Kaise Hua Tha Operation Sindoor | 2D Animation
TRANSCRIÇÃO COMPLETA
7 मई 2025 को पहलगाम में धर्म पूछकर 26
बेगुनाह लोगों की हत्या करने वाले आतंकी
जब पाकिस्तान की जमीन पर अपने ठिकानों में
आराम से सो रहे थे तब उन्हें बिल्कुल
अंदाजा नहीं था कि ये रात उनके लिए आखिरी
साबित होने वाली है। रात लगभग 1:05 से
1:30 मिनिट के बीच पाकिस्तान के सियालकोट,
मुरीद के और बहावलपुर और साथ ही पोके के
मुजफराबाद, कोटली और भिम्बर में मौजूद
आतंकी ठिकानों पर एक साथ हमला किया गया।
लाशकर ए तैबा, जाइश मोहम्मेद और हिजबुल
मुजाहदीन के कुल नौ ठिकानों पर 24
मिसाइलें और कई बम गिराए गए। रात के
सन्नाटे में चारों तरफ धुएं का गुबार फैल
गया और कुछ ही मिनटों में आतंक के यह सभी
अड्डे पूरी तरह तबाह [संगीत] हो गए। यह
कार्यवाही भारत की तरफ से उन आतंकियों और
उनके हैंडलर्स के खिलाफ थी जो पाकिस्तान
[संगीत] में छिप कर भारत में मासूम लोगों
को मारते रहे हैं। इस मिशन को ऑपरेशन
सिंदूर नाम दिया गया। यह उन मांओं और
बहनों के दर्द का जवाब था। जिनकी आंखों के
सामने पहलगाम में उनके परिवार उजाड़ दिए
गए थे। ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ
भारत की अब तक की सबसे बड़ी मिलिट्री
एक्शन माना जा रहा है। पहली बार भारत ने
इंटरनेशनल बॉर्डर से करीब 100 किलोमीटर
अंदर जाकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकियों के
मारे जाने की जानकारी सामने आई। इनमें
जॉर्ज ए मोहमेद के चीफ मसूद अजहर के
परिवार के 10 लोग और उसके चार करीबी
[संगीत] एसोसिएट्स शामिल थे। यह हमला इतना
जोरदार था कि सैकड़ों बेगुनाह लोगों की
मौत [संगीत] का जिम्मेदार मसूद अजहर खुद
टूट गया और यह कहते हुए सुना गया कि काश
वह भी इस हमले में मारा गया होता। अब सवाल
यह था कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर इतना
बड़ा ऑपरेशन कैसे किया? इसकी प्लानिंग
कैसे हुई? और इसके बाद हालात कैसे बदले?
आतंकी
[संगीत]
ठिकाने तबाह होने के बाद पाकिस्तान ने
घबराकर भारत के सिविलियन एरियाज और
मिलिट्री साइट्स को नुकसान [संगीत]
पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन वो इसमें
पूरी तरह नाकाम रहा। इसके जवाब में इंडियन
आर्म्ड फोर्सेस ने [संगीत] पाकिस्तान के
11 एयरबेस पर कड़ी कार्रवाई की। इससे
पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ और उसे पीछे
हटने पर मजबूर होना पड़ा। पहलगाम हमले को
अंजाम देने वाले चार आतंकी हमले के बाद
जंगलों में भाग गए। लेकिन भारत ने साफ कहा
कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों और इसकी
साजिश रचने वालों को उनकी सोच से भी बड़ी
सजा दी जाएगी। भारत ने ये भी साफ किया कि
ये एक बेहद प्रिसाइस और जॉइंट मिलिट्री
ऑपरेशन था। जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान
ऑक्युपाइड जम्मू एंड कश्मीर में मौजूद नौ
बड़े टेरर कैंप्स को निशाना बनाया गया।
इसका मकसद सिर्फ पहलगाम हमले के विक्टिम्स
को जस्टिस दिलाना था। हमले के बाद
पाकिस्तान की ओर से रात के अंधेरे में
ड्रोंस भेजे गए। लेकिन इंडियन आर्मी ने
तुरंत एक्शन लेते हुए करीब 50 [संगीत]
ड्रोंस को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके
साथ ही देशवासियों को भरोसा दिलाया गया कि
मातृभूमि पर किसी भी तरह का हमला सफल नहीं
होने दिया जाएगा| इसी दौरान लाहौर में
मौजूद पाकिस्तान का एयर डिफेंस रेडर और
डिफेंस सिस्टम [संगीत] भी इंडियन फोर्सेस
की कार्यवाही में पूरी तरह न्यूट्रलाइज कर
दिया गया।
इस पूरी कहानी की शुरुआत 22 अप्रैल 2025
से होती है। जब पाकिस्तान के आतंकी संगठन
लाशकर ई तबा से जुड़े उसके फ्रंट ग्रुप
टीआरएफ के पांच से छह आतंकियों ने पहलगाम
की बैसरण घाटी को पूरी तरह दहशत में बदल
दिया। आतंकियों ने वहां मौजूद लोगों को
रोका। उनसे उनका धर्म पूछा और जैसे ही
किसी ने खुद को हिंदू बताया उसे गोली मार
दी गई। वो यहीं नहीं रुकी। आतंकियों ने
पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान साबित करने
के लिए कलमा पढ़ने को कहा। जो लोग कलमा
नहीं पढ़ पाए उन्हें बेरहमी से मार दिया
गया। इस तरह सिर्फ धर्म के आधार पर 26
बेगुनाह पुरुषों की जान ले ली गई। यह
पाकिस्तान की तरफ से कराया गया कोई पहला
आतंकी हमला नहीं था। पिछले दो-तीन [संगीत]
दशकों में पाकिस्तान स्पों्सर्ड टेररिज्म
के तहत 2001 पार्लियामेंट अटैक, 2611
मुंबई अटैक, पथंगकोट, उरी और पुलवामा जैसे
कई बड़े हमले भारत में कराए जा चुके हैं।
साल 2024 में भी जम्मू कश्मीर के
सोनमार्ग, गुलम्ग और रियासी में हमले हुए
थे। लेकिन पहलगाम का हमला इन सबसे अलग था।
इस बार आतंकियों ने इंसानियत की हर सीमा
पार कर दी थी। धर्म के आधार पर की गई इन
हत्याओं ने भारत की सहनशक्ति की हद भी पार
कर दी। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने हमेशा
की तरह वही पुराना खेल शुरू कर दिया। कभी
उसने पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को
फ्रीडम फाइटर्स बताया तो कभी भारत पर ही
आरोप लगाने लगा। इस बार भारत सरकार ने
पाकिस्तान से सिर्फ बयानबाजी करने के बजाय
ठोस कदम उठाने का फैसला किया। सबसे पहले
डिप्लोमेटिक लेवल पर ऐसे फैसले लिए गए जो
पहले कभी नहीं किए गए थे। भारत ने इंडस
वाटर ट्रीटी [संगीत] को सस्पेंड कर दिया।
पाकिस्तान की करीब 80% इति योग्य जमीन
इंडस रिवर और उसकी सहायक नदियों के पानी
पर निर्भर है जिसे वहां की लाइफ लाइन माना
जाता है। भारत के पास अब यह अधिकार था कि
वह इन नदियों के पानी को रोके या बिना
किसी वार्निंग के एक साथ पानी छोड़े। इससे
पाकिस्तान को कभी सूखे और कभी बाढ़
[संगीत] जैसी स्थिति का सामना करना पड़
सकता है। इसके अलावा अटारी चेक पोस्ट को
बंद किया गया। एसवीईएस वीजा रद्द किए गए
और पाकिस्तान के खिलाफ चार और सख्त फैसले
लिए गए। पाकिस्तान के सेलिब्रिटीज,
क्रिकेटर, मीडिया हाउस और सरकार से जुड़े
सोशल मीडिया अकाउंट्स को इंडिया में बैन
कर दिया गया। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से भी
सभी पाकिस्तानी फिल्में, शोज़ और सॉन्ग्स
हटाने का आदेश दिया गया। इस बार भारत साफ
तौर पर पाकिस्तान के आतंकवाद पर हमेशा के
लिए फुल स्टॉप लगाना चाहता था। इसलिए एक
तरफ जहां पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल पर
आइसोलेट करने के लिए डिप्लोमेटिक स्टेप्स
उठाए जा रहे थे। वहीं दूसरी तरफ आतंकियों
के खिलाफ मिलिटरी ऑपरेशन की प्लानिंग को
लेकर हाई लेवल मीटिंग्स लगातार चल रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बिहार
की एक जनसभा में साफ शब्दों में कह चुके
थे कि इस हमले में शामिल आतंकियों और इसकी
प्लानिंग करने [संगीत] वालों को उनकी
कल्पना से भी कहीं बड़ी सजा दी जाएगी।
2016 में पूरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019
में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद
पाकिस्तान को अच्छी तरह समझ आ चुका था कि
भारत जरूरत पड़ने [संगीत] पर सैन्य
कार्यवाही करने से पीछे नहीं हटता। इसी डर
की वजह से पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान
को आशंका थी कि इस बार भी भारत [संगीत]
जवाबी कार्यवाही करेगा। इसी बीच वो एलओसी
पर लगातार फायरिंग करके माहौल बिगाड़ने की
कोशिश करने लगा। उसका मकसद साफ था। तनाव
बढ़ाकर विदेशी ताकतों का ध्यान खींचना
ताकि न्यूक्लियर वॉर का डर दिखाकर भारत पर
दबाव बनाया जा सके और उसे किसी कार्यवाही
से रोका जा सके। लेकिन भारत ने इन चालों
की परवाह नहीं की। पहलगाम हमले के बाद
भारत पूरी गंभीरता से आतंकियों के खिलाफ
एक बड़े ऑपरेशन की तैयारी में जुट चुका
था। 19 अप्रैल को दिल्ली में एक हाई लेवल
मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,
नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, चीफ
ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तीनों
सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। इस बैठक में
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि आतंकवाद
को खत्म करने के लिए सेनाएं जो जरूरी समझे
वह कदम उठाएं। उन्हें पूरी छूट दी गई।
इसके बाद भारतीय सेनाओं ने फैसला किया कि
पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले
जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर
एक बड़ी [संगीत] एयर स्ट्राइक की जाएगी।
मकसद साफ था उन ठिकानों को खत्म करना जहां
बैठकर भारत पर हमलों की साजिश रची जाती थी
और जहां आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती थी।
इस काम में खुफिया एजेंसियां भी पूरी ताकत
से जुट गई। रॉ और एनएटीआरओ ने पाकिस्तान
और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों की रियल
टाइम जानकारी जुटानी शुरू कर दी। हर
एजेंसी हर अफसर अपना सबसे अच्छा देने में
लगा हुआ था। सभी के मन में एक ही बात
पहलगाम हमले के दोषियों और उनके अड्डों को
खत्म करना। ऑपरेशन से जुड़ी कोई भी
जानकारी बाहर ना जाए इसके लिए पूरी
गोपनीयता बढ़ती जा रही थी। बहुत कम समय
में रॉ और एनएटीआरओ ने कुल 21 आतंकी
ठिकानों की पूरी जानकारी इकट्ठा कर ली और
ये इनपुट्स प्लानिंग टीम को दे दिए गए। इन
21 में से नौ सबसे अहम और खतरनाक ठिकानों
को चुना गया। यही वो जगहें थी जहां से
पुलवामा, 26 नवंबर और पहलगाम जैसे बड़े
हमलों की साजिश रची गई थी। इन नौ ठिकानों
पर लगातार नजर रखी जाने लगी। उन्हें पूरी
तरह सर्िलांस में रखा गया। एनएसए अजीत
डोभाल ने इन नौ टारगेट्स को फाइनल किया और
5 [संगीत] मई तक पूरे ऑपरेशन का
ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया। इसके बाद
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर
ऑपरेशन की मंजूरी मांगी। प्रधानमंत्री
मोदी ने बिना देर किए इन नौ आतंकी ठिकानों
पर कारवाई की मंजूरी दे दी। पहलगाम में
आतंकियों [संगीत] ने हिंदू महिलाओं का
सुहाग उजाड़ा था। उसी दर्द और उसी इंसाफ
की भावना से इस मिशन का नाम रखा गया
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