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सुनिये गढ़वाल और कुमांऊ की लोरियां || Some lullabies of Uttarakhand || Garhwal-Kumaun ki Loriyan

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घुगुती

0:02

बसुती क्या खादी दुध बाती क्या

0:10

जिठबोलाजिबोककजइचा लारधुणकुलारककछन। आगि जैग आग कक पाणी मुझे

0:23

पानी कच्चा डांगल पियाल

0:27

ढंग ढांग किले प्याई सरगीनिबरखसरसरग किले खो मिंडकीनिटमिंडकी मिंकी किले

0:39

गुर

0:41

गुर किले खांदी इत मेरी जाती रे। इत मेरी जाति रे

0:48

तुम सी निंद बारी गढबीनिंदबारी। यानि।

0:56

आज हम गढ़वाल और कम

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बात करना

1:02

वो लोरी जो हम

1:05

वो निंद बारी जूते सोने की बो बुवाजी हमे सुलाना

1:12

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1:19

तो घसेरी में आप सभी का स्वागत है। सभी साथियों को प्यार भरा नमस्कार

1:26

साथियों, हर क्षेत्र, हर भाषा की अपनी अलग अलग तरह की लोरियां होती हैं। और इससे उत्तराखंड भी अछूता नहीं है।

1:36

गढ़वाली और कुमाउनी की कुछ लोरियां सुनने से पहले लोरी के बारे में कुछ जान लेते हैं।

1:44

कई लोरियों में आपने 1 समानता देखी होगी। ये लोरियां डरावनी होती है लेकिन इनको मधुर लय में गाया जाता है और बच्चे को यह पसंद होती है। इन्हें सुनकर वह सो भी जाता है।

2:02

लोरी के इतिहास पर बात करें तो कहा जाता है की सबसे पहले लोरी 4000 साल पहले बेबोलोनिया में किसी माँ ने अपने बच्चे को सुनाई थी।

2:14

लोरी को अंग्रेजी में लल बाई कहते हैं

2:19

जो लल और बाई का मिश्रित रूप है। इसका मतलब होता है कि बच्चा शांत हो कर सो जाए।

2:27

विज्ञान भी मानता है कि लोरी का बच्चों पर सकारात्मक असर पड़ता है और लोरी सुना कर माँ अपने बच्चों में अच्छे संस्कार भर सकती है।

2:40

तो अब सुन 2 गडवी और कुमैया लोरी।

2:45

उत्तराखंड में 1 प्यारा पक्षी होता है घुगुती। उस पर हमने आपको पहले 1 लोरी सुनाई।

2:53

गढवाल और कुमाऊं में इस पक्षी को लेकर कुछ और प्यारी लोरियां सुनाई जाती हैं। अब इस लोरी को ही सुनिए जो पहली वाली लोरी का ही थोड़ा सा भिन्न स्वरूप है। गुगुतिबसुति क्या खादी तुद्बाति कलाई जिला जिते कक

3:19

आगिलजेगिगिनआग कक्ष पानी मुझे पानी कक्ष डांगल प्याल कक्ष लमडिगाईत्यारू

3:30

म्यार सरे ख्यात लेकन

3:34

आपने सुनी। यह लोरी। यह लोरी बच्चे को घुटने के निचले हिस्से में बिठा कर फिर पांव को ऊपर नीचे करके सुनाई जाती है।

3:45

इस लोरी पर अगर आप गौर करेंगे तो इसका कोई सिर पैर नहीं है। लेकिन हमने बचपन में यह इतनी बार सुनी है कि इसमें बहुत अपनापन लगता है। लोरियाँ असल में ऐसी ही होती हैं।

4:01

अब इसी से मिलती जुलती कुमाउनी लोरियां सुनते हैं।

4:06

घुगुती बासूती आमा को छे भाड़ में छे की करें छे, पुहाल में छे 1 पुआ, मीदे काचों छे जाल पेन रख दे। बलकन खुन

4:24

गुगुतिबासुती। आमा कांच बारुन में की कारण रे पूड़ी पकुनरेमिके देलिन।

4:36

इसी क्रम में यह लोरी भी आगे बढ़ती रहती है।

4:41

घुगुती बासुती से जुडी 1 और कुमाउनी लोरी है।

4:47

घुगुती बासुती भाव खा लो दूध भात नीनुरिनिनुरी

4:56

नीनुरिकाथेहनि

5:00

नि नूरी आ

5:03

गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी ने भी 1 लोरी गाई है जो गढ़वाल में काफी लोकप्रिय हुई

5:11

है। मेरी आँखों का रतन बाला से जादी, बाला से जादी।

5:17

लोरियों का मुख्य मकसद बच्चे को सुलाना होता है। लेकिन जब बच्चा रो रहा है तब भी लोरियाँ सुनाई जाती है

5:27

अब इस लोरी को सुनिए की किस तरह से माँ पशु पक्षियों को बुला कर रोते हुए बच्चे को चुप कराने की कोशिश करती है

5:37

उतलपुतुलुजलुम्यारु थुपआबिरमयारथुपुल गिचिचाटचुपहेजादी कु पुचलुमयारुछुबुआरे मूसा

5:53

म्यार चुचु की कुट्टी का आर कौवा कुतुल कु चुप

6:01

कुतुल चुप हे जालु म्यारुबछुरएलोरी में माँ किस तरह से बच्चे का ध्यान बंटाने की कोशिश करती है चिंदा बिंदा रावण झोली गिया कमोल घुदुदाकीटुपक बिंदा

6:21

इस लोरी में 1 हाथ ऊपर ले जाया जाता है और धीरे धीरे नीचे लाकर अंगूठे से बच्चे के सिर पर टीका सा लगाया जाता है बच्चा खिलखिलाने लगता है तभी तो कहते है की माँ से बड़ा कलाकार इस दुनिया में कोई नहीं होता है माँ दुनिया की सबसे बड़ी कलाकार होती है

6:48

पहाड़ में तो महिलाओं के लिए खेतों में कई तरह के काम होते हैं माँ खेतों में गई है और बच्चे को भूख लगी है ऐसे में बच्चे की रखवाली करने वाला भी लोरी सुना कर उसे चुप कराने की कोशिश करता है कुछ इस तरह से

7:07

अनिन जा भू का निनु जा भू का

7:12

निनुआ

7:14

भोह को सुला जा भो की इजा आली बहुत दुध पिला ली

7:22

इसी तरह की 1 और लोरी है

7:26

सेजा सेजा निन्दा की बाली निंदा की बाली सीणकुआदवजघसकटणक वो घास काटी लिया ली फिर दुद्धु पिला ली तालिम भात खा ले नौवा कु पाणी पी ले खतड़ीमापुणुरैले

7:58

अब इस लोरी में मामा को ढोल वादक बना कर हाथ से भी जोड़ा गया है

8:06

होली आ होली भोकू मामा ढोली मामा ढोल बजा लो वो से जा लो आजा मामा आ

8:17

जा मामा

8:19

ढोली ढोल बजा जा भो को सुला जा आ होली जा भू का भोकोटोफिलयाली भोक चचा

8:30

भोको मिटे ल्या लू भोक बोबा आ लू भोक लौन

8:37

नीनुजाभूकानीनु जा का

8:42

लोरियां सुनते सुनते बच्चे को अगर अक्षर ज्ञान हो जाए तो फिर इसे क्या कहेंगे सोने पे सुहागा यकीन न हो तो इस लोरी को सुनिए आप लोगों में से कई ने बचपन में यह लोरी सुनी होगी

8:58

आइइउउएधरामाकागणा से गे ओ औअंगआमाँदोजादन जोगी नंगा ककड़ी गगरी गा

9:11

चखरी जजरी या

9:14

तथड़ीदधडीनतथड़ी ददरी न पपड़ी बाबड़ी माँ यरड़ीलवड़ीशषडी ससरी अक्षा तर्रागा

9:28

अब कुछ और लोरियां सुनते हैं

9:32

काबुरी कवच डाल मा भवाच उखल में पिना देरी मा माच देखिये आम बालों का पिन खा लो

9:44

अब इस लोरी में चिड़िया का आह्वाहन किया गया है

9:49

हा चढ़िया हा हा चढ़िया है ताल गाडजोपकाऊमालगद जो पकाऊं बीच में मसूर पकाया हा चढ़िया हा हा चढ़िया है

10:03

रुख को चली ले सब बे चाको है चढ़िया हा हा चढिया है

10:11

टक्कर लगी तुम थे

10:13

कुमयनिंदबारीयानि लोरी

10:16

जो तुम बचपन की याद ताजा है हम जरुर बताया

10:22

लोरी तुम याद

10:25

जरुर सुना

10:27

की

10:30

जा

10:31

नमस्कार।

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