ശിവകവചസ്തോത്രമന്ത്രം siva kavacham
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[संगीत]
[संगीत]
अस्य श्री शम कवच स्तोत्र महा
मंत्र ऋषभ योगीश्वर
ऋषि अनुष
छंद श्री साम सदा शिवो देवता
ओम
बीजम नम
शक्ति शिवाय
केलकम मम साम सदाशिव प्रीत अर्थे जपे
विनियोग ओम सदा शिवाय अंग भ्यान
नमः नम गंगा धराय तर्जनी भ्यान
नमः मम मृत्युंजय
मध्यमा भ्यान
शिम शूल पान अनामिका ब्याम
नमः वाम पिनाक पान कनिष्का ब्याम
नमः यम उमा पतय करतल कर पृष्टा भ्यान
नमः ओम सदा शिवाय हृदयानंद
[प्रशंसा]
[संगीत]
शम शलन
कवचा वाम
बनान
नेया यम उमा पतय अस्त्र
फट भ भुव सुवर इ
बंध
ध्यानम वज्र दम नयनम काल कंठ
ममम सहस्त्र कर
मतम वंदे शंभु मुमा
पतिम रुद्राक्ष कंकल सतक दंड युग्म फाला
अंतराल धत भस्म सित
त्रिप्र पंचाक्षर परि पठन व मंत्र राजम यं
सदा पशुपति शरणम
था अत परम सर्व पुराण गुम
नि पाप हरम
पवित्रम जय प्रदम सर्व विपत प्रमो चन
कक्षम शैवम कवचम
हिताय लम
पमने गंम समर्पयामि
हम आकाशा मने पुष्प पू
जयाम यम
वामने धूप पयाम
अगन आत्मने दीपम
दर्शम वम अमृता मने अमृतम महा नैवेद्यम
निवेद याम सम
सर्वात्मका पूजाम समर्पयामि
ऋषभ
उवाच नमस्कृत्य महादेवम विश्व व्यापम
स्वरम वक्ष शिवमय वर्म स रक्षा करम
णा शच देश समा सेनो यथावत कल्पिता
सन जितेंद्र जित प्राण चिंत शिवम
वयम क
पुंडरीका सनि विषम स्व जसा व्यापत नवका शम
अति इंद्रियम सूक्ष्म अनंत
मादम धय परान मयम
महेश ध्याना वधू खिल कर्म बंध चरम चिदानंद
निमग्न
चेता डर स
समागमा सैवेन कुर्य कवन
रक्ष माम पातु देवो खिल देवता आत्मा संसार
कपे पतित
गभरे तन्नाम दिव्यम वर मंत्र मूलम धुनो
तुमे सर्व
सर्वत्र माम रक्षत विश्व
मूर्ति ज्योतिर मयानंद
तात्मा
अनोर नुर शक्ति
रे सवर पातु भया
दश यो भ स्वरूपे विभक्ति विश्वम पाया सूम
गिरि
मूर्ति यो पाम स्वरू
करोति संजीवनम सोवत माम
जले कल्पा बसाने भुवना
दवा सर्वा नियो नत
भूल सकाल रुद्रो माम
दवाने वात्या भीते रखता
पात प्रदीप्त विद्युत कनका भासो
विद्या व भीति कुठार
पाण चतुर्मुख स्त पुरुष स्त्र
नेत्र प्राम स्थि रक्षमाम
जसम कुठार खेड कुष पाश शूल कपाल माला अगनि
कणादान चतुर्मुख नील रुचि स्त्र
नेत्र पाया द घोरो दिश दक्षिण स्याम
कुंदेंदु शंख स् पटका व
भासो वेदा माला वदा
भयानक त्रिस
चतुवतिके
[संगीत]
जलक समान
वर्ण त्रिलोचन चारु चतुर्मुख माम
पाया
दुदम शिवाम
देव वेदा
भंग सट क पाश कपाल ड कार शल
पाण सित पंच मुख बतान माम ईशान र्म परम
प्रकाश मूर्धा म्या मम चंद्र
म फलम ममा
नेत्र
नेत्र भग नेत्र हारी ना साम सदा रक्षत
विश्वनाथ पाया शति में श्रुति कीत
कीर्ति कपोल मया सततम
कपाली वम सद रक्षत
पंचवक्त्र जिवा सदा रक्ष वेद
गिरी शोव नील
कंठ पाण दवम पातु पिनाक
पाण दोर मूल मव मम धर्म
बाहु वक्ष स्थलम दक्ष मंत
कोवत ममो दरम पातु गिरींद्र
धनवा मध्यम ममा व्या मनात
कारी रमता तो मम पातु नाभि
पायात कटम धूर जरी शवर
में स्मरा रव्या मम्य देशम पृम सदा रक्षत
पार्वती रुद वयम पातु कुबेर
मित्र जानु दवम
जगदीश्वर जंग युम पुंग
[प्रशंसा]
केरव पाद म्या
महेश्वर दिना
दिया माम मया मेेम
देव
त्रिलोचन
यया ष पादु
दिनाम पाया निद शिखरो माम गंगाधर
रक्ष गौरी पति
मृत्युंजय रक्षत सर्व
कालम अंत स्थित रक्षत शंक मा स्न सदा पातु
बग
स्थित
रेतु पति पशु नाम सदा शिवो रक्षमाम
समंता
तम भुवन
कनाथ पाया जतम प्रम नाथ
वेदांत वेदव माम
निम
माम
शिवन मार्गे माम रक्ष नील
कंठ शैला दुर्गेश
पुरया अनन्य वासा महा
प्रवासे पान मृग व्याध उद
शक्ति कल्पा कालो
स्टा
सोलिता
कोश घोर हरि सेना नव दुर निवार महा भया
दतु वर
भद्र पतव मातंग रथा
बथिनी सहस्र लक्ष युत कोटि भीषण अक्षौहिणी
नाम शतम तता नाम िन मो घोर कुट
नि दस
प्रया जवल लम
त्रिपुरास श
सिदन
संस धनु
पना दुस्वप्न दुक दुर्गति द मनस्य
दुर्भिक्ष दुर्व सन दुस
दुरम उत्ता पताप वि स
गति व्याध चना शय तुमे जगता
मध ओम नमो भगवते सदा
शिवाय सकल तत्वा
मकाय सर्व मंत्र
स्वरूपाय सर्व यंत्रा
धता सर्व तंत्र
स्वरूपाय सर्व तत्व वि
दूराय ब्रह्म रुद्रा
अवतार नील
कंठाया पार्वती मनोहर
प्रिया सोम सूर्या अगनि लोचना या भस्म धूत
विग्र
हाया महा मनि मुकुट धारणा या माणिक्य भूषण
या सृष्टि स्थिति प्रणय काल
रुद्रावताराय
दक्षा दवर ध्वंस
महाकाल भेद
नाया मूलाधार क निल
याया तत्वा दता या
गंगाधराया सर्व देवाधि
देवाया णा
शया वेदांत
सराया त्रिवर्ण
या अनंत कोटि ब्रह्मांड नायकाया
वासुकी
तक्षक कार् कोटक शंक कुलिक पद्म महा
पद्मे अष्ट महा नाग कुल
भूषण प्रणव
स्वरूपाय चदा
काया
आकाश दिक्
स्वरूपाय ग्रह नक्षत्र
मालिन सकला
कलंक
हिताया सकल लोक कत्र सकल लोक
भत्र सकल लोकक सम
हत्र सकल लोकक
गुरवे सकल लोकक
साक्ष सकल निगम
गुया सकल वेदांत
पारकलम
प्रदाय सकल लोक
शंकराया सकल दुरिता
भंजय सकल जगद भयंकरा या शशांक
शेखरा शाश्वत निजा वासा या
निराकारा निरा भासा या
निरामया निर्मला या
निर्लों या नि
अहंकारा निरंकुश या निष्कल काया निर्गुणा
या निष्कामा या निरूप पलवा या निरव द्या
निरंतरा या निष्क या
निराया निष्प्रभ चाया नि
संगाया निर् दव वाया
निराया
गाया निष्क्रोमों
[प्रशंसा]
वया परम शांत
स्वरूपाय परम शांत प्रकाश या तेजो
रूपाय तेजो
मयाय तेजो धि पतय जय जय रुद्र
महारुद्रा
महारुद्र
भद्रावल
महाभैरव काल
भैरवा कल्पा र कपाल माला धरा खड वांग चर्म
खडग धर पाश कुष डमरु त्रिशूल छाप बान गदा
शक्ति भिंडी बाल तोमर मुसल भूसुंडी
मुद्गर पाश परिघ शत अग्नि चक्र य भीषण का
सहस्र मुख दम कराल वदन विकट हास विस्पा
ब्रह्मांड मंडल नागेंद्र
कुंडल नागेंद्र हार नागेंद्र वलय नागेंद्र
चर्म धर नागेंद्र
निकेतन मृत्युंजय त्रय
त्रिपुरांतकारी
पाक्ष्मण
[संगीत]
विष
विभूषण विश्व तो मुख सर्वतो मुख माम रक्ष
रक्ष ज्वल ज्वल प्रज्वल
प्रज्वल महा मृत्यु भयम समय समय अप मृत्यु
भयम नाश
नाय रोग भयम उत् साद
साद विष सर्प भयम शय समय चोरा मारया
मारया मम शत्रु
उय त्रिशूल न वि दार
विद कुठार न भि भि खन छि छि खड वांगन विपो
विपो
मम पापम शोध
शोध मुसले निषे
निषे बाण संताय
संताय यक्ष रक्षम स भीय भीय अष भूतान
विद्राव्य कुष भूत
वेता ग
ब्रह्मराक्ष संत्र सं
ममा अभयम कुरु कुरु नरक भया माम उधर
उधर वित्र स्तम माम आश्वास
आश्वास अमृत कटाक्ष वीक्षण नमाम आलोक
आलोक संजीव
संजीव
शतनाम माम आप्या
आप्या दुखा माम आनंद
आनंद शिव कवच नमाम आच्छा दय आच्छा
दया हर हर मृत्युंजय
त्रयंबक सदा शिव परम शिव नमस्ते नमस्ते
नमः ओम सदा शिवाय
अंग नमः
गंगाधरा तर्जनी भम
नमः मम मृत्युंजय
मध्यमा ब्याम
नमः शिम शूल पान अनामिका ब्याम
नमः वाम पिनाक पान कनिष्का ब्याम
नमः यम उमा पतय करतल कर
प्या
नमः ओम सदा शिवाय
नम नम गंगाधरा शर
स्वाहा मम मृत जया
शव शिम शलन
कवचा वाम
विना
नेया यम उमा पतय अस्त्र फटे भू भुव सुवर इ
ष
उवाच इत परमम शवम कवचम तम
मया सर्व बाधा प्रशमनम रहस्यम सर्व
देना य सदा धार मत सैवम कवचम
उत्तम नतस्य
जायते भयम शभ अनुग्रहा
म महाग
तोवा सद्य
सुखवा दीर्घ माय
विंद सर्व दारद शवम सौ मांगल्य
विवर्धन योते कवचम शवम सदर
पूजते महा पातक संघात
मुत देहते मुक्ति माप शिव मानु
भावत शद याव शवम कवचम
उतम धार स्व मया दत्तम सत्य शयो
वापसी श्री सूत
उवाच
इवा योगी तस्म पार्थिव
सनवे दद शम महाराव खम वारि
निनम पुन भस्म मंगम
परतो गजाना सहस दस बलम दद बम प्रभावा
संप्राप्ति बलेश्वर
स्मृति सराज पुत्र शुभे शरद कव श्रिया तमा
प्रांजल भय सयो गप
नंदनम य मया दत मंनु भावत
डगम यम दर् स्टम
सते शत्रु साक्षा मृत्युर स्वयम अस्य शस्य
निदम
ंहिता
ते मर्ता पति नस्त शस्त्र
वितना खडग शंखा विमो दिव पर सन्य
विनाश आत्म सैन्य स्व पक्षाम शौर्य तेज
तयो प्रभान शन
कवन वित सहस्त्र नागा नाम बलेन
महता भस्म धारण सामर्थ शत्रु सन्यम विजेश
से प्राप्य सिंहासन पियम गोता स पृथिवी
माम इति भद्राय शम समस समात कम ताम सूज
योग स्वैर गतिर
[संगीत]
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