
जनरेट कर सकते हो। तो बस इतना सिंपल है
इसे क्रिएट करना और एक चीज याद रखना कि
पहले हफ्ते में शायद दो सेल आए या फिर
जीरो भी हो सकती है। लेकिन अगर आप सिस्टम
पे ट्रस्ट करते हो और एफिलिएट्स को सपोर्ट
करते रहते हो और अपने प्रोडक्ट को
धीरे-धीरे इंप्रूव करते रहते हो तो रिजल्ट
जरूर आएंगे। एफिलिएट मॉडल बेसिकली
कंपाउंडिंग पे काम करता है। यानी स्लो
स्टार्ट होता है लेकिन जब मोमेंट बनता है
तब सेल्स कंसिस्टेंटली आती है। तो अब यहां
पे डिसीजन आपका है। अगर आपका प्रोडक्ट
आईडिया रेडी है उसे फटाफट बना दो। अगर
आपका प्रोडक्ट रेडी है तो उसे फटाफट लिस्ट
कर दो। सेलू आईक्यू की लिंक मैंने नीचे
डिस्क्रिप्शन में ऑलरेडी दे दी है। आज ही
साइन अप करो और अपना एफिलिएट प्रोग्राम
ल्च करो क्योंकि सोचने से पैसा नहीं बनता।
एक्चुअली में कुछ करने से पैसा बनता है।
अब अपने इमोशंस ना साइड में रखो और सीधा
मैथ्स पे आ जाओ। क्योंकि अब हम लोग खुद के
लिए एक टारगेट सेट करने वाले हैं व्हिच इज
₹1 लाख। अब ₹1 लाख बनाने के लिए आपकी
सेल्स कितनी होनी चाहिए? क्या प्राइस पे
सेट होना चाहिए? कितना कमीशन देना पड़ेगा?
ये सारी चीजें स्टेप बाय स्टेप डिस्कस
करते हैं। अब इसका बड़ा सिंपल फार्मूला
है। सेल्स * प्रोडक्ट प्राइस माइनस कमीशन
इक्वल्स योर अर्निंग्स। मतलब अगर आपका
प्रोडक्ट ₹29 का है और आप एफिलिएट को ₹900
कमीशन दे रहे हो तो हर सेल पे आपके पास
₹2099 बचते हैं। अब इससे अगर आपको ₹1 लाख
बनाने हैं तो आपको कितनी सेल्स करनी
पड़ेगी? तो ₹1 लाखे बाय 2099 इक्वल्स लगभग
अराउंड 48 सेल्स। देखा सिर्फ 48 सेल वो भी
पूरे महीने में। मतलब रफली दिन के डेढ़
सेल आपको करने हैं। अब आप लोग सोचोगे कि
भाई 48 सेल कुछ कम नहीं होता। यह आएंगे
कहां से? अब मान लो आपके पास 20 एफिलिएट्स
हैं और हर एक एफिलिएट सिर्फ महीने के दो
से तीन सेल ही लाता हो फिर भी आप ₹1 लाख
ईजीली क्रॉस कर जाओगे। यह एक बहुत ही
ज्यादा रियलिस्टिक आउटकम है। सिर्फ 20 लोग
हैं और उनसे दो से तीन सेल ईच आप मांग रहे
हो। अब इसका ना एक और डिफरेंट सिनेरियो
देखते हैं ताकि आप अपने प्रोडक्ट के हिसाब
से उसे कैलकुलेट करना सीख जाओ। सबसे पहला
सिनेरियो देखते हैं लो टिकट प्रोडक्ट का
जिसकी प्राइस हम लोग सेट करते हैं ₹499।
अब इसमें मान लो आप कमीशन देते हो ₹150 का
तो आपका मार्जिन बचता है ₹349. अब ₹349 से
₹1 लाख बनाने के लिए आपको लगेगी ऑलमोस्ट
287 सेल्स। अब मैं आपको ना कोई भी फॉर्स
एक्सपेक्टेशन नहीं देना चाहता। 287 सेल्स
मतलब बहुत ज्यादा हाई वॉल्यूम लगता है। और
अगर आप अभी शुरू कर रहे हो तो इतने ज्यादा
एफिलिएट्स से सेल ढूंढ पाना बहुत ज्यादा
टफ होगा आपके लिए। अब इसके बाद आता है
हमारा सिनेरियो नंबर टू व्हिच इज अ मिड
टिकट प्रोडक्ट। अब इसकी प्राइस आप सेट कर
सकते हो ₹19 टू ₹399। अब मान लो इस
एग्जांपल के लिए मैंने सेट कर दी उसकी
प्राइस ₹299 जिसमें से कमीशन मैं देता हूं
₹700 तो आपका मार्जिन हुआ ₹299।
अब इससे ₹1 लाख बनाने के लिए आपको लगेंगे
44 सेल्स। 44 सेल्स 15 से 20 एक्टिव
एफिलिएट्स के साथ बहुत ज्यादा ईजीली
अचीवेबल है। और यही वो स्वीट स्पॉट हो
सकता है आप में से बहुत सारे क्रिएटर्स के
लिए। एंड फिर आता है हमारा आखिरी सिनेरियो
व्हिच इज अ हाई टिकट प्रोडक्ट। यानी जिसकी
प्राइस रफली अराउंड ₹10,000 से ऊपर ही है।
तो मान लो आपके प्रोडक्ट का प्राइस
₹10,000 है जिसमें से आप ₹2500 कमीशन जैसे
दे रहे हो। तो यहां पे आपका मार्जिन बचेगा
₹7,500 और इस ₹7,500 से ₹1 लाख बनाने के
लिए आपको लगेंगे 14 सेल्स। अब आपको शायद
लग रहा होगा कि सिर्फ 14 सेल ही तो चाहिए।
मैं तो यूं करके दिखा दूंगा। लेकिन भाई एक
चीज याद रखना अगर आप हाई टिकट में खेल रहे
हो तो यहां पे सेल लाना इतना इजी नहीं
होता। क्योंकि बायर को ट्रस्ट चाहिए होता
है। बायर को प्रूफ चाहिए होता है। कभी-कभी
बायर को एक कॉल भी चाहिए होता है। और यह
जो अफिलिएट्स होते हैं ना वो भी वही
प्रमोट करते हैं जहां पे सबसे ज्यादा
कन्वर्जन हो। यानी एक ऐसा प्रोडक्ट जो
एकदम फटाफट बिक जाए और उनको मैक्सिमम
कमीशन मिले। और इसमें भी अगर आपका
प्रोडक्ट स्ट्रांग नहीं है तो आपको हाई
टिकट में बहुत ज्यादा स्ट्रगल होगी। तो यह
ऑप्शन तो मैं किसी को भी रेकमेंड नहीं
करूंगा अंटिल एंड अनलेस यू आर एन
एक्सपर्ट। अब उसके बाद थोड़ा सा कमीशन का
स्ट्रक्चर देख लेते हैं कि कितना होना
चाहिए। यह जो डिजिटल प्रोडक्ट्स है उनमें
जनरली 20 टू 50% तक आप कमीशन दे सकते हो।
और अगर आपका प्रोडक्ट नया है तो उसके लिए
आपको पहले ट्रैक्शन लाना पड़ेगा। आपको
एफिलिएट्स को बेसिकली गाजर दिखाना पड़ेगा।
तो इसीलिए आप थोड़ा सा कमीशन ज्यादा रख
सकते हो जैसे 40 टू 50% ताकि एफिलिएट्स और
ज्यादा इंटरेस्टेड रहे इस प्रोडक्ट में और
धीरे-धीरे जैसे आपका प्रोडक्ट थोड़ा सा जम
जाए मार्केट में या फिर उसकी सेल्स आना
शुरू हो जाए तो आप उसे कम पे लेके आ सकते
हो टू 25 टू 30%। इस चीज को याद रखना कि
जितना आप कमीशन दोगे उतना ही एफिलिएट्स
इंटरेस्टेड रहेंगे आपके प्रोडक्ट में।
लेकिन जितना ज्यादा कमीशन आप दोगे उतना
आपका मार्जिन कम होगा। तो यहां पे ना आपको
एक बैलेंस बना के चलना होगा। और यहां पे
एक और चीज समझो कि जो एफिलिएट मार्केटिंग
होता है ना उसमें क्वालिटी एफिलिएट्स
ज्यादा मैटर करते हैं रादर दैन क्वांटिटी।
ऐसे 10 एफिलिएट्स जो सीरियसली पूरी शिद्दत
से आपके प्रोडक्ट को प्रमोट कर रहे हैं वो
कभी भी बेटर है देन 100्स ऑफ एफिलिएट्स जो
बस आपके प्रोडक्ट की लिंक लेके बैठे हैं।
तो जब भी आप अपने एफिलिएट्स को रिक्रूट
करो। उनसे कम्युनिकेट करो। उन्हें सपोर्ट
करो अपनी एसेट्स देके और उनके परफॉर्मेंस
में उन्हें कोई भी मदद लग रही है तो
उन्हें वो प्रोवाइड करो। तो यही था इस
वीडियो के वीडियो के एंड में मैं बस आपको
एक ही सिंपल चीज बोलना चाहता हूं कि आपके
पास ऑलरेडी नॉलेज है। आपके पास स्किल है।
आपके पास एक प्रूवन एक्सपीरियंस है। लेकिन
वो अभी सिर्फ आपके दिमाग के अंदर बंद है।
जब तक आप इसे अच्छे से ऑर्गेनाइज नहीं
करोगे। इसे अच्छे से पैकेज नहीं करोगे।
इसकी अच्छे से प्राइस लगा के इसे लोगों तक
नहीं पहुंचाओगे तब तक वो नॉलेज वो स्किल
किसी काम की नहीं है आपके। और अब तो आपके
पास कोई भी एक्सक्यूज नहीं रहा है। मैंने
प्रोडक्ट कैसे बनाते हैं वो बता दिया है।
सेल्स कैसे लानी है वो भी बता दिया है।
कहां पर बेचना है वो भी बता दिया है। उसके
बाद मैथ्स को भी क्लियर कर दिया है। यानी
आपका सिस्टम, आपका प्लेटफार्म, आपका मैथ्स
सब कुछ क्लियर है। अब बस मैं आपको एक ही
सवाल पूछना चाहूंगा कि आप कब शुरू करोगे।
अब मैं जानता हूं आप में से बहुत सारे
लोगों का यह रिप्लाई आया कि मैं कल करूंगा
या फिर पहला प्रोडक्ट परफेक्ट कर लेता हूं
भाई। उसके बाद नहीं तो थोड़ा टाइम लेके
मैं सीख लूंगा उसके बाद कर लूंगा। यह जो
बहाने आप बना के मुझे दे रहे हो ना उससे
मेरा कुछ ज्यादा होगा नहीं लेकिन आपका
बहुत कुछ चेंज हो सकता है। बहाने देते
देते एक महीना, 2 महीना, 6 महीने या फिर
साल भर निकल जाएगा और आप वही के वही
रहोगे। जबकि दूसरी तरफ आपसे कोई और लेस
स्मार्ट इंसान अपने प्रोडक्ट लॉन्च भी कर
देगा और एफिलिएट से उससे पैसे भी जनरेट
करना शुरू कर देगा। बस डिफरेंस यह था कि
उसने शुरू किया और आप बस सोचते रह गए। तो
ज्यादा सोचो मत। फटाफट से डिस्क्रिप्शन
में जाके सेलियो आईक्यू ओपन करो और अपना
पहला अकाउंट बनाओ। इसका साइनअप बिल्कुल
फ्री है और आपको बस 2 मिनट लगेंगे। उसके
बाद फटाफट अपना प्रोडक्ट ऐड करो। कोर्स,
टेंपलेट, ई-बुक, कोचिंग कुछ भी लिस्ट कर
दो और कमीशन सेट कर दो। याद रखना आपको बस
अपना प्रोडक्ट लिस्ट करना है। बाकी सब कुछ
प्लेटफार्म आपके लिए हैंडल करेगा। और अगर
आपको सेलियो आईक्यू को और भी अच्छे से और
भी डिटेल में समझना है। इसकी बारीकियां
समझनी है तो ब्लू कैप मार्केटर a के
पूर्वेश महाजन के चैनल को जरूर चेक करना।
यह मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं जो ऑलमोस्ट
रेगुलरली बहुत सारे वीडियोस बना रहे हैं
सेल यू आईक्यू पे। मैं उनके भी चैनल की
लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगा। तो
वहां पे जाके एक बार इसे जरूर चेक करना।
मैं मिलूंगा आपको ऐसी और एक इंटरेस्टिंग
वीडियो के साथ। तब तक के लिए कीप हज़लिंग,
कीप लर्निंग एंड एज ऑलवेज कीप
इंस्पायरिंग।
बिहाइंड माय बैग
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